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Delhi Holiday: BRICS समिट के कारण 11 सितंबर को सरकारी कार्यालयों में अवकाश, जानें क्या-क्या रहेगा बंद

नई दिल्ली देश की राजधानी दिल्ली में होने जा रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर दिल्ली सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने 11 सितंबर 2026, शुक्रवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. इस फैसले से दिल्ली के लोगों को लगातार तीन दिनों का लंबा वीकेंड मिलने की संभावना है. सरकार का कहना है कि सम्मेलन के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।  सभी सरकारी कार्यालयों में रहेगा अवकाश दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग (को-ऑर्डिनेशन ब्रांच) की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार उपराज्यपाल ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सभी सरकारी कार्यालयों, स्वायत्त निकायों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में 11 सितंबर को अवकाश घोषित किया है. इस दिन इन संस्थानों में नियमित कामकाज नहीं होगा।  BRICS सम्मेलन के कारण लिया गया निर्णय सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि BRICS शिखर सम्मेलन के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए यह अवकाश घोषित किया गया है. सम्मेलन में कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।  ऐसे में राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और प्रशासनिक तैयारियों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सम्मेलन के दौरान दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. सुरक्षा एजेंसियां बड़े स्तर पर तैनात रहेंगी और कुछ मार्गों पर विशेष प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं. इस वजह से आम लोगों को यात्रा की योजना पहले से बनाकर चलने की सलाह दी जा रही है। 

Hanuman Ansh में ग्वालियर के कलाकारों का जलवा, साधु और श्रेयश की आवाज ने बिखेरा भक्ति का रंग

 ग्वालियर बड़े पर्दे पर बाबा नीम करोली की भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक जीवन की कहानी दर्शकों को खूब प्रभावित कर रही है। फिल्म ‘हनुमान अंश’ को देशभर में दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है और कमाई के मामले में भी फिल्म ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस कामयाबी में ग्वालियर की सुरमयी आवाजों की भी खास भूमिका है। फिल्म के कुल 13 गीतों में से पांच गीत शहर के गायक साधु तिवारी ने अपनी आवाज में पिरोए हैं। वहीं, एक अन्य भक्ति गीत ‘जय हनुमान’ को ग्वालियर के ही श्रेयश धर्माधिकारी ने स्वर दिया है। साधु तिवारी की खासियत सिर्फ उनकी आवाज तक सीमित नहीं है। उन्होंने फिल्म के जिन पांच गीतों को गाया है, उनमें से गीतों के बोल लिखने और संगीत तैयार करने की जिम्मेदारी भी उन्होंने खुद संभाली है। फिल्म में उनके स्वर में ‘आवागवम’, ‘सासा हाले’, ‘जिद पर आ गई पार्वती’, ‘हे खरारी’ और ‘बजरंग बांका’ गीत सुनने को मिलते हैं। करैया से मुंबई तक, जुनून ने बनाई पहचान साधु तिवारी मूल रूप से ग्वालियर जिले के करैया-भितरवार क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने ग्वालियर के साइंस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की और इसके बाद एक निजी संस्थान से स्नातकोत्तर शिक्षा हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने शहर के कई निजी महाविद्यालयों में अतिथि संकाय सदस्य के तौर पर भी सेवाएं दीं। हालांकि, शिक्षा और अध्यापन के साथ उनका सबसे बड़ा जुनून संगीत रहा। उन्होंने ग्वालियर के शास्त्रीय गायक संजय देवले से संगीत की बारीकियां सीखीं। संगीत के प्रति इसी लगन ने उन्हें धीरे-धीरे ग्वालियर से मुंबई की मायानगरी तक पहुंचाया, जहां उनके हुनर को बड़े मंच पर पहचान मिलने लगी। ‘जय हनुमान’ में सुनाई देती है श्रेयश की आवाज फिल्म के संगीत में ग्वालियर की एक और प्रतिभा श्रेयश धर्माधिकारी ने अपनी छाप छोड़ी है। उन्होंने फिल्म के चर्चित भक्ति गीत ‘जय हनुमान’ को आवाज दी है। पर्दे पर जब यह गीत गूंजता है तो ग्वालियर के दर्शकों के लिए इसका जुड़ाव और भी खास हो जाता है। श्रेयश मूल रूप से ग्वालियर के लाला का बाजार क्षेत्र में रहते हैं और उनकी शिक्षा भी शहर में ही हुई है। वर्तमान में वह मुंबई में रहकर संगीत के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में जुटे हैं। इस तरह ‘हनुमान अंश’ की सफलता के साथ ग्वालियर के दो कलाकारों की आवाज भी देशभर के दर्शकों तक पहुंच रही है, जो शहर की संगीत परंपरा और यहां की प्रतिभाओं के लिए गर्व का विषय है।  

Bhagalpur में Trade License की जांच तेज, 50 हजार दुकानों की होगी पड़ताल; 1.42 करोड़ जुटे

