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स्वतंत्र देव सिंह बोले- पहले भर्तियों में होती थी लूट, ‘चाचा-भतीजा’ करते थे खेल

जब-जब भर्तियां निकलती थीं 'चाचा-भतीजा' लूटने के लिए झोला लेकर निकल पड़ते थे : स्वतंत्र देव सिंह – सपा सरकार में हुई नियुक्तियों और भर्तियों की योगी सरकार के मंत्रियों ने खोली पोल  – कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने अखिलेश पर साधा निशाना  – 2004-07 पुलिस भर्ती घोटाले पर योगी सरकार के मंत्रियों ने सपा को घेरा – सपा सरकार में भर्ती मतलब सेटिंग और वसूली : स्वतंत्र देव सिंह  – योगी सरकार में पारदर्शी ढंग से हुईं 9 लाख भर्तियां : स्वतंत्र देव सिंह – सपा की असली ऑडिट रिपोर्ट जनता के पास है : असीम अरुण – यूपीपीएससी में एक जाति विशेष को फायदा पहुंचाया गया : असीम अरुण – योगी सरकार में नकल माफिया की कमर तोड़ दी गई, इसीलिए बौखलाए हैं अखिलेश : असीम अरुण  लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों स्वतंत्र देव सिंह और असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सपा सरकार के दौरान भर्ती प्रक्रिया भ्रष्टाचार, जातिवाद और पैसे के खेल का अड्डा बन चुकी थी। दोनों मंत्रियों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश में पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था स्थापित कर युवाओं का भरोसा लौटाया है, जबकि सपा शासन में नौकरी निकलते ही 'चाचा-भतीजा वसूली तंत्र' सक्रिय हो जाता था। भर्ती निकलते ही झोला लेकर निकल जाते थे चाचा-भतीजा जल शक्ति विभाग के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में जब-जब नियुक्तियों और रोजगार के विज्ञापन निकलते थे, तब-तब चाचा-भतीजा लूट के लिए झोला लेकर निकल जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर भर्ती तक हर जगह खुला रेट चलता था और बिना पैसे व सिफारिश के कोई काम नहीं होता था। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में लगभग 9 लाख सरकारी भर्तियां पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ हुई हैं। समाज के सभी वर्गों के युवाओं को अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि आज हर गांव में 4-5 युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। न जातिवाद चला, न क्षेत्रवाद। केवल योग्यता के आधार पर चयन हुआ।  दलितों और शोषितों को दबाने का काम करती थी सपा सरकार स्वतंत्र देव सिंह ने आरोप लगाया कि सपा शासन में दलितों, पिछड़ों और शोषित वर्गों को व्यवस्थित रूप से दबाने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और लूट-खसोट उस सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बन चुके थे। सपा सरकार में हर काम में भ्रष्टाचार था। जनता सब देख चुकी है और समझ चुकी है। 2004-07 की भर्ती घोटाले की ऑडिट रिपोर्ट जनता के सामने है समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने भी अखिलेश यादव की कथित 'पीडीए ऑडिट रिपोर्ट' पर पलटवार करते हुए कहा कि जनता के पास सपा सरकार की असली 'ऑडिट रिपोर्ट' पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा कि 2004 से 2007 के बीच मुलायम सिंह यादव सरकार में पुलिस भर्ती घोटाला हुआ था, जिसमें व्यापक धांधली के आरोप लगे। असीम अरुण ने कहा कि मायावती सरकार बनने के बाद 50 से अधिक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया और पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करना पड़ा। बाद में सीबीआई ने मामले में चार्जशीट दाखिल की। उन्होंने कहा कि मायावती सरकार ने 2007 में पुलिस भर्ती की पारदर्शी व्यवस्था लागू की थी, लेकिन 2012 में अखिलेश सरकार ने उसे खत्म कर 10वीं और 12वीं के नंबर के आधार पर भर्ती शुरू कर दी, जिससे पक्षपात और धांधली के आरोप फिर बढ़े। योगी सरकार ने बिना सिफारिश सवा दो लाख पुलिस भर्ती की असीम अरुण ने कहा कि योगी सरकार ने पहली बार ऐसी भर्ती व्यवस्था दी, जिसमें बिना सिफारिश और बिना पैसे के केवल योग्यता के आधार पर चयन हुआ। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग सवा दो लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती पारदर्शी तरीके से कराई गई है और कुल मिलाकर लगभग 9 लाख सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने कहा कि आज नकल माफिया की कमर टूट चुकी है। परीक्षा माफियाओं पर कार्रवाई हो रही है। इसी वजह से अखिलेश यादव बौखलाए हुए हैं। यूपीपीएससी में एक जाति विशेष की भर्तियां हुईं असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान यूपीपीएससी में हुई नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा सरकार ने अनिल यादव को यूपीपीएससी का चेयरमैन बनाया, जिसकी नियुक्ति को हाईकोर्ट ने बाद में रद्द कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में एक जाति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए भर्ती प्रक्रिया प्रभावित की गई। सामान्य वर्ग की सीटों पर भी एक ही जाति के लोगों की भर्ती कराई गई। यही सपा की असली ऑडिट रिपोर्ट है। राहुल गांधी राजनीतिक पर्यटक बन चुके हैं राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए असीम अरुण ने कहा कि कांग्रेस नेता अमेठी और रायबरेली में 'राजनीतिक पर्यटक' की तरह आते हैं और हर बार विवाद पैदा करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 7.6 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है और यह दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ऊर्जा बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन राहुल गांधी ऊल-जुलूल बयान देकर सिर्फ भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। जनता सब जानती है दोनों मंत्रियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सपा शासन और योगी सरकार के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से देख चुकी है। उन्होंने दावा किया कि जहां पहले भर्ती प्रक्रिया जातिवाद और भ्रष्टाचार से प्रभावित रहती थी, वहीं अब पारदर्शिता, तकनीक और मेरिट के आधार पर चयन हो रहा है।

रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना: पहले चरण में 45 हजार छात्राओं को मिलेगा लाभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाली मेधावी छात्राओं के लिए एक बेहद शानदार खबर है। राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपने चुनावी वादे को अमलीजामा पहनाने के लिए 'रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना' के तहत छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने की तैयारियां तेज कर दी हैं। पहले चरण में 45 हजार छात्राओं को स्कूटी मिल सकती है। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए पात्रता और मेरिट तय करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद उच्च शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। सीएम योगी की अधिकारियों को फटकार, जल्द नियम तय करने के निर्देश उच्च स्तरीय बैठक के दौरान जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्कूटी वितरण को लेकर अब तक तैयार की गई पात्रता, नियमों और रूपरेखा के बारे में पूछा, तो अधिकारियों ने बताया कि इस पर अभी अंतिम नियम और ड्राफ्ट तैयार नहीं हो सका है। इस पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि बिना किसी देरी के जल्द से जल्द गाइडलाइंस और पात्रता के नियम निर्धारित किए जाएं, ताकि योजना के अगले चरण का काम शुरू हो सके। सीएम ने साफ कहा कि प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाकर मेधावी छात्राओं को जल्द से जल्द स्कूटी का वितरण सुनिश्चित किया जाए पहले चरण के लिए 400 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद अब उच्च शिक्षा विभाग मुफ्त स्कूटी वितरण के लिए मेरिट का पैमाना तय करने में जुट गया है। विभाग इस बात पर मंथन कर रहा है कि छात्राओं का चयन स्नातक (UG) व स्नातकोत्तर (PG) कक्षाओं में प्रथम वर्ष के अंकों के आधार पर किया जाए या फिर अंतिम वर्ष के परीक्षा परिणामों को आधार बनाया जाए। आपको बता दें कि राज्य सरकार ने इस योजना के लिए पहले ही ₹400 करोड़ का भारी-भरकम बजट स्वीकृत कर रखा है। शिक्षा विभाग के आकलन के अनुसार, इस बजट के जरिए पहले चरण में प्रदेश की लगभग 45,000 सबसे मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी दी जा सकती है। हालांकि, लाभार्थियों की अंतिम संख्या पर आखिरी मुहर शासन स्तर से ही लगाई जाएगी 9 लाख छात्राओं में से होगा मेधावियों का चयन मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक स्तर पर करीब 9 लाख छात्राएं नामांकित हैं। इन सभी छात्राओं में से कड़ी स्क्रीनिंग और मेरिट लिस्ट के जरिए ही भाग्यशाली मेधावियों का चुनाव किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है, बल्कि कॉलेज आने-जाने में उन्हें आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाना भी है। शासन से हरी झंडी मिलते ही विभाग द्वारा ऑनलाइन आवेदन और कॉलेजों के जरिए डेटा जुटाने का काम शुरू कर दिया जाएगा

