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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट राहत: श्रीलंका ऑपरेशन पवन सैनिक को पूर्ण पेंशन लाभ

चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने ऑपरेशन पवन के दौरान श्रीलंका में तैनात एक सैनिक को बड़ी राहत देते हुए सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें सैनिक को सामान्य विकलांगता पेंशन के बजाय वॉर इंजरी पेंशन देने और उसकी 50 प्रतिशत विकलांगता को 75 प्रतिशत मानकर पेंशन का लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने केंद्र सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऑपरेशनल एरिया में आतंकवादियों की तलाश के दौरान लगी चोट को सैन्य सेवा से असंबद्ध नहीं माना जा सकता। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ केंद्र सरकार द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी। केंद्र सरकार ने एएफटी के 29 मार्च 2022 के आदेश को चुनौती दी थी। मामला भारतीय सेना की पैरा रेजीमेंट में तैनात रहे नायक नाहर सिंह से जुड़ा है जो ऑपरेशन पवन के दौरान श्रीलंका में भारतीय शांति सेना के हिस्से के रूप में तैनात थे।केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सैनिक की बाईं आंख में लगी चोट पेड़ों की झाड़ियों और शाखाओं के टकराने से हुई थी। सरकार का तर्क था कि सैनिक को डयूटी के दौरान अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी, इसलिए इस चोट को युद्धजनित या सैन्य सेवा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी चोट नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार एक ऐसे सैनिक की चोट को सैन्य सेवा से जोड़ने से इंकार कर रही है, जो ऑपरेशनल एरिया के जंगलों में आतंकवादियों की तलाश कर रहा था। अदालत ने कहा कि सैनिक को “परफोरेटिंग इंजरी लेफ्ट आई” नामक गंभीर चोट उसी दौरान लगी, जब वह सरकार के आदेश पर ऑपरेशन पवन के तहत सैन्य दायित्व निभा रहा था। ऐसे में यह चोट न केवल सैन्य सेवा से संबंधित है, बल्कि वास्तविक सैन्य कर्तव्य के निर्वहन के दौरान हुई है।खंडपीठ ने केंद्र सरकार की 31 जनवरी 2001 की नीति का हवाला देते हुए कहा कि सरकार द्वारा अधिसूचित विशेष सैन्य अभियानों के दौरान होने वाली मृत्यु या विकलांगता श्रेणी-ई के अंतर्गत आती है और ऐसे मामलों में वॉर इंजरी पेंशन देय होती है। कोर्ट ने एएफटी के फैसले को सही ठहराया ऑपरेशन पवन इसी श्रेणी में शामिल है।अदालत ने विकलांगता के प्रतिशत को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत मानने के एएफटी के फैसले को भी सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि नाहर सिंह भर्ती के समय पूरी तरह स्वस्थ थे और सेवा के दौरान ही उन्हें यह विकलांगता हुई, इसलिए वॉर इंजरी पेंशन तथा 75 प्रतिशत विकलांगता के आधार पर लाभ देने में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। परिणामस्वरूप केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी गई।  

जयपुर डेयरी का मेगा अपग्रेड तैयार, CM भजनलाल शर्मा करेंगे उद्घाटन; बढ़ी प्रोसेसिंग क्षमता

