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राजधानी भोपाल में बड़े बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी, हजारों पेड़ों की कटाई पर बढ़ी चिंता

भोपाल  भोपाल शहर में अभी अरेरा हिल्स की 45 साल पुरानी हरियाली में से 2000 पेड़ों को हटाने का मामला अभी ही रहा है कि ग्रामीण क्षेत्र में भी 45 हेक्टेयर वनक्षेत्र में से 3200 बड़े व दस हजार छोटे झाड़-झाड़ियों को खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी है। पश्चिमी बायपास प्रोजेक्ट में ये हरियाली खत्म करने की पटकथा लिख दी गई है। हालांकि इसके विरोध में आवाजें उठी और सरकार के पास 40 शिकायतें पहुंच गई है। स्थानीय लोगों का दबाव भी है और अब फिर डिजाइन बदलने पर विचार शुरू हो गया है। खासतौर पर समसगढ़ और इससे लगे क्षेत्र में वन व कैचमेंट को बचाने आवाज तेज हुई है। भानपुर केकड़िया से फंदा कलां तक कटेंगे पेड़ जबलपुर राजमार्ग स्थित भानपुर पश्चिम बायपास चार लेन पेव्हड शोल्डर प्रोजेक्ट है। भोपाल केकडिया से शुरू होकर भोपाल देवास मार्ग स्टेट हाईवे 28 के फंदा कलां पर जुड़ेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग 45 व 46 से आंकर इंदौर की ओर जाने वाले भारी वाहन शहरी क्षेत्र में प्रवेश किए बिना आवागमन कर सकेंगे। इसकी लंबाई 35.611 किमी. प्रस्तावित है। बायपास एक लेन पांच किमी लंबाई में वनक्षेत्र है। यहां सात स्थानों पर 610 मीटर लंबाई में वायडक्ट बनाया जाएगा, ताकि वन्यजीव ट्रैफिक से उलझे बिना निकल जाएं। वनक्षेत्र मार्ग निर्माण में 45 हेक्टेयर भूमि के साथ 3200 पेड़ प्रभावित होंगे। ऐसे समझें ग्रामवार जमीन व पेड़ -हेक्टयर निजी भूमि जबकि 7.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि है। भू अर्जन में चार भवन व 35 पेड़ प्रभावित होंगे। -भानपुर केकड़िया में 8.45 हेक्टेयर निजी व 8.38 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। -झागरिया खुर्द में 19.30 हेक्टेयर निजी जबकि 2.11 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित होगी। यहां आठ भवन व 40 पेड़ हटेंगे। -फंदा कलां में बड़ा तालाब वेटलैंड में पानी पहुंचाने वाले नाले हैं। यहां नालों पर ब्रिज व कल्वर्ट बनाना प्रस्तावित । -फंदाखुर्द में 1.75 हेक्टेयर निजी भूमि व 0.20 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां 20 पेड़ प्रभावित होंगे। -सरवर में 2.04 हेक्टेयर निजी व 0.55 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां एक भवन हटेगा। -समसपुरा में 7.02 हेक्टेयर निजी भूमि व 3.43 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। यहां तीन भवन व 54 पेड़ हटेंगे। -पिपलिया धाकड़ में 6.62 हेक्टेयर निजी भूमि व 1.01 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित होगी। एक भवन व 23 पेड़ हटेंगे। -थुआखेड़ा में 12.1284 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। -नरेला में 12.89 हेक्टेयर निजी व 0.65 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। दो भवन व 150 पेड़ हटेंगे। -मूंडला में 12.40 हेक्टेयर निजी व 0.75 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। दो भवन व 70 पेड़ हटेंगे। -आंवला में 15.28 हेक्टेयर निजी व 0.34 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। चार भवन व 50 पेड़ हटेंगे। -हताईखेड़ी में 3.85 हेक्टेयर निजी व 0.22 हेक्टेयर सरकारी जमीन प्रभावित। 50 पेड़ हटेंगे। -जाटखेड़ी में 7.72 निजी व 0.91 हेक्टेयर सरकारी भूमि प्रभावित। पश्चिम बायपास में वन व कैचमेंट का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा। पहले की डिजाइन में कम था। इसे पूरी तरह से वन व कैचमेंट से दूर करना चाहिए। हमने शिकायतें की है। मामले में कोर्ट में भी ले जाएंगे। – राशीदनूर खान, पर्यावरण एक्टिविस्ट  