भागलपुर. होल्डिंग टैक्स वसूली के साथ-साथ भागलपुर नगर निगम ने अब व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के ट्रेड लाइसेंस को लेकर भी सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। चल रहे 'राजस्व वसूली माह' के तहत निगम प्रशासन ने ट्रेड लाइसेंस जांच अभियान को गति देने के लिए एक विशेष टास्क टीम का गठन किया है। यह टीम शहर के मुख्य बाजारों और व्यावसायिक इलाकों में जाकर दुकानों के वैध लाइसेंस की भौतिक जांच करेगी। जिन व्यवसायियों ने अब तक लाइसेंस नहीं बनवाया है, उन्हें पहले समझाइश देकर ऑनलाइन आवेदन के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके बाद भी लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने सिल्क सिटी के लगभग 50 हजार दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को ट्रेड लाइसेंस के दायरे में लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक पोर्टल पर 16,405 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 14,708 आवेदनों का सत्यापन कर ट्रेड लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं, जबकि 913 आवेदनों में भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। इसके अतिरिक्त करीब 8,000 पुराने ट्रेड लाइसेंस नवीनीकरण की प्रत्याशा में लंबित पड़े हैं। जांच के साथ जागरूक करेगी टास्क टीम अभियान के दौरान निगम की टास्क टीम दुकानदारों को ऑनलाइन आवेदन करने की सरल प्रक्रिया और ट्रेड लाइसेंस के लाभों से अवगत कराएगी। अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश छोटे-मंझोले व्यवसायी प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में लाइसेंस नहीं बनवाते हैं। ऐसे में टीम मौके पर ही मार्गदर्शन प्रदान करेगी। निगम का स्पष्ट उद्देश्य शहर के शत-प्रतिशत कारोबार को औपचारिक दायरे में लाकर नगर निकाय के राजस्व में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है। अब तक 1.42 करोड़ की कमाई, 24 लाख से अधिक प्रक्रियाधीन ट्रेड लाइसेंस जारी करने के एवज में नगर निगम को अब तक 1.42 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है। इसके अलावा 24.70 लाख रुपये का भुगतान विभिन्न स्तरों पर प्रक्रियाधीन है, जो जल्द ही निगम के खाते में जुड़ जाएगा। निगम अधिकारियों के मुताबिक, विशेष जांच अभियान के गति पकड़ते ही आवेदनों और राजस्व दोनों में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। सर्वे के आधार पर बिना लाइसेंस संचालित हो रही दुकानों को चिह्नित कर उन्हें समय सीमा के भीतर दस्तावेज दुरुस्त करने का अंतिम मौका दिया जाएगा।

UP चुनाव से पहले आकाश आनंद को झटका, मायावती ने फिर छीनी बड़ी जिम्मेदारी; बताया अपरिपक्व

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद को फिलहाल पार्टी की किसी बड़ी जिम्मेदारी से दूर रखने का फैसला किया है। उन्होंने आकाश को राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत बताते हुए केवल पार्टी में कार्य करने की अनुमति दी है। मायावती ने इस फैसले के लिए बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला दिया। मायावती ने कहा कि कांशीराम ने अपने परिवार के सदस्यों को पार्टी के काम में शामिल होने की अनुमति तो दी थी, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या संगठन में बड़े पद देने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने कहा कि वह भी इसी संकल्प पर आगे बढ़ रही हैं। नेशनल को-ऑर्डिनेटर का पद भी वापस लिया! मायावती का मानना है कि आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत है, ताकि विरोधी दल साम, दाम, दंड, भेद जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर बसपा को चुनावी नुकसान न पहुंचा सकें। वहीं पार्टी सूत्रों का कहना है कि उनका नेशनल को-ऑर्डिनेटर का पद भी वापस ले लिया गया है। हालांकि पार्टी से बाहर नहीं किया गया है। आकाश को दो बार पहले पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। आकाश ने अपने एक्स अकाउंट से पद हटाकर खुद को बसपा कार्यकर्ता लिख दिया है। कई जिम्मेदारी दी गई, और फिर वापस ली गई आकाश आनंद को पहले भी कई बार पार्टी में अहम जिम्मेदारियां दी गईं और बाद में वापस ली गईं। वर्ष 2019 में उन्हें बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कई जनसभाओं को संबोधित किया। मई 2024 में सीतापुर की एक जनसभा में उनके आक्रामक भाषण के बाद मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद मायावती ने उन्हें पार्टी से हटा दिया था। हालांकि बाद में उनकी वापसी हुई। मार्च 2025 में आकाश आनंद को फिर पार्टी से निष्कासित किया गया। उस समय मायावती ने यह भी कहा था कि अब उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं होगा। बाद में आकाश की दोबारा पार्टी में वापसी हुई और अगस्त 2025 में उन्हें फिर राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई। हाल में हाथरस में उन्होंने चुनावी रैली को संबोधित करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला था। अब एक बार फिर उनसे संगठन की बड़ी जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। संघ प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा इस बीच मायावती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत पर भी निशाना साधा। लखनऊ में पार्टी की राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में उन्होंने कहा कि जातिवाद, असमानता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आरएसएस की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। उन्होंने आरएसएस से बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के समतामूलक संविधान का ईमानदारी से पालन करने की सलाह दी। बैठक में संगठन को मजबूत करने पर जोर बैठक में मायावती ने संगठन को मजबूत करने, कमियों को दूर करने और पदाधिकारियों को पूरी निष्ठा से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कांशीराम की पुण्यतिथि पर देशभर में होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि शोषित वर्ग को शासक वर्ग बनाना ही बहुजन आंदोलन का मुख्य लक्ष्य है और इसके लिए सत्ता हासिल करना जरूरी है।

