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तेंदूपत्ता संग्रहण में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने वन विभाग की अनूठी पहल

सुरक्षा संदेश युक्त मास्क वितरण एवं जनजागरूकता अभियान भोपाल दक्षिण सामान्य वनमण्डल बालाघाट द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन के दौरान संग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष (ह्युमन वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट) की घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से विशेष जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत तेंदूपत्ता संग्राहकों के बीच सुरक्षा संदेशों से मुद्रित मास्क वितरित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से जंगल में सुरक्षित व्यवहार एवं आवश्यक सावधानियों की जानकारी दी जा रही है। वन विभाग द्वारा बताया गया कि तेंदूपत्ता संग्रहण के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं वनाश्रित परिवार जंगल क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं। ऐसे समय में हिंसक वन्यप्राणियों की गतिविधियों वाले क्षेत्रों में सतर्कता अत्यंत आवश्यक होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा सुरक्षा संबंधी संदेशों को सरल एवं प्रभावी तरीके से जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह अभिनव पहल की गई है। वन विभाग द्वारा मास्क पर अंकित संदेशों के माध्यम से संग्राहकों को समूह में जाकर तेंदूपत्ता संग्रहण करने, सूर्योदय के पूर्व एवं सूर्यास्त के बाद जंगल में प्रवेश न करने, किसी क्षेत्र में हिंसक वन्यप्राणी की उपस्थिति दिखाई देने पर तत्काल विभाग को सूचना देने तथा अत्यधिक घने एवं संवेदनशील वन क्षेत्रों में संग्रहण से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही संग्रहण कार्य में विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील भी की गई है। वन विभाग के मैदानी अमले द्वारा गांवों एवं संग्रहण केंद्रों में लगातार संपर्क कर संग्राहकों को जागरूक किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य है कि जागरूकता, सतर्कता एवं सामूहिक सहभागिता के माध्यम से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके तथा तेंदूपत्ता संग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।  

अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए तैयार हो रहा मध्यप्रदेश

विश्वस्तरीय हॉकी सुविधाओं एवं अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित हो रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का हॉकी इंडिया प्रतिनिधिमंडल ने किया अवलोकन आधुनिक खेल अधोसंरचना से मध्यप्रदेश में खेल विकास को मिल रही नई दिशा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही एमपी हॉकी अकादमी भोपाल   खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा विकसित विश्वस्तरीय हॉकी अधोसंरचना एवं भोपाल स्थित बरखेड़ा नाथू में अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निर्माणाधीन सर्वसुविधायुक्त अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का हॉकी इंडिया के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल द्वारा अवलोकन एवं निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर खेल एवं युवा कल्याण संचालक श्री अंशुमान यादव के साथ हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह, कोषाध्यक्ष सेकर जे. मनोहरन तथा महानिदेशक कमांडर आर.के. श्रीवास्तव उपस्थित रहे। प्रतिनिधिमंडल ने हॉकी अकादमी में उपलब्ध अंतर्राष्ट्रीय स्तर की एस्ट्रोटर्फ सुविधाओं, आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान हॉकी इंडिया के पदाधिकारियों ने मध्यप्रदेश में विकसित की गई खेल सुविधाओं एवं अधोसंरचना की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में खिलाड़ियों को मिल रही विश्वस्तरीय सुविधाएं भारतीय हॉकी के भविष्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रतिनिधिमंडल ने बरखेड़ा नाथू में निर्माणाधीन सर्वसुविधायुक्त अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की प्रगति एवं वहां विकसित की जा रही आधुनिक खेल अधोसंरचना का भी अवलोकन किया। यह कॉम्प्लेक्स अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है, जहां भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन की व्यापक संभावनाएं निर्मित होंगी। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस प्रकार की अत्याधुनिक एवं समग्र खेल सुविधाएं खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण एवं प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगी। मध्यप्रदेश राज्य हॉकी अकादमी लगातार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही है। अकादमी के खिलाड़ियों ने विगत वर्षों में भारतीय टीम में स्थान बनाकर विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। जूनियर एवं सीनियर स्तर पर खिलाड़ियों की निरंतर सफलता यह प्रमाणित करती है कि मध्यप्रदेश देश में हॉकी प्रतिभाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है। प्रदेश में खेलों के विकास के लिये मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं सहकारिता खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग के नेतृत्व में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों, अनुभवी प्रशिक्षकों एवं उत्कृष्ट खेल वातावरण के कारण मध्यप्रदेश हॉकी सहित विभिन्न खेलों में स्वर्णिम उपलब्धियों की नई इबारत लिख रहा है। बरखेड़ा नाथू में निर्माणाधीन सर्वसुविधायुक्त अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तैयार होने के बाद मध्यप्रदेश में खेल विकास को एक नया आयाम प्राप्त होगा। इस अत्याधुनिक परिसर में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, आवास, फिटनेस, रिकवरी एवं प्रतियोगिताओं से संबंधित सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। साथ ही यह परिसर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित होगा, जिससे प्रदेश के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण एवं बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।  

