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भाजपा नेता चेतन भार्गव ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को दी जन्मदिवस की शुभकामनाएं

भाजपा नेता चेतन भार्गव ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को दी जन्मदिवस की शुभकामनाएं भोपाल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं भोपाल भाजपा के जिला महामंत्री चेतन भार्गव ने भारतीय जनता पार्टी मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को जन्मदिवस के अवसर पर आत्मीय शुभकामनाएं एवं बधाई प्रेषित की। इस अवसर पर भार्गव ने भगवान श्रीराम एवं इष्टदेव से प्रदेश अध्यक्ष के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की मंगलकामना की। चेतन भार्गव ने प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल को धार्मिक चित्र भेंट कर उनका अभिनंदन किया। आत्मीय भेंट के दौरान संगठनात्मक विषयों तथा प्रदेश में भाजपा के विस्तार और जनकल्याणकारी कार्यों को लेकर भी चर्चा हुई। संगठन के प्रति समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पहचान चेतन भार्गव लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक कार्यों से जुड़े हुए हैं और भोपाल में सक्रिय भाजपा नेता के रूप में अपनी अलग पहचान रखते हैं। संगठन के विभिन्न अभियानों, जनसंपर्क कार्यक्रमों और पार्टी की गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। वे बूथ एवं विधानसभा स्तर के संगठनात्मक कार्यों में भी दायित्व निभा चुके हैं। पूर्व में उन्हें लोकसभा एवं विधानसभा प्रभारी सहित विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।  भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता को देखते हुए मई 2026 में चेतन भार्गव को भाजपा जिला भोपाल का महामंत्री नियुक्त किया गया। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से हुए जिला संगठन के विस्तार में उन्हें यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया था।  हाल ही में पार्टी द्वारा चलाए गए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भी चेतन भार्गव को भोपाल जिले का प्रभारी दायित्व सौंपा गया, जो संगठन के प्रति उनकी सक्रियता और कार्यक्षमता में पार्टी के विश्वास को दर्शाता है।  सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय चेतन भार्गव भाजपा के संगठनात्मक दायित्वों के साथ-साथ सामाजिक एवं जनहित के विषयों को लेकर भी सक्रिय रहते हैं। पुराने भोपाल के विभिन्न जनसरोकारों तथा नागरिक समस्याओं से जुड़े मुद्दों में उनकी सहभागिता सामने आती रही है।  हेमंत खंडेलवाल को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए चेतन भार्गव ने कहा कि “प्रदेश अध्यक्ष के रूप में हेमंत जी के कुशल नेतृत्व में मध्यप्रदेश भाजपा संगठन नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। उनके नेतृत्व में संगठन और अधिक सशक्त एवं प्रभावी होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प तथा प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में सफल होगा।” इस अवसर पर भार्गव ने प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं सफल संगठनात्मक कार्यकाल की मंगलकामना की।

बलूचिस्तान में BLA का बड़ा हमला, 25 PAK सैनिकों की मौत का दावा; हथियार लेकर भागे हमलावर

बलोचिस्तान     पाकिस्तान के बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ दो अलग-अलग हमलों को लेकर बलोच लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने बड़ा दावा किया है. संगठन का कहना है कि 3 सितंबर को हुए इन हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के 25 जवान मारे गए।  BLA के मुताबिक, पहला हमला जियारत क्रॉस के पास पाकिस्तानी सेना के एक काफिले को निशाना बनाकर किया गया. संगठन ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने काफिले की दो गाड़ियों को नष्ट कर दिया और इस हमले में 18 सुरक्षाकर्मी मारे गए. BLA का कहना है कि पांच घायल जवान वहां से भागने में कामयाब रहे, जबकि हमलावरों ने हथियार भी अपने कब्जे में ले लिए।  संगठन ने दूसरे हमले का दावा सुराब के हाजीका इलाके में किया. BLA के मुताबिक, यहां उसके एसटीओएस ने रिमोट कंट्रोल से संचालित वाहन में विस्फोट किया. इस हमले में सात सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने का दावा किया गया है. BLA ने जियारत क्रॉस पर हुए हमले में अपने फतेह स्क्वाड के शामिल होने की बात कही है. संगठन ने दोनों हमलों की जिम्मेदारी भी ली है।  जियारत क्रॉस पर सैन्य काफिले को बनाया निशाना BLA के प्रवक्ता के मुताबिक, उसके लड़ाकों ने जियारत क्रॉस के पास एक सैन्य काफिले को निशाना बनाया। हमले में सैन्य वाहनों को निशाना बनाया गया और इनमें से दो वाहन नष्ट हो गए, जिनमें एक सैन्य ट्रक भी शामिल था। संगठन ने शुरुआत में इस हमले में 18 सैन्यकर्मियों के मारे जाने का दावा किया था। बाद में उसने मृतकों की संख्या बढ़ाकर 25 कर दी। BLA ने अपने आधिकारिक मीडिया चैनल हक्कल के जरिए एक मिनट 11 सेकंड का वीडियो ट्रेलर भी जारी किया। संगठन का कहना है कि इसमें जियारत क्रॉस हमले की तस्वीरें हैं। जारी किए गए फुटेज में कथित तौर पर जलते हुए पाकिस्तानी सैन्य वाहनों के पास हथियारबंद लड़ाके नजर आते हैं। मौके पर शव और हथियार भी दिखाई देने का दावा किया गया है। BLA ने कहा है कि वह बाद में इस हमले का पूरा वीडियो जारी करेगा। सुराब के हाजीका इलाके में भी हमला BLA के बयान के मुताबिक, दूसरा हमला सुराब के हाजीका इलाके में किया गया। संगठन की स्पेशल टैक्टिकल ऑपरेशंस स्क्वाड (STOS) ने विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी को दूर से विस्फोट कर दिया। BLA के अनुसार, इस हमले में एक सैन्य वाहन नष्ट हुआ और सात सैन्यकर्मी मारे गए। दोनों हमलों में कुल 25 सैन्यकर्मियों के मारे जाने का दावा BLA की ओर से किया गया है। बलूचिस्तान में 21 आतंकवादी मारे गए इससे पहले पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को दावा किया था कि उसके अशांत बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों और विद्रोहियों के बीच हुई दो अलग-अलग झड़पों में कम से कम 21 आतंकवादी मारे गए हैं। सेना ने एक बयान में कहा कि ये घटनाएं सोमवार रात चगाई जिले के नोकचा और पिशिन जिले के जियारत चौराहे पर हुईं, जिनमें सुरक्षा बल के पांच जवान और सीमा शुल्क विभाग का एक अधिकारी भी मारा गया। इसमें कहा गया है कि सुरक्षा बलों की प्रभावी जवाबी कार्रवाई में 'फितना-अल-खवारिज' से जुड़े 21 आतंकवादी मारे गए। 'फितना-अल-खवारिज' वह शब्द है जिसका इस्तेमाल सरकार प्रतिबंधित संगठन 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (टीटीपी) के लिए करती है। पहली घटना में, आतंकवादियों ने जबरन वसूली के लिए एन-40 क्वेटा-ताफ्टन राजमार्ग पर एक अवैध जांच चौकी बनाकर यात्रियों की आवाजाही में बाधा डालने की कोशिश की। पाकिस्तान ने नहीं की सैनिकों के मारे जाने की पुष्टि इन हमलों में 25 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने के BLA के दावे की फिलहाल पाकिस्तानी अधिकारियों या किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है. BLA इससे पहले भी पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों पर किए गए हमलों में बड़ी संख्या में जवानों के मारे जाने का दावा करता रहा है।  बलोचिस्तान में लगातार बढ़ रही हिंसा बलोचिस्तान में अलगाववादी संगठन BLA लंबे समय से पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों के खिलाफ सशस्त्र अभियान चला रहा है. अगस्त 2026 में भी BLA ने 9 से 15 अगस्त के बीच आठ दिनों में 22 समन्वित हमले करने का दावा किया था. संगठन ने इन हमलों में 26 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की बात कही थी।  अगस्त के अंत में मस्तुंग के पास एक सैन्य काफिले पर IED हमले को लेकर भी BLA ने 13 सैनिकों को मारने का दावा किया था. वहीं जुलाई 2026 में ग्वादर कोस्ट गार्ड कैंप पर आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी BLA की मजीद ब्रिगेड ने ली थी और 30 से ज्यादा पैरामिलिट्री जवानों के मारे जाने का दावा किया था। 