वाटरशेड योजना बनी किसान छबी लाल की समृद्धि का आधार

  रायपु  प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत संचालित वाटरशेड विकास परियोजनाओं ने छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में कई किसानों की किस्मत बदल दी है। ये परियोजनाएं जो वर्षा जल संरक्षण और भूमि की उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित हैं, छोटे और सीमांत किसानों के लिए समृद्धि का मार्ग बन गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में संचालित वाटरशेड विकास योजना आज अनेक परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। धमतरी जिले के बेलौदी (विकासखंड-मगरलोड) निवासी एक छोटे से कृषक श्री छबी लाल इस योजना के सफल क्रियान्वयन की एक जीवंत और प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। पारंपरिक खेती से आधुनिक सब्जी उत्पादन तक का सफर पूर्व में श्री छबी लाल सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती पर निर्भर थे। सिंचाई के लिए वर्षा पर निर्भरता और तकनीकी जानकारी के अभाव के कारण उनकी आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रहती थी। वाटरशेड योजना के अंतर्गत आजीविका मद से प्राप्त सहयोग और कृषि विशेषज्ञों के तकनीकी मार्गदर्शन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्होंने अपनी लगभग 1.5 एकड़ भूमि में सब्जी उत्पादन का एक सफल और उन्नत मॉडल विकसित किया।  बदलाव की शुरुआत       आज वे अपने खेत में निम्नलिखित फसलों की सफल खेती कर रहे हैं, जिनमें सब्जियाँ बरबट्टी, भिंडी, करेला, भाटा (बैंगन) और गिल्की शामिल हैं। जल संरक्षण, नमी संरक्षण और बहुफसली चक्र का समावेश किया है। आर्थिक सशक्तिकरण और बेहतर जीवन स्तर           योजना के तहत मिली प्रोत्साहन राशि और जल प्रबंधन के कार्यों से खेत की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। श्री छबी लाल अब स्थानीय बाजारों में ताजी सब्जियों की निरंतर आपूर्ति कर रहे हैं, जिससे उन्हें नियमित और अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और जीवन स्तर में व्यापक सुधार आया है। भारत सरकार के सचिव ने थपथपाई पीठ          हाल ही में धमतरी प्रवास के दौरान भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (भूमि संसाधन विभाग) के सचिव श्री नरेन्द्र भूषण ने स्वयं श्री छबी लाल के प्रक्षेत्र (खेत) का अवलोकन किया। वाटरशेड योजना केवल जल एवं भूमि संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक प्रभावी माध्यम है।         किसान छबी लाल की यह सफलता साबित करती है कि यदि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, सही तकनीकी मार्गदर्शन और किसान की मेहनत एक साथ मिल जाए, तो ग्रामीण विकास की एक नई और सुनहरी तस्वीर गढ़ी जा सकती है।

अब सोमवार और शुक्रवार होगी वर्चुअल सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नया आदेश

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब सुप्रीम कोर्ट में भी दिखाई देने लगा है। देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए आदेश जारी किया है कि कोर्ट के स्टाफ सप्ताह में दो दिन घर से काम करेंगे। साथ ही कोर्ट की सुनवाई सोमवार, शुक्रवार को ऑनलाइन मोड में होगी। इसके साथ ही रजिस्ट्री से जुड़े 50 फीसदी कर्मचारियों को WFH करने का आदेश दिया गया है।  इसके तहत सोमवार और शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए मामलों की सुनवाई की जाएगी। वहीं, मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को वकीलों और याचिकाकर्ताओं के सामने विकल्प होगा कि वह फिजिकली या वर्चुअली पेश हो सकते हैं। कोर्ट ने आगे कहाकि जजों ने एकमत से फैसला लिया है कि ईंधन के पूरी तरह से सदुपयोग के लिए वह कार पूलिंग को बढ़ावा देंगे। दो दिन 50 फीसदी स्टाफ को WFH इसके अलावा, हफ्ते में दो दिन सभी रजिस्ट्री ब्रांच या सेक्शन के 50 फीसदी स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति होगी। इसके लिए वीकली रोस्टर तैयार किया जाएगा, ताकि कोर्ट का काम-काज प्रभावित न होने पाए। फैसले में आगे कहा गया है कि रजिस्ट्री अधिकारी वर्क फ्रॉम व्यवस्था को काम के हिसाब से बंद कर सकते हैं बदल सकते हैं। अगर उन्हें लगता है कि किसी खास ब्रांच में ऑफिस से ही काम करना जरूरी है तो इसके मुताबिक फैसला लिया जा सकता है। PM मोदी की अपील यह फैसला ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों को तेल का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक ही करने का आह्वान किया है। पश्चिम एशिया में मौजूद संकट और दुनिया में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते पीएम मोदी ने देश के नागरिकों से यह अपील की है। गौरतलब है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी गई है।

