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ड्राइवरलेस ट्रेनों के साथ यूपी मेट्रो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मेंटेनेंस और ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम

लखनऊ यूपी में मेट्रो का नया ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिहाजा और उन्नत तकनीक से युक्त होगा। सफर के दौरान समस्या आने पर यात्री कोच में लगे इंटरकॉम से जब ऑपरेशन कंट्रोल और सिक्योरिटी कंट्रोल रूम से संपर्क करेगा तो कोच की लाइव फुटेज इन दोनों ही स्थानों पर तैनात कर्मचारी देख सकेंगे। ऐसे में उस तक तुरंत मदद पहुंचाने में आसानी होगी। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (फेज-1 बी) के लिए 15 अत्याधुनिक ट्रेन सेट और सिग्नलिंग सिस्टम के डिजाइन और निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता हुए सभी कोचों में पैसेंजर इमरजेंसी इंटरकॉम (पीईआई बटन) की सुविधा हलगी। इस बटन को दबाते ही यात्री सीधे ट्रेन ऑपरेटर से संपर्क कर सकेंगे और अपनी समस्या बता सकेंगे। जिस कोच से कॉल किया जाएगा उसकी लाइव फुटेज ड्राइवर केबिन, ऑपरेशन कंट्रोल रूम और सिक्योरिटी कंट्रोल रूम में दिखाई देगी। ट्रेन के अगले स्टेशन पर पहुंचते ही सुरक्षा टीम तुरंत मदद के लिए मौजूद रहेगी। एआई आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस … मेट्रो ट्रेन के ट्रेन कंट्रोल एंड मैनेजमेंट सिस्टम (टीसीएमएस टीजीसी) को कम्प्यूटरीकृत मेंटेनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएमएस) से जोड़ा जाएगा। इस व्यवस्था में सर्वर सीधे ट्रेनों से जुड़ा रहेगा, जिससे ट्रेनों के डेटा की ऑनलाइन मॉनिटरिंग और डाउनलोडिंग होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से प्रिवेंटिव और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस किया जाएगा। इसमें किसी भी फाल्ट का पता चलते ही स्वतः जॉब कार्ड तैयार होने की सुविधा भी होगी। यूपीएमआरसी के एमडी, सुशील कुमार ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर चलने वाली ट्रेनें सुरक्षा और ऊर्जा बचत में विश्वसनीय और बेहतर होंगी। ड्राइवर लेस ट्रेन का संचालन होगा संभव ट्रेनें अनअटेंडेड ट्रेन ऑपरेशन (यूटीओ) ) मोड पर संचालित होंगी, जिससे उनका संचालन पूरी तरह "ड्राइवर लेस" होगा। इस प्रणाली के तहत ट्रेनें कम्युनिकेशन-बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) जैसी उन्नत तकनीक की मदद से स्वतः संचालित होंगी। गति भी नियंत्रित करेंगी। साथ ही ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) प्रणाली से सुरक्षित दूरी बनाते हुए चलेंगी। किसी भी तकनीकि या अन्य समस्या की स्थिति में स्वतः ब्रेक लग जाएगा। ट्रेनों में सीओटू सेंसर आधारित एचवीएसी सिस्टम लगाया जाएगा। यह सिस्टम से एसी की कूलिंग अपने आप एडजस्ट करेगा। इससे यात्रियों को बेहतर आराम मिलेगा और ऊर्जा की बचत भी होगी। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (चारबाग से बसंतकुंज) पर बिना ड्राइवरों वाली ट्रेनें दौड़ेंगी। कंट्रोल सिस्टम से इनका संचालन होगा, जिससे इससे सुरक्षा और पुख्ता होगी। मेट्रो प्रशासन ने शुक्रवार को 15 ड्राइवरलेस ट्रेन सेट और सिग्ननलिंग सिस्टम के डिजाइन और निर्माण के लिए टेंडर जारी किया।

