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स्मृति-शेफाली का धमाका, भारत का विश्व कप में सबसे बड़ा स्कोर; नीदरलैंड पर 95 रन की जीत

लीड्स भारत ने महिला टी20 विश्व कप 2026 के अपने दूसरे मुकाबले में एकतरफा जीत हासिल की है। टीम इंडिया के सामने नीदरलैंड की चुनौती थी। लीड्स के हेडिंग्ले मैदान पर ग्रुप ए के इस मुकाबले पहले बैटिंग करते हुए भारत ने 5 विकेट पर 209 रन बनाए। यह टूर्नामेंट के इतिहास में भारत का सबसे बड़ा स्कोर भी है। नीदरलैंड की टीम सिर्फ 114 रनों पर ऑलआउट हो गई और भारत ने मैच को 95 रनों से जीत लिया। इस जीत से भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया को पछाड़कर ग्रुप ए में टॉप पर पहुंच गई है। महिला टी20 में भारत की रनों से सबसे बड़ी जीत 142 रन vs मलेशिया, कुआलालंपुर (2018) 104 रन vs यूएई, सिलहट (2022) 100 रन vs बारबाडोस, एजबेस्टन (2022) 97 रन vs इंग्लैंड, ट्रेंट ब्रिज (2025) 95 रन vs नीदरलैंड, हेडिंग्ले (2026) स्मृति और शेफाली के बीच शतकीय साझेदारी नीदरलैंड की कप्तान बेबेट डी लीडे ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया। शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना की जोड़ी ने 70 गेंदों में 115 रन की साझेदारी की। शेफाली 38 गेंदों में 55 रन बनाकर आउट हुईं। उनकी इस पारी में 10 चौके शामिल रहे। इसके बाद मंधाना ने जेमिमा रोड्रिगेज के साथ मोर्चा संभाला। दोनों खिलाड़ियों ने दूसरे विकेट के लिए 26 गेंदों में 47 रन जुटाए। भारत को 16वें ओवर की अंतिम गेंद पर स्मृति मंधाना के रूप में दूसरा झटका लगा। मंधाना 47 गेंदों में 1 छक्के और 11 चौकों के साथ 74 रन बनाकर आउट हुईं। जेमिमा 13 गेंदों में 2 चौकों की मदद से 19 रन बनाकर आउट हुईं। यास्तिका भाटिया सिर्फ तीन रन बना सकीं। भारतीय टीम 168 के स्कोर तक 4 विकेट गंवा चुकी थी। ऋचा घोष (नाबाद 20) ने कप्तान हरमनप्रीत कौर (12) के साथ पांचवें विकेट के लिए 15 गेंदों में 31 रन की साझेदारी करते हुए भारत को विशाल स्कोर तक पहुंचाया। दीप्ति शर्मा पारी की अंतिम दो गेंदें खेलने मैदान पर उतरीं, जिसमें एक छक्का और एक चौका लगाया। नीदरलैंड की तरफ से कैरोलिन डी लैंग ने 2 विकेट हासिल किए। एक रन बनाने में आखिरी 5 विकेट गिरे लक्ष्य का पीछा करने उतरी नीदरलैंड की टीम 17.3 ओवरों में 114 रन पर सिमट गई। हीथर सीगर्स ने फीबे मोल्केनबोअर के साथ पहले विकेट के लिए 34 रन जोड़े। हीथर 16 गेंदों में 21 रन बनाकर आउट हुईं, जिसके बाद कप्तान बैबेट डी लीडे ने छोटी-छोटी साझेदारियां करते हुए टीम को संभालने की कोशिश की। इस टीम को 96 के स्कोर पर कप्तान के रूप में चौथा झटका लगा। बैबेट 27 गेंदों में 28 रन बनाकर लौटीं, जिसके बाद विकेटों का पतझड़ लग गया और टीम 114 के स्कोर पर ऑलआउट हो गई। 16वें ओवर के बाद टीम का स्कोर 5 विकेट पर 113 रन था। अगले 9 गेंदों में एक रन बनाकर नीदरलैंड के आखिरी 5 विकेट गिर गए। भारत के लिए श्री चरणी ने 19 रन देकर 4 विकेट हासिल किए, जबकि शेफाली वर्मा ने 20 रन देकर 3 विकेट निकाले। नंदिनी शर्मा ने 2 विकेट अपने नाम किए।

FIFA के अनिवार्य हाइड्रेशन ब्रेक्स पर बवाल, फैंस बोले- मैच का फ्लो हो रहा खराब, मजा हो रहा किरकिरा

