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यात्रियों की जेब पर बढ़ा बोझ, तय किराये से अधिक वसूली पर डीटीओ सख्त

पटना राजधानी पटना में ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी से यात्रियों की भारी फजीहत हो रही है। इन चालकों ने बिना किसी सरकारी आदेश के किराये में अचानक बढ़ोतरी कर दी है। ऑटो और ई-रिक्शा चालक मनमाने ढंग से यात्रियों से पैसे वसूल रहे हैं। यह बात सामने आने के बाद अब डीटीओ ने चालकों पर ऐक्शन लेने की बात कही है। अभी हालत यह है कि बोरिंग रोड से राजापुर के बीच कई जगहों पर निर्धारित किराया सात रुपये है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से ऑटो और ई-रिक्शा चालक यात्रियों से 10 रुपये वसूल रहे हैं। इसी तरह पटना जंक्शन से कंकड़बाग का तय किराया 15 रुपये है, जबकि चालक 20 रुपये तक ले रहे हैं। वहीं बेली रोड से गोला रोड तक का किराया 30 रुपये निर्धारित है, लेकिन कई चालक 35 रुपये वसूल रहे हैं। अधिक किराया वसूले जाने को लेकर आए दिन यात्रियों और चालकों के बीच कहासुनी हो रही है। कई मामलों में जिला परिवहन अधिकारियों के औचक निरीक्षण के दौरान यात्रियों ने इसकी शिकायत भी की है। बता दें कि सीएनजी कीमतों में बढ़ोतरी के बाद ऑटो चालक संघ ने किराया बढ़ाने की मांग को लेकर परिवहन सचिव को पत्र भेजा है। हालांकि, अभी तक परिवहन विभाग की ओर से किराया बढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई है। नियमानुसार परिवहन विभाग की स्वीकृति मिलने के बाद ही पटना के प्रमंडलीय आयुक्त किराये में संशोधन का आदेश जारी कर सकते हैं। इसके बावजूद शहर के कई रूटों पर ऑटो और ई-रिक्शा चालक मनमाने तरीके से तीन से पांच रुपये अतिरिक्त वसूल रहे हैं। कई मामलों में अतिरिक्त किराया देने से इनकार करने पर यात्रियों के साथ विवाद भी हो रहा है। पटना के डीटीओ उपेंद्र कुमार पाल ने कहा कि राजधानी पटना समेत पूरे जिले में ऑटो और ई-रिक्शा के किराये में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। ऐसे में कोई भी चालक निर्धारित किराये से अधिक राशि नहीं वसूल सकता। इस संबंध में शिकायतें मिल रही हैं। जांच के दौरान दोषी पाए जाने पर संबंधित चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वाहन पर किराया प्रदर्शित करना अनिवार्य पटना जिला परिवहन कार्यालय के अनुसार जब भी किराये में आधिकारिक रूप से बढ़ोतरी की जाएगी, इसकी सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी। इसके बाद सभी ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को अपने वाहन पर रूटवार किराया सूची प्रदर्शित करनी होगी, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई रूटों पर चालक खुले पैसे (खुदरा) नहीं होने का हवाला देकर यात्रियों को एक-दो रुपये कम वापस करते हैं। इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी यात्रियों को उठाना पड़ता है।

हरियाणा कैबिनेट बैठक आज: नई शिक्षक नीति और कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर होगा फैसला

चंडीगढ़. हरियाणा मंत्रिपरिषद की बैठक सोमवार को होगी, जिसमें कई अहम फैसलों पर मुहर लगेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा तैयार नई शिक्षक नीति को स्वीकृति दी जा सकती है। इसके अलावा विभिन्न विभागों ने भी कुछ नीतियों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जिस पर चर्चा होगी। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह बैठक हरियाणा सचिवालय में सुबह 11 बजे होनी थी, लेकिन अचानक से समय में परिवर्तन कर दिया गया है। अब यह बैठक सुबह दस बजे होगी, जिसके लिए सभी मंत्रियों और प्रशासनिक सचिवों को सूचित कर दिया गया है। बैठक में करीब एक दर्जन प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। जिनमें विकास परियोजनाओं, भर्ती प्रक्रियाओं, कृषि, उद्योग तथा बुनियादी ढांचा विकास से जुड़े विषय शामिल हैं। इसके अलावा कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी पुनर्नियुक्ति देने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

