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भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे पटना के छात्र आशीष, एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस में मिला मौका

पटना बिहार की राजधानी पटना के एक होनहार छात्र ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य और पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है। राजकीय पॉलिटेक्निक गुलजारबाग, पटना के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्र आशीष राजवंश का चयन चीन के शंघाई में होने वाली प्रतिष्ठित 'वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता' के लिए हुआ है। यह प्रतियोगिता इसी साल 22 सितंबर 2026 को आयोजित होने जा रही है, जिसमें आशीष 'एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस' के बेहद चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। आशीष की इस कामयाबी से न सिर्फ उनके कॉलेज प्रशासन में जश्न का माहौल है, बल्कि पूरे बिहार के युवाओं के लिए यह एक बहुत बड़ी प्रेरणा बनकर सामने आया है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के छात्र हैं आशीष आशीष राजवंश संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के छठे सेमेस्टर के छात्र हैं। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का यह शानदार सफर तय किया है। आपको बता दें कि इस वैश्विक मंच तक पहुंचने से पहले आशीष ने ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में शानदार खेल दिखाते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया था, और इसके बाद आर्थिक राजधानी मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। जीएमआर एयरो स्कूल में मिली एडवांस्ड ट्रेनिंग लगातार मिल रही इन बड़ी सफलताओं और उनकी अद्भुत तकनीकी क्षमता के आधार पर ही आशीष का चयन 'जीएमआर एयरो स्कूल ऑफ एविएशन' में एडवांस्ड ट्रेनिंग और मूल्यांकन के लिए किया गया था। वहां उन्होंने अपने हुनर का ऐसा प्रदर्शन किया कि वर्ल्ड स्किल्स शंघाई 2026 के लिए भारत की तरफ से उनका टिकट पूरी तरह पक्का हो गया। इस विशेष ट्रेनिंग ने उनकी स्किल्स को और अधिक धारदार बना दिया है। जानकारों और कॉलेज के प्रोफेसरों का कहना है कि आशीष जिस लगन से तैयारी कर रहे हैं, उससे पूरी उम्मीद है कि वह सितंबर में चीन की धरती पर तिरंगा लहराकर देश के लिए मेडल जरूर जीतेंगे।

राम चरण की ‘पेड्डी’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाल, 150 करोड़ के पार पहुंचा कलेक्शन

राम चरण स्टारर ‘पेड्डी’ बॉक्स ऑफिस पर दमदार प्रदर्शन कर रही है. फिल्म का तेलुगु वर्जन 150 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर चुका है. शानदार कलेक्शन के बावजूद स्पोर्ट्स ड्रामा सोशल मीडिया पर कई वजहों से चर्चा और विवादों का हिस्सा बनी हुई है. हाल ही में हैदराबाद में आयोजित एक इवेंट के दौरान अभिनेता जगपति बाबू ने इपर रिएक्ट किया. पेड्डी को लेकर क्या बोले जगपति बाबू जगपति बाबू ने कहा कि ‘पेड्डी’ ने कई चुनौतियों का सामना किया और आखिरकार जीत हासिल की. उन्होंने आगे कहा कि किसी भी फिल्म का असली फैसला आखिरकार वही दर्शक करते हैं, जो टिकट खरीदकर थिएटर तक पहुंचते हैं. उनके मुताबिक, 300 रुपये की टिकट खरीदने वाला दर्शक ही तय करता है कि फिल्म हिट होगी या नहीं. इस तरह की कहानी पर फिल्म बनाना आसान नहीं था और निर्देशक के लिए प्रोड्यूसर ढूंढना भी चुनौतीपूर्ण रहा होगा. नेगेटिव रिव्यू लिखने वालों को जगपति बाबू ने कहा थैंक्यू, बोले- हिट होने में की मदद इवेंट के दौरान जगपति बाबू ने राम चरण की जमकर तारीफ की. उन्होंने साउथ स्टार को ‘सुपरमैन’ और ‘ही-मैन’ कहा. लास्ट में एक्टर ने उन लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने फिल्म की आलोचना की या नेगेटिव रिव्यू लिखे. उनका कहना था कि ऐसे रिव्यूज ने भी किसी न किसी तरह फिल्म को फायदा पहुंचाया है और ये हिट हुई. पेड्डी के बारे में बुची बाबू सना के निर्देशन में बनी इस स्पोर्ट्स ड्रामा में राम चरण, जाह्नवी कपूर, शिवा राजकुमार, दिव्येंदु, रवि किशन और बोमन ईरानी जैसे कलाकार हैं. फिल्म को क्रिटिक्स से मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला, जबकि दर्शकों के बीच जाह्नवी कपूर का किरदार सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. पेड्डी की टक्कर बॉक्स ऑफिस पर वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ से हुई.

