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विवाह समारोह में शामिल होकर अभिशंख-स्तुति जायसवाल को सुखद दांपत्य जीवन का आशीर्वाद

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  दिलीप जायसवाल के सुपुत्र अभिशंख जायसवाल एवं पुत्रवधू स्तुति जायसवाल के पावन वैवाहिक बंधन मांगलिक अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं मंगल आशीष प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ईश्वर से नवदंपति के सुखमय, समृद्ध एवं आनंदपूर्ण दाम्पत्य जीवन की कामना करते हुए कहा कि यह नवीन जीवन यात्रा प्रेम, विश्वास, सम्मान और अटूट साथ के पवित्र सूत्र से सदैव सुसज्जित रहे। उनके जीवन में सुख, शांति, वैभव, उत्तम स्वास्थ्य और उन्नति का प्रकाश निरंतर बना रहे तथा परिवार का आंगन सदैव खुशियों, सौभाग्य और मधुर संबंधों की सुगंध से महकता रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बिजुरी में आयोजित वैवाहिक समारोह में सम्मिलित हुए और नवविवाहित दंपति को अपने स्नेहिल आशीर्वचनों से अभिसिंचित कर उज्ज्वल एवं मंगलमय भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने राज्यमंत्री  जायसवाल एवं उनके परिवारजन से आत्मीय भेंट कर इस सुखद अवसर की खुशियां साझा कीं। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों एवं अतिथियों से भी मुख्यमंत्री ने आत्मीय चर्चा की। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती सम्पतिया उइके, शहडोल संसदीय क्षेत्र की सांसद मती हिमाद्री सिंह, मंडला सांसद  फग्गन सिंह कुलस्ते, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री तथा अनूपपुर जिले के प्रभारी मंत्री  दिलीप अहिरवार, विधायक एवं पूर्व मंत्री  बिसाहूलाल सिंह, विधायक जैतपुर  जयसिंह मरावी, विधायक जयसिंहनगर मती मनीषा सिंह, कलेक्टर  हर्षल पंचोली, उपाध्यक्ष जिला पंचायत अनूपपुर मती पार्वती राठौर, जिला पंचायत सदस्य भारती केवट नर्मदा सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  

हफ्ते में सिर्फ 5 लीटर तेल! क्या भारत में भी लागू हो सकता है फ्यूल राशनिंग नियम?

