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भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा चुनाव अपडेट: 11 हजार चिकित्सक डालेंगे वोट

 कुरुक्षेत्र  भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा चुनाव की प्रक्रिया जहां बंद हुई थी, वहीं से अब दोबारा शुरू हो गई। पानीपत के जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. राज कपूर को चुनाव करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें रिटर्निंग ऑफिसर बनाया। चुनाव में प्रदेशभर के 11 हजार से ज्यादा आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथी और सिद्धा चिकित्सक अपने मत का प्रयोग करेंगे। डॉ. कपूर ने दैनिक जागरण को बताया कि पहले इस प्रक्रिया में 15 अक्टूबर 2024 तक के पंजीकृत चिकित्सक भाग ले रहे थे, जिसे अब अपडेट कर 15 अक्टूबर 2025 तक के चिकित्सकों को भी इसमें शामिल किया है। ऐसे में सात सदस्यों के चुनाव के लिए प्रदेश के जिन 20 चिकित्सकों ने नामांकन भरा था वह तो इसमें बने ही रहेंगे। साथ ही जो नए पंजीकृत चिकित्सक हैं, उन्हें भी नामांकन करने का मौका दिया जाएगा। इसकी रूपरेखा बनाकर अतिरिक्त मुख्य सचिव आयुष विभाग को भेज दी है, जहां से स्वीकृति मिलते ही इसे पुन: शुरू कर दिया जाएगा। 21 जून के बाद चुनाव की प्रक्रिया जोर पकड़ लेगी। भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा की कार्यकारिणी में सात सदस्य एक चेयरमैन और एक वाइस चेयरमैन बनता है। सरकार की ओर से चेयरमैन को नामिनेट किया जाता है। परिषद का चुनाव हर पांच साल में होना चाहिए लेकिन कोरोना के चलते 2020-21 में यह चुनाव नहीं हो पाया था। अब यह चुनाव 12 साल बाद होगा। फरवरी में प्रशासनिक कारणों से चुनाव कर दिए थे स्थगित गौर हो कि भारतीय चिकित्सा परिषद हरियाणा के सात सदस्यों को चुनने की चुनाव प्रक्रिया इसी साल जनवरी में शुरू हो गई थी। मगर प्रशासनिक कारणों के चलते इस प्रक्रिया को फरवरी में रोक दिया था, जबकि उस दौरान नामांकन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी। पहले परिषद के तत्कालीन चेयरमैन डॉ. दिनेश अग्रवाल की अध्यक्षता में यह प्रक्रिया चल रही थी। अब उनकी जगह रिटर्निंग आफिसर डॉ. राज कपूर को बनाया गया है। नई कार्यकारिणी से मिलेगा नया बल: डॉ. शुभम गर्ग आयुर्वेदिक चिकित्सक डाक्टर शुभम गर्ग ने कहा कि नई कार्यकारिणी चुनकर परिषद में जाएगी इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बल मिलेगा। साथ ही पंजीकृत चिकित्सकों के लिए नई नीतियां बन पाएंगी, जिससे चिकित्सकों को फायदा मिलेगा। 21 जून के बाद चुनाव की प्रक्रिया तेज होगी: डॉ. राज जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डाक्टर राज कपूर ने बताया कि 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बाद चुनाव की प्रक्रिया तेज होगी। जिला आयुर्वेदिक अधिकारियों को चुनाव के नोटिस को बोर्ड पर प्रदर्शित करने के लिए पत्र भेजा गया है।  

पटना से गया, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और राजगीर के लिए चलेगी रैपिड रेल: सीएम का ऐलान

