samacharsecretary.com

छत्तीसगढ़ में जमीन सीमांकन हुआ आसान! डिजिटल सुविधा से तहसील के चक्कर खत्म, ऐसे मिलेगा लाभ

डिजिटल छत्तीसगढ़- अब ज़मीन के सीमांकन के लिए नहीं काटने पड़ेंगे तहसील के चक्कर नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश,पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन रायपुर,   राज्य सरकार के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए ज़मीन के सीमांकन (Demarcation)  की प्रक्रिया को बेहद आसान, पारदर्शी और डिजिटल बना दिया है। अब ज़मीन मालिकों को नाप-जोख या सीमांकन के लिए तहसील कार्यालयों और सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।        नए डिजिटल सिस्टम में सीमांकन आवेदन के लिए तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी बल्कि सिर्फ  लोक सेवा केंद्र (CSC/चॉइस सेंटर) और राजस्व विभाग के ऑनलाइन सिटिज़न  पोर्टल या सेवासेतु के माध्यम से ही आवेदन जमा किए जा सकेंगेद्य जिससे सीमांकन के ऑफलाइन या मैन्युअल आवेदन को म-बवनतज अंतर्गत  तहसील स्तर से दर्ज करने की व्यवस्था खत्म की जा रही है। आवेदन सीधे संबंधित तहसीलदार की आईडी में ट्रांसफर हो जाएंगे। एवं राजस्व निरीक्षक द्वारा भी अपने रिपोर्ट ऑनलाइन  जमा करने का प्रावधान भी इसमें शामिल किया जा रहा है, जिससे आवेदक को आवेदन के संबंध मे सभी स्तर के जानकारी उपलब्ध होती रहेगी।      राजस्व विभाग के भू-अभिलेख शाखा से जारी पत्र अनुसार राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (NIC) के वरिष्ठ तकनीकी निदेशक को ई-कोर्ट  (E-Court)  सॉफ्टवेयर में ज़रूरी तकनीकी सुधार कर नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए गये हैं।        सिर्फ आपत्ति होने पर ही जाना होगा तहसील        नई व्यवस्था के तहत पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और डिजिटल मैपिंग से पूरी होगी। आवेदक को तहसील कार्यालय केवल तभी जाना पड़ेगा, जब सीमांकन के दौरान किसी पड़ोसी या अन्य पक्ष द्वारा कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई जाए। अगर मामला निर्विवाद है, तो आवेदक को एक बार भी दफ्तर जाने की ज़रूरत नहीं होगी।        मैन्युअल व्यवस्था खत्म होने से दफ्तरों की अनचाही भाग-दौड़ और बिचौलियों का दखल पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। तय समय-सीमा के कारण मामलों के पेंडिंग रहने की समस्या दूर होगी और आवेदकों को निश्चित समय में सीमांकन रिपोर्ट मिल जाएगी।  ई-गवर्नेंस की ओर एक और बड़ा कदम      राजस्व विभाग नागरिकों की सुविधा के लिए पहले ही कई सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन कर चुका है। जिसमें डिजिटल हस्ताक्षरित B-1 एवं P-II नागरिक घर बैठे खसरा और खतौनी की QR कोड वाली प्रमाणित कॉपी डाउनलोड कर सकते हैं। ज़मीन की खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन और स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा उपलब्ध है। ऑनलाइन नजरी नक्शा, परिवर्तित भूमि (Diversion) और नजूल ज़मीन के टैक्स रिकॉर्ड्स को पूरी तरह डिजिटल किया जा चुका है। राजस्व अदालतों में चल रहे मामलों की पेशी, आदेश और सुनवाई का स्टेटस ऑनलाइन देखा जा सकता है।          राजस्व विभाग की यह नई पहल राज्य में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने और आम लोगों की समस्याओं को पारदर्शी तरीके से हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

NIA केसों की सुनवाई में देरी पर SC नाराज, राज्यों से जल्द विशेष अदालतें गठित करने को कहा

