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राजस्थान के मौसम का बदला मिजाज, 7 सितंबर के बाद घटेगी बारिश, 12-13 सितंबर से फिर अलर्ट

जयपुर राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से सक्रिय मानसून अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार 7 सितंबर से प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगेगी। हालांकि पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद 8 से 10 सितंबर तक ज्यादातर इलाकों में मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहने की संभावना है। राहत के इस दौर के बाद 12-13 सितंबर से फिर बारिश का नया दौर शुरू होने के संकेत हैं। 7 सितंबर को भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। बीकानेर संभाग में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। 7 सितंबर को इन इलाकों में बारिश के आसार मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार 7 सितंबर को अजमेर संभाग के कुछ हिस्सों के अलावा टोंक, सवाई माधोपुर, कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, जयपुर, दौसा, अलवर और भरतपुर के कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है। भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। उदयपुर संभाग में भी कुछ जगह बौछारें पड़ सकती हैं। इसके अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, बीकानेर और नागौर में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है। उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश में बना सिस्टम कमजोर राजस्थान में पिछले दिनों हुई बारिश के पीछे उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में बना अच्छी तरह चिह्नित निम्न दबाव क्षेत्र (Well Marked Low Pressure Area) प्रमुख मौसम सिस्टम था। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के साथ पूर्वी राजस्थान में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ी थीं। IMD ने 5 सितंबर को पूर्वी राजस्थान में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना भी जताई थी। अब यह सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। इसके कमजोर होने के साथ राजस्थान में मानसून की सक्रियता भी कम होने की संभावना है। इसलिए 7 सितंबर के बाद प्रदेश में बारिश का दायरा और तीव्रता दोनों घट सकती हैं। 8 से 10 सितंबर तक बारिश से राहत मौसम विभाग के अनुसार 8 से 10 सितंबर के बीच राजस्थान में मानसून कमजोर रहने की संभावना है। इस दौरान व्यापक बारिश की संभावना कम रहेगी। हालांकि स्थानीय स्तर पर बादल बनने और कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। यानी अगले तीन दिन प्रदेश में बारिश से कुछ राहत मिल सकती है। खासकर पश्चिमी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है, जबकि पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में छिटपुट बारिश जारी रह सकती है। 12-13 सितंबर से फिर सक्रिय हो सकता है मानसून बारिश में यह कमी लंबे समय तक रहने वाली नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 12 और 13 सितंबर से पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में बारिश का नया दौर शुरू होने के संकेत हैं। 12 से 15 सितंबर के बीच पूरबाई हवाओं के कारण वातावरण में नमी बढ़ सकती है। इससे पूर्वी, दक्षिण-पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में कई स्थानों पर खंड-खंड बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां प्रदेश के अन्य हिस्सों की तुलना में ज्यादा रह सकती हैं। हालांकि इस दौरान किसी एक सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र को लेकर अभी स्पष्ट स्थिति नहीं है। इसलिए इस दौर को फिलहाल नमी बढ़ने और पूरबाई हवाओं के असर से संभावित बारिश के चरण के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा। 16-17 सितंबर से फिर कम हो सकती है बारिश मौसम विभाग के अनुसार 16 और 17 सितंबर के आसपास प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में एक बार फिर कमी आ सकती है। हालांकि 10 से 15 दिन के विस्तारित पूर्वानुमान में बदलाव संभव है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाले किसी नए मौसम सिस्टम, मानसून ट्रफ की स्थिति और हवाओं के रुख का राजस्थान की बारिश पर असर पड़ सकता है। इसलिए अगले चरण की बारिश को लेकर स्थिति साफ होने के साथ पूर्वानुमान में बदलाव भी संभव है।  

हवा में मंडराया खतरा! 36 हजार फीट पर बंद करना पड़ा इंजन, अबू धाबी जा रही फ्लाइट की कोच्चि में सुरक्षित लैंडिंग

