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कर्वी में भारी वाहनों पर प्रतिबंध, श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम

 चित्रकूट  प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में सोमवार को पड़ रही सोमवती अमावस्या पर करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम यातायात और मूलभूत सुविधाओं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। वहीं कर्वी नगर में भारी और मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाते हुए विस्तृत रूट डायवर्जन योजना लागू कर दी गई है। अच्छी वर्षा और सुख-समृद्धि की कामना लेकर श्रद्धालु कामदगिरि की परिक्रमा करेंगे और मां मंदाकिनी में पवित्र स्नान करेंगे। भीषण गर्मी को देखते हुए रामघाट क्षेत्र में बड़े टेंट लगाकर छाया की व्यवस्था की जा रही है। परिक्रमा और पैदल मार्गों पर मैट और कारपेट बिछाए जा रहे हैं, ताकि श्रद्धालुओं को गर्म जमीन से राहत मिल सके। कर्वी नगर में भारी एवं मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा बैठने और विश्राम के लिए अलग-अलग स्थानों पर छायादार स्थल बनाए गए हैं, जबकि पेयजल, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी ने परिक्रमा मार्ग पर पड़ी निर्माण सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश भी दिए हैं। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए 14 जून प्रातः 5:30 बजे से 16 जून मध्यरात्रि तक कर्वी नगर में भारी एवं मध्यम मालवाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इसके बाद 17 जून से अगले 30 दिनों तक निर्धारित समयावधि में नो-एंट्री व्यवस्था लागू रहेगी। प्रयागराज, कौशांबी, बांदा और सतना की ओर से आने वाले भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। वहीं जानकीकुंड और सतना की ओर जाने वाले हल्के वाहनों के लिए भी अलग डायवर्जन प्लान बनाया गया है, ताकि मेले के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

500 यूनिट से ज्यादा खपत पर बढ़ेगा बिजली बिल, दिल्ली उपभोक्ताओं को झटका

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी में बिजली के बिल बढ़ने वाले हैं, इसका सीधा असर हजारों विद्युत उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों को 'फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज' (FPPAS) वसूलने की अनुमति दे दी है। ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार जिसे आमतौर पर PPAC भी कहा जाता है। DERC के इस फैसले का सीधा असर उन ग्राहकों पर होगा, जो 500 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करते हैं। DERC का फैसला, बढ़ जाएगा बिजली बिल दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने वैश्विक तनाव के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट और बिजली खरीद लागत में वृद्धि के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी बिजली बिल बढ़ाने की तैयारी कर रही है। DERC ने बिजली वितरण कंपनियों को उपभोक्ताओं से अधिक ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) वसूलने की अनुमति दे दी है अधिकारियों ने बताया कि इस फैसले का असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो बिजली सब्सिडी योजना के दायरे में नहीं आते हैं। हालांकि पूर्ण या 50 फीसदी सब्सिडी प्राप्त करने वाले विद्युत उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। 500 यूनिट से ज्यादा इस्तेमाल करने वालों को झटका एफपीपीएएस बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और बिजली खरीद लागत में बदलाव के आधार पर लगाया जाने वाला अधिभार है। यह कुल ऊर्जा और स्थायी लागत के पर्सेंट के रूप में वसूला जाता है। अधिकारियों के अनुसार, हाल के समय में कोयले के आयात और परिवहन लागत बढ़ने से कोयले की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जानकारी के मुताबिक, पूर्वी और मध्य दिल्ली में BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) से बिजली लेने वाले ग्राहकों के बिल में लगभग 5.7 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। जून से बढ़ सकता है बिजली बिल दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल), बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीीडीडीएल) ने मई में डीईआरसी से एफपीपीएएस वसूली की 10 फीसदी की सीमा में ढील देने का अनुरोध किया था। कंपनियों ने कहा था कि अप्रैल में उनकी वास्तविक बिजली खरीद लागत, 30 सितंबर 2021 के फीस आदेश में निर्धारित आधार लागत की तुलना में काफी बढ़ गई है। DERC के फैसले की बड़ी बातें     डीईआरसी के आदेश के अनुसार, अप्रैल के लिए एफपीपीएएस बीआरपीएल के मामले में 31.5 फीसदी, बीवाईपीएल के लिए 35.26 फीसदी और टाटा पावर डीडीएल के लिए 16 फीसदी रहा।     आयोग ने बिजली खरीद लागत में वृद्धि का उचित हिस्सा वसूलने में बिजली कंपनियों को हो रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए 10 फीसदी की सीमा में ढील देने का फैसला किया।     इसके तहत बीआरपीएल को अप्रैल के लिए अतिरिक्त 7.94 फीसदी और बीवाईपीएल को 7.43 फीसदी अतिरिक्त एफपीपीएएस वसूलने की अनुमति दी गई है।     टीपीडीडीएल को पूरा 16 फीसदी एफपीपीएएस वसूलने की अनुमति दी गई है।     इस आदेश के बाद अप्रैल के लिए बीआरपीएल की ओर से वसूला जाने वाला कुल एफपीपीएएस बढ़कर 17.94 फीसदी होगा     बीवाईपीएल के लिए 17.43 प्रतिशत हो गया है।     डीईआरसी ने स्पष्ट किया कि अगला आदेश जारी होने तक यह छूट मासिक आधार पर लागू रहेगी।

