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बीजेपी का बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, 7 मोर्चों के प्रभारी नियुक्त; हरीश द्विवेदी और सतीश पूनिया को अहम जिम्मेदारी

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी ने संगठन के स्तर पर नए सात अलग-अलग मोर्चों के प्रभारियों को नियुक्त किया है. इसमें बस्ती सांसद हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चा को प्रभारी बनाया गया है. इसके अलावा राजस्थान के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया को एसटी मोर्चा को प्रभारी बनाया गया है. आंध्र प्रदेश में भाजपा की प्रदेश अध्‍यक्ष रहीं दग्गुबती पुरंदेश्वरी (डी. पुरंदेश्वरी) को महिला मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है।  बीजेपी के प्रभारियों का ऐलान     युवा मोर्चा- हरीश द्विवेदी     महिला मोर्चा- डी. पुरंदेश्वरी     एससी मोर्चा- संजय भाटिया     ओबीसी मोर्चा – वैजयंत पांडा     किसान मोर्चा – लाल सिंह आर्या      एसटी मोर्चा – सतीश पूनिया     अल्पसंख्यक मोर्चा- गजेंद्र पटेल एससी मोर्चा के प्रभारी बनाए गए संजय भाटिया हरियाणा से भाजपा के एक प्रमुख नेता हैं. वह वर्तमान में राज्यसभा के सदस्य हैं. भाजपा संगठन में राष्ट्रीय महामंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।  ओबीसी मोर्चा की प्रभारी बनाई गईं बैजयंत पांडा ओड़िशा में भाजपा की बड़ी नेता है. वह वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. ओडिशा की केंद्रपाड़ा सीट से लोकसभा जीतने वाली बैजयंत पांडा की ओडिशा विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में बड़ी भूमिका रही है।  किसान मोर्चा के प्रभारी बनाए गए लाल सिंह आर्य मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं. एमपी में उनकी गिनती भाजपा के एक बेहद वरिष्ठ, अनुभवी और प्रमुख दलित नेता के रूप में रही है. वह वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय प्रभारी भी रहे हैं।  सतीश पूनिया राजस्थान भाजपा के कद्दावर नेता हैं. वो राजस्थान में भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. हरियाणा विधानसभा चुनाव में बतौर प्रभारी उन्होंने भाजपा की जीत की हैट्रिक पूरी करवाई थी. पूनिया अभी राज्यसभा सांसद हैं. अब उन्हें एसटी मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। 

क्या नीम करोली बाबा हनुमान जी के अवतार थे? जानें भक्तों की आस्था और इसके पीछे की मान्यता

