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अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर 8 सितंबर को सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजन

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बुनियादी शिक्षा की मजबूत नींव बालवाटिका स्तर से ही तैयार करने की दिशा में सीखने को बच्चों के लिए सहज, आनंदमय और रचनात्मक अनुभव से जोड़ रही है। इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर को प्रदेश के सभी को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों एवं बालवाटिकाओं तथा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ गतिविधि आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य कहानी के माध्यम से बच्चों में सुनने, समझने, अपनी बात कहने, कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को विकसित करना है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा श्रीमती मोनिका रानी के निर्देशों के क्रम में जारी कार्यक्रम में बालवाटिका के साथ डायट स्तर पर भी गतिविधियों के आयोजन और स्थानीय नवाचारों को शामिल करने पर जोर दिया गया है। नीतिगत रूप से यह पहल बालवाटिका स्तर पर सीखने की प्रक्रिया को बच्चों के अनुभव, संवाद और रचनात्मकता से जोड़ते हुए बुनियादी साक्षरता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कहानी बनेगी सीखने का सहज माध्यम को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों एवं बालवाटिकाओं में बालवाटिका हस्तपुस्तिका की दिवस योजना के अनुसार स्वागत समय और स्वतंत्र खेल गतिविधि के बाद कहानी सत्र में ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ गतिविधि कराई जाएगी। इसे बच्चों के सामाजिक एवं भावनात्मक विकास से जोड़ते हुए कहानी समय के सत्र में आयोजित किया जाएगा। राज्य स्तर से उपलब्ध बिग बुक अथवा स्थानीय कहानी में से बच्चों की आयु के अनुरूप कहानी का चयन किया जाएगा। कहानी ऐसी होगी, जिससे बच्चों को नैतिक संदेश भी मिल सके। कहानी सुनाने के दौरान बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को ध्यान में रखते हुए कहानी से जुड़े बंद एवं खुले छोर वाले प्रश्न पूछे जाएंगे और बच्चों को अपने उत्तर देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। डायट स्तर पर भी होगा विशेष आयोजन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में भी ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ गतिविधि आयोजित की जाएगी। स्थानीय आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इसमें नवाचारी प्रयासों को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। आसपास की बालवाटिकाओं के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एकेडमिक रिसोर्स पर्सन, बच्चों और अभिभावकों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित किया जा सकेगा। डायट स्तर पर कहानी पढ़ने का सत्र, कहानी के बाद बच्चों के साथ चर्चा एवं प्रश्नोत्तर सत्र तथा अभिभावकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और एकेडमिक रिसोर्स पर्सन की सहभागिता से कहानी वाचन जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं। बच्चों को कागज एवं रंग उपलब्ध कराकर कहानी से प्रेरित चित्र बनाने के लिए प्रोत्साहित करने और उनके चित्रों को प्रदर्शित कर उनकी सराहना करने पर भी जोर दिया गया है। कहानी से आगे बढ़ेगी रचनात्मक अभिव्यक्ति गतिविधि के बाद बालवाटिका में बच्चों से कहानी के आधार पर चित्र बनाने, चित्र के बारे में अपनी बात बताने और कहानी से जुड़ी रचनात्मक अभिव्यक्ति के अवसर देने के निर्देश हैं। बच्चों द्वारा तैयार सामग्री को सुरक्षित रखने तथा उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया है। सभी बालवाटिकाओं में गतिविधि सुनिश्चित करने के लिए प्रधानाध्यापक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और संबंधित शिक्षण सहयोगियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। कोट: योगी सरकार बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए सीखने को आनंद और रचनात्मकता से जोड़ रही है। ‘आओ सुनें और सुनाएं कहानी’ जैसी गतिविधियों से बालवाटिका के बच्चों में भाषा, कल्पनाशीलता और अभिव्यक्ति का विकास होगा। *संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश* कोट कहानी बच्चों के सीखने, सोचने और अपनी बात कहने का सहज माध्यम है। यह गतिविधि बालवाटिका में बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करते हुएव साक्षरता की मजबूत नींव तैयार करने में सहायक होगी। श्रीमती मोनिका रानी, महानिदेशक स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश

राइजिंग राजस्थान को रफ्तार देने की तैयारी, 10 दिसंबर तक ज्यादा से ज्यादा निवेश प्रोजेक्ट्स धरातल पर लाने का लक्ष्य

जयपुर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राइजिंग राजस्थान के माध्यम से प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को मुख्यमंत्री की मंशानुरूप आगामी 10 दिसंबर को प्रवासी राजस्थानी दिवस तक अधिकाधिक एमओयू ग्राउंड ब्रेकिंग के लक्ष्य की दिशा में प्रभावी एवं समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव सोमवार को शासन सचिवालय में आयोजित राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान हुए एमओयू की प्रगति एवं उनके क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न विभागों से संबंधित लंबित प्रकरणों की स्थिति की जानकारी लेते हुए इनके त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निवेश परियोजनाओं से संबंधित आवश्यक प्रस्ताव एवं फाइलें शीघ्र प्रस्तुत की जाएं। साथ ही, संबंधित जिला कलक्टरों के साथ सतत समन्वय स्थापित कर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से ऊर्जा एवं राजस्व विभाग से अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मुख्य सचिव ने भूमि संबंधी प्रकरणों के त्वरित निस्तारण को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि की पहचान एवं आवंटन से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब न हो और परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग शिखर अग्रवाल ने विभागवार प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि राइजिंग राजस्थान के अंतर्गत 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव विभिन्न चरणों में हैं। इनमें 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है उन्होंने कहा कि आगामी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जिन प्रकरणों में स्वीकृति दी जानी है, उनमें अनावश्यक विलंब न हो और उन्हें शीघ्र अनुमोदित किया जाए। वहीं, जिन प्रकरणों में स्वीकृति संभव नहीं है, उनमें भी तत्काल निर्णय लेकर उन्हें लंबित न रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करते हुए अनावश्यक रूप से कोई प्रकरण लंबित नहीं रखा जाए। बैठक में विभागवार निर्धारित लक्ष्यों एवं उनके विरुद्ध अर्जित प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि निवेश प्रस्तावों से जुड़े प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाई जाए।    