राइस मिल को मिली बड़ी राहत, उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को 43.30 लाख रुपये चुकाने के निर्देश दिए

 दुर्ग  बीमा कंपनियों द्वारा वैध दावों के निपटारे में की जाने वाली मनमानी और कटौती पर राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील को पूरी तरह से निराधार मानते हुए खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, उपभोक्ता किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल की काउंटर अपील को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 43 लाख 30 हजार 423 रुपये का भुगतान करने का आदेश जारी किया है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि इस राशि पर 11 मार्च 2024 से आठ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी देय होगा। बिना ठोस कानूनी आधार के कम किया दावा प्रकरण के अनुसार, दुर्ग ब्लॉक के समोदा में स्थित किशोर सारटेक्स एंड राइस मिल ने अपनी मिल में स्थापित बूलर कंपनी की कलर सॉर्टर मशीन का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था। एक अक्टूबर 2023 को यह मशीन अचानक खराब हो गई, जिसकी सूचना मिल प्रबंधन ने तुरंत बीमा कंपनी को दी। कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर ने मौके का निरीक्षण किया, लेकिन इसके बाद बिना किसी ठोस कानूनी आधार के, उपभोक्ता के 45 लाख 58 हजार 340 रुपये के वास्तविक दावे को घटाकर मात्र 20 लाख 55 हजार रुपये कर दिया। जिला आयोग ने ग्राहक के पक्ष मे सुनाया आदेश बीमा कंपनी के निर्णय के खिलाफ राइस मिल के संचालक कृष्णा अग्रवाल ने अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी के माध्यम से जिला उपभोक्ता आयोग, दुर्ग में न्याय की गुहार लगाई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला आयोग ने 28 जुलाई 2025 को बीमा कंपनी को 40 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया था। आदेश को चुनौती देते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की। वहीं, पीड़ित उपभोक्ता ने भी काउंटर अपील दायर कर पूरे नुकसान की भरपाई की मांग की। राज्य आयोग ने मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद माना कि कंपनी ने दावे को अनुचित तरीके से कम किया था और रिपेयर बिल के आधार पर पूरा भुगतान करने का फैसला सुनाया। IRDAI से करेंगे शिकायत उपभोक्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कमल नयन चतुर्वेदी ने बताया कि यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों द्वारा वैध दावों को तकनीकी कमियों का बहाना बनाकर खारिज करने के बढ़ते मामलों को लेकर भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को भी औपचारिक शिकायत भेजी जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी मनमानी पर रोक लग सके।  

