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बारिश बनी विलेन, 349 रन बनाने के बाद भी मिली हार; अब ट्राई सीरीज फाइनल की राह कैसे होगी तय?

 दांबुला IND A vs AFG A: दांबुला में खेली जा रही ट्राई-नेशन A सीरीज में अफगानिस्तान A ने बड़ा उलटफेर करते हुए भारत A को DLS नियम के तहत 4 रन से हरा दिया. इस नतीजे ने टूर्नामेंट के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं और अब 21 जून को होने वाले फाइनल की रेस काफी रोमांचक हो गई है. सवाल है कि क्या भारत ए टीम इस टूर्नामेंट का फाइनल खेल पाएगी? लेकिन उससे पहले जान लीजिए गुरुवार (11 जून) को हुए मुकाबले में क्या हुआ?  भारत A ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 49 ओवर में 349/9 का विशाल स्कोर खड़ा किया. टीम को तेज शुरुआत दिलाने में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और प्रभस‍िमरन सिंह ने अहम भूमिका निभाई. दोनों ने पहले विकेट के लिए सिर्फ 7.1 ओवर में 74 रन जोड़ दिए।  16 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने 22 गेंदों पर 44 रन बनाए. उनकी पारी में 9 चौके शामिल रहे. खास बात यह रही कि उन्होंने बिना कोई छक्का लगाए 200 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए. हालांकि वह एक बार फिर ऑफ स्टंप के बाहर उठती गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में आउट हो गए।  इसके बाद प्रभस‍िमरन सिंह ने आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी और 69 गेंदों पर 84 रन ठोक दिए. कप्तान तिलक वर्मा और उपकप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने भी शानदार अर्धशतक जड़े. दोनों बल्लेबाजों ने 66-66 रन की पारियां खेलीं. तिलक ने लगातार दूसरा अर्धशतक लगाया, जबकि ऋतुराज ने भी टूर्नामेंट में लगातार दूसरी बार 50+ स्कोर बनाया।  मध्यक्रम में सूर्यांश शेडगे ने 27 गेंदों पर 40 रन बनाकर तेजी से रन जुटाए और भारत को 300 के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. अफगानिस्तान की ओर से अब्दुल्लाह अहमदजई सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 5 विकेट झटके।  बारिश की वजह से मुकाबला प्रभावित हुआ और DLS नियम के तहत अफगानिस्तान A का लक्ष्य 38 ओवर में 294 रन कर दिया गया. जवाब में कप्तान इमरान और हसन इसाखिल ने तेज शुरुआत दिलाई. इमरान ने नाबाद 75 रन बनाए, जबकि बहिर शाह ने 51 रन की अहम पारी खेली।  जब 25.5 ओवर में अफगानिस्तान का स्कोर 177/2 था, तब एक बार फिर बारिश आ गई और खेल दोबारा शुरू नहीं हो सका. DLS गणना में उस समय अफगानिस्तान A निर्धारित पार स्कोर से 4 रन आगे था, जिसके चलते उसे विजेता घोषित कर दिया गया।  भारत A के गेंदबाज शुरुआती दो विकेट लेने के बाद दबाव नहीं बना सके. अरशद और अनुकूल रॉय ने सफलता दिलाई, लेकिन इमरान और बहिर शाह की साझेदारी मैच भारत से दूर ले गई. अगर खेल आगे बढ़ता या कुछ और विकेट गिरते तो DLS समीकरण बदल सकता था, लेकिन बारिश ने भारत की वापसी का मौका ही नहीं दिया।  फाइनल का समीकरण क्या है? टूर्नामेंट में अब अफगानिस्तान A और भारत A दोनों के 2-2 अंक हैं. हालांकि बेहतर नेट रन रेट (+0.155) की वजह से अफगानिस्तान शीर्ष पर पहुंच गया है, जबकि भारत A (+0.053) दूसरे स्थान पर है. श्रीलंका A अभी बिना अंक के तीसरे स्थान पर है।  अब भारत A को 15 जून को श्रीलंका A और 17 जून को अफगानिस्तान A के खिलाफ मुकाबले खेलने हैं. इन मैचों के नतीजे ही तय करेंगे कि 21 जून के फाइनल में कौन सी दो टीमें पहुंचेंगी. यदि श्रीलंका A अगले मुकाबले में अफगानिस्तान को हरा देता है तो अंक तालिका और भी दिलचस्प हो जाएगी।  ट्राई सीरीज का शेड्यूल 9 जून: भारत A ने श्रीलंका A को 8 रन से हराया 11 जून: अफगानिस्तान A ने भारत A को 4 रन से हराया (DLS) 13 जून: अफगानिस्तान A vs श्रीलंका A 15 जून: भारत A vs श्रीलंका A 17 जून: भारत A vs अफगानिस्तान A 19 जून: अफगानिस्तान A vs श्रीलंका A 21 जून: फाइनल  

