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सेवा सेतु छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल क्रांति का नया अध्याय

रायपुर छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” एक गेम-चेंजर पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को नागरिकों की उंगलियों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी विजन का परिणाम है कि आज आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र से लेकर राशन कार्ड और भू-नक़ल तक की 441 से अधिक सेवाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। डिजिटल युग में सुशासन का असली अर्थ है सेवाओं का सरलीकरण और समयबद्धता। “सेवा सेतु” इसी सोच को साकार कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है। डिजिटल सुशासन- कार्यालयों के चक्करों से मिली मुक्ति एक समय था जब नागरिकों को प्रमाण-पत्र बनवाने जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग-अलग सरकारी कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़ती थी। इसमें न केवल समय और श्रम की बर्बादी होती थी, बल्कि बिचौलियों का डर भी बना रहता था। “सेवा सेतु” ने इस पारंपरिक ढर्रे को बदलते हुए “वन स्टॉप सॉल्यूशन” पेश किया है। अब नागरिक घर बैठे या नजदीकी लोक सेवा केंद्र से ऑनलाइन आवेदन कर निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ ले रहे हैं। तकनीकी उन्नयन की दिशा में राज्य ने लंबी छलांग लगाई है। छत्तीसगढ़ के पुराने ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जहाँ केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं नए और उन्नत “सेवा सेतु” प्लेटफॉर्म पर अब 441 सेवाएं लाइव हैं। इस पोर्टल पर 30 से अधिक विभागों को एक साथ जोड़ा गया है इस नई सेवा में 54 नई सेवाओं के साथ विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का सफल एकीकरण किया गया है, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल्स पर भटकना नहीं पड़ता। छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में सेवा देना अब केवल कागजी नियम नहीं, बल्कि हकीकत है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी बयां करते हैं। कुल  75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदनों में से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामले का निराकरण किया जा चुका है। इस प्रकार 95 प्रतिशत से अधिक आवेदनों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर किया गया। प्रमाण-पत्रों की डिजिटल सुलभता आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक मांग बुनियादी प्रमाण-पत्रों की रही है। चिप्स (ब्भ्पच्ै) कार्यालय के मुताबिक आय प्रमाण-पत्ररू 32 लाख से अधिक आवेदन, मूल निवास, जाति प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन और भू-नक़ल सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर डिजिटल उपयोग हुआ है। व्हाट्सएप और डिजिटल ट्रांजेक्शन- पहुँच हुई और भी आसान तकनीक को जन-जन तक पहुँचाने के लिए अब “सेवा सेतु” को व्हाट्सएप से भी जोड़ दिया गया है। डिजिटल इंडिया की अवधारणा को धरातल पर उतारते हुए इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं। पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल “सेवा सेतु” केवल एक तकनीकी पोर्टल नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली के कारण अब हर आवेदन की रीयल-टाइम निगरानी संभव है, जिससे अनावश्यक देरी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई है। यदि इसी गति से सुधार जारी रहा, तो छत्तीसगढ़ का यह मॉडल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है।  

विष्णु सरकार ने बड़े प्रशासनिक बदलाव किए, नई टीम से अधिकारियों से उम्मीदें जुड़ीं