‘पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा’ : दूरी, संसाधनों और आर्थिक अभाव को दूर कर सुनिश्चित कर रही है जीवनरक्षक उपचार

गंभीर मरीजों के लिए बनी नई उम्मीद अब तक 140 मरीज हो चुके हैं लाभान्वित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, त्वरित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के सुदृढ़ीकरण तथा दूरस्थ क्षेत्रों तक बेहतर उपचार की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा कई नवाचार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मई 2024 से प्रदेश में ‘पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा’ प्रारंभ की गई, जो आज गंभीर रूप से बीमार, दुर्घटना प्रभावित एवं आपदा पीड़ित मरीजों के लिए जीवनरक्षक पहल के रूप में स्थापित हो रही है। प्रदेश सरकार द्वारा प्रारंभ की गई यह महत्वाकांक्षी सेवा उन परिस्थितियों में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है, जब मरीज को "गोल्डन ऑवर" के भीतर उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थान तक पहुंचाना आवश्यक होता है। सेवा के अंतर्गत एक हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस तथा एक फिक्स्ड-विंग कन्वर्टेड फ्लाइंग एम्बुलेंस को प्रशिक्षित चिकित्सकीय और पैरामेडिकल टीम के साथ संचालित किया जा रहा है। यह व्यवस्था राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित मानकों और आपातकालीन चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुरूप कार्य कर रही है। एयर एम्बुलेंस के माध्यम से कम समय में उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे मरीजों की जान बचाने की संभावनाएं उल्लेखनीय रूप से बढ़ी हैं। प्रदेश सरकार द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि आर्थिक अभाव किसी भी मरीज के उपचार में बाधा नही बने। आयुष्मान भारत योजना के हितग्राहियों को प्रदेश के भीतर एवं बाहर स्थित सभी शासकीय तथा आयुष्मान मान्यता प्राप्त अस्पतालों तक एयर एम्बुलेंस सुविधा पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। इसका समस्त व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है। वहीं गैर-आयुष्मान श्रेणी के मरीजों को भी प्रदेश के भीतर शासकीय अस्पतालों तक यह सेवा नि:शुल्क प्रदान की जा रही है। सड़क दुर्घटना, औद्योगिक हादसों एवं आपदा प्रभावित मरीजों के लिए भी राज्य के भीतर और बाहर किसी भी शासकीय अथवा निजी अस्पताल तक नि:शुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मई 2024 से प्रारंभ इस सेवा से 140 मरीज लाभान्वित हो चुके हैं। अनेक गंभीर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में यह सेवा महत्वपूर्ण साबित हुई है। दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को मिल रही त्वरित चिकित्सा सहायता हाल ही में बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड के ग्राम देवरी बुजुर्ग निवासी चार माह के मासूम अयांश-मसराम के मामले ने इस सेवा की संवेदनशीलता और उपयोगिता को रेखांकित किया। गंभीर हृदय रोग से पीड़ित अयांश की पहचान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विशेष शिविर में की गई थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए महानगर में इलाज संभव नहीं था, लेकिन जिला प्रशासन की तत्परता और राज्य सरकार की संवेदनशील पहल के चलते बच्चे को पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से मुंबई स्थित नारायण हृदयालय भेजा गया, जहां उसका उपचार एवं आवश्यक सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत नि:शुल्क की जा रही है। बच्चे के परिजनों की भावुक प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि शासन की यह पहल केवल एक योजना नहीं, बल्कि जरूरतमंद परिवारों के लिए नई जिंदगी की उम्मीद बन रही है। संवेदनशील और सशक्त स्वास्थ्य व्यवस्था पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा न केवल आपातकालीन चिकित्सा परिवहन को नई दिशा दे रही है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि दूरी, संसाधनों की कमी या आर्थिक स्थिति किसी नागरिक के जीवनरक्षक उपचार में बाधा न बने। सिंगरौली निवासी 32 वर्षीय श्रीमती संध्या दुबे के मामले में भी पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा ने जीवनदायिनी भूमिका निभाई। गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं एवं सेप्टीसीमिया की स्थिति उत्पन्न होने पर जिला प्रशासन ने त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें एयरलिफ्ट कर एम्स भोपाल भेजा। ये उदाहरण स्पष्ट करते हैं कि मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक आधुनिक एवं त्वरित चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के लिए संकल्पित है।  

देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने प्रदेश की पहल को सराहा, पर्यावरण को मिलेगा संबल

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश में पेपरलेस कार्य संस्कृति को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। नागरिकों को एमपी ई-सेवा पोर्टल एवं मोबाइल ऐप पर सरकार के 56 विभागों की 1700 सेवाएं एक ही पोर्टल पर उपलब्ध हैं। प्रदेश में साइबर तहसीलों की स्थापना हो चुकी है। इस नवाचार को प्रधानमंत्री पुरस्कार भी मिल चुका है। भोपाल में देश के पहले साइबर पंजीयन कार्यालय की शुरुआत की गई है। प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर का भी शुभारंभ किया गया है। मंत्रि-परिषद की कार्यवाही पूर्णत: पेपरलैस हो चुकी है, जिससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता भी बढ़ी है। प्रदेश में सुशासन के साथ ग्रीन गवर्नेंस को भी बढ़ावा मिल रहा है। इन नवाचारों से प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं और जन सामान्य से जुड़ी सेवाओं तक आम आदमी की पहुंच को आसान और उनके उपयोग को सरल व सुगम बनाया जा रहा है। सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश-न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने जबलपुर के एक कार्यक्रम में प्रदेश में पेपर लैस कार्य प्रणाली को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, पूर्णत: पेपरलैस बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। इससे पर्यावरण को भी संबल मिलेगा। गुड गवर्नेंस के नए आयाम होंगे स्थापित प्रधानमंत्री श्री मोदी के सुशासन के मंत्र को आत्मसात करते हुए मिनिमम गवर्नमेंट- मैग्सिमम गवर्नेंस के मूल मंत्र के साथ मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश में गुड गवर्नेंस के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में सक्रिय हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कार्यालयों में फाइलों की मॉनिटरिंग, समयबद्ध निराकरण और उत्तरदायित्व सुनिश्चित हुआ है। इससे भ्रष्टाचार में कमी, पारदर्शिता में वृद्धि तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति आई है। लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। सीएम हेल्पलाइन नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित कर रही है। संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर सिस्टम के माध्यम से प्रदेश में रजिस्ट्री की सुविधा अब लोगों के लिए आसान हुई है। नागरिक अब घर बैठे दस्तावेज के पंजीयन करवा रहे हैं। वारंट और समन की तामील के लिए ई-तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। मध्यप्रदेश, ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य है। तकनीक के बदलते दौर में बदल रहा न्यायिक प्रशासन मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही, सुशासन के दो मजबूत स्तंभ हैं और एक -दूसरे के पूरक भी। पारदर्शिता से जवाबदेही मजबूत होती है और जवाबदेही स्वयं पारदर्शिता की कारक होती है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में डिजिटल क्रांति ने देश में सर्विस डिलीवरी और व्यवस्था की जवाबदेही को मजबूती दी है। तकनीक आज सामाजिक परिवर्तन के साथ व्यवस्था में बदलाव का भी प्रमुख कारक बन गई है। तकनीक के इस बदलते दौर में प्रदेश के न्यायालय तेजी से बदल रहे हैं। वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया कागजी अभिलेखों पर आधारित रही। एफआईआर से लेकर चार्जशीट, केस डायरी, मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट, समन, वारंट और अंतिम निर्णय हर चरण पर भौतिक दस्तावेजों का आदान-प्रदान होता था। अब डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के माध्यम से हम "एंड-टू-एंड ई-प्रोसीडिंग'' की ओर बढ़ रहे हैं। ई-फाइलिंग, ई-समन, डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) और इलेक्ट्रॉनिक डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं न्यायिक प्रशासन को अधिक कुशल बना रही हैं। महाधिवक्ता कार्यालय में भी पेपरलैस प्रणाली स्थापित करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। केस मैनेजमेंट, डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन केस ट्रैकिंग एवं विभागीय समन्वय के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। कानूनी जागरूकता बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकता मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपने अधिकारों को जानना जरूरी है। कमजोर वर्गों, महिलाओं और बुजुर्गों में कानूनी जागरूकता बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। कानून की भाषा ऐसी होनी चाहिए जो न्याय चाहने वाले व्यक्ति को सरलता से समझ में आ जाए। राज्य सरकार जन सामान्य में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर कार्यरत है। डिजिटल समय में कानूनी प्रक्रियाओं को डिजिटली सशक्त करने से न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक सशक्त और जीवंत बनाने में सहायक होगी।  