कोच्चि कोच्चि से अबू धाबी जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX 415 (बोइंग 737) को बीच रास्ते में ही वापस लौटना पड़ा। क्रू को पता चला कि इंजन 1 में ऑयल का लेवल तेज़ी से गिर रहा है और जब ऑयल प्रेशर डेंजर ज़ोन में पहुंच गया, तो उन्होंने इंजन बंद कर दिया। प्लेन कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा। प्लेन में सवार यात्रियों को पता नहीं था कि स्थिति कितनी गंभीर हो गई थी।  सूत्रों के मुताबिक, टेक-ऑफ के करीब 50 मिनट बाद और 36,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते समय पायलट और को-पायलट ने देखा कि इंजन 1 में ऑयल का लेवल तेज़ी से गिर रहा है। क्रू ने FORDEC असेसमेंट किया। ऑयल का लेवल लगातार गिरते देख, उन्होंने अबू धाबी जाने का प्लान छोड़कर कोच्चि वापस लौटने का फैसला किया। इसके बाद कमांडर ने हाई फ्रीक्वेंसी पर मुंबई रेडियो से संपर्क किया और ATC को बताया कि फ्लाइट कोच्चि वापस लौट रही है। प्लेन का रास्ता बदलने के दौरान स्टैंडर्ड सेफ्टी प्रोसीजर का पालन किया गया। रास्ता बदलने के पूरे समय, दोनों पायलट इंजन के पैरामीटर्स पर नज़र रखे हुए थे और किसी भी स्थिति के लिए तैयार थे।  वापस मुड़ने के करीब 45 मिनट बाद, इंजन 1 का ऑयल प्रेशर ऊपर-नीचे होने लगा और कॉकपिट गेज पर रेड ज़ोन में पहुंच गया, जो डेंजर रेंज में गिरावट का संकेत था। इसके बाद क्रू ने नॉन-नॉर्मल चेकलिस्ट (NNC) का पालन किया और इंजन 1 बंद कर दिया। ज़्यादा वज़न वाले बोइंग 737 को एक इंजन पर लैंड कराना बहुत ज़्यादा काम और जोखिम वाला काम होता है। क्रू ने इसे आसानी से पूरा किया। यात्रियों को कॉकपिट में हुई घटना की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं हुआ।  भारतीय एयरलाइंस में टेक्निकल डायवर्जन लगभग हर हफ़्ते होने वाली घटना बन गई है। यह ताज़ा घटना एयर इंडिया पर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो की शुरुआती रिपोर्ट आने के कुछ दिनों बाद हुई है। फुकेत-दिल्ली फ़्लाइट। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि एयरबस के टेक्निकल एक्सपर्ट्स ने जांच टीम की मौजूदगी में उस विमान की तीन दिनों तक जांच की। इसके बाद आगे की जांच के लिए हाइड्रोलिक पार्ट्स और हाइड्रोलिक सैंपल इकट्ठा किए गए। फुकेत-दिल्ली घटना के बाद, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि DGCA फ़्लाइट क्रू के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों (नशीले पदार्थों) के टेस्ट का सालाना प्रतिशत बढ़ाएगा।  एयर इंडिया एक्सप्रेस के इंजन-ऑयल वाली घटना से अब एक और सवाल उठता है: क्या नागरिक उड्डयन मंत्रालय DGCA के सेफ्टी ऑडिट के नियमों को भी और सख्त करेगा? US फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) आमतौर पर हर पांच साल में एक बार इंटरनेशनल एविएशन सेफ्टी असेसमेंट (IASA) प्रोग्राम के तहत किसी देश की सेफ्टी निगरानी की समीक्षा करता है। भारत का पिछला बड़ा IASA ऑडिट अक्टूबर 2021 में हुआ था; अगला ऑडिट इस साल नवंबर में होने की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या नई दिल्ली DGCA सेफ्टी ऑडिट से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए इस मौके का इस्तेमाल करती है या नहीं। एयर इंडिया एक्सप्रेस और DGCA की आधिकारिक टिप्पणी का इंतज़ार है।   

न स्टार, न बड़ा बजट… फिर भी ‘हनुमान अंश’ का जलवा, नेत्रहीन सुनील लोधी की आवाज ने जीता दिल

