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मध्य प्रदेश में शराब कारोबार पर सख्ती, छतरपुर की 20 बड़ी शराब दुकानों के ठेके रद्द

छतरपुर छतरपुर जिले में आबकारी विभाग ने बड़े शराब ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए जिले के 20 बड़ी शराब दुकानों के ठेके निरस्त कर दिए हैं। जिले के सबसे महत्वपूर्ण और व्यावसायिक रूप से लाभकारी छतरपुर, खजुराहो और हरपालपुर समूहों के शराब ठेकेदारों द्वारा निर्धारित लाइसेंस ड्यूटी जमा नहीं करने पर विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। इस कार्रवाई से शराब ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है और साथ ही सरकार को लगने वाले करोड़ों रुपए के राजस्व घाटे पर भी सवाल खड़े हुए हैं। ठेकेदार नवीन पांडेय पर 85 करोड़ बकाया- सूत्र सूत्रों के अनुसार, इन समूहों का संचालन कर रहे ठेकेदार नवीन पांडेय पर कुल मिलाकर लगभग 85 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि बकाया है। यह राशि उस निर्धारित लाइसेंस ड्यूटी का हिस्सा है, जिसे ठेकेदार को तय समय-सीमा के भीतर सरकारी खजाने में जमा करना था। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि ठेकेदार को बकाया राशि जमा करने के लिए बार-बार औपचारिक नोटिस दिए गए थे। कई बार चेतावनी देने के बावजूद, जब ठेकेदार की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो विभाग के पास कठोर कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। पहली बार ऐसे हालात छतरपुर जिले के आबकारी इतिहास में यह पहली बार है जब इतने बड़े समूहों के ठेकेदारों ने बोली लगाने के मात्र तीन-चार महीनों के भीतर ही घुटने टेक दिए हैं। यह स्थिति न केवल ठेकेदार की वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाती है, बल्कि आबकारी विभाग की टेंडर प्रक्रिया और पार्टी की आर्थिक साख की जांच की प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। विशेषज्ञ इसे एक प्रणालीगत विफलता के रूप में देख रहे हैं, जहां ऊंची बोली लगाकर ठेका तो हासिल कर लिया गया, लेकिन बाद में राजस्व की भरपाई करने में ठेकेदार पूरी तरह असफल रहे। छत्रसाल और भोले विश्वनाथ के लाइसेंस रद्द कठोर प्रशासनिक कार्रवाई के तहत, विभाग ने छत्रसाल बेवरेजेज और भोले विश्वनाथ एसोसिएट्स नामक कंपनियों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। ये वही कंपनियां थीं जो इन 20 प्रमुख शराब दुकानों का संचालन कर रही थीं। लाइसेंस रद्द होने के तुरंत बाद, विभाग ने इन दुकानों को अपने पूर्ण नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रभावित दुकानें और तत्काल प्रभाव इस निर्णय से जो 20 दुकानें प्रभावित हुई हैं, उनमें शहर की 8 बड़ी दुकानें शामिल हैं, उनमें राजनगर, खजुराहो, बमीठा, गंज बसारी, चंद्रनगर, टौरिया टेक और गठेवरा-सारंगपुर और हरपालपुर क्षेत्र की दो अन्य प्रमुख दुकानें भी इस कार्रवाई के दायरे में आई हैं। आगे का रास्ता: नया टेंडर और सरकारी कब्जा     सरकारी नियंत्रण: सहायक आबकारी आयुक्त ने पुष्टि की है कि तत्काल प्रभाव से सभी 20 दुकानें अब विभाग के सीधे नियंत्रण में आ गई हैं। जब तक कोई नया स्थायी इंतजाम नहीं हो जाता, इन दुकानों का संचालन सरकारी कर्मचारी करेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि शराब की बिक्री पूरी तरह बंद न हो और सरकार को कुछ राजस्व मिलता रहे, साथ ही शराब माफिया पर भी नकेल कसी जा सके।     पुनः नीलामी : विभाग बहुत जल्द इन सभी 20 दुकानों के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है। जल्दी ही नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि दुकानों का संचालन सुचारू रूप से पुनः प्रारंभ किया जा सके।