 नई दिल्ली विशेष एनआईए अदालतों की स्थापना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्यों से जल्द विशेष अदालतें शुरू करने को कहा, ताकि NIA के मामलों में सुनवाई में देरी न हो।  एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ को बताया कि कई राज्यों ने इस संबंध में अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की है. मतलब इन राज्यों ने अब तक बताया ही नहीं है कि उनके यहां विशेष NIA अदालतें स्थापित की गई हैं या नहीं।   सुनवाई के दौरान कर्नाटक के वकील ने बताया कि बेंगलुरु में तीन विशेष अदालतें हैं. और चिकमंगलूर में भी जल्द अदालत शुरू होने वाली है. केरल सरकार के वकील ने बताया कि उन्होंने विशेष अदालतों के लिए जगहों की पहचान कर ली है. राज्य में दो अदालतें स्थापित होनी है. उन्होंने अदालत से दो-तीन महीने का समय मांगा लेकिन CJI ने एक महीने में ही अदालतें शुरू करने को कहा. तमिलनाडु सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में 2 विशेष अदालतें स्थापित की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि एक तो कार्यरत भी हैं।  तेलंगाना सरकार के वकील ने बताया कि राज्य में सिर्फ एक विशेष NIA अदालत की जरूरत है. तेलंगाना में NIA के 13 मामले हैं. CJI ने तेलंगाना सरकार को तीन हफ्ते में अदालतें शुरू करने का निर्देश दिया. असम में NIA के 26 मामले हैं. राज्य में एक विशेष अदालत काम कर रही है और दो और अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।  CJI ने असम से इस संबंध में चार हफ्ते में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए. जम्मू कश्मीर में NIA के 46 मामले हैं और यहां सिर्फ एक विशेष अदालत है. सुरक्षा कारणों से अदालतें जम्मू में बनाने की बात कही गई. सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर में तीन और अदालतों की जरूरत बताई गई।  मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने साफ कहा कि विशेष NIA अदालतों में दूसरे मामलों की सुनवाई नहीं होनी चाहिए. ताकि NIA के मामलों का जल्द से जल्द निपटारा हो सके। 

‘शिक्षित इलाकों में 70-75%, क्रिमिनल एरिया में 92% वोट’, नितिन गडकरी के बयान से मची हलचल

नागपुर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. अब उन्होंने फिर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है. नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि उन्हें शिक्षित क्षेत्रों की तुलना में क्रिमिनल, अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से ज्यादा वोट मिले. गडकरी का यह बयान अब वायरल हो रहा है।  नागपुर में बोले गडकरी- पढ़े-लिखे से ज्यादा अपराधी इलाकों से मिले वोट  दरअसल नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि उनके चुनाव में पढ़े-लिखे लोगों से ज्यादा अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया से उन्हें वोट मिले थे. उन्होंने बताया कि शहर के बड़े और शिक्षित इलाकों में उन्हें कुल मतदान प्रतिशत का लगभग 70-75% वोट मिला, जबकि अपराधी, अंडरवर्ल्ड और रेड इलाकों में उन्हें 92% वोट मिले।  मैं उनके काम का समर्थन नहीं करताः गडकरी गडकरी ने हंसते हुए कहा कि नागपुर में अंडरवर्ल्ड और असामाजिक कार्य से जुड़े लगभग 99% लोग उनके समर्थक हैं. हालांकि, उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि वे उनके काम या गतिविधियों का समर्थन करते हैं. नितिन गडकरी का कहना है कि उनके सभी लोगों से संबंध हैं लेकिन इसे गलत अर्थ में नहीं लिया जाना चाहिए।  गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि उनके उन लोगों से संबंध हैं या वे उनके कामों का समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि उन इलाकों में सड़कें बनवाने और सामाजिक कार्य करने के कारण वहां के लोगों ने उन्हें वोट दिया. इससे पहले भी नितिन गडकरी के कई बयान चर्चित हुए हैं. वो बिना लाग-लपेट अपनी बात रखने वाले नेता माने जाते हैं.बीते दिनों उन्होंने खुद से कहा था कि बहुत काम कर लिया, अब नई पीढ़ी को मौका मिले। 

भारत-पाकिस्तान की टक्कर तय! Asian Games में सीधे क्वार्टर फाइनल खेलेगी टीम इंडिया, जानें पूरा शेड्यूल

