samacharsecretary.com

चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में वार्ड आरक्षण का ड्रॉ 11 को, कई पार्षदों के समीकरण बिगड़ने के आसार

चंडीगढ़  नगर निगम चुनाव के लिए 11 सितंबर को होने वाले वार्ड आरक्षण ड्राॅ से पहले सबसे ज्यादा नजर उन वार्डों पर है, जो अनुसूचित जाति (एससी) और महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकते हैं। 2011 की जनगणना में वार्डवार एससी आबादी के प्रतिशत और पिछले आरक्षण की रोटेशन व्यवस्था को आधार मानें तो वार्ड नंबर-1, 3, 4, 9, 15, 29 और 32 एससी आरक्षण के लिए संभावित वार्डों की सूची में सबसे आगे हैं। सात एससी वार्डों में से तीन को 11 सितंबर के ड्रा में एससी महिला के लिए आरक्षित किया जाएगा, जबकि बाकी चार एससी वर्ग की महिला-पुरुष के लिए ओपन रहेंगे। इसलिए इन वार्डों के आरक्षित होने की संभावना अधिक वार्ड-1, 3, 4, 9, 15, 29, 32 इन सात वार्डों को संभावित एससी वार्डों के तौर पर इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि 2021 में एससी के लिए आरक्षित रहे सात वार्डों को रोटेशन के तहत इस बार बाहर रखा गया है। 2021 में वार्ड-7, 16, 19, 24, 26, 28 और 31 एससी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे। इनमें वार्ड-16, 19 और 28 एससी महिला के लिए आरक्षित थे। आरक्षण के तय फार्मूले के अनुसार एक चुनाव में एससी के लिए आरक्षित वार्डों को अगले चुनाव में दोबारा उसी श्रेणी में आरक्षित करने के बजाय एससी आबादी के प्रतिशत के आधार पर अगले वार्डों को मौका दिया जाता है। महिलाओं के लिए भी 12 वार्ड आरक्षित होंगे 35 में से कुल 12 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे। इनमें तीन एससी महिला और नौ सामान्य महिला वार्ड होंगे। कई पुरुष नेताओं को अपनी पत्नी को चेहरा बनाना होगा। पहले भी देवेंद्र बबला जैसे नेता ने महिला आरक्षण के बाद पत्नी हरप्रीत कौर बबला को चुनाव लड़ाया था। इन पार्षदों को तलाशना पड़ सकता है नया वार्ड वार्ड-1 में अभी आप पार्षद जसविंद्र कौर सामान्य वर्ग श्रेणी से हैं। वार्ड-3 पर भाजपा पार्षद दलीप शर्मा के सामने आरक्षण तीसरी बार जीत का क्रम रोकेगा। उन्हें नई राजनीतिक जमीन तलाशनी होगी। वार्ड-4 में आप से भाजपा में शामिल होने के बाद डिप्टी मेयर की कुर्सी पर पहुंची सुमन शर्मा काबिज हैं। उनको भी अब नए वार्ड से टिकट लेने के लिए लड़ाई लड़नी होगी। वार्ड-9 में भाजपा पार्षद बिमला दुबे हैं। 2021 में वार्ड-7 आरक्षित होने के कारण उन्होंने वार्ड-9 से चुनाव लड़ा था। अब वार्ड-9 छोड़ना पड़ सकता है। वह वापस वार्ड-7 लौट सकते हैं। वार्ड-15 में आप पार्षद रामचंद्र यादव की मुश्किल बढ़ने वाली है। उन्हें टिकट के लिए नई जगह तलाशनी पड़ सकती है। वार्ड-29 से आप की टिकट पर पार्षद बने मुन्नवर अब कांग्रेस में जा चुके हैं। आरक्षण को देखते हुए ही नई जगह टिकट की तलाश में उनके पार्टी बदलने की बात कही जा रही है। वहीं अंतिम वार्ड-32 में भाजपा पार्षद एवं सीनियर डिप्टी मेयर जसमनप्रीत सिंह हैं। अगर वार्ड रिजर्व होता है तो उन्हें भी टिकट के लिए दूसरी जगह तलाशनी होगी।

सहारनपुर में कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर कार्रवाई, सांसद इकरा हसन को किया गया हाउस अरेस्ट