महाभारत की वो वीरांगनाएं, जिनकी शक्तियां इतिहास के पन्नों में छिप गईं

महाभारत काल की जब भी बात होती है, तो अक्सर वीर पुरुषों के नाम और उनके पराक्रम की कहानियां ही सामने आती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस समय कुछ ऐसी वीर और शक्तिशाली स्त्रियां भी थीं, जिनकी अद्भुत शक्तियां इतिहास के पन्नों में कहीं दबकर रह गईं. आखिर कौन थीं ये स्त्रियां और क्यों इनकी चर्चा कम होती है, आइए जानते हैं. 1. हिडिंबा इसमें सबसे पहला नाम आता है हिडिंबा का. वह एक भयानक राक्षस हिडिंब की बहन थी और खुद भी कई मायावी शक्तियों की स्वामिनी थी. वह रूप बदलने में माहिर थी और एक साथ कई लोगों को आकाश में उठा सकती थी. महाभारत के मुताबिक, लाक्षागृह से बचने के बाद जब पांडव जंगल में रुके थे, तब हिडिंब ने अपनी बहन को उन्हें मारने भेजा. लेकिन भीम को देखकर हिडिंबा मोहित हो गई और सुंदर स्त्री का रूप धारण कर लिया. बाद में भीम और हिडिंब के बीच युद्ध हुआ, जिसमें हिडिंब मारा गया और भीम ने हिडिंबा से विवाह कर लिया. हिडिंबा के पास एक और अद्भुत शक्ति थी, वह गर्भ धारण करते ही तुरंत संतान को जन्म दे सकती थी. इसी से घटोत्कच का जन्म हुआ था. 2. गांधारी गांधार देश के राजा सुबल की पुत्री होने के कारण उनका नाम गांधारी पड़ा था. वह भगवान शिव की महान भक्त थीं और उन्हें 100 पुत्रों का वरदान मिला था. उनकी आंखों में अद्भुत शक्ति थी. उन्होंने अपने तप और शक्ति से दुर्योधन के शरीर को वज्र समान मजबूत बना दिया था. हालांकि, श्रीकृष्ण की रणनीति के कारण उसकी जांघ कमजोर रह गई. महाभारत युद्ध के बाद गांधारी ने पांडवों को क्षमा कर दिया, लेकिन श्रीकृष्ण को पूरे वंश के नाश का श्राप दिया था. इससे उनकी शक्ति का अंदाजा लगाया जा सकता है. 3. कुंती कुंती एक तपस्वी और अत्यंत बुद्धिमान स्त्री थीं. उन्हें ऋषि दुर्वासा से एक चमत्कारी मंत्र प्राप्त हुआ था, जिससे वह किसी भी देवता का आह्वान कर सकती थीं. इसी मंत्र के प्रभाव से कर्ण का जन्म हुआ. बाद में उन्होंने यह मंत्र माद्री को भी दिया था. पति की मृत्यु के बाद कुंती ने अपने पुत्रों का पालन-पोषण किया और उन्हें योग्य शिक्षा दिलाई. उन्होंने पांडवों को उनका अधिकार दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी राजनीतिक समझ और धैर्य उन्हें विशेष बनाता है. 4. उलूपी उलूपी नागराज वासुकी की दत्तक पुत्री थीं और उन्हें नागकन्या व जलपरी दोनों रूपों में जाना जाता है. अर्जुन जब अपने अभियान पर थे, तब उनकी मुलाकात उलूपी से हुई. उलूपी अर्जुन को पाताल लोक ले गई और उनसे विवाह किया. उसने अर्जुन को जल में अजेय होने का वरदान दिया था. 5. भानुमती भानुमती कंबोज के राजा की पुत्री थीं. वह बेहद सुंदर, बलशाली और बुद्धिमान थीं. उनके स्वयंवर में कई राजा आए थे, लेकिन दुर्योधन ने उनसे बलपूर्वक विवाह किया था. कहा जाता है कि भानुमती कुश्ती में निपुण थीं और कई बार दुर्योधन को भी हरा देती थीं. उनकी ताकत और बुद्धिमत्ता उन्हें खास बनाती है. 6. सत्यवती सत्यवती, राजा शांतनु की पत्नी थीं. उनका जन्म मछली के गर्भ से हुआ था, इसलिए उन्हें मत्स्यगंधा कहा जाता था. ऋषि पराशर ने उन्हें वरदान दिया, जिससे उनके शरीर से सुगंध आने लगी और उनका नाम सत्यवती पड़ा था. सत्यवती राजनीति और कूटनीति में निपुण थीं. उनके कारण ही भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया, जो आगे चलकर महाभारत युद्ध की नींव बना.