बाढ़ का पानी उतरा तो सामने आई तबाही, चित्रकूट में घर-दुकानें कीचड़ से पटीं; बिजली बहाली जारी

 चित्रकूट सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के पांच दिन में तीन बार उफान पर आने के बाद अब बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन पीछे तबाही छोड़ गया है। गलियों, दुकानों और घरों में मिट्टी और कीचड़ जमा है। कई परिवारों की गृहस्थी बर्बाद हो गई, जबकि दुकानदारों का लाखों का सामान खराब हो गया। अरे भइया, हम तो रजौला से कर्वी तक किए गए अवैध कब्जों के कारण मंदाकिनी नदी के कोप का भाजन साल के 365 दिन बनते हैं। अभी बाढ़ है तो देखिए बरवारा डायवर्जन नहर दो जगह फटने से फसलें जलमग्न हैं। गर्मी में सूखा झेलते हैं। पानी बढ़ा और नहरें ओवरफ्लो हुईं तो फिर नुकसान तय है। मंदाकिनी दोहरी मुसीबत बन गई है। बाढ़ में डुबोती है तो गर्मी में रुलाती है। ये दर्द बंधोइन बंधे के पास बाढ़ की विभीषिका देखने पहुंचे ग्रामीण राजेश कुमार का है। यही व्यथा-कथा बंधोइन व आसपास के गांवों के हर ग्रामीण की भी है। कारण, बंधोइन बंधा ही है, जो चित्रकूट की चार पुरानी जल परियोजनाओं के साथ मंदाकिनी के जल को गर्मी में भी बचाए रखता है व 25 हजार एकड़ कृषि भूमि की सिंचित करने में मदद करता है। बाढ़ व सूखे से बचने को बंधोइन से कनकोटा गांव में मंदाकिनी के यमुना में मिलने तक आवश्यकता एक बड़े बांध की है, जो इस क्षेत्र के 60 गांवों को नया जीवन दे सकता है, जिनमें बाढ़ के पानी से अभी त्राहिमाम है। बांध बनने से बाढ़ का संकट खत्म होगा तो गर्मी में सूखा खत्म होगा व सिंचाई के लिए आत्मनिर्भरता आएगी। पानी इतनी तेजी से आया, घर और दुकान दोनों नहीं बचा पाई आरोग्यधाम में जनरल स्टोर और कपड़ों की दुकान चलाने वाली ममता शर्मा ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि जरूरी सामान दूसरी मंजिल तक पहुंचाने का समय नहीं मिला। घर और दुकान में रखा सामान पानी और कीचड़ की चपेट में आकर खराब हो गया। पुरानी लंका तिराहे पर फुटवियर दुकान चलाने वाले जितेंद्र ने गुरुवार को शटर खोला तो अंदर टूटा काउंटर, बिखरी अलमारी और कीचड़ में सने जूते-चप्पल मिले। उनके मुताबिक करीब 3 लाख रुपए का सामान बर्बाद हुआ है। खाना मिल रहा, लेकिन सफाई के लिए पानी नहीं बाढ़ प्रभावित लोगों तक प्रशासन, मठ-मंदिरों और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से भोजन-पानी पहुंचाया जा रहा है। लोगों को राहत व्यवस्था से शिकायत नहीं है, लेकिन अब सबसे बड़ी जरूरत सफाई के पानी की है। एमपीटी चौराहे पर चाय-नाश्ते का होटल चलाने वाली पूनम ने बताया कि बाढ़ में काफी सामान बह गया। जो सामान बचा है और होटल में जमा गंदगी, उसे साफ करने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है। समाजसेवी रामशिरोमणि शर्मा ने बताया कि घरों और होटलों में कीचड़ भरा है। नदी से पानी लाकर सफाई करना संभव नहीं है और नगर परिषद के कर्मचारी भी कई जगह नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने सफाई की बड़ी चुनौती बनी हुई है। मुख्य सड़क साफ, अब गलियों में युद्ध स्तर पर सफाई गुरुवार को चित्रकूट की स्थिति में कुछ सुधार नजर आया। बाढ़ के दौरान बंद पड़ी मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। सड़क पर जमा कचरा और कीचड़ भी काफी हद तक हटाया जा चुका है। जिला प्रशासन का बड़ा अमला पिछले पांच दिनों से चित्रकूट में मौजूद है। राहत और बचाव के बाद अब शहर को सामान्य स्थिति में लाने पर फोकस है। मुख्य सड़क के बाद मोहल्लों और गलियों में सफाई तेज कर दी गई है। कीचड़ हटाने के साथ मलबा उठाया जा रहा है। 1275 में से 709 घरों की बिजली बहाल बाढ़ और बारिश से बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई थी। चित्रकूट वितरण केंद्र के 19 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए। इनमें से 11 ट्रांसफॉर्मर गुरुवार तक ठीक कर दिए गए, जबकि बाकी 8 पर काम जारी है। कुल 1275 प्रभावित उपभोक्ताओं में से 709 की बिजली सप्लाई बहाल हो चुकी है। 566 उपभोक्ताओं के घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं। बारिश और कीचड़ के बीच बिजलीकर्मी नेटवर्क को जल्द सामान्य करने में जुटे हैं। पांच दिन बाद निकली धूप, लोगों को मिली उम्मीद गुरुवार शाम करीब 4 बजे पांच दिन बाद कुछ देर के लिए सूरज बादलों के पीछे से बाहर आया। लगातार बारिश और बाढ़ के बीच यह धूप लोगों के लिए राहत की खबर बनी। गुरुवार को बारिश नहीं होने से प्रशासन को भी सफाई और बहाली के काम में तेजी लाने का मौका मिला।  मंदाकिनी में बाढ़ व उसके कारणों को तलाशते चार दिवसीय समाचारीय शृंखला की तीसरी कड़ी में बंधोइन से यमुना के संगम तक 38 किलोमीटर क्षेत्र में की पड़ताल की गई। बंधोइन बंधा युवाओं का बड़ा सेल्फी प्वाइंट भी है। इसलिए यहां दिन भर 50 से युवक रहते ही हैं। इस बंधे के कारण ऊपर पानी रुकने से कर्वी में इंटकवेल, मानिकपुर क्षेत्र में सुदूर फैली विंध्य पर्वतमाला में कभी डकैतों के शरणगाह रहे पाठा के पौने दो लाख कोल आदिवासियों को पानी उपलब्ध कराने वाली झांसी-मीरजापुर हाईवे पर कर्वी पुल घाट के पास वर्ष 1932 में अस्तित्व में आई पाठा जलकल योजना संचालित है। बनकट पंप कैनाल से निकली नहरों व बरवारा डायवर्जन नहर से गांवों की 25 हजार एकड़ जमीन सिंचित होती है। हालांकि, बंधा 60 गांवों को बाढ़ की विभीषिका देता है तो गर्मी में इन्हीं गांवों के लिए सूखे के हालात पैदा करता है, क्योंकि तब इतना पानी भी इसके ऊपर से आगे नहीं बढ़ पाता है कि जल धारा भी दिखाई पड़ सके। बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह कहते हैं कि ये बंधा हटाने की मांग यदाकदा उठती है पर इसे हटाना श्रेयष्कर नहीं होगा, क्योंकि तब फिर इसके माध्यम से चल रही चारों जल परियोजनाएं दम तोड़ देंगी। गर्मी में नदी का जल आचमन योग्य भी नहीं रहेगा। वर्तमान में बाढ़ का असर इन क्षेत्रों में है। किसान त्राहिमाम कर रहे हैं। बंधोइन माता का मंदिर भी भीषण बाढ़ में इस बार डूब गया था। मान्यता है कि मंदाकिनी की बाढ़ से बंधोइन माता ही रक्षा करती हैं। इससे साफ है कि मंदाकिनी के इस क्षेत्र में तटबंध और मजबूत करने की आवश्यकता … Read more

