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सास की अंतिम विदाई बनी मिसाल, लुधियाना में बहुओं ने दिया अर्थी को कंधा; आंखें-शरीर किए दान

लुधियाना  लुधियाना में महिला की मौत के बाद जब घर से उनकी अर्थी निकाली गई तो बहुओं ने एक नई मिसाल कायम की। दोनों बहुओं ने अपनी सास की अर्थी को आगे से अपने कंधों पर उठाया, जबकि दोनों बेटों ने पीछे से कंधा लगाकर मां को अंतिम विदाई दी। घर से कुछ दूर तक बहुओं ने सास की अर्थी को कंधा दिया और उसके बाद शव हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर की मैनेजमेंट के हवाले कर दिया। शव लेकर अस्पताल की मैनेजमेंट फिरोजपुर के लिए रवाना हुई। मेडिकल कॉलेज में अब उनके शव पर स्टूडेंट्स प्रैक्टिकल करेंगे। अंतिम यात्रा से पहले महिला सुखदेव कौर की आंखें भी दान की गई। आंखें डॉ रमेश सुपरस्पेशिलिटी आईएंड लेजर सेंटर को दी गई। उनकी आंखें भी किसी दृष्टिहीन को लगाई जाएंगी और वो भी दुनियां देख सकेंगे। महिला अपने दो बेटों व बहुओं के साथ लुधियाना के प्रताप सिंह वाला में रहती थी। उन्होंने 10 साल पहले मरणोपरांत शरीर दान करने का फैसला किया था। उन्होंने बाकायदा इसके लिए फॉर्म भर दिया था। परिवार ने भी एफिडेविट दिया था कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। परिवार व रिश्तेदारों ने ऐसे दी सुखदेव कौर को अंतिम विदाई…     मौत होते ही आई हॉस्पिटल को किया फोन: सुखदेव कौर ने 10 साल पहले शरीर व आंखें दान करने का संकल्प लिया था। बुधवार शाम को जैसे ही सुखदेव कौर की हार्ट अटैक से मौत हुई तो बेटों यादविंदर सिंह व गुरविंदर सिंह ने डॉ रमेश सुपरस्पेशलिटी आई एंड लेजर सेंटर को फोन किया और मां की आंखों को ले जाने के लिए कहा। आई अस्पताल की टीम आई और उनकी आंखें लेकर चली गई।     शरीर के लिए डेरे की टीम से किया संपर्क: सुखदेव कौर ने एक सत्संग के दौरान डेरे में शरीर दान का संकल्प लिया था। जब उनकी मौत हुई तो बेटों ने डेरे की टीम से संपर्क किया। हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर को शव लेने के लिए कहा। गुरुवार को अस्पताल की टीम शव लेने लुधियाना पहुंची।     बहुओं ने दिया अर्थी को कांधा: धार्मिक रीति रिवाज निभाने के बाद अंतिम यात्रा की शुरुआत में समाज की पुरानी मान्यताओं को दरकिनार करते हुए सुखदेव कौर की दोनों बहुओं मनप्रीत कौर और राजवीर कौर ने अपनी सास की अर्थी को आगे से अपने कंधों पर उठाया, जबकि बेटे यादविंदर सिंह और गुरविंदर सिंह पीछे से सहारा बने।     फूलों से सजी एंबुलेंस को दी हरी झंडी: पार्थिव शरीर को एंबुलेंस में सम्मानपूर्वक रखा गया और पूरे वाहन को फूलों से सजाया गया। गांव प्रताप सिंह वाला के सरपंच गुरमेज सिंह ने हरी झंडी दिखाकर एम्बुलेंस को फिरोजपुर के मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया। अंतिम विदाई के दौरान उपस्थित परिजनों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने उनकी इस अंतिम सेवा और त्याग को नमन किया। मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और शोध में आएगा काम गांव प्रताप सिंह वाला के सरपंच गुरमेज सिंह कामरेड ने कहा कि इंसानी शरीर मृत्यु के बाद मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन सुखदेव कौर का यह शरीर अब अमर हो गया है। वे बेहद सहृदय और मीठे स्वभाव की महिला थीं, जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहती थीं। उनके जाने से गांव को अपूरणीय क्षति हुई है, लेकिन उनके परिवार ने शरीरदान करके पूरे समाज को एक मिसाल दी है। उन्होंने आगे कहा कि शरीरदान की मुहिम बेहद सराहनीय है। इस पार्थिव देह पर हारमनी आयुर्वेदिक कॉलेज एंड हॉस्पिटल फिरोजपुर के छात्र प्रैक्टिकल करेंगे और बीमारियों पर शोध करेंगे, जो भविष्य में मानव जाति के इलाज के काम आएगा। शरीर दान की प्रक्रिया जानिए…     जीवनकाल में संकल्प व पंजीकरण: जब कोई व्यक्ति जीवित रहते हुए शरीरदान का फैसला करता है, तो उसे किसी नजदीकी मेडिकल कॉलेज या अधिकृत संस्थान में जाकर बॉडी डोनेशन फॉर्म भरना होता है, जिसमें उसकी स्पष्ट सहमति दर्ज होती है। इस आवेदन पत्र में परिवार के सदस्यों या नॉमिनी का विवरण भी लिया जाता है, जिसके बाद संस्थान आवेदक को एक औपचारिक पंजीकरण या शपथ पत्र जारी कर देता है।     परिवार को सूचित करना: शरीरदान की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए यह बेहद जरूरी है कि व्यक्ति अपने फैसले की जानकारी अपने निकटतम परिजनों को पहले से दे दे। व्यक्ति की मृत्यु के तुरंत बाद परिवार के सदस्यों को ही संबंधित मेडिकल कॉलेज या संस्थान से संपर्क करके दान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होता है।     मृत्यु के बाद संस्थान को सूचना: डॉक्टर द्वारा मृत्यु की पुष्टि किए जाने के बाद परिजनों को बिना किसी देरी के मेडिकल कॉलेज को तुरंत सूचित करना चाहिए। इसके बाद संस्थान के विशेषज्ञ यह जांचते हैं कि क्या शरीर उनके निर्धारित मानकों और स्वीकार्यता की शर्तों के अनुसार सही स्थिति में है।     जरूरी दस्तावेजों की पूर्ति: प्रक्रिया को कानूनी रूप से पूरा करने के लिए मृत्यु प्रमाणपत्र, पहले से भरा हुआ संकल्प-पत्र, मृतक व उनके निकट संबंधी के पहचान पत्र और संस्थान का निर्धारित सहमति फॉर्म तैयार रखना होता है।     मेडिकल कॉलेज को शव सौंपना: सभी कागजी प्रक्रियाएं और प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद पार्थिव देह को सम्मानपूर्वक मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी डिपार्टमेंट को सौंप दिया जाता है, जहां इसका उपयोग मेडिकल छात्रों के प्रैक्टिकल, अध्ययन और जटिल बीमारियों पर शोध के लिए किया जाता है।     अंतिम संस्कार की प्रक्रिया: शोध व अध्ययन का कार्य पूरा हो जाने के बाद संबंधित संस्थान अपनी नीतियों के तहत शव का अंतिम संस्कार करता है। कई मामलों में परिजनों की इच्छा अनुसार उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर दिया जाता है।

