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भीषण गर्मी से पंजाब बेहाल, पारा 42.5 डिग्री पार; थर्मल प्लांट बंद होने से बिजली संकट गहराया

चंडीगढ़  पंजाब में पारा 42.5 डिग्री पहुंच गया। हालांकि देर शाम कई जिलों में तेज हवाओं के साथ हुई बरसात ने गर्मी से राहत दिलाई। पंजाब में तापमान 1.5 डिग्री की वृद्धि के साथ सामान्य से 2.1 डिग्री ऊपर हो गया है। आने वाले दिनों में इस भीषण गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।  मौसम विभाग ने अगले तीन दिन के लिए पंजाब में यलो अलर्ट जारी कर दिया है। इस दौरान पंजाब में कई जगहों पर गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर की गति से तेज हवाएं चलेंगी और बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की कमी दर्ज की जा सकती है। इसके बाद 25 जून से पंजाब में मौसम शुष्क बन जाएगा। पंजाब के न्यूनतम तापमान में 0.6 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। यह सामान्य के नजदीक बना हुआ है। सबसे कम 22.8 डिग्री का न्यूनतम पारा रूपनगर का दर्ज किया गया। पंजाब में 42.5 डिग्री के साथ बठिंडा सबसे ज्यादा तपा। अमृतसर का अधिकतम पारा 38.3 डिग्री, लुधियाना का 39.8 डिग्री, पटियाला का 40.6 डिग्री, पठानकोट का 39.9 डिग्री, बठिंडा का 42.5 डिग्री, फिरोजपुर का 39.0 डिग्री, फाजिल्का का 40.6 डिग्री, होशियारपुर का 37.1 डिग्री, एसबीएस नगर का 37.3 डिग्री और रूपनगर का 39.1 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 27.1 डिग्री, लुधियाना का 29.0 डिग्री, पटियाला का 28.0 डिग्री, पठानकोट का 26.8 डिग्री, बठिंडा का 28.0 डिग्री, फाजिल्का का 26.1 डिग्री, फिरोजपुर का 27.0 डिग्री, होशियारपुर का 24.2 डिग्री दर्ज किया गया। बिजली संकट गहराया  भीषण गर्मी और धान सीजन के मध्य सूबे में बिजली संकट गहरा गया है। 920 मेगावाट की क्षमता वाले लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट की सभी चार यूनिट बंद हो गई हैं। इसके अलावा गोइंदवाल थर्मल का 270 मेगावाट की दो नंबर यूनिट और रोपड़ थर्मल प्लांट की 210 मेगावाट की क्षमता की 4 नंबर यूनिट भी बॉयलर ट्यूब में लीकेज के चलते बंद है।  सरकारी क्षेत्र के सभी तीन थर्मल प्लांटों के छह यूनिट बंद पड़ने से कुल 1400 मेगावाट बिजली उत्पादन बंद पड़ गया है। वहीं रविवार को पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 15568 मेगावाट दर्ज की गई। लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट की तीन यूनिट तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं, वहीं चौथी यूनिट भारी मात्रा में राख जमा होने के कारण ठप पड़ गई है। प्लांट के पूरी तरह से बंद होने का मुख्य कारण मुलाजिमों की हड़ताल को माना जा रहा है। थर्मल प्लांट के करीब 1800 ठेका मुलाजिम इस समय हड़ताल पर हैं। मुलाजिम मांग कर रहे हैं कि उन्हें ठेकेदारों के अधीन रखने के बजाय सीधे तौर पर पावरकाॅम के ठेके पर लिया जाए। ठेका मुलाजिमों का यह आंदोलन हालांकि 9 जून से चल रहा है लेकिन 16 जून से सभी मुलाजिम मुकम्मल हड़ताल पर चले गए हैं। इसके मद्देनजर प्लांट प्रबंधन ने जमा हुई राख को तुरंत साफ करने और बिजली उत्पादन दोबारा बहाल करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की मांग की है। प्लांट में करीब 500 रेगुलर मुलाजिम हैं जिनमें से करीब आधे केवल दफ्तरी कामों में लगे हुए हैं। इस कारण फील्ड के काम के लिए स्टाफ की बड़ी कमी आ रही है।  अघोषित कट भी लगने की संभावना  रविवार को पावरकाॅम के पास केवल 4143 मेगावाट बिजली की ही उपलब्धता रही। इसमें से प्रमुख तौर पर प्राइवेट क्षेत्र के तलवंडी साबो और राजपुरा थर्मल प्लांटों से 3023 मेगावाट, सरकारी क्षेत्र के थर्मलों से मात्र 609 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों से 369 मेगावाट बिजली की उपलब्धता हुई। पावरकाॅम अधिकारियों के मुताबिक गर्मी के इस पीक सीजन में पावरकाॅम को सस्ती बिजली अपने थर्मल प्लांटों से मिलनी थी लेकिन तकनीकी खराबी के चलते छह यूनिट बंद होने से अब बाहर से महंगे दामों में बिजली खरीदनी पड़ रही है। अधिकारियों के मुताबिक जरूरत पड़ने पर 10 रुपये प्रति यूनिट तक के दामों पर बाहर से बिजली खरीदी जा रही है। बिजली की मांग को 16000 मेगावाट से कम रखने के लिए अघोषित कट भी लगाए जा सकते हैं।  

देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चातुर्मास, 25 जुलाई से चार महीने तक शुभ कार्यों पर विराम

हिंदू धर्म में चातुर्मास के चार महीने बहुत ही शुभ माने जाते हैं. इन शुभ दिनों की शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है और समापन प्रबोधिनी यानी देवउठनी एकादशी पर होती है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी, जिसके चार महीने भगवान विष्णु को समर्पित हैं. जिसका समापन देवउठनी एकादशी पर 20 नवंबर को होगा. इस चातुर्मास में सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के महीनों का आगमन होगा.    क्या है चातुर्मास? देवशयनी एकादशी पर शुरू होने वाले चातुर्मास से भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा में चले जाते हैं. जिसके बाद उन चार महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. इसके बाद जैसे ही श्रीहरि देवउठनी एकादशी पर जागते हैं, उसी वक्त से सभी मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं. पौराणिक कथा के मुताबिक, चातुर्मास की कथा राजा बलि और श्रीहरि से जुड़ी हुई है. राजा बलि, जो असुरों के राजा थे, उन्होंने इंद्र से सत्ता छीनकर पूरे ब्रह्मांड पर राज करना शुरू कर दिया था. तब सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए. भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया, जो एक बौने ब्राह्मण के रूप में थे, और राजा बलि से तीन पग जमीन मांगी. फिर उन्होंने विशाल रूप धारण किया. पहले पग में पूरी पृथ्वी नाप ली, दूसरे पग में आकाश (मध्य लोक) को माप लिया. तीसरे पग के लिए जगह नहीं बची, तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया और भगवान से कहा कि वे तीसरा पग उनके सिर पर रख दें. पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु इन चार महीनों तक राजा बलि के द्वार पर ही रहते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन वापस आते हैं. इन चार महीनों में, जब देवता सोते हैं, तब असुर ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और लोगों को परेशान करते हैं. इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि इस समय हर व्यक्ति को कोई न कोई व्रत जरूर करना चाहिए. चातुर्मास वही सुरक्षा कवच है, जो अनुशासन और भक्ति से हमें बचाता है. क्या चातुर्मास में मांगलिक कार्य होते हैं? चातुर्मास के दौरान, यज्ञ, विवाह, जनेऊ (उपनयन), गृह प्रवेश और अन्य शुभ काम नहीं किए जाते है. इस समय शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य करना अशुभ माना जाता है. इसके बजाय, गृहस्थ लोगों के लिए यह समय अपनी आस्था को मजबूत करने का होता है. वे ध्यान करते हैं और व्रत रखते हैं. लेकिन रोज की पूजा, सत्यनारायण कथा, रुद्राभिषेक और भक्ति से जुड़े काम चातुर्मास में पूरी तरह किए जा सकते हैं, बल्कि इन्हें करना और भी अच्छा माना जाता है. यानि, इस दौरान शुभ कामों पर रोक लगाना आध्यात्मिक रुकावट नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा को भक्ति और साधना की ओर मोड़ना है. चातुर्मास में क्या खाना और क्या नहीं खाना चाहिए? चातुर्मास में भक्त कुछ खास चीजों का सेवन नहीं करते, जैसे गुड़, तेल, बैंगन और हरी पत्तेदार सब्जियां. साथ ही नमकीन और मसालेदार भोजन से भी परहेज किया जाता है. खासकर वैष्णव परंपरा को मानने वाले लोग इस दौरान तैलीय, ज्यादा नमक या मीठा खाने से बचते हैं. इसके अलावा प्याज, लहसुन और बैंगन भी नहीं खाते हैं. हर महीने के हिसाब से भी कुछ चीजों से परहेज किया जाता है- श्रावण में पालक और हरी सब्जियां नहीं खानी चाहिए. भाद्रपद में दही से बचना चाहिए. आश्विन में दूध नहीं पीना चाहिए. कार्तिक में मांसाहार, खासकर मछली नहीं खानी चाहिए. कैसे करें चातुर्मास में पूजा? चातुर्मास मनाने के लिए आपको कहीं बाहर जाने या मंदिर में रहने की जरूरत नहीं है. आप घर पर ही आसान तरीके से इसका पालन कर सकते हैं. – सुबह सूर्योदय से पहले उठें और भगवान विष्णु को दीपक जलाकर ताज़ी तुलसी के पत्ते अर्पित करें. – विष्णु सहस्रनाम या हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें. अगर आप एक माला भी जप लेते हैं, तो वह भी काफी माना जाता है. – इन चार महीनों में कम से कम एकादशी का व्रत जरूर रखें. – अपनी इच्छा से किसी एक चीज़ या आदत का त्याग करें, यही आपका व्यक्तिगत व्रत होगा. – भागवत पुराण या रामायण का पाठ करें या उनकी कथा सुनें. – दान-पुण्य करें, जैसे अन्नदान, गरीबों को भोजन कराना या मंदिर में सेवा करना.

