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असम में फिर हिमंता सरकार: दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंता बिस्वा सरमा, 4 विधायक भी बने मंत्री

 गुवाहाटी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की विधानसभा चुनावों में शानदार जीत के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार (12 मई) को असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली। हिमंता का राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में यह लगातार दूसरा कार्यकाल है। यह बड़ी जीत राज्य में BJP के बढ़ते प्रभुत्व को अधिक मजबूत करती है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के चार विधायकों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में आयोजित समारोह में शपथ ली। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य खानापारा क्षेत्र के वेटरनरी मैदान में मगंलवार सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर हिमंता बिस्वा सरमा और चार अन्य विधायकों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। 57 साल के हिमंता असम में लगातार दूसरी बार शपथ लेने वाले पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बन गए हैं। हिमंता बिस्वा सरमा के साथ शपथ लेने वाले चार विधायकों में BJP के अजंता नियोग और रामेश्वर तेली, जबकि उनके सहयोगी दल असम गण परिषद (AGP) के अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के चरण बोरो शामिल हैं। नियोग, बोरा और बोरो इससे पहले भी हिमंता के पहले मंत्रिमंडल में सदस्य थे। जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री तेली ने राज्य की राजनीति में फिर से वापसी की है। NDA की असम में तीसरी बार सरकार बनी है। गठबंधन पहली बार 2016 में सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में सत्ता में आया था जो अब केंद्र सरकार में मंत्री हैं। प्रधानमंत्री मोदी असम में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली NDA की तीसरी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से पहले सोमवार रात गुवाहाटी पहुंचे। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और अन्य BJP नेताओं ने गुवाहाटी में लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पीएम मोदी का स्वागत किया। पीएम मोदी ने गुवाहाटी के खानापारा इलाके के कोइनाधोरा स्थित राज्य अतिथि गृह में रात्रि विश्राम की। शपथ ग्रहण समारोह में कई केंद्रीय मंत्री, NDA शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री, शीर्ष उद्योगपति, सत्राधिकार (वैष्णव मठों के प्रमुख) और अन्य गणमान्य व्यक्ति, BJP कार्यकर्ता और बूथ समिति अध्यक्ष शामिल थे। शपथ ग्रहण में शामिल होने वालों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, सर्बानंद सोनोवाल, शिवराज सिंह चौहान, ललन सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और चिराग पासवान शामिल हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गोवा के उनके समकक्ष प्रमोद सावंत, राजस्थान के भजन लाल शर्मा, बिहार के सम्राट चौधरी, छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साय, उत्तराखंड के पुष्कर सिंह धामी, महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, ओडिशा के मोहन चरण माझी और मध्य प्रदेश के मोहन यादव भी शपथ ग्रहण में शामिल थे। हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार के शपथ ग्रहण समारोह पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, "असम में खुशी का माहौल है, डॉ हिमंत बिस्वा सरमा दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे…डॉ हिमंत बिस्वा सरमा ने जनता के कल्याण के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं… मैं विकास के लिए वोट करने के लिए राज्य की जनता को धन्यवाद देता हूं। -हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार के शपथ ग्रहण समारोह पर केंद्रीय मंत्री सरबानंदा सोनोवाल ने कहा, 'ये हमारे लिए एक बड़ा दिन है. असम की जनता, एनडीए के लिए ऐतिहासिक दिन… इस ऐतिहासिक घटना को देखने के लिए राज्य भर से लोग आए हैं। -शपथ के लिए निकले हिमंता बिस्वा सरमा -अजंता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो भी लेंगे मंत्री पद की शपथ कैबिनेट में अनुभवी चेहरों की वापसी आज शपथ लेने वाले चार मंत्रियों में से तीन- अजंता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो पिछली सरकार में भी कैबिनेट का हिस्सा थे. अजंता नियोग वित्त मंत्रालय संभाल चुकी हैं, जबकि अतुल बोरा कृषि और चरण बोरो परिवहन मंत्री थे. वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली की राज्य की राजनीति में वापसी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, नए मंत्रिमंडल में कुल 18 से 19 मंत्री हो सकते हैं, जिनके नामों पर चर्चा के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सोमवार रात ही गुवाहाटी पहुंच चुके हैं। खानापारा में भव्य समारोह शपथ ग्रहण समारोह के लिए गुवाहाटी के खानापारा में विशेष तैयारियां की गई थीं. इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए, जिनमें बीजेपी के पंचायत अध्यक्ष और सदस्य शामिल हैं।