सरकारी कर्मचारियों को बड़ा झटका और महिलाओं को राहत! ट्रेनिंग बॉन्ड से लेकर चाइल्ड केयर लीव तक बदले नियम

बीकानेर सरकारी नौकरी में नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण लेकर जल्द सेवा छोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने नियम सख्त कर दिए है। वहीं महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव और सरोगेसी के मामले में राहत दी गई है। नए नियम के तहत राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद स्वतंत्र प्रभार संभालने से पहले निर्धारित प्रशिक्षण लेने वाले कर्मचारी को प्रशिक्षण शुरू होने से पहले बॉन्ड देना होगा। प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण पूरा होने के दो वर्ष के भीतर इस्तीफा देने अथवा दूसरी नौकरी स्वीकार करने पर सरकार प्रशिक्षण पर किए गए खर्च और अन्य प्रशिक्षण संबंधी खर्च की वसूली कर सकेगी। हालांकि, वसूली में कर्मचारी को दिया गया वेतन तथा नियमानुसार मिले यात्रा एवं दैनिक भत्ते शामिल नहीं होंगे। यदि कर्मचारी को केंद्र सरकार, किसी अन्य राज्य सरकार, केंद्र या राजस्थान सरकार के पूर्ण अथवा आंशिक स्वामित्व वाले सार्वजनिक उपक्रम, क्वासी-गवर्नमेंट संगठन, आरबीआई या ग्रामीण बैंक में नौकरी मिलती है और इसके लिए राजस्थान सरकार की सेवा छोड़नी पड़ती है, तो बॉन्ड की शर्त उसी रूप में लागू नहीं होगी। ऐसे कर्मचारी से नए नियोक्ता के यहां निर्धारित अवधि तक सेवा करने के लिए नया बॉन्ड लिया जाएगा। अवधि और शर्ते संबंधित प्रशासनिक विभाग तय करेगा। 6 माह तक की ट्रेनिंग पर 1 साल की सेवा जरूरी तीन महीने से अधिक अवधि के प्रशिक्षण पर भेजे गए और नियम 7 (8) (बी) के तहत ड्यूटी पर माने गए कर्मचारियों पर भी बॉन्ड की शर्त लागू होगी। 3 महीने से अधिक और 6 महीने तक के प्रशिक्षण के बाद कम से कम एक वर्ष राज्य सेवा करनी होगी। 6 महीने से अधिक के प्रशिक्षण के बाद कम से कम दो वर्ष राज्य सेवा करनी होगी। निर्धारित अवधि पूरी किए बिना सेवा छोड़ने या दूसरी नौकरी स्वीकार करने पर प्रशिक्षण पर हुए खर्च की वसूली का प्रावधान रहेगा। पहले से आवेदन किया है, तो भी मिल सकेगी अनुमति यदि किसी ने राजस्थान सरकार की सेवा में आने से पहले ही केंद्र सरकार, अन्य राज्य सरकार, सरकारी उपक्रम या संबंधित संस्थाओं में आवेदन कर रखा था और उस समय आवेदन उचित माध्यम से भेजना संभव नहीं था, तो उसे भी इस प्रावधान का लाभ मिल सकता है। इसके लिए कर्मचारी को राजस्थान सरकार की सेवा में शामिल होने के एक महीने के भीतर सरकार को इसकी सूचना देनी होगी। चाइल्ड केयर लीव के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब सामान्य स्थिति में यह अवकाश एक कैलेंडर वर्ष में तीन से अधिक स्पेल में नहीं दिया जाएगा। पहली बार अलग मातृत्व अवकाश यदि सरोगेट मां और कमीशनिंग मां में से कोई एक या दोनों सरकारी कर्मचारी हैं, तो सरोगेट मां को 180 दिन तक मातृत्व अवकाश, कमीशनिंग मां को 90 दिन तक मातृत्व अवकाश मिल सकेगा। सरोगेट मां के लिए विवाहित महिला सरकारी कर्मचारी होना, उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होना और इम्प्लांटेशन के समय उसका स्वयं का बच्चा होना जैसी शर्तें रखी गई हैं। वहीं कमीशनिंग मां की उम्र 23 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

सहारनपुर में करोड़ों की नकली करेंसी का खुलासा, NIA की 8 सदस्यीय टीम खंगाल रही पूरा नेटवर्क

