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सुहेल सेठ ने की ‘योगी मॉडल ऑफ गवर्नेंस’ की तारीफ, बोले- देश को चाहिए योगी जैसे और नेता

सुहेल सेठ ने की 'योगी मॉडल ऑफ गवर्नेंस' की तारीफ, बोले-देश को चाहिए योगी आदित्यनाथ जैसे और नेता नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक के शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना, बोले- मजबूत और निर्णायक नेतृत्व से ही दिखता है बदलाव गलगोटियास यूनिवर्सिटी में नई किताब 'डब्ल्यूटीएफ इंडिया: आर वी लूजिंग द प्लॉट?' का विमोचन, छात्रों से भारत के भविष्य और नागरिक जिम्मेदारियों पर खुलकर संवाद ग्रेटर नोएडा जाने-माने लेखक, ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट और कमेंटेटर सुहेल सेठ ने गलगोटियास यूनिवर्सिटी में आयोजित संवाद कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन मॉडल की जमकर सराहना की। नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक सफर के दौरान नजर आए इंफ्रास्ट्रक्चर की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि देश को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे और नेताओं की जरूरत है। सुहेल सेठ गलगोटियास यूनिवर्सिटी में अपनी नई किताब 'डब्ल्यूटीएफ इंडिया: आर वी लूजिंग द प्लॉट?' के विमोचन के लिए पहुंचे थे। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की संवाद श्रृंखला का हिस्सा था, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियों को छात्रों से बातचीत के लिए आमंत्रित किया जाता है। क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव का जिक्र करते हुए सेठ ने यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता और विकास की रफ्तार को प्रभावी शासन की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि विश्वस्तरीय और जमीन पर दिखाई देने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर अचानक तैयार नहीं होता। इसके पीछे मजबूत और निर्णायक नेतृत्व होता है, जो स्पष्ट दिशा तय करता है और उसे जमीन पर लागू करने की क्षमता रखता है। उनके मुताबिक क्षेत्र में बदलाव की रफ्तार बताती है कि जब स्पष्ट सोच के साथ उसे लागू करने की इच्छाशक्ति और क्षमता जुड़ती है, तो प्रभावी शासन के जरिए कितना बड़ा बदलाव किया जा सकता है। किताब के विमोचन के बाद गलगोटियास यूनिवर्सिटी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर डॉ. ध्रुव गलगोटिया के साथ सुहेल सेठ की विस्तृत बातचीत हुई। इसके बाद उन्होंने छात्रों के साथ भी संवाद किया। बातचीत में भारत की दिशा, नागरिकों की जिम्मेदारियों और देश के भविष्य के प्रति उदासीन रहने के बजाय सक्रिय रूप से जुड़े रहने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम दौरे के प्रमुख आकर्षणों में रहा। छात्रों ने भारत की दिशा और अपनी पीढ़ी की भूमिका को लेकर सुहेल सेठ से कई सवाल किए। सेठ ने अपने खास बेबाक और सहज अंदाज में जवाब देते हुए छात्रों से सवाल करने, भागीदारी निभाने और भारत की कहानी को खुद आकार देने की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया। डॉ. ध्रुव गलगोटिया ने सुहेल सेठ की मेजबानी पर खुशी जताई। उन्होंने कहा, “हमारे कैंपस में सुहेल सेठ की मेजबानी करना हमारे लिए सम्मान की बात है। विश्वविद्यालय अपने छात्रों को सबसे बड़ी चीज यह दे सकता है कि वे उन लोगों के साथ बड़े विचारों पर चर्चा और बहस कर सकें, जो उन विचारों को आकार देते हैं। साथ ही वे खुद और देश के बारे में पहले से ज़्यादा सोचकर यहां से निकलें। हमारे छात्रों ने आज बिल्कुल यही किया और उनकी ऊर्जा मुझे भरोसा दिलाती है कि हम सही तरह का माहौल तैयार कर रहे हैं।” गलगोटियास यूनिवर्सिटी की संवाद श्रृंखला विश्वविद्यालय की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत उद्योग, विचार और सार्वजनिक जीवन को प्रभावित करने वाली हस्तियों को कैंपस में बुलाया जाता है। इसका उद्देश्य छात्रों को ऐसे लोगों से सीखने और संवाद करने का अवसर देना है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों को प्रभावित किया है। 50 हजार से ज्यादा छात्र, एक लाख से अधिक पूर्व छात्र गलगोटियास यूनिवर्सिटी भारत की प्रमुख मल्टीडिसिप्लिनरी यूनिवर्सिटी में शामिल है। विश्वविद्यालय को अकादमिक उत्कृष्टता, रिसर्च, इनोवेशन, ग्लोबल सहयोग और इंडस्ट्री से जुड़ी शिक्षा के लिए जाना जाता है। यहां 50,000 से अधिक छात्र पढ़ते हैं, जबकि इसका ग्लोबल एलुमनाई नेटवर्क 1,00,000 से अधिक पूर्व छात्रों का है। विश्वविद्यालय ने टेक्नोलॉजी, उद्यमिता, अलग-अलग विषयों के बीच सीखने और वास्तविक दुनिया में काम आने वाली शिक्षा पर केंद्रित एक तेजी से बढ़ता इकोसिस्टम तैयार किया है। क्यूएस और टाइम्स हायर एजुकेशन रैंकिंग में भी स्थान क्वाक्वेरेली साइमंड्स की क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027 में गलगोटियास यूनिवर्सिटी को वैश्विक स्तर पर 1201 – 1400 बैंड में जगह मिली है। भारत में यह निजी विश्वविद्यालयों में 16वें और सभी विश्वविद्यालयों में 46वें स्थान पर रही। वहीं टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 में विश्वविद्यालय को वैश्विक स्तर पर 1201-1500 बैंड में स्थान मिला और भारत में निजी विश्वविद्यालयों में 27वां तथा सभी विश्वविद्यालयों में 65वां स्थान मिला। विश्वविद्यालय को एनएएसी 'ए प्लस' मान्यता भी प्राप्त है, जो भारत की उच्च संस्थागत गुणवत्ता रेटिंग में शामिल है। विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कंप्यूटर साइंस, सेमीकंडक्टर्स, बिजनेस, लॉ, मीडिया, डिजाइन, हेल्थ साइंसेज, हॉस्पिटैलिटी, लिबरल एजुकेशन और नए इंटरडिसिप्लिनरी क्षेत्रों में विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। वर्ष 2026 में छात्रों को 1,250 से अधिक रिक्रूटर्स की ओर से 5,500 से ज्यादा जॉब ऑफर मिले। विश्वविद्यालय ने एप्पल, एक्सेंचर, इन्फोसिस, आईबीएम, इंटेल, सिस्को, टाटा टेक्नोलॉजीज, एलएंडटी एडुटेक, कैपजेमिनी और सेल्सफोर्स जैसी संस्थाओं के साथ इंडस्ट्री और इनोवेशन पार्टनरशिप भी विकसित की हैं। साथ ही ग्लोबल अकादमिक सहयोग और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने पर भी काम जारी है।