ग्लास स्किन पाने के आसान घरेलू उपाय, रसोई की चीजों से निखरेगा चेहरा

आजकल कोरियंस की तरह 'ग्लास स्किन' का ट्रेंड हर तरफ छाया हुआ है. 'ग्लास स्किन' ऐसी स्किन होती है जो साफ, हाइड्रेटेड और चमकदार हो. इसी वजह से इन दिनों कोरियन स्किनकेयर का ट्रेंड लोगों के बीच काफी पॉपुलर हो रहा है. सोशल मीडिया पर दमकती स्किन देखकर कई लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीद लेते हैं, लेकिन हर बार खूबसूरत स्किन पाने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना जरूरी नहीं होता. दरअसल, कोरियन स्किनकेयर में इस्तेमाल होने वाली कुछ फायदेमंद चीजें आपकी रसोई में भी आसानी से मिल सकती हैं. ये स्किन को हाइड्रेट रखने, उसे मुलायम बनाने और नेचुरल ग्लो बढ़ाने में मदद कर सकती हैं. आज हम आपको ऐसे ही कुछ इंग्रीडिएंट्स के बारे में बताएंगे, जो ग्लास स्किन पाने में आपके काम आ सकते हैं. बस इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करना आना चाहिए. 1. चावल का पानी: इस लिस्ट में सबसे पहला नाम चावल के पानी का आता है. कोरियन ब्यूटी रूटीन में चावल का पानी बहुत खास माना जाता है. इसमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स स्किन को ताजगी देने में मदद करते हैं. नियमित रूप से चेहरे पर चावल का पानी लगाने से स्किन ज्यादा फ्रेश और निखरी हुई दिखाई दे सकती है. कैसे इस्तेमाल करें? चावल का पानी स्किन के लिए इस्तेमाल करने के लिए चावल को रातभर पानी में भिगो दें. सुबह इस पानी छानकर एक बोतल में भर लें. इसे टोनर की तरह कॉटन की मदद से चेहरे पर लगाएं. 2. ग्रीन टी: लिस्ट में दूसरा नाम ग्रीन टी का आता है, जिसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. ये स्किन को किसी भी तरह के बाहरी नुकसान से बचाने में मदद करते हैं. ये स्किन को शांत रखने और चेहरे पर नेचुरल चमक लाने में भी मददगार मानी जाती है. कैसे इस्तेमाल करें? चेहरे पर ग्रीन टी का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले ग्रीन टी बैग को गर्म पानी में डालें. इसके बाद पानी को ठंडा होने दें. ठंडा होने के बाद उस पानी को कॉटन से चेहरे पर लगाएं. इसे नेचुरल टोनर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. 3. शहद: इसमें शहद का नाम भी शामिल है. ये एक नेचुरल मॉइश्चराइजर है. शहद लगाने से स्किन में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है और इसके साथ-साथ उसे सॉफ्ट और हेल्दी दिखाने में मदद करता है. कैसे इस्तेमाल करें? एक चम्मच शहद को सीधे चेहरे पर लगाएं. 15 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें. चाहें तो बेसन और हल्दी के साथ मिलाकर फेस पैक भी बना सकते हैं. 4. खीरा: खीरा गर्मियों में न केवल खाने के लिए बल्कि स्किन पर लगाने के लिए भी बहुत बढ़िया होता है. खीरा स्किन को ठंडक और हाइड्रेशन देने के लिए जाना जाता है. ये चेहरे की थकान कम करने और स्किन को फ्रेश महसूस कराने में मदद कर सकता है. कैसे इस्तेमाल करें? इसका इस्तेमाल करने के लिए खीरे के पतले टुकड़े काटकर चेहरे और आंखों पर रखें. 10-15 मिनट बाद इन्हें हटा दें. इससे स्किन तरोताजा महसूस होती है. 5. एलोवेरा: स्किन की देखभाल करने के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल दशकों से किया जा रहा है. ये स्किन को नमी देने और उसे शांत रखने में मदद करता है. कैसे इस्तेमाल करें? इसे चेहरे पर इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले ताजा एलोवेरा जेल निकाल लें. उसके बाद उसे चेहरे पर लगाएं. इसे 15-20 मिनट बाद धो लें. चाहें तो एलोवेरा जेल की आइस क्यूब बनाकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. सिर्फ घरेलू नुस्खों से रातों-रात नहीं मिलेगी ग्लास स्किन एक्सपर्ट्स के अनुसार ग्लास स्किन कोई जादू नहीं है. ग्लास स्किन पाने के लिए अच्छे हाइड्रेशन, प्रॉपर स्किनकेयर और हेल्दी लाइफस्टाइल की जरूरत होती है. ये घरेलू उपाय स्किन की देखभाल में मदद कर सकते हैं, लेकिन इनके परिणाम धीरे-धीरे दिखाई देते हैं.