 अटलांटा FIFA वर्ल्ड कप 2026 में पहली बार लागू किए गए अनिवार्य हाइड्रेशन ब्रेक्स को लेकर नई बहस छिड़ गई है. खिलाड़ियों को अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको की गर्मी से राहत देने के उद्देश्य से शुरू की गई यह व्यवस्था अब खेल की लय और रोमांच को प्रभावित करने के आरोपों का सामना कर रही है. आलोचकों का कहना है कि इन ब्रेक्स ने मैचों का प्राकृतिक प्रवाह तोड़ा है और कोचों को रणनीति बदलने का अतिरिक्त मौका दे दिया है।  इस बहस की सबसे बड़ी मिसाल जर्मनी और कुरासाओ के बीच खेले गए मुकाबले में देखने को मिली. वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करने वाला सबसे छोटी आबादी वाला देश कुरासाओ चार बार के चैम्प‍ियन जर्मनी के खिलाफ 1-1 की बराबरी पर था. लिवानो कोमेनेंसिया के गोल के बाद कुरासाओ के खिलाड़ी और फैन्स उत्साह से भरे हुए थे और बड़ा उलटफेर संभव नजर आ रहा था।  हालांकि इसके तुरंत बाद हाइड्रेशन ब्रेक हो गया. खेल दोबारा शुरू होने के बाद कुरासाओ अपनी लय कायम नहीं रख सका. जर्मनी ने हाफ टाइम से पहले दो गोल दाग दिए और आखिरकार मुकाबला 7-1 से जीत लिया।  इंग्लैंड के पूर्व स्ट्राइकर एलन शियरर ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें कुरासाओ के लिए बुरा लगा. उनके अनुसार टीम ने गोल कर मोमेंटम हासिल किया था, लेकिन कुछ ही सेकंड बाद खेल रुक गया और उसी के साथ उनकी लय भी टूट गई।  पूर्व आयरलैंड कप्तान रॉय कीन ने भी FIFA के फैसले पर सवाल उठाए. उनका मानना है कि फुटबॉल की सबसे बड़ी खूबसूरती उसकी लगातार चलने वाली गति है, लेकिन ये ब्रेक मैच की रफ्तार और रोमांच दोनों को प्रभावित कर रहे हैं. उन्होंने इसे अमेरिकी खेलों में दिखने वाले टाइमआउट जैसा बताया।  कोचों के लिए बन गया रणनीतिक हथियार हाइड्रेशन ब्रेक का उद्देश्य खिलाड़ियों को पानी पिलाना था, लेकिन कोच इस समय का इस्तेमाल रणनीतिक चर्चा के लिए भी कर रहे हैं. नीदरलैंड्स के कोच रोनाल्ड कोमैन ने खुलकर स्वीकार किया कि ब्रेक के दौरान खिलाड़ियों को सुधार, रणनीति और मैच की स्थिति के बारे में निर्देश दिए जा सकते हैं और उनकी टीम भी इसका फायदा उठा रही है।  शुरुआती 16 मैचों में से 8 मुकाबलों में हाइड्रेशन ब्रेक के 10 मिनट के भीतर गोल देखने को मिले. इससे यह धारणा और मजबूत हुई है कि इन ब्रेक्स का सीधा असर मैच के रुख पर पड़ रहा है।  ब्राजील और मोरक्को के मैच में भी ऐसा ही देखने को मिला. मोरक्को ने शुरुआत से दबदबा बनाया और पहले हाइड्रेशन ब्रेक से ठीक पहले बढ़त हासिल कर ली. लेकिन खेल दोबारा शुरू होने के 10 मिनट से भी कम समय बाद विनीसियस जूनियर ने ब्राजील के लिए बराबरी का गोल दाग दिया।  कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, स्कॉटलैंड, स्वीडन और ईरान जैसी टीमों ने भी ब्रेक के बाद गोल कर फायदा उठाया. कई मैचों के मोमेंटम मैप्स में भी यह साफ दिखाई दिया कि खेल रुकने के बाद मुकाबलों की दिशा बदल गई।  स्टेड‍ियम में बैठे फैन्स भी नाखुश  इन ब्रेक्स का असर केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है. स्टेडियम में मौजूद दर्शक भी इससे नाराज नजर आए हैं. मैसाचुसेट्स के फॉक्सबोरो में इराक और नॉर्वे के मुकाबले के दौरान पहले हाइड्रेशन ब्रेक पर दर्शकों ने हूटिंग तक की।  FIFA के नियमों के मुताबिक रेफरी हर हाफ के 22वें मिनट में खेल रोकते हैं और खिलाड़ियों को लगभग तीन मिनट का समय दिया जाता है. खास बात यह है कि यह नियम मौसम, तापमान या स्टेडियम की स्थिति से अलग सभी मैचों में लागू किया जा रहा है।  सोमवार को अटलांटा में स्पेन और केप वर्डे के बीच मैच एयर-कंडीशंड और छत वाले स्टेडियम में खेला गया, फिर भी हाइड्रेशन ब्रेक लागू किया गया. FIFA का कहना है कि सभी टीमों और मैचों के लिए समान परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए ऐसा किया जा रहा है।  स्पेन के कोच लुइस डे ला फुएंते ने माना कि अत्यधिक गर्मी में यह फैसला समझ में आता है, लेकिन हर मैच में इसकी आवश्यकता पर उन्होंने सवाल उठाए. वहीं नॉर्वे के कोच स्टाले सोलबाकेन का भी मानना है कि 35 डिग्री सेल्सियस जैसी भीषण गर्मी में यह व्यवस्था सही है, लेकिन सामान्य परिस्थितियों में इसकी जरूरत नहीं है।  टीवी ब्रॉडकास्ट भी विवाद की वजह हाइड्रेशन ब्रेक्स को लेकर एक और बड़ी आलोचना प्रसारण से जुड़ी है. अमेरिका में ब्रॉडकास्टर फॉक्स इन ब्रेक्स के दौरान सीधे विज्ञापनों पर चला जाता है. दूसरी तरफ स्पेनिश भाषा के चैनल टेलीमुंडो ऐसा नहीं करता।  फुटबॉल में पारंपरिक रूप से हाफ टाइम के अलावा विज्ञापन ब्रेक देखने को नहीं मिलते. ऐसे में कई लोगों का मानना है कि ये रुकावटें दर्शकों के अनुभव को प्रभावित कर रही हैं।  नीदरलैंड्स के कप्तान वर्जिल वैन डाइक ने कहा कि लगातार विज्ञापनों पर जाना उन्हें पसंद नहीं है और तटस्थ दर्शकों के लिए भी यह अनुभव बेहतर नहीं माना जा सकता।  हालांकि फ्रांस के कोच डिडिएर डेशां का मानना है कि फुटबॉल बदल रहा है और अब मुकाबले दो हाफ की बजाय चार हिस्सों में बंटे हुए नजर आते हैं. उनके अनुसार खिलाड़ियों और कोचों को इस नई वास्तविकता के साथ तालमेल बैठाना होगा।  फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि FIFA भविष्य के सभी वर्ल्ड कप में इस व्यवस्था को जारी रखेगा या नहीं. हालांकि इंग्लैंड फुटबॉल एसोसिएशन ने संकेत दिए हैं कि 2028 में ब्रिटेन और आयरलैंड में होने वाली यूरोपीय चैम्प‍ियनशिप में ऐसे हाइड्रेशन ब्रेक लागू होने की संभावना बेहद कम है। 