 पटना बिहार में आने वाले समय में रैपिड रेल का जाल बिछने वाला है। राजधानी पटना से गयाजी, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय और राजगीर जैसे शहरों को हाईस्पीड ट्रेन से जोड़ा जाएगा। इन शहरों के बीच रोजाना सफर करने वाले कामकाजी लोगों एवं अन्य सभी वर्ग के यात्रियों को सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को इस बारे में घोषणा की। उन्होंने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की बात कही है। सीएम सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर पटना में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद बिहार में रेलवे का नेटवर्क मजबूत हो रहा है। राज्य के लगभग सभी रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। अब भारत सरकार ने कहा है कि यहां रैपिड रेल चलाई जाएंगी। पटना से 4 शहरों के लिए चलेगी रैपिड रेल मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अभी पटना से गयाजी जाने में डेढ़ से दो घंटे का समय लगता है। सरकार ऐसी व्यवस्था करेगी कि रैपिड रेल से यह यह सफर 40 मिनट से भी कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ट्रेन से पटना और मुजफ्फरपुर के बीच का सफर भी दो से ढाई घंटे में पूरा होता है, उससे कम समय में रोड से लोग पहुंच जाते हैं। इन शहरों को भी रैपिड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा नालंदा जिले का राजगीर टूरिस्ट हब के रूप में विकसित हो रहा है। बेगूसराय भी राज्य का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र हो गया है। पटना से राजगीर और बेगूसराय के लिए भी आने वाले समय में रैपिड रेल चलेंगी। सीएम ने दावा किया कि इन शहरों का भी राजधानी से सफर 40 मिनट के अंदर ही पूरा होगा। उन्होंने कहा कि रैपिड रेल को मेट्रो और रोड नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा। पटना से जयनगर के बीच चल रही नमो भारत अभी पटना से जयनगर के बीच नमो भारत ट्रेन चलाई जा रही है। इसकी शुरुआत पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले की गई थी। सप्ताह में 6 दिन चलने वाली यह ट्रेन बाढ़, मोकामा, बरौनी, समस्तीपुर, दरभंगा, सकरी और मधुबनी स्टेशन पर रुकती है। हालांकि, 266 किलोमीटर की दूरी यह लगभग पौने 6 घंटे में पूरी करती है। इसकी औसत स्पीड 46 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह ट्रेन पूरी तरह से वातानुकूलित है और यात्री बिना रिजर्वेशन के सामान्य टिकट पर इस में यात्रा कर सकते हैं। ट्रेन की बाहरी बनावट वंदे भारत ट्रेन जैसी है। रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को ध्यान में रखते हुए इसे शुरू किया गया था।

गोरखपुर में 295 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण, योगी ने गिनाए सरकार के काम

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दल जोरशोर से तैयारियों में जुटे हैं। ऐसे में सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी एक तरह से चुनावी शंखनाद कर दिया है। सीएम योगी पश्चिम से लेकर पूरब तक यूपी के धुआंधार दौरे कर रहे हैं। इन दौरों के दौरान सैकड़ों करोड़ की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण-शिलान्यास के साथ ही वह लोगों को अपनी सरकार के कामों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं साथ ही विपक्ष पर जमकर हमला भी बोल रहे हैं। शनिवार को सीएम योगी वाराणसी, आजमगढ़ से होते हुए अपने गृह जनपद गोरखपुर पहुंचे। यहां चिल्लूपार की जनसभा में उन्होंने राम मंदिर निर्माण, रोजगार, कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। सीएम योगी ने जनता से आह्वान किया जो दल आस्था का सम्मान, युवाओं को रोजगार और क्षेत्र का विकास नहीं कर सकते, उन्हें न चुनें। सीएम योगी शनिवार को गांधी इंटर कालेज महुआपार बड़हलगंज में 295 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 152.21 करोड़ रुपये की 122 पूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और 143.25 करोड़ रुपये की 197 नई परियोजनाओं का शिलान्यास किया। सीएम योगी ने कहा कि चिल्लूपार क्षेत्र के लोग सरयू मैया के प्रति गहरी आस्था रखते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से सरयू में स्नान करते हैं और पर्व-त्योहारों पर काशी तथा अयोध्या धाम की यात्रा करते हैं। अनुमान कीजिए आपका एक वोट कैसे पीढ़ियों को तार देता है। 500 वर्ष पहले जिस अयोध्या धाम में हम सब अपमानित हुए थे। पांच सौ वर्षो तक संघर्ष चलता रहा। पीढ़ी दर पीढ़ी, साल दर साल संघर्ष का सिलसिला थमा नहीं। फिर डबल इंजन की सरकार आई। आज अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर का निर्माण हो गया। सीएम ने सभा में लोगों से पूछा कि क्या ये काम कांग्रेस कर पाती? कांग्रेस के वश का था? क्या समाजवादी पार्टी कर पाती? उन्होंने कहा कि आप सोचें कि जब ये आपकी आस्था को सम्मान नहीं दे सकते, महापुरुषों को सम्मान नहीं दे सकते, विकास की योजनाएं नहीं ला सकते, नौजवान को रोजगार नहीं दे सकते, उद्योग धंधे नहीं ला सकते, बेटी बहन को सुरक्षा नहीं दे सकते, बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं दे सकते, सड़कों का निर्माण नहीं कर सकते है, बब इन्हें चुनकर भेजते क्यों हैं? इन्हें चुनकर भेजने का मतलब स्वयं पर एक बोझ और कलंक का ठप्पा लगा लेना है। सपा पर साधा निशाना सीएम योगी ने नाम लिए बगैर सपा पर जमकर निशाना साधा। सीएम योगी ने कहा कि जब गलत लोग चुन कर जाते थे, तब जनता का पैसा चंद लोगों के परिवारों के विकास में लगता था। नौकरियों में सेंध लगती, यूपी के नौजवानों को नौकरी नहीं लगती। विकास की योजना में ठेके पट्टे के लिए पहले ही मार होने लगती थी। विधायक स्वयं ठेका करेगा तो हो चुका काम। यही होता था। लेकिन अब विकास भी हो रहा, नौजवानों को नौकरी भी मिल रही है। पुलिस भर्ती में चिल्लूपार और गोरखपुर के नौजवान भर्ती हुए। हर सरकारी भर्ती में नियुक्ति पत्र वितरित करता हूं तो गोरखपुर के सभी विधानसभा क्षेत्र से नौजवान मंच पर दिखते हैं। प्रसन्नता होती है। सीएम ने एक बार फिर लोगों से पूछा कि क्या ये 2017 के पहले संभव था? उन्होंने कहा कि तब चाचा-भतीजे की जोड़ी आपके हक पर डकैती डालती थी। नौजवानों का सलेक्शन नहीं होता था बल्कि वे नौकरी रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पहचान के संकट से जूझता था। मै मानता हूं कि चिल्लूपार, आजमगढ़, मऊ और यूपी के नाम पर रोजगार नहीं मिलता था। हक विकास भी करेंगे, सुरक्षा और सम्मान भी देंगे सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में दंगा, कर्फ्यू, अव्यवस्था, गुंडागर्दी, माफियागिरी यही सब था यूपी में। न बेटी सुरक्षित न व्यापारी। आज ऐसा नहीं है। एक नई पहचान बनी है यूपी की। यह नई पहचान आपके विकास की इस यात्रा की पहचान है। हम विकास भी करेंगे, सुरक्षा भी देंगे, आस्था का सम्मान भी करेंगे और समृद्धि की नई उंचाई की ओर आप सब को भी लेकर जाएंगे। सीएम योगी ने कहा कि सरकार यहां लगने वाले उद्योगों के लिए ऐसे प्रशिक्षण केंद्र भी खोलेगी जहां तकनीशियन पैदा होंगे। उद्योगों में प्रशिक्षित बेटे और बेटियों को नौकरी मिलेगी, उन्हें पलायन नहीं करना होगा। लेकिन इन प्रक्रियाओं को गति तब मिलेगी जब अच्छी सरकारें होंगी, सुशासन होगा, सुरक्षा होगी।

