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कांवड़ यात्रा के लिए दिल्ली सरकार ने बनाई नई उच्च स्तरीय समिति

नई दिल्ली  मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आगामी कांवड़ यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए उच्च स्तरीय 'कांवड़ समिति' का पुनर्गठन किया है। दिल्ली सरकार के संस्कृति और कानून मंत्री कपिल मिश्रा को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच विधायकों को बतौर सदस्य इसमें शामिल किया गया है। सीएम रेखा गुप्ता ने एक्स पर दी जानकारी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में लिखा कि उच्च स्तरीय कांवड़ समिति का पुनर्गठन किया गया है। कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। जबकि अजय माहवार, अनिल शर्मा, करनैल सिंह, संजय गोयल और उमंग बजाज को इस समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। कावड़ शिविरों को दी जाएगी विशेष सहायता मुख्यमंत्री का कहना है कि दिल्ली सरकार इस बार भी शिवभक्तों के लिए सम्मानजनक एवं बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। इसके लिए कांवड़ शिविरों को विशेष सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक पारंपरिक धार्मिक आयोजन मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अटूट सामाजिक समरसता और जनआस्था का एक विराट महोत्सव है। हर शिवभक्त को मिले श्रेष्ठ सुविधाएं उन्होंने कहा कि सावन माह में दिल्ली की सड़कों पर उमड़ने वाला शिवभक्तों का सैलाब देश की सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित करता है। दिल्ली सरकार के लिए कांवड़ व्यवस्थाएं अब सिर्फ कागजी प्रशासनिक कामकाज नहीं रह गई हैं, बल्कि यह पूरी व्यवस्था दिल्ली में सेवा, श्रद्धा और सम्मान का एक अनूठा प्रतीक बन चुकी है। सरकार का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने वाले हर एक शिवभक्त (कांवड़िए) को अतिथि के रूप में देवतुल्य सम्मान और श्रेष्ठ सुविधाएं मिलें। कपिल मिश्रा संभालेंगे अध्यक्ष की कमान मुख्यमंत्री की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि अध्यक्ष कपिल मिश्रा के नेतृत्व में यह नवगठित समिति जल्द ही दिल्ली के सभी डीएम, दिल्ली पुलिस, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेगी। समिति का मुख्य फोकस रूट मैनेजमेंट, वाटरप्रूफ टेंटों की गुणवत्ता, चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता, 24 घंटे निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति और सुरक्षा चाक-चौबंद रखने पर होगा, ताकि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी यात्रा निर्विघ्न और अभूतपूर्व रूप से संपन्न हो सके। पिछली साल सरकार द्वारा की गईं व्यवस्थाओं का किया जिक्र मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली सरकार ने शिवभक्तों की सेवा के लिए पिछले वर्षों की तुलना में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक व्यवस्थाएं की थीं। वर्ष 2024 में जहां राजधानी में केवल 170 कांवड़ शिविरों को मंजूरी मिली थी, वहीं वर्ष 2025 में सरकार की ओर से दी गई आसान मंजूरियों के चलते रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई और पूरी दिल्ली में कुल 374 पंजीकृत कांवड़ शिविर लगाए गए। प्रत्येक शिविर को मिलती हैं ये सुविधाएं उन्होंने बताया कि इन शिविरों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार ने पुरानी टेंडर प्रथा को खत्म कर सीधे बैंक खातों में (डीबीटी के माध्यम से) 50,000 रुपये से लेकर अधिकतम 11 लाख रुपये तक की पारदर्शी आर्थिक सहायता प्रदान की, जिसका 50 प्रतिशत हिस्सा आयोजन से पहले ही एडवांस के रूप में जारी कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, समितियों पर वित्तीय बोझ कम करने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार द्वारा प्रत्येक पंजीकृत शिविर को 1,200 यूनिट तक मुफ्त बिजली और अस्थाई मीटर के सिक्योरिटी डिपॉजिट में 75 प्रतिशत की छूट भी दी गई थी।  