घर की अलमारियों का सही उपयोग और दिशा से जुड़ा वास्तु प्रभाव

अक्सर हम अपने घर में जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तरह की अलमारियां रखते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार इन अलमारियों का असर हमारी जिंदगी पर भी पड़ता है. अलमारियां सिर्फ सामान रखने की जगह नहीं होती हैं, बल्कि ये बचत, सुरक्षा और सुख-समृद्धि का प्रतीक भी मानी जाती हैं. माना जाता है कि घर की अलग-अलग अलमारियों का संबंध अलग-अलग ग्रहों से होता है. अगर इन्हें सही तरीके से रखा जाए और व्यवस्थित रखा जाए, तो जीवन में सुख, समृद्धि और स्थिरता बनी रहती है. 1. कपड़ों की अलमारी कपड़ों की अलमारी का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है. अगर यह अलमारी साफ और व्यवस्थित रहती है, तो घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है. – कपड़ों की अलमारी में कपड़े ही रखें. – इसमें रुपया-पैसा या गहने रखने से बचें, क्योंकि मान्यता है कि इससे धन टिकता नहीं है. – जरूरी दस्तावेज या महत्वपूर्ण कागज इसमें रखे जा सकते हैं. – अलमारी हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें. 2. रसोई की अलमारी रसोई की अलमारी का संबंध सूर्य ग्रह से माना जाता है. इसमें बर्तन, मसाले और रसोई का सामान रखा जाता है. – रसोई की अलमारी को हमेशा साफ रखें. – मसाले और अनाज अलग-अलग रखें. – कांच और धातु के बर्तन अलग रखने चाहिए. – कोशिश करें कि रसोई की अलमारी पूरी तरह बंद न हो, हल्के पारदर्शी दरवाजे वाली अलमारी बेहतर मानी जाती है. – महीने में कम से कम एक बार इसकी अच्छी तरह सफाई जरूर करें. मान्यता है कि अगर रसोई की अलमारी अस्त-व्यस्त रहती है, तो घर में तनाव और छोटी-छोटी परेशानियां बढ़ सकती हैं. 3. पैसे की अलमारी जिस अलमारी में पैसा, गहने और कीमती सामान रखा जाता है, उसका संबंध बृहस्पति ग्रह से माना जाता है. – धन की अलमारी घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है. – अलमारी का दरवाजा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर खुलना अच्छा माना जाता है. – धन की अलमारी का रंग काला नहीं होना चाहिए. – अलमारी पर लाल रंग का स्वस्तिक बनाना शुभ माना जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर घर की अलमारियां सही दिशा में और व्यवस्थित रखी जाएं, तो इससे घर में सुख, शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है.

