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PM उदय योजना को नहीं मिल रहा रिस्पॉन्स, प्रॉपर्टी नियमितीकरण शुल्क कम करने की तैयारी

नई दिल्ली  1511 अनाधिकृत कॉलोनियों में जैसा है वैसे ही के आधार पर लोगों को उनकी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक देने के लिए नए सिरे से पीएम उदय योजना की शुरुआत की गई थी। नियमों को आसान बनाते हुए यह प्रक्रिया DDA की बजाय MCD को दी गई थी। इसके बावजूद इसे रिस्पांस नहीं मिल रहा है। अब MCD की मांग पर DDA इस योजना के तहत रेगुलराइजेशन शुल्क कम करने पर विचार कर रही है। अधिकारी के अनुसार MCD की तरफ से यह मांग मिली है जिस पर अधिकारी विचार कर रहे हैं। अभी तक पीएम उदय योजना को कोई खास रिस्पांस नहीं मिला है। पोर्टल पर दी जा रही जानकारी के अनुसार अभी तक 50 से भी कम आवेदन मिले हैं। हालांकि प्रक्रिया को सरल करने के बाद इसमें बड़ी संख्या में आवेदन आने की उम्मीद थी। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि इसके नियमतीकरण का शुल्क अधिक है। आवेदन न मिलने और इस शुल्क में कमी के लिए अप्रैल में MCD ने DDA को पत्र लिखकर यह मांग की थी कि इस शुल्क को कम किया जाए। MCD को उम्मीद है कि DDA इस शुल्क को कम करे तो बड़ी संख्या में लोग अप्लाई कर सकते हैं। 2019 में शुरु हुई पीएम उदय योजना दिल्ली में पीएम उदय योजना 2019 में लाई गई थी। शुरुआत में इसका उद्देश्य 1731 कॉलोनियों में रहने वाले करीब 45 लाख प्रॉपर्टी मालिकों को उनके घर का स्वामित्व का अधिकार देना था। हालांकि तय मानकों से अतिरिक्त निर्माण करने के व दूसरी प्रक्रियाएं जटिल होने की वजह से छह साल में मात्र 40 हजार लोग ही इसका लाभ ले सके थे। DDA से मिले कम रिस्पांस के बाद केंद्र सरकार ने नए बदलावों व आसान प्रक्रिया के साथ अप्रैल 2026 में इन कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा कर मालिकाना हक देने की बात कही थी। इस बार प्रक्रिया को आसान किया गया और MCD को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि कोर्ट में चल रहे मामलों की वजह से करीब 200 कॉलोनियों को इसमें से हटा लिया गया। फिलहाल 350 AFR की ही अनुमति फिलहाल यहां पर संपत्तियों की खरीद फरोख्त जनरल पावर अटॉर्नी के आधार पर होती है। इसलिए MCD ने DDA से अपील की है कि इसके रेगुलराइजेशन का शुल्क एक तिहाई कम करे। अभी तक 350 फ्लोर एरिया रेशियो (AFR) की ही अनुमति है। अभी तक रेगुलराइजेशन के लिए यदि किसी 100 गज की जमीन पर बनी चार मंजिला इमारत के ऊपर किसी ने दो मंजिल और बना रखी है तो उसे करीब सात से 10 लाख रुपये अतिरिक्त देने होंगे। बाकी खर्चे अलग हैं। ऐसे में निगम ने मांग की है कि इस शुल्क को भी घटाया जाए। क्योंकि अतिरिक्त FAR लेने पर 11 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर का शुल्क है, वह तीन गुणा अधिक देना पड़ता है। यही वजह है कि लोग अप्लाई नहीं कर रहे हैं। अनधिकृत कॉलोनियों में अधिकांश निर्माण नियमों के तहत नहीं है। इसलिए तीन गुणा अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है।  