महाराणा प्रताप की वीरता आज भी देश की प्रेरणा, CM डॉ. मोहन यादव बोले- राष्ट्र गौरव के अमर प्रतीक हैं वीर शिरोमणि

महाराणा प्रताप राष्ट्र गौरव के अमर प्रतीक, उनका अदम्य साहस हर पीढ़ी के लिए प्रेरक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल में हो रही वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप लोक की स्थापना, लोकार्पण जल्द ही समाज के युवाओं को पार्थ योजना से पुलिस एवं सेना में भर्ती के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण दिलायेगी सरकार स्कूली कक्षाओं में पढ़ाई जायेगी महाराणा प्रताप की जीवनी महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती पर हुआ राज्य स्तरीय समारोह मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समारोह में सहभागिता कर महाराणा प्रताप को अर्पित किए श्रद्धासुमन भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जीवन वीरता, शौर्य, पराक्रम, त्याग का प्रतीक है। उनका नाम स्मरण करते ही मन श्रद्धा से भर जाता है। महाराणा प्रताप ने तमाम कठिनाइयों के बीच भी 'राष्ट्र प्रथम' को सर्वोपरि रखा। समाज का हर वर्ग देश की अस्मिता और आत्म सम्मान के लिए महाराणा प्रताप को एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में देखता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि महाराणा प्रताप सिर्फ़ एक राजा नहीं, स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रभक्ति के अनुपम प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि साहस और वीरता मनुष्य का आभूषण है। यह पराक्रमी राजा का नैसर्गिक गुण होता है। महाराणा प्रताप वीरता के पर्याय हैं। उन्होंने जीवन में अनेक कष्ट सहे, पर अपने लक्ष्य से कभी भी विचलित नहीं हुए। उनका जीवन आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के अवसर पर भोपाल के महाराणा प्रताप नगर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में यह उद्गार व्यक्त किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिसोदिया-राजपूत-क्षत्रिय समुदाय द्वारा आयोजित इस सामाजिक कार्यक्रम में सहभागिता कर महान योद्धा महाराणा प्रताप को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाज के प्रतिभाशाली डाक्टर, युवाओं, खिलाड़ियों और समाजसेवियों को मंच से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का गठन किया है और आज इसी बोर्ड के माध्यम से यह राज्य स्तरीय कार्यक्रम किया गया है। हमारी सरकार महापुरुषों की विरासत को संरक्षित करते हुए इसे और आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सेना और पुलिस बल में युवाओं की भर्ती के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से "पार्थ योजना" की शुरुआत की है। इसके अंतर्गत तैयारी कर रहे युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रदेश के अधिकांश जिले इस योजना के दायरे में ले लिए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा की कि क्षत्रिय समाज के सभी युवाओं को भी इसी योजना में पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इसके अतिरिक्त इंटर्नशिप की व्यवस्था और समायोजन के लिए भी प्रभावी पहल की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाराणा प्रताप लोक निर्माण का शेष कार्य तेजी से पूरा कराकर इसका बहुत जल्द लोकार्पण किया जाएगा। म.प्र.पर्यटन विकास निगम और महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के समन्वय से सरकार महाराणा प्रताप के स्वर्णिम अतीत को दुनिया के सामने लाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश इकलौता राज्य है, जिसने महाराणा प्रताप की जयंती पर अवकाश घोषित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप की जीवनी अब स्कूलों में पढ़ाई जायेगी। हम महाराणा प्रताप के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने जा रहे हैं। इससे हमारी भावी पीढ़ी महाराणा की वीरता और देशभक्ति से प्रेरणा लेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के सभी देशों में अपना अग्रणी स्थान बना रहा है। हमारी सरकार विरासत से विकास के संकल्प के साथ आगे बढ़ते हुए भारत के गौरवशाली अतीत को दुनिया के सामने लाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप अद्वितीय वीरता, शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति के प्रेरणा स्त्रोत हैं। आज इस जयंती समारोह में महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड के बैनर तले संपूर्ण क्षत्रिय समाज एक मंच पर आया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अत्यंत बलशाली महाराणा प्रताप का कवच 72 किलो और भाला 80 किलोग्राम वजनी था। यह उनके अद्भुत व्यक्तित्व का परिचायक है। उन्होंने हर युद्ध में महान शौर्य दिखाया। महाराणा प्रताप के घोड़े "चेतक" के साथ उनके लगाव की कहानियां सुनकर मन रोमांचित हो जाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सम्राट विक्रमादित्य शोध पीठ की स्थापना कर विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से उनके उत्कृष्ट जीवन से दुनिया का परिचय कराया है। युवाओं को सम्राट विक्रमादित्य पर शोक के लिए फैलोशिप प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही उज्जैन में मां क्षिप्रा के किनारे शहीद दुर्गादास राठौर का भव्य संग्रहालय भी तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमें गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का जो संकल्प दिया है, उसकी प्रेरणा हमें महाराणा प्रताप से ही मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराणा प्रताप के संघर्षमय जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मातृभूमि, संस्कृति और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जीवनभर संघर्ष किया , परंतु विकट विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं किया। इतिहास गवाह है कि महाराणा प्रताप को जीवन के कठिनतम समय में घास की रोटियां तक खानी पड़ीं, तब भी उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों के सामने कभी सिर नहीं झुकाया। अपने नाम के अनुरूप वे सचमुच प्रतापी थे। उनका गौरवशाली व्यक्तित्व भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में सदैव अमर रहेगा। मुख्यमंत्री ने देश-प्रदेश के युवाओं से महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपनाने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। समारोह में पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का गठन एक प्रकार से प्रदेश में शौर्य की स्थापना करने जैसा है। कुछ व्यक्तित्व समय, युग और जाति के साथ नहीं बंधते हैं। वे सदैव मानव कल्याण, स्वाभिमान और देश के कल्याण के लिए होते हैं। महाराणा प्रताप ने कल्याण बोर्ड बनाकर एक महान वीर के गुणों से परिचित कराने का प्रशंसनीय कार्य किया है। देश के कई राज्य मध्यप्रदेश की योजनाओं का अनुसरण कर रहे हैं। महाराणा प्रताप के समान ही … Read more

