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तलाक के बाद मौनी रॉय और सूरज नांबियार ने दी सफाई, एलिमनी और अफवाहें खारिज

मौनी रॉय और सूरज नांबियार की शादी टूट चुकी है. दोनों ने अपने तलाक को कंफर्म कर दिया है. लेकिन फिर भी उनके रिश्ते को लेकर अटकलें बंद नहीं हो रही हैं. कभी एलिमनी को लेकर बातें बन रही हैं. तो कभी दिशा पाटनी संग मौनी का नाम जोड़ा जा रहा है. इन अटकलों से तंग आकर मौनी और सूरज ने हेटर्स को करारा जवाब दिया है. सूरज-मौनी की सफाई एक्स कपल ने इंस्टा स्टोरी पर जॉइंट स्टेटमेंट शेयर कर लिखा- हमारे सेपरेशन को लेकर उड़ रहीं बेबुनियाद रिपोर्ट्स गलत हैं. ये मनगढ़ंत बातें हैं. इसे गलत इरादे के साथ सर्कुलेट किया जा रहा है. इसलिए इन सभी बातों पर विराम लगाने के लिए हम हमेशा के लिए फैक्ट्स सामने रख रहे हैं. हमारे बीच कोई एलिमनी नहीं शेयर की गई है. हमारे बीच कोई झगड़ा नहीं है. हमारी शादी टूटने के पीछे कोई तीसरी पार्टी इंवॉल्व नहीं है. ''मौनी और मैंने आपसी सहमती और रिस्पेक्ट के साथ अलग होने का फैसला किया है. इस फैसले में एक दूसरे की भलाई का ध्यान रखा गया है. बस यही सच है. इसके अलावा जो भी रिपोर्ट्स में शेयर किया जा रहा है वो फिक्शन है. दो लोगों का बदनाम करने के लिए ये सब जानबूझकर किया जा रहा है. जबकि हमने कुछ नहीं किया, बस अकेले छोड़ देने की अपील की. '' सूरज ने पोस्ट में बताया कि उन्हें और मौनी को लेकर हुआ कोई भी दावा सच नहीं है. तीसरे शख्स को लेकर कही गई बातें भी झूठी हैं. तीसरे इंसान को उनके रिश्ते के बीच लाना कूल नहीं है. उनके निर्दोष दोस्तों को इस केस में घसीटा जा रहा है. उन्होंने उनके तलाक की कवरेज करने वाली रिपोर्ट्स से मर्यादा बरतने की अपील की है. सूरज ने मीडिया कंपनियों से कहा कि वो बिना वैरिफाई किए कोई न्यूज ना पब्लिश करें. उन्होंने मौनी और अपने लिए प्राइवेसी मांगी. एक्स कपल ने 27 जनवरी 2022 को गोवा में ग्रैंड वेडिंग की थी. उनकी ये शादी बंगाली और मलयाली रीति-रिवाजों से हुई थी. मगर ये रिश्ता बस 4 साल ही चला. सूरज पेशे से बिजनेसमैन हैं. उनकी जोड़ी फैंस के बीच हिट थी. दोनों के तलाक की न्यूज ने फैंस को सबसे ज्यादा हैरान किया है.

‘सड़क पर नमाज नहीं चलेगी’, CM योगी की चेतावनी; नियम तोड़ने वालों को दिया सख्त संदेश