पटना कोर्ट में खान सर की जमानत याचिका पर सुनवाई, फैसला 8 जुलाई तक टला

पटना  खान ग्‍लाेबल स्‍टडीज के डायरेक्‍टर फैजल खान (खान सर) की अग्र‍िम जमानत एवं उनके दो गार्डों प्रदीप कुमार एवं तालेबर सिंह जमानत याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश रूपेश कुमार देव ने करीब 40 मिनट तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद पक्ष के वकील के आरोपों पर फैजल खान के आपराध‍िक इतिहास का ब्‍योरा कोर्ट ने मांगा। खान के वकील बोले- उस मामले में बरी हो चुके हैं खान सर के अधिवक्ता का कहना था कि उस केस में वे बरी हो गए हैं। इस पर अदालत ने अधिवक्ता को एक पूरक आवेदन देने को कहा और सुनवाई की तिथि 8 जुलाई को रखी है। इससे पूर्व जिला जज के छुट्टी पर रहने के कारण खान सर और अन्य आरोपितों की जमानत याचिका पर सुनवाई की तिथ‍ि 7 जुलाई तय की गई थी। इससे पहले 30 जून को कोर्ट ने हथ‍ियारों के डॉक्‍यूमेंट्स जमा करने का आदेश दिया था।  उस दिन लोक अभ‍ियोजक ने कोर्ट में कहा था क‍ि फैजल खान के दोनों गार्ड के पास अवैध हथ‍ियार थे। 30 जून को डॉक्‍यूमेंट्स जमा करने का द‍िया था निर्देश दहशत फैलाने के उद्देश्‍य से 2 जून की रात फायरिंग की गई थी। बचाव पक्ष के वकील अरविंद मौआर ने हथ‍ियारों के लाइसेंसी होने की बात कही थी। उन्‍होंने दावा किया था कि दोनों के हथ‍ियार के दस्‍तावेज पुलिस ने जब्‍त कर लिए हैं।   इसके बाद कोर्ट ने हथ‍ियारों के डॅक्‍यूमेंट जमा करने को कहा था। तीन जुलाई सुनवाई की तिथ‍ि तय की थी।  अब 7 जुलाई पर सबकी नजर टिक गई है।   2 जून की रात हुई थी फायरिंग पुलिस जांच में सामने आया था क‍ि जून की रात खान ग्‍लाेबल स्‍टडीज कोचिंग सेंटर पर पथराव और मारपीट के बाद चार राउंड गोली गार्डों ने चलाई थी। फैजल खान के कहने पर ही गार्डों ने ऐसा किया था। इस आरोप में पूर्व में दर्ज एफआईआर में बाद में खान सर का नाम भी जोड़ा गया था।   उससे पूर्व ज्ञान बिंदु के डायरेक्‍टर रौशन आनंद व उनके दो अन्‍य सहयोग‍ियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। बाद में वे जमानत पर बाहर आए।

VIP नंबर का जबरदस्त क्रेज! जालंधर में एक्टिवा के लिए ₹8.52 लाख खर्च, 9 नंबरों की ई-ऑक्शन से 25 लाख की कमाई

जालंधर  जालंधर में फैंसी नंबरों का क्रेज किसी से छिपा नहीं है। रीजनल परिवहन कार्यालय (RTO) की ओर से आयोजित ऑनलाइन ई-ऑक्शन में इस बार PB 08 GA सीरीज के 0001 नंबर के लिए सबसे अधिक 8 लाख 52 हजार 500 रुपए की बोली लगी। यह नंबर किसी लग्जरी कार नहीं, बल्कि एक्टिवा स्कूटर का है।  अभी एक्टिवा का ऑन रोड प्राइस करीब 1.10 लाख रुपए है। यानी बोली लगी रकम से करीब 8 एक्टिवा खरीदी जा सकती थीं। वहीं, ई-ऑक्शन में 0007 नंबर 3 लाख 11 हजार रुपए, 0005 नंबर 2 लाख 83 हजार रुपए, 0008 नंबर 2.50 लाख रुपए, जबकि 0002, 0003, 0006 और 0009 नंबर 2-2 लाख रुपए में बिके। 000 सीरीज के नंबर लाखों रुपए में बिक रहे पिछले महीनों से लगातार 000 सीरीज के नंबर लाखों रुपए में बिक रहे हैं। हालांकि ऑक्शन में 8 लाख रुपए से ज्यादा कीमत में भी नंबर बिके हैं, लेकिन पिछले महीनों के मुकाबले यह ऑक्शन सबसे बेहतर रहा। इससे पहले PB 08 FZ सीरीज का 0001 नंबर 8 लाख 61 हजार रुपए में नीलाम हुआ था। 0001 नंबर 8,500 रुपए कम कीमत पर बिका मौजूदा सीरीज का 0001 नंबर उससे महज 8,500 रुपए कम कीमत पर बिका। आरटीओ अधिकारियों के अनुसार, इच्छुक वाहन मालिक पोर्टल पर बोली लगाते हैं। सबसे अधिक बोली लगाने वाले को संबंधित नंबर आवंटित किया जाता है। तीन दिन ऐसे होती है ई-ऑक्शन… हर सप्ताह शनिवार, रविवार और सोमवार तक फैंसी नंबरों के लिए ऑनलाइन आवेदन लिया जाता है। मंगलवार और बुधवार को आवेदक परिवहन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन बोली लगाते हैं। हर क्लिक के साथ बोली 500 रुपए बढ़ती है। 0001 से 0010 तक के नंबरों का रिजर्व प्राइस 5 लाख रुपए है। रिजर्व प्राइस 1 लाख रुपए है इनमें भाग लेने के लिए 1 लाख रुपए सिक्योरिटी अमाउंट और 2,000 रुपए आवेदन शुल्क जमा करना होता है। 0011 से 0099 तक के नंबरों का रिजर्व प्राइस 1 लाख रुपए है। नीलामी पूरी होने के बाद सफल बोलीदाता को निर्धारित समय सीमा के भीतर पैसे जमा कराने होते हैं।

