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Hyundai ने बंद किए 2 Creta वैरिएंट्स, ADAS फीचर का खर्च बढ़ा; कार प्रेमियों में मायूसी

मुंबई  भारत में मिड-साइज SUV सेगमेंट की सबसे मजबूत खिलाड़ी मानी जाने वाली Hyundai Creta को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया है, जिसने संभावित खरीदारों को चौंका दिया है। अगर आप भी इस SUV को खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानकारी आपके फैसले को प्रभावित कर सकती है। कंपनी ने बिना ज्यादा प्रचार किए अपने लाइनअप में बदलाव करते हुए दो लोकप्रिय वैरिएंट्स को हटा दिया है, जिससे अब विकल्प सीमित हो गए हैं और कुछ फीचर्स पहले से महंगे हो गए हैं। कौन से वैरिएंट्स हुए बंद, क्या बदला लाइनअप? हुंडई ने अपने पोर्टफोलियो से Creta के SX Tech और SX (O) वैरिएंट्स को पूरी तरह हटा दिया है। पहले जहां इस SUV के कुल 9 वैरिएंट्स बाजार में उपलब्ध थे, अब उनकी संख्या घटकर 7 रह गई है। मौजूदा समय में E, EX, EX (O), S (O), SX, SX Premium और King वैरिएंट्स ही ग्राहकों के लिए उपलब्ध हैं। SX Tech वैरिएंट खासतौर पर उन ग्राहकों के बीच लोकप्रिय था, जो कम कीमत में एडवांस सेफ्टी फीचर्स चाहते थे। वहीं SX (O) लंबे समय तक इस SUV का टॉप-एंड विकल्प रहा, जिसे प्रीमियम फीचर्स के लिए पसंद किया जाता था। ऐसे में इन दोनों विकल्पों का हटना सीधे तौर पर मिड-रेंज ग्राहकों को प्रभावित करता है। ADAS फीचर हुआ महंगा, जेब पर बढ़ा बोझ इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन ग्राहकों पर पड़ा है, जो ADAS यानी Advanced Driver Assistance Systems जैसे आधुनिक सुरक्षा फीचर्स लेना चाहते हैं। पहले SX Tech वैरिएंट के साथ यह सुविधा करीब 15.69 लाख रुपये की शुरुआती कीमत में मिल जाती थी। अब जब यह वैरिएंट बंद कर दिया गया है, तो ADAS पाने के लिए ग्राहकों को सीधे टॉप मॉडल ‘King’ का विकल्प चुनना होगा, जिसकी शुरुआती कीमत लगभग 17.27 लाख रुपये है। इसका मतलब साफ है कि अब वही फीचर पाने के लिए करीब 1.5 लाख रुपये ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। यह बदलाव उन खरीदारों के लिए बड़ा झटका है जो सीमित बजट में ज्यादा सेफ्टी और टेक्नोलॉजी चाहते थे। फीचर्स और इंजन में नहीं हुआ कोई बदलाव हालांकि वैरिएंट्स में कटौती के बावजूद कंपनी ने गाड़ी के इंजन या बेसिक फीचर्स में कोई बदलाव नहीं किया है। Hyundai Motor Company ने साफ किया है कि बाकी सभी वैरिएंट्स में पहले की तरह ही इंजन ऑप्शन और सुविधाएं मिलती रहेंगी। इसके अलावा, ग्राहक अगर अतिरिक्त फीचर्स चाहते हैं तो कंपनी के स्पेशल एडिशन, जैसे समर एडिशन, का विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि इसके लिए अतिरिक्त कीमत चुकानी होगी, जिससे कुल लागत और बढ़ सकती है। कंपनी की रणनीति या मजबूरी? ऑटो एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह कदम महज एक सामान्य बदलाव नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। कंपनी का फोकस अब ग्राहकों को टॉप-एंड वैरिएंट्स की ओर शिफ्ट करने पर है, जहां उसका प्रॉफिट मार्जिन ज्यादा होता है। इस रणनीति का सीधा असर मिड-सेगमेंट पर पड़ा है, जहां पहले ग्राहकों के पास संतुलित कीमत और फीचर्स वाले विकल्प मौजूद थे। अब उन्हें या तो कम फीचर्स वाले सस्ते मॉडल लेने होंगे या फिर ज्यादा कीमत देकर प्रीमियम वैरिएंट चुनना होगा। क्या बिक्री पर पड़ेगा असर? Hyundai Creta लंबे समय से भारतीय बाजार में बेस्ट-सेलिंग SUVs में शामिल रही है और इसकी बिक्री लगातार मजबूत रही है। लेकिन वैरिएंट्स में यह बदलाव ग्राहकों के निर्णय को प्रभावित कर सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ग्राहक बढ़ी हुई कीमत के बावजूद टॉप मॉडल की ओर रुख करते हैं या फिर वे प्रतिस्पर्धी कंपनियों के विकल्पों की ओर मुड़ते हैं। फिलहाल इतना तय है कि इस बदलाव ने बाजार में हलचल जरूर पैदा कर दी है और Creta खरीदने का प्लान बना रहे लोगों को अब पहले से ज्यादा सोच-समझकर फैसला लेना होगा।

ब्योहारी तहसील के एसडीएम कार्यालय में लोकायुक्त का छापा ,15 हजार की रिश्वत लेते बाबू रंगे हाथ हुआ गिरफ्तार!