नई दिल्ली एशियन क्रिकेट काउंसिल ने सोमवार को आने वाले एशियन गेम्स में पुरुषों और महिलाओं के क्रिकेट मुकाबलों का शेड्यूल कन्फर्म किया. सभी क्रिकेट मैच नागोया के पालोमा मिजुहो स्टेडियम में T20 फॉर्मेट में खेले जाएंगे. वहीं भारतीय टीम सीधे क्वार्टर फाइनल खेलेगी. जहां पुरुष टीम का 28 सितंबर को अपने अभियान की शुरुआत करेगी. ड्रॉ के तहत, भारत और पाकिस्तान सिर्फ़ गोल्ड-मेडल मैच या ब्रॉन्ज़-मेडल प्ले-ऑफ़ में ही मिल सकते हैं, दोनों ही मैच 3 अक्टूबर को होने हैं. पुरुषों का क्रिकेट शेड्यूल ग्रुप ग्रुप A: अफ़गानिस्तान, जापान, नेपाल ग्रुप B: हॉन्ग कॉन्ग, चीन, मलेशिया, ओमान ग्रुप स्टेज 24 सितंबर सुबह 9:00 बजे — अफ़गानिस्तान बनाम जापान दोपहर 2:00 बजे — हॉन्ग कॉन्ग बनाम मलेशिया 25 सितंबर सुबह 9:00 बजे — हॉन्ग कॉन्ग बनाम ओमान दोपहर 2:00 बजे — अफ़गानिस्तान बनाम नेपाल 26 सितंबर सुबह 9:00 बजे — जापान बनाम नेपाल दोपहर 2:00 बजे — मलेशिया बनाम ओमान क्वार्टर-फ़ाइनल — 28 सितंबर सुबह 9:00 बजे — पाकिस्तान बनाम B2 दोपहर 2:00 बजे — इंडिया बनाम A2 क्वार्टर-फ़ाइनल — 29 सितंबर सुबह 9:00 बजे — श्रीलंका बनाम A1 दोपहर 2:00 बजे — बांग्लादेश बनाम B1 नॉकआउट स्टेज — 1 अक्टूबर सुबह 9:00 बजे — सेमी-फ़ाइनल 1 दोपहर 2:00 बजे — सेमी-फ़ाइनल 2 मेडल मैच — अक्टूबर 3 सुबह 9:00 बजे — ब्रॉन्ज़-मेडल मैच दोपहर 2:00 बजे — खत्म महिला क्रिकेट शेड्यूल क्वार्टर-फ़ाइनल 17 सितंबर सुबह 9:00 बजे — बांग्लादेश बनाम चीन दोपहर 2:00 बजे — पाकिस्तान बनाम थाईलैंड 18 सितंबर सुबह 9:00 बजे — श्रीलंका बनाम मलेशिया दोपहर 2:00 बजे — इंडिया बनाम जापान नॉकआउट स्टेज 20 सितंबर सुबह 9:00 बजे — सेमी-फ़ाइनल 1 दोपहर 2:00 बजे — सेमी-फ़ाइनल 2 22 सितंबर सुबह 9:00 बजे — ब्रॉन्ज़-मेडल मैच दोपहर 2:00 बजे — खत्म  

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र बोले- स्वदेशी हथियारों के दम पर हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’, आत्मनिर्भरता को बताया संप्रभुता