एक महीने से हड़ताल पर सफाई कर्मचारी, हरियाणा सरकार ने 30 की नौकरी खत्म की; दर्ज है FIR

चंडीगढ़  हरियाणा में एक महीने से चल रही सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। राज्य के अलग-अलग शहरी निकायों में कार्यरत पे रोल और हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) के माध्यम से लगे 30 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इन कर्मचारियों के खिलाफ सफाई कार्य नहीं करने और काम कर रहे कर्मचारियों को भी काम करने से रोकने के आरोप में एफआइआर दर्ज है। हड़ताल लंबी खिंचने के साथ ही प्रदेश के कई शहरों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। सरकार और सफाई कर्मचारियों के बीच मुख्य गतिरोध नियमितीकरण को लेकर है। प्रदेश सरकार कर्मचारियों की 13 में से 12 मांगें मान चुकी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी विधानसभा में कहा है कि कर्मचारियों की 12 मांगें स्वीकार की जा चुकी हैं और अदालत में विचाराधीन मामलों में न्यायालय के निर्देश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार की ओर से कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा के दायरे में लाने की पेशकश की गई है। इसका मतलब पात्र कर्मचारियों को नौकरी में एक निश्चित सुरक्षा मिलेगी और उन्हें अचानक सेवा से बाहर किए जाने की आशंका कम होगी। सरकार के मुताबिक एचकेआरएन के तहत कर्मचारियों को व्यवस्थित और संस्थागत व्यवस्था देने का उद्देश्य भी ठेकेदारों और बिचौलियों की भूमिका को खत्म करना है। एचकेआरएन में समान श्रेणी के काम के लिए मानकीकृत वेतन व्यवस्था लागू है और सरकार इसे कर्मचारी-केंद्रित व्यवस्था बता रही है। सरकार ने सेवा सुरक्षा को लेकर यह भी कहा है कि पात्र कर्मचारियों को इसका लाभ देने की प्रक्रिया चल रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार 31 अगस्त तक सेवा सुरक्षा पोर्टल पर 62,497 आवेदन मिले थे, जिनमें से हजारों आवेदनों को संबंधित अधिकारियों की ओर से मंजूरी दी जा चुकी थी। सरकार ने आश्वासन दिया है कि अगले दो माह में कोई भी पात्र कर्मचारी सेवा सुरक्षा से वंचित नहीं रहेगा। दूसरी ओर, हड़ताली कर्मचारी सेवा सुरक्षा के बजाय नियमितीकरण की मांग पर अड़े हुए हैं। यही मुद्दा सरकार और कर्मचारियों के बीच समझौते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। हाल के दिनों में हड़ताल के कारण गुरुग्राम समेत कई शहरों में कचरा उठाने और सफाई व्यवस्था पर असर पड़ा है। गुरुग्राम में हड़ताल के 31वें दिन कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप सिर मुंडवाकर प्रदर्शन किया और मंत्री के आवास की ओर मार्च किया। सरकार की ओर से 12 मांगें मान लिए जाने के बावजूद हड़ताल समाप्त नहीं हुई है। ऐसे में 30 कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई से विवाद और बढ़ने के आसार हैं। अब सरकार का जोर सेवा सुरक्षा और मौजूदा रोजगार व्यवस्था को मजबूत करने पर है, जबकि कर्मचारी नियमित सरकारी सेवा का दर्जा चाहते हैं। दोनों पक्षों के बीच इसी बिंदु पर गतिरोध बना हुआ है।