तिर्वा रियासत की जमीन पर बड़ा आदेश: अपर आयुक्त न्यायालय ने दिया अंतिम निर्णय

कन्नौज यूपी के कन्नौज में 50 साल पुराने भू-सीलिंग विवाद में अपर आयुक्त न्यायालय ने अंतिम आदेश जारी करते हुए तिर्वा रियासत की 67.29 एकड़ भूमि सरकारी घोषित कर दी है। उप्र अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम, 1960 के तहत अपर आयुक्त प्रशासन रेनू सिंह ने राजा शारदा नरायण सिंह के वारिसों की अपील पर यह फैसला दिया। उन्होंने कुल 112.60 एकड़ भूमि में से 67.29 एकड़ भूमि को अंतिम रूप से सीलिंग के तहत अतिरिक्त यानी सरप्लस घोषित किया है। 17.31 एकड़ भूमि को आबादी और बाग की श्रेणी में होने के कारण सीलिंग से अवमुक्त कर दिया गया है। राज्य सरकार का पक्ष रख रहे शासकीय अधिवक्ता कानपुर मंडल नीरज सिंह सेंगर के मुताबिक तिर्वा रियासत की कन्नौज एवं फर्रुखाबाद के कई गांवों में जमीन थी। जिसको लेकर न्यायालयों में वाद दायर था। जिसमें राजा शारदा नरायण सिंह की 44 एकड़ भूमि सीलिंग में घोषित की गई थी। जिसके विरुद्ध रियासत ने न्यायालय में वाद दायर किया था। जिस पर प्रशासन द्वारा जमीनों की बिक्री पर रोक लगा दी थी। तिर्वा खास की भूमि को लेकर उच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र की 37 एकड़ भूमि को रियासत ने छोड़ने का प्रार्थना पत्र दिया था। 1 जून को अपर आयुक्त कानपुर मंडल ने निर्णय लेते हुए कहा कि राजा शारदा नरायण सिंह की 112 एकड़ भूमि में से 67.29 एकड़ भूमि को सीलिंग में घोषित किया जाता है। एसडीएम की जांच में खुला खेल उच्च न्यायालय ने 27 जून 2023 को साल 1994 के पुराने आदेश को निरस्त करते हुए अपर आयुक्त को निर्देश दिया था कि सभी पक्षों को दोबारा सुनकर छह महीने के भीतर मामले का अंतिम निस्तारण करें। इस आदेश के अनुपालन में अदालत ने एसडीएम तिर्वा से रिपोर्ट मांगी। जिसमें खुलासा हुआ कि सीलिंग का मुकदमा लंबित रहने और क्रय-विक्रय पर रोक होने के बावजूद खातेदारों द्वारा जमीनों की लगातार खरीद-फरोख्त की गई। जमीन पर कोल्ड स्टोरेज बना लिया गया। सड़कें निकाल दी गई और बड़े हिस्से पर मकान बनाकर आबादी बसा दी गई।