भारत में ऐसे कई संत हुए हैं, जिनका जीवन भक्तों के लिए आज भी रहस्य और आस्था का विषय बना हुआ है. इन्हीं में एक नाम है नीम करोली बाबा का, जिन्हें उनके अनुयायी प्यार से महाराज जी भी कहते हैं. नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम आज उनकी भक्ति और आध्यात्मिक परंपरा का बड़ा केंद्र माना जाता है. बाबा की सबसे खास पहचान भगवान हनुमान के प्रति उनकी गहरी आस्था से जुड़ी रही थी. यही वजह है कि उनके भक्तों का एक वर्ग उन्हें सिर्फ हनुमान जी का भक्त नहीं, बल्कि बजरंगबली का अंश या अवतार तक मानता है. आखिर बाबा के जीवन में ऐसा क्या था, जिसकी वजह से यह विश्वास इतना गहरा हुआ? उनकी कौन-सी बातें भक्तों को हनुमान जी की याद दिलाती हैं? आइए जानते हैं इस मान्यता के पीछे की कहानी. हनुमान भक्ति में डूबा था बाबा का जीवन नीम करोली बाबा का जीवन राम नाम और हनुमान भक्ति से गहराई से जुड़ा बताया जाता है. उनके आश्रमों में हनुमान जी की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता रहा है. बाबा से जुड़ी परंपरा में भगवान का नाम लेने, सेवा करने और जरूरतमंदों की मदद करने पर जोर मिलता है. भक्तों के अनुसार, बाबा लोगों को दिखावे से दूर रहकर भगवान का स्मरण करने और दूसरों की सेवा करने की प्रेरणा देते थे. यही वजह है कि उनके अनुयायियों को बाबा की साधना में हनुमान जी के गुणों की झलक दिखाई देती थी. हनुमान जी को भी भगवान राम के प्रति पूर्ण समर्पण, सेवा और विनम्रता के लिए जाना जाता है. फिर क्यों कहा जाने लगा हनुमान जी का अंश? नीम करोली बाबा को हनुमान जी का अंश मानने की धारणा किसी प्रमाणित ऐतिहासिक दस्तावेज से नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था और उनसे जुड़ी कथाओं से बनी है. बाबा के अनुयायी उनके जीवन में घटित कई घटनाओं को उनकी आध्यात्मिक शक्ति से जोड़कर देखते हैं. एक खास बात यह भी बताई जाती है कि बाबा खुद को भगवान के रूप में स्थापित करने के बजाय लोगों को हनुमान जी और राम नाम की ओर प्रेरित करते थे. भक्तों के लिए यही भाव बहुत महत्वपूर्ण था. उन्हें लगता था कि बाबा का जीवन स्वयं से ज्यादा अपने आराध्य के प्रति समर्पण का उदाहरण है. इसी कारण समय के साथ उनके अनुयायियों के बीच यह विश्वास मजबूत होता गया कि बाबा पर हनुमान जी की विशेष कृपा थी और वे बजरंगबली के अंश थे. कैंची धाम में आज भी दिखती है हनुमान भक्ति उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम का नाम नीम करोली बाबा के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है. पहाड़ों के बीच स्थित यह स्थान आज देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है. कैंची धाम में हनुमान जी का मंदिर भी है. यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु बाबा की स्मृति के साथ भगवान हनुमान की पूजा करते हैं. आश्रम से जुड़ी परंपराओं में राम नाम और हनुमान भक्ति को विशेष महत्व दिया जाता है. इसलिए कई भक्तों के लिए बाबा और हनुमान जी की भक्ति एक-दूसरे से जुड़ी हुई है. बाबा से जुड़े चमत्कारों की भी कई कहानियां नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़ी कई चमत्कारिक कथाएं आज भी भक्तों के बीच सुनाई जाती हैं. इनमें संकट में पड़े लोगों की सहायता, किसी भक्त की परेशानी का समाधान और बाबा के दूर बैठे व्यक्ति की स्थिति जान लेने जैसी कहानियां शामिल हैं. हालांकि, इन घटनाओं की स्वतंत्र ऐतिहासिक या वैज्ञानिक पुष्टि हर मामले में उपलब्ध नहीं है. इसलिए इन्हें प्रमाणित तथ्य के बजाय भक्तों के अनुभव और धार्मिक मान्यता के तौर पर देखना उचित है. आस्था रखने वाले लोगों के लिए हालांकि इन कथाओं का महत्व काफी गहरा है. क्या सच में हनुमान जी के अवतार थे नीम करोली बाबा? यह सवाल आस्था और इतिहास, दोनों के नजरिए से अलग-अलग तरीके से देखा जा सकता है. भक्तों का विश्वास है कि नीम करोली बाबा हनुमान जी के अंश या अवतार थे. वे बाबा के जीवन, उनकी हनुमान भक्ति और उनसे जुड़ी घटनाओं को इसका आधार मानते हैं. वहीं, ऐतिहासिक दृष्टि से ऐसा कोई प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, जिससे यह निश्चित रूप से साबित किया जा सके कि बाबा हनुमान जी के अवतार थे. इसलिए इसे भक्तों की धार्मिक आस्था और मान्यता के रूप में ही समझना उचित है. आज भी कैंची धाम क्यों खींचे चले आते हैं भक्त? नीम करोली बाबा के शरीर छोड़ने के दशकों बाद भी उनके प्रति भक्तों की आस्था कम नहीं हुई है. कैंची धाम में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं. कई भक्त यहां बाबा का स्मरण करने के साथ हनुमान जी की पूजा और राम नाम का जाप करते हैं. लोगों का विश्वास है कि बाबा की शिक्षाएं उन्हें कठिन समय में धैर्य रखने और जीवन में सेवा, प्रेम तथा भक्ति का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती हैं.