बिलासपुर की शिविका पांडेय बनीं राज्य स्तरीय स्केटिंग चौंपियन, चोट के बावजूद जीता गोल्ड

बिलासपुर की शिविका पांडेय बनीं राज्य स्तरीय स्केटिंग चौंपियन, चोट के बावजूद जीता गोल्ड रायपुर रायपुर के सरोना स्थित निजी पब्लिक स्कूल के स्केटिंग ग्राउंड में 9 एवं 10 मई 2026 को प्रथम छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय रोलर स्पोर्ट्स रैंकिंग चौंपियनशिप का सफल आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में बिलासपुर की होनहार खिलाड़ी शिविका पांडेय ने अपनी प्रतिभा और अदम्य साहस का लोहा मनवाते हुए राज्य स्तरीय चौंपियन का खिताब अपने नाम किया। चोट को मात देकर हासिल किया स्वर्ण          शिविका ने 10 से 12 वर्ष आयु वर्ग के ट्वॉय इनलाइन स्केट स्पर्धा में हिस्सा लिया। 9 मई को आयोजित 400 मीटर रेस के दौरान वे गंभीर रूप से चोटिल हो गई थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और घायल अवस्था में ही रेस पूरी कर कांस्य पदक जीता। अगले ही दिन, उसी चोट और दर्द के बावजूद, शिविका ने 200 मीटर रेस में असाधारण प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया और अपने आयु वर्ग की ओवरऑल चौंपियन बनीं। परिचय और परिवार         शिविका पांडेय बिलासपुर के बिरला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल की छठवीं कक्षा की छात्रा हैं और रॉयल स्केटिंग क्लब, बिलासपुर में नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं। उनकी इस सफलता पर उनके परिवार में हर्ष का माहौल है। शिविका के माता-पिता चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। डॉ. श्वेता पांडेय आयुर्वेद चिकित्साधिकारी हैं और डॉ. विद्या भूषण पांडेय (विभागाध्यक्ष – बालरोग विभाग), शासकीय आयुर्वेद चिकित्सालय महाविद्यालय, बिलासपुर में पदस्थ हैं। उल्लेखनीय है कि शिविका स्वयं स्वर्ण प्राशित (आयुर्वेदिक इम्युनिटी बूस्टर प्राप्त) हैं। उनके पिता डॉ. विद्या भूषण पांडेय नियमित रूप से स्वर्ण प्राशन शिविरों का आयोजन कर बच्चों के स्वास्थ्य संवर्धन के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

फुटबॉल फैन्स के लिए बुरी खबर: FIFA वर्ल्ड कप का प्रसारण अटका, भारत में देखने को लेकर संशय