मुख्यमंत्री साय ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को सौंपी भूमि आबंटन आदेश की प्रति

सुशासन तिहार के दौरान वनांचल क्षेत्र के विकास और स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई गति रायपुर रायगढ़ जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र धरमजयगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम गंवरघुटरी अब स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल और राज्य शासन की जनकल्याणकारी सोच के परिणामस्वरूप यहां 100 बिस्तरों वाला अत्याधुनिक बहुउद्देशीय अस्पताल स्थापित किया जाएगा। इस अस्पताल के निर्माण से धरमजयगढ़ सहित आसपास के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले हजारों ग्रामीणों, विशेष रूप से आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार ग्राम गंवरघुटरी, तहसील धरमजयगढ़ की 2 हेक्टेयर भूमि 30 वर्ष की अस्थायी लीज पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को आबंटित की गई है। इस भूमि पर फाउंडेशन द्वारा गरीबों और जरूरतमंद लोगों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 100 बिस्तरों का अस्पताल बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शनिवार को प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत रायगढ़ जिले के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बिलासपुर संभाग के जांजगीर-चांपा, कोरबा और रायगढ़ जिलों की समीक्षा बैठक ली। समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन को भूमि आबंटन आदेश की प्रति सौंपते हुए कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक विकास और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय के साथ प्रदेश के वित्तमंत्री ओपी चौधरी, सांसद राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि विशेष तौर पर उपस्थित थे। उल्लखेनीय है कि यह अस्पताल क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का एक बड़ा केंद्र बनेगा। वर्तमान में धरमजयगढ़ और आसपास के कई ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को गंभीर बीमारी या विशेष उपचार के लिए रायगढ़, बिलासपुर अथवा अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक दोनों प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल बनने के बाद स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे ग्रामीणों को त्वरित उपचार मिल सकेगा। अस्पताल में सामान्य चिकित्सा, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, आपातकालीन उपचार, जांच सुविधाएं तथा अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध रहेगी। इससे वनांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर मजबूत होगा और ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा।   अस्पताल का संचालन गरीबों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जाएगा। शासन द्वारा निर्धारित शर्तों के अनुसार भूमि का उपयोग केवल अस्पताल एवं स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कार्यों के लिए ही किया जा सकेगा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों तथा अन्य वैधानिक प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा। शासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि भूमि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाए तथा समय-समय पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इसका निरीक्षण किया जाता रहे। राज्य शासन के इस फैसले का वनांचल क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे स्वास्थ्य सुविधाओं की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अस्पताल निर्माण से न केवल बेहतर उपचार सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि क्षेत्र में रोजगार और अन्य सामाजिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।  