मॉनसून का इंतजार खत्म होने वाला है, जानिए कब बदलेगा मौसम का मिजाज

नई दिल्ली उत्तर भारत समेत देश के विभिन्न हिस्सों में कई दिनों तक बारिश होने के बाद एक बार फिर से भीषण गर्मी का दौर वापस लौट आया है। इसकी वजह से लोग मॉनसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अब यह इंतजार खत्म होने वाला है। दरअसल, मौसम विभाग (IMD) ने कहा है कि दक्षिण पश्चिम मॉनसून 26 मई को दस्तक दे सकता है। भारत में यह सबसे पहले केरल में आता है और इस बार 26 मई को यानी कि तय समय से पहले ही आने की संभावना है। हालांकि, मौसम विभाग ने इस तारीख में प्लस माइनस चार दिनों की संभावना जताई है। वहीं, अगले 24 घंटे में मॉनसून बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पहुंचने वाला है। मॉनसून के आने से पहले दक्षिण भारत में झमाझम बारिश शुरू हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पूरे हफ्ते के दौरान उत्तर पूर्वी भारत, अगले तीन चार दिनों के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल, माहे और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। केरल के जरिए मॉनसून के एंट्री लेने के बाद अगले एक महीने के भीतर यह अन्य राज्यों की ओर बढ़ेगा। भारत के निचले भाग से ऊपरी भाग की ओर मॉनसून बढ़ता जाएगा। आमतौर पर मॉनसून केरल में एक जून को पहुंचता है, लेकिन इस बार चार दिन पहले आने की संभावना है, जोकि किसी खुशखबरी से कम नहीं है। उत्तर भारत के मौसम का हाल उत्तर भारत की बात करें तो 15 व 16 मई को जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में छिटपुट से हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाओं के चलने की संभावना है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में व पूर्वी राजस्थान में 15 और 16 मई को छिटपुट हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने वाली हैं। इस दौरान आंधी की स्पीड 50 किमी प्रति घंटे रह सकती है। 15 मई को पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान में गरज के साथ आंधी आ सकती है। 15 मई को पश्चिमी राजस्थान में कुल इलाकों में धूलभरी आंधी चलने की संभावना है। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो 15-17 मई के दौरान नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में छिटपुट से लेकर काफी व्यापक स्तर पर हल्की से मध्यम बारिश, गरज, बिजली और तेज हवाओं के चलने की संभावना है। मॉनसून से पहले दक्षिण भारत में झमाझम बारिश इसके अलावा, मॉनसून के आगमन से पहले ही दक्षिण भारत में झमाझम बरसात हो रही है। 15-19 मई के दौरान केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा, आंतिरक कर्नाटक, लक्षद्वीप में 15-16 मई को छिअपुट से लेकर व्यापक स्तर पर गरज, बिजली और तेज हवाएं चलने वाली हैं। 15-17 मई के दौरान तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, 16-17 मई को केरल, माहे, 15 मई को लक्षद्वीप में और 15-18 मई के दौरान दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में अलग-अलग जगहों पर भारी बरसात की संभावना है। साथ ही, 15 मई को केरल, माहे में कुछ जगहों पर बहुत भारी बरसात होगी। 15 मई को आंतरिक कर्नाटक में कुछ जगह पर ओले गिरेंगे।

एक्सप्रेसवे से डिजिटल टेक्नोलॉजी तक, इंफ्रास्ट्रक्चर में नई छलांग लगा रहा मध्यप्रदेश

सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे, डिजिटल तकनीक से मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास को मिल रही नई गति : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी की विकसित भारत की परिकल्पना को साकार कर रहा मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान किया तैयार जीआईएस आधारित लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप किया गया विकसित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश आज अधोसंरचना विकास के क्षेत्र में तेजी से एक नई पहचान बना रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “विकसित भारत” की परिकल्पना को मध्यप्रदेश साकार कर रहा है। प्रदेश में अभूतपूर्व गति से सड़क, पुल, एक्सप्रेसवे और आधुनिक सार्वजनिक अधोसंरचना निर्माण हो रहा है। लोक निर्माण विभाग ने “लोक निर्माण से लोक कल्याण” को अपना मूल मंत्र बनाकर विकास को सीधे जनता की सुविधा, आर्थिक प्रगति और सामाजिक समृद्धि से जोड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मजबूत अधोसंरचना किसी भी विकसित राष्ट्र की सबसे बड़ी आवश्यकता होती है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देशभर में सड़क, रेलवे, एक्सप्रेसवे, लॉजिस्टिक नेटवर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक विस्तार हुआ है। प्रदेश में सड़क संपर्क, शहरी यातायात, औद्योगिक कनेक्टिविटी और ग्रामीण अधोसंरचना के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। वैज्ञानिक तरीके से तैयार हो रहा सड़क नेटवर्क मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के सड़क नेटवर्क को अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सड़क श्रेणियों के पुनर्गठन तथा रोड नेटवर्क रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, जिससे सड़क निर्माण और रखरखाव की प्राथमिकताएँ अधिक स्पष्ट हुई हैं। विभाग द्वारा “लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल ऐप” विकसित किया गया है। यह ऐप GIS आधारित तकनीक पर कार्य करता है और इसके माध्यम से प्रदेश में 71 हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों, लगभग 3 हजार भवनों तथा 1400 से अधिक पुलों का विस्तृत सर्वेक्षण किया जा चुका है। इस सर्वेक्षण से विभाग को अधोसंरचना की वास्तविक स्थिति का डिजिटल डेटा प्राप्त हुआ है, जिसके आधार पर योजनाएँ अधिक सटीक और व्यावहारिक तरीके से तैयार की जा रही हैं। रोड नेटवर्क मास्टर प्लान से बेहतर कनेक्टिविटी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया है। मास्टर प्लान के अंतर्गत शहरों के लिए बायपास मार्ग, औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बेहतर सड़क संपर्क, जिला मुख्यालयों के बीच तेज कनेक्टिविटी तथा यातायात दबाव कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही यात्रा दूरी और समय कम करने के उद्देश्य से 6 नए ग्रीनफील्ड सड़क मार्गों की पहचान की गई है। इन परियोजनाओं से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि एवं पर्यटन क्षेत्रों को नई गति मिलने की संभावना है। जीआईएस आधारित डिजिटल बजट प्रणाली से बढ़ी पारदर्शिता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था के अनुरूप लोक निर्माण विभाग ने जीआईएस आधारित बजट मॉड्यूल लागू किया है। इस प्रणाली से प्रत्येक सड़क प्रस्ताव को डिजिटल नक्शे पर दर्ज किया जाता है। इससे यह तुरंत स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित सड़क पहले से किसी अन्य योजना में शामिल है या नहीं। इस व्यवस्था ने योजनाओं में दोहराव को समाप्त करने के साथ विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया है। लोकपथ 2.0 : नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल सुविधा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोक निर्माण विभाग द्वारा विकसित “लोकपथ” ऐप को अब उन्नत स्वरूप में “लोकपथ 2.0” के रूप में विकसित किया गया है। यह ऐप नागरिकों के लिए स्मार्ट ट्रैवल गाइड की तरह कार्य कर रहा है। इस ऐप में रूट प्लानर, टोल जानकारी, अस्पताल एवं पेट्रोल पंप की लोकेशन, एसओएस सुविधा और सड़क दुर्घटना संभावित स्थानों की चेतावनी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। ऐप ब्लैक स्पॉट से लगभग 500 मीटर पहले अलर्ट जारी करता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में सहायता मिल रही है। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था, 25 ठेकेदार किये गये ब्लैक लिस्टेड मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की है। इसके अंतर्गत 875 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया गया। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर 25 ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट किया गया तथा कई मामलों में दंडात्मक कार्रवाई भी की गई। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम (PMS 2.0) लागू किया जा रहा है। इससे योजना निर्माण से लेकर भुगतान तक की संपूर्ण प्रक्रिया डिजिटल रूप से मॉनिटर की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण के साथ अधोसंरचना विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकास कार्यों को पर्यावरण संरक्षण के साथ जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान खुदाई से निर्मित गड्ढों को “लोक कल्याण सरोवर” के रूप में विकसित किया जा रहा है। अब तक 506 सरोवर तैयार किए जा चुके हैं और 600 नए सरोवर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही सड़क किनारे भूजल रिचार्ज व्यवस्था, फ्लाई-ओवर पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तथा ग्रीन बिल्डिंग निर्माण जैसे नवाचारों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग द्वारा शासकीय भवनों को ऊर्जा दक्ष, पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। तेजी से आगे बढ़ रहा सड़क और पुल निर्माण कार्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सड़क और पुल निर्माण कार्यों को अभूतपूर्व गति मिली है। वर्तमान में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत 77 हजार किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क विकसित किया जा चुका है। पिछले दो वर्षों में विभाग द्वारा 11,632 किलोमीटर सड़कों का निर्माण एवं मजबूतीकरण, 5,741 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण और 190 पुल एवं फ्लाईओवर का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त वर्तमान में 16,954 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य तथा 531 पुल एवं फ्लाईओवर परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। इन परियोजनाओं से प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुगम होगा तथा आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। एक्सप्रेस-वे और रिंग रोड परियोजनाओं से मिलेगा नया आयाम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में बड़े स्तर पर कनेक्टिविटी विस्तार के लिए 6 प्रमुख विकास पथ (एक्सप्रेसवे) परियोजनाओं पर कार्य प्रारंभ किया गया है। इसके साथ ही भोपाल, इंदौर, … Read more

