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राष्ट्रीय कार्यशाला में पहुंचे उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर हुई विस्तृत चर्चा

16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा पंचायतों के वित्तीय सशक्तिकरण एवं ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर हुई चर्चा          रायपुर,  नई दिल्ली में आयोजित 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा शामिल हुए। कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर ग्रामीण स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधनों के आवंटन, पंचायतों की वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ करने तथा 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।          कार्यशाला में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता, बेहतर सेवा प्रदायगी, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रदर्शन आधारित अनुदान व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कार्यशाला के विभिन्न तकनीकी सत्रों में सहभागिता करते हुए पंचायतों एवं ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर आयोजित प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श का अवलोकन किया। छत्तीसगढ़ को ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान कार्यशाला के दौरान 16वें वित्त आयोग द्वारा ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के लिए प्रस्तावित अनुदान की जानकारी साझा की गई। आयोग की अनुशंसाओं के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि में छत्तीसगढ़ को कुल 11,664 करोड़ रुपए का अनुदान प्राप्त होगा। इसमें 9,331 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट तथा 2,333 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट शामिल हैं। वहीं, ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अंतर-राज्यीय अनुदान वितरण में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी 2.68 प्रतिशत निर्धारित की गई है। वर्षवार आवंटन के अनुसार 2026-27 में राज्य को 1,498 करोड़ रुपए की बेसिक ग्रांट मिलेगी। 2027-28 में 1,663 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 248 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2028-29 में 1,846 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 624 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट, 2029-30 में 2,049 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 693 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट तथा 2030-31 में 2,275 करोड़ रुपए बेसिक ग्रांट एवं 768 करोड़ रुपए परफॉर्मेंस ग्रांट का प्रावधान किया गया है।        यह अनुदान ग्राम पंचायतों एवं अन्य ग्रामीण स्थानीय निकायों के माध्यम से आधारभूत अधोसंरचना के विकास, नागरिक सुविधाओं के विस्तार तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

छत्तीसगढ़: बंदूक से विकास तक का सफर, सुकमा के मड़कम भीमा की बदली तस्वीर

सुकमा : बंदूक छोड़ विकास की राह पर बढ़े मड़कम भीमा, शासकीय योजनाओं ने बदली जिंदगी    पक्का घर, रोजगार और सम्मान: मड़कम भीमा की प्रेरक कहानी सुकमा जिले में शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। कोंटा विकासखंड के ग्राम पंचायत पोलमपल्ली निवासी मड़कम भीमा की कहानी इस परिवर्तन का जीवंत उदाहरण है, जिन्होंने हिंसा और भय के रास्ते को छोड़कर विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा को अपनाया। जिला प्रशासन, सुरक्षा बलों और शासन की समन्वित पहल ने उन्हें समाज में सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित होने का अवसर प्रदान किया।     मुख्यधारा में लौटने के बाद जिला प्रशासन ने मड़कम भीमा को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़कर उनके जीवन को नई दिशा दी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत स्वीकृत आर्थिक सहायता से उनका पक्का आवास बनकर तैयार हुआ, जिसने उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार दिया। यह पहल न केवल एक घर उपलब्ध कराने तक सीमित रही, बल्कि उनके जीवन में स्थायित्व और विश्वास की नई भावना भी लेकर आई।     आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन द्वारा उन्हें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से जोड़ा गया। गांव के विकास कार्यों में सक्रिय भागीदारी करते हुए उन्होंने सम्मानजनक मजदूरी अर्जित की, जिसकी राशि सीधे उनके बैंक खाते में पहुंची। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बल्कि आत्मविश्वास और स्वाभिमान के साथ आगे बढ़ने की नई प्रेरणा भी मिली।     मड़कम भीमा की सफलता की यह कहानी बताती है कि सुकमा जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल, प्रभावी पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों। 