टाइगर रिजर्व में बढ़े टिकट के दाम, विदेशी पर्यटकों को अब देने होंगे 1000 रुपये

लखनऊ यूपी में पयर्टकों को पीलीभीत टाइगर रिजर्व में घूमने के लिए अब ज्यादा रुपए देने पड़ेंगे। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में अब सैलानियों को सप्ताह के अंत में यानी शनिवार और रविवार को घूमना महंगा पड़ेगा। अभी तक शनिवार और रविवार को 150 रुपये प्रति व्यक्ति टिकट का देना होता था और अब इसे बढ़ाकर 200 रुपये प्रति व्यक्ति कर दिया है। अन्य दिनों में पहले की ही तरह 120 रुपये का टिकट लेना होगा। वहीं विदेशी सैलानियों को अब 800 रुपये की बजाए 1000 रुपये देने होंगे। वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में हुई पीलीभीत बाघ संरक्षण फाउंडेशन के शासी निकाय की बैठक में फाउंडेशन के कार्यों की समीक्षा के साथ पर्यटन सत्र 2026-27 की इन प्रस्तावित दरों और विभिन्न विकास कार्यों को स्वीकृति दे दी गई। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के लिए 1.96 करोड़ का बजट मंजूर कर दिया गया है। बैठक में ईको टूरिज्म को विकसित करने पर सर्वाधिक जोर दिया गया। साथ ही नए पर्यटन सत्र को लेकर आवश्यक चर्चा की गई। घटनाओं की रोकथाम के लिए किए गए प्रयासों की प्रशंसा प्रमुख सचिव वन, प्रधान मुख्य संरक्षक समेत नामित कार्यकारिणी के सदस्यों ने भी अहम मुद्दों पर अपने तर्क रखे। बैठक में वन मंत्री ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व व उसके आसपास के क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की रोकथाम के लिए किए गए प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित ग्रामीणों और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशीलता बरतने के साथ ही सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है। बाघ संरक्षण फाउंडेशन से होने वाले कार्यों की योजनाओं को रखा गया। जंगल में पर्यावरण के सरंक्षण से लेकर पर्यटन को बढ़ावा देने तक के लिए कई स्तर पर चर्चा की गई। वन व वन्यजीव संरक्षण के मानकों को सख्ती से लागू किया जाने पर जोर पीलीभीत टाइगर रिजर्व में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पर्यटकों को पर्यावरण मित्र की सुविधाएं अधिक से अधिक दी जाएंगी। यही नहीं पर्यटन के विस्तार के साथ वन व वन्यजीव संरक्षण के मानकों को सख्ती से लागू किया जाने पर जोर दिया गया। बैठक में प्रमुख सचिव, वन वी. हेकाली झिमोमी ने कहा कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व फाउंडेशन की आय के साधन बढ़ाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। स्वैच्छिक दानदाताओं को फाउंडेशन में योगदान को प्रेरित किया जा रहा है। बैठक में वन राज्य मंत्री केपी मलिक और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष सुनील चौधरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।  