मुजफ्फरनगर दंगे की बरसी पर अखिलेश की PC, संगीत सोम बोले- ‘सनातनी न भूले हैं, न भूलेंगे’

'मुजफ्फरनगर में हिंदू कट रहे थे, अखिलेश सैफई में डांस देख रहे थे', संगीत सोम ने सपा को घेरा मुजफ्फरनगर दंगे की बरसी पर अखिलेश की PC, संगीत सोम बोले- ‘सनातनी न भूले हैं, न भूलेंगे’ सहारनपुर में अवैध इमारत हटाने पर अखिलेश क्यों बौखलाए? संगीत सोम ने पूछा- ‘क्या भूमाफियाओं के साथ हैं?’ मर्डर पर राजनीति, एनकाउंटर पर माफियाओं का साथ? अंकित बालियान केस पर अखिलेश को संगीत सोम ने घेरा ‘P से पापी, D से डकैत, A से अपराधी’- संगीत सोम ने अखिलेश के PDA को बताया छलावा ‘अखिलेश यादव मुगल शासन के आखिरी शासक थे’- संगीत सोम बोले, अब यूपी में नहीं चलेगा मुगल राज लखनऊ  मुजफ्फरनगर दंगे की बरसी पर अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बीजेपी के पूर्व विधायक संगीत सोम ने सपा पर तीखा हमला बोला। संगीत सोम ने आरोप लगाया कि जब मुजफ्फरनगर में हिंदू काटे जा रहे थे और पश्चिमी यूपी जल रहा था, तब अखिलेश यादव सैफई में डांस देख रहे थे। उन्होंने कहा कि सनातनी मुजफ्फरनगर दंगे को न भूले हैं और न भूलेंगे। संगीत सोम ने कहा कि 'हम न माफ किए थे, न करेंगे।' संगीत सोम ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि आज (सोमवार) प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव मुजफ्फरनगर दंगे की बरसी पर कुछ बोलेंगे और सनातनियों से माफी मांगेंगे कि कैसे उन्होंने हजारों हिंदुओं को कटवाने और मरवाने का काम किया गया था, लेकिन अखिलेश यादव कुछ बोले तक नहीं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि अखिलेश यादव को आज भी याद नहीं आया कि उन्होंने क्या किया था। ‘मुजफ्फरनगर में अखिलेश के इशारे पर पुलिस वाले हिंदुओं को गोली मार रहे थे’ संगीत सोम ने कहा कि मुजफ्फरनगर में अखिलेश यादव के इशारे पर पुलिस वाले हिंदुओं को गोली मार रहे थे। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने मुजफ्फरनगर में दंगे कराए और आज उसकी बरसी पर बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि अंदाजा लगा लीजिए कि अखिलेश यादव क्या कर रहे हैं। संगीत सोम ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव का इतिहास ही सनातन विरोधी रहा है। उन्होंने कहा, 'कभी राम मंदिर भक्तों पर गोली चलवाते हैं तो कभी दंगे करवाते हैं।' संगीत सोम ने कहा कि अखिलेश यादव केवल एक ही धर्म की राजनीति करते हैं। उन्हें सनातनियों से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान अखिलेश यादव को कभी माफ नहीं करेगा। सहारनपुर में कार्रवाई पर अखिलेश को घेरा, पूछा- ‘क्या वो भूमाफियाओं के साथ हैं?’ संगीत सोम ने सहारनपुर में अवैध निर्माण के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर भी अखिलेश यादव को घेरा। उन्होंने कहा कि एक सरकारी बिल्डिंग पर अवैध इमारत थी और उसे हटाया गया है। इसके बावजूद अखिलेश यादव इस कार्रवाई को लेकर बौखला गए हैं। उन्होंने सवाल किया, 'क्या वो भूमाफियाओं के साथ हैं?' संगीत सोम ने कहा कि जितनी इस तरह की कब्जे वाली जमीन है और जितनी इस तरह की अवैध मस्जिद और मजार बनी हैं, उसे तोड़ा जाएगा। 'अंकित बालियान के मर्डर पर गिद्ध जैसी नजर, एनकाउंटर होते ही पलट गए' मुरादाबाद के अंकित बालियान हत्याकांड का जिक्र करते हुए भी संगीत सोम ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव राजनीति के लिए इस तरह की घटनाओं पर गिद्ध जैसे नजर रखेंगे, लेकिन जैसे ही एनकाउंटर होगा, वह तुरंत पलट जाएंगे और माफियाओं के साथ देने लगेंगे। उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में दंगा नहीं हो सकता है। अब प्रदेश में कानून का राज है। ‘अखिलेश को पर्यटन स्थल, एम्स और एक्सप्रेस-वे से मतलब नहीं’ संगीत सोम ने कहा कि अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश में बन रहे पर्यटन स्थल, एम्स और एक्सप्रेस-वे से मतलब नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव केवल डांस देखने में व्यस्त रहते थे और उन्हें केवल माफियाओं से मतलब है। उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव मुगल शासन के आखिरी शासक थे। अब यूपी में मुगल शासन नहीं चलेगा।' संगीत सोम ने अपने ऊपर हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने उन पर फर्जी रासुका लगाई थी और कई निर्दोषों को जेल भेजा था। सपा-कांग्रेस गठबंधन पर भी हमला, बोले- ‘इनका कुछ पता नहीं कब होगा, कैसे होगा’ सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर चल रही खींचतान पर भी संगीत सोम ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों दलों में अभी सीट बंटवारे को लेकर ही लड़ाई मची है। सपा सोचती है कि वह बड़ी पार्टी है और कांग्रेस भी खुद को बड़ी पार्टी समझती है। संगीत सोम ने कहा कि अखिलेश यादव सोच रहे हैं कि कांग्रेस को 20-30 सीट में निपटा दें, जबकि कांग्रेस वाले 200 सीट मांग रहे हैं। ऐसे में इनके गठबंधन का कुछ पता नहीं है कि कब होगा और कैसे होगा। इसके उलट उन्होंने दावा किया कि बीजेपी 300 सीटों के साथ यूपी में सरकार बनाने जा रही है। बीजेपी जमीन पर चुनाव लड़ रही है और जमीन पर काम कर रही है। ‘पी से पापी, डी से डकैत, ए से अपराधी… ये केवल छलावा कर रहे हैं’ सपा के PDA फॉर्मूले पर हमला बोलते हुए संगीत सोम ने कहा, 'पी से पापी, डी से डकैत, ए से अपराधी।' उन्होंने कहा कि ये केवल छलावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज यूपी में काम हो रहा है। सड़कें बन रही हैं, स्कूल-कॉलेज बन रहे हैं, निवेश आ रहा है और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधर रहा है। उन्होंने दावा किया कि सपा कहीं है ही नहीं और चुनाव में वह बसपा से भी पीछे रहेगी।

दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बनने की ओर जेद्दा टावर, 109 मंजिलें पूरी; बुर्ज खलीफा रहेगा पीछे

दुबई    दुबई की बुर्ज खलीफा को दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का खिताब हो सकता है छिन जाए. इस इमारत का यह रिकॉर्ड अब टूटने की ओर है. सऊदी अरब के जेद्दा शहर में एक ऐसी गगनचुंबी इमारत तैयार हो रही है, जिसकी ऊंचाई सुनकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह प्रोजेक्ट कितना बड़ा है।  नाम है जेद्दा टावर. इसे पहले किंगडम टावर के नाम से जाना जाता था. पूरी तरह तैयार होने के बाद इसकी ऊंचाई कम से कम 1000 मीटर यानी 1 किलोमीटर होगी. इस ऊंचाई के साथ यह दुनिया की पहली ऐसी इमारत बनने जा रही है, जो एक किलोमीटर के निशान को पार करेगी।  109 मंजिलों तक पहुंच चुका है टावर निर्माण की ताजा प्रगति के मुताबिक अगस्त 2026 तक जेद्दा टावर का स्ट्रक्चर 109वीं मंजिल तक पहुंच चुका था. इसकी ऊंचाई करीब 430 मीटर हो गई थी. यानी इमारत अभी अपनी अंतिम ऊंचाई से काफी नीचे है, लेकिन जमीन से ऊपर उठता इसका ढांचा अब दूर से ही एक विशाल गगनचुंबी इमारत जैसा दिखाई देने लगा है।  टावर में 157 से ज्यादा मंजिलें होने की योजना है. निर्माण की रफ्तार भी लगातार बढ़ाई जा रही है. इंजीनियरिंग फर्म थॉर्नटन टोमासेट्टी के मुताबिक इसका कोर स्ट्रक्चर हर हफ्ते करीब एक मंजिल और लगभग 4 मीटर ऊपर जा रहा है।  बुर्ज खलीफा से कितनी ऊंची होगी? अभी दुनिया की सबसे ऊंची इमारत दुबई की बुर्ज खलीफा है, जिसकी ऊंचाई 828 मीटर है. जेद्दा टावर की प्रस्तावित ऊंचाई कम से कम 1000 मीटर है.यानी दोनों के बीच करीब 172 मीटर का अंतर होगा. आसान भाषा में समझें तो जब जेद्दा टावर पूरा होगा, तब बुर्ज खलीफा का 828 मीटर का रिकॉर्ड पीछे छूट जाएगा।  लेकिन इस प्रोजेक्ट की खासियत सिर्फ इसकी ऊंचाई नहीं है. तीन पंखुड़ियों जैसी क्यों है डिजाइन? जेद्दा टावर का डिजाइन अमेरिकी आर्किटेक्ट एड्रियन स्मिथ ने तैयार किया है. दिलचस्प बात यह है कि एड्रियन स्मिथ बुर्ज खलीफा के डिजाइन से भी जुड़े रहे हैं।  जेद्दा टावर को ऊपर से देखने पर इसकी आकृति तीन पंखुड़ियों जैसी नजर आती है. यह डिजाइन केवल देखने में आकर्षक बनाने के लिए नहीं है. इतनी ऊंची इमारत के लिए हवा सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होती है. टावर का आकार हवा के दबाव और उसके आसपास बनने वाले एयरफ्लो को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.यानी यहां डिजाइन और इंजीनियरिंग दोनों का काम साथ-साथ किया गया है।  630 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर होगा ऑब्जर्वेशन डेक जेद्दा टावर के अंदर सिर्फ ऑफिस या घर नहीं होंगे. इसमें होटल, रेजिडेंशियल स्पेस, सर्विस अपार्टमेंट्स और दूसरी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं.इसकी सबसे खास सुविधाओं में दुनिया के सबसे ऊंचे ऑब्जर्वेशन डेक में से एक शामिल होगा, जो करीब 630 से 638 मीटर की ऊंचाई पर होगा. इसके अलावा टावर के ऊपरी हिस्से में हेलीपैड की भी योजना है।  200 कमरों का लग्जरी होटल भी जेद्दा टावर को सिर्फ एक ऊंची इमारत के तौर पर नहीं बनाया जा रहा. इसमें करीब 200 कमरों वाला लग्जरी होटल भी प्रस्तावित है.इसके अलावा यहां प्राइवेट रेजिडेंस और सर्विस अपार्टमेंट्स होंगे. इमारत जितनी ऊपर जाएगी, वहां के कुछ रेजिडेंशियल स्पेस उतने ही खास और महंगे होने की उम्मीद है।  सात साल तक क्यों थम गया था काम? इस प्रोजेक्ट की कहानी सिर्फ इंजीनियरिंग की नहीं है. इसका निर्माण 2013 में शुरू हुआ था, लेकिन कुछ सालों बाद काम रुक गया.2018 के बाद जेद्दा टावर का निर्माण लंबे समय तक ठप रहा. इसके पीछे प्रोजेक्ट से जुड़ी वित्तीय और राजनीतिक परिस्थितियां अहम वजहों में शामिल थीं।  करीब सात साल तक रुके रहने के बाद जनवरी 2025 में निर्माण दोबारा शुरू हुआ. इसके बाद प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए 2 अरब डॉलर से ज्यादा के नए कॉन्ट्रैक्ट की खबरें सामने आईं और साइट पर फिर से बड़े स्तर पर काम शुरू हुआ।  अब कब तक पूरा होगा? मौजूदा निर्माण प्रगति को देखते हुए जेद्दा टावर के 2028 के आसपास पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है.अगर प्रोजेक्ट योजना के मुताबिक पूरा हुआ, तो उस वक्त दुनिया की सबसे ऊंची इमारत का रिकॉर्ड एक बार फिर बदल जाएगा. 828 मीटर की बुर्ज खलीफा नंबर-1 से नंबर-2 पर आ जाएगी. जेद्दा टावर कम से कम 1000 मीटर की ऊंचाई के साथ दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बन जाएगी।  फिलहाल 109 मंजिलों तक पहुंच चुका इसका ढांचा उस भविष्य की झलक दे रहा है, जब पहली बार किसी इमारत की ऊंचाई एक पूरे किलोमीटर के पार होगी। 

