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योगी का चुनावी मोड, मंत्रियों और विधायकों को विकास योजनाओं पर फोकस करने की हिदायत

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में अगले छह महीने में विधानसभा चुनाव होना है। इससे पहले योगी सरकार चुनावी मोड में आ गई हैं। सीएम योगी ने सोमवार को कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रिपरिषद की बैठक ली। मंत्रियों को शासन की योजनाओं को अंतिम पायदान पर खड़े लोगों और जरूरतमंदों तक पहुंचाने का निर्देश दिया। इसके बाद विधायकों और जनप्रतिनिधियों के साथ वर्चुअल बैठक करके पौधरोपण महाभियान-2026' के लिए निर्देश दिया। कहा कि दो दिनों के अंदर अपने-अपने इलाके में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय संस्थाओं के साथ बैठक करके स्थान तय करें। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की 25 करोड़ जनता हमारा परिवार है। प्रदेश सरकार द्वारा अन्तिम पायदान पर खड़े समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। हमारा प्रयास होना चाहिए कि प्रत्येक जरुरतमन्द तक आवश्यक सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जाए। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी रहे मौजूद मुख्यमंत्री सोमवार को यहां अपने सरकारी आवास पर मंत्रिमण्डल के सदस्यों के साथ बैठक कर रहे थे। बैठक में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि राज्य का चहुंमुखी विकास प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है। मंत्री प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं का जमीनी स्तर पर जायजा लेते रहें। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से प्रत्येक मुद्दे पर विचार-विमर्श करते हुए गांवों तथा कस्बों में विद्यालयों, अस्पतालों आदि की स्थिति और वहां प्रदान की जा रही जनसुविधाओं की पड़ताल करें। प्रत्येक जनपद के महिला स्वयं सहायता समूहों से संवाद बनायें। जल जीवन मिशन के अन्तर्गत रोड कटिंग से जुड़े मामलों का तय समय में निस्तारण किया जाना चाहिए। अभिभावकों के साथ बैठक करें मंत्री मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनीफॉर्म, बैग, किताबें, जूते-मोजे आदि प्रदान कर रही है। मंत्री इन स्कूलों में जाकर अभिभावकों के साथ बैठक करें। बच्चों के रिपोर्ट कार्ड देखते हुए स्कूलों में प्रदान की जा रही अन्य सुविधाओं की जानकारी प्राप्त करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 जुलाई को वाराणसी में मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारम्भ किया जाएगा। इस योजना से बेसिक तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षक, शिक्षा मित्र, अनुदेशक आदि तथा उनके परिवार के सदस्य पांच लाख रुपये तक का वार्षिक स्वास्थ्य बीमा कवर प्राप्त कर सकेंगे। जनपद स्तर पर मंत्री तथा प्रत्येक विधान सभा स्तर पर विधायक इस कार्यक्रम को सम्पन्न कराएंगे। 12 जुलाई को वृक्षारोपण अभियान मुख्यमंत्री ने कहा कि 12 जुलाई को प्रदेश में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृक्षारोपण महाअभियान संचालित किया जाएगा। इस वृक्षारोपण महाअभियान के पश्चात प्रदेश 275 करोड़ पौधे रोपित करने का रिकार्ड बनाने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के सकारात्मक प्रयासों से प्रदेश की आधी आबादी राज्य के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रही है। जनपद सिद्धार्थनगर की एक महिला उद्यमी ने मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना का लाभ उठाकर दो वर्षों में छह लाख रुपये की आमदनी प्राप्त की है। वह अन्य महिलाओं के लिए मिसाल बनी हैं। कोविड कालखण्ड में आशा वर्करों ने अच्छा कार्य किया है, उनका मानदेय बढ़ाने की आवश्यकता है। दो दिनों में बैठक करें विधायक और सभी जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री ने पौधे लगाने और उसकी सुरक्षा पर भी ध्यान देने की अपील की है। सोमवार को 'पौधरोपण महाभियान-2026' को लेकर जनप्रतिनिधियों से वर्चुअली संवाद के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अगले दो दिनों में अपने-अपने क्षेत्रों में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय संस्थाओं के साथ बैठक कर वृक्षारोपण स्थलों का चयन करें तथा पौधों की आवश्यकता का प्रस्ताव जिला प्रशासन एवं वन विभाग को उपलब्ध कराएं, ताकि समय रहते सभी तैयारियां पूरी की जा सकें। इस संवाद में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, महापौर, जिला पंचायत अध्य़क्षों, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत के अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों, जिला पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, निवर्तमान ग्राम प्रधानों, पंचायत सदस्यों, नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों के पार्षद भी जुड़े। मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों, संगठनों और नागरिकों से इसमें बढ़-चढ़कर सहभागिता का आह्वान किया।

दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा 5000 पार, 2028 तक होंगी 13000 बसें

नई दिल्ली  दिल्ली की सड़कों पर आज मंगलवार को 300 नई इलेक्ट्रिक बसें उतरेंगी। दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा 5000 के पार पहुंच जाएगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का दावा है कि 2028 तक दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 100 फीसदी बसें इलेक्ट्रिक होंगी। इसके लिए वह अभी से पीएम ई-ड्राइव के तहत ऑर्डर प्लेस कर चुकी हैं। सूत्रों का कहना है कि 2028 तक डीटीसी के पास कुल 13 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक बसें होंगी। मुख्यमंत्री इन 300 बसों को आज हरी झंडी दिखाएंगी आज मंगलवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री इन 300 बसों को हरी झंडी दिखाएंगी। अभी DTC के पास 6223 बसें हैं, जिनमें 4680 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इसमें 12 मीटर वाली स्टैंडर्ड बसों के अलावा 9 मीटर वाली देवी बसें भी शामिल हैं। DTC चाहकर भी अब सीएनजी चालित बसें नहीं खरीद पाएगी ईवी पॉलिसी आने के बाद सरकार ने अब दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक बसें लाने का प्रावधान किया है। यानी DTC चाहकर भी अब सीएनजी चालित बसें नहीं खरीद पाएगी। दिल्ली सरकार के अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली सरकार ने पीएम ई-ड्राइव के तहत 2800 नई बसें खरीदने को लेकर एक और कैबिनेट प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें 9 मीटर वाली 1400 बसें भी शामिल हैं। ये नई बसें 2027 से आनी शुरू हो जाएंगी और अप्रैल 2027 तक सड़कों पर चलाने की तैयारी है। यानी 2027 तक डीटीसी के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों का आंकड़ा 8000 को पार कर जाएगा। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट नोट तैयार कर वित्तीय मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। महाकाल से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह, 2 अक्टूबर से होगी शुरुआत     5,000 के पार इलेक्ट्रिक बसों की संख्या दिल्ली में     13,000 इलेक्ट्रिक बसें होगी DTC के पास 2028 तक     पीएम ई-ड्राइव के तहत किया जा चुका है ऑर्डर प्लेस     नई बसें 2027 से आनी शुरू हो जाएगी, अप्रैल 2027 तक चलाने की तैयारी आप पर असर दिल्ली में बसों की संख्या बढ़ने से सबसे ज्यादा फायदा उसमें सफर करने वाले लाखों यात्रियों को होगा। बसों की फ्रीक्वेंसी बेहतर होगी। जिन रूटों पर अभी भीड़ ज्यादा है, वहां बसों की संख्या भी बढ़ाई जा सकेगी। छोटी बसें आने से संकरी सड़कों पर बसों की आवाजाही बढ़ेगी। इसके लिए सरकार IIT दिल्ली के साथ मिलकर दिल्ली को तीन जोन में बांटकर बस रूट रेशनलाइजेशन का काम भी कर रही है, जिससे कनेक्टिविटी को बेहतर किया जा सके। वर्तमान में दिल्ली में मांग के हिसाब से बसों की संख्या करीब 6500 है। अगले साल यह संख्या 8 हजार करने के साथ-साथ 2028 तक 13 हजार से अधिक करना है।  

WhatsApp ने रोका राम गोपाल यादव का मैसेज कैंपेन, प्रतिदिन 5 हजार लोगों को भेजते थे संदेश

 लखनऊ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव हर सुबह करीब 5 हजार लोगों को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजते हैं. लेकिन अब यह सिलसिला कुछ समय के लिए रुक गया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि 31 जुलाई तक वह अपने नियमित व्हाट्सएप संदेश नहीं भेज पाएंगे, क्योंकि व्हाट्सऐप ने उनके अकाउंट से संदेश भेजने पर अस्थायी रोक लगा दी है।  रामगोपाल यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि वह प्रतिदिन सुबह लगभग पांच हजार लोगों को सुप्रभात संदेश भेजते थे और उनके अच्छे दिन की कामना करते थे. उन्होंने बताया कि व्हाट्सएप ने 31 जुलाई तक उनके द्वारा भेजे जाने वाले संदेशों पर रोक लगा दिया है. इसी वजह से वह इस अवधि में अपने शुभचिंतकों तक रोजाना पहुंचने वाला संदेश नहीं भेज सकेंगे।  रामगोपाल यादव की इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई. कई समर्थकों ने उनके पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए जल्द प्रतिबंध हटने की उम्मीद जताई, जबकि कुछ यूजर्स ने यह जानने की उत्सुकता दिखाई कि व्हाट्सऐप ने इतनी बड़ी संख्या में संदेश भेजने पर यह अस्थायी रोक क्यों लगाई।  गौरतलब है कि व्हाट्सएप की नीतियों के तहत एक साथ बड़ी संख्या में संदेश भेजने या असामान्य गतिविधि पाए जाने पर सुरक्षा कारणों से कुछ अकाउंट्स पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है. हालांकि, रामगोपाल यादव के मामले में व्हाट्सएप की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, इसलिए प्रतिबंध का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है। 