ब्योहारी  तहसील कार्यालय में भृत्य के पद पर पदस्थ रहते हुए बीर सिंह कर रहा था एसडीएम कार्यालय में पेशकार का काम। कई सालों से यहां पर था पदस्थ। बिना लिये दिए नहीं होता तहसील कार्यालय में किसी का कोई काम। तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार की लिखी जा  रही इवारत की खबरों की हो गई पुष्टि भ्रष्टाचार का गढ़ बना तहसील कार्यालय, पैसों के दम पर होते है फैसले। तहसील कार्यालय में हुई लोकायुक्त की दविश से मची खलबली। ब्यौहारी- भ्रष्टाचार के विरुद्ध रीवा लोकायुक्त की टीम ने आज एक बड़ी कार्यवाही करते हुए ब्यौहारी तहसील में अनुभागीय अधिकारी कार्यालय के बाबू पेशकार को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। न्यायालयीन प्रकरण में पक्ष में फैसला सुनाने के नाम पर रिश्वत की मांग की गई थी। ​जमीनी विवाद के फैसले के बदले मांगी थी पंद्रह हजार की घूंस। ​मिली जानकारी अनुसार, तहसील कार्यालय के अनुभागीय अधिकारी कार्यालय में कार्यरत लिपिक वीर सिंह जो भृत्य के पद पर पदस्थ रहते हुए यहां सालों से पेशकार का काम करता रहा है। जिसने एक जमीनी विवाद के मामले में निर्णय पीड़ित पक्ष के हक में करने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। आरोपी बाबू ने शिकायतकर्ता को धमकी भी दी थी कि यदि पैसे नहीं दिए, तो वह मामले का निर्णय दूसरे पक्ष संपत जायसवाल के समर्थन में करवा देगा। ​20 हजार में तय हुआ था सौदा। ​शिकायतकर्ता अंकिता जायसवाल पति सुरेश जायसवाल ने इस मामले की शिकायत लोकायुक्त रीवा से की थी। बताया जा रहा है कि एसडीएम के बाबू वीर सिंह ने शुरुआत में 20 हजार रुपये की मांग की थी, लेकिन बाद में मामला 15,000/- रुपये में तय हुआ। ​लोकायुक्त रीवा की कार्यवाही ​शिकायत की पुष्टि होने के बाद लोकायुक्त की बारह सदस्यी टीम ने जाल बिछाया और तहसील के एसडीएम कार्यालय में जैसे ही शिकायतकर्ता ने रिश्वत की रकम बाबू वीर सिंह को दी, टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथ दबोच लिया।  लोकायुक्त की टीम फिलहाल भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्यवाही कर रही है।