नर चीतल के अवैध शिकार का भंडाफोड़, 7 आरोपी गिरफ्तार; कोर्ट ने भेजा जेल

वन्यजीव संरक्षण में बड़ी सफलता नर चीतल के अवैध शिकार का खुलासा, सात आरोपी गिरफ्तार, न्यायालय ने भेजा जेल सरकार की सख्ती से वन्यजीव अपराधों पर लग रहा अंकुश, वन्यजीव संरक्षण को मिल रही मजबूती रायपुर,   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन, वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा अवैध शिकार के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी क्रम में कवर्धा परियोजना मंडल ने नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया। मुखबिर की सूचना पर योजनाबद्ध कार्रवाई वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगल में शिकारियों ने जाल बिछाकर लगभग तीन वर्ष के नर चीतल का शिकार किया। इसके बाद उसके मांस को पकाकर आपस में बांटने की तैयारी की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना पर वन विकास निगम की टीम ने तत्काल योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर दबिश दी और सभी सात आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। शिकार में प्रयुक्त सामग्री और चीतल का मांस जब्त कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस, नायलॉन की रस्सी, तीन कुल्हाड़ियां, स्टील के तार एवं लकड़ी से बने फंदे तथा खून से सना थैला बरामद कर जब्त किया गया। आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई। सघन निगरानी और गश्त से मिल रही सफलता वन विभाग और वन विकास निगम द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा विशेष निगरानी अभियान चलाने के कारण वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो रहा है। विभाग की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से अवैध शिकार करने वालों के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार की स्पष्ट नीति मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन विभाग आधुनिक निगरानी व्यवस्था, नियमित गश्त और प्रभावी सूचना तंत्र के माध्यम से वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने का कार्य कर रहा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।  वन मंत्री कश्यप ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। यदि कहीं भी अवैध शिकार या वन अपराध की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई कर प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा और जैव विविधता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

कैंसर और आपात चिकित्सा सेवाओं को मिलेगा नया स्वरूप, मुख्यमंत्री ने तैयार कराया व्यापक रोडमैप

प्रदेश में विकसित होगा एकीकृत ट्रॉमा नेटवर्क, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश कैंसर और आपात चिकित्सा सेवाओं को मिलेगा नया स्वरूप, मुख्यमंत्री ने तैयार कराया व्यापक रोडमैप स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े विस्तार की तैयारी, हर जिले में कैंसर केयर और सुदृढ़ होगा ट्रॉमा नेटवर्क कैंसर से ट्रॉमा केयर तक स्वास्थ्य व्यवस्था के व्यापक कायाकल्प की तैयारी, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश 'गोल्डन ऑवर' में मिलेगा बेहतर इलाज, मुख्यमंत्री ने तय की कार्ययोजना हॉस्पिटल की रीढ़ हैं इमरजेंसी सेवाएं, इसके निरंतर बेहतरी पर सीएम का रहा जोर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में प्रत्येक जिले तक कैंसर उपचार सुविधाएं विकसित करने तथा सड़क दुर्घटनाओं व अन्य आपात स्थितियों में 'गोल्डन ऑवर' के भीतर उपचार सुनिश्चित करने के लिए प्रदेशव्यापी एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को त्वरित उपचार, समय पर जांच, आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ मानव संसाधन तथा सुदृढ़ रेफरल प्रणाली पर आधारित बनाया जाए, ताकि प्रत्येक नागरिक को उसके निकट ही गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके। शुक्रवार को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा विभिन्न विशेषज्ञों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश राज्य कैंसर टास्क फोर्स तथा उत्तर प्रदेश ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क (यूपीटीईएन) द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को दोनों प्रस्तावों का विस्तृत परीक्षण कर चरणबद्ध, समयबद्ध एवं परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को केवल उपचार केंद्रित न रखकर रोकथाम, शीघ्र पहचान, गुणवत्तापूर्ण उपचार, पुनर्वास, अनुसंधान तथा तकनीक आधारित समन्वित स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में चरणबद्ध रूप से कैंसर उपचार सुविधाओं का विकास किया जाए तथा प्रत्येक मंडल में आधुनिक कैंसर केन्द्र स्थापित किए जाएं। कैंसर की रोकथाम, समय पर स्क्रीनिंग, शीघ्र निदान तथा गुणवत्तापूर्ण उपचार पर विशेष ध्यान दिया जाए। तंबाकू जनित कैंसर की रोकथाम के लिए प्रभावी जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक नियमित कैंसर स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाए। मरीजों की स्क्रीनिंग से लेकर उपचार और फॉलोअप तक की पूरी व्यवस्था डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ी जाए। मुख्यमंत्री ने ट्रॉमा एवं आपात चिकित्सा सेवाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि दुर्घटना अथवा अन्य गंभीर आपात स्थिति में घायल व्यक्ति को 'गोल्डन ऑवर' के भीतर उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क विकसित किया जाए। मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, ट्रॉमा केंद्रों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित किया जाए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल रेफरल प्रणाली विकसित कर एम्बुलेंस, चिकित्सकों, बेड उपलब्धता तथा उपचार सुविधाओं की वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित की जाए। सड़क दुर्घटना संभावित क्षेत्रों, राष्ट्रीय राजमार्गों तथा एक्सप्रेसवे पर त्वरित चिकित्सा सहायता की सुदृढ़ व्यवस्था विकसित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ तथा पैरामेडिकल कार्मिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। मेडिकल शिक्षा संस्थानों में विशेषज्ञ प्रशिक्षण, अनुसंधान तथा नवाचार को बढ़ावा दिया जाए। आधुनिक चिकित्सा के साथ पुनर्वास, मानसिक स्वास्थ्य सहयोग, योग एवं आयुष आधारित समन्वित सेवाओं को भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि बड़ी जनसंख्या, जागरूकता के अभाव तथा अधिकांश मामलों का देर से पता चलने के कारण कैंसर गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। उपचार पर होने वाला अत्यधिक निजी व्यय तथा कैंसर उपचार संस्थानों का असमान वितरण भी बड़ी चुनौती है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए वर्ष 2026 से 2036 तक का 10 वर्षीय राज्य कैंसर रोडमैप तैयार किया गया है। बैठक में यह भी बताया गया कि प्रस्तावित कैंसर मिशन रोकथाम एवं स्क्रीनिंग, निदान एवं रेफरल, उपचार एवं आधारभूत संरचना, पैलिएटिव केयर एवं पुनर्वास, डिजिटल स्वास्थ्य एवं कैंसर रजिस्ट्री, क्षमता निर्माण एवं प्रशिक्षण, ऑन्कोलॉजी अनुसंधान तथा समन्वित ऑन्कोलॉजी सेवाओं जैसे आठ प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा। बाल्यावस्था कैंसर के लिए भी सभी प्रमुख केन्द्रों पर समग्र उपचार सुविधा विकसित की जाएगी।  मुख्यमंत्री ने कैंसर की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग व आयुष विभाग मिलकर अभियान चलाएं। उन्होंने जागरूकता, खानपान, शुद्ध पेयजल व सुचारू जीवन पद्धति पर विशेष बल दिया।  सड़क दुर्घटनाओं एवं अन्य आपात स्थितियों में मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश ट्रॉमा एवं इमरजेंसी नेटवर्क (यूपीटीईएन) विकसित करने पर चर्चा के दौरान बताया गया कि इसके अंतर्गत प्रदेश में एकीकृत ट्रॉमा एवं आपात चिकित्सा इकाइयों का विकास किया जाएगा, जिनमें लेवल-1 एपेक्स केन्द्र, लेवल-2 क्षेत्रीय केन्द्र तथा लेवल-3 जिला एवं प्राथमिक प्रतिक्रिया इकाइयां शामिल होंगी। इस नेटवर्क के माध्यम से प्रदेश की लगभग 95 प्रतिशत आबादी को 60 मिनट के भीतर विशेषज्ञ आपात चिकित्सा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इमरजेंसी सेवाएं हॉस्पिटल की रीढ़ होती हैं। उन्होंने गोल्डन ऑवर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि एंबुलेंस के रिस्पांस टाइम को और बेहतर कर घायल व्यक्ति को समय से अस्पताल पहुंचाया जाए तो उसे समय पर इलाज मिल सकता है।