नई दिल्ली ईरान युद्ध और मध्य पूर्व (Middle East) में तेल आपूर्ति मार्गों में आई रुकावट के कारण पूरी दुनिया एक गंभीर ऊर्जा संकट से जूझ रही है। इस संकट के बीच कई देशों में फ्यूल राशनिंग लागू की जा चुकी है। भारत में भी न‍िजी वाहनों के ल‍िए एक ल‍िमिट में पेट्रोल-डीजल और गैस खरीदने का कोटा तय करना एक उपाय हो सकता है। फिलहाल, भारत सरकार ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं किया है। अगर देश में कोटा सिस्टम लागू होता है, तो लोग अपने मन के मुताबिक पेट्रोल, डीजल या गैस नहीं खरीद पाएंगे। बता दें कि श्रीलंका, पाकिस्तान, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में QR Code, ऑड-ईवन नियम और साप्ताहिक फ्यूल लिमिट लागू हो चुकी है। अगर भविष्य में हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत समेत कई देशों में भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं। सरल शब्दों में कहें तो 'फ्यूल राशनिंग' सरकार द्वारा लगाया गया वह प्रतिबंध है, जिसके तहत आप अपनी मर्जी के मुताबिक जितना चाहें उतना पेट्रोल या डीजल नहीं खरीद सकते हैं। सरकार प्रत्येक नागरिक या वाहन के लिए एक 'कोटा' तय कर देती है। एक निश्चित समय सीमा (जैसे एक हफ्ता) में आप केवल लिमिट में ही ईंधन खरीद पाएंगे। इसके लिए सरकार QR-कोड, कूपन या गाड़ियों के नंबर के हिसाब से 'ऑड-ईवन' (Odd-Even) जैसे तरीके अपनाती है। 2026 के इस वैश्विक संकट में कई देशों ने अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए ईंधन की बिक्री पर सीमा लगा दी है। श्रीलंका: यहां 'नेशनल फ्यूल पास' (QR कोड) सिस्टम लागू है। कारों के लिए हफ्ते में केवल 15-25 लीटर और मोटरसाइकिलों के लिए सिर्फ 5 लीटर पेट्रोल तय किया गया है। पाकिस्तान: यहां स्थिति इतनी गंभीर है कि एक बार में वाहन को केवल 5 लीटर तेल मिल रहा है। साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए हफ्ते में केवल 4 दिन काम का नियम बनाया गया है। फ्रांस और जर्मनी: यूरोप के संपन्न देश भी अब राशनिंग की कगार पर हैं। फ्रांस के कुछ इलाकों में QR कोड के जरिए हफ्ते में 15-20 लीटर की सीमा तय की गई है, जबकि जर्मनी में कुछ जगहों पर एक बार में केवल 10 लीटर पेट्रोल मिल रहा है। बांग्लादेश और म्यांमार: बांग्लादेश ने ऊर्जा बचाने के लिए स्कूलों को ऑनलाइन कर दिया है और बिजली की रोटेशनल कटौती (Load Shedding) शुरू कर दी है। म्यांमार में 'ऑड-ईवन' सिस्टम से पेट्रोल दिया जा रहा है। स्लोवेनिया और केन्या: स्लोवेनिया ने प्राइवेट ड्राइवरों के लिए हफ्ते में 50 लीटर का कोटा तय किया है, वहीं केन्या ने घरेलू सप्लाई बचाने के लिए तेल के निर्यात पर ही पाबंदी लगा दी है। ईंधन की किल्लत का असर भारत पर भी पड़ा है। लाइव हिंदुस्तान की बिजनेस टीम ने हाल ही में कुछ शहरों में एक सर्वे किया, जिसमें पाया गया कि पेट्रोल पंप संचालकों ने खुद से ही पेट्रोल-डीजल खरीदने की एक सीमा तय कर रखी है। पूछने पर पता लगा कि कुछ दिनों पहले बाइक सवार ग्राहकों को 200 रुपये और कार चालकों को 2,000 रुपये से ज्यादा का तेल नहीं दिया जा रहा था। अभी भी कई शहरों में पेट्रोल पंप पर अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने पहुंच रहे ग्राहकों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। इससे पता चलता है कि बिना किसी आदेश के पहले ही पेट्रोल पंप संचालकों ने अपनी कार्यशैली बदलकर कोटा सिस्टम शुरू कर दिया है। वर्क फ्रॉम होम और 4-डेज वर्किंग:– फिलीपींस, लाओस और पाकिस्तान ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने या हफ्ते में कम दिन ऑफिस आने का आदेश दिया है। कार-लेस-डेज:– न्यूजीलैंड जैसे देश 'कार-लेस-डेज' (हफ्ते में एक दिन गाड़ी न चलाना) को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट:- वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों में लोगों को कारपूलिंग और बस-मेट्रो का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि लगभग 30% पेट्रोल पंप बंद हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले ही देशवासियों से ईंधन और यात्रा में कटौती करने की भावुक अपील की है। हालांकि, भारत में अभी तक औपचारिक रूप से राशनिंग लागू नहीं हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो भविष्य में 'कोटा सिस्टम' या 'QR कोड आधारित खरीद' की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फ्यूल राशनिंग का विचार डरावना लग सकता है, लेकिन यह संकट के समय तेल के समान वितरण को सुनिश्चित करने का एक तरीका है। फिलहाल, बचाव का सबसे अच्छा तरीका यही है कि हम निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करें और ईंधन की बर्बादी रोकें।

ट्रैफिक पुलिस ला रही खास APP: अब नागरिक मोबाइल से दर्ज कर सकेंगे ध्वनि प्रदूषण की शिकायत

