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गुणवत्तापूर्ण निर्माण और सुगम यातायात सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : राज्यमंत्री गौर

राज्यमंत्री  गौर ने किया निर्माणाधीन 10 लेन सड़क का जायजा गुणवत्तापूर्ण निर्माण और सुगम यातायात सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : राज्यमंत्री गौर राज्यमंत्री  गौर बोली एक वर्ष में पूर्ण करें 10 लेन सड़क का निर्माण कार्य, आमजन को यातायात में नहीं हो असुविधा भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने शनिवार को निर्माणाधीन 10 लेन सड़क के कार्य का औचक निरीक्षण कर जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ तय समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अभूतपूर्व विकास कार्य हो रहे हैं। यह 10 लेन सड़क परियोजना भी इसी तीव्र विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि 10 लेन सड़क का यह निर्माण कार्य हर हाल में अगस्त 2027 तक पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने निर्माण कार्य में सामने आ रही व्यवस्थागत समस्याओं एवं अव्यवस्थाओं को गंभीरता से लिया और इनके शीघ्र निराकरण के लिये संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने निर्माण एजेंसी और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण कार्य के दौरान आम नागरिकों को यातायात, आवागमन एवं अपनी दैनिक गतिविधियों में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए वैकल्पिक मार्गों और सुव्यवस्थित ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि जनसुविधा, सुगम यातायात एवं गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  

पहले गेम में कड़ी टक्कर के बावजूद सिंधु नहीं बचा सकीं बढ़त, फाइनल से बाहर

सिडनी  भारत की बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु शनिवार यानि 13 जून को ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में जापान की शीर्ष वरीय अकाने यामागुची के खिलाफ हार गईं। जिससे इस भारतीय खिलाड़ी का बीडब्ल्यूएफ खिताब का इंतजार बरकरार रहा। साथ ही इस साल के पहले खिताब से भी हाथ धोना पड़ा। सिंधू को यहां तीसरी वरीयता मिली थी। उन्होंने पहले गेम में कड़ी टक्कर दी लेकिन 43 मिनट तक चले मुकाबले में यामागुची से 20-22, 12-21 से हार गईं। पीवी सिंधु ने पहले गेम में किया डंटकर मुकाबला सिंधु के बाहर होने के साथ ही इस बीडब्ल्यूए ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर 500 टूर्नामेंट में भारत का अभियान भी समाप्त हो गया है। सिंधु ने पहले गेम में यामागुची के हर प्रहार का बखूबी जवाब दिया। दोनों खिलाड़ियों ने लगातार छह-छह अंक हासिल किए, लेकिन भारतीय खिलाड़ी अपने गेम प्वाइंट को अंक में बदलने में नाकाम रही। यामागुची ने संयम का परिचय देते हुए पहला गेम जीत लिया। दूसरे गेम में फिसली बाजी पहले गेम में कांटे की टक्कर होने के बाद दूसरे गेम में खेल का रुख पूरी तरह बदल गया। यामागुची ने लगातार आठ अंक बनाकर 13-6 की बढ़त बना ली और पूरे गेम में अपना दबदबा बनाए रखते हुए आसानी से मैच जीत लिया। अब जापानी खिलाड़ी महिला एकल के खिताबी मुकाबले में थाईलैंड की पोर्नपावी चोचुवोंग से भिड़ेंगी। सिंधु का इस हार के साथ यामागुची के खिलाफ हालिया संघर्ष जारी रहा। हालांकि जीत के रिकॉर्ड में भारतीय खिलाड़ी अब भी 15-13 से आगे हैं, लेकिन पिछले छह मुकाबलों में से पांच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है। खिताब का इंतजार हुआ लंबा दिसंबर 2024 में सैयद मोदी इंटरनेशनल में जीत के बाद से सिंधु बीडब्ल्यूएफ टूर का खिताब नहीं जीत पाई हैं। इस सत्र में सिंधू का यह दूसरा सेमीफाइनल था। इससे पहले वह मलेशिया ओपन के सेमीफाइनल तक पहुंची थीं जिसमें उन्हें चीन की वांग झियी से हार का सामना करना पड़ा था। वह इस सत्र में तीन बार क्वार्टर फाइनल में भी पहुंची हैं। पीवी सिंधु ने चीन की चेन सु यू को क्वार्टर फाइनल में 21-6, 21-9 से एकतरफा मैच में मात दी थी। जिसके उनकी खिताब जीतने की उम्मीद मजबूत हो गई थी।  