सहारनपुर यूपी के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की करेंसी चेस्ट में करोड़ों के नकली नोट मिलने के मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की आठ सदस्यीय टीम ने जांच की कमान संभाल ली है। टीम बुधवार रात सहारनपुर पहुंची और इसके बाद से मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और नकली नोटों के करेंसी चेस्ट तक नोट पहुंचने के रास्ते की पड़ताल शुरू कर दी है। पीएनबी की घंटाघर स्थित करेंसी चेस्ट में नोटों की जांच के दौरान 17 करोड़ से अधिक की नकली करेंसी मिलने का मामला सामने आया है। इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट मिलने के बाद बैंक अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए गंभीर सवाल बन गया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी रकम के नकली नोट बैंक की करेंसी चेस्ट तक आखिर किस माध्यम से पहुंचे। सीधे करेंसी चेस्ट पहुंचे या किसी बैंक से? एनआइए टीम नकली करेंसी के स्रोत का पता लगाने में जुटी है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि नकली नोट सीधे किसी माध्यम से करेंसी चेस्ट तक पहुंचे या किसी बैंक शाखा या अन्य स्तर से होते हुए यहां तक आए। जांच के दौरान नोटों के करेंसी चेस्ट में आने की पूरी प्रक्रिया को खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही कैश के आवागमन, नोटों की गिनती और जांच प्रक्रिया तथा संबंधित रिकॉर्ड को भी जांच के दायरे में लिया गया है। बैंक के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी पड़ताल एनआईए टीम बैंक में नकदी के लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों की नजर उन प्रक्रियाओं पर है, जिनके तहत करेंसी चेस्ट में नकदी जमा होती है और उसकी जांच की जाती है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकली नोटों की पहचान बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान पहले क्यों नहीं हो सकी और वे किस स्तर पर करेंसी चेस्ट तक पहुंच गए। कहीं संगठित नेटवर्क से तो नहीं जुड़े तार? पीएनबी करेंसी चेस्ट में 17 करोड़ से अधिक की नकली करेंसी मिलने का मामला महज नकली नोट बरामद होने तक सीमित नहीं दिख रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में नकली नोट आखिर करेंसी चेस्ट तक पहुंची कैसे? क्या यह किसी बैंक शाखा से सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के तहत यहां पहुंची या फिर इसके पीछे कोई सुनियोजित और संगठित नेटवर्क सक्रिय था? सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों की नकली करेंसी बैंकिंग सिस्टम की इतनी महत्वपूर्ण कड़ी तक पहुंच गई और इसकी भनक समय रहते क्यों नहीं लगी। माध्यम ही है जांच का अहम बिंदु जांच का अहम बिंदु यह है कि नकली नोट किन माध्यमों से करेंसी चेस्ट तक पहुंचे। एजेंसियां इस संभावना को भी खंगाल रही हैं कि कहीं नकली करेंसी किसी संगठित गिरोह के जरिए अलग-अलग स्तरों से होते हुए बैंक तक तो नहीं पहुंचाई गई। यदि जांच में नेटवर्क के संकेत मिलते हैं तो मामला केवल बैंकिंग अनियमितता नहीं, बल्कि बड़े नकली करेंसी सिंडिकेट तक पहुंच सकता है। बैंक अधिकारी-कर्मचारी भी जांच के दायरे में करेंसी चेस्ट में नकदी पहुंचने, उसकी गिनती और जांच की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ हो सकती है। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि नकली नोट किस स्तर पर सिस्टम में शामिल हुए और उनकी पहचान पहले क्यों नहीं हो सकी। फिलहाल एनआइए की आठ सदस्यीय टीम मामले की जांच में जुटी है। टीम बुधवार रात सहारनपुर पहुंची थी। बैंक के रिकॉर्ड, कैश मूवमेंट और अन्य दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। निलंबित प्रबंधक फरार, गिरफ्तारी को कई राज्यों में दबिश पंजाब नेशनल बैंक की सोफिया मार्केट स्थित करेंसी चेस्ट में सामने आए जाली नोट और नकदी गायब होने के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। नामजद और निलंबित बैंक अधिकारियों के खिलाफ सर्च वारंट जारी होने के बाद अब उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पुलिस के अनुसार करेंसी चेस्ट प्रकरण में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। इनमें एक मुकदमा जाली नोट मिलने से संबंधित है, जबकि दूसरे में करीब 4.30 लाख रुपये गायब होने की शिकायत दर्ज कराई गई है। पीएनबी के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की तहरीर पर कोतवाली सदर बाजार में वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील शर्मा और खेरा बाजार जगाधरी करेंसी चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जांच में भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद बैंक प्रबंधन ने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। इनमें रवि कुमार कांसे, सुशील शर्मा और अमित कुमार शामिल हैं। अब उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज है।

श्रीकृष्ण की प्रिय हैं ये 4 राशियां, जन्माष्टमी पर करें ये उपाय तो मिलेगा धन-सुख और सफलता का आशीर्वाद