‘शादी के बाद सहमति की जरूरत नहीं?’ 12 साल पुरानी याचिका से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मैरिटल रेप का मुद्दा

नई दिल्ली करीब 12 साल पहले एक शादीशुदा महिला अदालत पहुंची. उसका आरोप था कि उसका पति उसकी इच्छा के खिलाफ बार-बार शारीरिक संबंध बनाता है. लेकिन जब उसने न्याय की मांग की तो उसके सामने एक कानूनी दीवार खड़ी हो गई. कानून कह रहा था कि अगर ऐसा काम पति ने अपनी पत्नी के साथ किया है, तो उसे बलात्कार (Rape) नहीं माना जाएगा. यहीं से शुरू हुई बहस दिल्ली हाईकोर्ट से होते हुए अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक बलात्कार (Marital Rape) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की नई तारीख तय करने से फिलहाल इनकार कर दिया. अदालत ने कहा कि पहले केंद्र सरकार का पक्ष रिकॉर्ड पर आने दें. लेकिन कोर्ट की अगली तारीख आने से पहले बड़ा सवाल यह है कि आखिर Marital Rape पर बहस खत्म क्यों नहीं हो रही? क्यों यह मुद्दा हर कुछ साल बाद फिर देश के सामने खड़ा हो जाता है?  दिल्ली हाईकोर्ट के जजों का फैसला भी बंटा था इन सवालों का जवाब जानने से पहले एक चौंकाने वाला तथ्य समझिए भारत में अगर कोई पुरुष किसी महिला की इच्छा के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाता है, तो यह बलात्कार हो सकता है. लेकिन यदि वही महिला उसकी पत्नी है, तो भारतीय कानून में लंबे समय से एक अपवाद (Exception) मौजूद रहा है. यही "Marital Rape Exception" है, जिस पर पूरी लड़ाई टिकी हुई है. याचिकाकर्ताओं का सवाल है कि "अगर सहमति ही रेप और सेक्स के बीच का फर्क है, तो शादी के बाद सहमति की अहमियत कैसे खत्म हो सकती है?" इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में जज भी एक राय नहीं बना पाए.  मार्च 2022 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर विभाजित फैसला दिया. एक जज ने कहा कि वैवाहिक बलात्कार अपवाद संविधान के खिलाफ है. लेकिन दूसरे जज इससे सहमत नहीं थे।  जाहिर है कि अदालत के भीतर भी मतभेद था. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. यहीं से साफ हो गया कि यह केवल कानून का मसला नहीं, बल्कि समाज और संविधान के बीच टकरा रहे दो विचारों का सवाल है. जो Marital Rape को अपराध बनाने की मांग कर रहे हैं, वे क्या कहते हैं? पक्ष में लोग ये तर्क देते हैं     शादी किसी महिला की शारीरिक स्वायत्तता खत्म नहीं करती.     संविधान सभी महिलाओं को समान सुरक्षा देता है.     सहमति (Consent) हर रिश्ते में जरूरी है.     पत्नी को कानून में कम सुरक्षा देना समानता के अधिकार के खिलाफ है. और विरोध करने वाले क्या कहते हैं?     दूसरा पक्ष कई चिंताएं उठाता है:     विवाह संस्था पर असर पड़ सकता है.     झूठे मामलों की आशंका बढ़ सकती है.     पति-पत्नी के निजी विवाद आपराधिक मुकदमों में बदल सकते हैं. 29 फीसदी महिलाएं हुई हैं शिकार भारत में Marital Rape के अलग अपराध का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता, इसलिए NCRB के पास इसका सीधा डेटा मौजूद नहीं है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि शादीशुदा महिलाओं के खिलाफ यौन या शारीरिक हिंसा का कोई अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) की रिपोर्ट बताती है कि 18 से 49 वर्ष की आयु की करीब 29 फीसदी विवाहित महिलाओं ने अपने जीवन में कभी न कभी पति द्वारा शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा झेलने की बात कही. इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जिन महिलाओं ने यौन हिंसा की शिकायत की, उनमें अधिकांश मामलों में आरोपी कोई अजनबी नहीं बल्कि उनका अपना पति था. यही आंकड़े बताते हैं कि Marital Rape पर बहस अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे वर्षों से मौजूद एक सामाजिक वास्तविकता है, जिस पर अब कानूनी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।  दूसरी तरफ कानून की किताब में ऐसे मामलों को अलग अपराध की श्रेणी नहीं मिली हुई है. यही विरोधाभास इस पूरी बहस का केंद्र है. सुप्रीम कोर्ट के सामने भी मूल प्रश्न यही है कि अगर किसी महिला की सहमति के बिना सेक्स अपराध हो सकता है, तो क्या विवाह उस सहमति को स्थायी रूप से मान लेने का आधार बन सकता है? घर की चारदीवारी के भीतर भी होती है हिंसा अगर NCRB के व्यापक आंकड़ों को देखें तो भी एक तस्वीर सामने आती है. महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों में हर साल सबसे बड़ी हिस्सेदारी 'पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता' (IPC 498A) से जुड़े मामलों की रहती है।  दूसरे शब्दों में कहें तो महिलाओं के लिए खतरा हमेशा सुनसान सड़क या किसी अजनबी से नहीं जुड़ा होता, कई बार वह उसी व्यक्ति से जुड़ा होता है जिसके साथ वह अपना जीवन साझा कर रही होती है।  यही वजह है कि Marital Rape की बहस केवल कानून की व्याख्या तक सीमित नहीं रह जाती. यह बहस उस बुनियादी प्रश्न में बदल जाती है कि भारतीय समाज विवाह को कैसे देखता है. यह भारतीय समाज की उस सोच से जुड़ा है जहां शादी को कभी अधिकार, कभी जिम्मेदारी और कभी पवित्र संस्था के रूप में देखा जाता है. लेकिन नई पीढ़ी एक अलग सवाल पूछ रही है कि "क्या किसी भी रिश्ते में, चाहे वह शादी ही क्यों न हो, सहमति से बड़ा कुछ हो सकता है?" शायद इसी सवाल का जवाब आने वाले वर्षों में भारत के कानून और समाज दोनों को तलाशना होगा। 