घर में सुख-शांति और धन वृद्धि के लिए 9 शुभ पौधों का सही दिशा में चयन जरूरी

 भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर शांति की तलाश करते हैं.  इसी शांति की तलाश लिए कई लोग अपने घरों में कई सारे पौधे भी लगाते हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में वे यह भूल जाते हैं कि हर पौधा शुभ नहीं होता. वास्तु शास्त्र के अनुसार, प्रकृति में हर समस्या का समाधान है, बशर्ते आपका चुनाव सही हो. अक्सर हम बिना सोचे-समझे कोई भी पौधा घर के किसी भी कोने में रख देते हैं, जबकि वास्तु में दिशाओं का चयन ही सबसे महत्वपूर्ण है. गलत दिशा में रखा गया एक कीमती पौधा भी आपके जीवन में तनाव पैदा कर सकता है, वहीं सही दिशा में लगा एक छोटा सा पौधा आपकी बंद किस्मत के ताले खोल सकता है. अगर आप भी घर में सुख, शांति और धन की आवक बढ़ाना चाहते हैं, तो इन 9 पौधों को उनकी सही दिशा में जरूर लगाए. 1. तुलसी: हिंदू धर्म और वास्तु में तुलसी को हरिप्रिया कहा गया है. यह पौधा जिस घर के आंगन में हरा-भरा रहता है, वहां वास्तु दोष टिक नहीं पाता. इसे हमेशा उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखें.  यह न केवल ऑक्सीजन का भंडार है, बल्कि मानसिक शांति के लिए भी अनिवार्य है. 2. मनी प्लांट जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह शुक्र ग्रह से संबंधित है. वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, इसे घर के दक्षिण-पूर्व कोण (आग्नेय कोण) में लगाने से धन का ठहराव बढ़ता है.  ध्यान रहे, इसकी बेलें जमीन को नहीं छूनी चाहिए, उन्हें हमेशा ऊपर की ओर चढ़ाएं. 3. शमी: शनि देव और महादेव को प्रिय शमी का पौधा न्याय और विजय का प्रतीक है. इसे घर के मुख्य द्वार पर इस तरह लगाएं कि बाहर निकलते समय यह आपके दाहिने हाथ की ओर हो. यह व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है. 4. लकी बैंबू: फेंगशुई और वास्तु दोनों में बांस के पौधे को बेहद भाग्यशाली माना गया है. यह सकारात्मक ऊर्जा (Chi) को अपनी ओर खींचता है. इसे घर के लिविंग रूम के पूर्व या उत्तर-पूर्व कोने में रखने से सुख-समृद्धि और लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है. 5. अपराजिता: नीले फूलों वाली अपराजिता की बेल को साक्षात लक्ष्मी का रूप माना जाता है.  इसे उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाने से घर में बरकत बनी रहती है. इसके फूलों को शनिवार या शुक्रवार को विष्णु जी पर चढ़ाना भी अत्यंत शुभ है. 6. स्नेक प्लांट: आज के प्रदूषण भरे दौर में स्नेक प्लांट एक वरदान है. यह रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है. वास्तु के अनुसार, इसे घर के दक्षिण या पूर्व कोने में रखने से यह मानसिक तनाव और इलेक्ट्रॉनिक रेडिएशन को खत्म कर शांति का माहौल बनाता है. 8. जेड प्लांट: इसे फ्रेंडशिप ट्री भी कहा जाता है. छोटे गोल पत्तों वाला यह पौधा ऑफिस डेस्क (उत्तर दिशा) या घर के मुख्य प्रवेश द्वार के दाईं ओर रखना चाहिए. यह धन लाभ के नए अवसरों को आकर्षित करता है . 9. पीस लिली: अगर घर में तनाव रहता है, तो पीस लिली को लगाएं. यह पौधा आपसी कलह को खत्म कर प्रेम को बढ़ावा देता है. इसे पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना सबसे उत्तम है, खासकर बेडरूम में. पौधों को सिर्फ लगाना काफी नहीं है, उनकी देखभाल भी जरूरी है.  अगर कोई पौधा सूख जाए, तो उसे तुरंत हटा दें, क्योंकि मुरझाए पौधे तरक्की में बाधा बन सकते हैं.

बिहार सरकार में 26 मंत्रियों ने कार्यभार संभाला, विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने पर जोर

 पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि अपने-अपने विभाग को ठीक से समझें और योजनाओं की समीक्षा करें। साथ ही अपने-अपने विभाग में नयी योजनाओं की संभावनाओं को तलाशें और उसका प्रस्ताव तैयार करें। राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार के अगले ही दिन मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को लोक सेवा आवास, 1अणे मार्ग के लोक संवाद में सभी नवनियुक्ति मंत्रियों के साथ औपचारिक बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कई दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को यह भी कहा कि अपने विभाग की पूरी जानकारी रखें। किसी भी योजना की पूरी जानकारी लेने के बाद ही मीडिया में इससे संबंधित बायन दें। 26 मंत्रियों ने कामकाज संभाला नवगठित एनडीए सरकार में शपथ लेने के अगले ही दिन ज्यादातर मंत्रियों ने अपने-अपने महकमे का दायित्व संभाल लिया है। शुक्रवार को सुबह दस बजे से ही मंत्रियों के कामकाज संभालने का सिलसिला शुरू हो गया और यह शाम साढ़े छह बजे तक चला। इस दौरान 26 मंत्रियों ने विभागों में जाकर विधिवत कामकाज शुरू कर दिया। दायित्व संभालने वाले मंत्रियों ने विकास कार्यों में तेजी लाने तथा विभागीय योजनाओं को लाभुक तक पहुंचाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। मुख्यमंत्री समेत दोनों उप मुख्यमंत्रियों ने 15 अप्रैल को ही अपना दायित्व संभाल लिया था। गुरुवार को हुए शपथ ग्रहण समारोह में 32 और मंत्री मंत्रिपरिषद का हिस्सा बने। 26 मंत्रियों के दायित्व संभालने के बाद शेष छह मंत्री शनिवार से लेकर मंगलवार तक अपने-अपने विभागों में योगदान करेंगे। इनमें कृषि मंत्री विजय सिन्हा, भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह, योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा, लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन, पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद और पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेन्द्र शामिल हैं। अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी इलाज की सुविधा : निशांत जदयू नेता निशांत ने कहा कि अंतिम व्यक्ति तक इलाज पहुंचाना उनकी प्राथमिकता होगी। मुख्यमंत्री ने उनको जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसको पूरी ईमानदारी के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके पिता नीतीश कुमार ने पिछले 20 वर्षों में राज्य में जो भी ईमानदारीपूर्वक विकास कार्य किए, उसे भविष्य में भी जारी रखा जाएगा। वे शुक्रवार को विकास भवन स्थित स्वास्थ्य विभाग में मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। निशांत ने कहा कि शहर से लेकर गांव तक बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद को उच्च कोटि की स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराई जायेगी। गांवों और शहरों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं के अंतर को खत्म किया जायेगा। साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में कराये जाने वाले विकास कार्यों में पूरी ईमानदारी और संवेदना बरती जाएगी। राज्य की अच्छी छवि बनाने को प्रभावी कदम उठाएं : श्रवण सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने कहा है कि राज्य के बाहर भी बिहार की सकारात्मक छवि को मजबूत बनाना है। वे शुक्रवार को विभाग का पदभार ग्रहण करने के बाद पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि बिहार के बाहर भी राज्य की अच्छी छवि बनाए रखने के लिए विस्तृत कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, रेडियो और सोशल मीडियाका समन्वित उपयोग किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी सरकार की प्रमुख योजनाओं अंतिम छोर तक पहुंचाई जाए। कहा कि विभाग में मानव संसाधन की कमी को तत्काल पूरा किया जाए, जिससे बिना किसी बाधा और देरी के सभी काम पूरा हो सके। सूचना प्रसार को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नवीन तकनीकों और रचनात्मक तरीकों का इस्तेमाल किया जाए।