हर वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भाद्रपद की कृष्ण अष्टमी को मनाया जाता है. आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व पूरे देश में मनाया जा रहा है. इस दिन निशीथ काल में भगवान कृष्ण के स्वरूप लड्डू गोपाल का पूजन किया जाता है. दरअसल, भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम, करुणा, बुद्धिमत्ता और जीवन में सही समय पर सही निर्णय लेने के लिए जाना जाता है. उनकी लीलाओं और गीता के उपदेशों में जीवन को बेहतर तरीके से जीने के कई सूत्र मिलते हैं. जन्माष्टमी के अवसर पर भक्त कान्हा की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं और उन्हें माखन-मिश्री समेत कई चीजों का भोग लगाते हैं l ज्योतिषीय मान्यताओं में कुछ राशियों को भगवान श्रीकृष्ण से विशेष रूप से जोड़कर देखा जाता है. कहा जाता है कि इन राशियों के जातकों पर कान्हा की कृपा बनी रहे तो जीवन में आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं और परेशानियों से निकलने का रास्ता भी मिलता है. तो आइए जानते हैं श्रीकृष्ण की कौन-कौन सी हैं प्रिय राशियांl वृषभ राशि: सुख-सुविधाओं के साथ तरक्की वृषभ राशि को भगवान श्रीकृष्ण की प्रिय राशियों में शामिल माना जाता है. इस राशि के जातक आमतौर पर धैर्यवान और अपने लक्ष्य को लेकर काफी गंभीर होते हैं. ये लोग जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय सोच-समझकर आगे बढ़ना पसंद करते हैं. ज्योतिषीय मान्यता है कि श्रीकृष्ण की कृपा से वृषभ राशि वालों को जीवन में सुख-सुविधाओं और आर्थिक स्थिरता का लाभ मिल सकता है. मेहनत के साथ अगर इनका भाग्य भी साथ दे तो ये अपने लिए अच्छी संपत्ति और मजबूत आर्थिक स्थिति बनाने में सफल हो सकते हैं l   जन्माष्टमी पर क्या करें: भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाकर उनका ध्यान करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें l   कर्क राशि: मुश्किल वक्त में मिलता है सहारा कर्क राशि के जातकों को भी कान्हा की प्रिय राशियों में माना जाता है. ये लोग भावुक होने के साथ-साथ अपने परिवार और रिश्तों को लेकर काफी संवेदनशील होते हैं. इनके लिए भावनात्मक सुरक्षा और अपनों का साथ काफी मायने रखता है l मान्यता है कि श्रीकृष्ण की कृपा से कर्क राशि वालों को मुश्किल परिस्थितियों में सही रास्ता खोजने की शक्ति मिलती है. आर्थिक मामलों में भी समय के साथ सुधार के अवसर बन सकते हैं. अगर ये लोग अपने कर्मों पर ध्यान दें और धैर्य बनाए रखें तो परिस्थितियां इनके पक्ष में आ सकती ह l जन्माष्टमी पर क्या करें: कान्हा को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करें l सिंह राशि: मेहनत से हासिल करते हैं बड़ा मुकाम सिंह राशि के जातकों में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता मजबूत मानी जाती है. ये लोग किसी काम को हाथ में लेने के बाद उसे पूरा करने की कोशिश करते हैं. यही वजह है कि इनके लिए मेहनत और लगातार प्रयास सफलता की कुंजी बनते हैं. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की कृपा सिंह राशि वालों के आत्मविश्वास को और मजबूत कर सकती है. नौकरी हो या कारोबार, सही रणनीति के साथ आगे बढ़ने पर इन्हें अच्छे परिणाम मिलने की संभावना रहती है. इस राशि के जातकों के लिए सबसे जरूरी है कि सफलता मिलने के बाद भी अहंकार से बचें. श्रीकृष्ण के जीवन और गीता के संदेशों में कर्म को महत्व दिया गया है, इसलिए सिंह राशि वालों के लिए भी अपने कर्म पर फोकस करना लाभकारी माना जाता है. जन्माष्टमी पर क्या करें: श्रीकृष्ण के साथ राधा रानी का पूजन करें और गाय को हरा चारा खिलाएं. तुला राशि: धन के साथ सम्मान भी मिलता है तुला राशि को भी श्रीकृष्ण की प्रिय राशियों में गिना जाता है. इस राशि के जातक संतुलन बनाने और परिस्थितियों को समझकर फैसला लेने में अच्छे माने जाते हैं. यही गुण उन्हें करियर और निजी जीवन दोनों में आगे बढ़ने में मदद कर सकता है l ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार तुला राशि वालों पर कान्हा की कृपा बनी रहे तो जीवन में सुख-सुविधाओं के साथ आर्थिक उन्नति के अवसर भी मिल सकते हैं. मेहनत और सही निर्णयों के जरिए ये लोग धन के साथ समाज में सम्मान भी हासिल कर सकते हैं l जन्माष्टमी पर क्या करें: भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाएं और ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें l

बेंगलुरु में गूंजा बिहार का गौरव! बिहार महोत्सव 2026 में झिझिया, मधुबनी पेंटिंग और बिहारी स्वाद का जलवा

पटना कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में गुरुवार को चार दिनी बिहार महोत्सव 2026 का शानदार आगाज हुआ। छह सितंबर तक चलने वाले इस महोत्सव का मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने द आर्ट ऑफ लिविंग इंटरनेशनल सेंटर में श्रीश्री रवि शंकर की गरिमामयी उपस्थिति में शुभारंभ किया। इस आयोजन के माध्यम से बिहार की जीवंत लोक परंपराओं, विशिष्ट खान-पान, हस्तशिल्प और आधुनिक उद्यमिता को एक मंच पर लाया गया है, जिसमें एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इस अवसर पर बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान सहित कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। शाम की शुरुआत गौरव और अपनत्व की भावना से ओत-प्रोत बिहार गौरव गान की भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ हुई। इसके बाद बिहार की विशिष्ट लोक नृत्य परंपराओं में शामिल झिझिया की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों ने सिर पर दीप रखकर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। समृद्ध लोक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बिहार की समृद्ध लोक परंपराओं की झलक देखने को मिलेगी। इनमें झिझिया, सामा-चकेवा, कजरी और झूमर प्रमुख हैं। प्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना पटवारी और लोक गायक सत्येंद्र कुमार संगीत बिहार की संगीत विरासत को मंच पर जीवंत करेंगे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अलावा महोत्सव में श्रीश्री योग सत्र, आयुर्वेद एवं वेलनेस सत्र, शास्त्रीय नृत्य कार्यशालाएं, भजन क्लबिंग और ध्यान कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। महोत्सव के दौरान आर्ट ऑफ लिविंग के विशेष कार्यक्रमों के तहत हैप्पीनेस और सहज समाधि पाठ्यक्रम भी आयोजित होंगे। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। श्रीश्री रविशंकर बोले -बिहार के हर क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया गुरुदेव श्रीश्री रविशंकर ने पिछले कई दशकों में बिहार में आए व्यापक बदलाव को याद करते हुए कहा, मैंने बिहार को देखा है और आज के बिहार को भी देख रहा हूं। दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। बिहार में अपने कार्यों के दिनों को याद करते हुए श्रीश्री ने राज्य में हुए एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि किस तरह कभी एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे रणवीर सेना और सीपीआई-एमएल के विद्रोहियों को एक साथ लाकर ध्यान और सुदर्शन क्रिया का अभ्यास कराया था। अंतिम दिन दोनों समूहों के सदस्यों की आंखों में आंसू थे और उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया। इससे पूरे वातावरण में अपनत्व और शांति की एक नई भावना का संचार हुआ। श्रीश्री ने कहा, “दोनों समूह एक-दूसरे से मिले, आंसू बह निकले और पूरा वातावरण बदल गया। उन्होंने कहा कि बिहार में वर्तमान विकास की गति पर कहा कि चाहे आप पूर्णिया देखें, भागलपुर या दूसरे जिले, आप देख सकते हैं कि कितना विकास हुआ है। बिहार को बहुत-बहुत बधाई। कहा कि सम्राट चौधरी बहुत मेहनती हैं और वे बिहार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। समृद्ध बिहार से पूरा होगा विकसित भारत का सपना: सम्राट मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रवासी बिहारियों से अपने राज्य के विकास में योगदान देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बिहार को अब विकास और समृद्धि के नए दौर में आगे ले जाना है। इसके लिए बिहार के बाहर रहने वाले सभी लोगों का सहयोग आवश्यक है। बिहार की धरती ने भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, गुरु गोविंद सिंह और महात्मा गांधी जैसे महान व्यक्तित्वों को अपनी विरासत से जोड़ा है। आज आवश्यकता है कि बिहार के लोग अपनी कर्मभूमि के साथ-साथ अपनी जन्मभूमि के विकास में भी सहयोग करें। बिहार समृद्ध होगा, तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार किया जा सकेगा। बिहारी व्यंजन और मधुबनी पेंटिंग के स्टॉल सीएम ने कहा कि अगले दो वर्षों में 31 दिसंबर 2028 तक बिहार में मां सीता का भव्य मंदिर स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार ने विकास की लंबी यात्रा तय की। उन्होंने कहा कि आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग प्रांगण में लगे बिहार के व्यंजन, मधुबनी पेंटिंग्स सहित अन्य स्टॉलों का अवलोकन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने गौशाला, आश्रम में स्थित गुरुकुल का भ्रमण किया और गणेश मंदिर में पूजा कर बिहारवासियों की सुख, समृद्धि की कामना की।मुख्यमंत्री ने पाग और अंगवस्त्र भेंटकर श्रीश्री रविशंकर जी का स्वागत किया। बिहार की विरासत को विश्व पटल पर पहुंचाना हमारा दायित्व : डॉ. प्रेम कुमार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार की गौरवशाली विरासत को विश्व पटल पर पहुंचाना हमारा दायित्व है। बिहार का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही गौरवशाली भी है। प्राचीन काल में पाटलिपुत्र विश्व की महानतम राजधानियों में शामिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज का दिन हम सभी के लिए अत्यंत गौरव, आत्मसम्मान और अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को स्मरण करने का अवसर है। बिहारी जहां भी रहते हैं, नाम रोशन करते हैं: सरावगी बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी गुरुवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बेंगलुरु पहुंचे। एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में मौजूद बिहारवासियों ने दोनों का गर्मजोशी से स्वागत किया। ‎इस मौके पर सरावगी ने कहा कि बिहार के लोग देश के जिस भी हिस्से में रहते हैं, अपनी मेहनत, प्रतिभा और संस्कारों के माध्यम से बिहार का नाम रोशन कर रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष श्री श्री गौशाला पहुंचे और वहां गौ सेवा की। सरावगी ने कहा यहां बिहार के लोगों से मिले स्नेह, सम्मान और अपनत्व से वह अभिभूत हूं। उन्होंने कहा कि बिहार से दूर रहकर भी अपनी माटी, संस्कृति और संस्कारों से जुड़े आप सभी लोगों का यह स्नेह हृदय को छू गया। बिहार में सेवा और साधना प्रयासों से आया बड़ा बदलाव चार दशकों से अधिक समय से श्रीश्री रवि शंकर और द आर्ट ऑफ लिविंग ने बिहार के कुछ चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है। संस्था ने कभी हिंसा और उपेक्षा के लिए पहचाने जाने वाले क्षेत्रों को संवाद और पुनर्निर्माण के केंद्रों में बदलने का प्रयास किया है। नक्सली संघर्ष से प्रभावित रहे गांवों में वर्षों तक चले संवाद और ध्यान के प्रयासों ने 100 से अधिक समुदायों को पुरानी हिंसा और प्रतिशोध के चक्र से बाहर निकलने में मदद की है। आज इन समुदायों ने शिक्षा, कृषि और शांतिपूर्ण जीवन … Read more