8th Pay Commission में 7% Increment हुआ लागू तो कितनी बढ़ेगी Salary? जानें पूरा कैलकुलेशन

नई दिल्ली  8वें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही इस पर लगातार चर्चा चल रही है. देशभर के केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों की निगाह भी इसी पर टिकी है कि नए आयोग की सिफारिशों के बाद उनके वेतन और भत्तों में कितना उछाल आएगा. इसी पर मंथन करने के लिए वेतन आयोग के सदस्यों ने जयपुर में बैठक की थी और अब 7 व 8 सितंबर को चेन्नई में भी हितधारकों के साथ बातचीत करेंगे. आयोग के सदस्य तमाम कर्मचारी और पेंशनर्स के संगठनों से बातचीत करके उनकी डिमांड और जरूरतों की लिस्ट बना रहे हैं. इसमें सालाना इंक्रीमेंट भी इस बार बड़ा मुद्दा बना हुआ है. सभी कर्मचारी संगठनों ने एक सुर में कहा है कि सालाना 3 फीसदी का इंक्रीमेंट जायज नहीं है और इसे हर हाल में बढ़ाया जाना चाहिए।  सालाना वेतन वृद्धि का मौजूदा फॉर्मूला कहता है कि केंद्रीय कर्मचारियों को 3 फीसदी का इंक्रीमेंट मिलता है. हालांकि, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह राशि उनके खर्चे और बढ़ती महंगाई को पूरा करने में पर्याप्त नहीं होते हैं. संगठनों की डिमांड है कि इस इंक्रमेंट को कम से कम 5 से 7 फीसदी किया जाना चाहिए. अगर आयोग संगठन की बात मानता है और 7 फीसदी सैलरी इंक्रीमेंट को मंजूरी मिलती है तो आपकी सैलरी में कितना इजाफा होगा।  क्या है संगठनों की डिमांड केंद्रीय कर्मचारियों के मुख्य संगठन नेशनल काउंसिल ऑफ ज्वाइन कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) का कहना कि 8वें वेतन आयोग में कम से कम 6 फीसदी का सालाना इंक्रीमेंट होना चाहिए. इसके अलावा आल इंडिया डिफेंस एम्पलॉयीज फेडरेशन (AIDEF) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO) ने भी सालाना 6 फीसदी सैलरी इंक्रीमेंट की सिफारिश की है. आल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्पलॉयीज फेडरेशन (AINPSEF) ने तो सालाना 7 फीसदी इंक्रीमेंट का मुद्दा उठाया है. हालांकि, रेलवे कर्मचारियों के संगठन ने 5 फीसदी इंक्रीमेंट पर ही संतोष जताया है।  अभी इंक्रीमेंट का कितना असर मौजूदा इंक्रीमेंट दर 3 फीसदी और इसे लेवल 1 के कर्मचारियों पर लागू किया जाए तो सालाना कितना इंक्रीमेंट होता है. 7वें वेतन आयोग में लेवल 1 के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 18 हजार रुपये है. इसमें 3 फीसदी इंक्रीमेंट होता है तो हर साल बेसिक सैलरी में सिर्फ 540 रुपये का इजाफा होगा और 10 साल में कुल 5,400 रुपये के इंक्रीमेंट के साथ बेसिक सैलरी 23,400 रुपये तक पहुंचेगी. लेवल 5 के कर्मचारियों की बेसिक अभी 29,200 रुपये है और 3 फीसदी इंक्रीमेंट पर सालाना वेतन वृद्धि 876 रुपये होगी. इसका मतलब है कि 10 साल में 8,760 रुपये के इंक्रीमेंट के साथ कुल बेसिक 37,960 रुपये ही पहुंचेगी।  8वें वेतन आयोग में कैसे होगा इंक्रीमेंट का असर कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 3 फीसदी इंक्रीमेंट से एक वेतन आयोग के पूरे कार्यकाल में भी बेसिक सैलरी पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है. अगर इंक्रीमेंट को 7 फीसदी रखा जाए तो 10 साल में उनका बेसिक पे अमूमन दोगुने के करीब हो जाएगा. 7वें वेतन आयोग में लेवल 8 के कर्मचारी के बेसिक पे के आधार इंक्रीमेंट रेट लागू करके देखते हैं कि कितना असर पड़ता है. अभी लेवल 8 का बेसिक पे 47,600 रुपये है. अगर 8वां वेतन आयोग 2.15 का फिटमेंट फैक्टर लागू करता है तो 3,5,6 और 7 फीसदी इंक्रीमेंट के साथ सैलरी पर कितना असर पड़ेगा।  कितना बढ़ जाएगा आपका वेतन     लेवल 8 के कर्मचारी का अभी मूल वेतन 47,600 रुपये जो 2.15 का फिटमेंट फैक्टर लगने के बाद 1,02,340 रुपये हो जाएगा.     8वें वेतन आयोग के बाद लेवल 8 के कर्मचारी के 1,02,340 रुपये की बेसिक सैलरी पर 3 फीसदी इंक्रीमेंट होता है तो 10 साल में कुल मूल वेतन 1,40,78,561 रुपये पहुंच जाएगा.     अगर इंक्रीमेंट 5 फीसदी की दर से होता है तो बेसिक पे 10 साल में 1,54,46,658 रुपये हो जाएगा, जो 13,68,097 रुपये ज्यादा होगा.     अगर इंक्रीमेंट की दर 6 फीसदी निर्धारित होती है तो 10 साल में कुल मूल वेतन 1,61,87,071 रुपये होगा.     इसी तरह, 7 फीसदी का इंक्रीमेंट लगता है तो 8वें वेतन आयोग के तहत 10 साल में कुल बेसिक सैलरी के रूप में 1,69,67,703 रुपये का भुगतान किया जाएगा.  

