samacharsecretary.com

आस्था और टेक्नोलॉजी का संगम: अयोध्या में बनेगा दुनिया का पहला रामायण वैक्स म्यूजियम

लखनऊ राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद, अयोध्या एक और खास चीज तैयार हो गई है। ये शहर में आस्था, कला और पर्यटन का संगम है। ये होगा दुनिया का पहला रामायण-थीम वाला वैक्स म्यूजियम। म्यूजियम अब बनकर तैयार हो चुका है। सीएम योगी कल अपने अयोध्या दौरे पर इसका उद्घाटन करेंगे। यह म्यूज़ियम आने वालों को सीधे त्रेता युग या रामायण काल में ले जाने का वादा करता है। इसे आस्था के केंद्र और पर्यटकों के लिए एक बड़े आकर्षण के तौर पर देखा जा रहा है। यह पौराणिक कथाओं, टेक्नोलॉजी और कलाकारी का मेल दिखाते हुए एक अनोखा अनुभव देगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 19 जून को अयोध्या पहुंचकर नगर निगम की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं रामायण वैक्स म्यूजियम और अयोध्या धाम के नए जोनल कार्यालय का लोकार्पण करेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री वैक्स म्यूजियम परिसर में आयोजित समारोह को संबोधित भी करेंगे। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रामायण वैक्स म्यूजियम अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बनेगा। म्यूजियम में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान जी, ऋषि वशिष्ठ, रावण, मेघनाथ और जटायु सहित रामायण के 25 से अधिक प्रमुख पात्रों की जीवंत मोम प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। उद्घाटन के बाद इसे आम पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा। टिकट दरों और समय-सारिणी की घोषणा भी लोकार्पण के बाद की जाएगी। मुख्यमंत्री इसी दौरान मोहबरा बाजार क्षेत्र में 10.19 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए जोनल कार्यालय का भी उद्घाटन करेंगे। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, इस कार्यालय के शुरू होने से अयोध्या धाम क्षेत्र के नागरिकों को नगर निगम से संबंधित विभिन्न सेवाएं और सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकेंगी। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे को लेकर नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार सुबह महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी और नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश पांडे ने बताया कि निरीक्षण के दौरान राम कथा पार्क के निकट स्थित हेलीपैड स्थल पर घास की सफाई तथा खुले केबलों को भूमिगत करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा अधिकारियों ने ऋषिदेव जैन मंदिर और मनीरामदास की छावनी का निरीक्षण कर सफाई और सौंदर्यीकरण कार्यों की समीक्षा की। महापौर ने दोनों स्थलों को विशेष रूप से सजाने-संवारने के निर्देश दिए। नगर आयुक्त ने कार्यक्रम स्थलों पर पेयजल, स्वच्छता, चूना और ब्लीचिंग का छिड़काव, एंटी-लार्वा दवा के प्रयोग, फॉगिंग तथा धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी के छिड़काव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अपने इस दौरे के दौरान अयोध्या की कई अन्य विकास परियोजनाओं का भी लोकार्पण कर सकते हैं। निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त डॉ. नागेंद्र नाथ, भारत भार्गव, मुख्य महाप्रबंधक जलकल सौरभ श्रीवास्तव, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राममणि शुक्ल, अधिशासी अभियंता दीपांकर सिंह तथा सहायक अभियंता राजपति यादव सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