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में बड़ा ट्विस्ट: मायरा के स्टॉकर की असलियत आई सामने, घर का निकला ऋषभ

स्टार प्लस के मशहूर शो ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ की कहानी में इन दिनों एक बहुत ही धमाकेदार मोड़ चल रहा है. अभिरा और अरमान की मुश्किलें काफी बढ़ने वाली हैं क्योंकि मायरा की जान खतरे में है. मायरा को सोशल मीडिया पर चैट के जरिए कोई अनजान शख्स बहुत वक्त से डरा-धमका रहा है, लेकिन उसे इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं है कि उसे परेशान करने वाला कोई बाहर का नहीं बल्कि घर का ही एक सदस्य ऋषभ है. ऋषभ ने चली बड़ी चाल अब तक की कहानी में देखा गया कि अरमान और अभिरा को इस बात का शक हो जाता है कि मायरा के पीछे पड़ा स्टॉकर उनके आसपास ही कहीं छिपा है. सच का पता लगाने के लिए अरमान सबूत ढूंढने निकल जाता है, वहीं दूसरी तरफ अभिरा और विद्या मिलकर ऋषभ से पूछताछ करती हैं. लेकिन ऋषभ बहुत चालाकी दोनों को अपनी बातों में फंसा लेता है. इस बीच ऋषभ एक नई चाल चलता है और अभिरा व मायरा का फोन हैक कर लेता है. इसकी मदद से वह अरमान और अभिरा की हर एक बात चुपके से सुनने लगता है और उनके होते हुए भी मायरा के बेहद करीब पहुंच जाता है. अभिरा को हुआ ऋषभ पर शक अरमान को अपनी छानबीन के दौरान एक बड़ा सबूत मिलता है. उसे पता चलता है कि ऋषभ अपना नाम बदलकर मायरा के सबसे पसंदीदा कैफे में काम कर रहा था. अरमान तुरंत यह बात फोन पर अभिरा को बताता है. दूसरी तरफ, अभिरा का शक भी ऋषभ पर तब गहरा जाता है जब वह नोटिस करती है कि मायरा को फोन आने के ठीक उसी वक्त ऋषभ का मोबाइल भी बजता है. अभिरा बिना देर किए यह बात पूरे परिवार को बता देती है, लेकिन घरवाले उसकी बात मानने से साफ मना कर देते हैं और दिशा तो उल्टा अभिरा से ही झगड़ा करना शुरू कर देती है. अरमान और मायरा ने सिखाया सबक जब अभिरा घरवालों के सामने ऋषभ को दोषी साबित नहीं कर पाती, तब ऋषभ बहुत भोला बनने का नाटक करता है और सारा परिवार उसका साथ देने लगता है. तभी वहां अरमान की एंट्री होती है और वह सबके सामने ठोस सबूत रख देता है. अपनी चोरी पकड़ी जाती देख ऋषभ अपनी दादी का झूठा बहाना बनाता है, जिससे घरवाले एक बार फिर अरमान और अभिरा पर ही गुस्सा करने लगते हैं. तभी वहां खुद मायरा एक ड्रोन कैमरा लेकर पहुंच जाती है, जिसे देखकर ऋषभ बुरी तरह डर जाता है. मायरा सबके सामने ऋषभ को एक जोरदार थप्पड़ मारती है और उसका सारा सच परिवार के सामने लाकर उसे सबक सिखाती है.

गोल्ड जीतकर चमकीं छत्तीसगढ़ की बेटियां, मुख्यमंत्री साय और रमन सिंह ने सराहा प्रदर्शन