पैरामाउंट-वार्नर ब्रदर्स डील को अमेरिकी न्याय विभाग से मंजूरी, जांच बंद

 यूएस जस्टिस डिपार्टमेंट ने पैरामाउंट स्काईडांस की तरफ से वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने के प्रपोजल की जांच की है। जांच में पाया गया है कि मीडिया कंपनियों के मर्जर से इंडस्ट्री में कंज्यूमर्स को नुकसान होने की संभावना नहीं है। एजेंसी ने शुक्रवार को कहा कि उसने इस डील की जांच बंद कर दी है। इसके एंटीट्रस्ट डिवीजन के रेगुलेटर्स ने निष्कर्ष निकाला कि मर्जर का असर 'मीडिया और एंटरटेनमेंट इकोसिस्टम में कंपटीशन बढ़ाने वाला होगा, जिससे अमेरिकी कंज्यूमर्स और वर्कर्स को फायदा होगा।' साल के शुरुआत में हुई थी डील पैरामाउंट स्काईडांस ने फरवरी के आखिर में वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी को खरीदने की डील की थी। पैरामाउंट को यह सफलता महीनों की बातचीत और नेटफ्लिक्स की एक बोली के बाद मिली। पैरामाउंट को पिछले साल स्काईडांस ने खरीदा था। कंज्यूमर्स को मिलेगा ज्यादा कंटेंट कंपनियों का तर्क है कि मर्जर इंडस्ट्री की ग्रोथ के लिए अच्छा होगा और कंज्यूमर्स को ज्यादा कंटेंट मिलेगा। मगर आलोचकों ने इस बात पर चिंता जताई है कि ऐसी इंडस्ट्री में और ज्यादा समेकन का क्या मतलब हो सकता है, जिस पर पहले से ही कुछ बड़ी कंपनियों का कब्जा है। मर्जर से बढ़ेगा कॉम्पिटिशन मर्जर से मार्केट पर संभावित असर के बारे में रेगुलेटर्स ने इस बात पर भी विचार किया कि क्या इस डील से वीडियो स्ट्रीमिंग में कॉम्पिटिशन को नुकसान होगा। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि मर्जर से कॉम्पिटिशन बढ़ने की संभावना है क्योंकि यह कस्टमर्स को बड़े वीडियो स्ट्रीमिंग विकल्पों के मुकाबले एक मजबूत विकल्प देगा। कंज्यूमर का ध्यान खींचते हैं यूट्यूब और टिक टॉक एजेंसी ने यह भी पाया कि यूट्यूब, टिकटॉक और अन्य सोशल मीडिया पोर्टल, जो वीडियो स्ट्रीमिंग कंटेंट भी देते हैं, वह अच्छी तरह से स्थापित एंटीट्रस्ट कानूनी मिसालों के तहत यहां कॉम्पिटिटिव विकल्प नहीं लगते हैं, हालांकि वे कंज्यूमर का ध्यान खींचने के लिए बड़े पैमाने पर कॉम्पिटिशन करते हैं। रेगुलेटर्स ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि मर्जर से तथाकथित लीनियर टेलीविजन के लिए कॉम्पिटिशन को नुकसान होने की संभावना नहीं है, क्योंकि लाइव प्रोग्रामिंग के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है। मर्जर के विरोध में हैं कई लोग हजारों एक्टर्स, डायरेक्टर्स, राइटर्स और इंडस्ट्री के अन्य प्रोफेशनल्स ने पैरामाउंट डील का विरोध किया है। उनका तर्क है कि और ज्यादा समेकन से नौकरियां जाएंगी और फिल्ममेकर्स और फिल्म देखने वालों के लिए विकल्प कम हो जाएंगे। कई सांसदों ने भी इसी तरह चिंता जताई है।  

बिरयानी विवाद के बाद प्रणित मोरे का यू-टर्न, कहा- मुझसे बड़ी गलती हुई, लोगों से मांगी क्षमा