नहीं रहे शूटिंग के गोल्डन बॉय जसपाल राणा, खेल जगत में शोक की लहर

नईदिल्ली  जाने-माने भारतीय शूटिंग कोच और एशियाई खेलों के पूर्व गोल्ड मेडलिस्ट जसपाल राणा का निधन हो गया है। वे 49 साल के थे। नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (NRAI) के प्रेसिडेंट कलिकेश नारायण सिंह देव के अनुसार, राणा ने गुरुवार रात दिल्ली के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली। हाल ही में, जर्मनी के म्यूनिख में हुए ISSF वर्ल्ड कप से भारतीय टीम की वापसी की फ़्लाइट के दौरान बीमार पड़ने के बाद राणा का एक मेडिकल प्रोसीजर हुआ था। नई दिल्ली पहुंचने पर उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और स्टेंट लगाने के लिए एक मेडिकल प्रोसीजर किया गया। राणा भारतीय पिस्टल शूटर्स के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच के तौर पर काम कर रहे थे। कैसे हुई जसपाल राणा की मौत? निशानेबाज से कोच बने जसपाल राणा जर्मनी से लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के MAX अस्पताल में भर्ती करवाया गया और फिर आज कुछ देर पहले उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट में उनके सीने में तेज दर्द हुआ था। दिल्ली में विमान लैंड होने के बाद, उन्हें दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने के कारण तुरंत साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, अभी डॉक्टर की तरफ से उनकी मौत की वजह नहीं बताया गई है। मूल रूप से उत्तराखंड के उत्तरकाशी निवासी जसपाल राणा को निशानेबाजी के क्षेत्र में उनकी उत्कृष्ट सफलता के लिए साल 2002 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा के निधन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर गहरा दुख व्यक्त किया है। 

ब्रिक्स प्रतिनिधियों के सम्मान में मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विशेष आयोजन, कृषि मंत्रियों संग हुई अहम चर्चा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों से मुलाकात इन्दौर में अतिथियों और प्रतिनिधियों के सम्मान में दिया रात्रि भोज इन्दौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल कृषि मंत्रियों एवं अन्य विदेशी प्रतिनिधियों एवं अतिथियों से मुलाकात की। उन्होंने अतिथियों का देश के दिल मध्यप्रदेश की औद्योगिक राजधानी इन्दौर में स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी के सम्मान में रात्रि भोज भी दिया। अतिथियों के स्वागत के साथ मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और पर्यटन वैभव को प्रदर्शित करने वाले रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। सांस्कृतिक संध्या में प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना पर आधारित प्रस्तुतियों ने देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम द्वारा से मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहरों और पर्यटन स्थलों की विशेषताओं को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया। रात्रि भोज एवं सांस्कृतिक आयोजन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी राम सिलावट, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, सांसद शंकर लालवानी तथा सुकविता पाटीदार, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जिला पंचायत अध्यक्ष के श्रीमती रीना सतीश मालवीय, विधायक श्रीमती मालिनी गौड़, सुउषा ठाकुर, रमेश मेंदोला, मधु वर्मा तथा गोलू शुक्ला, सावन सोनकर, प्रताप करोसिया, सुमित मिश्रा, श्रवण सिंह चावड़ा, सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। 

TMC-Congress विलय की चर्चा पर बड़ा खुलासा, जानिए क्यों ममता बनर्जी के लिए आसान नहीं है यह फैसला