लखनऊ   बकरीद (Bakrid 2026) से पहले उत्तर प्रदेश में सड़क पर नमाज को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ (Yogi Adityanath) का सख्त बयान सामने आया है. राजधानी लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज की इजाजत नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा कि सड़कें आवागमन के लिए होती हैं, किसी भी व्यक्ति को उन्हें रोकने या सार्वजनिक रास्तों पर धार्मिक आयोजन करने का अधिकार नहीं है।  सीएम योगी ने कहा, ‘लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या यूपी में सड़कों पर नमाज नहीं होती? मैं कहता हूं बिल्कुल नहीं होती. सड़कें चलने के लिए हैं, कोई भी चौराहे पर आकर तमाशा नहीं बना सकता.’ उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों के लिए निर्धारित स्थल हैं और वहीं पर आयोजन होने चाहिए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कुछ लोगों ने उनसे कहा कि नमाजियों की संख्या अधिक होने के कारण जगह कम पड़ती है, तो उन्होंने सुझाव दिया कि ‘शिफ्ट में नमाज पढ़ लीजिए.’ उन्होंने आगे कहा कि अगर व्यवस्था के साथ रहना है तो नियम-कानून का पालन करना होगा।  आपको बता दें कि सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि नमाज पढ़नी है, आप शिफ्ट में पढ़िए. प्यार से मानेंगे ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग मुझसे पूछते हैं साहब आपके यहां यूपी में क्या सड़कों पर सचमुच नमाज नहीं होती? मैं कहता हूं कतई नहीं होती है. आप जा कर देख लो नहीं होती है. अरे सड़कें चलने के लिए है या कोई भी व्यक्ति आकर के चौराहे पर आकर तमाशा बना देगा. क्या अधिकार है उसको सड़क रोकने का? आवागमन बाधित करने का कौन सा अधिकार है? जहां उसका स्थल होगा वहां जाकर करें।  बकौल सीएम योगी- 'उन लोगों ने मुझसे कहा साहब कैसे होगा? हमारी संख्या ज्यादा है. हमने कहा शिफ्ट में कर लो. तुम्हारे घर में रहने की जगह नहीं है तो भाई संख्या नियंत्रित कर लो. और नहीं है सामर्थ्य क्यों बेकार आगे संख्या बढ़ाई जा रही है और यह चाहिए आपको कि अगर आपको सिस्टम के साथ रहना है तो याद करना हम उन नियम और कानून को मानना शुरू करें।  सीएम योगी ने सख्‍त लहजे में कहा कि अगर तुम्हारे घर में रहने की जगह नहीं है तो भाई अपनी जनसंख्‍या को ही नियंत्रित कर लो. अगर सामर्थ्य नहीं है तो क्यों बेकार आगे संख्या बढ़ा रहे हो. अगर आपको सिस्टम के साथ रहना है तो उन नियम और कानूनों को भी मानना शुरू करें. मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने आगे कहा कि यूपी में कानून का राज होागा और हम इसे सबके लिए समान रूप से ही लागू करेंगे. नमाज पढ़नी जरूरी है तो आप लोग इसे शिफ्ट में पढ़िए. हम तो उसको रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नहीं।  सीएम योगी ने साफ किया कि ‘सड़क चलने के लिए है. एक आम नागरिक के लिए, एक बीमार व्यक्ति के लिए, एक आम नागरिक के लिए, एक कामगार के लिए, एक कर्मचारी के लिए, एक सामान्य नागरिक के लिए, एक व्यापारी के लिए हम सड़क को बाधित नहीं करने देंगे. सरकार का नियम सार्वभौम है. सबके लिए समान रूप से लागू होता है।  इसके बाद वह और ज्‍यादा सख्‍त दिखे. उन्‍होंने यहां तक कह डाला कि ‘हम यूपी में सड़कों पर अराजकता नहीं फैलने देंगे. प्यार से मानेंगे तो ठीक बात है. अगर नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे. हमारा काम है संवाद बनाना. आप संवाद से मानेंगे.. संवाद से नहीं तो संघर्ष से भी देख लो. बरेली में लोगों ने हाथ आजमाने का काम किया था. देख लिया ताकत. इसलिए सरकार उन सिस्टम के साथ पूरी व्यवस्था को जोड़ना चाहती है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून का राज होगा. कानून के राज को सबको समान रूप से लागू करेंगे. नमाज पढ़नी आवश्यक है. आप शिफ्ट में पढ़िए. हम उसको रोकेंगे नहीं. लेकिन सड़क पर नहीं. सड़क चलने के लिए एक आम नागरिक के लिए, एक बीमार व्यक्ति के लिए, एक आम नागरिक के लिए, एक कामगार के लिए, एक कर्मचारी के लिए, एक सामान्य नागरिक के लिए, एक व्यापारी के लिए हम सड़क को बाधित नहीं करने देंगे. सरकार का नियम सार्वभौम है. सबके लिए समान रूप से लागू होता है।  उन्होंने कहा है कि हमने सबको कहा हमने कहा भाई नहीं चलने देंगे. अराजकता नहीं सड़कों पर फैलने देंगे. प्यार से मानेंगे ठीक बात है. नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे. हमारा काम है संवाद बनाना. आप संवाद से मानेंगे संवाद से नहीं तो संघर्ष से भी देख लो. बरेली में लोगों ने हाथ आजमाने का कार्य किया. देख लिया ताकत. इसलिए सरकार उन सिस्टम के साथ पूरी व्यवस्था को जोड़ना चाहती है। 

सड़क सुरक्षा पर बड़ा एक्शन, गड्ढों की मरम्मत और बेरिकेडिंग को लेकर प्रशासन को निर्देश