पीएम ई-बस योजना के तहत आईएसबीटी से इलेक्ट्रिक बसों का संचालन तय

पटना  राजधानी पटना में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत जिले में जल्द ही 200 इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन शुरू किया जाएगा। इस संबंध में शुक्रवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में परिवहन विभाग, पथ निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और बस संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत होगा संचालन बैठक में योजना के क्रियान्वयन और बस परिचालन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना का उद्देश्य सतत और आधुनिक नगरीय परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि इस योजना से राजधानी के लोगों को बेहतर और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा। आईएसबीटी से शुरू होगा बसों का परिचालन जिलाधिकारी ने बताया कि पाटलिपुत्र बस टर्मिनल, बैरिया (आईएसबीटी) से 200 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। इससे पटना और आसपास के क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा में उल्लेखनीय सुधार होगा। बसों के परिचालन के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अधिकारियों को समयबद्ध तैयारी के निर्देश समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सभी जरूरी तैयारियां निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। अनुमंडल पदाधिकारी पटना सदर, जिला परिवहन पदाधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक को सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। यात्रियों को मिलेगी स्वच्छ और सुरक्षित यात्रा जिलाधिकारी ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और मजबूत होगी। लाखों यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही यातायात व्यवस्था में भी सुधार आएगा और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। प्रदूषण घटेगा, हरित परिवहन को मिलेगा बढ़ावा इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से वायु प्रदूषण में कमी आएगी और हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगी। बैठक में बस परिचालन से जुड़ी आधारभूत संरचना, यात्री सुविधाओं और यातायात प्रबंधन से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।  

14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस, एक यूनिट रक्त से बच सकती हैं कई जिंदगियां