 सहारनपुर/शामली सहारनपुर के कलेक्ट्रट परिसर में मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन को लेकर सपा सांसद इकरा हसन का हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। बता दें कि शनिवार सुबह कलेक्ट्रट परिसर में मौजूद मस्जिद को प्रशासन ने ढहा दिया है। इकरा हसन ने लगाया हाउस अरेस्ट का आरोप मस्जिद प्रकरण को लेकर कैराना सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उनके आवास पर रात में भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया गया। इकरा हसन ने इसे हाउस अरेस्ट बताते हुए सवाल उठाया कि क्या जनता के मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना अब अपराध हो गया है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि को रोककर जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती। यूपी के सहारनपुर में शनिवार सुबह डीएम परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया. प्रशासन के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध पाया था. मस्जिद कमेटी की पहली अपील भी खारिज हो चुकी थी. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और आरआरएफ की तैनाती रही. वहीं, इस मामले को लेकर सहारनपुर जाने की कोशिश कर रहीं कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया।  सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था. शनिवार सुबह प्रशासन ने इस निर्माण को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी. मौके पर बुलडोजर लगाया गया और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा।  प्रशासन का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सुनवाई के दौरान मस्जिद के निर्माण को अवैध पाया गया था. अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्माण सरकारी जमीन पर था. इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहली अपील की थी, लेकिन वहां भी अपील खारिज कर दी गई और सिटी मजिस्ट्रेट के मूल आदेश को बरकरार रखा गया।  कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की अपील की थी खारिज डिस्ट्रिक्ट जज की कोर्ट ने 4 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की अपील खारिज कर दी थी। जिला जज की कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पेश किए गए सबूतों की जांच करने के बाद मस्जिद को अवैध घोषित करने वाले सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मस्जिद गिराने का दिया था आदेश सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने 17 जुलाई को मस्जिद को गिराने का आदेश दिया था और सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और उसके गलत इस्तेमाल के लिए वहां मौजूद लोगों पर लगभग 6.41 करोड़ रुपये का मुआवजा लगाया था। रात से ही पुलिस की तैनाती, अफवाहों पर नजर कार्रवाई से पहले ही सहारनपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी. प्रशासन ने बताया कि त्योहारों को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पांच कंपनी पीएसी, आरआरएफ की तैनाती की गई है. मिश्रित आबादी वाले इलाकों में लगातार फुट पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च किया जा रहा है।  सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि प्रशासन ने कार्रवाई से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की हैं. उनके मुताबिक नोटिस और अपील समेत निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।  डीआईजी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को भी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इस मामले को लेकर अफवाह फैलाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ध्वस्तीकरण के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा का खास इंतजाम किया गया. बुलडोजर से मस्जिद के निर्माण को गिराने की कार्रवाई जारी रही और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर तैनात रहे।  सहारनपुर जाने से पहले इकरा हसन हाउस अरेस्ट उधर, इस कार्रवाई के बीच कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया. वह सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं. इसी दौरान उनके आवास पर बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंचा और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया।  हाउस अरेस्ट के बाद इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले को लेकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और इलाके की जनता की आवाज प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं. उनका आरोप है कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए घर पर ही नजरबंद कर दिया गया।  सांसद ने सवाल उठाया कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि का अपनी जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना भी अब अपराध हो गया है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं और उन्हें रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता. फिलहाल सहारनपुर में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी है. कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के साथ-साथ इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है।   

नेपाल त्रासदी में नहीं थम रही मौतों की संख्या, अब तक 1,344 लोगों की मौत

काठमांडू  नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. अब तक 1,344लोगों की जान जा चुकी है और 5053 लोग लापता हैं. 32963 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 7570 घरों को नुकसान पहुंचा है। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में अब तक 1,344 लोगों की जान जा चुकी है. पिछले हफ्ते आई फ्लैश फ्लड ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांवों और कस्बों को बुरी तरह प्रभावित किया. कई इलाकों में अब भी मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश जारी है।  मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी NDRF तबाही के बीच सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों को ढूंढना है, जो अभी भी मलबे और कीचड़ के नीचे फंसे हो सकते हैं. इसी को देखते हुए भारत ने 11 सदस्यीय  NDRF तकनीकी टीम नेपाल भेजी है. यह टीम स्थानीय बचाव दलों के साथ मिलकर उन जगहों पर तलाशी अभियान चला रही है, जहां लोगों के दबे होने की आशंका है।  नेपाल के दार्चुला में भूस्खलन से नदी का रास्ता बंद, निचले इलाकों में अलर्ट नेपाल के दार्चुला जिले में शुक्रवार को भारी भूस्खलन के बाद चौलानी नदी का प्रवाह बाधित हो गया। नदी का रास्ता बंद होने से आसपास के क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। लोगों को नदी के आसपास और निचले क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। चिलिमे सुरंग में भारतीय टीम क्या कर रही है? भारतीय सुरंग बचाव दल ने शुक्रवार को चिलिमे सुरंग के अंदर अभियान चलाया। टीम का प्रयास सुरंग के पानी और मलबे से प्रभावित हिस्सों तक पहुंचने और वहां फंसे लोगों की तलाश करने का है। भारी उपकरणों को सुरंग तक पहुंचाने और बचाव अभियान को गति देने के लिए एक अस्थायी ट्रैक भी तैयार किया जा रहा है। टीम ने सुरंग के भीतर सुरक्षा रस्सियां लगाई हैं, जबकि पानी और मलबे से बाधित हिस्सों में फ्लोट और पंप भी तैनात किए जा रहे हैं। रसुवा जिले के स्याब्रुबेसी गांव के पास स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना का इलाका बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। सुरंग के कई हिस्से पानी और मलबे से बाधित हो गए थे, जिसके कारण वहां पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। अब भारतीय टीम सुरंग के अंदर आगे बढ़कर प्रभावित हिस्सों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, ताकि खोज और बचाव अभियान को और प्रभावी बनाया जा सके।  चिलिमे सुरंग में फंसे लोगों के लिए बचाव अभियान, भारतीय टीम जुटी; मृतकों का आंकड़ा 1344 पहुंचा नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारतीय बचाव दल नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में जुटा है। इसी क्रम में विशेष भारतीय सुरंग बचाव टीम ने चिलिमे सुरंग में अभियान तेज कर दिया है। वहीं शुक्रवार को नेपाल सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें बताया गया कि बाढ़ से 32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। इससे सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान पहुंचा है। सरकार की शुरुआती रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। वहीं इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1344 हो गई। प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़ी है।   कहां से कितने लोगों की हो चुकी है मौत कुल मौत – 1,344     रसुवा: 140     नुवाकोट: 184     धादिंग: 67     गोरखा: 73     तनहुं: 38     नवलपरासी पूर्व: 221     नवलपरासी पश्चिम: 212     चितवन: 359     (विभिन्न मानव अंगों सहित)     शिनाख्त कर सौंपे गए शवों की संख्या: 96     घायलों की संख्या: 5,663     लापता लोगों की संख्या: 5,053     बचाए गए लोगों की संख्या: 13,095 7570 घरों को हुआ नुकसान     निजी घर: कुल 7570     सरकारी संरचना: कुल 48 (35 पूर्ण क्षति, 13 आंशिक क्षति)     विद्यालय: कुल 18 (11 पूर्ण क्षति, 7 आंशिक क्षति)     स्वास्थ्य संस्था: कुल 7 (4 पूर्ण क्षति, 3 आंशिक क्षति)     सड़क: 55 किलोमीटर पूर्ण क्षति पुल: कुल मोटरेबल 37 (33 पूर्ण क्षति) और 68 झोलुंगे (झूला) पुल 26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़ नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से अचानक आई बाढ़ ने उत्तर और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई और व्यापक स्तर पर नुकसान हुआ। 

