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Punjab में बड़ी नशा तस्करी का खुलासा, 14 किलो अफीम और Verna कार बरामद

तरनतारन. जिले के थाना वल्टोहा की पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति को 14 किलो 110 ग्राम अफीम, वरना कार और एक हजार रुपये की ड्रग मनी समेत गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे अदालत में पेश कर रिमांड हासिल किया है। जिले के एसएसपी सुरिंदर लांबा ने जानकारी देते हुए बताया कि थाना वल्टोहा के प्रभारी इंस्पेक्टर बलजिंदर सिंह पुलिस पार्टी के साथ गांव दासूवाल में एक स्कूल के नजदीक विशेष नाकाबंदी कर वाहनों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान उत्तराखंड नंबर लगी एक वरना कार को रुकने का इशारा किया गया। पुलिस के अनुसार कार चालक ने पूछताछ के दौरान अपनी पहचान गुरमीत सिंह उर्फ गीतू पुत्र अमरीक सिंह निवासी मरगिंदपुरा, जिला तरनतारन के रूप में बताई। पुलिस पार्टी ने जब कार की तलाशी ली तो उसमें से 14 किलो 110 ग्राम अफीम बरामद हुई। इसके अलावा पुलिस ने एक हजार रुपये की ड्रग मनी और कार भी कब्जे में ले ली। एसएसपी लांबा ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर थाना वल्टोहा में 1 सितंबर को मामला दर्ज किया गया। आरोपी को माननीय अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल किया गया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है।

बस्तर लौटे 50 पूर्व माओवादी, गढ़चिरौली में साथियों ने नम आंखों से दी विदाई

जगदलपुर. कभी घने जंगलों में AK-47 जैसे आधुनिक हथियारों के साथ घूमने वाले, कभी एक-दूसरे के लिए जान लेने और जान देने को तैयार रहने वाले माओवादी, आज जब एक-दूसरे से बिछड़े, तो आंखों से आंसू नहीं रुके। तस्वीर ऐसी थी जिसे देखकर शायद कोई भी ठिठक जाए जो लोग कभी बंदूक के साए में जिंदगी जीते थे, आज सामान्य जिंदगी की ओर लौटते हुए एक-दूसरे को गले लगाकर रोते नजर आए। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास का सिलसिला अब अगले चरण में पहुंच गया है। पिछले साल पूर्व माओवादी नेता वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। सुरक्षा कारणों से इन्हें गढ़चिरौली के पुलिस पुनर्वास केंद्र में रखा गया। यहां उनकी जिंदगी की दिशा बदलने की कोशिश की गई किसी को स्किल ट्रेनिंग दी गई, कई पूर्व माओवादियों के रिवर्स नसबंदी ऑपरेशन कराए गए और कुछ माओवादी जोड़ों ने नई जिंदगी की शुरुआत शादी के साथ की। अब उसी पुनर्वास प्रक्रिया के तहत इन्हें धीरे-धीरे उनके मूल गांव और जिलों में वापस भेजा जा रहा है। पहले चरण में 50 पूर्व माओवादियों को गढ़चिरौली से बस्तर के अलग-अलग जिलों में उनके गृहग्राम के लिए रवाना किया गया। लेकिन विदाई के वक्त जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरी कहानी का दूसरा चेहरा दिखा दिया। कभी जंगलों में हथियारों के साथ साथ चलने वाले ये लोग, अब एक-दूसरे से बिछड़ने के दर्द में गले मिलकर रो रहे थे। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया पर पूर्व माओवादी नेता जिनुगु नरसिम्हा रेड्डी उर्फ जम्पन्ना ने सवाल भी खड़े किए हैं। प्रेस नोट जारी कर जम्पन्ना ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को लंबे समय तक पुनर्वास केंद्र में पुलिस निगरानी में रखने के बजाय, आत्मसमर्पण के बाद जल्द से जल्द उनके घर भेजा जाना चाहिए, ताकि वे सामान्य जिंदगी में वापस लौट सकें। कुल मिलाकर जंगल से शुरू हुआ सफर अब गांव की ओर लौट रहा है फर्क सिर्फ इतना है कि कभी इन हाथों में हथियार हुआ करते थे, लेकिन आज वही हाथ विदाई के वक्त एक-दूसरे को कसकर पकड़कर यह कह रहे थे, अब जिंदगी की लड़ाई बंदूक से नहीं, सामान्य जिंदगी जीकर लड़नी है।

गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में 5 सितंबर को होगा भव्य समारोह