सभी जिलों में पर्यटन और रोजगार की संभावनाएं तलाशकर युवाओं को अवसर देने पर जोर

पटना बिहार पर्यटन विभाग हर साल चार लाख लोगों को रोजगार देगा। इस संबंध में विभाग ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत अगले पांच वर्षों का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। शुक्रवार को विभाग के मंत्री केदार गुप्ता ने अपना कार्यभार संभाल लिया। उन्होंने विभाग की ओर से पिछली सरकार द्वारा तय की गई योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने को कहा। इसके अलावा लंबित पड़ी योजनाओं पर फिर से जल्द काम शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। विभाग अपनी नयी योजना में पांच वर्षों में 20 लाख लोगों को रोजगार देगा। वर्ष 2030 तक विभाग पूरे प्रदेश में इतने युवाओं को रोजगार से जोड़ेगा। इससे बड़ी संख्या में अप्रत्यक्ष रोजगार का भी सृजन होगा। राज्य सरकार ने सात निश्चय तीन के तहत एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसमें सभी विभागों की हिस्सेदारी तय की जा रही है। सबसे बड़ी हिस्सेदारी उद्योग विभाग के साथ पर्यटन विभाग को ही मिला है। सरकार के लक्ष्य का 20 फीसदी केवल पर्यटन विभाग ही पूरा करेगा। ऐसे में रोजगार देने के लिए पर्यटन विभाग आगे आया है। उसने आगामी पांच वर्षों में 20 लाख रोजगार देने के लक्ष्य को हर वर्ष के लिए अलग-अलग निर्धारित किया है। पर्यटन विभाग अगले पांच वर्षों में सभी जिलों में रोजगार की संभावनाओं की तलाश करेगा और फिर युवाओं को उनकी पात्रता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराएगा। युवा जिस कौशल के होंगे, उन्हें उसी में रोजगार मिलेगा। इसके लिए सभी जिलों के अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं। उन्हें अपने-अपने जिलों में रोजगार की संभावनाओं के सेक्टर की पहचान करने और फिर उनमें युवाओं के लिए अवसर की उपलब्धता की पूरी जानकारी देने को कहा गया है। सरकार हर संभावनाओं को युवाओं के लिए सुलभ बनाएगी विशेषज्ञों के अनुसार सूबे में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और इसका अबतक ढंग से विकास नहीं हो पाया है। इस समय पर्यटन के क्षेत्र में काफी कम रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। यही नहीं बहुत कम संख्या में लोगों को रोजगार मिला हुआ है। अधिसंख्य रोजगार असंगठित क्षेत्र में है और वे भी अनिश्चितता वाले हैं। इसलिए राज्य सरकार ने पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार के हर संभव संभावनाओं की तलाश कर उन्हें युवाओं के लिए सुलभ बनाएगी। धार्मिक पयर्टन का होगा विकास सूबे के पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने शुक्रवार को विस पहुंच अपने विभाग का कार्यभार संभाला। उन्होंने विभाग के प्रधान सचिव व अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर विभाग के कामकाज की जानकारी ली। मंत्री ने बताया कि उनका लक्ष्य अगले पांच सालों में प्रदेश के उन पर्यटन क्षेत्रों का विकास करना होगा, जिनकी चर्चा बहुत कम होती है। खासकर धार्मिक पर्यटन को लेकर प्रदेश में अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में उनकी प्राथमिकता पर्यटकीय महत्व वाले धार्मिक स्थलों की पहचान करना है, ताकि विभागीय अधिकारियों से विमर्श कर उनके विकास के लिए किए जाने वाले कामों की सूची तैयार की जा सके। इसके लिए वे जल्द ही एक बैठक अधिकारियों संग बुलाकर इस योजना पर काम शुरू करेंगे। इसके अलावा प्रदेश में प्राकृतिक दृश्यों वाले स्थानों की भरमार है। उनको भी विकसित कर पर्यटन के मानचित्र पर स्थान दिलाना उनकी प्राथमिकता सूची में शामिल है।