सपा सरकार में बाबू जगदेव कुशवाहा की प्रतिमा लगेगी, अखिलेश यादव का बड़ा वादा

  लखनऊ   समाजवादी पार्टी, प्रदेश मुख्यालय लखनऊ में आज बिहार के समाजवादी नेता श्रद्धेय बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा के शहादत दिवस पर कुशवाहा, शाक्य, मौर्य, सैनी समाज का सम्मेलन हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शहीद बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।     इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई बहुत पुरानी है। भाजपा सामाजिक न्याय विरोधी है। नकारात्मक राजनीति करती है। विपक्ष पर झूठे आरोप लगाती है। बदनाम करती है। भाजपा बाबा साहब का संविधान और कानून नहीं मानती है। बाबा साहब का संविधान बचाने और सामाजिक न्याय के लिए पीडीए सरकार बनाना जरूरी है। भाजपा के खिलाफ पीडीए ही विकल्प है। पीडीए की लड़ाई बड़ी है। पीडीए की एकजुटता से भाजपा घबराई है। तरह-तरह का षड्यंत्र कर रही है। भाजपा गरीबों, कमजोरों पर अन्याय कर रही है। उसका एजेण्डा नफरत फैलाना है। उन्होंने कहा कि सच्चा सनातनी कभी दूसरे से नफरत नहीं करता है और दूसरे के साथ अन्याय नहीं करता है।     अखिलेश यादव ने कहा कि आज कार्यक्रम में सामाजिक न्याय की लड़ाई को लड़ने वाले बड़ी संख्या में लोग मौजूद है। सभी ने पीडीए समाज को और जोड़ने तथा पीडीए आंदोलन को और मजबूत करने का संकल्प लिया। सबने मिलकर पीडीए सरकार बनाने और सामाजिक न्याय के राज की स्थापना का संकल्प लिया है जिससे सबको हक और सम्मान मिले। अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर चक्रवर्ती सम्राट अशोक की जयंती पर छुट्टी घोषित की जाएगी और सपा सरकार में लखनऊ के सबसे महत्वपूर्ण स्थान गोमती रिवर फ्रंट पर बाबू जगदेव कुशवाहा की प्रतिमा लगाकर स्मारक बनाया जाएगा। यादव ने कहा कि श्रद्धेय बाबू जगदेव कुशवाहा ने अपना पूरा जीवन वंचित, शोषित तबके को न्याय दिलाने और सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने में लगा दिया।     अखिलेष यादव ने कहा कि समाजवादी सरकार में प्रदेश में भगवान बुद्ध से जुड़े स्थानों कपिलवस्तु, श्रावस्ती, कुशीनगर, सिद्धार्थ नगर, सारनाथ, सोनभद्र और अन्य में विश्वस्तीय इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर दुनिया से जोड़ने और सुविधाएं देने का काम होगा।     अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना कराने की मांग करते हुए कहा कि कुशवाहा, शाक्य, मौर्या, सैनी समाज के लोग आबादी में ज्यादा हैं लेकिन संख्या कम बताई जाती है। इनकी गिनती होनी चाहिए। आबादी के हिसाब से हक और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण था, आरक्षण है और आरक्षण रहेगा, जो लोग सुरंग में रहकर आरक्षण के खिलाफ साजिश कर रहे हैं, उनकी सुरंगवादी सोच को नहीं चलने दिया जाएगा।     समारोह की अध्यक्षता समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने की। इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चौधरी, सांसद बाबू सिंह कुशवाहा, नीरज मौर्य एवं देवेश शाक्य, विधायक ऊषा मौर्य, राम अवतार सैनी, पूर्व एमएलसी लीलावती कुशवाहा, कार्यक्रम संयोजक जयपाल सैनी, कार्यक्रम संचालक अवनीश कुशवाहा पूर्व विधायक, जगदीश कुशवाहा पूर्व सांसद, आलोक शाक्य, प्रवक्ता राज कुमार भाटी, डॉ. नवल किशोर शाक्य आदि ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभाग किया। प्रदेश अध्यक्ष छात्र सभा विनीत कुशवाहा, आरएस कुशवाहा, दीनानाथ कुशवाहा, अमरनाथ मौर्य, वैभव सैनी प्रदेश उपाध्यक्ष छात्र सभा शामिल रहे।        

28 साल बाद फिर बनेगा अनोखा संयोग, एक दिन दो देशों में खेलेगा भारत

नई दिल्ली 3 अक्टूबर 2026 का दिन भारतीय क्रिकेट के लिए ऐतिहासिक बन सकता है. इस दिन भारत की दो मेन्स क्रिकेट टीमें एक साथ दो अलग-अलग देशों में मैदान पर उतर सकती हैं. एक टीम मुल्लांपुर (न्यू चंडीगढ़) में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी मुकाबला खेलेगी, जबकि दूसरी टीम जापान में एशियन गेम्स मेडल के लिए मुकाबला करती नजर आ सकती है. भारत और वेस्टइंडीज के बीच वनडे सीरीज का तीसरा एवं आखिरी मुकाबला 3 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे से निर्धारित है. इसी दिन जापान के निशिन स्थित कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता के ब्रॉन्ज और गोल्ड मेडल मैच खेले जाएंगे. भारत फाइनल का टिकट हासिल करता है तो वो 3 अक्टूबर को एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के लिए उतरेगा. सेमीफाइनल में हारने की स्थिति में टीम ब्रॉन्ज मेडल के लिए खेलेगी. यह भी पढ़ें: शेफाली को सेंडऑफ देना पड़ा महंगा, पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना पर ICC का तगड़ा एक्शन बता दें कि भारतीय मेन्स क्रिकेट टीम को एशियन गेम्स में सीधे क्वार्टर फाइनल में जगह मिली है. टीम 28 सितंबर को ग्रुप-ए में दूसरे स्थान पर रहने वाली टीम के खिलाफ अपना पहला मुकाबला खेलेगी. इस ग्रुप में अफगानिस्तान, जापान और नेपाल शामिल हैं. क्वार्टर फाइनल जीतने वाली टीम 1 अक्टूबर को सेमीफाइनल खेलेगी. भारतीय टीम एशियन गेम्स में मौजूदा चैम्पियन भी है. उसने 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में मेन्स क्रिकेट का गोल्ड मेडल जीता था. एशियन गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय टीम को महज युवा या दूसरे दर्जे की टीम कहना मुश्किल होगा. श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाया गया है, जबकि टीम में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह और वैभव सूर्यवंशी जैसे नाम शामिल हैं. 1998 में बना था ऐसा संयोग भारत के लिए एक ही दिन दो अलग-अलग देशों में दो मेन्स टीमों के खेलने की स्थिति नई नहीं है. इससे पहले 12 सितंबर 1998 को ऐसा हुआ था. कुआलालंपुर में कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले, अजय जडेजा और वीवीएस लक्ष्मण जैसे सितारों से सजी भारतीय टीम ने कनाडा को 112 रनों से हराया था. भारत ने उस मैच में 157/9 का स्कोर बनाया. फिर अनिल कुंबले (11 रन देकर 4 विकेट) की शानदार गेंदबाजी की बदौलत कनाडा को सिर्फ 45 रनों पर समेट दिया. उसी दिन टोरंटो में दूसरी भारतीय टीम ने सहारा फ्रेंडशिप कप में पाकिस्तान का सामना किया था. मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी वाली उस टीम में सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, नवजोत सिंह सिद्धू, जवागल श्रीनाथ और अजीत अगरकर जैसे खिलाड़ी थे. गांगुली ने 54 रन बनाए और तीन विकेट भी लिए, जिसके दम पर भारत ने पाकिस्तानी टीम को छह विकेट से हराया था. 1998 में दो अलग-अलग टीमों की जरूरत एक साथ आई थी, लेकिन 2026 की स्थिति भारतीय क्रिकेट की मौजूदा गहराई को दिखाने वाली हो सकती है. एक तरफ ओडीआई टीम में रोहित शर्मा, विराट कोहली, शुभमन गिल, केएल राहुल और कुलदीप यादव जैसे खिलाड़ी हो सकते हैं, वहीं दूसरी ओर एशियन गेम्स की टीम भी इंटरनेशनल और आईपीएल अनुभव से भरी होगी.

