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शिक्षक दिवस पर PM मोदी की गुरुओं से अपील, ‘बच्चों का बचपन बचाइए, उनकी प्रतिभा पहचानिए’

नईदिल्ली  क्लास में बैठा बच्चा सिर्फ किताबों के पन्ने नहीं पढ़ रहा होता. उसके आसपास की दुनिया भी उसे हर दिन कुछ न कुछ सिखा रही होती है. कभी मोबाइल की स्क्रीन उसे अपनी तरफ खींचती है. कभी दोस्तों का असर पड़ता है. कभी पढ़ाई का दबाव परेशान करता है. ऐसे में बच्चे के साथ सबसे ज्यादा वक्त बिताने वाले लोगों में शिक्षक भी शामिल हैं. शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी भूमिका की याद शिक्षकों को दिलाई. उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन बचाना भी शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री ने नेशनल टीचर्स अवॉर्ड पाने वाले 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने सिर्फ पढ़ाई और परीक्षा के नंबरों की बात नहीं की. उन्होंने बच्चों के व्यवहार, उनकी आदतों और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी नजर रखने की जरूरत बताई।  पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चा पढ़ाई में कैसा कर रहा है, यह जरूरी है. लेकिन उससे भी जरूरी यह समझना है कि वह सामान्य जिंदगी में कैसा व्यवहार कर रहा है. उसके स्वभाव में अचानक कोई बदलाव तो नहीं आया. वह दोस्तों से दूर तो नहीं हो रहा. वह देर रात तक मोबाइल तो नहीं चला रहा. कहीं नशे जैसी किसी बुरी आदत की तरफ तो नहीं बढ़ रहा. प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बच्चे के व्यवहार में बदलाव दिखे तो उसकी वजह समझने की कोशिश करनी चाहिए. जरूरत पड़े तो माता-पिता से बात करनी चाहिए और बच्चे को सही रास्ते पर लाने में मदद करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त परिवार कम होने के दौर में बच्चों की जिंदगी में शिक्षक की भूमिका और ज्यादा बढ़ गई है।  स्क्रीन टाइम पर पीएम मोदी की चिंता प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों को सिर्फ सिलेबस पूरा कराने तक शिक्षक की भूमिका सीमित नहीं होनी चाहिए. बच्चा सवाल पूछता है तो उसकी जिज्ञासा को दबाने के बजाय उसे सही दिशा देनी चाहिए. उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा ही उनके सीखने की सबसे बड़ी ताकत हो सकती है. अगर बच्चा कुछ नया जानना चाहता है, अलग सवाल पूछता है या चीजों को अपने तरीके से समझना चाहता है तो उसे रोकने के बजाय प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. पीएम मोदी ने यह भी जोर दिया कि पढ़ाई सिर्फ किताबों और क्लासरूम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. बच्चों को वास्तविक दुनिया से जोड़ना जरूरी है।  स्क्रीन टाइम भी प्रधानमंत्री की चिंता का एक बड़ा मुद्दा रहा. उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे माता-पिता से बातचीत करें और यह समझें कि बच्चा मोबाइल या दूसरी स्क्रीन पर कितना समय बिता रहा है. खास तौर पर यह देखना जरूरी है कि बच्चे देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे. ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों को निकालने के लिए उन्हें खेल, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कामों से जोड़ने की सलाह दी गई. पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को सिर्फ पढ़ाई में व्यस्त रखने के बजाय उनकी पूरी दिनचर्या और विकास पर ध्यान देना जरूरी है।  नशे की लत से बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री ने नशे की लत को लेकर भी शिक्षकों को सतर्क रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि अगर किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव नजर आता है तो शिक्षक उसे सिर्फ अनुशासन की समस्या मानकर छोड़ न दें. उसके पीछे की वजह जानने की कोशिश होनी चाहिए. शिक्षक बच्चे और उसके परिवार के बीच संवाद का पुल बन सकते हैं।  स्क्रीन टाइम पर भी रखें नजर मोबाइल और स्क्रीन आज बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. ऐसे में पीएम मोदी ने शिक्षकों से माता-पिता के साथ मिलकर इस पर नजर रखने को कहा. बच्चों को मोबाइल से दूर करने के लिए सिर्फ रोक-टोक पर्याप्त नहीं है. उन्हें खेल, शारीरिक गतिविधियों और क्रिएटिव कामों के विकल्प देने होंगे. इससे उनका समय भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल होगा और उनका विकास भी होगा।  क्लासरूम से बाहर भी हो बच्चों की पढ़ाई पीएम मोदी ने कहा कि पढ़ाई सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. बच्चों को वास्तविक दुनिया दिखानी चाहिए. उन्हें कामकाज की प्रक्रिया समझानी चाहिए. इससे किताबों में पढ़ी चीजों को जिंदगी से जोड़ना आसान होगा. प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों में ‘श्रम की गरिमा’ जैसे संस्कार विकसित करने पर भी जोर दिया।  82 शिक्षकों को मिला नेशनल टीचर्स अवॉर्ड इस साल 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड के लिए चुना गया है. इनमें 48 स्कूल शिक्षक, 21 उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक के शिक्षक और 13 स्किल ट्रेनर शामिल हैं. अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों ने प्रधानमंत्री के साथ अपने अनुभव भी साझा किए. उन्होंने क्लासरूम में किए गए नए और रचनात्मक प्रयोगों के बारे में बताया।  कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का संदेश सिर्फ शिक्षकों के लिए नहीं, बल्कि स्कूल, परिवार और समाज तीनों के लिए था. बच्चे के विकास का मतलब सिर्फ अच्छे नंबर नहीं हैं. उसका व्यवहार, उसकी आदतें, उसकी जिज्ञासा और उसका आत्मविश्वास भी उतना ही जरूरी है. ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका और बड़ी हो जाती है. क्योंकि कई बार बच्चा अपनी परेशानी घर पर नहीं बता पाता, लेकिन उसके व्यवहार में बदलाव क्लास में सबसे पहले नजर आ सकता है. यही वजह है कि पीएम मोदी ने शिक्षकों से बच्चों का बचपन बचाने और उन्हें सही दिशा देने को अपनी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा मानने की अपील की।   