बाजार में मिलने वाले घी की शुद्धता पर बढ़ी चिंता, मिलावट से सेहत को खतरा

 भारत में घी सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं बल्कि रोजमर्रा की डाइट का अहम हिस्सा है. लेकिन हाल में आई कुछ रिपोर्ट्स में कुछ देसी घी ब्रांड्स में मिलावट सामने आने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है. ऐसे में अक्सर मन में सवाल आता है कि बाजार में मिलने वाला घी कितना शुद्ध है और इसे पहचानने का सही तरीका क्या है? एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुछ ऐसे घरेलू तरीके भी हैं जिससे आप असली और नकली घी में फर्क कर सकते हैं. तो आइए उन तरीकों के बारे में जान लीजिए. शुद्ध घी की पहचान क्यों जरूरी? हेल्थलाइन के मुताबिक, मिलावटी या नकली घी में अक्सर वेजिटेबल ऑयल या सस्ते फैट मिलाए जाते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. लंबे समय तक ऐसे घी का सेवन दिल और पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है. इसके अलावा शुद्ध घी में हेल्दी फैट के साथ-साथ जरूरी विटामिन भी होते हैं लेकिन मिलावट कर देने पर इनके फायदे कम हो जाते हैं और नुकसान बढ़ जाते हैं. स्मेल और स्वाद (Smell and Taste) असली घी की खुशबू हल्की और प्राकृतिक होती है जबकि मिलावटी घी में तेज या अजीब सी गंध आ सकती है. स्वाद भी शुद्ध घी का हल्का मीठा और स्मूद होता है. अगर घी का स्वाद कड़वा या अटपटा लगे तो उसमें मिलावट की संभावना हो सकती है. हाथ पर पिघल जाता है (It melts on the hand) एक्सपर्ट्स के मुताबिक, असली घी की कुछ बूंदें हथेली पर रखकर रगड़ें. शुद्ध घी शरीर की गर्मी से तुरंत पिघल जाता है जबकि मिलावटी घी को पिघलने में समय लगता है या फिर वह चिपचिपा महसूस होता है. आयोडीन टेस्ट (Iodine Test) अगर घी में स्टाच या अन्य मिलावट का शक हो तो आयोडीन टेस्ट किया जा सकता है. घी में थोड़ा आयोडीन डालने पर अगर रंग नीला पड़ता है तो उसमें मिलावट मौजूद हो सकती है. यह तरीका घर पर भी आसानी से किया जा सकता है. जमने के तरीके से भी पहचान (Freezing method) घी को फ्रिज में रखकर देखें. शुद्ध घी समान रूप से जमता है, जबकि मिलावटी घी अलग-अलग लेयर में या दानेदार तरीके से जम सकता है. यह संकेत देता है कि उसमें अन्य तेल या फैट मिलाए गए हैं.