जयपुर  जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (जयपुर डेयरी) ने अपने उपभोक्ताओं और पशुपालकों को बड़ी सौगात देते हुए प्लांट की उत्पादन व प्रोसेसिंग क्षमता में ऐतिहासिक विस्तार किया है। डेयरी ने करीब 133 करोड़ रुपए की लागत से अपने मौजूदा प्लांट का आधुनिकीकरण (Modernization) पूरा कर लिया है। इस अपग्रेडेशन के बाद प्लांट की दूध प्रोसेसिंग क्षमता अब 12 लाख लीटर से सीधे बढ़कर 20 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है। इस अत्याधुनिक नए प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जल्द ही करेंगे। विद्युत और प्रोसेसिंग यूनिट्स के सफल संचालन के बाद डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने प्लांट का दौरा कर उद्घाटन समारोह की तैयारियों की समीक्षा की। मंत्री कुमावत ने अधिकारियों से नई ऑटोमैटिक प्रोसेसिंग यूनिट्स की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझा और कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।  इस अवसर पर राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) की प्रबंध संचालक (MD) श्रुति भारद्वाज और जयपुर डेयरी के एमडी मनीष फौजदार सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए डेयरी मंत्री ने बताया कि इस नए और सर्वसुविधायुक्त प्लांट से उत्पादन क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा फायदा जयपुर और आसपास के जिलों के दुग्ध उत्पादकों को मिलेगा: पैकेजिंग क्षमता: दूध की प्रोसेसिंग के साथ ही पाउच पैकिंग की क्षमता को भी रफ्तार दी गई है। अब प्रतिदिन दूध पाउच पैक करने की क्षमता 10 लाख लीटर से बढ़कर 16.50 लाख लीटर हो गई है। घी उत्पादन: प्लांट की नई तकनीक के चलते अब यहाँ रोजाना 70 टन घी का उत्पादन आसानी से किया जा सकेगा। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर : प्लांट में नई जनरेशन के बॉयलर और हैवी मशीनरी स्थापित की गई है, जो प्रति घंटे लगभग 70 मीट्रिक टन भाप जेनरेट कर सकती है। इसकी मदद से घी, बटर और वे-वाटर (Whey Water) जैसे विभिन्न दुग्ध उत्पादों का निर्माण और अधिक शुद्धता व गति से संभव हो सकेगा। महत्व : जयपुर डेयरी का यह नया रूप न केवल मिलावट रहित और शुद्ध दुग्ध उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता आंदोलन को भी राजस्थान में एक नई मजबूती प्रदान करेगा।

JDU के पत्र से बढ़ी सियासी हलचल, लालू के जन्मदिन पर मिले हीरे के कंगन की जांच की उठी मांग

पटना  राजद सुप्रीमो लालू यादव के बर्थडे पर भोजपुरी सिंगर छोटू छलिया को कंगन देने का मामला राजनीतिक विवाद से होते हुए ईओयू के पाले में चला गया है। रबड़ी देवी ने सिंगर के गाना पर खुश होकर दो कंगन नजराने में दिए थे जिसे छोटू छलिया ने हीरे का बताया था। जदयू के मुख्य प्रवक्ता सह एमएलसी नीरज कुमार ने आर्थिक अपराध इकाई(ईओयू) के एडीजी को पत्र भेजकर मामले की छानबीन की मांग की है। कहा है कि रबड़ी देवी ने हीरे का कंगन कैसे प्राप्त किया इसकी जांच होनी चाहिए। नीरज ने छह बिंदुओं पर जांच की मांग की है। नीरज कुमार ने ईओयू को पत्र लिख कर लालू परिवार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। वीडियो बयान जारी कर उन्होंने पूछा है कि इतना महंगा कंगन उनके पास कहां के आया यह रबड़ी देवी को बताना चाहिए। इसी लिए ईओयू के एडीजी पत्र लिखा है कि इसकी जांच होना चाहिए। नीरज ने कहा है कि लालू परिवार की नियती है कि इन लोगों ने भ्रष्टाचार करके अकूत संपत्ति बनाई है। यह कंगन भी कहीं उसी का हिस्सा तो नहीं है। कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों, संबंधित वीडियो, मीडिया रिपोर्ट्स, विभिन्न लोगों के बयानों के आधार पर मामले की जांच कर ईओयू उचित कार्रवाई करे। नीरज ने पत्र की कॉपी प्रधान आयकर आयुक्त, प्रवर्तन निदेशालय, और लोक आयुक्त बिहार के पास भी भेजा है। पहले से कई मामलो में ईडी, सीबीआई, ईओयू की चल रही जांच के बीच लालू परिवार के लिए यह नया संकट दिख रहा है। 11 जून को लालू यादव के 79वें जन्मदिन के मौके पर राबड़ी आवास में रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलाकार छोटू छलिया का गाना सुनकर राबड़ी देवी ने अपने हाथों से दो कंगन निकालकर उसे गिफ्ट कर दिया। कलाकार ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि राबड़ी देवी उन्हें बेटा मानती हैं और हीरे का कंगन देकर सम्मानित किया। हीरे का कंगन गिफ्ट किए जाने का मामला जैसे ही चर्चा में आया कि राजनैतिक फसाद हो गया। इधर राजद और कांग्रेस रबड़ी देवी के बचाव में उतर गई है। राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा है कि बीजेपी के नेतृत्व में चल रही एनडीए सरकार पहले राज्य में चल रहे सरकारी भ्रष्टाचार की जांच करे। नीरज जी इतना उद्वेलित और विचलित नहीं होना चाहिए। कांग्रेस पार्टी इसे राजनैतिक बदले की भावना से उठाया गया कदम करार दिया है।

भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार! इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल रोकने की क्षमता से बढ़ी सैन्य ताकत

 नई दिल्ली भारत की सामरिक सुरक्षा और सैन्य इतिहास में 10 और 11 जून, 2026 की तारीखें सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन- DRDO ने लगातार तीन ऐतिहासिक फ्लाइट-टेस्ट करके देश की 'नेक्स्ट-जेनरेशन' की रक्षा क्षमताओं का लोहा मनवाया है।  इन सफल परीक्षणों के माध्यम से भारत ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' और समुद्र में मध्यम दूरी की एंटी-शिप मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है. इस ऐतिहासिक कामयाबी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को बधाई देते हुए कहा कि इन परीक्षणों ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा 'एलीट' देशों के समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को भी हवा में नष्ट करने की तकनीक मौजूद है।  इसके साथ ही, भारत ने पहली बार अपनी स्वदेशी नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफल पहला परीक्षण किया है, जो देश की समुद्री ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।  क्या है मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता? मिसाइल डिफेंस की भाषा में 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' का मतलब एक ऐसे अभेद्य सुरक्षा चक्र से है, जो दुश्मन की मिसाइल को आसमान की अलग-अलग ऊंचाइयों पर ही ढूंढकर पूरी तरह नष्ट कर देता है. मान लीजिए कि किसी दुश्मन देश ने भारत पर कोई लंबी दूरी की घातक मिसाइल दागी है, तो भारत का यह नया डिफेंस सिस्टम उसे दो स्तरों पर निशाना बनाएगा…     एक्सो-एटमॉस्फेरिक: इसके तहत इंटरसेप्टर मिसाइल दुश्मन की मिसाइल को पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर (अंतरिक्ष की सीमा पर) ही मार गिराती है।      एंडो-एटमॉस्फेरिक: यदि कोई मिसाइल पहले सुरक्षा चक्र को पार कर जाती है, तो वायुमंडल के भीतर मौजूद दूसरा इंटरसेप्टर उसे धरती पर गिरने से पहले ही हवा में उड़ा देता है।  DRDO द्वारा 10 और 11 जून को किए गए इन लगातार तीन परीक्षणों के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने तय लक्ष्यों (टारगेट्स) को बेहद सटीकता के साथ एंगेज किया और उन्हें हवा में ही मलबे में तब्दील कर दिया. ये डिफेंस सिस्टम्स उभरते हुए आधुनिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए सबसे लेटेस्ट और स्वदेशी तकनीकों के आधार पर डिजाइन की गई हैं।  ICBM को रोकने वाला 'एलीट क्लब': भारत की बड़ी वैश्विक छलांग इस सफल परीक्षण के बाद भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों की कतार में मजबूती से खड़ा हो गया है जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के खतरों को निष्क्रिय करने की तकनीक है. ICBM ऐसी मिसाइलें होती हैं जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक (5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी) मार कर सकती हैं और इनकी स्पीड बहुत तेज होती है।  अब तक ऐसी मिसाइलों को रोकने और हवा में ही मार गिराने की तकनीक केवल अमेरिका, रूस, चीन और इजरायल जैसी महाशक्तियों के पास ही प्रमुख रूप से मानी जाती थी. भारत ने इस परीक्षण के जरिए साबित कर दिया है कि उसका 'बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस'सुरक्षा कवच अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है. यह तकनीक आने वाले समय में देश के प्रमुख महानगरों, परमाणु प्रतिष्ठानों और सामरिक ठिकानों को दुश्मन के किसी भी अचानक होने वाले मिसाइल हमले से पूरी तरह सुरक्षित रखेगी।     नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का पहला सफल परीक्षण इन तीन परीक्षणों की कड़ी में भारत को एक और बड़ी कामयाबी समुद्र में मिली. DRDO ने अपनी अत्याधुनिक नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का 'मेडन फ्लाइट-टेस्ट' यानी पहला आधिकारिक उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।    यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है और इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों तथा हेलीकॉप्टरों से दागे जाने के लिए तैयार किया गया है. मध्यम दूरी की इस एंटी-शिप मिसाइल का मुख्य काम समुद्र में भारतीय सीमाओं की तरफ बढ़ रहे दुश्मन के बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों को पलक झपकते ही नष्ट करना है. इस मिसाइल के सफल परीक्षण से भारतीय नौसेना की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों क्षमताओं में जबरदस्त इजाफा हुआ है।  वैज्ञानिकों और भारतीय उद्योग की साझी कूटनीतिक जीत इन बेहद जटिल और संवेदनशील परीक्षणों की कमान रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के हाथों में थी. उन्होंने खुद इन परीक्षणों की बारीकी से निगरानी की और इसे देश की रक्षा सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़े बदलाव वाला मोड़ बताया।  इन परीक्षणों को भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, वायुसेना और नौसेना) के शीर्ष अधिकारियों ने भी अपनी आंखों से देखा और इसकी मारक क्षमता को देश की संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी बताया।   भले ही भारत के पड़ोसी देश अपनी मिसाइल क्षमताओं का लगातार आधुनिकीकरण कर रहे हों, लेकिन DRDO के इस नेक्स्ट-जेन सुरक्षा कवच ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब किसी भी आसमानी या समुद्री खतरे को सीमा पार ही ढेर करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