एमसीबी : विश्व रक्तदाता दिवस (14 जून) : रक्तदान: जीवन बचाने का सबसे बड़ा उपहार सिर्फ एक यूनिट रक्त से बच सकती हैं तीन जिंदगियां एमसीबी रक्तदान को महादान कहा जाता है और यह केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस ( World Blood Donor Day) मनाया जाता है। यह दिवस उन लाखों स्वैच्छिक रक्तदाताओं के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का अवसर है, जो निस्वार्थ भाव से रक्तदान कर जरूरतमंद लोगों को नया जीवन प्रदान करते हैं। साथ ही यह दिवस सुरक्षित, पर्याप्त और नियमित रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी संदेश देता है। क्यों मनाया जाता है विश्व रक्तदाता दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2004 से विश्व रक्तदाता दिवस मनाने की शुरुआत की। 14 जून का दिन ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर ( Karl Landsteiner) के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में चुना गया है। उन्होंने (ABO Blood Group System ) रक्त समूह प्रणाली की खोज की थी, जिसने रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) को सुरक्षित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस महान खोज के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। रक्त का कोई विकल्प नहीं आज तक रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प विकसित नहीं किया जा सकता है। सड़क दुर्घटनाओं, बड़ी सर्जरी, प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, थैलेसीमिया, कैंसर, एनीमिया तथा अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्त जीवनरक्षक साबित होता है। ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदाता ही किसी जरूरतमंद के लिए आशा की किरण बनते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रक्त की एक यूनिट कम से कम तीन लोगों की जान बचा सकती है। रक्तदान के बाद रक्त को विभिन्न घटकोंकृरेड ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा में विभाजित कर अलग-अलग मरीजों के उपचार में उपयोग किया जाता है। कौन कर सकता है रक्तदान? सामान्यतः 18 से 65 वर्ष की आयु का स्वस्थ व्यक्ति, जिसका वजन 45 से 50 किलोग्राम या उससे अधिक हो तथा हीमोग्लोबिन निर्धारित मानकों के अनुरूप हो, रक्तदान कर सकता है। रक्तदान से पूर्व चिकित्सकीय जांच और परामर्श लिया जाता है, जिससे दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। रक्तदान से जुड़े भ्रम और सच्चाई समाज में रक्तदान को लेकर अनेक भ्रांतियां प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि रक्तदान से कमजोरी आती है या स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जबकि चिकित्सकीय दृष्टि से स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित होता है। शरीर कुछ ही समय में रक्त की कमी की पूर्ति कर लेता है। नियमित रक्तदान स्वास्थ्य परीक्षण का भी एक अवसर प्रदान करता है। रक्त समूहों की समझ भी है जरूरी रक्तदान और रक्त प्राप्ति रक्त समूहों पर निर्भर करती है। सही रक्त समूह मिलने पर ही मरीज का सुरक्षित उपचार संभव होता है। O $ :  सबसे सामान्य रक्त समूह देश की लगभग 30 प्रतिशत आबादी का रक्त समूह  O $ माना जाता है। O $  रक्त समूह वाले व्यक्ति  O $‚ A $‚ B $ और  AB $   समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं, जबकि वे केवल  O $  और  O & समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं। O & : यूनिवर्सल डोनर O & रक्त समूह को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है क्योंकि इस समूह का रक्त लगभग सभी रक्त समूहों के मरीजों को दिया जा सकता है। हालांकि  O&  समूह के व्यक्ति केवल  O &  रक्त ही प्राप्त कर सकते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में इस रक्त समूह का विशेष महत्व होता है। AB $ : यूनिवर्सल रिसीवर AB $ रक्त समूह वाले लोग किसी भी रक्त समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं। इसी कारण इन्हें यूनिवर्सल रिसीवर कहा जाता है। हालांकि वे केवल  AB $  समूह के लोगों को ही रक्तदान कर सकते हैं। A $ रक्त समूह A $ रक्त समूह वाले व्यक्ति  A $ और  AB $  रक्त समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं। वहीं वे  A $] A  &] O $ और  O & समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं। A  & रक्त समूह A & रक्त समूह अपेक्षाकृत कम पाया जाता है। इस समूह के लोग  A $] A  &] AB $  और  AB & रक्त समूह को रक्तदान कर सकते हैं, लेकिन रक्त केवल  A& और  A& समूह से ही प्राप्त कर सकते हैं। B $ रक्त समूह B $ रक्त समूह वाले व्यक्ति  B $ और  AB $ समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर वे  B $] B &] O $ और  O &   समूह से रक्त प्राप्त कर सकते हैं। B &रक्त समूह B &रक्त समूह वाले व्यक्ति  B $] B &] AB $ और  AB & समूह के लोगों को रक्तदान कर सकते हैं, लेकिन रक्त केवल  B & और  O & समूह से प्राप्त कर सकते हैं। AB & : दुर्लभ रक्त समूह AB & भारत में अपेक्षाकृत दुर्लभ रक्त समूहों में शामिल है। इस समूह के लोग  AB $ और  AB & को रक्तदान कर सकते हैं, जबकि रक्त  AB &] A  &] B & और  O &  समूह से प्राप्त कर सकते हैं। युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण देश में रक्त की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए युवाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा आयोजित रक्तदान शिविरों में युवाओं की सक्रिय सहभागिता न केवल रक्त भंडार को मजबूत करती है, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदना का संदेश भी प्रसारित करती है। रक्तदान: महादान रक्तदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोत्तम उदाहरण है। किसी अनजान व्यक्ति को जीवनदान देने का सुख और संतोष अमूल्य होता है। एक छोटा-सा प्रयास किसी परिवार की खुशियां बचा सकता है और किसी मरीज को नया जीवन दे सकता है। निष्कर्ष विश्व रक्तदाता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि रक्त की आवश्यकता किसी भी समय, किसी भी व्यक्ति को पड़ सकती है। अस्पतालों में हर दिन हजारों मरीजों की जिंदगी स्वैच्छिक रक्तदाताओं पर निर्भर रहती है। इसलिए प्रत्येक स्वस्थ नागरिक को नियमित और स्वैच्छिक रक्तदान का संकल्प लेना चाहिए। रक्तदान कर हम न केवल किसी का जीवन बचाते हैं, बल्कि एक संवेदनशील, सहयोगी और स्वस्थ समाज … Read more

सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी से घिरे दिग्विजय सिंह, इंदौर महापौर ने की कानूनी कार्रवाई की मांग

