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वास्तु शास्त्र: झाड़ू लगाने के नियम, दाहिने हाथ से सफाई को माना जाता है शुभ

 वास्तु शास्त्र में झाड़ू लगाने से संबंधित बहुत सारे नियमों का उल्लेख है. जिसमें सबसे विशेष है कि झाड़ू किस हाथ से लगानी चाहिए. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, झाड़ू को हमेशा दाहिने हाथ (Right Hand) से पकड़कर सफाई की शुरुआत करनी चाहिए. चूंकि हिंदू सनातन परंपरा और वास्तु में झाड़ू को देवी लक्ष्मी का रूप माना गया है, इसलिए इसे पकड़ने और इस्तेमाल करने के कुछ खास नियम बताए गए हैं. झाड़ू पकड़ने और इस्तेमाल करने के नियम दाहिने हाथ से शुरुआत किसी भी शुभ या जरूरी कार्य की तरह, झाड़ू को भी दाहिने हाथ से पकड़कर ही बुहारना (सफाई करना) शुरू करना चाहिए. यदि आप बाएं हाथ से काम करने वाले (Left-handed) हैं, तो आप अपनी सुविधा के अनुसार बाएं हाथ का उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि वास्तु में भाव और स्वच्छता को अधिक महत्व दिया गया है. दोनों हाथों का उपयोग यदि झाड़ू भारी या लंबी है, तो आप दोनों हाथों से उसे पकड़ सकते हैं, लेकिन मुख्य नियंत्रण दाहिने हाथ में ही होना चाहिए. पैर न लगाएं झाड़ू को कभी भी पैर नहीं लगाना चाहिए और न ही इसके ऊपर से लांघकर (पार करके) जाना चाहिए. अगर गलती से पैर लग जाए, तो हाथ से छूकर क्षमा मांग लेनी चाहिए. झाड़ू लगाने के मुख्य वास्तु नियम सही दिशा झाड़ू हमेशा घर के पश्चिम (West) या दक्षिण-पश्चिम (South-West) कोने में रखनी चाहिए. झाड़ू लगाते समय कोशिश करें कि शुरुआत उत्तर या पूर्व दिशा से करते हुए कचरे को दक्षिण या पश्चिम की तरफ लाएं. समय का ध्यान झाड़ू लगाने का सबसे शुभ समय सूर्योदय के तुरंत बाद का होता है. शाम को झाड़ू न लगाएं सूर्यास्त के बाद या शाम के वक्त झाड़ू लगाने से सख्ती से बचना चाहिए. माना जाता है कि इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा और लक्ष्मी बाहर चली जाती है. अगर किसी वजह से शाम को सफाई करनी ही पड़े, तो कचरे को घर से बाहर न फेंकें, उसे एक कोने में इकट्ठा कर दें और सुबह फेंकें. झाड़ू को छुपा कर रखें जैसे घर में धन को छुपाकर रखा जाता है, वैसे ही झाड़ू को भी ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां बाहर से आने वाले किसी मेहमान या बाहरी व्यक्ति की सीधी नजर उस पर न पड़े. खड़ी न रखें झाड़ू झाड़ू को कभी भी खड़ी करके नहीं रखना चाहिए. इसे हमेशा लिटाकर रखना ही वास्तु के अनुसार शुभ होता है. खड़ी झाड़ू घर में कलह और दरिद्रता का कारण बन सकती है.

‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में बड़ा ट्विस्ट: अरमान की भूलने की बीमारी से बढ़ा ड्रामा

