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आधार सेवाओं का विस्तार, 22 नए जिलों में यूआईडीएआई केंद्रों का संचालन शुरू

लखनऊ  प्रदेश के 22 और जिलों में आधार सेवा केंद्रों का संचालन शुरू हो गया है। अब इनकी संख्या कुल 32 हो गई है। ये सेवा केंद्र सीधे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की तरफ से संचालित किए जाते हैं। यहां की क्षमता अधिक होती है, जिससे एक दिन में अधिक से अधिक लोगों को आधार सेवा संबंधी सेवा उपलब्ध कराई जाती है। पहले 12 जिलों में ही इस तरह के आधार सेवा केंद्र संचालित हो रहे थे। इसमें लखनऊ, आगरा, गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर, कानपुर, गोंडा, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और गाजियाबाद शामिल थे। अब इसमें 22 और जिले जुड़ गए हैं। इसमें अलीगढ़, अयोध्या, हापुड़, मुजफ्फरनगर, रायबरेली, उन्नाव, हाथरस, सीतापुर, बलरामपुर, मथुरा, इटावा, मैनपुरी, गाजीपुर, मऊ, मिर्जापुर, अमेठी, बस्ती और चंदौली है। सुविधा के शुरू होने से इन जिलों व आसपास जिलों के रहने वालों को आधार सुविधाएं बेहतर तरीके से मिल रही हैं। कम समय में काम हो रहा है और एक दिन में अधिक लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कुल 32 जिलों में ये सुविधा शुरू हो चुकी है। 39 जिलों में इस तरह के सेवा केंद्र शुरू करने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए दफ्तर के लिए स्थान चिन्हित कर लिए गए हैं। मैनपॉवर व मशीनें आदि उपलब्ध कराई जा रही हैं। एक दो महीने में इन जिलों में भी आधार सेवा केंद्र शुरू कर दिए जाएंगे। इसलिए इन केंद्रों पर है सहूलियत जिन जिलों में यूआईडीएआई द्वारा संचालित केंद्र नहीं हैं वहा बैंकों व पोस्ट ऑफिसर में आधार संबंधी कार्य होते हैं। वहां की क्षमता कम है लिहाजा कम आवेदन ही स्वीकार किए जाते हैं। यूआईडीएआई से सीधे संचालित केंद्रों पर सभी सुविधाएं हैं। इसलिए इसका लाभ अधिक से अधिक लोगों को मिलता है।  

पेपर लीक पर जवाबदेही तय हो: सोनम वांगचुक, जंतर-मंतर प्रदर्शन में सरकार पर निशाना

नई दिल्ली कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को तब और बल मिला जब शिक्षा सुधार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने मंच पर पहुंचकर छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया। सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से विरोध-प्रदर्शन पसंद नहीं है, लेकिन जब न्याय की मांगों को अनसुना किया जाता है तो लोगों को आवाज उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी बदलाव की आवश्यकता है और छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। सोनम वांगचुक ने कहा कि बार-बार परीक्षा के पेपर लीक हो रहे हैं। ऐसे में जवाबदेही तो तय करनी पड़ेगी। राजनीति में आएंगे सोनम वांगचुक? वांगचुक ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि नेताओं मंत्रियों और नौकरशाहों के बच्चों को सरकारी स्कूलों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में पढ़ना चाहिए। उनका कहना था कि जो लोग व्यवस्था चला रहे हैं, उन्हें उसी व्यवस्था का अनुभव भी करना चाहिए। मंच के सामने मौजूद छात्रों ने कई बार उन्हें शिक्षा मंत्री बनने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने किसी भी राजनीतिक भूमिका में आने की संभावना को खारिज कर दिया। अभीजीत दीपके ने क्या कहा? इससे पहले सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन की मांगों पर ध्यान देने के बजाय सोशल मीडिया गतिविधियों को निशाना बनाया जा रहा है। दीपके ने कहा कि पिछले एक महीने से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। उन्होंने मंच से कहा कि समाज के कुछ वर्ग दबाव में समझौता कर सकते हैं, लेकिन देश के छात्र और युवा अभी भी अपने अधिकारों और न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दोपहर करीब तीन बजे गर्मी से दीपके की बिगड़ गई। हालांकि, अंत में प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। 'अगले शनिवार फिर जंतर मंतर लौटेंगे' दीपके ने कहा कि आज का प्रदर्शन समाप्त हो रहा है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। हम अगले शनिवार फिर जंतर मंतर लौटेंगे। अगर धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते है तो यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। हम पूरे देश में प्रदर्शन करेंगे और स्टूडेंट्स की आवाज को हर राज्य और हर शहर तक पहुंचाएंगे। विभिन्न छात्र और राजनीतिक संगठनों का भी समर्थन देखने को मिला। जेएनयू के वर्तमान और पूर्व छात्र नेताओं ने भाग लिया। सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी जंतर-मंतर पहुंचे। 'परिवार को धमकियां, छोड़ना पड़ा घर' प्रदर्शन समाप्त होने के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर एक मेसेज साझा किया। उन्होंने लिखा कि वह अपने माता-पिता से मिलने घर लौट रहे हैं, जिनसे उनकी मुलाकात एक साल से अधिक समय से नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 15 दिन के दौरान उनके परिवार को धमकियों का सामना करना पड़ा और उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। दीपके ने कहा कि अब वह अपने माता-पिता को वापस घर ले जाएंगे। अपने मेसेज में उन्होंने समर्थकों का आभार जताते हुए लिखा कि आज का प्रदर्शन सिर्फ एक ट्रेलर था।  

