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मोदी कैबिनेट में बदलाव की आहट! कई मंत्रियों की छुट्टी तय?, TMC और शिवसेना के बागियों की एंट्री की चर्चा

नई दिल्ली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठन में अगले कुछ दिनों में बड़े स्तर पर फेरबदल हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार में मंत्रिमंडल के विस्तार और संगठनात्मक बदलाव दोनों पर गंभीरता से मंथन चल रहा है. इस कवायद में कुछ नए चेहरों को सरकार में जगह मिल सकती है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं।  सूत्रों के अनुसार, हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद एनडीए का कुनबा मजबूत हुआ है. ऐसे में सहयोगी दलों और हाल में एनडीए के साथ आए नेताओं को भी सरकार में प्रतिनिधित्व देने की तैयारी की जा रही है. इसी क्रम में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल से कुछ अहम नेताओं के नाम चर्चा में हैं।  टीएमसी के एक बागी को कैबिनेट में जगह सूत्रों का कहना है कि शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में कैबिनेट रैंक के साथ शामिल किया जा सकता है. वहीं पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों में काकोली घोष, सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी राय के नामों पर भी विचार चल रहा है. इनमें से किसी एक को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।  इसके अलावा शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) से अलग हुए सांसद संजय दीना पाटिल का नाम भी संभावित मंत्रियों की सूची में बताया जा रहा है. माना जा रहा है कि सहयोगी दलों और नए राजनीतिक साथियों को उचित प्रतिनिधित्व देकर एनडीए अपने राजनीतिक विस्तार को और मजबूत करना चाहता है।  कुछ मंत्रियों का बदलेगा रोल सूत्रों के मुताबिक, केवल नए मंत्रियों की नियुक्ति ही नहीं, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियां भी बदली जा सकती हैं. उत्तर प्रदेश और दिल्ली बीजेपी की कमान संभाल चुके पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को संगठन में अधिक सक्रिय भूमिका देने के लिए केंद्र सरकार से मुक्त किया जा सकता है. यदि ऐसा होता है तो उनके स्थान पर नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है।  जानकारी यह भी है कि भाजपा सरकार में शामिल कुछ वरिष्ठ नेताओं को संगठन में अहम जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम कर रही है. इसके बदले सरकार में अपेक्षाकृत युवा नेताओं को अवसर देकर नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार करने की कोशिश की जा सकती है।  सिर्फ सरकार ही नहीं, बीजेपी के संगठनात्मक ढांचे में भी व्यापक बदलाव की संभावना जताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार, पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर कम से कम दो महिला उपाध्यक्षों की नियुक्ति कर सकती है. इसके अलावा त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को भी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद दिए जाने पर विचार चल रहा है। 

मध्यप्रदेश में घर-दुकान बनाने वालों के लिए अलर्ट! निर्माण से पहले देनी होगी सूचना, वरना होगी कानूनी कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश में अब घर, दुकान, बहुमंजिला इमारत या किसी भी तरह का निर्माण कार्य शुरू करने से पहले मकान मालिकों, ठेकेदारों और बिल्डर्स को बेहद सावधान रहने की जरूरत है। श्रम विभाग ने नए और सख्त निर्देश जारी करते हुए साफ कर दिया है कि किसी भी कंस्ट्रक्शन साइट पर काम शुरू करने से कम से कम 30 दिन पहले इसकी लिखित या ऑनलाइन सूचना विभाग को देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा। श्रम विभाग के अनुसार, नियमों की अनदेखी करने वाले नियोक्ताओं और बिल्डर्स के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जेल की हवा खाने से लेकर भारी जुर्माने तक का प्रावधान शामिल है। क्यों सख्त हुआ श्रम विभाग? श्रम विभाग ने यह कदम निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य और उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ पहुंचाने के लिए उठाया है। 'भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल' के तहत अब हर कंस्ट्रक्शन साइट पर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम और सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती अनिवार्य होगी। 'श्रम सेवा पोर्टल' पर देनी होगी तमाम जानकारी नियोजकों को 'श्रम सेवा पोर्टल' मोबाइल ऐप के जरिए निर्माण स्थल की सटीक लोकेशन, वहां काम कर रहे श्रमिकों की कुल संख्या और उन्हें दी जा रही मूलभूत सुविधाओं (जैसे साफ पानी, शौचालय आदि) का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन दर्ज करना होगा। 30 दिन पहले सूचना नहीं दी, तो 3 महीने की जेल भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण अधिनियम 1996 के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, अगर कोई भी नियोक्ता धारा 46 के तहत काम शुरू होने की पूर्व सूचना देने में विफल रहता है, तो उसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। कानूनी कार्रवाई का प्रावधान दोषी पाए जाने पर संबंधित बिल्डर, ठेकेदार या मकान मालिक को 3 महीने तक का कारावास , 2 हजार रुपए तक का जुर्माना, या फिर दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के सभी सरकारी निर्माण विभागों जिनमें PWD, नगर निगम आदि को भी सख्त हिदायत दी गई है कि वे भी कोई भी काम शुरू करने से पहले श्रम विभाग को अनिवार्य रूप से लूप में लें। 'श्रम प्रहरी' बनकर आम जनता भी दे सकेगी सूचना निर्माण कार्यों में पारदर्शिता लाने और मजदूरों के हक की रक्षा के लिए विभाग ने आम नागरिकों को भी एक बड़ी ताकत दी है। शहर का कोई भी जागरूक नागरिक ‘श्रम प्रहरी’ की भूमिका निभा सकता है। शिकायत के किलए टोल फ्री नंबर जारी अगर आपके आसपास कोई ऐसा निर्माण कार्य चल रहा है, जिसकी सूचना श्रम विभाग को नहीं दी गई है या जहां मजदूरों की सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है, तो आप इसकी गुप्त शिकायत विभाग के विशेष कंट्रोल रूम नंबर पर कर सकते हैं। इसके लिए श्रम प्रहरी हेल्पलाइन टोल-फ्री नंबर: 1800-233-8888 दिया गया है।