मध्यप्रदेश के आमों की मिठास और विशालकाय नूरजहाँ की विश्व पहचान

प्रदेश का गौरव-किंग ऑफ मैंगो नूरजहाँ आम भोपाल भारत को आमों का देश कहा जाता है और मध्यप्रदेश इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला प्रमुख राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश की जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और विविध भौगोलिक परिस्थितियां आम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती हैं। यही कारण है कि यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा, केसर, आम्रपाली, अल्फांसो और तोतापरी जैसी अनेक प्रसिद्ध किस्मों के साथ-साथ एक ऐसी अनोखी किस्म भी पैदा होती है, जिसने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी विशेष पहचान बनाई है। यह विशेष किस्म है "नूरजहाँ'' आम। इसे "किंग ऑफ मैंगो" भी कहा जाता है। मध्यप्रदेश के जनजातीय बहुल आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पैदा होने वाला नूरजहाँ आम अपने विशाल आकार, अद्वितीय स्वाद और आकर्षक स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। इसे दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिना जाता है। सामान्यतः एक नूरजहाँ आम का वजन लगभग 2 से 5 किलोग्राम तक होता है। इसका आकार इतना बड़ा होता है कि एक ही आम पूरे परिवार के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसका रंग, सुगंध और मिठास लोगों को पहली नजर में आकर्षित कर लेते हैं। बाजार में इसकी मांग विशेष रूप से बड़े शहरों और विदेशों में अधिक है। एक आम की कीमत 1500 से 3000 तक होती है। "नूरजहाँ'' आम केवल अपने आकार के कारण ही नहीं, बल्कि अपनी दुर्लभता के कारण भी विशेष माना जाता है। इसके पेड़ों पर सीमित संख्या में फल आते हैं, इसलिए इसकी कीमत सामान्य आमों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। कई बार एक फल ही हजारों रुपये में बिक जाता है। यही कारण है कि यह आम किसानों के लिए लाभकारी फसल के रूप में उभर रहा है। कट्ठीवाड़ा का मौसम और वातावरण इस किस्म के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है, जिससे यहां पैदा होने वाले फल विशेष गुणवत्ता वाले होते हैं। माना जाता है कि नूरजहाँ आम की यह प्रजाति वर्षों पहले अफगान क्षेत्र से भारत पहुंची और बाद में पाँचवें – छठवें दशक में मध्यप्रदेश के मालवा तथा आदिवासी अंचल झाबुआ में विकसित हुई। आलीराजपुर जिले के ग्राम जूना कट्टीवाड़ा स्थित शिव (बावड़ी) आम फार्म के कृषक श्री भरतराजसिंह जादव बताते हैं कि उनके पिता स्व. रणवीरसिंह जादव लगभग 55 से 60 वर्ष पूर्व गुजरात के बनमाह क्षेत्र से नूरजहाँ आम का पौधा लेकर आए थे। उन्होंने अपने खेत में इस पौधे को लगाया और वर्षों की मेहनत से इसे संरक्षित किया। यही पौधा आगे चलकर पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया। श्री जादव के अनुसार उनके पिता ने ग्राफ्टिंग तकनीक से एक विशेष पौधा तैयार किया था, जिसकी वर्तमान आयु लगभग 20 से 25 वर्ष है। इसके अतिरिक्त स्वयं श्री भरतराजसिंह जादव द्वारा तैयार किए गए 11 ग्राफ्टेड पौधे आज 3 से 5 वर्ष की अवस्था में विकसित हो रहे हैं। आज यह मध्यप्रदेश की विशेष पहचान बन चुकी है। कट्टीवाड़ा क्षेत्र में नूरजहाँ आम की ख्याति वर्षों पुरानी है। इसकी विशिष्टता को देखते हुए वर्ष 1999 तथा 2010 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों ने न केवल किसानों का उत्साह बढ़ाया बल्कि आलीराजपुर जिले को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई। धीरे-धीरे यह आम मध्यप्रदेश की उद्यानिकी पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया। नूरजहाँ आम का इतिहास मालवा और पश्चिमी भारत की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि मुगलकाल में बड़े आकार और विशेष स्वाद वाले आमों को शाही बागों में विशेष महत्व दिया जाता था। इसी परंपरा से जुड़ी यह किस्म समय के साथ गुजरात और झाबुआ-आलीराजपुर अंचल तक पहुंची। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और तापमान नूरजहाँ के लिए अनुकूल सिद्ध हुए, जिसके कारण यह किस्म यहां अच्छी तरह विकसित हुई। झाबुआ और आलीराजपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका संरक्षण किसानों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी किया जाता रहा है। विदेशों में भी नूरजहाँ आम की विशेष मांग देखी जा रही है। विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में भारतीय प्रीमियम आमों की अच्छी मांग रहती है। वहां बड़े आकार और आकर्षक स्वरूप वाले फलों को विशेष पसंद किया जाता है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा तथा यूनाइटेड किंगडम में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी भारतीय आम अत्यंत लोकप्रिय हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में भी इसकी विशेष पहचान बन रही है। हालांकि नूरजहाँ आम का उत्पादन सीमित मात्रा में होता है, इसलिए इसका निर्यात बड़े पैमाने पर नहीं हो पाता, लेकिन इसकी विशिष्टता और दुर्लभता इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में “लक्ज़री मैंगो” की पहचान दिला रही है। विदेशी बाजारों में यह आम आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीकों, उन्नत पौधों, ड्रिप सिंचाई तथा फल प्रसंस्करण के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे प्रदेश में आम उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है। आज मध्यप्रदेश का आम केवल स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि, कृषि नवाचार और प्रदेश की वैश्विक पहचान का माध्यम बन चुका है।  