11 सितंबर से BRICS समिट, विदेशी मेहमानों के स्वागत में सजेगा नई दिल्ली क्षेत्र; 15 हजार गमले लगेंगे

नई दिल्ली  भारत मंडपम् में 11 से 13 सितंबर तक होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए एनडीएमसी ने समिट की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण हिस्से को सजाने-संवारने का काम तेज कर दिया है। विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए सम्मेलन स्थल, वीआईपी रूट, प्रमुख सड़कों, बाजारों और होटल क्षेत्रों में स्वच्छता से लेकर सजावटी रोशनी और सौंदर्याकरण तक तैयारियां की जा रही है। एनडीएमसी के डिप्टी चेयरमैन कुलजीत सिंह चहल ने बताया कि सारे काम 9 सितंबर तक पूरे हो जाएंगे। रोशनी से जगमग होंगे नई दिल्ली क्षेत्र गोलचक्कर पटेल चौक, विंडसर प्लेस, मंडी हाउस, तीन मूर्ति, क्यू-पॉइंट, शांतिपथ के प्रमुख चौराहों, अशोका होटल, सम्राट होटल, मान सिंह और पीएम गोलचक्कर सहित 17 प्रमुख गोलचक्करों पर सजावटी रोशनी लगाई जाएगी। 11 प्रमुख होटल परिसरों और आसपास के पेड़ों को भी सजाया जाएगा। एनडीएमसी की 10 प्रमुख इमारतों और स्थलों पर भी सजावटी लाइटिंग होगी। विदेश मंत्रालय के डिजाइन के मुताबिक, एनडीएमसी क्षेत्र में 309 ब्रैडिंग साइट्स तैयार की गई हैं। इनमें 154 डिजिटल मीडिया स्क्रीन, S3 सीटीयू और पीटीयू फ्लेक्स साइट्स और 72 बस क्यू शेल्टर शामिल हैं। 41 प्रमुख सड़कों पर खास निगरानी डेलिगेट्स और वीआईपी रूट की 41 प्रमुख सड़को की सर्कलवार निगरानी की जा रही है। सड़क, फुटपाथ और बस शेल्टर की मरम्मत पूरी हो चुकी है। 32 सड़कों की पेंटिंग पूरी हो गई है, जबकि नौ सड़कों पर काम जारी है। हरित सौदर्शीकरण के लिए 15 हजार से अधिक गमले प्रमुख मार्गों और चौराहों पर लगाए जाएंगे। 15 जगहों पर फूलों से तैयार किए गए बोर्ड और नौ स्थानों पर फूलों के आकार वाले फव्वारे लगाए जाएंगे। पांच जगह मिस्ट स्प्रे की व्यवस्था की गई धूल और प्रदूषण नियंत्रण के लिए लोदी रोड, तिलक मार्ग, अफ्रीका एवेन्यू, शातिपथ और जाकिर हुसैन मार्ग पर पांच जगह मिस्ट स्प्रे की व्यवस्था की गई है। जलभराव वाले हॉटस्पॉट का 100 प्रतिशत सत्यापन और स्टॉर्म वाटर ड्रेनों की 100 प्रतिशत डीसिल्टिंग पूरी हो चुकी है। वीवीआईपी मार्गों पर अतिरिक्त पंपिंग सेट लगाए गए है। बरसात से निपटने के लिए अतिरिक्त पंप 14 स्वच्छता सर्कलों को 14 निरीक्षण सर्कलों से मैप किया गया है। प्रमुख सड़कों पर 24×7 सफाई की व्यवस्था रहेगी। रात में 7 मिकैनिकल रोड स्वीपर्स लगाए जाएंगे। डीप क्लीनिंग के लिए 10 प्रेशर जेटिंग मशीनें लगेंगी। प्रमुख मार्गों की डीप वॉशिंग की जा रही है। कंट्रोल रूम से 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी। बरसात में प्रभावित बाबा खड़क सिंह मार्ग पर मौजूदा 80 HP पंप के अलावा एक और 80 HP पंप तथा 24 IIP क्षमता की मोबाइल पंपिंग वैन लगाई गई है।

नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए खुशखबरी, हरियाणा में 4 महीने तक चलेगा मेगा रोजगार अभियान