नई दिल्ली  गुड़गांव के ‘₹370 बिरयानी विवाद’ को लेकर मचे भारी बवाल के बाद स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे ने माफी मांगी है. उन्होंने एक वीडियो शेयर कर अपनी गलती को स्वीकार किया लोगों का गुस्सा पूरी तरह जायज बताया. उन्होंने माना कि शो के दौरान उनके जजमेंट में बड़ी चूक हुई थी. सोशल मीडिया पर हो रही तीखी आलोचना और कानूनी कार्रवाई के बीच प्रणित मोरे ने ये कदम उठाया है।  ‘₹370 बिरयानी विवाद’ सोशल मीडिया पर काफी बढ़ा. सेलेब्स और लोगों की आलोचाओं के बाद महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया है. वहीं, राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी दोनों को समन जारी किया है।  प्रणित मोरे ने क्या कहा आज प्रणित मोरे ने वीडियो जारी कर कहा, ‘आप सबने मेरा क्राउड वर्क का वीडियो देखा होगा. इसके लिए मुझे बहुत हेट मिल रही है. मुझे लगता है कि मैं यह हेट डिजर्व भी करता हूं. जब मैं उस लड़के के साथ बात कर रहा था तो उसने काफी गलत बातें बोलीं. लेकिन उस वक्त सब लोग हंस रहे थे. मैं भी भावनाओं में बह गया और मेरे से मुझसे ‘लैप्स इन जजमेंट’ हो गया. यह मेरी बहुत बड़ी गलती थी। ‘मैं उसे रोक सकता था लेकिन…’ प्रणीत ने आगे माना कि एक कॉमेडियन के तौर पर उनके पास माइक और स्टेज की जिम्मेदारी होती है. प्रणीत ने आगे कहा, ‘मैं चाहता तो उसे वहीं पर टोक सकता था या स्टैंड ले सकता था. लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया. मैंने उसे एक प्लेटफॉर्म दिया, जिसकी वजह से बात इतनी बढ़ गई. जिन लोगों को भी इस वजह से ठेस पहुंची है, मैं उन सभी से माफी मांगता हूं. यह मेरी बहुत बड़ी गलती थी।  ‘पुलिस का सहयोग कर रहा हूं, एक मौका और दे’ प्रणित ने वीडियो में कहा, ‘मेरे खिलाफ जो भी कानूनी कार्रवाई हो रही है, मैं उसमें पुलिस और अधिकारियों का पूरा सहयोग कर रहा हूं. मैं बस यही गुजारिश करना चाहता हूं कि प्लीज मुझे एक मौका दें. मैं एक बेहतर इंसान बनकर दिखाऊंगा. यह मेरे लिए एक बड़ा सबक था. अब मैं खुद पर और अपने कंटेंट पर काम करूंगा।  विवाद क्या है ₹370 बिरयानी’ मामला यह पूरा विवाद प्रणित मोरे के एक लाइव शो के दौरान शुरू हुआ था. शो में दर्शकों के बीच बैठे हिमांशु जांगड़ा नाम के एक 22 साल युवक ने अपनी डेटिंग लाइफ का एक किस्सा सुनाया. युवक ने कहा कि उसने एक लड़की को ₹370 की चिकन बिरयानी खिलाई थी. जब लड़की ने डेट के बाद घर जाने को कहा तो युवक ने शो में माइक कुछ आपत्तिजनक शब्द कहे. ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा दोनों ट्रोल होने लगे. हिमांशु को तो अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा।  प्रणित ने हंसकर दिया था इनाम इस विवादित बयान पर वहां मौजूद दर्शक और खुद प्रणित मोरे जोर-जोर से हंसने लगे. प्रणित ने इसे ‘पीक गुड़गांव कंटेंट’ कहा और युवक को उसकी कहानी के लिए 5000 रुपये का इनाम भी दे दिया. इसके बाद प्रणित ने इस क्लिप को एडिट करके अपने लाखों सब्सक्राइबर्स के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. वीडियो वायरल होते ही लोग भड़क गए। लोगों ने इसे महिलाओं के साथ जबरदस्ती और असहमति को बढ़ावा देने वाला बताया।   

CBI ने कसी शिकंजा: IDFC बैंक घोटाले में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, हरियाणा-चंडीगढ़ कनेक्शन