अच्छे लोग हमेशा नहीं जीतते”: चाणक्य नीति में सफलता की कड़वी सच्चाई

 आपने अनगिनत बार सुना होगा कि अच्छे बनो, सबका भला सोचो, धैर्य रखो. लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि अच्छे लोग सिर्फ कहानियों की किताबों में जीतते हैं, असल जिंदगी में नहीं. यह बात आपको अभी गलत लग रही होगी, लेकिन यही वह सच है जिससे कोई बच नहीं सकता है. दुनिया में वही लोग आगे बढ़ते हैं, जो समय के साथ अपनी सोच और नीति बदलना जानते हैं. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर सच्ची सफलता चाहिए, तो सिर्फ अच्छाई नहीं, नीति भी सीखनी पड़ेगी. यानी जरूरत पड़ने पर बुरा बनने का साहस भी रखना होगा, वरना दुनिया आपको कुचलकर आगे बढ़ जाएगी. अच्छाई कब बन जाती है कमजोरी? यह दुनिया मासूमों की नहीं, समझदारों की है. यहां अच्छाई को अक्सर कमजोरी, डर और इस्तेमाल करने लायक स्वभाव समझ लिया जाता है. लोग आपकी शांति को आपकी सीमा समझ लेते हैं. आपके त्याग को मूर्खता कह देते हैं. आपकी चुप्पी को आपकी हार मान लेते हैं लेकिन चाणक्य कहते हैं कि, 'जो समय की चाल नहीं समझता, उसका अच्छा चरित्र भी उसे नहीं बचा सकता.' चाणक्य का सूत्र आचार्य चाणक्य कहते हैं कि, 'अगर हर कोई आपसे खुश है, तो समझिए आपने कहीं न कहीं खुद से गद्दारी की है.' सबको खुश रखना सफलता नहीं है. असली जीत तब है जब आप सही के लिए अकेले खड़े हो सकें. तीन गुण जो हर व्यक्ति में जरूरी हैं लोमड़ी जैसी चालाकी- ताकि कोई आपकी मासूमियत का फायदा न उठा सके. कौवे जैसी बुद्धि- कब बोलना है और कब चुप रहना है. शेर जैसी निडरता- जरूरत पड़े तो दहाड़ सको. चाणक्य की सबसे बड़ी सीख अगर आप सांप हैं, तो जहर मत फैलाइए, लेकिन इतना जरूर दिखाइए कि आपके पास जहर है. यानी कि शांत रहिए, लेकिन कमजोर मत दिखिए, माफ कीजिए, लेकिन भूलिए मत, कम बोलिए, लेकिन सटीक बोलिए. श्रीकृष्ण से सीख जरा सोचिए कि श्रीकृष्ण अच्छे थे या बुरे? क्योंकि उन्होंने छल भी किया, रणनीति भी बनाई. लेकिन धर्म की रक्षा के लिए. वहीं दुर्योधन ने भी वही किया, लेकिन अपने अहंकार के लिए. दोनों की नीयत में फर्क था. इसलिए श्रीकृष्ण पूजे जाते हैं और दुर्योधन नकारे गए. असली समस्या क्या है? अच्छे लोग एक मानसिक जाल में फंस जाते हैं वे सबकी मदद करते हैं. खुद को पीछे रखते हैं और अंत में सबसे ज्यादा थके और टूटे हुए होते हैं. क्योंकि दुनिया आपकी अच्छाई नहीं, आपकी उपलब्धता देखती है. चाणक्य का गुरु मंत्र – लोगों के शब्द नहीं, उनकी नीयत पढ़ो. – जितना मीठा कोई बोले, उतना सतर्क रहो. – दूसरों की चाल समझो, अपनी चाल मत खोलो. – माफ करो, लेकिन सबक मत भूलो. – खुद को इतना मजबूत बनाओ कि कोई आपको तोड़ न सके.

पुलिस हिरासत से भागा आरोपी सैफ मांडर में पकड़ा गया, फिर फायरिंग के बाद मुठभेड़ में पैर में लगी गोली

 रांची आरएसएस कार्यालय पर बम से हमले के मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपित अमन और सैफ से पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें हाजत में बंद कर दिया था। इसी दौरान आरोपित सैफ पुलिस को चकमा देकर हाजत से फरार हो गया और मांडर की ओर भाग निकला। सूचना मिलते ही पुलिस ने उसका पीछा शुरू किया और मांडर टोल गेट के पास उसे पकड़ लिया। पुलिस सैफ को वापस रांची ला रही थी। इसी दौरान रास्ते में पुलिस की गाड़ी खराब हो गई। पुलिस के अनुसार मौके का फायदा उठाकर सैफ ने एक जवान की पिस्टल छीन ली और दोबारा भागने का प्रयास किया। इस दौरान उसने पुलिस टीम पर फायरिंग भी कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई, जिससे सैफ के पैर में गोली लग गई। इसके बाद पुलिस ने उसे फिर से दबोच लिया। घायल आरोपी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। दुबई में काम करते हैं अमन और सैफ पुलिस का कहना है कि सैफ और अमन दोनों दुबई में काम करते थे। वहीं काम करने के दौरान उनका संपर्क कथित तौर पर आतंकी संगठनों से हुआ था। दोनों करीब एक माह पहले भारत लौटे थे। आरएसएस कार्यालय पर हमला किस उद्देश्य से किया गया और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपितों से पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और जल्द ही मामले में बड़ा खुलासा किया जाएगा।