पेपर लीक का झांसा देकर छात्रों से ठगी, लखनऊ से आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक कराने का दावा कर छात्रों से पैसे वसूलने वाले एक फर्जी रैकेट का खुलासा हुआ है. यूपी STF ने लखनऊ से ओम कुमार नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि वह टेलीग्राम पर 'पेपर लीक' जैसे चैनल बनाकर परीक्षा से एक दिन पहले प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिका देने का झांसा देता था. इसके बदले हर परीक्षार्थी से करीब 2 हजार रुपये लिए जाते थे. सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों छात्र हर साल प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठते हैं. इसी भरोसे का फायदा उठाकर कुछ लोग उन्हें आसान रास्ता दिखाने का लालच देते हैं. ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश में सामने आया है, जहां टेलीग्राम के जरिए कथित ‘पेपर लीक’ का खेल चलाया जा रहा था. यूपी STF के मुताबिक, आरोपी ओम कुमार को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया. वह मूल रूप से बिहार के पटना जिले का रहने वाला बताया गया है. जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर फर्जी दावा करता था कि उसके पास परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से मौजूद है. न्यूज एजेंसी के अनुसार, आरोपी ने टेलीग्राम पर कई चैनल बना रखे थे. इनमें 'पेपर लीक' जैसे नाम इस्तेमाल किए जाते थे ताकि छात्रों को भरोसा हो जाए. UP CNET परीक्षा को लेकर भी कुछ ऐसे चैनल चलाए जा रहे थे. दावा किया जाता था कि परीक्षा से एक दिन पहले असली प्रश्नपत्र और उसके जवाब दिए जाएंगे. इस काम के लिए आरोपी छात्रों से 2 हजार रुपये लेता था. टेलीग्राम चैनल पर QR कोड भेजे जाते थे, जिन पर पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे. STF का कहना है कि कम रकम होने की वजह से कई छात्र जल्दी भरोसा कर लेते थे और शिकायत भी कम करते थे. जांच में सामने आया कि परीक्षा वाले दिन चैनल बंद कर दिए जाते थे. इसके बाद दूसरी परीक्षा के नाम पर नया चैनल बना लिया जाता था. पूछताछ में आरोपी ने माना कि वह साल 2022 से अपने कुछ साथियों के साथ ऐसा कर रहा था. इस मामले की जानकारी मिलने के बाद STF ने जांच शुरू की थी. अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ की ओर से शिकायत भी दर्ज कराई गई थी. इसके बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और मोबाइल से मिले सबूतों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया. फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं. साथ ही ऐसे दूसरे गैंगों की भी तलाश की जा रही है, जो सोशल मीडिया पर पेपर लीक की अफवाह फैलाकर छात्रों से पैसे ऐंठते हैं.  

‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना को मिलेगा बढ़ावा, खेल ढांचे के विस्तार पर जोर

पटना बिहार में खेलों को बढ़ावा देने के लिए सम्राट चौधरी सरकार ने कई बड़े ऐलान किए हैं। सम्राट चौधरी सरकार ने साफ किया है कि बिहार में अब ओलंपिक जैसी सुविधाएं मिलेंगी। सरकार ने ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना को भी बढ़ावा देने का मन बनाया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेलों को बिहार में ओलंपिक स्तर की सुविधाएं दी जायेंगी। मुख्यमंत्री ने शनिवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में खेल विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रखंड स्तरीय आउटडोर स्टेडियमों का निर्माण समय सीमा के भीतर पूरा करने और इनके संचालन एवं रख-रखाव की व्यवस्था पीपीपी मॉडल के माध्यम से करने का निर्देश दिया। उन्होंने खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और तमाम उपकरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेल को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाये गये हैं। विश्वस्तरीय खेल अवसंरचनाओं का निर्माण चरणबद्ध ढंग से कराया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल करने वाले युवा एवं प्रतिभावान खिलाड़ियों को सम्मानित किया जा रहा है। बेहतर खेल प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को सुविधाएं देने के साथ-साथ उन्हें ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत प्रोत्साहित भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने खेल विश्वविद्यालय, राजगीर में ऐसे पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता देने का कहा, जिनमें नवाचार, देशस्तर पर उपयोगी एवं रोजगार की अधिक संभावनाएं हों। जिला स्तरीय खेल भवन-सह-व्यायामशालाओं के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए तथा इनके संचालन एवं रख-रखाव के लिए पीपीपी मॉडल की संभावनाओं का आकलन किया जाए। इसके पहले खेल सचिव विनोद सिंह गुंजियाल ने खेल अवसंरचना का विकास, विभिन्न योजनाओं की अद्यतन स्थिति, खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं, प्रोत्साहन एवं सम्मान तथा खेल विकास की भावी कार्य योजना की जानकारी दी। बैठक में खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह व संजय कुमार सिंह, बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रविन्द्रण शंकरण, खेल निदेशक आरिफ अहसन उपस्थित थे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पंचायत स्तर पर नियमित खेल उत्सवों एवं खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कर ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने समक्षा बैठक के दौरान कहा कि पंचायत खेल क्लबों से पुराने खिलाड़ियों, युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों को जोड़कर खेल संस्कृति को विकसित किया जाए। साथ ही जिला एवं प्रखंड स्तर पर खेल सुविधाओं का विस्तार करने का भी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया। पटना के डुमरी खेल परिसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनेगा मुख्यमंत्री ने पटना के डुमरी खेल परिसर में सभी खेलों के लिए अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम का निर्माण तथा राजगीर में क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण 31 दिसंबर तक पूर्ण करने का निर्देश दिया। कहा कि राज्य की कुल 8053 ग्राम पंचायतों में से 5266 में खेल मैदान का निर्माण हो चुका है। शेष का निर्माण कार्य जल्द पूर्ण होगा। उन्होंने ग्राम पंचायतों में वीबी जी रामजी के माध्यम से खेल मैदानों के निर्माण का निर्देश दिया।