बेसहारा बुजुर्गों को कल धार्मिक यात्रा सकल ब्राह्मण महासमिति करवाएगी, बैठक संपन्न

बेसहारा बुजुर्गों को कल धार्मिक यात्रा सकल ब्राह्मण महासमिति करवाएगी, बैठक संपन्न                                       ग्वालियर   सकल ब्राह्मण समाज की कोर कमेटी की बैठक प्रधान कार्यालय संस्थापक डॉक्टर जयवीर भारद्वाज की अध्यक्षता में संपन्न हुई । बैठक में निर्णय लिया गया कि 9 सितंबर को आश्रम स्वर्ग सदन के सभी समाजों के वरिष्ठ बुजुर्ग जनों को धार्मिक यात्रा पर ले जाकर उन्हें अपने साथ गणेश पूजन, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, श्रीमद् भागवत गीता के 18 वें अध्याय एवं श्री सत्यनारायण की कथा का श्रवण पंडित गिरिराज गुरुजी सहित पांच ब्राह्मणों के मुखारविंद से डबरा नव ग्रह शक्ति पीठ पर कराया जाएगा ।                                              यात्रा  का संयोजक तीरथ मिश्रा , डॉ मुन्नालाल शर्मा, अनिता योगेंद्र दीक्षित को मनोनीत किया गया ।       सकल ब्राह्मण महासमिति ग्वालियर द्वारा धार्मिक यात्रा में पुरुष बुर्जुगों की लिस्ट  .नवल पाठक,शंकर कुशवाह जी .विवेक सोनी जी .किशन जाटव जी.भागीरथ जाटव जी.शिशुपाल जी.दिलीप शाक्य जी.अनुराग जी ,.भाई जी.सूरज जी.राजेन्द्र जी.जयप्रकाश जी.करणजी.सुधीर जी.रामानंद जी.मुकेश जी.फूलचंद्र .सुमित जी.हेमंत ठाकुर जी.देव जी.आलोक श्रीवास्तव जी.चंदन सिंह .रामकृपाल जी.दीपक TI जी,.विजय भदौरिया जी.विनय जी, विकास गोस्वामी,पवन सूर्यवंशी,प्रिंस खटीक,युगांक गिरी,महिला बुजुर्गों की लिस्ट अभी .निर्मला देवी जी.रमादेवी जी.प्रीतिदेवी जी.भावना जी.सुनीता जी.पूजा जी.रूपाली जी.आराध्या.राशि,विभा अनेजा, काजल मौर्य, रश्मि बाथम,.विभा अनेजा .प्रिंस खटीक .सोनी गिरी.युगांक गिरी।                                         यात्रा का शुभारंभ भार्गव समाज के संभागीय अध्यक्ष परमानंद शर्मा, सकल ब्राह्मण महासमिति के अध्यक्ष प्रकाश नारायण शर्मा,सर्व ब्राह्मण महासंघ के अध्यक्ष रामनारायण मिश्रा, सनाढ्य सभा के संरक्षक डॉ केशव पांडे, श्याम बाबू शर्मा, ब्रह्म दत्त पाण्डेय शास्त्री,देवेन्द्र कुमार पाठक,सर्व ब्राह्मण महासंघ के महामंत्री रवि गौड, सकल ब्राह्मण महासमिति की महिला अध्यक्ष बीना भारद्वाज, सनातन धर्म का ध्वज पताका फहराकर नवग्रह शक्ति पीठ के लिए रवाना करेंगे।                                                   

सलाखों के पीछे गूंजेगी साहित्य की आवाज, पंजाब की 27 जेलों में होगा साहित्य उत्सव

 चंडीगढ़  जेल की सलाखें भले ही बंदियों की बाहरी दुनिया से दूरी तय करती हों, लेकिन अब उनकी कलम को अभिव्यक्ति की आजादी देने की तैयारी है। पंजाब की 27 जेलों में बंद कैदियों और बंदियों को अपनी भावनाओं, अनुभवों और कल्पनाओं को शब्दों में ढालने का अवसर देने के लिए जेल साहित्य उत्सव आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित इस उत्सव में प्रदेश की सभी 27 जेलों के बंदी हिस्सा ले सकेंगे। इस पहल का उद्देश्य बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें सकारात्मक दिशा देना और पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना है। बंदियों को रचनात्मक रूप से व्यस्त रखना इस पहल के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। जेल में रहने के दौरान बंदियों के पास अपनी भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के सीमित अवसर होते हैं। ऐसे में लेखन उनके लिए अपनी बात कहने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। कहानी, कविता और अन्य रचनात्मक विधाओं के माध्यम से बंदी अपने भीतर चल रहे विचारों और भावनाओं को कागज पर उतार सकेंगे। ‘गुलदस्ता’ परियोजना से मिलेगा साहित्यिक माहौल इस पहल को ‘गुलदस्ता’ परियोजना के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। बेल्बा फाउंडेशन के सहयोग से संचालित इस परियोजना के माध्यम से जेलों में साहित्यिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। बंदियों को विभिन्न प्रकार की साहित्यिक सामग्री पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें अपनी रचनाएं लिखने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। जेल प्रशासन का मानना है कि पढ़ने और लिखने की आदत बंदियों को सकारात्मक गतिविधि से जोड़ सकती है। जेल में खाली समय का इस्तेमाल केवल समय बिताने के बजाय रचनात्मक कार्यों में किया जा सकेगा। बंदी अपने जीवन की घटनाओं, अनुभवों, यादों, सपनों और भविष्य की उम्मीदों को कहानी या कविता का रूप दे सकेंगे। इससे उन्हें अपने जीवन और परिस्थितियों को नए नजरिये से देखने का अवसर मिल सकता है। पुनर्वास की दिशा में अलग तरह का प्रयोग जेल साहित्य उत्सव को केवल साहित्यिक आयोजन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसे बंदियों के सुधार और पुनर्वास से जोड़कर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेखन व्यक्ति को अपने विचारों और भावनाओं पर आत्ममंथन करने का अवसर देता है। बंदी अपने अतीत की घटनाओं को शब्दों में व्यक्त करते हुए भविष्य को लेकर नई सोच विकसित कर सकते हैं। इस पहल की खास बात यह है कि इसमें बंदियों को अपनी कहानी खुद लिखने का मंच दिया जाएगा। जेल में बंद व्यक्ति के लिए यह अवसर इसलिए भी अहम है क्योंकि समाज से दूरी के बीच उसकी आवाज अक्सर सीमित हो जाती है। साहित्य उस आवाज को अभिव्यक्ति देने का माध्यम बन सकता है। कलम के जरिये दूसरी तरह की आजादी पंजाब की सभी 27 जेलों को इस साहित्यिक पहल से जोड़ना इसे व्यापक स्वरूप देता है। जेल प्रशासन के लिए यह प्रयोग बंदियों को अनुशासन और रचनात्मकता के साथ जोड़ने का अवसर भी है। वहीं बंदियों के लिए यह अपनी प्रतिभा को पहचानने और उसे सामने लाने का माध्यम बन सकता है। सलाखों के पीछे बाहरी दुनिया की आजादी भले सीमित हो, लेकिन विचारों और कल्पनाओं पर कोई पहरा नहीं होता। ऐसे में एक कलम बंदी को उसकी यादों, कल्पनाओं और आत्ममंथन की दुनिया तक पहुंचाने का रास्ता खोल सकती है। जेल साहित्य उत्सव इसी सोच के साथ बंदियों को शब्दों की दुनिया से जोड़ने की एक नई पहल के रूप में सामने आ रहा है।