NRI ने भर दिया भारत का डॉलर खजाना! RBI की स्कीम को मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स, 127 अरब डॉलर जुटाए

नई दिल्ली प्रवासी भारतीयों (NRI) से डॉलर जुटाने की रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की खास पहल उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल रही. 31 अगस्त 2026 तक फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट के जरिए भारत में $100 बिलियन से ज्यादा की रकम आ चुकी थी. तेज इनफ्लो को देखते हुए RBI ने इस स्कीम के लिए दी गई स्पेशल स्वैप फैसिलिटी की विंडो तय समय से करीब एक महीने पहले ही बंद कर दी।  इस तेज डॉलर इनफ्लो से भारत का फॉरेक्स रिजर्व भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. 21 अगस्त तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार $729.3 बिलियन था. इससे कुछ ही हफ्ते पहले 24 जुलाई को यह करीब $682 बिलियन था।  मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ा डॉलर का दबाव RBI का यह कदम ऐसे समय में आया, जब मिडिल ईस्ट में जारी जंग और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारत के बाहरी खाते और रुपये पर दबाव बढ़ा रखा था. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद भारत के फॉरेक्स रिजर्व में करीब $46 बिलियन की कमी आई थी. इसी दौरान 24 जुलाई तक रिजर्व करीब $682 बिलियन रह गया था, जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 6% कमजोर हो चुका था. ऐसे माहौल में RBI ने NRI से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए FCNR(B) डिपॉजिट को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई।  क्या है FCNR(B) डिपॉजिट? फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) अकाउंट NRI के लिए एक फिक्स्ड टर्म डिपॉजिट होता है. इसमें NRI अपनी विदेशी कमाई को भारत में विदेशी मुद्रा में जमा कर सकते हैं. उन्हें रकम को पहले भारतीय रुपये में बदलने की जरूरत नहीं होती. इस खाते की खासियत यह है कि मूलधन और उस पर मिलने वाला ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में ही वापस मिलते हैं. ऐसे में NRI को रुपये में उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं उठाना पड़ता।  क्यों शुरू करनी पड़ी खास स्वैप फैसिलिटी? FCNR(B) डिपॉजिट में इनफ्लो पहले कमजोर हो गया था. वित्त वर्ष 2024-25 में इस माध्यम से $7 बिलियन से ज्यादा की रकम आई थी, लेकिन FY26 में यह घटकर सिर्फ $946 मिलियन रह गई. इनफ्लो को फिर से बढ़ाने के लिए RBI ने जून 2026 में एक खास स्वैप फैसिलिटी का ऐलान किया था. इसके तहत 3 से 5 साल की अवधि वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट पर बैंकों को रियायती स्वैप की सुविधा दी गई. इस व्यवस्था में हेजिंग की लागत RBI ने वहन की. इसका मकसद NRI को विदेशी मुद्रा भारत में जमा करने के लिए ज्यादा आकर्षक विकल्प देना था।  RBI की उम्मीद से कहीं ज्यादा आया पैसा RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा को शुरुआत में करीब $80 बिलियन के इनफ्लो की उम्मीद थी. लेकिन डिपॉजिट में पैसा आने की रफ्तार अनुमान से काफी ज्यादा रही. अगस्त की शुरुआत तक ही करीब $40.8 बिलियन आ चुके थे. इसके बाद 31 अगस्त तक FCNR(B) के जरिए आने वाली रकम $100 बिलियन के आंकड़े को पार कर गई. तेज इनफ्लो को देखते हुए RBI ने 30 सितंबर 2026 की तय डेडलाइन का इंतजार नहीं किया और स्पेशल स्वैप फैसिलिटी की विंडो करीब एक महीने पहले ही बंद कर दी।  फॉरेक्स रिजर्व और रुपये को मिला सहारा इस डॉलर इनफ्लो का असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दिखाई दिया. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, 21 अगस्त तक भारत का फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर रिकॉर्ड $729.3 बिलियन पर पहुंच गया था. 24 जुलाई को यह करीब $682 बिलियन था. इतना बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट को फाइनेंस करने और बाहरी झटकों से निपटने में मदद कर सकता है. रुपये को भी इससे कुछ राहत मिली. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर को रुपया 0.4% मजबूत होकर 94.7988 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. यह 1 जुलाई के बाद रुपये का सबसे मजबूत स्तर था. इस दौरान RBI ने ऑफशोर और ऑनशोर बाजारों में डॉलर की बिक्री भी की।  NRI से पहले भी RBI ने जुटाए हैं डॉलर मुश्किल आर्थिक परिस्थितियों में RBI के लिए NRI से विदेशी मुद्रा जुटाना कोई नया कदम नहीं है. 1991 के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स संकट के दौरान भी प्रवासी भारतीयों के विदेशी मुद्रा संसाधनों का इस्तेमाल किया गया था. इसके बाद 2013 में रुपये पर दबाव बढ़ने के दौरान करीब $34 बिलियन जुटाए गए थे. $100 बिलियन से ज्यादा का फॉरेन करेंसी इनफ्लो दिखाता है कि संकट के समय NRI डिपॉजिट भारत के लिए विदेशी मुद्रा जुटाने का एक अहम जरिया बन सकता है। 