 नई दिल्ली    सुरक्षा सभा में 'आसमान के रखवाले' सेशन के दौरान एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्र ने खुलकर बात की. वेस्टर्न एयर कमांड के पूर्व एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे एयर मार्शल मिश्र ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आसमान में हुई घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया।  उन्होंने साफ कहा कि भविष्य का युद्ध आज ही चल रहा है. जो लोग सोच रहे थे कि कुछ नहीं हो रहा, वास्तव में लंबी तैयारी, मेहनत और दूरदर्शिता का नतीजा ऑपरेशन सिंदूर में दिख रहा था. भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी हथियारों और प्रणालियों के दम पर दुश्मन को करारा जवाब दिया. यह सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं था बल्कि वर्षों की मेहनत, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और वायुसेना के संयुक्त प्रयास का प्रमाण था।  एयर मार्शल मिश्र ने सामान्य जीवन के उदाहरण से समझाया कि तकनीक कितनी गहराई तक पहुंच चुकी है. जब आप पेट्रोल पंप पर एटीएम कार्ड स्वाइप करते हैं तो वह सैटेलाइट के जरिए भारत के बैंक खाते से जुड़ता है, पैसे काटता है और तुरंत जानकारी वापस भेजता है. इसी तरह भविष्य के युद्ध भी रोजमर्रा की जिंदगी की तरह तकनीक पर आधारित होंगे, लेकिन हम उन्हें देख नहीं पाते क्योंकि वे धीरे-धीरे विकसित हो रहे हैं।  ब्रह्मोस एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल को सुखोई-30 से दागने का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 250- 300 किलोमीटर दूर लक्ष्य को दो मीटर की सटीकता से भेदना भारतीय तकनीक का चमत्कार है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने के बाद तकनीक की रफ्तार और तेज हो गई है. अगर हम इसके साथ कदम नहीं मिलाएंगे तो चार-पांच साल में ही हैरान रह जाएंगे।  वायुसेना अधिकारी की निरंतर पढ़ाई और सिस्टम का विकास एयर मार्शल मिश्र ने नई पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि वायुसेना अधिकारी को परिचालन ड्यूटी निभाते हुए भी सामान्य छात्रों से कहीं ज्यादा पढ़ाई करनी पड़ती है. तकनीक के साथ तालमेल बनाए रखना अनिवार्य है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिन उपकरणों ने हमारे एयर स्पेस की रक्षा की और दुश्मन को नष्ट किया, वे वर्षों की मेहनत का फल थे. वायुसेना को अक्सर सबसे महंगी सेना कहा जाता है क्योंकि इसमें बजट का बड़ा हिस्सा लगता है, लेकिन यह दुनिया की उत्कृष्ट वायुसेनाओं में गिनी जाती है।  परिपक्व सिस्टम बनाने में पीढ़ियां लगती हैं. पंद्रह-बीस साल पहले भारतीय वायुसेना के पास ज्यादातर विदेशी रडार थे- रूस, अमेरिका, फ्रांस के. विदेशी विक्रेता से एयर डिफेंस सिस्टम बनवाने पर डेटा साझा करना पड़ता जो सार्वजनिक हो जाता. इसलिए भारतीय वैज्ञानिक, इंजीनियर और वायुसेना के अधिकारियों ने मिलकर पूरी तरह स्वदेशी इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम यानी आईएसीसीएस बनाया. इसमें करीब पंद्रह साल लगे।  आज देश के हर रडार- सैन्य, नागरिक, सेना और धीरे-धीरे नौसेना के, इस सिस्टम से जुड़े हैं. सात-आठ भूमिगत संचालन केंद्रों से पूरे देश की वायु स्थिति पर नजर रखी जा सकती है और जरूरत पड़ने पर सीमा पर हथियार दागे जा सकते हैं. पहले हर रडार के पास एक व्यक्ति बैठकर स्कोप देखता था।  अब डेटा नेटवर्क से सब जुड़ गया है. अलग-अलग देशों के रडारों के डेटा फॉर्मेट को तोड़कर एक सामान्य प्रारूप में लाया गया. दिल्ली, मुंबई, चेन्नई जैसे नागरिक टर्मिनलों के शक्तिशाली रडार भी इसमें शामिल हैं. इंटरनेट प्रोटोकॉल पर कमांड लेकर किसी भी जगह से मिसाइल दागने का आदेश दिया जा सकता है. यह सब एक दिन में नहीं हुआ. वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और पायलटों की पीढ़ियों ने असफलताओं से सीखा और फिर से कोशिश की।  बालाकोट से सिंदूर तक: रणनीतिक विस्तार और सटीकता का प्रमाण एयर मार्शल मिश्र ने बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर की तुलना रणनीतिक दृष्टि से की. बालाकोट के समय भी वायुसेना के पास वही क्षमता थी जो सिंदूर में इस्तेमाल हुई. अंतर संसाधनों की कमी का नहीं बल्कि रणनीति का था. सरकार के निर्णयों पर निर्भर करते हुए प्रतिक्रिया का विस्तार होता गया।  उड़ी हमले के बाद बालाकोट, फिर सिंदूर- यह चेतावनी का क्रम था. अगर दुश्मन नहीं मानता तो और बड़ा जवाब दिया जाता है. सिंदूर भी अंतिम नहीं है. तीस अप्रैल 2026 को रिटायर हो चुके एयर मार्शल ने कहा कि जो लोग अभी योजना बना रहे हैं उनके पास हर स्थिति के लिए तैयार योजनाएँ हैं।  सटीकता का प्रमाण देते हुए उन्होंने सैटेलाइट इमेजरी का जिक्र किया. बालाकोट में दो धब्बे दिखे थे. सिंदूर में बहावलपुर और मुरीद के नौ भवनों पर हमले की इमेज में भी वही दो स्पॉट दिखे. लेकिन जमीनी तस्वीरों से साफ हो गया कि कितना विनाशकारी और सटीक हमला हुआ था।  बालाकोट में मौसम या अन्य कारणों से जमीनी तस्वीर नहीं आ सकीं इसलिए सबूत कमजोर समझा गया. अब दोनों की तुलना से साबित होता है कि भारतीय वायुसेना का हमला कितना प्रभावी था. सैनिकों को जब 'कोई सबूत नहीं' या 'कौए मार दिए' जैसी बातें सुननी पड़ती हैं तो दर्द होता है, लेकिन वे परिणाम जानते हैं क्योंकि उन्होंने खुद देखा और किया है।  लंबी दूरी की क्षमता और वायु शक्ति की खूबियां एस-400 सिस्टम से 314 किलोमीटर दूर उड़ते विमान को मार गिराना लगभग विश्व रिकॉर्ड के करीब है. ब्रह्मोस एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल दुनिया की एकमात्र परिचालन सुपरसोनिक एयर लॉन्च क्रूज मिसाइल है जो पूरी तरह स्वदेशी (रूस-भारत सहयोग से) है।  सरगोधा, रहीम यार खान जैसे ठिकानों पर कम से कम दो सौ किलोमीटर दूर से हमला संभव हुआ. वायु शक्ति जमीनी और नौसैनिक शक्ति से अलग है. यह तेज, लंबी दूरी तक पहुंचने वाली, सटीक और गतिशील है. हवा में उड़ान भरने के बाद भी वापस बुलाया जा सकता है जबकि जमीन से दागी मिसाइल एक बार निकलने के बाद नहीं लौटती. ईरान-इजरायल संघर्ष में भी यही देखा गया कि उड़ते विमानों की लचीलापन ज्यादा होती है।  स्वदेशीकरण का मतलब संप्रभुता एयर मार्शल मिश्र ने स्वदेशीकरण को मेक इन इंडिया या सर्वश्रेष्ठ होने से अलग बताया. उनके अनुसार स्वदेशीकरण संप्रभुता के बराबर है. अगर आप किसी दूसरे देश पर निर्भर हैं तो सीमाओं की रक्षा स्वतंत्र रूप से नहीं कर सकते. पाकिस्तान के कई अमेरिकी मूल के रडार नष्ट होने के बाद मरम्मत के लिए अमेरिकी तकनीशियनों का इंतजार करना पड़ा. इससे सुरक्षा में बड़ा अंतराल पैदा हो गया।  अगर रडार स्वदेशी होते तो भारतीय कंपनियां, स्टार्टअप और पीएसयू तुरंत ठीक कर देते. संप्रभुता सिर्फ जमीन, कानून और लोगों … Read more