अंबाला  प्रदेश में नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए आने वाले चार महीने उनकी तकदीर बदलने वाले होंगे। यह चार महीने केवल रोजगार मेले आयोजन तक सीमित नहीं रहेंगे बल्कि सरकार और युवाओं के बीच सीधे संवाद का बड़ा मौका बनेंगे। प्रदेश सरकार ने सितंबर से दिसंबर तक अलग-अलग जिलों में मेगा जॉब फेयर आयोजित करने का कार्यक्रम तैयार किया है। खास बात यह है कि इन आयोजनों में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से लेकर कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और सांसद तक सीधे युवाओं के बीच पहुंचेंगे। इसी कड़ी में नौ सितंबर को कुरुक्षेत्र, सात अक्टूबर को रोहतक, 21 अक्टूबर को पलवल और एक नवंबर को हिसार में राज्यस्तरीय रोजगार मेला लगेगा जिसमें सीएम सैनी शिरकत करेंगे। सरकार की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक सितंबर में अंबाला और रेवाड़ी से मेगा जॉब फेयर की शुरुआत होगी। कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में पहला राज्यस्तरीय आयोजन होगा। सितंबर में यमुनानगर, सिरसा, भिवानी, कैथल और चरखी दादरी में भी रोजगार मेले प्रस्तावित हैं। अक्टूबर में यह अभियान रोहतक से लेकर फरीदाबाद, महेंद्रगढ़, पलवल, गुरुग्राम, पानीपत और झज्जर तक पहुंचेगा। नवंबर में हिसार और जींद समेत अन्य स्थानों पर आयोजन होंगे। रोजगार निदेशालय को बनाया नोडल एजेंसी रोजगार निदेशालय को इन मेलों की नोडल एजेंसी बनाया गया है। वहीं कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग को आयोजन स्थल, लॉजिस्टिक्स, प्रचार-प्रसार और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार ने निजी क्षेत्र के नियोक्ताओं को जोड़ने के साथ विश्वविद्यालयों, पालिटेक्निक और उच्च शिक्षण संस्थानों के माध्यम से अधिक से अधिक युवाओं को मेलों तक लाने के निर्देश दिए हैं। कौन कहां संभालेगा कमान     7 सितंबर को अंबाला में राज्यसभा सांसद संजय भाटिया व रेवाड़ी में राज्य मंत्री राजेश नागर।     14 सितंबर को यमुनानगर में मंत्री अनिल विज।     16 सितंबर को सिरसा मंत्री कृष्ण लाल पंवार।     17 सितंबर को भिवानी में मंत्री महिपाल ढांडा।     21 सितंबर को कैथल में मंत्री श्याम सिंह राणा व चरखी दादरी में मंत्री श्रुति चौधरी अक्टूबर में रोजगार अभियान     9 अक्टूबर को फतेहाबाद में मंत्री कृष्ण कुमार व नूंह में राज्य मंत्री गौरव गौतम।     16 अक्टूबर को फरीदाबाद में सांसद कृष्ण पाल गुर्जर व महेंद्रगढ़ में मंत्री राव नरबीर सिंह।     21 अक्टूबर को पलवल में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि।     23 अक्टूबर को गुरुग्राम में मंत्री विपुल गोयल।     28 अक्टूबर को पानीपत में मंत्री अरविंद कुमार शर्मा।     30 अक्टूबर को झज्जर में मंत्री आरती सिंह राव मुख्य अतिथि। नवंबर और दिसंबर में     16 नवंबर को करनाल में सांसद नवीन जिंदल। l     14 दिसंबर को पंचकूला में सांसद मनोहर लाल इसी दिन सोनीपत में सांसद सुभाष बराला।     28 दिसंबर को हांसी में सांसद धर्मबीर सिंह।  

घर में लगाएं ये 5 शुभ पौधे, बढ़ेगी सुख-समृद्धि!