 लखनऊ  राज्य में अब नागरिकों को जल्द ही मोबाइल एप्लीकेशन (एप) के जरिए ध्वनि प्रदूषण की शिकायत करने की सुविधा मिलने जा रही है। यातायात निदेशालय एप विकसित करने की योजना पर तेजी के साथ काम कर रहा है। इस काम में विभिन्न जिलों की यातायात पुलिस के विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है। इस एप के जरिए नागरिकों को ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की फोटो व वीडियो अपलोड करके सीधी शिकायत करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। एडीजी, यातायात एवं सड़क सुरक्षा ए सतीश गणेश ने बताया कि डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देशन में राज्य में वाहनों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को कम करने की योजना पर काम किया जा रहा है। राज्य भर में प्रेशर हॉर्न, मॉडीफाइड साइलेंसर व हूटर की बड़ी समस्या है। यातायात पुलिस ने तीन से पांच और 18 से 19 अप्रैल के बीच राज्य भर में अभियान चलाकर 6039 वाहनों का चालान प्रेशर हार्न के उपयोग को लेकर किया है, जबकि 11 हजार से अधिक वाहनों का चालान मॉडीफाइड साइलेंसरों व हूटर लगाने को लेकर किया गया है। इन वाहनों से 3.97 करोड़ रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। वहीं प्रेशर हार्न लगाने वाले वाहन चालकों से 2.42 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है। उन्होंने बताया कि वाहनों से फैलने वाले ध्वनि प्रदूषण को समाप्त करने के लिए चलाए जा रहे अभियान को लेकर आम नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। इसी सिलसिले में यातायात निदेशालय मोबाइल एप विकसित करा रहा है। नागरिक ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की सीधी शिकायत एप के जरिए कर सकेंगे। एप पर आने वाली शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि मोबाइल एप की सुविधा जल्द ही नागरिकों को उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।  

कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET UG-2026) की परीक्षाओं के दृष्टिगत मंडल ने किया निर्णय

भोपाल  माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश, भोपाल द्वारा आयोजित हाई स्कूल/हायर सेकेंडरी द्वितीय परीक्षा वर्ष 2026 के परीक्षा कार्यक्रम में आंशिक संशोधन किया गया है। यह संशोधन कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET UG-2026) की परीक्षाओं के दृष्टिगत किया गया है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा सभी शासकीय एवं अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देश भी जारी किए गए है। साथ ही संशोधित परीक्षा कार्यक्रम को विद्यालय के सूचना पटल पर प्रमुखता से प्रदर्शित करने और संबंधित विद्यार्थियों को इसकी जानकारी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाने को कहा है। परीक्षा सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक चलेगी। नियमित, स्वाध्यायी एवं दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों की परीक्षाएं समान तिथि एवं समय पर संपन्न होंगी। विद्यार्थी संशोधित परीक्षा कार्यक्रम मंडल की वेबसाइट माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश पर भी देख सकते हैं। मंडल द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूर्व निर्धारित परीक्षा तिथियों में परिवर्तन किया गया है। 14 मई 2026 को आयोजित होने वाली कृषि (Agriculture), गृह विज्ञान (Home Science) एवं अकाउंटेंसी (Accountancy) विषयों की परीक्षाएं अब 19 मई 2026 को होंगी। वहीं 21 मई को होने वाली गणित (Mathematics) एवं मनोविज्ञान (Psychology) विषयों की परीक्षाएं अब 26 मई 2026 आयोजित की जाएंगी।  

इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को बूस्ट: 503 करोड़ की योजना से EV मालिकों की होगी बल्ले-बल्ले