 नई दिल्ली FIFA World Cup 2026: FIFA वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में अब सिर्फ 32 दिन बाकी हैं, लेकिन दुनिया के दो सबसे बड़े बाजार भारत और चीन में अब तक टूर्नामेंट के ब्रॉडकास्ट राइट्स तय नहीं हो पाए हैं. हालात ऐसे हैं कि करीब 3 अरब लोगों को अभी तक यह नहीं पता कि वे फुटबॉल के सबसे बड़े टूर्नामेंट का लाइव प्रसारण देख पाएंगे या नहीं। अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा की मेजबानी में 11 जून से शुरू होने वाले  फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 के लिए FIFA लगातार ब्रॉडकास्टर्स से बातचीत कर रहा है, लेकिन उसकी भारी-भरकम मांग कई देशों को मंजूर नहीं हो रही। रिपोर्ट के मुताबिक FIFA की एक बड़ी टीम इस समय बीजिंग में डेरा डाले हुए है. इसमें FIFA (Federation Internationale de Football Association /International Federation of Association Football) के सेक्रेटरी जनरल मैटियास ग्राफस्ट्रॉम और मीडिया राइट्स डायरेक्टर जीन-क्रिस्टोफ पेटिट शामिल हैं. उनका मकसद चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV को किसी तरह डील के लिए राजी करना है। बताया गया कि FIFA ने शुरुआत में चीन से करीब 300 मिलियन डॉलर की मांग की थी, जबकि CCTV सिर्फ 80 मिलियन डॉलर तक खर्च करने को तैयार था. बाद में बातचीत 120 से 150 मिलियन डॉलर के बीच पहुंची, लेकिन अब तक सहमति नहीं बन सकी है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि FIFA अब अपनी मांग में 50 प्रतिशत से ज्यादा कटौती करने को तैयार है ताकि मई के आखिर तक समझौता हो सके. चीन में यह भी चर्चा है कि 2026 के साथ-साथ 2030 वर्ल्ड कप पैकेज पर भी बातचीत चल रही है। भारत में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है. Reuters की रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस-डिज्नी जॉइंट वेंचर ने 2026 वर्ल्ड कप के लिए करीब 20 मिलियन डॉलर का प्रस्ताव दिया था, जिसे FIFA ने अपनी अपेक्षा से काफी कम माना. इसके बाद डील फिलहाल रुक गई। इस बीच भारत में यह चर्चा भी तेज हो गई कि कहीं एक बार फिर दूरदर्शन वर्ल्ड कप के प्रसारण अधिकार हासिल ना कर ले. हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एशियाई देशों में सबसे बड़ी समस्या मैचों का समय भी माना जा रहा है. चीन में मुकाबले तड़के करीब 3 बजे प्रसारित होंगे, ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स को डर है कि दर्शकों की संख्या उम्मीद से कम रह सकती है. ऊपर से चीन की टीम टूर्नामेंट में क्वालिफाई भी नहीं कर पाई है, जिससे टीवी कंपनियां इतने बड़े निवेश को लेकर सवाल उठा रही हैं। भारत और चीन के अलावा थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों में भी FIFA की कीमतों को लेकर विवाद जारी है. थाईलैंड में तो हालात ऐसे हो गए कि वहां के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल को खुद दखल देना पड़ा. उन्होंने फैन्स को भरोसा दिलाया कि देश के लोग वर्ल्ड कप देखने से वंचित नहीं रहेंगे। दरअसल, थाईलैंड में पिछले साल फुटबॉल वर्ल्ड कप को 'Must Have' सूची से हटा दिया गया था. इसका मतलब था कि टूर्नामेंट फ्री-टू-एयर टीवी पर दिखाना जरूरी नहीं रहेगा. इसके बाद लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। 2022 वर्ल्ड कप से पहले भी थाईलैंड को आखिरी समय में करीब 33 मिलियन डॉलर की डील करनी पड़ी थी. उस समय सरकार और निजी कंपनियों ने मिलकर फंड जुटाया था. एशियाई बाजारों में पाइरेसी भी FIFA के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. 2018 और 2022 वर्ल्ड कप के दौरान अवैध स्ट्रीमिंग काफी बढ़ गई थी, जिससे ब्रॉडकास्ट राइट्स की वैल्यू प्रभावित हुई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Weibo पर कथित ब्रॉडकास्ट डील्स की रकम भी वायरल हुई. इसमें जापान के लिए 200 मिलियन डॉलर, हॉन्गकॉन्ग के लिए 25 मिलियन डॉलर, जर्मनी के लिए 120 मिलियन डॉलर और इंग्लैंड के लिए दो वर्ल्ड कप के 350 मिलियन डॉलर बताए गए। FIFA ने हालांकि इस पूरे मामले पर चुप्पी बनाए रखी है. रॉयटर्स को जारी बयान में संगठन ने कहा कि चीन और भारत में मीडिया राइट्स को लेकर बातचीत जारी है और फिलहाल इसे गोपनीय रखा जाएगा. रॉयटर्स के आंकड़ों के मुताबिक 2022 वर्ल्ड कप की ग्लोबल टीवी रीच में चीन की हिस्सेदारी 17.7 प्रतिशत थी, जबकि भारत की हिस्सेदारी 2.9 प्रतिशत रही. डिजिटल स्ट्रीमिंग में दोनों देशों का संयुक्त योगदान 22.6 प्रतिशत था. यही वजह है कि FIFA इन बाजारों को किसी भी कीमत पर खोना नहीं चाहता।