उत्कृष्ट योगदान देने के लिए शिक्षक दिवस पर प्रदेश के 81 अध्यापकों को सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में 5 सितंबर को होगा भव्य समारोह बेसिक शिक्षा के 61 और माध्यमिक शिक्षा के 15 शिक्षकों को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार, माध्यमिक के 5 शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार इनमें 33 शिक्षिकाएं (31 बेसिक और 2 माध्यमिक विद्यालयों की) हैं शामिल    पुरस्कार के लिए चयनित अध्यापकों को गोरखपुर में ससम्मान होटलों में ठहराने की व्यवस्था गोरखपुर,   शिक्षा के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण में भविष्य की पीढ़ियों को आकार देने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों की भूमिका शिक्षक दिवस पर स्वर्णिम अध्याय में दर्ज हो जाएगी। शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विद्यालयों का उचित प्रबंधन, नवाचार और विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करने वाले प्रदेश के कुल 81 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025 से सम्मानित करेंगे। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मानित करने का भव्य समारोह गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा। पुरस्कार के लिए चयनित प्रदेशभर के शिक्षकों को विशिष्ट अतिथि की तरह ससम्मान ठहराने की व्यवस्था होटलों में की गई है।  समाज के प्रति शिक्षक के समर्पण को प्रतिष्ठित करने वाले राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों का चयन किया गया है। इनमें कुल मिलाकर 33 शिक्षिकाएं (31 बेसिक और 2 माध्यमिक विद्यालयों की) शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिन शिक्षकों को चयनित किया गया है उनमें से 5 को ‘मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को अच्छे शिक्षण कार्य के लिए प्रोत्साहित करना है। साथ ही बेहतर ढंग से समाज में शिक्षा की अलख जगाने के उनके प्रयासों को और प्रभावी बनाना है। पुरस्कार राशि के रूप में मिलेंगे 25 हजार रुपये योगी सरकार, राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह के साथ ही पुरस्कार राशि के रूप में 25 हजार रुपये भी भेंट करेगी। इसके अलावा सम्मानित शिक्षकों को आजीवन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में प्रतिवर्ष 4000 किलोमीटर की निशुल्क यात्रा की सुविधा भी मिलेगी। राज्य स्तरीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की सीमा भी दो वर्ष बढ़ जाएगी।  बेसिक शिक्षा के इन शिक्षकों को दिया जाएगा राज्य अध्यापक पुरस्कार 1. संगीता शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय धनौली, अकोला, आगरा) 2. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौबारा, गजरौला, अमरोहा) 3. प्रीति मिश्रा (सहायक अध्यापक, पीएम उच्च विद्यालय बेलवा, पयागपुर, बहराइच) 4. सलमा खान (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय आदर्श, नगर क्षेत्र, बलरामपुर) 5. उर्मिला देवी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय खेमईपुर, भदोही) 6. रचना कपूर (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नंगली छोइया, हल्दौर, बिजनौर) 7. किरन देवी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अंबियापुर, बदायूं) 8. जूही मलिक (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय स्याना, बुलंदशहर) 9. उषा सिंह (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय सैदपुर, शहबादगंज, चंदौली) 10. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय अमानाबाद, फर्रुखाबाद) 11. अर्चना पांडेय (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट स्कूल पर्थला खंजरपुर, गौतमबुद्धनगर) 12. ज्योत्स्ना गोस्वामी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय ननकागढ़ी, राजापुर, गाजियाबाद) 13. शुचि त्यागी (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पिपलैडा, दहौलाना, हापुड़) 14. विजया अवस्थी (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय मंसूरनगर, पिहानी, हरदोई) 15. पल्लवी चतुर्वेदी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सासनी, हाथरस) 16. प्रीति श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पठाकरका, बंगरा, झांसी) 17. डॉ. सुमनलता यादव (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय कुंवरपुर बनवारी, छिबरामऊ, कन्नौज) 18. डॉ. कामायनी शर्मा (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय औरोताहरपुर, ककवन, कानपुर नगर) 19. सुमन कुशवाहा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर, नेवादा, कौशाम्बी) 20. प्रीति गुप्ता (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौकी बस स्टैंड, बिरधा, ललितपुर) 21. विनीता (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अमेठी उर्दू, गोसाईगंज, लखनऊ) 22. सीमा कुमारी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय महटौली, घिरोर, मैनपुरी) 23. प्रतिभा रानी भारती (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, हर्रा, सरूरपुर, मेरठ) 24. सुनीता रानी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसवां, भगतपुर, मुरादाबाद) 25. आरती शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रुस्तमगढ़, मुज्जफरनगर) 26. वैलेंटिना विक्टर (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अहमदनगर, नगर क्षेत्र, रामपुर) 27. अमिता टंडन (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय राजपुर रानी, श्रावस्ती) 28. मीरा सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़ईडीह, चोपन, सोनभद्र) 29. प्रीति भारती (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नेवलगंज, हसनगंज, उन्नाव) 30. नीलम राय (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मंडुआडीह, वाराणसी) 31. सय्यदा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरु, मरौरी, पीलीभीत) 32. सुनीत मित्र पांडेय (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गोकुला, नवाबगंज, गोंडा) 33. अमर सिंह (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय बहरावद, अतरौली, अलीगढ़) 34. राम मिलन गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च विद्यालय, नसीरपुर छितौना, जहांगीरगंज, अम्बेडकरनगर) 35. पंकज कुमार द्विवेदी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, ठेउंगा, सोहावल, अयोध्या) 36. प्रदीप कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरवपुर, कोयलसा, आजमगढ़) 37. अजीत कुमार श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, इब्राहिमाबाद, मुरली छपरा, बलिया) 38. राहुल कुमार शुक्ल (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बहुता, त्रिवेदीगंज, बाराबंकी) 39. हरिशंकर त्रिपाठी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गढ़चपा, मानिकपुर, चित्रकूट) 40. ओमवीर सिंह (प्रधानाध्यापक, पीएम उच्च प्राथमिक विद्यालय पिदौरा, मरेहरा, एटा) 41. वीरेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय ताखा, इटावा) 42. आनंद कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर, ऐरायां, फतेहपुर) 43. संतोष कुशवाहा (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय मनिहारी, गाजीपुर) 44. नीतिराज सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, चुनकी का डेरा, सुमेरपुर, हमीरपुर) 45. राजेश कुमार उपाध्याय (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बारीगांव, घुघली, महराजगंज) 46. संजय कुमार मिश्र (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय गरियांव, मुंगरा बादशाहपुर, जौनपुर) 47. विनीत कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अन्ता, रसूलाबाद, कानपुर देहात) 48. धनंजय प्रताप सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर लाला, कासगंज) 49. प्रमोद कुमार (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रतासिया, बेहजम, लखीमपुर खीरी) 50. नवीन कुमार त्रिपाठी (सहायक अध्यापक, पीएम कम्पोजिट विद्यालय उनवल प्रथम, बांसगांव, गोरखपुर) 51. ओमप्रकाश तिवारी (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय बिलखी, कबरई, महोबा) 52. अनिल कुमार मौर्य (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय दौलसेपुर, रानीपुर, मऊ) 53. दयानंद मिश्रा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सिद्धि, पहारी, मिर्जापुर) 54. डॉ. देवेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय बरना, प्रतापगढ़) 55. रामलखन मौर्या (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, सिरसा, प्रतापपुर, प्रयागराज) 56. बृजकिशोर (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय रसूलपुर, गुन्नौर, सम्भल) 57. अरुण कुमार गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय धनौरा, ददरौल, शाहजहांपुर) 58. दिनकर चौहान (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गंगेरू प्रथम, कांधला, शामली) 59. महेश कुमार (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बूड़ा, बर्डपुर, … Read more

