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सिंहस्थ 2028 की तैयारी में बड़ा फैसला, उज्जैन की पुरानी मस्जिद हटाने पर हाईकोर्ट ने राहत से किया इनकार

 इंदौर  उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व 2028 की तैयारियों के तहत सड़कों के चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है। कंठाल से बड़े गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण की जद में आ रही करीब 100 साल पुरानी शाही मस्जिद को हटाने के खिलाफ दायर दोनों याचिकाओं को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने बुधवार को खारिज कर दिया। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने दोनों मामलों की एक साथ सुनवाई की और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाएं निरस्त कर दीं।  उज्जैन की 100 साल पुरानी शाही मस्जिद के तोड़ने पर फिलहाल कोई रोक नहीं है। सिंहस्थ 2028 के तहत किए जा रहे सड़क चौड़ीकरण के दायरे में यह मस्जिद भी आ रही है।उज्जैन नगर निगम ने इसे हटाने के लिए नोटिस दिया था जिसे चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका प्रस्तुत हुई थी। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निगम की कार्रवाई पर किसी तरह की रोक लगाने से इंकार करते हुए याचिका निराकृत कर दी। हाई कोर्ट में प्रस्तुत इन याचिकाओं में मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, भवन अधिकारी और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था। उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव ने याचिका निरस्त करने और कार्रवाई पर किसी तरह का स्टे नहीं दिए जाने की पुष्टि की है। मस्जिद पक्ष की ओर से प्रस्तुत याचिका में नगर निगम के भवन अधिकारी द्वारा जारी सूचना पत्र को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई गई थी। कहा था कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी और मुगलकालीन मस्जिद है। क्या है वजह प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। याचिकाकर्ताओं की ओर से मस्जिद को 100 वर्ष से अधिक पुराना और ऐतिहासिक बताया गया। पंचायत ने पुराने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट और ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें कुछ भूमि के अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख होने का दावा किया गया है। पहली याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान के प्रतिनिधि अशफाक अहमद और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी वक्फ पंच मोचियान के प्रतिनिधि और वाइस चेयरमैन अशफाक अहमद की ओर से दायर की गई थी। इसमें मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, बिल्डिंग ऑफिसर और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था। दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के प्रेसीडेंट अशान हुसैन की अपर से लगाई गई थी। इसमें मप्र दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान के प्रेसीडेंट अरशान हुसैन की ओर से लगाई गई थी। इसमें मप्र शासन, उज्जैन नगर निगम और मप्र वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सैय्यद अशहर अली वारसी ने कहा कि अभी विस्तृत लिखित आदेश आना बाकी है। याचिकाएं खारिज की गई हैं, लेकिन आदेश का अध्ययन करने के बाद फैसले के खिलाफ डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मस्जिद ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की है, इसलिए इसे हटाया नहीं जाना चाहिए।मस्जिद प्रबंधन ने पुराने दस्तावेजों का हवाला दिया था। प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। गोपाल मंदिर मार्ग शहर के व्यस्त और संकरे रास्तों में शामिल है। सिंहस्थ के दौरान यातायात को सुचारू रखने और भीड़ का दबाव कम करने के लिए इस मार्ग का चौड़ीकरण जरूरी माना जा रहा है। नगर निगम का कहना है कि कार्रवाई मास्टर प्लान और निर्धारित नियमों के तहत की जा रही है। अनवर कादरी की पार्षदी खत्म करने का मामला पहुंचा हाई कोर्ट, दायर हुई याचिका इंदौर :नगर निगम वार्ड 58 से पार्षद रहे अनवर कादरी की पार्षदी समाप्त करने के मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई है। याचिका कादरी की पत्नी ने दायर की है।याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने शासन से कहा कि वह दो दिन में स्पष्ट करे कि कादरी की ओर से की गई अपील की क्या स्थिति है। एडवोकेट विभोर खंडेलवाल के मुताबिक कादरी की पार्षदी खत्म करने के संभागायुक्त के निर्णय को प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन के समक्ष चुनौती देते हुए अपील दायर की गई थी जो अब भी लंबित है। अपील लंबित रहने के दौरान प्रमुख सचिव ने निर्वाचन आयोग से चुनाव के लिए अनुशंसा कर दी। इसी को चुनौती देते हुए याचिका प्रस्तुत हुई है। बुधवार को हुई सुनवाई में शासन कोर्ट को बताया कि फिलहाल वार्ड में चुनाव स्थगित कर दिए हैं। इस पर कादरी के वकील ने सवाल उठाया कि अपील लंबित है तो फिर ऐसी स्थिति में चुनाव कराए कैसे जा सकते हैं। इस पर कोर्ट ने अपील की स्थिति के बारे में पूछा जिस पर सरकारी वकील ने जानकारी लेने की बात कही। इस पर कोर्ट ने शासन को दो दिन का समय दिया है। शासन को बताना है कि कादरी की ओर से दायर अपील की क्या स्थिति है। मामले में अब 11 सितंबर को सुनवाई होगी। शाही मस्जिद 100 वर्ष पुरानी, ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध याचिकाओं में मस्जिद कमेटी ने उज्जैन नगर निगम के नोटिस को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रबंधन का दावा है कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी है और इससे जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्पूवमेंट ट्रस्ट और ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें भूमि अधिग्रहण के बाद मस्जिद के शेष हिस्से को यथावत रखने का उल्लेख था। इसके अलावा 13 सितंबर 1985 के मप्र शासन के राजपत्र में भी मस्जिद और उसकी पैमाइश का उल्लेख होने का दावा किया गया है। वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी प्रबंधन का यह भी कहना है कि वर्ष 1975 में यातायात सुगम बनाने के लिए मस्जिद की ओर से स्वेच्छा से भूमि दी गई थी। वर्तमान में सड़क करीब 40 फीट चौड़ी है और आवागमन में कोई बड़ी बाधा नहीं … Read more