Maruti Cars Price Hike: ग्राहकों को फिर झटका! मारुति ने बढ़ाए कारों के दाम, जानें कितना महंगा हुआ सफर

मुंबई  मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने ग्राहकों को एक और झटका दिया है। कंपनी ने सितंबर 2026 से अपने कुछ सेलेक्टेड कार मॉडल्स की कीमतों में 20 हजार रुपये तक बढ़ोतरी करने का ऐलान किया है। कंपनी का कहना है कि लगातार बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट और महंगाई के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। मारुति सुजुकी इससे पहले मई और अगस्त में भी कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी है। हालांकि, पहले की दोनों बढ़ोतरी कंपनी के लगभग पूरे व्हीकल पोर्टफोलियो पर लागू हुई थीं, जबकि इस महीने में होने वाली प्राइस हाइक सिर्फ सेलेक्टेड मॉडल्स के लिए थी। किन कारों की कीमत बढ़ेगी? मारुति सुजुकी ने फिलहाल यह साफ नहीं किया है कि 20 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी किन-किन कारों पर लागू होगी। कंपनी के मौजूदा कार पोर्टफोलियो में ऑल्टो K10, S-प्रेसो, सेलेरियो, वैगनआर, ईको, स्विफ्ट, डिजायर, ब्रेजा, अर्टिगा और विक्टोरिस जैसी कारें शामिल हैं। वहीं, नेक्सा सीरीज के तहत कंपनी ई विटारा, इनविक्टो, जिम्नी, XL6, ग्रैंड विटारा, फ्रॉन्क्स और बलेनो सेल है। इनमें से किन मॉडलों पर नई कीमत लागू होगी, इसकी जानकारी कंपनी ने अभी नहीं दी है। लागत बढ़ने से कंपनियों पर दबाव मारुति सुजुकी के अलावा हाल में टाटा मोटर्स और हुंडई ने भी अपनी कारों की कीमतें बढ़ाने की घोषणा की है। इन कंपनियों ने भी बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों को कीमत बढ़ाने का मेन कारण बताया है। मारुति सुजुकी का कहना है कि कंपनी लागत का असर कम से कम ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए कॉस्ट कम करने और लोकल लेवल पर ज्यादा से ज्यादा कंपोनेंट तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मारुति सुजुकी ने हाल में लॉन्च की नई बलेनो मारुति सुजुकी ने 5 सितंबर को बलेनो के फेसलिफ्ट को लॉन्च किया है। कंपनी ने इसकी शुरुआती कीमत 6.10 हजार रुपये (एक्स-शोरूम) रखी है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव 1.2-लीटर Z-सीरीज के थ्री-सिलेंडर वाले पेट्रोल इंजन का इस्तेमाल है, जिसे स्विफ्ट और Dzire से लिया गया है। यह इंजन 5-स्पीड मैनुअल और AMT गियरबॉक्स के साथ आता है। यही इंजन मैनुअल गियरबॉक्स के साथ फैक्ट्री-फिटेड CNG किट के ऑप्शन में भी उपलब्ध है। बलेनो में अब बड़ी फ्रंट ग्रिल दी गई है, जिसमें काले हॉरिजॉन्टल स्लैट्स हैं, जबकि हेडलैंप और टेल लैंप पहले जैसे ही हैं। नए फॉग लैंप हाउसिंग के साथ बंपर में थोड़ा बदलाव किया गया है। इस बार इसमें जो नई चीजे जोड़ी गई हैं, उनमें वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, टायर प्रेशर मॉनिटर और लेवल 2 ADAS-बेस्ड सेफ्टी फीचर्स शामिल हैं।  

MP Transco में 351 युवाओं को मिली नौकरी! ऊर्जा मंत्री तोमर ने नियुक्ति पत्र देकर किया स्वागत