SC ने खत्म किया 70 साल पुराना भूमि विवाद, पीढ़ियां बीत गईं, अब जाकर मिला अंतिम फैसला

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे अनोखे और 70 साल पुराने जमीन विवाद का निपटारा किया है, जो देश के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल से होकर गुजरा है। दिलचस्प बात यह है कि इस मामले में फैसला सुनाने वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच के दोनों जजों का तब जन्म भी नहीं हुआ था, जब यह कानूनी विवाद शुरू हुआ था। यह पूरा मामला साल 1957 की एक सेल डीड (बिक्री विलेख) से जुड़ा हुआ है। क्या है 70 साल पुराना यह जमीन विवाद? टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह विवाद 4 जून 1957 को हरिद्वार के नरसीपुर कलां गांव में 15.5 बीघा जमीन की खरीद से जुड़ा है। इस जमीन को अपीलकर्ता शराफत अली के पूर्वजों ने खरीदा था। उस समय शराफत अली के पूर्वज नाबालिग थे, इसलिए जमीन की यह खरीद उनके पिता ने की थी। शुरुआत में यह मामला दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की कार्यवाही के रूप में शुरू हुआ, जो बाद में यूपी जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950 और चकबंदी ढांचे (कंसोलिडेशन फ्रेमवर्क) के दायरे में चला गया। चार पीढ़ियों ने लड़ी कानूनी लड़ाई, गुजर गए लोग इस केस का सफर इतना लंबा रहा कि इस दौरान एक के बाद एक पीढ़ियां गुजर गईं। मुकदमे की इस लंबी और घुमावदार यात्रा के दौरान अपीलकर्ता शराफत अली का भी निधन हो गया। इसके बाद उनके कानूनी उत्तराधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट तक इस लड़ाई को लड़ा। इस तरह एक ही परिवार की चार पीढ़ियां इस 70 साल पुरानी मुकदमेबाजी में उलझी रहीं। सुप्रीम कोर्ट ने पलटा निचली अदालत और हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए अहम फैसला सुनाया। इससे पहले निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) और हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अपीलकर्ता इस सेल डीड के निष्पादन को साबित करने में विफल रहे हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत और हाईकोर्ट दोनों के निष्कर्षों को खारिज कर दिया और डीड को वैध माना। म्यूटेशन और चकबंदी में कैसे उलझा था मामला? जमीन की खरीद के बाद जब खरीदार के नाम पर दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) का समय आया, तो बेचने वाले ने शुरुआत में आपत्ति जताई। हालांकि, बाद में उसने आपत्ति वापस ले ली ताकि राजस्व अधिकारी अपीलकर्ताओं के पक्ष में जमीन का म्यूटेशन कर सकें। लेकिन, जब गांव में चकबंदी की प्रक्रिया शुरू हुई, तो अपीलकर्ताओं ने पाया कि खरीदी गई जमीन के मालिक के रूप में उनका नाम रिकॉर्ड से गायब था और वह अभी भी बेचने वाले के नाम पर ही दर्ज थी। चकबंदी अधिकारी ने म्यूटेशन रिकॉर्ड के आधार पर अपीलकर्ताओं का नाम जमीन के मालिक के रूप में दर्ज कर दिया। लेकिन बेचने वालों ने इसे फिर से चुनौती दी, जिसके बाद चकबंदी अधिकारी ने नए सिरे से फैसला करने का आदेश दिया था। आखिरकार, अब 70 साल बाद सुप्रीम कोर्ट से इस मामले का अंतिम समाधान हो गया है।

Indore News: मध्यप्रदेश में पहली बार वर्ल्ड स्नूकर चैंपियनशिप, नवंबर में यशवंत क्लब बनेगा मेजबान