पिठोरी अमावस्या की अनोखी कथा: सात बेटों की मौत के बाद ऐसे मिला मां को संतान सुख

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण, स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए खास माना जाता है. लेकिन, भाद्रपद महीने की अमावस्या का महत्व इससे भी अलग है. इसे पिठोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है. कई जगह इसे पिठौरा, पोला या पोलाला अमावस्या भी कहा जाता है. इस दिन खासतौर पर महिलाएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति की कामना से व्रत रखती हैं. पिठोरी अमावस्या से जुड़ी एक ऐसी कथा भी प्रचलित है, जिसमें एक मां को बार-बार अपनी संतान को खोने का दुख झेलना पड़ा. एक के बाद एक उसके सातों पुत्रों की मृत्यु हो गई. जब मां ने देवी की शरण ली तो उसकी पूरी जिंदगी ही बदल गई. आखिर क्या हुआ था उस मां के साथ और कैसे उसके मृत पुत्रों को जीवन मिला, आइए जानते हैं पिठोरी अमावस्या की पूरी व्रत कथा. पिठोरी अमावस्या की प्रचलित कथा बहुत समय पहले एक गांव में सात भाई रहते थे. सभी भाइयों का विवाह हो चुका था और उनके घर में बच्चे भी थे. परिवार की महिलाएं संतान के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना से पिठोरी अमावस्या का व्रत करती थीं. कथा के अनुसार, बड़े भाई की पत्नी ने जब पहली बार यह व्रत रखा तो उसके पुत्र की मृत्यु हो गई. मां के लिए यह किसी पहाड़ टूटने से कम नहीं था. लेकिन अगले वर्ष भी परिवार पर ऐसा ही दुख आया और उसकी एक और संतान की मृत्यु हो गई. समय बीतता गया, लेकिन हर साल अमावस्या के आसपास उस मां के घर मातम छा जाता. सातवें साल तक उसके सातों पुत्रों की मृत्यु हो चुकी थी. वह अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी, लेकिन उसने उम्मीद नहीं छोड़ी. कहा जाता है कि एक दिन गांव की कुलदेवी ने उस दुखी महिला को देखा. देवी ने उससे उसके दुख का कारण पूछा. महिला ने रोते हुए अपनी पूरी कहानी देवी को बता दी. उसने बताया कि कैसे उसकी संतानें एक-एक करके उससे दूर होती चली गईं और अब उसके पास कुछ भी नहीं बचा है. मां की पीड़ा सुनकर देवी का हृदय द्रवित हो गया. उन्होंने उसे एक उपाय बताया और उन स्थानों पर हल्दी छिड़कने के लिए कहा, जहां उसके मृत पुत्रों का अंतिम संस्कार किया गया था. महिला ने देवी के बताए अनुसार वही किया. उसने उन सभी स्थानों पर हल्दी छिड़की और देवी का स्मरण किया. इसके बाद जब वह अपने घर लौटी तो वहां का दृश्य देखकर उसके होश उड़ गए. कथा के अनुसार, उसके सातों पुत्र जीवित अवस्था में उसके सामने खड़े थे. अपने बच्चों को दोबारा जीवित देखकर मां की आंखों से आंसू निकल पड़े. उसके लिए इससे बड़ा चमत्कार और कोई नहीं हो सकता था. कहा जाता है कि इसी घटना के बाद महिलाओं के बीच पिठोरी अमावस्या का व्रत संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से करने की परंपरा मजबूत हुई. पिठोरी अमावस्या पर 