रायपुर  छतीसगढ़ में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल की हुआ है। तबादलों की इस आंधी में कई अहम बदलाव हुए हैं जो प्रदेश सरकार के लिहाज से काफी अहम है। इस फेरबदल को रिजल्ट ओरिएंटिड तरीके से देखा जा रहा है। काफी लंबे से समय से इंतजार किए जा रहे आईएएस अफसरों के तबादले आज हो गए हैं। इन अधिकारियों में एसीएस स्तर से लेकर कलेक्टर तक शामिल रहे। इस बड़े फेरबदल को इसिलए महत्वपूर्ण कहा जा रहा है क्योंकि इसे सीएम विष्णुदेव साय ने की नई प्रशासनिक टीम कहा जा रहा है जो आगामी चुनाव तक काम करेगी। दरअसल छतीसगढ़ सरकार को ढाई साल पूरे हो गए हैं।अब बचे समय में नतीजे लाने की जिम्मेवारी है । लिहाजा नतीजे देने वाले अफसरों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया गया है। सात कलेक्टरों को हटाकर नए चेहरों को तैनाती दी गई है। जानकारी आ रही है कि बलरामपुर कलेक्टर को मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद हटाया गया है। वहीं एसीएस ऋचा शर्मा को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऋचा को नतीजे देने वाली अफसर के रूप में पहचाना जाता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह ऊर्जा विभाग के प्रशासनिक प्रमुख तो बनाए गए हैं, साथ ही उन्हें बिजली कंपनी का अध्यक्ष भी बनाया गया है। वहीं बात अगर गृह एवं जेल विभाग की करें तो पहली बार महिला अधिकारी की तैनाती हुई है। निहारिका बारीक को इस अहम विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह वित्त विभाग अब डॉ. रोहित यादव संभालेंगे। मुकेश बंसल को पीडब्ल्यूडी और छत्तीसगढ़ रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की जिम्मेदारी दी गई है। मुकेश बंसल से सरकार उम्मीद कर रही है कि चुनाव मोर्चे पर जाने से पहले तक स्थिति बेहतर हो जाए। वहीं इन तबादलों में सबसे ज्यादा चर्चा बसवराजू एस के मुख्यमंत्री सचिवालय से बाहर होने को लेकर रही। उन्हें अब कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार विभाग का प्रभार सौंपा गया है। 7 जिलों के कलेक्टरों को भी बदला गया है। सरकार ने संदेश  साफ और स्पष्ट है कि लोक हित योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लिहाजा सरकार ने बेहतर नतीजों की दिशा में बड़ा फेरबदल करके पहला कदम बढ़ा दिया है। देखना होगा सरकार कितनी सफल हो पाती है और ये अधिकारी लक्ष्यों के कितने करीब पहुंच पाते हैं।

डीडवाना में पशु तस्करी का खुलासा, ट्रक से 21 ऊंट बरामद, दो की मौत

डीडवाना डीडवाना जिले के परबतसर थाना क्षेत्र में ऊंट तस्करी का मामला सामने आया है. वहां गौरक्षा दल और पुलिस ने संयुक्त रूप से अवैध पशु तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की और एक ट्रक में भरे 21 ऊंटों को मुक्त कराया है. साथ ही  पुलिस ने दो ऊंट तस्करों को भी गिरफ्तार किया है. लेकिन इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें गौरक्षकों ने ऊंट तस्करों को अनोखी सजा सुनाई गई. उन्होंने ऊंट तस्करों को सबक सिखाने के लिए उन्हें साड़ी पहनाकर डांस करवाया और माफी भी मंगवाई. इस वीडियो में ऊंट तस्कर हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए भी नजर आ रहे हैं. 21 ऊंटों की तस्करी, 2 की मौत यह घटना गत 3 मई की देर रात की है. गौरक्षा दल किशनगढ़ को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक ट्रक में ऊंटों को भरकर परबतसर के रास्ते मेवात (हरियाणा) ले जाया जा रहा है. इस दौरान हाईवे पर गौरक्षकों ने ट्रक को रुकवाया ओर तीन तस्करों को पकड़ लिया. ट्रक की जांच करने पर ट्रक के अंदर तिरपाल के नीचे 21 ऊंट और ऊंटनी ठूंस-ठूंस कर भरे पाए गए. तस्करों की इस निर्दयता के कारण दम घुटने से दो ऊंटों की मौके पर ही मौत हो गई, जिसे देख गौसेवकों में भारी रोष फैल गया. साथ ही उन्होंने वध के लिए मेवात ले जाए जा रहे 21 ऊंटों को तस्करों के चंगुल से मुक्त करा दिया.  डीडवाना जिले के परबतसर थाना क्षेत्र में ऊंट तस्करी का मामला सामने आया है. वहां गौरक्षा दल और पुलिस ने संयुक्त रूप से अवैध पशु तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की और एक ट्रक में भरे 21 ऊंटों को मुक्त कराया है. साथ ही पुलिस ने दो ऊंट तस्करों को भी गिरफ्तार किया है साड़ी पहनाकर करवाया डांस इस दौरान पुलिस के हवाले करने से पहले गो रक्षकों ने मौके पर ही तस्करों को सबक सिखाने के लिए उन्हें साड़ी पहनाई और मुख्य सड़क पर ही फिल्मी गाने " मुझको राणा जी माफ करना, गलती म्हारे से हो गई…" गाने पर जमकर डांस करवाया. इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने इसका वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में तस्कर हाथ जोड़कर माफी मांगते नजर आ रहे हैं. घटना की सूचना पर परबतसर पुलिस थाने से राजेंद्र प्रसाद पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला. इस दौरान पुलिस ने मेवात निवासी वसीम अकरम और मेरठ निवासी जिशान के खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया.

