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अमेरिका में होने वाले UN युवा सम्मेलन में संजय की भागीदारी, भारत का बढ़ाएंगे मान

दुमका. झारखंड की उपराजधानी दुमका के काठीकुंड प्रखंड अंतर्गत बड़तल्ली गांव के संजय पाल समय पर वीजा नहीं बन पाने के कारण अमेरिका नहीं जा सकेंगे, लेकिन अब वह वर्चुअल माध्यम से लॉस एंजिल्स में होने वाले संयुक्त राष्ट्र के 13वें अंतरराष्ट्रीय युवा सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। संजय पाल का चयन नेतृत्व क्षमता व तार्किक-व्याख्यात्मक कौशल के कठोर मूल्यांकन के आधार पर इस वैश्विक मंच के लिए हुआ है। सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के करीब 20 हजार प्रतिभागी शामिल होंगे। संजय वर्चुअल रूप से जुड़कर भारत की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखेंगे। उनका कहना है कि यदि भारत की युवा आबादी को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में मजबूत आधार मिले तो देश विश्व पटल पर महाशक्ति बन सकता है। उनका लक्ष्य सिविल सेवा में जाकर समाज की सेवा करना है। संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की प्रेरक कहानी: संजय पाल का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता कार्तिक पाल मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता रेणुका पाल ने सीमित शिक्षा के बावजूद बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। आर्थिक तंगी के दौर में संजय की मां ने रात में मूढ़ी (लाई) भूनकर परिवार का सहारा बनने का प्रयास किया, लेकिन लगातार धुएं में काम करने से उनका स्वास्थ्य प्रभावित हुआ। इसके बाद संजय ने स्वयं पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने साप्ताहिक बाजारों में कपड़े की दुकानों पर काम किया और ग्रामीण क्षेत्रों में पावरोटी बेचकर पढ़ाई का खर्च निकाला, लेकिन पढ़ाई से कभी समझौता नहीं किया। राज्य टॉपर से लेकर राष्ट्रीय मंच तक: संकटों के बीच संजय ने 10वीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की और आगे चलकर उच्च माध्यमिक परीक्षा में प्रखंड टाप करने के साथ अर्थशास्त्र में पूरे झारखंड में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर राज्य टॉपर बने। इसके बाद उन्होंने सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान, विकसित भारत युवा संवाद 2026 और बजट क्वेस्ट 2026 जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में झारखंड का प्रतिनिधित्व किया। उनके प्रदर्शन के लिए रांची स्थित रिम्स ऑडिटोरियम में माय भारत झारखंड की निदेशक ललिता कुमारी द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया गया। शिक्षकों और मार्गदर्शन के सहारे संजय ने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी प्रतिभा को साबित किया, और आज वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने को तैयार हैं।

यूपी सरकार का बड़ा फैसला, मीरजापुर में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी स्थापना को हरी झंडी

मीरजापुर में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी की स्थापना को मिली मंजूरी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के अंतर्गत निजी क्षेत्र में “सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी, मीरजापुर” की स्थापना हेतु उसकी प्रायोजक संस्था को आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि वाराणसी स्थित एपेक्स वेलफेयर ट्रस्ट, जो बड़े अस्पतालों का संचालन करता है, अब शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रवेश कर रहा है। ट्रस्ट द्वारा मीरजापुर में सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी की स्थापना का प्रस्ताव दिया गया था, जिसकी सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। इसी क्रम में कैबिनेट ने संस्थान को आशय पत्र जारी किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रस्ताव के अनुसार मीरजापुर जनपद की चुनार तहसील के ग्राम समसपुर में लगभग 50.45 एकड़ भूमि पर इस निजी विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। यह विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी गति देगा। मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश में उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार होने के साथ उसकी गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अंग्रेजों के समय से लेकर वर्ष 2017 तक प्रदेश में केवल 14 सरकारी विश्वविद्यालय थे, जबकि वर्ष 2017 के बाद अब तक आठ नए सरकारी विश्वविद्यालय स्थापित किए जा चुके हैं। इसी प्रकार निजी विश्वविद्यालयों की संख्या, जो लंबे समय तक 29 पर स्थिर थी, अब बढ़कर 52 हो गई है। मंत्री ने बताया कि आठ संस्थानों को लेटर ऑफ इंटेंट यानी आशय पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।