रायपुर. छत्तीसगढ़ की बालिका बास्केटबाल टीम ने नेशनल टूर्नामेंट के फाइनल मे शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए 14 साल बाद विजेता होने का गौरव हासिल किया है। चार साल पूर्व जूनियर बालिका वर्ग की टीम ने रजत पदक प्राप्त किया था। बालिका टीम की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बधाई दी है। छत्तीसगढ़ की बालिका बास्केटबॉल टीम ने पुद्दुचेरी में बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा पुद्दुचेरी बास्केटबॉल एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित जूनियर नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता में केरल को 55-51 अंकों से परास्त कर स्वर्ण पदक जीता। टीम की ओर से दिव्या रंगारी ने 22 अंक, अंजली कोडापे कप्तान 14, रूमी कोनवर और अंजनी ने 7-7 अंक, अदिति कोडापे 3 अंक, सारा सिंह 2 अंक लगा कर अपनी टीम को विजयी होने में शानदार भूमिका निभाई। वहीं सोफी सिका एवं नंदनी माधो प्रधान ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। टीम ने सेमीफाइनल में कर्नाटक की टीम को 67-62 को परास्त कर फाइनल में प्रवेश किया। क्वार्टर फाइनल मैच में छत्तीसगढ़ की टीम ने महाराष्ट्र की टीम को 56-44 अको से परास्त किया था। छत्तीसगढ़ प्रदेश बास्केटबॉल संघ में विवाद होने के कारण बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा छत्तीसगढ़ टीम के चयन के लिए एड हॉक कमेटी बनाई है, जो छत्तीसगढ़ के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की टीम चयनीत कर विभिन्न राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में भेजती है। बेटियों ने प्रदेश का मान बढ़ाया – पुडुचेरी में आयोजित 76वीं जूनियर नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर छत्तीसगढ़ की बेटियों ने पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। यह उपलब्धि उनकी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और समर्पण का गौरवपूर्ण प्रतिफल है। पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए हमारी बेटियों… — Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) May 30, 2026 बेटियों ने प्रदेश को गौरवान्वित किया – पुद्दुचेरी में आयोजित 76वीं जूनियर नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर छत्तीसगढ़ की बेटियों ने पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है। फाइनल मुकाबले में केरल को पराजित कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराने वाली सभी खिलाड़ियों, कोच एवं सहयोगी दल को हार्दिक… — Dr Raman Singh (@drramansingh) May 29, 2026