Stock Market में उतार-चढ़ाव का खेल, अमेरिका की चेतावनी और ट्रंप के गुड सिग्नल ने बढ़ाई निवेशकों की टेंशन

मुंबई  शेयर मार्केट में सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को भारी कन्फ्यूजन देखने को मिला है. सेंसेक्स-निफ्टी दोनों इंडेक्स की चाल बदली-बदली नजर आई. शुरुआती कारोबार के दौरान कभी ये ग्रीन जोन में ट्रेड करते हुए दिखाई दिए, तो अचानक ही गिरावट के साथ रेड जोन में आ गए. हालांकि, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 77000 के पार, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 24,000 के पार बना हुआ है।  सेसेंक्स-निफ्टी की बदली-बदली चाल  शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने पर बीएसई का सेंसेक्स अपने गुरुवार को अपने पिछले बंद 77,155 की तुलना में मामूली गिरावट लेकर 77,131 के लेवल पर खुला और फिर अचानक रेड जोन से ग्रीन जोन में छलांग लगाकर 77,281 पर कारोबार करता नजर आया. ये तेजी भी अगले ही पल चली गई और सेंसेक्स गिरकर 77,044 पर ट्रेड करने लगा।  बात 50 शेयरों वाले इंडेक्स NSE Nifty की करें, तो इसकी चाल भी सेंसेक्स के जैसे ही देखने को मिली है. अपने पिछले बंद 24,085 की तुलना में गिरकर निफ्टी 24,073 पर ओपन हुआ और फिर कभी रेड तो कभी ग्रीन जोन में कारोबार करता दिखा।  बाजार में कन्फ्यूजन की वजह क्या?  शेयर बाजार में भारी कन्फ्यूजन की वजह पर गौर करें, तो अमेरिका से आई Good Or Bad News को माना जा सकता है. दरअसल अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) ने नीतिगत ब्याज दरों (US Fed Rate) को बिना किसी बदलाव के 3.50% से 3.75% पर स्थिर रखा है. फेड के नए चेयरमैन केविन वार्श की अध्यक्षता वाली पहली बैठक में ये फैसला लिया गया है और उन्होंने किसी तरह की राहत नहीं दी है. इसके बाजार का सेंटीमेंट बिगड़ा है।  वहीं दूसरी ओर गुड न्यूज ये आई है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता डन हो गया है और दोनों के बीच एग्रीमेंट पर साइन भी कर दिए गए हैं. इसका असर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के रूप में दिखा है, जो महंगाई का जोखिम कम होने का संकेत है और बाजार को इसका सपोर्ट मिल सकती है।  उथल-पुथल के बीच ये 10 शेयर चमके  शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच जो शेयर अपने निवेशकों को फायदा कराते हुए नजर आए. उनमें बीएसई लार्जकैप कंपनियों में शामिल टाटा ग्रुप की Trent Share (1.50%), BEL Share (1.20%), HDFC Bank Share (1.10%) की बढ़त में ट्रेड कर रहे थे।  इसके अलावा मिडकैप कैटेगरी में देखें, तो Nykaa Share (1.20%), Yes Bank Share (1.10%) की बढ़त में कारोबार करता हुआ दिखाई दिया. स्मॉलकैप सेक्शन में शामिल शेयरों की बात करें, तो यहां पर Carboruniv Share (7%), Redington Share (5.50%), ABREL Share (2.50%), WockPharma Share (2.10%), HSCL Share (1.90%) की बढ़त में कारोबार कर रहा था।  

Tata Sierra.ev की धमाकेदार एंट्री तय, लंबी रेंज और लग्जरी फीचर्स से EV बाजार में मचाएगी हलचल