ऑफिस के तनाव से हैं परेशान? अपनाएं ये आसान आदतें और रखें मेंटल हेल्थ फिट

 आज की इस बिजी लाइफस्टाइल में पर्सनल लाइफ के अलावा ऑफिस का स्ट्रेस होना भी सबसे बड़ी प्रॉब्लम्स में से एक बन गया है. हर समय काम का प्रेशर, समय पर अपने सारे टार्गेट्स अचीव करने की टेंशन और घंटों तक स्क्रीन की तरफ ही देखते रहना आपको मेंटली और फिजिकली दोनों ही तरीके से थका देता है. ऐसे में यह काफी जरूरी हो जाता है कि आप इस स्ट्रेस को जितना जल्दी हो सके कम करने की कोशिश करें. अगर आप समय रहते इसे कम नहीं करते हैं, तो इसका सीधा असर आपके हेल्थ, नींद और रिश्तों पर पड़ता है. आज की इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी आसान आदतों के बारे में जिन्हें अपनाकर आप काफी आसानी से ऑफिस के स्ट्रेस को कम कर सकते हैं. तो चलिए इन उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं ताकि आपका मेंटल और फिजिकल हेल्थ एक बार फिर से सही ट्रैक पर वापस आ जाए. काम के बीच लें छोटे-छोटे ब्रेक जब आप घंटों तक एक ही जगह पर बैठकर एक ही तरह का काम करते रहते हैं, तो आपका दिमाग थकना शुरू हो जाता है और स्ट्रेस भी बढ़ने लगता है. अगर आप ऑफिस में बैठकर लगातार काम कर रहे हैं तो हर एक से दो घंटे के बीच एक बार कम से कम 10 मिनट का ब्रेक जरूर लें. इस समय अपनी सीट से उठ जाएं और थोड़ी देर टहलें, पानी पीएं या फिर खिड़की के पास खड़े होकर फ्रेश ऑक्सीजन लें. जब आप ऐसा करते हैं तो आपका दिमाग रिलैक्स हो जाता है और साथ ही दोबारा काम करने में आपका मन लगने लगता है. अपनी डेली रूटीन को रखें व्यवस्थित अक्सर हमारी यह आदत होती है कि हम एक ही समय में कई काम करने की कोशिश करते हैं. आपकी इस आदत की वजह से भी स्ट्रेस काफी ज्यादा बढ़ सकता है. स्ट्रेस से बचने के लिए सुबह सोकर उठते ही अपने सभी जरूरी कामों की लिस्ट तैयार कर लें और उन्हें प्रायोरिटी के हिसाब से सेट करके पूरा कर लें. जब सारे काम व्यवस्थित तरीके से होने लगते हैं, तो आपके दिमाग पर प्रेशर काफी कम पड़ता है और साथ ही आपकी समय भी बेकार की चीजों में बर्बाद नहीं होता है. हेल्दी डाइट और हाइड्रेशन का रखें ख्याल जब आप स्ट्रेस में होते हैं तो इसका काफी गहरा असर आपके खाने-पीने की आदत पर भी पड़ता है. कई लोग स्ट्रेस में होने की वजह से जंक फूड्स खाना शुरू कर देते हैं. इसकी वजह से आपका शरीर और भी ज्यादा सुस्त महसूस करने लगता है. जब आप ऑफिस में काम कर रहे हों तो हमेशा एक हेल्दी और लाइट डाइट ही लें. इसके अलावा फलों, ड्राई फ्रूट्स और सही मात्रा में पानी पीने की आदत को भी अपने डेली रूटीन का हिस्सा बनाएं. जब आपका शरीर हाइड्रेटेड रहेगा तो आपका दिमाग काफी ज्यादा बेहतर तरीके से काम करने लग जाएगा. स्मार्टफोन और स्क्रीन से बनाएं थोड़ी दूरी अगर आप ऑफिस के कामों को खत्म करने के बाद भी लगातार स्मार्टफोन और लैपटॉप में ही घुसे हुए रहते हैं, तो इसकी वजह से आपके दिमाग को आराम करने का बिलकुल भी समय नहीं मिलता है. कोशिश करें कि जब भी आपका काम खत्म हो जाए, तो कुछ देर के लिए स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसी चीजों से दूर रहें. आपके लिए बेहतर होगा कि आप अपने परिवार के साथ समयबिताएं , इस समय कोई किताब पढ़ें या फिर अपनी पसंद का कोई काम ही कर लें. जब आप ऐसा करते हैं तो आपका मेंटल स्ट्रेस देखते ही देखते खत्म होने लग जाता है. योगा और मेडिटेशन की ले सकते हैं मदद अगर आप वाकई में ऑफिस में होने वाली स्ट्रेस को कंट्रोल में रखना चाहते हैं, तो अपनी डेली रूटीन में योगा और मेडिटेशन को जरूर शामिल कर लें. जब आप हर दिन कम से कम 15 मिनट मेडिटेशन करना, गहरी सांसें लेना और एक्सरसाइज करना शुरू कर देंगे तो आपका मन काफी ज्यादा शांत रहने लग जाएगा. इससे आपका स्ट्रेस भी कम होगा और साथ ही गुस्सा भी कंट्रोल में रहने लगेगा. यह छोटा सा उपाय आपके कामों को करने की कैपसिटी को भी बढ़ा देता है.