नीम करोली बाबा के 4 जीवन सूत्र, जो बदल सकते हैं आपकी सोच और जीवन

नीम करोली बाबा के 4 जीवन-बदलने वाले सूत्र नीम करोली बाबा सादगी और भक्ति के प्रतीक थे.  उनका मानना था कि सुख-समृद्धि पाने के लिए किसी कठिन अनुष्ठान की जरूरत नहीं है, बस कुछ छोटी बातों को जीवन में उतारना काफी है. 1. हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें बाबा हनुमान जी के परम भक्त थे.  उनका कहना था कि हनुमान चालीसा की हर पंक्ति एक मंत्र की तरह है.  जो व्यक्ति रोजाना पूरी श्रद्धा के साथ सुबह-शाम हनुमान चालीसा पढ़ता है, उसके जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं. 2. गुरु का आशीर्वाद और मार्गदर्शन लें जीवन में एक गुरु का होना बहुत जरूरी है.  उनके अनुसार, जिसने गुरु चुन लिया, उसे उनके सानिध्य में रहते हुए उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए.  गुरु का आशीर्वाद ही सबसे बड़ी पूंजी है, जो इंसान को सही दिशा दिखा कर उसे भटकने नहीं देता. 3. बुरे वक्त में धैर्य रखें जीवन है तो उतार-चढ़ाव तो आएंगे ही. बाबा सिखाते थे कि कठिन समय में घबराना नहीं चाहिए.  हर अंधेरी रात के बाद सवेरा जरूर होता है. यदि आप अपनी ईश्वर/शक्ति पर पूरा भरोसा रखेंगे, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी आसान हो जाएगी. 4. धन का सही इस्तेमाल करें असली अमीर वह नहीं है जिसके पास बहुत पैसा है, बल्कि वह है जो धन को सही जगह खर्च करता है. नीम करोली बाबा कहते थे कि अपने धन का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों की सेवा और परोपकार में लगाना चाहिए.  जो पैसा दूसरों की भलाई में काम आता है, वह कभी कम नहीं होता, बल्कि बरकत लेकर आता है.

भीषण गर्मी से पंजाब बेहाल, पारा 42.5 डिग्री पार; थर्मल प्लांट बंद होने से बिजली संकट गहराया