12 वर्षों में बदला भारत का स्वरूप: आस्था और आर्थिकी के संगम से विकसित राष्ट्र बन रहा देश, बोले सीएम योगी

12 वर्षों में बदला भारत का स्वरूप, आस्था व आर्थिकी के संगम से विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ रहा भारत: सीएम योगी मीडिया संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां, कहा- गरीब, महिला, युवा व किसान को केंद्र में रखकर हुआ अभूतपूर्व विकास कोविड प्रबंधन से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण, किसान एवं युवा कल्याण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आत्मनिर्भर भारत तक की यात्रा को सीएम योगी ने बताया ऐतिहासिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोहराया उत्तर प्रदेश को 2030 तक वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में संचालित जन कल्याणकारी कार्यक्रमों का सर्वाधिक लाभ उत्तर प्रदेश को मिला: मुख्यमंत्री लखनऊ,   सेवा, सुशासन और समर्पण को समर्पित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 140 करोड़ भारतीयों की निरंतर सेवा के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन में मीडिया संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश और उत्तर प्रदेश में हुए व्यापक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी शक्ति, सामर्थ्य और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री ने लोकभवन में आयोजित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 जून को एनडीए द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पूरे देश और दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे कार्यकाल और उनकी सफल नेतृत्व यात्रा का उत्सव देखा। दुनिया के प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों ने प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और भारत की विकास यात्रा की सराहना करते हुए शुभकामनाएं दीं। पिछले 12 वर्षों में भारत ने अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है और आज देश का प्रत्येक नागरिक नए भारत का हिस्सा होने पर गर्व महसूस कर रहा है। योजनाओं को मिला जन आंदोलन का रूप सीएम ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक योजनाएं बनती रहीं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पहली बार योजनाओं को जन आंदोलन का स्वरूप मिला। जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों बैंक खाते खोले गए, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ शौचालय बने, 4 करोड़ गरीब परिवारों को पक्के मकान मिले और आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच प्राप्त हुआ। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया और मुद्रा योजना जैसी पहलों ने देश को नई दिशा दी। 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकास की धुरी के रूप में गरीब, महिला, युवा व किसान को केंद्र में रखा। भारत ने पिछले 12 वर्षों में आस्था व आर्थिक विकास का अद्भुत संगम देखा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने में सफलता मिली, जो विश्व इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि है। उत्तर प्रदेश को प्रधानमंत्री की योजनाओं का सर्वाधिक लाभ मिला है। राज्य में 65 लाख गरीबों को आवास, 3 करोड़ परिवारों को शौचालय, लगभग 2 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन तथा 15 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिला। कोविड काल में 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया गया। गरीब अब केवल वोट बैंक नहीं रहा, बल्कि विकास प्रक्रिया का केंद्र बन चुका है। महिलाओं को मिली नई पहचान महिला सशक्तीकरण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, मातृ वंदन योजना, नारी शक्ति वंदन अधिनियम और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं ने महिलाओं को नई पहचान दी है। उत्तर प्रदेश में भी बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग, पुस्तकें और स्वेटर उपलब्ध कराए गए। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना तथा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से बेटियों के जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने का कार्य किया गया। मिशन शक्ति अभियान और पुलिस बल में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण ने महिलाओं को सुरक्षा व अवसर प्रदान किए हैं। युवाओं को नई ऊर्जा व अवसर दिए युवाओं के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया। परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम, मुद्रा योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना, आत्मनिर्भर भारत अभियान, फिट इंडिया और खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों ने युवाओं को नई ऊर्जा और अवसर दिए हैं। पहली बार युवाओं को यह विश्वास मिला कि वे नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बन सकते हैं। योजनाओं से मजबूत बने किसान किसानों को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, फसल बीमा योजना और सॉइल हेल्थ कार्ड जैसी योजनाओं ने किसानों को मजबूत किया है। उत्तर प्रदेश में 3 करोड़ से अधिक किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है और 24 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया के सामने सफल कोविड प्रबंधन का मॉडल प्रस्तुत किया। मुफ्त टेस्टिंग, मुफ्त वैक्सीन, मुफ्त राशन और मुफ्त उपचार जैसी व्यवस्थाओं ने करोड़ों लोगों को राहत दी। इसी दौरान ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से पूरे देश को राष्ट्रभक्ति के सूत्र में बांधा गया। पंच प्रण के माध्यम से विकसित भारत का आह्वान मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के सामने ‘पंच प्रण’ का आह्वान किया, जो विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की आधारशिला हैं। इन पंच प्रणों में गुलामी की मानसिकता के अवशेषों को समाप्त करना, भारत की समृद्ध विरासत पर गर्व करना, राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना, प्रत्येक नागरिक द्वारा अपने कर्तव्यों का पालन करना तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार करना शामिल है। प्रधानमंत्री ने देश को केवल अमृत महोत्सव के उत्सव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप भी प्रस्तुत किया। आस्था व सांस्कृतिक विरासत का सम्मान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की आस्था व सांस्कृतिक विरासत को वह सम्मान प्राप्त हुआ, जिसकी लंबे समय से अपेक्षा थी। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या … Read more