2 जून 2026 को बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर, जानें किस पर पड़ेगा असर

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के गोचर को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, जिसमें देवगुरु बृहस्पति का राशि परिवर्तन सबसे अधिक प्रभावशाली और व्यापक माना जाता है. ग्रहों के गुरु माने जाने वाले बृहस्पति 2 जून 2026 को एक प्रमुख गोचर करने जा रहे हैं. इस दिन गुरु अपनी वर्तमान स्थिति को त्यागकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, कर्क राशि बृहस्पति की 'उच्च' राशि है, जिसका अर्थ है कि इस गोचर के दौरान गुरु अपने सबसे शक्तिशाली और शुभ प्रभाव में रहेंगे. बृहस्पति को ज्ञान, धन, संतान, और भाग्य का कारक माना जाता है, इसलिए उनके इस राशि परिवर्तन से पूरी दुनिया के सामाजिक, आर्थिक और व्यक्तिगत जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ना तय है. किसी के लिए यह गोचर करियर में नई ऊंचाइयां लेकर आएगा, तो किसी के लिए यह समय आत्म-चिंतन और सावधानी बरतने का होगा. क्या यह गोचर आपके लिए सुख-समृद्धि के द्वार खोलेगा या आपको आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा? आइए जानते हैं कि कर्क राशि में गुरु का यह विशेष गोचर किन राशियों के लिए बहुत बुरा माना जा रहा है. मेष (Aries) गुरु का यह गोचर आपके चतुर्थ भाव में होगा. पारिवारिक जीवन में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं. घर के रखरखाव या माता के स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ सकता है. कार्यस्थल पर भी बदलाव की स्थिति बन सकती है, इसलिए धैर्य बनाए रखें. मिथुन (Gemini) बृहस्पति आपकी राशि से निकलकर दूसरे भाव में प्रवेश करेंगे. आर्थिक रूप से आपको सावधान रहना होगा. धन संचय में दिक्कतें आ सकती हैं. परिवार में वाणी के कारण मतभेद होने की संभावना है. फिजूलखर्ची पर लगाम लगाएं. तुला (Libra) गुरु का गोचर आपके दसवें भाव में होगा. करियर और कार्यक्षेत्र में अचानक कोई बड़ा बदलाव या तनाव देखने को मिल सकता है. वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर चलें. कार्य में किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें. कुंभ (Aquarius) आपके छठे भाव में गुरु का गोचर स्वास्थ्य और शत्रुओं से जुड़ी समस्याएं खड़ी कर सकता है. गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें. कानूनी मामलों में सावधानी बरतें. स्वास्थ्य के प्रति जरा भी लापरवाही न बरतें.

योगी सरकार ने पेंशन राशि 2500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह की