पंजाब की सियासत में बड़ा उलटफेर, मनप्रीत अयाली अमृतपाल सिंह की पार्टी का थामेंगे दामन

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत दाखा से शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बागी विधायक मनप्रीत सिंह अयाली (Manpreet Singh Ayali) आज मंगलवार को वारिस पंजाब दे (Waris Punjab De) में औपचारिक रूप से शामिल होने जा रहे हैं। यह कार्यक्रम चंडीगढ़ में आयोजित होगा, जिसकी अध्यक्षता तरसेम सिंह करेंगे। अयाली ने इस कदम की पुष्टि करते हुए कहा कि वह आज मंगलवार को वारिस पंजाब दे का दामन थामेंगे। पिछले कई महीनों से उनका संगठन के साथ निकट संबंध रहा है। जिला परिषद और पंचायत चुनावों में उनके समर्थित उम्मीदवारों ने भी चुनाव प्रचार के दौरान अमृतपाल सिंह की तस्वीरों का इस्तेमाल किया था। चूंकि वारिस पंजाब दे फिलहाल एक पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, इसलिए अयाली पर दल-बदल कानून के तहत तत्काल अयोग्यता का खतरा नहीं माना जा रहा। हालांकि, शिरोमणि अकाली दल उनके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर सकता है। 'कई नेता मेरे फैसले का इंतजार कर रहे थे' मनप्रीत अयाली ने दावा किया कि कई राजनीतिक नेता और समर्थक उनके इस फैसले का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में वारिस पंजाब दे में कई बड़े चेहरे शामिल हो सकते हैं। अयाली ने कहा, "वारिस पंजाब दे की जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ बनने जा रही है और आने वाले दिनों में लोग इसका असर देखेंगे। अगले पांच से छह महीनों में कई चर्चित नेता संगठन से जुड़ सकते हैं।" AAP विधायक को लेकर भी दिए संकेत आम आदमी पार्टी के विधायक कुंवर विजय प्रताप के वारिस पंजाब दे नेताओं के साथ देखे जाने संबंधी खबरों पर अयाली ने कहा कि अभी इंतजार करना चाहिए। उन्होंने संकेत दिए कि उनके संगठन से जुड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पंजाब की राजनीति में बढ़ सकती है WPD की पकड़ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनप्रीत अयाली जैसे प्रभावशाली नेता का संगठन से जुड़ना वारिस पंजाब दे के लिए बड़ा राजनीतिक लाभ साबित हो सकता है। आगामी चुनावों से पहले संगठन अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