IPL 2026: राजस्थान रॉयल्स का प्लेऑफ सफर मुश्किल में, LSG के खिलाफ जीत जरूरी

जयपुर राजस्थान रॉयल्स को अगर आईपीएल 2026 के प्लेऑफ में पहुंचने की अपनी धुंधली उम्मीदों को बरकरार रखना है तो उसे अपने दोनों आखिरी मुकाबले जीतने होंगे। टीम अपने पिछले तीनों मुकाबले हार चुकी है। अब उसका अगला मुकाबला मंगलवार को अपने होम ग्राउंड जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में लखनऊ सुपर जॉइंट्स के खिलाफ है। इस करो या मरो मैच में जीत हासिल करने के लिए उसे खेल के हर विभाग में सुधार करना होगा राजस्थान रॉयल्स इस सीजन में घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाने में पूरी तरह नाकाम रही है। इस सीजन में उसने अपने होमग्राउंड में एक भी मैच नहीं जीता है। अब आईपीएल 2026 में जयपुर में होने वाला उसका आखिरी मैच उसके लिए करो या मरो जैसा बन गया है। राजस्थान रॉयल्स इसके बाद लीग चरण के अपने अंतिम मैच में 24 मई को मुंबई इंडियंस का सामना करेगी। राजस्थान रॉयल्स को रविवार यानी 17 मई को दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ निचले क्रम के बल्लेबाजों और गेंदबाजों के खराब प्रदर्शन के कारण हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा उसकी फील्डिंग भी अच्छी नहीं रही थी। रॉयल्स की टीम अच्छी शुरुआत के लिए 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी पर काफी हद तक निर्भर रही है, लेकिन इस युवा खिलाड़ी को दूसरे छोर से यशस्वी जायसवाल से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला है। ध्रुव जुरेल ने कुछ शानदार पारियां खेली हैं, लेकिन पिछले मैच में उन्होंने कुछ धीमी पारी खेली जबकि दूसरे छोर पर विकेट गिरते रहे। कप्तान रियान पराग ने हाल के मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है। वह चाहेंगे कि उनकी टीम आखिरी पांच ओवरों में बल्लेबाजी में और अधिक सटीक प्रदर्शन करे। आईपीएल के मौजूदा सत्र में अधिकतर टीम की फील्डिंग अच्छी नहीं रही है और उन्होंने कई कैच छोड़े हैं। राजस्थान रॉयल्स भी इन टीमों में शामिल है जिसने कुछ अच्छे मौके गंवाए हैं। दिल्ली कैपिटल्स से मिली हार के बाद पराग ने टूर्नामेंट के अंतिम चरण में टीम के अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाने पर निराशा व्यक्त की थी। पराग ने कहा, ‘फील्डिंग खराब थी। अगर हम इसी तरह खेलते रहे तो हमें शीर्ष चार में जगह बनाने की दौड़ में नहीं होना चाहिए। अब अगर हम क्वालीफाई नहीं कर पाते हैं तो यह हमारी गलती होगी किसी और की नहीं।’ एलएसजी की टीम पहले ही प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी है। वह अब बिना किसी दबाव के खेल रही है जिसका नमूना पिछले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के खिलाफ मिली जीत में देखने को मिला। उसे राजस्थान रॉयल्स के बाद अपने आखिरी लीग मैच में पंजाब किंग्स का सामना करना है। उसकी टीम इन दोनों टीमों के समीकरण बिगाड़ने के लिए प्रतिबद्ध होगी। बल्लेबाजी एलएसजी की सबसे कमजोर कड़ी रही है, लेकिन मिचेल मार्श ने सीएसके के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया जिससे टीम जीत हासिल करने में सफल रही। वह अपना इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखकर इस सत्र का सकारात्मक अंत करना चाहेगी। टीम इस प्रकार हैं: राजस्थान रॉयल्स: शुभम दुबे, शिमरोन हेटमायर, यशस्वी जयसवाल, ध्रुव जुरेल, लुआन-ड्रे प्रीटोरियस, रियान पराग (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, डोनोवन फरेरा, रवींद्र जड़ेजा, जोफ्रा आर्चर, नांद्रे बर्गर, तुषार देशपांडे, क्वेना मफाका, संदीप शर्मा, रवि बिश्नोई, सुशांत मिश्रा, अमन राव पेराला, एडम मिल्ने, कुलदीप सेन, दासुन शनाका, युध्दवीर चरक, रवि सिंह, विग्नेश पुथुर, ब्रिजेश शर्मा। लखनऊ सुपर जॉइंट्स: ऋषभ पंत (कप्तान), अब्दुल समद, आयुष बडोनी, मैथ्यू ब्रीट्ज़के, हिम्मत सिंह, एडेन मार्क्रम, निकोलस पूरन, अर्शिन कुलकर्णी, मिचेल मार्श, शाहबाज़ अहमद, अवेश खान, मोहम्मद शमी, प्रिंस यादव, दिग्वेश सिंह राठी, मयंक प्रभु यादव, वानिंदु हसरंगा, एनरिक नोर्किया, जोश इंग्लिस, मोहसिन खान, नमन तिवारी, आकाश महाराज सिंह, मुकुल चौधरी, मणिमारन सिद्धार्थ, अर्जुन सचिन तेंदुलकर, अक्षत रघुवंशी। समय: मैच भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे शुरू होगा।