न कोई बड़ा स्टार और न ही बड़ा बजट…फिर भी बॉक्स ऑफिस पर 'हनुमान अंश' फिल्म गर्दा उड़ा रही है. फिल्म की ताबड़तोड़ कमाई ने हर किसी को हैरान कर दिया है. नीम करौली बाबा की जिंदगी पर बनी फिल्म इतिहास रच रही है. फिल्म की सादगी भरी कहानी के साथ इसके गाने भी लोगों के दिलों को छू रहे हैं. फिल्म के एक भजन 'मैंने तेरे ही भरोसे' को दर्शकों का काफी प्यार मिल रहा है. तंबूरा बजाने वाला कैसे बना स्टार? लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस भजन को बुंदेलखंड के गांव के एक नेत्रहीन सिंगर सुनील लोधी ने गाया है. 'हनुमान अंश' में भजन गाकर सुनील की जिंदगी बदल गई है. वो स्टार बन गए हैं. उनकी हर तरफ चर्चा हो रही है. नेत्रहीन सिंगर सुनील लोधी ने यहां तक पहुंचने के लिए काफी स्ट्रगल किया है. आइए जानते हैं उनके बारे में खास बातें… 'हनुमान अंश' में 'मैंने तेरे ही भरोसे' भजन गाने वाले सुनील भले ही नेत्रहीन हैं, लेकिन उनमें टैलेंट का खजाना भरा है. सुनील लोधी का जन्म बुंदेलखंड के एक छोटे से गांव में हुआ. वो एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनका परिवार खेती करके गुजारा करता है. पैदाइश के समय से ही सुनील देख नहीं पाते हैं. लेकिन फिर भी उन्होंने अपनी जिंदगी में अंधेरा नहीं छाने दिया. संगीत-भक्ति को बनाया दुनिया पीटीसी पंजाब में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक इंटरव्यू में सुनील ने अपने बचपन और आर्थिक हालात के बारे में बात की थी. उन्होंने बताया था कि उनके माता-पिता ने उनकी आंखों की रोशनी वापस लाने के लिए उनका इलाज कराया था, लेकिन फिर भी वो ठीक नहीं हो पाए. उन्होंने यह भी बताया कि पैसों की तंगी और आंखों से न देख पाने की वजह से वो अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाए. सुनील ने फिर संगीत और भक्ति को ही अपनी दुनिया बना लिया. उन्होंने गांव की चौपालों और धार्मिक कार्यक्रमों में बुंदेली लोकगीत और भजन गाए,  जिसके साथ वो अक्सर पारंपरिक तंबूरा बजाते थे. सोशल मीडिया ने बदली दुनिया वो गांव के लोगों के बीच बैठकर भजन गाते थे. ट्रेनों और स्थानीए कार्यक्रमों में भी भजन गाते थे. लेकिन फिर उनकी जिंदगी साल 2019 में तब बदलनी शुरू हुई, जब उनकी मुलाकात यूट्यूबर रोहित साहू से हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, सुनील को गाते हुए सुनने के बाद, रोहित ने उनकी परफॉर्मेंस रिकॉर्ड करके इंटरनेट पर अपलोड करना शुरू कर दिया. सुनील के बुंदेली गानों को यूट्यूब पर मिलियन में व्यूज मिलने लगे, जिसके बाद उन्हें पहचान मिलने लगी. सुनील की जिंदगी में सबसे बड़ा ब्रेक उनके पारंपरिक हनुमान भजन 'ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान' के बाद आया. सुनील की देसी आवाज और तंबूरे की सादगी के साथ गाए गए इस भजन को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया गया. इसके वीडियो को मिलियंस में व्यूज मिले और लोग सिंगर को ढूंढने लगे. कैसे मिली हनुमान अंश फिल्म? सुनील के वायरल भजन ने आखिरकार हनुमान अंश के मेकर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. इसके बाद सुनील को भक्ति गीत रिकॉर्ड करने के लिए मुंबई बुलाया गया. फिल्म में सुनील का गाना 'मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान' को काफी पसंद किया जा रहा है. इस भक्ति गीत को गाकर वो स्टार बन गए हैं.