बिहार में ग्रीनफील्ड टाउनशिप योजना को मंजूरी, भू-स्वामियों को जमीन बेचने की मिली छूट

पटना  बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार के स्तर से पटना समेत 11 शहरों के पास घोषित सैटेलाइट टाउनशिप के लिए चिन्हित की गई जमीन पर लगी खरीद-बिक्री की रोक हटा दी गई है। ग्रीनफील्ड सैटनेलाइट टाउनशिप क्षेत्र में जमीन की खरीद-बिक्री की छूट देने से संबंधित प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। सम्राट कैबिनेट का बड़ा फैसला सीएम सम्राट चौधरी ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई थी। इसमें लिए गए निर्णयों के बारे में विस्तृत जानकारी मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सूचना भवन स्थित सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में दी। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि इन सैटेलाइट टाउनशिप की जद में जिनकी जमीन आई है, अब वे बिहार राज्य आवास बोर्ड को अपनी जमीन बेच सकते हैं। अब राज्य आवास बोर्ड को बेच सकते हैं जमीन सरकार ने फैसला लिया है कि यह जमीन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के स्तर से अधिसूचित बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 के अंतर्गत बिक्री की जा सकेगी। साथ ही राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद के स्तर से अनुमोदित निवेश परियोजनाओं के लिए संबंधित निवेशक को जमीन की खरीद-बिक्री करने की अनुमति प्रदान करने की भी स्वीकृति दी गई है। इस प्रावधान से भू-स्वामी की तत्कालिक वित्तीय आवश्यकताएं पूरी की जा सकेगी और सरकारी प्राधिकार अपनी योजनाओं के लिए भूमि का प्रबंध भी कर सकेगी। राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद के स्तर से अनुमोदित निवेश परियोजनाओं के लिए भी जमीन का प्रबंध हो सकेगा। राज्य के 500 स्थानों पर लगेगा आईटीएमएस  अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि राज्य में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने और सड़क दुर्घटनाओं को 22 फीसदी तक कम करने के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) मॉडल को लागू किया जाएगा। पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर पहले चरण में राज्य के 200 और दूसरे चरण में 300 स्थानों पर इस विशेष प्रणाली को लागू किया जाएगा। इस तरह राज्य में 500 स्थानों पर दो चरणों में इस नई प्रणाली को लागू करने की योजना है। बिहार के ट्रैफिक मैनेजमेंट पर खर्च होंगे 622 करोड़ रुपये इसके क्रियान्वयन पर आगामी 10 वर्षों (2026-27 से 2037-38) में 622 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। आईटीएमएस की मदद से वाहनों का ऑटोमेटिक चालान कटने से लेकर ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों या किसी संदिग्ध वाहनों की पहचान करने तक की व्यवस्था लागू हो जाएगी। इसमें लगाए जाने वाले अत्याधुनिक कैमरों की मदद से किसी वाहन के नंबर प्लेट से पूरी जानकारी एकत्र की जा सकती है। ऐसी कई अन्य सुविधाएं इस प्रणाली में मौजूद है।  

अब बिना निगरानी नहीं मिलेगी कफ सिरप, हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला

अंबाला. खांसी की सीरप अब सिर्फ एक सामान्य दवा नहीं, बल्कि निगरानी के दायरे में आने वाला उत्पाद बन गई है। केंद्र सरकार ने ड्रग्स नियमों में अहम बदलाव करते हुए उन प्रावधानों में संशोधन कर दिया है, जिनके तहत कुछ सीरप को विशेष छूट प्राप्त थी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से 9 जून 2026 को जारी राजपत्र अधिसूचना के बाद अब कफ सीरप और अन्य सीरप आधारित दवाओं की बिक्री, भंडारण और नियामकीय निगरानी पहले से अधिक सख्त कर दी गई है। दरअसल, केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स-1945 के शेड्यूल-के में संशोधन करते हुए सीरियल नंबर-13 के अंतर्गत आइटम नंबर-7 से सीरप शब्द को हटा दिया है। यह बदलाव सुनने में छोटा लग सकता है, लेकिन इसका असर दवा कारोबार, मेडिकल स्टोरों और उपभोक्ताओं तक दिखाई देगा। हरियाणा में भी जारी किए निर्देश विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में कफ सीरप के दुरुपयोग और नशे के लिए इस्तेमाल की घटनाएं बढ़ी हैं। कई राज्यों में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे मामलों में कार्रवाई भी की है। ऐसे में सरकार ने नियामकीय ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हरियाणा में भी इस अधिसूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। राज्य औषधि नियंत्रक रिपन मेहता ने सभी अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अनुसूचित दवाओं की बिक्री केवल वैध चिकित्सकीय पर्ची के आधार पर सुनिश्चित की जाए। नियमों के पालन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बिक्री रिकॉर्ड, प्रिस्क्रिप्शन सत्यापन और स्टॉक प्रबंधन को लेकर रहना होगा अधिक सतर्क इस बदलाव का सीधा असर मेडिकल स्टोर संचालकों पर पड़ सकता है। अब उन्हें दवा बिक्री के रिकार्ड, प्रिस्क्रिप्शन सत्यापन और स्टॉक प्रबंधन को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा। वहीं उपभोक्ताओं को भी कुछ सीरप खरीदने के लिए चिकित्सकीय सलाह और पर्ची की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि अधिसूचना में किसी विशेष ब्रांड या उत्पाद का नाम नहीं दिया गया है, लेकिन संकेत साफ हैं कि सरकार सीरप आधारित दवाओं की निगरानी को और कड़ा करना चाहती है यानी अब मेडिकल स्टोर पर जाकर एक कफ सीरप दे दो कहना पहले जितना आसान नहीं रह सकता। अधिकारियों को निर्देश जारी किए – ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक्स अधिनियम के तहत अनुसूचित दवाइयां बिना चिकित्सक के वैध प्रिस्क्रिप्शन के नहीं बेची जा सकती। कफ सीरप से संबंधित हाल ही में जारी अधिसूचना के मद्देनजर विशेष सतर्कता बरतने के सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। – रिपन मेहता, राज्य औषधि नियंत्रक, हरियाणा।

97 परीक्षा केंद्रों पर विशेष इंतजाम, अभिभावकों को मिलेगा पेयजल, शिकंजी और आरामदायक प्रतीक्षा सुविधा