WhatsApp Plus: नया सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च

WhatsApp अब सिर्फ मैसेज भेजने वाला ऐप नहीं रहना चाहता. कंपनी अब इसे एक प्रीमियम प्लेटफॉर्म में बदलने की तैयारी कर रही है. अब कंपन WhatsApp Plus ला रही है. ये दरअसल एक सब्सक्रिप्शन सर्विस है जिसके लिए यूजर्स को पैसे देने होंगे. फिलहाल ये सब्सक्रिप्शन प्लान चुनिंदा आईफोन यूजर्स के लिए रोलआउट होना शुरू हो गया है. पिछले कई महीनों से इसकी चर्चा बीटा वर्जन में हो रही थी, लेकिन अब पहली बार कुछ यूजर्स को इसका एक्सेस मिलने लगा है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि काफी समय तक एक फर्जी WhatsApp Plus वायरल होता रहा था. ये ऐप यूजर्स को एक्स्ट्रा फीचर्स दिलाने का दावा करता था, लेकिन बाद में य स्कैम ऐप निकला. लेकिन अब कंपनी खुद ही WhatsApp Plus ला रही है. कंपनी खुद ही लोगों को पहले WhatsApp Plus यूज करने से मना करती रही. कई यूजर्स के अकाउंट परमानेंट ब्लॉक भी हो गए. बहरहाल, कंपनी का नया WhatsApp Plus फीचर सिर्फ कुछ आईफोन यूजर्स को दिख रहा है और धीरे-धीरे बाकी लोगों तक पहुंचाया जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन लोगों के पास WhatsApp का लेटेस्ट iOS वर्जन है, उन्हें सेटिंग्स में इसका ऑप्शन दिख सकता है. पैसे देकर मिलेगा क्या? व्हाट्सऐप प्लस का पूरा फोकस ऐप को ज्यादा पर्सनल और कस्टमाइज्ड बनाने पर है. यानी मैसेजिंग और कॉलिंग जैसी बेसिक सुविधाएं अभी भी मुफ्त रहेंगी, लेकिन जो लोग ऐप का लुक और फीचर्स बदलना चाहते हैं, उन्हें एक्स्ट्रा चीजें मिलेंगी. इस नए प्लान में यूजर्स को 18 नए थीम कलर मिलेंगे. अभी व्हाट्सऐप का ज्यादातर इंटरफेस हरे रंग का होता है, लेकिन प्लस सब्सक्रिप्शन के बाद लोग पर्पल, ब्लू, रेड, यलो और कई दूसरे रंग चुन पाएंगे. ऐप के आइकन भी बदले जा सकेंगे. कंपनी करीब 14 नए ऐप आइकन देने वाली है. नए थीम्स, नए स्टिकर्स इसके अलावा प्रीमियम स्टिकर्स भी मिलेंगे जिनमें एनिमेटेड इफेक्ट होंगे. यानी स्टिकर भेजने का एक्सपीरियंस थोड़ा ज्यादा इंटरैक्टिव और विजुअल होगा. कंपनी नए रिंगटोन भी दे रही है ताकि व्हाट्सऐप कॉल बाकी ऐप्स से अलग महसूस हो. एक बड़ा बदलाव पिन चैट्स में देखने को मिलेगा. अभी आम यूजर्स सिर्फ 3 चैट पिन कर सकते हैं, लेकिन WhatsApp Plus लेने के बाद 20 चैट तक पिन की जा सकेंगी. जिन लोगों के पास बहुत ज्यादा काम या बिजनेस चैट्स होती हैं, उनके लिए यह फीचर उपयोगी माना जा रहा है. व्हाट्सऐप ग्रुपिंग और चैट मैनेजमेंट पर भी काम कर रहा है. उदाहरण के लिए अगर किसी ने ऑफिस नाम से एक चैट लिस्ट बनाई है, तो वह एक साथ सभी ऑफिस चैट्स का थीम, नोटिफिकेशन साउंड और कॉल ट्यून बदल सकेगा. अभी यह सब अलग-अलग करना पड़ता है. 300 रुपये प्रति माह सबसे ज्यादा चर्चा इसकी कीमत को लेकर हो रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूरोप में इसकी कीमत करीब 2.49 यूरो प्रति महीना रखी गई है. यानी भारतीय रुपये में लगभग 280 रुपये के आसपास. अलग-अलग देशों में कीमत अलग हो सकती है. कुछ जगहों पर कंपनी ट्रायल भी दे सकती है. हालांकि अभी भारत में इसकी आधिकारिक लॉन्च डेट सामने नहीं आई है. लेकिन टेक रिपोर्ट्स मान रही हैं कि आने वाले हफ्तों या महीनों में यह ज्यादा यूजर्स तक पहुंच सकता है. दिलचस्प बात यह भी है कि मेटा अब धीरे-धीरे अपने सभी प्लेटफॉर्म पर पेड फीचर्स बढ़ा रहा है. इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पहले से सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम कर रहे हैं. अब व्हाट्सऐप भी उसी दिशा में जाता दिख रहा है. फ्यूचर में जरूरी फीचर्स भी पेड कर सकती है कंपनी इस नए मॉडल को लेकर बहस भी शुरू हो गई है. कुछ लोग मानते हैं कि आज थीम और स्टिकर्स पैसे में मिल रहे हैं, लेकिन फ्यूचर में कहीं जरूरी फीचर्स भी पेड न हो जाएं. आम तौर पर कंपनियां पैसे कमाने के लिए ये स्ट्रैटिजी अपनाती आई हैं. नया सब्सक्रिप्शन ला कर फ्री में मिलने वाले जरूरी फीचर्स पेड कर देती हैं.