सोनारपुर में Abhishek Banerjee के काफिले पर हमला, कपड़े फाड़ने तक पहुंची हिंसा

सोनारपुर  पश्चिम बंगाल के सोनारपुर इलाके में उस समय भारी राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित तौर पर जानलेवा हमला कर दिया गया। मिली जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी सोनारपुर में हाल ही में हुई चुनावी हिंसा में घायल हुए टीएमसी कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने और उनका हालचाल जानने पहुंचे थे। लेकिन उनके वहां पहुंचते ही माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया और देखते ही देखते हिंसक झड़प शुरू हो गई। भाजपा कार्यकर्ताओं पर मारपीट का आरोप तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि जैसे ही अभिषेक बनर्जी का काफिला सोनारपुर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ तीखी नारेबाजी शुरू कर दी, जो कुछ ही पलों में हिंसक मारपीट में बदल गई। उग्र भीड़ ने टीएमसी सांसद पर अंडे फेंके और उनके साथ धक्का-मुक्की की, जिसमें अभिषेक बनर्जी की शर्ट तक फट गई। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई थी कि सुरक्षाकर्मियों को अभिषेक बनर्जी के सिर को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें आनन-फानन में हेलमेट पहनाना पड़ा और किसी तरह सुरक्षित बाहर निकाला गया। घटना के दौरान, स्थानीय लोगों ने ने कथित तौर पर बनर्जी के खिलाफ चोर चोर के नारे लगाए। घटनास्थल से मिले दृश्यों में तनाव बढ़ने पर सुरक्षाकर्मी उन्हें घेरते और उनकी सुरक्षा करते हुए दिखाई दिए। इस हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि यह घटना भाजपा द्वारा प्रायोजित है। उन्होंने कहा, “यह सब भाजपा द्वारा प्रायोजित है। देखिए उन्होंने क्या किया है। यही उनका लोकतंत्र का उदाहरण है। अभी एक महीना भी नहीं बीता है और पुलिस का नामोनिशान नहीं है।” टीएमसी सांसद ने आगे कहा, “वे मुझे मार डालना चाहते थे। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई है। हम निश्चित रूप से हाई कोर्ट को इस बारे में जानकारी देंगे। हम राज्यपाल को भी इस बारे में अवगत कराएंगे। मैं निश्चित रूप से कोर्ट का रुख करूंगा। ये लोग मुझे जान से मारना चाहते थे: अभिषेकइस भीषण हमले के बाद पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने मीडिया के सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने अत्यंत आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, "ये लोग पूरी तैयारी के साथ आए थे और मुझे जान से मारना चाहते थे। भीड़ ने हमला करके मेरी शर्ट तक फाड़ दी। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इतने संवेदनशील मौके पर वहां एक भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं था।" उन्होंने आगे कहा कि हेलमेट की वजह से आज उनका सिर बच गया, वरना कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। अभिषेक बनर्जी ने विपक्षी दलों को ललकारते हुए साफ किया कि टीएमसी इस तरह के कायराना हमलों से डरने वाली नहीं है और वे जनता के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। स्थानीय लोगों ने क्या कहा? स्थानीय लोगों ने कहा कि हम लोग मजदूर आदमी हैं. हम लोग कोई पार्टी के नहीं हैं. हम लोगों का रास्ता कभी नहीं बना. जितना पैसा आया, सब खा लिया. हम लोग आज भी परेशान हैं, इसलिए गुस्सा है. एक और शख्स ने कहा कि हम कोई बीजेपी नहीं करते. हम यहीं के रहने वाले हैं. हम दीघा के आदमी हैं. यहां दो कट्ठा जमीन लेकर रहते हैं।  अभिषेक के खिलाफ क्यों फूटा लोगों का गुस्सा? इस इलाके के सड़क का हाल बुहत खराब है. इस इलाके में करीब एक किलोमीटर तक सड़क की स्थिति बेहद खराब है. बारिश के दौरान यहां पानी भर जाता है।  लोगों का कहना है कि जब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थीं, तब कई बार उनसे गुजारिश की गई, आवेदन दिए गए कि सड़कें ठीक कराई जाएं और पानी की सप्लाई व्यवस्था सुधारी जाए. लेकिन लोगों का आरोप है कि उनकी समस्याओं पर कभी ध्यान नहीं दिया गया. उनके मुताबिक, किसी ने उनके बारे में नहीं सोचा।  इसी वजह से जब सांसद होने के नाते अभिषेक बनर्जी यहां पहुंचे, तो लोगों ने सवाल उठाया कि पंद्रह साल से सत्ता में रहने के बावजूद इस इलाके का विकास क्यों नहीं हुआ. इन्हीं मुद्दों को लेकर लोगों में गुस्सा था. उनके खिलाफ लगातार नारेबाजी की गई और उन पर अंडे भी फेंके गए।  'यह बीजेपी का प्रायोजित हमला, पुलिस गायब थी' इस हमले और तीखे विरोध के बाद उन्होंने विपक्ष पर सीधा निशाना साधा है. उन्होंने अपनी स्थिति दिखाते हुए मीडिया से कहा, "यह सब पूरी तरह से बीजेपी द्वारा प्रायोजित है. आप खुद देख सकते हैं कि आज मेरा क्या हाल किया गया है. यह इनके लोकतंत्र का असली नमूना है. सबसे बड़ी बात यह है कि मौके पर कहीं भी पुलिस दिखाई नहीं दे रही थी।  इस घटना के बाद पूरे सोनारपुर इलाके में भारी राजनीतिक तनाव पैदा हो गया है. टीएमसी जहां इसे विपक्षी दल की सोची-समझी साजिश बता रही है, वहीं दूसरी तरफ से इसे स्थानीय लोगों का गुस्सा कहा जा रहा है. फिलहाल इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। 