क्रिकेट में धमाल: शहडोल की रीना ने WMPL टीम में बनाई जगह, भोपाल बुल्स की नजर

शहडोल / भोपाल   मध्य प्रदेश के शहडोल जिले की पहचान अब गर्ल्स क्रिकेट की नर्सरी के तौर पर भी होने लगी है. क्योंकि यहां से कई लड़कियां क्रिकेट में कमाल कर रही हैं. पूजा वस्त्रकार जहां भारतीय टीम तक का सफर तय कर चुकी हैं, तो वहीं पूनम सोनी जैसी लड़कियां भी हैं जो क्रिकेट में बड़ा कमाल कर चुकी हैं. अब रीना यादव जैसी लड़कियां हैं जिनके घर की आर्थिक स्थिति भले ही बेहतर नहीं है. लेकिन अपने सपने को साकार करने के लिए वो लगातार कड़ी मेहनत कर रही हैं और सफलता हासिल कर रही हैं।  मेहनत से मंज़िल पाने की ज़िद कहते हैं सही दिशा में किया गया हार्ड वर्क एक दिन मंजिल जरूर दिला देता है. रीना यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिनके घर की घरेलू परिस्थितियों बहुत बेहतर नहीं हैं. पिता ऑटो चलाकर घर को संभाल रहे हैं. लेकिन बेटी का सपना था कि उन्हें क्रिकेटर बनना है और इसीलिए उन्होंने क्रिकेट खेलने की शुरुआत कर दी. और धीरे-धीरे कड़ी मेहनत और हार्ड वर्क से आज रीना यादव मध्य प्रदेश के सीनियर टीम तक का सफर तय कर ही चुकी हैं।   उन्हें हाल ही में विमेंस मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग WMPL की टीम में चुना गया है. जिसके बाद वो एक बार फिर से सुर्खियों में आ गई हैं. रीना यादव बताती है कि, ''वो मध्य प्रदेश एसोसिएशन की खिलाड़ी हैं और उनका सिलेक्शन अभी हाल ही में WMPL के लिए भोपाल बुल्स की टीम में हुआ है. पिछले साल उन्हें बुंदेलखंड बुल्स की टीम ने चुना था।  कैसे हुई क्रिकेट की शुरुआत रीना यादव बताती हैं कि, ''वो शहडोल जिले के बुढार के पास रुंगटा कॉलोनी की रहने वाली हैं और उन्हें बचपन से क्रिकेट खेलने का शौक था. इसी में वो अपना करियर बनाना चाहती थी. पेरेंट्स भी उनके काफी सपोर्टिव थे और उनके हर फैसले का समर्थन कर रहे थे. यही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी जिसकी वजह से आज वह अपने क्रिकेट करियर के लिए आगे बढ़ पा रही है और नई मंजिल को अचीव कर रही हैं।  रीना यादव बताती हैं कि, ''उन्होंने शहडोल क्रिकेट अकादमी में भी क्रिकेट सीखा फिर इसके बाद उनका सिलेक्शन शिवपुरी के महिला क्रिकेट अकादमी में हो गया जहां वो अभी भी सीख रही हैं. सब कुछ अच्छा चल रहा है, शिवपुरी में रहती हैं तो वहां महिला क्रिकेट अकादमी में ट्रेनिंग कर रही हैं. कभी- कभी शहडोल आने पर यहां भी ट्रेनिंग करती हैं. इस तरह से वो अपने क्रिकेट में बेहतर करने की कोशिश में डटी हुई हैं।  रीना यादव के अचीवमेंट्स शहडोल क्रिकेट अकादमी के कोच सोनू रॉबिंसन बताते हैं कि, ''रीना यादव 10 साल से शहडोल संभाग के लिए क्रिकेट खेल रही हैं. रीना को पहली बार स्कूल गेम्स में देखा गया था जिसके बाद उन्हें शहडोल क्रिकेट अकादमी प्रैक्टिस के लिए बुलाया गया था. पहले वो हफ्ते में तीन-चार दिन आती थी, कुछ साल तक तो वहीं से उन्होंने अप डाउन किया लेकिन इसके बाद अपने मामा के यहां रहने लगीं. शहडोल में ही उन्होंने क्रिकेट की रेगुलर शुरुआत कर दी. इसके बाद रीना यादव का सफर यहीं नहीं थमा।  अपनी हार्ड वर्क और कड़ी मेहनत के दम पर रीना ने मध्य प्रदेश से अंडर-19, अंडर 23 और सीनियर ग्रुप को रिप्रेजेंट किया है. इस बार उनके परफॉर्मेंस के आधार पर मध्य प्रदेश के WMPL में जो वूमेंस का दूसरा संस्करण है भोपाल बुल्स की टीम ने उन्हें अपनी टीम में रखा है. रीना यादव राइट हैंड बैट्समैन हैं और पार्ट टाइम ऑफ स्पिन भी करती हैं. उनमें बहुत काबिलियत है, उन्हें बेहतर मंच मिला है, अब उनके पास एक अच्छा मौका है अपने टैलेंट को दिखाने का।  शहडोल बना गर्ल्स क्रिकेट की नर्सरी देखा जाए तो शहडोल जिला गर्ल्स क्रिकेट की नर्सरी है क्योंकि यहां से कई लड़कियां हैं जो मध्य प्रदेश के अलग-अलग एज ग्रुप की टीम से खेल रही हैं. अभी हाल ही में कई लड़कियां WMPL के लिए जो सिलेक्ट हुई हैं, उसमें शहडोल संभाग से भी कई लड़कियां शामिल हैं. पूजा वस्त्रकार जैसे खिलाड़ी भारतीय टीम से खेल चुकी हैं. पूनम सोनी मध्य प्रदेश से तो खेल ही चुकी हैं. इसके अलावा अब वो क्रिकेट के दम पर रेलवे में नौकरी भी कर रही हैं और रेलवे की टीम से भी खेल रही हैं. इसके अलावा भी कई ऐसी लड़कियां हैं, जो लगातार क्रिकेट में कमाल कर रही हैं और अपने टैलेंट से सभी का ध्यान खींच रही हैं। 