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में अब कहानी और भी इमोशनल होती जा रही है. शो के आने वाले एपिसोड में ऐसा बड़ा ट्विस्ट देखने को मिलेगा, जिसने फैंस की टेंशन बढ़ा दी है. अरमान की हरकतों से अब अभीरा को शक होने लगा है कि वह धीरे-धीरे अपनी याददाश्त खो रहा है.  अरमान को हुई भूलने की बीमारी एपिसोड की शुरुआत मायरा और मुक्ति से होती है, जो लॉक कार के अंदर फंस जाती हैं. कार में फैले पेंट की तेज गंध से दोनों की हालत खराब होने लगती है. उधर अरमान उनकी परेशानी देख मदद करने जाता है, लेकिन तभी अभीरा की आंखों में पेंट चला जाता है. अभीरा की हालत देखकर अरमान पूरी तरह उसकी देखभाल में लग जाता है और मायरा और मुक्ति के बारे में भूल जाता है. कुछ देर बाद अभीरा को दोनों लड़कियों के कार में फंसे होने का पता चलता है. वह उन्हें बाहर निकालती है. इस दौरान मुक्ति बताती है कि अरमान को उनके बारे में पता था और वह चाबी लेने गया था, लेकिन वापस ही नहीं आया. सबकुछ भूल जाता है अरमान जब अरमान वहां पहुंचता है तो उसे कुछ भी याद नहीं रहता. वह उल्टा ये सोचता है कि किसी ने कार चोरी करने की कोशिश की है. टूटा हुआ शीशा देखकर वह पुलिस बुलाने की बात करता है. तभी अभीरा को एहसास होता है कि मामला सिर्फ भूलने का नहीं है. उसे शक होने लगता है कि अरमान किसी गंभीर मेमोरी प्रॉब्लम से गुजर रहा है. अभीरा डॉक्टर से बात करती है. डॉक्टर अरमान का एमआरआई कराने की सलाह देते हैं. अरमान से सवाल करेगी अभीरा अभीरा, अरमान से सीधे बात करती है. वह उसे याद दिलाती है कि मायरा और मुक्ति खतरे में थीं, लेकिन वह उन्हें भूल गया था. सच जानकर अरमान खुद भी चौंक जाता है. अभीरा उसे अस्पताल जाकर एमआरआई कराने के लिए कहती है, लेकिन अरमान मानने से इनकार कर देता है.

राष्ट्रीय कर्तव्य पर बोले मुकुल कानिटकर, कहा- भ्रष्टाचारियों को समाज में सम्मान नहीं मिलना चाहिए

रायपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पंचम सरसंघचालक स्व. कुप्पाहली सीतारमैया सुदर्शन की जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय व्याख्यान में मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने कहा, हिंदू समाज का आधार मैं से हम की ओर जाना है. इस यात्रा में पांच परिवर्तन के उद्देश्य तय किया गया है जिसमें स्वदेशी का चिंतन है, संवाद से कुटुंब परिवार की शक्ति बढ़ाना, सामाजिक समरसता की संकल्पना है, पर्यावरण के प्रति संवेदना और राष्ट्रीय कर्तव्य के प्रति हमारी प्रतिबद्धता शामिल है. कार्यक्रम की अध्यक्षता संघचालक डॉ टोपलाल वर्मा एवं मुख्यातिथि अनुराग पांडे थे. संचालन साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने किया. कार्यक्रम संयोजिका शील शर्मा ने स्वागत भाषण दिया. मुख्य वक्ता मुकुल कानितकर ने राष्ट्रीय कर्तव्य, स्वार्थ ही देशद्रोह विषय पर बोलते हुए कहा, हमारा शरीर खरबों कोशिकाओं से मिलकर बना है, सभी कोशिकाएं मिलकर प्रत्येक अंग बनते हैं, जो अपना अपना कार्य करते हैं इसलिए जीवन चलता है. इसी प्रकार देश भी सभी व्यक्ति से मिलकर बनता है, मिलकर अपना अपना कार्य करेंगे तो राष्ट्र शक्तिशाली होगा. यही प्रत्येक व्यक्ति का देश के प्रति कर्तव्य है. जैसे एक कोशिका के स्वार्थी हो जाने से शरीर बीमार और कमजोर हो जाएगा. इसी प्रकार एक व्यक्तिव स्वार्थी हो जाने से देश कमजोर हो जाता है. उन्होंने कहा, देश के प्रति कर्तव्य नहीं करने के कारण समाज, व्यवस्था में अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार बढ़ गया है. इसे समाज में मान्यता मिल गई है. इस भ्रष्टाचार से मुक्ति का उपाय यही है कि समाज ऐसे लोगों को दंडित करे, बहिष्कार करे. व्यक्ति अपने स्वार्थ में देश का नुकसान करे उसे समाज प्रतिष्ठा न दे. मुकुल कानिटकर ने कहा, संघ को लेकर विवाद खड़े वे लोग करते हैं, जिन्हें संघ की समझ नहीं है. संघ हिंदू समाज को संगठित करने की यात्रा है. संघ की शताब्दी वर्ष कोई उत्सव का अवसर नहीं है बल्कि समाज परिवर्तन के अपने कार्य के सिंहावलोकन करने का अवसर है. राष्ट्र निर्माण के लिए व्यक्ति निर्माणकार ही संघ का लक्ष्य है. संघ की स्थापना भारत के स्वाधीन होने के बाद भारत का स्व तंत्र कैसे विकसित हो, शक्तिशाली कैसे बने इस विचार को लेकर कार्य प्रारंभ करने के लिए किया था. इसके लिए हिंदू समाज को संगठित करना आवश्यक है, राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण करना आवश्यक है. इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए डॉ हेडगेवार ने संघ की स्थापना की. यह भारतीय स्वाधीनता का सशस्त्र आंदोलन, अहिंसा और सत्याग्रह के बाद तीसरा आंदोलन था. कार्यक्रम के अध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रान्त के संघचालक डॉ टोपलाल वर्मा ने स्व. सुदर्शन जी का स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन और विचार देश को प्रेरणास्पद है.  मुख्य अतिथि अनुराग पांडे ने कहा कि नागरिक कर्तव्य नहीं होने के कारण जगह जगह गंदगी, यातायात की समस्या, भ्रष्टाचार जैसी अव्यवस्था फैलती है.