16 डिग्री पर AC चलाना पड़ सकता है भारी, सेहत के लिए खतरे की घंटी

उत्तर भारत में इस समय भीषण गर्मी का कहर जारी है. ऐसे में थका देने वाली धूप से घर लौटते ही हर कोई एसी (Air Conditioner) को सबसे कम तापमान यानी 16 या 17 डिग्री पर सेट कर देता है ताकि कमरा तुरंत ठंडा हो जाए. हम सोचते हैं कि इससे हमें जल्दी राहत मिलेगी, लेकिन हकीकत में यह तरीका सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. दरअसल, इतने कम तापमान पर लगातार एसी चलाना न केवल आपके घर का बिजली बिल रॉकेट की तरह बढ़ाता है, बल्कि आपको बीमार कर अस्पताल के लंबे-चौड़े बिल का भुगतान करने पर भी मजबूर कर देता है. आइए जानते हैं कि यह आदत हमारे शरीर को किस तरह नुकसान पहुंचाती है. थर्मल शॉक और इम्युनिटी पर हमला जब आप बाहर के 40 से 45 डिग्री के झुलसा देने वाले तापमान से सीधे आकर 16 डिग्री वाले एकदम ठंडे कमरे में बैठते हैं तो आपकी बॉडी को एक गंभीर 'थर्मल शॉक' लगता है. अचानक होने वाले इस बड़े टेम्परेचर चेंज को हमारा शरीर आसानी से झेल नहीं पाता. इसके कारण ब्लड वेसल्स अचानक सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड सर्कुलेशन पर बुरा असर पड़ता है. शरीर की इम्युनिटी होने लगती है. यही वजह है कि ऐसे माहौल में रहने वाले लोगों को बार-बार सर्दी, जुकाम, खांसी और गले में इन्फेक्शन की शिकायत होने लगती है. जोड़ों का दर्द, मसल्स में अकड़न लगातार बेहद कम तापमान में बैठने या सोने से शरीर के मसल्स और नसें बुरी तरह प्रभावित होती हैं. 16-17 डिग्री की ठंडी हवा सीधे शरीर पर लगने से जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों में अकड़न की समस्या बढ़ जाती है. खासकर जिन लोगों को पहले से ही आर्थराइटिस या साइनस की शिकायत है, उनके लिए यह स्थिति बेहद दर्दनाक हो सकती है. इसके अलावा ठंडी हवा के कारण सिरदर्द की समस्या भी आम हो जाती है जो धीरे-धीरे माइग्रेन का रूप ले सकती है. स्किन और आंखों में सूखापन कम टेम्परेचर पर चलने वाला एसी कमरे की हवा से पूरी नमी यानी मॉइश्चर को सोख लेता है. हवा ड्राई होने के कारण आपकी स्किन और आंखों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ता है. लगातार ठंडी और सूखी हवा में रहने से त्वचा में ड्राईनेस और खुजली होने लगती है. साथ ही आंखों का मॉइश्चर खत्म होने से ड्राई आइज की प्रॉब्लम हो जाती है जिससे आंखों में जलन और रेडनेस की शिकायत शुरू हो जाती है. क्या है एसी चलाने का सही तरीका? डॉक्टरों और ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) के अनुसार, इंसानी शरीर के लिए 24 से 26 डिग्री का तापमान सबसे बेस्ट और हेल्दी माना जाता है. इस टेम्परेचर पर एसी चलाने से बॉडी पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता और कमरे में बेहतर कूलिंग भी बनी रहती है. सबसे बड़ी बात यह है कि 24 डिग्री पर एसी चलाने से बिजली की खपत भी काफी कम होती है, जिससे आपका बिजली बिल कंट्रोल में रहता है.