एमपी ट्रांसको ने 351 नए कार्मिकों को दी नियुक्ति : ऊर्जा मंत्री तोमर भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार ऊर्जा विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा विभिन्न श्रेणियों के पदों पर चयन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण कर प्रथम चरण में अब तक कुल 351 नए कार्मिकों को नियुक्तियां दी गई है। इनमें द्वितीय श्रेणी के 55 अधिकारी, तृतीय श्रेणी के 173 कर्मचारी तथा चतुर्थ श्रेणी के 123 कर्मचारी शामिल हैं। ऊर्जा मंत्री तोमर ने सभी नवनियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समर्पण, दक्षता और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा एवं प्रशिक्षित मानव संसाधन के जुड़ने से प्रदेश की ट्रांसमिशन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। चरणबद्ध तरीके से की जा रही है नियुक्तियां ऊर्जा मंत्री ने बताया कि कंपनी द्वारा ट्रांसमिशन तंत्र के प्रभावी संचालन, रखरखाव तथा विस्तार कार्यों को गति देने के लिए चरणबद्ध रूप से रिक्त पदों पर भर्ती की जा रही है। इन नियुक्तियों से कंपनी की तकनीकी एवं संचालन क्षमता को और मजबूती मिलेगी तथा प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत पारेषण व्यवस्था सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। नए कार्मिकों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण एमपी ट्रांसको के मुख्य अभियंता (मानव संसाधन एवं प्रशासन) धीरेंद्र सिंह ने बताया कि नियुक्त किए गए 351 कार्मिकों में 55 सहायक अभियंता, 166 कनिष्ठ अभियंता(पारेषण), 7 कनिष्ठ अभियंता (सिविल), 89 उपकेंद्र परिचारक, 24 सिविल परिचारक तथा 10 सर्वेयर परिचारक शामिल हैं। सभी नवनियुक्त कार्मिकों को आवश्यक तकनीकी एवं कार्यात्मक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।  

बिहार वाला फॉर्मूला यूपी में आजमाएगी BJP? तावड़े ने मिशन-2027 के लिए कसी कमर

   लखनऊ उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने सत्ता की हैट्रिक लगाने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया है. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और यूपी प्रभारी विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय लखनऊ दौरे के दौरान मिशन-2027 के लिए पार्टी के रणनीतिक खाके यानी ब्लूप्रिंट की नींव रखी. बिना किसी भारी तामझाम और सादगी के साथ लखनऊ पहुंचे तावड़े ने जीत की हैट्रिक लगाने के लिए संगठन को चुस्त-दुरुस्त करने से लेकर नैरेटिव सेट करने तक कई अहम दिशा-निर्देश दिए।  बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों को परखा. इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ दोनों उप-मुख्यमंत्रियों से मुलाकात और बातचीत भी की. इसके अलावा संगठन के लोगों के साथ मंथन कर सारा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है।  विनोद तावड़े ने पार्टी पदाधिकारियों को विधानसभा चुनाव 2027 के लिए टारगेट दिया. उन्होंने कहा कि हमें हर बूथ को मजबूत करना होगा, कोई बूथ छूटना नहीं चाहिए और उसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाएं. इसके साथ ही उन्होंने सभी जातियों को साधने का मंत्र भी दिया और कहा कि संख्या चाहे कम हो या ज्यादा, लेकिन कोई जाति छूट न जाए, हमें सबको जोड़ना होगा।  यूपी फतह का खाका खींच गए तावड़े बिहार चुनावों में एनडीए के चुनावी प्रबंधन और तालमेल के सफल फार्मूले को यूपी की जमीन पर उतारने का काम तावड़े ने शुरू कर दिया है. उत्तर प्रदेश के बीजेपी प्रभारी बनने के बाद पहली बार लखनऊ पहुंचे राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े ने 2027 का विधानसभा चुनाव मजबूत संगठन के बलबूते और पीएम मोदी व सीएम योगी के नाम और काम पर लड़ने के संकेत दिएच इस तरह सरकार और संगठन दोनों के साथ समन्वय बनाकर 2027 के चुनाव में उतरने का खाका खींच गए।  विनोद तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के बाद दिनभर पार्टी दफ्तर में क्षेत्रीय पदाधिकारियों से मुलाकात की. उन्होंने प्रदेश के महामंत्रियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों के साथ बैठक की. बीजेपी संगठन के नेताओं से मुलाकात के दौरान विनोद तावड़े ने साफ कहा कि बूथ की मजबूती ही 2027 के चुनाव की जीत का आधार बनेगी।  तावड़े ने पदाधिकारियों से कहा कि वे हर बूथ के अनुसार कार्ययोजना बनाएं. किस बूथ पर जीत की क्या स्थिति है, इसकी ठीक से समीक्षा करें. इसके अलावा जहां कमी नजर आए, उसे दुरुस्त करें. इस तरह हारी हुई बूथों को चिह्नित करते हुए वहां पार्टी को मजबूत करने के निर्देश भी दिए।  सपा के पीडीए का काउंटर प्लान तैयार अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड की काट के लिए तावड़े ने 'परफॉर्मेटिव नैरेटिव' पेश किया. उन्होंने सपा के पीडीए पर तंज कसते हुए इसे 'पराया धन अपना' करार दिया और जमीन पर अवैध कब्जे तथा महिला सुरक्षा (स्त्रीधन) जैसे मुद्दों को उठाकर सपा को घेरने का संकेत दिया. इसके साथ ही बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने का खाका भी खींचा।  तावड़े ने कहा कि हमें सभी वर्गों का साथ चाहिए, ऐसी कोई भी जाति न हो जो अछूती रह जाए. यूपी बड़ा प्रदेश है और हर क्षेत्र में अलग-अलग जातियों का प्रभाव है. यदि किसी जाति के वोटरों की संख्या कम है, तो भी हमें उसे छोड़ना नहीं है, उनसे संपर्क करके उन्हें पार्टी से जोड़ने का प्रयास करना है. इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष की तैयारी पर नजर रखकर अपनी रणनीति बनाने की नसीहत दी।  विपक्ष के प्रत्याशी का तोड़ तलाशने का टास्क बीजेपी प्रभारी ने कहा कि विपक्षी तैयारियों पर हमें पूरी नजर रखनी होगी. विपक्ष का कोई नेता या प्रत्याशी मजबूत है, तो उसकी मजबूती का आधार पता करना होगा और फिर उसी के अनुसार अपनी रणनीति तैयार करके मजबूत होना होगा. पार्टी सूत्रों का कहना है कि उन्होंने विपक्ष के मजबूत प्रत्याशियों पर खास नजर रखने और उनका तोड़ निकालने के लिए कहा है. इसका यह संदेश भी है कि यदि विपक्ष के मजबूत प्रत्याशी को अपने पाले में लाकर जीत मिलती है, तो आखिर में यह भी एक विकल्प हो सकता है।  बीजेपी संगठन को निर्देश दिए गए कि 2022 के चुनाव में गंवाई गई 57 सीटों और एनडीए की हारी हुई 130 सीटों की गहन समीक्षा की जाए और बूथ स्तर पर शक्ति केंद्रों में युवाओं को जोड़ा जाए. इस तरह से विनोद तावड़े 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता की हैट्रिक लगाने ही नहीं, बल्कि बिहार की तरह क्लीन स्वीप करने का प्लान बना रहे हैं।  वीआईपी कल्चर से दूरी बनाकर दिया संदेश बीजेपी के प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के बाद विनोद तावड़े ने उत्तर प्रदेश आने से पहले ही साफ कर दिया था कि उनके स्वागत की एक भी होर्डिंग शहर में नहीं लगनी चाहिए और न ही उनका नाम दिखाई देना चाहिए. ऐसे में जिन लोगों ने विनोद तावड़े के लिए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाए थे, उन्हें रातों-रात उन्हीं लोगों ने हटा लिया।  अब विनोद तावड़े ने नया मंत्र दिया और पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लखनऊ में समय बिताने के बजाय अपने-अपने आवंटित विधानसभा क्षेत्रों में जाएं, रात को वहीं प्रवास करें और स्वागत-सत्कार के चक्कर में न पड़ें. मार्च 2027 तक, यानी विधानसभा चुनाव होने तक सभी पदाधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गईं और चुनावी अभियानों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए।  संगठन-सरकार के साथ मजबूत समन्वय प्रदेश प्रभारी तावड़े ने भाजपा के सभी प्रदेश मोर्चों के अध्यक्षों से भी संवाद किया. इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि वे जल्द से जल्द अपनी कार्यसमिति बनाएं. सूत्रों के अनुसार हफ्तेभर के अंदर कार्यकारिणी गठित करने के लिए उन्होंने कहा है. यह भी कहा गया कि जब कार्यकारिणी गठित हो जाए, तो उन्हें आगे का टारगेट दिया जाएगा जिसे पूरा करने के लिए सभी को मिलकर जुटना होगा।  तावड़े ने रविवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की. सूत्रों के अनुसार उन्होंने सरकार के कामकाज की जानकारी ली और कल्याणकारी योजनाओं पर बात की. सरकार और संगठन में समन्वय के मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई।  सीएम के साथ बैठक में संगठन के सहयोग से सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने और विकास को मुद्दा बनाने पर सहमति बनी. इससे पहले उन्होंने शनिवार … Read more