बैंक खातों से कारोबार तक जांच तेज, तरनतारन में ED की बड़ी कार्रवाई

तरनतारन. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की विशेष टीम ने सोमवार को तरनतारन में सोना कारोबारी बिक्रमजीत सिंह उर्फ बंटी के तीन ठिकानों पर दबिश देकर व्यापक जांच अभियान चलाया। सुबह से शुरू हुई इस कार्रवाई से शहर में हड़कंप मच गया। ईडी की टीम ने कारोबारी की दुकान, पुश्तैनी घर और कोठी में दस्तावेजों तथा बैंक लेनदेन की गहन जांच की। जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह करीब दस बजे ईडी की दो टीमें गुरु बाजार स्थित आभूषण दुकान और मोहल्ला गुरु का खूह चौक स्थित पुश्तैनी घर पहुंचीं। जब टीम दुकान पर पहुंची, उस समय कारोबारी बंटी के पिता कुलवंत सिंह वहां मौजूद थे। अधिकारियों ने करीब डेढ़ घंटे तक दुकान से जुड़े कारोबार, दस्तावेजों और लेनदेन के रिकार्ड की जांच की। कारोबारी के घर में भी चला तलाशी अभियान दूसरी ओर एक अन्य टीम ने गुरु का खूह चौक स्थित घर में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान परिवार की महिलाओं को घरेलू कामकाज जारी रखने के लिए कहा गया। कार्रवाई के दौरान ईडी ने स्थानीय पुलिस को भी पहले से कोई जानकारी नहीं दी थी, जिससे पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई। इसके बाद टीम ने दीप एवेन्यू कालोनी स्थित गुरुद्वारा लकीर साहिब के पास बनी कोठी में भी दबिश दी। करीब 12 सदस्यों वाली टीम ने परिवार के सदस्यों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की। चार अलग-अलग बैंकों के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर खातों में हुए लेनदेन का विवरण प्राप्त किया गया। दिल्ली के बिल्डर कारोबारी से संबंध सूत्रों के अनुसार कारोबारी के एक करीबी रिश्तेदार का संबंध दिल्ली के बड़े निर्माण कारोबार से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां इसी कड़ी को ध्यान में रखते हुए कारोबारी के आर्थिक संबंधों और लेनदेन की जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि करीब चार माह पहले भी ईडी की टीम ने इसी कोठी में दबिश दी थी, लेकिन उस समय भी कारोबारी घर में मौजूद नहीं मिला था। फिलहाल ईडी की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन शहर में पूरे दिन इस छापेमारी की चर्चा बनी रही। जांच एजेंसियां अब कारोबारी के वित्तीय रिकॉर्ड और संभावित कारोबारी संबंधों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