सुरक्षा को प्राथमिकता: विकास मार्ग पर स्ट्रीट लाइट लगाने का फैसला, पैदल और साइकिल चालकों को फायदा

चंडीगढ़. शहर के दक्षिणी सेक्टरों में अंधेरे में डूबी साइकिल ट्रैकों को रोशन करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने करीब 1.95 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना शुरू करने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों की सुरक्षा बढ़ाना तथा झपटमारी और लूटपाट जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाना है। परियोजना के तहत विकास मार्ग पर सेक्टर 39/56, 55/40, 54/41, 53/42, 52/43, 51/44, 50/45, 49/46 और 48/47 के बीच स्थित साइकिल ट्रैकों पर प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। इन इलाकों में लंबे समय से पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई थीं। हाल के वर्षों में इन अंधेरे मार्गों पर कई झपटमारी और लूट के प्रयास सामने आए हैं। मार्च में सेक्टर-56 के पास एक व्यक्ति से सामान छीने जाने की घटना हुई थी, जबकि पिछले वर्ष सेक्टर-39 के निकट साइकिल ट्रैक पर एक राहगीर को खिलौना पिस्तौल दिखाकर लूटने का प्रयास किया गया था। शहर में 200 किलोमीटर से अधिक लंबा साइकिल ट्रैक नेटवर्क है, लेकिन दक्षिणी सेक्टरों में कई ट्रैक सुनसान क्षेत्रों, खाली प्लिटों और घने पेड़ों वाले इलाकों से होकर गुजरते हैं, जहां शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। पुलिस रिकॉर्ड भी बताते हैं कि अपराधी ऐसे कम रोशनी वाले और कम आवाजाही वाले क्षेत्रों को निशाना बना रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि नई स्ट्रीट लाइट व्यवस्था से दृश्यता बढ़ेगी, सुरक्षा मजबूत होगी और रात के समय साइकिल ट्रैकों का उपयोग अधिक सुरक्षित बन सकेगा।

दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट में सुरक्षा चूक, स्टेज पर चढ़ा खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारी

फेमस पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने ग्लोबल 'ऑरा वर्ल्ड टूर 2026' को लेकर सुर्खियों में हैं. हाल ही में सैन फ्रांसिस्को में चल रहे उनके एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए एक खालिस्तान-समर्थक प्रदर्शनकारी हाथ में झंडा लिए सीधे स्टेज पर जा पहुंचा. इस घटना से शो में मौजूद दर्शकों के बीच कुछ देर के लिए अफरातफरी और तनाव का माहौल बन गया. हालांकि, वहां मौजूद मुस्तैद वेन्यू सिक्योरिटी और स्थानीय पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला, उस व्यक्ति को काबू में किया और हिरासत में ले लिया. इस पूरे ड्रामे के बीच दिलजीत ने गजब के प्रोफेशनल रवैये का परिचय दिया और बिना डरे अपनी परफॉर्मेंस जारी रखी. शो के बीच में सुरक्षा में बड़ी चूक यह चौंकाने वाली घटना शुक्रवार की रात सैन फ्रांसिस्को में दिलजीत के लाइव शो के दौरान घटी. चश्मदीदों और मिली जानकारी के अनुसार, जब दिलजीत अपनी परफॉर्मेंस में डूबे हुए थे, तभी एक प्रदर्शनकारी अचानक दौड़ता हुआ मंच पर चढ़ गया. इसे सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी चूक के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, दिलजीत ने इस व्यवधान के बाद भी अपना आपा नहीं खोया. जैसे ही पुलिस उस व्यक्ति को पकड़कर ले गई, दिलजीत ने तुरंत अपना डांस और गाना फिर से शुरू कर दिया. उन्होंने पूरे शो के दौरान अपना पूरा ध्यान दर्शकों के मनोरंजन और प्रवासी भारतीय समुदाय की एकता पर केंद्रित रखा. धमकियों के बीच दिलजीत का कड़ा रुख यह हंगामा ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में 'सिख्स फॉर जस्टिस' (SFJ) जैसे कुछ कट्टरपंथी संगठनों की तरफ से ऑनलाइन धमकियां और रुकावटें डालने की कोशिशें देखी जा रही थीं. ये समूह मुख्यधारा के भारतीय मीडिया में दिलजीत की सक्रिय मौजूदगी का विरोध कर रहे हैं. इस घटना के बाद सिंगर ने लाइव इवेंट्स को लेकर अपना रुख एक बार फिर साफ कर दिया है. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि जो कोई भी उनके फैंस को परेशान करने या कॉन्सर्ट में खलल डालने की कोशिश करेगा, उसे स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों द्वारा फौरन बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा. सैन फ्रांसिस्को में टूर का शानदार समापन तनाव के इन पलों के बावजूद दिलजीत दोसांझ के नॉर्थ अमेरिकन 'ऑरा वर्ल्ड टूर 2026' का सफर बेहद शानदार रहा. इस बड़े स्टेडियम और एरिना टूर का समापन 20 और 21 जून, 2026 को सैन फ्रांसिस्को के मशहूर 'चेस सेंटर' में आयोजित हुए शोज़ के साथ हुआ, जहां फैंस की भारी भीड़ उमड़ी थी. लॉस एंजिल्स में मिला ऐतिहासिक सम्मान ग्लोबल स्तर पर दिलजीत का कद लगातार बढ़ रहा है. हाल ही में लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल ने वैश्विक मंच पर पंजाबी संगीत को पहचान दिलाने और अमेरिकी मनोरंजन जगत में दक्षिण एशियाई संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए दिलजीत को एक अनोखा सम्मान दिया है. काउंसिल ने बाकायदा एक प्रस्ताव पास करके 6 जनवरी, 2027 को आधिकारिक तौर पर 'दिलजीत दोसांझ दिवस' घोषित किया है.

भीषण गर्मी से बढ़ा बिजली का लोड, यूपी में मांग ने तोड़ा देश का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड

लखनऊ यूपी में बिजली आपूर्ति की अधिकतम मांग ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनाया है। रविवार देर रात बिजली की अधिकतम मांग ने 32348 मेगावॉट का नया आंकड़ा छू लिया। यह देश में अब तक की अधिकतम मांग का रिकॉर्ड है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे लेकर पोस्ट किया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र की अधिकतम मांग इस साल 13 मई को 32317 मेगावॉट गई थी। यह अब तक देश की अधिकतम मांग थी। यूपी ने रविवार को इस मांग को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। एके शर्मा ने इस उपलब्धि के लिए जनता और बिजली विभाग के सभी कर्मचारियों व अधिकारियों को शुभकामनाएं दी हैं। चढ़ते पारे से एक बार फिर बिजली की मांग में बेतरतीब इजाफा दर्ज किया जा रहा है। तकरीबन 10 दिनों के बाद बिजली की अधिकतम मांग बढ़कर 31 हजार मेगवॉट के पार चली गई है। बिजली की बढ़ती मांग के बीच चार पावर प्लांट ठप रहे, जिसकी वजह से बिजली के इंतजाम एक्सचेंज व अन्य स्रोतों से करना पड़ा। वहीं, बढ़ते लोड से बिजली फॉल्ट की संख्या भी बढ़ी है। बिजली की आवाजाही से जनता परेशान रही। बढ़ी हुई मांग की आपूर्ति बनाए रखना चुनौती जानकारों की मानें तो मौसम देखते हुए अभी बिजली की मांग में इजाफा दर्ज होगा। ऐसे में बिजली की आपूर्ति बनाए रखना पावर कॉरपोरेशन के लिए चुनौती से कम नहीं है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं के संयोजित भार और ट्रांसफॉरमरों के भार में करीब 2 करोड़ किलोवॉट का अंतर है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे कहते हैंकि उमस भरे मौसम में बिजली की मांग और भी बढ़ती है। ऐसे में अभी दर्ज हो रही मांग से ज्यादा अधिकतम मांग वाला समय मॉनसून में आएगा। निर्बाध आपूर्ति के लिए बेहतर होगा कि छांटे गए संविदा कर्मचारियों को बहाल किया जाए। इससे बिजली फॉल्ट जल्दी ठीक किए जा सकेंगे। और लोग कम परेशान होंगे। शनिवार-रविवार रात 31509 मेगावॉट तक पहुंच गई थी मांग शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात को करीब 1.30 बजे बिजली की अधिकतम मांग 31509 मेगावॉट पहुंच गई। वहीं, न्यूनतम मांग का आंकड़ा भी 24369 मेगावॉट दर्ज किया गया। इसके पहले 10 जून को बिजली की अधिकतम मांग 31894 मेगावॉट दर्ज की गई थी। हालांकि, इसके बाद से मौमस में नर्मी थी तो बिजली की मांग भी कम पड़ी थी। अब एक बार फिर मौसम तप रहा है और बिजली की मांग बढ़ रही है। मांग बढ़ने की वजह से ट्रांसफॉर्मरों पर लोड़ बढ़ रहा है। तमाम जगहों पर एरियल बंच कंडक्टर (एबीसी) जलने, केबल जल जाने और ट्रांसफॉर्मर फुंक जाने जैसी घटनाएं हो रही हैं। इस तरह के फॉल्ट की संख्या में बीते दो दिनों में इजाफा दर्ज किया गया है। ऐसे में बिजली की आवाजाही उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बनी हुई है। गर्मी में फॉल्ट की वजह से आपूर्ति बाधित होने से लेाग आक्रोशित हैं। वहीं, बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही उत्पादन इकाइयों के ठप होने से बिजली की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

रेत माफियाओं पर सख्ती: भाजपा नेता हत्याकांड के बाद रातभर चला संयुक्त उड़नदस्ता का अभियान

रायपुर. कोरिया जिले में रेत उत्खनन को लेकर हुए विवाद के बाद भाजपा नेता की भाजपा नेता द्वारा की गई जघन्य हत्या के बाद अब सरकार हरकत में आती नजर आ रही है. केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने बीती रात नदियों का औचक निरीक्षण किया. औचक निरीक्षण में अवैध भंडारण पर कार्रवाई करते हुए भंडारण करने वालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. संचालक आईएएस रजत बंसल के निर्देश पर सक्रिय हुए केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने बीती रात मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिला के तहसील केल्हारी में दंडाहस्वाही स्थित केवाई नदी, पसौरी, कुटरा और हसदेव नदी का निरीक्षण किया. इस दौरान स्वीकृत दो अस्थाई भण्डारण अनुज्ञप्ति स्थलों की सघन जांच की गई. मौके पर ड्रोन सर्वे के माध्यम से रेत की मात्रा का मापन किया गया. विभागीय जानकारी के अनुसार, केवल एमसीबी जिला ही नहीं, बल्कि संचालक के निर्देशानुसार राज्य के विभिन्न जिले के पहुंच विहीन क्षेत्र एवं अवैध रेत उत्खनन क्षेत्रों का चिन्हांकन कर हाईटेक ड्रोन सर्वे के माध्यम से से निगरानी की जा रही है, जिससे अवैध रेत खनन एवम भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके. इसके साथ ही जांच में केंद्रीय उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम के साथ जिला स्तरीय टीम मौजूद रहे. 