भोपाल  मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों पर भाजपा के कब्जे के बाद शुरू हुई राजनीतिक जंग अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस जहां दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रही है, वहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महापौर ने भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को एक शिकायती पत्र लिखकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत की आपराधिक अवमानना का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। 'चोरी में सुप्रीम कोर्ट भी शामिल' बयान पर आपत्ति महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सॉलिसिटर जनरल को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन रद्द होने को मिली-जुली सीट चोरी करार दिया था। सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसकी ट्रांसक्रिप्ट भी शिकायत के साथ संलग्न की गई है। वीडियो में कांग्रेस नेता कथित तौर पर कह रहे हैं कि, 'इस चोरी में सभी शामिल हैं। न केवल राज्य बल्कि केंद्र भी, चुनाव आयोग भी और मुझे कहना पड़ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट भी।' दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई में देरी को लेकर अदालत पर यह टिप्पणी की थी। कंटेम्प्ट एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग इंदौर मेयर ने पत्र में स्पष्ट किया है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान माननीय न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और अदालत को बदनाम करने की श्रेणी में आता है। उन्होंने मांग की है कि कांग्रेस नेता के खिलाफ 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971' के सेक्शन 15(1)(बी) के तहत सर्वोच्च न्यायालय की आपराधिक अवमानना की सख्त वैधानिक कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए। 'पीड़ित महिला की बद्दुआ का असर है' इस पूरे घटनाक्रम पर महू से भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने भी तीखा और विवादित बयान दिया है। उन्होंने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने को एक पीड़ित महिला की बद्दुआ का असर बताया। ठाकुर ने दावा किया कि तेलंगाना में एक महिला द्वारा कांग्रेस नेता के खिलाफ की गई शिकायत पर नटराजन ने कोई कार्रवाई नहीं की थी, जिसके कारण पीड़ित महिला की बद्दुआ के चलते उनका फॉर्म रिजेक्ट हुआ है। आपराधिक अवमानना क्या होती है? भारत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट 1971' लागू है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति या नेता लिखित, मौखिक या वीडियो के जरिए अदालत की गरिमा को कम करने, उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाने या उसे 'स्कैंडलाइज्ड' करने की कोशिश करता है, तो सॉलिसिटर जनरल या अटॉर्नी जनरल की सहमति से सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई कर सकता है, जिसमें जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।  

अगले थल सेना अध्यक्ष की दौड़ में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जानिए उनका सैन्य सफर और उपलब्धियां