यूपी में ग्रीन एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा, कोल इंडिया और यूपीआरवीयूएनएल के बीच हुआ बड़ा समझौता

यूपी में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लिए कोल इंडिया और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने किया समझौता  संयुक्त उपक्रम के तहत प्रदेशभर में सौर, पवन, फ्लोटिंग सोलर और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं का होगा विकास ऊर्जा सुरक्षा को सशक्त बनाने, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और सतत आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में रणनीतिक साझेदारी लखनऊ उत्तर प्रदेश में स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (यूपीआरवीयूएनएल) ने राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास के लिए संयुक्त उपक्रम समझौते (Joint Venture Agreement) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता यूपीआरवीयूएनएल के प्रबंध निदेशक मयूर माहेश्वरी तथा कोल इंडिया लिमिटेड के निदेशक (बिजनेस डेवलपमेंट) आशीष कुमार की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर इन्वेस्ट यूपी के पीएसयू प्रमुख सुबोध दीक्षित और कोल इंडिया लिमिटेड व यूपीआरवीयूएनएल के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह रणनीतिक साझेदारी स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार को तेज़ करने और प्रदेश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से देश की अग्रणी ऊर्जा कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड और प्रदेश की प्रमुख विद्युत उत्पादन कंपनी यूपीआरवीयूएनएल मिलकर विश्वस्तरीय नवीकरणीय ऊर्जा अवसंरचना विकसित करेंगे, जो उत्तर प्रदेश की बढ़ती विद्युत आवश्यकताओं को टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य उन्मुख समाधान उपलब्ध कराएगी। समझौते के तहत एक नई संयुक्त उद्यम कंपनी का गठन किया जाएगा, जिसमें कोल इंडिया लिमिटेड की 51 प्रतिशत तथा यूपीआरवीयूएनएल की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। यह कंपनी ग्राउंड-माउंटेड सोलर, फ्लोटिंग सोलर, रूफटॉप सोलर, पवन ऊर्जा, पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं सहित पारस्परिक सहमति से तय अन्य स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के विकास, वित्तपोषण, निर्माण, संचालन और रखरखाव का कार्य करेगी। यह साझेदारी कोल इंडिया लिमिटेड की वित्तीय क्षमता, परियोजना क्रियान्वयन दक्षता और नवीकरणीय ऊर्जा विशेषज्ञता को यूपीआरवीयूएनएल के विद्युत उत्पादन अनुभव एवं उत्तर प्रदेश की ऊर्जा आवश्यकताओं की गहरी समझ के साथ जोड़ती है। दोनों संस्थाएं मिलकर सौर, पवन, फ्लोटिंग सोलर और पंप्ड स्टोरेज जैसी उच्च गुणवत्ता वाली नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का विकास करेंगी, जिससे राज्य में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता और कार्बन उत्सर्जन में कमी सुनिश्चित होगी।  यह संयुक्त उपक्रम उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित कर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और सतत आर्थिक विकास को गति देगा। कोल इंडिया स्वच्छ ऊर्जा निवेश के माध्यम से एक एकीकृत ऊर्जा कंपनी के रूप में आगे बढ़ रही है, जबकि यूपीआरवीयूएनएल प्रदेश में विश्वसनीय एवं किफायती विद्युत आपूर्ति तथा हरित ऊर्जा अवसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस संयुक्त उपक्रम समझौते के अवसर पर यूपीआरवीयूएनएल, कोल इंडिया लिमिटेड तथा इन्वेस्ट यूपी के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में यूपीआरवीयूएनएल के निदेशक (पी एंड सी) एस.के. दत्ता, निदेशक (वित्त) घनश्याम शर्मा, मुख्य अभियंता अनुराग वाजपेयी, अधीक्षण अभियंता संजय गुप्ता तथा अधिशासी अभियंता अभिषेक श्रीवास्तव उपस्थित रहे। वहीं, कोल इंडिया लिमिटेड की ओर से अधिशासी निदेशक (नवीकरणीय ऊर्जा) तुषार कुमार, राज्य प्रमुख बिनोद कुमार एवं वरिष्ठ प्रबंधक जितेंद्र सिंह ने सहभागिता की। सभी अधिकारियों ने इस रणनीतिक साझेदारी को उत्तर प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा निवेश, ऊर्जा सुरक्षा तथा सतत औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल बताया।

Air India Flight: हलवारा पहुंचने से पहले तकनीकी खराबी, फिर तूफानी मौसम ने बढ़ाई परेशानी