कुष्ठावस्था पेंशन योजना बनी सहारा, हजारों दिव्यांगजनों को मिल रहा सम्मान और संबल योगी सरकार ने पेंशन राशि 2500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह की   नौ वर्षों में लाभार्थियों की संख्या 4765 से बढ़कर 13667 पहुंची पीएफएमएस एवं ई-पेमेंट प्रणाली से सीधे खातों में पहुंच रही पेंशन राशि लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत एवं सुरक्षा पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। इसी क्रम में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित कुष्ठावस्था पेंशन योजना कुष्ठ रोग से प्रभावित दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक एवं सामाजिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। वर्तमान में प्रदेश के 13 हजार से अधिक लाभार्थियों को इस योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 3000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह योजना ऐसे व्यक्तियों के लिए है जो कुष्ठरोग के शिकार होने के बाद दिव्यांग भी हो जाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को मिल रही सहायता दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य कुष्ठ रोग से प्रभावित आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत ऐसे सभी पात्र दिव्यांगजन लाभान्वित किए जाते हैं, जो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं, जिनके परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये से अधिक नहीं है तथा जो किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना का लाभ प्राप्त नहीं कर रहे हैं।  योगी सरकार ने सहायता राशि 2500 से बढ़ाकर 3000 रुपये की योजना के प्रारंभ में लाभार्थियों को 2500 रुपये प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जाती थी, जिसे साल 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील सोच और गरीब कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के दृष्टिगत बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया था। इससे लाभार्थियों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है और उनके जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार आया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में जहां 4765 लाभार्थियों को योजना का लाभ प्राप्त हो रहा था, वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 13667 हो गई है। सहायता सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जा रही योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का चयन मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर किया जाता है। इस योजना के तहत ऐसे व्यक्तियों को पात्र माना जाता है जिनमें कुष्ठरोग का शिकार होने के कारण दिव्यांगता आ जाती है। विशेष बात यह है कि कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के लिए दिव्यांगता प्रतिशत की कोई अनिवार्यता निर्धारित नहीं है। पात्र लाभार्थियों को पेंशन की धनराशि पीएफएमएस प्रणाली एवं कोषागार की ई-पेमेंट व्यवस्था के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं प्रभावी बनी हुई है। योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं आवेदक प्रदेश सरकार द्वारा आवेदन प्रक्रिया को भी पूर्णतः ऑनलाइन किया गया है। पात्र आवेदक sspy-up.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को भी सुविधा प्राप्त हुई है तथा सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने की समस्या में कमी आई है। पारदर्शी तरीके से योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा- उप निदेशक दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि कुष्ठावस्था पेंशन योजना के माध्यम से कुष्ठ रोग से प्रभावित दिव्यांगजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप पात्र व्यक्तियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।

नकली दूध-पनीर पर पंजाब सरकार का शिकंजा, जांच में बड़ी गड़बड़ी उजागर

चंडीगढ़. पंजाब में मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ सरकार ने अब पनीर पर बड़ा अभियान शुरू किया है। दूध की जांच के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) पंजाब ने पूरे राज्य में दो दिन का विशेष पनीर सैंपलिंग अभियान चलाकर 211 नमूने एकत्र किए हैं। ये नमूने स्थानीय डेयरियों, प्रोसेसिंग यूनिटों और शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों के खुदरा बिक्री केंद्रों से लिए गए। सभी नमूनों को राज्य की मान्यता प्राप्त खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है, जहां मिलावट, अशुद्धता और गुणवत्ता मानकों के आधार पर जांच की जाएगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. बलबीर सिंह ने बुधवार को बताया कि पंजाब सरकार खाद्य सुरक्षा को लेकर लगातार सख्ती बरत रही है। इसी कड़ी में सोमवार और मंगलवार को पूरे राज्य में पनीर सैंपलिंग अभियान चलाया गया। उन्होंने बताया कि अगर कोई फूड बिजनेस आपरेटर तय मानकों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट-2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि पनीर अभियान से पहले 6 और 7 मई को राज्यभर में दूध सैंपलिंग अभियान चलाया गया था। उस दौरान 204 दूध के नमूने लिए गए थे। जांच रिपोर्ट में इनमें से 68 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि एक नमूना मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाया गया। इस खुलासे के बाद विभाग ने डेयरी उत्पादों की निगरानी और सख्त कर दी है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों तक सुरक्षित और शुद्ध खाद्य सामग्री पहुंचाना है। एफडीए पंजाब की कमिश्नर कंवलप्रीत बराड़ ने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी केवल सैंपल लेने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेयरी संचालकों को स्वच्छता, भंडारण और सुरक्षित हैंडलिंग के नियमों के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं।

Prime Video की ‘Off Campus’ में मीका अब्दुल्ला की चर्चा, महिमा चौधरी से हो रही तुलना