गाजियाबाद से लखनऊ तक ट्रांसफर: परिवहन विभाग में बड़ा बदलाव

लखनऊ यूपी सरकार ने शनिवार को परिवहन विभाग में बड़ा फेरबदल किया है। गाजियाबाद, कानपुर देहात और लखनऊ समेत 26 एआरटीओ का तबादला कर दिया गया है। इनमें दो प्रतीक्षारत अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें तैनात दी गई है। अचानक हुए इस तबादले से कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। ट्रांसफर किए गए अधिकारियों में गाजियाबाद में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन द्वितीय दल) रहे मनोज कुमार मिश्रा को नोएडा का सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), कानपुर देहात में संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन प्रथम दल) रहीं सुश्री सोमलता यादव को सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी तृतीय दल कानपुर नगर, मीरजापुर के संभागीय परिवहन अधिकारी रहे विजय प्रकाश सिंह को प्रयागराज का सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, पीलीभीत के संभगीय परिवहन अधिकारी रहे वीरेंद्र सिंह को मीरजापुर का सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, कुशीनगर के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे मोहम्मद अजीम को श्रावस्ती का सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी बनाया है। इसी तरह बलिया के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे अरुण कुमार राय को मीरजापुर में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, बिजनौर में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे गौरी शंकर ठाकुर को फिरोजाबाद का सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), लखनऊ परिक्षेत्र के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्राविधिक) रहे हिमांशु जैन को लखनऊ में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) प्रथम दल बनाया गया। साथ ही इन्हें सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) विस्तार पटल देवा रोड का भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। श्रावस्ती के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे विनीत कुमार मिश्र को गाजियाबाद में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) चतुर्थ दल, हमीरपुर में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे अमिताभ राय को बाराबंकी में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन), बाराबंकी में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहीं सुश्री अंकिता शुक्ला को गाजियाबाद में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) द्वितीय दल, देवरिया में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे आशुतोष कुमार शुक्ला को प्रतापगढ़ का सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, आजमगढ़ में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे अतुल कुमार यादव को देवरिया का सहायक संभागीय अधिकारी (प्रशासन), प्रतापगढ़ में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे दिलीप कुमार को मैनपुरी, अमरोहा के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे महेश कुमार शर्मा को बिजनौर, अलीगढ़ के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे प्रवेश कुमार को शामली की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जबकि शामली के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे रोहित राजपूत को कानपुर देहात, मिर्जापुर के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे संतोष कुमार सिंह को फतेहपुर, एटा के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे सत्येंद्र कुमार को अलीगढ़, मैनपुरी के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे शिवम यादव को एटा, फर्रुखाबाद के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे सुभाष चंद्र राजपूत को आजमगढ़, वाराणसी के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे सुधांशु रंजन को मेरठ, सोनभद्र के सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रहे राजेश्वर यादव को कुशीनगर, मिर्जापुर सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) रहे सुशील कुमार मिश्र को पीलीभीत, प्रतीक्षारत प्रवीण् कुमार सिंह को हमीरपुर, प्रतीक्षारत सुश्री सौम्या पांडेय को उरई का संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) बनाया गया है।

अजमेर पर आतंकी नजर: पिछले दो दशकों की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