आउटसोर्स भर्ती में अब मनमानी पर लगेगी लगाम, ₹40 हजार तक न्यूनतम पारिश्रमिक का प्रस्ताव

लखनऊ आउटसोर्स कार्मिकों के लिए लागू की गई नई व्यवस्था में मौजूदा पारिश्रमिक को सुरक्षित रखने के साथ ही एजेंसियों की मनमानी पर भी अंकुश लगाया गया है। उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीसीओएस) ने चार श्रेणियों में कार्मिकों को बांटकर न्यूनतम पारिश्रमिक तय किया है। यदि किसी विभाग में किसी कार्मिक को इससे अधिक पारिश्रमिक मिल रहा है तो उसे नई व्यवस्था लागू होने के बाद घटाया नहीं जाएगा, बल्कि मौजूदा पारिश्रमिक ही मिलता रहेगा। निगम आउटसोर्सिंग व्यवस्था को महज एजेंसी के जरिए कर्मचारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के बजाय नियामक व्यवस्था के रूप में काम करेगा। यह एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण रखेगा और कार्मिकों को बिना किसी कटौती के पूरा पारिश्रमिक दिलाने की व्यवस्था करेगा। साथ ही सभी विभागों, संस्थाओं और स्थानीय निकायों को आवश्यकता के अनुसार मानव संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी निगम की ही होगी। निगम ने आउटसोर्स कार्मिकों के लिए जो चार श्रेणियां तय की हैं उनमें श्रेणी-1 (हाईली स्किल्ड) के लिए न्यूनतम 40 हजार रुपये, श्रेणी-2 (स्किल्ड/टेक्निकल) के लिए 25 हजार, श्रेणी-3 (सेमी-स्किल्ड) के लिए 22 हजार और श्रेणी-4 (सपोर्ट स्टाफ) के लिए 20 हजार रुपये का न्यूनतम पारिश्रमिक प्रस्तावित है। मसलन, चिकित्सक, अभियंता और वास्तुविद श्रेणी-1 में, जबकि नर्स, फार्मासिस्ट, डाटा प्रोसेसिंग और ड्राइविंग से जुड़े पद श्रेणी-2 में रखे गए हैं। आउटसोर्स कार्मिकों की भर्ती में भी पारदर्शिता लाने का प्रविधान है। विभाग पहले अपनी मांग और आरक्षण नियमों के साथ निगम को भेजेगा। इसके बाद सेवायोजन पोर्टल से छंटनी की जाएगी, फिर 100 अंकों की चयन प्रणाली के आधार पर चयन होगा। अंत में कार्मिक को यूनिक कोड व आइडी कार्ड दिया जाएगा। 50 अंक लिखित परीक्षा, 25 अंक अधिमानी अर्हता, 15 अंक स्थानीय निवासी और 10 अंक विशेष महिला आरक्षण के लिए रखे गए हैं। आउटसोर्स कर्मियों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी स्पष्ट प्रविधान हैं। व्यवस्था की निगरानी के लिए राज्य/निदेशालय, मंडल, जिला और स्थानीय निकाय स्तर पर चार-स्तरीय समितियां बनाई जाएंगी। ये समितियां कार्मिकों की अर्हता का सत्यापन कर पात्र सूची आउटसोर्स एजेंसी को भेजेंगी। इससे भर्ती, तैनाती और एजेंसी के स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों पर निगरानी का तंत्र मजबूत होगा। नियमित सरकारी नौकरी का विकल्प नहीं सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है आउटसोर्स व्यवस्था नियमित सरकारी सेवाओं का विकल्प नहीं है। आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं सृजित/नियमित पदों के विरुद्ध नहीं ली जाएंगी और इसे नियमित रोजगार का दावा नहीं माना जाएगा। विभागों को आउटसोर्स मद में पर्याप्त बजट का प्रविधान भी करना होगा। निगम की स्थापित व्यवस्था में किसी भी प्रकार का बदलाव या संशोधन मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद ही किया जा सकेगा।