इंदौर  दुनिया को स्नूकर का खेल सिखाने वाले मध्य प्रदेश में 100 साल में पहली बार विश्व स्नूकर चैंपियनशिप होने जा रही है। यह प्रतिष्ठित आयोजन 12 से 23 नवंबर तक इंदौर के यशवंत क्लब में होगा। इस दौरान दुनिया के करीब 50 देशों के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने आएंगे। चैंपियनशिप का कुल व्यय पांच करोड़ रुपये होगा। कुल पुरस्कार राशि 40 हजार डालर यानी 37 लाख, 75 हजार रुपये के करीब होगी। भारतीय बिलियर्ड्स और स्नूकर महासंघ के सचिव सुनील बजाज ने बताया कि देश में 2014 में बेंगलुरू में विश्व चैंपियनशिप हुई थी, जिसके बाद अब यह टूर्नामेंट भारत में होने जा रहा है। भारतीय बिलियर्ड्स और स्नूकर महासंघ की स्थापना के 100 वर्ष के यादगार अवसर पर इंदौर को मेजबानी के लिए चुना गया है। विश्व चैंपियनशिप के दौरान पुरुष और महिला दोनों वर्गों के मैच होंगे। पुरुषों के वर्ग में 100 से 125 के करीब खिलाड़ी हिस्सा लेंगे जबकि महिला वर्गों में 40 से 60 खिलाड़ी शामिल होंगी। इनमें 15 के करीब विश्व चैंपियन खिलाड़ी भी होंगे। स्पर्धा के मुकाबले 12 टेबलों पर खेले जाएंगे जबकि पांच टेबलें अभ्यास के लिए होंगी। विश्व चैंपियनशिप के लिए 17 टेबलें बाहर से आयात की जा रही हैं। मध्य प्रदेश के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाए हाल ही में चीन में वर्ल्ड टीम स्नूकर चैंपियनशिप में रजत विजेता भारतीय टीम में इंदौर के केतन चावला भी शामिल थे। नेहरू स्टेडियम स्थित अकादमी में केतन चावला को मप्र बिलियर्ड्स व स्नूकर संघ द्वारा सम्मानित किया गया। उनसे पहले मप्र की खिलाड़ी अमी कमानी, सान्वी शाह, इशिका शाह, कनिष्का जुरानी, ऋतिक जैन, ओवेश खान सहित कई अन्य युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।  

Solar Power से चमका उत्तर रेलवे, 2 महीने में 3.4 मिलियन यूनिट बिजली बनाई, ₹2.2 करोड़ की बचत

नई दिल्ली  नॉर्दर्न रेलवे पर्यावरण संरक्षण और बिजली की लागत कम करने के मकसद से सोलर एनर्जी को बढ़ावा दे रहा है। इस पहल के तहत, अप्रैल और मई के दौरान रूफटॉप सोलर क्षमता में 2.2 MW की बढ़ोतरी की गई है। आने वाले दिनों में सोलर पैनल लगाने के काम को और तेज करने की कोशिश की जाएगी। चीफ पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी, एनर्जी सिक्योरिटी, कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, नॉर्दर्न रेलवे ने अपने रिन्यूएबल एनर्जी सफर में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। कुल सोलर क्षमता बढ़कर लगभग 28.35 MW  इस फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती दो महीनों में, अलग-अलग रेलवे स्टेशनों और सर्विस बिल्डिंग्स में लगभग 2.2 MW क्षमता वाले ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर पावर प्लांट चालू किए गए। इन नए प्लांट के लगने से, नॉर्दर्न रेलवे की कुल सोलर क्षमता बढ़कर लगभग 28.35 MW हो गई है। यह उपलब्धि कार्बन उत्सर्जन कम करने, नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों को पूरा करने और पर्यावरण के अनुकूल ट्रांसपोर्टेशन को बढ़ावा देने की इंडियन रेलवे की कोशिशों को और मजबूत करती है। इस फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती दो महीनों में, नॉर्दर्न रेलवे के सोलर पावर प्लांट से लगभग 3.4 मिलियन यूनिट बिजली पैदा हुई, जिससे एनर्जी की लागत में लगभग ₹2.2 करोड़ की बचत हुई। इस सोलर पावर जनरेशन से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 2,820 टन की कमी आने की उम्मीद है।  

आधार कार्ड यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! 1 जुलाई से बिना शुल्क अपडेट होगी ईमेल आईडी