नई दिल्ली  देशभर में 21 जून को होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के मद्देनजर दिल्ली सरकार ने मानवीय पहल की है। सरकार ने नीट परीक्षार्थियों के साथ-साथ अभिभावकों की सुविधा का भी विशेष प्रबंध किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहली बार है, जब परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देने वालों के साथ-साथ उनके माता-पिता और परिजनों के आराम एवं सुविधा को ध्यान में रखते हुए कूलिंग जोन बनाए जा रहे हैं, जहां उनके बैठने की सुविधा, स्वच्छ पेयजल, शिकंजी आदि आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में नीट परीक्षा के लिए कुल 97 केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 69 सरकारी विद्यालय में तथा 28 केंद्रीय विद्यालयों में हैं। इन परीक्षा केंद्रों के आसपास जिला प्रशासन द्वारा विशेष कूलिंग जोन स्थापित किए जा रहे हैं, जहां अभिभावकों और परिजनों के बैठने, विश्राम करने तथा गर्मी से राहत पाने की समुचित व्यवस्था रहेगी। उन्होंने कहा कि हर वर्ष लाखों परिवार अपने बच्चों के भविष्य के सपनों के साथ परीक्षा केंद्रों तक पहुंचते हैं। परीक्षा के दौरान परीक्षार्थी तो केंद्र के भीतर होते हैं, लेकिन बाहर कई घंटे तक प्रतीक्षा कर रहे माता-पिता की चिंता, धूप, गर्मी और असुविधा पर अक्सर किसी का ध्यान नहीं जाता। दिल्ली सरकार ने इस मानवीय पहलू को समझते हुए यह निर्णय लिया है कि परीक्षा के दिन अभिभावकों को असुविधा का सामना न करना पड़े। आरामदायक प्रतीक्षा व्यवस्था उपलब्ध होगी रेखा गुप्ता ने आगे कहा कि अब तक अक्सर देखा जाता था कि परीक्षा के दौरान परिजन कभी किसी पेड़ की छांव तलाशते थे, कभी पार्क में बैठकर समय बिताते थे, तो कभी आसपास की बाजारों में इधर-उधर भटकते रहते थे। कई लोगों को भीषण गर्मी में लंबे समय तक खड़ा रहना पड़ता था। अब ऐसी स्थिति नहीं होगी। परीक्षा केंद्रों के बाहर ही उनके लिए आरामदायक प्रतीक्षा व्यवस्था उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि डिविजनल कमिश्नर (डीएम) के निर्देश से संबंधित अधिकारी सभी परीक्षा केंद्रों के आसपास कूलिंग जोन की व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे हैं। इन कूलिंग जोन में बैठने की सुविधा, स्वच्छ पेयजल, शिकंजी, ओआरएस, चाय तथा प्राथमिक चिकित्सा जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी ताकि अभिभावकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। परीक्षा से जुड़ा अनुभव बनेगा बेहतर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल परीक्षा का सफल आयोजन नहीं, बल्कि परीक्षा से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के अनुभव को बेहतर बनाना है। जब अभिभावक सहज और निश्चिंत रहेंगे तो विद्यार्थियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और वे अधिक आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे सकेंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा और युवाओं के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों और उनके परिवारों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है। यह पहल केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि उन लाखों माता-पिता के प्रति सम्मान का प्रतीक है जो अपने बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए हर कदम पर उनके साथ खड़े रहते हैं। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि दिल्ली सरकार की यह पहल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी और भविष्य में देशभर में परीक्षाओं के दौरान अभिभावकों की सुविधा को भी समान महत्व दिया जाएगा। उन्होंने सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पूरी दिल्ली उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना कर रही है। दिल्ली में पहले से 15 कूलिंग जोन मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि दिल्ली सरकार केवल परीक्षा केंद्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भीषण गर्मी से आमजन को राहत पहुंचाने के लिए पहले से व्यापक इंतजाम कर रही है। इसके तहत राजधानी के विभिन्न इलाकों में 85 शेड स्थापित किए गए हैं, 15 कूलिंग जोन संचालित हो रहे हैं तथा 13 मोबाइल राहत वैन (मोबाइल हीट रिलीफ यूनिट) लगातार विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को गर्मी से राहत पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा के दौरान अभिभावकों के लिए की गई विशेष व्यवस्था भी इसी जनकल्याणकारी और संवेदनशील सोच का विस्तार है। अक्षय श्रीवास्तव