दान चोरी के आरोपों पर राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा कदम, मुख्यमंत्री योगी से निष्पक्ष जांच की गुहार

अयोध्या  उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में जो पैसा भक्त दान करते हैं, उसकी कथित तौर पर चोरी को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में विवाद इतनी तेजी से फैलीं कि अब खुद राम मंदिर का ट्रस्ट मैदान में आ गया है. ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले की जांच एक SIT यानी विशेष जांच दल से करवाई जाए।  राम मंदिर में श्रद्धालु जो पैसे दान करते हैं, उन्हें दान पात्रों में डाला जाता है. ये दान पात्र यानी वो बक्से या डिब्बे जिनमें भक्त पैसे डालते हैं. इन्हीं दान पात्रों से पैसे चोरी होने की बात कही जा रही है।  अब इस कथित चोरी को लेकर बाजार में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं. कोई कुछ कह रहा था, कोई कुछ. इन अफवाहों ने मामले को और उलझा दिया और लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई।  इसी वजह से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, जो राम मंदिर की देखरेख करने वाला सरकारी ट्रस्ट है, उसने तय किया कि अब चुप रहना ठीक नहीं है. ट्रस्ट ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अनुरोध किया।  ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी से क्या अनुरोध किया? ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी से तीन बातें मांगी हैं. पहली – इस पूरे मामले की जांच एक SIT यानी से करवाई जाए. SIT एक खास जांच दल होती है जो किसी बड़े मामले की गहराई से, बिना किसी दबाव के जांच करती है।  दूसरी – यह जांच निष्पक्ष हो यानी बिना किसी की तरफदारी के हो और पूरी तरह से सच सामने आए. तीसरी – जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. ट्रस्ट ने साफ कहा कि दोषियों को बख्शा न जाए. SIT जांच की मांग क्यों? ट्रस्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर माना है. राम मंदिर की दान राशि से जुड़ा यह मामला सिर्फ पैसों की चोरी नहीं है, बल्कि यह भक्तों की आस्था और भरोसे का सवाल भी है. करोड़ों लोग इस मंदिर में श्रद्धा से दान करते हैं. ऐसे में अगर उस दान की चोरी होती है और उस पर अफवाहें भी फैलती हैं, तो यह बेहद संवेदनशील मामला बन जाता है।  ट्रस्ट चाहता है कि SIT जांच से यह बात एकदम साफ हो जाए कि आखिर हुआ क्या था, कितनी चोरी हुई, कौन जिम्मेदार है और इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाने चाहिए।  मुख्यमंत्री योगी से अनुरोध क्यों? उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी का राम मंदिर से गहरा जुड़ाव है. अयोध्या और राम मंदिर उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक रही है. SIT का गठन करना राज्य सरकार के अधिकार में आता है, इसलिए ट्रस्ट ने सीधे मुख्यमंत्री योगी से यह अनुरोध किया। 