 ग्वालियर  यदि आपके आधार कार्ड में अभी तक ईमेल आईडी अपडेट नहीं है या आप उसे बदलना चाहते हैं, तो आपके लिए एक बेहद अच्छी और राहत भरी खबर है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानि यूआईडीएआई ने एक नया नोटिफिकेशन जारी करते हुए आधार कार्ड के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इस नए नियम के तहत अब आधार कार्ड पर ईमेल आईडी अपडेट कराने के लिए नागरिकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा, यह सेवा पूरी तरह से मुफ्त कर दी गई है। यह नया नियम आगामी एक जुलाई से पूरे देश के साथ-साथ ग्वालियर-चंबल अंचल में भी लागू होने जा रहा है। सरकार के इस कदम से उन करोड़ों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा जो अपने आधार को डिजिटल रूप से अधिक सुरक्षित और अपडेटेड रखना चाहते हैं। मुफ्त में ईमेल अपडेट छह महीने तक कर सकते हैं। छह महीने के लिए खुली है मुफ्त सुविधा की खिड़की यूआईडीएआई द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, आम जनता को सहूलियत देने के लिए प्रशासन ने छह महीने की एक विशेष समय-सीमा तय की है। इसके अंतर्गत, नागरिक जुलाई से लेकर दिसंबर तक कभी भी अपनी ईमेल आईडी को आधार कार्ड में बिल्कुल मुफ्त में अपडेट करवा सकते हैं। आपको बता दें कि इस नए नियम के लागू होने से पहले तक, आधार कार्ड में ईमेल आईडी जुड़वाने या उसमें किसी भी तरह का संशोधन कराने के लिए उपभोक्ताओं को 75 रुपये का निर्धारित शुल्क देना पड़ता था, जिसे अब पूरी तरह से हटा लिया गया है। ईमेल आईडी अपडेट होना क्यों है जरूरी     सुरक्षित ओटीपी: कई बार मोबाइल नेटवर्क न होने या सिम बंद होने की स्थिति में आधार से जुड़े जरूरी काम रुक जाते हैं। ईमेल आईडी अपडेट होने पर आधार वेरिफिकेशन का ओटीपी आपकी मेल पर भी आ जाता है।     फर्जीवाड़े पर रोक: यदि कोई आपके आधार कार्ड का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश करता है, तो तुरंत आपके रजिस्टर्ड ईमेल पर अलर्ट आ जाता है, जिससे आप होने वाले फ्राड से बच सकते हैं।     ऑनलाइन सेवाएं: कई सरकारी और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन में ईमेल आईडी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।  

बीजेपी का बड़ा संगठनात्मक अभियान: 7 लाख वर्कर्स देंगे ऑनलाइन टेस्ट, सफल होने पर मिलेगा Digital Learning Certificate

भोपाल  भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) आज देशभर में बूथ और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए बड़े स्तर पर डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी। इस दौरान करीब 7 लाख कार्यकर्ताओं की ऑनलाइन परीक्षा संगठन ऐप के माध्यम से कराई जाएगी। पार्टी के अनुसार, 65 हजार से अधिक बूथ समितियों के कार्यकर्ता और मंडल स्तर के मोर्चा पदाधिकारी इस डिजिटल लर्निंग कार्यक्रम में शामिल होंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य संगठन को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना और कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा एवं योजनाओं की बेहतर जानकारी देना है। संगठन ऐप के जरिए होगा प्रशिक्षण डिजिटल लर्निंग प्रोग्राम के तहत कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा, संगठन का सफर, नेतृत्व और केंद्र की मोदी सरकार की प्रमुख योजनाओं से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद संगठन ऐप पर ऑनलाइन परीक्षा आयोजित होगी। संगठन एप के जरिए मिलेगी ट्रेनिंग बीजेपी की 65 हजार से ज्यादा बूथ समितियों में शामिल कार्यकर्ताओं और मंडल स्तर के 6 मोर्चों की कार्यकारिणी में शामिल पदाधिकारियों को संगठन एप के जरिए डिजिटल लर्निंग यानी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में चार पाठ्यक्रम संगठन एप पर दिए जाएंगे। इनमें बीजेपी की विचारधारा, पार्टी का सफर, नेतृत्व, मोदी सरकार की विकास योजनाएं जैसे चार पाठ्यक्रम शामिल होंगे। कार्यकर्ता अपने मोबाइल पर हर पाठ्यक्रम के वीडियो देखकर उस पाठ्यक्रम से संबंधित शब्दावली के उत्तर ऑनलाइन दर्ज करेंगे। चारों पाठ्यक्रमों के सवाल-जवाब पूरे होने के बाद उनके मोबाइल पर प्रशिक्षित होने का सर्टिफिकेट जनरेट होगा। इस प्रशिक्षण को लेकर सभी जिला अध्यक्षों को कार्ययोजना भेज दी गई है। यह महाअभियान डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि 23 जून से शुरू होकर उनकी जयंती 6 जुलाई 2026 तक पूरे 14 दिनों तक चलेगा। बीजेपी क्यों और कैसे कराने जा रही है यह कोर्स? बीजेपी इस बड़े अभियान को पूरी तरह अचूक बनाने के लिए इसे अपने नियमित कार्यक्रमों से जोड़ रही है। रणनीति के अनुसार, बूथ अध्यक्ष और 'मन की बात' प्रभारी यह सुनिश्चित करेंगे कि 'मन की बात' कार्यक्रम के तुरंत बाद बूथ समिति के सभी सदस्यों को मौके पर ही संगठन ऐप खुलवाकर डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का प्रशिक्षण पूरा कराया जाए और सर्टिफिकेट डाउनलोड करवाया जाए । तीन सदस्यों की टीम भी बनाई इसके साथ ही, शक्ति केंद्र प्रभारियों और मंडल कार्यकारिणी को सभी बूथों पर प्रवास (दौरा) करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वे हर कार्यकर्ता के स्मार्टफोन में इस प्लेटफॉर्म की जानकारी और ट्रेनिंग सुनिश्चित कर सकें । बीजेपी यह कदम इसलिए उठा रही है ताकि उसका पूरा कैडर 'कागज-रहित' और 'हाई-टेक' हो सके। इस पूरी व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए जिलों में (1+2 सदस्यों की) विशेष डिजिटल प्रशिक्षण टीमें बनाई गई हैं, जिनकी कमान प्रदेश स्तर पर संयोजक शैलेन्द्र बरूआ (प्रदेश उपाध्यक्ष) और सदस्यों के रूप में राजेन्द्र सिंह, सुयश त्यागी संभाल रहे हैं। 6 जुलाई तक पूरा होगा अभियान बीजेपी ने इस डिजिटल प्रशिक्षण अभियान को 6 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। पार्टी पहले ही जिला और मंडल स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित कर चुकी है। अब अंतिम चरण में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कार्यकर्ताओं का मूल्यांकन किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि डिजिटल प्रशिक्षण से संगठन की कार्यशैली अधिक प्रभावी होगी और कार्यकर्ताओं को सरकार की योजनाओं व संगठनात्मक गतिविधियों की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।  