अजमेर  लगभग दो दशकों से आतंकी संगठनों की नजर अजमेर पर है। पाकिस्तानी आतंकी संगठन आईएसआई और आईएसआईएस से जुड़े मॉड्यूल पहले भी रैकी कर चुके हैं। बीते तीन माह में दूसरी बार युवक की आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता सामने आई है। बीते मार्च में हरियाणा एटीएस ने लौंगिया मोहल्ला निवासी अली अकबर उर्फ बाबू को पकड़ा था। अब एनआइए ने परमेश मीणा को पकड़ा है। इससे खुफिया एजेंसियां और पुलिस अलर्ट मोड पर हैं। पुलिस को अली अकबर और परमेश के अलावा भी अजमेर में पाक आतंकी शहजाद भट्टी के किसी संगठन से जुड़ाव की आशंका है। एआइए ने स्थानीय लोगों से पूछताछ की। इसमें परमेश के ऑनलाइन लूडो गेम खेलने की जानकारी मिली। कुछ लोगों ने रिकवरी के कामकाज की जानकारी भी दी। उसके अजमेर में कहीं कारोबार अथवा नौकरी करने की कोई सूचना नहीं मिली। बंद कमरे में पूछताछ के बाद टीम परमेश को लेकर दिल्ली रवाना हो गई। पहले पकड़ा गया था ऑटोरिक्शा चालक बीती 15 मार्च में अंबाला में हरियाणा एटीएस ने पाकिस्तानी आतंकी शहजाद भट्टी से संपर्क रखने के आरोप में दो साथियों को 2 किलो आरडीएक्स सहित पकड़ा था। इनमें दरगाह लौंगिया गली नम्बर-1 निवासी ऑटो रिक्शा चालक अली अकबर उर्फ बाबू भी शामिल था। अली अकबर मूलत: अजमेर के पीसांगन थाना क्षेत्र के गोविन्दगढ़ का निवासी है। उसके पिता मोहम्मद रमजान रोडवेज से सेवानिवृत्त हैं। बड़ा भाई अली असगर गेस्ट हाउस में नौकरी करता है। आतंकी अशरफ रहा था दो साल अक्टूबर 2021 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद अशरफ भी पत्नी के साथ देहली गेट क्षेत्र में एक धार्मिक स्थल पर दो साल तक रहा। वह झाड़-फूंक करने की आड़ में इलाके की गतिविधियों पर नजर रखता रहा। अशरफ ने अजमेर में फर्जी दस्तावेज भी तैयार करवा लिए थे। शहर में आतंकी गतिविधियों की प्रमुख घटनाएं 2003 – आतंकी डेविड कॉलमैन हेडली ने पुष्कर के यहूदी धर्मस्थल बेदखबाद की रैकी की। 2006 – गेगल थाना पुलिस ने हथियारों का जखीरा लेकर जा रहे आतंकी मोहम्मद शब्बीर को गिरफ्तार किया। 2007 – अजमेर दरगाह परिसर में बम विस्फोट हुआ, जिसमें तीन लोगों की मौत और कई घायल हुए। 2010 – कर्नाटक एटीएस ने आतंकी युसूफ उर्फ उमर को गिरफ्तार किया। उसने दरगाह और पुष्कर क्षेत्र की रैकी करना कबूला। 2016 – आईएसआईएस टेरर मॉड्यूल के सदस्य मोहम्मद इब्राहिम राजदानी और हबीब मोहम्मद इलियासी दरगाह क्षेत्र के धानमंडी इलाके में चार दिन होटल में ठहरे। बाद में वे इंदौर के रास्ते लौटते समय एनआइए के हत्थे चढ़े। 2021 – दिल्ली में गिरफ्तार पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद अशरफ के अजमेर में दो साल तक छिपकर रहने का खुलासा हुआ।

सुबह-सुबह लोगों के बीच पहुंचे केवल सिंह ढिल्लों, पंजाब भाजपा अध्यक्ष का नया अंदाज चर्चा में