भोजशाला फैसले के बाद फिर चर्चा में धार्मिक विवाद, जानिए देश के बड़े मंदिर-मस्जिद केस

धार मध्य प्रदेश के धार में स्थित भोजशाला के संबंध में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष को बड़ी राहत दी है. कोर्ट का यह मानना है कि भोजशाला मूल रूप से एक मंदिर है. भोजशाला कमाल मौला मस्जिद विवाद की सुनवाई हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के सामने हुई. इसने पूरे भारत में चल रहे कई मंदिर मस्जिद के  विवादों पर राष्ट्रीय बहस को एक बार फिर से तेज कर दिया है. बीते कुछ सालों में देशभर की अदालतों में ऐसी याचिकाओं में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है जिनमें हिंदू संगठन और याचिकाकर्ताओं ने यह दावा किया है कि प्राचीन मंदिरों को तोड़कर कथित तौर पर मस्जिद या फिर दरगाह बनाई गई थीं. आइए जानते हैं उन सभी विवादों के बारे में।  ज्ञानवापी मस्जिद मामला     धार भोजशाला को कोर्ट ने मंदिर माना, हिंदू पक्ष को मिली राहत।     ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में ASI सर्वे, पूजा की अनुमति मिली।     मथुरा कृष्ण जन्मभूमि, संभल-लखनऊ मस्जिद पर भी चल रहे विवाद।     पूजा स्थल अधिनियम 1991 इन मामलों में बड़ी कानूनी बाधा।     अजमेर दरगाह, कुतुब मीनार पर भी हिंदू मंदिरों पर निर्माण के दावे। इस समय चल रहे सबसे चर्चित विवादों में से एक वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा है. हिंदू पक्ष का यह कहना है कि मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मूल काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़ दिया गया था और उसके बाद उसी जगह पर मस्जिद बनाई गई थी।  यह मामला तब और तेज हो गया जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के एक सर्वे में कथित तौर पर मस्जिद परिसर के नीचे एक बड़े हिंदू मंदिर से जुड़े अवशेष, खंभे, नक्काशी और ढांचागत सबूत मिले. अदालत ने परिसर के अंदर व्यास जी का तहखाना क्षेत्र में हिंदू पूजा पाठ की भी अनुमति दे दी है. इससे यह विवाद इस समय न्यायपालिका के सामने मौजूद सबसे संवेदनशील धार्मिक मामलों में से एक बन गया है।  मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि  एक और बड़ी कानूनी लड़ाई श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर से सटे शाही ईदगाह मस्जिद के आसपास चल रही है. याचिकाकर्ताओं का यह दावा है कि ईदगाह का निर्माण प्राचीन केशवदेव मंदिर को तोड़ने के बाद किया गया था. इसे भगवान कृष्ण का जन्म स्थान माना जाता है. मस्जिद के ढांचे को हटाने और उस जगह का वैज्ञानिक सर्वे करने की मांग वाली कई याचिका इस समय इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित हैं. अयोध्या और ज्ञानवापी के बाद यह मामला सबसे बड़े धार्मिक संपत्ति विवादों में से एक बनकर उभरा है।  संभल और लखनऊ मस्जिद विवाद  शाही जामा मस्जिद विवाद भी तब विवादों में आ गया जब यह दावा सामने आया की मस्जिद का निर्माण श्री हरिहर मंदिर के ऊपर किया गया था. यह मंदिर कल्कि पूजा परंपराओं से जुड़ा है. एक स्थानीय अदालत के आदेश के बाद एक एडवोकेट कमिश्नर ने मस्जिद परिसर का सर्वे किया. इस पर मुस्लिम पक्ष ने कड़ा विरोध जताया।  इसी तरह टीला वाली मस्जिद के मामले में भी कानूनी कार्रवाई चल रही है. हिंदू याचिकाकर्ताओं का यह तर्क है कि यह ढांचा लक्ष्मण टीला पर स्थित प्राचीन शेषनागेश्वर तिलेश्वर महादेव मंदिर के ऊपर बना है. वैज्ञानिक सर्वे और मंदिर की बहाली की मांग वाली याचिकाएं अभी विचाराधीन हैं।  अजमेर दरगाह और कुतुब मीनार का मामला  राजस्थान में अजमेर शरीफ दरगाह और उसके पास स्थित अढ़ाई दिन का झोपड़ा को लेकर याचिकाएं दायर की गई हैं. हिंदू संगठनों का यह दावा है कि इन ढांचों का निर्माण प्राचीन हिंदू धार्मिक और शैक्षणिक परिसरों को तोड़कर किया गया था और वह भगवान शिव की पूजा और संस्कृत शिक्षा से जुड़े थे।  इसी के साथ दिल्ली में कुतुब मीनार परिसर के अंदर स्थित कुव्वत उल इस्लाम मस्जिद से जुड़ी याचिकाएं लगातार कानूनी ध्यान आकर्षित कर रही हैं. याचिकाकर्ता अक्सर उन शिलालेखों का हवाला देते हैं जिनमें कथित तौर पर यह जिक्र है कि मस्जिद के निर्माण में 27 हिंदू और जैन मंदिरों की सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।  क्या है सबसे बड़ी कानूनी बाधा?  इन सब मामलों में पूजा स्थल अधिनियम 1991 सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है. यह कानून किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक स्वरूप को बदलने पर रोक लगाता है, जैसा कि वह 15 अगस्त 1947 को मौजूद था. हालांकि अदालतें इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या विवादित धार्मिक ढांचे के ऐतिहासिक स्वरूप का सर्वे और जांच करना इस अधिनियम के तहत कानूनी रूप से लीगल है या फिर नहीं। 