कोलकाता  तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की मुलाकात के बाद टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मुलाकात के बाद दोनों पार्टियों का आपस में विलय की अटकलें शुरू हो गई. इन मुलाकातों के बाद कांग्रेस की ओर से अपने तमाम प्रदेश अध्यक्ष को मीटिंग के लिए बुलावा भेजे जाने के बाद टीएमसी का कांग्रेस में विलय की अटकलें और तेज हो गई. हालांकि टीएमसी की तरफ से इन अटकलों को खारिज कर दिया गया है और कांग्रेस ने भी प्रदेश अध्यक्षों के साथ अपनी बैठक को टाल दिया है. अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि कांग्रेस और टीएमसी के बीच विलय को लेकर बातचीत में किसी बिंदु पर गतिरोध है. इन चर्चाओं के बीच विशेषज्ञों ने अपनी बात सामने रखी है. संविधान विशेषज्ञ का कहना है कि ममता बनर्जी के चाहने के बावजूद वह अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में नहीं कर पाएंगी।  सुप्रीम कोर्ट के वकील ने समझाया पार्टियों के विलय का पूरा समीकरण सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी दुबे ने कहा कि राजनीतिक दलों का विलेय दो तरह से होता है. एक विधायी विलय, जिसको हम लेजिस्लेटिव मर्जर कहते हैं. दूसरा होता है ऑर्गेनाइजेशनल मर्जर, जिसको हम सांगठनिक विलय कहते हैं. दोनों परिस्थितियों में दो तिहाई बहुमत होना जरूरी है. जब आप विधायी विलय करते हैं तो लोकसभा, राज्य सभा और विधानसभा के दो तिहाई सदस्यों का सहमति पत्र होना चाहिए. वहीं सांगठनिक विलय में भी तमाम राष्ट्रीय, राज्य स्तरीय और जिला स्तरीय पार्टी पदाधिकारियों का दो तिहाई समर्थन चाहिए।  उन्होंने कहा की तारीख में ममता बनर्जी पार्टी प्रमुख होने के नाते अगर टीएमसी का विलय करना भी चाहती हैं तो उन्हें सबसे पहले इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया को यह आश्वस्त करना होगा कि उनके इस फैसले के साथ पार्टी पदाधिकारी या सांसद-विधायकों में दो तिहाई समर्थन प्राप्त है।  वरिष्ठ अधिवक्ता इसके अलावा विलय के लिए दोनों दलों के मुख्य संगठन माने पार्टी हाईकमान आपस में औपचारिक विलय का प्रस्ताव पारित करते हैं. मूल पार्टी के कम से कम दो तिहाई सदस्यों की सहमति से विलय होता है. तभी एंटी डिफेक्शन लॉ (दल-बदल विरोधी कानून) और मर्जर क्लॉज कॉन्स्टिट्यूशनल वैलिडिटी (विलय की संवैधानिक वैधता) कार्यान्वयन में मदद करेगा. इसके बिना लेजिसलेटिव मर्जर कर देते हैं और दो तिहाई सदस्य नहीं है तो वह भी नहीं माना जाएगा. संगठन का विलय कर देते हैं तो भी नहीं माना जाएगा।  उन्होंने समझाया कि विलय में यह भी देखना होगा कि जिन लोगों ने खुद को अलग गुट घोषित कर दिया है, वह कहां हैं. चुनाव आयोग को आश्वस्त होना पड़ेगा कि विलय के समय ब्लॉक से लेकर केंद्रीय स्तर के संगठन और उसके जो ऑफिस बियरर्स हैं वो किसके साथ है. क्योंकि वो रिप्रेजेंट करते हैं कितनी मेंबरशिप है. तभी यह ऐसा हो सकता है और हमने हाल ही में महाराष्ट्र के केस में दोनों पॉलिटिकल पार्टीज के केस में इलेक्शन कमीशन का फैसला देखा भी है. क्योंकि संगठन और विधायिका दोनों के मर्जर के बाद इलेक्शन कमिशन ने जो निर्णय लिया था।  अश्विनी दुबे ने बताया कि अयोग्यता केवल लोकसभा, राज्य सभा और विधानसभा सदस्यों का कहा सकता है. लेकिन संगठन के लोगों का डिसक्वालीफिकेशन नहीं हो सकता है. दूसरी पार्टी की मान्यता तब मिलेगी जब उसमें भी दो तिहाई सदस्य जो पार्टी के सदस्य हैं वो वो तैयार हो जाएं करें।  उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना की टूट और एनसीपी की टूट सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कह दिया था कि सिर्फ अगर विधायक चाहे और सांसद चाहें तो वो अपने हिसाब से पार्टी को ले जाकर मर्ज नहीं कर सकते. अलग पार्टी नहीं बना सकते तो वो विलय भी नहीं कर सकते।  कहा कि चाहे लोकसभा हो, चाहे राज्यसभा हो, चाहे विधानसभा हो, इनसाइड द हाउस तो बागी गुट अपना नेता चुन सकता है अपने फैसले ले सकता है, लेकिन पार्टी का वो रिप्रेजेंटेटिव नहीं माना जाएगा. ये नहीं माना जाएगा कि बाहर भी वो पार्टी का रिप्रेजेंटेटिव है. लेकिन जैसे लोकसभा के अंदर विधानसभा के अंदर जो तो तिहाई बहुमत वो बहुमत अगर पार्टी जो मूल पार्टी है मूल पार्टी पर दावा करते हैं कि हम ही यहां विधानसभा या लोकसभा में रिप्रेजेंट करते हैं. कहेंगे कि ये हमारे चुनाव में जीते हुए लोगों के नंबर हैं, तो वहां उनकी वैद्यता मानी जाएगी. लेकिन बाहर संगठन में वो रिप्रेजेंट नहीं कर सकते. संगठन के रिप्रेजेंटेशन के लिए संगठनिक विलय और संगठनिक विलय के लिए ऑर्गेनाइजेशनल मर्जर के लिए वह जो सदस्यों की संख्या है वो इंश्योर करना जरूरी है रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट के मुताबिक तो अंदर वो कर सकते हैं बाहर नहीं और यही सुप्रीम कोर्ट में अभी मामला पेंडिंग है।  . कहां से शुरू हुई टीएमसी और कांग्रेस के विलय की खबरें बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के महज 80 सीटों पर सिमटने के बाद पार्टी में भगदड़ मच गई है. ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 58 विधायकों ने बागी गुट बना लिया और पश्चिम बंगाल विधानसभा में अपनी अलग मान्यता प्राप्त कर ली है. उनका दावा है कि उनके बागी गुट में अब तक तृणमूल कांग्रेस 65 विधायक आ चुके हैं. लोकसभा में काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में 20 सांसदों की सूची स्पीकर ओम बिरला को सौंपे जाने का दावा किया गया है. दावा किया जा रहा है कि टीएमसी के इन बागी सांसदों ने एनडीए सरकार का सपोर्ट करने की बात कही है. उधर, राज्य सभा में अब तक टीएमसी के तीन सांसदों सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं।  इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच विपक्षी दलों के संगठन इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंची ममता बनर्जी ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कीं. इसके अलावा टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की, जिसके बाद खबरें उड़ने लगी कि तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में विलय होने जा रहा है. हालांकि करीब 24 घंटे बाद कांग्रेस की तरफ से जयराम रमेश और तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ताओं ने ऐसे किसी विलय से इनकार कर दिया है।   