गर्मी और बारिश का डबल अटैक! मध्यप्रदेश के 5 जिलों में हीटवेव, जानें कब पहुंचेगा मानसून

भोपाल  मध्य प्रदेश में 26 जून तक हीटवेव (लू), गर्मी और आंधी-बारिश वाला मौसम रहेगा। मानसून के नहीं आने और प्री-मानसून की एक्टिविटी कम होने से उमस-गर्मी बढ़ी है। पिछले 2 दिन से जबलपुर संभाग में लू का असर भी है। मौसम केंद्र (IMD) भोपाल ने अगले 4 दिन तक जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। सोमवार को नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी में दिन में गर्म हवाएं चलेंगी, जबकि शाम के बाद आंधी-बारिश होने का अनुमान है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, गुना, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, देवास, सीहोर, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में गर्मी का असर रहने का अनुमान है। इन जिलों में आज बारिश हीटवेव-गर्मी के बीच 21 से अधिक जिलों में आंधी-बारिश वाला मौसम भी रहेगा। झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, मैहर, अनूपपुर, कटनी, दमोह, सागर, विदिशा और अशोकनगर में तेज आंधी का अलर्ट है। रायसेन में ढाई इंच पानी गिरा, भोपाल-सतना में भी तेज बारिश प्रदेश में रविवार को भी तेज आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। रायसेन में 61 मिमी यानी, करीब ढाई इंच पानी गिर गया। भोपाल में दोपहर में तेज बारिश हुई, जबकि सतना में पौन इंच बारिश दर्ज की गई। जबलपुर, खजुराहो, नौगांव, सिवनी में भी बारिश का दौर बना रहा। रविवार को दिन के तापमान में गिरावट आई है। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 35.3 डिग्री, इंदौर में 37.1 डिग्री, ग्वालियर में 39.7 डिग्री, उज्जैन में 36 डिग्री और जबलपुर में पारा 38 डिग्री सेल्सियस रहा। पचमढ़ी में सबसे कम 32.2 डिग्री सेल्सियस रहा। सिवनी-शिवपुरी में 35 डिग्री, रायसेन में 36 डिग्री, सागर-टीकमगढ़ में 36.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दतिया में सबसे ज्यादा 40.6 डिग्री रहा। प्रदेश में मानसून 4 दिन लेट प्रदेश में मानसून 7 दिन लेट हो गया है, जबकि इसकी एंट्री को 4 दिन और लगेंगे। IMD ने 25 जून के बाद प्रदेश में मानसून के दस्तक देने का अनुमान जताया है। 23 जून को यह छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र की ओर आगे बढ़ सकता है। 15 जून तक मानसून की एंट्री हो जाती है मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में मानसून की सामान्यत: 15 जून के आसपास एंट्री हो जाती है, लेकिन इस बार 22 जून तक मानसून का अता-पता नहीं है। तेलंगाना में 8 जून से ही मानसून अटका हुआ है। हालांकि, यह धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में 23 जून को छत्तीसगढ़ आने की संभावना है। रफ्तार तेज रहती है तो यह एमपी में 25 जून के आसपास आ सकता है। पिछली बार यह 16 जून को ही आ गया था। बारिश का आंकड़ा घटा मानसून के लेट होने से जून की सामान्य बारिश का आंकड़ा भी तेजी से घट रहा है। प्रदेश में 48 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें से पूर्वी हिस्से जैसे- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में 69 प्रतिशत पानी कम गिरा है। पश्चिमी हिस्से के संभाग- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम में आंकड़ा 29 प्रतिशत कम है। प्रदेश के 55 में से 45 जिलों में बारिश का आंकड़ा माइनस में है। अलीराजपुर में एक बूंद भी रिकॉर्ड नहीं हुई है, जबकि भोपाल में सबसे ज्यादा साढ़े 4 इंच पानी गिर चुका है। देश के मौसम का हाल दिल्ली और एनसीआर इलाके के लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि मौसम विभाग ने आंधी-तूफान के साथ बारिश का अनुमान लगाया है. इससे दिन भर में अधिकतम तापमान 38 और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की उम्मीद है. मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि दिल्ली में दोपहर के समय आंधी-तूफान और तेज हवा चल सकती है. हवा की स्पीड 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे पहुंच सकती है, और हवा के झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।  