64 योगिनियों की पूजा पिठोरी अमावस्या की पूजा में 64 योगिनियों का विशेष महत्व बताया जाता है. पारंपरिक विधि में आटे या गोबर से देवी-देवताओं और योगिनियों के प्रतीक बनाए जाते हैं. इसके साथ सप्त मातृकाओं का भी पूजन किया जाता है. अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और परंपराओं में अंतर देखने को मिलता है. पूजा के दौरान हल्दी, कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं. देवी को पकवानों का भोग लगाने के बाद आरती की जाती है. इसके बाद पिठोरी अमावस्या की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है.

घर पर बनाएं एलोवेरा हर्बल साबुन, चेहरे को मिलेगा नेचुरल निखार

साबुन का इस्तेमाल हर घर में रोज ही होता है. खासकर चेहरे धोने के लिए हम साबुन को दिन में 2 बार तो जरूर यूज करते हैं लेकिन बाजार में मिलने वाले ज्यादातर साबुनों में कठोर केमिकल्स, सल्फेट और आर्टिफिशियल खुशबू होती है जो त्वचा की प्राकृतिक नमी को छीनकर उसे रूखा और बेजान बना देते हैं. ऐसे में क्या हो अगर आप घर पर ही अपने फेस के लिए नेचुरल साबुन तैयार कर लें. जी हां बिना किसी केमिकल के अपनी त्वचा को साफ, मुलायम और चमकदार बनाना चाहते हैं तो घर पर ताजे एलोवेरा से बना हर्बल साबुन एक बेहतरीन विकल्प है. एलोवेरा में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और नमी देने वाले गुण त्वचा को गहराई से पोषण देते हैं, दाग-धब्बों को हल्का करते हैं और चेहरे पर एक प्राकृतिक और दूधिया निखार लाते हैं. यहां हम आपको ये साबुन बनाने का आसान तरीका बता रहे हैं. होममेड एलोवेरा साबुन के लिए आपको चाहिए होंगी ये चीजें ताजी एलोवेरा की पत्ती का जेल – 1/2 कप सोप बेस (ग्लिसरीन या गोट मिल्क सोप बेस) – 200 ग्राम विटामिन E कैप्सूल – 2 गुलाब जल – 1 बड़ा चम्मच बादाम का तेल या नारियल तेल – 1 छोटा चम्मच सिलिकॉन सोप मोल्ड (साबुन जमाने का सांचा) बनाने की विधि एलोवेरा जेल तैयार करें: ताजे एलोवेरा के पत्ते से चम्मच की मदद से जेल निकालें और इसे मिक्सी में पीसकर स्मूथ पेस्ट बना लें. सोप बेस पिघलाएं: सोप बेस को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. अब एक बर्तन में पानी उबालें और उस पर दूसरा बर्तन रखकर (डबल बॉयलर मेथड) सोप बेस को पूरी तरह पिघला लें. सामग्री मिलाएं: पिघले हुए सोप बेस में पिसा हुआ एलोवेरा जेल, विटामिन E का तेल, गुलाब जल और बादाम का तेल डालकर अच्छी तरह मिलाएं. मोल्ड में ढालें: तैयार मिश्रण को सिलिकॉन सोप मोल्ड में डालें. (अगर मोल्ड न हो तो किसी प्लास्टिक के छोटे डिब्बे में हल्का तेल लगाकर इस्तेमाल कर सकते हैं). सेट होने दें: साबुन को 2 से 3 घंटे के लिए सामान्य तापमान पर ठंडा होने दें या 30 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें. साबुन के सख्त होने पर इसे मोल्ड से बाहर निकालें. आपका 100% नेचुरल एलोवेरा हर्बल सोप इस्तेमाल के लिए तैयार है.