नई दिल्ली लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय थल सेना के अगले अध्यक्ष होंगे. सरकार ने इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी है. जनरल के स्थायी रैंक के साथ वो 30 जून को पदभार ग्रहण करेंगे. वो वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह लेंगे. लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का कार्यकाल 31 अगस्त, 2028 तक होगा।  महाराष्ट्र के पुणे जिले स्थित खड़कवासला के राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व-छात्र धीरज सेठ दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त हुए थे. लगभग चार दशकों के अपने कार्यकाल में उन्होंने विभिन्न भू-भागों और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में असाधारण संचालन अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें आतंकवाद विरोधी अभियान भी शामिल हैं।  लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, विकसित क्षेत्र में एक बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी बल की कमान संभाली है. लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद, उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली और बाद में दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में काम किया, जहां उन्होंने प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व किया. सेना कमांडर के पद पर पदोन्नत होने के बाद, उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया और पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमांड की कमान संभालने का दुर्लभ गौरव हासिल किया।  लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने जम्मू-कश्मीर में एक स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ संचालन अधिकारी, सेना मुख्यालय में सहायक सैन्य सचिव, दक्षिण पश्चिमी कमान मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ ऑपरेशंस और अनुशासन, समारोह और कल्याण के महानिदेशक सहित कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर काम किया।  क्षमता विकास और आधुनिकीकरण में एक विशिष्ट योगदानकर्ता के रूप में, उन्होंने सामरिक योजना और क्षमता विकास निदेशालयों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।  करीब 40 साल का सैन्य अनुभव, कई अहम कमानों का नेतृत्व किया दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन हासिल करने वाले धीरज सेठ को करीब 40 साल का सैन्य अनुभव है। उन्होंने रेगिस्तान, जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी मोर्चे सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में कमान संभाली है। धीरज सेठ दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जीओसी-इन-सी भी रह चुके हैं। वे पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करने वाले चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मिशन (अंगोला), सेना मुख्यालय और क्षमता विकास से जुड़े कई अहम पदों पर भी काम किया है। जूनियर कमांड कोर्स में टॉपर, कई सम्मान हासिल किए वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला, इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), DSSC वेलिंगटन और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। वे जूनियर कमांड कोर्स में फर्स्ट रैंक और DSSC में बेस्ट ऑल राउंड स्टूडेंट ऑफिसर मेडल हासिल कर चुके हैं। उन्हें उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया जा चुका है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने अमेरिका-पेरिस में किया कोर्स लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में मोंटेरी स्थित नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स,, पेरिस में मिलिट्री कॉलेज में डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड जनरल स्टाफ कोर्स, महू में हायर कमांड कोर्स और नई दिल्ली में नेशनल डिफेंस कॉलेज में ट्रेनिंग ली है। इसके अलावा, उन्होंने रेगिस्तानी इलाके में एक आर्मर्ड रेजिमेंट, विकसित इलाके में एक आर्मर्ड ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में एक काउंटर-इंसरजेंसी फोर्स की कमान भी संभाली है। सेना के आधुनिकीकरण के लिए जाने जाते हैं लेफ्टिनेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ हमेशा एक कुशल सैन्य अधिकारी रहे हैं और पेशेवर सैन्य शिक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वह सेना के आधुनिकीकरण में अपने योगदान के लिए व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले जनरल ऑफिसर हैं। उन्होंने सेना मुख्यालय के रणनीतिक योजना और क्षमता विकास विभागों में अहम पदों पर काम किया है। सेना के आधुनिकीकरण की दिशा, क्षमता विकास के रोडमैप और लंबे समय के लिए सेना से जुड़ी पहलों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट, जुलाई में वेतन वृद्धि की उम्मीद; 8वें वेतन आयोग पर नजरें

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी। कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान 8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है। पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है। कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी? सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…     पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।     दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा। 7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा? तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था। इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है। इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट? केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब 18 महीने का समय लगने की उम्मीद है। आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। इसके बाद सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के सुझावों की जांच की जाएगी और अंतिम सिफारिशें तैयार होंगी। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक सौंपी जाती है, तो सरकार पर एरियर (बकाया) देने की देनदारी काफी बढ़ जाएगी। सिफारिशें स्वीकार और लागू होने के बाद, केंद्र सरकार बीच की अवधि का पूरा एरियर कर्मचारियों को देगी। फिलहाल कर्मचारी संगठन ज्यादा मल्टीप्लायर और बेहतर रिटायरमेंट फायदों के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला देश के वित्तीय हालातों को देखकर ही लिया जाएगा। क्या होता है वेतन आयोग ? केंद्रीय वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों, पेंशन और अन्य फायदों की समीक्षा करने के लिए गठित एक पैनल होता है। आमतौर पर देश में हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है, जो बदलती अर्थव्यवस्था और महंगाई के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सिफारिशें देता है।