उत्तर-पश्चिमी और पूर्वी भारत आईएमडी ने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, राजस्थान और यूपी सहित उत्तर-पश्चिम में छिटपुट वर्षा का अनुमान लगाया है. हिमाचल और उत्तराखंड के लिए भारी अलर्ट जारी किए गए हैं, क्योंकि दोनों में 22-23 जून के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की गति से गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं, जो 60 किमी प्रति घंटे की गति तक पहुंच सकते हैं. पूरे सप्ताह अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में व्यापक वर्षा की गतिविधि होने की संभावना है।  पूर्वी और पश्चिमी भारत सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 23-25 ​​जून तक भारी बारिश होने की उम्मीद है. बिहार, झारखंड और ओडिशा में भी तेज हवा के साथ गरज के साथ बारिश होने की उम्मीद है. 22 जून को हवा की स्पीड 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है. मौसम विभाग ने 22-28 जून के दौरान गुजरात, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में बारिश की गतिविधि का अनुमान लगाया है।  मध्य भारत मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 22 से 26 जून तक बारिश जारी रहने की संभावना है. मौसम विभाग ने पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में कहीं-कहीं बारिश, गरज, बिजली कड़कने और तेज हवा का अनुमान लगाया है. मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ़्तार से तेज़ हवा भी चल सकती हैं।  दक्षिणी भारत दक्षिणी भारत में इस हफ़्ते तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में बारिश होने की उम्मीद है. 22 जून को तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल में भारी बारिश होगी।  लू के हालात हीटवेव की स्थिति 22-25 जून के दौरान छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर हो सकती है. कर्नाटक और ओडिशा में आज रात के समय मौसम गर्म रहने का अनुमान है। 

राष्ट्रपति के MP दौरे का समापन, कूनो भ्रमण के बाद ग्वालियर से दिल्ली रवाना; राज्यपाल रहे मौजूद

ग्वालियर  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मध्यप्रदेश के भ्रमण के उपरांत 22 जून को सुबह 10.35 बजे वायुसेना के विमान से ग्वालियर से दिल्ली रवाना हुईं। राष्ट्रपति श्योपुर जिले के कूनों से प्रात: 9.15 बजे हैलीकॉप्टर द्वारा रवाना होकर वायुसेना के विमानतल महाराजपुरा ग्वालियर पधारीं। उनके साथ मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी आए। ग्वालियर विमानतल पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, प्रदेश के जल संसाधन मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट, सामाजिक न्याय एवं उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सांसद भारत सिंह कुशवाह एवं महापौर शोभा सिकरवार ने विदाई दी। विमानतल पर अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव, डीजी होमगार्ड सुश्री प्रज्ञा रिचा श्रीवास्तव, संभागीय आयुक्त मनोज खत्री, आईजी अरविंद कुमार सक्सेना, डीआईजी असित यादव, कलेक्टर रुचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह, नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय एवं वायु सेना के अधिकारी उपस्थित थे। कूनो सफारी से किया जंगल भ्रमण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कूनो सफारी से किया जंगल भ्रमण, चीता परिवार को नजदीक से देखा। कूनो नेशनल पार्क के दो दिवसीय दौरे पर आई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को सुबह चीता सफारी से कूनो के जंगल का भ्रमण किया। उन्होंने चीता और उनके शावकों को नजदीक से देखा। राष्ट्रपति ने सफारी के बाद आदिवासी समाज के चीता मित्र, सफारी ड्राइवर और गाइड से बातचीत की। प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और अन्य विभागों के अधिकारियों ने श्योपुर जिले की पहचान से जुड़े उपहार भी राष्ट्रपति को भेंट किए हैं। कुछ ही देर में वह कूनो से प्रस्थान करेगी।  