पंकज त्रिपाठी के बड़े भाई पर कुल्हाड़ी से हमला, जमीन विवाद में आरोपी गिरफ्तार

बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी के बड़े भाई को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आई है. एक्टर बड़े भाई विजयेंद्रनाथ तिवारी पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला हुआ है. हमले में एक्टर के भाई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. पंकज त्रिपाठी के भाई पर कब और कैसे हमला हुआ? जानकारी के मुताबिक, पंकज त्रिपाठी के बड़े भाई पर बिहार के गोपालगंज जिले में जमीन विवाद को लेकर हमला किया गया है. पुलिस के मुताबित, विजयेंद्रनाथ तिवारी पर कुल्हाड़ी से हमला 21 जून को माधवपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेलसंड तिवारी टोला में जमीन विवाद को लेकर किया गया है. सूचना मिलने के बाद सदर-2 के एसडीपीओ और माधोपुर थानाध्यक्ष मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की. किस हालत में हैं एक्टर के भाई? हमले में एक्टर के भाई गंभीर रूप से जख्मी हो गए, जिसके बाद विजयेंद्रनाथ तिवारी को घायल हालत में पहले गोपालगंज सदर अस्पताल ले जाया गया. वहां उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया गया. डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर और नियंत्रण में है. कौन है आरोपी? घटना की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल टीम को मौके पर बुलाकर सबूत जुटाए गए. पुलिस ने घटना में प्रयुक्त कुल्हाड़ी और आरोपी द्वारा पहने गए खून से सने कपड़े भी बरामद कर लिए हैं. शुरुआती जांच से पता चला है कि यह हमला लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद के कारण हुआ. पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान पीड़ित के पड़ोसी राजेश साह के रूप में हुई है, जिसने कथित तौर पर तिवारी पर कुल्हाड़ी से हमला किया है. पुलिस ने राजेश को गिरफ्तार कर लिया गया है. अब उसे न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया चल रही है. मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है. पुलिस का कहना है कि इलाके में कानून-व्यवस्था फिलहाल सामान्य है.