अधूरा रह गया रोनाल्डो का सबसे बड़ा सपना, World Cup से बाहर होने के बाद भावुक हुए स्टार फुटबॉलर

 आर्लिंग्टन पुर्तगाल के स्टार स्ट्राइकर क्रिस्टियानो रोनाल्डो का फीफा वर्ल्ड कप जीतने का सपना अधूरा रह गया. स्पेन के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले में पुर्तगाल को 0-1 से दिल तोड़ने वाली हार मिली. इसके साथ ही 41 साल के रोनाल्डो का वर्ल्ड कप सफर हमेशा के लिए खत्म हो गया. मैच के बाद निराश रोनाल्डो ने पुष्टि की कि यह उनके करियर का आखिरी वर्ल्ड कप था, लेकिन उन्होंने इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लेने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं किया है।  7 जुलाई (मंगलवार) को आर्लिंग्टन के डलास स्टेडियम में आयोजित यह मुकाबला बहुत देर तक बराबरी पर था, लेकिन दूसरे हाफ के इंजरी टाइम में सब्स्टीट्यूट मिकेल मेरिनो ने गोल दागकर पुर्तगाल और रोनाल्डो का सपना तोड़ दिया. हार के बाद रोनाल्डो का दर्द साफ दिखाई दिया. उन्होंने स्वीकार किया कि आखिरी वर्ल्ड कप से इस तरह विदाई लेना उनके लिए बेहद दुखद है।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'इस तरह वर्ल्ड कप से बाहर होने का दुख है. मैंने अपना सबकुछ दिया. मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की और मैं साफ अंतरात्मा के साथ यहां से जा रहा हूं. हां, यह मेरा आखिरी वर्ल्ड कप था, लेकिन अब मेरे पास सोचने और अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका होगा. मैं जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करूंगा।  भावनाओं में नहीं बहना चाहता: रोनाल्डो स्पेन के खिलाफ हार के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रोनाल्डो ने पुर्तगाल के लिए भी अपना आखिरी मुकाबला खेल लिया है. रोनाल्डो ने इस सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया. उन्होंने साफ किया कि वह हार की निराशा और भावनाओं में बहकर अपने भविष्य पर कोई फैसला नहीं करेंगे।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'मैं भावनाओं में बहकर कोई फैसला नहीं करता.' उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि भले ही उनका वर्ल्ड कप करियर खत्म हो गया हो, लेकिन वह पुर्तगाल के लिए कुछ समय और खेलते हुए दिखाई दे सकते हैं. रोनाल्डो का मानना था कि पुर्तगाल ने स्पेन के खिलाफ कड़ा मुकाबला खेला और मैच किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने बताया, 'स्पेन थोड़ा भाग्यशाली रहा. यह ऐसा मुकाबला था, जो किसी भी टीम के पक्ष में जा सकता था.' रोनाल्डो ने अपने करियर में रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए छठी बार फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया. उन्होंने इस टूर्नामेंट में तीन गोल भी दागे, लेकिन वह अपनी टीम को खिताब तक नहीं पहुंचा सके।  दो दशक के अपने शानदार वर्ल्ड कप करियर में क्रिस्टियानो रोनाल्डो कभी फाइनल तक नहीं पहुंच पाए. हार की निराशा के बावजूद रोनाल्डो ने पुर्तगाल के लिए अपने योगदान पर गर्व जताया. उन्होंने याद दिलाया कि उनकी मौजूदगी में पुर्तगाल ने फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी सफलताएं हासिल कीं।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने कहा, 'मैंने पुर्तगाल के लिए तीन खिताब जीते हैं. क्रिस्टियानो रोनाल्डो से पहले पुर्तगाल ने एक भी खिताब नहीं जीता था. राष्ट्रीय टीम का सबसे बड़ा खिताब हमने 2016 में यूरोपियन चैम्पियनशिप के रूप में जीता था. सच कहूं तो मेरे लिए वह वर्ल्ड कप जितना ही महत्वपूर्ण है।  क्रिस्टियानो रोनाल्डो की कप्तानी में पुर्तगाल ने यूरो 2016 का खिताब जीतकर इतिहास रचा था. इसके बाद टीम ने 2019 और 2025 में यूईएफए नेशन्स लीग की ट्रॉफी भी अपने नाम की. रोनाल्डो ने क्लब और इंटरनेशनल फुटबॉल में लगभग हर बड़ी उपलब्धि हासिल की. पांच बार बैलन डी'ओर जीता, पुर्तगाल को तीन बड़े खिताब दिलाए और अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए. लेकिन वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उनके हाथों में नहीं आ सकी।   