तीन दिवसीय सोलर एक्सपो का भोपाल में किया शुभारंभ

भोपाल  नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्रीराकेश शुक्ला ने कहा हैं कि प्रदेश एवं देश तेजी से ग्रीन एनर्जी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आने वाला समय सौर ऊर्जा का है। उन्होंने कहा कि सोलर ऊर्जा न केवल बिजली व्यय को कम करने में सहायक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मंत्रीशुक्ला शुक्रवार को भोपाल में आयोजित तीन दिवसीय "सोलर एक्सपो 2026” के शुभारंभ समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। मंत्रीशुक्ला ने सोलर एक्सपो में नागरिकों से स्वच्छ एवं किफायती ऊर्जा के रूप में सौर ऊर्जा को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने एक्सपो में ऊर्जा विकास निगम सहित विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर पीएम सूर्य घर योजना सहित अन्य सौर ऊर्जा योजनाओं की जानकारी प्राप्त की तथा वेंडर्स से संवाद किया। एक्सपो में बड़ी संख्या में नागरिकों ने सहभागिता कर सौर ऊर्जा तकनीकों, बिजली बचत के उपायों एवं शासकीय योजनाओं के संबंध में जानकारी हासिल की।एक्सपो का उद्देश्य नागरिकों में सौर ऊर्जा के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। भोपाल में आयोजित 3 दिवसीय सोलर एक्सपो में सौर ऊर्जा से संबंधित नवीन तकनीकों, उपकरणों एवं शासकीय योजनाओं की जानकारी प्रदर्शित की गई।  