हलवारा दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से शनिवार सुबह 5:55 बजे हलवारा एयरपोर्ट के लिए रवाना हुई एयर इंडिया फ्लाइट संख्या एआई-481 में एक ही उड़ान के दौरान दो ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने यात्रियों की धड़कनें बढ़ा दीं।  पहले उड़ान भरने के करीब 15 मिनट बाद विमान में तकनीकी खराबी आने पर उसे वापस दिल्ली एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा। इसके बाद यात्रियों को दूसरे विमान में बैठाकर सुबह करीब 9 बजे दोबारा रवाना किया गया। लेकिन हलवारा पहुंचने पर तेज बारिश, आंधी और खराब मौसम के कारण पहली बार लैंडिंग का प्रयास भी सफल नहीं हो सका। आखिरकार पायलट ने विमान को दोबारा नियंत्रित करते हुए दूसरी कोशिश में सुरक्षित लैंडिंग कराई, जिसके बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-481 निर्धारित समय पर सुबह 5:55 बजे दिल्ली से रवाना हुई थी। उड़ान भरने के लगभग 15 मिनट बाद विमान में तकनीकी खराबी का संकेत मिलने पर पायलट ने एहतियात के तौर पर विमान को वापस दिल्ली एयरपोर्ट ले जाने का निर्णय लिया। सुबह करीब 7 बजे विमान सुरक्षित रूप से रनवे पर उतार लिया गया। विमान के दिल्ली लौटने के बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। एयर इंडिया की ओर से तकनीकी जांच के बाद यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें दूसरे विमान में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद सुबह लगभग 9 बजे वही फ्लाइट संख्या एआई-481 हलवारा के लिए दोबारा रवाना हुई। हालांकि यात्रियों की परीक्षा यहीं खत्म नहीं हुई। हलवारा पहुंचने पर एयरपोर्ट के आसपास तेज बारिश, आंधी और खराब मौसम के कारण विमान की पहली लैंडिंग का प्रयास सफल नहीं हो सका। पायलट ने विमान को हवा में नियंत्रित रखते हुए हलवारा के आसमान में दो चक्कर लगाए और मौसम की स्थिति का आकलन किया। कुछ देर बाद दूसरी बार लैंडिंग का प्रयास किया गया, जो सफल रहा और विमान सुरक्षित रूप से हलवारा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतर गया। पूरी उड़ान के दौरान विमान में सवार यात्रियों की सांसें अटकी रहीं। पहले तकनीकी खराबी और फिर खराब मौसम के कारण लैंडिंग में आई कठिनाई ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी। हालांकि विमान में यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम होने से स्थिति पूरी तरह नियंत्रित रही और किसी तरह की अफरा-तफरी नहीं मची। सभी यात्री सुरक्षित लैंडिंग की दुआ करते रहे। उड़ान में सवार यात्री डॉ. संजीव कुमार बक्शी ने बताया कि पहले विमान में आई तकनीकी खराबी के कारण उसे दिल्ली वापस लौटाना पड़ा। इसके बाद विमान बदलकर दूसरी उड़ान से रवाना किया गया, लेकिन हलवारा पहुंचने पर खराब मौसम के कारण पहली बार लैंडिंग नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि दोनों घटनाओं के कारण विमान में बैठे सभी यात्री काफी घबराए हुए थे। जब दूसरी कोशिश में विमान सुरक्षित उतर गया तो सभी यात्रियों ने राहत की सांस ली। पिछले एक वर्ष में एयर इंडिया की उड़ानों पर उठे सुरक्षा संबंधी सवाल बीते एक वर्ष के दौरान एयर इंडिया के विमानों में तकनीकी खराबी और परिचालन संबंधी समस्याओं के कई मामले सामने आए हैं। विभिन्न उड़ानों में इंजन, हाइड्रोलिक सिस्टम, एयर कंडीशनिंग, तकनीकी चेतावनी संकेत तथा अन्य तकनीकी कारणों से विमानों को बीच रास्ते से वापस लौटाना पड़ा या वैकल्पिक एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा। कई उड़ानों में यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा, जबकि कुछ मामलों में विमान बदलकर यात्रा पूरी कराई गई। हाल के महीनों में विमानन क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर बढ़ी संवेदनशीलता के बीच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) भी एयरलाइनों की तकनीकी निगरानी और सुरक्षा मानकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।  विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी खराबी की स्थिति में विमान को तत्काल वापस लौटाने या वैकल्पिक एयरपोर्ट पर उतारने का फैसला यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की स्थापित प्रक्रिया का हिस्सा है। शनिवार को दिल्ली से हलवारा की उड़ान में भी पायलट और एयरलाइन ने तकनीकी खराबी सामने आते ही एहतियात बरतते हुए विमान को वापस दिल्ली उतारा और बाद में दूसरा विमान उपलब्ध कराया।  

पंजाब में बारिश का कहर! चंडीगढ़ समेत कई शहरों में भारी बरसात, गुरदासपुर में बांध टूटने से खेत जलमग्न

चंडीगढ़ शुक्रवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-17 में बारिश के दौरान छाता ओढ़कर साइकिल से गुजरता एक व्यक्ति। गुरदासपुर में बांध टूटने से पानी खेतों में चला गया।पंजाब और चंडीगढ़ में मानसून लगातार सक्रिय है। चंडीगढ़ मौसम विज्ञान केंद्र ने ट्राईसिटी (चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला) में अगले 3 घंटों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब और रूपनगर।  विभाग के मुताबिक, 9 जुलाई तक मौसम ऐसे ही बना रहेगा। पंजाब के कई जिलों में भारी बारिश, बिजली चमकने और तेज हवाएं चल सकती है। आज पंजाब के ज्यादातर जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान चंडीगढ़ के साथ गुरदासपुर, पठानकोट, फरीदकोट, मोहाली, पटियाला और अमृतसर में में बारिश दर्ज की गई। इससे तापमान में गिरावट आई है और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। शुक्रवार को गुरदासपुर में भारी बारिश हुई, जिससे बहरामपुर में धुसी बांध टूट गया। इसका पानी गांव मुगलानिचक के खेतों में भर गया। हालांकि, अब पानी निकलने लगा है और हालात सामान्य हो रहे हैं। यह बांध पिछले साल आई बाढ़ में टूटा था, जिसे विभाग ने पक्के तौर पर ठीक नहीं किया था। सीटीईटी कॉलेज के हॉल का एक हिस्सा ढहा चंडीगढ़ के सेक्टर-26 स्थित सीटीईटी कॉलेज के मल्टीपर्पज हॉल का एक हिस्सा शुक्रवार को ढह गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है, क्योंकि भवन को पहले ही असुरक्षित घोषित कर उपयोग के लिए बंद कर दिया गया था। पिछले 24 घंटे में इन जिलों में हुई बारिश मौसम विभाग के अनुसार, पंजाब के माझा क्षेत्र और आसपास के जिलों में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई। इसमें गुरदासपुर में 48.2 मिमी, पठानकोट में 27.2 मिमी, फरीदकोट में 10.4 मिमी मोहाली में 8.5 मिमी, पटियाला में 6.1 मिमी, चंडीगढ़ में 4.6 मिमी और अमृतसर में 2.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है। बारिश के कारण कई इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को गर्मी से राहत मिली। बठिंडा रहा सबसे ठंडा दिन और रात दोनों के तापमान में कमी दर्ज की गई है। दिन के समय पंजाब का सबसे अधिक तापमान सामराला (लुधियाना) में 36.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान 34.6 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं रात के समय बठिंडा पंजाब का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। चंडीगढ़ में न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने जारी की एडवाइजरी मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ ने लोगों को खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार, गरज-चमक और बिजली कड़कने के दौरान खुले स्थानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचना चाहिए। इसके अलावा भारी बारिश के दौरान जलभराव वाले क्षेत्रों में वाहन चलाते समय सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की भी सलाह दी गई है। अगले कुछ दिनों तक पंजाब और चंडीगढ़ में मानसून की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