मध्य प्रदेश में भारी बारिश से हाहाकार, शहडोल में नदी उफान पर; पन्ना में डूबा होमगार्ड दफ्तर

भोपाल /श्योपुर/सतना मध्य प्रदेश में शुक्रवार को भी कई जिलों में बारिश का दौर जारी है। इंदौर-सीहोर में सुबह से पानी गिर रहा है। भोपाल में रिमझिम के साथ शाजापुर के अकोदिया और श्योपुर में भी बरसात हो रही है।पन्ना में बारिश का पानी होमगार्ड दफ्तर में घुस गया है। सरकारी रिकॉर्ड, महंगे कंप्यूटर और इमरजेंसी राहत सामग्री खराब हो रही है। सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। किनारे बसे लोगों और पर्यटकों को ऐहतियात बरतने के समझाइश दी गई है। ओंकारेश्वर में बारिश से नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। बांध के सभी गेट बंद हैं लेकिन आठों टरबाइन से करीब 1896 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। मंडला में नर्मदा नदी उफान पर है। वहीं, छतरपुर-पन्ना और मैहर समेत कई जिलों में बाढ़ के हालात हैं। एमपी-छत्तीसगढ़ का संपर्क टूटा शहडोल जिले में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। नदी-नाले उफान पर हैं और कई इलाकों में आवागमन प्रभावित हुआ है। जैतपुर तहसील क्षेत्र के कोलमी गांव में बरने नदी का जलस्तर बढ़ने से झींक बिजुरी से छत्तीसगढ़ के केल्हारी का संपर्क टूट गया है। प्रशासन और पुलिस ने लोगों को नदी पर बने पुल से आवागमन करने से रोक दिया है। यह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला एक भीतरी मार्ग है। पुल के ऊपर बह रहा पानी, पुलिस बल तैनात बरने नदी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है। नदी के एक ओर मध्य प्रदेश का जैतपुर थाना क्षेत्र है, जबकि दूसरी ओर छत्तीसगढ़ का केल्हारी थाना क्षेत्र आता है। नदी में पानी बढ़ने के बाद पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया है। पुल के ऊपर पानी होने की स्थिति में लोगों को इसे पार नहीं करने दिया जा रहा है। बाणसागर से छोड़ा जा रहा पानी लगातार बारिश के बीच बाणसागर बांध का जलस्तर पूर्ण जलभराव स्तर तक पहुंच गया है। 3 सितंबर की सुबह 8 बजे बांध का जलस्तर 341.64 मीटर दर्ज किया गया, जो पूर्ण जलभराव स्तर के बराबर है। बांध से कुल 4241.66 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसके लिए आठ रेडियल गेट 2.50 मीटर तक खोले गए हैं। स्पिलवे के आठ गेटों से करीब 4060 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है।  अब तक 1078.4 मिलीमीटर बारिश अधीक्षक भू-अभिलेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शहडोल जिले में 2 सितंबर को औसतन 54.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जैतपुर में सबसे अधिक 99 मिलीमीटर, बुढ़ार में 83, चनौढ़ी में 53, ब्यौहारी में 45, सोहागपुर में 38, जयसिंहनगर में 33 और गोहपारू में 29 मिलीमीटर बारिश हुई। दो सितंबर तक जिले में इस वर्ष कुल 1078.4 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है। जबकि पिछले वर्ष 2 सितंबर तक 945 मिलीमीटर औसत बारिश हुई थी। लगातार बारिश के कारण जिले के कई नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।  28 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने प्रदेश के 28 जिलों में अगले 48 घंटे के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। अगले दो दिन तक भोपाल, उज्जैन, सागर, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग में अति भारी या भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि शिवपुरी, गुना, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, नर्मदापुरम में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, श्योपुर, भिंड, दतिया, पन्ना, सतना, रीवा, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, छिंदवाड़ा, बैतूल, सीहोर, शाजापुर, देवास, आगर-मालवा और मंदसौर में भारी बारिश की चेतावनी है। इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, नीमच, रतलाम, हरदा, मुरैना, जबलपुर, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