भोपाल   सड़क हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑफ रोड सेफ्टी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब सड़कों पर बने गड्ढों, खुले नालों, मैनहोल और जलभराव वाले इलाकों में बैरिकेडिंग करना अनिवार्य होगा। समिति ने राज्यों से कहा है कि किसी भी खतरनाक जगह की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है। निर्देशों में साफ कहा गया है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले इलाकों में पर्याप्त लाइटिंग, रिफ्लेक्टिव टेप और मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि रात में सड़क हादसे रोके जा सकें। खुले मैनहोल और जलभराव पर विशेष सख्ती समिति ने कहा है कि खुले नाले, मैनहोल और बिना सुरक्षा वाले जलभराव क्षेत्र लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। कई हादसों में लोगों की मौत और गंभीर चोटें सामने आई हैं। इसी वजह से अब स्थानीय प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि सड़क निर्माण और रखरखाव भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार होना चाहिए। अगर किसी राज्य में लापरवाही पाई गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। 48 घंटे में कार्रवाई के निर्देश समिति ने निर्देश दिए हैं कि सड़क पर किसी भी गड्ढे, खुले मैनहोल या खतरनाक जलभराव की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर कार्रवाई करना अनिवार्य होगा। इसके तहत:     गड्ढों की तत्काल मरम्मत     खुले नालों और मैनहोल पर मजबूत बैरिकेडिंग     रिफ्लेक्टिव टेप लगाना     रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था जैसे कदम उठाने होंगे। बारिश में हादसे रोकने पर फोकस सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने कहा है कि बारिश के मौसम में अंधेरे और जलभराव वाले इलाकों में दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए रात में प्रकाश व्यवस्था अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वाहन चालकों को खतरे का पहले से अंदाजा हो सके। दो महीने में मांगी रिपोर्ट समिति ने सभी राज्यों से दो महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें पिछले पांच वर्षों में गड्ढों की वजह से हुए हादसे, खुले जलभराव क्षेत्रों में मौतें और बिना बैरिकेड वाले क्षेत्रों में घायल लोगों का डेटा भी शामिल करना होगा। IRC मानकों के अनुसार होगा सड़क निर्माण निर्देशों में साफ कहा गया है कि सड़क निर्माण और रखरखाव भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार होना चाहिए। यदि किसी राज्य ने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है। जिला सड़क सुरक्षा समितियों को भी जिम्मेदारी समिति ने जिला सड़क सुरक्षा समितियों को नियमित ऑडिट करने और सड़क सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने को कहा गया है। पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी इससे पहले 2018 में भी सड़क हादसे कम करने के लिए राज्यों को कई अहम निर्देश दे चुकी है। इनमें:     हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाना     स्पीड मॉनिटरिंग     सड़क किनारे बैरियर लगाना     ब्लैक स्पॉट ऑडिट     स्कूल वाहनों की सुरक्षा जैसे कदम शामिल थे। पांच साल के हादसों का डेटा भी मांगा सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने राज्यों से पिछले पांच वर्षों में गड्ढों और खराब सड़कों के कारण हुए हादसों का पूरा डेटा मांगा है। इसके अलावा खुले जलभराव और बिना बैरिकेड वाले क्षेत्रों में हुई मौतों और घायलों की जानकारी भी मांगी गई है। जिला सड़क सुरक्षा समितियों को नियमित ऑडिट करने और सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के आदेश दिए गए हैं। समिति का कहना है कि सड़क सुरक्षा में लापरवाही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश इससे पहले साल 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी ने सड़क हादसे कम करने के लिए राज्यों को कई अहम निर्देश दिए थे। इनमें हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाना, स्पीड मॉनिटरिंग, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का ऑडिट और स्कूल वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल था। अब बारिश के मौसम को देखते हुए एक बार फिर राज्यों को सख्ती से सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।  