भारत में ऑपरेशन बंद कर अमेरिकी कंपनी ने निकाले सभी 250 कर्मचारी, कर्मचारियों में मची चिंता

नई दिल्‍ली AI अब कंपनियों के बीच तेजी से अप्‍लाई हो रहा है, जिसका नतीजा ये है कि कंपनियां एआई का यूज बढ़ाते ही कर्मचारियों की संख्‍या में कटौती कर रही हैं. इसी के मद्देनजर, एक  अमेरिकी कंपनी ने भारत से अपना कारोबार बंद करने का फैसला किया है. इससे भारत में काम कर रहे सभी 250 कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित हुई है।   यह अमेरिकी रियल एस्टेट टेक कंपनी OpenDoor है, जिसने भारत स्थित अपने परिचालन को बंद करने का निर्णय लिया है, क्योंकि कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका में छोटी एआई बेस टीमों की ओर रुख कर रही है।  कर्मचारियों के साथ शेयर किए गए एक नोट में OpenDoor के सीईओ काज नेजातियान ने कहा कि कुछ महीने पहले जब कंपनी ने ओपनडोर 2.0 लॉन्च किया था, तब भारत में उसके लगभग 250 कर्मचारी थे. इसमें से पिछले कुछ महीनों में कुछ नौकरियों को वापस संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थानांतरित कर दिया गया है।  उन्‍होंने आगे कहा कि आज हम अमेरिका में अपने कस्‍टमर्स के लिए इन पदों को और भी सुलभ बनाने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे रहे हैं और भारत स्थित अपने परिचालन को बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे है. इससे भारत में हमारे उन सभी सहकर्मियों पर असर पड़ेगा, जिन्होंने ओपनडोर के लिए काम किया है।  भारत में बहुत अच्‍छे सहयोगी मिले उन्होंने कहा कि भारत में हमारे सहयोगी बहुत अच्छे लोग हैं. वे लोग शानदार काम करते हैं. अगर कोई इन्‍हें हायर करना चाहता है, तो उनके लिए ये बेहतरीन काम करके देंगे. हालांकि हम अब भारत से अपना कारोबार समेटकर निकल रहे हैं।  ओपनडोर यह बदलाव क्यों कर रहा है? इस फैसले के पीछे का कारण बताते हुए नेजातियान ने कहा कि ओपनडोर ने सालों से भारत में एक बड़ी टीम बनाई है ताकि अलग-अलग सिस्‍टम में मैन्युअल वर्कफ़्लो को संभाला जा सके. हालांकि, कंपनी ने कहा कि इन सिस्‍टम को यून‍िफाइड करने और पूरे अमेरिका में छोटी AI बेस्‍ड कस्‍टमर्स फोकस टीमें बनाने के बाद उसके ऑपरेशन में बदलाव आया है।  नेजातियन ने कहा कि हमारे ग्राहक अमेरिका में हैं, और उनके लिए हम जो परिचालन कार्य करते हैं, उसे उनके करीब रहकर करना सबसे अच्छा है. उन्होंने आगे कहा कि ओपनडोर 2.0 कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से एक बहुत छोटी कंपनी होगी, लेकिन प्रभाव के हिसाब से एक बहुत बड़ी कंपनी होगी. उन्होंने लिखा कि हमारे लोग पहले से कहीं अधिक चीजों के मालिक होंगे, अधिक निर्माण करेंगे और उनका दायरा पहले से कहीं अधिक व्यापक होगा।  कंपनी ने कहा कि रिस्‍टैब्लिसमेंट से कम चीजों, कम प्रॉसेस और कम ऑप्‍शन के साथ संचालन सरल हो जाएगा. कंपनी एक ऐसा सिंगल प्लेटफॉर्म बनाने की योजना बना रही है जहां कर्मचारी घर की खरीद, रिन्‍यूवेबल और बिक्री की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक कर सकें. साथ ही अलग-अलग सॉल्‍यूशन पर काम कर सकें। 

रेल यात्रियों को झटका! VIP कोटे के विस्तार से ग्वालियर की कई ट्रेनों में टिकट मिलना हो सकता है मुश्किल