हैदराबाद ने पंजाब को मात देकर बनाई टेबल की पहली पोज़िशन

हैदराबाद  सनराइजर्स हैदराबाद ने पंजाब किंग्स को 33 रनों से हरा दिया है. यह IPL 2026 सीजन में पंजाब टीम की लगातार तीसरी हार है. ये वही टीम है, जो पहले सात मुकाबलों में एक भी नहीं हारी थी. कूपर कोनोली अंत तक लड़ते रहे, लेकिन उनकी 107 रनों की शतकीय पारी पंजाब को जीत नहीं दिला पाई।  हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में SRH की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 235 रन बनाए थे. ईशान किशन और हेनरिक क्लासेन ने दमदार अर्धशतक लगाए, लेकिन उन्हें कई जीवनदान भी मिले. हैदराबाद को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में पंजाब टीम की खराब फील्डिंग का भी बड़ा हाथ रहा।  काम नहीं आया कूपर कोनोली का शतक पंजाब 236 रनों के विशालकाय लक्ष्य का पीछा करने आई पंजाब किंग्स की शुरुआत अच्छी नहीं रही क्योंकि 4 रन के स्कोर तक दोनों सलामी बल्लेबाज आउट हो चुके थे. कूपर कोनोली पारी के दूसरे ओवर में बैटिंग करने आ गए थे, उन्होंने अंत तक लड़ाई लड़ी और 59 गेंद में 107 रनों की पारी खेल नाबाद लौटे. इस पारी में उन्होंने 7 चौके और 8 छक्के लगाए।  कूपर चाहे पंजाब को जीत ना दिला पाए हों, लेकिन उन्होंने शतक ना लगाया होता तो पंजाब का नेट रन रेट धड़ाम से नीचे गिर गया होता. कप्तान श्रेयस अय्यर भी फ्लॉप रहे, जो सिर्फ 5 रन बना पाए. मार्कस स्टोइनिस ने 28 रन और सूर्यांश शेडगे ने 25 रनों का योगदान दिया, लेकिन अन्य कोई बल्लेबाज कोनोली का साथ नहीं दे पाया।  पंजाब की लगातार तीसरी हार यह पंजाब किंग्स की सीजन में लगातार तीसरी हार है. वह बहुत लंबे अरसे से टेबल के टॉप पर बनी हुई थी, लेकिन अब सनराइजर्स हैदराबाद ने अब पहले स्थान पर कब्जा जमा लिया है. दूसरी ओर हैदराबाद की टीम ने प्लेऑफ की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं, क्योंकि उसके 14 अंक हो गए हैं. SRH के तीन मुकाबले बचे हैं, जिनमें एक जीत भी उसकी प्लेऑफ में जगह लगभग सुनिश्चित कर देगी।  अभिषेक-हेड ने दिलाई तूफानी शुरुआत टॉस गंवाकर बल्लेबाजी के लिए उतरी सनराइजर्स हैदराबाद की सलामी जोड़ी अभिषेक शर्मा और ट्रेविस हेड ने पहले विकेट के लिए 21 गेंदों में 54 रन की साझेदारी कर टीम को विस्फोटक शुरुआत दिलाई. अभिषेक 13 गेंदों में 35 रन बनाकर पवेलियन लौटे. इसके बाद ट्रेविस हेड ने ईशान किशन के साथ दूसरे विकेट के लिए 30 रन जोड़े. ट्रेविस 19 गेंदों में 3 छक्कों और इतने ही चौकों के साथ 38 रन बनाकर आउट हुए. एसआरएच 84 के स्कोर तक दोनों सलामी बल्लेबाजों के विकेट गंवा चुकी थी।  ईशान-क्लासेन ने मिले मौकों को भुनाया यहां से ईशान किशन ने हेनरिक क्लासेन के साथ तीसरे विकेट के लिए 48 गेंदों में 88 रन की साझेदारी करते हुए टीम को मजबूत स्थिति में ला दिया. इन दोनों ही बल्लेबाजों के कैच छूटे जिनका फायदा उठाते हुए ईशान और क्लासेन ने अर्धशतक ठोके. ईशान 32 गेंदों में 55 रन बनाकर आउट हुए. उनकी इस पारी में 4 छक्के और 2 चौके शामिल रहे. नितीश रेड्डी ने हेनरिक क्लासेन के साथ चौथे विकेट के लिए 32 गेंदों में 63 रन जोड़कर टीम को विशाल स्कोर तक पहुंचाया. क्लासेन 43 गेंदों में 4 छक्कों और 3 चौकों के साथ 69 रन बनाकर आउट हुए, जबकि नितीश रेड्डी ने 13 गेंदों में 4 बाउंड्री के साथ नाबाद 29 रन बनाए. पंजाब के लिए अर्शदीप सिंह, लॉकी फर्ग्यूसन, युजवेंद्र चहल और विजयकुमार वैशाक ने 1-1 विकेट निकाला। 