बरनाला  पंजाब की राजनीति में आमतौर पर देर रात तक चलने वाली सरगर्मियों के विपरीत, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने आज राजनीति को एक अलग और नई दिशा दी। लोगों से सीधा संपर्क कायम करने और उनकी समस्याओं को जमीनी स्तर पर समझने के लिए केवल सिंह ढिल्लों ने आज तड़के सुबह 5 बजे ही अपने विशेष 'जन संपर्क अभियान' का आगाज कर दिया। सूरज की पहली किरण के साथ ही वह बरनाला के विभिन्न हिस्सों में आम लोगों, सैर करने वाले नागरिकों और कर्मठ (मेहनतकश) वर्ग के बीच पहुंच गए।  इस मौके पर बातचीत करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने एक बहुत ही भावुक और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा, "आज सुबह 5 बजे ही मैं जन सेवा और जन संपर्क के लिए मैदान में निकल पड़ा हूं। मेरे लिए राजनीति सिर्फ सत्ता हासिल करने या कुर्सी पर बैठने का साधन नहीं है, बल्कि यह जनता की सच्ची सेवा करने का एक पवित्र माध्यम है।" उन्होंने कहा कि जब लोग सो रहे होते हैं या अपने दिन की शुरुआत कर रहे होते हैं, उस समय लोगों के बीच जाकर उनकी उम्मीदों को समझना ही वास्तविक नेतृत्व है। "सेवा ही संगठन" के सिद्धांत पर पहरा केवल सिंह ढिल्लों ने भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा का मूल मंत्र “सेवा ही संगठन” है। यह सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि हर भाजपा कार्यकर्ता और नेता के जीवन का हिस्सा है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए वह पंजाब के हर वर्ग—चाहे वह किसान हो, व्यापारी, युवा या महिलाएं—सभी की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर खरा उतरने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा पंजाब के लोगों ने मुझ पर हमेशा जो अगाध प्यार और विश्वास जताया है, वही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। मैं इस विश्वास को कभी टूटने नहीं दूंगा। पंजाब के खोए हुए गौरव को बहाल करना, राज्य में प्रगति, खुशहाली और चौमुखी (सर्वांगीण) विकास लाना ही मेरा एकमात्र लक्ष्य है।" स्थानीय लोगों में भारी उत्साह सुबह-सुबह अपने लोकप्रिय नेता को बिना किसी तामझाम के अपने बीच देखकर बरनाला के लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। शहर के पार्कों, चौराहों और बाजारों में लोगों ने केवल सिंह ढिल्लों का गर्मजोशी से स्वागत किया। बुजुर्गों ने उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और युवाओं ने पंजाब के विकास के लिए उनके इस नए दृष्टिकोण (विज़न) की सराहना की। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ढिल्लों की यह तड़के सुबह वाली रणनीति विरोधियों को पछाड़ने और जनता के दिलों में सीधी जगह बनाने में काफी कारगर साबित होगी। 

शुजालपुर में ऊर्जीकृत हुआ 200 एमवीए क्षमता का नया पावर ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर

मध्यप्रदेश ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की ट्रांसमिशन योजना क्राइटेरिया का किया पालन शुजालपुर में ऊर्जीकृत हुआ 200 एमवीए क्षमता का नया पावर ट्रांसफार्मर : ऊर्जा मंत्री तोमर शुजालपुर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की ट्रांसमिशन प्लानिंग क्राइटेरिया का पालन करते हुए शाजापुर जिले के  220 के वी सब स्टेशन शुजालपुर मे एक नया 200 एमवीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित कर ऊर्जीकृत किया है। मध्यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी ने सीईए की गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित करते  हुए इस ट्रांसफार्मर को ऊर्जीकृत करने में सफलता प्राप्त की है। शाजापुर जिले की ट्रांसफार्मेशन कैपेसिटी में हुई वृद्धि  एमपी ट्रांसको के अधीक्षण अभियंता उज्जैन अनिल सक्सेना ने जानकारी दी कि इस क्षमता वृद्धि से शुजालपुर 220 के वी सब स्टेशन की क्षमता बढ़कर 793 एम वी ए की हो गई है, वहीँ शाजापुर जिले की ट्रांसफार्मेशन कैपेसिटी बढकर 1926 एमवीए की हो गई है। शाजापुर जिले मे एमपी ट्रांसको अपने 11 सबस्टेशनों के माध्यम से विद्युत पारेषण करती है जिसमें 220 केवी के दो सब स्टेशन शुजालपुर, शाजापुर एवं 132 के वी के 9 सबस्टेशन पोलाइकलां, अरनिया कलां, मक्सी, बेरछा, मोहन बादोदिया,  कालापीपल, शुजालपुर,  शाजापुर,  पनवाडी  शामिल हैं।  

बिजली व्यवस्था होगी और मजबूत! रांची में बने दो नए सब स्टेशन, हजारों उपभोक्ताओं को राहत