10 मेगा रोड शो से BJP का शक्ति प्रदर्शन, कांग्रेस ने स्थानीय नेताओं के भरोसे साधा वार्ड-वार मुकाबला

जयपुर राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव 2026 की तारीखें नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। इन्हीं हलचलों के बीच अब बड़ी खबर ये है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपने सबसे बड़े चेहरे के तौर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को चुनावी फ्रंटलाइन पर उतार रही है। 'पार्षद चुनाव' में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में वोट अपील के लिए मुख्यमंत्री के उतरने से प्रचार अभियान का पूरी तरह से हाई-वोल्टेज मोड पर आना तय है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस बार स्टेट या सेंट्रल लेवल के बड़े नेताओं के बजाय पूरी तरह से स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं पर दांव लगाने की साइलेंट स्ट्रेटजी अपनाई है। BJP जहां मुख्यमंत्री के 10 मेगा रोड शो और केंद्रीय मंत्रियों के सघन डोर-टू-डोर कैम्पेन के जरिए हर एक बूथ पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, वहीं कांग्रेस स्थानीय मुद्दों, मोहल्ला-लेवल कनेक्ट और वार्ड प्रत्याशियों की व्यक्तिगत साख के दम पर चुनाव जीतने का दावा कर रही है। राजस्थान के इस सियासी परिदृश्य में यह मुकाबला इस बात का बड़ा टेस्ट है कि क्या भाजपा की मुख्यमंत्री सहित केंद्रीय नेतृत्व की हाई-प्रोफ़ाइल ब्रैंडिंग, कांग्रेस की ग्राउंड-लेवल पर स्थानीय  नेटवर्क पर भारी पड़ पाएगी या नहीं? BJP ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कैम्पेन को इस तरह डिजाइन किया है कि राज्य के सबसे महत्वपूर्ण शहरों को कवर किया जा सके। फाइनल फेज के प्रचार में CM भजनलाल शर्मा सीधे voters से कनेक्ट करेंगे और पार्टी प्रत्याशियों के लिए समर्थन मांगेंगे। शनिवार (उदयपुर एवं भीलवाड़ा): कैम्पेन की शुरुआत मेवाड़ अंचल से हो रही है। CM भजनलाल शर्मा उदयपुर और भीलवाड़ा में भव्य रोड शो करेंगे, जहां मेवाड़ के शहरी वोटों को एकजुट करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा 6 सितंबर (बीकानेर, अजमेर एवं जोधपुर): एक ही दिन में तीन बड़े जिलों को कवर करने का टारगेट रखा गया है। मारवाड़ और पश्चिमी राजस्थान के इन प्रमुख शहरों में रोड शो के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा जाएगा। 7 सितंबर (भरतपुर एवं अलवर): पूर्वी राजस्थान और मत्स्य क्षेत्र के सबसे अहम केंद्रों भरतपुर और अलवर में CM के रोड शो प्रस्तावित हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र काफी संवेदनशील माना जाता है। 8 सितंबर (पाली एवं कोटा): हाड़ौती क्षेत्र के कोचिंग हब कोटा और औद्योगिक शहर पाली में कैम्पेन को बनाए रखने के लिए रोड शो आयोजित किए जाएंगे। 9 सितंबर (जयपुर): Election campaign के आखिरी दिन राजधानी जयपुर में मेगा रोड शो होगा। जयपुर नगर निगम के अलग-अलग वार्डों में CM का यह शो पूरे प्रचार अभियान का भव्य समापन होगा। रोड शोके साथ सांगठनिक बैठकें BJP की इस आक्रामक रणनीति में सिर्फ रोड शो और जनसभाएं ही शामिल नहीं हैं, बल्कि संगठन को पूरी तरह एक्टिव करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। रोड शो के साथ-साथ मुख्यमंत्री और वरिष्ठ प्रदेश नेता हर जिले में अहम सांगठनिक बैठकें भी लेंगे। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य बूथ कार्यकर्ताओं के साथ डायरेक्ट संवाद कायम करना और स्थानीय स्तर पर यदि कोई अंदरूनी गुटबाजी या कमजोरी है, तो उसे मौके पर ही दूर करना है। पार्टी के Central Election In-charge, Co-incharge और राष्ट्रीय पदाधिकारी भी इन क्षेत्रों में लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। केंद्रीय और राज्य सरकार के मंत्रियों को उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों और स्थानीय मुद्दों के हिसाब से विशिष्ट वार्डों और नगर निगमों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कांग्रेस का 'लोकल फॉर्मूला': बड़ा चेहरा नहीं, लोकल कैंडिडेट ही हीरो जहां BJP स्टार प्रचारकों की फौज के साथ मैदान में है, वहीं कांग्रेस ने इस बार अपना पूरा फोकस स्थानीय नेतृत्व और क्षेत्रीय नेताओं पर शिफ्ट कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) गोविंद सिंह डोटासरा के अनुसार, नगरीय निकाय चुनाव सफाई, स्ट्रीट लाइट्स, स्थानीय सड़कों और वार्ड विकास जैसे local issues पर लड़े जाते हैं, इसलिए इसमें स्थानीय नेतृत्व का ही एक्टिव होना सबसे ज्यादा जरूरी है। कांग्रेस की इस रणनीति के पीछे मुख्य बिंदु: रीजनल ओनरशिप: स्थानीय विधायकों, पूर्व विधायकों और वार्ड स्तर के नेताओं को पूरी छूट दी गई है कि वे अपने हिसाब से campaign डिजाइन करें। डोर-टू-डोर माइक्रो कनेक्ट: बड़े तामझाम के बजाय कांग्रेस प्रत्याशी वार्डों में घर-घर जाकर स्थानीय समस्याओं को उठा रहे हैं। नो सेंट्रल इंटरवेंशन: जब तक स्थानीय unit विशेष मांग न करे, तब तक जयपुर या दिल्ली से किसी बड़े नेता को प्रचार में नहीं उतारा जाएगा। स्टार पावर vs वार्ड-लेवल कनेक्ट राजस्थान का शहरी वोटर हमेशा से राष्ट्रीय मुद्दों और स्थानीय विकास के बीच संतुलन बनाकर मतदान करता आया है। निकाय चुनाव 2026 में दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं आमने-सामने हैं: BJP की ताकत: Chief Minister का सीधा जुड़ाव, केंद्रीय मंत्रियों का प्रभाव और मजबूत संगठन जो हर बूथ तक वोटर को रीच करती है। कांग्रेस की ताकत: वार्ड स्तर की नाराजगी को भुनाना, local issues को हाइलाइट करना और प्रत्याशी की चौबीसों घंटे उपलब्धता पर जोर देना। सितंबर 2026 में होने वाले इन चुनावों के नतीजे यह तय करेंगे कि राजस्थान के शहरी मतदाताओं पर CM भजनलाल शर्मा के रोड शो का कितना असर हुआ है और क्या कांग्रेस का 'शांत एवं स्थानीय' फॉर्मूला राजस्थान के नगर निगमों पर अपना कब्जा जमाने में कामयाब होता है या नहीं।  