मुख्यमंत्री निवास में 101 बच्चे बनेंगे राधा-कृष्ण, MP के 55 जिलों में आज मनेगा श्रीकृष्ण पर्व

भोपाल  श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को पूरा मध्यप्रदेश कृष्ण भक्ति में रंगा नजर आएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन-जन का पर्व बनाने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की ओर से प्रदेशभर में व्यापक ‘श्रीकृष्ण पर्व’ आयोजित होंगे।  ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की संकल्पना के साथ 55 जिलों के 111 स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। प्रदेश के 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जाएगी। इस आयोजन में 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति, लोक परंपराओं और जीवन दर्शन पर आधारित प्रस्तुतियां देंगे। नृत्य-नाटिका, रासलीला, भजन, लोकगायन और शास्त्रीय नृत्य के जरिए कृष्ण के जीवन के अलग-अलग प्रसंग मंच पर जीवंत किए जाएंगे। प्रदेश के 82 मंदिरों में विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री निवास में 101 बच्चे बनेंगे राधा-कृष्ण ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का विशेष आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर होगा। यहां 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। जन्मोत्सव के दौरान मटकी फोड़ कार्यक्रम भी होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बच्चों को माखन-मिश्री, लड्डू गोपाल की मूर्ति और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर केंद्रित पुस्तक भेंट करेंगे। कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव महू के जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्ण लोक का भूमिपूजन करेंगे। जानापाव में भगवान परशुराम द्वारा श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किए जाने के प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका भी होगी। यहां श्रीकृष्ण और भगवान परशुराम से जुड़े प्रसंगों पर प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। भोपाल में इस्कॉन पटेल नगर में जन्माष्टमी का भव्य आयोजन भोपाल में इस्कॉन पटेल नगर, हरे कृष्ण लैंड, रायसेन रोड पर शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव आयोजित होगा। आयोजकों के अनुसार यहां करीब एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। भगवान श्री श्री गौर राधा वल्लभ जी के विशेष दर्शन और भव्य श्रृंगार के साथ मंदिर को जैसलमेर की पारंपरिक थीम पर सजाया जा रहा है। मंदिर की सजावट में थाईलैंड से मंगाए गए विशेष ऑर्किड फूलों का उपयोग किया जाएगा। पूरे आयोजन के दौरान हरे कृष्ण महामंत्र का निरंतर कीर्तन होगा। श्रीकृष्ण कथा के साथ भक्तिमय नाट्य प्रस्तुति ‘रुक्मिणी कल्याणम्’ भी मुख्य आकर्षण रहेगी। श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उज्जैन के नारायणा धाम में पांच दिन कृष्ण कथा और रासलीला उज्जैन के नारायणा धाम मंदिर परिसर में 2 से 6 सितंबर तक पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन हो रहा है। यहां श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता, गुरु सांदीपनि आश्रम, माखन चोरी, जन्म एवं बाल लीला और गीता उपदेश जैसे प्रसंगों पर नृत्य-नाटिकाएं होंगी। भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, भजन और रासलीला के जरिए भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं प्रस्तुत की जाएंगी। वहीं उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 2 से 4 सितंबर तक गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित कार्यक्रम होंगे। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण करने और 64 कलाओं व 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त करने की परंपरा को नृत्य-नाटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। पन्ना, अमझेरा और महिदपुर में कृष्ण के अलग-अलग प्रसंग पन्ना के श्री बलदेवजी मंदिर में बलदेव-श्रीकृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका और भजन होंगे। श्री जुगल किशोर मंदिर में श्रीकृष्ण नृत्य-नाटिका, भक्ति गायन और प्रणामी परंपरा पर आधारित भरतनाट्यम प्रस्तुत किया जाएगा। धार के अमझेरा में 3 और 4 सितंबर को श्रीकृष्ण लीला तथा रुक्मिणी वरण एवं विवाह प्रसंग पर नृत्य-नाटिकाएं होंगी। महिदपुर में राधा-कृष्ण प्रेम, भक्ति गायन, बुंदेली लोकगायन और श्रीकृष्ण जन्म पर आधारित प्रस्तुतियां होंगी। अलग-अलग अंचलों की लोक संस्कृति भी दिखेगी प्रदेश के पाली, शहडोल, मंडला, दमोह, रीवा, खातेगांव सहित कई स्थानों पर एक दिवसीय कार्यक्रम होंगे। मथुरा प्रवेश, गोवर्धन धारण, सुदामा मिलन और कालियानाग मानमर्दन जैसे प्रसंगों को नृत्य-नाटिका और लोक प्रस्तुतियों के जरिए मंचित किया जाएगा। ग्वालियर, रायसेन, गुना, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, मुरैना, राजगढ़, इंदौर सहित कई जिलों में 4 सितंबर की शाम कृष्ण केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। स्थानीय कलाकारों को मिला बड़ा मंच ‘श्रीकृष्ण पर्व’ की खासियत यह है कि इसमें बड़े कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकारों की भी व्यापक भागीदारी रखी गई है। खरगौन, बड़वानी, खंडवा, राजगढ़, बैतूल, सीहोर, भोपाल, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, नीमच, रायसेन, सागर, सतना, रीवा, सिंगरौली, सीधी, कटनी, छिंदवाड़ा, धार, देवास, नरसिंहपुर, उमरिया, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी, बुरहानपुर, निवाड़ी और टीकमगढ़ समेत कई जिलों के कलाकार प्रस्तुतियां देंगे। संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेंद्र सिंह लोधी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के प्रतीक हैं। मध्यप्रदेश का भी श्रीकृष्ण से गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहा है। ‘श्रीकृष्ण पर्व’ के माध्यम से नई पीढ़ी को प्रदेश की इस विरासत और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी के अनुसार इस बार आयोजन स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। सांदीपनि आश्रम, नारायणा धाम, अमझेरा, जानापाव और जामगढ़ जैसे ऐतिहासिक-पौराणिक स्थलों के साथ प्रदेश के विभिन्न अंचलों के धार्मिक केंद्रों को भी आयोजन से जोड़ा गया है। उद्देश्य श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों के साथ स्थानीय लोक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी व्यापक मंच देना है। एक नजर देखें     इस्कॉन मंदिर: पटेल नगर, बरखेड़ा और बैरागढ़ स्थित इस्कॉन मंदिरों में जन्माष्टमी के कार्यक्रम होंगे। दिनभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।     गोपाल मंदिर में हुआ लड्डू गोपाल का अभिषेक: टीला जमालपुरा स्थित गोपाल मंदिर में लड्डू गोपाल का अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद विशेष शृंगार दर्शन और भजन हुए।     बांके बिहारी मंदिर में देर रात तक कार्यक्रम: मारवाड़ी रोड स्थित बांके बिहारी मंदिर में रात 1 बजे तक जन्माष्टमी के कार्यक्रम चलते रहेंगे।     देर रात तक मंदिरों में लगी रही भीड़: कृष्ण जन्मोत्सव के बाद करुणा धाम, चौक स्थित श्रीजी मंदिर, बरखेड़ा के अहीर समाज मंदिर समेत शहर के अन्य मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी।     बिड़ला मंदिर में भी उमड़े थे श्रद्धालु: जन्माष्टमी की रात बिड़ला मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे और देर रात तक भक्तों का तांता लगा रहा।