पटना के 3 इलाकों का होगा कायाकल्प, हरियाली के साथ वेंडिंग जोन और बेहतर पब्लिक स्पेस की तैयारी

पटना राजधानी में खाली और कम उपयोग हो रहे स्थानों को अब हरित और मनोरंजक सार्वजनिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए तीन प्रमुख स्थानों पर अर्बन ग्रीन एंड रिक्रिएशनल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का प्रस्ताव नगर निगम की ओर से तैयार किया गया है। इसमें पटेल गोलंबर से एयरपोर्ट होते हुए शेखपुरा मोड़ तक का मार्ग, गांधी मैदान व उसकी बाहरी परिधि और मीठापुर से करबिगहिया के बीच फ्लाईओवर के नीचे का क्षेत्र शामिल है। प्रस्तावित योजना में हरियाली बढ़ाने के साथ पैदल यात्रियों और साइकिल सवारों के लिए सुविधाएं विकसित करने तथा छोटे दुकानदारों के लिए व्यवस्थित वेंडिंग जोन बनाने की परिकल्पना की गई है। अर्बन ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होने से तीनों क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के साथ पैदल यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। साइकिल ट्रैक से साइकिल चलाने वालों को सुरक्षित जगह मिल सकेगी। वहीं, व्यवस्थित वेंडिंग जोन बनने से छोटे दुकानदारों को तय स्थान मिलेगा और सड़क किनारे अव्यवस्थित दुकानें लगाने की समस्या कम हो सकती है पौधारोपण, लैंडस्केपिंग, बैठने की जगह और बेहतर रोशनी से इन क्षेत्रों की सुंदरता बढ़ने के साथ लोगों को अधिक सुविधाजनक और बेहतर सार्वजनिक वातावरण उपलब्ध होगा। नगर निगम जल्द ही इस प्रस्ताव को धरातल पर उतारने की दिशा में काम कर रहा है। पटेल गोलंबर-शेखपुरा मोड़ मार्ग होगा हरित पहले स्थल के रूप में पटेल गोलंबर से एयरपोर्ट होते हुए शेखपुरा मोड़ तक के मार्ग को विकसित करने का प्रस्ताव है। सड़क के किनारे व्यवस्थित फुटपाथ और साइकिल ट्रैक बनाए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही सड़क के आसपास और डिवाइडर क्षेत्र में पौधे लगाकर हरियाली बढ़ाई जाएगी। पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए फुटपाथ पर टैक्टाइल पथ प्रस्तावित है। इससे दृष्टिबाधित लोगों को भी आवाजाही में सुविधा होगी। सड़क किनारे आकर्षक लाइटें, पौधों की कतार और गमलों से क्षेत्र को बेहतर रूप देने की योजना है। इसके अलावा दीवारों पर बिहार की कला और संस्कृति से जुड़े चित्रों के माध्यम से इस मार्ग को आकर्षक बनाया जाएगा। एयरपोर्ट से शहर में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्ग को हरित और व्यवस्थित स्वरूप दिया जाएगा। गांधी मैदान के चारों ओर विकसित होगा सार्वजनिक क्षेत्र दूसरे स्थल के रूप में गांधी मैदान की बाहरी परिधि को विकसित करने की योजना है। इसके गेट क्षेत्र समेत मैदान के आसपास के हिस्से को बेहतर सार्वजनिक स्थान के रूप में तैयार किया जागा। यहां चौड़े फुटपाथ, हरियाली, बैठने की जगह, स्ट्रीट लाइट और व्यवस्थित वेंडिंग कियोस्क प्रस्तावित हैं। चाय-नाश्ता, फल और अन्य सामान बेचने वाली दुकानों के लिए एक समान डिजाइन वाले कियोस्क लगाए जाएंगे। इससे दुकानदारों को निर्धारित स्थान मिलेगा और सड़क किनारे बेतरतीब तरीके से दुकानें लगाने की स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। गांधी मैदान के गेट क्षेत्र में ऑटो के लिए व्यवस्थित स्थान का भी प्रस्ताव है। कूड़ा प्रबंधन के लिए अलग-अलग डस्टबिन लगाए जाएंगे। लोगों के बैठने के लिए बेंच, पौधों से सजे लैंडस्केप क्षेत्र और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था से मैदान के आसपास का क्षेत्र अधिक सुविधाजनक बनेगा। गांधी मैदान की आंतरिक परिधि में भी बढ़ेगी हरियाली गांधी मैदान की आंतरिक परिधि को बेहतर बनाने के लिए भी योजना बनाई है। इसमें पैदल पथ को व्यवस्थित करने, हरियाली बढ़ाने और लोगों के बैठने के लिए स्थान विकसित करने की तैयारी है। कुछ हिस्सों में अलग साइकिल ट्रैक भी प्रस्तावित है। मैदान के किनारे खुले स्थानों को केवल आने-जाने के रास्ते के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें टहलने, बैठने और साइकिल चलाने के अनुकूल बनाया जाएगा। इससे गांधी मैदान के आसपास का क्षेत्र अधिक उपयोगी और सुविधाजनक सार्वजनिक स्थान बन सकेगा। मीठापुर-करबिगहिया फ्लाईओवर के नीचे बदलेगा नजारा तीसरे स्थल के रूप में मीठापुर से करबिगहिया के बीच फ्लाईओवर के नीचे की जगह को विकसित करने का प्रस्ताव है। फ्लाईओवर के पिलरों के बीच उपलब्ध स्थान में हरियाली, पैदल पथ और बैठने की सुविधा विकसित करने की तैयारी है। इसके साथ आकर्षक प्रकाश व्यवस्था भी प्रस्तावित है। यहां पौधों से सजे छोटे लैंडस्केप क्षेत्र बनाने की योजना है। पैदल यात्रियों के लिए टैक्टाइल पथ और कचरा डालने के लिए अलग-अलग डस्टबिन भी प्रस्तावित स्वरूप में शामिल हैं। इससे फ्लाईओवर के नीचे के स्थान को अधिक साफ-सुथरा और उपयोगी सार्वजनिक क्षेत्र बनाया जाएगा। ये जगह होंगे विकसित     पटेल गोलंबर से एयरपोर्ट-शेखपुरा मोड़     गांधी मैदान व उसकी बाहरी परिधि     मीठापुर-करबिगहिया फ्लाईओवर के नीचे  