घर को हरा-भरा और खूबसूरत बनाने के लिए लोग अलग-अलग तरह के पौधे लगाते हैं. वास्तु शास्त्र में भी कुछ पौधों को बेहद शुभ माना गया है. मान्यता है कि इन्हें घर में सही दिशा और सही स्थान पर रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. सुख-समृद्धि का माहौल बनता है. कुछ पौधों को धन और आर्थिक उन्नति से भी जोड़कर देखा जाता है. आइए जानते हैं ऐसे ही 5 पौधों के बारे में, जिन्हें घर में लगाना शुभ माना जाता है. 1. जेड प्लांट जेड प्लांट को वास्तु में तरक्की, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसकी मोटी, सिक्के जैसी पत्तियों के कारण इसे धन और आर्थिक विकास से जोड़ा जाता है. इसे घर या ऑफिस के ऐसे स्थान पर रखा जा सकता है जहां पर्याप्त रोशनी आती हो. वास्तु मान्यताओं के अनुसार यह करियर और कारोबार में सकारात्मक माहौल बनाने वाला माना जाता है. 2. केले का पौधा केले के पौधे का धार्मिक महत्व भी काफी अधिक है. वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे उत्तर दिशा में रखना शुभ माना जाता है.गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करने और दीपक जलाने की परंपरा भी कई घरों में प्रचलित है.इसे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से जोड़कर देखा जाता है. 3. मनी प्लांट मनी प्लांट का नाम ही इसे धन और समृद्धि से जोड़ता है.वास्तु मान्यताओं में इसे आर्थिक उन्नति और धन के प्रवाह का प्रतीक माना जाता है. इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना कई वास्तु परंपराओं में शुभ माना जाता है, जबकि कुछ स्रोत उत्तर दिशा को भी लाभकारी बताते हैं. इसलिए दिशा तय करते समय घर की बनावट और स्थानीय वास्तु सलाह को ध्यान में रखना बेहतर है. मनी प्लांट की बेल को सूखने न दें, नियमित रूप से इसकी देखभाल करें.मुरझाए या पीले पत्तों को हटाते रहना भी पौधे के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. 4. तुलसी का पौधा तुलसी को भारतीय घरों में धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त है.वास्तु के अनुसार स्वस्थ तुलसी का पौधा घर में सकारात्मकता और शांति से जुड़ा माना जाता है. इसे ऐसी जगह रखना चाहिए जहां पर्याप्त धूप और हवा मिल सके.पौधे को लगातार मुरझाने से बचाने के लिए पानी और रोशनी का संतुलन बनाए रखना जरूरी है. 5. लकी बैम्बू लकी बैम्बू को वास्तु और फेंगशुई परंपराओं में सौभाग्य, विकास और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसे घर के अंदर रखा जा सकता है ,कई वास्तु स्रोत इसे पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में रखने की सलाह देते हैं. पौधे रखते समय इन बातों का रखें ध्यान वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर में पौधों का चुनाव करने के साथ उनकी स्थिति और देखभाल पर भी ध्यान देना चाहिए. सूखे, मुरझाए या खराब स्थिति वाले पौधे घर में रखने से बचना बेहतर है. कांटेदार पौधों को लेकर भी कई वास्तु परंपराओं में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. सबसे जरूरी बात यह है कि पौधे को केवल धन प्राप्ति का उपाय मानने के बजाय घर की हरियाली, स्वच्छता और सकारात्मक वातावरण के लिए लगाएं.सही रोशनी, पानी और देखभाल मिलने पर स्वस्थ पौधे घर को अधिक सुंदर और सुखद बना सकते हैं.

मुरैना में जन्मोत्सव की खुशियां मातम में बदलीं, तेज रफ्तार ट्रक ने 3 महिलाओं की जान ली

मुरैना   कृष्ण जन्मोत्सव की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब मंदिर से दर्शन कर घर लौट रही तीन महिलाओं को अनियंत्रित तेज रफ्तार ट्रक ने कुचल दिया। दर्दनाक हादसे में तीनों महिलाओं की मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसा राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-44 पर स्थित घिरोना हनुमान मंदिर के पास देर रात हुआ। जानकारी के मुताबिक सिविल लाइन थाना क्षेत्र के हरफूल के पुरा गांव की रहने वाली तीन महिलाएं कृष्ण जन्मोत्सव देखने और पूजा-अर्चना करने के बाद अपने घर लौट रही थीं। इसी दौरान दिल्ली की ओर जा रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि तीनों महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और ट्रक सड़क किनारे स्थित कुछ दुकानों में जा घुसा। इससे दुकानों को भी नुकसान पहुंचा है। घटना की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। हादसे के बाद मृतक महिलाओं के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। त्योहार की रात घर से खुशी-खुशी निकली महिलाएं वापस नहीं लौट सकीं, जिससे पूरे गांव में शोक का माहौल है। सिविल लाइन थाना प्रभारी उदयभान सिंह यादव ने बताया कि मृतक तीनों महिलाएं हरफूल के पुरा गांव की निवासी थीं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ट्रक चालक को पकड़ लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। वहीं दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को घटनास्थल से हटाने का काम भी जारी है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार और लापरवाह वाहनों की आवाजाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

मतदाता सूची से नाम हटने पर ऐसे साबित करें नागरिकता, 200 मतदाताओं को सुनवाई का मौका

रांची मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान प्रारंभिक सूची से नाम हटाए गए मतदाताओं को संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) की ओर से नोटिस जारी किया गया है।नोटिस में नाम हटाए जाने की तिथि और स्थान का उल्लेख किया गया है। जिसके बाद लोग अंचल कार्यालय में उपस्थित हो रहे है। मतदाताओं को निर्धारित तिथि पर अंचल कार्यालय पहुंचकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखना है। जिला उपनिर्वाचन पदाधिकारी विवेक कुमार सुमन ने बताया कि जिन मतदाताओं के माता-पिता उपलब्ध नहीं हैं और जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में भी नहीं है, वे वंशावली के माध्यम से अपने माता पिता, के व रिश्तेदार की ट्रैकिंग, कर अपनी नागरिकता का प्रमाण प्रस्तुत कर सकते हैं। सुनवाई के लिए 200 मतदाताओं को समय दिया गया दूसरे राज्य से झारखंड में बसने वाले लोग पूर्व राज्य का स्थायी प्रमाण पत्र, राशन कार्ड सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं। वर्तमान स्थायी निवासी प्रमाण पत्र सीओ के माध्यम से बनवाकर वंशावली के साथ जमा किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि नोटिस पाने वाले मतदाताओं की संख्या पिछले दिनों की तुलना में कम हुई है। गुरुवार को सुनवाई के लिए 200 मतदाताओं को समय दिया गया था, जिनमें 140 उपस्थित हुए। तीन माह तक ऑनलाइन व्यवस्था की गई इसके लिए जाति, आय, स्थानीय निवासी और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तीन माह तक ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। जिससे ग्रामीण इलाकों के मतदाता अपना आय प्रमाण पत्र बना सकते हैं। कार्मिक, प्रशासनिक विभाग की ओर से जिलों में इन प्रमाण पत्रों के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आने के कारण लंबित आवेदनों का दबाव बढ़ रहा था। इसे देखते हुए आवेदकों की सुविधा और समय पर प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए आफलाइन प्रक्रिया को भी मंजूरी दी गयी है।