बिहार के वैशाली में अस्पताल पर गंभीर आरोप, इलाज के बदले महिला के शोषण और अश्लील वीडियो की जांच शुरू

 वैशाली बिहार के वैशाली जिले के राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से जुड़ा एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि अस्पताल के एक्स-रे रूम के भीतर एक महिला के साथ अस्पताल के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर यौन शोषण किया. हालांकि, इस पूरे मामले की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दे दिए हैं।  मामले को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, एक महिला अपनी सास का एक्स-रे कराने राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी. आरोप है कि एक्स-रे कराने के नाम पर उससे पैसे मांगे गए. महिला ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए असमर्थता जताई. इसके बाद उसकी मजबूरी का कथित तौर पर गलत फायदा उठाया गया और अस्पताल के एक्स-रे कक्ष में उसके साथ अनुचित हरकत की गई. इसी कथित घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है।  वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में पहले से अवैध वसूली या अनियमितताओं की शिकायतें मिलती रही थीं, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई. हालांकि इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।  उधर, मामले को गंभीरता से लेते हुए वैशाली के सिविल सर्जन ने कहा कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल वीडियो कब का है, उसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं और घटना वास्तव में राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ही है या नहीं. इन सभी पहलुओं की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित कर अस्पताल भेजी गई है।  स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच टीम वीडियो की प्रामाणिकता, घटना के स्थान और समय सहित सभी तथ्यों की पड़ताल करेगी. रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर न पहुंचें. अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे यह साफ हो सके कि वायरल वीडियो के पीछे की सच्चाई क्या है।   

‘न पद की चाह, न सिद्धांतों से समझौता’, मंत्री अनिल विज ने 5 दशक की राजनीति पर कही बड़ी बात