चंडीगढ़  केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के फंड के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई की। सीबीआई ने सरकारी अधिकारियों और आईडीएफसी बैंक के कर्मचारियों सहित कुल 9 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालतों में दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की हैं। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। सीबीआई अधिकारी ने बताया कि हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में अवैध बैंक लेन-देन के कारण लगभग 504 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जबकि चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े मामले में करीब 153 करोड़ रुपए की हानि हुई। सीबीआई ने यह भी कहा कि इन मामलों में आगे और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं। चार्जशीट में क्या? सीबीआई के बयान में कहा गया है कि चार्जशीट में आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप शामिल हैं। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई ने बताया कि हरियाणा सरकार से जुड़े मामले की चार्जशीट पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में दाखिल की गई है। इस मामले में दो निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है, जिन्हें कथित अपराध से प्राप्त धन का लाभार्थी बताया गया है। सीबीआई की यह दूसरी चार्जशीट यह हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में दूसरी चार्जशीट है। इससे पहले सीबीआई 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें तीन सरकारी कर्मचारी, छह बैंक अधिकारी, दो कंपनियां और चार निजी व्यक्ति शामिल हैं। सीबीआई ने बताया कि चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) से जुड़े मामले की चार्जशीट चंडीगढ़ स्थित सीबीआई विशेष अदालत में दाखिल की गई है। इस मामले में कुल सात आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें पांच बैंक अधिकारी, सीएससीएल का एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति शामिल है। यह इस मामले में पहली चार्जशीट है। सीबीआई ने की थी छह स्थानों पर छापेमारी सीबीआई ने हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से आठ विभागों से जुड़े एक मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इसके अलावा, चंडीगढ़ के आर्थिक अपराध पुलिस स्टेशन से चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़े दो मामलों की जांच भी सीबीआई को सौंपी गई थी। पिछले सप्ताह सीबीआई ने इन दोनों मामलों के सिलसिले में चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में छह स्थानों पर छापेमारी की थी। किनके ठिकानों पर तलाशी? जिन परिसरों की तलाशी ली गई, उनमें हरियाणा कैडर के कुछ सरकारी अधिकारियों के आवास और विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक के ठिकाने शामिल थे। सीबीआई के अनुसार, यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और अपराध से अर्जित धन की प्राप्ति से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए की गई थी। जांच में क्या आया सामने? सीबीआई ने बताया कि जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर खातों को खुलवाने, धनराशि ट्रांसफर करने और बाद में उसे दूसरी जगह भेजने में मदद की थी। एजेंसी के अनुसार, सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की कथित मिलीभगत के जरिए धन का दुरुपयोग किया गया, जिसकी जांच अभी भी जारी है। 

अटल विहार बना आदर्श आवासीय परिसर, पक्की सड़कें और आधुनिक सुविधाओं से बदली तस्वीर

रायपुर : अटल विहार बना आदर्श आवासीय परिसर : पक्की सड़कें, आधुनिक आधारभूत सुविधाएं और हर आय वर्ग के लिए आवास अटल विहार योजना से 184 परिवारों को मिला आशियाना 75.39 करोड़ की लागत से विकसित किया गया है सुनियोजित आवासीय परिसर रायपुर, घर केवल ईंट और सीमेंट से बना ढांचा नहीं होता, बल्कि वह परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की नींव होता है। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी अटल विहार योजना ने कोरबा जिले के सैकड़ों परिवारों के लिए इस सपने को साकार कर दिखाया है। अपने घर का सपना संजोए अनेक परिवार आज कोरबा नगरीय क्षेत्र के झगरहा में विकसित अटल विहार कॉलोनी में आत्मविश्वास और संतोष के साथ जीवन बिता रहे हैं। यह आवासीय परिसर आज इस बात का प्रमाण है कि सुनियोजित आवास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार भी बनता है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा 75 करोड़ 39 लाख रुपए की लागत से 19 एकड़ में यह आवासीय परियोजना विकसित की गई है। विभिन्न आय वर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यहां कुल 335 स्वतंत्र आवासों एवं फ्लैट भवनों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया। जिसमें 50 एच.आई.जी., 18 सीनियर एम.आई.जी., 32 जूनियर एम.आई.जी., 75 एल.आई.जी. तथा 160 ई.डब्ल्यू.एस. आवासों सहित प्रकोष्ठ भवन का निर्माण शामिल है। परियोजना के अंतर्गत अब तक 305 भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है और उनका चरणबद्ध हस्तांतरण किया जा रहा है। वर्तमान में 22 एच.आई.जी. तथा 5 सीनियर एम.आई.जी. भवनों का हस्तांतरण भी जारी है। यह उपलब्धि केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। अटल विहार कॉलोनी में अब तक 184 आवास हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं, जहां परिवार पिछले तीन वर्षों से शांत, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण में निवास कर रहे हैं। पक्की सड़कें, बेहतर आधारभूत सुविधाएं, नियोजित आवासीय परिसर और सामुदायिक वातावरण ने यहां के निवासियों को एक नई जीवन शैली प्रदान की है। जिन परिवारों के लिए स्थायी आवास कभी एक चुनौती था, उनके लिए अटल विहार आज आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन का पर्याय बन चुका है। वर्तमान में कॉलोनी में एक व्यवसायिक भू-खण्ड, 4 एच.आई.जी. भवन तथा 103 ई.डब्ल्यू.एस. फ्लैट भवन क्रय के लिए उपलब्ध हैं, जिससे और अधिक परिवार अपने घर के सपने को वास्तविकता में बदल सकते हैं। झगरहा स्थित अटल विहार कॉलोनी न केवल आवास निर्माण की एक महत्वपूर्ण परियोजना है, बल्कि यह राज्य सरकार की जनकल्याणकारी सोच और छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल की प्रतिबद्धता का सजीव उदाहरण भी है। यहां बसते परिवार इस बात के साक्षी हैं कि गुणवत्तापूर्ण आवास किस प्रकार जीवन की दिशा और दशा दोनों को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