फर्रुखाबाद में मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण कर देखे बाढ़ के हालात, पीड़ितों से मिलकर दिलाया विश्वास- हर दुःख-दर्द में साथ खड़ी है सरकार

बाढ़ की समस्या का कराएंगे स्थायी समाधान: सीएम योगी फर्रुखाबाद में मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण कर देखे बाढ़ के हालात, पीड़ितों से मिलकर दिलाया विश्वास- हर दुःख-दर्द में साथ खड़ी है सरकार पुलिस लाइन में 1000 परिवारों को किया गया बाढ़ राहत सामग्री का वितरण, मुख्यमंत्री ने कई परिवारों को प्रदान की सामग्री  आश्रयहीन परिवारों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि के चेक भी दिए मुख्यमंत्री ने  50 किलो राहत सामग्री किट दे रही सरकार, अस्पतालों में दवा, एंटी स्नेक वेनम व एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्धः मुख्यमंत्री सीएम ने प्रशासन, पीडब्ल्यू समेत संबंधित विभागों को दिया निर्देश- बाढ़ का पानी उतरते ही टूटी सड़कों का तत्काल शुरू कराएं निर्माण  फर्रुखाबाद,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ का स्थायी समाधान कराने के लिए आश्वस्त करते हुए कहा कि मां गंगा के उफान से पानी का फैलाव हो रहा है। इससे फसल का काफी नुकसान हुआ। सरकार ने 9 वर्ष में सैकड़ों करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की हैं। जनप्रतिनिधियों के मुताबिक बाढ़ की समस्या का समाधान करने के लिए गंगा नदी की ड्रेजिंग कर उसे चैनलाइज करना होगा। सिल्ट को बाहर तटबंध के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह परियोजना यहां की आवश्यकता है। नदी के चैनलाइज होने से फसल बचेगी और स्थानीय लोगों को भी राहत मिलेगी।  मुख्यमंत्री ने गुरुवार को हवाई सर्वेक्षण कर फर्रुखाबाद की बाढ़ प्रभावित सदर, कायमगंज व अमृतपुर तहसीलों में बाढ़ के हालात देखे। इसके पश्चात पुलिस लाइन में 1000 परिवारों को बाढ़ राहत सामग्री का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से कई परिवारों को राहत सामग्री, आश्रयहीन परिवारों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि भी दी। उन्होंने पीड़ित परिवारों से संवाद कर उनका दुख साझा किया और विश्वास दिलाया कि सरकार हर दुख-दर्द में आपके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन, पीडब्ल्यू समेत संबंधित विभागों को बाढ़ का पानी उतरते ही टूटी सड़कों का तत्काल निर्माण शुरू करने का निर्देश भी दिया।  बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए किसानों का मांगा साथ सीएम ने कहा कि प्रशासन ड्रेजिंग का कार्य शुरू करने की तैयारी करें। बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए किसानों का सहयोग मांगते हुए सीएम ने कहा कि इसमें यदि आपकी जमीन आएगी तो उचित मुआवजा मिलेगा। हम फर्रुखाबाद को बाढ़ से मुक्त कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। उन्होंने बाढ़ से फसल को हुए नुकसान का सर्वे करने का निर्देश दिया और कहा कि यह रिपोर्ट आते ही किसान के खाते में डीबीटी के माध्यम से सहायता धनराशि भेज दी जाएगी। अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रैबीज व अन्य दवाएं उपलब्ध मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सीजन में सांप, बिच्छू व अन्य विषैले कीड़ों का भय रहता है। सरकार ने पहले ही सीएचसी, जिला अस्पतालों आदि में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रैबीज व पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था की है। जिन क्षेत्रों में पानी घुस गया है, वहां पशुओं के चारे, वैक्सीन, दवा आदि की भी व्यवस्था है। जनप्रतिनिधि व फील्ड में तैनात टीम लगातार जनसेवा कर रही है। 