विराट कोहली ने भविष्य को लेकर दिए संकेत, 2027 वर्ल्ड कप पर कही बड़ी बात

मुंबई  विराट कोहली अब इंटरनेशनल क्रिकेट में सिर्फ वनडे खेलते हैं, वह टी20 और टेस्ट से संन्यास ले चुके हैं. उनको लेकर अक्सर चर्चा होती है कि क्या वह 2027 वनडे वर्ल्ड कप में खेलेंगे? इस पर खुद कोहली की प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने बिना किसी के नाम लिए कहा कि अगर उन्हें काबिलियत साबित करनी होगी, ऐसा एहसास दिलाया जाए तो मैं उस जगह पर नहीं रहूंगा. बता दें कि कुछ समय पहले खबर आई थी कि BCCI ने सीनियर खिलाड़ियों से कहा है कि अगर नेशनल टीम में खेलना है तो डोमेस्टिक भी खेलना होगा. कोहली ने इस इंटरव्यू में ये भी बताया कि वह विजय हजारे ट्रॉफी में क्यों खेले थे।  रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के यूट्यूब चैनल पर मयंती लैंगर के साथ इंटरव्यू में विराट कोहली ने ये बाते कहीं. उनसे जब पूछा गया कि अभी वह अपने करियर के किस दौर से गुजर रहे हैं? तो उन्होंने कहा, "मैं ऐसे मुकाम पर पहुंच गया जहां मैं जान चुका हूं कि आप रिकॉर्ड बनाते हो, अच्छी पारी खेलते हो लेकिन कल आपको फिर से शुरू करना होगा. आप लक्ष्य बनाते हो और लगता है कि वहां तक पहुंच जाओ तो सब ठीक हो जाएगा, लेकिन फिर हासिल हो जाए तो पता चलता है कि ये खत्म नहीं हुआ है।  मयंती ने उनसे 2027 वर्ल्ड कप में खेलने या नहीं खेलने को लेकर हो रही बहस के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, "मेरा नजरिया साफ है. मैं जिस माहौल का हिस्सा हूं, उसमे योगदान दे सकता हूं तो मुझे जरूर पहचाना जाएगा. लेकिन अगर मुझे ऐसा महसूस करवाया जाए कि मुझे अपनी काबिलियत और अहमियत साबित करनी होगी, तो मैं उस जगह पर नहीं रहूंगा क्योंकि मैं तो अपनी तैयारी के प्रति पूरा ईमानदार हूं. मैं कड़ी मेहनत करता हूं और भगवान का शुक्रगुजार हूं जो क्रिकेट से मुझे इतना कुछ मिला है. और जब मैं मैदान पर खेलने उतरता हूं तो अपना 100 प्रतिशत देता हूं। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जल जीवन मिशन बना ग्रामीण बदलाव का आधार

जब पानी घर पहुंचा, तब बदली ग्राम कंधारी की तस्वीर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जल जीवन मिशन बना ग्रामीण बदलाव का आधार मंत्री  उइके के मार्गदर्शन में बसई समूह जल प्रदाय योजना से बदला हजारों लोगों का जीवन भोपाल कभी पानी के लिए घंटों इंतजार, हैंडपंपों पर लंबी कतारें और दूर-दूर तक बर्तनों के साथ पानी की तलाश में जाती महिलाएं ग्राम कंधारी की पहचान हुआ करती थीं। गर्मी का मौसम आते ही गांव में पेयजल संकट और गहरा जाता था। कई परिवारों का पूरा दिन पानी की व्यवस्था करने में ही बीत जाता था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और महिलाओं की दिनचर्या ही बदल जाती थी। आज वही ग्राम कंधारी बदलती ग्रामीण तस्वीर का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है, जहां घर-घर पहुंचता शुद्ध पेयजल लोगों के जीवन में सहजता, सम्मान और विश्वास लेकर आया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण अधोसंरचना को जनजीवन से जोड़ते हुए ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है, जिनका सीधा प्रभाव आम नागरिकों के जीवन पर दिखाई दे। जल जीवन मिशन अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित बसई समूह जल प्रदाय योजना ने दतिया जिले के ग्राम कंधारी सहित क्षेत्र के अनेक गांवों में इसी परिवर्तन को वास्तविक रूप दिया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके के सतत मार्गदर्शन और नियमित मॉनिटरिंग के कारण योजना का लाभ अंतिम छोर तक रहने वाले परिवारों तक पहुंच रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में हर परिवार तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा योजनाओं की गुणवत्ता और नियमित संचालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि जल जीवन मिशन महिलाओं के जीवन में सबसे बड़ा सकारात्मक बदलाव लेकर आया है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की स्थिति मजबूत हुई है। बसई समूह जल प्रदाय योजना लगभग 52.26 करोड़ रूपये की लागत से विकसित की गई। योजना के माध्यम से दतिया एवं भांडेर क्षेत्र के 32 गांवों तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। योजना के क्रियान्वयन के बाद ग्राम कंधारी में हर घर नल कनेक्शन के जरिए नियमित जल आपूर्ति शुरू हुई, जिससे ग्रामीण जीवन की पूरी तस्वीर बदल गई। करीब 352 परिवारों वाले ग्राम कंधारी में पहले पेयजल की समस्या सबसे बड़ी चुनौती थी। गांव में सीमित हैंडपंप होने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था। कई बार महिलाओं और बच्चों को दूरस्थ स्थानों तक जाकर पानी लाना पड़ता था। पानी की गुणवत्ता भी बेहतर नहीं थी, जिससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी रहती थीं। गांव के लोगों के लिए पानी केवल जरूरत नहीं, बल्कि रोजाना संघर्ष का विषय था। योजना शुरू होने के बाद गांव में बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिला। अब घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को सबसे अधिक राहत मिली है। पहले जहां दिन का अधिकतम समय पानी जुटाने में निकल जाता था, वहीं अब वे परिवार और अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त समय दे पा रही हैं। बच्चों को भी राहत मिली है और उनको पढ़ाई के लिए समय मिलने लगा है। गांव में स्वच्छता की स्थिति बेहतर हुई है तथा जलजनित बीमारियों में कमी आई है। ग्रामीणों के जीवन स्तर में यह बदलाव स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। ग्राम कंधारी की यह कहानी केवल एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस बदलते मध्यप्रदेश की तस्वीर है, जहां विकास योजनाएं आंकड़ों से आगे बढ़कर लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं। जल जीवन मिशन के माध्यम से गांवों तक पहुंच रहा शुद्ध पेयजल अब ग्रामीण सम्मान, स्वास्थ्य सुरक्षा और बेहतर भविष्य की नई पहचान बन चुका है।  