अब्दू रोजिक का खुलासा: बिग बॉस से एक भी पैसा नहीं मिला, टीम पर लगाया धोखे का आरोप

सलमान खान के शो बिग बॉस में जो भी आया है, उसे फायदा जरूर मिला है. पैसा हो या काम, बिग बॉस शो ने हर किसी की किस्मत पलटी है. ताजिकिस्तान वाले अब्दू रोजिक भी साल 2022-23 में सलमान के शो पर आए थे. यहां उन्हें लोगों का बेशुमार प्यार मिला. लेकिन अब्दू ने बिग बॉस से एक भी रुपये की कमाई नहीं की थी. अब्दू को मिला धोखा हाल ही में अब्दू रोजिक ने हाउस ऑफ जेन पॉडकास्ट में बताया कि उनकी टीम ने उनका गलत फायदा उठाया. जो लोग उनके काम को मैनेज किया करते थे, उन्होंने अब्दू को ठगा और उनके सारे पैसे हड़प लिए. अब्दू ने कहा- इस दुनिया में लोगों को आपकी परवाह नहीं होती. मैंने उनके साथ तीन-चार साल काम किया. उन्होंने मुझे आगे बढ़ने में मदद की, लेकिन मैंने जो शो किए, उनसे मिलने वाला पैसा उन्होंने ले लिया. सोचिए, बिग बॉस के लिए मुझे एक डॉलर भी नहीं मिला. उन्होंने मुझे बुरी तरह धोखा दिया. उन्होंने मेरा सब कुछ ले लिया. अब्दू का ये भी कहना है कि कई लोग सोशल मीडिया पर उनकी लाइफस्टाइल देखकर ये सोचते हैं कि वो काफी अमीर हैं. मगर हकीकत एकदम उलटी है. बिग बॉस फेम ने कहा- जब लोग मुझे देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि मैं करोड़पति हूं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि मैं कितना बोझ ढो रहा हूं. कैमरे के सामने आप खुश, मुस्कुराते हुए, तस्वीरें खिंचवाते हैं, लेकिन घर जाते ही सारी परेशानियों का तनाव महसूस करते हैं. 'लोग सोचते हैं कि मैं बहुत अमीर हूं, लेकिन उन्हें नहीं पता कि मेरे पास न तो कार है और न ही घर. अच्छे लोगों के साथ काम करना बहुत जरूरी है. मेरी बस यही गुजारिश है कि लोग ईमानदार रहें और साफ-सुथरा काम करें. मुझे धोखा न दें. शायद मेरी लंबाई की वजह सें लोग मुझे कम आंकते हैं और सोचते हैं कि वो मुझे बेवकूफ बना सकते हैं. लेकिन असल में, मैं उनकी हर चाल समझ जाता हूं. हमें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए कि हम किस पर भरोसा करते हैं और किसके साथ व्यापार करते हैं.' हाईट बनी अड़चन अब्दू ने आगे ये भी बताया कि कैसे उनकी शारीरिक बनावट के कारण लोग अक्सर उन्हें कम आंकते हैं और धोखा देते हैं. उन्हें ग्रोथ हार्मोन डेफिशियेंसी नाम की बीमारी है, जिसमें उनका कद उम्र के हिसाब से छोटा है. उन्होंने कहा, 'जब भी मैं काम के लिए बाहर जाता हूं, लोग मुझसे सीधे बात नहीं करते. वो मान लेते हैं कि मुझे बातें समझ नहीं आतीं और वो अपनी टीम से बात करना पसंद करते हैं. मैं देखता हूं कि वो दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं और मेरे साथ कैसा व्यवहार करते हैं, इसमें कितना अंतर है.'