सात समंदर पार पहुंचेगी पठानकोट की मशहूर लीची, बंपर फसल से निर्यात को मिली रफ्तार

पठानकोट  पंजाब के पठानकोट की मशहूर लीची इस बार देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी मिठास बिखेरने जा रही है. अनुकूल मौसम और बेहतर उत्पादन के चलते इस बार लीची की बंपर फसल हुई है. यही वजह है कि अब पठानकोट की लीची की सप्लाई देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ लंदन, दुबई और सिंगापुर तक करने की तैयारी शुरू हो गई है. पठानकोट लंबे समय से अपनी उच्च गुणवत्ता वाली लीची के लिए जाना जाता है. जिले का वातावरण लीची की खेती के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. यही कारण है कि पंजाब में पठानकोट को लीची जोन घोषित किया गया है. यहां बड़े पैमाने पर लीची की खेती की जाती है और बागवानी विभाग भी किसानों को पूरा सहयोग देता है।  जानकारी के अनुसार इस समय पठानकोट में करीब 4 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लीची की खेती हो रही है. इस बार मौसम लीची के लिए अनुकूल रहा, जिसके चलते उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है. बागवानी विभाग का भी कहना है कि इस बार लीची की फसल बंपर हुई है. पठानकोट में मुख्य रूप से तीन किस्मों की लीची की पैदावार होती है. इनमें देहरादूनी, कलकती और सीडलेस लीची शामिल हैं. इन तीनों किस्मों की बाजार में अच्छी मांग रहती है. जून महीने में लीची की तुड़ाई का काम शुरू हो जाता है और इसके बाद इसे विभिन्न बाजारों तक पहुंचाया जाता है।  मौसम बना मेहरबान, पठानकोट में लीची की बंपर पैदावार एक व्यापारी ने बताया कि उन्होंने लीची का बाग ठेके पर लिया हुआ है. उनके अनुसार यहां से लीची पहले दिल्ली भेजी जाती है और उसके बाद विदेशों में निर्यात की जाती है. इस बार भी बड़े स्तर पर लीची की खेप तैयार की जा रही है, जिसे देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचाया जाएगा. वहीं एक बागवान ने बताया कि इस साल लीची की फसल काफी अच्छी हुई है. हालांकि पिछले दिनों आए तूफान और ओलावृष्टि के कारण कुछ नुकसान जरूर हुआ, लेकिन इसके बावजूद उत्पादन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा. उन्होंने कहा कि पठानकोट की लीची की मांग पूरे देश में रहती है और अब विदेशों में भी इसकी पहुंच बढ़ रही है।  बागवानों का कहना है कि विदेशी बाजारों में पहुंच मिलने से किसानों को बेहतर अवसर मिलेंगे. इससे पठानकोट की लीची को नई पहचान मिलने की उम्मीद है. इस संबंध में बागवानी विभाग के अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि पठानकोट की लीची पहले से ही देश के विभिन्न हिस्सों में भेजी जा रही है. अब विभाग के सहयोग और बागवानों के प्रयासों से इसे सिंगापुर, दुबई और लंदन भेजने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि जिले की जलवायु और मिट्टी लीची उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त।  बागवानों और बागवानी विभाग की मेहनत से खुला विदेशी बाजार इसी वजह से यहां की लीची की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है. विभाग लगातार किसानों के संपर्क में है और उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है. पठानकोट की लीची की बढ़ती मांग और इस बार की बंपर पैदावार ने किसानों और व्यापारियों दोनों के चेहरे पर खुशी ला दी है. अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि विदेशों के बाजारों में पठानकोट की यह मिठास कितना असर छोड़ती है।   

तकनीकी खराबी से AIIMS बठिंडा में हड़कंप, ब्लड सैंपल और रजिस्ट्रेशन सेवाएं प्रभावित