बीएसएफ मुख्यालय ब्लास्ट केस में नई कड़ी, पकड़ा गया दविंदर चंडीगढ़ ग्रेनेड हमले से जुड़ा

जालंधर. बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए धमाके की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ा सुराग हाथ लगा है। जांच में पकड़े गए नवांशहर के जमशेदपुर निवासी दविंदर सिंह का संबंध अब चंडीगढ़ में भाजपा दफ्तर के बाहर हुए ग्रेनेड हमले से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार दविंदर सिंह वही व्यक्ति है जिसने चंडीगढ़ हमले में इस्तेमाल किए गए ग्रेनेड उपलब्ध करवाए थे। फिलहाल दविंदर सिंह पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलीजेंस शाखा की गिरफ्त में है। उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। हालांकि शुरुआती पूछताछ में अब तक बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए धमाके से उसका सीधा संबंध स्पष्ट नहीं हो पाया है। इसके बावजूद जांच एजेंसियां इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेकर कई पहलुओं पर काम कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को दविंदर सिंह के संपर्कों और गतिविधियों से जुड़े कई अहम इनपुट मिले हैं। इसी आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि वह पंजाब और चंडीगढ़ में सक्रिय कुछ संदिग्ध नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। जांच एजेंसियां पूछताछ में जुटी जांच एजेंसियों का मानना है कि चंडीगढ़ में भाजपा दफ्तर के बाहर ग्रेनेड फेंकने की घटना और हालिया धमाके के पीछे सक्रिय लोगों के बीच किसी न किसी स्तर पर संपर्क हो सकता है। इसी कड़ी में दविंदर सिंह से लगातार पूछताछ की जा रही है। उधर, मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी की टीम भी दोपहर बाद जालंधर पहुंचने वाली है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी स्थानीय पुलिस और काउंटर इंटेलीजेंस अधिकारियों के साथ मिलकर पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। टीम दविंदर सिंह से भी पूछताछ कर सकती है। पंजाब में हाई अलर्ट जारी बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए धमाके के बाद पंजाब में सुरक्षा एजेंसियां पहले ही सतर्क हैं। हाल के दिनों में राज्य में धमकियों, ग्रेनेड हमलों और संदिग्ध गतिविधियों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में जांच एजेंसियां अब इन मामलों के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच कई स्तरों पर जारी है और हर पहलू को ध्यान में रखकर पूछताछ की जा रही है। दविंदर सिंह के मोबाइल संपर्क, आवाजाही और अन्य संदिग्ध लोगों से संबंधों की भी जांच की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में पूछताछ के दौरान कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले में बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही हैं।

कैंटीन से किराना दुकानों तक छापा, खाद्य विभाग ने पकड़ा एक्सपायरी सामान और गड़बड़ियों का जाल