योगी सरकार का बड़ा एक्शन! 21 साल पुराने सपा कार्यालय पर चला बुलडोजर

सीतापुर  यूपी के सीतापुर में सुबह-सुबह समाजवादी पार्टी के ऑफिस में योगी सरकार का बुलडोजर गरजा। टॉउन हॉल परिसर में 21 साल पहले नजूल भूमि पर बना कार्यालय चार बुलडोजर की मदद से जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे। प्रशासन द्वारा नोटिस जारी होने पर दो दिन पहले सपा कार्यालय खाली कर दिया गया था। टाउन हॉल परिसर की नजूल भूमि को तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष राधेश्याम जायसवाल ने नियम विरुद्ध 15 जनवरी 2005 को समाजवादी पार्टी के कार्यालय संचालन के लिए आवंटित किया था। जिसका वार्षिक किराया केवल 100 रुपये था। आवंटन प्रक्रिया नियम विरुद्ध होने पर पूर्व में नगर पालिका ने उक्त आवंटन को निरस्त कर दिया था। आवंटन निरस्त होने के बाद भी सपा कार्यालय नियम विरुद्ध संचालित हो रहा था। बीते आठ जून को जिलाधिकारी न्यायालय ने नोटिस जारी कर कार्यालय को 15 दिन के भीतर खाली करने का आदेश जारी किया गया था। प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी। तय समय पूरा होने के पहले ही सपा जिलाध्यक्ष छत्रपाल यादव ने लगभग दो दिन पहले ही कार्यालय खाली कर दिया। कार्यालय खाली होने के बाद सोमवार इसके बाद सोमवार सुबह ही प्रशासनिक अधिकारी बुलडोजर लेकर समाजवादी पार्टी कार्यालय पर पहुंच गए। समाजवादी पार्टी कार्यालय की बिल्डिंग को बुलडोजर की मदद से जमीदाज कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सपा कार्यालय को दिया गया था नोटिस नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी सीमा सिंह ने कहा कि नियमों के तहत संबंधित पक्ष को विधिवत नोटिस जारी किया गया था। निर्धारित 15 दिन की अवधि पूरी होने के बाद भूमि को खाली कराया गया, क्योंकि उस पर अवैध कब्जा था। यहां एक पार्टी कार्यालय संचालित हो रहा था। प्रशासन का उद्देश्य इस भूमि को कब्जामुक्त कराकर सरकारी महाविद्यालय के निर्माण के लिए सुरक्षित करना है। बागपत में सरकारी जमीन पर बनी मस्जिद पर चला बुलडोजर उधर, बागपत के राजपुर खामपुर गांव में न्यायालय के आदेश पर प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बनी करीब 40 साल पुरानी मस्जिद को शनिवार को बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया। कार्रवाई के दौरान गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। प्रशासनिक अधिकारी पूरे अभियान की निगरानी करते रहे। राजपुर खामपुर गांव में तकिए वाली मस्जिद है। करीब पांच साल पहले गांव के एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई गई थी कि इस मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करके बनाया गया है। शिकायत के अनुसार तालाब की जमीन पर करीब 40 साल पहले मस्जिद का निर्माण कर लिया गया था। मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था। अब न्यायालय के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने पुलिस और राजस्व विभाग की टीम के साथ शनिवार को ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान गांव में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

जलवायु परिवर्तन का गहरा असर: बिहार में घट रही बारिश, बढ़ रहा तापमान

पटना बिहार सहित देश भर में जलवायु परिवर्तन का गंभीर असर अब साफ तौर पर दिखने लगा है, जिससे मौसम का स्वाभाविक तेवर पूरी तरह बिगड़ चुका है और ऋतुओं का स्वरूप बेरंग हो रहा है। मौसम विभाग ने पिछले दो दशकों में तेजी से बदले इस पर्यावरण संकट के कारणों का एक विशेष अध्ययन करने का फैसला लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार सहित देश भर में बारिश की गतिविधियां लगातार कम हो रही हैं और मानसून की चाल बुरी तरह बाधित हुई है। इस वजह से न केवल बारिश के दिनों में हीट वेव की स्थिति बन रही है, बल्कि सालभर के कुल वर्षापात (Rainfall) के आंकड़े भी साल-दर-साल लगातार घटते जा रहे हैं, जो कृषि प्रधान बिहार के लिए एक खतरे की बड़ी घंटी है। पिछले दो दशकों में 13 साल सूखा जैसे हालात आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 20 साल में बिहार के भीतर ऐसे 13 मौके आए हैं जब मानसून अवधि में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2025 में 31%, 2024 में 20%, 2023 में 23%, 2022 में 31% और 2018 में 25% कम वर्षा हुई थी, जबकि इस साल भी अब तक सूबे में 41% बारिश की भारी कमी बनी हुई है। जलवायु विशेषज्ञ प्रो. डॉ. प्रधान पार्थसारथी के अनुसार, बिहार में सावन और भादो के महीने में होने वाली पारंपरिक धीमी और लगातार बारिश, जिसे स्थानीय भाषा में 'झपसी' कहा जाता था, वह पिछले डेढ़ दशक से पूरी तरह गायब हो चुकी है। इस झपसी से न केवल धान की फसलों को प्रचुर लाभ मिलता था, बल्कि वातावरण का तापमान भी नियंत्रित रहता था, लेकिन अब नई पीढ़ी इस अनमोल मौसमी घटना से पूरी तरह वंचित हो चुकी है। देश के अलग-अलग केंद्रों को सौंपी गई जिम्मेदारी मौसम विभाग की इस विशेष योजना के तहत देश के विभिन्न प्रमुख केंद्रों को अध्ययन की अलग-अलग कमान सौंपी गई है। इसके तहत चंडीगढ़ केंद्र पश्चिमी विक्षोभ, अहमदाबाद हीट वेव व कोल्ड वेव, भोपाल मानसून के प्रसार, भुवनेश्वर ट्रॉपिकल साइक्लोन और जयपुर केंद्र डेजर्ट मेट्रोलॉजी पर अध्ययन करेगा, जबकि हैदराबाद को समेकित शहरी मौसम प्रणाली की जिम्मेदारी मिली है। गौरतलब है कि भारत में साल 1901 से 1930 की तुलना में 2015 से 2024 के बीच औसत तापमान में 0.9 डिग्री सेल्सियस की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के कारण हरित क्षेत्र में कमी, वज्रपात की अप्रत्याशित घटनाएं, शहरी बाढ़, ग्राउन्ड वाटर पर असर पड़ रहा है, जिसे रोकने के लिए अब यह वैज्ञानिक अध्ययन बेहद मील का पत्थर साबित होगा।