10 सितंबर से वक्री होंगे अरुण ग्रह, इन 3 राशियों के करियर और कारोबार में आ सकते हैं बड़े बदलाव

ग्रहों की चाल में होने वाला छोटा सा बदलाव भी ज्योतिष में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. सितंबर के दूसरे सप्ताह में एक ऐसा ही बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है. आज अरुण ग्रह यानी यूरेनस वक्री अवस्था में आ जाएंगे. ज्योतिष में अरुण यानी यूरेनस को अचानक बदलाव, नई सोच, तकनीक, रिसर्च और अप्रत्याशित अवसरों से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में इसकी वक्री चाल कुछ राशियों के लिए पुराने कामों को नए तरीके से शुरू करने और करियर में नई दिशा पाने का मौका दे सकती है. यह स्थिति 8 फरवरी 2027 तक रहने की बात कही जा रही है. खास बात यह है कि इस ग्रह परिवर्तन का असर सभी राशियों पर एक जैसा नहीं माना जाता. कुछ राशियों को नौकरी और कारोबार में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं, तो कुछ लोगों के लिए रुके हुए काम दोबारा गति पकड़ सकते हैं. आइए जानते हैं वे कौन सी 3 राशियां हैं, जिनके लिए अरुण की वक्री चाल फायदेमंद रह सकती है. अरुण ग्रह की वक्री चाल कब से शुरू होगी? 10 सितंबर 2026 को अरुण ग्रह वक्री होंगे और फरवरी 2027 की शुरुआत तक यह स्थिति बनी रहने की बात कही गई है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वक्री अवस्था में ग्रह से जुड़े विषयों पर दोबारा विचार करने, पुराने फैसलों की समीक्षा करने और अटके हुए काम को नए तरीके से आगे बढ़ाने का समय माना जाता है. अरुण ग्रह को खासतौर पर बदलाव और आधुनिक सोच से जोड़ा जाता है. इसलिए इस दौरान तकनीक, डिजिटल काम, नए बिजनेस मॉडल, इनोवेशन और अलग तरीके से काम करने वाले लोगों को नए अवसर मिलने की संभावना जताई जाती है. मेष राशि अरुण की वक्री चाल मेष राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से कुछ नए रास्ते खोल सकती है. लंबे समय से जिस काम या प्रोजेक्ट में रुकावट आ रही थी, उसमें दोबारा प्रगति देखने को मिल सकती है. नौकरी करने वाले लोगों को कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी या ऐसा काम मिल सकता है, जिसमें उनकी क्षमता खुलकर सामने आए. जो लोग नौकरी बदलने का मन बना रहे हैं, उन्हें इस अवधि में अचानक कोई अच्छा विकल्प मिल सकता है. हालांकि सिर्फ आकर्षक प्रस्ताव देखकर तुरंत फैसला करने के बजाय उससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच करना बेहतर रहेगा. बिजनेस करने वालों के लिए भी समय उपयोगी हो सकता है. पुराने क्लाइंट, पुराने संपर्क या पहले अधूरी रह गई कारोबारी योजना दोबारा चर्चा में आ सकती है. अगर किसी नए आइडिया पर काफी समय से काम करने का विचार है, तो उसे व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने का मौका मिल सकता है. सिंह राशि सिंह राशि के लोगों के लिए अरुण की यह वक्री चाल कामकाज और आय के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है. नौकरी में आपकी कार्यशैली या जिम्मेदारियों में बदलाव देखने को मिल सकता है. शुरुआत में यह बदलाव थोड़ा अचानक लग सकता है, लेकिन आगे चलकर इससे फायदा मिलने की संभावना बन सकती है. कारोबार करने वाले लोगों को नई तकनीक या नए तरीके से काम करने का लाभ मिल सकता है. डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन काम, मार्केटिंग या नए बिजनेस आइडिया से जुड़े लोगों के लिए यह समय खास हो सकता है. धन के मामले में भी नए स्रोतों पर विचार करने का मौका मिलेगा. अगर आमदनी का कोई अतिरिक्त जरिया शुरू करने की योजना लंबे समय से मन में है, तो उस पर गंभीरता से काम किया जा सकता है. हालांकि खर्च और निवेश के मामलों में जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा. कन्या राशि कन्या राशि के जातकों के लिए अरुण की वक्री चाल आर्थिक और भाग्य से जुड़े मामलों में बदलाव का संकेत दे सकती है. इस दौरान विदेश से जुड़े काम, उच्च शिक्षा, यात्रा या नए लोगों से संपर्क के जरिए अवसर मिलने की संभावना जताई जाती है. नौकरी करने वालों के लिए यह समय नई जिम्मेदारी या किसी नए प्रोजेक्ट से जुड़ने का हो सकता है. अगर आप लंबे समय से किसी बेहतर अवसर की तलाश कर रहे हैं, तो अचानक कोई ऐसा प्रस्ताव सामने आ सकता है जिसकी आपने उम्मीद नहीं की थी. आर्थिक मोर्चे पर भी स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है. निवेश या पुराने आर्थिक फैसलों की समीक्षा करना फायदेमंद रहेगा. हालांकि किसी भी निवेश में केवल ज्योतिषीय अनुमान के आधार पर फैसला लेने के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति और विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है. किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए? अरुण की वक्री चाल के दौरान अचानक बदलाव की स्थिति बन सकती है. इसलिए नौकरी बदलने, बड़ा निवेश करने, बिजनेस पार्टनर बदलने या किसी पुराने समझौते को खत्म करने जैसे फैसलों में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. जो अवसर सामने आएं, उनका अच्छी तरह आकलन करने के बाद ही कदम उठाना बेहतर रहेगा.