 नई दिल्ली देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की मांग बढ़ी है, लेकिन चुनौतियां अभी कम नहीं हुई है. भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी 5.77 फीसदी तक पहुंच गई है. हालांकि, अभी भी लोगों के मन में बैठी रेंज एंजाइटी खत्म नहीं हुई है. ऐसे में सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे ईवी वालों की बड़ी चिंता दूर हो जाएगी।  भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए भारी उद्योग मंत्रालय ने चार्जिंग स्टेशन इंस्टॉल करने का ऐलान किया है. मंत्रालय देशभर में 4,874 इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन लगाएगा. इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार 503.86 करोड़ रुपये खर्च करेगी. ये प्रोजेक्ट पीएम ई-ड्राइव स्कीम का हिस्सा है.   कई राज्यों में लगेंगे EV चार्जिंग स्टेशन 12 मई को बेंगलुरू में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने इस बारे में जानकारी दी है. इस कदम का उद्देश्य लोगों के मन में बैठी रेंज एंजाइटी को कम करना है. इसके लिए सरकार इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना चाहती है. इससे जब भी लोगों को जरूरत होगी वे अपने व्हीकल को चार्ज कर पाएंगे।  इन चार्जिंग स्टेशन पर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स, थ्री व्हीलर्स, पैंसेजर कार, बस और हैवी ड्यूटी ट्रक्स को भी चार्ज किया जा सकेगा. सरकार की मानें तो इन चार्जिंग स्टेशन को प्लानिंग के तहत अलग-अलग राज्यों में लगाया जाएगा. इसमें कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना और तमिलनाडु शामिल हैं।  बढ़ रहा ईवी का दबदबा इस फंडिंग का बड़ा हिस्सा कर्नाटक में खर्च होगा. रिपोर्ट्स की मानें, तो राज्य में 1243 चार्जिंग स्टेशन इंस्टॉल किए जाएंगे, जिसें लगभग 123.66 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस प्रोजेक्टर को पूरा करने में प्रमुख पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइसेस का भी योगदान होगा. प्रमुख तेल कंपनियां (जिनके नाम से आप पेट्रोल पंप देखते हैं) इस इंस्टॉलेशन प्रोजेक्ट को लीड करेंगी।  मौजूदा स्थिति की बात करें, तो पैसेंजर व्हीकल कैटेगरी में ईवी की हिस्सेदारी 5.77 फीसदी की है. वहीं टू-व्हीलर कैटेगरी में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की हिस्सेदारी 7.76 फीसदी तक पहुंच गई है. कमर्शियल व्हीकल कैटेगरी में ईवी का शेयर 2.26 फीसदी है. थ्री व्हीलर कैटेगरी में ईवी का दबदबा है. यहां इलेक्ट्रिक व्हीकल की हिस्सेदारी 60.38 फीसदी की है. ये आंकड़े अप्रैल 2026 में हुई सेल के हैं। 

अब ग्लोबल स्क्रीन पर दिखेगा प्रदेश: विदेशी सीरीज से 80 देशों को पता चलेगा गौरवशाली इतिहास

भोपाल   मध्यप्रदेश की समृद्ध कला, संस्कृति और वन्यजीवन अब सरहदों को पार कर वैश्विक पटल पर अपनी चमक बिखेरने को तैयार है। स्पेन के मशहूर प्रोडक्शन हाउस कलर्स क्युनिकेशन ग्रुप (RTVV) द्वारा निर्मित इंटरनेशनल सीरीज रूरल टूरिज्म ऑफ द वर्ल्ड की शूटिंग इन दिनों प्रदेश (MP Tourism) के विभिन्न अंचलों में जारी है। यह सीरीज जब दुनिया के 80 से अधिक देशों में प्रसारित होगी, तो मध्यप्रदेश का 'अतिथि देवो भव:' वाला अंदाज सात समंदर पार गूंजेगा। स्पेनिश क्रू ने अपनी इस डॉक्यूमेंट्री (MP Tourism) में एमपी की विविधता को पिरोने के लिए यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों से लेकर अनछुए ग्रामीण अंचलों तक का सफर तय किया है। प्रमुख शूटिंग लोकेशंस भोपाल- मेंबड़ा तालाब, जगदीशपुर और पुरानी हवेली के दृश्य शूट किए गए हैं।  रायसेन व सीहोर: मेंसांची स्तूप, तवा डैम और मढ़ई में भी गई टीम। महेश्वर व मांडू: में नर्मदा घाट और ऐतिहासिक किले भी आए पसंद। भेड़ाघाट:मेंधुआंधार जलप्रपात और ग्रामीण जीवन ने किया आकर्षित। कैमरे में कैद एमपी की रूह सांची और भीमबेटका: इस TV सीरीज (MP Tourism) के लिए क्रू ने प्राचीन इतिहास और पुरापाषाण काल के शैलचित्रों से प्रदेश की ऐतिहासिक गहराई को फिल्माया गया है। सतपुड़ा और पचमढ़ी: सीरीज में एमपी के सतपुड़ा और पचमढ़ी की बोट सफारी और घने जंगलों के जरिए वन्यजीव पर्यटन की वैश्विक संभावनाओं को उभारा गया है। महाकाल की नगरी: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर (MP Tourism) की आध्यात्मिक भव्यता इस सीरीज का एक प्रमुख आकर्षण होगी। क्रू का जीता दिल वहीं स्पेनी फिल्म डायरेक्टर जुआन फ्रूटोस ने तामिया, साबरवानी और धुसावानी जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के बीच रहकर हुए अपने अनुभवों को जादुई बताया। उन्होंने कहा कि अगर आप असली भारत को समझना चाहते हैं, तो यहां आना ही होगा। यहां की गोंड पेंटिंग, स्थानीय खान-पान और होमस्टे के खास अनुभवों ने अंतरराष्ट्रीय टीम को काफी प्रभावित किया है। स्पेन के साथ हुए MOU का नतीजा यह स्पेन के साथ हुए एमओयू का बड़ा नतीजा (MP Tourism) है। एमपी अब केवल घूमने के लिए नहीं, बल्कि शूटिंग के लिए भी दुनिया की पसंद बनता जा रहा है। आने वाले समय में ऐसे कई और वैश्विक फिल्म एवं कंटेंट प्रोडक्शन प्रोजेक्ट्स देखने को मिलेंगे। -डॉ. इलैयाराजा टी., प्रबंध संचालक, एमपीटीबी