मुंबई Tata Motors अपनी सबसे आइकॉनिक SUV Sierra को बिल्कुल नए अवतार में वापस ला रही है. कंपनी 30 जून 2026 को अपनी मोस्ट-अवेडेट 'Tata Sierra.ev' के प्रोडक्शन मॉडल को पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है. साल 2020 और 2023 के ऑटो एक्सपो में कॉन्सेप्ट के तौर पर दिखने के बाद से ही फैंस इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. आइए जानते हैं कि इस नए जमाने की सिएरा में आपको क्या कुछ खास मिलने वाला है।  नई Tata Sierra.ev का बाहर का लुक नई टाटा सिएरा ईवी बेहद मॉडर्न और फ्यूचरिस्टिक नजर आएगी. इसके फ्रंट लुक में ईवी-स्पेसिफिक बदलाव किए गए हैं जैसे इसमें पूरी तरह से बंद फ्रंट ग्रिल और एक नया स्पोर्टी बंपर देखने को मिलेगा. इसके अलावा कार के चारों तरफ खास '.ev' की बैजिंग दी जाएगी जो इसे इसके पेट्रोल-डीजल मॉडल से अलग बनाएगी।  केबिन के अंदर स्क्रीन की भरमार इसके टॉप-स्पेक वेरिएंट्स में कंपनी Triple-Screen Layout सेटअप दे सकती है. इसमें ड्राइवर के लिए 10.25-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर, बीच में 12.3-इंच का मुख्य टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम और सबसे मजेदार बात यह है कि आगे बैठने वाले पैसेंजर के लिए भी अलग से 12.3-इंच का डिस्प्ले दिया जा सकता है. इसके निचले वेरिएंट्स में ग्राहकों को ड्यूल-स्क्रीन के साथ हेड-अप डिस्प्ले का ऑप्शन मिलेगा।  नई सिएरा ईवी के अंदर एक बड़ा पैनोरमिक सनरूफ, वेंटिलेटेड और इलेक्ट्रिकली एडजस्टेबल फ्रंट सीट्स, कई सारे ड्राइविंग मोड्स और एक प्रीमियम ऑडियो सिस्टम मिलेगा. इसका केबिन स्पेस और कम्फर्ट इस तरह डिजाइन किया गया है कि लंबी दूरी के सफर में भी आपको थकान का अहसास नहीं होगा।  बैटरी, पावर और धांसू परफॉर्मेंस यह दमदार इलेक्ट्रिक एसयूवी टाटा के एडवांस्ड 'acti.ev+' प्लेटफॉर्म पर बेस्ड है जिस पर हैरियर ईवी को भी तैयार किया जा रहा है. ताकत के लिए इसमें ग्राहकों को 65 kWh और 75 kWh के दो बड़े बैटरी पैक के विकल्प मिल सकते हैं।  सबसे बड़ी बात यह है कि टाटा ने पुष्टि की है कि सिएरा ईवी रियर-व्हील-ड्राइव (RWD) और ऑल-व्हील-ड्राइव (AWD) दोनों कॉन्फिगरेशन में आएगी. हालांकि इसका ऑल-व्हील-ड्राइव (4X4) वर्जन सिर्फ बड़े बैटरी पैक के साथ ही उपलब्ध कराया जाएगा।  नई Tata Sierra.ev की कीमत उम्मीद जताई जा रही है कि इसकी एक्स-शोरूम कीमत ₹18 लाख से शुरू होकर ₹25 लाख के बीच हो सकती है. भारतीय बाजार में कदम रखते ही इसका सीधा मुकाबला Mahindra BE 6, हुंडई क्रेटा इलेक्ट्रिक, एमजी जेडएस ईवी, टोयोटा एबेला और मारुति की आने वाली e Vitara जैसी दिग्गज गाड़ियों से होने वाला है। 

दूसरी पत्नी के हक में हाईकोर्ट, ब्याज सहित बकाया फैमिली पेंशन देने के आदेश

चंडीगढ़ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पारिवारिक पेंशन को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मृत सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी को पूरी पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। यह तब लागू होगा जब वह एकमात्र जीवित और पात्र दावेदार हो। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल दूसरी पत्नी होने के आधार पर विधवा को 50 फीसदी पेंशन तक सीमित करना नियमों की गलत व्याख्या है। जस्टिस नमित कुमार ने गुरदासपुर निवासी एक महिला की याचिका स्वीकार की। उन्होंने 25 मई 2022 के उस आदेश को रद्द किया जिसमें महिला को 50 फीसदी पेंशन का हकदार माना गया था। अदालत ने संबंधित विभाग को महिला को पूर्ण पारिवारिक पेंशन जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही बकाया राशि ब्याज सहित देने का भी आदेश दिया गया। याचिकाकर्ता के पति पंजाब सरकार में जिला कोषागार अधिकारी थे। उनका निधन 14 नवंबर 2011 को हुआ था। पहली पत्नी का निधन 6 नवंबर 1980 को हो चुका था। याचिकाकर्ता से विवाह 30 मई 1992 को हुआ था। पेंशन स्वीकृति में त्रुटि  पति की मृत्यु के बाद महालेखाकार कार्यालय ने 3 अगस्त 2015 को पेंशन भुगतान आदेश जारी किया। इस आदेश में याचिकाकर्ता को केवल 50 फीसदी पारिवारिक पेंशन स्वीकृत की गई थी। इसके पीछे तर्क दिया गया कि वह मृत कर्मचारी की दूसरी पत्नी हैं। हाईकोर्ट ने पाया कि कर्मचारी की मृत्यु के समय याचिकाकर्ता ही एकमात्र जीवित पत्नी थीं। हाईकोर्ट का तर्क अदालत ने कहा कि एक से अधिक जीवित विधवाओं के बीच पेंशन बंटवारे का नियम यहां लागू नहीं होता। विभाग की गलत व्याख्या से पेंशन का एक हिस्सा बिना लाभार्थी के अटका रह जाता। यह पारिवारिक पेंशन योजना की मूल भावना के विपरीत है। हाईकोर्ट ने दोहराया कि एकमात्र पात्र दावेदार होने पर दूसरी पत्नी को पूर्ण पेंशन मिलेगी। 

Bata Carry Bag Case: 6 रुपये के बैग पर उपभोक्ता आयोग सख्त, कंपनी पर लगा 10 हजार रुपये का जुर्माना