17 IPS और 3 HPS अफसरों के तबादले, गुरुग्राम को मिला नया पुलिस कमिश्नर

चंडीगढ़. हरियाणा में पुलिस विभाग में अधिकारियों के स्थानांतरण का क्रम जारी है। हरियाणा पुलिस सेवा (एचपीएस) के 27 अधिकारियों को बदलने के बाद अब प्रदेश सरकार ने 17 आईपीएस और तीन एचपीएस अधिकारियों का स्थानांतरण किया है। साेमवार को इनमें से कई अधिकारियों ने नया कार्यभार संभाल भी लिया। गृह सचिव सुधीर राजपाल द्वारा जारी आदेशों में आईपीएस चारू बाली को राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निराेधक ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) पद से हटा दिया गया है। हालांकि वह पहले की तरह एडीजीपी पुलिस कॉम्प्लेक्स भोंडसी की जिम्मेदारी संभालती रहेंगी। उनकी जगह आईपीएस माटा रवि किरण को राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निराेधक ब्यूरो में एडीजीपी लगाया गया है। सिबास कबिराज को मिली नई जिम्मेदारी पंचकूला के पुलिस आयुक्त और साइबर व राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो मुख्यालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे सिबाश कबिराज को गुरुग्राम का नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है। गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर रहे विकास अरोड़ा को एडीजीपी प्रशासन पुलिस मुख्यालय पंचकूला बनाया गया है। आईपीएस केके राव को एडीजीपी आरटीसी भौंडसी लगाया गया है। इसी प्रकार गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा को अब पंचकूला में एडीजीपी प्रशासन लगाया गया है। राकेश कुमार आर्य को आइजी क्राइम ब्रांच, अशोक कुमार को आइजी करनाल रेंज, ओम प्रकाश को आइजी साउथ रेंज रेवाड़ी, नाजनीन भसीन को आइजी एचएपी मधुबन व आइजीपी आरटीसी भोंडसी, कुलदीप सिंह को आइजी हिसार रेंज लगाया है। सुरिंदर पाल सिंह डीआईजी-सीआईडी इसी तरह हामिद अख्तर को डीआइजी एचएपी मधुबन, सुरिंदर पाल सिंह को डीआईजी सीआईडी, राजेंद्र कुमार मीणा को डीआइजी हरियाणा स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, सोनीपत के पद पर तैनात किया गया है। आईपीएस मनबीर सिंह को डीआइजी एचएसएनसीबी रोहतक, सुनील कुमार को डीआईजी स्टेट क्राइम ब्यूरो पंचकूला, एसएस भोरिया को एसपी एसटीएफ पंचकूला तथा अदिति सिंह को एसपी स्टेट विजिलेंस के पद पर तैनात किया गया है। एचपीएस अधिकारियों में सिद्धार्थ ढांडा और पूनम को एसपी राज्य अपराध शाखा मुख्यालय बनाया गया है। पूजा डाबला को आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस) में एसपी लगाया गया है।