बठिंडा. पंजाब के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल AIIMS बठिंडा में गुरुवार सुबह तकनीकी गड़बड़ी के कारण पूरा डिजिटल सिस्टम अचानक ठप पड़ गया। सर्वर बंद होने से ओपीडी पर्चियां बनाने, मरीजों के पंजीकरण, जांच संबंधी प्रक्रियाओं और ब्लड सैंपल लेने जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। इसके चलते दूर-दराज के जिलों और पड़ोसी राज्यों से इलाज के लिए पहुंचे हजारों मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात यूपीएस (अनइंटरप्टेड पावर सप्लाई) में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे सर्वर को मिलने वाली बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। इसके बाद अस्पताल का केंद्रीय कंप्यूटर नेटवर्क काम करना बंद कर गया और लगभग पूरा डिजिटल सिस्टम ठप हो गया। सुबह से लगी लंबी कतारें गुरुवार सुबह जैसे ही मरीज इलाज और जांच के लिए AIIMS पहुंचे तो उन्हें पता चला कि कंप्यूटर सिस्टम बंद होने के कारण पर्चियां नहीं बन पा रही हैं। OPD के बाहर लंबी कतारें लग गईं और मरीज घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे। कई बुजुर्ग, महिलाएं और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज परेशान होकर इधर-उधर भटकते नजर आए। सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हुई जो सुबह खाली पेट ब्लड टेस्ट कराने पहुंचे थे। ब्लड सैंपल लेने की प्रक्रिया प्रभावित होने से उन्हें लंबे समय तक भूखे-प्यासे इंतजार करना पड़ा। कई मरीजों और उनके परिजनों ने अव्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। सूत्रों के मुताबिक, AIIMS बठिंडा में यह पहला मौका है जब केंद्रीय सर्वर प्रभावित होने से लगभग पूरा डिजिटल सिस्टम ही ठप पड़ गया हो। अस्पताल की अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन प्रणाली पर आधारित होने के कारण एक तकनीकी खराबी ने पूरे कामकाज को प्रभावित कर दिया। घटना के बाद अस्पताल की तकनीकी टीमें सर्वर को दोबारा चालू करने और सिस्टम को बहाल करने में जुटी रहीं, लेकिन कई घंटों तक सामान्य व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी। इस घटना ने AIIMS की बैकअप व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में इस प्रकार की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का मजबूत होना बेहद जरूरी है, ताकि किसी तकनीकी खराबी का खामियाजा मरीजों को न भुगतना पड़े। हैरानी की बात यह रही कि हजारों मरीजों की परेशानी के बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से देर शाम तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया। अधिकारियों ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों के बीच यह सवाल चर्चा का विषय बना रहा कि यदि भविष्य में इससे भी बड़ा तकनीकी संकट पैदा हो जाए तो उससे निपटने के लिए संस्थान के पास क्या वैकल्पिक व्यवस्था मौजूद है।

पाकिस्तानी गैंग्स्टरों और ISI से जुड़े नेटवर्क की जांच तेज, यूपी में पोस्टर लगाने की थी साजिश

लखनऊ  आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की टीम दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ करेगी। एटीएस ने इसके लिए दिल्ली पुलिस से संपर्क कर अभी तक की पूछताछ की जानकारी ली है। एटीएस को मिली जानकारी के अनुसार आरोपित उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में पाकिस्तानी गैंग्सटर शहजाद भट्टी, आबिद जट व अजमल गुर्जर के पोस्टर लगाने की तैयारी कर रहे थे। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने पिछले दिनों गाजियाबाद निवासी अनस, मोहित, आरिफ, साबिर, दीपक, जतन व मेरठ निवासी मोहम्मद रेहान को आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोपित पाकिस्तानी गैंग्सटरों के इशारे पर पाक खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए काम कर रहे थे। इन्हें पंजाब, हरियाणा, दिल्ली व उत्तर प्रदेश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने का लक्ष्य दिया गया था। इसके लिए आरोपितों ने कई संवेदनशील इमारतों की रेकी भी की थी। पाक गैंग्सटरों ने इन्हें पुलिसकर्मियों, नेताओं को मारने, राजनीतिक दलों के कार्यालयों व महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों को निशाना बनाने को कहा था। सूत्रों के अनुसार एटीएस की टीम यह जानने की कोशिश कर रही है कि आरोपितों ने अपने कितने साथियों को आतंकी गिरोह के साथ जोड़ा था। साथ ही इन्हें पिस्तौल व कारतूस किसने उपलब्ध कराए थे। साथ ही मेरठ में लगाए गए पाकिस्तानी गैंग्सटरों के पोस्टर कहां से छपवाए गए थे। इसके लिए आरोपितों को कितनी राशि उपलब्ध कराई गई थी। आरोपितों के मोबाइल से कई फोटो व वीडियो भी मिले हैं। इन्हें दिल्ली पुलिस ने एटीएस को भेजा है। इनमें एक वीडियो तहरीक-ए-तालिबान-हिंदुस्तान (टीटीएच) से भी संबंधित है। टीटीएच द्वारा इंटरनेट मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें स्लीपर सेल के लिए तैयार किया जा रहा है।