PM मोदी 17 जुलाई को करेंगे बड़ा ऐलान, पहली हाइड्रोजन ट्रेन समेत कई मेगा प्रोजेक्ट्स राष्ट्र को समर्पित

जींद. पीएम नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के अलावा 4 मेडिकल कॉलेज, कटरा एक्सप्रेसवे, एलिवेटेड ट्रैक का उद्घाटन करेंगे। इनके अलावा भी कई प्रोजेक्ट का उद्घाटन-शिलान्यास हो सकता है। पीएम नए बस स्टैंड के सामने जनसभा को संबोधित करेंगे। उसी दिन उनके चंडीगढ़ व पंजाब में भी कई प्रोजेक्ट का लोकार्पण-शिलान्यास के कार्यक्रम हैं। मोदी 2014 विधानसभा चुनाव के 12 साल बाद जींद आएंगे। जनसभा में पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचाने का संदेश दिया जाएगा। भाजपा कार्यकर्ताओं से पैदल या साइकिल, ईवी, ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से आने की अपील करेगी।   सिख संग्रहालय का वर्चुअली शिलान्यास होगा कुरुक्षेत्र में 'विरासत-ए-खालसा' की तर्ज पर 115 करोड़ से बनने वाले हरियाणा के पहले सिख संग्रहालय का वर्चुअली शिलान्यास होगा। हाइड्रोजन ट्रेन यह जींद-सोनीपत ट्रैक पर75 किमी. प्रति घंटे की स्पीड से चलेगी। इसमें 10 कोच हैं। प्रोजेक्ट की लागत 136 करोड़ है। पीएम हरी झंडी दिखाकर इसका शुभारंभ करेंगे। कटरा एक्सप्रेसवे 35 हजार करोड़ से 670 किमी. लंबा दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे बन रहा है। हरियाणा में 1,866 करोड़ से बने 135 किमी. हिस्से में 22 नवंबर 2024 को ट्रैफिक शुरू हुआ। वर्चुअली उद्घाटन होगा। यह झज्जर, सोनीपत, जींद, कैथल से गुजर रहा है। 2027 तक पूरा बनने पर दिल्ली से कटरा के 14 के बजाय 6 घंटे लेंगे। स्पीड लिमिट कार की 120, भारी वाहन की 80 किमी. प्रति घंटा है। एलिवेटेड ट्रैक 350 करोड़ से कुरुक्षेत्र में 6 किमी. में बने एलिवेटेड ट्रैक से 5 मुख्य रेलवे फाटक हट गए हैं। वर्चुअली उद्घाटन होगा। मेडिकल कॉलेज  नारनौल, भिवानी समेत 4 अलग-अलग जिलों में मेडिकल कॉलेजों का वर्चुअली लोकार्पण होगा, जहां मंत्री मौजूद रहेंगे। इससे जहां चिकित्सा सुविधाएं बढ़ेंगी, वहीं एमबीबीएस की सीटें भी बढ़ेंगी। यह जानकारी भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने दी।