क्या आपको चाहिए लोअर बर्थ? IRCTC से जानें आसान तरीका

 नई दिल्ली अक्सर लोग स्वास्थ्य कारणों से या कंफर्ट की वजह से लोअर बर्थ लेना चाहते हैं. लेकिन, कई बार समय पर ट्रेन की टिकट समय पर बुक करने के बाद भी लोअर बर्थ नहीं मिल पाती है. दरअसल, रेलवे की ओर से सीनियर सिटीजन को लोअर बर्थ में प्राथमिकता दी जाती है. अगर आप भी परिवार में किसी सीनियर सिटीजन के लिए टिकट बुक कर रहे हैं तो आप आईआरसीटी की ओर से बताए गए तरीके से आसानी से लोअर बर्थ बुक कर सकते हैं. तो जानते हैं क्या है वो तरीका।  हाल ही में सोशल मीडिया पर किसी यूजर ने आईआरसीटीसी से लोअर बर्थ के बारे में सवाल किया था और सीनियर सिटीजन की टिकट को लेकर पूछा था. इसके जवाब में आईआरसीटीसी ने जवाब दिया है और बताया है कि किस तरह से लोअर बर्थ अलॉट की जाती है।  आईआरसीटीसी ने अपने एक्स अकाउंट पर बताया, 'आप लोअर बर्थ पाने के लिए सीनियर सिटीजन कोटा में टिकट बुक कर सकते हैं. जनरल कोटा में भी आप लोअर बर्थ की प्रेफरेंस दे सकते हैं, लेकिन बर्थ का अलॉटमेंट सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करता है. अगर आप सीनियर सिटीजन के लिए टिकट इसके बाद आप 'रिजर्वेशन चॉइस' में 'Book only if lower berth is allotted' विकल्प चुन सकते हैं।    साथ ही आईआरसीटी ने बताया कि जनरल कोटा में लोअर बर्थ का आवंटन पूरी तरह उपलब्धता पर निर्भर करता है और इसमें किसी भी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप नहीं होता. अगर बुकिंग के समय आपको लोअर बर्थ नहीं मिलती है तो आप यात्रा के दौरान ड्यूटी पर मौजूद कोच टीटीई (TTE) से संपर्क कर सकते हैं. वे जरूरतमंद यात्रियों की मदद करने के लिए अधिकृत होते हैं।  कैसे बुक करते हैं ट्रेन टिकट? ट्रेन टिकट बुक करने के लिए सबसे पहले आईआरसीटीसी की वेबसाइट या ऐप पर अकाउंट बना लें और अगर अकाउंट है तो लॉगिन करें. इसके बाद “From” और “To” स्टेशन यात्रा की तारीख डालकर ट्रेन सर्च करें और अपनी पसंद की ट्रेन व क्लास चुनें. सीट उपलब्धता देखने के बाद “Book Now” पर क्लिक करें और यात्री का नाम, उम्र, जेंडर जैसी जानकारी भरें।  अगर लोअर बर्थ चाहिए तो प्रेफरेंस में चुन सकते हैं और 'रिजर्वेशन चॉइस' में Book only if lower berth allotted ऑप्शन भी सिलेक्ट कर सकते हैं. इसके बाद यूपीआई, कार्ड या नेट बैंकिंग से पेमेंट करें. पेमेंट सफल होने पर टिकट कन्फर्म हो जाता है और आपको एसएमएस, मेल से टिकट मिल जाती है। 

MP Metro ट्रेनों में अब बर्थडे और प्री-वेडिंग का मजा, सस्ती बुकिंग के साथ जश्न संभव

इंदौर/भोपाल   मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने एक पहल शुरू की है, जिसके तहत मेट्रो ट्रेनों और स्टेशन परिसर में बर्थडे पार्टी, प्री-वेडिंग शूट, फिल्म की शूटिंग और अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनुमति दी जाएगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब इंदौर और भोपाल में मेट्रो सेवाओं में यात्रियों की संख्या उम्मीद से कम है। MPMRCL ने बताया कि 'सेलिब्रेशन्स ऑन व्हील्स' पहल के तहत, मेट्रो कोच और चुनिंदा स्टेशन क्षेत्रों का उपयोग विभिन्न रचनात्मक और सामाजिक गतिविधियों के लिए किया जाएगा, बशर्ते निर्धारित शुल्क और सुरक्षा नियमों का पालन किया जाए। MPMRCL के प्रबंध निदेशक एस. कृष्णा चैतन्य ने कहा, "सेलिब्रेशन्स ऑन व्हील्स पहल इंदौर और भोपाल की जीवंत संस्कृति, तेजी से बढ़ते शहरी वातावरण और नागरिकों की बदलती जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है।" उन्होंने कहा, "यह मेट्रो को जनता के करीब लाने का एक प्रयास है, जिससे लोग मेट्रो के सुरक्षित और आधुनिक वातावरण में अपने खास मौकों का जश्न मना सकें। इससे मेट्रो सेवाएं नागरिकों के दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन जाएंगी।" सुरक्षा और अनुशासन को ध्यान में रखते हुए कुछ पाबंदियां भी तय की गई हैं. मेट्रो परिसर में शराब, बीड़ी-सिगरेट और पटाखों पर पूरी तरह मनाही रहेगी. आयोजन में शामिल होने से पहले सभी लोगों की स्टेशन पर जांच की जाएगी।  पिछले साल शुरू हुई थी भोपाल मेट्रो भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर 2025 को हुआ था और 21 दिसंबर से इसे आम यात्रियों के लिए खोला गया था. शुरुआती दिनों में यात्रियों की अच्छी खासी तादाद देखने को मिली, लेकिन वक्त के साथ फुटफॉल में गिरावट आई. ऐसे में अब मेट्रो एडमिनिस्ट्रेश ने कमाई बढ़ाने के लिए यह नया प्रयोग शुरू किया है। 