एशियाई मंच पर चमकी छत्तीसगढ़ की बेटी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी ज्ञानेश्वरी यादव को बधाई

रायपुर राजनांदगांव की युवा वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव ने सीनियर एशियाई वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। 53 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करते हुए ज्ञानेश्वरी ने सिल्वर और कांस्य पदक अपने नाम कर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया। उनकी इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने उन्हें बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। ज्ञानेश्वरी यादव ने प्रतियोगिता में स्नैच में 88 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 106 किलोग्राम वजन उठाकर कुल 194 किलोग्राम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके इस दमदार प्रदर्शन ने खेल जगत में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा को नई पहचान दिलाई है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव की सफलता पूरे प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणादायक है। सीमित संसाधनों के बावजूद मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो उपलब्धि हासिल की है, वह छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास के लिए गौरव का क्षण है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ज्ञानेश्वरी आने वाले समय में देश के लिए और भी बड़े कीर्तिमान स्थापित करेंगी।

बंगाल की राजनीति में हलचल: शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम छोड़ने का किया ऐलान

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों पर जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्हें एक सीट खाली करनी थी. उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी है, वह भवानीपुर सीट से ही विधायक रहेंगे. उन्होंने विधानसभा में भवानीपुर विधायक के रूप में शपथ ली है. बता दें कि इस सीट पर उन्होंने बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया था।  दोनों सीटों से जीतने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि मैं 10 दिनों के भीतर एक सीट छोड़ दूंगा. हालांकि उन्होंने कहा था कि कौन सी सीट मुझे रखनी है, इसका निर्णय पार्टी करेगी. मेरी अपनी राय जरूर होगी, जिसे मैं नेतृत्व के सामने रखूंगा।  सुवेंदु बोले, नंदीग्राम से किया गया वादा भी पूरा करता रहूंगा विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि नंदीग्राम से अब किसी अन्य उम्मीदवार को उपचुनाव के जरिए विधायक चुना जाएगा. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नंदीग्राम की जनता को उनकी कमी महसूस नहीं होगी. अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि वे मुख्यमंत्री के रूप में पूरे पश्चिम बंगाल के साथ-साथ नंदीग्राम के लोगों से किए गए हर विकास वादे को पूरा करेंगे। सुवेंदु बोले- नंदीग्राम से उनका अलग रिश्ता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि नंदीग्राम उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय रहा है. उन्होंने 2008 के नंदीग्राम आंदोलन और पुलिस गोलीकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी उन्होंने क्षेत्र के लोगों के साथ खड़े होकर संघर्ष किया था. उन्होंने याद दिलाया कि 2009 से 2016 तक तृणमूल कांग्रेस की विधायक रहीं फिरोजा बीबी को उन्होंने लगातार समर्थन दिया था, जबकि वे स्वयं उस सीट के विधायक नहीं थे. इस बार भी, विधायक पद छोड़ने के बावजूद, नंदीग्राम के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह समर्पित रहेंगे।  ममता बनर्जी को हराकर भवानीपुर से जीते हैं सुवेंदु हालिया चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर सीट पर उन्हें 15,105 वोटों के अंतर से हराया. वहीं नंदीग्राम में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार पवित्र कर को 9,665 वोटों से पराजित किया. भवानीपुर सीट को बनाए रखने के फैसले को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह वही सीट है जिसे लंबे समय तक ममता बनर्जी का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है. सुवेंदु अधिकारी के इस फैसले से अब नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव होना तय है, जिस पर पूरे राज्य की नजरें टिकी रहेंगी।  नंदीग्राम सीट पर कितने वोटों से जीते थे शुभेंदु? शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर टीएमसी के पबित्र कर को हराया था. बीजेपी कैंडिडेट अधिकारी को इस सीट पर 127301 वोट मिले थे, जबकि टीएमसी कैंडिडेट पबित्र कर को 117636 वोट मिले थे. वहीं तीसरे नंबर पर सीपीआई के संती गोपाल गिरी थे, जिन्हें करीब तीन हजार वोट मिले थे. जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार शेख जरितुल हुसैन 5वें नंबर पर थे और उन्हें सिर्फ 794 वोट मिले थे।  भवानीपुर में शुभेंदु को कितने वोट मिले थे? शुभेंदु अधिकारी ने 2021 के चुनावों में बीजेपी की टिकट पर नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था, उनकी पार्टी को राज्य में बहुमत तो मिला था, लेकिन वह खुद चुनाव हार गई थीं, जिसके बाद भवानीपुर सीट को खाली कराया गया और ममता बनर्जी यहां से चुनाव जीतकर विधायक बनीं थीं. 2026 में एक बार फिर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को चुनाव में पटखनी दे दी. इस चुनाव में शुभेंदु को 73917  वोट मिले थे, जबकि ममता बनर्जी को 58812 वोट मिले. शुभेंदु ने ममता को भवानीपुर में 15105 वोटों से हराया।  नंदीग्राम सीट कितनी महत्वपूर्ण? बंगाल की नंदीग्राम सीट ममता बनर्जी का गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछला चुनाव हारने के बाद ममता ने इस सीट की ओर मुड़कर नहीं देखा. इस सीट को शुभेंदु अधिकारी भी अपना गढ़ मानते हैं. ये उनके राजनीतिक करियर का केंद्र रहा है. साल 2007 में भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ आंदोलन को उन्होंने लीड किया था। 