50 किलो राहत सामग्री किट दे रही सरकार सीएम ने बताया कि पिछले दिनों लखनऊ में फर्रुखाबाद के विधायकों व जिलाध्यक्ष के साथ बैठक में मैंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की चर्चा की थी। प्रभारी मंत्री को भेजकर राहत कार्यों की निगरानी, समीक्षा व ठोस रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा था। हमारी पूरी संवेदना पीड़ितों के प्रति है। राहत कार्यों के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम, बाढ़ चौकियां व राहत शिविर चल रहे हैं। जिन गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है, वहां प्रभावित परिवारों के लिए शासन ने रहने, भोजन आदि की व्यवस्था कराई है। जो लोग घर में सुरक्षित रह सकते हैं, उन तक 50 किलो राहत सामग्री की किट पहुंचाई जा रही है, जिसमें 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 10 किलो आलू, 2 किलो अरहर दाल, तेल, चना, लाई, मसाला, बाल्टी, बरसाती, डिग्निटी किट समेत 50 आइटम शामिल हैं। 15 दिनों से तीनों विधायक सभी पीड़ितों तक पहुंचकर स्थानीय प्रशासन की मदद से राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं।  हर दुख-दुर्द में साथ खड़ी है सरकार मुख्यमंत्री ने बाढ़ की विभीषिका से जूझ रही 102 गांवों की जनता के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सरकार हर दुःख-दर्द में साथ खड़ी है। जरूरत के मुताबिक हर मदद पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को पढ़ाने के लिए पहली बार शिक्षक शिविरों व गांवों में जाकर कक्षाएं ले रहे हैं। स्वास्थ्य शिविर, राहत सामग्री समेत सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।  अब बदल चुका है फर्रुखाबाद सीएम ने कहा कि फर्रुखाबाद बदल चुका है। यहां गंगा एक्सप्रेसवे का लिंक एक्सप्रेसवे आ रहा है और यह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के साथ जुड़ेगा। अब फर्रुखाबाद के पास भी अपना एक्सप्रेसवे होगा। सड़कों के चौड़ीकरण, ओवरब्रिज तथा गांवों की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। सड़कें अच्छी होने से बाढ़ के बावजूद कनेक्टिविटी बनी हुई है।  किसानों के साथ है सरकार सीएम ने कहा कि फर्रुखाबाद खेती किसानी की बेल्ट है। यहां आलू किसानों की काफी संख्या है। जिन किसानों का आलू कोल्ड स्टोरेज में है, उनके लिए प्रति बोरा धनराशि की व्यवस्था की गई है। डबल इंजन सरकार किसानों के साथ है। 2017 में 275 से 300 रुपये के बीच प्रति क्विंटल गन्ना का दाम मिलता था। आज यह राशि 400 रुपये क्विंटल है। हमने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर पर्ची, घटतौली आदि से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि का लाभ दिलाने, फसलों की खरीद के साथ ही मक्का के लिए भी क्रय केंद्र स्थापित किए हैं। पेरू की मदद से आगरा में आलू का अंतरराष्ट्रीय केंद्र काम कर रहा है। दुनिया के बाजार की मांग के अनुरूप आलू उपलब्ध करवाना और किसानों को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ कर उनकी आमदनी कई गुना बढ़ाई गई है। अब युवाओं की नौकरी से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता सीएम ने कहा कि पहली बार बिना भेदभाव हर जनपद के युवाओं को सरकारी नौकरी मिल रही है। फर्रुखाबाद के साथ कोई भेदभाव, अन्याय नहीं कर सकता। अब सरकारी नौकरी, ओडीओपी आदि के माध्यम से रोजगार के नए अवसर आ रहे हैं। सुरक्षा … Read more