उद्यानिकी की आधुनिक तकनीकों से किसान महेश कश्यप की बदली तकदीर

उद्यानिकी की आधुनिक तकनीकों से किसान महेश कश्यप की बदली तकदीर रायपुर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड अंतर्गत कछार निवासी महेश कश्यप आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं। कभी पारंपरिक खेती के कारण बढ़ती लागत और घटते लाभ से परेशान रहने वाले महेश ने उद्यानिकी विभाग की सहायता से आधुनिक कृषि को अपनाया और अपनी आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी सुधार किया। परंपरागत खेती से आधुनिकता का सफर           कश्यप पहले परंपरागत फसलों पर निर्भर थे, लेकिन उद्यानिकी विभाग की समेकित उद्यानिकी विकास योजना  ने उनकी सोच और खेती का तरीका बदल दिया। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 2.00 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण और फेंसिंग के लिए प्राप्त अनुदान का लाभ उठाकर सब्जी उत्पादन का उन्नत मॉडल तैयार किया। तकनीक का बेजोड़ तालमेल          कश्यप ने अपने खेतों में वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हुए तकनीकों को अपनाया। ड्रिप सिंचाई से न केवल पानी की बचत हुई, बल्कि फसल को सटीक पोषण मिला और खरपतवार की समस्या भी कम हुई। मिट्टी में नमी बनाए रखने और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए मल्चिंग का प्रभावी उपयोग किया गया। वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद के प्रयोग से फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ी है। आय में दोगुनी वृद्धि और रिकॉर्ड उत्पादन             महेश ने बैंगन के साथ-साथ अंतरवर्ती फसल  के रूप में कद्दू और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती की। लगभग 4.5 एकड़ में बैगन कीखेती की है। उन्होंने बताया कि अनुमानित 900 से 1100 क्विंटल उत्पादन होने की संभावना है, जहाँ खेती में लगभग 7 से 8 लाख रुपये की लागत आई, वहीं सब्जियों की बिक्री से उन्हें 14 से 15 लाख रुपये की शुद्ध आर्थिक लाभ  प्राप्त हुई। क्षेत्र के किसानों के लिए रोल मॉडल             महेश कश्यप आज न केवल आत्मनिर्भर हुए हैं, बल्कि वे किसानों को संदेश दे रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को एक लाभप्रद व्यवसाय बनाया जा सकता है। उद्यानिकी विभाग की यह पहल बिलासपुर के ग्रामीण अंचल में समृद्धि का नया अध्याय लिख रही है।