पाकिस्तान के खिलाफ भारत की रिकॉर्डतोड़ जीत, जूनियर महिला हॉकी टीम ने 19 गोल दागे

नई दिल्ली विमेंस हॉकी जूनियर एशिया कप 2026 में भारतीय टीम का शानदार प्रदर्शन जारी है. गुरुवार (10 सितंबर) को चीन के मोकी में आयोजित क्वार्टर फाइनल में भारतीय टीम ने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 19-0 से हराया. भारतीय टीम के लिए पूजा मलिक ने सबसे ज्यादा तीन गोल (27वें, 49वें और 51वें मिनट) किए. वहीं चंद्रकांत सानिका माने (13वें और 23वें मिनट), मधु सिदार (16वें और 39वें मिनट), सुप्रिया (40वें और 54वें मिनट) और ऐंद रोशनी (9वें और 60वें मिनट) ने दो-दो गोल दागे. पूजा साहू (7वें मिनट), दिनेश तुनश्री काडू (11वें मिनट), सुखवीर कौर (13वें मिनट), गीता यादव (18वें मिनट), तनुजा टोप्पो (25वें मिनट), पूर्णिमा यादव (33वें मिनट), कृष्णा शर्मा (48वें मिनट) और बिनिमा धन (55वें मिनट) भी एक-एक गोल करने में सफल रहीं. सेमीफाइनल में भारत का सामना मलेशिया और कोरिया के बीच होने वाले चौथे क्वार्टरफाइनल के विजेता से होगा. सेमीफाइनल मुकाबले 12 सितंबर को खेले जाने हैं. इस मुकाबले में भारत का दबदबा पूरी तरह रहा और पाकिस्तानी खिलाड़ी कुछ नहीं कर पाईं. शुरुआती दो क्वार्टर में भारत ने कुल 10 गोल दागे. यानी हाफटाइम तक भारत 10-0 से आगे रहा. फिर तीसरे क्वार्टर में पाकिस्तान को थोड़ी राहत मिली, जहां भारत ने सिर्फ 3 गोल किए. आखिरी क्वार्टर भारत के लिए फिर दमदार रहा और छह गोल दागे गए. सात गोल भारत के पेनल्टी कॉर्नर से आए, जबकि दो गोल पेनल्टी स्ट्रोक पर हुए. बाकी के 11 गोल जो भारत ने किए, वो फील़्ड गोल रहे. भारत ने दो बार जीता है खिताब भारत और चीन ने एलीट पूल चरण का अंत 10-10 अंकों के साथ किया. हालांकि, बेहतर गोल अंतर के कारण भारत एलीट पूल में शीर्ष स्थान पर रहा. भारत ने जापान, कोरिया और मलेशिया के खिलाफ मुकाबले जीते, जबकि चीन से ड्रॉ खेला. पाकिस्तानी टीम की बात करें तो उसने चैलेंजर पूल में चार मैच खेलकर सात अंक हासिल किए थे और तीसरा स्थान प्राप्त किया था. चैलेंजर पूल में बांग्लादेश पहले और कजाखस्तान दूसरे नंबर पर रहा था. विमेंस हॉकी जूनियर एशिया कप का ये 10वां संस्करण है. भारतीय टीम डिफेंडिंग चैम्पियन है. 2024 में मस्कट में आयोजित प्रतियोगिता में भारत ने चीन को हराकर लगातार दूसरी बार खिताबी जीत हासिल की थी. साउथ कोरिया इस टूर्नामेंट की सबसे सफल टीम है. उसने चार बार (1992, 1996, 2000 और 2008) खिताब जीते. जबकि चीन ने 3 बार (2004, 2012, 2015) खिताबी जीत दर्ज की.

पोला पर्व पर छत्तीसगढ़ में खास आयोजन, CM विष्णुदेव साय होंगे शामिल

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज पोला पर्व के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री दोपहर 2.30 बजे रायपुर से दुर्ग के लिए रवाना होंगे। दोपहर 3 बजे ग्राम मडियापार में आयोजित पोरा महोत्सव-2026 में शामिल होंगे। कार्यक्रम के बाद 3.45 बजे भिलाई के रिसाली सेक्टर के लिए रवाना होंगे। यहां मुख्यमंत्री शाम 4.30 बजे दशहरा मैदान में आयोजित पोला उत्सव कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री शाम 5.45 बजे तक रायपुर लौटेंगे। सक्ती में होगा ग्रामीण विकास का बड़ा आयोजन रायपुर। सक्ती जिले के ग्राम जेठा में 11 सितंबर को ग्रामीण विकास को लेकर बड़ा आयोजन होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि होंगे, जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 2 लाख परिवारों को पक्के घर की सौगात देते हुए गृह प्रवेश कराया जाएगा। साथ ही आवास योजना में एआई आधारित जियो-टैग सत्यापन प्रणाली की शुरुआत होगी। इस दौरान नदियों और जलधाराओं के पुनर्जीवन के लिए ‘धार अपार अभियान’ शुरू किया जाएगा। ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए 270 नए इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर भी शुरू होंगे। कार्यक्रम में लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और रानी मिस्त्री को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा उत्कृष्ट कार्य करने वाली 5 पंचायतों के प्रतिनिधियों का भी सम्मान होगा। कार्यक्रम के दौरान 122 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले 39 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन-शिलान्यास किया जाएगा। आयोजन में प्रदेश सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और पंचायत प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण मौजूद रहेंगे।