 नई दिल्ली आप मॉल या शोरूम में सामान खरीदने के लिए जाते हैं, तो कैश काउंटर पर बिल बनाते समय एम्प्लाई आपसे कैरी बैग के लिए पूछता है. कुछ जगह ये फ्री में, तो कुछ जगह 5-6 रुपये के आसपास का पड़ता है और आपके ऊपर निर्भर करता है कि इसे लेना है या फिर नहीं. लेकिन इस पेपर कैरी बैग के चक्कर में मशहूर शू-कंपनी बाटा (Bata) को 10,000 रुपये देने पड़े. ये पूरा मामला 2023 का है, जिस लेकर कोर्ट ने बिना किसी नोटिस के ही अपना फैसला सुना दिया।  दरअसल, एक 6 रुपये के पेपर कैरी बैग को लेकर हुए उपभोक्ता विवाद के चलते फुटवियर कंपनी बाटा इंडिया को एक ग्राहक को मुआवजे और मुकदमेबाजी की लागत के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है।  2023 का ये है पूरा मामला साउथ दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) ने दिल्ली की रहने वालीं प्रीति अग्रवाल के पक्ष में अपना फैसला सुनाया है. उन्होंने बाटा इंडिया पर आरोप लगाया था कि मई 2023 में Bata Store से 1,499 रुपये कीमत के जूते खरीदते समय उनसे कैरी बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क लिया गया था, जबकि उन्हें पहले से इसकी सूचना नहीं दी गई थी।  शिकायत के अनुसार, प्रीति अग्रवाल को 6 रुपये के अतिरिक्त शुल्क के बारे में बिलिंग काउंटर पर पहुंचने पर ही जानकारी मिली. उन्होंने तर्क दिया कि स्टोर के अंदर कहीं भी कोई नोटिस नहीं लगा था, जिसमें ग्राहकों को यह बताया गया हो कि उन्हें कैरी बैग के लिए अलग से भुगतान करना होगा. उन्होंने आगे दावा किया कि खरीदारी करने के बाद ग्राहकों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे जूतों के डिब्बे अपने हाथों में लेकर चलें।  नोटिस न चिपकाना पड़ा बाटा को भारी इस पूरे मामले में चेयरमैन मोनिका ए. श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशा की अध्यक्षता वाली आयोग ने पाया कि खुदरा विक्रेताओं को सादा, बिना ब्रांड वाले कैरी बैग के लिए ग्राहकों से शुल्क लेने की कानूनी अनुमति है. हालांकि, उपभोक्ताओं को दुकान के अंदर प्रमुख नोटिस लगाकर पहले से सूचित किया जाना चाहिए. शिकायतकर्ता द्वारा पेश की गई तस्वीरों की जांच करने पर आयोग को संबंधित दुकान पर ऐसा कोई नोटिस नजर नहीं आया।  आयोग ने कहा कि नोटिस न होने के कारण ग्राहक को खरीदारी पूरी करने से पहले सोच-समझकर निर्णय लेने का अवसर ही नहीं मिला. आदेश सुनाते हुए कहा गया कि बाटा मुफ्त में कैरी बैग उपलब्ध कराने के लिए बाध्य नहीं था, फिर भी वह कैरी बैग रेट के को प्रदर्शित करने के संबंध में NCDRC के निर्देशों का अनुपालन करने में विफल रही।  चंडीगढ़, जयपुर में भी आए थे मामले रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई मामलों में चंडीगढ़ और जयपुर के उपभोक्ता मंचों ने कंपनी के ब्रांडिंग वाले बैग के लिए ग्राहकों से पेमेंट लेने के लिए बाटा को फटकार लगाई थी. यह कहते हुए कि ग्राहक को उस चीज के लिए पेमेंट करने को मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, जो प्रभावी रूप से ब्रांड के लिए एक विज्ञापन के रूप में काम करती है।     Bata ने शिकायत को बताया गलत हालांकि, Bata India की ओर से इस शिकायत को खारिज करते हुए तर्क दिया गया कि पेपर कैरी बैग एक अलग उत्पाद था, जिस पर एमआरपी अंकित थी. कंपनी ने दावा किया कि ये कैरी बैग ग्राहक की सहमति प्राप्त करने के बाद ही दिया गया था और इसका शुल्क अंतिम बिल में दर्शाया गया था। 

क्राइम कंट्रोल के लिए बड़ा प्लान, शिमला में होगी रणनीति; चंडीगढ़ ने पड़ोसी राज्यों से मांगा साथ

चंडीगढ़  चंडीगढ़ में हाल के दिनों में बढ़ी आपराधिक घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन 19 जून को शिमला में होने वाली उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (एनजेडसी) की स्थायी समिति की 22वीं बैठक में कानून-व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगा। इसके अलावा बुनियादी ढांचा विकास, ट्रैफिक प्रबंधन और सुखना वन्यजीव अभयारण्य के आसपास इको-सेंसिटिव जोन (ईएसजेड) घोषित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शहर में अपराध करने के बाद कई आरोपित गिरफ्तारी से बचने के लिए पड़ोसी राज्यों में फरार हो जाते हैं। ऐसे मामलों में अपराधियों की तलाश और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए समिति के सदस्य राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की मांग की जाएगी। शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन रिंग रोड परियोजना को शीघ्र पूरा करने का मुद्दा भी बैठक में उठाएगा। इससे अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश किए बिना बाहरी मार्ग से ही आगे भेजा जा सकेगा। मोहाली स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक कम दूरी वाले मार्ग का मुद्दा भी चर्चा का हिस्सा बन सकता है। बैठक में सुखना वन्यजीव सेंचरी के आसपास ईको-सेंसिटिव जोन घोषित करने का मामला भी उठाया जाएगा। चंडीगढ़ प्रशासन लंबे समय से पंजाब सरकार से इस दिशा में कार्रवाई की मांग करता रहा है। पंजाब ने अभयारण्य की सीमा से 2 से 2.75 किलोमीटर तक के क्षेत्र को संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव रखा था, जबकि पहले केवल 100 मीटर क्षेत्र को ईएसजेड घोषित करने का प्रस्ताव प्रशासन ने अस्वीकार कर दिया था। दूसरी ओर, हरियाणा सरकार ने अपने क्षेत्र में 1 से 1.5 किलोमीटर तक के क्षेत्र को ईएसजेड घोषित करने की मंशा जताई है। बैठक में चार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। उत्तरी क्षेत्रीय परिषद में हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली तथा चंडीगढ़ शामिल हैं। स्थायी समिति की बैठक का उद्देश्य मुख्य परिषद बैठक के लिए एजेंडा तैयार करना है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने केवल चंडीगढ़ क्षेत्र के लिए ईको-सेंसिटिव जोन अधिसूचित किया था। चंडीगढ़ प्रशासन लगातार यह मांग करता रहा है कि सुखना वन्यजीव अभयारण्य के संरक्षण के लिए पंजाब और हरियाणा के हिस्सों को भी ईएसजेड के दायरे में लाया जाए। प्रशासन का मानना है कि इससे झील और अभयारण्य के आसपास अनियंत्रित व्यावसायिक निर्माण पर रोक लगेगी और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।  