High Court Verdict: इस्लाम अपनाने के बाद OBC दर्जा और आरक्षण का लाभ नहीं, कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

चेन्नई मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में धर्म परिवर्तन और आरक्षण को लेकर एक बेहद अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है, जिसके तहत हिंदू धर्म की पिछड़ी, अति-पिछड़ी या अनुसूचित जाति से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को 'बैकवर्ड क्लास मुस्लिम' का दर्जा और आरक्षण देने की बात कही गई थी। जस्टिस जी आर स्वामीनाथन और जस्टिस पी बी बालाजी की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि कोई भी व्यक्ति इस्लाम अपनाने के बाद सिर्फ एक मुस्लिम होता है। पीठ ने कहा, “कोई भी शख्स इस्लाम अपनाने के बाद सिर्फ 'एक मुसलमान' रह जाता है, बस बात यहीं खत्म। वह बैकवर्ड क्लास मुस्लिम के दर्जे या आरक्षण का दावा कतई नहीं कर सकता।" क्या था मामला? यह मामला थूथुकुडी जिले के रहने वाले समीर अहमद की याचिका के बाद सामने आया। पहले उसका नाम परमशिवम था। परमशिवम का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था। 2015 में उसने इस्लाम धर्म अपनाकर अपना नाम समीर अहमद रख लिया और मुस्लिम रीति-रिवाजों से शादी की। धर्म परिवर्तन के बाद समीर ने तहसीलदार के पास 'मुस्लिम लेब्बाई' जाति का कम्युनिटी सर्टिफिकेट पाने के लिए आवेदन किया। इस जाति को तमिलनाडु में 'पिछड़े वर्ग के मुसलमानों' का दर्जा प्राप्त है। तहसीलदार ने समीर का आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद समीर ने हाईकोर्ट का रुख किया और तमिलनाडु सरकार के 9 मार्च 2024 के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें कनवर्टेड मुस्लिमों को आरक्षण देने की बात कही गई थी। तमिलनाडु सरकार ने दलील दी कि कनवर्ट होने वाले व्यक्ति को आरक्षण इसीलिए दिया जा रहा है ताकि वह अपनी पुरानी आरक्षित श्रेणी का लाभ उठा सके। हालांकि हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की दलील को खारिज कर दिया। क्या बोला मद्रास हाईकोर्ट? कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हालांकि मुस्लिम समाज में भी कई ऐसे समुदाय मौजूद हैं, लेकिन इन समुदायों की सदस्यता केवल जन्म से तय होती है। बेंच ने कहा, “बेझिझक यह कहा जा सकता है कि वे हिंदू धर्म की जातियों के समान हैं। जैसे जाति जन्म से तय होती है, वैसे ही कोई व्यक्ति जन्म से ही राउथर, मरक्कयार या दक्कनी मुस्लिम होता है। यह कहना बेतुका है कि किसी को राउथर मुस्लिम में बदला जा सकता है।” मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के इस सरकारी आदेश को संविधान और इस्लाम दोनों के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। बेंच ने साल 1951 के 'जी माइकल बनाम एस वेंकटेश्वरन' मामले का हवाला दिया, जिसमें साफ कहा गया था कि जब कोई हिंदू इस्लाम अपनाता है, तो वह 'सिर्फ एक मुसलमान' बनता है और मुस्लिम समाज में उसका स्थान उसकी पिछली जाति से तय नहीं होता। सिर्फ आरक्षण के लिए नहीं दे सकते लाभ अदालत ने कहा, "ईसाई मिशनरियों और इस्लामिक उपदेशकों ने दशकों और सदियों तक यह प्रचार किया कि उनके धर्मों में सामाजिक समानता है, जबकि हिंदू धर्म में जाति व्यवस्था है। धर्म-परिवर्तन के लिए ऐसा रुख अपनाने के बाद, अब यह दावा करना गलत है कि इस्लाम में भी ऊंच-नीच है। हमारी राय में, कुछ समुदायों को 'पिछड़ा' और बाकी को 'अगड़ा' मानना ​​कुरान की शिक्षाओं के खिलाफ है। इस्लाम एक ऐसा समाज बनाना चाहता है जिसमें सब बराबर हों। अल्लाह की नजर में सब समान हैं। वहां कोई सामाजिक ऊंच-नीच नहीं है।" अदालत ने कहा कि राज्य सरकार सिर्फ इसलिए विभिन्न जातियों के कनवर्टेड मुस्लिमों का एक समूह बनाकर उन्हें आरक्षण नहीं दे सकती कि वे लाभ उठाते रहें।