प्राइम वीडियो की नई सीरीज 'ऑफ कैंपस' (Off Campus) लगातार चर्चा में बनी हुई है. 13 मई को इस शो का प्रीमियर हुआ था. तब से सोशल मीडिया पर इसने धमाल मचाया हुआ है. फैंस लगातार सीरीज को लेकर एडिट्स, क्लिप्स और रिएक्शन्स शेयर कर रहे हैं. 'ऑफ कैंपस' की लीड जोड़ी हैना वेल्स (Ella Bright) और गैरेट ग्राहम (Belmont Cameli) की जबरदस्त केमिस्ट्री ने दर्शकों का दिल जीत लिया है. मगर भारत में कोई और ही जनता का खूब ध्यान खींच रहा है. लेखिका एली केनेडी (Elle Kennedy) की बेस्ट सेलिंग बुक सीरीज पर बना 'ऑफ कैंपस' शो, कॉलेज में पढ़ने वाले हैना और गैरेट की लव स्टोरी है. इन दोनों को प्यार होता है और उनकी जिंदगी बदल जाती है. शो में यंग एक्टर्स एला ब्राइट और बेलमॉन्ट कमेली ने बढ़िया का किया है. लेकिन शो में एक और किरदार है, जिसने भारतीय दर्शकों को हैरान कर दिया है. वो है एली हेज का रोल निभाने वाली एक्ट्रेस मीका अब्दुल्ला (Mika Abdalla). सीरीज में दिखीं महिमा चौधरी की बेटी? कई भारतीय दर्शकों ने सीरीज देखते हुए नोटिस किया है कि मीका अब्दुल्ला दिखने में काफी हद तक बॉलीवुड एक्ट्रेस महिमा चौधरी जैसी हैं. ऐसे में यूजर्स ने दोनों के लुक्स की तुलना शुरू कर दी. यंग महिमा चौधरी को याद किया जाने लगा. इसके अलावा कुछ यूजर्स ऐसे भी थे, जिन्हें मीका को देखकर महिमा की बेटी अरियाना चौधरी की याद आ गई. मीका अब्दुल्ला और अरियाना चौधरी की शक्ल भी बहुत मिलती-जुलती है. ऐसे में यूजर्स का कन्फ्यूज होना लाजिमी था. एक इंस्टाग्राम यूजर ने सीरीज में मीका अब्दुल्ला के डांस करते हुए वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, 'प्लॉट ट्विस्ट: महिमा चौधरी की असली बेटी ऑफ कैंपस में ही थी सबके सामने.' वीडियो में महिमा चौधरी के यंग दिनों की तस्वीरें भी शामिल थीं. वीडियो शेयर होने के तुरंत बाद कमेंट्स सेक्शन फैंस से भर गया. एक फैन ने लिखा, 'मुझे भी यही लगा था. वो बिल्कुल उनकी रेप्लिका हैं. वो साइड लुक…' दूसरे फैन ने लिखा, 'सही में भाई. मेरे दिमाग में सबसे पहले यही आया था.' तीसरे ने कहा, 'सच में ब्रो, वो महिमा चौधरी जैसी ही लगती हैं.' एक और यूजर ने लिखा, 'आखिरकार किसी ने ये बात कह ही दी. मेरा ख्याल भी बिल्कुल यही था.' एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, 'मुझे लगा मैं अकेली हूं जिसे लगा वो महिमा चौधरी जैसी दिखती है.' कौन है मीका अब्दुल्ला? 'ऑफ कैंपस' सीरीज में मीका अब्दुल्ला ने एली हेज (Allie Hayes) का रोल निभाया है. एली, शो की हीरोइन हैना वेल्स की क्लोज फ्रेंड और रूममेट हैं. इस अमेरिकी कॉलेज रोमांस ड्रामा में बेलमॉन्ट कमेली, स्टीफन कलिन, जेलन थॉमस ब्रुक्स संग अन्य ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं. लुईसा लेवी (Louisa Levy) का क्रिएट किया गया ये शो एक म्यूजिक स्टूडेंट और यूनिवर्सिटी के स्टार हॉकी प्लेयर के रोमांस की कहानी है, जो फिलहाल अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीमिंग हो रहा है.

शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, योगी सरकार विकसित करेगी इनोवेशन कल्चर