पंजाब के तीन धार्मिक शहरों में नॉनवेज पर बैन, मांस की बिक्री और सेवन भी प्रतिबंधित

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राज्य के तीन पवित्र शहरों में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक से संबंधित नोटिफिकेशन अब असाधारण गजट में प्रकाशित कर दिया है। पंजाब सरकार के 9 सितंबर 2026 के असाधारण गजट में पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास विभाग की ओर से जारी आदेश को प्रकाशित किया गया है। खास बात यह है कि गजट में प्रकाशित आदेश पर 23 दिसंबर 2025 की तारीख दर्ज है। यानी प्रतिबंध का आदेश करीब साढ़े आठ महीने पहले जारी किया गया था, लेकिन अब इसे सरकारी गजट में प्रकाशित किया गया है। सरकार का यह आदेश अमृतसर की चारदीवारी वाले क्षेत्र, रूपनगर जिले के श्री आनंदपुर साहिब और बठिंडा जिले के तलवंडी साबो (श्री दमदमा साहिब) में लागू होगा। आदेश में कहा गया है कि इन क्षेत्रों में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक तत्काल प्रभाव से लागू की जाएगी। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ राज्य में लागू संबंधित कानूनों और नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। गृह विभाग के निर्देश पर जारी हुआ आदेश पशुपालन विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई गृह मामले विभाग की 15 दिसंबर 2025 की अधिसूचना में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में की गई है। इसके बाद पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी विकास विभाग ने 23 दिसंबर 2025 को प्रतिबंध संबंधी आदेश जारी किया। अब इसे 9 सितंबर 2026 को पंजाब सरकार के असाधारण गजट में प्रकाशित किया गया है। अमृतसर में पूरे शहर पर नहीं, चारदीवारी क्षेत्र में रोक नोटिफिकेशन में अमृतसर के लिए पूरे शहर को प्रतिबंधित क्षेत्र नहीं बनाया गया है। इसमें विशेष तौर पर अमृतसर के चारदीवारी वाले शहर का उल्लेख है। वहीं श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो (श्री दमदमा साहिब) की संबंधित नगर पालिका सीमाओं में यह आदेश लागू होगा। पवित्र शहर घोषित करने के फैसले की पृष्ठभूमि राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों को धार्मिक महत्व को देखते हुए पवित्र शहर घोषित करने का फैसला किया था। अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब में तख्त श्री केसगढ़ साहिब और तलवंडी साबो में तख्त श्री दमदमा साहिब जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। इन क्षेत्रों की धार्मिक मर्यादा और गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंध का फैसला लिया गया था। हालांकि, वर्तमान गजट में मांस की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध का स्पष्ट उल्लेख है। शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों पर रोक संबंधी व्यापक घोषणा को अलग सरकारी आदेश के बिना इसी नोटिफिकेशन का हिस्सा नहीं माना जा सकता।