Bigg Boss 20 के प्रीमियर से पहले सलमान का दिखा गुस्सा, पैप्स की इस बात पर हुए इरिटेट

सलमान खान का मच-अवेटेड रियलिटी शो 'बिग बॉस 20' एक बार फिर दस्तक देने जा रहा है. शो का प्रीमियर एपिसोड शूट हो चुका है. लेकिन प्रीमियर एपिसोड की शूटिंग के दौरान सलमान खान पैप्स पर बुरी तरह भड़क गए. आखिर ऐसा क्या हुआ? चलिए जानते हैं… सलमान को क्यों आया गुस्सा? 'बिग बॉस 20' के सेट से सलमान खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दरअसल, सलमान खान बिग बॉस के सेट पर पैप्स को पोज दे रहे थे. तभी पैप्स ने सलमान को 'बाबा' कहकर पोज देने को कह दिया. बाबा सुनने के बाद सलमान खान भड़क गए. सलमान गुस्से से तिलमिलाकर बोले- बाबा? ये तेरा काम नहीं है. मुझे कैमरे के आगे आने की जरूरत नहीं है. पैपराजी के फोटोज के बार-बार रिक्वेस्ट करने पर सलमान खान इरिटेट होते भी नजर आए. सलमान को गुस्से में देख हर कोई हैरान रह गया. सलमान का दिखा टशन इसके अलावा बिग बॉस के मंच से सलमान खान ने अपनी कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं. सलमान टशन में पोज देते दिखे. जींस, टाइट फिटेड टी-शर्ट संग उन्होंने वेस्टकोट टीम-अप किया. सलमान ने हैट लगाकर अपना लुक कंप्लीट किया. दबंग खान ने फोटोज के साथ कैप्शन में लिखा- #BiggBoss20. सलमान हमेशा की तरह काफी डैशिंग लग रहे हैं. भाईजान के रॉकिंग लुक पर फैंस दिल हार रहे हैं. 60 की उम्र में सलमान की फिटनेस भी फैंस को क्रेजी कर रही है. सलमान ने शो के लिए वसूली मोटी रकम? बता दें कि बिग बॉस 20 रविवार 6 सितंबर से शुरू हो रहा है. शो को आप JioHotstar और कलर्स टीवी पर देख सकेंगे. रिपोर्ट्स की मानें तो बिग बॉस 20 के पूरे सीजन की होस्टिंग के लिए सलमान खान को 120 करोड़ रुपये ऑफर हुए हैं. हालांकि, सलमान की फीस कंफर्म नहीं हुई है.  

सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा फैसला: बिहार के लोकसेवकों की CBI जांच अब सरकार की मंजूरी के बाद

पटना बिहार सरकार के लोकसेवकों या राज्य सरकार के स्वामित्व वाले किसी संस्थान की सीबीआई जांच को लेकर सम्राट चौधरी सरकार ने नया गाइडलाइन जारी किया है। इनमें आपराधिक जांच से पहले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को बिहार सरकार से अनुमति लेनी होगी। सरकार के नये नियम के मुताबिक सीबीआई से मिले प्रस्ताव के आधार पर राज्य सरकार हर मामले पर अलग-अलग विचार कर जांच की शक्ति देने पर निर्णय लेगी। बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने प्रधान सचिव कुंदन कुमार के हस्ताक्षर से इससे संबंधित निर्णय की अधिसूचना जारी कर दी गई है। हालांकि, राज्य की सीमा में संचालित भारत सरकार या भारत सरकार के अधीनस्थ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मियों और निजी व्यक्तियों के संबंध में अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। नई अधिसूचना के मुताबिक, इस विषय पर पूर्व की सभी अधिसूचनाओं को हटा दिया गया है। केंद्र सरकार या उसके अधीनस्थ कर्मियों और निजी व्यक्तियों द्वारा किये जाने अपराध के मामले में जांच को लेकर सीबीआई को दी गयी शक्तियां व उनके अधिकार क्षेत्र में विस्तार पर सहमति दी गयी है। सीबीआई भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), भारतीय साक्ष्य अधिनियम और आईटी एक्ट से जुड़े अपराध के साथ ही साइबर अपराध एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े कांडों में जांच कर सकेगी। लेकिन, जब यह अपराध बिहार सरकार के कार्य से संबंधित नियुक्त लोकसेवकों, बिहार सरकार द्वारा नियंत्रित कोई निगम, कंपनी या बैंक, बिहार सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर चुके संस्थान द्वारा किया जाता है तो ऐसे मामलों में सीबीआई को जांच से पहले बिहार सरकार से अनुमति लेनी होगी। इसके लिए सीबीआई को प्रस्ताव भेजना होगा। समीक्षा के बाद सरकार से अनुमति मिलने पर ही सीबीआई कोई ऐक्शन ले पाएगी। सरकार ऐसे मामलों में केस टू केस अलग-अलग फैसला लेने के लिए स्वतंत्र है। सीबीआई भारत सरकार की सर्वोच्च और सर्वाधिक विश्वसनीय मानी जाने वाली जांच एजेंसी है। इसकी स्थापना 1 अप्रैल 1963 में गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर की गयी थी। सीबीआई का संचालन गृह मंत्रालय द्वारा ही किया जाता है। सीबीआई का मुख्यालय दिल्ली में है। राज्यों के मुख्यालय में इसकी इकाई होती है। यह एजेंसी भ्रष्टाचार या अपराध के गंभीर व सनसनीखेज मामलों में कार्रवाई करती है। कई बार सुप्रीम कोर्ट या राज्यों के हाईकोर्ट के आदेश पर भी मामलों की सीबीआई जांच होती है।

बाढ़ का पानी उतरने के बाद चित्रकूट में मंजर भयावह, घर-दुकानें कीचड़ से पटीं; 566 बिजली कनेक्शन अब भी प्रभावित