Tata Osprey ने मचाई एंट्री! सनरूफ, पुश-बटन स्टार्ट और 360° कैमरा, कीमत ₹14.8 लाख से

नई दिल्ली Tata Motors पैसेंजर व्हीकल लिमिटेड ने अपनी नई कार Tata Osprey को लॉन्च कर दिया है. कंपनी की ये कार Tata Nexon जैसी ही है. इसमें कई फीचर्स दिए गए हैं. Tata Osprey कॉम्पैक्ट SUV पैनोरमिक सनरूफ, Bi-LED हेडलैंप्स के अलावा LED DRLs, X-ग्राफिक फुल LED टेललाइट्स और स्टाइलिश 16-इंच अलॉय व्हील्स जैसे फीचर्स से लैस है. कंपनी ने इसे अफ्रीकी बाजार में पेश किया है।  Tata Osprey की कीमत आपको बता दें कि Osprey नाम दक्षिण अफ्रीका में पाए जाने वाले पक्षी से इंस्पायर्ड है. ये अपनी तेज नजर, ताकत और एडेप्टेशन कैपिबिलिटी के लिए जानी जाती है.  रिपोर्ट के अनुसार, इसकी कीमत R249,900 (लगभग 14.78 लाख रुपये) से शुरू होती है. नई Osprey के साथ, Tata Motors ने दक्षिण अफ्रीका में अपनी नई ग्लोबल, कस्टमर-फेसिंग ब्रांड पहचान TATA.CARS का भी अनवील किया है।  Tata Osprey के फीचर्स केबिन के अंदर, इस SUV में ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, कूल्ड ग्लव बॉक्स और एक 10.25-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर मिलता है. इसके साथ वायरलेस फोन चार्जर, पैसिव एंट्री के साथ पुश-बटन स्टार्ट, क्रूज कंट्रोल, और A-टाइप व C-टाइप USB चार्जिंग पोर्ट्स मिलते हैं. सुरक्षा और सेफ्टी के लिए, इस SUV में 6 एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम (ESP), टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) दिए गए हैं.  साथ में आपको फ्रंट पार्किंग सेंसर्स, ऑटो हेडलैंप्स, रेन-सेंसिंग वाइपर्स, और ब्लाइंड व्यू मॉनिटर के साथ 360° HD सराउंड व्यू सिस्टम मिलेगा।  को 4 वैरिएंट्स में उपलब्ध करवाया गया है. इसको कस्टमर्स Smart+ MT, Smart+ DCA, Creative DCA और Creative+ PS DCA वैरिएंट में खरीद सकते हैं. इसमें 1.2-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन दिया गया है. ये120 PS की पावर और 170 Nm का टॉर्क जनरेट करता है. साथ ही इसे 5-स्पीड मैनुअल या 7-स्पीड डुअल-क्लच ट्रांसमिशन (DCA) के साथ जोड़ा गया है।  क्या है TATA.CARS?  प्रोडक्ट लॉन्च के साथ, TMPVL ने अपनी यूनिफाइड कस्टमर-फेसिंग ग्लोबल रिटेल ब्रांड पहचान TATA.CARS पेश की है. इसे हैचबैक, सेडान, SUVs और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स सहित अपने पूरे पैसेंजर पोर्टफोलियो को एक ही छत के नीचे लाने के लिए डिजाइन किया गया है. Osprey अब ब्रांड के लोकल शोरूम पोर्टफोलियो में शामिल हो गई है. इसमें पिछले साल पेश की गई Harrier, Curvv, Punch और Tiago पहले से शामिल हैं। 