योगी सरकार का बड़ा फैसला: आउटसोर्स सेवा निगम का पोर्टल अगस्त तक तैयार, नई भर्ती भी शुरू

लखनऊ  प्रदेश के सरकारी विभागों में कार्यरत लगभग चार लाख आउटसोर्स कार्मिकों को बढ़ा मानदेय और अन्य सुविधाओं का लाभ सरकार सितंबर से दे सकती है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकास) की सेवाओं को धरातल पर उतारने के लिए पोर्टल अगस्त तक तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। पोर्टल तैयार होने के बाद पहले से कार्यरत आउटसोर्स कार्मिकों को प्रस्तावित बढ़ा मानदेय व अन्य सुविधाओं का लाभ देने की प्रक्रिया शुरू होगी। नई भर्तियां भी शुरू की जाएंगी। पोर्टल विकसित करने का काम उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम कारपोरेशन (यूपी डेस्को) के माध्यम से एक निजी संस्था को दिया गया गई है। इस पोर्टल में आउटसोर्स कार्मिकों से संबंधित जानकारियों के साथ ही नई भर्तियों के लिए आवेदन, मानदेय की दर, कार्मिकों को दिए जाने वाले अन्य लाभ का पूरा विवरण होगा। सभी गतिविधियां पोर्टल से होंगी संचालित कुल मिलाकर निगम की समस्त गतिविधियां इसी पोर्टल के माध्यम से संचालित होंगी। सूत्रों के मुताबिक निगम का पोर्टल तैयार हो जाने पर बढ़ा मानदेय देने के साथ ही अन्य सभी लाभ कार्मिकों को दिया जाएगा। नई भर्तियां भी शुरू की जाएंगी। प्रदेश में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के गठना का शासनादेश 20 सितंबर 2025 को जारी किया गया था। निगम के लिए एमडी और अन्य पदाधिकारियों की तैनाती की जा चुकी है। निगम के माध्यम से प्रदेश सरकार आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और पारिश्रमिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और एकरूप बनाने का काम करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिए थे निर्देश हाल ही में समीक्षा बैठक कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आउटसोर्स व्यवस्था को तकनीक आधारित, जवाबदेह और कर्मचारी हितैषी बनाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति, सत्यापन, निगरानी तथा अन्य प्रक्रियाओं का केंद्रीकृत संचालन किया जाए, जिससे व्यवस्था अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बन सके। निगम का गठन होने से कार्मिकों को न्यूनतम 20 हजार व अधिकतम 40 हजार रुपये तक मासिक मानदेय मिलेगा। इसके साथ ही कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) आदि का भी लाभ कार्मिकों को मिलेगा। सरकार ने आउटसोर्सिंग भर्तियों के लिए चार श्रेणियां बनाई हैं। श्रेणी एक के लिए 40 हजार, दो के लिए 25 हजार, श्रेणी तीन के लिए 22 और चार के लिए 20 हजार पारिश्रमिक तय किया गया है।