मनरेगा की जगह लागू होगी वीबी जीरामजी योजना, 125 दिन रोजगार का प्रावधान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी भत्ता को समय-समय पर मुद्दा बनाया जाता रहा है। अब इसका एक मसौदा तैयार किया गया है। इस मसौदे को प्रस्ताव के रूप में मंजूरी के लिए योगी कैबिनेट में जल्द ही लाया जाएगा। यूपी की योगी सरकार केंद्र द्वारा जारी विकसित भारत-जी राम जी (वीबी जीरामजी) योजना को यूपी में लागू कराने जा रही है। इस योजना की खास बात यह होगी कि फसलों की कटाई-बुवाई के लिए मजदूरों को अपने खेत में काम करने के दौरान खाली रहने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। ग्राम्य विकास विभाग ने इसका मसौदा तैयार कर लिया है और जल्द ही कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराने की तैयारी है। राज्य सरकार को इसे जुलाई से पूरी तरह से लागू करना है। केंद्र सरकार ने मनरेगा के स्थान पर वीबी जीरामजी योजना की शुरुआत की है। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कानून को राज्यों में अपने यहां लागू करना है। ग्राम्य विकास विभाग ने इसके आधार पर इसका प्रारूप तैयार किया है। इसमें मनरेगा के सभी मजदूरों को शामिल करते हुए योजनाओं का लाभ दिया जाएगा। इसके साथ ही अन्य नए मजदूरों को भी जोड़ने का काम किया जाएगा। 105 दिन गारंटी वाला रोजगार बुवाई और कटाई के व्यस्त सीजन में खेती में काम करने वाले मजदूरों के लिए कुल 60 दिन का नो वर्क का समय होगा। शेष 305 दिनों में भी मजदूरों को 125 दिन की गारंटी वाला रोजगार दिया जाएगा। दैनिक मजदूरी हर सप्ताह या किसी भी स्थिति में कम करने की तिथि के 15 दिन के अंदर दे दिया जाएगा। वीबी जीरामजी में रोजगार की गारंटी प्रति ग्रामीण परिवार 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यूपी में भी अब ग्रामीण मजदूरों को इतने दिन का ही रोजगार दिया जाएगा। वीबी जीरामजी योजना में मजदूरों को पूरी तरह से ऑनलाइन डिजिटल भुगतान किया जाएगा। इन कार्यों को दी जाएगी प्राथमिकता इसके साथ ही गड़बड़ी रोकने के लिए इसका सत्यापन भी कराया जाएगा। योजना में मजदूरों से फीडबैक लेकर गड़बड़ियों को रोका जाएगा और खामियों को दूर किया जाएगा। इस योजना में पानी से जुड़े कामों, कृषि और भूजल स्तर में सुधार के कामों को प्राथमिकता दी जाएगी। सड़क और कनेक्टिविटी जैसे कामों में इन्हें लगाया जाएगा। मनरेगा में पंजीकृत मजदूर यूपी में फिलहाल मनरेगा में 2.43 करोड़ मजदूर पंजीकृत हैं। इसमें 1.82 करोड़ जॉब कार्ड जारी किए गए हैं। इसमें सक्रिय मजदूरों की संख्या 1.21 करोड़ है। सक्रिय जॉब कार्ड की संख्या 86.15 लाख है।

76 किलो वर्ग में स्वर्ण पदक: काजल बनीं भारत की उभरती कुश्ती स्टार, ओलंपिक पर नजर

सोनीपत हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव लाठ की रहने वाली उभरती हुई स्टार महिला पहलवान काजल ने इंटरनेशनल मंच पर एक बार फिर से सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। काजल ने मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित इंटरनेशनल रैंकिंग रेसलिंग टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 76 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से जिले, प्रदेश और पूरे देश का गौरव बढ़ा है। पहलवान काजल फिलहाल सोनीपत के सेक्टर-23 में अपने चाचा पहलवान कृष्ण के पास रहकर कुश्ती की बारिकियां सीख रही हैं। वह अपनी लगातार कठिन मेहनत, अनुशासित प्रशिक्षण और खेल के प्रति गजब के समर्पण के बल पर भारतीय महिला कुश्ती की सबसे उभरती हुई स्टार्स में शुमार हो चुकी हैं। मेहनत, अनुशासन और समर्पण का मिला फल भारतीय महिला रेसलिंग टीम के पूर्व मुख्य कोच और बड़वासनी स्थित कुलदीप मलिक कुश्ती अकादमी के संचालक कुलदीप मलिक ने काजल की इस स्वर्णिम सफलता पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल स्तर पर मिला यह गोल्ड मेडल काजल की अथक मेहनत, कड़े अनुशासन और खेल के प्रति उसके अद्वितीय समर्पण का ही प्रतिफल है। वहीं, उनके कोच अजय मलिक ने काजल के खेल की तारीफ करते हुए बताया कि वह शुरू से ही बेहद मेहनती और अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित खिलाड़ी रही हैं। वह प्रतिदिन मैट पर कठिन प्रशिक्षण लेती हैं और अपनी तकनीक को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास करती हैं। कोच अजय ने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में काजल विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक जैसे दुनिया के सबसे बड़े खेल मंचों पर भी देश के लिए पदक जीतकर इतिहास रचेगी। वर्ल्ड रेसलिंग में पहले भी जीत चुकी हैं सोना यह पहला मौका नहीं है जब काजल ने इंटरनेशनल मैट पर तिरंगा लहराया हो, उनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड भी बेहद शानदार रहा है। बुल्गारिया के समोकोव में आयोजित इस चैंपियनशिप में काजल ने कमाल का खेल दिखाते हुए 72 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल मुकाबले में गोल्ड मेडल जीतकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। साल 2024 में आयोजित अंडर-17 विश्व चैंपियनशिप में भी काजल ने अपने भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर भारतीय रेसलिंग में अपनी बादशाहत साबित की थी। मंगोलिया में मिली इस ताजा सफलता के बाद काजल ने अपने अगले बड़े मिशन का भी खुलासा कर दिया है। काजल का अगला और मुख्य लक्ष्य वर्ष 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है, जिसके लिए वे अभी से जी-तोड़ मेहनत में जुट गई हैं। भारत ने लंबे समय से ओलंपिक में रेसलिंग में कोई भी मेडल नहीं जीता है। भारत को इसकी लंबे समय से तलाश है।