AI-डेटा से डिफेंस और फूड प्रोसेसिंग तक हर सेक्टर में अवसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

निवेश के लिए मध्यप्रदेश बना देश का नया ग्रोथ हब  AI-डेटा से डिफेंस और फूड प्रोसेसिंग तक हर सेक्टर में अवसर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 25 से ज्यादा नई नीतियां लागू 1.10 करोड़ से अधिक लोगों को MSME सेक्टर में रोजगार भोपाल मध्यप्रदेश अब निवेश, उद्योग और रोजगार के नए केंद्र के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। दुबई यात्रा के पहले दिन पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेश की दृष्टि से हर क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। फूड प्रोसेसिंग यूनिट, टेक्सटाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेक्टर, ड्रोन, डिफेंस और साइंस सिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश के लिए राज्य में अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के हर क्षेत्र की स्थानीय क्षमता को पहचानकर उसे उद्योग, निवेश और रोजगार के अवसरों में बदलना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में व्यापार को सुगम बनाने की दिशा में जो पहल की है, मध्यप्रदेश में उसे प्रभावी रूप से लागू किया गया है। राज्य सरकार ने कई अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त किया है और 25 से अधिक नई नीतियां लागू की हैं। इन नीतिगत सुधारों के परिणामस्वरूप प्रदेश में बड़े उद्योगों की स्थापना में तेजी आई है और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल अधिक अनुकूल हुआ है। MSME सेक्टर में 1.10 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था में MSME सेक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रदेश में 1 करोड़ 10 लाख से अधिक लोग MSME क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार ने शासकीय सेवाओं में नई भर्तियां भी लागू की हैं। प्रदेश में बड़े पैमाने पर उत्पादन हो रहा है और निर्यात के क्षेत्र में भी राज्य लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वर्ष 2026-27 में मध्यप्रदेश से 76 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ है।उन्होंने कहा कि सरकार की व्यापार हितैषी नीतियों का उद्देश्य बड़े निवेश को आकर्षित करने के साथ स्थानीय उद्यमों को भी विस्तार के अवसर उपलब्ध कराना है। निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण और आवश्यक सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे उद्योगों की स्थापना और संचालन दोनों को सुगम बनाया जा सके। AI, डेटा, ड्रोन और डिफेंस पर विशेष फोकस मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश ने AI, डेटा, ड्रोन और डिफेंस जैसे नए क्षेत्रों को विशेष रूप से प्रमोट किया है। प्रदेश में तीन नए IT पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जो रीवा, इंदौर और उज्जैन में बन रहे हैं। इनसे तकनीकी उद्योगों, स्टार्टअप और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे।उन्होंने कहा कि प्रदेश में साइंस सिटी भी विकसित की जा रही है। विज्ञान, तकनीक, नवाचार और नई पीढ़ी के कौशल विकास के लिहाज से यह महत्वपूर्ण पहल है।  जमीन, बिजली, पानी और ग्रीन एनर्जी की पर्याप्त उपलब्धता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योगों की स्थापना के लिए आवश्यक बुनियादी संसाधनों के मामले में मध्यप्रदेश की स्थिति बेहद मजबूत है। प्रदेश के पास पर्याप्त लैंड बैंक और भूमि, सरप्लस बिजली तथा पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध हैं। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप पंप लोड और अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता प्रदेश में है।उन्होंने कहा कि उद्योगों के लिए भूमि और संसाधनों के साथ बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आवागमन की सुविधा भी जरूरी है। मध्यप्रदेश ने इस दिशा में भी अपनी कनेक्टिविटी को मजबूत किया है। यही वजह है कि प्रदेश देशभर के निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में दुनिया की सबसे सस्ती बिजली बन रही है। सस्ती बिजली, ग्रीन एनर्जी, पर्याप्त भूमि, पानी और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का संयोजन प्रदेश को निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी बनाता है। इन सुविधाओं और नीतिगत लाभों के आधार पर मध्यप्रदेश अन्य राज्यों को प्रतिस्पर्धा दे रहा है। नीतियां बनीं निवेश की ताकत, लाभ जमीन पर पहुंचा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सरकार ने केवल नीतियां बनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि निवेशकों को नीतियों के आधार पर मिलने वाले लाभ प्रभावी रूप से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। व्यापार हितैषी नीतियों के साथ निवेशकों के लिए आवश्यक सुविधाओं और अनुकूल वातावरण का निर्माण किया गया है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में व्यापार सुगमता के लिए किए गए सुधारों को मध्यप्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू करने का परिणाम है कि बड़े उद्योगों की स्थापना तेजी से हो रही है और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव से जिला स्तर तक पहुंचेगा उद्योग मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय उद्योगों और निवेश को प्रोत्साहित करने के नए अवसर तैयार किए गए हैं। इस पहल की देशभर में सराहना हुई है।अब सरकार का फोकस जिला स्तर पर औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार पर है। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों और संभावनाओं को चिन्हित कर उन्हें उद्योग, निवेश और रोजगार के नए अवसरों में बदला जा रहा है। इससे औद्योगिक विकास बड़े शहरों तक सीमित न रहकर जिलों और स्थानीय क्षेत्रों तक पहुंचेगा। शिक्षा और स्वास्थ्य को रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी जरूरी है। इसी दृष्टिकोण से प्रदेश में शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र को भी इसी दृष्टिकोण से सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि बेहतर सेवाओं के साथ इस क्षेत्र में भी रोजगार और निवेश की संभावनाएं बढ़ें। भोपाल-इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें, चार नए एयरपोर्ट की तैयारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि निवेश और पर्यटन के लिए बेहतर एयर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है। भोपाल और इंदौर से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन हो रहा है। प्रदेश में चार और नए एयरपोर्ट विकसित किए जाने की तैयारी है। ग्वालियर और जबलपुर भी एयर कनेक्टिविटी के लिहाज से तैयार हैं और भविष्य में यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की संभावनाएं हैं।उन्होंने कहा कि बेहतर सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के कारण मध्यप्रदेश देश और दुनिया से तेजी से जुड़ … Read more

दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे पर हाईकोर्ट की फटकार, ‘सिर्फ मालिक नहीं, MCD भी जिम्मेदार’

 नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने सत्य निकेतन में PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतों के गिरने के मामले में दाखिल PIL पर सुनवाई की. कोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली यूनिवर्सिटी और NHRC को नोटिस जारी किया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह दिल्ली सरकार, केंद्र और MCD की ओर से पेश होंगे. कोर्ट ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. मामले में अगली सुनवाई 25 तारीख को होगी।  यह PIL सत्य निकेतन इलाके में कल हुई उस घटना के बाद दाखिल की गई, जिसमें लड़कों के लिए PG हॉस्टल के तौर पर चल रही दो इमारतें गिर गई थीं. इन इमारतों में करीब 50 छात्र रह रहे थे. हादसे में अब तक कम से कम 7 लोगों की मौत हो चुकी है. इमारतों में रहने वाले कई छात्रों को अस्पताल ले जाया गया है, जबकि कई अन्य के मलबे में दबे होने की बात कही गई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हर कुछ महीनों में ऐसी घटनाएं होती हैं, जिनमें निर्दोष छात्रों की जान चली जाती है. उन्होंने कहा कि MCD को इस दिशा में कुछ करना चाहिए।  हाई कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को अधिक गहरे और सार्थक तरीके से काम करने की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि जो इमारतें गिरीं, उनमें आसपास के DU से जुड़े कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रहते थे. कोर्ट ने कहा कि यह आम जानकारी है कि DU बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं नहीं देता, जिसके कारण छात्रों को PG का इस्तेमाल करना पड़ता है।  HC ने DU से बाहर से आने वाले कितने छात्र उसके कॉलेजों में पढ़ते हैं और यूनिवर्सिटी या कॉलेजों की ओर से कितने हॉस्टल चलाए जा रहे हैं, इसका डेटा मांगा है. कोर्ट ने MCD से पूछा कि क्या PG चलाने के लिए कोई नियम मौजूद हैं. MCD को इस बारे में विस्तृत जवाब देने को कहा गया है।  इमारतों की अनुमति की जांच और PG हॉस्टल का ऑडिट हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि MCD के उच्चतम कार्यकारी स्तर पर यह जांच कराई जाए कि हादसे में गिरी इमारतें वैध अनुमति के साथ बनाई गई थीं या नहीं. अगर इमारत बिना अनुमति के बनाई गई थी तो इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा गया है. कोर्ट ने गलत काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण भी मांगा है. इसके साथ ही MCD को PG हॉस्टलों का ऑडिट करने और यह जांचने का निर्देश दिया गया है कि उनका निर्माण संबंधित अनुमति और बिल्डिंग बायलॉज के तहत हुआ है या नहीं. सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि छात्र फ्लैट भी किराए पर लेते हैं. इस पर HC ने पूछा कि सरकार को कैसे पता चलता है कि कोई फ्लैट PG के तौर पर किराए पर दिया जा रहा है. कोर्ट ने PG हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की संख्या का डेटा देने को भी कहा. चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी सिर्फ PG हॉस्टल के मालिक की नहीं है. जिम्मेदारी MCD प्रशासन की भी है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि हर निर्माण नियमों के अनुसार किया जाए. HC ने कहा कि अगर अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को लेकर सजग होते तो शायद ऐसी त्रासदी को टाला जा सकता था. कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार, MCD और NHRC से रिपोर्ट और ऑडिट की जानकारी मांगी है. कोर्ट ने MCD, केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल द्वारा दिए गए इस आश्वासन को दर्ज किया कि सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. कोर्ट ने उम्मीद जताई कि बचाव प्रयासों को दोगुना किया जाएगा, ताकि लोगों की जान बचाई जा सके। 

स्वतंत्र भारद्वाज की मुश्किलें बढ़ीं, दिल्ली HC ने खारिज की याचिका; 21 सितंबर तक जेल में रहेंगे

नई दिल्ली एससी-एसटी और पॉक्सो ऐक्ट में गिरफ्तार किए गए यूट्यूबर स्वतंत्र भारद्वाज को डबल झटका लगा है। एक तरफ उसे निचली अदालत ने उसे 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है तो दूसरी तरफ हाई कोर्ट ने याचिका दायर करके राहत की उसकी उम्मीदों को तोड़ दिया। स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध घोषित कराने के लिए उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। जस्टिस नवीन चावला और रविंद्र डुडेजा की बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले सोमवार सुबह चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की बेंच ने तत्काल इस पर सुनवाई को सहमति दी थी। दूसरी तरफ, अडिशनल सेशंस जज सौरभ प्रताप सिंह की अदालत ने मारपीट मामले में हिंदुत्ववादी 'इन्फ्लुएंसर' स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललर ने अब भारद्वाज की न्यायिक हिरासत 21 सितंबर तक बढ़ा दी है। भारद्वाज को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जज के सामने पेश किया गया था। दलित यूट्यूबर के पिता के साथ मारपीट के आरोप में भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से गिरफ्तार किया गया था। रविवार को भारद्वाज को एक ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने ऑनलाइन पेश किया गया था और एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। कैसे गिरफ्तार हुआ स्वतंत्र भारद्वाज भारद्वाज की ओर से अधिवक्ता उमेश शर्मा ने कहा, 'वह पिछले तीन दिन से हिरासत में है, मैं अनुरोध करता हूं कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका आज ही सूचीबद्ध की जाए।' दिल्ली पुलिस ने 5 जून को भारद्वाज को तब गिरफ्तार किया गया जब उसके एक वीडियो की वजह से करीब दो महीने पहले हुई मारपीट की घटना ने अचानक तूल पकड़ लिया। सीजेपी आंदोलन के दौरान भारद्वाज और एक दलित शख्स के बीच मारपीट हुई थी। भारद्वाज ने हाल ही में एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि उसने मारपीट करके सिर फोड़ दिया, लेकिन राजनीतिक पहुंच की वजह से बच गया। उसने कहा था, ‘मैंने सिर फोड़ दिया… क्या आप जानते हैं कि यह अपराध किस धारा के तहत आता है? धारा 307। उसे 7 टांके लगे थे।’ इसके बाद सीजेपी और विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद मार्ग थाने पर धरना देकर पुलिस पर दबाव बनाया। पुलिस ने उसके खिलाफ एससी-एसटी ऐक्ट और पॉक्सो ऐक्ट में केस दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया था। पॉक्सो ऐक्ट में क्यों केस शुक्रवार को पुलिस ने नाबालिग छात्रा की शिकायत पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत एक नई शिकायत दर्ज की। शिकायत में ऑनलाइन धमकियों और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3), धारा 78 (पीछा करना) और धारा 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले कृत्य) के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 भी प्राथमिकी में जोड़ी है। पीड़िता ने इससे पहले आरोप लगाया था कि अपने पिता पर हुए कथित हमले के खिलाफ आवाज उठाने और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बाद उसे दुष्कर्म की धमकियां दी गईं, अपशब्द कहे गए और छेड़छाड़ कर बनाई गईं तस्वीरें भेजी गईं।