चाणक्य नीति: इन 7 मौकों पर रहें बिल्कुल चुप, वरना बढ़ सकती है आपकी परेशानी

 कई बार हमें लगता है कि किसी को सही सलाह देकर हम उसकी परेशानी कम कर सकते हैं. लेकिन हर व्यक्ति सलाह सुनने और उसे समझने के लिए तैयार हो, यह जरूरी नहीं है. कुछ परिस्थितियों में जरूरत से ज्यादा बोलना या सामने वाले को समझाने की कोशिश करना उल्टा हमारे लिए ही परेशानी खड़ी कर सकता है. आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में ऐसे ही मौकों पर मौन रहने को बुद्धिमानी बताया है. उनके अनुसार सही समय पर चुप रहना भी एक तरह की समझदारी है l 1.  जब सामने वाला आपकी बात समझना ही न चाहे अगर किसी व्यक्ति को अपनी गलती स्वीकार करने या सही बात समझने में कोई रुचि नहीं है, तो उसे बार-बार सलाह देना व्यर्थ हो सकता है. चाणक्य नीति के अनुसार ऐसे व्यक्ति को समझाने में अपनी ऊर्जा खर्च करने के बजाय मौन रहना बेहतर है l कई बार बहस में सही साबित होने से ज्यादा जरूरी यह होता है कि हम यह समझें कि सामने वाला हमारी बात सुनने की स्थिति में है या नहीं l 2.  जहां बात-बात पर बहस हो ऐसी जगह जहां लोग किसी विषय को समझने के बजाय केवल बहस करने या अपनी बात साबित करने के लिए जुटे हों, वहां सोच-समझकर बोलना चाहिए l चाणक्य के अनुसार बिना जरूरत किसी विवाद में पड़ना बुद्धिमानी नहीं है. हर सवाल का जवाब देना या हर बहस में शामिल होना जरूरी नहीं होता. कुछ मौकों पर चुप रहकर वहां से हट जाना ही बेहतर विकल्प होता है l 3.  जहां आपको सम्मान नहीं मिल रहा हो जिस जगह आपकी बात को महत्व नहीं दिया जा रहा हो या लोग केवल आपको नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हों, वहां अपनी सफाई देते रहना उचित नहीं है l चाणक्य नीति में अपनी योजनाओं और महत्वपूर्ण बातों को हर किसी के सामने जाहिर न करने की सीख दी गई है. ऐसे माहौल में शांत रहकर अपने काम पर ध्यान देना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है l 4.  जब किसी विषय की पूरी जानकारी न हो किसी मुद्दे के बारे में आधी-अधूरी जानकारी होने पर तुरंत अपनी राय देना कई बार नुकसान पहुंचा सकता है. अधूरी जानकारी के आधार पर कही गई बात आपको दूसरों के सामने असहज स्थिति में डाल सकती है l इसलिए जब किसी विषय की पूरी जानकारी न हो तो पहले उसे समझना और फिर अपनी बात रखना बेहतर है. कई बार कुछ देर का मौन गलत जानकारी देने से कहीं ज्यादा अच्छा होता है l इन मौकों पर भी रखें मौन चाणक्य नीति के अनुसार कुछ परिस्थितियों में व्यक्ति को विशेष रूप से अपनी जुबान पर नियंत्रण रखना चाहिए. गुस्से में: क्रोध के दौरान कही गई बात रिश्तों में लंबे समय तक कड़वाहट पैदा कर सकती है. पारिवारिक विवाद में: घर की निजी और गोपनीय बातें दूसरों के सामने बताने से बचना चाहिए. निंदा के दौरान: किसी की बुराई में शामिल होने के बजाय खुद को उस बातचीत से दूर रखना बेहतर है.