परिषदीय और केजीबीवी में इनोवेशन कल्चर विकसित करेगी योगी सरकार – 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों को डीप टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक सोच से जोड़ने की तैयारी – विद्यालयों में संगोष्ठी, टेक्नोलॉजी आधारित विशेष कक्षाएं, क्विज और निबंध प्रतियोगिताएं होंगी आयोजित – गांव और कस्बों के बच्चों तक आधुनिक और नवाचार आधारित शिक्षा पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम लखनऊ,  योगी सरकार परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ देश के उभरते इनोवेशन और तकनीकी बदलावों से जोड़कर भविष्य के लिए तैयार करने में जुट गई है। 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान के माध्यम से पहली बार गांव और कस्बों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को डीप टेक्नोलॉजी, रिसर्च, नवाचार और वैज्ञानिक सोच से जोड़ने की बड़ी पहल शुरू की गई है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चे तक भी वही आधुनिक सीखने का माहौल पहुंचे, जो अब तक चुनिंदा संस्थानों और बड़े शहरों तक सीमित माना जाता था। सरकार द्वारा अब परिषदीय और केजीबीवी विद्यालयों में संगोष्ठी, टेक्नोलॉजी आधारित विशेष कक्षाएं, नवाचार क्विज और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में वैज्ञानिक सोच और इनोवेशन कल्चर विकसित करने की तैयारी की जा रही है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रदेश के सभी परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 'भारत इनोवेट्स 2026' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके अंतर्गत मई 2026 के दौरान विद्यालयों में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की सहभागिता से विभिन्न नवाचार आधारित गतिविधियां कराई जाएंगी। प्रतियोगिता तथा निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालयों में 'विकसित भारत के नवाचार परिदृश्य' विषय पर संगोष्ठी, 'डीप टेक्नोलॉजी' विषय पर विशेष कक्षाएं, 'भारत क्विज- भारत के नवाचार को कौन जानता है?' प्रतियोगिता तथा निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उनमें जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है। भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से हो सकेंगे तैयार योगी सरकार की रणनीति है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी देश और दुनिया में हो रहे तकनीकी बदलावों और नवाचारों से परिचित हों। यही कारण है कि अब परिषदीय विद्यालयों में भी इनोवेशन और रिसर्च आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जब बच्चों को शुरुआती स्तर पर वैज्ञानिक सोच, तकनीक और नवाचार से जोड़ा जाएगा तो वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। स्वयंसेवी संस्थाओं का भी लिया जाएगा सहयोग विद्यालयों में कार्यक्रमों के आयोजन के लिए स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं और विशेषज्ञों का सहयोग भी लिया जाएगा। शासन ने निर्देश दिए हैं कि गतिविधियों को अधिक प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इसमें शामिल हो सकें। इसके साथ ही विद्यालयों में आयोजित गतिविधियों की फोटो, वीडियो और नवाचार से जुड़ी जानकारियों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा। तकनीक और नवाचार संस्कृति से जोड़ने का प्रयास योगी सरकार पहले ही निपुण भारत मिशन, स्मार्ट क्लास, डिजिटल मॉनिटरिंग और स्कूल कायाकल्प जैसे अभियानों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने पर काम कर रही है। अब 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान को उसी व्यापक विजन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी भविष्य की तकनीक और नवाचार संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

ई-रिक्शा चालकों के लिए बड़ा अलर्ट, रायपुर में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया तो फंसेंगे

रायपुर. राजधानी में संचालित ई-रिक्शा और ऑटो के ऑनलाइन पंजीयन के लिए विशेष अभियान शुरू कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने इस अभियान का शुभारंभ किया। जनहित फाउंडेशन के सहयोग से तैयार किए गए क्यूआर कोड और ऑनलाइन पंजीयन लिंक के जरिए ई-रिक्शा चालकों और मालिकों को अगले 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। पूरी जानकारी होगी दर्ज ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया में ई-रिक्शा मालिक और चालक का नाम, पता, मोबाइल नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस नंबर दर्ज किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस अभियान से राजधानी में संचालित ई-रिक्शा और ऑटो की वास्तविक संख्या का पता चल सकेगा। साथ ही वाहन संचालकों का पूरा डेटा भी पुलिस के पास उपलब्ध रहेगा। बिना पंजीयन पर होगी कार्रवाई पुलिस प्रशासन ने 5 जून तक विशेष पंजीयन अभियान चलाने का निर्णय लिया है। ई-रिक्शा और ऑटो चालक अपने मोबाइल फोन के माध्यम से भी आसानी से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 5 जून के बाद बिना पंजीयन के संचालित होने वाले ई-रिक्शा और ऑटो के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। राजधानी में यातायात व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।