CM रेवंत रेड्डी के खिलाफ बेटी का बयान पड़ा भारी, कोंडा सुरेखा की मंत्री पद से छुट्टी

 हैदराबाद  तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को अपनी कैबिनेट सहयोगी कोंडा सुरेखा को तुरंत प्रभाव से मंत्रिपरिषद से हटाने का फैसला किया। यह कदम महिला नेता की बेटी द्वारा मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर हुए विवाद के बाद उठाया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, इस बारे में गवर्नर शिव प्रताप शुक्ला को सिफारिश की गई है। राज्य की वन और बंदोबस्त मंत्री सुरेखा विवादों में घिर गई हैं। उनकी बेटी ने मुख्यमंत्री और पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ तीखी टिप्पणी की थी, जिस पर सत्ताधारी पार्टी के विधायकों और पदाधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। पिछले कुछ दिनों में चला था बैठकों का दौर सुरेखा को हटाने के अलावा, मुख्यमंत्री ने जी. चिन्ना रेड्डी की राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद पर नियुक्ति को भी तुरंत प्रभाव से रद कर दिया। ये घटनाक्रम पिछले कुछ दिनों में दिल्ली में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, उनके डिप्टी मल्लू भट्टी विक्रमार्क और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ की एआईसीसी नेताओं के साथ हुई बातचीत के बाद सामने आए। कांग्रेस की राज्य इकाई की अनुशासनात्मक समिति ने पहले ही पार्टी नेतृत्व से सुरेखा और चिन्ना रेड्डी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। सुरेखा ने राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी मामलों की एआईसीसी प्रभारी मीनाक्षी नटराजन से भी मुलाकात की थी और उनके सामने अपना पक्ष रखा था। कोंडा सुरेखा का मंत्री पद छिनने से इनकार उधर, कोंडा सुरेखा ने कैबिनेट से हटाने की खबरों से इनकार किया है और कहा है कि उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। सुरेखा ने CNN-News18 से बातचीत में कहा, "मुझे अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। न कोई हस्ताक्षर, न लेटर पैड, सिर्फ़ सादा कागज़। मुझे लगता है कि यह सही नहीं है। मुझे कोई सूचना नहीं दी गई।" उन्होंने अपनी बर्खास्तगी के तरीके पर सवाल उठाए और कहा कि यह सही तरीका नहीं है। पहले पार्टी को हमारी बात सुननी चाहिए थी सुरेखा ने कहा कि उन्होंने पार्टी द्वारा जारी 'शो-कॉज़ नोटिस' (कारण बताओ नोटिस) का जवाब दे दिया था। उनका कहना है कि बेटी की टिप्पणी के मामले में उनके पक्ष पर ठीक से विचार नहीं किया गया। उन्होंने आगे कहा, "पार्टी की ओर से किसी ने मुझसे संपर्क नहीं किया।" सुरेखा ने फैसले की जानकारी देने वाले संदेश की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए और कहा कि उसमें न तो हस्ताक्षर थे और न ही आधिकारिक लेटरहेड। उन्होंने तर्क दिया कि अनुशासनात्मक कार्रवाई करने से पहले पार्टी को उनकी बात सुननी चाहिए थी। अगला कदम क्या? कोंडा सुरेखा ने कहा कि वह अधिकारियों से औपचारिक पुष्टि मिलने के बाद ही आगे का कदम तय करेंगी। उन्होंने कहा, "आधिकारिक पुष्टि मिलने के बाद, मैं आगे की कार्रवाई तय करूंगी।" विवाद से जुड़े आरोपों पर सुरेखा ने कहा, "मैंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया और न ही कोई टिप्पणी की।" इससे पहले कांग्रेस आलाकमान ने सुरेखा के मामले पर विचार किया था। बता दें कि सुरेखा को हटाने का फैसला तब लिया गया, जब तेलंगाना कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने उनकी बेटी की ओर से मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और पार्टी के अन्य नेताओं पर की गई टिप्पणियों के लिए जारी 'कारण बताओ नोटिस' पर उनके जवाब की समीक्षा की। सुरेखा के बयान से पार्टी नेता असहमत सुरेखा को बर्खास्त करने का फैसला राज्य कांग्रेस की अनुशासन समिति द्वारा पार्टी नेतृत्व से उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश के बाद लिया गया है। इससे पहले करीब 20 विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने कहा था कि वे सुरेखा के इस बयान से असहमत हैं कि उनकी बेटी की टिप्पणियां उनके निजी विचार हैं। तेलंगाना कांग्रेस की अनुशासन समिति ने 19 अगस्त को कोंडा सुरेखा को नोटिस जारी कर उनकी बेटी सुष्मिता द्वारा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ की गई टिप्पणियों के संबंध में तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा था। सुरेखा ने 20 अगस्त को दिए अपने जवाब में कहा था कि उनकी बेटी द्वारा की गई टिप्पणियों के लिए उनसे स्पष्टीकरण मांगना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि बेटी की टिप्पणियों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। सुरेखा की बेटी ने क्या कहा था? कोंडा सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता पटेल ने वारंगल में एक समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री टीडीपी (TDP) और बीआरएस (BRS) से आए नेताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं, पुराने कांग्रेस वफादारों और उनकी उपेक्षा कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने परकल निर्वाचन क्षेत्र से अगला विधानसभा चुनाव लड़ने की भी घोषणा की थी। सुरेखा ने किया था कैबिनेट में बने रहने का आग्रह सुरेखा ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से उन्हें कैबिनेट में बने रहने देने का आग्रह किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक मंत्री के तौर पर उनका काम अच्छा रहा है और उन पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। मुख्यमंत्री और अन्य लोगों के खिलाफ अपनी बेटी की टिप्पणियों की निंदा न करने के कारण कई कांग्रेस विधायकों द्वारा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग का जिक्र करते हुए सुरेखा ने कहा कि कोई भी विधायक अपनी मर्जी से नहीं बोला और उनके पीछे कोई था। सुरेखा ने जताई आपत्ति जब उनसे पूछा गया कि विधायकों के पीछे कौन था तो उन्होंने किसी का नाम लेने से इनकार कर दिया और कहा कि इससे विवाद पैदा होगा। उन्होंने उन विधायकों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की जिन्होंने उनके खिलाफ बात की थी। सुरेखा ने अनुशासनात्मक समिति द्वारा उन्हें भेजे गए नोटिस पर आपत्ति जताई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा जैसे शीर्ष नेताओं को ईमेल भेजे हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपनी बेटी की टिप्पणियों का समर्थन करती हैं तो सुरेखा ने जवाब दिया कि उनकी बेटी स्वतंत्र है और उन टिप्पणियों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। चिन्ना रेड्डी पर भी हुई कार्रवाई सुरेखा के अलावा, राज्य कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने चिन्ना रेड्डी के खिलाफ भी … Read more

एशियन गेम्स 2026 के लिए भारत तैयार, 758 सदस्यीय दल मैदान में दिखाएगा दम; बनेगा नया रिकॉर्ड?