चित्रकूट  सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के पांच दिन में तीन बार उफान पर आने के बाद अब बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन पीछे तबाही छोड़ गया है। गलियों, दुकानों और घरों में मिट्टी और कीचड़ जमा है। कई परिवारों की गृहस्थी बर्बाद हो गई।  पानी इतनी तेजी से आया, घर और दुकान दोनों नहीं बचा पाई आरोग्यधाम में जनरल स्टोर और कपड़ों की दुकान चलाने वाली ममता शर्मा ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि जरूरी सामान दूसरी मंजिल तक पहुंचाने का समय नहीं मिला। घर और दुकान में रखा सामान पानी और कीचड़ की चपेट में आकर खराब हो गया। पुरानी लंका तिराहे पर फुटवियर दुकान चलाने वाले जितेंद्र ने गुरुवार को शटर खोला तो अंदर टूटा काउंटर, बिखरी अलमारी और कीचड़ में सने जूते-चप्पल मिले। उनके मुताबिक करीब 3 लाख रुपए का सामान बर्बाद हुआ है। खाना मिल रहा, लेकिन सफाई के लिए पानी नहीं बाढ़ प्रभावित लोगों तक प्रशासन, मठ-मंदिरों और स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से भोजन-पानी पहुंचाया जा रहा है। लोगों को राहत व्यवस्था से शिकायत नहीं है, लेकिन अब सबसे बड़ी जरूरत सफाई के पानी की है। एमपीटी चौराहे पर चाय-नाश्ते का होटल चलाने वाली पूनम ने बताया कि बाढ़ में काफी सामान बह गया। जो सामान बचा है और होटल में जमा गंदगी, उसे साफ करने के लिए पानी उपलब्ध नहीं है। समाजसेवी रामशिरोमणि शर्मा ने बताया कि घरों और होटलों में कीचड़ भरा है। नदी से पानी लाकर सफाई करना संभव नहीं है और नगर परिषद के कर्मचारी भी कई जगह नहीं पहुंच पाए हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने सफाई की बड़ी चुनौती बनी हुई है। मुख्य सड़क साफ, अब गलियों में युद्ध स्तर पर सफाई गुरुवार को चित्रकूट की स्थिति में कुछ सुधार नजर आया। बाढ़ के दौरान बंद पड़ी मुख्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। सड़क पर जमा कचरा और कीचड़ भी काफी हद तक हटाया जा चुका है। जिला प्रशासन का बड़ा अमला पिछले पांच दिनों से चित्रकूट में मौजूद है। राहत और बचाव के बाद अब शहर को सामान्य स्थिति में लाने पर फोकस है। मुख्य सड़क के बाद मोहल्लों और गलियों में सफाई तेज कर दी गई है। कीचड़ हटाने के साथ मलबा उठाया जा रहा है। 1275 में से 709 घरों की बिजली बहाल बाढ़ और बारिश से बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई थी। चित्रकूट वितरण केंद्र के 19 ट्रांसफॉर्मर प्रभावित हुए। इनमें से 11 ट्रांसफॉर्मर गुरुवार तक ठीक कर दिए गए, जबकि बाकी 8 पर काम जारी है। कुल 1275 प्रभावित उपभोक्ताओं में से 709 की बिजली सप्लाई बहाल हो चुकी है। 566 उपभोक्ताओं के घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं। बारिश और कीचड़ के बीच बिजलीकर्मी नेटवर्क को जल्द सामान्य करने में जुटे हैं। पांच दिन बाद निकली धूप, लोगों को मिली उम्मीद गुरुवार शाम करीब 4 बजे पांच दिन बाद कुछ देर के लिए सूरज बादलों के पीछे से बाहर आया। लगातार बारिश और बाढ़ के बीच यह धूप लोगों के लिए राहत की खबर बनी। गुरुवार को बारिश नहीं होने से प्रशासन को भी सफाई और बहाली के काम में तेजी लाने का मौका मिला। हालांकि बाढ़ का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कई घरों में गृहस्थी मिट्टी में सनी है और दुकानों में नुकसान का हिसाब लगाया जा रहा है। लोगों के सामने अब घर-कारोबार को दोबारा खड़ा करने की चुनौती है। पांच दिन की आफत के बाद आसमान साफ होने लगा है। अब चित्रकूट के लोग बाढ़ की तबाही से बाहर निकलकर अपनी जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने में जुट गए हैं।

17 सितंबर को सूर्य गोचर से बदलेगा भाग्य, इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की और धन के रास्ते