कोरोना के बाद नया खतरा? जानिए हंतावायरस कितना खतरनाक है और इसका इलाज कैसे होगा

 नई दिल्ली हंतावायरस से प्रभावित लग्जरी क्रूज शिप एमवी होंडियस की घटना ने दुनिया भर में चिंता पैदा कर दी है. कुछ लोग इसे कोविड-19 जैसी नई महामारी समझ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह बिल्कुल अलग है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख डॉ. टेड्रोस ने स्पष्ट कहा है कि यह कोविड-19 नहीं है. वर्तमान में हंतावायरस से पब्लिक हेल्थ का खतरा बहुत कम है।  हंतावायरस चूहों से इंसानों में फैलने वाला वायरस है. यह मुख्य रूप से दो प्रकार की बीमारियां पैदा करता है – एक फेफड़ों पर हमला करता है (Hantavirus Pulmonary Syndrome – HPS) और दूसरा किडनी को प्रभावित करता है. यह वायरस चूहों के मूत्र, लार और मल से फैलता है. जब ये सूखकर हवा में उड़ते हैं तो इंसान उन्हें सांस के साथ अंदर ले लेता है. कोविड-19 की तरह यह हवा में आसानी से नहीं फैलता।  कोविड-19 से सबसे बड़ा अंतर कोविड-19 हवा के जरिए बहुत तेजी से फैलता था. एक व्यक्ति से दूसरे में सामान्य बातचीत, खांसने या छींकने से भी संक्रमण हो जाता था. लेकिन हंतावायरस में इंसान से इंसान में संक्रमण बहुत दुर्लभ है. सिर्फ एंडीज स्ट्रेन ही इंसान से इंसान में फैलता है. यह तब होता है जब लंबे समय तक बहुत करीबी संपर्क हो, जैसे घर में साथ रहना या घनिष्ठ संबंध. सामान्य मिलने-जुलने से यह नहीं फैलता।  वैक्सीन अभी तक क्यों नहीं बना?  दुनिया भर में हर साल हंतावायरस से लगभग 60 हजार से एक लाख लोग संक्रमित होते हैं, फिर भी यूरोप, अमेरिका और लैटिन अमेरिका में अभी तक इसका कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इस वायरस के कारण होने वाली बीमारी बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर एंडीज स्ट्रेन जो 40 प्रतिशत तक मौत का कारण बन सकता है. हंतावायरस ने एक बार फिर इस सवाल को उठा दिया है कि क्या हमें महामारी आने से पहले ही टीका तैयार करना चाहिए। मॉडर्ना की कोशिश और प्रीक्लिनिकल स्टेज 2023 से अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना दक्षिण कोरिया की कोरिया यूनिवर्सिटी वैक्सीन इनोवेशन सेंटर के साथ mRNA Access प्रोग्राम के तहत काम कर रही है. इस साझेदारी की औपचारिक घोषणा 2024 में की गई थी. चूहों पर किए गए परीक्षणों में इस mRNA वैक्सीन ने अच्छे परिणाम दिखाए हैं. हालांकि, यह वैक्सीन अब भी प्रीक्लिनिकल स्टेज में है और ह्यूमन ट्रायल्स शुरू नहीं हुए हैं।  विशेष बात यह है कि यह वैक्सीन मुख्य रूप से हेमोरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) पैदा करने वाले स्ट्रेन पर काम कर रही है, न कि MV होंडियस क्रूज शिप वाले एंडीज स्ट्रेन पर, जो HPS (हंतावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम) का कारण बनता है।  क्रूज संकट के दौरान शेयरों में उछाल MV होंडियस क्रूज शिप पर हंतावायरस के मामले सामने आने के बाद जब मॉडर्ना की इस साझेदारी की खबर आई, तो कंपनी के शेयरों में करीब 10 प्रतिशत की तेजी आई. निवेशकों को उम्मीद है कि अगर भविष्य में बड़े पैमाने पर हंतावायरस का खतरा बढ़ा तो मॉडर्ना का mRNA प्लेटफॉर्म काम आ सकता है. लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि अभी तक यह सिर्फ शुरुआती चरण में है।  