ग्वालियर ग्वालियर से सफर करने वाले आम रेल यात्रियों के लिए आने वाले दिन और भी मुश्किल भरे हो सकते हैं। एक तरफ जहां नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और नो-रूम के कारण आम जनता का सफर बेपटरी हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ रेलवे प्रशासन आम यात्रियों को राहत देने के बजाय इमरजेंसी (आपातकालीन) कोटे का दायरा और बढ़ाने की तैयारी में है। इसमें रेलवे का तर्क है कि वीआइपी लोगों को अचानक आना-जाना पड़ता है, इसलिए यह कोटा बढ़ाया जा रहा है। लेकिन इस कदम से सीधा फायदा सिर्फ रसूखदारों को मिलेगा, जबकि दो-दो महीने पहले टिकट बुक कराकर कतार में खड़ा आम आदमी कंफर्म सीट के लिए तरसता रह जाएगा। कैंसर मरीजों को राहत, लेकिन आम जनता पर दोहरी मार इस पूरे मामले में राहत की बात सिर्फ इतनी है कि रेलवे इस कोटे के तहत आम आदमी की श्रेणी में आने वाले कैंसर मरीजों को प्राथमिकता देता है। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए रेलवे का यह कदम सराहनीय है, लेकिन इसकी आड़ में वीआइपी सीटों की संख्या बढ़ाए जाने से सामान्य और स्लीपर क्लास के मध्यमवर्गीय यात्रियों का हक मारा जाना तय है। ग्वालियर से इन ट्रेनों पर असर ग्वालियर से शुरू होने वाली और यहां से गुजरने वाली लगभग 50 ट्रेनों में इमरजेंसी कोटा लागू है। वीआइपी कोटा बढऩे से जिन प्रमुख ट्रेनों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, उनमें शामिल हैं। वंदे भारत, शताब्दी एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, पंजाब मेल, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, मंगला एक्सप्रेस, केरला एक्सप्रेस, स्वर्ण जयंती, चंबल एक्सप्रेस, ताज एक्सप्रेस, बरौनी एक्सप्रेस, रतलाम इंटरसिटी और बुंदेलखंड एक्सप्रेस आदि शामिल है। सीटों से ज्यादा आवेदन रेलवे की वीआइपी पेटी सुबह होते ही आवेदनों से भर जाती है। रेल प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि कोटा सीमित है, जबकि सिफारिशों का दबाव उम्मीद से कहीं ज्यादा है। सुबह 10 बजे तक रेलवे कार्यालय में माननीयों के प्रतिनिधियों की कतार लग जाती है। कई बार अंतिम क्षणों तक झांसी संपर्क करना पड़ता है। इन्हें मिलता है कोटा रेलवे के अनुसार ट्रेनों में कोटा न्यायाधीश, सांसद, विधायक, मंत्री, कैंसर मरीज, एमसीओ (मिलिट्री), सीआरपीएफ और पुलिस आदि को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाता है। इसमें से कुछ का कोटा तो लगभग हर एक दो दिन में लगता ही है। मंजूरी मिलते ही बढ़ाया जाएगा इमरजेंसी कोटा हमारे यहां से निकलने वाली कुछ ट्रेनों में भारी मांग को देखते हुए कोटा बढ़ाने का प्रस्ताव बनाकर रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद कुछ चुनिंदा ट्रेनों में इमरजेंसी कोटा बढ़ जाएगा। -अमन वर्मा, सीनियर डीसीएम (झांसी मंडल)

अनिल अंबानी पर संकट के बादल! NCLT के फैसले ने बढ़ाई चिंता, आगे क्या होगा?

मुंबई  उद्योगपति अनिल अंबानी को एक बड़ा झटका लगा है। दरअसल, मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी। इस फैसले के साथ ही अंबानी के खिलाफ दिवालियापन प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, NCLT के फैसले के बाद अनिल अंबानी ने स्पष्ट किया है कि वे इस आदेश को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) में चुनौती देंगे। अगर अनिल अंबानी का दिवालियापन प्रक्रिया मामला आगे बढ़ता है तो एक रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) नियुक्त किया जा सकता है, जो कानून के तहत उनकी व्यक्तिगत संपत्तियों का आकलन और नियंत्रण संभालने की प्रक्रिया शुरू करेगा। यह मामला करीब 1,200 करोड़ रुपये की वसूली से जुड़ा है। SBI का दावा है कि अनिल अंबानी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और रिलायंस इंफ्राटेल को दिए गए कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी। कंपनियों के कर्ज नहीं चुकाने के बाद बैंक ने गारंटी के आधार पर वसूली की कार्रवाई शुरू की थी। इस पूरे प्रकरण पर अनिल अंबानी की ओर से बयान आया है। यह मामला साल 2016 का है, जो कथित रूप से दी गई एक विवादित व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा है। अंबानी पक्ष का दावा है कि उन्हें इस फंड से कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं मिला था। मामला उस समय का है, जब भारत में व्यक्तिगत दिवालियापन संबंधी प्रावधान पूरी तरह लागू नहीं हुए थे। अंबानी के प्रवक्ता के मुताबिक NCLT का विस्तृत आदेश मिलने के बाद उनकी कानूनी टीम उसका अध्ययन करेगी और उपलब्ध कानूनी विकल्पों के तहत उचित मंच पर चुनौती देगी। उन्होंने भरोसा जताया कि अंबानी अपनी स्थिति को न्यायिक मंचों पर सफलतापूर्वक साबित करेंगे। अमिताभ झुनझुनवाला पर सीबीआई का एक्शन इस बीच, मुंबई की एक विशेष अदालत ने रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े एक कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) के पूर्व प्रबंध निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला को सीबीआई की हिरासत में भेज दिया है। झुनझुनवाला इससे पहले अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत के आधार पर दर्ज एक मामले में न्यायिक हिरासत में थे। इस मामले में कंपनी पर कथित तौर पर 2,929.05 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। सीबीआई के अनुसार, रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड, उसके निदेशकों और अज्ञात सरकारी अधिकारियों ने मिलकर 31 बैंकों और वित्तीय संस्थानों के एक समूह (कंसोर्टियम) के साथ धोखाधड़ी की साजिश रची। इस समूह से कंपनी ने कुल मिलाकर लगभग 9,280 करोड़ रुपये का लोन लिया था।