देवगांव में बनेगा अत्याधुनिक टेक सेंटर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे शिलान्यास

 खिजरसराय जिले के खिजरसराय प्रखंड अंतर्गत देवगांव स्थित फल्गु नदी के किनारे लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी सेंटर की आधारशिला 15 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा रखी जाएगी. इसको लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री के संभावित आगमन को देखते हुए हेलीपैड निर्माण, सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक तैयारियों के लिए संबंधित अधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई है. स्थल पर लगातार अधिकारियों का निरीक्षण एवं समीक्षा जारी है. जीतन राम माझी ने किया स्थल निरीक्षण इसी क्रम में सोमवार को केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी स्थल का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने नीमचक बथानी के एसडीओ एवं अन्य अधिकारियों के साथ परियोजना की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने एमएसएमई विभाग के विकास आयुक्त (डीसी) से भी फोन पर बातचीत कर परियोजना की प्रगति की जानकारी ली. गौरतलब है कि एमएसएमई विभाग द्वारा लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से इस टेक्नोलॉजी सेंटर का निर्माण कराया जाएगा. परियोजना के लिए बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है, जबकि भूमि पूजन के बाद मुख्य निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है. साधु नगर में पेयजल संकट की शिकायत निरीक्षण के दौरान समीपवर्ती साधु नगर की महिलाओं ने केंद्रीय मंत्री से पेयजल समस्या को लेकर शिकायत की. महिलाओं ने बताया कि क्षेत्र में नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

हर्षवर्धन कपूर का बड़ा खुलासा: एक्टिंग नहीं छोड़ी, नई फिल्म पर कर रहे हैं काम

मशहूर एक्टर अनिल कपूर के बेटे हर्षवर्धन कपूर अक्सर लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करते हैं. वे आखिरी बार फिल्म ‘थार’ में नजर आए थे. इसके बाद लंबे समय तक उनकी कोई नई फिल्म सामने नहीं आई, जिसे देखकर सोशल मीडिया पर यह अफवाह उड़ने लगी कि उन्होंने एक्टिंग छोड़ दी है. अब हर्षवर्धन ने खुद सामने आकर इन चर्चाओं पर विराम लगा दिया है और अपने फैंस को एक बहुत बड़ी खुशखबरी दी है. क्या एक्टिंग छोड़ रहे हैं हर्षवर्धन? खुद दिया जवाब हर्षवर्धन कपूर ने इन अफवाहों का जवाब देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा. उन्होंने साफ किया, “मैंने एक्टिंग से बिल्कुल भी दूरी नहीं बनाई है, जब से ‘थार’ फिल्म रिलीज हुई थी, मैं उसी दिन से एक नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा हू. ‘थार’ को बनने में 5 साल का समय लगा था. इसी तरह विक्रम को ‘भावेश जोशी’ फिल्म बनाने में कई साल लग गए थे.     हर्षवर्धन ने अपनी अपकमिंग प्रोजेक्ट के बारे में बताया अपने आने वाले काम के बारे में बात करते हुए हर्षवर्धन ने बताया कि वे पिछले 2-3 सालों से अपनी अगली फिल्म पर लगातार काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा ठीक वैसे ही, मुझे भी इस नई फिल्म को पूरा करने में अब जाकर 2-3 साल लगे हैं, जिसकी शूटिंग आने वाली 30 जून को खत्म होने जा रही है. मैं खुद इस फिल्म को प्रोड्यूस भी कर रहा हूं. मुझे लगता है कि लोगों को हर साल कलाकारों की कई फिल्में देखने की आदत हो गई है. लेकिन अगर आप ‘भावेश जोशी’, ‘थार’, ‘एके वर्सेस एके’ और ‘रे’ जैसी अलग तरह की फिल्में देखना चाहते हैं, तो यह साल में एक या दो बार मुमकिन नहीं है, यही असल सच्चाई है. खैर, आप सभी का धन्यवाद, और मेरी यह नई फिल्म अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्म है, 100 प्रतिशत यह बेहद अनोखी और बिल्कुल अलग है.” कैसा रहा है हर्षवर्धन का फिल्मी सफर? हर्षवर्धन कपूर ने सीधे एक्टिंग से नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे से अपने करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने रणबीर कपूर की फिल्म ‘बॉम्बे वेलवेट’ में एक असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम सीखा था. इसके बाद साल 2016 में उन्होंने ‘मिर्ज्या’ फिल्म से बतौर हीरो बॉलीवुड में कदम रखा. इसके दो साल बाद वे ‘भावेश जोशी सुपरहीरो’ में नजर आए. इसके बाद उन्होंने नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘एके वर्सेस एके’ और फिर ‘थार’ में अपने एक्टिंग का जलवा दिखाया, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया था.