 नई दिल्ली आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय दल पूरी तरह तैयार है. युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले इस महाकुंभ के लिए 758 सदस्यीय भारतीय दल को मंजूरी दी है. इसमें 503 खिलाड़ी और 246 सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं।  भारत 43 में से 35 खेलों में अपनी चुनौती पेश करेगा. भारत ने पिछले एशियन गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पहली बार 100 पदकों का आंकड़ा पार किया था. हांगझोउ में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 107 मेडल अपने नाम किए थे. अब जापान में इस प्रदर्शन को और बेहतर करने की कोशिश होगी।  भारतीय दल में 269 पुरुष और 234 महिला खिलाड़ी शामिल हैं. शुरुआती सूची में 492 खिलाड़ियों को मंजूरी मिली थी, लेकिन बाद में 11 और खिलाड़ियों को शामिल किया गया. इनमें एथलेटिक्स के छह, सर्फिंग के चार और मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) का एक खिलाड़ी शामिल है।  एथलेटिक्स में प्रवीण कुमार, हरिता भद्रा, किरण पहल, आशा इलांगो, सिंधुश्री गणेशा और सान्या यादव को जगह मिली है. वहीं MMA में वरुण सन्याल, जबकि सर्फिंग में किशोर कुमार, शिवराज बाबू, कमाली प्रकाश और शुगर शांति गायेन भारतीय दल का हिस्सा होंगे। क्रिकेट में 50 सदस्यीय दल क्रिकेट इवेंट (पुरुष एवं महिला) के लिए भारत का दल 50 सदस्यों का होगा. इनमें कुल 20 सपोर्ट स्टाफ भी शामिल हैं. पुरुष टीम के हेड कोच वीवीएस लक्ष्मण होंगे, जबकि महिला टीम की कोचिंग की जिम्मेदारी अमोल मजूमदार संभालेंगे. क्रिकेट में भारत की दोनों टीमें मजबूत दावेदार के रूप में उतरेंगी।  हॉकी (पुरुष एवं महिला) में भारत कुल 54 सदस्यीय दल भेजेगा. इसमें 40 खिलाड़ी और 14 सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं. एशियन गेम्स में हॉकी भारत के लिए पदक की अहम उम्मीदों में शामिल रहेगा।  भारतीय दल में सबसे बड़ा नाम जो नजर नहीं आएगा, वो नीरज चोपड़ा का है. स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज एंकल लिगामेंट की चोट के कारण टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं. नीरज ने जकार्ता (2018) और हांगझोउ (2023) एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीते थे. ऐसे में उनके बाहर होने से भारत के एथलेटिक्स अभियान को बड़ा झटका लगा है।  भारतीय ओलंपिक संघ की ओर से 19 अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल भी जापान जाएगा. वेटलिफ्टिंग फेडरेशन के प्रमुख सहदेव यादव को शेफ डी मिशन बनाया गया है, जबकि चार डिप्टी शेफ डी मिशन उनकी मदद करेंगे. डॉ. दिनशॉ पारदीवाला को चीफ मेडिकल ऑफिसर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के 152 मामले, कोरोना के 2 केस मिले; मंत्री बोले- घबराएं नहीं

रायपुर. प्रदेश में स्वाइन फ्लू (इन्फ्लूएंजा-ए एच1एन1) का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के 31 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अब तक प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 152 मरीज मिल चुके हैं। इनमें 38 मरीज वर्तमान में सक्रिय हैं, जिनका उपचार चल रहा है। रायपुर संक्रमण के मामले में सबसे आगे है। जिले में अब तक 66 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है, जबकि आठ मरीज अभी सक्रिय हैं। रायपुर के बाद दुर्ग और बिलासपुर में संक्रमण का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। दोनों जिलों में अब तक 17-17 मरीज मिल चुके हैं। दुर्ग में आठ और बिलासपुर में छह मरीज वर्तमान में सक्रिय हैं। 11 जिलों में एक भी मरीज नहीं स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बलरामपुर, बीजापुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोंडागांव, कोरिया, मुंगेली, नारायणपुर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और सुकमा में अब तक स्वाइन फ्लू का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। रायगढ़-कोरबा में भी सक्रिय मरीज रायगढ़ में 10 मरीज मिले हैं, जिनमें तीन सक्रिय हैं। कोरबा में नौ में से चार और धमतरी में नौ में से एक मरीज का उपचार चल रहा है। इसके अलावा बस्तर और बेमेतरा में तीन-तीन तथा कांकेर, राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा और सरगुजा में दो-दो मरीज मिले हैं। बालोद, बलौदाबाजार, महासमुंद और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में एक-एक सक्रिय मरीज दर्ज हैं। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम में बदलाव के दौरान वायरल संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे हो सकते हैं। सर्दी, खांसी, तेज बुखार, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी होने पर जांच कराना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच, उपचार और आइसोलेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पैनिक होने की जरूरत नहीं- स्वास्थ्य मंत्री स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पैनिक होने की जरूरत नहीं है। कोरोना से निपटने के लिए पहले लगे डोज़ेस की वजह से शरीर में पर्याप्त इम्यून पॉवर बनी हुई है। जिला अस्पताल मेकाहारा में जांच की पूरी व्यवस्था की गई है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि स्वाइन फ्लू या कोरोना के लक्षण नजर आते ही किसी तरह की लापरवाही न करें और तत्काल अस्पताल पहुंचकर जांच और इलाज करवाएं।