जीआरपी समीक्षा में सीएम योगी ने महिला सुरक्षा और अपराध नियंत्रण पर दिया जोर

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार रात राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने खासकर भर्ती परीक्षाओं व बड़े आयोजनों के दौरान यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखे जाने का कड़ा निर्देश दिया। प्रदेश में आठ, नौ व 10 जून को सिपाही भर्ती की बड़ी परीक्षा होनी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक, तकनीक-सक्षम तथा परिणामोन्मुख बनाया जाए। यूपी देश का सबसे बड़ा रेल यातायात वाला राज्य है, जहां प्रतिदिन लाखों यात्री रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा, महिला सम्मान, अपराध नियंत्रण और त्वरित पुलिस सहायता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। समीक्षा बैठक मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे नेटवर्क में अपराध और असामाजिक गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए तथा जीरो टालरेंस की नीति को पूरी दृढ़ता के साथ लागू किया जाए। रेलवे परिसरों, प्लेटफार्मों और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 1867 में स्थापित जीआरपी उत्तर प्रदेश वर्तमान में छह अनुभागों, 65 थानों तथा 89 अस्थायी चौकियों के माध्यम से कार्य कर रही है। प्रतिदिन 3031 से अधिक ट्रेनों, लगभग 1550 रेलवे स्टेशनों तथा 30 लाख से अधिक रेल यात्रियों की सुरक्षा का दायित्व जीआरपी निभा रही है। उन्होंने हरिद्वार में अर्द्धकुंभ 2027 को लेकर अभी से तैयारियां शुरू किए जाने और विस्तृत कार्ययोजना बनाए जाने का भी निर्देश दिया। रेलवे ट्रैक की हो नियमित निगरानी मुख्यमंत्री ने रेलवे ट्रैक और ट्रेन सुरक्षा की समीक्षा के दौरान रेलवे प्रशासन, आरपीएफ और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय और बेहतर करने का निर्देश दिया। बताया गया कि रेलवे ट्रैक सुरक्षा के लिए संयुक्त गश्त, ड्रोन एवं सीसीटीवी आधारित निगरानी, डिजिटल सत्यापन, निरीक्षण एप के माध्यम से संदिग्ध व्यक्तियों की जांच, मुखबिर तंत्र को सुदृढ़ बनाने तथा कबाड़ बाजारों एवं संवेदनशील स्थलों की निगरानी जैसे उपाय किए जा रहे हैं। पत्थरबाजी की घटनाएं पूरी तरह रुके मुख्यमंत्री ने रेलवे परिसरों और ट्रेनों पर पत्थरबाजी की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। बैठक में बताया गया कि जनजागरूकता, सुरक्षा चौपाल, अभिभावकों और युवाओं की काउंसिलिंग, रेल मित्र नेटवर्क, त्वरित अभियोजन तथा प्रभावी निगरानी के परिणामस्वरूप विभिन्न रेल मंडलों में पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे स्टेशन के प्रवेश व निकास नियंत्रण, कतार प्रबंधन, सार्वजनिक घोषणाओं, 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी तथा रेलवे प्रशासन के साथ समन्वय के माध्यम से भीड़ नियंत्रण को प्रभावी बनाया जाए। महिला सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। रेलवे नेटवर्क में महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए। मानव तस्करी और गुमशुदा बच्चों की बरामदगी से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इन अभियानों को और प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए। अधिकारियों ने बताया कि आपरेशन मुस्कान के तहत एक जनवरी से 26 मई 2026 तक 860 बच्चों को बरामद किया गया। विभिन्न अभियानों के माध्यम से अब तक 2325 व्यक्तियों को उनके परिवारों से मिलाने में सफलता प्राप्त हुई है। बैठक में यह भी बताया गया कि हरदोई जीआरपी थाना उत्तर भारत का पहला आईएसओ 9001 प्रमाणित जीआरपी थाना बन चुका है।