GDP पर उठे सवाल तो World Bank ने दिया जवाब, बोले- कम FDI से भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ता बड़ा असर

 नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को लेकर बहस तेज हो गई है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 7.8% रही है. सरकार जहां इसे अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति का संकेत बता रही है, वहीं पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के आंकड़ों और इसकी गणना के तरीके पर सवाल उठाए हैं. इस बीच वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने GDP पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए तीखी टिप्पणी की है।  विवाद की बड़ी वजह GDP की नई सीरीज है. फरवरी 2026 में सरकार ने GDP की नई सीरीज जारी की थी, जिसमें बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया. इसके साथ आंकड़े जुटाने और उनकी गणना के तरीके में भी बदलाव किया गया. पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का कहना है कि नई सीरीज में पिछली तिमाहियों के आंकड़ों में बड़ा बदलाव आया है।  उन्होंने खास तौर पर जून 2025 की तिमाही के मौजूदा कीमतों वाले GDP आंकड़े में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी का मुद्दा उठाया है. सुभाष चंद्र गर्ग का तर्क है कि अगर पुराने आंकड़ों को आधार बनाया जाए तो जून 2026 की ग्रोथ का आंकड़ा काफी अलग दिखाई देगा और यह 2.6% के आसपास ठहरेगा. उनका यह दावा सरकार के 7.8% ग्रोथ के दावे के एकदम विपरीत है।  कांग्रेस भी सरकार पर उठा रही सवाल कांग्रेस भी GDP के आंकड़ों को लेकर सरकार पर निशाना साध रही है. पार्टी का आरोप है कि नई GDP सीरीज और आंकड़ों में बदलाव के जरिए अर्थव्यवस्था की तस्वीर को जरूरत से ज्यादा मजबूत दिखाया जा रहा है. कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ GDP ग्रोथ बढ़ने से आम लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं हो जाती. रोजगार, कमाई, खपत और लोगों की जेब में बचने वाली रकम जैसे मुद्दों को भी देखना जरूरी है।  नीलकंठ मिश्रा ने दावों को बताया 'अल्पज्ञान' इस पूरे विवाद के बीच वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर GDP के आंकड़ों का बचाव किया. उन्होंने GDP की नई सीरीज पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें 'अल्पज्ञानी और बेहद गलत दावों' को देखकर हैरानी होती है. उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और कांग्रेस पार्टी की ओर माना जा रहा है।  नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि GDP के आंकड़ों में हुए बदलाव को समझे बिना पुराने और नए आंकड़ों की तुलना करना सही नहीं है. उनके मुताबिक, नई सीरीज में आंकड़े जुटाने और अर्थव्यवस्था की वास्तविक गतिविधियों को मापने का तरीका बेहतर किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि गलत जानकारी कई बार सही जानकारी से ज्यादा तेजी से फैलती है. इसलिए सही तथ्यों को बार-बार सामने रखना जरूरी है।  सिर्फ GDP नहीं, ये आंकड़े भी सकारात्मक नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति समझने के लिए सिर्फ GDP का आंकड़ा देखना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने अगस्त के कई आंकड़ों का हवाला दिया. उनके मुताबिक, कार और SUV की बिक्री में करीब 35% की बढ़ोतरी हुई है. दोपहिया वाहनों की बिक्री भी 20% से ज्यादा बढ़ी है. निर्यात में करीब 9% की बढ़ोतरी हुई है. कमर्शियल वाहनों की बिक्री में तो करीब 40% की तेजी देखने को मिली है. वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा के मुताबिक, यह कारोबार और निर्माण गतिविधियों में मजबूती का संकेत है।  कर्ज और निवेश में भी दिख रहा सुधार नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि बैंक लेंडिंग की ग्रोथ भी उम्मीद से बेहतर रही है. उनके मुताबिक, पहले कर्ज की धीमी रफ्तार की एक बड़ी वजह बैंकों की तरफ से कर्ज देने में कमजोरी थी, लेकिन अब इसमें सुधार दिखाई दे रहा है. टैक्स कलेक्शन में सुधार और निर्माण क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में निवेश की गतिविधियां भी जारी हैं. निर्माण क्षेत्र के सभी संकेतक बेहद मजबूत हैं. उनका मानना है कि अब उन लोगों की संख्या बेहद कम हो जानी चाहिए जो लगातार निजी क्षेत्र के निवेश के कमजोर होने का रोना रोते हैं, क्योंकि देश में निवेश के स्पष्ट और पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं।  आम आदमी की कमाई अब भी चुनौती हालांकि, नीलकंठ मिश्रा ने यह भी माना कि अर्थव्यवस्था में अभी कुछ 'स्लैक' यानी कमियां मौजूद हैं. इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था अभी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रही है. उन्होंने वास्तविक वेतन यानी महंगाई को हटाने के बाद बचने वाली कमाई में धीमी बढ़ोतरी को इसका एक संकेत बताया. उनके मुताबिक, इस स्थिति को पूरी तरह बदलने में कुछ तिमाहियां लग सकती हैं. उन्होंने कहा कि इन कमियों को पूरी तरह से दूर करने और लेबर मार्केट को मजबूत करने के लिए देश को लगातार कई तिमाहियों तक औसत से अधिक की आर्थिक विकास दर बनाए रखनी होगी, ताकि मार्केट पूरी तरह से चुस्त हो सके और भविष्य में महंगाई के दबावों को नियंत्रित रखा जा सके।  7.5% तक पहुंच सकती है भारत की ग्रोथ भविष्य की अर्थव्यवस्था को लेकर वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने काफी सकारात्मक रुख दिखाया है. उनका कहना है कि देश पर बजट का दबाव अब कम हो रहा है और मौद्रिक नीतियां भी अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल बन रही हैं. इसका असर GDP ग्रोथ पर भी दिख रहा है. उनके मुताबिक, आने वाले समय में भारत की औसत GDP ग्रोथ 7% से ऊपर रह सकती है. यहां तक कि अगर सरकार की बजट और मौद्रिक नीतियां सामान्य यानी तटस्थ भी रहती हैं, तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 7.5% की ग्रोथ हासिल कर सकती है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में महंगाई का दबाव फिर बढ़ सकता है। 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से बाजार में आएगी रौनक, देशभर में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक व्यापार का अनुमान