श्रीकृष्ण से जुड़े 5 रहस्यमयी प्रसंग, समुद्र में समाई द्वारका से जगन्नाथ पुरी के ‘दिव्य तत्व’ तक

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन जितना प्रेरणादायक है, उतना ही रहस्यमयी भी है. उनकी लीलाओं और उनसे जुड़े प्रसंगों में कई ऐसे रहस्य छिपे हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. द्वारका नगरी के समुद्र में समाने से लेकर सुदर्शन चक्र, गुरु दक्षिणा और जगन्नाथ पुरी से जुड़े रहस्यों तक, श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कई प्रसंग आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं. आज हम आपको भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े पांच ऐसे अलौकिक और रोचक प्रसंगों के बारे में बताएंगे, जिनके बारे में शायद आपने पहले सुना हो या शायद ये बातें आपके लिए बिल्कुल नई हों. भगवान श्रीकृष्ण की रहस्यमयी द्वारका नगरी भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा सबसे बड़ा रहस्य उनकी नगरी द्वारका को माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों में द्वारका का वर्णन एक बेहद भव्य और समृद्ध नगरी के रूप में मिलता है. मान्यता है कि जिस स्थान पर द्वारका नगरी बसाई गई थी, उस क्षेत्र को पहले कुशस्थली कहा जाता था. भगवान श्रीकृष्ण ने इस स्थान का पुनर्निर्माण कराया और यहां एक भव्य नगरी बसाई. कथाओं के अनुसार, द्वारका के निर्माण में विश्वकर्मा का विशेष योगदान था. विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और वास्तुकार माना जाता है. कुछ लोककथाओं और परंपराओं में मय दानव का नाम भी इस निर्माण कार्य से जोड़ा जाता है, जिन्हें असुरों का महान वास्तुकार माना गया है. द्वारका के समुद्र में समाने को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. महाभारत और पुराणों से जुड़ी कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के धरती से प्रस्थान के बाद द्वारका समुद्र में समा गई. समुद्र के भीतर द्वारका क्षेत्र के आसपास पुरातात्विक अवशेषों की खोज भी की गई है. हालांकि, धार्मिक ग्रंथों में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण की पूरी द्वारका और पुरातात्विक खोजों के बीच सीधा संबंध अब भी शोध और चर्चा का विषय बना हुआ है. क्या भगवान श्रीकृष्ण थे मार्शल आर्ट के जन्मदाता? भगवान श्रीकृष्ण की युद्ध कला और शारीरिक क्षमता से जुड़े कई प्रसंग धार्मिक कथाओं में मिलते हैं. उन्होंने मथुरा पहुंचकर कंस के मल्लों चाणूर और मुष्टिक का सामना किया था. कुछ लोकमान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण को प्राचीन युद्ध कलाओं से जोड़ा जाता है. दक्षिण भारत की प्रसिद्ध युद्ध कला कलारिपयट्टू को भी कई बार प्राचीन भारतीय युद्ध परंपराओं के संदर्भ में भगवान श्रीकृष्ण से जोड़ा जाता है. हालांकि, भगवान श्रीकृष्ण को कलारिपयट्टू का प्रत्यक्ष आविष्कारक मानने का दावा ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं है. फिर भी धार्मिक कथाओं में श्रीकृष्ण को एक महान योद्धा और युद्ध कला में निपुण माना गया है. मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने बचपन से ही ब्रजभूमि में रहते हुए अनेक प्रकार की शारीरिक और युद्ध कलाओं का अभ्यास किया था. यही कारण था कि कम उम्र में भी उन्होंने चाणूर और मुष्टिक जैसे शक्तिशाली मल्लों का सामना किया. भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र किसने दिया था? भगवान श्रीकृष्ण के सबसे शक्तिशाली दिव्य अस्त्रों में सुदर्शन चक्र का नाम सबसे पहले आता है. धार्मिक परंपराओं में सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का प्रमुख अस्त्र माना जाता है. भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, इसलिए सुदर्शन चक्र भी उनकी दिव्य शक्ति का प्रतीक माना गया है. कुछ कथाओं और लोक परंपराओं में यह भी कहा जाता है कि भगवान परशुराम ने श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था. हालांकि, अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इस प्रसंग के अलग-अलग वर्णन मिलते हैं. भगवान श्रीकृष्ण को अनेक दिव्य अस्त्रों का ज्ञाता भी माना जाता है. धार्मिक कथाओं में उनके युद्ध कौशल और दिव्य शक्तियों के कई प्रसंग मिलते हैं. भगवान श्रीकृष्ण ने कई लोगों को दिया जीवनदान भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग मिलते हैं, जिनमें उन्होंने अपने भक्तों और प्रियजनों की रक्षा की थी. ऐसी ही एक प्रसिद्ध कथा उनके गुरु संदीपनि ऋषि से जुड़ी है. माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने संदीपनि ऋषि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी. शिक्षा पूरी होने के बाद जब गुरु दक्षिणा देने की बात आई तो गुरु ने अपने पुत्र को वापस लाने की इच्छा व्यक्त की थी. धार्मिक कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण अपने गुरु के पुत्र की खोज करते हुए समुद्र तक पहुंचे और अंत में यमलोक से उसे वापस लेकर आए. इसके बाद उन्होंने गुरु दक्षिणा के रूप में अपने गुरु के पुत्र को उन्हें सौंप दिया. एक अन्य प्रसिद्ध प्रसंग अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित से जुड़ा है. महाभारत युद्ध के बाद अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु पर संकट आ गया था. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से उस शिशु की रक्षा की. आगे चलकर यही बालक राजा परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुआ. इसी तरह खाटू श्याम बाबा के रूप में पूजे जाने वाले बर्बरीक से जुड़ी कथाएं भी भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हैं. मान्यता है कि महाभारत युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण की कृपा से बर्बरीक का शीश युद्ध समाप्त होने तक युद्ध का साक्षी बना रहा. क्या भगवान श्रीकृष्ण का हृदय आज भी जगन्नाथ पुरी में मौजूद है? भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा एक बेहद रहस्यमयी और चर्चित प्रसंग जगन्नाथ पुरी से जुड़ा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का ही स्वरूप माना जाता है. एक लोकप्रिय लोककथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के शरीर त्यागने के बाद उनके शरीर का अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन उनका एक दिव्य अंश पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ. बाद में उसे समुद्र में प्रवाहित कर दिया गया. कथा के अनुसार, राजा इंद्रद्युम्न को भगवान ने स्वप्न में दर्शन दिए और समुद्र से प्राप्त दिव्य लकड़ी से भगवान की मूर्तियां बनवाने का निर्देश दिया. इसके बाद विश्वकर्मा एक वृद्ध बढ़ई के रूप में राजा के पास आए और मूर्तियां बनाने की जिम्मेदारी ली. उन्होंने शर्त रखी कि जब तक उनका काम पूरा न हो जाए, तब तक कोई भी कमरे का दरवाजा नहीं खोलेगा. लेकिन कई दिनों तक अंदर से कोई आवाज न आने पर राजा और रानी चिंतित हो गए. जब दरवाजा खोला गया तो वहां मूर्तियां अधूरी अवस्था में थीं और वृद्ध बढ़ई वहां से गायब हो चुके थे. मान्यता है कि तभी से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की मूर्तियां उसी विशेष स्वरूप में स्थापित की गईं. जगन्नाथ पुरी में एक … Read more