दिल्ली में 5 मंजिला इमारत गिरने से 7 मौतें, CM रेखा गुप्ता के निर्देश पर 5 अफसर निलंबित

नई दिल्ली  दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को गिरी 5 मंजिला इमारत मामले में दिल्ली सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। सीएम रेखा गुप्ता के निर्देश पर एमसीडी ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। वहीं इस हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल अस्पताल में भर्ती हैं। जानकारी के मुताबिक, सीएम रेखा गुप्ता के सख्त निर्देश के बाद एमसीडी ने 5 अधिकारियों को सस्पेंड किया है। जिसमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, रणवीर सिंह, ललित कुमार गोयल, सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार शामिल हैं। बिल्डिंग के मालिक की तलाश के लिए गठित की गई 10 टीमें वहीं बिल्डिंग के गिरने से हुए हादसे के संबंध में भवन मालिक हरिराम बंसल को गिरफ्तार करने के लिए 10 अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी होने के बाद उसे ढूंढने और गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इन टीमों में स्थानीय जिला पुलिस और विशेष स्टाफ के कर्मियों के साथ-साथ जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं। सभी 10 टीमों का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (अतिरिक्त डीसीपी) रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारी अभियान की निगरानी कर रहे हैं और विभिन्न स्थानों पर तलाशी का समन्वय कर रहे हैं। सत्य निकेतन हादसे ने खोली सिस्टम की पोल पुलिस के अनुसार, हरिराम का पता लगाने और उसे हिरासत में लेने के प्रयासों के तहत दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस ने दर्ज की FIR पुलिस ने रविवार को हरिराम बंसल और अन्य लोगों के खिलाफ इमारत गिरने के संबंध में एफआईआर दर्ज की। पुलिस के अनुसार, इमारत का उपयोग पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास के रूप में किया जा रहा था और बेसमेंट में कथित तौर पर नवीनीकरण का काम चल रहा था, तभी अचानक इमारत गिर गई। इस घटना में सात लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 12 लोगों को बचा लिया गया है और हादसे वाली जगह पर मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी है।

बेटियों को नेतृत्व और सुरक्षा का मजबूत कवच, मीना मंचों के 450 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करेगी योगी सरकार