नई दिल्ली  देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर है। बड़े पैमाने पर लोग खरीदारी कर रहे हैं। घरों और मंदिरों को सजाया है। जन्माष्टमी सिर्फ आस्था का ही त्योहार नहीं है, बल्कि भारत की 'सनातन अर्थव्यवस्था' का एक जीता-जागता प्रतीक है। इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने की उम्मीद की जा रही है। रक्षाबंधन के दौरान हुए जबरदस्त व्यापार के बाद इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने का अनुमान है।  कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) की ओर से यह अनुमान अलग-अलग सेक्टर में होने वाली संभावित बिक्री, घर और धार्मिक कामों के लिए खरीदारी, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर होने वाले खर्च, देशभर में बड़े पैमाने पर होने वाले जश्न और धार्मिक पर्यटन से जुड़े खर्चों पर आधारित है। सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सिर्फ भक्ति और आस्था का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों का एक अद्भुत संगम भी है। जन्माष्टमी एक अनोखा त्योहार है जहां आस्था सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों में बदल जाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "वोकल फॉर लोकल" (स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने) के आह्वान का असर देश भर के त्योहारों वाले बाजारों में साफ दिख रहा है। भारतीय उत्पादों को ज्यादा प्राथमिकता मिल रही है। जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को काफी बढ़ावा मिल रहा है। पूजा के सामान से लेकर सजावट और धार्मिक उत्पादों तक, जन्माष्टमी के दौरान स्वदेशी सामान की भारी मांग रहती है। प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ी हर रस्म और जश्न लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। किसान, डेयरी उत्पादक, फूल उगाने वाले, मिठाई बनाने वाले, कपड़े के व्यापारी, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, होटल और रेस्टोरेंट के मालिक और कई तरह की सेवाएं देने वाले लोग इस त्योहार से सीधे या परोक्ष रूप से फायदा उठाते हैं। सीएआईटी के अनुसार, 2024 में जन्माष्टमी के दौरान व्यापार लगभग 25 हजार करोड़ रुपए था और 2025 में यह बढ़कर लगभग 30 हजार करोड़ रुपए हो गया। इस वर्ष, ग्राहकों की ज्यादा मांग, सामान और सेवाओं की कीमतों में बदलाव, बढ़ते सामाजिक उत्सव, धार्मिक पर्यटन में बढ़ोतरी, और मॉडर्न रिटेल व डिजिटल कॉमर्स के विकास के कारण, व्यापार में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि होने और इसके 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होने की उम्मीद है। प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि इस साल जिन उत्पादों की मांग खास तौर पर ज्यादा है, उनमें माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद, मिठाइयां, फल, सूखे मेवे, पूजा का सामान, फूलों की मालाएं, सजावटी तोरण, झूले, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मुकुट, बांसुरी, मोर पंख, आभूषण और त्योहार के खास कपड़े शामिल हैं। खंडेलवाल की ओर से इस बात पर जोर दिया गया है कि भारतीय त्योहारों को सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन मानना ​​उनके असली महत्व को कम करके आंकना होगा। दिवाली, होली, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, करवा चौथ, छठ पूजा और कई अन्य त्योहार लाखों व्यापारियों, कारीगरों, शिल्पकारों, किसानों, महिला उद्यमियों, स्वरोजगार करने वाले लोगों और सेवा प्रदाताओं के लिए आर्थिक अवसरों का एक बड़ा नेटवर्क बनाते हैं। जन्‍माष्‍टमी पर कहां कितना खर्च करेंगे लोग?  कैट के आकलन के अनुसार जन्माष्टमी से जुड़े व्यापार में कई चीजों की हिस्‍सेदारी रहने वाली है. खंडेलवाल ने बताया कि इस वर्ष बाजारों में माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों, मिठाइयों, फलों, सूखे मेवों, पूजा सामग्री, फूल-मालाओं, बंदनवार, झूलों, लड्डू गोपाल की मूर्तियों, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, आभूषणों और विशेष परिधानों की मांग विशेष रूप से बढ़ी हुई है।  मिठाई, माखन-मिश्री और डेयरी उत्पाद पर 20% तो पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत और पूजन किट पर 10% खर्च कर सकते हैं. वहीं फूल, मालाएं और सजावट सामग्री पर 12%, पारंपरिक परिधान और वस्त्र पर 10%, फल, सूखे मेवे और प्रसाद सामग्री पर 10% खर्च किया जा सकता है. लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले और श्रृंगार सामग्री पर 8%, उपहार, खिलौने और घरेलू सजावटी सामग्री पर 5%, धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं पर 15% और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं पर 10% खर्च कर सकते हैं।  राष्‍ट्रीय महामंत्री बोले- वोकल फॉर लोकल की ताकत  कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल श्रद्धा और भक्ति का पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपरा, सामाजिक सहभागिता और आर्थिक गतिविधियों का अद्भुत संगम भी है. जन्माष्टमी ऐसा पर्व है, जिसमें आस्था सीधे आर्थिक गतिविधियों में परिवर्तित होती दिखाई देती है।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “वोकल फॉर लोकल” के आह्वान का प्रभाव त्योहारों के बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. अब उपभोक्ता बड़ी संख्या में भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को व्यापक लाभ मिल रहा है।  किसान, फल-फूल विक्रेता से होटल-रेस्‍तरां व्‍यवसाई तक को लाभ   जन्माष्टमी के अवसर पर पूजा सामग्री से लेकर सजावटी वस्तुओं और धार्मिक उत्पादों तक अधिकांश मांग स्वदेशी वस्तुओं की है. खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ा प्रत्येक अनुष्ठान और आयोजन किसी न किसी रूप में लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है. किसान, दुग्ध उत्पादक, फूल उत्पादक, मिठाई कारोबारी, वस्त्र विक्रेता, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्टर, होटल व्यवसायी, रेस्तरां संचालक और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग इस पर्व से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होते हैं।  2024 में 25,000 करोड़, 2025 में 30,000 करोड़ का कारोबार  कैट के अनुसार वर्ष 2024 में जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर में लगभग ₹25,000 करोड़ का व्यापार हुआ था, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग ₹30,000 करोड़ तक पहुंच गया. इस वर्ष उपभोक्ता मांग में वृद्धि, वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन, त्योहारों के बढ़ते सामाजिक विस्तार, धार्मिक पर्यटन में वृद्धि और आधुनिक रिटेल एवं डिजिटल खरीदारी के विस्तार को देखते हुए लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि के साथ व्यापार ₹40,000 करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है।  सनातन अर्थव्‍यवस्‍था की ताकत  उन्‍होंने कहा कि भारत के त्योहारों को … Read more