चंडीगढ़  पंजाब में पारा 42.5 डिग्री पहुंच गया। हालांकि देर शाम कई जिलों में तेज हवाओं के साथ हुई बरसात ने गर्मी से राहत दिलाई। पंजाब में तापमान 1.5 डिग्री की वृद्धि के साथ सामान्य से 2.1 डिग्री ऊपर हो गया है। आने वाले दिनों में इस भीषण गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है।  मौसम विभाग ने अगले तीन दिन के लिए पंजाब में यलो अलर्ट जारी कर दिया है। इस दौरान पंजाब में कई जगहों पर गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर की गति से तेज हवाएं चलेंगी और बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की कमी दर्ज की जा सकती है। इसके बाद 25 जून से पंजाब में मौसम शुष्क बन जाएगा। पंजाब के न्यूनतम तापमान में 0.6 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। यह सामान्य के नजदीक बना हुआ है। सबसे कम 22.8 डिग्री का न्यूनतम पारा रूपनगर का दर्ज किया गया। पंजाब में 42.5 डिग्री के साथ बठिंडा सबसे ज्यादा तपा। अमृतसर का अधिकतम पारा 38.3 डिग्री, लुधियाना का 39.8 डिग्री, पटियाला का 40.6 डिग्री, पठानकोट का 39.9 डिग्री, बठिंडा का 42.5 डिग्री, फिरोजपुर का 39.0 डिग्री, फाजिल्का का 40.6 डिग्री, होशियारपुर का 37.1 डिग्री, एसबीएस नगर का 37.3 डिग्री और रूपनगर का 39.1 डिग्री दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 27.1 डिग्री, लुधियाना का 29.0 डिग्री, पटियाला का 28.0 डिग्री, पठानकोट का 26.8 डिग्री, बठिंडा का 28.0 डिग्री, फाजिल्का का 26.1 डिग्री, फिरोजपुर का 27.0 डिग्री, होशियारपुर का 24.2 डिग्री दर्ज किया गया। बिजली संकट गहराया  भीषण गर्मी और धान सीजन के मध्य सूबे में बिजली संकट गहरा गया है। 920 मेगावाट की क्षमता वाले लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट की सभी चार यूनिट बंद हो गई हैं। इसके अलावा गोइंदवाल थर्मल का 270 मेगावाट की दो नंबर यूनिट और रोपड़ थर्मल प्लांट की 210 मेगावाट की क्षमता की 4 नंबर यूनिट भी बॉयलर ट्यूब में लीकेज के चलते बंद है।  सरकारी क्षेत्र के सभी तीन थर्मल प्लांटों के छह यूनिट बंद पड़ने से कुल 1400 मेगावाट बिजली उत्पादन बंद पड़ गया है। वहीं रविवार को पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 15568 मेगावाट दर्ज की गई। लहरा मुहब्बत थर्मल प्लांट की तीन यूनिट तकनीकी खराबी के कारण बंद हैं, वहीं चौथी यूनिट भारी मात्रा में राख जमा होने के कारण ठप पड़ गई है। प्लांट के पूरी तरह से बंद होने का मुख्य कारण मुलाजिमों की हड़ताल को माना जा रहा है। थर्मल प्लांट के करीब 1800 ठेका मुलाजिम इस समय हड़ताल पर हैं। मुलाजिम मांग कर रहे हैं कि उन्हें ठेकेदारों के अधीन रखने के बजाय सीधे तौर पर पावरकाॅम के ठेके पर लिया जाए। ठेका मुलाजिमों का यह आंदोलन हालांकि 9 जून से चल रहा है लेकिन 16 जून से सभी मुलाजिम मुकम्मल हड़ताल पर चले गए हैं। इसके मद्देनजर प्लांट प्रबंधन ने जमा हुई राख को तुरंत साफ करने और बिजली उत्पादन दोबारा बहाल करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की मांग की है। प्लांट में करीब 500 रेगुलर मुलाजिम हैं जिनमें से करीब आधे केवल दफ्तरी कामों में लगे हुए हैं। इस कारण फील्ड के काम के लिए स्टाफ की बड़ी कमी आ रही है।  अघोषित कट भी लगने की संभावना  रविवार को पावरकाॅम के पास केवल 4143 मेगावाट बिजली की ही उपलब्धता रही। इसमें से प्रमुख तौर पर प्राइवेट क्षेत्र के तलवंडी साबो और राजपुरा थर्मल प्लांटों से 3023 मेगावाट, सरकारी क्षेत्र के थर्मलों से मात्र 609 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों से 369 मेगावाट बिजली की उपलब्धता हुई। पावरकाॅम अधिकारियों के मुताबिक गर्मी के इस पीक सीजन में पावरकाॅम को सस्ती बिजली अपने थर्मल प्लांटों से मिलनी थी लेकिन तकनीकी खराबी के चलते छह यूनिट बंद होने से अब बाहर से महंगे दामों में बिजली खरीदनी पड़ रही है। अधिकारियों के मुताबिक जरूरत पड़ने पर 10 रुपये प्रति यूनिट तक के दामों पर बाहर से बिजली खरीदी जा रही है। बिजली की मांग को 16000 मेगावाट से कम रखने के लिए अघोषित कट भी लगाए जा सकते हैं।  

देवशयनी एकादशी से शुरू होगा चातुर्मास, 25 जुलाई से चार महीने तक शुभ कार्यों पर विराम