खैरागढ़. जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे सघन निरीक्षण अभियान के दौरान व्यापक कार्रवाई देखने को मिली, जिससे अस्पताल कैंटीन संचालकों से लेकर किराना दुकानदारों तक हड़कंप मच गया। “सही दवा-शुद्ध आहार, यही छत्तीसगढ़ का आधार” अभियान के तहत यह जांच अभियान चलाया गया। अस्पताल कैंटीनों में मिली खामियां, सुधार के निर्देश बता दें कि अभिहित अधिकारी सिद्धार्थ पांडे के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा दल ने सिविल अस्पताल खैरागढ़ और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुईखदान की कैंटीनों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान महिला समूहों द्वारा संचालित किचन और कैंटीनों की साफ-सफाई, खाद्य भंडारण और सुरक्षा मानकों की गहन जांच की गई। निरीक्षण में कई स्थानों पर व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं पाई गईं, जिसके बाद टीम ने तत्काल सुधार के सख्त निर्देश दिए। मावा केक का सैंपल लैब जांच के लिए भेजा गया कार्रवाई के दौरान छुईखदान स्थित मेसर्स कृष्णा बेकर्स से मावा केक का सर्विलांस सैंपल लिया गया। इस नमूने को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक्सपायरी सामान नष्ट, दुकानदारों को चेतावनी निरीक्षण के दौरान बाजार में बिक रहे एक्सपायरी कोल्ड ड्रिंक और कुरकुरे भी पाए गए, जिन्हें मौके पर ही नष्ट कर दिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि एक्सपायरी खाद्य पदार्थों का विक्रय या भंडारण पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। किराना दुकानों पर भी हुई जांच खाद्य सुरक्षा दल ने कई किराना दुकानों का निरीक्षण कर दुकानदारों को खाद्य अनुज्ञप्ति और पंजीयन अपडेट रखने, स्वच्छता बनाए रखने और एक्सपायरी सामान हटाने के निर्देश दिए। आगे भी जारी रहेगा अभियान विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में जिलेभर में इसी तरह की औचक कार्रवाई जारी रहेगी। खाद्य सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर निगरानी तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है, ताकि आम लोगों को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।

सिटाडेल सीजन 2’ ने ओटीटी पर मचाया धमाल, प्रियंका चोपड़ा की दमदार वापसी

प्रियंका चोपड़ा की पॉपुलर हॉलीवुड सीरीज 'सिटाडेल' का दूसरा सीजन रिलीज हो चुका है। इस दिल दहलाने देने वाली जासूसी थ्रिलर में प्रियंका ने एक बार फिर एजेंट नादिया सिंह बनकर लौटी हैं, जो इंसानियत को बचाने के मिशन पर निकली हैं। हालांकि, इस बार एक नई टीम एक नए खतरनाक मिशन पर दिखी। 'सिटाडेल सीजन 2' 6 मई को ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर प्रीमियर हुई थी। इसके सात एपिसोड हैं। 'सिटाडेल सीजन 2' देखने के बाद दर्शक इसके मुरीद हो गए और प्रियंका चोपड़ा की तारीफ कर रहे हैं। हालांकि, कुछ को यह पसंद नहीं आई और इसे पहले सीजन की तुलना में कमजोर बताया। वहीं कुछ ने, 'सिटाडेल 2' की कहानी भी तारीफ की और बताया कि कौन सा एपिसोड सबसे ज्यादा पसंद आया। 'सिटाडेल सीजन 2' की कहानी 'सिटाडेल 2' में मेसन केन, नादिया सिंह, बर्नार्ड ऑर्लिक और मेसन केन दमदार जासूस हैं जो एक स्पाई एजेंसी का हिस्सा हैं, पर उसी एजेंसी को Manticore नाम का एक नेटवर्क बर्बाद कर देता है। लेकिन एक नया खतरा सामने आता है तो तीनों फिर एक होकर इसका सामना करने के लिए तैयार हो जाते हैं। लेकिन इस बार उन्हें एक नई टीम बनानी होगी। पहले सीजन में एक भयावह घटना के बाद नादियै और मेसन केन अपनी याददाश्त खो बैठे थे, पर दूसरे सीजन यानी 'सिटाडेल 2' में वो अपने अतीत को याद करने की कोशिश करते हैं औऱ नए खूंखार दुश्मनों से लड़ने के लिए कमर कसते हैं।  