रांची की हवा सुधारने की कोशिशों को झटका, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 27वीं रैंक

रांची  National Clean Air Survey-2026 केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत जारी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में झारखंड की राजधानी रांची 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में 27वें स्थान पर रही। रांची का स्कोर 162.5 रहा। वहीं रांची से बहुत बेहतर प्रदर्शन धनबाद का रहा। धनबाद 17वें स्थान पर रहकर 174.5 अंक के साथ रांची से आगे रहा। झारखंड की औद्योगिक नगरी जमशेदपुर को 37वां स्थान मिला, जिसका स्कोर 147.3 रहा। सर्वेक्षण में शहरों में वायु प्रदूषण कम करने के प्रयास, उनकी प्रभावशीलता और परिणामों का आकलन किया गया। रांची नगर निगम के वार्ड 26, 29 और 15 को सबसे स्वच्छ वार्डों में शामिल किया गया। सर्वेक्षण में सीपीसीबी की भी भूमिका रही। 48 शहरों की श्रेणी में 27वीं रैंक इस बार 10 लाख से अधिक आबादी वाले 48 शहरों को एक श्रेणी में शामिल किया गया है। रैंकिंग तय करने में तालिका में दिए गए क्रमांक के बजाय अलग से दर्ज ‘रैंक’ को आधार बनाया गया है। इसी आधार पर रांची की रैंक 27 है। उसका अंतिम प्राप्तांक 162.5 दर्ज किया गया है। रांची से आगे रहने वाले पटना को 178 अंक मिले हैं और वह 16वें स्थान पर है। धनबाद को 174.5 अंक मिले और वह 18वें स्थान पर रहा। दोनों शहरों के प्राप्तांक रांची के मुकाबले अधिक हैं। लखनऊ शीर्ष पर, मदुरै 39वें स्थान पर सर्वेक्षण की सूची में लखनऊ 198 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा। इंदौर 197 अंक के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भोपाल और आगरा दोनों को 192-192 अंक मिले और दोनों चौथे स्थान पर रहे। सूची के निचले हिस्से में मदुरै 39वें स्थान पर है। उसका अंतिम प्राप्तांक 132.1 रहा। हालांकि सूची में 48 शहर शामिल हैं, उपलब्ध तालिका के ‘रैंक’ खाने में मदुरै के लिए 39 दर्ज है। इसलिए उसे 48वें स्थान पर बताना सही नहीं होगा। उपलब्ध रैंक और प्राप्तांक के आधार पर मदुरै की स्थिति 39वें स्थान की ही मानी गई है। शहर की रैंकिंग के बीच वार्डों से राहत पूरे शहर की रैंकिंग में रांची भले ही पीछे रही हो, लेकिन वार्ड स्तर पर शहर के दो हिस्सों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। राज्य स्तरीय वार्ड रैंकिंग में 30 हजार से अधिक आबादी वाली श्रेणी में रांची नगर निगम का वार्ड-29 शामिल हुआ है। वहीं 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में वार्ड-26 ने जगह बनाई है। वार्ड स्तर पर इन दोनों की मौजूदगी रांची के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे यह भी पता चलता है कि शहर के कुछ हिस्सों में स्वच्छ वायु और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रयासों का असर दिखाई दे रहा है। हालांकि पूरे शहर की रैंकिंग 27वें स्थान पर रहना यह सवाल भी खड़ा करता है कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले वार्डों में अपनाए जा रहे उपायों को नगर निगम के दूसरे क्षेत्रों में कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।  