बठिंडा में ई-रिक्शा चालकों की बढ़ी परेशानी, ऐप के जरिए बीच रास्ते रुक रहे वाहन

बठिंडा. शहर में ई-रिक्शा चालकों की परेशानी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अब तक चोरी, बैटरी और दुर्घटनाओं जैसी समस्याओं से जूझ रहे ई-रिक्शा चालकों के सामने एक नया खतरा खड़ा हो गया है। सोमवार देर रात बठिंडा के रेलवे रोड नजदीक अस्पताल बाजार के पास एक ई-रिक्शा को अज्ञात व्यक्ति ने मोबाइल एप के माध्यम से बंद कर दिया। ई-रिक्शा संचालक रेलवे स्टेशन के बाहर से सवारी लेकर जा रहा था। रेलवे स्टेशन से 500 मीटर की दूरी पर पहुंचने पर ई-रिक्शा अचानक बंद हो गया। जिसके बाद सवारी उतरकर दूसरे आटो पर चली गई, जबकि ई-रिक्शा चालक करीब दो घंटे तक परेशान होता रहा। इतना ही परेशान ई-रिक्शा संचालक ने बताया कुछ ही देर पहले हनुमान चौंक के पास भी एक अन्य ई-रिक्शा भी इसी तरह अचानक बंद हो गया। दोनों मामलों में चालक करीब दो घंटे तक परेशान रहे और उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर रिक्शा अचानक क्यों बंद हो गया। एप डाउनलोड कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की घटना के दौरान वहां से गुजर रहे नौजवान वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों ने भीड़ देखकर कारण जानने का प्रयास किया। संस्था के सदस्यों ने मोबाइल पर संबंधित एप डाउनलोड कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की, जिसके बाद ई-रिक्शा दोबारा चालू हो गया। बताया जा रहा है कि बठिंडा में इस तरह की यह पहली घटना है, जिसने ई-रिक्शा चालकों के साथ-साथ आम लोगों की भी चिंता बढ़ा दी है। नौजवान वेलफेयर सोसायटी के प्रधान सोनू माहेश्वरी ने कहा कि कुछ शरारती लोग तकनीक का गलत इस्तेमाल कर गरीब ई-रिक्शा चालकों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से ऐसे लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। कैसे मोबाइल एप से बंद हो जाता है ई-रिक्शा? विशेषज्ञों के अनुसार आजकल बाजार में आने वाले कई आधुनिक ई-रिक्शा स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम से लैस होते हैं। इनमें वाहन के कंट्रोलर या जीपीएस माड्यूल को मोबाइल एप से जोड़ा जाता है। अलग-अलग कंपनियां अपनी-अपनी आधिकारिक एप उपलब्ध कराती हैं, जिनके जरिए वाहन की लोकेशन देखी जा सकती है, बैटरी की स्थिति जानी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर वाहन को लाक या अनलाक भी किया जा सकता है। यदि किसी ई-रिक्शा का कंट्रोल सिस्टम असुरक्षित तरीके से कान्फ़िगर किया गया हो, डिफाल्ट पासवर्ड बदला न गया हो या किसी अनधिकृत व्यक्ति को उस वाहन तक डिजिटल पहुंच मिल जाए, तो वह एप के माध्यम से वाहन को लाक कर सकता है। हालांकि यह सुविधा मूल रूप से सुरक्षा के लिए बनाई गई है, ताकि चोरी होने पर वाहन को रोका जा सके, लेकिन इसका दुरुपयोग होने की आशंका भी रहती है। कौन-सी एप होती है? ई-रिक्शा को बंद करने के लिए कोई एक सार्वभौमिक मोबाइल एप नहीं होती। प्रत्येक निर्माता या कंट्रोलर कंपनी अपनी अलग आधिकारिक एप उपलब्ध कराती है। कुछ वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग कंपनियों की एप, जबकि कुछ में ब्लूटूथ आधारित कंट्रोल एप काम करती हैं। इसलिए किसी भी घटना में यह जानना जरूरी होता है कि संबंधित ई-रिक्शा में किस कंपनी का कंट्रोलर या स्मार्ट लाक सिस्टम लगा है। उसी की आधिकारिक एप से अधिकृत उपयोगकर्ता वाहन को अनलाक कर सकता है। यदि अचानक बंद हो जाए ई-रिक्शा तो क्या करें? विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले वाहन की बैटरी, मुख्य स्विच और फ्यूज की जांच करें। यदि सब कुछ सामान्य है और वाहन फिर भी चालू नहीं हो रहा, तो यह संभव है कि वह डिजिटल लाक मोड में चला गया हो। ऐसी स्थिति में वाहन के निर्माता, डीलर या अधिकृत सर्विस सेंटर से संपर्क करें। यदि आपके वाहन में स्मार्ट कंट्रोल एप का उपयोग होता है, तो उसी आधिकारिक एप में लाग-इन कर अधिकृत खाते से वाहन को अनलाक किया जा सकता है। यदि स्वयं प्रक्रिया की जानकारी न हो, तो किसी प्रशिक्षित तकनीशियन की मदद लें। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बताई गई एप डाउनलोड करने या अपना ओटीपी और पासवर्ड साझा करने से बचें। इन बातों का रखें विशेष ध्यान – ई-रिक्शा खरीदने के बाद डिफाल्ट पासवर्ड तुरंत बदलें। वाहन से जुड़ी मोबाइल एप केवल मालिक के मोबाइल में ही रखें। ओटीपी, यूजर आईडी या पासवर्ड किसी से साझा न करें। समय-समय पर एप और वाहन का साफ्टवेयर अपडेट कराते रहें। अनजान व्यक्ति की वजह से वाहन बंद होने का संदेह हो, तो तुरंत पुलिस और डीलर को सूचना दें। सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी अजनबी को वाहन का क्यूआर कोड, कंट्रोलर नंबर या डिजिटल जानकारी न दिखाएं। प्रशासन और कंपनियों की भी बढ़ी जिम्मेदारी तकनीकी जानकारों का मानना है कि यदि ऐसे मामले बढ़ते हैं, तो निर्माता कंपनियों को अपने डिजिटल सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाना होगा। दो-स्तरीय सुरक्षा (टू-फैक्टर आथेंटिकेशन), मजबूत पासवर्ड प्रणाली और मालिक की पहचान के बिना वाहन लाक या अनलाक न होने जैसी सुविधाएं अनिवार्य की जानी चाहिए। वहीं पुलिस और साइबर सेल को भी ऐसे मामलों की जांच कर यह पता लगाना होगा कि कहीं कोई व्यक्ति तकनीकी खामी का फायदा उठाकर गरीब चालकों को निशाना तो नहीं बना रहा।