शर्मनाक कृत्य पर बड़ा एक्शन, रेप आरोपी शिक्षक सलाखों के पीछे

बलरामपुर-रामानुजगंज. जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गोपातू में पदस्थ शिक्षक धन सिंह राम को गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तारी के बाद निलंबित कर दिया गया है. संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा, सरगुजा संभाग अंबिकापुर द्वारा जारी आदेश में शिक्षक के विरुद्ध दर्ज अपराध को शासकीय सेवा की गरिमा के विपरीत मानते हुए यह कार्रवाई की गई है. जारी आदेश के अनुसार शिक्षक धन सिंह राम के खिलाफ थाना दुलदुला, जिला जशपुर में अपराध क्रमांक 25/2026 के तहत धारा 376(2)(n) भादवि एवं 69 बीएनएस के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है. प्रकरण में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद शिक्षक वर्तमान में जेल निरुद्ध बताया गया है. शिक्षा विभाग ने आदेश में उल्लेख किया है कि उक्त कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन है. इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई है. निलंबन अवधि में धन सिंह राम का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय शंकरगढ़ निर्धारित किया गया है. उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी. कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है.

10,000 नए शिक्षकों का अधियाचन शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा गया: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

20,000 नए शिक्षक व अनुदेशक बेसिक शिक्षा के कायाकल्प को बनाएंगे और मजबूत: सीएम योगी 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने बढ़े मानदेय और स्वास्थ्य सुरक्षा सुविधा का किया शुभारम्भ 10,000 नए शिक्षकों का अधियाचन शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा गया: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नए अनुदेशकों की नियुक्ति की जाएगी: सीएम सीएम बोले: हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता बेसिक शिक्षा परिषद में 96% विद्यालयों में पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं, ड्रॉपआउट दर घटी: सीएम बच्चों को छुई-मुई न बनाएं, उन्हें मजबूत, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद की कायाकल्प यात्रा को और अधिक मजबूती देने के लिए प्रदेश सरकार 20,000 नए शिक्षक और अनुदेशकों की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शिक्षा आयोग का गठन किया गया है, जो विभिन्न स्तरों पर शिक्षकों का चयन कर रहा है। उन्होंने कहा कि 10,000 नए शिक्षकों का अधियाचन भेजा जा चुका है, जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नए अनुदेशकों की नियुक्ति भी की जाएगी, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात भी बेहतर होगा। मुख्यमंत्री रविवार को लोकभवन सभागार में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह एवं बढ़े हुए मानदेय के चेक वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सरकार ने खुद मांगा मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2011-12 में बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति शुरू की गई थी। उस समय उन्हें 7,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता था। वर्तमान में कला शिक्षा के 8,469, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा के 9,645 तथा कार्यानुभव शिक्षा के 6,192 अनुदेशक कार्यरत हैं और कुल संख्या 24,296 रह गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2011-12 से लेकर 2022 तक इनके मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। वर्ष 2019 में अनुदेशक महासंघ के साथ बैठक में उन्होंने स्वयं प्रस्ताव मांगा था, लेकिन चुनाव अधिसूचना के कारण निर्णय नहीं हो सका। वर्ष 2022 में सरकार ने 2,000 रुपये की वृद्धि की, लेकिन सरकार स्वयं भी इससे संतुष्ट नहीं थी। सभी अनुदेशक पोर्टल पर कराएं पंजीकरण, जल्द मिलेगा स्वास्थ्य कार्ड मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मानना है कि अनुदेशक, शिक्षामित्र और बेसिक शिक्षा से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी का सम्मान और मानदेय गरिमापूर्ण होना चाहिए। लंबे समय से चली आ रही मांगों को स्वीकार करते हुए सरकार ने अब अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। साथ ही उन्हें और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी अनुदेशक बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा तैयार पोर्टल पर तत्काल पंजीकरण कराएं ताकि अगले सप्ताह बड़े समारोह में स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा सकें। शिक्षा की नींव मजबूत करने वालों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी अवश्य मिलनी चाहिए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों, 24,296 अनुदेशकों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को सामाजिक एवं स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भारत की शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए निरंतर योगदान दे रहा है, उसे सामाजिक सुरक्षा की गारंटी अवश्य मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बढ़ा हुआ मानदेय सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी इससे जुड़ी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2019 में अनुदेशक बहनों को छह माह का पूर्ण मानदेय सहित मातृत्व अवकाश दिया था। वर्ष 2023 में स्वेच्छा से विद्यालय परिवर्तन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिसके तहत 4,000 से अधिक अनुदेशकों को अपनी पसंद का विद्यालय चुनने का अवसर मिला।  96 प्रतिशत बेसिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में जब उनकी सरकार बनी, उस समय बेसिक शिक्षा परिषद की स्थिति बेहद खराब थी। 100 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों में अनुदेशकों की सेवाएं समाप्त करने तक के प्रस्ताव आए थे, लेकिन सरकार ने उन्हें अस्वीकार करते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ और ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की शुरुआत की। आज परिणाम यह है कि 96 प्रतिशत बेसिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं और विद्यालयों की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि ड्रॉपआउट दर, जो पहले 17-18 प्रतिशत थी, अब घटकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई है और सरकार का लक्ष्य इसे शून्य तक पहुंचाना है।  बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बच्चा किसी न किसी प्रतिभा के साथ जन्म लेता है। कोई खेल में अच्छा होता है, कोई कला में, कोई विज्ञान में। शिक्षकों और अनुदेशकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें। उन्होंने कहा कि बच्चों को दबाने की नहीं, बल्कि प्रेरित करने और सही दिशा दिखाने की जरूरत है। आत्म अनुशासन, समय पालन, स्वच्छता और संस्कार शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने मीडिया से भी अपील करते हुए कहा कि यदि बच्चे श्रमदान करते दिखाई दें तो उसे नकारात्मक रूप में प्रस्तुत न किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को छुई-मुई न बनाएं, उन्हें मजबूत, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। बेसिक शिक्षा परिषद से उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षकों को दंडित करने के बजाय सम्मानित किया जाना चाहिए जो बच्चों में अनुशासन और स्वच्छता की भावना विकसित कर रहे हैं। समय पर उपलब्ध करा दी जाएंगी पुस्तकें मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ को नीति आयोग ने देश के सामने एक सफलता की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के सामूहिक प्रयासों से ही यह बदलाव संभव हुआ है। सरकार की साफ नीयत और स्पष्ट नीति के कारण आज प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 60 लाख बच्चे बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बच्चों के लिए जूते-मोजे, यूनिफॉर्म, स्वेटर और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था … Read more