लक्षण और मौत का खतरा हंतावायरस के लक्षण शुरू में फ्लू जैसे होते हैं – बुखार, थकान, सिरदर्द. इसके 4-10 दिन बाद सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरना शुरू हो जाता है. HPS का मौत का दर करीब 40% है, जो कोविड-19 से ज्यादा है. लेकिन क्योंकि यह आसानी से नहीं फैलता, इसलिए बड़े स्तर पर फैलने का खतरा बहुत कम है. कोविड-19 का इनक्यूबेशन पीरियड 2-14 दिन था, जबकि हंतावायरस का 1-8 हफ्ते तक।  कोविड-19 से मिला सबक कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को सिखाया कि टीका बनाने का सबसे सही समय महामारी शुरू होने से पहले होता है. जब कोविड-19 आया तब mRNA टेक्नोलॉजी पहले से तैयार थी, जिसकी वजह से कुछ महीनों में ही वैक्सीन बन गई. हंतावायरस के मामले में भी यही स्थिति है. वैज्ञानिक सालों से इस पर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार फंडिंग और प्राथमिकता न मिलने के कारण प्रगति धीमी रही है।  दुनिया भर में स्थिति वर्तमान में कोई भी देश हंतावायरस का स्वीकृत टीका नहीं दे रहा है. कुछ देशों में शोध चल रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर उत्पादन और इमरजेंसी उपयोग की मंजूरी अभी दूर है. MV होंडियस वाली घटना ने वैश्विक स्तर पर इस दिशा में ध्यान खींचा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है कि हंतावायरस जैसे जानलेवा वायरस पर गंभीरता से निवेश किया जाए।  मॉडर्ना की यह कोशिश एक अच्छी शुरुआत है. अगर मानव परीक्षण सफल रहे तो mRNA आधारित हंतावायरस वैक्सीन बन सकती है. लेकिन इसमें अभी कई साल लग सकते हैं।  क्रूज शिप पर क्या हुआ? एमवी होंडियस क्रूज शिप पर कुल 11 मामले सामने आए हैं. तीन लोगों – एक डच जोड़े और एक जर्मन पर्यटक – की मौत हो चुकी है. शिप पर सवार सभी लोगों को उनके देशों में भेज दिया गया है. उन्हें क्वारंटाइन में रखा गया है. स्पेन, नीदरलैंड, अमेरिका समेत कई देशों में यात्री पहुंच चुके हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ यात्री अर्जेंटीना में शिप पर चढ़ने से पहले ही संक्रमित हो गए थे, क्योंकि वहां यह वायरस पहले से मौजूद है।  महामारी बनने का खतरा? विशेषज्ञों का साफ कहना है कि हंतावायरस से महामारी बनना लगभग असंभव है. क्योंकि इंसान से इंसान में फैलाव बहुत कम और सीमित है. WHO, ECDC और अन्य एजेंसियां इसे अच्छी तरह नियंत्रित करने में सक्षम हैं. कोविड-19 पूरी दुनिया में फैल गया था क्योंकि यह हवा में आसानी से घूमता था. हंतावायरस ऐसा नहीं है।  क्या सावधानी बरतनी चाहिए? जिन लोगों में लक्षण दिखें (बुखार, थकान, सांस लेने में दिक्कत) उन्हें तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. क्वारंटाइन का समय 6 हफ्ते तक रखा जा रहा है क्योंकि वायरस का इनक्यूबेशन लंबा है. हंतावायरस खतरनाक है, लेकिन इसका फैलाव कोविड-19 जैसा नहीं है. चूहों से बचाव, स्वच्छता और सतर्कता रखने से इसका खतरा बहुत कम किया जा सकता है. WHO और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार निगरानी कर रहे हैं। 