63 लाख राशन कार्डधारकों पर लटकी तलवार, SIR में नाम कटते ही शुरू हुई बड़ी जांच

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य के खजाने पर बढ़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करने और सरकारी योजनाओं में हो रही धांधली को रोकने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। सरकार ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की खाद्य साथी योजना के तहत मुफ्त और सस्ते अनाज का लाभ ले रहे अपात्र और फर्जी लाभार्थियों को बाहर निकालने का फैसला किया है। गुरुवार को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के मुताबिक, विशेष गहन समीक्षा 2026 (SIR) के नतीजों के आधार पर उन सभी राशन कार्डों को चिह्नित कर डिलीट किया जाएगा जो नियमों के तहत अयोग्य पाए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से जिन 63 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनकी पहचान की जाएगी और उनके राशन कार्ड तुरंत रद्द कर दिए जाएंगे। हालांकि, सरकार ने इसमें एक मानवीय और कानूनी पहलू को भी शामिल किया है। आदेश में कहा गया है कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं, लेकिन उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया है या ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील की है उनके राशन कार्ड तब तक एक्टिव रहेंगे जब तक कि उनकी याचिकाओं पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा कुछ दिनों पहले शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना के लिए सरकार ने एक नया आवेदन फॉर्म भी पेश किया है। सरकार को संदेह है कि पिछली सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत लगभग 30 लाख से अधिक अपात्र महिलाएं वित्तीय सहायता ले रही थीं। नई अन्नपूर्णा योजना के तहत राज्य सरकार लगभग दो करोड़ महिलाओं को 3,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता देगी। इस योजना पर राज्य सरकार को हर साल करीब 72,000 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। इसके विपरीत, पिछली तृणमूल कांग्रेस की सरकार लक्ष्मी भंडार योजना को चलाने के लिए सालाना लगभग 30,000 करोड़ रुपये खर्च करती थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "राज्य का खजाना इस वक्त बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है और राजस्व को तुरंत बढ़ाना मुमकिन नहीं है। इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को संभालने के लिए फंड के दुरुपयोग और लीकेज को रोकना बेहद जरूरी है।" 15,000 करोड़ की लीकेज रोकने की तैयारी अधिकारियों के मुताबिक, खाद्य साथी योजना के तहत सालाना करीब 15,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिसके जरिए करीब दो करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया जाता है और किसानों से सीधे धान की खरीद की जाती है। सरकार को अंदेशा है कि टीएमसी (TMC) शासन के दौरान इन योजनाओं में बड़े पैमाने पर धन का दुरुपयोग हुआ है, इसलिए सभी राशन कार्ड धारकों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। कैसे होगा सत्यापन? पश्चिम बंगाल के सभी एसडीओ और बीडीओ अपने-अपने क्षेत्रों से हटाए गए मतदाताओं की सूची खाद्य विभाग के स्थानीय निरीक्षकों को सौंपेंगे। खाद्य विभाग के अधिकारी उन सभी लोगों के घरों पर जाकर जांच करेंगे जिनके नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद अपात्रों के राशन कार्ड बंद कर दिए जाएंगे। सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरी प्रक्रिया को 15 जून 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया है। टीएमसी राज में हुए धान घोटाले की भी होगी जांच भाजपा सरकार केवल राशन कार्डों की ही जांच नहीं करेगी, बल्कि टीएमसी शासन के दौरान हुई धान खरीद प्रक्रिया की भी गहराई से जांच करेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "कागजों पर राज्य ने पिछले कुछ वर्षों में औसतन 55 लाख टन से अधिक धान की खरीद दिखाई है। लेकिन शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि धान से चावल निकालने के लिए राइस मिलों में भेजा गया एक बड़ा हिस्सा कभी राज्य के पास वापस ही नहीं आया। अब इसकी जांच की जाएगी कि क्या कागजों पर दिखाया गया धान वास्तव में खरीदा भी गया था या यह सिर्फ एक कागजी घोटाला था।" आपको बता दें कि वर्तमान में केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बंगाल में 6.01 करोड़ लोगों को सस्ता अनाज देती है। इसके अलावा, राज्य सरकार अपनी तरफ से अतिरिक्त दो करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देती है। नई सरकार अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दो करोड़ अतिरिक्त लाभार्थियों में से कितने वास्तव में वास्तविक और जरूरतमंद हैं। धान खरीद घोटाले की आधिकारिक जांच भी जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है।

खनिज उड़नदस्ता दल का बड़ा एक्शन 15 संदिग्ध स्थानों पर छापा, अवैध खनन-परिवहन में लगे 14 वाहन जब्त

रायपुर  प्रदेश में गौण खनिजों के अवैध दोहन को रोकने और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में कोरबा जिले के कलेक्टर  कुणाल दुदावत के कड़े निर्देश और उप संचालक (खनि प्रशासन) के मार्गदर्शन में आज जिले में एक विशेष जांच अभियान चलाया गया। इसके लिए गठित दो विशेष खनिज उड़नदस्ता दलों ने विभिन्न क्षेत्रों में औचक दबिश देकर अवैध उत्खनन और परिवहन में संलिप्त माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई की है। 15 इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी, ये वाहन हुए जब्त           उड़नदस्ता दलों ने कोरबा जिले के कुल 15 संदिग्ध क्षेत्रों में सघन निरीक्षण किया। इनमें सीतामढ़ी, कपाटमुडा, सुराकछार, नरईबोध, रैंकी, कुदुरमाल, बरमपुर, बांकीमोंगरा, सुमेधा, कुमगरी, घनाकछार, कटघोरा, कछार, दर्री और धवईपुर शामिल हैं। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन कर अवैध उत्खनन एवं परिवहन करते पाए जाने पर कुल 14 वाहनों/मशीनों को रंगे हाथों जब्त किया गया, जिनमें 01 चैन माउंटेन (पोकलेन मशीन), 09 ट्रैक्टर, 02 हाइवा, 02 टीपर शामिल हैं। विभिन्न थानों की अभिरक्षा में सौंपे गए वाहन             जब्त किए गए सभी वाहनों को नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई के लिए क्षेत्र के विभिन्न थानों और चौकियों की सुरक्षात्मक अभिरक्षा में सौंप दिया गया है। कुसमुंडा थाना, हरदीबाजार थाना, दर्री थाना, बांकीमोंगरा थाना और खनिज जांच नाका, उरगा वाहनों को नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है। छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमों के तहत होगी सख्त कार्रवाई              खनिज विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पकड़े गए सभी आरोपियों और वाहन स्वामियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमों तथा अन्य प्रासंगिक वैधानिक प्रावधानों के तहत कड़े मामले दर्ज किए जा रहे हैं। अभियान का मुख्य उद्देश्य           अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण, भू-माफियाओं के हौसले पस्त करना है। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना, पर्यावरण की रक्षा करना है। शासकीय राजस्व (रॉयल्टी) की चोरी को शत-प्रतिशत रोकना। खनिज विभाग की खुली चेतावनी         जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ यह विशेष अभियान आगे भी बिना रुके लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष 7 जून को रायपुर दौरे पर, विभिन्न कार्यक्रमों में करेंगे शिरकत