दिल्ली में पुरानी इमारतों पर बड़ा एक्शन, 20-30 साल पुराने भवनों में नहीं चलेंगे हॉस्टल और नर्सिंग होम

नई दिल्ली दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई है. इस हादसे में कई लोग घायल भी हो गए. यह हादसा दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हुई. जो ब्लिडिंग गिरी, उसमें पीजी चलता था. जिसमें कई कॉलेज छात्र रहा करते थे. इस हादसे के बाद दिल्ली की पुरानी इमारतों में रह रहे लोगों की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं. इधर आज सुबह घटनास्थल पर पहुंचीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, 'हम अधिकारियों के साथ मिलकर एक ऐसी पॉलिसी बना रहे हैं जिसके तहत 20, 30 या 40 साल पुरानी इमारतों को स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी और अपनी सुरक्षा को प्रमाणित करना होगा।  सीएम ने आगे कहा कि इसके बिना उन्हें उस जगह पर कोई भी सार्वजनिक सेवा या सुविधा—जैसे PG अकोमोडेशन, नर्सिंग होम, स्कूल या कोई अन्य गतिविधि—चलाने का अधिकार नहीं होगा. इस संबंध में कड़े नियम लागू किए जाएंगे।  जिम्मेदार अधिकारी किए जाएंगे सस्पेंड दिल्ली की मुख्यमंत्री ने सत्य निकेतन के हादसे पर यह भी कहा कि जिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा; उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया जाएगा. सभी अधिकारियों और म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को कड़े निर्देश दिए गए हैं; इसमें शामिल किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।  जिम्मेदार अधिकारियों का सस्पेंशन आज हीः सीएम सीएम ने यह भी कहा कि हादसे के जिम्मेदार अधिकारियों के सस्पेंशन के आदेश आज ही जारी कर दिए जाएंगे. हम इन छात्रों के साथ पूरी तरह खड़े हैं। हमने म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी छात्र को कोई परेशानी न हो. सरकार की ओर से हम सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे।  मंत्री बोले- स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट अनिवार्य की नीति बनेगी दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर कहा, "बचाए गए 12 लोगों में से 6 की मौत हो गई है. बाकी लोगों का इलाज चल रहा है और वे सुरक्षित हैं. आज मुख्यमंत्री ने मेयर और MCD कमिश्नर के साथ बैठक की और निर्देश दिया कि यहां चल रहे PG, हॉस्टल और सार्वजनिक सुविधाओं वाले संस्थानों के लिए स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य करने वाली नीति तुरंत बनाई जाए. स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट के बिना उन्हें काम करने की इजाज़त नहीं दी जाएगी। 

कारीगरों और युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, योजना में जुड़े 14 नए ट्रेड, मुफ्त टूलकिट भी मिलेगी