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शूटिंग अकादमी में खिलाड़ियों से किया संवाद, बढ़ाया उत्साह

केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने शूटिंग अकादमी में खिलाड़ियों से किया संवाद नई शिक्षा नीति से खेल और शिक्षा को मिल रही नई दिशा 2036 ओलंपिक और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य मंत्री सारंग ने मध्यप्रदेश में खेल उन्नयन में दी जानकारी भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भोपाल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग के साथ शूटिंग अकादमी का दौरा किया और खिलाड़ियों से संवाद कर उनके अनुभवों को जाना। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में पहली बार कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल डिग्री आधारित शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें कौशल, खेल और नवाचार से जोड़ने का कार्य किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेलों को मिला विशेष स्थान केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से खेल और शारीरिक शिक्षा को शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। अब विद्यार्थियों को खेल और पढ़ाई में से किसी एक का चयन करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि दोनों क्षेत्रों में समान रूप से आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों और विद्यार्थियों के लिए विशेष कोर्स वर्क तैयार किया जा रहा है, जिससे खेल गतिविधियों और शैक्षणिक उपलब्धियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके। एपीएआर आईडी से जुड़ेंगी खिलाड़ियों की उपलब्धियां केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि एपीएआर (APAAR) आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों और खिलाड़ियों की शैक्षणिक तथा खेल संबंधी उपलब्धियों को एक मंच पर जोड़ा जाएगा। इससे उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों का समग्र रिकॉर्ड तैयार होगा, जो भविष्य में शिक्षा और करियर दोनों क्षेत्रों में लाभकारी साबित होगा। उन्होंने बताया कि इंटर-स्पोर्ट्स गतिविधियों को क्रेडिट स्कोर से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि खेलों में सक्रिय भागीदारी को भी अकादमिक मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जा सके। आईआईटी सहित उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ रहा खेलों का महत्व केन्द्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी स्पोर्ट्स कोटा की व्यवस्था की गई है। यह कदम खेल प्रतिभाओं को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करने और खेल संस्कृति को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। 2036 ओलंपिक और विकसित भारत 2047 का संकल्प केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले 20 वर्षों में भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ना है। उन्होंने 2036 ओलंपिक को देश का महत्वपूर्ण लक्ष्य बताते हुए कहा कि खेलों के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “विकसित भारत 2047” के संकल्प को साकार करने के लिए युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। जब देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब भारत को विकसित राष्ट्र, आत्मनिर्भर राष्ट्र और विश्व की अग्रणी महाशक्ति के रूप में स्थापित करना हमारा सामूहिक लक्ष्य होगा। मंत्री सारंग ने दी शूटिंग अकादमी की जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान को मंत्री सारंग ने मध्यप्रदेश की खेल उपलब्धियों एवं राज्य शूटिंग अकादमी की विशेषताओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि भोपाल स्थित शूटिंग अकादमी देश की ही नहीं बल्कि विश्वस्तरीय खेल अकादमियों में शामिल है। यहां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप खिलाड़ियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। मंत्री सारंग ने बताया कि हाल ही में ओलंपिक चयन प्रक्रिया (ट्रायल्स) का आयोजन भी इसी शूटिंग अकादमी में किया गया था, जो इसकी उत्कृष्ट अधोसंरचना और व्यवस्थाओं का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार खिलाड़ियों को सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देखने को मिल रहे हैं। खिलाड़ियों की उपलब्धियों से कराया अवगत मंत्री सारंग ने अकादमी के खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अर्जित पदकों और उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी भी केंद्रीय मंत्री को दी। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी लगातार देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं तथा विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। राज्य सरकार खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, पोषण, खेल उपकरण और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए हर संभव सहयोग उपलब्ध करा रही है।  

