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‘बेबी बॉस’ ने मारी एंट्री! राहुल द्रविड़ के बेटे को मिली इंडिया की ब्लू जर्सी, वैभव सूर्यवंशी के बीच छाए

नई दिल्ली  इंग्लैंड दौरे पर गए 15 साल के वैभव सूर्यवंशी की हर तरफ चर्चा है कि उनका टीम इंडिया के लिए डेब्यू कब होगा. वैभव पिछले तीन टी20 में टीम इंडिया में शामिल होने के बावजूद नहीं खेले, इसी बीच भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और कोच रहे राहुल द्रविड़ के छोटे बेटे अन्वय की इंडिया अंडर-19 टीम में डेब्यू हो गया. अन्वय ने भारत की अंडर-19 टीम में श्रीलंका अंडर-19 टीम के लिए डेब्यू किया है. यशवर्धन चौहान की कप्तानी वाली टीम में अन्वय को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया है।  बता दें कि अन्वय द्रविड़ एक विकेटकीपर बल्लेबाज हैं. अन्वय ने जूनियर लेवल क्रिकेट में पिछले कुछ समय से दमदार खेल का प्रदर्शन किया, जिसके कारण उन्हें भारत के अंडर-19 टीम में चुना गया है. इससे पहले अन्वय को पिछले साल अफगानिस्तान अंडर-19 टीम के खिलाफ इंडिया बी अंडर-19 की तरफ से मैदान पर उतरने का मौका मिला था. इस मैच में अन्वय बल्लेबाजी में शून्य पर आउट हुए थे, लेकिन विकेटकीपिंग में उन्होंने सबको खूब प्रभावित किया और 2 कैच लिए थे।  कर्नाटक अंडर-19 टीम के कप्तान भी रहे हैं अन्वय अन्वय द्रविड़ को लोग जितना उनके पिता राहुल द्रविड़ की वजह से जान रहे हैं, उतना उनके खेल से अभी नहीं जाना गया है. बहुत कम लोगों को पता है कि अन्वय ने हाल ही में कर्नाटक के लिए वीनू मांकड़ ट्रॉफी के क्वार्टर फाइनल में कप्तानी भी की थी. इस टूर्नामेंट में उनके प्रदर्शन की बात करें तो वह भी बहुत शानदार रहा था. अन्वय ने कर्नाटक की तरफ से खेलते हुए कुल 6 पारियों में 220 रन बनाए थे. इस दौरान उनके रन बनाने का औसत 55.00 का था. सिर्फ इतना ही नहीं, अन्वय टूर्नामेंट में दूसरे लीडिंग रन स्कोरर रहे थे।  श्रीलंका दौरे के लिए इंडिया अंडर-19 वनडे टीम यशवर्धन सिंह चौहान (कप्तान), लक्ष्य रायचंदानी (उप-कप्तान), विनीत वी के, वुटकुर यशवीर गौड़, रोहित अनिल यादव, शाविन वी, काव्य पारस पटेल, अर्जुन राजपूत, कुशाग्र ओझा, रजत बघेल (विकेटकीपर), अन्वय द्रविड़ (विकेटकीपर), सागर विर्क, अनमोलजीत सिंह, मोहित उल्वा, ईशान सूद। 

भारत निर्वाचन आयोग का राष्ट्रीय सम्मेलन, मीडिया एवं संचार अधिकारियों को दिए गए अहम दिशा-निर्देश