अंतरिक्ष में भारत की बड़ी छलांग, EOS-05 सफलतापूर्वक ऑर्बिट में तैनात; मिलेगी लगातार निगरानी की ताकत

श्रीहरिकोटा  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शुक्रवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ई.ओ.एस.05 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया. यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक और बड़ी उपलब्धि है।  इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने कहा, 'मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि जीएसएलवी-एफ17 व्हीकल ने एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट ई.ओ.एस.05 को तय और जरूरी ऑर्बिट में सफलतापूर्वक और सही तरीके से पहुंचा दिया है।  रियल-टाइम इमेजरी देने और खेती और डिजास्टर मैनेजमेंट जैसे एरिया में देश की मदद करने के लिए तैयार जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट पेलोड लेकर स्पेसपोर्ट से भारतीय समयानुसार सुबह 2:55 बजे आसमान में उड़ा।  यह प्रक्षेपण जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट पर किया गया, जो भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) की ईओएस-05 के रूप में सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (सब-जीटीओ) की ओर 19वीं उड़ान है. मिशन में शामिल इसरो और साइंटिस्ट्स की तारीफ करते हुए डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक्स पर लिखा, 'अंतरिक्ष में भारत की एक और बड़ी छलांग! जीएसएलवी-एफ17/ई.ओ.एस.05 के सफल लॉन्च पर टीम इसरो को बधाई।  ई.ओ.एस.05 एक अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है और जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है, जो विजिबल, इंफ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड में एडवांस्ड इमेजिंग को सक्षम बनाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूर की सोच वाली लीडरशिप से भारत की स्पेस कैपेबिलिटी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है, जिससे ग्लोबल स्पेस पावर के तौर पर हमारी जगह और मजबूत हो रही है।  इस मिशन ने लोगों का काफी ध्यान खींचा, स्टूडेंट्स, टीचर्स और स्पेस के शौकीन लोग लॉन्च देखने के लिए श्रीहरिकोटा में इकट्ठा हुए. बारिश के बावजूद लोग रॉकेट को उड़ान भरते देखने के लिए लॉन्च-व्यूइंग एरिया में मौजूद रहे. ई.ओ.एस.05 सैटेलाइट को पृथ्वी के बड़े हिस्सों का बार-बार ऑब्जर्वेशन करने और मौसम, खेती से जुड़े अपडेट वगैरह से जुड़ी जानकारी देने के लिए डिजाइन किया गया है।  स्पेसक्राफ्ट को जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट से ले जाया गया, जिसके पेलोड फेयरिंग में 4-मीटर डायमीटर का ओगिव कम्पोजिट कॉन्फ़िगरेशन है. इस व्हीकल का मिशन ई.ओ.एस.05 को सब-जीटीओ में रखना है, जिसके बाद सैटेलाइट के अपने ऑपरेशनल ऑर्बिट में पहुंचने की उम्मीद है।  ऐसे कक्षा से उपग्रह को पृथ्वी के बड़े हिस्सों का बार-बार अवलोकन करने और मौसम, खेती से जुड़े अपडेट वगैरह से जुड़ी जानकारी देने के लिए डिजाइन किया गया है. पिछले जीएसएलवी मिशन, जीएसएलवी-एफ16 ने जुलाई 2025 में नासा -इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार (NISAR) सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था. जीएसएलवी-एफ17 के सफल लॉन्च के साथ, इसरो ने एक बार फिर भारत के अर्थ ऑब्जर्वेशन प्रोग्राम को आगे बढ़ाते हुए अपने जीएसएलवी प्लेटफ़ॉर्म की क्षमताओं को दिखाया है। 

पानी की सप्लाई बंद होने से पहले मिलेगा SMS अलर्ट, दिल्ली जल बोर्ड शुरू करेगा नई सर्विस