चंडीगढ़. हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज का राजनीतिक व्यक्तित्व जितना बेबाक और स्पष्टवादी माना जाता है, उतना ही उनका संगठन के प्रति समर्पण भी चर्चा का विषय रहा है। करीब पांच दशक से भाजपा और उसके वैचारिक परिवार से जुड़े विज का कहना है कि उन्होंने जीवन में कभी पद, मंत्रालय या राजनीतिक लाभ की इच्छा नहीं की। पार्टी ने जब जो जिम्मेदारी सौंपी, उसे बिना किसी 'अगर-मगर' के स्वीकार किया। सात बार विधायक रहे विज का दावा है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत न धनबल है, न बाहुबल और न ही जातीय समीकरण, बल्कि जनता का विश्वास और संगठन के संस्कार हैं। 'भाजपा में मुझसे ज्यादा आज्ञाकारी शायद ही कोई होगा' अनिल विज ने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कभी पार्टी के निर्णयों पर सवाल नहीं उठाया। बैंक की नौकरी छोड़ने से लेकर चुनाव लड़ने और पार्टी के निर्देश पर अलग होकर फिर दोबारा लौटने तक हर निर्णय उन्होंने संगठन के आदेश को सर्वोपरि मानकर लिया। उनके अनुसार, उन्होंने कभी किसी आदेश पर 'इफ एंड बट' नहीं किया और जहां जिम्मेदारी मिली, वहीं पूरी निष्ठा से काम किया। 'संगठन के संस्कार मेरी नस-नस में हैं' विज ने कहा कि उनका पूरा राजनीतिक जीवन संगठन की पाठशाला में बीता है। उन्होंने बताया कि संगठन ने उन्हें हमेशा 'डिजर्व, नॉट डिजायर' का संस्कार दिया। यही कारण है कि उन्होंने कभी किसी पद, मंत्रालय या राजनीतिक जिम्मेदारी की मांग नहीं की। सरकार बनने के बाद भी वे अन्य नेताओं की तरह दिल्ली जाकर पैरवी करने के बजाय अपने विधानसभा क्षेत्र अंबाला छावनी में जनता के बीच ही रहे। 'भाजपा लोकतांत्रिक पार्टी है, जुगाड़ की राजनीति नहीं करती' भाजपा की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए विज ने कहा कि उनकी पार्टी किसी परिवार या व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की लोकतांत्रिक पार्टी है। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा में निर्णय एक तय प्रक्रिया के तहत होते हैं और संगठन का अधिकार सर्वोपरि होता है। उन्होंने स्वयं को पार्टी का सच्चा सिपाही बताते हुए कहा कि जहां भी संगठन खड़ा करेगा, वहीं पूरी निष्ठा से सेवा करते रहेंगे। 'कांग्रेस पहले भी मेरे सवालों से डरती थी, आज भी डरती है' विज ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए उन्होंने सदन में तथ्यों और आंकड़ों के साथ सरकार को घेरा, इसलिए उन्हें सबसे अधिक बार सदन से बाहर निकाला गया। उनका दावा है कि आज भी कांग्रेस तथ्यात्मक बहस से बचती है और इसी कारण उनके सवालों से असहज रहती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की भूमिका समान रूप से महत्वपूर्ण होती है, लेकिन कांग्रेस दोनों भूमिकाओं में असफल रही है। 'सबसे वरिष्ठ विधायक होने के नाते मेरे अनुभव का लाभ पार्टी को मिलना चाहिए' अनिल विज का कहना है कि लोकतंत्र में अपनी राय रखना प्रत्येक जनप्रतिनिधि का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा पार्टी और सरकार के मंचों पर अपनी बात रखते हैं। कई बार उस पर सहमति बनती है और कई बार नहीं, लेकिन विचार रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है। उनका मानना है कि सात बार विधायक और सबसे वरिष्ठ विधायकों में शामिल होने के कारण उनके अनुभव का लाभ संगठन और सरकार को मिलना चाहिए। 'न धनबल, न बाहुबल, न जात-पात- मेरी ताकत सिर्फ जनता का प्यार' अनिल विज ने कहा कि उनकी राजनीति कभी धन, बाहुबल या जातीय समीकरणों पर आधारित नहीं रही। उन्होंने कहा कि वे पहले जैसे थे, आज भी वैसे ही हैं और आगे भी बेबाकी से अपनी बात कहते रहेंगे। उनके अनुसार, यदि कोई ताकत उन्हें सात बार विधानसभा तक लेकर आई है तो वह केवल जनता का विश्वास, स्नेह और सहयोग है।

फर्जी मार्कशीट से नौकरी का खुलासा, रायपुर में GST विभाग के दो कर्मचारी हुए बर्खास्त