अवैध शराब कारोबारियों पर योगी सरकार ने की सख्त कार्रवाई, 1500 से अधिक लोग गिरफ्तार

योगी सरकार की बड़ी उपलब्धि, आबकारी विभाग को जून में मिला 5,173.56 करोड़ रुपये का राजस्व अवैध शराब कारोबारियों पर योगी सरकार ने की सख्त कार्रवाई, 1500 से अधिक लोग गिरफ्तार जून 2026 तक 15,809 करोड़ रुपये का राजस्व, पिछले वर्ष से 11.11 प्रतिशत अधिक वसूली: मंत्री लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पारदर्शी प्रशासन और सख्त निगरानी व्यवस्था का असर लगातार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत में ही राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई कर माफियाओं पर शिकंजा कसा है। जून में 16.05 प्रतिशत अधिक राजस्व प्राप्त जून 2026 में विभाग ने 5,173.56 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, जबकि पिछले वर्ष जून माह में यह आंकड़ा 4,458.23 करोड़ रुपये था। इस प्रकार जून माह में 16.05 प्रतिशत अधिक राजस्व प्राप्त हुआ। सरकार द्वारा लागू की गई पारदर्शी नीतियां, तकनीकी निगरानी, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और सख्त प्रशासनिक व्यवस्था का सकारात्मक असर राजस्व संग्रह में देखने को मिल रहा है। इससे प्रदेश के विकास कार्यों को भी मजबूती मिल रही है। अवैध शराब के खिलाफ व्यापक अभियान योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई जारी है। आबकारी विभाग ने जून 2026 तक प्रदेशभर में 2,65,870 छापेमारी अभियान चलाए। इस दौरान 29,267 अभियोग दर्ज किए गए और लगभग 9 लाख लीटर अवैध शराब बरामद की गई। कार्रवाई के दौरान 4,641 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 804 आरोपियों को जेल भेजा गया। इसके अलावा अवैध शराब की तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे 31 वाहनों को भी जब्त किया गया। राजस्व में 11.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज आबकारी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में आबकारी विभाग को 71,278 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य दिया गया है। विभागीय अधिकारी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता और जवाबदेही के साथ कार्य कर रहे हैं। जून 2026 तक विभाग ने 15,809.25 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में प्राप्त 14,228.91 करोड़ रुपये की तुलना में 1,580.34 करोड़ रुपये अधिक है। इस प्रकार विभाग ने 11.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।  1500 से ज्यादा लोग गिरफ्तार  आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि जून माह में ही 87,646 छापे डाले गए। इस दौरान 9,764 अभियोग दर्ज किए गए और 2.56 लाख लीटर अवैध शराब बरामद की गई। कार्रवाई के दौरान 1,513 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 283 को जेल भेजा गया। साथ ही तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे 7 वाहनों को जब्त किया गया।

सीएम योगी ने किया डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के नवीन परिसर का लोकार्पण