लखनऊ में 808 परिवारों को मिला आशियाना, एलडीए की अटल नगर योजना का लकी ड्रा संपन्न

लखनऊ  एलडीए ने बुधवार को अटल नगर योजना के 808 फ्लैटों का लाटरी से आवंटन किया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स आडिटोरियम में लाटरी ड्रा में 4469 आवेदकों के मध्य फ्लैटों की पर्चियां निकाली गई। नायरा ने बताया कि उन्होंने बड़ी उम्मीद से आवेदन किया था और उनका नाम आ गया। ऐसे ही कैलाश मिश्रा भी गदगद दिखे। एलडीए के अपर सचिव सीपी त्रिपाठी ने बताया कि देवपुर पारा में लांच की गयी अटल नगर आवासीय योजना में वन बीएचके और टू बीएचके के 2,496 फ्लैट्स हैं। 30 वर्गमीटर से लेकर 54.95 वर्गमीटर क्षेत्रफल के इन फ्लैटों की कीमत 9.82 लाख रुपये से शुरू है। एलडीए ने इस अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम में लिफ्ट के साथ स्वच्छ जल व विद्युत आपूर्ति, पावर बैकअप, सुरक्षा व्यवस्था, ग्रीन एवं किड्स प्ले एरिया व पार्किंग की सुविधा का प्रविधान किया है। उन्होंने बताया कि योजना में वन बीएचके के 135 और टू बीएचके के 673 फ्लैट शेष थे। जिसके लिए 18 अप्रैल से 18 मई के मध्य आनलाइन पंजीकरण खोला गया था। इसमें वन बीएचके के भवनों के लिए 1666 और टू बीएचके के भवनों के लिए 2803 आवेदकों ने पंजीकरण कराया था। अपर सचिव ने बताया, इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के मार्स आडिटोरियम में 4469 आवेदकों के मध्य फ्लैटों का लकी ड्रा हुआ। जिसमें खुले मंच पर आवेदकों को बुलाकर उन्हीं के हाथों से ही लाटरी ड्रा की पर्चियां निकलवायी गयी। 808 परिवारों को हाउसिंग स्कीम में अपने सपनों का आशियाना मिल गया है। वेलनेस सिटी के 59 किसानों को 125 भूखंड आवंटित एलडीए ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के वीआइपी लाज में वेलनेस सिटी योजना के लिए किसानों को 125 भूखंड आवंटित किया। यह योजना लैंड पूलिंग के माध्यम से आकार लेगी। वेलनेस सिटी के लिए 59 किसानों ने जमीन दिया था, उन्हें 125 भूखंड दिए गए। किसानों को 288 वर्ग मीटर के 86, 200 वर्ग मीटर के चार, 162 वर्ग मीटर के पांच, 128 वर्ग मीटर के नौ, 72 वर्ग मीटर के सात और 35 वर्ग मीटर के 14 आवेदकों के मध्य लाटरी का आयोजन किया गया था। 1200 एकड़ की योजना में जमीन 5100 रुपये प्रति वर्ग फीट एलडीए की सुलतानपुर रोड स्थित 1200 एकड़ की वेलनेस सिटी में भूमि का दाम तय हो गया है। यह योजना सबसे महंगी होगी। एलडीए ने आवासीय भूखंडों के 5100 रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से दाम तय किया है, जबकि बीकेटी स्थित नैमिष नगर योजना में 2800 रुपये प्रति वर्ग फीट और आगरा एक्सप्रेस-वे स्थित वरुण विहार योजना में 3200 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से भूखंड बिक्री किए जाएंगे। इसी तरह से सीतापुर रोड स्थित शिया पीजी कालेज के पास कब्जा मुक्त कराई 16 हजार वर्गमीटर भूमि पर चंद्रिका अपार्टमेंट में 900 फ्लैट बनेंगे।  

‘काश मेरे पास असुरक्षा का एंटीडोट होता’… पंजाब कांग्रेस में मनीष तिवारी की पोस्ट से मचा सियासी बवाल