मुहर्रम को लेकर सख्त निर्देश: DJ-म्यूजिक बजाने पर लगेगा 50 हजार रुपये का जुर्माना

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने एक नई एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में कहा गया है कि इस्लामिक पर्वों को केवल इस्लामिक शिक्षा के अनुसार की आयोजित किया जाना चाहिए। इसके लिए वफ्फ बोर्ड ने मस्जिद कमेटियों, दरगाह कमेटियों और आयोजकों के लिए लेजर जारी किया है। इसमें अपील की गई है कि सभी कार्यक्रम इस्लामिक शिक्षाओं के अनुसार ही आयोजित किए जाएं। इस्लामिक एडवाइजरी जारी एडवाइजरी में मुहर्रम और दूसरे इस्लामिक धार्मिक आयोजनों से पहले किसी भी तरह के शोर पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। एजवाइजरी में वक्फ बोर्ड ने डीजे म्यूजिक, बैंड-बाजा, डांस प्रोग्राम, आतिशबाजी और पारंपरिक “शेर” परफॉर्मेंस जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने की अपील की है। बोर्ड का कहना है कि ऐसी गतिविधियां शरीयत के नियमों के मुताबिक नहीं हैं। जुर्माने का भी प्रावधान एडवाइज़री में चेतावनी दी गई है कि जो कमेटियां इन निर्देशों का उल्लंघन करेंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसमें कमेटी को भंग करने और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। सादगी से मनाएं त्योहार वक्फ बोर्ड ने मुसलमानों से अपील की है कि वे मुहर्रम को इबादत, सादगी, अनुशासन और इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए मनाएं।     छत्तीसगढ़ मुस्लिम वक्फ बोर्ड की एडवाइजरी     सादगी से साथ त्योहार मनाएं मुस्लिम समाज     डीजे बजाना शरीयत के नियमों के खिलाफ     उल्लंघन करने वालों पर लगेगा जुर्माना बकरीद में की थी अपील इससे पहले छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने बकरीद को लेकर भी अपील की थी। बकरीद के दौरान वक्फ बोर्ड ने कहा था कि कुर्बानी खुले में नहीं करना चाहिए। कुर्बानी बंद जगह पर होनी चाहिए। बोर्ड ने कहा था कि खुले में खून नहीं बहाना चाहिए। दूसरे धर्म के लोगों को सम्मान करते हुए आपसी भाईचारे का उदाहरण पेश करना चाहिए।