कॉपर बॉटल में लेमन और गर्म पानी क्यों हो सकता है खतरनाक?

कॉपर बॉटल में पानी पीने का ट्रेंड पिछले कुछ सालों में बड़े स्तर पर फॉलो हो रहा है. आयुर्वेद में 'ताम्र जल' को सेहतमंद बताया गया है, लेकिन आज लोग इसे गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं. कॉपर बॉटल में लेमन वॉटर, जीरा वॉटर या गर्म पानी पी रहे हैं. कई लोग तो इसमें ये चीजें घंटों तक भरे रखते हैं तो कुछ लोग रात भर के लिए. लेकिन ऐसा करना सेहत के लिए काफी खतरनाक हो सकता है. यदि आप भी उन लोगों में से हैं तो ये आर्टिकल जरूर पढ़ें. लेमन वॉटर और जीरा वॉटर क्यों खतरनाक? लेमन जूस और जीरा में एसिडिकेटी होती है जो कॉपर के साथ क्रिया करके टॉक्सिक कॉपर सॉल्स बनाती है. ये सॉल्स पानी में घुलकर सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. डॉक्टरों और न्यूट्रिशनिस्ट्स का कहना है कि कॉपर बॉटल में सिर्फ सादा पानी स्टोर करना चाहिए लेकिन कोई भी एसिडिक लिक्विड नहीं डालना चाहिए. एसिडिक लिक्विड कॉपर लेचिंग बढ़ाते हैं यानी कॉपर ज्यादा मात्रा में पानी में घुल जाता है. गर्म पानी भी कॉपर बॉटल में नहीं डालें गर्म या बूइंग पानी कॉपर बॉटल में डालने पर कॉपर लेचिंग बढ़ जाती है. इससे कॉपर टॉक्सिसिटी का रिस्क बढ़ता है. डॉक्टर्स का कहना है कि गर्म पानी कॉपर बॉटल में डालना सेहत के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है. गर्म पानी में कॉपर तेजी से घुलता है और पानी में टॉक्सिक लेवल बढ़ जाता है. हरे निशानों का मतलब क्या है? कॉपर बॉटल में दिख रहे हरे निशान कॉपर के ऑक्सीडेशन का संकेत हैं. ये कॉपर कार्बोनेट होते हैं, जो बाहरी पतनी नहीं टॉक्सिक नहीं हैं, लेकिन अगर ये बॉटल के इनसाइड हैं तो उन्हें अच्छी तरह क्लीन करना जरूरी है. डॉक्टर्स का कहना है कि ग्रीन लेयर ऑक्सीडेशन का रिजल्ट है और बॉटल को अच्छी तरह क्लीन करना जरूरी है. कॉपर टॉक्सिसिटी के सिम्प्टम कॉपर टॉक्सिसिटी के सिम्प्टम नौजिया, वॉमिटिंग, स्टमक क्रम्प्स, डायरिया और दस्त हैं. बच्चों में यह रिस्क ज्यादा है क्योंकि उनके शरीर का साइज छोटा होता है. कैसे करें सही तरीके से कॉपर बॉटल इस्तेमाल     बॉटल में सिर्फ सादा पानी स्टोर करें     पानी को 6-12 घंटे कॉपर बॉटल में रखें     लेमन, जीरा, विनेगर नहीं डालें     गर्म पानी नहीं डालें     बॉटल को अच्छी तरह क्लीन करें  