Saudi Real Estate बना भारतीय निवेशकों की पहली पसंद, शानदार रिटर्न और नए अवसरों ने बढ़ाया आकर्षण

दुबई  खाड़ी देशों के रियल एस्टेट बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सऊदी अरब ने पहली बार विदेशी नागरिकों और विदेशी कंपनियों के लिए अपने प्रॉपर्टी बाजार के दरवाजे खोल दिए हैं। नए विदेशी रियल एस्टेट स्वामित्व कानून के लागू होने के साथ ही सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए ‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ पोर्टल भी शुरू कर दिया है। इस फैसले को सऊदी अरब के आर्थिक परिवर्तन कार्यक्रम ‘विजन 2030’ का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य विदेशी निवेश बढ़ाना, वैश्विक पूंजी आकर्षित करना और देश को अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के असर से दुबई का रियल एस्टेट बाजार दबाव में दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में सऊदी अरब का नया कानून भारतीय प्रवासियों, एनआरआई निवेशकों और वैश्विक खरीदारों के लिए एक नए विकल्प के रूप में उभरकर सामने आया है। दशकों बाद विदेशियों को मिला प्रॉपर्टी का मालिक बनने का अधिकार सऊदी अरब (Saudi Arabia Property News) में लंबे समय से लाखों विदेशी नागरिक काम करते रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल किराए के मकानों में रहने की अनुमति थी। अब पहली बार विदेशी नागरिकों को कानूनी रूप से आवासीय और निर्धारित श्रेणी की व्यावसायिक संपत्तियों का स्वामित्व प्राप्त करने का अवसर दिया गया है। भारतीय समुदाय सऊदी अरब में सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में शामिल है। ऐसे में इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ भारतीय पेशेवरों, कारोबारियों और लंबे समय से वहां रह रहे परिवारों को मिलने की संभावना जताई जा रही है। अब वे केवल किराएदार नहीं बल्कि निर्धारित नियमों के तहत संपत्ति के मालिक भी बन सकेंगे। दुबई बाजार की सुस्ती के बीच सऊदी बना नया विकल्प पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर दुबई के रियल एस्टेट बाजार पर भी देखने को मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों की सतर्कता बढ़ने से वहां संपत्तियों की खरीद-बिक्री की गति कुछ धीमी हुई है। इसी बीच सऊदी अरब ने विदेशी निवेशकों के लिए अपने बाजार को खोलकर क्षेत्रीय निवेश के समीकरण बदल दिए हैं। हालांकि एक्सपर्ट व्यू से दुबई की तुलना में सऊदी का रियल एस्टेट बाजार अभी शुरुआती चरण में है। यहां भविष्य की संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन रीसेल मार्केट और लिक्विडिटी को परिपक्व होने में अभी समय लग सकता है। इसके बावजूद विजन 2030 के तहत हो रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट इस बाजार को तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं। ‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ पोर्टल से पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन रियल एस्टेट जनरल अथॉरिटी (REGA) ने विदेशी रियल एस्टेट स्वामित्व कानून के साथ ‘सऊदी प्रॉपर्टीज’ नाम का डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और पूरी तरह ऑनलाइन बनाना है। विदेशी खरीदारों को अब विभिन्न सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। आवेदन, सत्यापन और पात्रता की अधिकांश प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएगी, जिससे निवेश