मेष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों के लिए करियर, धन और परिवार में सुधार के योग

जुलाई का महीना ज्योतिषीय नजरिए से बहुत ही खास रहने वाला है, क्योंकि इस महीने एक शुभ योग बनने जा रहा है, जिसे नवपंचम दृष्टि योग कहा जाता है. यह योग तब बनता है जब ग्रह एक-दूसरे से विशेष कोण पर आकर शुभ दृष्टि डालते हैं. इस बार यह योग गुरु ग्रह और वरुण ग्रह के बीच बनने वाला है. 20 जुलाई 2026 को यह योग प्रभावी होगा, जिसका असर कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है. करियर, धन, परिवार और मानसिक स्थिति, हर क्षेत्र में इसके अच्छे प्रभाव देखने को मिल सकते हैं. कब बनेगा नवपंचम दृष्टि योग? द्रिक पंचांग के अनुसार, जब दो ग्रह लगभग 120 डिग्री की दूरी पर होते हैं, तब नवपंचम दृष्टि योग बनता है. 20 जुलाई 2026 को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से यह योग सक्रिय होगा और उसी समय से इसका प्रभाव राशियों पर पड़ना शुरू हो जाएगा. मेष राशि मेष राशि वालों के लिए यह समय कामकाज में सुधार लेकर आ सकता है. यदि आप धैर्य और समझदारी से अपने कार्य करेंगे, तो लाभ मिलने की पूरी संभावना है. परिवार के साथ समय बिताने से रिश्ते मजबूत होंगे. घर का माहौल भी खुशहाल रहेगा. सिंह राशि सिंह राशि के जातकों को इस दौरान साहसिक निर्णयों का लाभ मिल सकता है. व्यापार में नए अवसर मिलेंगे. मुनाफा बढ़ सकता है. संपत्ति में निवेश करने के भी योग बन रहे हैं, जिससे भविष्य में अच्छा लाभ मिल सकता है. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों के लिए यह योग राहत देने वाला साबित हो सकता है. जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है. पुराने विवाद सुलझ सकते हैं. आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. परिवार में भी सुख-शांति बनी रहेगी. कुंभ राशि कुंभ राशि के लोगों को करियर और व्यापार में अच्छी प्रगति देखने को मिल सकती है. इस दौरान आप नई योजनाएं बना सकते हैं. संपत्ति खरीदने का विचार भी कर सकते हैं. परिवार में खुशी का माहौल बना रहेगा. मानसिक तनाव कम होगा. क्यों खास है यह योग? नवपंचम दृष्टि योग को शुभ फल देने वाला माना जाता है. यह योग जीवन में संतुलन, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है. खासतौर पर जिन राशियों पर इसका प्रभाव पड़ता है, उनके लिए यह समय तरक्की और राहत का संकेत देता है.

सुशासन तिहार 2026: सिमड़ा शिविर में 4 हितग्राहियों को मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी

सुशासन तिहार 2026: सिमड़ा शिविर में 4 हितग्राहियों को मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की खुशियों की चाबी पक्के घर का सपना हुआ साकार, हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जताया आभार रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेशभर में आयोजित “सुशासन तिहार 2026” के तहत आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही पात्र हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी मौके पर प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में 4 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित आवासों की चाबी सौंपी गई। लाभान्वित हितग्राहियों में ग्राम सिमड़ा की जेरोम, मयूरचुंदी के बीरबल यादव, करडेगा के टूना राम तथा जगदीश यादव शामिल हैं। पक्के मकान की चाबी पाकर सभी हितग्राहियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें बारिश, धूप और अन्य कठिनाइयों से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से उनका सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का सपना साकार हुआ है और अब वे अपने परिवार के साथ नए घर में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करेंगे। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