अभिनंदन वर्धमान की नई पारी शुरू, IAF से रिटायरमेंट के बाद FLY91 से जुड़े

नई दिल्ली भारतीय वायु सेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने इंडियन एयरफोर्स छोड़ गोवा की एक प्राइवेट कंपनी जॉइन कर ली है. वह गोवा की प्राइवेट एयरलाइन में कमर्शियल पायलट बन गए हैं.  साल 2019 में पाकिस्तान के फाइटर जेट एफ-16 को मार गिराने वाले भारतीय वायुसेना के पूर्व ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान अब क्षेत्रीय एयरलाइन FLY91 के साथ पायलट के रूप में जुड़ गए हैं. ये जानकारी बुधवार को सूत्रों के हवाले से सामने आई. ‘वीर चक्र' से सम्मानित वर्धमान अगस्त में गोवा स्थित एयरलाइन से बतौर पायलट जुड़े थे. अभिनंदन ने वायुसेना क्यों छोड़ी, इससे जुड़ी जानकारी अब तक सामने नहीं आई है।  पाकिस्तान के F-16 को मार गिराया अभिनंदन वर्धमान साल 2019 में पाकिस्तान के साथ हवाई मुठभेड़ के बाद सुर्खियों में आए थे. उन्होंने उस हवाई लड़ाई में एक पाकिस्तानी लड़ाकू विमान को मार गिराया था और इसके बाद पाकिस्तान में तीन दिन तक हिरासत में भी रहे थे. हालांकि बाद में उनको भारत वापस भेज दिया गया था।  दरअसल, अभिनंदन वर्धमान साल 2019 में पाकिस्तानी वायुसेना के साथ हुए मुठभेड़ के बाद चर्चा में आए थे। फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी 2019 को पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की थी। इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत पर हमला करना चाहा। 27 फरवरी को पाकिस्तान ने अपने लड़ाकू विमान हमले के लिए भेजे। हालांकि, भारतीय वायुसेना ने उन्हें खदेड़ दिया। इस मुठभेड़ के दौरान अभिनंदन ने अपने मिग-21 लड़ाकू विमान से पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट को मार गिराया था। हालांकि, अभिनंदन का विमान भी क्रैश हो गया था। इसके बाद पाकिस्तान ने अभिनंदन को हिरासत में ले लिया था। लेकिन भारत सरकार के दवाब के कारण 3 दिन बाद पाकिस्तान ने अभिनंदन को छोड़ दिया। अभिनंदन को मिला था वीर चक्र साल 2021 में अभिनंदन को वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। आपको बता दें कि वीर चक्र युद्धकाल में प्रदान किया जाने वाला देश का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। अभिनंदन को 'कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण' का प्रदर्शन करने के लिए ये सम्मान दिया गया था। एयरफोर्स से करीब एक लाख पेंशन मिलेगी ग्रुप कैप्टन अभिनंदन ने वायुसेना में 20 साल की सर्विस की है। पूर्व सैनिक कल्याण विभाग के मुताबिक, ग्रुप कैप्टन का मूल वेतन ₹1.40–2.18 लाख और एमएसपी ₹15,500 होता है। भत्तों को मिलाएं तो यह ज्यादा भी हो सकता है। इस हिसाब से उन्हें करीब ₹88–98 हजार महीना पेंशन मिल सकती है। इसके अलावा महंगाई राहत भी मिलती है। अभिनंदन की वास्तविक पेंशन उनके अंतिम वेतन और सेवा रिकॉर्ड से तय होगी। फ्लाई-91 एयरलाइन में 10 लाख से ज्यादा सैलरी हो सकती है पायलट ट्रेनिंग कराने वाले एजुकेशन प्लेटफॉर्म पायलट शाला के मुताबिक, प्राइवेट कंपनी में पायलट को हर महीने ₹5 लाख से ₹8 लाख सैलरी मिलती है। सीनियर कैप्टन बनने पर यह ₹10 लाख+ तक हो सकती है। लेकिन अभिनंदन वायुसेना के पूर्व पायलट हैं इसलिए यह सैलरी और भी ज्यादा हो सकती है। वे ATR 72-600 विमान उड़ाएंगे। प्राइवेट सेक्टर में बेस सैलरी के अलावा प्रति घंटे उड़ान के हिसाब से मिलने वाला फ्लाइंग अलाउंस, लेओवर पे