हथेली पर सर्प रेखा का रहस्य, हस्तरेखा शास्त्र में शुभ-अशुभ संकेतों की व्याख्या

हिंदू धर्म में सांप को सिर्फ एक जीव नहीं, बल्कि पूजनीय भी माना गया है. तभी तो नाग पंचमी और महाशिवरात्रि जैसे शुभ अवसरों पर सांपों की पूजा भी होती है. ऐसा भी मान्यता है कि स्वर्ग में धन के देवता कुबेर के खजाने की रखवाली स्वयं नाग देवता करत हैं. भगवान विष्णु भी क्षीरसागर में शेषनाग पर लेटे हुए हैं. इसी तरह हस्तरेखा शास्त्र में भी सांपों को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें कहीं गई हैं. हस्तरेखा विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी व्यक्ति की हथेली पर रेखाओं से सर्प जैसी आकृति बने तो यह सामान्य नहीं होता है. इसके पीछे कोई न कोई रहस्य छिपा होता है. हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हथेली पर सांप की आकृति का चिह्न शुभ और अशुभ दोनों तरह के प्रभाव को उजागर करता है. इसके परिणाम अच्छे होंगे या बुरे, यह सृप रेखा के स्थान से तय होता है.  इसके लिए यह देखना जरूरी है कि उंगली के नीचे कौन से पर्वत के पास वो सृप रेखा बन रही है. धन-वैभव का लाभ अंगूठे के नीचे स्थान को शुक्र पर्वत कहा जाता है. यह जीवन में प्रेम, आकर्षण, वैवाहिक जीवन और भौतिक सुख-सुविधाओं को दर्शाता है. हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, अगर शुक्र पर्वत के पास कोई रेखा ऐसी सृप आकृति बनाए तो यह जीवन में सुख-सुविधाओं और धन-वैभव की ओर इशारा करती है. हालांकि ऐसे लोगों के वैवाहिक जीवन में अक्सर परेशानियां देखी जाती हैं. पढ़ाई-लिखाई में तेज तर्जनी उंगली के नीचे गुरु पर्वत होता है, जिसे ज्ञान-शिक्षा और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना जाता है. कहते हैं कि अगर हथेली के इस स्थान पर किसी रेखा से सृप की आकृति बने तो व्यक्ति बुद्धिमान, विद्वान और बहुत गुणी बनता है. ऐसे लोग पढ़ाई-लिखाई में बहुत अच्छे होते हैं और अपने बुद्धि-कौशल के दम पर जीवन में बड़ी उपलब्धियों को हासिल करते हैं. सांप की दो आकृतियां अशुभ मध्यमा उंगली (मिडिल फिंगर) के नीचे स्थित शनि पर्वत भाग्य और कर्म से जुड़ा माना जाता है. इस स्थान पर सर्प का चिह्न बनने पर व्यक्ति को बड़ी धन-संपत्ति और भौतिक समृद्धि प्राप्त हो सकती है. हालांकि यदि सर्प की आकृति दोहरी हो तो इसके परिणाम विपरीत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में व्यक्ति अपने संचित धन को गलत आदतों के कारण खो सकता है. सूर्य ग्रहण जैसी स्थिति अनामिका उंगली के नीचे स्थित सूर्य पर्वत पर सर्प की आकृति को शुभ चिह्न नहीं माना जाता है. हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हथेली पर सृप की आकृति का ऐसा निशान व्यक्ति की उन्नति और सफलता में बाधा पैदा करता है. अनामिका उंगली के नीचे सांप की आकृति वाले ऐसे निशान को सूर्य ग्रहण पर ग्रहण लगने जैसा समझा जाता है. बुद्धि-कौशल, व्यापार में लाभ कनिष्ठा उंगली के नीचे स्थित बुध पर्वत व्यापार, बुद्धिमत्ता और संचार कौशल का प्रतिनिधित्व करता है. यदि इस स्थान पर सर्प का चिह्न हो तो व्यक्ति मानसिक रूप से मजबूत, दृढ़ संकल्पित माना जाता है. ऐसे लोग अपने निर्णयों पर अडिग रहते हैं. इन्हें जीवन में आगे चलकर क्या करना है. इसे लेकर ये बहुत क्लीयर रहते हैं. व्यापार या व्यवसाय के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल करने की क्षमता रखते हैं.