चुनावी शोर शांत, सियासी हलचल तेज: पंचकूला में हार-जीत के समीकरण बनने शुरू

पंचकूला. नगर निगम चुनाव के लिए शुक्रवार शाम चुनाव प्रचार थम गया। प्रचार के अंतिम दिन सभी राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंकते हुए रोड शो, जनसभाएं और डोर-टू-डोर संपर्क अभियान चलाए। चुनाव प्रचार समाप्त होने से पहले शहर का राजनीतिक माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में रंगा नजर आया। अब उम्मीदवारों और उनके समर्थकों का पूरा ध्यान मतदान प्रतिशत बढ़ाने और मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने पर रहेगा। इस बार नगर निगम चुनाव में सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है। भाजपा ने अपने प्रचार अभियान में स्टार प्रचारकों को उतारकर पूरी ताकत दिखाई, जबकि कांग्रेस प्रचार के स्तर पर अपेक्षाकृत कमजोर नजर आई। कांग्रेस के कई बड़े नेता मीडिया से रूबरू तो हुए, लेकिन जनसभाओं और जमीनी प्रचार में उनकी सक्रियता कम दिखाई दी। इसके बावजूद कांग्रेस खेमे में उत्साह बना हुआ है। अंतिम फैसला जनता तथा भगवान पर छोड़ा कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी सुधा भारद्वाज के पति और पार्टी नेता संजीव भारद्वाज ने दावा किया कि इस बार चुनाव परिणाम चौंकाने वाले होंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार जनता के बीच काम कर रही है और अंतिम फैसला जनता तथा भगवान पर छोड़ दिया गया है। सुधा भारद्वाज ने डोर शो करके प्रचार किया। बंसल ने किया 40 हजार से जीतने का दावा भाजपा पूरी तरह आत्मविश्वास से भरी नजर आई। भाजपा के मेयर पद प्रत्याशी श्याम लाल बंसल ने दावा किया कि पार्टी लगभग 40 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि शहर में भाजपा के पक्ष में एकतरफा माहौल बन चुका है और पार्टी मेयर पद के साथ-साथ सभी 20 वार्डों में जीत हासिल करेगी। 204 मतदान केंद्र नगर निगम चुनाव के लिए 20 वार्डों में कुल 204 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वार्ड-1, 2, 3, 10, 11, 12 और 13 में 10-10 बूथ स्थापित किए गए हैं, जबकि वार्ड-17 में सबसे अधिक 13 बूथ बनाए गए हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर दो ईवीएम लगाई जाएंगी, एक मेयर और दूसरी पार्षद पद के लिए, ताकि मतदाता अलग-अलग मतदान कर सकें। 2,07,379 मतदाता चुनाव में कुल 2 लाख 7 हजार 379 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 1 लाख 8 हजार 227 पुरुष, 98 हजार 447 महिलाएं और 5 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। वार्ड-17 में सबसे अधिक मतदाता हैं, जबकि वार्ड-15 में मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है। 204 ईवीएम के साथ 58 रिजर्व मशीनें निर्वाचन व्यवस्था के तहत मेयर पद के लिए 204 ईवीएम मशीनों के साथ 41 रिजर्व मशीनें रखी गई हैं। वहीं, पार्षद चुनाव के लिए 204 ईवीएम के साथ 58 रिजर्व मशीनें निर्धारित की गई हैं। प्रशासन द्वारा पोलिंग स्टाफ की अंतिम रेंडमाइजेशन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और मतदान केंद्रों पर ईवीएम वितरण की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए वार्ड-वार ड्यूटी मजिस्ट्रेट और सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। मतदान 10 मई और मतों की गिनती 13 मई को Government Girls College Sector 14 में सुबह 8 बजे से शुरू होगी। मतगणना पूरी होते ही परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