दीपिंदर गोयल ने किया ऐलान, लॉन्च होने वाला है टेंपल जो पढ़ सकेगा दिमाग

नई दिल्ली जोमैटो के को-फाउंडर दीपिंदर गोयल ने अपने नए हेल्थ-टेक प्रोजेक्ट Temple को लेकर बड़ा ऐलान कर दिया है. अब इस वियरेबल डिवाइस का अर्ली ऐक्सेस ओपन कर दिया गया है और कंपनी ने बताया है कि पहले 100 युनिट तैयार हैं, जिन्हें जल्द यूजर्स तक भेजा जाएगा।  Temple को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चा थी, लेकिन अब पहली बार इसे इस्तेमाल करने का मौका लोगों को मिलने जा रहा है. हालांकि यह अभी पूरी तरह से आम लोगों के लिए लॉन्च नहीं हुआ है. फिलहाल इसे सिर्फ चुनिंदा यूजर्स को दिया जा रहा है ताकि असली इस्तेमाल में इसका टेस्ट हो सके और फीडबैक लिया जा सके।  गौरतलब है कि पिछले साल दीपिंदर गोयल को टेंपल डिवाइस अपने माथे के साइड में लगाए हुए एक पॉडकास्ट में देखा गया. तब से इसके बारे में चर्चा शुरू हुई थी. लोगों के मन में सवाल था कि आखिर ये छोटा सा डिवाइस क्या करता है? क्या करता है टेंपल डिवाइस? यह डिवाइस बाकी फिटनेस बैंड या स्मार्टवॉच से काफी अलग है. टेंपल को सिर की कनपटी पर लगाया जाता है और इसका फोकस बॉडी नहीं, बल्कि दिमाग पर है।  कंपनी का दावा है कि यह दिमाग में ब्लड फ्लो को ट्रैक करता है. इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि इंसान का फोकस कैसा है, थकान कितनी है और उसकी मेंटल परफॉर्मेंस किस लेवल पर है।  आज तक ज्यादातर वियरेबल डिवाइस हार्ट रेट, स्टेप्स या नींद जैसी चीजें ट्रैक करते थे. लेकिन टेंपल सीधे दिमाग से जुड़ी एक्टिविटी को समझने की कोशिश कर रहा है. यही वजह है कि इसे एक नए तरह का ह्यूमन परफॉर्मेंस वियरेलबल कहा जा रहा है।  आइए जानते हैं कि ऐसी डिवाइस काम कैसे करती है. इसका जवाब जुड़ा है ब्रेन साइंस और सेंसर टेक्नोलॉजी से. ये दुनिया का पहला डिवाइस नहीं है जो ये काम करता है।  दिमाग नहीं पढ़ता है ये डिवाइस चूंकि इसे माथे के साइड में लगाया जाता है, इसलिए एक परसेप्शन ऐसा बनता है कि ये दिमाग पढ़ने वाला डिवाइस है. लेकिन ऐसा नहीं है. ये डिवाइस आपके दिमाग को नहीं पढ़ता.  टेंपल जैसे वियरेबल आमतौर पर ऑप्टिकल सेंसर्स का इस्तेमाल करते हैं, जो स्किन के अंदर ब्लड फ्लो को मेजर हैं. इसमें हल्की इंफ्रारेड या नजदीकी रोशनी नियर इंफ्रारेड लाइट स्किन में भेजी जाती है।  जब ये लाइट अंदर जाती है, तो खून उसमें मौजूद ऑक्सीजन के हिसाब से अलग-अलग तरीके से उसे एब्जॉर्ब करता है. सेंसर इस बदलाव को पढ़ते हैं और अंदाजा लगाते हैं कि उस जगह पर ब्लड फ्लो कितना है।  इस टेक्नोलॉजी को आसान भाषा में समझें तो यह कुछ-कुछ उसी तरह काम करती है जैसे स्मार्टवॉच में हार्ट रेट सेंसर काम करता है, लेकिन यहां फोकस दिमाग के पास की नसों पर होता है।  नियर इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कॉपी  इस तरह की तकनीक को मेडिकल दुनिया में NIRS (Near-Infrared Spectroscopy) कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल पहले से रिसर्च और अस्पतालों में किया जाता रहा है।  जब दिमाग ज्यादा एक्टिव होता है, तो वहां खून का बहाव बढ़ जाता है क्योंकि उसे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है. टेंपल जैसे डिवाइस इसी बदलाव को पकड़ने की कोशिश करते हैं. इसी डेटा के आधार पर यह अंदाजा लगाया जाता है कि व्यक्ति फोकस्ड है, थका हुआ है या उसकी मेंटल एनर्जी कैसी है।  हालांकि यह टेक्नोलॉजी नई नहीं है, लेकिन इसे छोटे वियरेबल डिवाइस में फिट करना और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए आसान बनाना एक बड़ी चुनौती रही है. यही वजह है कि अभी इसे पूरी तरह परफेक्ट नहीं माना जा रहा और एक्सपर्ट्स भी इसकी सटीकता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।  दीपिंदर गोयल पहले भी इस डिवाइस को पहनकर नजर आ चुके हैं, जिससे इसकी झलक पहले मिल चुकी थी. अब कंपनी इसे धीरे-धीरे लोगों तक पहुंचाने की तैयारी में है. बताया जा रहा है कि इसके लिए पहले से एक वेटलिस्ट बनाई गई थी और उसी के आधार पर यूजर्स को एक्सेस दिया जा रहा है।  फिलहाल टेंपल शुरुआती स्टेज में है, लेकिन अगर यह सफल होता है, तो वियरेबल टेक्नोलॉजी का अगला बड़ा ट्रेंड बन सकता है. आने वाले समय में सिर्फ फिटनेस नहीं, बल्कि दिमाग की परफॉर्मेंस को ट्रैक करना भी आम बात हो सकती है। 