रांची. राजधानी रांची में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। शहरवासियों को जल्द ही दो नए बिजली सब स्टेशन की सौगात मिलने वाली है। कोकर और जामचुआं में बन रहे नए सब स्टेशन लगभग तैयार हो चुके हैं और इनके चालू होने के बाद शहर के हजारों उपभोक्ताओं को बिजली संबंधी परेशानियों से राहत मिलेगी। बिजली विभाग के अनुसार कोकर सब स्टेशन से 10 एमवीए क्षमता के साथ बिजली आपूर्ति की जाएगी। इसका सीधा लाभ कोकर, लालपुर, बरियातू, खोरहाटोली, इंडस्ट्रियल एरिया, सुभाष चौक, भाभा नगर, तिरिल, पीस रोड और लालपुर चौक समेत आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों को मिलेगा। विभाग का दावा है कि करीब 30 हजार से अधिक लोगों को बेहतर और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज से मिलेगी राहत नए सब स्टेशन के चालू होने से लंबे समय से बनी लो-वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग और एक फेज में कम बिजली पहुंचने जैसी समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है। गर्मी के मौसम में बढ़ते लोड के कारण जिन इलाकों में बार-बार बिजली बाधित होती थी, वहां अब स्थिति बेहतर होगी। ग्रामीण इलाकों और उद्योगों को भी फायदा वहीं जामचुआं सब स्टेशन से भी 10 एमवीए बिजली आपूर्ति की जाएगी। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को पर्याप्त बिजली मिल सकेगी। इसके अलावा रामपुर और जामचुआं क्षेत्र के छोटे उद्योगों को भी बेहतर बिजली सुविधा मिलने से उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। स्मार्ट सिटी ग्रिड से मिली अतिरिक्त ताकत इधर शहर की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए स्मार्ट सिटी परिसर में बने स्मार्ट ग्रिड को भी झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड द्वारा चालू कर दिया गया है। इस स्मार्ट ग्रिड से शहर को 35 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने लगी है। विभाग का कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान बढ़ते लोड को संभालने में यह ग्रिड काफी सहायक साबित हो रहा है और इससे राजधानी में बिजली आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत हुई है।

राशन डिपो होल्डरों का सरकार को अल्टीमेटम, पंजाब में लाखों परिवार हो सकते हैं प्रभावित

लुधियाना. लुधियाना जिले से संबंधित राशन डिपो होल्डरों को सरकारी पॉलिसी के मुताबिक राशन डिपो पर पहुंचने वाली गेहूं का किराया-भाड़ा नहीं मिलने पर डिपो होल्डरों का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। गुस्से में आए डिपो होल्डरों ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को यहां तक चेतावनी दे दी है कि अगर उन्हें गेहूं की उतरवाई का भाड़ा नहीं मिलेगा तो वह "प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना " से जुड़े लाभपात्र परिवारों में अनाज नहीं बांटेंगे। इसके बाद लाखों परिवारों को समय पर अजान न मिलने का संकट पैदा हो गया है। डिपो होल्डर लक्की सिंह, गुरप्रीत सिंह गिल, हरमेश सिंह, बलबीर सिंह, राजविंदर कौर, चरणजीत कौर, निर्मला रानी, राजेश कुमार और सीमा शर्मा आदि ने बताया कि सरकार द्वारा हर 3 महीने के बाद जो गेहूं राशन डिपो पर भेजी जाती है उसकी उतरवाई का भाड़ा डिपो होल्डर 5 रुपए प्रति बोरी के हिसाब से मजदूर को अदा करने को मजबूर हैं वहीं सरकार द्वारा ठेकेदार को मजदूर की पेमेंट की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पूरे देश के मुकाबले पंजाब के डिपो होल्डरों को पहले से ही कम कमीशन मिल रही है जिस कारण राशन डिपो होल्डरों की आर्थिक हालत पहले से ही वेंटिलेटर पर लगी हुई है। डिपो होल्डर एसोसिएशन द्वारा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कंट्रोलर लखबीर सिंह को मांग पत्र सौंपते हुए गेहूं की उतरवाई की राशि अदा करने की अपील की गई है ताकि डिपो बिना किसी परेशानी के राशन कार्ड धारकों को गेहूं बांटने का काम लगारात जारी रहे।