नई दिल्ली  जिस तरह बिजली वितरण कंपनियां पावर कट या विलिंग संबंधित तमाम अपडेट्स उपभोक्ताओं को देती रहती है, उसी तरह जल बोर्ड ने भी उपभोक्ताओं को SMS के जरिए पानी संबंधित तमाम जानकारियां उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। पहले फेज में 20 लाख उपभोक्ताओं से बोर्ड SMS ब्रॉडकास्ट सर्विस शुरू करेगा। इस योजना के लिए जल्द ही एक प्राइवेट एजेंसी भी नियुक्त की जाएगी। SMS ब्रॉडकास्ट सर्विस नहीं होने के चलते शिकायतों की संख्या अधिक है। इससे जल बोर्ड के हेल्पलाइन नंबर पर भी बोझ अधिक बढ़ता जा रहा है। बिजली कंपनी की तरह पानी का एसएमएस आएगा जल बोर्ड अफसरों के अनुसार दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली वितरण कंपनियां अपने उपभोक्ताओं को बिजली संबंधित हर तरह की जानकारी SMS और वट्सऐप पर जारी करती है। बिजली बिल घर पर डिलीवर करने से कुछ दिन पहले बिजली कंपनियां सभी उपभोक्ताओं को बिजली बिलों के बारे में जानकारी भी देती है। इसी तरह जल बोर्ड भी अब अपने उपभोक्ताओं को SMS सर्विसेज उपलब्ध कराएगा। इसमें पानी व सीवर संबंधित नियोजित या अनियोजित मेटिनेस वर्क, पानी सप्लाई ठप होने, लाइनों में किसी तरह की खराबी आने और मेंटेनेंस के बाद पानी सप्लाई शुरू करने संबंधित तमाम जानकारियां उपभोक्ताओं के मोबाइल पर SMS के जरिए दी जाएगी। जल बोर्ड अफसरों का कहना है कि दिल्ली के नागरिकों के साथ तुरंत और बड़े पैमाने पर संवाद करने की नियमित आवश्यकता होती है। ऐसी सूचनाओं के प्रसार में देरी से नागरिकों को असुविधा होती है, जिससे हेल्पलाइन नंबर 1916 पर शिकायतों का बोझ बढ़ता है। अफसरों का कहना है कि ब्रॉडकास्ट SMS सर्विसेज के लिए किसी प्राइवेट कंपनी को हायर किया जाएगा। शुरुआत में 20 लाख उपभोक्ताओं से सर्विसेज की शुरुआत की जाएगी। ई-केवाईसी होने के बाद उपभोक्ताओं की संख्या करीब 60-62 लाख होने की उम्मीद है। इसके बाद SMS सर्विसेज का दायरा बाकी उपभोक्ताओं तक बढ़ाया जाएगा। सर्विस की शुरुआत अगले एक या डेढ़ महीने में किया जाएगा। 123 होटलों के बोरवेल होंगे सील नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त रुख के बाद दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने पहाड़गंज और आसपास के इलाको में भूजल के अवैध दोहन पर कार्रवाई तेज कर दी है। डीजेबी ने रिपोर्ट जमा करके बताया है कि इलाके में चिह्नित 555 होटल और गेस्ट हाउस में से 432 ने अपने बोरवेल पर डिजिटल वॉटर मीटर/पीजोमीटर लगा लिए है। वही, नियमों का पालन नहीं करने वाले 123 होटलों के बोरवेल सील करने की तैयारी है। DJB की रिपोर्ट के अनुसार, पिछली सुनवाई तक सिर्फ 162 होटल और गेस्ट हाउस मे मीटर लगाए गए थे। एनजीटी के सख्त रुख के बाद डीजेबी ने होटल असोसिएशनों के साथ बैठके की और लगातार फॉलो-अप किया। डीजेबी ने एनजीटी को बताया है कि भूजल निकासी की निगरानी आगे भी जारी रहेगी।  

हरियाणा वोटर लिस्ट SIR: नाम जोड़ने, हटाने और सुधार के लिए भरें ये फॉर्म, जानें कौन-से दस्तावेज जरूरी