जेडीयू में मंत्री पद पर निशांत कुमार की संभावना, नीतीश से हो रही है बैठक

पटना  बिहार में आज  7 मई को कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है. पटना के गांधी मैदान में भव्य शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी पूरी हो चुकी है. इस बीच एक बड़ी चर्चा यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं. हालांकि इसको लेकर जेडीयू की तरफ से कोई अधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।  बता दें कि कैबिनेट विस्तार से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. जेडीयू नेता संजय झा और डिप्टी सीएम विजय चौधरी पटना स्थित 7 सर्कुलर रोड पहुंचे. जहां उनकी नीतीश कुमार से मुलाकात हुई. माना जा रहा है कि इस बैठक में मंत्रिमंडल के नामों के साथ-साथ निशांत कुमार को लेकर भी चर्चा हुई है. यह बैठक कैबिनेट विस्तार से पहले काफी अहम मानी जा रही है।  क्या है निशांत की इच्छा? इस बीच जेडीयू एमएलसी संजय गांधी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी के कई नेता चाहते हैं कि निशांत कुमार मंत्री बनें. लेकिन निशांत की इच्छा है कि वे पहले बिहार का दौरा पूरा करें, उसके बाद ही मंत्रिमंडल में शामिल होने पर फैसला लें. संजय गांधी ने साफ कहा कि अंतिम फैसला निशांत कुमार को ही लेना है. बता दें कि वे नीतीश कुमार और निशांत के करीबी माने जाते हैं. यह बयान उन्होंने पटना के सात सर्कुलर रोड से बाहर निकलने के बाद दिया।  जिम्मेदारी लेने से किया था मना पिछले महीने नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद चर्चा थी कि उनके बेटे निशांत कुमार डिप्टी सीएम बन सकते हैं. पार्टी के कई नेताओं ने उन्हें इसके लिए मनाने की कोशिश भी की. लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया. सूत्रों के मुताबिक, निशांत का कहना था कि बिना चुनाव जीते वे कोई बड़ा पद नहीं लेना चाहते. उनका मानना है कि पहले जनता के बीच काम करके अनुभव लेना जरूरी है. इसलिए उन्होंने तय किया कि वे पहले चुनाव लड़कर विधायक बनेंगे, उसके बाद ही बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे. इसके लिए वे करीब छह महीने तक जमीनी स्तर पर काम करेंगे और लोगों के बीच रहेंगे. इन दिनों वे बिहार के अलग-अलग इलाकों का दौरा भी कर रहे हैं. निशांत कुमार 8 मार्च को जेडीयू में शामिल हुए थे।  कौन-कौन बनेंगे मंत्री सूत्रों के मुताबिक एनडीए की ‘टीम सम्राट’ लगभग तैयार है. इस बार मंत्रिमंडल में पुराने और अनुभवी नेताओं के साथ नए चेहरों को भी मौका मिल सकता है. बीजेपी अपने कोटे से बड़े नेताओं को शामिल कर रही है, वहीं जेडीयू भी अपने भरोसेमंद नेताओं पर दांव लगा रही है. चर्चा है कि बीजेपी से विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय, डॉ. दिलीप जायसवाल और डॉ. प्रमोद कुमार जैसे नेताओं को जगह मिल सकती है. वहीं युवा चेहरों में श्रेयसी सिंह और आनंद मिश्रा जैसे नाम भी चर्चा में हैं। 