हिंदू धर्म में चातुर्मास के चार महीने बहुत ही शुभ माने जाते हैं. इन शुभ दिनों की शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है और समापन प्रबोधिनी यानी देवउठनी एकादशी पर होती है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार देवशयनी एकादशी 25 जुलाई को मनाई जाएगी, जिसके चार महीने भगवान विष्णु को समर्पित हैं. जिसका समापन देवउठनी एकादशी पर 20 नवंबर को होगा. इस चातुर्मास में सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक के महीनों का आगमन होगा.    क्या है चातुर्मास? देवशयनी एकादशी पर शुरू होने वाले चातुर्मास से भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा में चले जाते हैं. जिसके बाद उन चार महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है. इसके बाद जैसे ही श्रीहरि देवउठनी एकादशी पर जागते हैं, उसी वक्त से सभी मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं. पौराणिक कथा के मुताबिक, चातुर्मास की कथा राजा बलि और श्रीहरि से जुड़ी हुई है. राजा बलि, जो असुरों के राजा थे, उन्होंने इंद्र से सत्ता छीनकर पूरे ब्रह्मांड पर राज करना शुरू कर दिया था. तब सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में गए. भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया, जो एक बौने ब्राह्मण के रूप में थे, और राजा बलि से तीन पग जमीन मांगी. फिर उन्होंने विशाल रूप धारण किया. पहले पग में पूरी पृथ्वी नाप ली, दूसरे पग में आकाश (मध्य लोक) को माप लिया. तीसरे पग के लिए जगह नहीं बची, तो राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया और भगवान से कहा कि वे तीसरा पग उनके सिर पर रख दें. पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु इन चार महीनों तक राजा बलि के द्वार पर ही रहते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन वापस आते हैं. इन चार महीनों में, जब देवता सोते हैं, तब असुर ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और लोगों को परेशान करते हैं. इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि इस समय हर व्यक्ति को कोई न कोई व्रत जरूर करना चाहिए. चातुर्मास वही सुरक्षा कवच है, जो अनुशासन और भक्ति से हमें बचाता है. क्या चातुर्मास में मांगलिक कार्य होते हैं? चातुर्मास के दौरान, यज्ञ, विवाह, जनेऊ (उपनयन), गृह प्रवेश और अन्य शुभ काम नहीं किए जाते है. इस समय शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्य करना अशुभ माना जाता है. इसके बजाय, गृहस्थ लोगों के लिए यह समय अपनी आस्था को मजबूत करने का होता है. वे ध्यान करते हैं और व्रत रखते हैं. लेकिन रोज की पूजा, सत्यनारायण कथा, रुद्राभिषेक और भक्ति से जुड़े काम चातुर्मास में पूरी तरह किए जा सकते हैं, बल्कि इन्हें करना और भी अच्छा माना जाता है. यानि, इस दौरान शुभ कामों पर रोक लगाना आध्यात्मिक रुकावट नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा को भक्ति और साधना की ओर मोड़ना है. चातुर्मास में क्या खाना और क्या नहीं खाना चाहिए? चातुर्मास में भक्त कुछ खास चीजों का सेवन नहीं करते, जैसे गुड़, तेल, बैंगन और हरी पत्तेदार सब्जियां. साथ ही नमकीन और मसालेदार भोजन से भी परहेज किया जाता है. खासकर वैष्णव परंपरा को मानने वाले लोग इस दौरान तैलीय, ज्यादा नमक या मीठा खाने से बचते हैं. इसके अलावा प्याज, लहसुन और बैंगन भी नहीं खाते हैं. हर महीने के हिसाब से भी कुछ चीजों से परहेज किया जाता है- श्रावण में पालक और हरी सब्जियां नहीं खानी चाहिए. भाद्रपद में दही से बचना चाहिए. आश्विन में दूध नहीं पीना चाहिए. कार्तिक में मांसाहार, खासकर मछली नहीं खानी चाहिए. कैसे करें चातुर्मास में पूजा? चातुर्मास मनाने के लिए आपको कहीं बाहर जाने या मंदिर में रहने की जरूरत नहीं है. आप घर पर ही आसान तरीके से इसका पालन कर सकते हैं. – सुबह सूर्योदय से पहले उठें और भगवान विष्णु को दीपक जलाकर ताज़ी तुलसी के पत्ते अर्पित करें. – विष्णु सहस्रनाम या हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें. अगर आप एक माला भी जप लेते हैं, तो वह भी काफी माना जाता है. – इन चार महीनों में कम से कम एकादशी का व्रत जरूर रखें. – अपनी इच्छा से किसी एक चीज़ या आदत का त्याग करें, यही आपका व्यक्तिगत व्रत होगा. – भागवत पुराण या रामायण का पाठ करें या उनकी कथा सुनें. – दान-पुण्य करें, जैसे अन्नदान, गरीबों को भोजन कराना या मंदिर में सेवा करना.

सुरक्षा को प्राथमिकता: विकास मार्ग पर स्ट्रीट लाइट लगाने का फैसला, पैदल और साइकिल चालकों को फायदा