यूपी की नौकरशाही पॉलिसी पैरालिसिस की शिकार नहीं: सीएम योगी  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के नवीन परिसर का लोकार्पण 464 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 22 एकड़ में तैयार अत्याधुनिक परिसर बनेगा भारत का अग्रणी स्कूल ऑफ पब्लिक लीडरशिप राजनीतिक नेतृत्व विजन देता है, इसे लागू करने की ताकत प्रशासन के पास: मुख्यमंत्री लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की नौकरशाही अब पॉलिसी पैरालिसिस का शिकार नहीं है, बल्कि पूरी तेजी के साथ विकसित उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को हासिल करने के लिए दौड़ने को तैयार है। विकसित भारत की आधारशिला उत्तर प्रदेश बनेगा और इसके लिए प्रदेश के प्रत्येक गांव, कस्बे और वार्ड को आत्मनिर्भर बनाना होगा। राजनीतिक नेतृत्व केवल विजन दे सकता है, लेकिन उसे धरातल पर उतारने की पूरी ताकत प्रशासनिक मशीनरी के पास होती है। इसलिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और सकारात्मक कार्यसंस्कृति बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के 464 करोड़ रुपये से अधिक लागत से 22 एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल में निर्मित अत्याधुनिक नवीन परिसर का लोकार्पण करने के उपरांत प्रशासनिक अधिकारियों और प्रशिक्षुओं को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भवन का उद्घाटन किया और परिसर का निरीक्षण कर विभिन्न सुविधाओं व व्यवस्थाओं की जानकारी ली। टीमवर्क व सकारात्मक सोच ही सफलता का आधार सीएम ने कहा कि इस अकादमी को भारत के अग्रणी स्कूल ऑफ पब्लिक लीडरशिप के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। नॉलेज टू डेवलपमेंट, डेवलपमेंट टू पब्लिक ट्रस्ट और पब्लिक ट्रस्ट टू नेशन बिल्डिंग की संकल्पना को साकार करने में यह संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसी उद्देश्य से आधुनिक सुविधाओं से युक्त अकादमी का निर्माण कराया गया है। एकला चलो की सोच या टीम को कमजोर करने की मानसिकता से अच्छे परिणाम नहीं मिल सकते। टीमवर्क, सकारात्मक सोच और नवाचार ही सफलता का आधार हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार सीखते रहने, तकनीक आधारित सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और नवाचार को अपनाने की आवश्यकता है। नौ वर्षों में बदली उत्तर प्रदेश की पहचान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की पिछले नौ वर्षों की विकास यात्रा स्वयं बहुत कुछ कहती है। शासन व आमजन के बीच प्रशासनिक अधिकारी सबसे महत्वपूर्ण सेतु होते हैं। यदि यह सेतु मजबूत होगा तो सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा और जनता की धारणा भी सकारात्मक बनेगी। वर्ष 2017 से पहले दो-तीन दशकों तक उत्तर प्रदेश की छवि बेहद नकारात्मक हो गई थी। लोग मानने लगे थे कि देश की कोई भी योजना उत्तर प्रदेश में सफल नहीं हो सकती। इसके लिए केवल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व भी जिम्मेदार था। अब पहचान का संकट नहीं, टॉप-3 अर्थव्यवस्था में यूपी मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपनी नई पहचान बनाई है। आज प्रदेश देश की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना चुका है। सुरक्षा, सुशासन, क्राउड मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी आधारित सुधार और प्रशासनिक कार्यप्रणाली के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अब यहां किसी के सामने पहचान का संकट नहीं है। अब कोई इसे बीमारू राज्य नहीं कह सकता। प्रदेश लगातार छह वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बना हुआ है। भारत सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रदेश लगातार पहले या दूसरे स्थान पर रहता है। मिशन कर्मयोगी और आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर भी यूपी नंबर-1 मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मिशन कर्मयोगी के तहत आई-गॉट प्लेटफॉर्म पर क्षमता निर्माण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पहले काफी पीछे था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों से अब देश में पहले स्थान पर है। यह हमारे प्रशासनिक तंत्र की कार्यक्षमता का प्रमाण है। विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश के विजन को लेकर प्रदेशभर में व्यापक संवाद अभियान चलाया गया। विधानमंडल से लेकर गांवों की चौपाल तक चर्चा हुई। 300 वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों और पूर्व अधिकारियों ने विभिन्न वर्गों के बीच जाकर संवाद किया। प्रदेश सरकार के पोर्टल पर 98 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए, जिनके आधार पर विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया। तकनीक ने खत्म किया भ्रष्टाचार, गरीब को मिला अधिकार मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी आधारित सुधारों ने आमजन के जीवन में बड़ा बदलाव किया है। राशन वितरण में ई-पॉस मशीनें लागू होने से शिकायतें समाप्त हो गईं और गरीबों को उनका पूरा अधिकार मिलने लगा। पहले राशन व्यवस्था में भ्रष्टाचार होता था, लेकिन अब पारदर्शिता आई है और जनता संतुष्ट है। गन्ना किसानों को पहले पर्ची, ब्लैक मार्केटिंग और घटतौली जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब मोबाइल पर ही पूरी जानकारी उपलब्ध हो जाती है। डीबीटी व्यवस्था लागू होने से पेंशन और अन्य योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खाते में पहुंच रहा है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। इन्फ्रास्ट्रक्चर में यूपी बना देश का अग्रणी राज्य मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश में सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाला राज्य है। देश के लगभग 60 प्रतिशत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं। फोर लेन और सिक्स लेन सड़क नेटवर्क तेजी से विकसित हुआ है। मेट्रो, एयरपोर्ट, रैपिड रेल, इनलैंड वॉटरवे जैसी परियोजनाएं उत्तर प्रदेश की नई पहचान बन चुकी हैं और यह सब डबल इंजन सरकार की ताकत का परिणाम है। इस अवसर पर वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, मुख्य सचिव एसपी गोयल, पूर्व मुख्य सचिव आर. रमणी, अतुल गुप्ता, आलोक रंजन, अनूप चंद्र पांडेय, दुर्गा शंकर मिश्र, मनोज कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में प्रदेश के सेवारत एवं सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी और प्रशिक्षु अधिकारी मौजूद रहे।