सुशासन शिविर से मत्स्य पालन में नई राह, आधुनिक तकनीक ने बढ़ाई सुविधा

मत्स्य पालकों के लिए सुशासन शिविर बना वरदान आधुनिक तकनीक से मत्स्य पालन करना हुआ आसान   रायपुर,  दंतेवाडा जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में कलस्टर वार हो रहे सुशासन शिविरों से जहां मौके पर ही ग्रामीणों की अधिकतर समस्याओं का समाधान किया जा रहा हैं। वही विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों को आधुनिक तकनीकों से युक्त यंत्र उपकरण सामग्रियां निशुल्क वितरण की जा रही है। इससे हितग्राहियों में अच्छा खासा उत्साह देखा जा रहा है और अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित हो रहे हैं। इस क्रम में विगत दिवस भूसारास और हल्बारास में संपन्न हुए सुशासन शिविर में मत्स्य विभाग द्वारा मत्स्य पालकों को उन्नत जाल और आईस बाक्स वितरण करके उनके व्यवसाय को सुविधाजनक और आर्थिक अनुकूलन बनाने का सफल प्रयास किया जा रहा हैं।    विकासखंड कटेकल्याण अंतर्गत ग्राम भूसारास में 6 मई को हुए हितग्राही हिड़मा मण्डावी एवं महादेव मरकाम भी लाभान्वित ग्रामीणों में से एक है। इस संबंध में मत्स्य कृषक हिड़मा ने बताया कि वह विगत 10 वर्षों से अपने स्वयं की भूमि में 0.20 हे. का तालाब निर्माण कर भारतीय मेजर कार्प रोहू, कतला, मृगल का संचयन कर मछली पालन का कार्य कर रहा हैं। इनके द्वारा उसे प्रतिवर्ष 30 से 40 हजार रूपये मछली विक्रय कर आमदनी होती हैं। जैसा कि हिड़मा ने बताया कि पूर्व में इनके पास जाल उपलब्ध नहीं थे। जिसके फलस्वरूप किराये से जाल लाकर मत्स्याखेट करना पड़ता था। परन्तु राज्य शासन की योजनाओं के माध्यम से सुशासन तिहार 2026 में इन्हें मत्स्याखेट हेतु जाल प्रदाय किया गया जिससे मत्स्याखेट करने में कोई परेशानी नहीं होगी एवं किराये से जाल होने की स्थिति से बचकर वह बेहतर आय अर्जित करेगा।        इसी प्रकार एक और अन्य हितग्राही महादेव मरकाम पिता हड़मा ग्राम भूसारास वि.ख. कटेकल्याण के मत्स्य कृषक को सुशासन तिहार 2026 में विभागीय फुटकर मछली विक्रय योजना अंतर्गत मछली विक्रय हेतु आइस बॉक्स प्रदाय किया गया है। चूंकि इसके पहले कृषक महादेव को अपने तालाब से निकाली गई मछली को तुंरत आस-पास के स्थानीय बाजारों में ले जाना पड़ता था। और मछली स्टोरेज करने हेतु आईस बाक्स न होने से मछलियों के खराब होने की स्थिति आ जाती थी। लेकिन अब महादेव खुश है क्योंकि सुशासन शिविर में आईस बाक्स प्रदान किया गया। वह अपने तालाब की मछली को निकालकर विक्रय हेतु बाजार ले जाने में कोई परेशानी नहीं होगी और मछली खराब होने की स्थिति से राहत मिलेगा।     इसके अलावा ग्राम पंचायत हल्बारास वि.ख. कुआकोंडा में भी मत्स्य कृषक परमेश्वर राना पिता नवल राना एवं सुनील कुमार भोयर पिता सामनाथ भी मत्स्य सामग्रियों से लाभान्वित हुए। कृषक परमेश्वर राना द्वारा विगत 08 वर्षों से अपने स्वयं के भूमि में 0.50 हे. का तालाब निर्माण कर मछली पालन का कार्य किया जा रहा है जिससे उन्हें प्रतिवर्ष 60 से 70 हजार की आमदनी प्राप्त हो रही है। पूर्व में कृषक के पास मत्स्याखेट हेतु जाल उपलब्ध नही होने के कारण मछली पकड़ने में परेशानी हो रही थी। वर्तमान में कृषक को सरकार की मंशानुरूप आयोजित सुशासन तिहार 2026 में विभाग द्वारा मत्स्यासेट हेतु जाल प्रदाय किया गया जिससे कृषक को अब मछली पकड़ने में कोई परेशानी नही होगी। वही सुनिल कुमार के पास भी पूर्व में मछली विक्रय हेतु बाजार तक ले जाने का कोई साधन नहीं था जिससे मछली खराब होने की संभावना बनी रहती थी। परन्तु आईस बाक्स मिलने से जिससे कृषक को बाजार तक मछली ले जाने में दिक्कत नहीं होगा। इस प्रकार राज्य शासन की मंशानुरूप सुशासन शिविर ने हिड़मा मण्डावी, महादेव मरकाम, परमेश्वर राना, सुनील कुमार भोयर जैसे सैकड़ों हितग्राहियों की व्यवहारिक एवं आर्थिक दिक्कतों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूर दराज के ग्रामीणों के घर तक पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुनने समझने और इसके समाधान करने का यह अभिनव प्रयास सुशासन को सार्थक कर रहा हैं