उद्धव ठाकरे की बढ़ी मुश्किलें, 20 विधायकों पर खतरा; आज करेंगे बड़ी बैठक

मुंबई  महाराष्ट्र विधानसभा का तीन सप्ताह का मानसून सत्र सोमवार 22 जून 2026 से शुरू होने जा रहा है. 10 जुलाई तक चलने वाला यह सत्र राजनीतिक उठापटक और मौसम संबंधी चुनौतियों के बीच काफी हंगामेदार रहने की संभावना है. एक ओर कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सियासी माहौल गर्म है, वहीं दूसरी ओर अनियमित मानसून और किसानों की समस्याएं सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. महाराष्‍ट्र विधानसभा सत्र से पहले राज्य की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ चर्चा का केंद्र बना हुआ है. विपक्ष का आरोप है कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के कुछ लोकसभा सांसदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहा है. शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने हाल ही में पार्टी के 60वें स्थापना दिवस पर कथित बागी नेताओं को बेशर्म और एहसान फरामोश बताते हुए तीखा हमला बोला था।  इस बार विधानसभा और विधानपरिषद दोनों सदनों में आधिकारिक नेता प्रतिपक्ष नहीं होने की संभावना है. ऐसे में सत्ता पक्ष इस स्थिति का लाभ उठाकर अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा. वहीं, शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ के जवाब में ‘ऑपरेशन वुल्फ’ शुरू करने की चेतावनी दी है, जिससे सदन में विपक्ष के आक्रामक रुख के संकेत मिल रहे हैं. सत्तारूढ़ गठबंधन मानसून सत्र के पहले सप्ताह में विधानपरिषद के उपसभापति पद के लिए चुनाव कराने की तैयारी में है. शिवसेना नेता नीलम गोरहे के दोबारा विधान परिषद सदस्य चुने जाने के बाद उन्हें फिर से इस पद पर बैठाने की संभावना जताई जा रही है. सदन के भीतर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच राज्य के किसानों की समस्याएं भी प्रमुख मुद्दा रहेंगी. महाराष्ट्र में अनियमित और लंबे समय तक कमजोर मानसून ने कृषि क्षेत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं. सरकार किसानों को जल्दबाजी में बुवाई न करने और मौसम विभाग की अगली सलाह का इंतजार करने की अपील कर चुकी है।  राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सत्र सामान्य विधायी कार्यवाही से ज्यादा राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन और दबदबा स्थापित करने की लड़ाई का मंच बनेगा. पूरक बजट मांगों की मंजूरी के साथ शुरू होने वाले इस सत्र में तीखी बहस, नारेबाजी, वॉकआउट और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकते हैं. महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह मानसून सत्र राज्य के राजनीतिक और आर्थिक भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।  'बेशर्मी से बिक गई तुम्हारी वफादारी', बागी सांसदों पर भड़के आदित्‍य ठाकरे शिवसेना (यूबीटी) के बागी सांसदों पर आदित्य ठाकरे ने तीखा हमला बोला है. आदित्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि दल बदलने वाले सांसदों ने यह साबित कर दिया है कि उनकी वफादारी और साख बेशर्मी से बिकाऊ है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष राजनीतिक फायदे के लिए सरकारी संसाधनों और जनता के पैसे का इस्तेमाल कर रहा है. आदित्य ठाकरे ने कहा कि जो सांसद अब पाला बदल रहे हैं, वे महाविकास अघाड़ी (MVA) और INDIA गठबंधन के मंच पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे. उनके लिए शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं ने प्रचार किया था और मतदाताओं ने उन्हें NDA के खिलाफ वोट दिया था. उन्होंने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि विचारधारा या गठबंधन बदलने की दलीलें अब नहीं चलेंगी, क्योंकि सच्चाई यह है कि लालच के कारण उन्होंने रातों-रात अपने वोटरों के जनादेश से विश्वासघात किया है।  शिवसेना-यूबीटी के बागी सांसद आज शाम 4 बजे थामेंगे शिंदे गुट का हाथ  महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक और बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है. सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के बागी सांसद आज शाम 4 बजे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल हो सकते हैं. इस संभावित राजनीतिक घटनाक्रम को उद्धव गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. पिछले कुछ दिनों से राज्य की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर चर्चाएं तेज हैं और इसी बीच यह खबर सामने आई है. हालांकि, अभी तक संबंधित सांसद या दोनों गुटों की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. अगर यह शामिल होना होता है, तो महाराष्ट्र की सियासत में इसका असर और बढ़ सकता है।  शिवसेना-यूबीटी के सांसद बागी कैसे – मनोज झा RJD सांसद मनोज झा ने शिवसेना(UBT) के कई सांसदों के आज शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल होने की संभावना पर कहा, ‘उन्हें बागी कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने शिवसेना (UBT) के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा था. जब शिवसेना UBT, TMC या किसी भी पार्टी में यह इंजीनियरिंग होती है, तो यह उनका संकट नहीं है, यह लोकतंत्र का संकट है. यह उद्धव ठाकरे के साथ धोखा नहीं है, यह उन मतदाताओं के साथ धोखा है, जिन्होंने विकल्प देखकर उन्हें चुना और वोट दिया. क्या आप उनके साथ अन्याय नहीं कर रहे हैं?’