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित नई दिल्ली स्थित आईआईआईडीईएम में आयोजित हुआ एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं संवाद कार्यक्रम रायपुर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईआईडीईएम) में मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए दूसरे एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। तीन जुलाई शुक्रवार को आयोजित सम्मेलन में देश के 16 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न जिलों के मीडिया नोडल अधिकारी, सोशल मीडिया नोडल अधिकारी, जिला जनसंपर्क अधिकारी तथा राज्य जनसंपर्क विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित 260 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। छत्तीसगढ़ से सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, अपर संचालक जनसंपर्क विभाग तथा प्रदेश के सभी 33 जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी सम्मेलन में शामिल हुए।             सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग की प्रत्येक कार्यवाही संविधान, निर्वाचन संबंधी कानूनों तथा आयोग द्वारा समय-समय पर जारी पारदर्शी दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित होती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक एवं फर्जी सूचनाओं के प्रति सतर्क रहने तथा तथ्यात्मक जानकारी के प्रभावी प्रसार के माध्यम से गलत सूचनाओं पर अंकुश लगाने में मीडिया एवं संचार अधिकारियों की सक्रिय भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हाल के विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत भारतीय मतदाताओं के निर्वाचन प्रणाली पर गहरे विश्वास का परिचायक है।             चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डीपफेक तथा भ्रामक डिजिटल सामग्री से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इनका प्रभावी ढंग से मुकाबला करने का आह्वान किया। उन्होंने चुनावी साक्षरता क्लबों के माध्यम से युवा मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया।          सम्मेलन में निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से संबंधित संचार रणनीतियों, मतदाता सूची प्रबंधन, मतदान एवं मतगणना प्रक्रिया, ईसीआईनेट, संवैधानिक एवं विधिक प्रावधानों, मीडिया प्रबंधन, प्रेस विज्ञप्ति लेखन, सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग तथा भ्रामक सूचनाओं के प्रबंधन पर विस्तृत तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को समूहों में निर्वाचन प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रदर्शन कराया गया तथा प्रदर्शनी एवं मीडिया कॉर्नर का अवलोकन भी कराया गया। कार्यक्रम के दौरान हाल ही में चुनाव संपन्न कराने वाले राज्यों के अधिकारियों ने निर्वाचन प्रबंधन एवं जनसंचार से जुड़े अपने अनुभव साझा किए तथा प्रभावी संचार की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर चर्चा की। सम्मेलन का समापन प्रतिभागियों एवं भारत निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के बीच प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ।

सीएम योगी पहुंचे मेदांता अस्पताल, महंत नृत्य गोपाल दास का जाना हालचाल

सीएम योगी मेदांता अस्पताल पहुंचे, महंत नृत्य गोपाल दास का जाना हालचाल मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से ली महंत जी के स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी महंत नृत्य गोपाल दास के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की मुख्यमंत्री ने की कामना राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष का लखनऊ के मेदांता अस्पताल में चल रहा इलाज लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास का हाल-चाल जानने के लिए मेदांता अस्पताल पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पूज्य महंत नृत्य गोपाल दास के स्वास्थ्य की जानकारी चिकित्सकों से ली और उनके बेहतर उपचार के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने महंत जी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की। महंत नृत्य गोपाल दास का लखनऊ के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा की। मुख्यमंत्री ने लिखा कि मणिरामदास छावनी के पूज्य महंत एवं राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास जी महाराज से आज लखनऊ स्थित मेदांता हॉस्पिटल में भेंट कर उनका कुशल-क्षेम जाना तथा चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य के विषय में जानकारी ली। प्रभु राम की कृपा से उन्हें शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो, यही प्रार्थना है।

कैब्रल के धमाकेदार गोल से हिली मेसी की टीम, रोमांचक जीत के बाद अर्जेंटीना राउंड ऑफ-16 में मिस्र से भिड़ेगा