रायपुर. फर्जी अंकसूची के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जीएसटी विभाग ने दो कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। जीएसटी आयुक्त पुष्पेंद्र मीणा ने मंगलवार को किशोर पटेल और भागवत पटेल को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए। दोनों कर्मचारियों पर वर्ष 2013 की भृत्य भर्ती में कक्षा आठवीं की फर्जी अंकसूची प्रस्तुत कर नौकरी हासिल करने का आरोप था। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2013 में हुई भृत्य भर्ती के दौरान दोनों अभ्यर्थियों ने कक्षा आठवीं की अंकसूची में 96 प्रतिशत से अधिक अंक दर्शाए थे। इसी मेरिट के आधार पर उनका चयन हुआ। बाद में दोनों की पदोन्नति होकर सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्ति हो गई। मामले में किशोर पटेल का नाम उस समय भी चर्चा में आया था, जब वह कर्मचारी संघ का नेता बन गया था। बताया जाता है कि तत्कालीन विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव के समन्वय कक्ष में पदस्थापना के दौरान टाइपिंग कार्य को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद किशोर पटेल ने कर्मचारी संघ और प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत भेजी थी। यह मामला मीडिया में भी प्रमुखता से सामने आया था। बलौदाबाजार के कुछ लोगों ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि किशोर पटेल और भागवत पटेल की कक्षा आठवीं की अंकसूचियां फर्जी हैं। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित मिडिल स्कूल की परीक्षा परिणाम पंजी को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों में सामने आया कि समतुल्यता परीक्षा में अनुपस्थित परीक्षार्थियों के रोल नंबर का उपयोग कर कथित रूप से फर्जी अंकसूचियां तैयार की गई थीं। आरोप है कि इस पूरे मामले में तत्कालीन प्रधान पाठक, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सारंगढ़ और जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा किया गया। शिकायत मिलने पर जीएसटी आयुक्त की ओर से अंकसूचियों के सत्यापन के लिए संबंधित अधिकारियों को भेजा गया था। उस समय अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में अंकसूचियों को सही बताया था। हालांकि बाद में विधानसभा में ध्यानाकर्षण सूचना के दौरान पूरे मामले का खुलासा हुआ, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी और अंततः दोनों कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जिन शिक्षा अधिकारियों पर फर्जी दस्तावेजों को सत्यापित करने और कथित संरक्षण देने के आरोप हैं, उनके खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं, जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में केवल बर्खास्तगी ही नहीं, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के आरोप में आपराधिक मामला दर्ज करने का भी प्रावधान है। फिलहाल इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

मोहन सरकार ने ₹3,600 करोड़ का नया लोन लिया, 18 और 30 साल में होगी अदायगी

भोपाल मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने मंगलवार को बाजार से 3,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज उठाया है। यह राशि दो अलग-अलग किश्तों में 18 वर्ष और 30 वर्ष की अवधि के लिए जुटाई गई है। इस नई उधारी के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 17,400 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर करीब 5.6114 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है। वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह राशि बॉन्ड जारी कर और सरकारी प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की नीलामी के माध्यम से जुटाई जाएगी। ऋण की राशि का उपयोग राज्य में उत्पादक विकास कार्यक्रमों और विभिन्न सार्वजनिक विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाएगा। इस उधारी के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक स्वीकृति भी प्राप्त कर ली गई है। 18 और 30 वर्ष की अवधि के लिए लिया गया ऋण अधिसूचना के मुताबिक, पहली किश्त 1,600 करोड़ रुपए की है, जिसे 18 वर्ष की अवधि के लिए लिया गया है। इस पर ब्याज का भुगतान निर्धारित अवधि तक प्रत्येक वर्ष किया जाएगा। दूसरी किश्त 2,000 करोड़ रुपए की है, जिसकी परिपक्वता अवधि वर्ष 2056 तक रहेगी। दोनों ऋणों पर राज्य सरकार 7.90 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर का भुगतान करेगी। ब्याज का भुगतान प्रत्येक वर्ष 15 अप्रैल और 15 अक्टूबर को किया जाएगा, जबकि ऋण राशि का भुगतान बुधवार को होगा। ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए हुई नीलामी राजपत्र के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी आयोजित की गई, जिसमें पात्र और संस्थागत निवेशकों ने भाग लिया। गैर-प्रतिस्पर्धी निवेशकों के लिए भी निर्धारित सीमा तक निवेश की सुविधा उपलब्ध कराई गई। 31 मार्च तक प्रदेश पर था 4.88 लाख करोड़ का कर्ज सरकार के अनुसार, 31 मार्च 2026 की स्थिति में मध्यप्रदेश पर कुल 4,88,714.17 करोड़ रुपए का ऋण था। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 3,33,278.21 करोड़ रुपए के मार्केट लोन का है। इसके अलावा वित्तीय संस्थानों, केंद्र सरकार, राष्ट्रीय लघु बचत निधि और अन्य स्रोतों से लिए गए ऋण भी कुल देनदारियों में शामिल हैं। विकास कार्यों पर खर्च होगा ऋण राज्य सरकार का कहना है कि इस ऋण का उपयोग सिंचाई, कृषि, ऊर्जा, सड़क, संचार, पेयजल, सहकारी संस्थाओं के विकास और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। सरकार ने यह भी दावा किया है कि राज्य की परिसंपत्तियों का मूल्य उसकी कुल देनदारियों से अधिक है, जिससे वित्तीय स्थिति संतुलित बनी हुई है।

अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी समय से पहले हुए अंतर्ध्यान, 5 दिन में पूरी तरह पिघली हिम शिवलिंग

श्रीनगर  अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन बाद ही बाबा बर्फानी का प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु गुफा में दर्शन कर चुके हैं। हिमलिंग के इतनी जल्दी पिघलने के बाद अमरनाथ श्राइन बोर्ड की व्यवस्थाओं और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।अमरनाथ यात्रियों के लिए दुख वाली खबर सामने आई है. यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन बाद ही हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु गुफा तक पहुंचकर दर्शन कर चुके हैं. अमरनाथ यात्रा इस बार 3 जुलाई से शुरू हुई थी और 7 जुलाई को बाबा बर्फानी पूरी तरह से अंतर्ध्यान हो गए. हर वर्ष 57 दिन तक चलने वाली बाबा अमरनाथ यात्रा का रक्षाबंधन के दिन यानी सावन पूर्णिमा पर समापन होता है. लेकिन महज पांच दिन में ही बाबा बर्फानी के अंतर्ध्यान होने से अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड पर सवाल खड़े हो रहे हैं।  3 जुलाई से शुरू हुई थी यात्रा इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी। बताया जा रहा है कि 7 जुलाई तक प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया। जबकि यह यात्रा हर साल 57 दिनों तक चलती है और इस बार इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन (सावन पूर्णिमा) के दिन होना है। श्राइन बोर्ड ने क्या कहा? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि हिमलिंग का बनना और पिघलना पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है। उन्होंने इसे मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों से जुड़ी सामान्य घटना बताया है।अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों से जब इस बारे में बात कई गई तो उन्होने इस स्थिति को प्राकृतिय प्रकिया का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया. लेकिन कश्मीर के पर्यावरणविदों का मानना है कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति देना इसका सबसे बड़ा कारण है. उनका कहना है कि लाखों भक्तों की गर्म सांस हिमलिंग सहन नहीं कर पा रहा है और श्राइन बोर्ड के अधिकारी भी यह मानते हैं लेकिन उन्होंने इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की. साथ ही हिमलिंग के पिघलने से रोकने के लिए किए गए सभी उपाय भी इनको नाकाफी साबित हुए।  पर्यावरणविदों ने जताई चिंता कश्मीर के कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से गुफा के आसपास का तापमान बढ़ता है, जिससे हिमलिंग तेजी से पिघल सकता है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। हालांकि, इस दावे पर सभी विशेषज्ञों की एक जैसी राय नहीं है और हिमलिंग के जल्दी पिघलने के पीछे मौसम और जलवायु भी अहम कारण माने जाते हैं। मौसम और तापमान का भी असर विशेषज्ञों के अनुसार, अमरनाथ गुफा में बनने वाला प्राकृतिक हिम शिवलिंग हर साल तापमान, बर्फबारी और मौसम की स्थिति के अनुसार आकार लेता है। ऊंचाई वाले इलाकों में बढ़ता तापमान, कम बर्फबारी और जलवायु परिवर्तन जैसी स्थितियां इसके बनने और पिघलने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।  अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड ने झाड़ा पल्ला अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने इसके पिघलने की प्रक्रिया से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि यह प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि कश्मीर के पर्यावरणविद इसे मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना था कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल होने की अनुमति देने से ऐसा हुआ है।  भक्तों की गर्म सांसों से पिघल रहा है हिमलिंग! पिछले कई सालों से जिस तेजी से हिमलिंग पिघल रहा है उसे रोकने की खातिर किए जाने वाले उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। दरअसल गुफा में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने से हिमलिंग को नुकसान पहुंच रहा है क्योंकि लाखों भक्तों की गर्म सांसों को हिमलिंग सहन नहीं कर पा रहा है। श्राइन बोर्ड के अधिकारी अप्रत्यक्ष तौर पर भक्तों की सांसों की थ्योरी को मानते हैं पर प्रत्यक्ष तौर पर वे इसे कुदरती प्रक्रिया करार देते थे।  पहले भी जल्दी पिघल चुका है हिमलिंग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 23 मई को हिमलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट थी। 29 जून तक यह घटकर करीब 5 फीट रह गई और अब इसके पूरी तरह पिघलने की जानकारी सामने आई है। यह पहली बार नहीं है जब हिमलिंग यात्रा के दौरान जल्दी पिघला हो। वर्ष 2016 में यात्रा शुरू होने के करीब 10 दिन बाद ही हिमलिंग पिघल गया था। वहीं, 2013 में भी यात्रा समाप्त होने से पहले ही हिमलिंग अंतर्ध्यान हो गया था। 28 अगस्त तक चलेगी अमरनाथ यात्रा इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था। इसी वजह से यह हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक मानी जाती है।