तेज गर्मी और चिपचिपी उमस से बेहाल दिल्ली, अगले 7 दिन मौसम में बड़े बदलाव के आसार नहीं

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में लोगों को इन दिनों तेज गर्मी के साथ भारी उमस का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को तापमान सामान्य के आसपास रहने के बावजूद हवा में नमी अधिक होने से लोगों को ज्यादा गर्मी महसूस हुई। दोपहर के समय घर से बाहर निकलने वालों को चिपचिपी गर्मी ने काफी परेशान किया। मौसम विभाग के अनुसार अगले सात दिनों तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है। हालांकि रविवार रात और सोमवार को हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है। महसूस हुआ 43.4 डिग्री तापमान     रविवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।     दोपहर 2:30 बजे वास्तविक तापमान 37.2 डिग्री था, लेकिन उमस के कारण यह 43.4 डिग्री जैसा महसूस हुआ।     इसे हीट इंडेक्स या "फील लाइक" तापमान कहा जाता है। अगले कुछ दिनों का मौसम     सोमवार को अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।     26 जून तक तापमान फिर से 40 डिग्री के करीब पहुंच सकता है।     रविवार का न्यूनतम तापमान 28.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक था।     मौसम विभाग ने फिलहाल कोई रंग-आधारित चेतावनी जारी नहीं की है। बारिश अभी भी सामान्य से कम     जून महीने में अब तक सफदरजंग मौसम केंद्र पर 31.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है     पूरे जून महीने की सामान्य वर्षा 74.1 मिमी मानी जाती है।     इससे साफ है कि इस महीने अब तक बारिश सामान्य से काफी कम रही है। हवा की गुणवत्ता रही मध्यम     दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) रविवार को 127 दर्ज किया गया।     यह "मध्यम" श्रेणी में आता है।     जून में अब तक 18 दिन हवा की गुणवत्ता मध्यम और 3 दिन संतोषजनक श्रेणी में रही है।