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बेटियों को शिक्षा के साथ नेतृत्व, आत्मविश्वास और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए विद्यालय स्तर पर चल रहे कार्यक्रमों को संस्थागत मजबूती दे रही है। इसी नीति के अंतर्गत विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के अंतर्गत मीना मंचों को बालिकाओं के सशक्तीकरण और नेतृत्व क्षमता विकास का प्रभावी माध्यम बनाने के लिए राज्य स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के अनुसार एसआईईटी, प्रयागराज में 09 से 24 सितंबर तक नौ बैचों में कुल 450 प्रतिभागियों की ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) एवं मास्टर ट्रेनर (एमटी) कार्यशाला होगी। कार्यशाला में मीना मंचों के सशक्तीकरण, नेतृत्व क्षमता प्रदान करने तथा यौन शोषण संबंधी प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रतिभागियों की क्षमता संवर्धित की जाएगी। नौ बैचों में होगा प्रशिक्षण जारी दिशा निर्देश के अनुसार प्रथम एवं द्वितीय बैच की कार्यशाला 09 एवं 10 सितंबर, तृतीय एवं चतुर्थ बैच की 11 एवं 12 सितंबर, पंचम एवं षष्ठम बैच की 21 एवं 22 सितंबर, सप्तम एवं अष्टम बैच की 16 एवं 17 सितंबर तथा नवें बैच की कार्यशाला 23 एवं 24 सितंबर 2026 को होगी। प्रत्येक बैच में 50 प्रतिभागी शामिल होंगे और कुल 450 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 75 जनपदों से होगी सहभागिता कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से प्रतिभागी शामिल होंगे। प्रथम बैच में बदायूं, बुलंदशहर, चंदौली, चित्रकूट, देवरिया, एटा, इटावा, फैजाबाद और फर्रुखाबाद से छह-छह प्रतिभागी शामिल होंगे। द्वितीय बैच में फतेहपुर, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर और हमीरपुर से प्रतिभागी होंगे। तृतीय बैच में हापुड़, हरदोई, हाथरस, जालौन, जौनपुर, झांसी, कन्नौज और कानपुर देहात तथा चतुर्थ बैच में कासगंज, कौशाम्बी, कुशी नगर, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, लखनऊ और महराजगंज से प्रतिभागी शामिल होंगे। इसी तरह पंचम बैच में महोबा, मैनपुरी, मथुरा, मऊ, मेरठ, मिर्जापुर, मुरादाबाद और मुजफ्फरनगर तथा षष्ठम बैच में पीलीभीत, प्रतापगढ़, रायबरेली, रामपुर, सहारनपुर, संभल, संत कबीर नगर और शाहजहांपुर से प्रतिभागी होंगे। सप्तम बैच में शामली, सिद्धार्थनगर, सीतापुर, सोनभद्र, श्रावस्ती, सुल्तानपुर, उन्नाव और वाराणसी तथा अष्टम बैच में आगरा, अलीगढ़, औरैया, प्रयागराज, अम्बेडकर नगर, अमेठी, अमरोहा, आजमगढ़ और बागपत से सहभागिता होगी जबकि नवां बैच 23 एवं 24 सितंबर को आयोजित होगा, जिसमें बहराइच, बलरामपुर, बांदा, बाराबंकी, बरेली, बस्ती, भदोही और बिजनौर से प्रतिभागी शामिल होंगे। मीना मंचों को मिलेगा सशक्त नेतृत्व कार्यशाला का उद्देश्य मीना मंचों को बालिकाओं के सशक्तीकरण, नेतृत्व क्षमता और सुरक्षा संबंधी जागरूकता से जोड़ते हुए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है। टीओटी एवं एमटी के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रतिभागी आगे संबंधित स्तरों पर इस क्षमता को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे विद्यालयों में बालिकाओं की सहभागिता को बढ़ाने और उन्हें नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी। कोट: योगी सरकार बालिकाओं को शिक्षा के साथ नेतृत्व, आत्मविश्वास और सुरक्षित वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। मीना मंच बालिकाओं के सशक्तीकरण और नेतृत्व विकास का प्रभावी माध्यम है। 450 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण इस व्यवस्था को और मजबूत करेगा। *संदीप सिंह, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश*

₹33.16 लाख की लागत से Advanced Life Care Ambulance का लोकार्पण, BPL परिवारों की 50 महिलाओं को सिलाई मशीनें वितरित