किसान मुद्दों पर प्रदेश में गर्माई राजनीति, कांग्रेस करेगी आज आंदोलन और जाम

भोपाल  मध्य प्रदेश में किसानों के मुद्दों को लेकर सियासत तेज हो गई है। आज 7 मई को कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन करने जा रही है, जिसमें मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में नेशनल हाईवे जाम कर किसानों की समस्याओं और मांगों को लेकर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई है, जिससे कई जिलों में यातायात प्रभावित होने की आशंका है। भोपाल में पीसी शर्मा ने बताया कि सरकार की खरीदी व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। बार-बार खरीदी और स्लॉट बुकिंग की तारीख बढ़ाने से सिस्टम की कमजोरी उजागर हो गई है। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया के पहले 14 दिनों में केवल 9.30 लाख मीट्रिक टन गेहूं ही खरीदा गया है। इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। किसान स्लॉट बुकिंग, रजिस्ट्रेशन पर्ची अपलोड करने और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को गेहूं का दाम 2625 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाए। साथ ही, जिन किसानों ने कम कीमत पर गेहूं बेचा है, उन्हें अंतर की राशि “भावांतर योजना” के तहत सीधे उनके बैंक खातों में दी जाए। इसके अलावा, पार्टी ने मूंग और सोयाबीन के दामों को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस के इस आंदोलन के कारण 11 जिलों में करीब 747 किलोमीटर तक यातायात प्रभावित होने की संभावना है। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन किसानों के हित में किया जा रहा है, जबकि प्रशासन ने भी सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस की मांगें पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भाव दिया जाए और कम कीमत पर बेचे गए गेहूं का अंतर भावांतर योजना के तहत सीधे खातों में डाला जाए। साथ ही मूंग और सोयाबीन के दामों को लेकर भी जवाब मांगा गया है। मंत्री बोले- वेयरहाउस की क्षमता में 20% बढ़ाई मध्यप्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंदसिंह राजपूत ने कहा कि मुख्यमंत्री और विभाग द्वारा गेहूं खरीदी के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी की अनुमति थी, लेकिन किसानों के अधिक पंजीयन को देखते हुए केंद्र सरकार से इसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन करा लिया गया है। मंत्री ने कहा कि खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है और अब तक करीब 15 लाख स्लॉट बुक हो चुके हैं। 50 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीदी भी हो चुकी है। राजपूत ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए तौल कांटे बढ़ाए गए हैं और वेयरहाउस की क्षमता में 20% तक की बढ़ोतरी की गई है, ताकि भंडारण में दिक्कत न आए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री खुद औचक निरीक्षण कर रहे हैं और वे स्वयं भी विभिन्न केंद्रों का दौरा कर रहे हैं। भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना- कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेसी किसी किसान को एक गिलास पानी तक नहीं पिलाते और आंदोलन का ढोंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने के कारण कांग्रेस इस तरह के कदम उठा रही है, लेकिन हाईवे जाम से आम जनता को परेशानी होगी। राजपूत ने कहा कि सड़कों को जाम करने से लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी और इससे आम नागरिकों को अनावश्यक दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। उन्होंने कांग्रेस से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की। मंत्री ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में कांग्रेस की स्थिति कमजोर है और पार्टी को आंदोलन करने के बजाय आत्ममंथन करने की जरूरत है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले कांग्रेस ने आज तक अन्नदाता की चिंता नही की कांग्रेस को तो यह बात कहने का भी अधिकार नहीं हैं। हमारी सरकार बनने के बाद हम अन्नदाता को किसान सम्मान निधि दे रहे हैं। समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी की जा रही हैं, जबकि बारदाने का संकट था। जीतू पटवारी को किसानों से माफी मांगना चाहिए। वो बताएं कि 2003-04 के पहले उन्होंने अन्नदाता के लिए क्या किया? जीतू पटवारी को आत्ममंथन और आत्मचिंतन करने की जरुरत है।

इंदौर में सड़क विकास: मधु मिलन–छावनी मार्ग होगा 60 फीट चौड़ा, अवरोध हटाने की तैयारी

इंदौर  मधुमिलन-छावनी मार्ग पर वर्षों से ट्रैफिक जाम की समस्या रहती थी, लेकिन अब यह समस्या हल होगी। नगर निगम ने इस मार्ग को 60 फीट चौड़ा करने का मन बना लिया है और इसके लिए दो-तीन दिन में 100 से ज्यादा अतिक्रमण भी हटाने की तैयारी की जा रही है। मेयर पुष्यमित्र भार्गव खुद इस मार्ग पर अतिक्रमण हटाने से पहले रहवासियों से मिलने पहुंचे और रहवासियों से आग्रह किया कि वे अगले दो से तीन दिनों के भीतर अपने-अपने अतिक्रमण खुद हटा लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने पर नगर निगम द्वारा कार्रवाई कर उन्हें हटाया जाएगा। कुछ रहवासी स्वेच्छा से अतिक्रमण हटाने के लिए तैयार हो चुके हैं। भार्गव ने बताया कि मधुमिलन चौराहे से छावनी तक का यह मार्ग शहर के ट्रैफिक के लिए महत्वपूर्ण है। इसका निर्माण निगम की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के तहत इस सड़क को प्रथम चरण में 60 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके बाद यातायात की स्थिति के अनुसार आगे की योजना बनाई जाएगी।   उन्होंने यह भी बताया कि 60 फीट चौड़ाई को लेकर क्षेत्र के अधिकांश रहवासी सहमत हैं, जिससे कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। आपको बता दें कि छह साल पहले भी तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने इस सड़क को चौड़ा करने की योजना बनाई थी और तब मथुरवाला स्वीट्स का निर्माण भी तोड़ा गया था, लेकिन बाद में उनका तबादला हो गया और सड़क चौड़ी नहीं हो पाई थी।