यात्रियों की जेब पर बढ़ा बोझ, तय किराये से अधिक वसूली पर डीटीओ सख्त

पटना राजधानी पटना में ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की मनमानी से यात्रियों की भारी फजीहत हो रही है। इन चालकों ने बिना किसी सरकारी आदेश के किराये में अचानक बढ़ोतरी कर दी है। ऑटो और ई-रिक्शा चालक मनमाने ढंग से यात्रियों से पैसे वसूल रहे हैं। यह बात सामने आने के बाद अब डीटीओ ने चालकों पर ऐक्शन लेने की बात कही है। अभी हालत यह है कि बोरिंग रोड से राजापुर के बीच कई जगहों पर निर्धारित किराया सात रुपये है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से ऑटो और ई-रिक्शा चालक यात्रियों से 10 रुपये वसूल रहे हैं। इसी तरह पटना जंक्शन से कंकड़बाग का तय किराया 15 रुपये है, जबकि चालक 20 रुपये तक ले रहे हैं। वहीं बेली रोड से गोला रोड तक का किराया 30 रुपये निर्धारित है, लेकिन कई चालक 35 रुपये वसूल रहे हैं। अधिक किराया वसूले जाने को लेकर आए दिन यात्रियों और चालकों के बीच कहासुनी हो रही है। कई मामलों में जिला परिवहन अधिकारियों के औचक निरीक्षण के दौरान यात्रियों ने इसकी शिकायत भी की है। बता दें कि सीएनजी कीमतों में बढ़ोतरी के बाद ऑटो चालक संघ ने किराया बढ़ाने की मांग को लेकर परिवहन सचिव को पत्र भेजा है। हालांकि, अभी तक परिवहन विभाग की ओर से किराया बढ़ाने की अनुमति नहीं दी गई है। नियमानुसार परिवहन विभाग की स्वीकृति मिलने के बाद ही पटना के प्रमंडलीय आयुक्त किराये में संशोधन का आदेश जारी कर सकते हैं। इसके बावजूद शहर के कई रूटों पर ऑटो और ई-रिक्शा चालक मनमाने तरीके से तीन से पांच रुपये अतिरिक्त वसूल रहे हैं। कई मामलों में अतिरिक्त किराया देने से इनकार करने पर यात्रियों के साथ विवाद भी हो रहा है। पटना के डीटीओ उपेंद्र कुमार पाल ने कहा कि राजधानी पटना समेत पूरे जिले में ऑटो और ई-रिक्शा के किराये में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। ऐसे में कोई भी चालक निर्धारित किराये से अधिक राशि नहीं वसूल सकता। इस संबंध में शिकायतें मिल रही हैं। जांच के दौरान दोषी पाए जाने पर संबंधित चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वाहन पर किराया प्रदर्शित करना अनिवार्य पटना जिला परिवहन कार्यालय के अनुसार जब भी किराये में आधिकारिक रूप से बढ़ोतरी की जाएगी, इसकी सार्वजनिक सूचना जारी की जाएगी। इसके बाद सभी ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को अपने वाहन पर रूटवार किराया सूची प्रदर्शित करनी होगी, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई रूटों पर चालक खुले पैसे (खुदरा) नहीं होने का हवाला देकर यात्रियों को एक-दो रुपये कम वापस करते हैं। इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी यात्रियों को उठाना पड़ता है।

हरियाणा कैबिनेट बैठक आज: नई शिक्षक नीति और कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर होगा फैसला

चंडीगढ़. हरियाणा मंत्रिपरिषद की बैठक सोमवार को होगी, जिसमें कई अहम फैसलों पर मुहर लगेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा तैयार नई शिक्षक नीति को स्वीकृति दी जा सकती है। इसके अलावा विभिन्न विभागों ने भी कुछ नीतियों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है, जिस पर चर्चा होगी। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह बैठक हरियाणा सचिवालय में सुबह 11 बजे होनी थी, लेकिन अचानक से समय में परिवर्तन कर दिया गया है। अब यह बैठक सुबह दस बजे होगी, जिसके लिए सभी मंत्रियों और प्रशासनिक सचिवों को सूचित कर दिया गया है। बैठक में करीब एक दर्जन प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। जिनमें विकास परियोजनाओं, भर्ती प्रक्रियाओं, कृषि, उद्योग तथा बुनियादी ढांचा विकास से जुड़े विषय शामिल हैं। इसके अलावा कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी पुनर्नियुक्ति देने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी।