चंडीगढ़  पंजाब चुनाव को लेकर कांग्रेस की नई टीम में जगह नहीं मिलने से सांसद मनीष तिवारी नाराज हैं. नाराजगी जाहिर करते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि काश उन्‍हें लोगों की असुरक्षा दूर करने का हुनर आता. दरअसल, करीब महीने भर के सस्पेंस को खत्म करते हुए कांग्रेस पार्टी ने  ऐलान किया कि पंजाब प्रदेश अध्यक्ष नहीं बदला जाएगा. इसके साथ कांग्रेस ने पंजाब में तीन कार्यकारी अध्यक्षों और कई चुनाव समितियों का ऐलान किया. इनमें मनीष तिवारी का नाम नदारद है।  पंजाब चुनाव कांग्रेस की नई टीम में मनीष तिवारी का नाम नहीं  चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी पहले लुधियाना और आनंदपुर साहिब सीट से भी सांसद रह चुके हैं. ऐसे में पंजाब में उनकी अच्‍छी पकड़ है, लेकिन इसके बावजूद मनीष तिवारी का नाम पंजाब चुनाव के लिए बनी किसी भी समिति में शामिल नहीं किया गया है. ये दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी उन्‍हें कोई बड़ी जिम्‍मेदारी पंजाब में नहीं देना चाहती है।  पंजाब से जुड़े कांग्रेस के फैसलों में उपेक्षा से नाराज मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पोस्‍ट में लिखा, 'हुनर होना अपने आप में बड़ा अवगुण है. काश मेरे पास लोगों की असुरक्षा को खत्म करने का कोई तरीका होता! लेकिन फिर भी, कांग्रेस पार्टी ने मुझे पिछले 45 वर्षों में बहुत कुछ दिया है और मैंने दशकों से अपना पूरा जीवन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सेवा में समर्पित किया है.' जो होगा सो होगा. कांग्रेस सांसद ने एक्स पर क्या लिखा? दरअसल, कांग्रेस सांसद 'पंजाब के लिए कांग्रेस द्वारा नए कार्यकारी अध्यक्षों और चुनाव आयोगों की नियुक्ति के बाद मनीष तिवारी हाशिए पर चले गए' इस शीर्षक वाले एक अखबार के लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए, एक्स पोस्ट पर लिखा,'काश मेरे पास व्यक्तियों और संस्थाओं की असुरक्षाओं का कोई इलाज होता! फिर भी, कांग्रेस ने पिछले 45 वर्षों में मुझे बहुत कुछ दिया है और मैंने दशकों से अपना पूरा जीवन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सेवा में समर्पित किया है। जो होगा सो होगा।   क्या है पूरा मामला? यह टिप्पणी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) द्वारा बुधवार को आगामी 2027 पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए महत्वपूर्ण संगठनात्मक नियुक्तियों की घोषणा के बाद आई है, जिसमें कई चुनाव संबंधी समितियों के अध्यक्षों और सह-अध्यक्षों के नाम घोषित किए गए हैं। वहीं,  चंडीगढ़ से तीन बार के लोकसभा सदस्य और पंजाब में पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी को कोई संगठनात्मक भूमिका नहीं सौंपी गई है। बता दें कि मनीष तिवारी वर्तमान में चंडीगढ़ से सांसद हैं। वे 2019 में पंजाब के आनंदपुर साहिब से सांसद थे और लुधियाना से भी सांसद रह चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, राजा वडिंग को पंजाब कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले से चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई और नेता भी नाराज हैं. पंजाब चुनाव के लिए कांग्रेस की टीम में कौन-कौन? कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले अपनी प्रदेश इकाई के नेतृत्व में बदलाव से जुड़ी अटकलों पर विराम लगाते हुए बुधवार को कहा कि प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा अपने पदों पर बने रहेंगे. इसके साथ ही, पार्टी ने अपने दलित चेहरे और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का प्रमुख नियुक्त किया. पार्टी ने लोकसभा सदस्य सुखजिंदर रंधावा को कोर कमेटी, पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंघला को चुनाव प्रबंधन एवं समन्वय समिति और सांसद अमर सिंह को घोषणापत्र समिति का अध्यक्ष बनाया है। 

उत्तराखंड में भारी बारिश से बिगड़े हालात, चारधाम यात्रा प्रभावित; बदरीनाथ हाईवे बंद