पिंक सहेली योजना अपडेट: 15 जून से केंद्र हर सोमवार बंद, महिलाओं को मिल चुका 10 लाख कार्ड

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली परिवहन निगम ( डीटीसी ) ने एनसीएमसी 'पिंक सहेली' स्मार्ट कार्ड वितरण केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को हर सोमवार को साप्ताहिक अवकाश देने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 15 जून से लागू होगी। विभाग के इस पहल की वजह से अब सोमवार को पिंक सहेली स्मार्ट केंद्र बंद रहेंगे। डीटीसी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, दिल्ली सरकार की पिंक सहेली योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा सुविधा देने के लिए NCMC स्मार्ट कार्ड वितरण अभियान 3 मार्च 2026 से शुरू किया गया था। शुरुआत में करीब 50 केंद्रों से शुरू हुई यह व्यवस्था बढ़कर 70 से अधिक केंद्रों तक पहुंच गई। अब तक 10 लाख से अधिक पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड जारी किए जा चुके हैं। पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड में क्या होगा पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड में सफर करने वाली महिला का पूरा डाटा उपलब्ध होगा, जो आधार से लिंक होगा। इस पर एक QR Code होगा, जिसे स्कैन कर वह डीटीसी बसों में मुफ्त में सफर कर पाएंगी। महिलाएं जितनी बार सफर करेंगी, उतनी ट्रिप इसमें एड होती जाएंगी। हालांकि, दिल्ली की महिलाओं के लिए यह अनलिमिटेड है। कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली का आधार कार्ड होना अनिवार्य कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य है। इसके लिए आपको दिल्ली के पते का प्रमाण पत्र (जैसे- दिल्ली का वोटर आईडी, आधार कार्ड) दिखाना होगा। कैसे काम करेगा पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड आपको सबसे पहले पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड बनवाना होगा। जिस ढंग से हम मेट्रो में कार्ड को स्कैन करते हैं, वैसे ही कंडक्टर को यह कार्ड दिखाना होगा। कंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन (ETM) पर टैप करेंगे और आपकी एंट्री हो जाएगी। आप आराम से सफर कर सकती हैं। कैसे बनेगा पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली में जगह-जगह काउंटर लगाए जाएंगे। द‍िल्‍ली में कुल 50 सेंटर्स पर काउंटर शुरू क‍िए गए हैं, जो सातों द‍िन काम करेंगे। यहां सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच जाकर आप अपना स्‍मार्ट कार्ड बनवा सकती हैं। पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड के लिए किन दस्तावेजों की होगी जरूरत     आधार कार्ड     दिल्ली का निवास प्रमाण पत्र     फोटो

मुख्यमंत्री की सराहना से बढ़ी विष्णु भोग चावल की मांग, रायपुर से पहुंचे ग्राहक ने खरीदा 50 किलो चावल