JSSC CGL पेपर लीक केस में खुलती जा रही परतें, 135 में 120 सवाल परीक्षा में हुए मैच

 रांची  SSC CGL Paper Leak: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) प्रतियोगिता परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच के लिए गठित 17 सदस्यीय एसआइटी को लगातार नई जानकारियां मिल रही हैं। नए सिरे से जब इस मामले की जांच तेज हुई तो गिरफ्तार एक-एक आरोपित इस परीक्षा में कथित पेपर लीक की पुष्टि करने लगे। सीआइडी के पूर्व डीजी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में सीआइडी ने जांच के दौरान 16 आरोपितों को गिरफ्तार तो किया था, लेकिन जांच में पेपर लीक की पुष्टि नहीं कर सकी थी। पूर्व की जांच में सीआइडी ने पाया था कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक नहीं हुई थी, बल्कि पेपर लीक के नाम पर अभ्यर्थियों से अवैध तरीके से वसूली की गई थी। जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी, ओएमआर शीट की हेराफेरी सहित अनियमितता मामले की जांच के क्रम में गिरफ्तार परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी की गिरफ्तारी के बाद ही एक-एक कर गड़बड़ियों का खुलासा होता गया। अभय कुमार तिवारी जेपीएससी की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के मामले में गिरफ्तार हुआ था। जब उससे पूछताछ हुई तो उसने जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा में भी गड़बड़ी से पर्दा उठाया। उसने बताया कि उसने स्वयं सहित अपनी पत्नी सुषमा कुमारी व भाई अक्षय तिवारी को उक्त परीक्षा में पास कराने के लिए जेएसएससी सीजीएल परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आइसीएन के संचालक मिथिलेश सिंह को 12-12 लाख रुपये की रिश्वत दी थी। अभय तिवारी ने यह भी बताया था कि उक्त परीक्षा में 12-12 लाख रुपये से लेकर किसी अभ्यर्थी से 15 लाख तो किसी से 20-20 लाख रुपये लेकर अभ्यर्थियों की सेटिंग कराई गई थी और उन्हें पास कराया गया था। बोकारो से लेकर नेपाल तक रटवाए गए थे प्रश्न व उत्तर सीजीएल परीक्षा मामले में एसआइटी ने गिरफ्तार आरोपितों से सख्ती से पूछताछ की तो आरोपितों ने बताया कि उन्हें बोकारो से लेकर नेपाल तक प्रश्न व उत्तर रटवाए गए थे। रटवाए गए 135 प्रश्नों में से 120 प्रश्न परीक्षा में मैच कर गए थे। रुपये देने वाले अभ्यर्थियों को भी सफलता हासिल हुई थी। सीआइडी की एसआइटी ने पिछले एक महीने के भीतर 11 सफल अभ्यर्थियों व परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आइसीएन के कर्मियों को गिरफ्तार किया है। अभ्यर्थियों व आइसीएन से जुड़े कर्मियों ने पेपर लीक की सूचना पर मुहर लगाई है। इसी सिंडिकेट से पूर्व में गिरफ्तार 16 अभ्यर्थी भी जुड़े थे, जिन्होंने अभ्यर्थियों से रुपये वसूले, उन्हें संबंधित ठिकानों तक पहुंचाया, जहां उन्हें प्रश्न व उत्तर रटवाया। इसमें विशेषज्ञों की भी मदद ली गई थी। वेबेल को मिला था काम, आइसीएन से करवाया, फिर लीक हुआ प्रश्न पत्र जेएसएससी सीजीएल परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी वेबेल एजेंसी को मिली थी। वेबेल ने अपने सहयोगी आइसीएन से परीक्षा संचालन में मदद ली। आइसीएन प्रश्न प्रिंट होने से लेकर स्ट्रांग रूम तक पहुंचाने में शामिल रहा। सीआइडी की जांच में पुष्टि हो चुकी है कि आइसीएन ने ही पेपर लीक किया अभ्यर्थियों, एजेंटों, दलालों, अधिकारियों के सिंडिकेट में आइसीएन भी शामिल था, जिसने पेपर लीक कर अयोग्य अभ्यर्थियों को मदद पहुंचाई है। सीआइडी ने अब तक 250 से अधिक अभ्यर्थियों व संदिग्धों का बयान ले लिया है। हर दिन पूछताछ जारी है। प्रखंड कल्याण पदाधिकारी कुंदन कुमार से रिमांड पर होगी पूछताछ सीआइडी की एसआइटी अब गिरफ्तार गुमला जिले के सिसई के प्रखंड कल्याण पदाधिकारी कुंदन कुमार को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। कुंदन कुमार की नियुक्ति जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के माध्यम से हुई थी। सीआइडी ने प्रारंभिक जांच में पाया है कि कुंदन कुमार ने स्वयं व अन्य अभ्यर्थियों के लिए भी एजेंट बनकर अवैध भुगतान किया था और नौकरी हासिल की थी। सीआइडी सभी बिंदुओं पर छानबीन कर रही है। भाजपा लगातार कर रही है पूर्व डीजी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग सीआइडी की जांच में पेपर लीक की पुष्टि के बाद भाजपा लगातार पूर्व डीजीपी सह सीआइडी के पूर्व डीजी अनुराग गुप्ता के विरुद्ध कार्रवाई की मांग कर रही है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री से पत्राचार कर व इंटरनेट मीडिया एक्स पर पोस्ट कर पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में संलिप्तता का आरोप लगाते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। बाबूलाल मरांडी के अनुसार अनुुराग गुप्ता ने जान-बूझकर सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक व अनियमितता के मामलों की अनदेखी करते हुए आरोपों को गलत ठहराया था। सभी आरोप एक-एक कर सही साबित होते जा रहे हैं।  JSSC-CGL मामले की जांच को प्रभावित करने, उसे गलत दिशा में ले जाने और डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट कराने के आरोपों से घिरे पुलिस अधिकारी अनुराग गुप्ता पर कार्रवाई करने से मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM आखिर क्यों हिचक रहे हैं?     आखिर ऐसी क्या वजह थी कि अनुराग गुप्ता छात्रों द्वारा लगाए गए…