रूखे और बेजान हाथों को बनाएं मुलायम, चावल-ओट्स-चीनी से घर पर तैयार करें DIY बॉडी स्क्रब

 रोजाना बार-बार साबुन, धूल-मिट्टी और धूप के संपर्क में आने से हाथों की त्वचा रूखी और बेजान नजर आने लगती है. स्किन पर डेड सेल्स जमा हो जाते हैं, जिसकी वजह से हमारी त्वचा खराब दिखने लगती है. स्किन को सॉफ्ट और फ्रेश बनाने के लिए लोग महंगे बॉडी स्क्रब और बॉडी वॉस का इस्तेमाल करते हैं, जिसके हमारी स्किन पर कई सारी साइड इफेक्ट्स भी हो जाते हैं. अगर आप बिना किसी नुकसान और नेचुरल चीजों से अपनी स्किन को पहले जैसी मुलायम बनाना चाहते हैं तो आप डेड सेल्स हटाने के लिए आप घर पर ही एक आसान बॉडी स्क्रब तैयार कर सकते हैं. इसके लिए आपको महंगे प्रोडक्ट्स की जरूरत नहीं पड़ेगी. रसोई में मौजूद चावल, ओट्स, चीनी और चुकंदर जैसी चीजों से मिनटों में आप यह DIY स्क्रब तैयार कर सकते हैं, जो स्किन को एक्सफोलिएट करने में मदद कर सकते हैं. घर पर ऐसे बनाएं बॉडी स्क्रब इस स्क्रब को बनाने के लिए सबसे पहले 2 चम्मच चावल, 2 चम्मच ओट्स और 2 चम्मच चीनी लें. इन तीनों चीजों को मिक्सर में डालकर बारीक पीस लें. इस बात का ध्यान रखें कि पाउडर बहुत ज्यादा मोटा न हो, ताकि त्वचा पर स्क्रब करते समय ज्यादा रगड़ न लगे. अब एक छोटा चुकंदर लें और उसे अच्छी तरह धोकर छोटे टुकड़ों में काट लें. इसमें थोड़ा गुलाब जल मिलाकर मिक्सर में पीस लें. तैयार मिक्सर को छानकर इसका जूस अलग कर लें. अब एक बाउल में तैयार किया हुआ चावल-ओट्स-चीनी का पाउडर लें. इसमें थोड़ा नारियल तेल मिलाएं. इसके बाद इसमें तैयार किया हुआ चुकंदर और गुलाब जल का जूस डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें. आपका होममेड बॉडी स्क्रब तैयार है. इस्तेमाल करने का सही तरीका स्क्रब को हाथों पर लगाएं और हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में मसाज करें. इसे बहुत जोर से रगड़ने से बचें, क्योंकि इससे त्वचा में जलन या लालिमा हो सकती है. करीब 2 से 3 मिनट हल्की मसाज करने के बाद हाथों को नॉर्मल पानी से धो लें और इसके बाद मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं. स्क्रब कैसे करता है काम? इस स्क्रब में मौजूद चावल, ओट्स और चीनी त्वचा की ऊपरी सतह पर मौजूद डेड स्किन को हटाने में मदद कर सकते हैं, जबकि नारियल तेल त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद करता है. चुकंदर का जूस स्क्रब को नेचुरल गुलाबी कलर भी देता है. अगर इसे नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाए और त्वचा को पर्याप्त मॉइस्चराइज रखा जाए, तो हाथ ज्यादा मुलायम और साफ नजर आ सकते हैं. हालांकि, हर इंसान की स्किन अलग होती है, इसलिए रिजल्ट भी अलग-अलग हो सकते हैं. इन बातों का रखें ध्यान: संवेदनशील या बहुत नाजुक त्वचा पर किसी भी DIY स्क्रब को लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें. कट, घाव, रैश या जलन वाली त्वचा पर इसे इस्तेमाल न करें. स्क्रब को बहुत ज्यादा बार इस्तेमाल करने के बजाय सप्ताह में 1 से 2 बार करना काफी है.