रायपुर सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर सशक्त रूप से रेखांकित करते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) भोपाल सर्कल ने रायपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में दो महत्वपूर्ण CSR पहल कीं। एक ओर पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, रायपुर को ₹33.16 लाख की लागत से Advanced Life Care Ambulance प्रदान की गई, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंद एवं BPL परिवारों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से 50 सिलाई मशीनों का वितरण किया गया। इन महत्वपूर्ण अवसरों पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के अध्यक्ष सी.एस. सेट्टी की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशेष बात यह रही कि बैंक के सभी प्रबंध निदेशक  अश्विनी तिवारी, राणा आशुतोष कुमार सिंह, राम मोहन राव अमरा एवं रवि रंजन भी एक मंच पर उपस्थित रहे। SBI के शीर्ष नेतृत्व की इस सामूहिक उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की और भोपाल सर्कल के लिए यह एक गौरवपूर्ण अवसर बना। जीवन बचाने वाली चिकित्सा सुविधा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम SBI द्वारा CSR के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई Advanced Life Care Ambulance अत्याधुनिक जीवन रक्षक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित है। आपातकालीन परिस्थितियों में गंभीर मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और सुरक्षित रूप से अस्पताल तक पहुंचाने में यह एम्बुलेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एम्बुलेंस को पंडित JNM मेडिकल कॉलेज, रायपुर के डीन डॉ. विवेक चौधरी ने प्राप्त किया। इस अवसर पर SBI भोपाल सर्कल के मुख्य महाप्रबंधक प्रभाष कुमार सुबुद्धि सहित CMC के सभी सदस्य एवं बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। SBI की इस पहल को रायपुर और आसपास के क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है। यह केवल एक एम्बुलेंस का योगदान नहीं, बल्कि जरूरत के समय जीवन बचाने की व्यवस्था को मजबूत करने की पहल है। 50 सिलाई मशीनों से आत्मनिर्भरता की ओर कदम CSR कार्यक्रम की दूसरी महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में BPL लाभार्थियों के लिए 50 सिलाई मशीनों का वितरण किया गया। लाभार्थियों का चयन परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना अभनपुर द्वारा किया गया था। इस पहल का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार का साधन देकर आत्मनिर्भर बनाना है। सिलाई मशीन मिलने से महिलाएं अपने घर से ही आय अर्जित करने के साथ अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगी। SBI Ladies Club(कॉर्पोरेट सेंटर) की ओर से श्रीमती सूर्या श्रीदेवी, विजया अमरा एवं अमृता सिन्हा एवं अन्य वरिष्ठ सदस्याओं द्वारा लाभार्थियों को सिलाई मशीनें प्रदान की गईं। कार्यक्रम में भोपाल मंडल की ओर से लेडीज क्लब अध्यक्षा श्रद्धांजलि सुबुद्धि सहित बैंक के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। CSR को सेवा और सशक्तिकरण का माध्यम बना रहा SBI SBI की इन दोनों पहलों ने बैंक के CSR दृष्टिकोण की व्यापकता को सामने रखा। *एक पहल जीवन बचाने वाली स्वास्थ्य सुविधा को मजबूती देती है, तो दूसरी जरूरतमंद महिलाओं के हाथों में आत्मनिर्भरता का साधन सौंपती है। SBI भोपाल सर्कल की यह पहल इस विश्वास को मजबूत करती है कि बैंक की सामाजिक जिम्मेदारी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के उन वर्गों तक अवसर, सुविधा और सम्मान पहुंचाना भी है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में जीवनरक्षक सुविधा और महिलाओं के हाथों में रोजगार का साधन—SBI की CSR पहल ने रायपुर में सेवा, संवेदना और सशक्तिकरण का एक प्रभावशाली संदेश दिया।

ईशान किशन ने जड़ा दोहरा शतक, ईस्ट जोन ने साउथ जोन के सामने खड़ा किया 708 रनों का पहाड़

नई दिल्ली दलीप ट्रॉफी 2026 के फाइनल मुकाबले में ईस्ट जोन के बल्लेबाजों ने कमाल का प्रदर्शन किया. मैच के दूसरे दिन साउथ जोन के गेंदबाजों को विकेट लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. इसके बावजूद टीम के हाथ सिर्फ निराशा ही लगी. टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए ईस्ट जोन के बल्लेबाजों ने साउथ जोन के गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए. चेन्नई के एम.ए चिदंबरम स्टेडियम में चल रहे इस महामुकाबले में ईस्ट जोन ने अपनी पहली पारी में 708 रनों का विशाल पहाड़ खड़ा कर दिया है. टीम को इस स्कोर तक पहुंचाने वाले सबसे बड़े हीरो ईशान किशन रहे. ईशान किशन ने 334 गेंदों में 270 रनों की धमाकेदार पारी खेलकर मैच को पूरी तरह से ईस्ट जोन की मुट्ठी में कर दिया. ईशान किशन की बल्लेबाजी में बड़ी खासियत यह रही कि वह मैच के सिचुएशन के हिसाब से खेलने का अंदाज भी बदलते रहे. ईशान किशन ने जड़ा दोहरा शतक ईशान किशन ने सिर्फ 300 गेंदों में अपना दोहरा शतक पूरा कर लिया था. पारी के दौरान तबीयत खराब होने की वजह से वह 250 रन के स्कोर पर रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान से बाहर चले गए. हालांकि, उनका जज्बा कम नहीं हुआ और वह आखिरी सेशन में दोबारा बल्लेबाजी करने आए और अपनी टीम के खाते में 20 रन और जोड़े. बनते-बनते रह गया 25 साल पुराना इतिहास ईशान भले ही अपने पहले तिहरे शतक से चूक गए, लेकिन उनकी इस पारी ने सबको मुरीद बना लिया. दलीप ट्रॉफी के इतिहास में अब तक केवल दो बल्लेबाज रमन लांबा और गगन खोड़ा ही तिहरा शतक लगा पाए हैं. ईशान के पास 25 साल से चले आ रहे इस इंतजार को खत्म करने का बेहतरीन मौका था, लेकिन वह 270 रन पर आउट हो गए. फाइनल में ऐसा करने वाली बनी चौथी टीम ईशान किशन के अलावा कुमार कुशाग्र ने भी बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए शानदार शतक जड़ा और टीम को 600 के पार पहुंचाया. दलीप ट्रॉफी फाइनल के इतिहास में यह केवल तीसरा मौका है जब किसी टीम ने 700 से अधिक रन बनाए हैं. इससे पहले 1986 में साउथ जोन, 1987 और 1991 में नॉर्थ जोन यह कारनामा कर चुके हैं. हालांकि 708 रन का यह स्कोर फाइनल का सबसे बड़ा स्कोर नहीं है. यह रिकॉर्ड आज भी नॉर्थ जोन के नाम है, जिसने 1987 के फाइनल में वेस्ट ज़ोन के खिलाफ 868 रन बनाए थे. अब साउथ जोन के सामने रनों का बड़ा पहाड़ खड़ा है. ईस्ट ज़ोन ने मैच पर अपना शिकंजा पूरी तरह कस लिया है और साउथ ज़ोन को इस संकट से निकलने के लिए अब किसी बड़े चमत्कार की जरूरत होगी.