गर्मियों में ग्लोइंग स्किन के लिए खीरे का फेस मास्क, घर पर बनाएं नेचुरल उपाय

गर्मियों के मौसम में स्किन का खास ख्याल रखना जरूरी होता है. इस मौसम में तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण स्किन डल और बेजान नजर आने लगती है. लेकिन अच्छी बात यह है कि किचन में मौजूद कुछ चीजों से आप अपनी स्किन की देखभाल आसानी से कर सकते हैं. खीरे से बना नेचुरल फेस मास्क ऐसा ही एक आसान और असरदार उपाय है जो स्किन से जुड़ी समस्याओं को दूर कर ग्लोइंग स्किन पाने में मदद करता है. यह फेस मास्क त्वचा को सॉफ्ट, फ्रेश और हाइड्रेटेड बनाता है. खास बात यह है कि इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और इसमें इस्तेमाल होने वाली चीजें भी पूरी तरह नेचुरल होती हैं. आइए जानते हैं कि घर पर खीरे से फेस मास्क कैसे बनाया जा सकता है और इसे बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है. इंग्रेडिएंट्स (ingredients) 1 खीरा 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल 1 चम्मच शहद खीरे से फेस मास्क कैसे बनाएं?     खीरे से फेस मास्क बनाने के लिए सबसे पहले ताजे खीरे को अच्छी तरह धो लें.     इसके बाद खीरे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें.     अब इन टुकड़ों को मिक्सी में डालकर स्मूद पेस्ट बना लें.     तैयार पेस्ट को एक साफ बाउल में निकाल लें.     इसमें एलोवेरा जेल और शहद डालें और सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाकर स्मूद पेस्ट बना लें.     इस तरह से आपका खीरे से बना होममेड फेस मास्क इस्तेमाल के लिए तैयार है. खीरे से बने फेस मास्क को लगाने का सही तरीका सबसे पहले चेहरे को फेस वॉश से अच्छे से धो लें. फिर चेहरा जब सूख जाएं तो हल्के हाथों या ब्रश से तैयार मास्क को पूरे चेहरे और गर्दन पर लगाएं. मास्क को 15-20 मिनट तक चेहरे पर रहने दें फिर ठंडे पानी से धो लें. बेहतर रिजल्ट के लिए इसे हफ्ते में कम से कम 2 बार जरूर लगाएं. वैसे तो खीरे से बना यह फेस मास्क स्किन के लिए काफी हेल्दी होता है. लेकिन आपकी स्किन बहुत सेंसिटिव है तो पहली बार चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर कर लें.

पहाड़ी और दूरस्थ कोरवा बस्तियों में अब नहीं होगी पानी की किल्लत, CM साय के निर्देश पर शुरू हुई बड़ी पहल

अम्बिकापुर. जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब इन क्षेत्रों में कुल 113 हैंडपंप एवं बोरवेल की खुदाई की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को पारंपरिक स्रोतों से पानी लाने की मजबूरी से राहत मिलेगी। विगत दिनों मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले में पेयजल समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं होना पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि शासन की योजनाओं खासकर बुनियादी जरूरतों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना यह सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी क्रम में सरगुजा कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास अध्यक्ष अजीत वसंत ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को एक माह के भीतर सभी 113 हैंडपंप एवं बोरवेल कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने बताया कि स्थलीय सर्वे पहले ही कर लिया गया है जिले के लुण्ड्रा में 34, बतौली में 06, लखनपुर में 22, अम्बिकापुर में 11, सीतापुर में 16, मैनपाट में 20 तथा उदयपुर में 04 इस तरह इन विकासखण्डों में डीएमएफ मद से 113 हैंडपंप एवं बोरवेल खनन की जाएगी। 24 अप्रैल को आयोजित जिला खनिज संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक में पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज, सहित अन्य सदस्यों की सहमति से यह कार्य की स्वीकृति दी गई है। कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायत सीईओ को हैंडपंप खनन, बोरवेल खनन कर दीर्घकालिक समाधान के लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं तथा सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से एक माह में पूर्ण किए जाएं, ताकि सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में स्थायी पेयजल सुविधा सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री साय के इस संवेदनशील पहल से जिले के दूरस्थ व वनांचल क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही पेयजल की समस्या से सैकड़ों गांवों के हजारों निवासियों को निश्चित ही राहत मिलेगी।