126 गेंदों में 150 रन, हरमन ने डेब्यू पर ब्रीत्ज़के के रिकॉर्ड की बराबरी की

नई दिल्ली जब सामने कोई टीम कमजोर होती है, तो कुछ ऐसा ही होता है, लेकिन 'ताकतवर' का कोई बल्लेबाज करियर का पहला ही मैच हो तो फिर श्रेय बनता ही है. और दक्षिण अफ्रीका के लिए बुधवार को वनडे करियर का आगाज करने वाले 24 साल के जॉर्डन हरमन को श्रेय दिया जाना तो एकदम बनता है. वैसे भी लोग श्रेय दें य न दें, हरमन ने कागजों पर तो इतिहास पलट ही दिया है. हरमन ने बुधवार को नामीबियाई धरती पर ही मेजबान टीम के खिलाफ अपने पहले ही वनडे मैच में 150 रन की पारी खेलकर इतिहास रच दिया. हरमन ने 126 गेंदों पर 17 चौकों और 3 छक्कों से 150 रन बनाए. और इसी के साथ ही हरमन वनडे के 51 साल के इतिहास में पहले ही वनडे में सबसे बड़ा स्कोर बनाने वाले संयुक्त रूप से पहले और दक्षिण अफ्रीका के दूसरे बल्लेबाज बने गए. हरमन सिर्फ 1 रन से चूक गए. अगर वह एक और बना लेते हैं, तो वह इस मामले में 'किंग' बन गए होते, लेकिन यह जीवन में एक बार मिलने वाला मौका उनके हाथ से निकल गया. पहले ही वनडे में टॉप स्कोर जब बात वनडे करियर के पहले ही मैच में सर्वश्रेष्ठ स्कोर करने की आती है, तो इसमें दक्षिण अफ्रीका के दो बल्लेबाज हैं. हरमन के अलावा एक और दक्षिण अफ्रीकी मैथ्यू पॉल ब्रीट्जे एक बल्लेबाज रहे, जिन्होंने पिछले साल पाकिस्तान के खिलाफ लाहौर में 150 रन बनाए थे. चलिए आप इस मामले में टॉप-5 बल्लेबाजों के बारे में  जान लें:- टॉप 10 में एक भी भारतीय नहीं वैसे जहां भारतीयों के नाम एक से बड़े एक रिकॉर्ड हैं, लेकिन इस मामले में भारत का एक भी बल्लेबाज टॉप 10 में शामिल नहीं है. वास्तव में सच यह है कि इस मामले में भारतीय नंबर-20 पर आता है. और यह केएल राहुल हैं, जिन्होंने साल 2016 में जिंबाब्वे के खिलाफ अपने पहले ही मैच में हरारे में 100 रन की पारी खेली थी. और केएल राहुल इकलौते ऐसे भारतीय बल्लेबाज हैं, जिन्होंने वनडे इतिहास में अपने पहले ही मैच में शतक बनाए हैं.   

न्यायमूर्ति कोगजे ने संभाली MP हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति की कमान, बने 30वें चीफ जस्टिस

राज्यपाल पटेल ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति को दिलाई शपथ न्यायमूर्ति कोगजे मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के बने 30वें मुख्य न्यायाधिपति भोपाल  राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे ने मध्य प्रदेश के 30 वें मुख्य न्यायाधीपति की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन गुरूवार को लोकभवन के सांदीपनि सभागार में किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे। राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शपथ ग्रहण के बाद नव नियुक्त मुख्य न्यायाधिपति कोगजे को पुष्प-गुच्छ भेंट कर बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने शपथ ग्रहण समारोह का संचालन किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे को नियुक्त किए जाने की अधिसूचना का वाचन किया। समारोह का प्रारंभ और समापन राष्‍ट्रीय गीत वंदे मातरम् तथा राष्‍ट्र गान जन-गण-मन के गायन के साथ हुआ। शपथ ग्रहण समारोह में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्‍द्र सिंह तोमर, उप मुख्‍यमंत्री द्वय जगदीश देवड़ा और राजेन्द्र शुक्‍ल, कौशल विकास एवं रोजगार राज्‍यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्‍यक्ष अवधेश प्रताप सिंह, पूर्व राज्‍यपाल कप्‍तान सिंह सोलंकी, न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया, न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर, न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट, न्यायमूर्ति विनय सराफ, न्यायमूर्ति रमेश फड़के, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, अपर मुख्‍य सचिव डॉ. शिवशेखर शुक्‍ला और संजय शुक्‍ल, राज्‍यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, विधायक, सांसद मध्‍यप्रदेश, गुजरात और उत्तरप्रदेश राज्‍य के उच्‍च न्‍यायालयों के न्‍यायमूर्तिगण, वरिष्‍ठ प्रशासनिक, न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और आयोगों के पदाधिकारी मौजूद थे।