रुद्रप्रयाग उत्तराखंड में मॉनसून की धमाकेदार एंट्री हो चुकी है। राज्य के सभी हिस्सों में बारिश हो रही है। खासकर पहाड़ी जिलों में तेज बारिश का सिलसिला जारी है। चारधाम यात्रा के मुख्य पड़ाव रुद्रप्रयाग में लगातार बारिश हो रही है। जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। यहां अलकनंदा और भागीरथी नदी का संगम है। दोनों नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। उधर, बदरीनाथ नेशनल हाईवे गुलाबकोटी में मलबा आने और सड़क धसने के कारण बंद हो गया है। गुरुवार को रुद्रप्रयाग जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (DDMO) नंदन सिंह राजवार ने बताया कि ऊपरी हिमालयी इलाकों में बारिश के बाद पानी का बहाव बढ़ रहा है और इलाके में जलस्तर पर कड़ी नजर रखी जा रही है। राजवार ने कहा कि अभी जलस्तर समुद्र तल से 622 मीटर ऊपर है, जबकि चेतावनी का स्तर 626 मीटर और खतरे का स्तर 627 मीटर है। वाट्सएप पर भेजे जाएंगे अलर्ट उन्होंने कहा कि जैसे ही जलस्तर चेतावनी के निशान तक पहुंचेगा, WhatsApp ग्रुप के ज़रिए अलर्ट जारी किए जाएंगे, गाड़ियों से सार्वजनिक घोषणाएँ की जाएँगी और निवासियों को आगाह करने के लिए ज़मीनी टीमें तैनात की जाएँगी। रुद्रप्रयाग में बुधवार से लगातार बारिश हो रही है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहती है, तो दोनों नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है और खतरे के निशान के करीब पहुंच सकता है। बदलती स्थिति को देखते हुए, जिला आपदा नियंत्रण कक्ष नदियों के जलस्तर पर कड़ी नज़र रख रहा है। प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले निवासियों और तीर्थयात्रियों से सतर्क रहने और ज़रूरत न होने पर नदी के किनारे या अन्य जोखिम वाले इलाकों में न जाने की अपील की है। मौसम विभाग ने 4 जुलाई तक जारी किया है अलर्ट देहरादून में भारत मौसम विज्ञान विभाग ने रुद्रप्रयाग जिले में 4 जुलाई तक के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है और ज़िला प्रशासन ने निवासियों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। रुद्रप्रयाग के अलावा आज देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' है। वहीं, हरिद्वार, उत्तरकाशी और चमोली के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। बदरीनाथ नेशनल हाईवे बंद भारी बारिश के कारण बदरीनाथ नेशनल हाईवे गुलाबकोटी में मलबा आने से बंद हो गया है। यहां पर संबंधित विभागों ने सड़क खोलने का काम सुचारु कर दिया है, लेकिन अभी भी रुक रुक कर बारिश जारी है। बता दें कि बुधवार देररात्रि लगभग 2 के बाद पगनो गांव की ओर से भारी बरसाती नाला आने के कारण मलबा व बोल्डर आने से बदरीनाथ नेशनल हाईवे में 50 मीटर से अधिक सड़क में मालबा फैला हुआ है। सड़क पर काफी बोलडर भी आ रखे हैं। जिस कारण से अभी तक सड़क सुचारू नहीं हो पाई है। सड़क खोलने का काम जारी है।

Punjab Cabinet Decision: वोटर लिस्ट अपडेट कराने वालों को 1 जुलाई से 30 सितंबर तक मुफ्त मिलेंगे जरूरी दस्तावेज

चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की प्रक्रिया के दौरान लोगों को बड़ी राहत देने का फैसला लिया है। राज्य सरकार द्वारा एसआइआर के लिए अनिवार्य दस्तावेजों के लिए एक जुलाई से 30 सितंबर के समय के दौरान कोई भी फीस नहीं वसूलने का निर्णय किया है। यह मंजूरी बुधवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दी गई है। इस संबंध में तुरंत सभी सेवा केंद्रों व अन्य पब्लिक डीलिंग विभागों को सूचित किया जाएगा। कैबिनेट ने न केवल एसआइआर की प्रक्रिया के दौरान इन जरूरी दस्तावेजों को बनवाने की फीस माफ की है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि संबंधित दस्तावेज के लिए लोगों द्वारा अप्लाई करने के बाद की प्रक्रिया को तेजी से निपटाया जाए ताकि आवेदन करने वाले व्यक्ति को समय रहते ही संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हो सकें। सरकार की मंशा स्पष्ट की गई है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम एसआइआर में केवल इस वजह से नहीं छूटना चाहिए कि उसे जरूरत के मुताबिक व समय रहते सरकारी दस्तावेज हासिल नहीं हुआ। ध्यान रहे कि एसआइआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल रखने के लिए 2003 की मतदाता सूची में दर्ज जानकारी के साथ-साथ कुछ ऐसे दस्तावेज हैं, जिन्हें सहयोगी दस्तावेज के तौर पर अंकित किया गया है। इनमें जन्म प्रमाणपत्र, पेंशन कार्ड, स्थायी निवासी प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र सरीखे 12 दस्तावेज हैं। हालांकि यह सभी मतदाताओं के लिए अनिवार्य नहीं होंगे, लेकिन पंजाब सरकार का मानना है कि जिन भी मतदाताओं को इनकी जरूरत होगी, उन्हें यह दस्तावेज हासिल करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। लैंड पुलिस में भी किया आंशिक परिवर्तन कैबिनेट ने आवास एवं शहरी विकास विभाग की लैंड पूलिंग पालिसी में भी थोड़ा बदलाव करने को मंजूरी दी गई है। इसके तहत भूमि अधिग्रहण होने पर भूमि मालिक को मिलने वाली रिहायशी व कमर्शियल जमीन को थोड़ा बढ़ाया गया है। पहले भूमि मालिक को एक एकड़ जमीन अधिग्रहण होने पर एक हजार गज रिहायशी और 200 गज कमर्शियल जमीन देने का प्रविधान था, जिसे अब बढाकर एक हजार गज रिहायशी और 210 गज कमर्शियल जमीन दी जाएगी। ठीक ऐसे ही यदि सिर्फ रिहायशी जमीन लेने की आप्शन चुनी जाती है तो पहले के प्रविधान के मुताबिक 1,600 वर्ग गज के बजाये अब 1,630 वर्ग गज जमीन दी जाएगी। इसके अलावा आवास एवं शहरी विकास विभाग के द्वारा अवैध कालोनियों के निवासियों को एनओसी. जारी करने संबंधी प्रक्रिया में बदलाव व वेबसाइट पर जानकारी मुहैया कराने को भी मंजूरी दी गई है।  