विजय की सरकार तो बनेगी, मगर चलाने में RBI की मदद जरूरी, समझिए कैसे

चेन्नई  थलपति विजय की पार्टी टीवीके तमिलनाडु में सरकार बनाने की स्थिति में है. ऐसे में अब विजय ने चुनावी घोषणापत्र में जो वादे किए थे, उसपर निगाहें टिक गई हैं. इनमें से सबसे अहम है सोना बांटने वाला वादा. थलापति विजय ने अपने चुनावी घोषणापत्र में हर नवजात बच्‍चे को सोने की अंगुठी और दुल्‍हनों को 8 ग्राम सोना और सिल्‍क की साड़ी देने का वादा किया था. अब विजय प्रदेश में सरकार बनाने की रेस में सबसे आगे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि थलापति विजय इतनी बड़ी मात्रा में सोना कहां से लाएंगे. बता दें कि तमिलनाडु में हर साल लाखों बच्‍चे जन्‍म लेते हैं और लाखों की तादाद में शादियां होती हैं. यदि गरीबी रेखा से नीचे वाले सिद्धांत पर भी चला जाए तो भी दोनों को मिलाकर लाखों की तादाद में लाभार्थी होंगे. इससे न केवल सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा, बल्कि विजय को इसके लिए आरबीआई से भी मदद लेनी पड़ सकती है।  थलापति विजय ने सरकार बनने पर जिन कल्‍याणकारी योजनाओं को लागू करने का वादा किया है, यदि उसपर अमल किया गया तो तमिलनाडु सरकार का वेलफेयर बिल (कल्‍याणकारी योजनाओं पर होने वाला खर्च) 52 फीसद तक बढ़ सकता है. इस मद में फिलहाल 65000 करोड़ रुपया खर्च होता है जो बढ़कर 1 लाख करोड़ के आसपास पहुंच जाएगा. अब सोना देने के वादे के आर्थिक पहलू पर बात करते हैं. दरअसल, TVK ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग देने के लिए एक अहम वादा किया है. पार्टी ने सालाना 5 लाख रुपये से कम आय वाले परिवारों की दुल्हनों को 8 ग्राम सोना और एक सिल्क साड़ी देने का आश्वासन दिया है. मौजूदा 22 कैरेट सोने की कीमत करीब 14,000 रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से केवल सोने की कीमत ही लगभग 1.12 लाख रुपये प्रति लाभार्थी बैठती है. तमिलनाडु में हर साल 4 से 5 लाख शादियां होती हैं. एक आकलन के अनुसार, 60 फीसद परिवार विजय की स्‍कीम के तहत फिट बैठते हैं. ऐसे में हर साल लगभग 2.7 लाख दुल्हन सोने की हकदार हो सकती हैं. इस तरह सिर्फ दुल्‍हनों को 8 ग्राम सोना देने में 3000 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का खर्च आने का अनुमान है।  नवजात को भी गोल्‍ड रिंग देने का वादा इतना ही नहीं, थलापति विजय ने प्रदेश में पैदा होने वाले हर नवजात को गोल्‍ड रिंग देने का वादा किया है. 