जब्त मवेशियों को सुपुर्दगी देने के अधिकार पर हाईकोर्ट में सुनवाई, अहम फैसला जल्द

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने गोवंश की जब्ती और उनकी अंतरिम कस्टडी को लेकर एक कानूनी सवाल पर सुनवाई शुरू की है। हाईकोर्ट यह तय करने जा रहा है कि क्या गोवंश तस्करी या अवैध परिवहन के मामलों में दर्ज एफआईआर के बाद, ट्रायल आपराधिक अदालतों को जब्त मवेशियों को अंतरिम कस्टडी में सौंपने का अधिकार है, या विशेष कानून के चलते इस पर कोई पाबंदी है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने इस संवेदनशील और जटिल कानूनी विषय पर अदालत की सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना आफरीन अली को न्याय मित्र नियुक्त किया है। साथ ही राज्य के महाधिवक्ता को भी कोर्ट में उपस्थित रहकर इस मामले में विशेष सहयोग देने के लिए कहा है। मामले किनअगली सुनवाई15 जुलाई को होगी। हाई कोर्ट ने 18 मार्च 2021 को इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न के उत्तर के लिए मामले को लार्जर बेंच को रेफर किया था। यदि पुलिस गोवंश से जुड़े किसी मामले में मवेशियों को जब्त करती है, तो क्या मजिस्ट्रेट कोर्ट को उन मवेशियों को अंतरिम रूप से किसी को सौंपने का अधिकार है, या ‘छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004’ की विशेष धाराएं अदालत के इस अधिकार को पूरी तरह रोक देती हैं। 2 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मोहम्मद वासिम कुरैशी के अधिवक्ता ऋषिकांत महोबिया ने कोर्ट को बताया, मूल मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ चल रहा मुकदमा ट्रायल कोर्ट में पहले ही पूरा हो चुका है और उसे दोषमुक्त किया जा चुका है। इस लिहाज से व्यक्तिगत तौर पर इस याचिका में अब कुछ शेष नहीं बचा है। डिवीजन बेंच ने कहा, भले ही मुख्य आरोपी बरी हो चुका हो, लेकिन सिंगल जज द्वारा ‘लार्जर बेंच’ के सामने जो बुनियादी कानूनी सवाल भेजा गया है, उसका जवाब तय होना राज्य के अन्य सभी मामलों के लिए अत्यंत आवश्यक है, ताकि भविष्य के लिए स्थिति साफ हो सके। राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने डिवीजन बेंच के सामने पक्ष रखते हुए कहा कि यह विषय काफी महत्वपूर्ण कानूनी बारीकियों से जुड़ा है, इसलिए उन्हें इस केस का अध्ययन करने और अपनी तैयारी पूरी करने के लिए कुछ समय की आवश्यकता है। डिवीजन बेंच ने महाधिवक्ता के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है, न्याय मित्र नौशीना आफरीन अली को पूरी याचिका, संलग्न दस्तावेजों और अब तक की सभी ऑर्डर शीट्स का एक पूरा सेट तत्काल उपलब्ध कराया जाए।

18 साल बाद अहमदाबाद ब्लास्ट पीड़ितों को न्याय, 38 दोषियों की फांसी की सजा पर मुहर