गौरीघाट में बड़ा हादसा टला, 4 की क्षमता वाली मोटरबोट में सवार थे 8 होमगार्ड जवान

 जबलपुर  मध्य प्रदेश में भारी वर्षा से जबलपुर स्थित बरगी बांध के 13 जलद्वार खोले जाने से उफनती नर्मदा नदी के गौरीघाट में शुक्रवार शाम को होमगार्ड की पेट्रोलिंग मोटरबोट पलट गई। हादसे के समय मोटर बोट में क्षमता से अधिक बचाव दल के सदस्य सवार थे। नर्मदा में दल के सदस्य मोटरबोट से गश्त कर रहे थे, तभी तेज बहाव के कारण नाव अनियंत्रित होकर बहने लगी। कुछ होमगार्ड जवान तैरकर बाहर आए, जबकि बाकी को मौके पर मौजूद स्थानीय नाविकों और गोताखोरों ने अपनी नावों की मदद से सुरक्षित निकाला। पुलिस ने भी बचाव अभियान चलाकर जवानों को निकाला। सामने आया है कि मोटरबोट की क्षमता चार से पांच होती है, लेकिन उस पर चालक सहित 12 होमगार्ड जवान सवार थे। जो मोटरबोट पलटी, उसमें बैठने की व्यवस्था नहीं रहती है, फिर भी जवानों को उसमें बैठाकर तेज प्रवाह के बीच ले जाया गया। मझधार में इंजन खराब होने की बात सामने आई है। इससे गश्ती बोट की तकनीकी फिटनेस और जांच में लापरवाही माना जा रहा है। हालांकि चालक को छोड़कर बाकी सभी ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी। बताया जा रहा है कि मोटरबोट श्रद्धालुओं की सुरक्षा और घाट पर निगरानी के लिए पेट्रोलिंग कर रही थी। इसी दौरान बोट नदी में डूब गई। चालक की लापरवाही की बात भी कही जा रही है। होमगार्ड कमांडेंट नीरज सिंह ने मामले की जांच कराने बात कही है। याद आया बरगी डैम हादसागौरीघाट में नाव पलटने की घटना ने जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज हादसे की याद दिला दी। 30 अप्रैल की शाम बरगी डैम के क्रूज में सवार 32 में नौ लोगों की मौत हो गई थी। लापता लोगों की तीन दिन तक तलाश चलने के बाद मृतकों की संख्या 13 हो गई थी। शेष को बचा लिया गया था। हादसे की जांच एकल सदस्यीय आयोग कर रहा है। बरगी बांध के गेट खुलने के बाद पेट्रोलिंग कर रही थी टीम होमगार्ड कमांडेंट नीरज सिंह ठाकुर ने बताया- बरगी बांध के गेट खोले जाने के बाद नर्मदा के घाटों पर अलर्ट जारी किया गया है। होमगार्ड्स की टीम को ग्वारीघाट पर तैनात किया गया है, लेकिन पेट्रोलिंग के दौरान नर्मदा नदी के बीच में इंजन में खराबी आ गई। सभी जवान ड्यूटी पर थे। लाइफ जैकेट पहने हुए थे। घटना के बाद नाव नदी में डूब गई। उन्होंने बताया कि यह सही है कि नाव में क्षमता से अधिक लोग सवार थे। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि चालक की गलती के कारण हादसा हुआ। इस संबंध में चालक से पूछताछ की जा रही है। हालांकि, स्थानीय लोगों के मुताबिक, नाव में 10 से 11 लोग सवार थे। क्षमता से करीब दोगुने जवान सवार थे गौरीघाट थाना प्रभारी के अनुसार, हादसे के समय मोटरबोट को भानु नामक जवान चला रहा था। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बोट में करीब 8 जवान सवार थे, जबकि उसकी क्षमता केवल 4 लोगों की थी। यानी बोट में निर्धारित क्षमता से करीब दोगुने जवान सवार थे। अधिकारियों ने जांच के निर्देश दिए मोटरबोट की क्षमता से अधिक जवानों के सवार होने की बात सामने आने के बाद होमगार्ड अधिकारियों ने जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में यह देखा जाएगा कि पेट्रोलिंग के दौरान बोट में निर्धारित क्षमता से अधिक जवान कैसे सवार हुए। इंजन खराब होने के बाद सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम मौजूद थे।  