SSO आईडी से ऑनलाइन पेंशन वेरिफिकेशन की नई व्यवस्था लागू

जयपुर अब तक पेंशन चालू रखने के लिए हर साल बुजुर्गों को बैंकों में जाकर लंबी लाइनों में लगना पड़ता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकार ने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए फेस ऑथेंटिकेशन को हरी झंडी दे दी है। इसका मतलब है कि पेंशनर्स अब मोबाइल या कंप्यूटर पर सिर्फ अपना चेहरा स्कैन करके अपना जीवन प्रमाण पत्र घर बैठे ही जमा कर सकेंगे। SSO ID से वेरिफिकेशन हुआ बेहद आसान पेंशनर्स के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को भी बहुत आसान बना दिया गया है। सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, अब चतुर्थ श्रेणी से ऊपर के कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी एसएसओ आईडी का इस्तेमाल कर सकेंगे। वे इसके जरिए ई-साइन करके किसी भी पेंशनर के जीवन प्रमाण पत्र को तुरंत ऑनलाइन वेरिफाई कर पाएंगे। इससे कागजी कार्रवाई से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा। दिव्यांग बच्चों की आजीवन पेंशन पर नया नियम सरकार ने दिव्यांग बच्चों को मिलने वाली आजीवन पारिवारिक पेंशन के नियमों में भी बड़ा सुधार किया है। अब दिव्यांगता का सर्टिफिकेट किसी सक्षम अधिकारी या विशेषज्ञों के मेडिकल बोर्ड से ही बनवाना होगा। अगर दिव्यांगता स्थाई है, तो यह सर्टिफिकेट पूरी जिंदगी में सिर्फ एक ही बार जमा करना होगा। अगर दिव्यांगता अस्थाई है, तो पेंशन जारी रखने के लिए हर 3 साल में नया सर्टिफिकेट जमा कराना जरूरी होगा।

बीएड प्रवेश परीक्षा PTET-2026: 1.26 लाख अभ्यर्थी देंगे एग्जाम, कड़े सुरक्षा इंतजाम

जयपुर राजस्थान में बीएड महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पीटीईटी-2026 (PTET-2026 ) की परीक्षा रविवार 14 जून को राज्य के 41 जिलों के 300 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की जा रही है. परीक्षा के मुख्य समन्वयक और वीएमओयू के कुलगुरू प्रोफेसर बीएल वर्मा ने बताया कि इस बार फरवरी में राज्य सरकार से दिशा निर्देश मिलने के बाद आवेदन आमंत्रित किए गए. अब तक कुल 1 लाख 26 हजार 600 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें छात्रों के 48 हजार 138 तथा छात्राओं के 78 हजार 462 आवेदन शामिल हैं. सुबह 9 बजे से 12 बजे तक परीक्षा होगी आयोजित प्रोफेसर वर्मा ने बताया कि डीएलएड परीक्षा की तरह इस परीक्षा में भी पूरी शुचिता, पारदर्शिता और गोपनीयता बरती जा रही है. उन्होंने बताया कि 14 जून को परीक्षा का आयोजन सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच किया जा रहा है. सभी परीक्षार्थियों को प्रातः 7.30 बजे से 8.30 बजे के बीच ही परीक्षा केन्द्रों पर प्रवेश मिल सकेगा. इस बार सबसे ज्यादा 1 लाख 15 हजार 293  परीक्षार्थी हिन्दी माध्यम में तथा 11 हजार 307 परीक्षार्थी अंग्रेजी माध्यम में परीक्षा देंगे. जयपुर में हाई टेक कमांड सेंटर प्रोफेसर वर्मा ने बताया के परीक्षार्थी के एडमिट कार्ड में क्यूआर कोड होगा जिसमें उसकी पूरी जानकारी समाहित रहेगी. प्रश्नपत्र पर भी क्यूआर कोड अंकित किया गया है. उन्होंने बताया कि संवेदनशील केन्द्रों की निगरानी के लिए जयपुर में हाई टेक कमांड सेंटर बनाया गया है और कोटा मुख्यालय से भी परीक्षा केन्द्रों की निगरानी की जाएगी. कुलगुरू प्रोफेसर वर्मा ने कहा कि पहली बार एआई साफ्टवेयर से सतर्कता बरती जाएगी. परीक्षा के वक्त जिलों में कई स्तरों पर बनाये गए उड़नदस्ता दल छापामारी का कार्य करेंगे और संदिग्धों पर कड़ी नजर रखी जाएगी. परीक्षा केन्द्रों पर बायोमेट्रिक जांच के बाद भी परीक्षार्थी को प्रवेश मिलेगा.