रातभर बालों में तेल लगाकर सोते हैं तो सावधान! जावेद हबीब ने बताया सही तरीका

बालों में तेल लगाना भारतीयों की हेयर केयर रूटीन का हिस्सा रहा है. पूराने समय से बालों को मजबूत, स्मूद, सिल्की और शाइनी बनाने के लिए लोत बालों में तेल लगाते आए हैं. खासकर बालों को मजबूत और घना रखने के लिए लोग अक्सर रात में सिर पर अच्छी तरह तेल लगाकर सोते हैं और सुबह शैंपू करते हैं. लेकिन अगर आप भी सालों से ऐसा करते आ रहे हैं, तो जरा रुकिए! मशहूर हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब के मुताबिक, तेल लगाने का ये तरीका सही नहीं है. यही बालों के झड़ने से लेकर उनका कमजोर होना का एक बड़ा कारण है. उनका कहना है कि सिर्फ तेल लगा लेना ही काफी नहीं है, बल्कि इसे कब और कैसे लगाया जा रहा है, ये भी बालों की सेहत के लिए काफी मायने रखता है. अगर आप भी बालों में रात को ठूस-ठूसकर तेल भरकर सो जाते हैं और सोचते हैं कि सुबह आपके बाल अच्छे मिलेंगे, तो आप बहुत गलत सोच रहे हैं. चलिए जानते हैं क्या है बालों में तेल लगाने का सही तरीका, जो उन्हें मजबूती देने के साथ ही टूटने से भी बचाएगा. रातभर तेल लगाकर सोना पड़ सकता है भारी भारतीय आमतौर पर मानते हैं कि बालों में तेल जितनी देर लगा रहेगा, उतना ही ज्यादा फायदा होगा. इसी सोच के चलते कई लोग रात को सोने से पहले सिर में तेल लगाते हैं और सुबह तक इसे लगा रहने देते हैं. लेकिन जावेद हबीब इस आदत को सही नहीं मानते. उनके मुताबिक, रात सोने के लिए होती है, बालों में घंटों तक तेल लगाए रखने के लिए नहीं. लंबे समय तक स्कैल्प पर तेल लगा रहने से धूल-मिट्टी और गंदगी चिपक सकती है. इसकी वजह से स्कैल्प ब्लॉक रहता है. इससे स्कैल्प से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं और बालों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है. उनका कहना है कि रात में तेल लगाकर सोना ना केवल बाल झड़ने का बल्कि सफेद होने का भी बड़ा कारण है. सूखे बालों पर तेल लगाना भी सही तरीका नहीं? बालों में तेल लगाने को लेकर एक और आम आदत है कि लोग सीधे सूखे बालों और स्कैल्प पर खूब सारा तेल लगा लेते हैं. जावेद हबीब के अनुसार, ये भी तेल लगाने का सही तरीका नहीं है. जिस तरह शैंपू और कंडीशनर का इस्तेमाल बालों की कंडीशन के हिसाब से किया जाता है, उसी तरह तेल लगाने का तरीका भी मायने रखता है. वो कहते हैं कि तेल लगाने से पहले बालों को हल्का गीला किया जा सकता है. इससे तेल को बालों पर फैलाना आसान होता है और जरूरत से ज्यादा तेल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. यानी तेल सूखे बालों पर नहीं, बल्कि हल्के गीले बालों पर लगाना अच्छा होता है. तो आखिर बालों में तेल कब लगाएं? जावेद हबीब के बताए तरीके के मुताबिक, बालों में तेल लगाने के लिए घंटों तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है. इसे शैंपू करने से कुछ समय पहले लगाया जा सकता है. तेल लगाने के बाद इसे करीब 5 से 10 मिनट तक बालों और स्कैल्प पर रहने दें और फिर शैंपू कर लें. यानी रातभर तेल लगाकर सोने के बजाय प्री-शैंपू ऑयलिंग को अपनी रूटीन में शामिल किया जा सकता है. तेल लगाते समय जोर-जोर से न रगड़ें बहुत से लोग ये भी मानते हैं कि सिर में तेल लगाते समय जितनी तेज मालिश की जाएगी, उतना ही ज्यादा फायदा होगा. लेकिन ऐसा करना जरूरी नहीं है. जावेद हबीब कहते हैं कि स्कैल्प को जोर से रगड़ने या नाखूनों से खुजलाने के बजाय हल्के हाथों से तेल लगाना अच्छा रहता है. तेल को स्कैल्प और बालों की लंबाई पर हल्के हाथों से लगाएं. इसके बाद कुछ मिनट छोड़कर शैंपू कर लें. इससे बालों की जड़ें कमजोर नहीं होंगी. तेल लगाने का मतलब यह नहीं कि बालों में घंटों तेल रहे बालों में तेल लगाने का मकसद उन्हें जरूरत से ज्यादा ऑयली बनाना नहीं है. असल में हेयर केयर में सबसे जरूरी बात है कि आप अपनी स्कैल्प और बालों की जरूरत को समझें. बहुत ज्यादा तेल लगाना, उसे लंबे समय तक छोड़ना या स्कैल्प को जोर से रगड़ना जरूरी नहीं है.