नीम करौली बाबा की सीख: कर्म करते रहें, हर चीज को कंट्रोल करने की जिद छोड़ दें, तभी मिलेगा सुकून

 कई बार जिंदगी में परेशानी किसी बड़ी समस्या की वजह से नहीं, बल्कि उसे लेकर हमारे मन में चल रही लगातार उथल-पुथल से बढ़ जाती है. भविष्य में क्या होगा, कोई अपना साथ छोड़ेगा या नहीं, मेहनत का परिणाम मिलेगा या नहीं, ऐसे सवाल मन को परेशान करते रहते हैं. नीम करौली बाबा की सीख इसी बेचैनी को कम करने का रास्ता बताती है. उनका संदेश है कि इंसान को अपना कर्म करते रहना चाहिए, लेकिन हर चीज को अपने हिसाब से चलाने की जिद छोड़ देनी चाहिए . भगवान पर विश्वास रखना जरूरी जीवन में कई परिस्थितियां ऐसी आती हैं, जिन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता. हम कोशिश जरूर कर सकते हैं, लेकिन हर परिणाम हमारी इच्छा के अनुसार हो, यह जरूरी नहीं. ऐसे समय में भगवान पर विश्वास मन को मजबूती देता है . नीम करौली बाबा की शिक्षाओं में समर्पण और विश्वास को महत्वपूर्ण माना जाता है. इसका अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति मेहनत करना छोड़ दे . बल्कि संदेश यह है कि अपना काम पूरी ईमानदारी से करें . मोह और प्रेम में अंतर समझें किसी व्यक्ति से प्रेम करना या अपने परिवार से जुड़ाव रखना स्वाभाविक है. परेशानी तब शुरू होती है, जब किसी रिश्ते या चीज को खोने का डर हमारी मानसिक शांति छीनने लगे . जरूरत से ज्यादा लगाव इंसान को लगातार डर में रख सकता है. इसलिए रिश्तों में प्रेम रखें, लेकिन अपनी पूरी खुशी किसी एक व्यक्ति या परिस्थिति पर निर्भर न करें. जो चीज आज हमारे साथ है, उसके बदलने की संभावना को स्वीकार करना भी जीवन का हिस्सा है . हर चीज को कंट्रोल करने की कोशिश न करें हम चाहते हैं कि नौकरी, रिश्ते, परिवार और भविष्य सब कुछ हमारी योजना के मुताबिक चले. लेकिन जीवन हमेशा हमारी बनाई हुई योजना के अनुसार नहीं चलता. कुछ परिस्थितियां हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं . ऐसे में हर चीज को बदलने की कोशिश करने के बजाय यह समझना बेहतर है कि हमें क्या करना है और क्या स्वीकार करना है. अपनी तरफ से पूरी कोशिश करें, लेकिन हर परिणाम को नियंत्रित करने की कोशिश न करें . मुश्किल वक्त भी देता है सीख जिंदगी में आने वाली हर परिस्थिति अपने साथ कोई न कोई सीख लेकर आती है. असफलता हमें अपनी कमियां समझा सकती है, मुश्किल समय धैर्य सिखा सकता है. किसी चीज का छूट जाना हमें यह एहसास करा सकता है कि जीवन में कुछ भी हमेशा एक जैसा नहीं रहता . अगर इंसान हर घटना को सिर्फ परेशानी मानने के बजाय उससे सीखने की कोशिश करे, तो मुश्किल दौर भी उसे भीतर से मजबूत बना सकता है . सुकून के लिए कुछ छोड़ना भी जरूरी अक्सर हम सोचते हैं कि खुश रहने के लिए जिंदगी में कुछ नया हासिल करना जरूरी है. लेकिन कई बार मानसिक शांति किसी चीज को पाने से नहीं, बल्कि उसे लेकर बनी चिंता छोड़ने से मिलती है . नीम करौली बाबा की सीख को इसी रूप में समझा जा सकता है, कर्म करते रहें, अपने रिश्तों और जिम्मेदारियों को निभाएं, लेकिन हर चीज को अपनी मुट्ठी में रखने की कोशिश न करें. भगवान पर भरोसा रखें,  जो हमारे नियंत्रण से बाहर है, उसे स्वीकार करना सीखें . यही सोच मन के बोझ को कम कर सकती है .