चंडीगढ़ हरियाणा में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच अभी तक एक लाख 36 हजार 646 लोगों ने अपना नाम मतदाता सूचियों में जुड़वाने के लिए फार्म-6 भरा है। अयोग्य या मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से कटवाने के लिए 10 हजार 156 फार्म-7 भरे गए हैं, जबकि एक लाख छह हजार 671 मतदाताओं ने नाम-पते सहित अपनी अन्य जानकारी अपडेट करने के लिए फार्म-8 भरा है। त्रुटियां ठीक कराने के लिए अंतिम तिथि 31 अगस्त से बढ़ाकर 30 सितंबर की जा चुकी है। फार्म-6 और आठ में पिछले एसआईआर की मतदाता सूची का स्वयं या माता-पिता, दादा-दादी का विवरण भरना होता है। यदि किसी पात्र व्यक्ति के पास पिछले एसआईआर की मतदाता सूची का रिकॉर्ड/विवरण उपलब्ध नहीं है तो जन्म वर्ष के अनुसार अपने दस्तावेज फार्म 6 व फार्म 8 के साथ संलग्न अवश्य करें। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए श्रीनिवास ने बताया कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने या स्थानांतरण के लिए घोषणा पत्र भी जमा करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पुराना मतदाता रिकॉर्ड या संबंधित दस्तावेज उपलब्ध न होने के आधार पर किसी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जा सकता। मतदाता की पात्रता का परीक्षण निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया जाएगा। जिन मतदाताओं का पिछली एसआईआर सूची से मिलान नहीं हुआ है, उन्हें अपनी पात्रता के साक्ष्य के रूप में दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। यदि किसी व्यक्ति का जन्म भारत में एक जुलाई 1987 से पहले हुआ है तो दस्तावेज सूची में से स्वयं का कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता है। एक जुलाई 1987 से दो दिसंबर 2004 के बीच जन्मे मतदाताओं को अपना तथा अपने माता-पिता में से किसी एक का दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। दो दिसंबर 2004 के बाद जन्मे मतदाताओं को स्वयं का, अपने पिता तथा अपनी माता का दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। यदि माता-पिता भारतीय नहीं हैं, तो जन्म के समय के उनके वैध वीजा तथा पासपोर्ट की प्रति प्रस्तुत करनी होगी। अगर किसी व्यक्ति का जन्म भारत के बाहर हुआ है तो भारतीय मिशन द्वारा जारी किया गया जन्म पंजीकरण संलग्न करना होगा। यदि पंजीकरण द्वारा भारतीय नागरिकता प्राप्त की है तो नागरिकता पंजीकरण प्रमाणपत्र संलग्न करना होगा। यह दस्तावेज होंगे मान्य     किसी केंद्रीय/राज्य/ पीएसयू के नियमित कर्मचारी/पेंशनभोगी को जारी कोई पहचान पत्र/ पेंशन भुगतान आदेश     एक जुलाई 1987 से पहले भारत में सरकार/स्थानीय प्राधिकरण/बैंक/डाकघर/ एसलआइसी/पीएसयू द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र/ प्रमाण पत्र/दस्तावेज     सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र     पासपोर्ट     मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैटिक परीक्षा/ शैक्षणिक प्रमाण-पत्र     सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण-पत्र     वन अधिकार प्रमाण-पत्र     सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी/एससी/एसटी या कोई भी जाति प्रमाणपत्र     राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, जहां भी यह प्रचलन में हो     राज्य/स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर     सरकार द्वारा कोई भी भूमि/ मकान आवंटन प्रमाणपत्र     आधार के लिए चुनाव आयोग के माध्यम से जारी अनुदेश लागू होंगे।

मोरहाबादी में आज गूंजेगा जय श्रीकृष्ण! दही हांडी, भजन संध्या और रासलीला का होगा भव्य आयोजन

 रांची दो दिवसीय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का शुभारंभ बाल गोपाल-बाल राधा पोशाक प्रतियोगिता के साथ चिरौंदी मोरहाबादी स्थित गीतांजली बैंक्वेट हाल में शुरू हो गई। कांके विधायक सुरेश बैठा ने दीप जलाया। इस अवसर पर श्री कृष्ण जन्माष्टमी आयोजन समिति मोरहाबादी के मुख्य संरक्षक राजीव रंजन प्रसाद, अध्यक्ष बिनोद गोप, संरक्षक डॉ राजेश गुप्ता छोटू, कार्यकारी अध्यक्ष राहुल सिंह, महासचिव मनोज गुप्ता, विजय शर्मा, राजेश गुप्ता सचिव रोहित सिंह उपस्थित थे। आज चार सितंबर को ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में दही हांडी का आयोजन होगा। भजन संध्या एवं रासलीला का मंचन किया जाएगा। सुरेश बैठा ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को लेकर रांचीवासियों में खासा उत्साह है। इस वर्ष दो दिवसीय आयोजन में बच्चों से लेकर युवाओं और श्रद्धालुओं के लिए श्री कृष्ण जन्मोत्सव आयोजन समिति द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शहर वासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं मुख्य संरक्षक राजीव रंजन प्रसाद ने भी तमाम राज्यवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि इस आयोजन को पहले भी लोगों का प्यार और समर्थन मिलता रहा है जो ऐसे भव्य आयोजन के लिए प्रेरणा देता है lसंरक्षक डा राजेश गुप्ता ने भी शहर वासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं l गोपाल एवं बाल राधा पोशाक प्रतियोगिता 0 से 5 वर्ष एवं 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे बाल गोपाल एवं बाल राधा की पोशाक ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में जज की भूमिका में शहर की प्रख्यात फैशन डिजाइनर स्मृति राजीव, अंशिका कुमारी और राम सिंह ने उपस्थित बच्चों के परिधान एवं अन्य पहलुओं का मूल्यांकन किया l मोरहाबादी मैदान में दही हांडी का आयोजन प्रतिभागी बच्चों के अभिभावकों ने भी कार्यक्रम में सहयोग दिया l प्रतियोगिता के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय विजेताओं को 4 सितंबर को मोरहाबादी मैदान स्थित दही हांडी आयोजन स्थल पर माननीय मुख्यमंत्री द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा।  