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष का 7 जून को  एक दिवसीय रायपुर प्रवास रायपुर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री, भारत सरकार) के अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति जी 07 जून 2026 को रायपुर (छत्तीसगढ़) के एक दिवसीय आधिकारिक प्रवास पर रहेंगी।            राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के दौरे में सहयोग हेतु श्री राजेन्द्र कुमार निषाद (निजी सचिव मो.-8756342092), एवं श्री रितिक विश्वकर्मा (मो. 7266050609)  कार्यक्रम के दौरान अध्यक्ष के  साथ रहेंगे।           अध्यक्ष-राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग साध्वी निरंजन ज्योति जी 07 जून 2026 को नई दिल्ली से सुबह 06:30 बजे प्रस्थान कर सुबह 08:15 बजे रायपुर पहुंचेंगी l वे राज्य अतिथिगृह, रायपुर 07 जून 2026 को सुबह 09:30 बजे पिछड़े समाज के प्रतिनिधि मंण्डल से भेंट करेंगी। 10:30 बजे माननीय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ से शिष्टाचार भेंट करने के बाद दोपहर 12 बजे माननीय राज्यपाल (छत्तीसगढ़) से शिष्टाचार भेंट करेंगी l            राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष 7 जून 14:00 बजे श्री बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बुढ़ापारा, रायपुर  में पिछड़ा वर्ग संगठन के  सामाजिक प्रगति चिन्तन सम्मेलन में  शामिल होंगी l वे अपरान्ह 3 बजे राजकीय अतिथि गृह रायपुर में पिछड़ा वर्ग के कल्याणकारी योजनाओं पर समीक्षा बैठक लेंगी, जिनमें मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन  माननीय अध्यक्ष एवं सदस्यगण, छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग अयोग, प्रमुख सचिव, पिछड़ा वर्गविकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन शामिल होंगे l राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष 7 जून को ही शाम को 6:40 बजे रायपुर से नई दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगी l

750 रुपये की खाद 1800 रुपये में बेचने वाले व्यापारी पर कार्रवाई, 74 बोरी खाद जब्त

रायपुर  किसानों को किफायती और उचित मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं।  इसी क्रम में किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने के लिए रायगढ़ जिला प्रशासन लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। कलेक्टर के निर्देश पर कृषि विभाग द्वारा जिलेभर में खाद वितरण व्यवस्था की निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में लैलूंगा विकासखंड में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कृषि विभाग ने खाद की कालाबाजारी का भंडाफोड़ किया।            उप संचालक कृषि स्वयं किसान बनकर एक खाद दुकान पर पहुंचे और खाद खरीदने का प्रयास किया। जांच के दौरान पता चला कि सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) खाद, जिसकी वास्तविक कीमत लगभग 750 रुपये प्रति बोरी है, उसे किसानों को 1800 रुपये प्रति बोरी में बेचा जा रहा था। इस तरह किसानों से प्रति बोरी एक हजार रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि वसूली जा रही थी। गोदाम सील, खाद बिक्री पर 10 दिन का प्रतिबंध           शिकायत सही पाए जाने पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लैलूंगा स्थित मां दुर्गा ट्रेडर्स के गोदाम को सील कर दिया। मौके से 74 बोरी खाद जब्त की गई। साथ ही दुकान में खाद विक्रय पर 10 दिनों का प्रतिबंध लगाया गया है। संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा गया है। किसानों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं            कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि खरीफ सीजन में किसानों को निर्धारित दर पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक मूल्य वसूली करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। राज्य शासन के निर्देशानुसार जिलेभर में खाद वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और उनकी मजबूरी का कोई अनुचित लाभ न उठा सके। आगे भी जारी रहेगा जांच अभियान            कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिले के विभिन्न विकासखंडों में खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों के भंडारण एवं विक्रय की नियमित जांच की जाएगी। निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने या कृत्रिम अभाव पैदा करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में उर्वरक निरीक्षक  पवन उरांव, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी  फुलेश्वर पैकरा सहित कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। किसानों से सहयोग की अपील           जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि यदि कहीं खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी या अधिक मूल्य वसूली की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत प्रशासन या कृषि विभाग को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ समय पर सख्त कार्रवाई की जा सके। यह कार्रवाई किसानों के हितों की रक्षा और पारदर्शी खाद वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी? 8वें वेतन आयोग को लेकर नई चर्चाओं ने बढ़ाई उम्मीदें