रिटायर्ड जज की बहू ट्विशा की मौत पर नया खुलासा, आखिरी चैट आई सामने

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रिटायर्ड जज की बहू ट्विशा शर्मा की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. कथित तौर पर ससुराल की प्रताड़ना की वजह से मौत के इस मामले में जहां एक तरफ पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है, वहीं हर दिन कई नए खुलासे सामने आ रहे हैं. बीते 12 मई को छत के सरिये से फांसी पर लटकी मिली ट्विशा को लेकर आरोपियों में से एक उसकी सास गिरिबाला सिंह ने कोर्ट में अग्रिम जमानती आवेदन दिया था. आवेदन में उन्होंने दावा किया कि ट्विशा परिवार में एडजस्ट नहीं हो पा रही थी और वह ड्रग्स लेती थी।  'ये लोग बहुत घटिया हैं. शक करते हैं' इस बीच ट्विशा और उसकी मां के बीच हुई आखिरी व्हाट्सएप चैट आजतक के हाथ लगी. मां के बात करते हुए वह काफी परेशान दिख रही है. इसमें ट्विशा ने अपने ससुराल वालों को लेकर कई गंभीर बातें लिखीं और पति पर चरित्र पर शंका करने जैसे आरोप लगाए।  व्हाट्सएप चैट के मुताबिक, ट्विशा ने मां को भेजे मैसेज में लिखा था ‘बहुत परेशान हूं… ये लोग बहुत घटिया हैं. शक करते हैं. समर्थ पूछता है कि मेरे पेट में किसका बच्चा है. इतना ही नहीं, ट्विशा ने अपनी मां से उसे वहां से ले जाने की गुहार भी लगाई थी. उसने लिखा, 'मुझे यहां से आकर ले जाओ, ये लोग मुझे जीने नहीं देंगे।  ‘मेरा जीवन नरक हो गया है, ले जाओ यहां से' यही नहीं चैट में ट्विशा ने एक जगह अपनी मां को लिखा है ‘मेरा जीवन नरक हो गया है’. ट्विशा ने लिखा है कि ‘ये लोग बहुत निर्दयी है. समर्थ तो ठीक से मुझसे बात तक नहीं करता।  इधर ससुराल वालों द्वारा हत्या का आरोप लगा रहा ट्विशा का परिवार उसके दोबारा पोस्टमार्टम के लिए आज आवेदन देगा. ट्विशा के माता पिता का कहना है कि इससे पहले जो बेल्ट ट्विशा के गले में मिली थी, उसके इंस्पेक्शन के बिना ही पोस्टमार्टम कर दिया गया था।  'मैं फंस गई हूं, तू मत फंसना' बता दें कि इससे पहले भी ट्विशा की उसकी दोस्त मीनाक्षी के साथ इंस्टाग्राम चैट सामने आई थी जिसमें वह उससे कह रही थी- मैं फंस गई हूं तू मत फंसना, ज्यादा बात नहीं कर पाउंगी।  'बहू ड्रग्स न ले तो हाथ कांपते थे' मृतका की सास और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को कोर्ट ने शुक्रवार को ही अग्रिम जमानत दे दी है. अपने जमानती आवेदन में गिरबाला ने दावा किया था कि बहू ड्रग्स लेती थी और ड्रग्स न मिल पाने की स्थिति में उसके हाथ कांपने लगते थे.  उन्होंने बताया कि ट्विशा विवाह के पूर्व फिल्म एक्ट्रेस और मॉडल थी और उन्होंने तेलगू और अन्य भाषाओं की फिल्मों में हीरोइन के रूप में और एड फिल्मों में काम किया था. शादी के समय ट्विशा दिल्ली की प्रायवेट कंपनी में वर्कफार्म होम काम कर रही थी. घर पर रहते हुए हम लोगों को ट्विशा के व्यवहार से संदेह हुआ कि वह ड्रग्स लेती हैं.  बाद में उसका पापा ने ही इस बात की पुष्टी की।  'प्रेग्नेंट हुई तो सामान बांधकर निकल गई' उन्होंने कहा कि ट्विशा शादी के दिन यानी 09 दिसंबर 2025 से  12 मई 2026 के बीच पांच बार सुसराल से मायके और अन्य जगहों पर गयी थी. हाथों में कंपन और कुछ समय तक डग्स न ले पाने के कारण उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन नजर आता था. ट्विशा के पिता ने ही हमें बताया कि वह ड्रग्स लेती है।  गिरिबाला का कहना है कि 17 अप्रैल 2026 को पहली बार ट्विशा को अपने प्रेग्नेंट होने की जानकारी हुई. उसी दिन ट्विशा अपने पति के साथ हजेला अस्पताल गयी. इसके बाद उसका व्यवहार मेरे और मेरे बेटे के प्रति  काफी अधिक परेशान करने वाला था. अस्पताल से आने के बाद ट्विशा ने अपना सामान बैग में भरा ओर बोली कि वह अपने घर नोएडा जाना चाहती हैं . वह 17 अप्रैल को निकलकर 18 अप्रैल 2026 को हवाई जहाज से दिल्ली पहुंची. लेकिन सीधा घर नहीं गई और घर पहुंचने में इतना समय लगने का कोई कारण भी नहीं बताया. इधर, मामले में फरार ट्विशा के पति समर्थ सिंह की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही हैं।  ट्विशा शर्मा का गलने लगा शव भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. मृतका का शव पिछले पांच दिनों से भोपाल एम्स (AIIMS) की मर्चुरी में रखा हुआ है, जो अब डीकंपोज (गलने) लगा है. इस बीच, ट्विशा शर्मा के परिजनों ने रविवार को सीएम हाउस के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद उनके पिता नवनिधि शर्मा और भाई ने मुख्यमंत्री के ओएसडी (OSD) से मुलाकात की. दूसरी ओर, पुलिस शव को सौंपने के लिए परिजनों को नोटिस देने की तैयारी कर रही है।  कानूनी सुनवाई किसी अन्य राज्य में की जाए सीएम हाउस में मुख्यमंत्री के ओएसडी से मुलाकात के दौरान ट्विशा के पिता और भाई को इस मामले में उचित और निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन मिला है. OSD से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने कहा, "हमारी मुख्य रूप से दो मांगें हैं. पहली मांग यह है कि बेटी का दोबारा पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स में कराया जाए, और दूसरी यह कि इस पूरे मामले की कानूनी सुनवाई मध्य प्रदेश के बजाय किसी अन्य राज्य में की जाए." उन्होंने बताया कि इस विषय पर अभी परिवार में चर्चा होगी और उसके बाद ही आगे का कोई फैसला लिया जाएगा।  क्या है ट्विशा शर्मा भोपाल मौत का पूरा मामला? 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं और उन्होंने एक मॉडल के रूप में भी काम किया था. शादी से पहले वह दिल्ली में जॉब करती थीं. वैवाहिक वेबसाइट 'शादी डॉट कॉम' के जरिए उनका रिश्ता भोपाल की रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के बेटे वकील समर्थ सिंह से तय हुआ था. दोनों ने दिसंबर 2025 में शादी की थी. शादी के कुछ समय बाद ट्विशा का गर्भपात हो गया और इसके बाद 12 मई 2026 को उन्होंने कथित तौर पर फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।  शरीर पर चोटों के निशान, मौत … Read more

योगी सरकार का बड़ा दावा, 9 वर्षों में 289 दुर्दांत अपराधी ढेर; 34 हजार से ज्यादा गिरफ्तार