मृत समझकर किया अंतिम संस्कार, 28 महीने बाद घर पहुंची शिवानी; अब उलझी पुलिस की जांच

लखनऊ राजधानी लखनऊ में बड़ा चमत्कार हो गया है। यहां परिवार ने जिस महिला को मृत समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था, वह 28 महीने बाद जिंदा घर लौट आई। 28 वर्ष की शिवानी पांच सितंबर को बीकेटी तहसील के नवीकोट नंदना गांव में अपने मायके पहुंची। उसे देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए। करीब डेढ़ वर्ष पहले आईआईएम रोड के पीछे नाले में एक अज्ञात महिला का शव मिला था। मायकेवालों ने उसकी पहचान शिवानी के रूप में की थी। इसके बाद भैंसाकुंड में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस प्रकरण में ससुरालवालों के खिलाफ दहेज हत्या का केस भी दर्ज कराया गया था। अब शिवानी के जिंदा लौटने से मामला उलझ गया है। सवाल है कि नाले में मिला शव आखिर किस महिला का था। पुलिस शिवानी को थाने ले गई और उससे पूछताछ की जा रही है। अपने प्रेमी के साथ पारा में रह रही उसके बारे में पता चला है कि वह अपने प्रेमी के साथ पारा में रह रही थी। पुलिस ने मामले में पड़ताल तेज कर दी है। अब सोमवार को पुलिस 164 के बयान दर्ज कराएगी। परिवार के मुताबिक, शिवानी का विवाह की शादी 22 अप्रैल 2020 को मूल रूप से सीतापुर और यहां बीकेटी के भीखापुर निवासी आनंद सिंह से हुई। आरोप है कि कुछ समय बाद उससे प्लाट की मांग की जाने लगी। दादी की मौत के बाद मायके आई शिवानी ने मां को जानकारी और फिर वापस ससुराल नहीं गई। दो मई 2024 की सुबह ससुराल से आधार कार्ड लाने की बात कहक शिवानी घर से निकली, लेकिन लौटी नहीं। ससुरालवालों ने भी जानकारी से किया इन्कार पिता सर्वेश सिंह उर्फ हींगू ने तलाश शुरू की। ससुरालवालों ने भी जानकारी से इन्कार किया तो बीकेटी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। 16 जुलाई को आइआइएम रोड के पीछे नाले में अज्ञात महिला का शव मिला। पुलिस ने शिवानी के स्वजन को सूचना दी। मेडिकल कालेज में स्वजन ने हाथ में बंधे कलावे और अंगूठी के आधार पर शिवानी के रूप में पहचान की। पुलिस की मौजूदगी में भैंसाकुंड में अंतिम संस्कार हुआ और ससुरालवालों पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। शिवानी ने बताया सच पुलिस के मुताबिक, शिवानी पारा में जावेद नामक युवक के साथ रह रही थी, जो नगर निगम के शौचालय की देखरेख करता है। शिवानी के अनुसार उसकी मुलाकात जावेद से पारा में हुई। जावेद ने कई बार उसे घर लौटने के लिए कहा, लेकिन वह वापस नहीं गई। डीएनए रिपोर्ट में निकला था किसी और का शव डीएनए रिपोर्ट में निकला था किसी और का शव एसीपी बीकेटी विकास पांडेय ने बताया कि महिला के शव का डीएनए टेस्ट कराया गया था। रिपोर्ट में पता चला कि शव शिवानी का नहीं है इसलिए ससुराल पक्ष से किसी को जेल नहीं भेजा गया था, लेकिन अपहरण की धारा में जांच चल रही है। साथ ही वह शव किसका था यह पता लगाया जा रहा है। शिवानी से पूछताछ में पता चलेगा कि इतने दिन वह क्यों नहीं लौटी।