फरीदकोट जेल से चल रहा था अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी रैकेट, मास्टरमाइंड सोनू निकला

  बीकानेर बीकानेर के खाजूवाला बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियों ने हथियार तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड पंजाब की फरीदकोट जेल में बंद कुख्यात तस्कर सुखविंदर सिंह उर्फ सोनू निकला है. सोनू ने जेल के अंदर से ही पाकिस्तानी तस्करों के साथ संपर्क साधा और ड्रोन के जरिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार हथियार मंगवाने का पूरा नेटवर्क तैयार किया था. आरोपी मूल रूप से श्रीगंगानगर जिले के रावला क्षेत्र का रहने वाला है. तकनीकी खराबी ने फेल की पाकिस्तानी साजिश यह मामला इसी साल फरवरी का है, जब खाजूवाला के 24 KND इलाके के एक सरसों के खेत में पाकिस्तानी ड्रोन गिरा मिला था. जांच में सामने आया कि तस्करों ने हथियारों की डिलीवरी के लिए नहर के पटड़े का रूट तय किया था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण ड्रोन खेत में जा गिरा. ड्रोन के साथ सुरक्षा एजेंसियों ने 5 चाइनीज पिस्टल और 325 कारतूस बरामद किए थे. ड्रोन गिरने के कारण तस्करों की प्लानिंग फेल हो गई और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा. स्थानीय कनेक्शन की तलाश कर रही पुलिस सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की संयुक्त जांच में बॉर्डर पार से चलने वाले इस बड़े स्मगलिंग नेटवर्क की परतें अब खुल रही हैं. सुखविंदर सिंह उर्फ सोनू से पूछताछ के आधार पर उन लोगों को नामजद किया गया है, जो बॉर्डर पर ड्रोन की डिलीवरी लेने पहुंचने वाले थे. पुलिस अब उन स्थानीय मददगारों की तलाश में जुटी है, जो इस नेटवर्क को जमीनी स्तर पर सपोर्ट कर रहे थे. एजेंसियों का मानना है कि इस खुलासे से सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय अन्य तस्करों पर भी शिकंजा कसेगा.

राजस्थान में दिल दहला देने वाली घटना, कुएं में गिरने के बावजूद नवजात को नहीं आई खरोंच