300 Billion Dollar Fund का बड़ा खेल! युद्धविराम के बाद ईरान को मिली सबसे बड़ी आर्थिक राहत

नई दिल्ली करीब चार दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों, आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना कर रहे ईरान के लिए यह शायद सबसे बड़ा मौका साबित हो सकता है. अमेरिका-ईरान के समझौते के बाद अब जिस आंकड़े की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है 300 अरब डॉलर का फंड. यह इतनी बड़ी रकम है कि इससे कई छोटे देशों की पूरी अर्थव्यवस्था खड़ी की जा सकती है।  लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका ईरान को 300 अरब डॉलर यूं ही दे रहा है? क्या यह जंग में हुए नुकसान की भरपाई है? या फिर इसके पीछे कोई और खेल चल रहा है? पहली नजर में यह मामला जितना सीधा दिखता है, असलियत उतनी ही मुश्किल है।  अमेरिका और ईरान के बीच जिस शुरुआती समझौते पर सहमति बनी है, उसके तहत एक 300 अरब डॉलर का इनवेस्टमेंट फंड बनाने का प्रस्ताव रखा गया है. नाम भले ही फंड का हो, लेकिन यह सीधे ईरानी सरकार के खाते में भेजी जाने वाली रकम नहीं है. यही सबसे बड़ा अंतर है. आइए समझते हैं कि यह फंड ईरान को कैसे मिलेगा और इसका क्या इस्तेमाल होगा।  पहले समझिए 300 अरब डॉलर का पूरा मामला अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कोई "कैश पेमेंट" नहीं होगी. अमेरिका ईरान को 300 अरब डॉलर का चेक नहीं देने जा रहा. इसके बजाय यह एक ऐसा निवेश मंच होगा जिसके जरिए अमेरिकी-खाड़ी समेत दुनिया भर की कंपनियां और निवेशक ईरान में पैसा लगाएंगे. यानी यह पैसा ईरान को मुआवजे के तौर पर नहीं मिलेगा, बल्कि निवेश के रूप में आएगा।  जानकारी के मुताबिक, इस फंड में सिर्फ अमेरिकी कंपनियां ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों, एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के निवेशकों की भी भागीदारी हो सकती है. दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर, मलेशिया और अमेरिका की कुछ कंपनियों ने शुरुआती रुचि दिखाई भी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 300 अरब डॉलर के प्रस्तावित फंड में से आधे से ज्यादा राशि के लिए पहले ही शुरुआती कमिटमेंट मिल चुकी हैं. यानी यह सिर्फ कागजी योजना नहीं बल्कि एक वास्तविक आर्थिक ढांचा तैयार करने की कोशिश है।  ईरान आखिर इतनी बड़ी रकम चाहता क्यों था? जंग के दौरान ईरान के कई अहम औद्योगिक और रणनीतिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा. रिफाइनरियां प्रभावित हुईं, हवाई अड्डों को नुकसान पहुंचा, कुछ औद्योगिक फैसिलिटीज पर हमले हुए और बुनियादी ढांचे पर भी असर पड़ा. इसी वजह से ईरान शुरू में अमेरिका से लगभग 400 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग कर रहा था. तेहरान का तर्क था कि युद्ध से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई होनी चाहिए।  लेकिन अमेरिका सीधे मुआवजा देने के लिए तैयार नहीं था.  यहीं से एक बीच का रास्ता निकाला गया. मुआवजे की जगह निवेश का. मतलब ये है कि अमेरिका सीधे पैसा नहीं देगा, लेकिन ऐसी व्यवस्था बनाने में मदद करेगा जिससे ईरान में सैकड़ों अरब डॉलर का निवेश आ सके।  दिलचस्प बात यह है कि मुआवजे जैसे सवालों पर दोनों पक्ष अलग-अलग जवाब देते हैं. अमेरिका कहता है कि यह डेवलपमेंट और इनवेस्टमेंट फंड है. दूसरी तरफ ईरान के कई अधिकारी इसे इनडायरेक्ट मुआवजा मान रहे हैं. ईरानी विश्लेषकों का तर्क है कि अगर पैसा युद्ध में क्षतिग्रस्त ढांचे को दोबारा बनाने में इस्तेमाल होगा, तो तकनीकी रूप से यह पुनर्निर्माण है और पुनर्निर्माण का मतलब किसी न किसी रूप में नुकसान की भरपाई ही होता है. यानी नाम चाहे कुछ भी हो, ईरान इसे अपनी जीत के तौर पर पेश कर सकता है।  300 अरब डॉलर से ईरान क्या करेगा? ईरान के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की है. पहला बड़ा सेक्टर ऊर्जा क्षेत्र हो सकता है, जहां ईरान के पास दशकों पुरानी तकनीकें हैं. ईरान के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार और चौथा सबसे बड़ा तेल भंडार है. लेकिन प्रतिबंधों और निवेश की कमी की वजह से वह अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाया।  अगर यह निवेश आता है तो नई रिफाइनरियां, गैस प्रोसेसिंग यूनिट्स और तेल उत्पादन परियोजनाएं शुरू हो सकती हैं. दूसरा बड़ा क्षेत्र होगा परिवहन और लॉजिस्टिक्स हो सकता है. ईरान एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व को जोड़ने वाले एक अहम पॉइंट पर स्थित है. नए रेलवे नेटवर्क, बंदरगाह, हवाई अड्डे और माल ढुलाई केंद्र बनाए जा सकते हैं. इनके अलावा जंग के दौरान ईरान में कनेक्टिविटी को भी धव्स्त किया गया है, कई ब्रिज तबाह किए गए हैं, सभी के रिकंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल किया जा सकता है।  क्या ईरान को अलग से भी पैसा मिलेगा? जी हां. 300 अरब डॉलर के निवेश फंड से अलग ईरान के विदेशों में फंसे हुए अरबों डॉलर के सरकारी फंड का मुद्दा भी बातचीत का हिस्सा था और MoU में सहमति भी बनी है. समझौते के शुरुआती चरण में लगभग 24 अरब डॉलर की ब्लॉक की गई संपत्तियां जारी करने पर भी सहमति बनी है. बताया जा रहा है कि इनमें से आधी राशि अंतिम बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को दी जा सकती है।  यानी निवेश फंड और फ्रीज किए गए फंड दो अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं. लेकिन एक बड़ी शर्त भी है. यहां एक अहम बात समझना जरूरी है. 300 अरब डॉलर का फंड अभी सिर्फ एक प्रस्तावित ढांचा है. यह तुरंत शुरू नहीं होगा. पहले अमेरिका और ईरान को अंतिम समझौते पर पहुंचना होगा. इसके बाद अगले 60 दिनों के दौरान परियोजनाओं की पहचान होगी, निवेशकों को जोड़ा जाएगा और फंड के संचालन की रूपरेखा तय होगी।  सबसे बड़ी बात यह है कि ईरान को समझौते की शर्तों का पालन करना होगा. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, संवर्धित यूरेनियम के भंडार को खत्म करे और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण स्वीकार करे. अगर ऐसा नहीं होता तो पूरा ढांचा खतरे में पड़ सकता है।  पिछले चार दशकों में शायद ही कभी ईरान को वैश्विक पूंजी बाजारों तक इतनी बड़ी पहुंच मिली हो. अगर यह योजना सफल होती है तो ईरान सिर्फ युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई ही नहीं कर सकेगा, बल्कि अपनी अर्थव्यवस्था को नई दिशा भी दे सकता है. फिलहाल दुनिया की नजर शुक्रवार पर टिकी है, जहां अमेरिका-ईरान के बीच MoU … Read more