योगी सरकार की पुलिस ने नौ वर्षों में 289 दुर्दांत अपराधियों को मुठभेड़ में किया ढेर, 34,253 को गिरफ्तार किया योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जारी है एनकाउंटर की कार्रवाई  सबसे अधिक मेरठ में 97 अपराधी किए गए ढेर, प्रदेश में पहले स्थान पर    एनकाउंटर की कार्रवाई में दूसरे नंबर पर है वाराणसी जोन और तीसरे नंबर पर है आगरा जोन  लखनऊ,  योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 289 दुर्दांत अपरधियों को मुठभेड़ में ढेर कर यमलोक पहुंचाया है। इस दौरान पुलिस ने कुल 17,043 मुठभेड़ की कार्रवाइयां कीं, जिनमें 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। एनकाउंटर की कार्रवाई में 11,834 अपराधी घायल हुए। वहीं अपराधियों से लोहा लेते हुए 18 पुलिसकर्मी शहीद हो गये जबकि 1,852 पुलिसकर्मी घायल हुए। एनकाउंटर में मेरठ जोन पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर  सबसे अधिक मुठभेड़ मेरठ ज़ोन में दर्ज की गईं, जहां पुलिस ने 4,813 कार्रवाई की गईं। इस कार्रवाई में 8,921 अपराधी दबोचे गये जबकि 3,513 अपराधियों को घायल हुए। वहीं 97 कुख्यात अपराधियों को मौके पर ही मार गिराया गया। मेरठ जोन की मुठभेड़ के दौरान 477 पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दो पुलिसकर्मी शहीद हो गये। एनकाउंटर कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में मेरठ जोन पहले स्थान पर रहा है। इसी तरह वाराणसी जोन में 1,292 मुठभेड़ हुईं, जिनमें 2,426 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया जबकि 29 अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर किया गया। इस दौरान 907 अपराधी और 104 पुलिसकर्मी घायल हुए। पूरे प्रदेश में वाराणसी जोन एनकाउंटर कार्रवाई में दूसरे स्थान पर है। वहीं एनकाउंटर कार्रवाई में पूरे प्रदेश में आगरा जोन तीसरे स्थान पर है। यहां 2,494 एनकाउंटर की कार्रवाई की गईं, जिनमें 5,845 अपराधियों को दबोचा गया। इस दौरान 968 अपराधी घायल हुए जबकि 24 अपराध मार गिराए गए। मुठभेड़ के दौरान 62 पुलिसकर्मी घायल हुए।  कमिश्नरेट में सबसे अधिक गाजियाबाद में 18 अपराधी किए गये ढेर एनकाउंटर आंकड़ों पर नजर डालें तो बरेली ज़ोन में 2,222 मुठभेड़ के दौरान 21 दुर्दांत अपराधियों को मारा गया, वहीं लखनऊ ज़ोन में 971 मुठभेड़ के दौरान 20 अपराधी मारे गए। गाजियाबाद कमिश्नरी में 7,89 मुठभेड़ों में 18 अपराधी मारे गये। सभी कमिश्नरेट में यह सबसे अधिक है। कानपुर जोन में 791 मुठभेड़ों में 12, लखनऊ कमिश्नरी में 147 मुठभेड़ों में 12 और प्रयागराज जोन में 643 मुठभेड़ों में 11 अपराधियों को मारा गया। इसी तरह आगरा कमिश्नरी में 489 मुठभेड़ों में 10, गौतमबुद्ध नगर में 1,144 मुठभेड़ों में 9, गोरखपुर जोन में 699 मुठभेड़ों में 8, वाराणसी कमिश्नरी में 146 मुठभेड़ों में 8, प्रयागराज कमिश्नरी में 150 मुठभेड़ों में 6 और कानपुर कमिश्नरी में 253 मुठभेड़ों में 4 अपराधियों को ढेर किया गया। पुलिसिया एक्शन ने अपराधियों को प्रदेश छोड़ने पर किया मजबूर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में यूपी पुलिस ने जीरो टॉलरेंस नीति को धरातल पर उतारा। इससे अपराधियों में भय और आम जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। यही वजह है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पुलिस ने संगठित अपराध, माफिया और अवैध वसूली पर सख्त प्रहार किया। मुठभेड़ों के साथ ही संपत्ति कुर्की, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और एनएसए जैसे कानूनों के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अपराधियों के खिलाफ चला यह नौ वर्षीय अभियान न सिर्फ आंकड़ों में बल्कि जमीनी हकीकत में भी कानून का राज स्थापित करने में सफल रहा है। पुलिस की त्वरित, कठोर और साहसिक कार्रवाई ने अपराधियों को प्रदेश छोड़ने पर मजबूर कर दिया है और उत्तर प्रदेश अब भयमुक्त और सुरक्षित राज्य के रूप में अपनी पहचान को सशक्त कर रहा है।