महाभारत की वो वीरांगनाएं, जिनकी शक्तियां इतिहास के पन्नों में छिप गईं

महाभारत काल की जब भी बात होती है, तो अक्सर वीर पुरुषों के नाम और उनके पराक्रम की कहानियां ही सामने आती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस समय कुछ ऐसी वीर और शक्तिशाली स्त्रियां भी थीं, जिनकी अद्भुत शक्तियां इतिहास के पन्नों में कहीं दबकर रह गईं. आखिर कौन थीं ये स्त्रियां और क्यों इनकी चर्चा कम होती है, आइए जानते हैं. 1. हिडिंबा इसमें सबसे पहला नाम आता है हिडिंबा का. वह एक भयानक राक्षस हिडिंब की बहन थी और खुद भी कई मायावी शक्तियों की स्वामिनी थी. वह रूप बदलने में माहिर थी और एक साथ कई लोगों को आकाश में उठा सकती थी. महाभारत के मुताबिक, लाक्षागृह से बचने के बाद जब पांडव जंगल में रुके थे, तब हिडिंब ने अपनी बहन को उन्हें मारने भेजा. लेकिन भीम को देखकर हिडिंबा मोहित हो गई और सुंदर स्त्री का रूप धारण कर लिया. बाद में भीम और हिडिंब के बीच युद्ध हुआ, जिसमें हिडिंब मारा गया और भीम ने हिडिंबा से विवाह कर लिया. हिडिंबा के पास एक और अद्भुत शक्ति थी, वह गर्भ धारण करते ही तुरंत संतान को जन्म दे सकती थी. इसी से घटोत्कच का जन्म हुआ था. 2. गांधारी गांधार देश के राजा सुबल की पुत्री होने के कारण उनका नाम गांधारी पड़ा था. वह भगवान शिव की महान भक्त थीं और उन्हें 100 पुत्रों का वरदान मिला था. उनकी आंखों में अद्भुत शक्ति थी. उन्होंने अपने तप और शक्ति से दुर्योधन के शरीर को वज्र समान मजबूत बना दिया था. हालांकि, श्रीकृष्ण की रणनीति के कारण उसकी जांघ कमजोर रह गई. महाभारत युद्ध के बाद गांधारी ने पांडवों को क्षमा कर दिया, लेकिन श्रीकृष्ण को पूरे वंश के नाश का श्राप दिया था. इससे उनकी शक्ति का अंदाजा लगाया जा सकता है. 3. कुंती कुंती एक तपस्वी और अत्यंत बुद्धिमान स्त्री थीं. उन्हें ऋषि दुर्वासा से एक चमत्कारी मंत्र प्राप्त हुआ था, जिससे वह किसी भी देवता का आह्वान कर सकती थीं. इसी मंत्र के प्रभाव से कर्ण का जन्म हुआ. बाद में उन्होंने यह मंत्र माद्री को भी दिया था. पति की मृत्यु के बाद कुंती ने अपने पुत्रों का पालन-पोषण किया और उन्हें योग्य शिक्षा दिलाई. उन्होंने पांडवों को उनका अधिकार दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनकी राजनीतिक समझ और धैर्य उन्हें विशेष बनाता है. 4. उलूपी उलूपी नागराज वासुकी की दत्तक पुत्री थीं और उन्हें नागकन्या व जलपरी दोनों रूपों में जाना जाता है. अर्जुन जब अपने अभियान पर थे, तब उनकी मुलाकात उलूपी से हुई. उलूपी अर्जुन को पाताल लोक ले गई और उनसे विवाह किया. उसने अर्जुन को जल में अजेय होने का वरदान दिया था. 5. भानुमती भानुमती कंबोज के राजा की पुत्री थीं. वह बेहद सुंदर, बलशाली और बुद्धिमान थीं. उनके स्वयंवर में कई राजा आए थे, लेकिन दुर्योधन ने उनसे बलपूर्वक विवाह किया था. कहा जाता है कि भानुमती कुश्ती में निपुण थीं और कई बार दुर्योधन को भी हरा देती थीं. उनकी ताकत और बुद्धिमत्ता उन्हें खास बनाती है. 6. सत्यवती सत्यवती, राजा शांतनु की पत्नी थीं. उनका जन्म मछली के गर्भ से हुआ था, इसलिए उन्हें मत्स्यगंधा कहा जाता था. ऋषि पराशर ने उन्हें वरदान दिया, जिससे उनके शरीर से सुगंध आने लगी और उनका नाम सत्यवती पड़ा था. सत्यवती राजनीति और कूटनीति में निपुण थीं. उनके कारण ही भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया, जो आगे चलकर महाभारत युद्ध की नींव बना.