धर्म बदलवाने का दबाव और हैवानियत की हदें, पति-पत्नी की साजिश का सनसनीखेज मामला आया सामने

कैमूर बिहार के कैमूर में धर्मांतरण के लिए रची गई खौफनाक साजिश का खुलासा हुआ है. दरअसल कैमूर में एक मुस्लिम कपल ने धर्मांतरण के लिए एक महिला को निशाना बनाकर बेहद घिनौनी साजिश रची. महिला को कथित तौर पर नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब आरोपी महिला के साथ दुष्कर्म कर रहा था, तब उसकी पत्नी मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो बना रही थी. इसके बाद वीडियो वायरल करने की धमकी देकर महिला पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू हुआ।  क्या है पूरा मामला? मामला कैमूर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है. पीड़ित महिला की शिकायत के अनुसार आरोपी एकराम अंसारी ने उसे नशीला पदार्थ दिया, जिससे वह अचेत हो गई. आरोप है कि बेहोशी की हालत का फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए. इस दौरान आरोपी की पत्नी शाहिदा बेगम मौके पर मौजूद रही और उसने मोबाइल फोन से पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग का खेल! पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद आरोपी दंपति ने वीडियो को हथियार बना लिय. महिला को धमकी दी गई कि यदि उसने उनकी बात नहीं मानी और धर्म परिवर्तन नहीं किया तो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा. लगातार मिल रही धमकियों और दबाव से परेशान होकर महिला ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।  पुलिस ने खोला साजिश का राज शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. जांच के दौरान सामने आया कि कथित दुष्कर्म और वीडियो रिकॉर्डिंग की घटना में पति-पत्नी दोनों की भूमिका थी. पुलिस अधिकारियों के अनुसार महिला को नशीला पदार्थ दिए जाने, दुष्कर्म और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के आरोपों की जांच की गई, जिसके बाद कार्रवाई करते हुए आरोपी दंपति को गिरफ्तार कर लिया गया।  दोनों आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने आरोपी एकराम अंसारी और उसकी पत्नी शाहिदा बेगम को गिरफ्तार कर लिया है. अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है. इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और मोबाइल फोन की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाई जा सके।  इलाके के लोग हैरान! वहीं इस घटना सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. स्थानीय लोग इस वारदात को लेकर स्तब्ध हैं. नशीला पदार्थ, दुष्कर्म, वीडियो रिकॉर्डिंग, ब्लैकमेलिंग और धर्म परिवर्तन के दबाव जैसे गंभीर आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है. पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

LPG से मुक्ति की ओर भोपाल, चार इमली समेत 4 प्रमुख कॉलोनियों में PNG नेटवर्क का विस्तार