कानून व्यवस्था होगी और मजबूत, गृहमंत्री शाह ने लॉन्च किए 400 डायल-112 वाहन

रायपुर. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज माना पुलिस परेड ग्राउंड, रायपुर में छत्तीसगढ़ पुलिस की अत्याधुनिक ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ और  मोबाइल फॉरेंसिक वैन का शुभारंभ किया. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 400 अत्याधुनिक डायल-112 वाहनों और 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विधायकगण, जनप्रतिनिधिगण और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे. उल्लेखनीय है कि ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम पर आधारित यह आधुनिक सेवा पुलिस, अग्निशमन और चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करते हुए नागरिकों को एक ही नंबर पर त्वरित आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराएगी. इसके तहत शुरू किए गए 400 अत्याधुनिक वाहनों में स्मार्टफोन, जीपीएस, वायरलेस रेडियो, पीटीजेड कैमरा, डैश कैम, मोबाइल एनवीआर और सोलर बैकअप जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं. इन तकनीकों की मदद से घटनास्थल की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित संचार सुनिश्चित किया जा सकेगा. यह सेवा 24×7 संचालित होगी. इसमें जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग, एडवांस व्हीकल ट्रैकिंग, एसआईपी ट्रंक टेक्नोलॉजी और स्वचालित कॉलर लोकेशन पहचान जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है. राज्य के सभी 33 जिला समन्वय केंद्रों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा गया है. नागरिक वॉयस कॉल, एसएमएस, ईमेल, वेब पोर्टल, व्हाट्सएप, चैटबॉट और SOS-112 इंडिया ऐप के माध्यम से भी सहायता प्राप्त कर सकेंगे. मोबाइल फॉरेंसिक वैन से घटनास्थल पर ही होगी वैज्ञानिक जांच ‘Science on Wheels – Towards Faster Justice’ थीम पर आधारित 32 मोबाइल फॉरेंसिक वैन प्रदेश में अपराध अनुसंधान को नई दिशा देंगी. “32 वैन – 32 जिले – एक संकल्प: सटीक जांच, त्वरित न्याय” के उद्देश्य के साथ शुरू की गई यह पहल घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच की सुविधा उपलब्ध कराएगी. लगभग 65 लाख रुपये प्रति यूनिट लागत वाली इन अत्याधुनिक वैन में घटनास्थल संरक्षण किट, साक्ष्य संग्रहण एवं सीलिंग उपकरण, फिंगरप्रिंट डिटेक्शन सिस्टम, नार्कोटिक्स परीक्षण किट, डिजिटल फॉरेंसिक सपोर्ट, उच्च गुणवत्ता फोटोग्राफी व्यवस्था, बुलेट होल स्क्रीनिंग एवं बैलिस्टिक जांच किट तथा गनशॉट रेजिड्यू (GSR) परीक्षण किट जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं. अब तक अपराध स्थल से साक्ष्य प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने में समय लगता था, जिससे साक्ष्यों के दूषित होने की संभावना बनी रहती थी तथा रिपोर्ट आने में भी विलंब होता था. नई मोबाइल फॉरेंसिक वैन के माध्यम से घटनास्थल पर ही प्रारंभिक जांच, साक्ष्य संरक्षण, परीक्षण और डिजिटल दस्तावेजीकरण किया जा सकेगा. इससे जांच की गुणवत्ता और गति दोनों में महत्वपूर्ण सुधार होगा. साक्ष्य आधारित न्याय व्यवस्था को मिलेगा नया बल राज्य सरकार का उद्देश्य वैज्ञानिक जांच को जन-जन तक पहुंचाना, साक्ष्य आधारित न्याय प्रणाली को मजबूत करना, अपराध नियंत्रण में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका को बढ़ाना तथा समयबद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित करना है. आधुनिक डायल-112 सेवा और मोबाइल फॉरेंसिक वैन के संचालन से प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा, अपराध अनुसंधान को नई गति मिलेगी और आम नागरिकों का कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा.

मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना से गांवों को मिली नई रफ्तार, छोटे ग्रामीण इलाकों तक पहुंचीं बसें

‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना’ से उत्तर प्रदेश के छोटे गांवों तक बसों का संचालन शुरू शुरुआती चरण में लगभग 80 बसों में सफर कर रहे ग्रामीण अब तक 70 जिलों में बस संचालन के लिए 858 आवेदन चयनित हुए लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ग्रामीण इलाकों में परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना’ पर गंभीरता से ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य छोटे से छोटे गांव तक बसों की पहुंच को बढ़ाना है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) ने तैयारी को तेज कर दिया है। इस योजना के तहत लगभग 80 बसों को संचालन शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश में 59 हजार से अधिक ग्राम सभाओं को बस सेवा से जोड़ने के लिए सरकार और निगम तेजी से काम कर रहा है। योजना के तहत ग्रामीणों के लिए बस सेवा को ब्लॉक, ग्राम पंचायत, तहसील और जिला मुख्यालय तक जोड़ा जाना है। यूपीएसआरटीसी सहायक प्रबंधक उमेश आर्य ने बताया कि अब तक 70 जिलों के लिए 858 बस ऑपरेटरों के आवेदन चयनित हो चुके हैं। एजेंसियों के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में ‘मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना’ के तहत लगभग 80 बसों का संचालन शुरू हो गया है। 28 सीट वाली मिनी बसों का संचालन उमेश आर्य ने बताया कि इस योजना के तहत अधिकतम 28 सीटों वाली मिनी बसें चलाई जानी हैं। इनकी लंबाई 7 मीटर तक निश्चित की गई है। जिन ऑपरेटरों के आवेदन चयनित हुए हैं, उन्होंने तय मानकों के आधार पर बसों को ऑर्डर दे दिया है। अन्य बसों को संचालन भी जल्द ही शुरू होगा। उन्होंने बताया कि बसों के मार्ग का चयन जिला स्तरीय कमेटी कर रही है। सभी बसों के संचालन और तय मार्ग की जानकारी भी जल्द साझा की जाएगी। रोजगार के रास्ते खुल रहे यह योजना निजी बस संचालकों के माध्यम से चलाई जा रही है। इसके जरिए रूट के करीबी ग्रामीण युवाओं और स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसमें बस ड्राइवर, कंडक्टर, हेल्पर समेत अन्य स्टाफ की आवश्यकता होगी।