मझिआंव मोड़ पर गंदगी फैलाने वालों पर सख्ती, एसडीएम ने शुरू की कार्रवाई

गढ़वा झारखंड में गढ़वा शहर के व्यस्त मझिआंव मोड़ क्षेत्र में सड़क किनारे खुले में मुर्गा काटने और गंदगी फैलाने वाले कारोबारियों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा हंटर चलाया है. सार्वजनिक स्थलों पर मांस, खून, हड्डी और पंख बिखेरकर स्वच्छता को प्रभावित करने संबंधी लगातार मिल रही जनशिकायतों के बाद, सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) संजय कुमार ने सख्त रुख अख्तियार किया है. अवैध मांस दुकानों पर प्रशासन का एक्शन एसडीएम ने मझिआंव मोड़ पर अवैध रूप से दुकान चलाने वाले पांच दुकान मालिकों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 152 के तहत ‘पब्लिक न्यूसेंस’ (जनता को परेशानी पहुंचाना) की कार्रवाई शुरू कर दी है. इसके साथ ही इस मामले में ढिलाई बरतने को लेकर गढ़वा नगर परिषद से भी शो-कॉज की गई है. एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि इन अवैध मांस कारोबारियों को पूर्व में भी कई बार हिदायत और चेतावनी दी जा चुकी थी. इसके अलावा, नगर परिषद को भी लिखित रूप से आदेश दिया गया था कि वे नियमित निगरानी रखें और सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता सुनिश्चित कराएं. इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और आम जनता की परेशानियां बढ़ती गईं, जिसके बाद प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा. पांच दुकानदारों को नोटिस, अन्य इलाकों में भी होगी कार्रवाई बताया गया कि पहले चरण में मझिआंव मोड़ के पास नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले जिन पांच दुकानदारों/मालिकों को नोटिस जारी कर पक्षकार बनाया गया है, उसमें अजय सिंह (पिता- सूर्यदेव सिंह),अनुरुल हक (पिता- ताजुद्दीन खां),फैजान खान (पिता- लुहू तारीक),इब्राहिम खान (पिता- उस्मान खान),कमलेश अग्रवाल का नाम शामिल हैं . एसडीएम संजय कुमार ने कहा कि पशु-पक्षियों का वध करना और उनके अपशिष्ट को ऐसे ही फेंक देना आम लोगों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के साथ खिलवाड़ है. वहां से गुजरने वाले राहगीरों को भयंकर बदबू और असहजता का सामना करना पड़ता है, जो सीधे तौर पर ‘पब्लिक न्यूसेंस’ का गंभीर मामला है. ऐसी ही सख्त कार्रवाई अनुमंडल के अन्य इलाकों में भी चलाई जाएगी. गंदगी और बदबू पर एसडीएम सख्त एसडीएम ने कहा कि शहर में स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल देना प्रशासन की प्राथमिकता है. अब न केवल मुर्गा, मछली और मांस के व्यवसायियों को निर्धारित मानकों और स्वच्छता नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, बल्कि नगर निकाय (नगर परिषद) जैसी संस्थाओं को भी अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभानी होगी, वरना उनपर भी गाज गिरेगी.