अयोध्या राम मंदिर दान घोटाले की जांच तेज, शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हो सकती है FIR

अयोध्या अयोध्या राम मंदिर दान में कथित हेराफेरी की जांच के लिए बनाई गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) अपनी अंतरिम रिपोर्ट आज देर शाम तक सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार, अंतरिम रिपोर्ट पूरी हो चुकी है। इसे आज शाम को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय को सौंपा जा सकता है। 15 दिन बाद फाइनल रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि में रामलला के चढ़ावे में धांधली की जांच के लिए गठित एसआईटी सोमवार को प्रारम्भिक रिपोर्ट शासन को सौंप सकती है। रिपोर्ट पूरी करने के लिए शासन से नामित वरिष्ठ जांच अधिकारी भले शनिवार शाम लखनऊ चले गए, लेकिन उनका स्टाफ देर रात तक श्रीराम जन्मभूमि परिसर के पीएफसी में कार्यरत रहा। यह टीम रविवार को भी पूरी सक्रियता से काम करती रही। 15 दिनों के बाद फाइनल रिपोर्ट सौंपी जाएगी। द्वितीय चरण की जांच एसआईटी सोमवार से शुरू करेगी। एसआईटी की प्रारम्भिक रिपोर्ट पर होगा मुकदमा टीम ने रिपोर्ट में शामिल लोगों के बयान में हुई भूल-चूक दुरुस्त करने के लिए दोबारा बुलाकर बयान दर्ज किया। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद यह टीम या इनका कोई अधिकृत व्यक्ति लखनऊ जाएगा और सोमवार को जांच टीम के अधिकारी रिपोर्ट शासन को सौंप देंगे। पुनः शासन के निर्देश पर अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित होगी, जिसमें प्रथम दृष्टया दोषसिद्धि के आधार पर संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। नृपेन्द्र के बयानों से असहज हो रहे ट्रस्टी अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में धांधली के साथ दिन-प्रतिदिन हो रहे नए खुलासों के बीच मीडिया में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पदेन सदस्य और भवन-निर्माण समिति चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र के बयान ने कठघरे में खड़े ट्रस्टियों को असहज कर दिया है। किसी ने कहा कि प्रशासनिक सेवा से वरिष्ठतम अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त होकर और मंदिर ट्रस्ट में शामिल होते हुए भी उनकी ओर से बयान जारी करना उचित नहीं प्रतीत होता है। इससे ट्रस्ट की छवि ही नहीं प्रभावित हो रही, बल्कि मीडिया को भी अनर्गल प्रलाप का मौका मिल गया है। कई लोगों ने लगाए संगीन आरोप एक सप्ताह के भीतर देखें तो एसआईटी की जांच के बीच कुछ लोगों ने निर्माण से लेकर मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाने वाले रुपए और धातुओं को गायब करने का आरोप लगाया है। सूत्र बताते हैं कि अब जांच के दूसरे चरण में सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से जिन लोगों ने विभिन्न प्रकार के आरोप लगाए हैं अब उनसे भी पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही पता चल सकेगा कि उनके दावे में कितनी सच्चाई थी। इसके बाद बड़ी कार्रवाई की चर्चा है।