WhatsApp का नया Username फीचर कितना सुरक्षित? कंपनी ने 7 सवालों के दिए जवाब, फ्रॉड पर भी किया साफ़ खुलासा

नई दिल्ली  व्हाट्सऐप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार की ओर से उठाई गई चिंताओं के बीच Meta ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है. कंपनी का कहना है कि सरकार जिन आशंकाओं को लेकर सवाल उठा रही है, उन्हें ध्यान में रखते हुए पहले से ही कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है. Meta का दावा है कि Username फीचर में ऐसे कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं, जिनकी मदद से फर्जीवाड़ा, पहचान की नकल और ऑनलाइन धोखाधड़ी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।  हाई प्रोफाइल नामों को पहले से सुरक्षित रखा गया एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सऐप के प्रवक्ता ने बताया कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थानों और मशहूर लोगों के नाम फिलहाल सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि उन्हें केवल उनके वास्तविक मालिक ही इस्तेमाल कर सकें. इतना ही नहीं, इन नामों से मिलते जुलते यूजरनेम भी रिजर्व रखे गए हैं, जिससे कोई फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को भ्रमित न कर सके।  फोन नंबर छिपाकर भी कर सकेंगे चैट व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा ने बताया कि नया यूजरनेम फीचर इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक दूसरे से जुड़ सकेंगे. इसका उद्देश्य यूजर्स की निजता को और मजबूत बनाना है. हालांकि कंपनी ने साफ किया कि व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा. यूजरनेम केवल बातचीत शुरू करने का एक नया विकल्प होगा. कंपनी ने बताया कि यूजरनेम फीचर एक साथ सभी यूजर्स के लिए जारी नहीं किया जाएगा. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. फिलहाल कुछ यूजर्स से केवल अपना पसंदीदा यूजरनेम चुनने के लिए कहा गया है।  व्हाट्सऐप के अनुसार, सिस्टम में ऐसे कई सुरक्षा तंत्र लगाए गए हैं जो किसी भी तरह की फर्जी पहचान, धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल के पैटर्न की पहचान करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत ब्लॉक कर देंगे. कंपनी ने बताया कि किसी नए अकाउंट को सीमित संख्या में ही नए लोगों से संपर्क करने की अनुमति होगी. इसके अलावा किसी का यूजरनेम अनुमान लगाकर खोजने या लगातार ट्राई करने की कोशिशों को भी सिस्टम रोक देगा।  यूजरनेम से मैसेज आने पर पूरी जानकारी मिलेगी व्हाट्सऐप ने बताया कि किसी यूजर को यूजरनेम के जरिए मैसेज भेजने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा. जब किसी को यूजरनेम के जरिए मैसेज मिलेगा, तो उसके साथ यह जानकारी भी दिखाई जाएगी कि मैसेज भेजने वाला नया अकाउंट है या पहले से संपर्क में है, क्या दोनों के कोई साझा ग्रुप हैं और उसका देश कौन सा है. इससे यूजर को यह समझने में आसानी होगी कि सामने वाला भरोसेमंद है या नहीं।  केंद्र सरकार ने तीन दिन में मांगा जवाब इससे पहले केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप को नोटिस जारी कर यूजरनेम फीचर पर तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में पूरी तरह विचार विमर्श नहीं हो जाता, तब तक इस फीचर को भारत में लागू नहीं किया जा सकता।  सरकार को फर्जीवाड़े और साइबर ठगी की आशंका सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह जांच कर रही है कि कहीं इस फीचर का इस्तेमाल सरकारी विभागों, बैंकों और अन्य भरोसेमंद संस्थानों की फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने के लिए तो नहीं किया जा सकता. इसके अलावा इस फीचर की समीक्षा यूजर सुरक्षा, जवाबदेही और भारत के डिजिटल नियमों के अनुरूप भी की जा रही है।  मेटा से मांगी गई सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी सरकार ने मेटा से यह भी पूछा है कि इस फीचर में कौन कौन से सुरक्षा उपाय लगाए गए हैं और कंपनी फर्जी पहचान तथा दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था कर रही है. सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि यह फीचर ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों और पहचान की नकल करने वाले हमलों की घटनाओं को बढ़ा सकता है. सरकार का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था, बैंक, सार्वजनिक प्राधिकरण या किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलता जुलता यूजरनेम बना लेता है, तो इससे लोगों के साथ धोखाधड़ी की आशंका बढ़ सकती है।  सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार मेटा के जवाब का अध्ययन करने और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर आगे विचार विमर्श करने के बाद ही यह तय करेगी कि भारत में व्हाट्सऐप के यूजरनेम फीचर को अनुमति दी जाए या नहीं। 