कोलकाता में ED की ताबड़तोड़ रेड, TMC फंड केस में 5 ठिकानों पर कार्रवाई; अभिषेक बनर्जी की फ्लाइट पर उठे सवाल

कोलकाता  तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बैंक खातों और चुनावी चंदे में मचे घमासान के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमें कोलकाता और उसके आसपास सॉल्ट लेक, राजारहाट और राधाबाजार समेत पांच ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। ईडी के अधिकारी केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को साथ लेकर एक चार्टर्ड एविएशन कंपनी के डायरेक्टरों के घर और दफ्तरों को खंगाल रहे हैं। पूरा मामला टीएमसी के खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स जांच के दायरे में मंगलवार की सुबह ईडी की टीम सबसे पहले 'केयरवेल एविएशन' नाम की कंपनी के निदेशकों के घर पहुंची। जांच में यह बात सामने आई है कि इसी कंपनी के प्राइवेट विमानों और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल टीएमसी के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और पार्टी के अन्य बड़े नेता दौरों के लिए करते रहे हैं। सॉल्ट लेक में रहने वाले कंपनी के दो निदेशकों, पवन जाजू और राजेश जाजू के घर पर टीम मौजूद है और उनसे बंद कमरे में पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही राजारहाट और राधाबाजार स्थित केयरवेल एविएशन के दफ्तरों पर भी छापेमारी चल रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या नेताओं के लिए बुक होने वाले इन महंगे चार्टर्ड विमानों का भुगतान टीएमसी के उन्हीं खातों से किया जा रहा था, जिन्हें लेकर शिकायत दर्ज है। पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने खुद की थी बैंक खाते फ्रीज करने की मांग दरअसल, टीएमसी के इन बैंक खातों को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने खुद बैंक अधिकारियों को एक चिट्ठी भेजी थी। इस चिट्ठी में उन्होंने खुद को पार्टी का अधिकृत कोषाध्यक्ष बताते हुए इन खातों से होने वाले लेन-देन पर रोक लगाने और इन्हें फ्रीज करने का अनुरोध किया था। इसके अलावा साइबर क्राइम ब्रांच में भी वित्तीय गबन को लेकर एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद से ही ये खाते केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर आ गए थे। भाजपा विधायक की शिकायत पर पुलिस ने की थी कार्रवाई इस मामले में राजनीतिक मोड़ तब आया जब जयनगर से भाजपा विधायक ने निजी बैंक के तीन खातों में भारी गड़बड़ी और संदिग्ध लेन-देन का आरोप लगाते हुए बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में साफ कहा गया था कि इन खातों के जरिए बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग का खेल चल रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने बैंक को पत्र लिखकर तीनों खातों को तुरंत फ्रीज करवा दिया था, जिसकी कड़ियां जोड़ते हुए अब ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है। "चार्टर्ड फ्लाइट का किराया इसी संदिग्ध पैसे से दिया गया" पार्टी के भीतर और बाहर इस भारी खर्च को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रीतब्रत बनर्जी ने इस पूरे विवाद पर तीखा दावा करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स के लिए जो मोटी रकम पानी की तरह बहाई गई, वह इसी फंड से निकली थी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, "हमारे लिए अब यह साबित कर पाना नामुमकिन है कि इस खाते में जमा किया गया करोड़ों रुपया किसी घोटाले, डकैती, जबरन वसूली या भ्रष्टाचार की कमाई का हिस्सा नहीं है। साफ दिख रहा है कि वीआईपी चार्टर्ड फ्लाइट्स का लाखों-करोड़ों का किराया इसी संदिग्ध पैसे से चुकाया जा रहा था।" फिलहाल ईडी की टीमें दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटाने में लगी हैं, जिससे आने वाले दिनों में टीएमसी के कई बड़े नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।  