चंडीगढ़. शहर के दक्षिणी सेक्टरों में अंधेरे में डूबी साइकिल ट्रैकों को रोशन करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने करीब 1.95 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना शुरू करने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों की सुरक्षा बढ़ाना तथा झपटमारी और लूटपाट जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाना है। परियोजना के तहत विकास मार्ग पर सेक्टर 39/56, 55/40, 54/41, 53/42, 52/43, 51/44, 50/45, 49/46 और 48/47 के बीच स्थित साइकिल ट्रैकों पर प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। इन इलाकों में लंबे समय से पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई थीं। हाल के वर्षों में इन अंधेरे मार्गों पर कई झपटमारी और लूट के प्रयास सामने आए हैं। मार्च में सेक्टर-56 के पास एक व्यक्ति से सामान छीने जाने की घटना हुई थी, जबकि पिछले वर्ष सेक्टर-39 के निकट साइकिल ट्रैक पर एक राहगीर को खिलौना पिस्तौल दिखाकर लूटने का प्रयास किया गया था। शहर में 200 किलोमीटर से अधिक लंबा साइकिल ट्रैक नेटवर्क है, लेकिन दक्षिणी सेक्टरों में कई ट्रैक सुनसान क्षेत्रों, खाली प्लिटों और घने पेड़ों वाले इलाकों से होकर गुजरते हैं, जहां शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। पुलिस रिकॉर्ड भी बताते हैं कि अपराधी ऐसे कम रोशनी वाले और कम आवाजाही वाले क्षेत्रों को निशाना बना रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि नई स्ट्रीट लाइट व्यवस्था से दृश्यता बढ़ेगी, सुरक्षा मजबूत होगी और रात के समय साइकिल ट्रैकों का उपयोग अधिक सुरक्षित बन सकेगा।

दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट में सुरक्षा चूक, स्टेज पर चढ़ा खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारी

फेमस पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने ग्लोबल 'ऑरा वर्ल्ड टूर 2026' को लेकर सुर्खियों में हैं. हाल ही में सैन फ्रांसिस्को में चल रहे उनके एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए एक खालिस्तान-समर्थक प्रदर्शनकारी हाथ में झंडा लिए सीधे स्टेज पर जा पहुंचा. इस घटना से शो में मौजूद दर्शकों के बीच कुछ देर के लिए अफरातफरी और तनाव का माहौल बन गया. हालांकि, वहां मौजूद मुस्तैद वेन्यू सिक्योरिटी और स्थानीय पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला, उस व्यक्ति को काबू में किया और हिरासत में ले लिया. इस पूरे ड्रामे के बीच दिलजीत ने गजब के प्रोफेशनल रवैये का परिचय दिया और बिना डरे अपनी परफॉर्मेंस जारी रखी. शो के बीच में सुरक्षा में बड़ी चूक यह चौंकाने वाली घटना शुक्रवार की रात सैन फ्रांसिस्को में दिलजीत के लाइव शो के दौरान घटी. चश्मदीदों और मिली जानकारी के अनुसार, जब दिलजीत अपनी परफॉर्मेंस में डूबे हुए थे, तभी एक प्रदर्शनकारी अचानक दौड़ता हुआ मंच पर चढ़ गया. इसे सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी चूक के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, दिलजीत ने इस व्यवधान के बाद भी अपना आपा नहीं खोया. जैसे ही पुलिस उस व्यक्ति को पकड़कर ले गई, दिलजीत ने तुरंत अपना डांस और गाना फिर से शुरू कर दिया. उन्होंने पूरे शो के दौरान अपना पूरा ध्यान दर्शकों के मनोरंजन और प्रवासी भारतीय समुदाय की एकता पर केंद्रित रखा. धमकियों के बीच दिलजीत का कड़ा रुख यह हंगामा ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में 'सिख्स फॉर जस्टिस' (SFJ) जैसे कुछ कट्टरपंथी संगठनों की तरफ से ऑनलाइन धमकियां और रुकावटें डालने की कोशिशें देखी जा रही थीं. ये समूह मुख्यधारा के भारतीय मीडिया में दिलजीत की सक्रिय मौजूदगी का विरोध कर रहे हैं. इस घटना के बाद सिंगर ने लाइव इवेंट्स को लेकर अपना रुख एक बार फिर साफ कर दिया है. उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि जो कोई भी उनके फैंस को परेशान करने या कॉन्सर्ट में खलल डालने की कोशिश करेगा, उसे स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों द्वारा फौरन बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा. सैन फ्रांसिस्को में टूर का शानदार समापन तनाव के इन पलों के बावजूद दिलजीत दोसांझ के नॉर्थ अमेरिकन 'ऑरा वर्ल्ड टूर 2026' का सफर बेहद शानदार रहा. इस बड़े स्टेडियम और एरिना टूर का समापन 20 और 21 जून, 2026 को सैन फ्रांसिस्को के मशहूर 'चेस सेंटर' में आयोजित हुए शोज़ के साथ हुआ, जहां फैंस की भारी भीड़ उमड़ी थी. लॉस एंजिल्स में मिला ऐतिहासिक सम्मान ग्लोबल स्तर पर दिलजीत का कद लगातार बढ़ रहा है. हाल ही में लॉस एंजिल्स सिटी काउंसिल ने वैश्विक मंच पर पंजाबी संगीत को पहचान दिलाने और अमेरिकी मनोरंजन जगत में दक्षिण एशियाई संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए दिलजीत को एक अनोखा सम्मान दिया है. काउंसिल ने बाकायदा एक प्रस्ताव पास करके 6 जनवरी, 2027 को आधिकारिक तौर पर 'दिलजीत दोसांझ दिवस' घोषित किया है.