ज्योतिष में ग्रहों की चाल को व्यक्ति के जीवन में होने वाले बदलावों से जोड़कर देखा जाता है. सितंबर के मध्य में सूर्य एक बार फिर अपनी राशि बदलने जा रहे हैं.17 सितंबर को सूर्य सिंह राशि से निकलकर बुध की राशि कन्या में प्रवेश करेंगे. करीब एक महीने तक इसी राशि में रहेंगे.ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सूर्य के इस गोचर का असर सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह समय खास तौर पर शुभ रह सकता है. सूर्य को ज्योतिष में आत्मविश्वास, मान-सम्मान, पद और अधिकार का कारक माना जाता है.वहीं कन्या राशि का संबंध बुध से है, जिसे तर्क, बुद्धि, गणना और व्यावहारिकता से जोड़ा जाता है.ऐसे में सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश कुछ जातकों के लिए नौकरी, कारोबार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिहाज से अच्छे अवसर लेकर आ सकता है.आइए जानते हैं किन 5 राशियों के लिए सूर्य का यह गोचर लाभकारी रहने की संभावना है. सिंह राशि सूर्य का गोचर सिंह राशि के जातकों के लिए उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला हो सकता है.इस दौरान काम को लेकर आपकी सक्रियता बढ़ेगी. नौकरी करने वाले लोगों को इंटरव्यू या किसी प्रशासनिक कार्य में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. आर्थिक मोर्चे पर भी स्थिति बेहतर होने के संकेत हैं.यात्रा से जुड़े अवसर मिल सकते हैं. कन्या राशि कन्या राशि वालों के लिए सूर्य का गोचर विशेष महत्व रखता है क्योंकि सूर्य इसी राशि में प्रवेश करेंगे. इस दौरान कार्यक्षेत्र में आपकी स्थिति मजबूत हो सकती है. नौकरीपेशा लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं.  काम में आपकी पहचान बढ़ सकती है. कारोबार करने वालों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है. किसी नई योजना पर काम शुरू करने या कारोबार को आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है. आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं.हालांकि निजी जीवन में बातचीत के दौरान संयम बनाए रखना बेहतर होगा. वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों के लिए यह गोचर करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव ला सकता है. कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान बढ़ सकता है और कारोबार करने वालों को पार्टनरशिप से लाभ मिलने की संभावना है. इस दौरान अटका हुआ पैसा वापस मिलने के योग बन सकते हैं. परिवार और दोस्तों का सहयोग मिलेगा. अविवाहित लोगों के लिए विवाह से जुड़ा कोई अच्छा प्रस्ताव भी आ सकता है. हालांकि वैवाहिक जीवन में छोटी-मोटी बातों को लेकर तनाव से बचना जरूरी होगा. धनु राशि धनु राशि वालों के लिए सूर्य का यह गोचर भाग्य को मजबूत करने वाला साबित हो सकता है. कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिलने के साथ पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है. कारोबार से जुड़े लोगों को नई डील मिलने के अवसर बन सकते हैं. भूमि, भवन या वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है. परिवार में खुशी का माहौल रहेगा .  कोई शुभ समाचार मिलने की संभावना है. मीन राशि मीन राशि के जातकों के लिए सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश कई मामलों में राहत लेकर आ सकता है. मेहनत का उचित परिणाम मिलने की संभावना है. आर्थिक स्थिति में सुधार होने के साथ बचत करने में भी सफलता मिल सकती है. कारोबार से जुड़े लोगों के लिए समय अच्छा रह सकता है. परिवार और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा.सेहत के लिहाज से भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. सूर्य गोचर कब होगा? सूर्य 17 सितंबर 2026 को सुबह 7:12 बजे कन्या राशि में प्रवेश करेंगे. 17 अक्टूबर तक इसी राशि में रहेंगे.ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में सूर्य से संबंधित सकारात्मक ऊर्जा का लाभ उठाने के लिए रविवार को सूर्य को जल अर्पित करना और जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना शुभ माना जाता है.

OTT ने ठुकराई थी ‘हनुमान अंश’, थिएटर में मचा धमाल; 10 लाख की ओपनिंग से 80 करोड़ पार

विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर सचमुच चमत्कार कर दिखाया है. कुछ समय पहले तक जिस फिल्म की चर्चा नहीं थी, वो अब 80 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है. OTT ने नकारा फिल्म की सफलता पर जश्न मनाए जा रहे हैं, लेकिन निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि शुरू में उन्हें एक OTT प्लेटफॉर्म पर अपनी कहानी सुनाने जाने पर नकारा गया था. वो भी ऐसे तरीके से जो उन्हें ‘अपमानजनक’ लगा. इंडिया टीवी से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं अपनी कहानी एक OTT प्लेटफॉर्म पर सुनाने गया था, जहां उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे पास ‘भारतीय कहानी है जो अंतरराष्ट्रीय लेवल पर फेमस है’. मैंने महाराज जी की कहानी ऐसे सुनाई कि मैं रो पड़ा.” उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगा जिस तरह उन्होंने रिजेक्ट किया, जिस भाषा का प्रयोग किया, वो थोड़ी अपमानजनक थी. जिस तरह से उन्होंने कहा, मुझे लगा उनके दिमाग में जो नैरेटिव था, उसमें छेद है. अब उस नैरेटिव को तोड़ना जरूरी है. हम फिल्ममेकर हैं, हमें हजार बार रिजेक्ट किया गया है. अगर आपको कहानी समझ नहीं आई, तो कह सकते थे कि अच्छी है, लेकिन बाद में करेंगे.” बॉक्स ऑफिस पर कमाल ‘हनुमान अंश’ 7 अगस्त को थिएटर्स में रिलीज हुई थी और शुरू में बहुत धीमी चली. फिल्म ने पहले दिन सिर्फ 10 लाख रुपये कमाए. पहले वीक में पहले  करीब 1.80 करोड़ रुपये का बिजनेस किया. दूसरे सप्ताह इसका कलेक्शन महज 40 लाख रुपये था. लेकिन तीसरे वीक में फिल्म को माउथ पब्लिसिटी मिली और दर्शकों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी. अब फिल्म का इंडिया ग्रॉस कलेक्शन 96.03 करोड़ रुपये और इंडिया नेट कलेक्शन 81.41 करोड़ रुपये हो गया है. फिल्म की बात करें, तो ‘हनुमान अंश’ एक आध्यात्मिक ड्रामा है, जो संत नीम करोली बाबा (महाराज जी) के जीवन पर आधारित है. फिल्म में नीम करोली बाबा का रोल शोभिनव सत्या ने निभाया है.