बिहार में वाहन चालकों पर बढ़ेगा खर्च, स्टेट हाईवे पर कार से ट्रक तक सभी से वसूला जाएगा टोल

पटना  बिहार में अब नेशनल हाईवे (एनएच) की तरह स्टेट हाईवे (एसएच) पर भी टोल टैक्स लगेगा। वाहन चालकों की जेब और ढीली होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली, 2026 पर मुहर लगा दी गई। नियमावली में कार-जीप से लेकर ट्रक-ट्रेलर तक सभी तरह के वाहनों के लिए शुल्क की दर तय कर दी गई है। टोल टैक्स वसूली के लिए सड़कों का हो रहा अध्ययन फिलहाल टोल टैक्स की वसूली के लिए सड़कें चिह्नित नहीं की गई हैं। बिहार सरकार स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स वसूली को लेकर सड़कों का अध्ययन करा रही है। ऐसी सड़कों पर वाहनों की आवाजाही की रिपोर्ट तैयार होगी। इसके बाद यह तय होगा कि किन-किन सड़कों पर टैक्स की वसूली की जाए। माना जा रहा है कि भविष्य में बनने वाले एक्सप्रेस-वे पर भी टोल टैक्स की वसूली की जाएगी। स्टेट हाईवे, बड़े पुल और बायपास से गुजरने पर देना होगा टोल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में 29 प्रस्तावों पर मुहर लगी है। बैठक के बाद कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि मंत्रिमंडल ने बिहार सरकार के स्वामित्व वाले पथ अवसंरचनाओं पर टोल टैक्स लिए जाने के निर्णय के फलस्वरूप नियमावली को मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत राज्य सरकार के स्वामित्व वाली सड़कों, बड़े पुलों और बाइपास का उपयोग करने वाले वाहनों से श्रेणीवार टैक्स लिया जाएगा। बिहार में स्टेट हाईवे पर टोल टैक्स की दरें हल्के मोटर वाहनों के लिए टोल की दरें 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित की गई है। वहीं, ट्रक जैसे भारी वाहनों के लिए यह शुल्क 6.65 रुपये और उससे अधिक क्षमता वाले वाहनों के लिए 8.10 रुपये प्रति किलोमीटर होगा। शुल्क संग्रहण को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए फास्टैग और अन्य स्वीकृत इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के माध्यम से डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दी जाएगी। ओवरलोड गाड़ियों पर टोल से अतिरिक्त चार्ज भी लगेगा उन्होंने कहा कि नियमावली में वाहनों के लिए शुल्क की वार्षिक समीक्षा का भी प्रावधान किया गया है। आवश्यकतानुसार टोल टैक्स की दरों में संशोधन किया जा सकेगा। नई व्यवस्था के अनुसार बिना फास्टैग वाले वाहनों से सामान्य दर की तुलना में अधिक टोल वसूला जाएगा। वहीं, ओवरलोडेड वाहनों पर भी अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगाया जाएगा। स्थानीय और नियमित यात्रियों को निर्धारित श्रेणियों के अनुसार छूट, रियायती पास एवं मल्टीपल ट्रिप सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। टोल टैक्स वसूली की तारीख अभी तय नहीं बिहार में स्टेट हाईवे की कुल लंबाई 3614 किलोमीटर है। इनमें से 3617 किलोमीटर टू लेन है, जबकि 40 किलोमीटर फोरलेन सड़क है। नई टोल की दरें कब से लागू होंगी, इसकी तारीख अभी तय नहीं की गई है। सड़कों पर वाहनों के भार की रिपोर्ट तैयार होने के बाद इस पर फैसला होगा। किस गाड़ी पर कितना टोल देना होगा?     हल्के वाहन (कार, जीप) : 1.25 रुपये प्रति किमी     छोटे व्यावसायिक वाहन : 2 रुपये प्रति किमी     दो एक्सल वाले बस या ट्रक : 4.25 रुपये प्रति किमी     बड़े वाहन (पोकलेन, डंपर): 6.65 रुपये प्रति किमी     7 या इससे अधिक एक्सेल वाले वाहन : 8.10 रुपये प्रति किमी 100 किमी यात्रा के लिए कार चालक को 125 रुपये देने होंगे प्रस्तावित दरों के अनुसार, बिहार में स्टेट हाईवे से गुजरने वाले कार, जीप जैसे चौपहिया वाहनों को प्रति 100 किलोमीटर की यात्रा के लिए 125 रुपये टोल टैक्स देना होगा। इतनी ही दूरी के लिए बस और ट्रक से 425 रुपये वसूले जाएंगे। मल्टी एक्सल भारी वाहनों को 810 रुपये देने होंगे। पिकअप, लोडिंग टेंपो जैसे छोटे व्यावसायिक वाहनों से प्रति 100 किमी 200 रुपये टोल देने होंगे।