 मियामी फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में डिफेंडिंग चैम्पियन अर्जेंटीना को जीत तो मिल गई, लेकिन इस जीत ने टीम की कमजोरियां भी उजागर कर दीं. लियोनेल मेसी की कप्तानी वाली अर्जेंटीना को महज 5 लाख की आबादी वाले छोटे से देश केप वर्डे ने 120 मिनट तक जमकर परेशान किया. मुकाबला ऐसा रहा कि आखिरी मिनट तक यह तय नहीं था कि तीन बार की वर्ल्ड चैम्पियन टीम अगले दौर में पहुंच पाएगी या नहीं।  4 जुलाई (शनिवार) को आयोजित इस मुकाबले में लियोनेल मेसी की टीम ने तीन मौके पर बढ़त बनाई, लेकिन केप वर्डे ने दो बार शानदार वापसी कर पूरे स्टेडियम को हैरान कर दिया. आखिरकार एक ओन गोल ने अर्जेंटीना को 3-2 की रोमांचक जीत दिलाई और केप वर्डे का ऐतिहासिक सपना टूट गया।  करीब 65 हजार दर्शकों से खचाखच भरे मियामी स्टेडियम में लियोनेल मेसी का हर टच तालियों से गूंज रहा था. अर्जेंटीना ने भी शुरुआत शानदार की और पहले हाफ में मेसी ने गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी. लेकिन केप वर्डे दबाव में नहीं आया. दूसरे हाफ के 60वें मिनट में डेरॉय डुआर्टे ने शानदार गोल कर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया. निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें बराबरी पर रहीं और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में पहुंच गया. एक्स्ट्रा टाइम शुरू होते ही लिसांड्रो मार्टिनेज ने अर्जेंटीना को फिर 2-1 से आगे कर दिया. ऐसा लग रहा था कि मुकाबला अब खत्म हो जाएगा, लेकिन केप वर्डे ने फिर कमबैक की ठान ली।  कैब्रल ने किया अविश्वसनीय गोल कुछ ही मिनट बाद सिडनी लोपेस कैब्रल ने बॉक्स के बाहर से ऐसा जोरदार शॉट लगाया कि गेंद सीधे टॉप कॉर्नर में जा समाई. यह गोल इतना शानदार था कि इसे अब 'गोल ऑफ द टूर्नामेंट' का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है. कैब्रल का यह गोल देखकर खुद लियोनेल मेसी भी हैरान रह गए।  मैच जब पेनल्टी शूटआउट की ओर बढ़ता नजर आ रहा था, तभी अर्जेंटीना को कॉर्नर मिला. मेसी के शानदार क्रॉस पर क्रिस्टियन रोमेरो ने हेडर लगाया, लेकिन गेंद डिफेंडर डाइनी बोर्गेस से टकराकर गोल में चली गई. यह आत्मघाती गोल (ओन गोल) ही मुकाबले का निर्णायक पल साबित हुआ. केप वर्डे के खिलाड़ी मैदान पर ही निराश होकर बैठ गए क्योंकि वे इतिहास रचने से कुछ मिनट दूर थे।  ओन गोल के बाद भी केप वर्डे ने हार नहीं मानी. इंजरी टाइम में सिडनी कैब्रल ने एक और शानदार शॉट लगाया, लेकिन अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने बेहतरीन सेव करते हुए मैच को पेनल्टी शूटआउट में जाने से बचा लिया।  मेसी ने बना दिया खास रिकॉर्ड इस मुकाबले में गोल करने के साथ ही लियोनेल मेसी ने लगातार आठ वर्ल्ड कप मैचों में गोल करने का अपना रिकॉर्ड और मजबूत कर लिया. इसके साथ ही उन्होंने टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में कीलियन एम्बाप्पे पर अपनी बढ़त भी बढ़ा ली।  यह केप वर्डे का पहला फीफा वर्ल्ड कप था, लेकिन टीम ने अपने प्रदर्शन से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है. ग्रुप चरण में उसने स्पेन, उरुग्वे और सऊदी अरब जैसी मजबूत टीमों को ड्रॉ पर रोककर नॉकआउट में जगह बनाई थी. अब उसने अर्जेंटीना को भी 120 मिनट तक कड़ी टक्कर देकर साबित कर दिया कि फुटबॉल में सिर्फ बड़े नाम ही नहीं, बड़ा जज्बा भी मायने रखता है। 

‘सीनियर नेताओं को किया जा रहा इग्नोर’… पंजाब कांग्रेस में रंधावा का बड़ा हमला, हाईकमान पर साधा निशाना