 लखनऊ योगी सरकार ने युवाओं और कारीगरों के लिए विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 का दायरा व्यापक कर दिया है। अब योजना में पहले से शामिल 11 ट्रेडों के साथ 14 नए ट्रेड जोड़े गए हैं। इस विस्तार के बाद योजना में कुल 25 ट्रेड शामिल हो गए हैं। नई व्यवस्था में मूर्तिकार, मालाकार, दूधवाला, भरभूजा और मछुआरा जैसे पांच नए पारंपरिक ट्रेड शामिल किए गए हैं। वहीं आधुनिक जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयरिंग, ऑटोमोबाइल मरम्मत, इलेक्ट्रॉनिक सामान मरम्मत, विद्युत सामान, प्लम्बर, कंप्यूटर मरम्मत, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी तथा सौंदर्य एवं वेलनेस को भी योजना से जोड़ा गया है। नए ट्रेडों के जुड़ने से अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के हुनर रखने वाले अधिक कारीगर योजना के दायरे में आ सकेंगे। सरकार का यह विस्तार युवाओं को बदलती तकनीक और बाजार की मांग के अनुरूप कौशल से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हुनरमंदों को बाजार से जोड़ने की कोशिश उपायुक्त उद्योग अमरेश पांडे, सहायक आयुक्त दिनेश आर्य का कहना है कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 का विस्तार योगी सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें पारंपरिक कारीगरों के हुनर को संरक्षित करने के साथ युवाओं को रोजगार के बजाय स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कारोबार के लिए 10 लाख तक लोन प्रशिक्षण के साथ कारोबार के लिए मदद का प्रावधान है। 10 लाख रुपये तक ऋण मिल सकेगा। सामान्य श्रेणी के पुरुषों को लागत का 10 प्रतिशत, जबकि महिलाओं, ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और भूतपूर्व सैनिकों को 5 प्रतिशत मार्जिन मनी जमा करनी होगी। शेष राशि पर 15 प्रतिशत मार्जिन मनी सब्सिडी का प्रावधान है। सीजीटीएमएसई योजना के तहत ऋण 100 प्रतिशत बिना गारंटी सुरक्षित होगा। नियमित भुगतान करने पर पांच वर्षों तक ब्याज सब्सिडी भी दी जाएगी। छह माह की मोरेटोरियम अवधि के बाद ऋण का भुगतान 54 किस्तों में किया जा सकेगा। 10 दिन की ट्रेनिंग और 500 रुपये मानदेय योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि में प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को 500 रुपये प्रतिदिन मानदेय डीबीटी के माध्यम से बैंक खाते में मिलेगा। प्रशिक्षण के दौरान भोजन और नाश्ते की व्यवस्था भी निःशुल्क रहेगी। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लाभार्थियों को 15 हजार रुपये मूल्य तक की उन्नत टूलकिट फ्री दी जाएगी, साथ ही सरकारी मान्यता प्राप्त कौशल प्रमाण-पत्र भी मिलेगा।

पटना एयरपोर्ट पर पार्किंग होगी स्मार्ट, ऐप से स्लॉट बुकिंग और ऑटोमैटिक बैरियर की सुविधा

पटना  बिहार की राजधानी पटना में स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पटना में वाहनों की पार्किंग ऐप के माध्यम से हो सकेगी। निकास और प्रवेश द्वार पर सुगम यातायात व्यवस्था और पार्किंग मैनेजमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए एयरपोर्ट परिसर में काम शुरू हो गया है। हाल ही में नई एजेंसी को परिसर में वाहनों के प्रबंधन का जिम्मा मिला है। एजेंसी ने बताया कि एक पखवारे में पीएमएसस ऐप से पटना एयरपोर्ट पर वाहनों की पार्किंग का स्लॉट बुक करने की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। एयरपोर्ट प्रशासन ने तय अवधि में काम पूरा करने का निर्देश एजेंसी को दिया है। पार्किंग संचालन कर रही एजेंसी पार्कमॉन्ट प्राइवेट लिमिटेड के विपिन कुमार ने बताया कि पटना एयरपोर्ट पर पार्किंग की नई व्यवस्था पर काम शुरू हो गया है। परिसर में पार्किंग प्रबंधन के लिए कंट्रोल एंड कमांड रूम बनाया जा रहा है। इससे सुगम आवाजाही की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा। ऐप से वैसे वाहन चालकों को ऑनलाइन पेंमेंट की सुविधा दी जाएगी जिनकी गाड़ियों में फास्टैग नहीं लगा है। मैनुअल व्यवस्था में निकास द्वार के पास वाहनों की कतार लग जाती है। नई व्यवस्था के तहत ऐसे वाहनों के नंबर को तकनीकी माध्यम से स्कैन कर उन्हें निकास द्वार पर पेमेंट से छूट मिल जाएगी। ऐप से निकास द्वार के पास लगे कैमरे जुड़े होंगे। नंबर स्कैन होते ही स्वचालित माध्यम से बूम बैरियर स्वत: खुल जाएगा। इस सुविधा से निकास द्वार के पास जाम की स्थिति नहीं बनेगी। मुंबई और अन्य एयरपोर्ट पर कंपनी दे रही सुविधा पार्किंग व्यवस्था संभाल रही एजेंसी के प्रबंधक ने बताया कि यह सुविधा कंपनी की ओर से मुंबई एयरपोर्ट पर दी जा रही है। पटना एयरपोर्ट पर भी यह सुविधा देने की तैयारी है। ऐप की एक और खासियत यह है कि इसमें उपयोगकर्ताओं को खुली पार्किंग और बहुमंजिली पार्किंग का रियल टाइम स्टेटस दिखेगा। ताकि सुविधानुसार वे जगह का चयन कर सकें। इससे वाहन चालकों और यात्रियों के समय की बचत होगी। साथ ही पार्किंग प्रबंधन बेहतर हो सकेगा।