जैसलमेर में बड़ी बुलडोजर कार्रवाई, 300 मकान-झोपड़ियां टूटीं; करीब 1000 लोग प्रभावित

जैसलमेर जैसलमेर में नगर परिषद ने सरकारी जमीन पर हुए अवैध कब्‍जा को हटाया. करीब 400 बीघा सरकारी जमीन को खाली कराया. बुलडोज से करीब 300 अवैध निर्माणों को तोड़ द‍िया गया. लगभग 1000 लोग प्रभावित हुए, जिनमें कई परिवार बेघर हो गए. अब उनके रहने का कोई ठ‍िकाना नहीं है. नगर परिषद, प्रशासन और भारी पुलिस जाब्ते की मौजूदगी में कार्रवाई हुई.   पूरा इलाका छावनी में तब्दील  म्याजलार रोड, बाड़मेर रोड, एयरपोर्ट रोड, तोताराम की ढाणी और सुदासर क्षेत्र में सरकारी जमीन पर लोग कच्चे-पक्के कमरे बनाकर रहने लगे थे. JCB मशीन से झोपड़ी और मकान तो तोड़ द‍िया गया. नगर परिषद, प्रशासन और भारी पुलिस जाब्ता तैनात थी. पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था.  लोगों ने जताई नाराजगी  कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों में भारी नाराजगी देखने को मिली. लोगों का आरोप है कि उन्हें ना तो पहले सूचना दी गई, और ना ही घर का सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय मिला. प्रभावित महिला आमू देवी ने बताया कि उन्होंने प्रशासन से कुछ समय की मांग की थी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई. उनका आरोप है कि सामान बाहर निकालने से पहले ही मकान तोड़ दिया गया.  रोजमर्रा की जरूरतों पर संकट  उन्होंने दावा किया कि कार्रवाई के दौरान दीवार गिरने से उनका बेटा सुरेश घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा.  परिवार का कहना है कि वे मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं, और अचानक हुई कार्रवाई के बाद उनके सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है.  "अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं करेंगे" नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह ने कहा कि राजकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने बताया कि अभियान के तहत करीब 400 बीघा भूमि से 300 अवैध कब्जा हटाकर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा, और आमजन से अपील की कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा ना करें, अन्यथा नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी.  नगर परिषद जैसलमेर के राजस्व अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि एक अखबार के माध्यम से नोटिस जारी करके सूचित किया था. किसी के पास कोई कागज हो तो सूचित करें. हलांकि, सरकारी जमीन है, इसलिए किसी के पास कागज होगा भी नहीं.  

Viral Girl Case: पति की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज, कोर्ट ने कहा- ट्रायल में तय होगी उम्र