झारखंड राज्यसभा चुनाव में सियासी गणित और क्रॉस वोटिंग की अटकलें तेज

 रांची झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया. राज्य के सभी 81 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है. अब सबकी नजरें मतगणना और नतीजों पर टिकी हैं. शाम चार बजे से मतों की गिनती शुरू होगी और करीब सात बजे तक तस्वीर साफ हो जाएगी. अगले चार घंटे झारखंड की राजनीति के लिए सबसे बेचैन करने वाले साबित हो सकते हैं, क्योंकि दावे बहुत हैं और गणित उससे भी ज्यादा दिलचस्प है. तीन उम्मीदवारों के बीच है मुकाबला राज्यसभा चुनाव में कुल तीन उम्मीदवार मैदान में हैं. झामुमो ने बैजनाथ राम को प्रत्याशी बनाया है, कांग्रेस की ओर से प्रणव झा चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नथवानी मैदान में हैं. दो सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में मुकाबला संख्या बल, रणनीति और संभावित क्रॉस वोटिंग के इर्द-गिर्द घूम रहा है. यही वजह है कि मतदान समाप्त होने के बावजूद राजनीतिक हलचल थमी नहीं है. रिजॉर्ट पॉलिटिक्स भी रही चर्चा में इस बार राज्यसभा चुनाव के दौरान झारखंड में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स भी चर्चा का विषय बनी रही. मंगलवार से कांग्रेस और एनडीए के कई विधायकों को रांची के विभिन्न होटलों में ठहराया गया था. इसका मकसद विधायकों को एकजुट रखना और किसी भी तरह की राजनीतिक उठापटक से दूर रखना बताया गया. हालांकि झामुमो ने अपने विधायकों को किसी होटल या रिसॉर्ट में नहीं रखा. पार्टी नेतृत्व का कहना रहा कि उन्हें अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है. हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका पर भी नजर राज्यसभा चुनाव के दौरान हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म रखा. कई नेताओं ने साफ कहा कि यदि इंडिया गठबंधन के निर्धारित 56 वोटों से अधिक या एनडीए के 24 वोटों से काफी ज्यादा मत सामने आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर सवाल उठेंगे. यही कारण है कि मतगणना शुरू होने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा में कोई “खेला” होता है या फिर चुनावी मैदान में कोई “घोड़ा बिदक” जाता है. इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन 81 सदस्यीय विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक शामिल हैं. इसी संख्या बल के आधार पर गठबंधन ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा को जीत दिलाने का दावा इंडिया गठबंधन लगातार कर रहा है. एनडीए के पास 24 वोट, नथवानी पर दांव दूसरी तरफ एनडीए के पास कुल 24 वोट हैं. भाजपा के 21 विधायक हैं, जबकि आजसू, जदयू और लोजपा के एक-एक विधायक हैं. इसी समर्थन के आधार पर एनडीए ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी का समर्थन किया है. हालांकि मौजूदा संख्या के आधार पर नथवानी की राह आसान नहीं मानी जा रही है. ऐसे में उनकी जीत की संभावना काफी हद तक अतिरिक्त समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर मानी जा रही है. 28 वोट का जादुई आंकड़ा करेगा फैसला राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 28 वोट का जादुई आंकड़ा पार करना जरूरी है. बैजनाथ राम की स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और परिमल नथवानी के बीच असली मुकाबला माना जा रहा है. अब शाम सात बजे तक झारखंड की राजनीति की धड़कनें तेज रहेंगी. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन राज्यसभा जाएगा, बल्कि यह भी है कि क्या संख्या का गणित जीत जाएगा या फिर राजनीति का रसायन एक बार फिर सबको चौंका देगा. आखिर लोकतंत्र में बैलेट बॉक्स खुलने तक हर दावा सिर्फ दावा ही होता है, नतीजा नहीं.