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नियुक्तियों और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर शुरू हुआ विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मौजूदा हालात पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर तीन-चार दौर की बैठकों के बावजूद पार्टी में डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो पा रहा है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। रंधावा ने कहा कि कांग्रेस के पास अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं की कोई कमी नहीं है, इसके बावजूद पार्टी के भीतर लगातार बढ़ रहे मतभेद चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि देश के लोग आज भी इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर की कांग्रेस को पसंद करते हैं, इसलिए पार्टी नेतृत्व को मौजूदा हालात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दरअसल, विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत कांग्रेस हाईकमान ने ऑब्जर्वर टीम गठित की थी। इसके बाद दिल्ली में दो से तीन दौर की बैठकों में पंजाब के लगभग सभी वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया गया। चन्नी के करीबी सोर्स के मुताबिक नेता ने भरोसा दिलाया कि राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश से लौट आएंगे, उसके बाद चन्नी की उनसे मीटिंग करा दी जाएगी। दूसरी तरफ कल शुक्रवार को दिल्ली में अमित शाह से मिलकर आए गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर रंधावा ने हाईकमान पर ही सवाल खड़े किए। एक इंटरव्यू में रंधावा ने कहा- लीडरशिप को देखना चाहिए कि ऐसी बातें क्यों हो रही हैं। इतने पदाधिकारियों के बावजूद डैमेज कंट्रोल क्यों नहीं हो रहा। 3-4 मीटिंग के बाद भी ऐसा होना, यह किसका फेलियर है। इंदिरा गांधी-राजीव गांधी के वक्त 3 जनरल सेक्रेटरी होते थे, अब पता नहीं कितने हैं। सीनियर कांग्रेसियों को नजरअंदाज किया जाता है, इसलिए ऐसी बातें होती हैं। वहीं पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल भी इसको लेकर हरकत में आ गए हैं। वह आज या फिर अगले कुछ ही दिनों में चंडीगढ़ पहुंचकर मौजूदा प्रधान सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व CM सांसद चरणजीत चन्नी से मुलाकात कर सकते हैं। वहीं शुक्रवार को सांसद अमरिंदर राजा वड़िंग को प्रधान बनाए रखने पर पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने कांग्रेस हाईकमान को तीखे तेवर दिखाए। शुक्रवार को अपने घर मोरिंडा में 50 से ज्यादा नेता इकट्‌ठे कर हाईकमान का फैसला रिजेक्ट कर दिया। चन्नी गुट ने कहा कि एक हफ्ते के बाद वह हाईकमान से मुलाकात करेंगे और अपना विरोध दर्ज कराएंगे। चन्नी इस वक्त ठीक उसी स्टाइल में पार्टी हाईकमान पर प्रेशर बना रहे हैं, जैसे नवजोत सिद्धू ने प्रधान रहते 2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को CM की कुर्सी से हटवा दिया था। हालांकि उसके बाद सिद्धू की जगह चन्नी सीएम बन गए। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि चन्नी के इस स्टैप से कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी सड़क पर आ गई है। अब वह हाईकमान पर प्रेशर बनाने में कामयाब होते हैं या नहीं, लेकिन इसका खामियाजा कांग्रेस को विधानसभा चुनाव 2027 में झेलना ही पड़ेगा। इसे देखते हुए कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल भी आज चंडीगढ़ आ सकते हैं। 3 पॉलिटिकल एक्सपर्ट से जानिए, चन्नी के फैसले से कांग्रेस को क्या फायदा और नुकसान होगा… राजा वड़िंग को लेकर बहस तेज इसके बावजूद प्रदेश इकाई में असंतोष कम होने के बजाय और खुलकर सामने आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक संगठनात्मक फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व को लेकर भी बहस तेज हो गई है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि पंजाब कांग्रेस में मौजूदा स्थिति पहले सामने आए कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के टकराव जैसी बनती जा रही है। अब चन्नी और वड़िंग समर्थकों के बीच बढ़ती खींचतान ने हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि कांग्रेस के भीतर यह भी माना जा रहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में अब तक लिए गए बड़े संगठनात्मक फैसलों को वापस लेने की परंपरा नहीं रही है। ऐसे में हाल ही में घोषित संगठनात्मक सूची में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि इस स्तर पर बदलाव करने से विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। सात जुलाई को विदेश दौरे पर लौटेंगे राहुल गांधी सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी 7 जुलाई को विदेश दौरे से लौटने के बाद पंजाब कांग्रेस के हालात की समीक्षा कर सकते हैं। इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस हाईकमान कुछ वरिष्ठ नेताओं को चंडीगढ़ भेज सकता है। प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल और सह-प्रभारियों की चन्नी तथा वड़िंग गुट के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक कर संगठन में बढ़ते विवाद को शांत करने और डैमेज कंट्रोल की कोशिश की जा सकती है। पंजाब मामलों के सह प्रभारी सूरज ठाकुर चरणजीत चन्नी से मुलाकात के लिए चंडीगढ़ आ सकते हैं।  

बलूचिस्तान फिर दहला! ग्वादर में BLA के फिदायीन हमले से 30+ पाक सैनिकों की मौत का दावा