अहमदाबाद साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को कायम रखा है. इसके साथ ही दोषियों की ओर से दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया गया. अदालत ने विस्फोटों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।  यह फैसला गुजरात हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने सुनाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस केस की सुनवाई के लिए विशेष बेंच का गठन किया था. मार्च 2025 से इस मामले की नियमित आधार पर सुनवाई चल रही थी. राज्य सरकार की ओर से फांसी की सजा की पुष्टि करने की याचिका और दोषियों द्वारा सजा के खिलाफ दाखिल अपीलों पर संयुक्त सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।  दरअसल, अहमदाबाद की विशेष अदालत ने 18 फरवरी 2022 को इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को फांसी और 11 अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. भारतीय कानून के अनुसार किसी भी निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा तब तक लागू नहीं की जा सकती, जब तक संबंधित हाईकोर्ट उसकी पुष्टि न कर दे. इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत यह मामला गुजरात हाईकोर्ट में विचाराधीन था।  इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है. धमाकों में मारे गए 56 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। यह पूरा मामला 26 जुलाई 2008 का है, जब अहमदाबाद में एक के बाद एक करीब 70 मिनट के भीतर कुल 21 बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 56 लोगों की जान चली गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. बम को साइकिल पर रखे टिफिन बॉक्स में छिपाया गया था।  20 धमाके, 59 लोगों की गई थी जान 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 49 मिनट के अंदर एक के बाद एक 20 धमाके हुए थे। इस सीरियल ब्लास्ट में 59 लोगों की जान चली गई थी। हमलावरों ने नरोदा, बापू नगर, सरखेज और हटकेश्वर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया था। अस्पतालों, बसों, सार्वजनिक स्थानों और बाजारों में बम लगाए थे। 38 आरोपियों को फांसी, 11 को उम्रकैद इस केस के 14 साल बाद 2022 में सेशन कोर्ट ने 38 आरोपियों को फांसी और 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने इस मामले को सबसे दुर्लभ बताया और कहा कि मौत की सजा देना उचित है। साथ ही, मारे गए और घायल लोगों के परिवारों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह पहला मामला है, जब किसी भी केस में एक साथ 38 आरोपियों को दोषी मानते हुए अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। राज्य सरकार ने भी दायर की थी याचिका इसके बाद, सभी दोषियों ने निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। वहीं, राज्य सरकार ने भी हाई कोर्ट के समक्ष मौत की सजा के लिए याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट क्यों पहुंचा मामला? कानून के मुताबिक, किसी भी अपराधी को फांसी देने के लिए हाई कोर्ट की मंजूरी मिलना जरूरी होता है, इसीलिए सजा पाए दोषियों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। दोषियों के वकीलों ने पुलिस की जांच, सबूतों और कबूलनामों पर सवाल उठाए। हमलावरों ने शहर की बसों, बाजारों और अस्पताल तक को निशाना बनाया था. धमाकों के बाद अहमदाबाद और सूरत से भी बम बरामद हुए थे. आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने इन धमाकों की जिम्मेदारी ली थी. बताया जाता है कि यह धमाके साल 2002 में हुए गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए किए गए थे।  इस मामले में सरकार ने 78 लोगों को आरोपी बनाकर 35 अलग-अलग केस दर्ज किए थे, जिनकी सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाई गई थी. करीब 14 साल की लंबी सुनवाई के बाद फरवरी 2022 में स्पेशल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था।  उस समय 49 दोषियों में से 38 को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा दी गई थी, जबकि सबूतों की कमी के चलते 28 लोगों को बरी कर दिया गया था. भारत के न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका था जब एक साथ 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।  इस मामले में स्पेशल कोर्ट में 1150 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे और 8 फरवरी 2022 को 6700 से ज्यादा पन्नों का फैसला सुनाया गया था. स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को दोषियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।     

सिया गोयल पहले से थी शादीशुदा! WhatsApp चैट से हुआ बड़ा खुलासा, जांच में नया मोड़