UPTET 2026: दूसरे दिन की परीक्षा भी AI निगरानी में शांतिपूर्ण संपन्न, सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद

तीन दिवसीय यूपीटीईटी-2026 के दूसरे दिन की परीक्षा भी एआई निगरानी में शुचितापूर्वक संपन्न 03 जुलाई को दो पालियों में 955 केंद्रों पर 7.51 लाख अभ्यर्थी शामिल, 11 फर्जी परीक्षार्थी व 01 मोबाइल के साथ अभ्यर्थी पकड़ा गया 04 जुलाई को अंतिम पाली की होगी परीक्षा, कुल 05 पालियों में 60 जनपदों में संपन्न हो रही परीक्षा लखनऊ  शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET-2026) की तीन दिवसीय लिखित परीक्षा के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रथम पाली पूर्वाह्न 09:30 बजे से 12:00 बजे तक उच्च प्राथमिक स्तर तथा द्वितीय पाली अपरान्ह 02:30 बजे से 05:00 बजे तक प्राथमिक स्तर की परीक्षा प्रदेश के 60 जनपदों के 955 परीक्षा केंद्रों पर शांतिपूर्ण, पारदर्शी एवं नकलविहीन वातावरण में संपन्न हुई। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि  परीक्षा के दौरान आयोग में स्थापित एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से उनकी, सदस्यगण, सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उपसचिव की उपस्थिति में सभी परीक्षा केंद्रों की सघन निगरानी की गई। केंद्रों पर लगे ए.आई. कैमरों के माध्यम से परीक्षार्थियों की गतिविधियों पर सतत दृष्टि रखी गई व यथाआवश्यक निर्देश भी दिए गए। प्रथम पाली में एआई आधारित सॉफ्टवेयर की मदद से संदिग्धों की जाँच के पश्चात प्रदेश के विभिन्न जनपदों में 09 फर्जी परीक्षार्थी, जो दूसरे परीक्षार्थियों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे, तथा 01 अभ्यर्थी जो अपने जूते में मोबाइल छिपाकर परीक्षा कक्ष में उपस्थित हुआ था, पकड़ा गया। द्वितीय पाली में विभिन्न जनपदों में 02 फर्जी परीक्षार्थी दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़े गए। इन सभी के विरुद्ध अग्रेतर विधिक कार्रवाई हेतु उन्हें स्थानीय पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त सभी निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा सुचारु रूप से पारदर्शी, नकल विहीन, शुचितापूर्ण, निर्विघ्न एवं सुव्यवस्थित वातावरण में संपन्न हुई। आयोग अध्यक्ष ने बताया कि शुक्रवार को दोनों पालियों में कुल 8,07,709 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 7,51,321 यानी 93.01% अभ्यर्थियों ने परीक्षा में प्रतिभाग किया। इनमें महिला परीक्षार्थियों की उपस्थिति 92.70% तथा पुरुष परीक्षार्थियों की उपस्थिति 93.36% रही। परीक्षा के सफल संचालन में संबंधित जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ। डॉ. प्रशांत कुमार ने जानकारी दी कि उ.प्र. शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज की विज्ञापन संख्या 01/2026 शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET-2026) की तीन दिवसीय लिखित परीक्षा 02 व 03 जुलाई 2026 को दो-दो पाली तथा  04 जुलाई 2026 को एक पाली, इस प्रकार कुल 05 पालियों में प्रदेश के 60 जनपदों में 955 परीक्षा केंद्रों पर संपन्न हो रही है।  इसी क्रम में  04 जुलाई को अंतिम पाली की परीक्षा भी इसी प्रकार एआई निगरानी, शुचिता व सुरक्षा के उच्च मानकों के साथ संपन्न कराई जाएगी। अभ्यर्थियों से अपील है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं को ही प्रामाणिक मानें।