बलूचिस्तान पाकिस्तान में बीएलए यानी बलूच लिबरेशन आर्मी ने कोहराम मचा दिया है. बलूचिस्तान के ग्वादर में बीएलए ने पाकिस्तानी सैनिकों की लाशें बिछाकर गदर काट दी है. जी हां, बलूचिस्तान के ग्वादर में फिदायीन हमला कर बीएलए ने पाकिस्तान के 30 से अधिक सैनिकों को मार डाला. ग्वादर के जिवानी इलाके के पनवान में पाकिस्तान कोस्ट गार्ड कैंप पर हुए फिदायीन हमले की जिम्मेदारी बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली है. गौरतलब है कि बलूच लिबरेशन आर्मी को पाकिस्तान ने बैन कर रखा है. समय-समय पर बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान को घाव देता रहता है. बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ रहा है।  बीएलए ने अटैक कर पाकिस्तान को दिया गहरा जख्म ‘द बलूचिस्तान पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया कि इस हमले में 30 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई अन्य घायल हो गए. बलूच लिबरेशन आर्मी पाकिस्तान का अलगाववादी समूह है. हालांकि, पाकिस्तान सरकार इसे एक आतंकी संगठन मानती है. इसे बैन कर रखा है. जबकि बलूच लिबरेशन आर्मी का दावा है कि वह बलूचिस्तान को आजाद कराने की लड़ाई लड़ रहा है. उसका कहना है कि बलूचिस्तान का हक मारा जा रहा है. पाकिस्तानी हुकूमत बलूचिस्तान के साथ सौतेला व्यवहार करती है. पाकिस्तानी सरकार यहां के खजाने को लूटती है, मगर उस लिहाज से इस इलाके का विकास नहीं करती।  ग्वादर में कब और कैसे हुआ अटैक बहरहाल, ग्वादर में यह हमला शुक्रवार शाम को हुआ. इस अटैक को बलूच लिबरेशन आर्मी की खास ‘मजीद ब्रिगेड’ ने अंजाम दिया.  बलूच लिबरेशन आर्मी ने दावा किया कि अताउल्लाह बलूच उर्फ अजमल नाम के एक आत्मघाती हमलावर ने शाम करीब 6:32 बजे (स्थानीय समय) विस्फोटकों से लदे ट्रक को कोस्ट गार्ड के कड़ी सुरक्षा वाले कैंप में घुसा दिया, जिससे जबरदस्त धमाका हुआ. इस अटैक में कैंप पूरी तरह मलबे के ढेर में बदल गया।  बीएलए ने वीडियो में दिखाया सबूत बलूच लिबरेशन आर्मी के मीडिया विंग ‘हक्कल’ ने 43 सेकंड का एक वीडियो भी जारी किया. इस वीडियो में साफ दिख रहा था कि धमाके से ठीक पहले विस्फोटकों से भरा ट्रक कैंप में घुस रहा था. बलूच लिबरेशन आर्मीने कहा कि बाद के फुटेज में मिलिट्री कैंप का एक बड़ा हिस्सा तबाह हुआ दिखाई दिया. इतना ही नहीं, ट्रक बम धमाके के बाद बलूच लिबरेशन आर्मी के ‘फतेह स्क्वाड’ ने ज़मीन से एक साथ हमला किया. बलूच लिबरेशन आर्मी के मुताबिक, इसके बाद उसके लड़ाकों ने बचे हुए कोस्ट गार्ड कर्मियों से आमने-सामने की लड़ाई लड़ी और ऑपरेशन के दौरान 30 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को मार गिराया। 

कश्मीर की पाठ्यसामग्री पर बवाल: बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा? मकबूल भट्ट और अलगाववादियों के महिमामंडन का दावा

जम्मू  आतंकवाद और अलगाववाद के अंधकार से दूर हो रहे जम्मू-कश्मीर की नई पीढ़ी को फिर से आतंक का पाठ पढ़ाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर समग्र शिक्षा नीति के तहत स्कूलों को ऐसी किताबें भेजी गई है कि जिसमें आतंकी मकबूल बट को शहीद और अलगाववादियों को स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए महिमामंडन किया गया है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम ने इस किताब को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और पुस्तक खरीद में शामिल लोगों पर कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदेश के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में भेजी गई "जम्मू-कश्मीर की महान व दिग्गज हस्तियां" नामक इस पुस्तक को एक निजी प्रकाशक ओबराय बुकस सर्विस की ओर से प्रकाशित किया गया है और इसे हिलाल अहमद व संतोष मीणा द्वारा लिखा गया है। सैयद अलगी, शब्बीद सहित कई अलगाववादियों का जिक्र शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम के पदाधिकारियों ने पत्रकार वार्ता कर पुस्तक को सार्वजनिक करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने और इस पुस्तक की खरीद करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। फोरम के उप-प्रधान रघु मेहता व ट्रस्टी दीपक कपूर ने बताया कि पुस्तक में आतंकी मकबूल भट्ट को शहीद-ए-आजम बताया है और अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर अहमद शाह, मसरत आलम व मौलवी फारूक को कश्मीर का स्वतंत्रता सेनानी। प्रदेश सरकार ने समग्र शिक्षा योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए इस पुस्तक की खरीद की और प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में पुस्तक उपलब्ध कराई गई। कपूर ने बताया कि पुस्तक में मकबूल बट पर अध्याय है। इसमें भारत को आक्रांता दिखाया है और बताया है मकबूल ने कश्मीर की आजादी के लिए बलिदान दे दिया। 1984 में दी गई थी फांसी मकबूल को सीआइडी इंस्पेक्टर अमर चंद व भारतीय राजदूत की हत्या के आरोप में 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी। पुस्तक में कुछ अन्य अध्यायों में सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह, मसरत आलम, मीरवाइज उमर फारूक व मौलवी फारूक को कश्मीर का स्वतंत्रता सेनानी करार दिया गया है।  

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे अस्पताल में भर्ती, तबीयत बिगड़ने के बाद रद्द हुए सभी सार्वजनिक कार्यक्रम