नुआखाई, महाअष्टमी और गोवर्धन पूजा के अवसर पर शासकीय कार्यालय एवं संस्थाएं रहेंगी बंद

नुआखाई, महाअष्टमी और गोवर्धन पूजा के अवसर पर शासकीय कार्यालय एवं संस्थाएं रहेंगी बंद तीन स्थानीय अवकाश किए घोषित रायपुर  सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा जारी आदेश के तहत रायपुर जिले में तीन स्थानीय अवकाश घोषित किए हैं। यह अवकाश रायपुर जिले, शहर (राजधानी) स्थित शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं में लागू होंगे।         जारी आदेश के अनुसार नुआखाई पर्व के लिए 15 सितंबर 2026 (मंगलवार), महाअष्टमी के लिए 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) तथा गोवर्धन पूजा (दीपावली के दूसरे दिन) के लिए 9 नवंबर 2026 (सोमवार) को स्थानीय अवकाश रहेगा। जारी आदेश के अनुसार ये अवकाश रायपुर जिले के अंतर्गत संबंधित शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं पर लागू होंगे।

30 साल पुराने भवनों की जांच शुरू, खतरनाक मिले तो नोटिस-सुनवाई के बाद होगा ध्वस्तीकरण

जयपुर राजधानी लखनऊ में पुराने और खस्ताहाल भवनों से होने वाले हादसों को रोकने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने बड़ा अभियान शुरू किया है। एलडीए अपनी विभिन्न आवासीय और व्यावसायिक योजनाओं में करीब 160 जर्जर इमारतों को चिह्नित कर उन्हें ध्वस्त करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए सभी जोनों में सर्वे शुरू कर दिया गया है और प्रत्येक जोन से 20-20 भवनों की पहचान की जाएगी। ध्वस्तीकरण से पहले इनकी सेफ्टी आडिट करायी जाएगी। सेफ्टी आडिट में जो बिल्डिंग बेहद कमजोर मिलेंगी उन्हें गिराया जाएगा। 30 वर्ष से अधिक पुराने भवनों की होगी जांच एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि प्राधिकरण की कॉलोनियों में स्थित 30 वर्ष से अधिक पुराने भवनों की विशेष रूप से जांच कराई जाएगी। इन भवनों में मकान, दुकानें, व्यावसायिक परिसर, बहुमंजिला इमारतें और अन्य निर्माण शामिल होंगे। सर्वेक्षण के दौरान भवनों की मौजूदा स्थिति, संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा मानकों का आकलन किया जाएगा। सेफ्टी ऑडिट के बाद होगा अंतिम फैसला चिह्नित भवनों का तकनीकी विशेषज्ञों से सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि भवन सुरक्षित हैं या नहीं। जिन इमारतों को असुरक्षित और खतरनाक माना जाएगा, उनके खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जाएगी। एलडीए का कहना है कि किसी भी भवन को बिना तकनीकी परीक्षण के नहीं गिराया जाएगा। नोटिस और सुनवाई के बाद चलेगा बुलडोजर प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार कार्रवाई से पहले भवन स्वामियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी की अदालत में सुनवाई होगी, जहां भवन मालिकों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। यदि सुनवाई के बाद भवन को जर्जर और खतरनाक माना जाता है तो उसके ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया जाएगा। आदेश मिलने के बाद संबंधित भवन को गिराने की कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम से भी मांगी जाएगी रिपोर्ट एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि पूरे शहर में जर्जर भवनों का सर्वे कराना प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। शहर के अन्य हिस्सों में स्थित जर्जर भवनों को लेकर नगर निगम से रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर निगम को ही अपने क्षेत्र में खतरनाक भवनों को चिन्हित करने और ध्वस्त करने का अधिकार प्राप्त है। हादसों की आशंका कम करने की तैयारी पिछले कुछ वर्षों में पुराने और कमजोर भवनों के हिस्से गिरने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में एलडीए का यह अभियान लोगों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते खतरनाक भवनों की पहचान और ध्वस्तीकरण से बड़े हादसों को रोका जा सकेगा तथा प्राधिकरण की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