फायर विभाग की कमी दूर करेंगे अग्निवीर? दिल्ली सरकार कर रही विचार

नई दिल्ली  दिल्ली सरकार राजधानी में अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने के लिए पूर्व अग्निवीरों को दिल्ली फायर सर्विस में परिचालन के पदों पर नियुक्त करने पर विचार कर रही है। यह प्रस्ताव सोमवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में सामने आया। इस बैठक की अध्यक्षता उपराज्यपाल टीएस संधू ने की। इस बैठक में हाल ही में दक्षिण दिल्ली में लगी भीषण आग में 22 लोगों की मौत के बाद फायर सर्विस की तैयारियों और संसाधनों की समीक्षा की गई। सोमवार को हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, गृह मंत्री आशीष सूद, पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा समेत पुलिस और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उपराज्यपाल ने फायर विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए पूर्व अग्निवीरों की सेवाएं लेने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया। उपराज्यपाल ने दिया प्रस्ताव सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर तरनजीत संधू ने कहा, 'अग्निशमन विभाग के कार्यबल को मजबूत करने के लिए मौजूदा रिक्तियों को भरने की खातिर पूर्व अग्निवीरों की नियुक्ति पर विचार करने का सुझाव दिया।' अधिकारियों ने बताया कि बैठक में अग्निशमन सेवाओं को मजबूत करने, नागरिकों की निगरानी बढ़ाने और रिक्त पदों को भरने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। पूर्व अग्निवीर बनेंगे फायर फाइटर! एक अधिकारी ने बताया, सरकार अब पूर्व अग्निवीरों को फायर फाइटर के रूप में नियुक्त करने की प्रक्रिया, आवश्यक प्रशिक्षण और सेवा शर्तों का खाका तैयार करेगी। अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की चार वर्ष के लिए सशस्त्र बलों में भर्ती की जाती है। 1,030 पद हैं खाली दिल्ली फायर सर्विस लंबे समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है। विभाग में स्वीकृत 3,633 पदों में से 1,030 पद खाली हैं, जबकि 412 पद संविदा कर्मियों के माध्यम से भरे गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण फायर ऑपरेटर श्रेणी में 2,367 स्वीकृत पदों में से 552 पद रिक्त हैं। विभाग में वर्तमान में 312 संविदा फायर ऑपरेटर कार्यरत हैं। नियमित भर्ती प्रक्रिया आखिरी बार वर्ष 2011-12 में हुई थी। फायर स्टेशनों की संख्या बढ़ाने पर भी चर्चा बैठक में राजधानी में फायर स्टेशनों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। वर्तमान में दिल्ली में 71 फायर स्टेशन हैं, जिनमें 67 नियमित और 4 डे-टाइम स्टेशन शामिल हैं। वर्ष 2011 में गृह मंत्रालय द्वारा कराए गए एक अध्ययन में दिल्ली के लिए 99 फायर स्टेशनों की आवश्यकता बताई गई थी। गृह मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली फायर सर्विस अधिनियम, 2007 की धारा 32 को सख्ती से लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत राजधानी की सभी बहुमंजिला इमारतों में अग्नि सुरक्षा और अग्नि रोकथाम उपायों को अनिवार्य बनाने की बात कही गई। वर्तमान नियमों के अनुसार 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के लिए फायर सेफ्टी एनओसी आवश्यक है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से अधिक इमारतें अग्नि सुरक्षा के दायरे में आएंगी और लोगों की सुरक्षा बेहतर होगी।