सड़क, बिजली और स्वास्थ्य क्षेत्र में बिहार को मिलेगी नई रफ्तार, अदाणी समूह करेगा भारी निवेश

पटना एशिया के प्रमुख उद्योगपति गौतम अदाणी ने कहा कि बिहार की प्रगति के लिए अदाणी सूमह 50-60 हजार करोड़ निवेश करेगा। बिजली, सड़क, शिक्षा, स्कूल और विश्वविद्यालय के क्षेत्र में भी अदाणी समूह कार्य करेगा। सरकार को सहयोग कर बिहार की प्रगति को बढ़ावा देने के लिए जो भी संभव हो किया जाएगा। गौतम अदाणी ने कहा कि यह निवेश बिहार में सड़क, शिक्षा, ऊर्जा, मल्‍टी मोडल लॉजिस्‍ट‍िक हब के साथ स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में किया जाएगा। इससे बिहार विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर होगा। बिहार में संसाधन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सड़क एवं औद्योगीकरण की जरूरत है। हर घर में 24 घंटे क‍िफायती दर पर बिजली की जरूरत है। अब बिहार विकसित होगा। रविवार की सुबह करीब 11 बजे सारण जिले के दरियापुर प्रखंड अंतर्गत मस्तीचक स्थित अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल में आयोजित कार्यक्रम में अदाणी पत्रकारों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रस्तावित “अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल – अदाणी सेंटर फॉर आई डिजीज़ेस” और “अखंड ज्योति आई हॉस्पिटल – अदाणी ट्रेनिंग सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक मेडिसिन” का भूमि पूजन और शिलान्यास किया। वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम में भक्ति, सेवा और आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का अनोखा संगम देखने को मिला।बिहार के सारण में बनने वाला यह अत्याधुनिक संस्थान नेत्र चिकित्सा, रिसर्च और मेडिकल प्रशिक्षण के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाएगा। यहां मरीजों को आधुनिक उपचार सुविधा उपलब्ध कराने के साथ डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे बिहार सहित पूर्वी भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। “यह तो बहुत अच्छा है…” प्रतिमा देख ठहर गए गौतम अदाणी अस्पताल परिसर में स्थापित पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की भव्य प्रतिमा ने गौतम अदाणी का विशेष ध्यान खींचा। प्रतिमा के सामने वे कुछ पल के लिए रुक गए और उसे गौर से निहारते रहे। आध्यात्मिक वातावरण से प्रभावित होकर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “यह तो बहुत अच्छा है।” उनके इस आत्मीय भाव ने वहां मौजूद लोगों को उत्साहित कर दिया। इसके बाद उन्होंने गायत्री मंदिर में पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की। शंख, नगाड़े और स्वागत गीत से गूंज उठा परिसर डॉ. प्रीति अदाणी के साथ पहुंचे गौतम अदाणी का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि शंखध्वनि और नगाड़ों की गूंज से पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा। अस्पताल के सीईओ और एक्जीक्यूटिव ट्रस्टी मृत्युंजय तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और अस्पताल परिवार के सदस्य मौजूद रहे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ भूमि-पूजन भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। देश के विभिन्न तीर्थ स्थलों से लाए गए गंगाजल और पवित्र मिट्टी को पूजन स्थल पर अर्पित किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार ईंट रखकर निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। इसके बाद गौतम अदाणी ने शिलापट्ट का अनावरण किया। आयोजन के दौरान पूरा परिसर श्रद्धा और उत्साह से सराबोर दिखा। नेत्र स्वास्थ्य और ग्रामीण सेवा अभियान को मिलेगी नई दिशा कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और कौशल विकास से जुड़ी नई योजनाओं की भी आधारशिला रखी गई। अस्पताल की ओर से मरीजों की चिकित्सा और परिवहन सुविधा के लिए दस बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। बताया गया कि ‘सेवा ही साधना है’ के उद्देश्य के साथ यह अभियान ग्रामीण इलाकों तक बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधा पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। कई गणमान्य लोग रहे मौजूद समारोह में प्रणव अडाणी, एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन रवि कांत, क्लिनिकल एवं रिसर्च एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन डॉ. राजवर्धन आज़ाद और मेडिकल डायरेक्टर डॉ. अजीत कुमार पोद्दार, अखंड ज्योति आई अस्पताल के सीईओ मृत्युंजय तिवारी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि यह परियोजना लाखों जरूरतमंद मरीजों के लिए वरदान साबित होगी और बिहार को नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।

विदेश में चमका पंजाब का नाम, UK में कुलविंदर सिंह मेयर तो प्रीत कौर बनीं हेल्थ मिनिस्टर