मध्य प्रदेश में तबादलों को लेकर नया निर्देश, अब 3 साल का कार्यकाल नहीं बल्कि कामकाज तय करेगा पोस्टिंग

भोपाल  अब तबादलों में परफार्मेंस को आधार बनाया जाएगा। जिनका परफार्मेंस अच्छा होगा, वे तीन साल की अवधि पूरी करने बाद भी एक ही स्थान पर रह सकेंगे। ऐसे शासकीय सेवकों को विभागाध्यक्ष अपनी ओर से मौका देंगे, लेकिन जिनका कामकाज अच्छा नहीं होगा, उन्हें हटाने के लिए तीन साल के कार्यकाल पूरा होने का इंतजार नहीं किया जाएगा। 6 महीने में ही हटाया जा सकेगा। ये निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार सामान्य प्रशासन के एसीएस शिवशेखर शुक्ला और प्रमुख सचिव (कार्मिक) एम सेलवेन्द्रन को दिए। अब तक तीन साल में होती थी कार्यवाही आमतौर पर शासकीय सेवकों को एक स्थान पर तीन साल या अधिक की सेवा अवधि पूरी करने के बाद हटाया जाता है। सीएम ने सुशासन भवन में अपने प्रभार के विभागों की समीक्षा की। बारी-बारी से अफसरों को बुलाकर कामकाज पूछा आगामी निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर भी सीएम ने चर्चा की। अगले साल काम के आधार पर होगा ट्रांसफर मुख्यमंत्री (MP Transfer Policy) ने शासकीय सेवकों के तबादलों के लिए परफार्मेंस वाले जिन आधारों को तैयार करने की बात कही है, वे अगले साल की तबादला नीति में शामिल किए जाएंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में तबादलों का अंतिम चरण जारी है। इसमें किसी भी आधार को शामिल करना मुश्किल काम हो सकता है इसलिए आने वाले वर्ष की तबादला नीति को परफार्मेंस बेस्ड तबादला नीति के रूप में तैयार करेंगे। इधर तीन दिन और लेकिन नहीं हो रहे ट्रांसफर सरकार ने 13 दिन पहले तबादलों से बैन हटाया। अब तीन दिन बाद फिर से बैन लगने वाला है। लेकिन इन 13 दिनों में 90 फीसदी विभागों ने एक भी तबादले नहीं किए। यानी जो अफसर-कर्मचारी जहां पर डटे हुए हैं वे वहीं पर रहना चाहते हैं। वहीं सबसे बड़ी अनदेखी यह कि सरकार द्वारा तबादला नीति सार्वजनिक किए जाने के बावजूद एक भी विभागों ने खाली पदों को पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। जबकि अंदर खाने गुपचुप सूचियां बनाई जा रही हैं। सीएम ने पारदर्शिता की बात कही लेकिन अफसरों ने इस पर तवज्जो नहीं दी। अब प्रदेशभर के शासकीय सेवक सरकार और भाजपा को कोस रहे हैं। स्कूल शिक्षा में पोर्टल ही नहीं, प्रोग्रामर पर गाज मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव, दोनों ने कहा कि जो भी तबादले होंगे, उसके लिए ऑनलाइन आवेदन मंगवाए जाएं। स्कूल शिक्षा विभाग में हाल यह है कि शिक्षकों के लॉग-इन आइडी के जरिए पोर्टल खोलने के निर्देश हैं, लेकिन वह खुल ही नहीं रहा। आवेदन के लिए प्लेटफार्म ही नहीं है। मंत्री के दफ्तर में भीड़ लग रही है। हालांकि विभाग ने एक प्रोग्रामर को हटा दिया है। स्वास्थ्य विभाग में आवेदन ले रहे, तबादला नहीं कर्मचारियों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग ने सबसे पहले आवेदनों के लिए पोर्टल बनाया। हजारों की संख्या में आवेदन भी आ चुके हैं, लेकिन तबादले नहीं किए जा रहे हैं। यही हाल जनजाति कार्य विभाग का है। यहां भी आवेदनों की भरमार है लेकिन निपटारा नहीं। मंत्रियों से बिना पूछे तबादला, सीएम को शिकायत कास एवं आवास विभाग में तबादलों को लेकर शिकायतें भी होने लगी हैं। सूत्रों के मुताबिक मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, इंदर सिंह परमार और प्रद्मु्न सिंह तोमर के क्षेत्र के कुछ सीएमओ को नगरीय प्रशासन विभाग के एक अधिकारी ने अपने स्तर पर ही हटा दिया। तीनों मंत्रियों ने इस बात की शिकायत सीएम को कर दी। इसके बाद मामला विभागीय मंत्री को देखने के लिए कहा गया। उधर एक जिले के पुलिस अधीक्षक पर प्रभारी मंत्री से बगैर पूछे तबादला करने का मामला भी सीएम तक पहुंचा है। संबंधित मंत्री का कहना है कि पुलिस अधीक्षक ने 17 पुलिस अधिकारियों के तबादले किए लेकिन, एक भी सहमति नहीं ली। इसके बाद एसपी को जमकर फटकारा गया।