समर वेकेशन में खुल रहे स्कूलों पर कड़ा एक्शन, DEO को DPI का आदेश जारी

रायपुर. भीषण गर्मी के बीच ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान स्कूल संचालित करने वाले निजी शिक्षण संस्थानों पर अब कार्रवाई की जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संभागीय संयुक्त संचालकों को ऐसे स्कूलों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कार्रवाई की रिपोर्ट शासन को भेजने के लिए भी कहा गया है। 20 अप्रैल से 15 जून तक घोषित है ग्रीष्मकालीन अवकाश राज्य सरकार की ओर से सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, गैर अनुदान प्राप्त और अशासकीय विद्यालयों में 20 अप्रैल से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है। इसके बावजूद कई निजी स्कूलों में बच्चों को बुलाकर नियमित कक्षाएं संचालित किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। आदेश की अनदेखी कर स्कूल चला रहे कई निजी संस्थान जानकारी के मुताबिक कुछ अशासकीय विद्यालय शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद विभिन्न कारणों से स्कूलों का संचालन कर रहे हैं। शासन ने इसे आदेश का उल्लंघन माना है और ऐसे संस्थानों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। हाल ही में हाई कोर्ट ने भी अवकाश अवधि के दौरान निजी स्कूलों में कक्षाएं संचालित किए जाने पर चिंता व्यक्त की थी। इसके बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