2011 की जनगणना के अनुसार, तमिलनाडु की आबादी करीब 7.21 करोड़ है. राज्य में जन्म दर फिलहाल देश में सबसे कम चल है. साल 2025 में करीब 7.8 लाख बच्चों ने जन्म लिया. विजय की योजना के मुताबिक, हर नवजात को सोने की अंगूठी दी जाएगी. अब अगर हम मान लें कि इसमें से 60 प्रतिशत बच्चे उन परिवारों में पैदा होते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, तो भी हर साल करीब 4.7 लाख बच्चों को यह अंगूठी देनी होगी. भले ही एक छोटी अंगूठी की कीमत करीब 5,000 रुपये के आसपास हो, लेकिन जब इसे लाखों बच्चों से गुणा करते हैं, तो यह अकेले 235 करोड़ रुपये का सालाना खर्च बन जाता है।  BI से लेनी पड़ सकती है अनुमति दोनों गोल्‍ड स्‍कीम को मिला दिया जाए तो थलापति विजय को बड़ी मात्रा में सोने की जरूरत होगी. बता दें कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना खरीदने के लिए कुछ नियम कायदे हैं. यदि दुल्‍हनों को दिए जाने वाले सोने की बात की जाए तो नई सरकार को 8 ग्राम के हिसाब से 2160000 ग्राम यानी हर साल 2160 किलो गोल्‍ड की जरूरत होगी. बच्‍चों को गोल्‍ड रिंग देने की स्‍कीम में मात्रा का उल्‍लेख नहीं है. यदि उसे भी जोड़ दिया जाए तो सैकड़ों किलो का और ईजाफा होगा. ऐसे में थलापति विजय आरबीआई की मदद के बिना इस वादे को पूरा नहीं कर पाएंगे।  वेलफेयर बिल पहुंच जाएगा सातवें आसमान पर फिल्म स्टार से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की शानदार चुनावी जीत के बाद अब घोषणापत्र में किए गए बड़े वादों पर चर्चा तेज हो गई है. पार्टी ने महिलाओं के मुखिया वाले परिवारों को हर महीने ₹2,500 देने, हर परिवार को साल में छह मुफ्त एलपीजी सिलेंडर और 10 लाख बेरोजगार ग्रेजुएट्स को ₹4,000 मासिक भत्ता देने जैसे कई बड़े ऐलान किए हैं. ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, अनुमान है कि इन योजनाओं पर राज्य सरकार का सालाना खर्च करीब ₹1 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है. यह राशि 2025-26 में DMK सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं और सब्सिडी पर खर्च किए गए ₹65,000 करोड़ से लगभग 52% अधिक है. अगर राज्य के कुल राजस्व से तुलना करें, तो यह खर्च तमिलनाडु के 2025-26 के बजट में अनुमानित ₹3.31 लाख करोड़ के राजस्व का करीब एक तिहाई होगा। 