ठाणे अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को इलाज के लिए ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि उनकी हालत पूरी तरह से स्थिर है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। पिछले कुछ दिनों से काम के भारी दबाव और लगातार भागदौड़ का सीधा असर एकनाथ शिंदे की सेहत पर पड़ा है। उन्हें कमजोरी महसूस हो रही थी। विधानमंडल की कार्यवाही के दौरान ही उन्हें बुखार की शिकायत हुई थी। इसके बावजूद वह कुछ तय कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए ठाणे पहुंचे, लेकिन तबीयत ज्यादा नासाज होने के चलते उन्हें अपने सभी कार्यक्रम रद्द करने पड़े। डॉक्टरों ने दी अस्पताल में भर्ती होने की सलाह रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों के राजनीतिक घटनाक्रमों और फिर विधानमंडल का अधिवेशन शुरू होने के कारण एकनाथ शिंदे लगातार व्यस्त चल रहे थे। माना जा रहा है कि थकान, वायरल बुखार और कमजोरी की वजह से ही उनका स्वास्थ्य बिगड़ा। डॉक्टरों ने उन्हें घर पर रहकर आराम करने के बजाय अस्पताल में भर्ती होकर समुचित इलाज कराने की सलाह दी। इसके बाद शुक्रवार रात उन्हें फौरन ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, चिंता की कोई बात नहीं है और उनकी स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। रात 2 बजे हुआ शुभांगी पाटिल का पार्टी प्रवेश डिप्टी सीएम के अस्पताल में भर्ती होने की वजह से ठाणे में होने वाले एक अहम सियासी कार्यक्रम में भी बदलाव करना पड़ा। दरअसल, ठाणे के गंगूबाई शिंदे हॉल में शुक्रवार दोपहर धुले से ठाकरे गुट की शिवसेना उपनेत्री शुभांगी पाटिल का पार्टी प्रवेश समारोह आयोजित होने वाला था। लेकिन एकनाथ शिंदे के अचानक बीमार पड़ने के कारण इसे टालना पड़ा। आखिरकार देर रात 2 बजे कल्याण के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे की मौजूदगी में शुभांगी पाटिल ने ठाणे में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। वायरल बुखार और लगातार व्यस्तता के बीच अस्पताल पहुंचे शिंदे     प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शुक्रवार दोपहर विधानसभा सत्र के दौरान ही एकनाथ शिंदे को तेज बुखार और कमजोरी महसूस होने लगी थी. शुरुआत में इसे सामान्य थकान माना गया, लेकिन शाम तक तबीयत में सुधार नहीं होने पर डॉक्टरों ने जांच की सलाह दी. देर रात उन्हें ठाणे के जुपिटर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।      लगातार राजनीतिक बैठकों, विधानसभा सत्र और प्रशासनिक गतिविधियों के कारण पिछले कुछ दिनों से उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पा रहा था. डॉक्टरों का मानना है कि वायरल संक्रमण के साथ लगातार काम का दबाव भी उनकी तबीयत बिगड़ने की एक वजह हो सकता है. फिलहाल उनकी मेडिकल जांच जारी है और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।      शिवसेना (शिंदे गुट) के नेताओं ने बताया कि उपमुख्यमंत्री की स्थिति स्थिर है और उन्हें केवल निगरानी तथा आराम के लिए अस्पताल में रखा गया है. पार्टी की ओर से समर्थकों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने की अपील भी की गई है।  महत्वपूर्ण कार्यक्रम फिलहाल स्थगित स्वास्थ्य संबंधी समस्या के चलते एकनाथ शिंदे के कई राजनीतिक कार्यक्रम फिलहाल रद्द या स्थगित कर दिए गए हैं. शनिवार को प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण पार्टी दीक्षांत समारोह में भी अब वह शामिल नहीं हो पाएंगे. इसके अलावा आगामी राजनीतिक दौरों की नई तारीख बाद में तय की जाएगी।  डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा इलाज अस्पताल सूत्रों के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है. वायरल बुखार और कमजोरी को देखते हुए उन्हें आराम करने की सलाह दी गई है. शुरुआती इलाज के बाद उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और फिलहाल किसी गंभीर जटिलता की जानकारी सामने नहीं आई है।  राजनीतिक हलकों में बढ़ी चिंता महाराष्ट्र की राजनीति में एकनाथ शिंदे की अहम भूमिका को देखते हुए उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर तेजी से फैल गई. सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है. फिलहाल पार्टी का कहना है कि डॉक्टरों की सलाह के बाद ही उनकी सार्वजनिक गतिविधियां दोबारा शुरू होंगी।  एकनाथ संभाजी शिंदे महाराष्ट्र के एक प्रमुख राजनेता हैं, जो वर्तमान में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। शिंदे इससे पहले 30 जून 2022 से 5 दिसंबर 2024 तक महाराष्ट्र के 20वें मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। राजनीति में उनकी शुरुआत 1980 के दशक में शिवसेना के दिग्गज नेता आनंद दीघे के मार्गदर्शन में हुई, जिसके बाद वे 1997 में ठाणे नगर निगम में पहली बार पार्षद चुने गए। ठाणे के कोपरी-पांचपाखाड़ी विधानसभा क्षेत्र से 2004 से लगातार विधायक रहे शिंदे ने 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट के दौरान शिवसेना में बगावत का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप तत्कालीन महा विकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिर गई थी और उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। फरवरी 2023 से वे शिवसेना के अध्यक्ष की भूमिका भी निभा रहे हैं, जब चुनाव आयोग ने उनके गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी। 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद हुए नेतृत्व परिवर्तन में, उन्होंने देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने पर उपमुख्यमंत्री का पद संभाला।