UAE के बड़े फैसले से बदलेंगे तेल समीकरण! भारत को दिखा बड़ा लाभ

नई दिल्ली संयुक्त अरब अमीरात ने पिछले दिनों तेल उत्पादक मुस्लिम देशों के संगठन ओपेक से खुद को अलग कर लिया था। उसका कहना था कि इस संगठन में रहते हुए उसके ऊपर तेल उत्पादन की सीमा तय करने को लेकर बंधन रहता है। ऐसे में वह इससे बाहर रहना ही ठीक समझ रहा है। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी यूएई दौरे पर 15 मई को पहुंचने वाले हैं। उससे पहले यूएई स्थित भारतीय राजदूत दीपक मित्तल का कहना है कि इससे हमें फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भारत की ऊर्जा सुरक्षा यूएई के साथ संबंध बेहतर होने से बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अब यदि यूएई की ओर से तेल उत्पादन में इजाफा होगा तो इसका फायदा हमें सीधे तौर पर मिलेगा। इसके अलावा हम अपने ऊर्जा स्रोतों का विविधिकरण भी कर सकेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे से पहले उन्होंने कहा कि हमारी संयुक्त अरब अमीरात के साथ साझेदारी तेजी से बढ़ रही है। अब हम अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता ला रहे हैं और अलग-अलग देशों से खरीद बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत भी एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर में तेजी से इजाफा कर रहा है। हमारी ओर से पाइपलाइन नेटवर्क को बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा एलपीजी, कच्चा तेल, एलएनजी की स्टोरेज के लिए भी हम क्षमता तेजी से बढ़ा रहे हैं। मित्तल ने कहा, 'संयुक्त अरब अमीरात हमारे लिए महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। पिछले साल भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाले देशों में यूएई चौथे स्थान पर था। भारत के कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 11 फीसदी थी। इसके अलावा पिछले 6 से 7 सालों में वह एलएनजी का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है।' दीपक मित्तल ने कहा कि यूएई ने जब ओपेक से बाहर निकलने का फैसला लिया है तो वह अपने लिए बाहर भी अवसरों की तलाश कर रहा होगा। उसने उत्पादन में इजाफा किया तो भारत एक खरीददार के तौर पर उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने हमेशा ही अच्छे नेटवर्क को प्राथमिकता दी है। सऊदी अरब से किन मतभेदों के चलते OPEC से निकला UAE उन्होंने कहा कि हम अपने रणनीतिक स्टोरेज में इजाफा कर रहे हैं। कच्चे तेल के अलावा हम गैस, एलपीजी और पीएनजी की स्टोरेज भी बढ़ाना चाहते हैं। बता दें कि इसी महीने की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात ने ओपेक से बाहर निकलने का फैसला लिया था। इस तरह उसने दशकों से सऊदी अरब के साथ चले आ रहे मतभेदों को खत्म कर दिया था। दरअसल सऊदी अरब की ओपेक में ज्यादा पकड़ मानी जाती है। अकसर वह तेल उत्पादन घटाने और बढ़ाने के एकतरफा फैसलों की बात करता था। यह स्थिति यूएई को असहज करने वाली थी।