फर्जी जॉइनिंग लेटर और ट्रेनिंग का खेल! BCCL भर्ती घोटाले में बड़ा खुलासा

डकरा  कोल इंडिया की सबसे पुरानी सब्सिडियरी बीसीसीएल धनबाद में नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है. डकरा, खलारी, पिपरवार, टंडवा, भुरकुंडा, हजारीबाग और बड़कागांव समेत कई इलाकों में सक्रिय एक संगठित गिरोह पर करीब 200 लोगों से लगभग 20 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप लगा है. मामले में खलारी थाना में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुटी है, जबकि आरोपियों ने अपने मोबाइल बंद कर लिए हैं. कांग्रेस नेत्री से 24 लाख की ठगी डकरा निवासी कांग्रेस नेत्री इंदिरा देवी ने 12 मई को खलारी थाना में लिखित शिकायत देकर बताया कि उनके बेटे मनीष कुमार, कुणाल कुमार और भतीजा कौशल प्रसाद को बीसीसीएल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 24 लाख रुपये ठग लिए गए. इंदिरा देवी के अनुसार, चूरी उत्तरी के पूर्व मुखिया संजय आइंद की पत्नी मीनाक्षी आइंद ने उन्हें बताया था कि उसकी दोनों बेटियां साक्षी और श्रेया बीसीसीएल में नौकरी कर रही हैं. यह नौकरी केडी खलारी निवासी और अशोका, पिपरवार में कार्यरत सीसीएल कर्मचारी अजय कुमार सिन्हा और दरहाटांड़ राय निवासी पवन कुमार ने लगवाई है. फर्जी ज्वाइनिंग लेटर और मेडिकल जांच का खेल इंदिरा देवी ने बताया कि पवन कुमार ने खुद को बीसीसीएल में सेटिंग से नौकरी पाने वाला बताते हुए अपना कथित ज्वाइनिंग लेटर भी दिखाया. राजनीतिक परिवार से संबंध होने के कारण उन्होंने उस पर भरोसा कर लिया. पहले चेक के माध्यम से भुगतान करने की कोशिश हुई, लेकिन तकनीकी कारणों से पैसा नहीं निकल सका. इसके बाद पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी स्थित रॉयल पार्क अपार्टमेंट निवासी सागर चक्रवर्ती के शानवी इंटरप्राइजेज बैंक खाते में 24 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. पैसा ट्रांसफर होने के बाद एक बॉन्ड पेपर तैयार किया गया, जिस पर संबंधित लोगों के हस्ताक्षर भी कराए गए. इसके बाद युवकों को धनबाद बुलाकर होटल में ठहराया गया और पीएमसीएच में रवि राय और मुकेश महतो द्वारा मेडिकल जांच कराई गई. उस समय वहां कई दूसरे युवकों की भी जांच चल रही थी. बायोमीट्रिक और ट्रेनिंग के नाम पर ठगी थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, दूसरी बार धनबाद बुलाकर लोदना एरिया के रेलवे साइडिंग में अनुप सरकार, विशाल सिंह और रवि राय द्वारा बायोमीट्रिक हस्ताक्षर और बीटीसी ट्रेनिंग की प्रक्रिया पूरी कराई गई. इसके बाद युवकों को एक सूची दिखाई गई, जिसमें लगभग 200 अभ्यर्थियों के नाम अलग-अलग एरिया में पोस्टिंग के साथ दर्ज थे. इसमें इंदिरा देवी के तीनों बच्चों के नाम भी शामिल थे. हालांकि, इसके बाद किसी को ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला और आरोपियों ने फोन उठाना बंद कर दिया. नेटवर्क मार्केटिंग की तरह चलाया गया गिरोह जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पूरी ठगी को नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल की तरह संचालित किया. इसके अलग-अलग चैनल बनाए गए थे. बताया जा रहा है कि एक चैनल सागर चक्रवर्ती और दूसरा मुस्तकीम अंसारी चला रहा था. सागर चक्रवर्ती के शानवी इंटरप्राइजेज बैंक खाते और मुस्तकीम के धनबाद स्थित एक टायर दुकान के खाते में पैसे जमा कराए गए. गिरोह में शामिल लोगों को पहले खुद नौकरी का लालच दिया गया. बाद में उनसे कहा गया कि वे नए कैंडिडेट जोड़ें, ताकि उनका काम बिना पैसे दिए हो जाए. इसी लालच में कई लोग खुद भी एजेंट बन गए. वे अपने रिश्तेदारों और परिचितों को फंसाने लगे. करोड़ों रुपये का हुआ लेनदेन सूत्रों के मुताबिक, पिपरवार के एक व्यक्ति ने विभिन्न लोगों से पैसे जुटाकर करीब पांच करोड़ रुपये गिरोह तक पहुंचाए. वहीं डकरा के एक सीसीएल कर्मचारी ने अपने रिश्तेदारों से 75 लाख रुपये इकट्ठा कर दिए. अब पैसे गंवाने वाले कई लोग मानसिक तनाव में हैं और सामाजिक बदनामी के डर से खुलकर सामने भी नहीं आ रहे हैं. धनबाद के सिजुआ से जुड़ रहे तार पीड़ितों के अनुसार, मुस्तकीम अंसारी धनबाद के सिजुआ का रहने वाला है. वह खुद को कांग्रेस और ट्रेड यूनियन नेता बताता था. वहीं, सागर चक्रवर्ती अपने आपको टीएमसी नेता बताकर लोगों पर प्रभाव जमाता था. मामले में संतोष सिंह, छोटेलाल राम, मुकेश महतो, विशाल कुमार, राजेश करमाली और करमा नामक लोगों की भी चर्चा हो रही है. पुलिस बोली- संपर्क से बाहर हैं आरोपी मामले की जांच कर रहे खलारी थाना के एसआई शंकर राम ने बताया कि पुलिस शुरुआती स्तर पर जांच कर रही है. कुछ लोगों को नोटिस भेजा गया है, लेकिन फिलहाल किसी आरोपी से संपर्क नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि इंदिरा देवी द्वारा भुगतान किए गए पैसों का सत्यापन कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

सड़क निर्माण के लिए उजड़ेंगे 1300 घर? पीड़ित परिवारों का नगर निगम पर प्रदर्शन

रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में गुरुमुख नगर पचपेड़ी नाका से भाटागांव तक कैनाल रोड 2.0 बनाने का प्लान है, जिसके लिए कई घरों को तोड़ने की तैयारी है। बेघर होने से बचने के लिए पीड़ित परिवार ने आज निगम का घेराव किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमें 80 फीट रोड नहीं चाहिए और ना ही हम अपना घर छोड़ेंगे। क्या है पूरा मामला ? दरअसल, गुरुमुख नगर पचपेड़ी नाका से भाटागांव तक कैनाल रोड बनाने का प्लान है। 30 फीट का जगह होने के बावजूद 80 फीट का रोड बनाने का प्रावधान रखा गया है। ऐसे में रोड के बीच में आने वाले कई घरों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है। पीड़ित परिवार ने किया नगर निगम का घेराव इसी को लेकर आज पीड़ित परिवार ने नगर निगम का घेराव किया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि विस्थापन नियम का पालन नहीं किया गया और अगले 40 साल से बसे परिवारों को बेघर करने की साज़िश की जा रही है। रोड के लिए 30 फिट का जगह होने के बावजूद 80 फीट का बनाने का प्रावधान रखा गया है। नहीं चाहिए रोड, ना ही छोड़ेंगे घर वहीं उन्होंने आगे कहा कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर 1300 परिवारों को बेघर किया जा रहा है। बगैर नोटिस सर्वे किया जा रहा है और तोड़ने की तैयारी हो रही है। उनका कहना है कि हमें 80 फ़ीट का रोड नहीं चाहिए और ना ही हम अपना घर छोड़ेंगे।

बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक या बड़ा दांव? राजस्थान में तीन राज्यसभा सीटों पर सियासी घमासान