और इंटरनेशनल बोनस जैसे फायदे भी मिलते हैं। पुलवामा हमले के बाद भारत ने बालाकोट एयरस्ट्राइक की 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में CRPF के काफिले पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें 40 जवान शहीद हुए थे। इसके जवाब में भारत ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी। इसके अगले दिन कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान LoC की ओर बढ़ा। उस समय अभिनंदन श्रीनगर एयरफोर्स स्टेशन पर MiG-21 बाइसन स्क्वाड्रन में तैनात थे। वह ऑपरेशनल रेडीनेस ड्यूटी पर थे। MiG-21 पर हमले के बाद पैराशूट से पाकिस्तान में उतरे अभिनंदन पाकिस्तानी विमानों का पता चलने के करीब पांच मिनट बाद अभिनंदन को उन्हें रोकने के लिए भेजा गया। आधिकारिक प्रशस्ति-पत्र के मुताबिक, उन्होंने पीछे हट रहे एक दुश्मन विमान का पीछा किया और हवाई लड़ाई में उसे मार गिराया। हवाई लड़ाई के दौरान पाकिस्तानी विमान ने कई बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलें दागीं। इनमें से एक मिसाइल अभिनंदन के विमान से टकराई। विमान को नुकसान पहुंचने के बाद अभिनंदन ने इजेक्ट किया। वह पैराशूट से पाकिस्तान के इलाके में उतरे, जहां उन्हें पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने पकड़ लिया। भारत के दबाव में पाकिस्तान ने 60 घंटे में छोड़ा अभिनंदन की गिरफ्तारी के बाद भारत ने राजनयिक स्तर पर तत्काल विरोध दर्ज कराया और उनकी सुरक्षित व जल्द वापसी की मांग की। घायल हालत में उनका वीडियो जारी करने पर भी भारत ने पाकिस्तान से आपत्ति जताई। इस बीच दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव चरम पर था। 28 फरवरी को पाकिस्तान ने अभिनंदन को लौटाने का ऐलान किया और 1 मार्च को करीब 60 घंटे बाद वे वाघा-अटारी सीमा से भारत लौट आए। अभिनंदन को साल 2021 में ‘वीर चक्र' से सम्मानित किया गया था, जो युद्धकाल में दिया जाने वाला भारत का तीसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है. पुरस्कार के प्रशस्ति पत्र में हवाई मुठभेड़ के दौरान ‘कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण' प्रदर्शित करने के लिए उन्हें सम्मानित किए जाने का जिक्र किया गया था।  गोवा की एयरलाइन FLY91 से जुड़े अभिनंदन वर्धमान एफएलवाई91 के प्रवक्ता ने इस संबंध में टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी निजी मामला है. एयरलाइन में वर्धमान की भूमिका के बारे में अन्य जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है. बता दें कि गोवा स्थित एफएलवाई91 ने मार्च, 2024 में परिचालन शुरू किया था. इसके बेड़े में फिलहाल छह एटीआर 72-600 विमान हैं. इसके दो परिचालन केंद्र गोवा और हैदराबाद में हैं।  अभिनंदन को ट्रेनिंग लेनी होगी, 22 साल काम कर सकते हैं एयरफोर्स से रिटायर पायलट DGCA के नियमों के तहत जरूरी सिविल पायलट लाइसेंस, ट्रेनिंग और मेडिकल फिटनेस पूरी कर एयरलाइन में काम कर सकते हैं। हालांकि वे सीधे एयरबस या बोइंग नहीं उड़ा सकते, संबंधित विमान की टाइप रेटिंग और ट्रेनिंग जरूरी होती है। भारत में कमर्शियल एयर ट्रांसपोर्ट के पायलट की अधिकतम उम्र 65 साल है। 60-65 साल की उम्र में मल्टी-क्रू ऑपरेशन के तहत साथ उड़ने वाला दूसरा पायलट 60 साल से कम उम्र का होना चाहिए। इसके … Read more

2027 वर्ल्ड कप की तैयारी में जुटा BCCI, साउथ अफ्रीका में टीम इंडिया खेलेगी 4-6 वनडे; तैयार होगा बड़ा रोडमैप