पुतिन-शी-पेजेशकियन की सुरक्षा पर खास फोकस, ड्रोन से लेकर पैराग्लाइडर तक पर नजर

नई दिल्ली  भारत मंडपम् में होने वाले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और हाई-प्रोफाइल डेलिगेशंस पहुंच रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां सिर्फ वीवीआईपी रूट और होटलों तक ही मुस्तैद नहीं रहेंगी, बल्कि कई टीमें इस दौरान हवाई गश्त पर भी रहेंगी। सिक्योरिटी असेसमेंट ने इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन में ड्रोन, पैराग्लाइडर और दूसरे रिमोट कंट्रोल्ड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स से जुड़े खतरे को भी प्रमुखता से शामिल किया है। मौजूदा वैश्विक तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सुरक्षा का फोकस सबसे ज्यादा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को लेकर है। वीवीआईपी नेताओं के काफिले में शामिल सभी गाड़ियों में जीपीएस डिवाइस लगाए गए हैं, जिससे कंट्रोल रूम से उनकी रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक की जा सके। मुख्य कार्यक्रम स्थल और होटलों में एंट्री के लिए हाईटेक फेशियल रिकग्निशन और बायोमीट्रिक सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। एंटी-ग्राफिटी गश्त, पिकेट चेकिंग और स्टैटिक तैनाती से पूरे इलाके को कवर किया गया है। 30 हजार जवानों के घेरे में दिल्ली, 100 से ज्यादा NSG कमांडो तैनात सेंट्रल एजेंसियों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पूरी दिल्ली में करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों और 100 से ज्यादा NSG कमांडो की तैनाती की गई है। इसके अलावा प्रोग्राम स्थल और होटलों की सुरक्षा में 7 हजार जवानों को लगाया गया है। 11 प्रमुख होटलों से भारत मंडपम् तक वीवीआईपी काफिलों के लिए अलग-अलग रूट तैयार किए गए हैं। अलग-अलग मेहमानों के लिए एंट्री गेट और ड्रॉप पॉइंट भी अलग रखे गए हैं, ताकि दो देशों के काफिले एक साथ सामने न आएं।

जालंधर में आज रहेगा बंद, डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा की बेअदबी के विरोध में आह्वान

जालंधर. मंगलवार को लुधियाना में डाक्टर बीआर अंबेडकर की प्रतिमा की बेअदबी के विरोध में जिले के वाल्मीकि संगठनों ने दस सितंबर वीरवार को जालंधर बंड का ऐलान किया है। संगठनों ने सुबह नौ से लेकर शाम पांच बजे तक शहर के सभी बाजारों, मार्केटें व माल्स सहित व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने का एलान किया हुआ है। हालांकि कुछ वाल्मीकि संगठनों ने बुधवार रात को बैठक कर 10 दिसंबर को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक बंद करने की घोषणा भी की है। इस दौरान रेलवे ट्रैक या फिर नेशनल हाईवे को बंद नहीं किया जाएगा। कई शिक्षण संस्थानों में इन दोनों परीक्षाएं चल रही है, ऐसे में शिक्षण संस्थान भी बंद नहीं करवाए जाएंगे। आज क्या रहेगा बंद वीरवार को शहर की मार्केट, दुकानें, माल्स, शोरूम, बेकरी, स्वीट शाप सहित तमाम तरह के व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। किसे मिलेगी राहत वाल्मीाकि संगठनों के प्रतिनिधियों ने बंद के दौरान राहत की भी घोषणा की है। जिसके तहत वीरवार को सुबह नौ से शाम पांच बजे तक बंद के दौरान अस्पताल, मेडिकल की दुकानें, एंबुलेंस का संचालन, विदेश की फ्लाइट वाले यात्रियों, मृत्यु पर जाने वालों तथा शिक्षण संस्थानों को राहत रहेगी।

बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटने का आरोप तथ्यहीन

बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटने का आरोप तथ्यहीन सीएमओ कानपुर नगर इन्द्रदेव सिंह ने जांच के बाद किया खबर का खंडन 02 सितंबर के बाढ़ राहत कैंप में नहीं बांटा गया ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप कानपुर बाढ़ पीड़ितों को एक्सपायर्ड सीरप बांटे जाने के आरोपों को कानपुर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन्द्रदेव सिंह ने तथ्यहीन बताया है। जांच के बाद सीएमओ ने स्पष्ट किया कि 02 सितंबर को आयोजित बाढ़ राहत कैम्प में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप का वितरण नहीं किया गया था। उन्होंने संबंधित खबर का खंडन करते हुए विभागीय रिकॉर्ड और दवा के स्टॉक की स्थिति को आरोपों के विपरीत बताया। रिकॉर्ड के मुताबिक उक्त सीरप वर्ष 2025 में ड्रग वेयरहाउस कानपुर नगर में प्राप्त हुआ था। इसके बाद मार्च 2025 तक सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सीरप वितरित किया जा चुका था। वर्तमान में किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उक्त बैच की दवा उपलब्ध नहीं है। जांच के दौरान बाढ़ राहत के लिए बनाए गए स्टॉक रजिस्टर को भी देखा गया। रजिस्टर में ट्राइमेथोप्रिम एंड सल्फामेथॉक्साज़ोल आईपी सीरप की एक भी प्रविष्टि नहीं मिली। ऐसे में 02 सितंबर को बाढ़ कैंप में उक्त सीरप बांटे जाने की बात विभागीय रिकॉर्ड से पुष्ट नहीं होती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन्द्रदेव सिंह ने जांच के आधार पर कहा कि बाढ़ कैंप में उक्त सीरप का वितरण नहीं हुआ था और एक्सपायर्ड दवा बांटे जाने के आरोप तथ्यहीन हैं। उन्होंने संबंधित खबर का खंडन किया है। विभागीय रिकॉर्ड में दवा के वर्ष 2025 में प्राप्त होने और मार्च 2025 तक स्वास्थ्य केंद्रों को वितरित किए जाने का उल्लेख है।

सलमान खान की ‘काला हिरण’ पर फिर हाई कोर्ट में सुनवाई, 30 सितंबर को होगा अगला फैसला