प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगी। किन लोगों को मिलेगा संपत्ति खरीदने का अधिकार नई नीति के तहत सऊदी अरब में वैध रूप से रह रहे विदेशी निवासी अपने रेजिडेंसी नंबर यानी इकामा के आधार पर सीधे आवेदन कर सकेंगे। पोर्टल पर उनकी पात्रता का डिजिटल सत्यापन किया जाएगा। सऊदी अरब से बाहर रहने वाले विदेशी नागरिक भी निवेश कर सकेंगे, लेकिन उन्हें अपने देश में स्थित सऊदी दूतावास या वाणिज्य दूतावास से डिजिटल पहचान प्राप्त करनी होगी। इसके बाद वे ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। विदेशी कंपनियों को भी पहली बार सऊदी अरब में सीधे प्रॉपर्टी खरीदने की अनुमति दी गई है। इसके लिए उन्हें निवेश मंत्रालय (MISA) के ‘इन्वेस्ट सऊदी’ प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण कर राष्ट्रीय एकीकृत नंबर प्राप्त करना होगा। भारतीय निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला भारतीय निवेशकों के लिए यह निर्णय कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सऊदी अरब में पहले से बड़ी भारतीय आबादी मौजूद है, जिससे किराए की मांग और आवासीय जरूरतें लगातार बनी रहती हैं। इसके अलावा देश में तेजी से विकसित हो रहे स्मार्ट शहर, औद्योगिक कॉरिडोर और पर्यटन परियोजनाएं भविष्य में प्रॉपर्टी की मांग को और बढ़ा सकती हैं।     रियल एस्टेट एक्स्पर्ट्स की माने तो लंबे समय के निवेश की सोच रखने वाले भारतीय निवेशकों के लिए यह बाजार बेहतर अवसर प्रदान कर सकता है। हालांकि निवेश से पहले स्थानीय कानून, कर व्यवस्था, स्वामित्व नियम और रीसेल शर्तों का विस्तृत अध्ययन करना आवश्यक होगा।     सऊदी अरब ने जिन क्षेत्रों को विदेशी निवेश के लिए खोला है, उनमें दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें रेड सी प्रोजेक्ट, दिरियाह, अलउला और भविष्य का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट नियोम (NEOM) प्रमुख हैं। सरकार इन क्षेत्रों को पर्यटन, व्यापार, तकनीक और वैश्विक निवेश का केंद्र बनाने की दिशा में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।     इन परियोजनाओं के विकसित होने के साथ आवासीय, व्यावसायिक और होटल सेक्टर में भी बड़े निवेश की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। मक्का और मदीना के लिए अलग नियम हालांकि नई नीति के साथ कुछ महत्वपूर्ण प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं। धार्मिक महत्व को देखते हुए मक्का और मदीना में संपत्ति स्वामित्व के नियम अलग रखे गए हैं। इन दोनों पवित्र शहरों में संपत्ति खरीदने का अधिकार सीमित श्रेणी के पात्र व्यक्तियों और सऊदी कंपनियों तक ही रखा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्रों की विशेष पहचान को सुरक्षित बनाए रखना है। सऊदी अरब के इस फैसले के प्रमुख फायदे     विदेशी नागरिकों को पहली बार कानूनी रूप से प्रॉपर्टी खरीदने का अवसर।     भारतीय प्रवासियों और एनआरआई निवेशकों के लिए नया निवेश विकल्प।     पूरी आवेदन प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी बनाई गई।     विजन 2030 के तहत विकसित हो रहे मेगा प्रोजेक्ट्स में निवेश की संभावना।     विदेशी कंपनियों को भी रियल एस्टेट बाजार में प्रवेश की अनुमति।     वैश्विक निवेश आकर्षित करने और अर्थव्यवस्था को विविध बनाने की दिशा में बड़ा कदम। किन बातों का रखना होगा ध्यान     निवेश से पहले स्थानीय संपत्ति कानूनों का अध्ययन आवश्यक होगा।     शुरुआती वर्षों में बाजार … Read more