नई दिल्ली 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की निगाहें टिकी हुई हैं। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों ने वेतन आयोग के सामने ऐसी मांग रखी है, जिसने लाखों सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। ऑल एम्प्लॉइज जॉइंट एसोसिएशन, जम्मू-कश्मीर और ऑल सिख माइनॉरिटी एम्प्लॉइज एसोसिएशन ने 8वें वेतन आयोग से फिटमेंट फैक्टर 2.86 से 3.68 के बीच तय करने की मांग की है। अगर यह डिमांड स्वीकार हो जाती है, तो वर्तमान में ₹18,000 का न्यूनतम बेसिक वेतन बढ़कर ₹51,480 से ₹66,240 तक पहुंच सकता है। हाल ही में 8वें वेतन आयोग की टीम जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दौरे पर पहुंची थी। इस दौरान कर्मचारी संगठनों ने आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और अन्य अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केवल वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि पेंशन, महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA), स्वास्थ्य सुविधाओं और टैक्स राहत से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुझाव भी शामिल किए गए। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में महंगाई तेजी से बढ़ी है, जिससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति प्रभावित हुई है। ऐसे में 7वें वेतन आयोग के तहत लागू 2.57 फिटमेंट फैक्टर अब पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि कम से कम 2.86 और अधिकतम 3.68 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को वास्तविक राहत मिल सके। उदाहरण के तौर पर अगर 2.86 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो न्यूनतम बेसिक वेतन ₹51,480 हो जाएगा, जबकि 3.68 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह बढ़कर ₹66,240 तक पहुंच सकता है। जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों ने पेंशनर्स के लिए भी कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने सभी पेंशनर्स के लिए पूर्ण पेंशन समानता (Pension Parity) लागू करने, वेतन निर्धारण से पहले महंगाई भत्ते को मूल वेतन में मर्ज करने और कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 12 साल करने की मांग की है। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया है। हाउस रेंट अलाउंस (HRA) को लेकर भी कर्मचारी संगठनों ने विशेष सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि जम्मू और श्रीनगर जैसे शहरी क्षेत्रों में मकानों का किराया लगातार बढ़ रहा है। इसलिए कर्मचारियों को बेहतर HRA दिया जाना चाहिए। साथ ही दूरदराज, सीमावर्ती और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए विशेष भत्ते और अतिरिक्त सुविधाएं भी प्रदान की जानी चाहिए। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के कर्मचारियों को देश के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दुर्गम पहाड़ी इलाके, खराब मौसम, ऊंची परिवहन लागत, सीमावर्ती क्षेत्रों में सेवा की जिम्मेदारी और कुछ इलाकों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां उनके काम को और कठिन बना देती हैं। इसलिए 8वें वेतन आयोग को इन विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग से राहत देने पर विचार करना चाहिए। हालांकि, अभी 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशें आना बाकी हैं, लेकिन जम्मू-कश्मीर के कर्मचारी संगठनों की ये मांगें चर्चा का बड़ा विषय बन गई हैं। अगर इनमें से कुछ प्रमुख मांगें भी स्वीकार हो जाती हैं, तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। अब सभी की नजर आयोग की अंतिम रिपोर्ट और केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हुई है।