रायपुर : सीएम की तारीफ का बड़ा असर – सोशल मीडिया पर वीडियो देख रायपुर से जीपीएम पहुंचे ग्राहक, खरीदा 50 किलो विष्णु भोग चावल सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सराहा था स्थानीय उत्पाद, बाजार में बढ़ी सुगंधित पारंपरिक चावल की मांग रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के पारंपरिक विष्णु भोग चावल की तारीफ किए जाने के बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। हालत यह है कि अब जिले के बाहर से भी लोग इस विशेष सुगंधित चावल को खरीदने के लिए उत्पादकों तक सीधे पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो बना जरिया          गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत निमधा में आयोजित जनचौपाल के दौरान स्थानीय किसानों और महिला समूहों द्वारा उपजाए गए विष्णु भोग चावल की विशेष सराहना की थी। मुख्यमंत्री के इस संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। इसी वीडियो को देखकर रायपुर निवासी अजय कुमार इस पारंपरिक चावल की विशेषताओं और गुणवत्ता से इतने प्रभावित हुए कि वे अपने साथियों के साथ सीधे गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले पहुंच गए। कलेक्टर की मौजूदगी में 7 हजार की सीधी खरीदी         जिले में पहुंचे इन ग्राहकों ने कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन की विशेष उपस्थिति में तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से सीधे 50 किलोग्राम विष्णु भोग चावल की खरीदी की। इस खरीदी की कुल कीमत 7 हजार रुपये रही। रायपुर से आए ग्राहकों ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा उत्पाद की तारीफ किए जाने के बाद ही उनकी रुचि इस चावल के प्रति जगी थी और वे खुद इसकी सुगंध और स्वाद का अनुभव करना चाहते थे। उन्होंने भविष्य में भी इस चावल की खरीदी जारी रखने की बात कही। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही है मजबूती         इस मौके पर तिपान महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की राज्य सरकार की नीति रंग ला रही है। इससे किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और उत्पादक संगठनों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है और उनके लिए बाजार के नए रास्ते खुल रहे हैं। कृषि समृद्धि का नया प्रतीक बना विष्णु भोग        अपनी विशिष्ट सुगंध, बेहतरीन स्वाद और उच्च गुणवत्ता के लिए पहचाना जाने वाला विष्णु भोग चावल अब सिर्फ एक स्थानीय फसल नहीं, बल्कि जिले की कृषि समृद्धि और महिला उद्यमिता का एक सफल ब्रांड बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री की इस अनूठी पहल से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीदें काफी मजबूत हो गई हैं।

शौर्य चक्र से सम्मानित वीर जवानों से मिले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, किया सम्मान और उत्साहवर्धन

रायपुर : शौर्य चक्र से सम्मानित वीर जवानों से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा की मिसाल बने जवानों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं रायपुर,   माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों “शौर्य चक्र” से सम्मानित वीर पुलिस एवं सुरक्षा बल के जवानों से उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज अपने नवा रायपुर अटल नगर स्थित निवास कार्यालय में आत्मीय मुलाकात कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर डीजीपी अरुण देव गौतम सहित जवानों के परिजन एवं परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहे। जवानों की बहादुरी आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत – शर्मा      उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ और देश को ऐसे वीर सपूतों पर गर्व है, जिन्होंने अपने अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति का परिचय देते हुए असाधारण परिस्थितियों में भी वीरता का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इन जवानों की बहादुरी आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत है। योगदान में परिवारों का त्याग, समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण        मुलाकात के दौरान शर्मा ने शौर्य चक्र से सम्मानित इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट, इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख तथा राइफलमैन भोज राम साहू के साहसिक कार्यों की सराहना की और उनके परिजनों से भी मुलाकात की और सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश सेवा के इस गौरवपूर्ण योगदान में परिवारों का त्याग और समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने जवानों के अदम्य साहस भरी घटनाओं के बारे में भी उनसे जानकारी ली। कठिन परिस्थितियों में किया नक्सलियों का मुकाबला       ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट एवं इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख को 16 अप्रैल 2024 को कांकेर क्षेत्र में नक्सलियों के विरुद्ध संचालित एक बड़े अभियान में अद्वितीय नेतृत्व, साहस और रणनीतिक कौशल का परिचय देने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने कठिन परिस्थितियों में नक्सलियों का मुकाबला करते हुए महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की थी। गंभीर रूप से घायल होकर भी अदम्य साहस के साथ संभाला मोर्चा        इसी प्रकार 3 असम राइफल्स के राइफलमैन भोज राम साहू को भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में घुसपैठ विरोधी अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अदम्य साहस के साथ मोर्चा संभालते हुए दुश्मनों को पीछे हटने के लिए मजबूर करने और अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। सरकार जवानों के सम्मान, कल्याण और परिवारों की सुरक्षा लिए प्रतिबद्ध       उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा बलों के जवानों के सम्मान, कल्याण और उनके परिवारों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने सम्मानित जवानों एवं उनके परिजनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनका साहस और बलिदान राष्ट्र सेवा का सर्वाेच्च उदाहरण है।

संथाल-कोल्हान में सक्रिय हुआ मानसून, 9 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी

 रांची झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार दस्तक दे दी है। गुरुवार को रांची के हिनू स्थित मौसम विज्ञान केंद्र में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि राज्य के पूर्वी हिस्से, विशेषकर संथाल परगना और कोल्हान क्षेत्र में मानसूनी प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। गोड्डा, देवघर, पूर्वी सिंहभूम तथा गिरिडीह के कुछ हिस्सों में मानसून सक्रिय हो चुका है। अगले दो से तीन दिनों में इसका विस्तार झारखंड के अन्य जिलों में भी होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिम बंगाल में बने गहरे निम्न दबाव क्षेत्र के कारण झारखंड में मानसूनी गतिविधियां तेज हुई हैं। इसका सबसे अधिक असर कोल्हान और संथाल परगना क्षेत्र में देखने को मिलेगा। विभाग ने राज्य के नौ जिलों में भारी बारिश को लेकर आरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं रांची समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है। भारत में देर से पहुंचा मानसून, पिछले साल कम होगी भारत में बारिश मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि सामान्य तौर पर केरल में मानसून 1 जून को पहुंचता है, लेकिन इस वर्ष यह 4 जून को पहुंचा। झारखंड में मानसून का सामान्य आगमन 12 जून के आसपास माना जाता है, जबकि रांची और आसपास के मध्य भागों में यह 15 जून तक सक्रिय हो जाता है। इस बार भी इसी क्रम में मानसून आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि जून माह में राज्य में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। अल नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष पूरे देश में मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है। हालांकि जुलाई और अगस्त के दौरान होने वाली वर्षा ही यह तय करेगी कि मानसून का कुल प्रदर्शन कैसा रहेगा। झारखंड में सर्वाधिक बारिश इन्हीं दो महीनों में दर्ज की जाती है। बिचड़ा लगाना शुरू करें किसान, निचले भागों में खेती करें शुरू कृषि क्षेत्र के लिए मानसून की शुरुआत राहत भरी खबर लेकर आई है। मौसम विभाग ने किसानों को धान की नर्सरी तैयार करने और बिचड़ा लगाने की सलाह दी है। विशेष रूप से निचले खेतों में धान की खेती शुरू करने का यह उपयुक्त समय बताया गया है। वहीं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वैकल्पिक फसलों की खेती पर जोर देने की सलाह दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। वज्रपात, तेज हवा और भारी बारिश की संभावना को देखते हुए खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी गई है। विभाग का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसून का प्रभाव और अधिक स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा।

सरकारी स्कूलों में माध्यम परिवर्तन विवाद पर शिक्षा निदेशालय ने लिया संज्ञान

नई दिल्ली  सरकारी स्कूलों में कक्षा 11 के छात्रों को अंग्रेजी माध्यम से हिंदी माध्यम सेक्शन में स्थानांतरित किए जाने के आरोपों की शिक्षा निदेशालय ने अब औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है।अधिवक्ता अशोक अग्रवाल की ओर से इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की कक्षाओं को या तो बंद किया जा रहा है या फिर उन्हें हिंदी माध्यम के साथ मिला दिया जा रहा है, जिससे छात्रों को अपनी चुनी हुई भाषा में पढ़ाई जारी रखने में कठिनाई हो रही है। शिकायतकर्ता ने कहा कि ये घटनाएं उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कुछ स्कूलों में हो रही हैं, जिनमें सीआर दास सर्वोदय कन्या विद्यालय का नाम भी सामने आया है। शिकायत के अनुसार, जिन छात्रों ने 10वीं तक अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई की थी, उन्हें 11वीं में उसी माध्यम में आगे बढ़ने के पर्याप्त विकल्प नहीं मिल रहे हैं। इस स्थिति को लेकर अभिभावकों और छात्रों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि अचानक माध्यम बदलने से न केवल पढ़ाई की समझ प्रभावित होती है, बल्कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी और आगे की उच्च शिक्षा की योजना पर भी असर पड़ता है। अभिभावक संगठनों का कहना है कि यदि अंग्रेजी माध्यम में पढ़ने वाले छात्रों को बीच में ही हिंदी माध्यम में स्थानांतरित किया जाता है, तो यह उनकी शैक्षणिक प्रगति को प्रभावित कर सकता है।