चन्नी बन सकते थे पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष! पर्यवेक्षक समिति की सिफारिश के बावजूद हाईकमान ने बदला फैसला

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस के भीतर एक बार फिर नेतृत्व को लेकर खींचतान तेज हो गई है. जानकारी के मुताबिक, पंजाब के राजनीतिक हालात का आकलन करने के लिए गठित कांग्रेस के तीन सदस्यीय ऑब्जर्वर पैनल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की पुरजोर सिफारिश की थी।  हालांकि, कांग्रेस हाईकमान ने इस आंतरिक फीडबैक को दरकिनार करते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को ही पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बरकरार रखा. इस फैसले के बाद पार्टी के एक धड़े में भारी नाराजगी देखी जा रही है।  अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव की सदस्यता वाली इस हाई-प्रोफाइल कमेटी ने अपनी रिपोर्ट हाईकमान को सौंपी थी. कमेटी ने नेताओं को अलग-अलग समूहों में बांटा और उनसे अलग-अलग मुलाक़ात की. हर नेता से खास तौर पर पूछा गया कि क्या पंजाब में पार्टी के नेतृत्व में बदलाव होना चाहिए।  तमाम बड़े से छोटे नेताओ तक से ली थी राय कमेटी ने पंजाब के करीब 67 वरिष्ठ नेताओं से गहन विचार-विमर्श किया, जिसमें सीडब्ल्यूसी सदस्य, पूर्व मंत्री, विधायक, सांसद और जिला अध्यक्ष शामिल थे. जिनमें कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य, पूर्व मंत्री, विधायक, सांसद और DCC अध्यक्ष शामिल थे. उन्होंने अंबिका सोनी जैसे वरिष्ठ नेताओं से भी उनके आवास पर जाकर उनकी राय जानी।  सूत्रों के मुताबिक, इस गुप्त मंथन के दौरान एक अधिकांश नेताओं ने पिछले साढ़े चार साल से पद पर काबिज राजा वड़िंग के कामकाज पर असंतोष जाहिर किया और चन्नी को कमान सौंपने की वकालत की. कमेटी ने नेताओं के बयानों को ज्यों का त्यों शामिल किया और अपनी रिपोर्ट में चन्नी को सबसे लोकप्रिय चेहरा बताया था. इस प्रक्रिया की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि चन्नी काफ़ी लोकप्रिय हैं और राज्य के अन्य कांग्रेस नेताओं की तुलना में पार्टी के भीतर सबसे ज़्यादा लोकप्रिय नेता हैं।  हाईकमान के फैसले पर उठे सवाल पैनल की रिपोर्ट के बाद चन्नी कैंप को पूरा भरोसा था कि पंजाब में लीडरशिप में बदलाव तय है, लेकिन हाईकमान ने यथास्थिति बनाए रखते हुए राजा वड़िंग को अध्यक्ष बनाए रखा और चन्नी को केवल चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया।  इस फैसले से हैरान कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, "यह पूरी तरह से एक विफलता  है. जब नेतृत्व बदलने का कोई इरादा ही नहीं था, तो नेताओं से रायशुमारी करने का यह पूरा नाटक क्यों रचा गया? इसका मतलब है कि यह पूरी कवायद सिर्फ एक दिखावा थी।  चन्नी की ताकत पर दूसरे धड़े का पलटवार दूसरी तरफ, पंजाब कांग्रेस के भीतर एक दूसरा धड़ा इस राय से इत्तेफाक नहीं रखता. पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने चन्नी की वास्तविक पकड़ पर सवाल उठाते हुए कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि चन्नी कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से हैं और वे सभी निर्वाचन क्षेत्रों के नेताओं से संपर्क साध रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि वास्तव में उनके बुलाने पर कितने लोग आ रहे हैं? जब वे बैठकें बुलाते हैं, तो बमुश्किल चार-पांच विधायक पहुंचते हैं. हमारा मुकाबला भगवंत मान से है, ऐसे में अगले कुछ दिनों में तस्वीर साफ हो जाएगी कि चन्नी के साथ कितने लोग टिकते हैं।  पंजाब कांग्रेस में हाईकमान के इस फैसले ने संगठन के भीतर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखने वाली बात होगी कि यह असंतोष आगे चलकर शांत होता है या चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी के लिए नई चुनौती बनता है। 