भीषण गर्मी से बढ़ा बिजली का लोड, यूपी में मांग ने तोड़ा देश का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड

लखनऊ यूपी में बिजली आपूर्ति की अधिकतम मांग ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनाया है। रविवार देर रात बिजली की अधिकतम मांग ने 32348 मेगावॉट का नया आंकड़ा छू लिया। यह देश में अब तक की अधिकतम मांग का रिकॉर्ड है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे लेकर पोस्ट किया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र की अधिकतम मांग इस साल 13 मई को 32317 मेगावॉट गई थी। यह अब तक देश की अधिकतम मांग थी। यूपी ने रविवार को इस मांग को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। एके शर्मा ने इस उपलब्धि के लिए जनता और बिजली विभाग के सभी कर्मचारियों व अधिकारियों को शुभकामनाएं दी हैं। चढ़ते पारे से एक बार फिर बिजली की मांग में बेतरतीब इजाफा दर्ज किया जा रहा है। तकरीबन 10 दिनों के बाद बिजली की अधिकतम मांग बढ़कर 31 हजार मेगवॉट के पार चली गई है। बिजली की बढ़ती मांग के बीच चार पावर प्लांट ठप रहे, जिसकी वजह से बिजली के इंतजाम एक्सचेंज व अन्य स्रोतों से करना पड़ा। वहीं, बढ़ते लोड से बिजली फॉल्ट की संख्या भी बढ़ी है। बिजली की आवाजाही से जनता परेशान रही। बढ़ी हुई मांग की आपूर्ति बनाए रखना चुनौती जानकारों की मानें तो मौसम देखते हुए अभी बिजली की मांग में इजाफा दर्ज होगा। ऐसे में बिजली की आपूर्ति बनाए रखना पावर कॉरपोरेशन के लिए चुनौती से कम नहीं है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं के संयोजित भार और ट्रांसफॉरमरों के भार में करीब 2 करोड़ किलोवॉट का अंतर है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे कहते हैंकि उमस भरे मौसम में बिजली की मांग और भी बढ़ती है। ऐसे में अभी दर्ज हो रही मांग से ज्यादा अधिकतम मांग वाला समय मॉनसून में आएगा। निर्बाध आपूर्ति के लिए बेहतर होगा कि छांटे गए संविदा कर्मचारियों को बहाल किया जाए। इससे बिजली फॉल्ट जल्दी ठीक किए जा सकेंगे। और लोग कम परेशान होंगे। शनिवार-रविवार रात 31509 मेगावॉट तक पहुंच गई थी मांग शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात को करीब 1.30 बजे बिजली की अधिकतम मांग 31509 मेगावॉट पहुंच गई। वहीं, न्यूनतम मांग का आंकड़ा भी 24369 मेगावॉट दर्ज किया गया। इसके पहले 10 जून को बिजली की अधिकतम मांग 31894 मेगावॉट दर्ज की गई थी। हालांकि, इसके बाद से मौमस में नर्मी थी तो बिजली की मांग भी कम पड़ी थी। अब एक बार फिर मौसम तप रहा है और बिजली की मांग बढ़ रही है। मांग बढ़ने की वजह से ट्रांसफॉर्मरों पर लोड़ बढ़ रहा है। तमाम जगहों पर एरियल बंच कंडक्टर (एबीसी) जलने, केबल जल जाने और ट्रांसफॉर्मर फुंक जाने जैसी घटनाएं हो रही हैं। इस तरह के फॉल्ट की संख्या में बीते दो दिनों में इजाफा दर्ज किया गया है। ऐसे में बिजली की आवाजाही उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बनी हुई है। गर्मी में फॉल्ट की वजह से आपूर्ति बाधित होने से लेाग आक्रोशित हैं। वहीं, बिजली की मांग बढ़ने के साथ ही उत्पादन इकाइयों के ठप होने से बिजली की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।