‘बेबी बॉस’ पर BCCI की खास नजर, वैभव सूर्यवंशी समेत 10-15 युवा खिलाड़ियों का बनेगा भविष्य

नई दिल्ली महज 15 साल की उम्र में क्रिकेट जगत में अपनी पहचान बनाने वाले वैभव सूर्यवंशी को लेकर भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने बड़ा रोडमैप तैयार किया है. बोर्ड अब 'बेबी बॉस' के मौजूदा प्रदर्शन के बजाय उनके लंबे इंटरनेशनल करियर पर ध्यान दे रहा है. बीसीसीआई चाहता है कि वैभव अपनी प्रतिभा को सही दिशा में आगे बढ़ाएं और आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट के लिए लगातार योगदान दें l   गुरुवार (3 सितंबर) को मुंबई में हुई बीसीसीआई की हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग के बाद सचिव देवजीत सैकिया ने वैभव के भविष्य को लेकर बोर्ड की सोच स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि बीसीसीआई इस युवा खिलाड़ी को बेहद गंभीरता से देख रहा है और उसके करियर के हर कदम पर नजर रखी जा रही है l   देवजीत सैकिया ने कहा, 'हम चाहते हैं कि वैभव सूर्यवंशी या उनके जैसे किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी का करियर आगे बढ़े और वह सचिन तेंदुलकर या अतीत के दूसरे दिग्गज खिलाड़ियों की तरह लंबे समय तक देश की सेवा करें l   वैभव पर दबाव ना बने: सैकिया देवजीत सैकिया ने यह भी स्पष्ट किया कि बोर्ड वैभव से तुरंत नतीजे हासिल करने के बजाय उनके विकास को प्राथमिकता दे रहा है. बीसीसीआई की कोशिश है कि कम उम्र में मिली सफलता के बाद वैभव पर जरूरत से ज्यादा दबाव ना आए और वह लगातार अपने खेल में सुधार करते रहें l देवजीत सैकिया कहते हैं, 'हम बहुत सावधानी बरत रहे हैं कि वह हर सही कदम आगे बढ़ाएं, ताकि यह सिर्फ एक सीरीज या एक साल की कहानी बनकर न रह जाए.' IPL (इंडियन प्रीमियर लीग) 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टीम में जगह मिली. इसके बाद वैभव भारत के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने. इंग्लैंड के खिलाफ T20I सीरीज में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने जिम्बाब्वे के खिलाफ तीन मैचों की सीरीज में 151 रन बनाकर जोरदार वापसी की l घरेलू क्रिकेट में भी वैभव सूर्यवंशी का शानदार फॉर्म जारी है. दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में उन्होंने सेंट्रल जोन के खिलाफ 81 गेंदों में 92 रन बनाए. इस पारी के दौरान वह टूर्नामेंट के इतिहास में अर्धशतक लगाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बने. दूसरी पारी में भी उन्होंने 40 रन बनाए और ईस्ट जोन को फाइनल में पहुंचाने में योगदान दिया l वैभव एक खास टागेट ग्रुप में बीसीसीआई की योजना केवल वैभव सूर्यवंशी तक सीमित नहीं है. देवजीत सैकिया के मुताबिक बोर्ड ने करीब 10-15 उभरते खिलाड़ियों को एक खास टारगेट ग्रुप में रखा है. इन खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट की लगातार निगरानी की जा रही है l देवजीत सैकिया ने बताया, 'हम सिर्फ वैभव को नहीं देख रहे हैं. हमारे टारगेट ग्रुप में करीब 10-15 खिलाड़ी हैं. सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण उनके भविष्य, ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं. l वैभव सूर्यवंशी फिलहाल 13 सितंबर से शुरू होने वाली अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की T20I सीरीज के लिए भारतीय टीम का हिस्सा हैं. इसके अलावा वह एशियन गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय टीम में भी शामिल हैं, जहां वीवीएस लक्ष्मण हेड कोच की भूमिका निभाएंगे l

Dyson ने लॉन्च किया AI वाला CameraJet टूथब्रश, कैमरा देखकर खुद साफ करेगा दांतों के गैप