परिणीता बोरठाकुर का बड़ा खुलासा: फिल्म के बदले ‘फिजिकल रिलेशन’ की मांग, डरकर छोड़ना पड़ा प्रोजेक्ट

मुंबई  परिणीता फेमस एक्ट्रेस हैं. वो टीवी के साथ कई फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं. अपने सालों के करियर में उन्होंने हमेशा फैंस को अपनी दमदार एक्टिंग से इंप्रेस किया है। एक्ट्रेस ने अब एक इंटरव्यू में साउथ इंडस्ट्री को लेकर शॉकिंग खुलासा किया है. एक्ट्रेस ने बताया कि काम के बदले उनसे शारीरिक संबंध बनाने की डिमांड की गई थी।  टेलीचक्कर संग बातचीत में एक्ट्रेस से इंडस्ट्री की डार्क रियलिटी के बारे में सवाल किया गया. इसपर परिणीता ने बताया- इस इंडस्ट्री में डार्क रियलिटी तो है, जिसका मैंने भी सामना किया है।                  'लेकिन एक बात इस इंडस्ट्री की अच्छी है कि आपकी मर्जी के बिना आपको कोई टच भी नहीं कर सकता. ये चीज कहीं ना कहीं आपकी पर्सनैलिटी पर भी डिपेंड करती है. आप कैसे किससे बात करते हो. कितना लोगों को अपने करीब आने देते हो या नहीं आने देते।         परिणीता से आगे पूछा गया कि उन्होंने क्या फेस किया है? इसपर एक्ट्रेस बोलीं- अभी तो नहीं, क्योंकि अब मुझे कोई भी कुछ भी बोलने से पहले सोचेगा।  'लेकिन करियर की शुरुआत में मुझे साउथ फिल्म के लिए एक कॉल आया था. उन्होंने मुझे बोला कि आपकी फोटो शॉर्टलिस्ट हुई है. मैं फिर वहां गई. वहां और भी लड़कियां थीं, लोग थे, मैं सबसे मिली।  'मुझे फिर बोला गया कि आप फाइनल हो गई हो. कॉन्ट्रैक्ट साइन करने के लिए आ जाओ. वो लोग कॉन्ट्रैक्ट लेकर आए. उन्होंने अपने असिस्टेंट को कुछ बोला और फिर असिस्टेंट वहां से चला गया।         'उसके बाद वो मुझे बोल रहा है कि अब आप मेरी हीरोइन हो. मैं भी छोटी थी तब. 21 साल की थी. तो मैंने बोला हां. उसने फिर मुझसे कहा कि मुझे आपके बॉडी मूवमेंट्स जानने हैं. मुझे लगा डांस की बात कर रहे हैं. लेकिन वो फिर बोला मुझे लगता है कि हमारे बीच फिजिकल रिलेशन होने चाहिए। 'ये सुनकर मेरे दिल की धड़कन काफी तेज हो गई. मैं तुरंत खड़ी हो गई और मैंने बोला कि मुझे नहीं करनी आपकी फिल्म और फिर मैं भाग गई।         'मैंने अपने पापा को कॉल करके बताया. उन्होंने कहा छोड़ो ये सब तुम इधर आ जाओ. कोई जरूरत नहीं है. फिर उस डायरेक्टर का कॉल आया उसने कहा कि प्लीज किसी को मत बताना मैं फैमिली मैन हूं। 'आपके लिए मेरी फिल्म में रोल है. लेकिन मैंने उनके साथ काम करने से मना कर दिया था. मैंने कभी भी काम करने के लिए कुछ गलत तरीका नहीं अपनाया। परिणीता की बात करें तो वो बेपनाह, सावधान इंडिया, गुप्ता ब्रदर्स, एक था राजा एक थी रानी जैसे शोज में काम कर चुके हैं.