OBC आरक्षण पर बड़ा फैसला करीब? सात साल से लंबित मामले की 24 जून से होगी लगातार सुनवाई

 जबलपुर मध्य प्रदेश के बहुचर्चित और सात वर्षों से लंबित ओबीसी आरक्षण विवाद मामले में अब सुनवाई की प्रक्रिया तेज होने जा रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की विशेष युगलपीठ ने मामले की गंभीरता और इससे प्रभावित हजारों अभ्यर्थियों के हितों को देखते हुए 24 जून 2026 से प्रतिदिन सुनवाई (डे-टू-डे हियरिंग) करने का फैसला लिया है। प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की विशेष युगलपीठ के समक्ष मंगलवार को यह मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। हालांकि सामान्य वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति के कारण मामले में कोई ठोस सुनवाई नहीं हो सकी। इस दौरान ओबीसी आरक्षण विवाद से संबंधित 91 याचिकाएं और संबद्ध प्रकरण सूचीबद्ध थे। सुनवाई के दौरान ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने न्यायालय से मुख्य याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई शुरू करने का आग्रह किया। उन्होंने वैकल्पिक रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा 18 फरवरी 2026 को दिए गए आदेश के संदर्भ में अंतरिम आदेशों को निरस्त करने से जुड़े लंबित आवेदनों पर विचार करने की मांग भी रखी। अधिवक्ता ठाकुर ने दलील दी कि आरक्षण विवाद के कारण बड़ी संख्या में शासकीय नियुक्तियां वर्षों से लंबित हैं और हजारों अभ्यर्थी करीब सात साल से अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में मामले का शीघ्र निराकरण आवश्यक है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला पहली बार उनके समक्ष सूचीबद्ध हुआ है और सभी पक्षों को विस्तृत सुनवाई का समुचित अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इतने व्यापक और बहुस्तरीय विवाद का न्यायसंगत समाधान तभी संभव है, जब सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी जाएं। इसी को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने 24 जून से प्रतिदिन सुनवाई करने का निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि नियमित सुनवाई से लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है और नियुक्तियों का रास्ता भी साफ हो सकता है।     ओबीसी आरक्षण विवाद से राज्य की विभिन्न भर्ती प्रक्रियाएं, चयन सूचियां व हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। लिहाजा, अब निगाहें जाहिर तौर पर 24 जून पर टिकी हैं, जब हाई कोर्ट इस बहुप्रतीक्षित मामले की नियमित सुनवाई आरंभ करेगा। उम्मीद की जा रही है कि लगातार सुनवाई से वर्षों से लंबित इस संवेदनशील संवैधानिक विवाद के समाधान की दिशा में निर्णायक प्रगति हो सकेगी।     -संदीप जैन, अधिवक्ता, मप्र हाई कोर्ट।