भाजपा के बाद अब JDU को मिल सकती है विधान परिषद सभापति की कुर्सी, NDA में बनी सहमति की चर्चा

 पटना  बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार के गठन के बाद अब सत्ता के गलियारों में एक और बड़े राजनीतिक बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। बिहार विधान परिषद के सभापति का पद एक बार फिर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खाते में जा सकता है। चर्चा है कि इसको लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सहमति बन चुकी है। यदि यह बदलाव होता है तो इसे भाजपा और जदयू के बीच सत्ता-संतुलन साधने की दिशा में अहम कदम माना जाएगा।फिलहाल विधान परिषद के सभापति की जिम्मेदारी भाजपा के वरिष्ठ नेता अवधेश नारायण सिंह के पास है। नई सरकार बनने के बाद से ही राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि सरकार में महत्वपूर्ण पदों के बंटवारे के बाद अब विधान परिषद की शीर्ष कुर्सी जदयू को दी जा सकती है। भाजपा के पास कई अहम पद, जदयू की दावेदारी क्यों मजबूत? सरकार में मुख्यमंत्री पद समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भाजपा के पास हैं। विधानसभा अध्यक्ष का पद भी भाजपा के पास है। ऐसे में विधान परिषद के सभापति का पद जदयू को दिया जाना एनडीए के भीतर राजनीतिक संतुलन बनाने का संदेश माना जा रहा है। यानी सदन के दोनों शीर्ष संवैधानिक पदों में से एक पर जदयू की मौजूदगी गठबंधन के भीतर जिम्मेदारियों के संतुलित बंटवारे का संकेत दे सकती है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विधान परिषद में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन जदयू भी मजबूत स्थिति में है। आंकड़ों को देखें तो परिषद में भाजपा के 25 और जदयू के 20 सदस्य हैं। इसके अलावा राजद के 15, कांग्रेस के दो, निर्दलीय सात तथा सीपीआई, सीपीएम, हम, रालोमो और लोजपा (रामविलास) के एक-एक सदस्य हैं। विधानसभा में भी भाजपा और जदयू के बीच सीटों का अंतर बहुत बड़ा नहीं है। भाजपा के 88 जबकि जदयू के 85 विधायक हैं। ऐसे में दोनों दलों की राजनीतिक ताकत को देखते हुए संवैधानिक पदों का बंटवारा एनडीए के भीतर सत्ता-संतुलन के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाता है। जदयू के लिए नई नहीं है सभापति की कुर्सी विधान परिषद के सभापति पद पर जदयू की दावेदारी पहले भी रही है। भाजपा के अवधेश नारायण सिंह से पहले जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर करीब दो वर्षों तक इस पद पर रहे थे। वहीं, महागठबंधन सरकार के दौरान उपसभापति हारुण रशीद ने कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी संभाली थी। इससे साफ है कि विधान परिषद की शीर्ष कुर्सी को लेकर जदयू की भूमिका पहले भी महत्वपूर्ण रही है। किसे मिलेगी जिम्मेदारी, इस पर नजर अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सभापति का पद जदयू के खाते में जाता है तो पार्टी किस वरिष्ठ विधान पार्षद को यह जिम्मेदारी देगी।पार्टी के भीतर अनुभवी नामों पर मंथन की चर्चा है। हालांकि, संभावित नाम को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई है। राजनीतिक तौर पर यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि नई सरकार के दौर में भाजपा और जदयू के बीच सत्ता-साझेदारी का नया प्रारूप सामने आ रहा है। ऐसे में विधान परिषद सभापति का पद किसके पास जाता है, इसे आने वाले दिनों में एनडीए के भीतर शक्ति-संतुलन के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जाएगा।