‘अंबाला से दिल्ली तक होंगे धमाके’, स्कूलों और CM दफ्तर को मिली धमकी से हड़कंप

चंडीगढ़ चंडीगढ़ के स्कूलों को फिर एक बार बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। जहां धमकी आने के बाद हड़कंप मच गया है और पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड में है। चंडीगढ़ पुलिस ने तुरंत एक्शन में आते हुए स्कूलों की घेराबंदी कर ली है। कई आलाधिकारी भी मौके पर पहुंचे हैं और बम स्क्वायड, डॉग स्क्वायड के साथ तत्परता से स्कूलों को खाली कराते हुए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। सर्च ऑपरेशन के दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और एंबुलेंस भी मौजूद हैं। स्कूलों और आसपास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अब तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस को बम या कुछ भी संदिग्ध बमनुमा जैसी चीज नहीं मिली है। हरियाणा CM के दफ्तर को भी निशाना बनाने की बात सिर्फ चंडीगढ़ के स्कूलों को ही बम से उड़ाने की धमकी नहीं दी गई है बल्कि शहर के सेक्टर-1 स्थित हरियाणा CM के दफ्तर को भी निशाना बनाने की बात कही गई है। जिसके बाद सीएम ऑफिस की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है और ऐतियातन वहां भी गहन छानबीन की जा रही है। इसके अलावा धमकी में यह भी कहा गया है कि अंबाला से दिल्ली तक बम धमाके किए जाएंगे। अंबाला से दिल्ली रेलवे ट्रैक पर धमाकों की बात कही गई है। जिसके बाद रेलवे प्रबंधन भी अलर्ट मोड में है और जांच की जा रही है। धमकी के बाद दिल्ली की सुरक्षा एजेंसियां भी अपना काम कर रहीं हैं। ईमेल के जरिए बम की धमकी दी गई जानकारी के मुताबिक, स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी इस बार भी ईमेल के जरिए ही दी गई है। बताया जा रहा है कि रात में ईमेल के माध्यम से धमकी भेजी गई। जिसमें खालिस्तान का जिक्र किया गया और चंडीगढ़ के स्कूलों समेत हरियाणा CM के दफ्तर को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। ईमेल में लिखा गया कि चंडीगढ़ बनेगा खालिस्तान और स्कूलों में धमाके होंगे। हरियाणा सीएम दफ्तर को भी निशाना बनाया जाएगा। इधर धमकी की सूचना मिलते ही चंडीगढ़ पुलिस भी तुरंत एक्शन में आई और आगे की कार्रवाई की। पुलिस द्वारा मौके पर सभी तरह के सुरक्षा इंतजाम किए गए और एहतियात के तौर पर स्कूलों को खाली कराया गया है। फिलहाल सर्च ऑपरेशन अभी जारी है। चंडीगढ़ प्रशासन ने की लोगों से अपील बताया जा रहा है कि धमकी भरे ईमेल में स्कूलों के साथ-साथ रेलवे ट्रैक को भी निशाना बनाने की बात कही गई है, जिसके बाद पूरा प्रशासन सतर्क हो गया है। फिलहाल साइबर सेल की टीम ईमेल भेजने वाले की पहचान करने में जुटी हुई है। वहीं, चंडीगढ़ प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास न करें और शहर में शांति बनाए रखें। गौरतलब है कि चंडीगढ़ के स्कूलों में 23 मई से गर्मियों की छुट्टियां शुरू होने जा रही हैं, लेकिन उससे पहले मिली इस धमकी के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों में डर का माहौल बना हुआ है। साइबर सेल टीम जांच में जुटी धमकी के संबंध में चंडीगढ़ पुलिस ने गंभीरता से जांच भी शुरू कर दी है। इसी के साथ चंडीगढ़ पुलिस और प्रशासन की ओर से लोगों से पैनिक न होने की अपील की गई है। चंडीगढ़ पुलिस की साइबर सेल टीम यह पता लगाने में जुट गईं हैं कि आखिर स्कूलों को धमकी भरी ईमेल किसने और कहां से भेजी? वहीं आशंका यही जताई जा रही है कि यह धमकी दहशत फैलाने के लिए किसी की जानबूझकर की शरारत या साजिश हो सकती है। लेकिन पुलिस इसे गंभीरता से लेते हुए जरूरी कार्रवाई कर रही है। पुलिस की हर एंगल से जांच जारी है। पुलिस अपनी तरफ से अपनी पूरी जांच और छानबीन के बाद ही राहत की सांस लेगी। वहीं इस धमकी के बाद चंडीगढ़ में अलर्ट जारी है और स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस द्वारा आसपास के सीसीटीवी कैमरे भी चेक किए जा रहे हैं। पहले भी कई फर्जी धमकियां मिलीं गौरतलब है कि इससे पहले भी बीते कुछ महीनों के अंदर कई बार चंडीगढ़ के स्कूलों को बम से उड़ाने की फर्जी धमकियां दी जा चुकी हैं। यह फर्जी धमकियां भी ईमेल के जरिए ही आईं। वहीं सिर्फ चंडीगढ़ के स्कूल ही नहीं बल्कि चंडीगढ़ जिला अदालत, पंजाब सचिवालय, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट, हरियाणा सचिवालय, हरियाणा सीएम आवास को भी पिछले दिनों बम से उड़ाने की बात कही जा चुकी है। जिसके बाद अफरा-तफरी का माहौल बनता रहा और हर बार पुलिस टीम और बम स्क्वायड ने गहन सर्च ऑपरेशन चला छानबीन की कार्रवाई भी की। हालांकि, बार-बार बम होने की सूचना अफवाह ही साबित हुई। मसलन सर्च ऑपरेशन में कोई भी बम नहीं मिला। बढ़ रहा है धमकियों का सिलसिला धमकियों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। सिर्फ चंडीगढ़ के स्कूल या अन्य संस्थान ही नहीं बल्कि पंजाब में मोहाली, अमृतसर, पटियाला, जालंधर और हरियाणा के अंबाला समेत अन्य शहरों के स्कूलों को भी पिछले दिनों बम से उड़ाने की धमकी दी जा चुकी है। इसके अलावा पंचकूला में जिला अदालत को बम से उड़ाए जाने की धमकी मिल चुकी है। वहीं इसी के साथ दिल्ली के स्कूलों को भी बम से उड़ाने की बात कही जा चुकी है। हाल ही में राजधानी दिल्ली में कई स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। इसके अलावा दिल्ली-NCR में कई अदालतों, विमानों, मॉल, क्लब, होटलों में भी बम रखे जाने की फेक धमकी दी जा चुकी है। ये सिर्फ डराने की साजिश या कोई बड़ी प्लानिंग? पिछले कुछ दिनों से जिस तरह लगातार स्कूलों को बम से उड़ाने की फेक धमकी दी जा रही है। ये सिर्फ डराने की साजिश है या कोई बड़ी प्लानिंग? फिलहाल तो यह बेहद चिंताजनक और सुरक्षा को लेकर खतरे की स्थिति है। इससे पहले वास्तव में कोई बड़ी घटना हो। पुलिस और जांच-सुरक्षा एजेंसियों को इसे कतई हल्के में नहीं लेना चाहिए और इसे रोकने के लिए कोई ठोस और प्रभावी कदम उठाना चाहिए। अगर कोई इस तरह की शरारत भी कर रहा है तो उसके खिलाफ पुलिस को ऐसी कार्रवाई करनी चाहिये की नजीर बने और आगे से फिर कोई और ये काम … Read more