भोपाल  मध्य प्रदेश में पिछले तीन महीनों से चल रही एलपीजी (घरेलू गैस सिलेंडर) की भारी किल्लत से आम जनता परेशान है। राजधानी भोपाल में भी यह संकट लगातार बना हुआ है और गैस एजेंसियों पर सिलेंडरों की बुकिंग को लेकर लोग चक्कर काट रहे हैं। बुधवार को ही एक गैस एजेंसी पर सिलेंडर न मिलने को लेकर उपभोक्ताओं ने भारी हंगामा किया। इस बड़े संकट से निपटने के लिए अब खाद्य विभाग भोपाल को 'सिलेंडर फ्री' बनाने की एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। इसके तहत जिन इलाकों में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) की पाइपलाइन बिछ चुकी है, वहां भविष्य में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। चार बड़ी कॉलोनियों से होगी शुरुआत फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि भोपाल में 'थिंक गैस' कंपनी के जरिए घरों तक सीधे पाइपलाइन से गैस पहुंचाने का काम किया जा रहा है। यह लाइन मिसरोद से शुरू होकर होशंगाबाद रोड के दोनों तरफ की कॉलोनियों को कवर कर रही है। वर्तमान में बावड़ियाकलां, सलैया, अयोध्या बायपास, अवधपुरी और साकेत नगर के अधिकांश घरों में कनेक्शन दिए जा चुके हैं। अब विभाग ने योजना बनाई है कि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछ रही है, वहां पहले शत-प्रतिशत (100%) घरों को कनेक्शन दिया जाए और उसके बाद ही अगली कॉलोनी में काम शुरू हो। इसके लिए पहले चरण में चार बड़ी कॉलोनियों— बावड़ियाकलां की केराल केनसिप, अवधपुरी की सौम्या पार्कलैंड, अयोध्या बायपास की सागर लैक व्यू होम्स और सलैया की आकृति ग्रीन को चुना गया है। 172 कॉलोनियों के सामने से गुजर रही है लाइन अधिकारियों के मुताबिक, थिंक गैस कंपनी ने होशंगाबाद रोड के दोनों ओर समेत कुल 172 कॉलोनियों के मुख्य रास्तों पर गैस लाइन बिछा दी है। यहां रहने वाले लोग कंपनी के पास आवेदन करके अपने घरों में कनेक्शन लगवा रहे हैं और कटारा हिल्स समेत कई अन्य इलाकों से भी लोग इसके लिए तेजी से फॉर्म भर रहे हैं। विभाग अब चार-चार कॉलोनियों का समूह बनाकर फोकस कर रहा है ताकि काम जल्दी पूरा हो सके। एक तय समय सीमा के बाद इन इलाकों में एलपीजी सिलेंडरों की होम डिलीवरी हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी। मंत्री और अफसरों के बंगलों में भी बिछेगी पाइपलाइन भोपाल के दो सबसे बड़े और वीआईपी इलाके 'चार इमली' और '74 बंगला' में भी इस समय भूमिगत (अंडरग्राउंड) गैस पाइपलाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। आपको बता दें कि इन दोनों क्षेत्रों में मध्य प्रदेश के 75 फीसदी से ज्यादा मंत्रियों, सीनियर आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों के सरकारी बंगले हैं। इन इलाकों के अधिकांश हिस्सों में लाइन बिछाने का काम पूरा हो चुका है और कुछ ही दिनों में बंगलों के भीतर कनेक्शन देने की शुरुआत हो जाएगी। अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते गहराया संकट दरअसल, वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े सैन्य टकराव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसी का असर है कि मध्य प्रदेश और भोपाल में पिछले कई महीनों से घरेलू गैस की भारी किल्लत देखी जा रही है। भोपाल में इस समय हर दिन 12 से 14 हजार सिलेंडरों की बुकिंग हो रही है, जबकि कंपनियों की तरफ से सप्लाई केवल 9 से 10 हजार सिलेंडरों की ही हो पा रही है। इस किल्लत की चपेट में आम जनता के साथ-साथ कई बड़े मंत्री और अफसर भी आ गए थे, जिसके बाद वीआईपी इलाकों में भी पाइपलाइन बिछाने के काम में तेजी लाई गई है। होशंगाबाद रोड पर सबसे ज्यादा 43 हजार कनेक्शन वर्तमान में पीएनजी पाइपलाइन का सबसे बड़ा जाल होशंगाबाद रोड पर फैला हुआ है, जहां करीब 43 हजार घरों में गैस पाइपलाइन के जरिए खाना बन रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस योजना को पुराने शहर (ओल्ड सिटी) की तरफ भी ले जाया जाएगा ताकि वहां के बड़े इलाकों को कवर करके घर-घर गैस पहुंचाई जा सके। इसके अलावा घरों के साथ-साथ शहर के सभी बड़े होटलों, रेस्टोरेंटों, व्यावसायिक संस्थानों और बहुमंजिला इमारतों (मल्टीस्टोरी बिल्डिंग) को भी अनिवार्य रूप से पीएनजी लाइन से जोड़ा जाएगा। 90 दिनों में कनेक्शन लेना होगा अनिवार्य सरकार ने इस योजना को लेकर एक नई और सख्त गाइडलाइन भी जारी कर दी है। इसके नियम के मुताबिक, जिन इलाकों में गैस की अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछ जाएगी, वहां के निवासियों को 90 दिनों के भीतर पीएनजी कनेक्शन लेना अनिवार्य होगा। यदि कोई तय समय के भीतर नया कनेक्शन नहीं लेता है, तो उसका पुराना एलपीजी सिलेंडर वाला कनेक्शन सरकारी आदेश के तहत ब्लॉक या काट दिया जाएगा। PNG को लेकर केंद्र सरकार ने गाइडलाइन भी जारी की गैस संकट के बीच ही भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 'अनिवार्य वस्तु अधिनियम, 1955' के तहत एक नया आदेश जारी किया था। इस नए नियम का मकसद देशभर में गैस पाइपलाइन बिछाने और उनके विस्तार के काम को रफ्तार देना है। अब पाइपलाइन के काम में जमीन मिलने या मंजूरी मिलने में होने वाली देरी खत्म हो गई है। जिससे रिहायशी इलाकों (Residential areas) तक गैस इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से पहुंच सकेगा। नए एक्ट के 4 नियम समझें 1. सोसाइटियों और RWA की मनमानी खत्म     कई बार हाउसिंग सोसाइटियों या RWA (रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) के विरोध की वजह से पाइपलाइन का काम रुक जाता था। अब ऐसा नहीं होगा।     अगर कोई कंपनी पाइपलाइन के लिए रास्ता मांगती है तो सोसाइटी को 3 दिन के भीतर मंजूरी देनी होगी।     अगर सोसाइटी ने मना किया या देरी की तो वहां रहने वाले सभी घरों की PNG सप्लाई पर रोक लगाई जा सकती है। 2. छोटे इलाकों को 10 दिन में मंजूरी मिलेगी     पाइपलाइन बिछाने के लिए अब सरकारी विभागों को फाइलों को लटकाने की इजाजत नहीं है।     छोटे नेटवर्क के लिए 10 दिन और बड़ी लाइनों के लिए 60 दिन में मंजूरी देना अनिवार्य है।     अगर विभाग तय समय में जवाब नहीं देता, तो उसे 'डीम्ड क्लियरेंस' यानी 'ऑटोमैटिक मंजूरी' मान लिया जाएगा और काम शुरू कर दिया जाएगा। 3. जमीन और मुआवजे का झंझट खत्म अगर पाइपलाइन किसी की निजी जमीन … Read more