जयपुर राजस्थान की सियासत में एक बार फिर बड़ा सियासी ड्रामा देखने को मिल सकता है। आगामी जून महीने में होने वाले राज्यसभा की तीन सीटों के चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने ऐसी बिसात बिछाई है, जिसने कांग्रेस खेमे में हलचल तेज कर दी है। शनिवार देर रात तक चली बीजेपी कोर कमेटी की मैराथन बैठक से छनकर जो खबर आ रही है, उसके मुताबिक बीजेपी विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद तीनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। राज्यसभा में खाली हो रही इन नेताओं की सीटें गणित के हिसाब से बीजेपी केवल दो सीटें आसानी से जीत सकती है, लेकिन तीसरी सीट पर दांव खेलकर वह विपक्ष की घेराबंदी करने के मूड में है। हालांकि, आखिरी फैसला दिल्ली में बैठा आलाकमान ही करेगा। बता दें कि भाजपा सांसद राजेंद्र गहलोत और रवनीत सिंह बिट्टू का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। कांग्रेस सांसद नीरज डांगी की सीट पर भी चुनाव की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। 'नारी शक्ति' को आगे कर मास्टरस्ट्रोक खेलने की तैयारी बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर लंबी माथापच्ची हुई। अंदरखाने से खबर है कि पार्टी इस बार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का बड़ा संदेश देने के लिए किसी महिला चेहरे को राज्यसभा भेज सकती है। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने संकेत दिया कि राजस्थान से अब तक केवल नजमा हेप्तुल्ला ही बीजेपी की तरफ से राज्यसभा पहुंची हैं, ऐसे में इस बार किसी महिला को मौका मिलने की उम्मीद बेहद ज्यादा है। 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' पर भी मंथन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंत्रियों को आने वाले दिनों में जिला स्तर पर 'प्रवास' करने और संगठन को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, बीजेपी 'वन स्टेट, वन इलेक्शन' के ढांचे के तहत आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को कराने की रणनीति पर भी विचार कर रही है। चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय पदाधिकारी नितिन नवीन का भी जल्द ही राजस्थान का अचानक दौरा हो सकता है। साफ है कि बीजेपी इस बार राज्यसभा चुनाव को केवल औपचारिकता न मानकर, इसे एक बड़े सियासी रण की तरह लड़ रही है। NEET पेपर लीक और अपराध के आंकड़ों पर भी बनी रणनीति इस हाई-प्रोफाइल बैठक में सिर्फ चुनाव ही नहीं, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और हालिया विवादों पर भी गंभीर चर्चा हुई। बैठक में हाल ही की NCRB रिपोर्ट को लेकर चिंता जताई गई, जिसमें कथित तौर पर जयपुर को रेप केसों में शीर्ष पर बताया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे इस मुद्दे पर आक्रामक रहें और जनता के बीच जाकर कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने का भरोसा दें। कांग्रेस को घेरने का प्लान देश भर में गरमाए NEET पेपर लीक मामले के राजनीतिक नफा-नुकसान पर भी मंथन हुआ। बीजेपी ने अपने सोशल मीडिया विंग और नेताओं को साफ निर्देश दिए हैं कि वे विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय हुए पेपर लीक के मामलों को आक्रामक तरीके से उठाएं।  

जशपुर की नाशपाती बनी किसानों की कमाई का बड़ा जरिया, 3500 से ज्यादा कृषक जुड़े

जशपुर की नाशपाती से बढ़ रही किसानों की आमदनी, 3,500 से अधिक कृषक जुड़े फल उत्पादन से 3500 हेक्टेयर में हो रही नाशपाती की खेती, देश के कई राज्यों में है जशपुर की नाशपाती की मांग एक एकड़ से किसानों को हो रही 1 लाख से 1.50 लाख रुपए तक की वार्षिक आय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। जशपुर जिले के किसान नाशपाती की खेती के माध्यम से उल्लेखनीय आय अर्जित कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। प्राकृतिक रूप से अनुकूल जलवायु और उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन के कारण जशपुर आज राज्य के प्रमुख नाशपाती उत्पादक जिलों में शामिल हो चुका है। जशपुर जिले में लगभग 3,500 से अधिक किसान करीब 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र में नाशपाती की खेती कर रहे हैं। जिले में प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 75 हजार क्विंटल नाशपाती का उत्पादन हो रहा है। इससे हजारों कृषक परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और जिले की पहचान फल उत्पादन के क्षेत्र में लगातार मजबूत हो रही है। जशपुर की नाशपाती स्वाद, गुणवत्ता और आकर्षक आकार के कारण देश के विभिन्न राज्यों में विशेष रूप से पसंद की जाती है। जिले के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई और गीधा जैसे क्षेत्रों से नाशपाती की खेप दिल्ली, उत्तर प्रदेश, ओडिशा सहित अन्य राज्यों में भेजी जाती है। फल को सावधानीपूर्वक कैरेट में पैक कर बाजारों तक पहुंचाया जाता है। नाशपाती की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। एक एकड़ क्षेत्र से किसानों को औसतन 1 लाख से 1.50 लाख रुपए तक की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसान आधुनिक उद्यानिकी की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। उद्यानिकी विभाग तथा नाबार्ड के सहयोग से किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, पौधरोपण, बागवानी प्रबंधन और विपणन संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत नाशपाती क्षेत्र विस्तार योजना संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से किसानों को अनुदान एवं तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर जिले में उद्यानिकी आधारित कृषि को नई दिशा मिली है। नाशपाती की खेती न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि जशपुर को राज्य के एक उभरते हुए फल उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है।