खरगोन महाकुंभ से वायरल हुईं मोनालिसा ने इसी साल 11 मार्च को अपने बॉयफ्रेंड फरमान खान संग केरल में शादी की थी. उनकी इंटरफेथ मैरिज पर जमकर बवाल हुआ. बताया गया कि मोनालिसा नाबालिग हैं. फरमान पर उन्हें भड़काने के आरोप लगे. हालांकि फरमान ने मीडिया के सामने मोनालिसा के 18 प्लस होने का दावा किया. फिर जांच पड़ताल में सामने आया कि मोनालिसा नाबालिग हैं. अब इस केस में फरमान की मुश्किल और बढ़ गई है।  जेल जाएंगे फरमान? खरगोन जिले के जिला न्यायालय मण्डलेश्वर की विशेष POCSO कोर्ट ने फरमान की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज की. फरमान पर नाबालिग मोनालिसा को केरल ले जाकर शादी करने के आरोप हैं. फरमान पर नाबालिग मोनालिसा को केरल ले जाकर शादी करने का आरोप एक्ट्रेस के माता-पिता ने लगाया था. कोर्ट ने माना कि आरोपी फरार है, साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है. महेश्वर थाने में बीएनएस, सहित अन्य धाराओं में दर्ज मामले में राहत देने से कोर्ट ने इनकार किया है।  महेश्वर पुलिस ने इन धाराओं में केस डायरी पेश की मोनालिसा के मामले में ऑडियो विभाग के अधिकारी पुलिस महेश्वर श्वेता शुक्ला ने पुलिस थाना महेश्वरी में धारा 137,( 2), 81,83, 87 भारतीय न्याय संहिता और धारा 9 बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम साथ ही धारा 3(2) v, 3(2) (va) अजजा, अजा अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की केस डायरी सहित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है।  महेश्वर नगरपरिषद में गलत बर्थडेट दर्ज जांच की शुरुआत केरल के नयनार देवा मंदिर से हुई. मंदिर प्रशासन ने जांच में बताया कि मोनालिसा और फरमान की शादी आधार कार्ड में लिखी ऐज के बेसिस पर की गई है. केरल के पुअर गांव के ग्राम पंचायत कार्यालय में इस शादी का पंजीकरण किया गया है. इसमें मोनालिसा के गलत जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाया गया है. जांच टीम ने पाया कि ये गलत जन्म प्रमाण पत्र नगरपालिका महेश्वर से जारी किया गया है. उसके बाद जांच टीम ने तत्काल मध्यप्रदेश महेश्वर के सरकारी मेडिकल अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच की. फिर पाया कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को शाम 5:50 हुआ था. जिसके आधार पर वो केरल में संपन्न विवाह 11 मार्च, 2026 को मात्र 16 वर्ष 2 माह और 12 दिन की थी।  साथ ही जांच टीम ने पूर्व में स्थानीय नगरपालिका महेश्वर द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र, जो गलत जन्म तिथि के आधार पर जारी किया गया है, जिसमें मोनालिसा की जन्म तिथि 1/1/2008 लिखाई गई थी, उसे निरस्त करवाने में भी कानूनी प्रावधानों का अध्ययन कर स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया. जन्म प्रमाण पत्र के इस दस्तावेजी प्रमाण ने विवाह के पक्षकारों  की साजिश को बेनकाब कर दिया. मोनालिसा के माता-पिता ने उनके रक्त संबंधियों के जाति प्रमाण पत्र भी आयोग को उपलब्ध कराए गए. जिससे ये बात भी साबित हो गई कि मोनालिसा के माता-पिता अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्य हैं।  महेश्वर के सरकारी रिकार्ड में नाबालिग मोनालिसा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष अन्तर सिंह आर्य के निर्देश पर गठित जांच दल ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश के गांवों तक गहन छानबीन की. 72 घंटे में केरल से लेकर मध्य प्रदेश के महेश्वर तक सारे तार जोड़कर सच को उजागर कर दिया। 

रांची ट्रैफिक पुलिस का रिकॉर्ड अभियान, एक महीने में 9.50 करोड़ रुपये के चालान

रांची  राजधानी रांची में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ जून माह में ट्रैफिक पुलिस ने व्यापक अभियान चलाते हुए 1,24,144 वाहनों का चालान काटा। इस दौरान कुल 9.50 करोड़ रुपये का चालान किया गया, जो अब तक का रिकॉर्ड बताया जा रहा है। इसकी जानकारी ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि मई महीने में लगभग 50 हजार वाहनों का चालान किया गया था, जबकि जून में यह संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई। जून माह में सबसे अधिक कार्रवाई नो-पार्किंग के मामलों में हुई, जिसमें 50,500 वाहनों का चालान काटा गया। वहीं बिना हेलमेट वाहन चलाने पर 58,743, पीछे बैठे यात्री के बिना हेलमेट होने पर 547, रेड लाइट जंप के 4,612, ओवरस्पीडिंग के 2,118, ऑटो ओवरलोडिंग के 1,359 तथा ड्रंक एंड ड्राइव के 99 मामलों में चालान किया गया। ट्रैफिक एसपी ने बताया कि लगातार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले 765 वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित (सस्पेंड) करने की अनुशंसा भी की गई है। इसके अलावा अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन के मामलों में भी कार्रवाई की गई। सिविक सेंस अपनाने की अपील प्रेस वार्ता में ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस का उद्देश्य लोगों से जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि उन्हें यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि यदि लोग सिविक सेंस का पालन करें, निर्धारित स्थान पर ही वाहन पार्क करें, हेलमेट पहनें और ट्रैफिक नियमों का ईमानदारी से पालन करें, तो न केवल चालान से बच सकते हैं बल्कि सड़क दुर्घटनाओं और जाम की समस्या को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।