तिजारा कहते हैं कि जिसकी रक्षा खुद ईश्वर करे, उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता. राजस्थान के खैरथल तिजारा  जिले के तिजारा कस्बे में मंगलवार सुबह कुछ ऐसा ही कुछ देखने को मिला. यहां एक कलयुगी मां ने अपनी ही चंद घंटों की मासूम बच्ची को पालपुर रोड स्थित एक 60 फीट गहरे कुएं में मरने के लिए फेंक दिया. लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था. इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद मासूम बच्ची को एक खरोंच तक नहीं आई. रस्सी के सहारे नीचे उतरकर युवक ने किया रेस्क्यू सुबह जब कुएं के पास से गुजर रहे ग्रामीणों ने अंदर से किसी के रोने की आवाज सुनी, तो वे ठिठक गए. जब कुएं में झांका गया तो नीचे एक नवजात बच्ची सुरक्षित नजर आई. किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि इतने गहरे और अंधेरे कुएं में गिरने के बाद भी बच्ची सही-सलामत है. ग्रामीणों ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया और गांव का एक जांबाज युवक रस्सी के सहारे नीचे उतरा. उसने बच्ची को अपनी गोद में लिया और सुरक्षित बाहर निकाल लाया. बाहर आते ही जब बच्ची का शरीर देखा गया, तो वह पूरी तरह सुरक्षित थी. डॉक्टर भी हैरान, अब अलवर में हो रही देखभाल बच्ची को तुरंत तिजारा के उप जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांच की. बीसीएमओ डॉ. मनोज यादव ने बताया कि बच्ची का जन्म करीब 24 घंटे पहले हुआ लग रहा है. सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि प्राथमिक जांच में बच्ची के शरीर पर कोई बाहरी चोट या खरोंच के निशान नहीं मिले. हालांकि, एहतियात के तौर पर और बेहतर निगरानी के लिए उसे अलवर के जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है. पुलिस कर रही 'कलयुगी मां' की तलाश इस घटना ने जहां एक तरफ लोगों को हैरान कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ लोगों में इस कृत्य को लेकर भारी गुस्सा है. तिजारा डीएसपी शिवराज सिंह ने बताया कि अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस की टीमें इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं और स्वास्थ्य केंद्रों से हाल ही में हुए प्रसव का डेटा जुटाया जा रहा है ताकि इस मासूम को मौत के मुंह में धकेलने वालों तक पहुंचा जा सके.

39 किलो गांजा बरामदगी मामले में पुलिसकर्मी की संलिप्तता उजागर, विभागीय जांच शुरू

 अलीगढ़  तीन दिन पहले क्वार्सी पुलिस ने गांजा तस्करी के आरोप में जिन छह लोगों को गिरफ्तार किया था उनसे थाने के सिपाही प्रबल प्रताप की संलिप्तता थी। एसपी सिटी की जांच में आरेाप सही पाए जाने पर एसएसपी ने सिपाही को निलंबित कर दिया है। विभागीय कार्रवाई के भी आदेश जारी किए हैं। क्वार्सी पुलिस ने 39 किलो गांजा समेत गिरफ्तार किए थे छह लोग क्वार्सी पुलिस ने शनिवार को क्षेत्र के शहंशाहबाद में गली नंबर एक निवासी आफताब उर्फ कप्तान, आफताब की पत्नी शहरीन व गुड़िया के अलावा मुहल्ले के नबील, अब्दुल्ला और बिलाल को 39 किलो गांजा के साथ गिरफ्तार किया था। एक अवैध तमंचा, बिक्री से प्राप्त 1.05 लाख रुपये के अलावा अन्य सामान भी बरामद किया था। पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि गांजा का वह ओड़िसा से मंगाते थे। सस्ते दामों में मिलने वाले गांजा की पुड़िया बनाकर 100 में बेचते थे। इतने बड़े स्तर पर गांजा का धंधा होने की बीट कांस्टेबल प्रबल प्रताप की जानकारी में होना से ही अधिकारियों का माथा ठनका। बीट सिपाही की संदिग्ध स्थिति होने पर एसपी सिटी ने की थी जांच एसएसपी ने एसपी सिटी को पूरे मामले की जांच सौंपी। एसपी सिटी की जांच में सिपाही को आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्तियों से मेलजोल रखने तथा अन्य संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त पाया गया। रिपोर्ट के आधार पर की गई इस कार्रवाई में कहा गया है कि उक्त आरक्षी की गतिविधियों से पुलिस विभाग की छवि धूमिल हो रही थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने आरक्षी के विरुद्ध विभागीय जांच एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी है। मनोयोग से करें कार्यं, अवैध गतिविधियों में संलिप्तता पर होगी कार्रवाई एसएसपी नीरज जादौन ने सभी अधीनस्थ पुलिस कर्मियों को निर्देशित किया है कि वे पूर्ण मनोयोग एवं ईमानदारी के साथ जनहित में कार्य करें। चेतावनी दी कि यदि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनहीनता, लापरवाही अथवा अवैध गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप सामने आते हैं, तो संबंधित के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।  