चटगांव में क्रिकेटर से कथित बदसलूकी पर BCB ने जांच की मांग की

नई दिल्ली बांग्लादेश क्रिकेट में उस समय हड़कंप मच गया, जब स्टार स्पिनर नईम हसन ने पुलिस पर मारपीट और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए. 25 वर्षीय क्रिकेटर का दावा है कि चटगांव में पुलिसकर्मियों ने ना सिर्फ उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, बल्कि उन्हें डंडों और प्लास्टिक पाइप से पीटा. इस घटना के सामने आने के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) से लेकर देश के कई मौजूदा और पूर्व क्रिकेटरों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक नईम हसन शुक्रवार रात ढाका से चटगांव लौट रहे थे, वह ढाका प्रीमियर डिवीजन क्रिकेट लीग में प्राइम बैंक क्रिकेट क्लब से जुड़े कार्यक्रम के बाद अपने घर जा रहे थे. इसी दौरान लालखान बाजार इलाके के पास उनकी सीएनजी ऑटो-रिक्शा को कुछ पुलिसकर्मियों ने रोक लिया. नईम का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें रोकने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया. इसके बजाय अधिकारियों ने शुरुआत से ही आक्रामक रवैया अपनाया और उनके साथ बदसलूकी शुरू कर दी. नईम हसन के अनुसार पुलिसकर्मियों ने उनका गला पकड़ लिया और जबरन उन्हें दूसरे ऑटो-रिक्शा में बैठाकर थाने ले जाने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को समझाने की कोशिश की कि वह बांग्लादेश की राष्ट्रीय टीम के क्रिकेटर हैं, लेकिन अधिकारियों ने किसी की बात नहीं सुनी. नईम ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'मैं लगातार उन्हें बता रहा था कि मैं राष्ट्रीय क्रिकेटर हूं, लेकिन उन्होंने मेरी बात सुनने से इनकार कर दिया. उन्होंने मुझे डंडों और प्लास्टिक पाइप से पीटा. जब थाने पहुंचकर मैंने अपनी पहचान बताई, तब भी मेरे साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया.' नईम हसन ने पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, 'अगर वे वास्तव में मुझे हिरासत में लेना चाहते थे, तो मुझे पुलिस वाहन में ले जाना चाहिए था मुझे एक सामान्य सीएनजी में बैठाने की कोशिश क्यों की गई. मैं चाहता हूं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले.' चटगांव मेट्रोपॉलिटन पुलिस के डिप्टी कमिश्नर आमिरुल इस्लाम ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है. उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआती जानकारी से ऐसा प्रतीत होता है कि ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों ने कार्रवाई के दौरान तय नियमों और प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया. आमिरुल ने कहा, 'हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं, अगर कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. नईम हसन को न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है.' नईम के सपोर्ट में उतरे मुश्फिुकर रहीम घटना के बाद बांग्लादेश क्रिकेट जगत में नाराजगी की लहर दौड़ गई. अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज मुशफिकुर रहीम ने सोशल मीडिया पर नईम हसन के समर्थन में पोस्ट करते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्रीय खिलाड़ी के साथ ऐसा व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है. कई पूर्व क्रिकेटरों और खेल प्रशासकों ने भी इस घटना की आलोचना करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आधिकारिक बयान जारी कर घटना पर गहरी चिंता जताई है. बोर्ड ने कहा कि राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी के साथ इस तरह का व्यवहार न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि पूरी तरह अस्वीकार्य भी है. बीसीबी ने संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए दोषियों को जल्द से जल्द सजा देने की अपील की है. क्रिकेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश ने भी इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है. नईम हसन हाल ही में जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच के लिए बांग्लादेश की 15 सदस्यीय टीम में चुने गए हैं. ऐसे में यह घटना सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गई है, बल्कि राष्ट्रीय टीम की तैयारियों पर भी असर डाल सकती है. 2018 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले नईम अब तक बांग्लादेश के लिए 14 टेस्ट मैच खेल चुके हैं, जिसमें उन्होंने 48 विकेट झटके.