पंजाब में DA को लेकर कर्मचारियों का विरोध जारी, केंद्र के बराबर वेतन-भत्ते के ऑफर पर भी नहीं माने

अमृतसर  पंजाब सरकार और कर्मचारियों के बीच चल रहे डीए विवाद के बीच मान सरकार ने कर्मचारियों को नया ऑफर दिया है। वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने वीरवार को दावा किया कि पंजाब सरकार सूबे के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मियों के बराबर वेतन प्लस डीए देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार केवल केंद्र के डीए प्रतिशत की नकल करने के बजाय समग्र वेतन पैकेज को केंद्र के बराबर करने के लिए तैयार है।  वित्तमंत्री ने दावा किया कि पंजाब अपने राजस्व का 51 फीसदी वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जो प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है। साथ ही पंजाब में कर्मचारियों का वेतन पड़ोसी राज्य हरियाणा, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश समेत अन्य राज्यों से अधिक है। वित्तमंत्री चीमा ने कहा कि डीए के बकाया भुगतान के लिए सरकार ने लिक्विडेशन प्लान बनाया हुआ है। इसके तहत चरणबद्ध भुगतान योजना के तहत बकाया डीए का किस्तों में भुगतान किया जा रहा है और आगे भी इसी तरह किया जाता रहेगा। मंत्री अमन अरोड़ा और डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि यह बकाया शिअद-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के कार्यकाल का है, जिसे आम आदमी पार्टी की सरकार डीए की दर बढ़ाते हुए चुका रही है। लिहाजा कर्मचारियों को सरकार का सहयोग करना चाहिए, क्योंकि कर्मचारी प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। उन्हें विपक्षी दलों के बहकावे में नहीं आना चाहिए। सरकार कर्मचारियों के साथ फिर बातचीत के लिए तैयार है। क्या है लिक्विडेशन प्लान? पंजाब सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के छठे वेतन आयोग के तहत लंबित डीए/डीआर के करीब 14,191 करोड़ रुपये के बकाये के भुगतान के लिए लिक्विडेशन प्लान तैयार किया है। इसके तहत सरकार ने पूरी राशि एकमुश्त देने के बजाय पांच वित्तीय वर्षों (2024-25 से 2028-29) में चरणबद्ध तरीके से भुगतान का प्रस्ताव रखा है। वित्तमंत्री का दावा है कि बकाये की अदायगी मासिक किस्तों के जरिये की जा रही है। इसके तहत पेंशनभोगियों के लिए उम्र के आधार पर अलग-अलग किस्तों का प्रावधान किया गया था। 85 वर्ष से अधिक उम्र वालों को दो, 75 से 85 वर्ष वालों को 12 और 75 वर्ष से कम उम्र वालों को 42 मासिक किस्तों में भुगतान की रूपरेखा बनाई गई है। अब तक करीब 4500 करोड़ रुपये के बकाये का भुगतान किया जा चुका है। हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अगस्त 2026 में इस लिक्विडेशन प्लान को रद्द कर 14 दिनों में पूरा बकाया चुकाने का आदेश दिया। इसके खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल की है। केंद्र-पंजाब के वेतन और डीए में फर्क – पंजाब में क्लर्क इस वक्त 42 प्रतिशत डीए के हिसाब से टेक होम यानी हाथ में आने वाला शुद्ध वेतन 54,812 रुपये प्राप्त करते हैं जबकि केंद्र के अधीन क्लर्कों को 60 प्रतिशत डीए के साथ 36,960 रुपये वेतन मिलता है। – इसी तर्ज पर पंजाब के ड्राइवर 40,612 रुपये वेतन पाते हैं जबकि केंद्र के ड्राइवरों को 36,960 रुपये मिलते हैं। – पंजाब के स्टेनोग्राफर का वेतन 56,374 रुपये है जबकि केंद्र का 47,360 रुपये। – पंजाब के ईटीटी टीचर का 67,592 रुपये वेतन मिल रहा है जबकि केंद्र के टीचरों का वेतन 65,760 रुपये है। – पंजाब के पुलिस कांस्टेबल 54,812 रुपये वेतन पाते हैं, जबकि केंद्र के 36,960 रुपये। – सरकार यदि पंजाब के कर्मचारियों को केंद्र की तर्ज पर 60 प्रतिशत डीए देती है तो कर्मियों का वेतन और बढ़ जाएगा। कर्मचारियों का कड़ा रुख बकाया डीए के लिए संघर्ष कर रही पंजाब कर्मचारियों की विभिन्न जत्थेबंदियों की ज्वाइंट एक्शन कमेटी के समन्वयक सुखचैन सिंह खैहरा समेत अन्य नेताओं ने कहा कि कर्मचारी किसी भी तरह से गुमराह नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट पंजाब सरकार का लिक्विडेशन प्लान रद्द करते हुए बकाया डीए के भुगतान का आदेश दे चुका है। इसके बावजूद पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल कर दी है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि इसके अलावा आंदोलन के तहत कर्मचारियों द्वारा सामूहिक अवकाश लेने के बावजूद उनके खिलाफ अनधिकृत रूप से अवकाश लेने पर कार्रवाई के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार हाईकोर्ट का आदेश लागू नहीं करेगी और सुप्रीम कोर्ट से याचिका तथा कार्रवाई के नोटिस वापस नहीं लेगी, तब तक कर्मचारी किसी भी बात के लिए तैयार नहीं हैं।  वेतन और डीए पर सरकार ने बताए छह प्रमुख तथ्य – पंजाब के कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वालों में पंजाब सरकार के कर्मचारी देश में सबसे अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों में शामिल हैं। राज्य की अधिक बेसिक-पे संरचना के कारण कई प्रमुख श्रेणियों में पंजाब के कर्मचारियों का टेक-होम वेतन उनके केंद्र सरकार के समकक्ष कर्मचारियों की तुलना में अधिक है। – राजस्व का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च पंजाब अपने राजस्व प्राप्तियों का 51% वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जो प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक है। इसके मुकाबले अखिल भारतीय औसत 38% है। – तीन किस्तों में डीए में 14% की बढ़ोतरी भगवंत मान सरकार ने नवंबर 2021 में डीए को 28% से बढ़ाकर नवंबर 2024 में 42% किया है। तीन किस्तों में हुई इस बढ़ोतरी के तहत अक्टूबर 2022 में डीए 34%, दिसंबर 2023 में 38% और नवंबर 2024 में 42% किया गया। – 14,100 करोड़ रुपये की डीए बकाया देनदारी विरासत में मिली तथ्य पत्र के अनुसार, लगभग 14,100 करोड़ रुपये की डीए बकाया देनदारी 2016-21 की अवधि से संबंधित है और पिछली कांग्रेस तथा अकाली-भाजपा सरकारों से विरासत में मिली है। – विरासत में मिले बकाये में से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान भगवंत मान सरकार ने विरासत में मिले डीए बकाये को समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है और कर्मचारियों तथा पेंशनरों को इस देनदारी में से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान पहले ही किया जा चुका है। – 60% डीए करने पर सालाना 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पंजाब में डीए को 60% करने पर राज्य के सरकारी खजाने पर लगभग 6,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बोझ पड़ेगा। इसके लिए इसे आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं पर होने वाले खर्च के साथ संतुलित करना होगा। क्या बोले मंत्री? – वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आगे कहा कि … Read more