NEET पेपर लीक विवाद पर गरमाई सियासत, सीकर में जांच जारी, विपक्ष ने CBI जांच की मांग की

जयपुर NEET परीक्षा की गड़बडी को लेकर खबर सुर्खियों में है. NEET परीक्षा में गेस पेपर से हूबहू सवाल मिलने का मुद्दा गरमाया हुआ है. मामले में पुलिस जांच में जुटी है. सीकर जिले में NEET पेपर को लेकर धांधली की खबर के बाद विपक्ष ने इसकी जांच CBI से कराने की मांग कर रहा है. लेकिन इस बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बयान भी सामने आया है. उन्होंने दावा किया है कि  भाजपा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है. परीक्षा प्रणाली पर भरोसा दोबारा स्थापित सीएम भजनलाल ने कहा कि उनकी सरकार युवाओं के सपनों को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है और पिछली सरकार के समय जिस तरह से परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कमजोर हुआ था उसे दोबारा स्थापित किया गया है. जयपुर में बिरला सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौर में राजस्थान का माहौल अलग था लेकिन वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने का काम किया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने चार लाख सरकारी और छह लाख निजी क्षेत्र में रोजगार देने का वादा किया था और अब तक हजारों युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं. उन्होंने अजमेर जिले के कड़ैल गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि हाल के समय में वहां 13 युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है और RAS भर्ती परीक्षा का टॉपर भी इसी गांव से निकला है. मुख्यमंत्री ने इसे युवाओं की मेहनत और सरकार की पारदर्शी भर्ती व्यवस्था का परिणाम बताया. कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का फोकस युवाओं को रोजगार, कौशल और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर है ताकि राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विश्वास का माहौल मजबूत हो सके.

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल: पर्यावरणीय मानकों के पालन और सतत निगरानी का सशक्त मॉडल

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल: पर्यावरणीय मानकों के पालन और सतत निगरानी का सशक्त मॉडल रायपुर /छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल प्रभावी और सक्रिय भूमिका निभा रहा है। मंडल द्वारा विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण, वैज्ञानिक परीक्षण और सतत निगरानी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन हो। राखड़ प्रबंधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुशासित व्यवस्था मंडल की सतर्कता के परिणामस्वरूप जांजगीर-चांपा सहित राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में फ्लाई ऐश (राखड़) का प्रबंधन निर्धारित वैज्ञानिक दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है। हाल ही में विभागीय अधिकारियों ने ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संबंधित स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान राखड़ के परिवहन, भंडारण और निस्तारण की प्रक्रियाएं सुव्यवस्थित एवं मानकों के अनुरूप पाई गईं। पारदर्शिता और जनभागीदारी से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जनसहभागिता को विशेष महत्व दिया है। निरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि राखड़ परिवहन में सुरक्षा मानकों का पालन हो तथा धूल या अन्य कणों का अनियंत्रित प्रसार न हो। वैज्ञानिक डंपिंग तकनीकों के उपयोग से आसपास के जल स्रोतों और कृषि भूमि की गुणवत्ता सुरक्षित बनी हुई है। स्थानीय निकायों और ग्रामीणों के साथ सतत संवाद के माध्यम से मंडल विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित कर रहा है। रियल-टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ा जनविश्वास मंडल आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उद्योगों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग कर रहा है। इस सतत निगरानी व्यवस्था से न केवल पर्यावरणीय अनुपालन को मजबूती मिली है, बल्कि आम नागरिकों में स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति विश्वास भी बढ़ा है। स्वच्छ और हरित छत्तीसगढ़ की दिशा में सतत प्रयास छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल का उद्देश्य राज्य की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करते हुए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य का निर्माण करना है। नियमित समीक्षा, उन्नत तकनीकों और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से मंडल पर्यावरण संरक्षण के उच्चतम मानकों को स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।