मानव हस्तक्षेप से प्रभावित अरावली क्षेत्र की जैव विविधता में गिरावट

 उदयपुर  उदयपुर संभाग के जंगलों में आज भले ही तेंदुए, सियार और जंगली सूअर बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हों, लेकिन एक सदी पहले मेवाड़ के वन बाघ, शेर, चीता और जंगली कुत्तों जैसे शीर्ष वन्यजीवों की शरणस्थली थे। जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य पर किए गए एक शोध अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि मानव हस्तक्षेप, जंगलों के विखंडन और प्राकृतिक वन्यजीव गलियारों के टूटने से क्षेत्र की जैव विविधता में भारी गिरावट आई है। शोध के अनुसार जयसमंद और आसपास का क्षेत्र कभी बाघ, शेर, चीता, भेड़िया, जंगली कुत्ता, काला हिरण, चिंकारा, चीतल, सांभर और नीलगाय जैसे वन्यजीवों से समृद्ध था। उस समय अरावली के जंगल पाली के गोरमघाट और कमलीघाट से लेकर मध्यप्रदेश तक फैले हुए थे, जिससे वन्यजीवों का आवागमन निर्बाध बना रहता था। शिकार और जंगलों की कटाई बनी बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार राजशाही काल में बड़े पैमाने पर शिकार और बाद के वर्षों में बढ़ते मानव दबाव ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाया। खेती के विस्तार, खनन गतिविधियों, सड़क निर्माण और आबादी बढ़ने से वन क्षेत्र छोटे-छोटे हिस्सों में बंट गए। इसका सीधा असर उन प्रजातियों पर पड़ा जिन्हें बड़े और निरंतर जंगलों की आवश्यकता होती है। कई प्रजातियां हुईं स्थानीय रूप से विलुप्त शोध में बताया गया है कि बाघ, शेर, चीता, जंगली कुत्ता और काला हिरण जैसी कई प्रजातियां जयसमंद क्षेत्र से स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुकी हैं। वर्ष 2005 से 2009 के बीच किए गए अध्ययन में केवल 21 स्तनधारी प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें से बड़ी संख्या कम या दुर्लभ श्रेणी में पाई गई। वर्तमान में तेंदुआ और जंगली सूअर का दबदबा हाल ही में उदयपुर संभाग की वन्यजीव गणना के अनुसार वर्तमान में जंगली सूअर 515, सियार 251, जरख 173 और तेंदुए 57 दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुए जैसे अनुकूलनशील वन्यजीव बदलते परिवेश में खुद को ढालने में सफल रहे हैं, जबकि कई संवेदनशील प्रजातियां लगातार सिमटती जा रही हैं। कॉरिडोर बचाने की जरूरत वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि फुलवारी की नाल, जयसमंद, सज्जनगढ़ और कुंभलगढ़ के बीच प्राकृतिक वन्यजीव कॉरिडोर का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में जैव विविधता पर और गंभीर खतरा मंडरा सकता है। शोधकर्ताओं ने वन्यजीव आवासों की सुरक्षा, मानव हस्तक्षेप में कमी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है।  

रांची-रामगढ़ समेत कई हाईवे पर जलभराव रोकने के लिए सफाई और मरम्मत शुरू

रांची  बरसात के मौसम को देखते हुए एनएचएआई ने झारखंड के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त करने को लेकर अभियान चलाया है. इस क्रम में सड़कों के रखरखाव और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम किया गया. एनएचएआई ने रांची-रामगढ़ मार्ग सहित रांची-जमशेदपुर मार्ग, रांची-डाल्टनगंज मार्ग और अन्य प्रमुख राजमार्गों पर ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और मरम्मत का काम शुरू कराया है. जल भराव रोकने के लिए किए जा रहे कार्य यातायात को निर्बाध रखने के लिए साइड ड्रेन, बॉक्स कल्वर्ट और क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाओं की सफाई की जा रही है, ताकि बरसात के पानी की तेजी से निकासी की व्यवस्था हो सके. इसके अलावा, राजमार्गों पर जल जमाव वाले और संवेदनशील स्थलों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी रखी जा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि भारी बारिश के दौरान भी यातायात प्रभावित न हो और यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े. साथ ही, इन मार्गों पर सड़क सुरक्षा से जुड़े आवश्यक सुधार कार्य भी किए जा रहे हैं. एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी का बयान इस मानसून अभियान को लेकर एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी संतोष कुमार आर्य ने कहा कि मानसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध यातायात बनाये रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी की जा रही हैं, जिससे बारिश के दिनों में भी यात्रियों का सफर सुरक्षित रहेगा.