मोदी सरकार में शिंदे की बढ़ी ताकत! NDA को अब नायडू-नीतीश की जरूरत नहीं? मंत्री पद पर बेटे की चर्चा तेज

नई दिल्ली 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे जब सामने आए थे, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) 240 सीटों पर सिमट गई थी। पूर्ण बहुमत के 272 के जादुई आंकड़े को छूने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सहयोगी दलों पर निर्भर होना पड़ा था। उस वक्त 16 सांसदों के साथ चंद्रबाबू नायडू की तेलगू देशम पार्टी (TDP) और 12 सांसदों के साथ नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) 'किंगमेकर' बनकर उभरे थे। ऐसा माना जा रहा था कि तीसरी बार बनी मोदी सरकार की चाबी इन्हीं दोनों नेताओं के हाथ में है और इनके बिना NDA का बहुमत खतरे में पड़ सकता है। लेकिन, अब 2026 आते-आते सियासी समीकरण पूरी तरह से बदल चुके हैं। पश्चिम बंगाल और फिर महाराष्ट्र में एक ऐसा राजनीतिक भूचाल आया जिसने न सिर्फ मोदी सरकार को और मजबूत कर दिया है, बल्कि नायडू और नीतीश पर सरकार की निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर दिया है। महाराष्ट्र: 'ऑपरेशन टाइगर' से उद्धव गुट में बड़ी सेंधमारी हाल ही में महाराष्ट्र की सियासत में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत एक बड़ा उलटफेर हुआ है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उद्धव ठाकरे गुट (UBT) को तगड़ा झटका दिया है। उद्धव गुट के 6 लोकसभा सांसदों ने पाला बदलते हुए एकनाथ शिंदे गुट का दामन थाम लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपकर इन सांसदों ने आधिकारिक तौर पर अपना गुट बदल लिया है। शिंदे गुट में शामिल होने वाले 6 सांसद:     ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव)     नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली)     संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी)     संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व)     भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)     संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम) इस बगावत के बाद लोकसभा में उद्धव गुट (UBT) के पास अब मात्र 3 सांसद बचे हैं, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर सीधे 13 हो गई है। दल-बदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, जिसे इन 6 सांसदों ने आसानी से पार कर लिया। बंगाल में तो खेला ही हो गया, NDA में सबसे बड़ी पार्टी बनी NCPI पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद TMC ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। लोकसभा में TMC के 29 सांसदों में से 20 सांसदों ने ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया है। इस बड़ी बगावत की अगुवाई बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार और बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय जैसी कद्दावर नेता कर रही हैं। इन सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र सौंपकर आधिकारिक तौर पर NDA को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। दल-बदल कानून के तहत संसद सदस्यता रद्द होने के खतरे से बचने के लिए इन बागी सांसदों ने एक बेहद चालाक रणनीतिक कदम उठाया है। कानूनन दल-बदल से बचने के लिए दो-तिहाई सांसदों का एक साथ आना जरूरी था। इन सभी ने 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) नामक एक बेहद कम चर्चित और गैर-मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी में अपने गुट का विलय कर लिया है। 2023 के आसपास पंजीकृत हुई यह गुमनाम सी पार्टी रातों-रात भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। 20 सांसदों के विलय के साथ ही यह अब लोकसभा में पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी और NDA के भीतर दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी बनकर उभरी है। NDA का मजबूत अंकगणित और कैसे कम हुई निर्भरता? शिंदे के 6 नए सांसदों और NCPI के 20 सांसदों के NDA में शामिल होने से गठबंधन का कुल आंकड़ा लोकसभा में काफी मजबूत हो गया है। 2024 में सरकार गठन के समय NDA के पास लगभग 293 सांसद थे। अब यह आंकड़ा 318 तक पहुंच गया है। ऐसे में मौजूदा स्थिति यह है कि अगर आज चंद्रबाबू नायडू (16) और नीतीश कुमार (12) किसी बात पर नाराज होकर NDA से अपना समर्थन वापस भी ले लेते हैं, तब भी नए सांसदों और अन्य छोटे दलों के समर्थन से मोदी सरकार पूर्ण बहुमत (272) के आंकड़े के ऊपर ही रहेगी। यानी सरकार पर से 'किंगमेकर्स' का दबाव अब खत्म हो गया है। लोकसभा में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के घटक दलों और उनकी सीटों की मौजूदा स्थिति की टेबल नीचे दी गई है:   क्र. सं. राजनीतिक दल लोकसभा सीटें 1 BJP (भारतीय जनता पार्टी) 240 2 NCPI (नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) 20 3 TDP (तेलुगु देशम पार्टी) 16 4 SHS (शिवसेना – शिंदे गुट) 13 5 JD(U) (जनता दल – यूनाइटेड) 12 6 LJP(RV) (लोक जनशक्ति पार्टी – रामविलास) 5 7 JD(S) (जनता दल – सेक्युलर) 2 8 JSP (जनसेना पार्टी) 2 9 RLD (राष्ट्रीय लोक दल) 2 10 AD(S) (अपना दल – सोनेलाल) 1 11 AGP (असम गण परिषद) 1 12 AJSU (ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन) 1 13 HAM(S) (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा – सेक्युलर) 1 14 NCP (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – अजीत पवार गुट) 1 15 SKM (सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा) 1   कुल (Total NDA Seats) 318 NDA में बढ़ा शिंदे का रुतबा  इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अंदर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कद काफी बढ़ा दिया है। 2022 में विधायकों की बगावत के जरिए शिवसेना में दो फाड़ करने के बाद, अब लोकसभा में भी शिंदे ने यह साबित कर दिया है कि 'असली शिवसेना' उन्हीं के पास है और उनके पास जमीनी नेताओं का समर्थन है।  मास्टरमाइंड श्रीकांत शिंदे को मिलेगा मंत्री पद का इनाम? उद्धव गुट के सांसदों को तोड़ने वाले इस गुप्त अभियान 'ऑपरेशन टाइगर' को अंजाम तक पहुंचाने का श्रेय एकनाथ शिंदे के बेटे और कल्याण से लगातार तीसरी बार लोकसभा सांसद चुने गए डॉ. श्रीकांत शिंदे को दिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कई महीनों से श्रीकांत शिंदे ही इस ऑपरेशन की रणनीति बना रहे थे। बागी सांसदों को दिल्ली लाने के लिए निजी विमान बुक करने से लेकर उनकी सुरक्षा और स्पीकर से मुलाकात तक का पूरा जिम्मा श्रीकांत शिंदे ने ही संभाला था। अब दिल्ली के सियासी गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि मोदी सरकार में जल्द ही होने वाले कैबिनेट विस्तार में शिवसेना (शिंदे गुट) को इसका बड़ा इनाम मिल सकता है। NDA के … Read more