सलमान खान और फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ का विवाद एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है. कोर्ट में फिल्म की रिलीज को लेकर सुनवाई हुई, जहां जस्टिस ज्योति सिंह ने मेकर्स से सीधा सवाल किया कि- फिल्म कब रिलीज हो रही है? प्रोड्यूसर अमित जानी की ओर से पेश वकील ने कहा कि उन्हें इस बारे में निर्देश लेने होंगे. वहीं मेकर्स की तरफ से कोर्ट में फिल्म की रिलीज को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई. उनका कहना था कि फिल्म अभी रिलीज करने की स्थिति में ही नहीं है और उसे सेंसर सर्टिफिकेशन के लिए CBFC के पास भेजना बाकी है. यहां तक कि फिल्म का ट्रेलर भी रिलीज नहीं हुआ है. कोर्ट के आदेश में भी दर्ज किया गया कि फिल्म फिलहाल रिलीज योग्य स्थिति में नहीं है और इसकी सामग्री को अभी सेंसर बोर्ड से प्रमाणित किया जाना बाकी है. हालांकि, सलमान खान की ओर से पेश वकील ने कहा कि OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज के लिए सेंसर सर्टिफिकेशन की जरूरत नहीं होती. इसके बाद कोर्ट ने OTT रिलीज को भी अपने आदेश के दायरे में शामिल किया है. अब इस मामले में मेकर्स को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करना है, जबकि अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी. फिलहाल ‘काला हिरण’ की रिलीज को लेकर मामला पूरी तरह साफ नहीं हुआ है. फिल्म बड़े पर्दे पर आएगी या OTT का रास्ता अपनाएगी, इस पर भी कानूनी पेंच बना हुआ है. आखिर सलमान खान ‘काला हिरण’ फिल्म से इतने नाराज क्यों हैं? अब जरा पूरे मामले की शुरुआत समझिए…. ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ कोई आम फिल्म नहीं है. इस फिल्म को लेकर सबसे बड़ा विवाद यही है कि इसकी कहानी और प्रमोशनल मटीरियल का कनेक्शन सलमान खान के 1998 के काला हिरण मामले से जोड़ा जा रहा है. फिल्म के सामने आने के बाद सलमान की टीम ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट में उनकी शख्सियत और पहचान का इस्तेमाल किया जा रहा है. एक्टर ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख करते हुए फिल्म की रिलीज, प्रमोशन और इससे जुड़े दूसरे कामों पर रोक की मांग की थी. उनकी याचिका में इसे उनके पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स का उल्लंघन बताया गया था. मामला सिर्फ इतना नहीं था कि फिल्म का नाम ‘काला हिरण’ है. फिल्म के पोस्टर और प्रमोशनल मटीरियल में दिखाए गए किरदार को लेकर भी सलमान की टीम ने आपत्ति जताई. आरोप था कि किरदार की शक्ल-सूरत और कुछ पहचान वाली चीजों के जरिए दर्शकों को सीधे सलमान खान की याद दिलाई जा रही है. 1998 का वो काला हिरण केस फिर क्यों आया चर्चा में? 1998 में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान राजस्थान में काले हिरण के शिकार का मामला सामने आया था. इस केस ने सलमान खान की जिंदगी में लंबी कानूनी लड़ाई को जन्म दिया. अब ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ इसी विवाद से प्रेरित बताई जा रही है. फिल्म को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक इसमें काले हिरण से जुड़े मामले के साथ कोर्टरूम ड्रामा, अपराध और उससे जुड़े दूसरे विवादों को कहानी का हिस्सा बनाया गया है. फिल्म में लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े एंगल की चर्चा भी हुई है. यही वजह है कि सलमान खान की टीम को डर है कि फिल्म में दिखाई गई कहानी उनके बारे में लोगों की धारणा और उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती है. कोर्ट ने पहले भी मेकर्स को दिया था झटका यह पहली बार नहीं है जब इस फिल्म को लेकर कोर्ट में हंगामा हुआ है. जून में सलमान खान की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म के मेकर्स को नोटिस जारी किया था. बाद की सुनवाई में फिल्म के प्रमोशनल मटीरियल को लेकर भी कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. जुलाई में हाई कोर्ट ने ‘काला हिरण’ के टीजर से जुड़े सोशल मीडिया लिंक और प्रोड्यूसर अमित जानी के कुछ इंटरव्यू हटाने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने सलमान की प्रतिष्ठा को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की थी. यानी मामला सिर्फ ‘फिल्म रिलीज होगी या नहीं’ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फिल्म के पोस्टर, टीजर और प्रमोशन तक कोर्ट की नजर पहुंच चुकी है. अमित जानी भी पीछे हटने को तैयार नहीं दूसरी तरफ फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी लगातार अपना पक्ष रखते आए हैं. मेकर्स का रुख रहा है कि फिल्म एक वास्तविक विवाद से प्रेरित कहानी है और इसे सीधे सलमान खान की बायोपिक नहीं माना जाना चाहिए. विवाद बढ़ने के बाद जानी ने दिल्ली हाई कोर्ट के कुछ आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी थी. यानी एक तरफ सलमान खान अपनी पहचान और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ फिल्म के मेकर्स भी प्रोजेक्ट को बचाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं. अब 30 सितंबर को क्या होगा? फिलहाल ताजा सुनवाई के बाद गेंद फिर कोर्ट के पाले में है. मेकर्स को दो हफ्ते में अपना जवाब दाखिल करना है और 30 सितंबर को अगली सुनवाई होगी. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म अभी सेंसर सर्टिफिकेशन के स्टेज तक भी नहीं पहुंची है. ऐसे में फिलहाल रिलीज को लेकर कोई साफ तस्वीर नहीं है. लेकिन इतना जरूर है कि ‘काला हिरण’ सिर्फ एक फिल्म नहीं रह गई है. एक तरफ सलमान खान का नाम, 1998 का बेहद चर्चित काला हिरण केस और उनकी पर्सनैलिटी राइट्स की लड़ाई है, तो दूसरी तरफ फिल्म मेकर्स का दावा और रिलीज की कोशिश. अब असली सवाल यही है- क्या ‘काला हिरण’ सिनेमाघरों तक पहुंच पाएगी, या सलमान खान की कानूनी लड़ाई फिल्म की रिलीज पर भारी पड़ेगी? इसका अगला बड़ा जवाब 30 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई में मिल सकता है.