जालंधर. देश-विदेश में पंजाबी खूब नाम कमा रहे हैं। इसी बीच खबर सामने आई है कि मूल रूप से जालंधर के 2 सिखों ने UK की राजनीति में अपनी छाप छोड़ी है। जानकारी के अनुसार कुलविंदर सिंह जोहल (56) इंग्लैंड के लीसेस्टर के पहले पगड़ीधारी सिख मेयर बने हैं। वह फिल्लौर के गांव से संबंधित है। इसके साथ ही प्रीत कौर गिल जो कि जालंधर के जमशेर गांव संबंधित है को जूनियर स्वास्थ्य मंत्री नियुक्त किया गया है। UK में सिख समदाय से संबंधित व्यक्तियों को मिली इस जिम्मेदारी के बाद वहां बसे पंजाब लोगों में खुशी का माहौल है। बता दें कि कुलविंदर सिंह जोहल महज 6 वर्ष की उम्र में परिवार के साथ यू.के. आ गए थे। यहां करीब 25 साल तक उन्होंने एक फैक्ट्री में काम किया। मेयर चुने जाने पर उन्होंने साथी पार्षदों का आभाज जताया। वहीं प्रीत कौर गिल काफी समय से राजनीति में सक्रिय थी और 2017 में वह UK के इतिहास में पहली महिला ब्रिटिश सिख सांसद बनी थीं। वहीं अब उन्हें जूनियर स्वास्थ्य मंत्री नियुक्त किया गया है।

लंबित मामलों के बोझ को कम करने की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या

नई दिल्ली  देश की शीर्ष अदालत में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रविवार को केंद्रीय कैबिनेट के उस फैसले को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 38 (मुख्य न्यायाधीश सहित) कर दिया गया है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फैसले की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस अध्यादेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट अधिनियम, 1956 में संशोधन किया गया है। इसके तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। क्यों पड़ी जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत? सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य देश की सर्वोच्च अदालत को और अधिक मजबूत बनाना और आम जनता को जल्द से जल्द न्याय दिलाना है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 92,000 से अधिक हो गई है। इस वृद्धि को औपचारिक रूप देने के लिए कैबिनेट ने संसद में सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। क्या कहता है भारतीय संविधान? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत संसद को यह अधिकार दिया गया है कि वह कानून (कानूनी संशोधन) बनाकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या का निर्धारण कर सकती है। बढ़ते मुकदमों और काम के बोझ को देखते हुए पिछले कुछ दशकों में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या में कई बार बदलाव किए गए हैं। भारतीय सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या का इतिहास देश में बढ़ते मुकदमों और न्यायपालिका के विस्तार को दर्शाता है, जिसकी शुरुआत साल 1956 में मूल अधिनियम के तहत मुख्य न्यायाधीश के अलावा केवल 10 जजों की संख्या तय करने से हुई थी। इसके बाद, समय-समय पर बढ़ते कार्यभार को देखते हुए संसद ने इसमें बदलाव किए, जिसके तहत साल 1960 में जजों की संख्या बढ़ाकर 13, साल 1977 में 17 और साल 1986 में बढ़ाकर 25 कर दी गई। 21वीं सदी में मुकदमों के बढ़ते बोझ के कारण साल 2008 में इस स्वीकृत संख्या को 30 किया गया, जिसे आगे चलकर साल 2019 में आखिरी बार संशोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 34 कर दिया गया था। अब वर्तमान में, यानी साल 2026 में, लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और शीर्ष अदालत को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जजों की संख्या में फिर से बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर जजों की संख्या 37 और मुख्य न्यायाधीश सहित कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है।  

नहीं रहे भरत मटियारा, लंबे इलाज के बाद हैदराबाद अस्पताल में हुआ निधन

कांकेर. राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त एवं मछुआ कल्याण बोर्ड अध्यक्ष भरत मटियारा का निधन हैदराबाद में इलाज के दौरान अस्पताल में निधन हो गया. भरत मटियारा के निधन की खराब लगते ही भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं में शोक की लहर छा गई है. जानकारी के अनुसार, दो बार कांकेर भाजपा जिला अध्यक्ष और दूसरी बार मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बने भरत मटियारा को एक महीने पहले अचानक स्वास्थ्य में समस्या आई थी. रायपुर में उपचार के बाद उन्हें उपचार के लिए हैदराबाद ले जाया गया था, जहां निजी अस्पताल में उपचार के दौरान उनका निधन हो गया.