Dyson ने एक बेहद ही कमाल का इलेक्ट्रिक टूथब्रश लॉन्च किया है, जिसका नाम CameraJet इलेक्ट्रिक टूथब्रश है. इसमें कैमरा, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) और माउथवॉश जेट सिस्टम लगाया गया है l कंपनी ने इसको माउथ की फुल क्लीनिंग सॉल्यूशन के तौर पर लॉन्च किया है, जहां यूजर्स फोन में दांतों की कंडीशन देख सकते हैं और उन्हें साफ रखने में मदद कर सकते हैं l Dyson ने न्यू लॉन्च ब्रश की कीमत 499.99 अमेरिकी डॉलर (करीब 47,000 रुपये) रुपये रखी है. अभी इसको पेरिश में लॉन्च किया है. भारत समेत अन्य मार्केट में कब तक लॉन्च होगा, उसकी जानकारी आने वाले दिनों में पता चलेगी l कैमरा, AI से क्या होगा फायदा? डायसन के इस ब्रश के अंदर बिल्ट-इन कैमरा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एक माउथवॉश जेट दिया है. यह ब्रश दांतों के बीच की जगह को भी आसानी से साफ करने में मदद करेगा l डायसन ने CameraJet इलेक्ट्रिक टूथब्रश को तैयार करने में छह साल का रिसर्च और डेवलपमेंट तक का काम किया है. ब्रश हेड के अंदर 1,00,000 पिक्सल मैक्रो कैमरा है. यह ब्रशिंग के दौरान हर सेकेंड में 28 इमेज को कैप्चर कर सकता है l Dyson का गैप ऑप्टीकल टारगेटिंग सिस्टम ब्रश के सिस्टम को जब भी कोई गैप डिटेक्ट होता है, Dyson का गैप ऑप्टीकल टारगेटिंग सिस्टम माउथवॉश की एक छोटी की धार छोड़ता है. कंपनी ने बताया है कि यह सिस्टम सिर्फ 100 मिलीसेकंड में एक्टिव हो जाता है l MyDyson ऐप से कनेक्ट होता है डायसन का इलेक्ट्रिक ब्रश वाईफाई और ब्लूटूथ के जरिए MyDyson ऐप से भी कनेक्ट होता है. ऐप की मदद से यूजर्स अपने मुंह के अंदर का वीडियो देख सकते हैं. साथ ही दातों की कंडीशन या फिर कोई इंफेक्शन आदि को चेक कर सकते हैं l Dyson ने बताया है कि यूजर्स की प्राइवेसी का ध्यान रखा है और कंपनी ने बताया है कि टूथब्रर्श कैमरा केवल लाइव व्यू देखने या ऑटोमैटिक जेटिंग के दौरान ही एक्टिव होता है. साथ ही तस्वीरें न तो रिकॉर्ड की जाती हैं और न ही टूथब्रश या क्लाउड में स्टोर होती हैं l

190 प्रतिष्ठानों पर सीलिंग के बाद अचानक थमी कार्रवाई, रहवासियों ने कोर्ट में पेश किए दस्तावेज

भोपाल  राजधानी भोपाल में सीलिंग और नोटिस देने के हो रहे विरोध के बाद नगर निगम ने कार्रवाई रोक दी है। तीन दिन में 190 सीलिंग की गई थी, लेकिन चौथे दिन जीरो यानी, एक भी सीलिंग नहीं की गई। अफसर कार्रवाई करने से बचते रहे। उधर, नगर निगम, नगरीय प्रशासन और रहवासी अपने-अपने तर्क रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे हैं। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने बताया, रहवासियों ने अरेरा कॉलोनी के जिन अवैध मॉलों की शिकायतें की थीं, उन पर अब तक सिलिंग की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। दूसरी ओर, नगर निगम छोटे व्यापारियों पर कार्रवाई कर रहा है। इसे लेकर नाराजगी है। इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर सभी दस्तावेज प्रस्तुत कर निगम की पक्षपात पूर्ण कार्रवाई की मांग की है। ताकि, न्यायालय से दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो सके। नगरीय प्रशासन, निगम कमिश्नर भी दिल्ली में रहवासी इलाकों में कारोबार के इस मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। इसमें निगम मोहलत मांग सकता है। नगरीय आवास एवं प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी दिल्ली में है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार और निगम की ओर से पक्ष रखने के लिए वे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से भी मिले हैं। तीन दिन में इतनी हुई थी सीलिंग 31 अगस्त को निगम ने कुल 109 प्रतिष्ठानों को बंद कराया था। 1 सितंबर को संख्या घटकर 61 पर आ गई। वहीं, 2 सितंबर को सिर्फ 20 सीलिंग हुई। कुल आंकड़ा 190 पर पहुंच गया। चौथे दिन 3 सितंबर को शहर में कहीं भी सीलिंग नहीं की गई। अधिकारियों ने बताया कि हाईकोर्ट में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर टीम लगी रही। इसलिए सीलिंग की कार्रवाई नहीं की गई। मंत्री विजयवर्गीय बोले- भोपाल का मास्टर प्लान जल्दी जारी होगा कार्रवाई को लेकर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने माना कि सीलिंग की कार्रवाई से पूरे भोपाल के व्यापारी परेशान हो रहे हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि नगरीय प्रशासन विभाग के सभी बड़े अधिकारी फिलहाल दिल्ली में हैं। इस मामले में उच्चतम वकीलों के साथ चर्चा की जाएगी और कोई न कोई ऐसा रास्ता निकाला जाएगा, जिससे भोपाल के लोगों को कोई नुकसान ना हो। मंत्री ने कहा कि भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर भी चर्चा चल रही है। इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा। सीलिंग कार्रवाई के बीच मास्टर प्लान को लेकर सरकार के स्तर पर होने वाली चर्चा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 8 हजार दुकानदारों को दे चुका नोटिस बता दें कि नगर निगम एक महीने के अंदर 8 हजार से ज्यादा नोटिस जारी कर चुका है। पिछले दिनों 24 घंटे के नोटिस दिए गए। इनमें स्पष्ट लिखा कि रहवासी भवन में कमर्शियल एक्टिविटी बंद कर लें, वरना सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में कई प्रतिष्ठानों पर स्वैच्छा से बंद करने के पोस्टर-बैनर भी लगा दिए गए। सुप्रीम कोर्ट में चल रहा मामला भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के पहले सप्ताह में सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को बड़ा झटका देते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही इस मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले सभी राहत आदेश (स्टे ऑर्डर) निरस्त कर दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। इस दौरान नगर निगम को कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करना है। इसके चलते ही नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, पिछले चार दिन से व्यापारियों को नोटिस नहीं दिए गए हैं। अफसरों का कहना है कि नोटिस देने के बाद परीक्षण किया जा रहा है।