 नई दिल्ली टीम इंडिया  वनडे वर्ल्ड कप 2027 से पहले साउथ अफ्रीका में वनडे सीरीज खेल सकती है. BCCI और CSA के बीच 4 से 6 मैचों की सीरीज को लेकर बातचीत चल रही है. टीम मैनेजमेंट ने अफ्रीकी परिस्थितियों में गेम टाइम मांगा है. नई FTP अभी तैयार नहीं है, इसलिए वर्ल्ड कप से ठीक पहले इस सीरीज के आयोजन की संभावना बनी हुई है।  भारतीय क्रिकेट टीम 2027 में होने जा रहे वनडे वर्ल्ड कप से पहले साउथ अफ्रीका का दौरा कर सकती है, यह दौरान वनडे वर्ल्ड कप के ल‍िहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।  टीम इंडिया के पास 2027 वनडे वर्ल्ड कप से पहले साउथ अफ्रीका की परिस्थितियों में खुद को ढालने का मौका मिल सकता है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और क्रिकेट साउथ अफ्रीका (CSA) के बीच वर्ल्ड कप से ठीक पहले एक वनडे सीरीज करवाने लेकर बातचीत चल रही है. टीम मैनेजमेंट ने खुद इस तरह की सीरीज की मांग की है।  दरअसल, 2027 का वनडे वर्ल्ड कप अक्टूबर-नवंबर की विंडो में साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाना है. ऐसे में भारतीय टीम मैनेजमेंट चाहता है कि विश्व कप शुरू होने से पहले टीम को अफ्रीकी परिस्थितियों में पर्याप्त मैच खेलने का मौका मिले।  कितने मैचों की हो सकती है सीरीज? मौजूदा बातचीत के मुताबिक भारत और साउथ अफ्रीका के बीच 4 से 6 वनडे मैचों की सीरीज कराए जाने पर विचार हो रहा है. अभी इसका  शेड्यूल या मैचों की  संख्या तय नहीं हुई है।  इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय टीम मैनेजमेंट के अनुरोध के बाद BCCI ने CSA से संपर्क किया है. मकसद साफ है- वर्ल्ड कप से पहले खिलाड़ियों को अफ्रीकी परिस्थितियों में ज्यादा से ज्यादा गेम टाइम देना और टीम को वहां के हालात के लिए तैयार करना।  यानी यह सिर्फ एक सामान्य द्विपक्षीय सीरीज नहीं होगी. टीम इंडिया इसे वर्ल्ड कप की तैयारी के हिस्से के तौर पर देख सकती है।  अफ्रीका में खेलने का फायदा क्या होगा? वनडे वर्ल्ड कप के दौरान टीमों को दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियों का सामना करना होगा. ऐसे में वहां जाकर खेलने से भारतीय खिलाड़ियों को पिच, उछाल, मौसम और तेज गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाजी जैसे पहलुओं को समझने का मौका मिलेगा।  खास तौर पर वर्ल्ड कप से ठीक पहले सीरीज होने का फायदा यह होगा कि खिलाड़ी परिस्थितियों के साथ जल्दी तालमेल बिठा सकेंगे. यही वजह है कि टीम मैनेजमेंट ने अफ्रीका में मैच खेलने की जरूरत BCCI के सामने रखी है।  रिपोर्ट के मुताबिक, नया फ्यूचर  टूर प्रोग्राम (FTP)अभी तैयार नहीं हुई है. ऐसे में वर्ल्ड कप से ठीक पहले इस सीरीज को शेड्यूल करने में फिलहाल कोई बड़ी अड़चन नहीं दिख रही है।  मौजूदा FTP में क्यों नहीं है यह दौरा? 2023-27 के मौजूदा FTP में भारत और साउथ अफ्रीका के बीच वर्ल्ड कप से पहले ऐसी कोई वनडे सीरीज निर्धारित नहीं है. मौजूदा FTP के तहत भारत के द्विपक्षीय कार्यक्रम लगभग मार्च 2027 तक चलते हैं।  इसके बाद 2027 वर्ल्ड कप अक्टूबर-नवंबर में होना है. इस लंबे अंतराल में साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज फिट करने की गुंजाइश बन सकती है. नई FTP अभी तय नहीं हुई है, इसलिए BCCI और CSA के पास शेड्यूल  लेकर बदलाव की जगह मौजूद है।  भारत के 2026-27 के घरेलू कार्यक्रम में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन वनडे, न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच वनडे और फिर श्रीलंका तथा जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन-तीन वनडे शामिल हैं. इसके अलावा अफगानिस्तान, वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड और श्रीलंका के खिलाफ T20I मुकाबले भी हैं।  इसके बाद भारत को न्यूजीलैंड में टेस्ट सीरीज और घर पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी भी खेलनी है. इतना बिजी शेड्यूल होने की वजह से खिलाड़ियों के वर्कलोड और फिटनेस को लेकर भी BCCI चिंतित है।  2023 में भी अफ्रीका में जीती थी ODI सीरीज भारत ने आखिरी बार साउथ अफ्रीका में वनडे सीरीज दिसंबर 2023 में खेली थी. उस दौरे पर भारतीय टीम ने तीन मैचों की सीरीज 2-1 से अपने नाम की थी. जोहान‍िसबर्ग में खेले गए पहले वनडे में भारत ने साउथ अफ्रीका को 116 रन पर समेटकर 8 विकेट से जीत दर्ज की थी. दूसरे वनडे में साउथ अफ्रीका ने वापसी करते हुए 8 विकेट से मुकाबला जीता. इसके बाद पार्ल में तीसरे वनडे में भारत ने 78 रन से जीत हासिल कर सीरीज अपने नाम कर ली।  इस सीरीज में संजू सैमसन ने निर्णायक तीसरे वनडे में शतक लगाया था, जबकि अर्शदीप सिंह ने सीरीज में शानदार गेंदबाजी करते हुए 10 विकेट हासिल किए थे. साई सुदर्शन ने भी उस सीरीज में प्रभावित किया था और तीन मैचों में 127 रन बनाए थे।  भारत ने इसके बाद नवंबर 2024 में साउथ अफ्रीका का T20I दौरा जरूर किया, लेकिन मौजूदा FTP में वर्ल्ड कप को-होस्ट के खिलाफ कोई वनडे सीरीज नहीं खेली है।  फिलहाल साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज की तारीखों या मैचों की संख्या पर अंतिम मुहर नहीं लगी है. लेकिन अगर BCCI और CSA के बीच बात बनती है, तो वर्ल्ड कप शुरू होने से ठीक पहले अफ्रीकी धरती पर टीम इंडिया की यह सीरीज उसकी तैयारियों के लिए बड़ा बूस्टर साबित हो सकती है। 

छह साल में भी पूरा नहीं हुआ पुल का निर्माण, जोखिम उठाकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे

रायपुर. गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड में देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर बन रहा करीब 300 मीटर लंबा पुल लगभग छह वर्षों से अधूरा पड़ा है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर अधूरे पुल के पिलर से लगी करीब 20 फीट ऊंची लोहे की सीढ़ी के सहारे नदी पार करनी पड़ रही है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी के अध्यक्ष इदरीस गांधी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। गांधी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि पुल का निर्माण पूरा होने तक बच्चों के लिए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाए। अधूरे पुल पर निकले लोहे के सरिए, ऊंची और फिसलन भरी सीढ़ी तथा नीचे बहती तेज नदी के कारण बच्चों की आवाजाही बेहद जोखिमपूर्ण बनी हुई है। किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को पहले ही प्रभावी कदम उठाना चाहिए। इदरीस गांधी ने पुल निर्माण को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा उनकी जान की कीमत पर नहीं हो सकती। इस पूरे मामले के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह केवल स्थानीय समस्या नहीं रह गई है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और क्षेत्र के विकास से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है।

चाइना डोर बनी जानलेवा, लड़की की गर्दन पर 10 इंच लंबा और गहरा घाव

लुधियाना. प्रशासनिक पाबंदी और तमाम दावों के बावजूद इंसानी जिंदगियों के लिए काल बनी 'चाइना डोर' की अवैध बिक्री और उपयोग थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिमलापुरी इलाके में स्थित व्यस्त क्वालिटी चौक के नजदीक एक और दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है, जहां काम खत्म कर घर लौट रही 22 वर्षीय कंप्यूटर ऑपरेटर युवती के गले में अचानक चाइना डोर उलझ गई। तेज धार वाली इस खूनी डोर से युवती की गर्दन पर करीब 10 इंच लंबा और आधा इंच गहरा कट लग गया, जिससे वह बुरी तरह लहूलुहान हो गई। राहगीरों की तत्परता से युवती को तुरंत सिविल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने समय रहते इलाज कर उसकी जान बचा ली। जानकारी देते हुए मुस्कान (22) ने सिविल अस्पताल में खौफनाक मंजर बयां करते हुए बताया कि वह एक निजी दफ्तर में कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है। बुधवार शाम को वह अपना रोजाना का काम खत्म कर घर लौट रही थी। जैसे ही वह शिमलापुरी के क्वालिटी चौक के पास पहुंची, रास्ते में हवा में लटकती हुई चाइना डोर अचानक उसके गले में आ फंसी।मुस्कान ने बताया कि इससे पहले कि वह कुछ समझ पाती या हाथ से डोर को हटाने का प्रयास करती, धारदार डोर ने उसकी गर्दन को चीर दिया। गर्दन कटते ही खून का फव्वारा फूट पड़ा और वह दर्द से चीख उठी। सड़क पर युवती को लहूलुहान हालत में तड़पता देख आसपास मौजूद राहगीरों और दुकानदारों ने तुरंत इंसानियत दिखाते हुए उसे संभाला और बिना देर किए सिविल अस्पताल पहुंचाया। आपातकालीन वार्ड में तैनात डॉक्टरों ने तुरंत खून का बहाव रोकते हुए जख्म पर टांके लगाए और मरहम-पट्टी की। डॉक्टरों के मुताबिक, गनीमत यह रही कि डोर सांस की नली या मुख्य नस (कैरोटिड आर्टरी) तक नहीं पहुंची, जिससे एक बड़ा जानी नुकसान टल गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने युवती को घर भेजते हुए मुकम्मल आराम की सलाह दी है। इस दिल दहला देने वाले हादसे ने एक बार फिर शहर में पुलिस व प्रशासन की मुस्तैदी पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। प्रशासन कागजों में भले ही चाइना डोर की बिक्री और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध के दावे करता रहे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि महानगर के कई अंदरूनी इलाकों में यह जानलेवा डोर बेखौफ होकर बेची और उड़ाई जा रही है। 'राहगीरों के लिए मौत का फंदा बनी डोर, तुरंत लगे पूर्ण रोक' हादसे के बाद गहरा सदमा झेल रही मुस्कान ने कड़ा रोष जाहिर करते हुए कहा कि सड़कों पर चलने वाले बेकसूर राहगीरों के लिए यह डोर साक्षात मौत का फंदा बन चुकी है। उसने जिला प्रशासन और पुलिस कमिश्नर से हाथ जोड़कर अपील की है कि चाइना डोर बेचने और इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सिर्फ औपचारिकता न की जाए, बल्कि कड़े गैर-जमानती मुकदमों के तहत ठोस कार्रवाई कर खूनी कारोबार को जड़ से खत्म किया जाए, ताकि अन्य बेकसूर की जिंदगी इस तरह दांव पर न लगे। 

Patiala में नशे की हालत में लड़की का Video वायरल, हरकत में आई पुलिस

पटियाला. पटियाला के लकड़ मंडी इलाके की एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर एक लड़की बेसुध या बेहोशी की हालत में दिखाई दे रही है। वीडियो सामने आने के बाद दावा किया जा रहा है कि लड़की नशे की हालत में थी। इस वायरल वीडियो को लेकर पटियाला पुलिस की ओर से भी स्पष्टीकरण जारी किया गया है। पुलिस के मुताबिक, जिस स्थान की यह वीडियो बताई जा रही है, वहां पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की, लेकिन उस समय वहां कोई भी लड़की मौजूद नहीं मिली। पुलिस अब वायरल वीडियो में दिखाई दे रही लड़की की तलाश कर रही है। पुलिस का कहना है कि यदि लड़की की पहचान कर उसे ढूंढ लिया जाता है तो उसका मेडिकल टेस्ट करवाया जाएगा। अगर जांच के दौरान उसके नशे की हालत में होने की पुष्टि होती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान यदि कोई अन्य तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर भी उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल वायरल वीडियो में दिखाई दे रही लड़की के नशे की हालत में होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि वायरल वीडियो के पीछे वास्तविक मामला क्या है।