सब्जी-चाय वालों पर मंडराया QR बंद होने का खतरा! 15 सितंबर तक Re-KYC जरूरी, लाखों छोटे कारोबारी परेशान

नई दिल्ली भारत में डिजिटल पेमेंट अब लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. चाय की दुकान हो, सब्जी मंडी हो या गली-मोहल्ले की किराना दुकान, हर जगह QR कोड के जरिए भुगतान आम बात है. लेकिन अब एक ऐसी डेडलाइन सामने आई है, जिसने लाखों छोटे कारोबारियों और उनके ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है।  RBI के नियमों के तहत मर्चेंट्स के लिए री-केवाईसी (Re-KYC) प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है. उद्योग जगत का कहना है कि अगर बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों का सत्यापन तय समय तक पूरा नहीं हो पाया, तो उनके QR कोड आधारित भुगतान प्रभावित हो सकते हैं।  क्या है पूरा मामला? रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार मर्चेंट्स को समय-समय पर अपनी KYC जानकारी अपडेट करनी होती है. मौजूदा समयसीमा के तहत 15 सितंबर तक री-केवाईसी पूरी करना जरूरी है. पेमेंट एग्रीगेटर और फिनटेक कंपनियों का कहना है कि लाखों छोटे कारोबारियों का सत्यापन अभी बाकी है. इसी वजह से इंडस्ट्री ने RBI से समयसीमा बढ़ाने की मांग भी की है।  आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है? अगर किसी दुकानदार की री-केवाईसी समय पर पूरी नहीं होती और उसका QR कोड प्रभावित होता है, तो ग्राहकों को भुगतान में परेशानी हो सकती है. मान लीजिए आप सब्जी खरीदने पहुंचे और दुकानदार का QR कोड काम नहीं कर रहा. ऐसी स्थिति में UPI से भुगतान संभव नहीं होगा. तब आपको नकद भुगतान करना पड़ सकता है या फिर सीधे बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने जैसे विकल्प अपनाने पड़ सकते हैं. हालांकि इसका असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होगा. एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं वाले इलाकों में परेशानी ज्यादा दिखाई दे सकती है।  कितने कारोबारी हो सकते हैं प्रभावित? इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक स्थिति चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है. करीब 30 से 35 फीसदी छोटे और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेता इस डेडलाइन से प्रभावित हो सकते हैं. वहीं लगभग 10 लाख छोटे कारोबारियों को जोखिम के दायरे में माना जा रहा है. इंडस्ट्री का अनुमान है कि तय समय तक करीब 80 फीसदी वेरिफिकेशन ही पूरा हो पाएगा. यही वजह है कि पेमेंट कंपनियां RBI से अतिरिक्त समय देने की मांग कर रही हैं।  क्या रुक जाएगा डिजिटल पेमेंट सिस्टम? इस पूरे मामले को लेकर सबसे जरूरी बात है कि इससे देश का डिजिटल पेमेंट सिस्टम बंद नहीं होने वाला है. भारत में हर महीने अरबों UPI ट्रांजैक्शन होते हैं और बड़े कारोबारियों के भुगतान सिस्टम सामान्य रूप से चलते रहेंगे. चिंता मुख्य रूप से उन छोटे व्यापारियों को लेकर है, जिनका कारोबार QR कोड आधारित भुगतान पर काफी हद तक निर्भर है. अगर ऐसे कारोबारियों के QR कोड प्रभावित होते हैं, तो उनकी बिक्री और ग्राहकों की सुविधा दोनों पर असर पड़ सकता है।  क्या ग्राहकों को कैश रखना चाहिए? फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. इंडस्ट्री लगातार समयसीमा बढ़ाने की मांग कर रही है और बाजार की नजर RBI के अगले कदम पर टिकी हुई है. हालांकि एहतियात के तौर पर अगर आप छोटे बाजारों, मंडियों या रेहड़ी-पटरी वाले इलाकों में खरीदारी करते हैं, तो कुछ नकद राशि साथ रखना उपयोगी हो सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि RBI 15 सितंबर की समयसीमा को बरकरार रखता है या फिर इंडस्ट्री को कुछ और राहत देता है. लाखों छोटे कारोबारियों की नजर फिलहाल इसी फैसले पर टिकी हुई है।