Pakistan Terror Attack: पुलिस चौकी पर आतंकियों का हमला, 9 सुरक्षाकर्मी मारे गए

इस्लामाबाद आतंकियों को पनाह देने वाले पाकिस्तान से बड़ी खबर सामने आई है। यहां के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में बड़ा आतंकी हमला हुआ है। बताया जा रहा है कि जियारत जिले में सोमवार देर रात आतंकवादियों ने एक पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया और ताबड़तोड़ गोलीबारी करने लगे। इस हमले में दो एसएचओ समेत 9 पुलिसकर्मी मारे गए। बताया जा रहा है कि आतंकवादियों ने पांच जवानों को अगवा भी कर लिया है। वहीं, हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और संयुक्त अभियान शुरू किया, जिसमें 15 आतंकवादी मारे गए। घटना की पुष्टि करते हुए जियारत के पुलिस अधीक्षक अब्दुल कुदूस ने बताया कि हमलावरों ने मांगी फेज-तीन क्षेत्र में स्थित पुलिस चौकी को निशाना बनाया। रात भर चली गोलीबारी बेहद भीषण रही, जिसमें दोनों तरफ से भारी मात्रा में हथियारों का इस्तेमाल हुआ। मारे गए पुलिस अधिकारियों में मांगी थाने के एसएचओ मोहम्मद हुसैन, कोवास थाने के एसएचओ सोहबत खान और एंटी-टेररिस्ट फोर्स के इंचार्ज हेड कांस्टेबल सैफुल्लाह शामिल हैं। मारे गए जवानों के शवों को जियारत जिला मुख्यालय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। हमले में टीटीपी का हाथ? बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शाहिद रिंद ने बताया कि मांगी इलाके में आतंकवादियों के खिलाफ चलाया गया क्लियरेंस ऑपरेशन पूरा कर लिया गया है। इस अभियान में फ्रंटियर कॉर्प्स, बलूचिस्तान पुलिस, काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट, स्पेशल ऑपरेशंस विंग और एंटी-टेररिज्म फोर्स ने भाग लिया। शाहिद रिंद ने आगे बताया कि अभियान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के 15 आतंकवादी मारे गए। रिंद ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ इंटेलिजेंस आधारित अभियान और तेज किए जाएंगे। वहीं, अगवा किए गए पांच पुलिसकर्मियों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने की घटना की निंदा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी हमले की निंदा की और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। शरीफ ने कहा कि हम बलूचिस्तान की शांति को नुकसान पहुंचाने की किसी को इजाजत नहीं देंगे। शांति के दुश्मनों को पूरी तरह समाप्त किए बिना हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। वहीं, गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि ऐसे कायराना हमले न तो शांति भंग कर सकते हैं और न ही आतंकवाद के खिलाफ देश के दृढ़ संकल्प को कमजोर कर सकते हैं। इलाके में तनाव, सड़कें जाम हमले की खबर फैलते ही जियारत और आसपास के इलाकों में गुस्सा भड़क उठा। स्थानीय कबीलों, ट्रांसपोर्टरों, व्यापारियों और मारे गए पुलिसकर्मियों के परिजनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बलूचिस्तान को पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा से जोड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को पूरी तरह जाम कर दिया। इस कारण सैकड़ों यात्री बसें और माल ढोने वाले वाहन सड़कों पर फंस गए। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। जियारत के डिप्टी कमिश्नर अब्दुल कुदूस अचकजई ने कहा कि लापता जवानों की तलाश के लिए विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और इलाके में अतिरिक्त सैन्य व पुलिस बल भेजे गए हैं।