वैश्विक संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत: Morgan Stanley ने जताया भरोसा

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट टेंशन के बावजूद मॉर्गन स्टैनली ने भारत की FY27 (वित्त वर्ष 2026-27) के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत कर दिया है. यह आंकड़ा अप्रैल में दिए गए 6.2 प्रतिशत के पूर्वानुमान से ऊपर है. जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।  पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एनालिस्ट ने जानकारी दी है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही थमने के कारण तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. लेकिन मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि FY27 में भारत 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा. FY28 में यह ग्रोथ 7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।  अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा तेल की कीमतें जून 2026 तिमाही में सबसे हाई लेवल पर पहुंचने के बाद कम होने की उम्मीद है. शुरुआती तिमाही में विकास थोड़ा धीमा पड़ सकता है, लेकिन बाद में सुधार होगा. घरेलू मांग, निवेश और नीतिगत सहायता से अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा. मॉर्गन स्टैनली ने चेतावनी भी दी है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं तो विकास पर और ज्यादा दबाव पड़ सकता है।  ब्याज दरों बदलाव होने की संभावना कम मॉर्गन स्टैनली का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस वित्त वर्ष में ब्याज दरों को स्थिर रखेगा. RBI नीतिगत दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कुछ अन्य फैसले भी ले सकता है।  रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई पर कंट्रोल रखने और रुपये की स्थिरता बनाए रखने के लिए RBI सतर्क रहेगा. मिडिल ईस्ट संकट से ऊर्जा कीमतों में उछाल आने का खतरा है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है. फिर भी, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और घरेलू फैक्टर्स से भारत इस चुनौती का सामना कर सकता है।  भारत को मिलेंगी नई संभावनाएं इस संकट के बावजूद भारत की स्थिति अन्य देशों की तुलना में बेहतर है. मॉर्गन स्टैनली के अनुसार, निवेश बढ़कर जीडीपी का 37.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जिससे अगले पांच साल में अतिरिक्त 800 अरब डॉलर का पूंजी निवेश आ सकता है।  यह वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत को नई संभावनाएं देगा. मध्यम अवधि में 6.5 से 7 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखना संभव है. सरकार की सुधार नीतियां, इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर और घरेलू खपत इस विकास को और मजबूत बनाएंगी।  आरबीआई ने दी चेतावनी हालांकि, Reserve Bank of India (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा किसी भी संभावित आर्थिक झटके से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और वैश्विक हालात पर लगातार नजर रखे हुए है.  उन्होंने कहा कि आरबीआई अपनी मौद्रिक नीति के जरिए आर्थिक विकास को बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा।  आरबीआई गवर्नर ने चेतावनी दी कि अगर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है. इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।