मणिमहेश में शाही स्नान को लेकर श्रद्धालुओं की भारी भीड़, रात 12:14 बजे तक रहेगा शुभ मुहूर्त

मणिमहेश  उत्तर भारत की पवित्र मणिमहेश यात्रा में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान शिव के धाम मणिमहेश पहुंच रहे श्रद्धालु पवित्र ‘डल झील’ में सुबह से ही आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। इस मौके पर हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और जम्मू से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु पवित्र झील में स्नान कर भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मणिमहेश यात्रा 2026 आधिकारिक तौर पर 19 सितंबर तक चलेगी। मणिमहेश झील समुद्र तल से करीब 13 हजार फीट की ऊंचाई पर कैलाश पर्वत की तलहटी में स्थित है। जिला चंबा प्रशासन के अनुसार, कैलाश चोटी की ऊंचाई करीब 18,564 फीट है। मणिमहेश को भगवान शिव का प्रमुख तीर्थ माना जाता है और यहां हर साल हजारों श्रद्धालु पवित्र डल झील में स्नान के लिए पहुंचते हैं। हड़सर से 13 किलोमीटर पैदल चढ़ाई मणिमहेश पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को हड़सर से करीब 13 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करना पड़ता है। हड़सर तक वाहन पहुंचते हैं। इसके बाद यात्रा पैदल शुरू होती है। रास्ते में धनछो प्रमुख पड़ाव है, जहां श्रद्धालु विश्राम करते हैं। इसके आगे चढ़ाई पार कर मणिमहेश डल झील तक पहुंचा जाता है। झील से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले गौरी कुंड और शिव क्रोत्री भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल हैं। मान्यता के अनुसार, गौरी कुंड और शिव क्रोत्री में क्रमश: माता पार्वती और भगवान शिव ने स्नान किया था। ज्यादातर श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हैं, मगर काफी लोग हेलीटैक्सी से भी मणिमहेश पहुंचते हैं। प्रशासन ने इस बार चार हेलीटैक्सी के साथ मणिमहेश यात्रा के लिए करार किया है। राधाष्टमी पर होगा बड़ा शाही स्नान जन्माष्टमी के शाही स्नान के बाद अब श्रद्धालुओं की नजर राधाष्टमी पर होने वाले बड़े शाही स्नान पर है। यह 18 और 19 सितंबर को होगा। मणिमहेश यात्रा का यह सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पड़ाव माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इस बार मौसम भी दे रहा साथ यात्रा के दौरान इस बार मौसम श्रद्धालुओं का साथ दे रहा है। मौसम अनुकूल रहने से पैदल ट्रैक पर आवाजाही सुगम बनी हुई है। प्रशासन भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर निगरानी कर रहा है। एसडीएम भरमौर अजय कुमार सिंह ने बताया कि जन्माष्टमी के शाही स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचे हैं। डल झील में शाही स्नान चल रहा है। पिछले साल भारी बारिश और बादल फटने के कारण मणिमहेश यात्रा के दौरान काफी मुश्किलें आई थीं। 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु भरमौर से मणिमहेश के रास्ते में फंस गए थे। यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य प्रशासन ने इस बार मणिमहेश यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया है। श्रद्धालुओं को भरमौर पहुंचने से पहले पंजीकरण कराने और उसकी रसीद साथ रखने की सलाह दी गई है। हड़सर बेस कैंप पर स्वास्थ्य जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे यात्रा की अनुमति दी जाती है। प्रशासन ने यात्रियों से मौसम को देखते हुए गर्म कपड़े, रेनकोट, छाता, टॉर्च और उचित जूते साथ रखने की अपील की है। यात्रा का मुख्य आकर्षण भगवान शिव के धाम मणिमहेश में पवित्र डल झील में स्नान है। जन्माष्टमी के शाही स्नान के बाद अब 18-19 सितंबर को होने वाले बड़े शाही स्नान को लेकर भी प्रशासन और श्रद्धालुओं में उत्साह है।