बिलासपुर में कफ सिरप तस्करी का भंडाफोड़, बड़ी खेप बरामद; 2 गिरफ्तार, 2 फरार

बिलासपुर. सरकंडा पुलिस ने नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कार की डिक्की से 520 नग प्रतिबंधित ऑनरेक्स कफ सिरप बरामद किया है। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि कफ सिरप उपलब्ध कराने वाले दो आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक कार के जरिए प्रतिबंधित कफ सिरप ले जाया जा रहा है। सूचना पर सरकंडा पुलिस की टीम ने बिरकोना रोड गैस गोदाम के पास घेराबंदी की। इसी दौरान काले रंग की कार क्रमांक CG 04 QD 9753 को रोककर तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान वाहन की डिक्की से 520 नग ऑनरेक्स कफ सिरप बरामद हुआ। बरामद कफ सिरप का कुल वजन 85.02 किलोग्राम बताया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹1,04,780 है। पुलिस ने प्रतिबंधित कफ सिरप के अलावा एक कार और तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। पुलिस ने मामले में मिथुन बघेल व अमन कुमार चौबे को गिरफ्तार किया है। वहीं राजा भोई और नीरज पटेल फरार हैं। दोनों पर गिरफ्तार आरोपियों को बिक्री के लिए कफ सिरप उपलब्ध कराने का आरोप है। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। आरोपियों के खिलाफ थाना सरकंडा में धारा 21, 22 एवं 29 एनडीपीएस एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

17 सितंबर से सूर्य गोचर बदलेंगे चाल, 5 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की और धन लाभ के रास्ते

 17 सितंबर 2026 को सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर अपनी मित्र राशि कन्या में गोचर करेंगे. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा, आत्मा, पिता, मान-सम्मान और प्रशासनिक क्षमता का कारक माना गया है. जब सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे कन्या संक्रांति कहा जाता है. कन्या राशि में सूर्य का यह गोचर लगभग एक महीने (17 अक्टूबर तक) रहेगा. इस दौरान पहले से कन्या राशि में मौजूद बुध ग्रह के साथ सूर्य की युति होगी, जिससे बेहद शुभ 'बुधादित्य राजयोग' का निर्माण होगा. सूर्य के इस राशि परिवर्तन से मुख्य रूप से इन राशियों को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है: मेष राशि शत्रुओं पर विजय: छठे भाव में सूर्य का गोचर आपको अपने विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों पर भारी रखेगा. कोर्ट-कचहरी में राहत: यदि कोई कानूनी मामला या विवाद चल रहा है, तो फैसला आपके पक्ष में आ सकता है. स्वास्थ्य में सुधार: लंबे समय से चल रही किसी बीमारी से राहत मिलेगी और ऊर्जा का स्तर बढ़ा रहेगा. सिंह राशि अचानक धन लाभ: आपकी राशि के स्वामी सूर्य का दूसरे (धन) भाव में गोचर आर्थिक स्थिति को बहुत मजबूत बनाएगा. रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है. वाणी का प्रभाव: आपकी बातों का लोगों पर गहरा असर पड़ेगा, जिससे कार्यक्षेत्र और समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा. पारिवारिक सुख: परिवार के सदस्यों का पूर्ण सहयोग मिलेगा और धन संचय करने में सफलता मिलेगी. धनु राशि करियर में बड़ी सफलता: सूर्य का गोचर आपके दशम (कर्म) भाव में होगा, जिसे कार्यक्षेत्र के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. पदोन्नति के योग: नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन, सैलरी में बढ़ोतरी या मनचाहा ट्रांसफर मिल सकता है. प्रशासनिक लाभ: सरकारी क्षेत्र या उच्च अधिकारियों से लाभ मिलने की प्रबल संभावना है. बिजनेस में बड़ा मुनाफा हो सकता है. वृश्चिक राशि आय में जबरदस्त वृद्धि: सूर्य आपकी राशि के ग्यारहवें (लाभ) भाव में गोचर करेंगे. इससे आपकी आमदनी के नए जरिया बनेंगे. इच्छाओं की पूर्ति: लंबे समय से अटकी हुई योजनाएं पूरी होंगी. निवेश से बड़ा फायदा हो सकता है. वरिष्ठों का सहयोग: कार्यस्थल पर बड़े अधिकारियों और वरिष्ठ लोगों का पूरा समर्थन मिलेगा. मकर राशि भाग्य का पूरा साथ: नवम (भाग्य) भाव में सूर्य का गोचर आपके सोए हुए भाग्य को जगाएगा. धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी. यात्रा से लाभ: व्यापार या नौकरी के सिलसिले में की गई यात्राएं बेहद लाभकारी सिद्ध होंगी. उच्च शिक्षा व प्रतियोगी परीक्षा: छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में मनमुताबिक सफलता मिलने के योग हैं. सूर्य गोचर के दौरान करें ये सरल उपाय – प्रतिदिन प्रातःकाल उगते हुए सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें. – जल चढ़ाते समय ऊं सूर्याय नमः या ऊं घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें. – रविवार के दिन गेहूं, गुड़ या तांबे की वस्तुओं का दान करना शुभ रहेगा.