Tata Sierra CNG का इंतजार कर रहे ग्राहकों के लिए खबर, कंपनी ने लॉन्च को लेकर खोले पत्ते

  नई दिल्ली टाटा ने सीएनजी कारों के साथ वो प्रयोग किए हैं, जो इंडस्ट्री में दूसरे प्लेयर्स नहीं कर रहे हैं. चाहें सीएनजी के साथ ऑटोमेटिक (AMT) गियरबॉक्स देना हो या फिर कार का पेट्रोल पर नहीं बल्कि सीधे सीएनजी पर स्टार्ट होना हो. लेकिन टाटा की सारी सीएनजी कारें सब-फोर मीटर सेगमेंट की हैं।  यानी टाटा सीएनजी वाली सभी कारें चार मीटर से छोटी हैं. चाहें बता टियागो की हो या फिर नेक्सन की. ऐसे में एक सवाल उठता है कि क्या टाटा मोटर्स एक बड़ी सीएनजी कारों को मार्केट में उतारेगी. मसलन टाटा सिएरा सीएनजी या कर्व सीएनजी हमें देखने को मिलेगी. वैसे इंटरनेट पर टाटा सिएरा सीएनजी को लेकर कई तरह की बातचीत चल रही है।  कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी इसे जल्द ही लॉन्च कर सकती हैं, लेकिन इन कयासों को हकीकत क्या है. ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कुछ वक्त में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ है. वैसे इजाफा सीएनजी की कीमतों में भी हुआ है. तो क्या टाटा बड़ी सीएनजी कारों को लॉन्च करेगी।  क्या CNG में आएगी टाटा सिएरा और कर्व SUV?  ऑटो से बातचीत में टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के चीफ कमर्शियल ऑफिसर विवेक श्रीवत्स ने सीएनजी और टाटा की प्लानिंग पर कई बाते बताई हैं. टाटा की बड़ी कारों में सीएनजी देने के सवालों पर उन्होंने बताया, 'सीएनजी कारों के ज्यादातर खरीदार 15 लाख से कम के सेगमेंट में हैं. बड़ी गाड़ियों में कंज्यूमर्स के अपेक्षाएं अलग हैं।  'बड़ी कारों के खरीदारों को परफॉर्मेंस, ड्राइवेबिलिटी और ओवरऑल कैपेबिलिटी चाहिए होती है. प्रोडक्ट के नजरिये से भी देखें तो, बड़ी गाड़ियों में CNG पावरट्रेन हमेशा वैसी परफॉर्मेंस नहीं देते जैसी उस सेगमेंट के ग्राहक चाहते हैं. फिलहाल हमें बड़ी कारों में सीएनजी की कोई मांग नहीं दिख रही है।  इसका ये मतलब है कि अगर आप सिएरा सीएनजी का इंतजार कर रहे हैं, तो कंपनी इसे अभी लॉन्च नहीं करने वाली है. हालांकि, विवेक ने ये नहीं कहा कि सिएरा सीएनजी या टाटा की बड़ी कारों में सीएनजी कभी नहीं मिलेगा. उन्होंने बताया कि हम लगातार मार्केट ट्रेंड्स और कस्टमर्स की जरूरत का आकलन करते रहते हैं. अगर भविष्य में बड़ी कारों में सीएनजी की मांग बढ़ेगी, तो हम सही प्रोडक्ट के साथ बाजार में उतरने पर विचार करेंगे।  बढ़ रहा सीएनजी का मार्केट सीएनजी कारों को पहले सिर्फ फ्लीट ओनर्स की पसंद के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब ये नजरिया बदल रहा है. इसकी वजह सेफ, कम्फर्टेबल और प्रैक्टिकल विकल्प का मिलना है. सीएनजी देश का तेजी से बढ़ने वाला फ्यूल टाइप है।  वित्तवर्ष 2025 में इसका मार्केट शेयर 19 परसेंट था, जो वित्तवर्ष 2026 में बढ़कर 22 फीसदी पहुंच गया है. हालांकि, इसके बाद भी लोगों के मन में सीएनजी कारों की रिसेल वैल्यू और अपफ्रंट कॉस्ट को लेकर कई सवाल होते हैं।  विवेक श्रीवत्स ने बताया कि सीएनजी कारों की नेट कॉस्ट पेट्रोल कारों के मुकाबले 16 से 20 फीसदी ज्यादा होती हैं. हालांकि, अगर कोई रोजाना 40 किलोमीटर का औसत सफर करता है, तो 16 से 20 परसेंट का ये एक्स्ट्रा खर्च शुरुआती एक साल में ही निकल जाता है।  उन्होंने बताया कि चार साल की ओनरशिप में पेट्रोल कार का कुल खर्च सीएनजी के मुकाबले 10 से 12 परसेंट बढ़ जाता है. वहीं फैक्टरी फिटेड सीएनजी कारों की रिसेल वैल्यू भी ज्यादा होती है।