पुणे पुणे के लोहगढ़ किले से धक्का देकर केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ आया है। पुलिस जांच और डिजिटल सबूतों से खुलासा हुआ है कि मामले की मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर सिया गोयल ने सह-आरोपी चेतन चौधरी से गुपचुप तरीके से शादी रचा ली थी। पुलिस का मानना है कि यह शादी सगाई से महीनों पहले ही हो चुकी थी। परिवार से छिपाकर की थी 'सीक्रेट मैरिज' न्यूज18 मराठी की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आया है कि जांचकर्ताओं का मानना है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने करीब चार महीने पहले अपने-अपने परिवारों को बिना बताए गुपचुप शादी कर ली थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से रिकवर की गई वॉट्सऐप चैट्स को खंगाला। डिजिटल सबूतों से खुली साजिश की पोल जांचकर्ताओं ने मामले की तह तक जाने के लिए आरोपियों के पिछले 6 से 7 महीने के कॉल रिकॉर्ड्स, लोकेशन डेटा, वॉट्सऐप चैट और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री की गहन जांच की है। पुलिस का दावा है कि इस डिजिटल एक्टिविटी से साफ होता है कि दोनों ने अपनी शादी की बात परिवारों से छिपाकर रखी थी। पुलिस को संदेह है कि सीक्रेट मैरिज के बाद ही केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची गई। 14 जून को फेल हो गया था हत्या का पहला प्लान पुलिस के मुताबिक, केतन अग्रवाल की हत्या की पहली कोशिश 14 जून को की गई थी, लेकिन वह नाकाम रही। जांचकर्ताओं का दावा है कि सिया ऐन मौके पर डर गई और पीछे हट गई, जिसकी वजह से वह प्लान फेल हो गया था। पुलिस का कहना है कि इसके बाद दोनों आरोपियों के बीच कई मैसेज का आदान-प्रदान हुआ, जिसमें आगे की साजिश पर चर्चा की गई। वॉट्सऐप चैट में लिखा- 'तुम भी आ जाओ, मिलकर धक्का दे देंगे' पुलिस के हाथ एक ऐसी अहम वॉट्सऐप चैट लगी है, जिसने इस हत्याकांड की पूरी कहानी साफ कर दी है। रिकवर किए गए एक मैसेज में कथित तौर पर सिया ने चेतन से कहा कि वह अकेले इस काम को अंजाम देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है, इसलिए उसने चेतन को अपने साथ आने के लिए कहा। पुणे मर्डर केस जांचकर्ताओं के मुताबिक, सिया ने मैसेज में लिखा था: "मुझमें इसे करने की हिम्मत नहीं है, तुम भी आ जाओ- हम दोनों मिलकर उसे चट्टान से धक्का दे देंगे।" पुलिस का दावा है कि इस खौफनाक बातचीत के बाद 18 जून को कथित तौर पर दोनों ने मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या कर दी। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच लगातार जारी है और यह पूरा केस कोर्ट के विचाराधीन है।

5वीं और 8वीं की पुनः परीक्षा का रिजल्ट जारी, राज्य शिक्षा केंद्र ने घोषित किए परिणाम

राज्य शिक्षा केंद्र ने 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम किए घोषित 5वीं में 80% और 8वीं में 74 % से अधिक विद्यार्थी उत्तीर्ण सत्र 2025-26 में पांचवीं में कुल 98.89 और आठवीं में 98.19 % हुआ परीक्षा फल भोपाल मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग ने मंगलवार को कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए। विद्यार्थी व अभिभावक राज्य शिक्षा केन्द्र के परीक्षा पोर्टल पर परिणाम देख सकते हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 की पुन: परीक्षा में कक्षा 5वीं में 80.42 एवं कक्षा 8वीं में 74.16 % परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं, मुख्य वार्षिक परीक्षा और पुन: परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या को मिलाकर इस सत्र में कक्षा 5वीं का कुल परीक्षा परिणाम 98.89 एवं कक्षा 8वीं का कुल परीक्षा परिणाम 98.19 प्रतिशत रहा है। राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर संचालक डॉ. अरूण सिंह ने बताया कि विद्यार्थी, अभिभावक एवं शिक्षकगण उक्त परिणामों को राज्य शिक्षा केन्द्र के https://www.rskmp.in/result.aspx पर अपना रोल नम्बर डालकर देख सकते हैं। साथ ही शिक्षक, संस्था प्रमुख भी अपनी शाला का विद्यार्थीवार परिणाम इसी पोर्टल पर देख सकते हैं। गौरतलब है कि राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा 16 से 23 जून के बीच कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षाओं का आयोजन किया गया था। इसमें प्रदेश की शासकीय, अशासकीय शालाओं एवं पंजीकृत मदरसों के कक्षा 5वीं के 71, 548 तथा कक्षा 8वीं के 76, 274 विद्यार्थी सम्मिलित हुए थे। इन विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए प्रदेश में कुल 322 केन्द्र बनाए गए थे। 17, 000 से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं के द्वारा अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि पोर्टल पर दर्ज की गई थी। वहीं कक्षा पांचवीं में शासकीय स्कूलों के कुल 46, 665 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें 36, 217 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। मदरसा में 581 में से 352 विद्यार्थी पास हुए हैं, तो वहीं अशासकीय स्कूलों के 24, 302 विद्यार्थियों में से 20, 971 विद्यार्थी परीक्षा में पास हुए हैं। इसी प्रकार कक्षा 8वीं में शासकीय स्कूलों के कुल 56,738 विद्यार्थियों में से 40, 315 उत्तीर्ण हुए हैं। मदरसा के 423 में से 268 और अशासकीय विद्यालयों के 19, 113 में से 15,978 विद्यार्थी पास हुए हैं।