ममता के इस्तीफे की घोषणा नहीं, बंगाल में असामान्य स्थिति अगले दो दिन

कलकत्ता पश्चिम बंगाल अगले कुछ घंटों के लिए एक गजब संवैधानिक संकट की ओर जा रहा है. सीएम ममता बनर्जी चुनाव हार चुकी हैं, लेकिन उन्होंने इस्तीफा देने से दो-दो बार इनकार कर दिया है. पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल आज यानी कि 7 मई को खत्म हो रहा है. अगर ममता बनर्जी आज 12 बजे रात तक इस्तीफा नहीं देती हैं तो 8 मई की रात 12 बजे से लेकर राज्य में नई सरकार बनने तक पश्चिम बंगाल की कमान किसके हाथ में होगी. पश्चिम बंगाल को संभालेगा कौन? बीजेपी ने कहा है कि उसका नया सीएम 9 मई को शपथ लेगा. ऐसी स्थिति में बंगाल में क्या होगा. 8 से 9 मई तक पश्चिम बंगाल की संवैधानिक स्थिति क्या होगी?  बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में ये अहम सवाल बनकर उभरा है।   संविधान का अनुच्छेद-172 राज्य विधानसभाओं का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित करता है. पहली बैठक की तारीख से ये गणना शुरू होती है. 5 वर्ष पूरे होते ही विधानसभा का स्वतः विघटन (automatic dissolution) हो जाता है. इसके लिए किसी आदेश की जरूरत नहीं. इस लिहाज से गुरुवार (7 मई) रात 12 बजते ही पुरानी विधानसभा अपने आप भंग हो जाएगी, इसके साथ ही सीएम, मंत्री, विधायक सभी का दर्जा खत्म हो जाएगा और इनका वैधानिक अधिकार समाप्त हो जाएगा।  अब राज्यपाल आर एन रवि क्या करेंगे? संविधान का अनुच्छेद-164 कहता है कि मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल राज्यपाल के प्रसाद पर्यंत ही अपने पद पर बने रह सकते हैं. चुनाव हारने के बाद बहुमत खोने पर राज्यपाल उन्हें बर्खास्त कर सकता है और बहुमत वाली पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकता है।  अगर सत्ता गंवाने वाला CM इस्तीफा नहीं देते हैं तो राज्यपाल को अधिकार है कि वह मंत्रिपरिषद को बर्खास्त कर दे।  सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल कहते हैं, "चूंकि ममता ने इस्तीफा नहीं दिया है, इसलिए उनका कार्यकाल 7 मई को अपने आप खत्म हो जाएगा।  गवर्नर को यह फैसला लेना होगा कि क्या वे उस परंपरा का पालन करेंगे जिसके तहत वे ममता को अगले CM के शपथ लेने तक पद पर बने रहने को कह सकते हैं।  पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल कहते हैं कि हो सकता है कि राज्यपाल 9 तारीख को नई सरकार के शपथ लेने तक एक दिन के लिए कोई व्यवस्था कर दें. यह एक अभूतपूर्व स्थिति है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ. लेकिन रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि यथास्थिति कायम रखा जाएगा।  ECI ने केंद्रीय बल तैनात कर दिए हैं और गवर्नर ने आदेश जारी किया है कि कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।  कानूनी तौर पर इसका कोई उदाहरण नहीं है लेकिन गवर्नर के पास अंतरिम व्यवस्था करने की शक्ति है. अब तक की परंपरा यही रही है कि वे मौजूदा CM से तब तक पद पर बने रहने को कहते हैं, जब तक कि अगला व्यक्ति शपथ न ले ले।  चुनाव आयोग के अनुसार मौजूदा बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 8 मई 2021 को शुरू हुआ था और 7 मई को समाप्त हो रहा है. इसके बाद, राज्यपाल को नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी. जिसका मतलब है कि नए विधायकों को शपथ लेनी होगी और एक नई सरकार का चुनाव करना होगा।  अगर बनर्जी सचमुच अपने फैसले पर कायम रहती हैं और कोई गतिरोध पैदा होता है तो यह एक अभूतपूर्व घटना होगी।  मैं इस्तीफा नहीं दूंगी-ममता ममता बनर्जी ने 5 मई 2026 को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि वे इस्तीफा नहीं देंगी, उन्होंने कहा, "मैं इस्तीफा नहीं दूंगी, इसका सवाल ही नहीं उठता, मैं हारी नहीं हूं, मैं राजभवन नहीं जाऊंगी।  ममता ने कहा हम चुनाव नहीं हारे हैं, हमें हराया गया है. चुनाव आयोग के माध्यम से वे हमें हरा सकते हैं, लेकिन नैतिक रूप से हमने चुनाव जीता है।  6 मई 2026 को ममता बनर्जी ने TMC के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में अपने इस्तीफे पर दोबारा सख्त रुख दोहराया. उन्होंने कहा, "मैं इस्तीफा नहीं दूंगी.चाहे वे मुझे बर्खास्त कर दें. मैं चाहती हूं कि यह काला दिन हो।