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‘AC में बैठकर वोट नहीं मिलेंगे, जमीन पर आइए, किसान लट्ठ लेकर तैयार है’: अखिलेश पर रालोद का हमला

सहारनपुर के बाद बुलंदशहर में भी सपा को रद्द करनी पड़ी रैली, रालोद का दावा – 36 कौम के विरोध का असर 'AC में बैठकर वोट नहीं मिलेंगे, जमीन पर आइए, किसान लट्ठ लेकर तैयार है': अखिलेश पर रालोद का हमला पश्चिमी यूपी में अखिलेश की दो रैलियां रद्द, RLD बोली- 'समझ में आ गया होगा कि चौधरी कौन है?' लखनऊ  समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ वाले बयान को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सपा के साथ चल रही जुबानी जंग के बीच अब राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) ने अखिलेश यादव के प्रस्तावित बुलंदशहर दौरे के रद्द होने पर निशाना साधा है। रालोद प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने दावा किया कि पश्चिम यूपी में 36 बिरादरी के विरोध के चलते सपा को पहले सहारनपुर और अब बुलंदशहर की रैली रद्द करनी पड़ी। दरअसल अखिलेश यादव का 11 सितंबर को बुलंदशहर दौरा प्रस्तावित था, जिसे अब रद्द कर दिया गया है। इससे पहले उनका सहारनपुर दौरा भी रद्द हुआ था। इन दोनों घटनाओं को लेकर रालोद ने सपा पर हमला तेज कर दिया है। रोहित अग्रवाल ने वीडियो जारी कर कहा कि अब अखिलेश यादव को समझ में आ गया होगा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ‘चौधरी’ कौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने उस चौधरी परिवार का अपमान करने का प्रयास किया, जिसने उनके (अखिलेश के) परिवार को राजनीति की ‘ABCD’ सिखाने का काम किया। रालोद प्रवक्ता ने कहा कि समाज को बांटने की राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एसी कमरों में बैठकर बड़ी-बड़ी बातें करना आसान है, लेकिन चुनाव के समय जनता के बीच जाना पड़ता है। अग्रवाल ने दावा किया कि पश्चिमी यूपी का किसान लट्ठ लेकर अपने मान-सम्मान का हिसाब मांगने के लिए तैयार है। 2027 के चुनाव में जनता देगी जवाब रोहित अग्रवाल ने 2027 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि सपा को वोट मांगने के लिए जमीन पर उतरना पड़ेगा। ऑडिटोरियम में बैठकर चुनाव नहीं जीता जा सकता। रालोद प्रवक्ता ने दावा किया कि जाट समाज और चौधरी परिवार के अपमान पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता अखिलेश यादव को चुनाव में जवाब देगी। अग्रवाल ने यह भी दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक-एक सीट के लिए तरस जाएगी और उसका खाता तक नहीं खुलेगा। अखिलेश यादव के किस बयान पर मचा है बवाल? समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीते 17 अगस्त को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान बिना नाम लिए राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) प्रमुख जयंत चौधरी पर तंज कसा था। इसमें उन्होंने कहा था कि गठबंधन में न जाने कहां-कहां से लोग आ गए थे, जिन्हें उन्होंने "चवन्नी से रुपया बना दिया था", लेकिन वे फिर भी साथ छोड़कर चले गए। सपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान से भी बढ़ी तल्खी अखिलेश यादव के इस बयान के बाद सपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने भी मुजफ्फरनगर में बयान दिया कि सपा ने चवन्नी को रुपया बनाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को राजनीति की एबीसीडी तक नहीं आती थी, उन्हें समाजवादी पार्टी ने राजनीतिक मंच दिया और आगे बढ़ाने का काम किया। इस बयानबाजी पर राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी चौधरी चरण सिंह के परिवार और जाट समाज के स्वाभिमान को ठेस पहुंचा रही है।

वन्यप्राणियों की सुरक्षा के लिए सख्ती, छत्तीसगढ़ के जंगलों में प्लास्टिक पर लगेगा जुर्माना

बिलासपुर. वन्यप्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण को देखते हुए वन मुख्यालय ने बड़ा निर्णय लिया है। एटीआर सहित प्रदेश के सभी वन मंडलों और संरक्षित क्षेत्रों में प्लास्टिक के इस्तेमाल और कचरे पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। अब यदि किसी सैलानी के पास प्रतिबंधित प्लास्टिक पाया जाता है या उसे जंगल में फेंकते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए 500 रुपए या उससे अधिक की प्रशमन राशि वसूल की जाएगी। वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए सख्त होगी कार्रवाई वन्यप्राणियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए शासन स्तर पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रदेश के सभी वन मंडलों, रेंज, डिवीजन, अचानकमार टाइगर रिजर्व सहित राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्यों को प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त करने के लिए कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा रहा है। संरक्षित क्षेत्रों में प्रतिबंधित प्लास्टिक मिलने पर केवल समझाइश देने के बजाय तलाशी, जब्ती, प्लास्टिक हटाने और नियमों के तहत प्रशमन राशि वसूलने की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सर्किल फॉरेस्ट ऑफिसर और बीट फॉरेस्ट ऑफिसर स्तर तक के अधिकारियों को अधिकार देने के निर्देश जारी किए गए हैं। वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन कार्यालय की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि संरक्षित क्षेत्रों में प्लास्टिक के उपयोग पर पहले से रोक के निर्देश हैं। इसके बावजूद प्लास्टिक के उपयोग और कचरे पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। इसे देखते हुए अब छत्तीसगढ़ प्लास्टिक एवं अन्य जैव अनाशित सामग्री नियम, 2023 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के नियमों के तहत प्लास्टिक कैरी बैग, नॉन-वूवन पॉलीप्रोपलीन बैग, प्लास्टिक और थर्मोकोल से बने डिस्पोजेबल कप, प्लेट, गिलास, कटोरे, चम्मच और स्ट्रॉ समेत कई वस्तुएं प्रतिबंधित हैं। टाइगर रिजर्व में भी सख्त प्रावधान लागू अचानकमार टाइगर रिजर्व के अलावा प्रदेश के उदंती-सीतानदी, इंद्रावती और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व सहित राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों के लिए भी निर्देश जारी किए गए हैं। जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि संबंधित क्षेत्रों के सर्किल और बीट फॉरेस्ट अधिकारियों को नियमों के तहत कार्रवाई के लिए अधिकृत एवं सशक्त किया जा सकता है। 500 से 1 लाख रुपए तक प्रशमन राशि नियमों में अपराध की प्रकृति और संबंधित व्यक्ति के आधार पर प्रशमन राशि निर्धारित की गई है। पहली बार उल्लंघन करने पर व्यक्ति या स्ट्रीट वेंडर से 500 रुपए, दुकान या प्रतिष्ठान से 5 हजार रुपए और निर्माता से 1 लाख रुपए तक की राशि ली जा सकती है। दूसरी बार अपराध करने पर यह राशि क्रमशः 5 हजार, 50 हजार और 2 लाख रुपए होगी। इसके बाद के अपराधों को अशमनीय रखा गया है। जुर्माने की राशि और अपराध के प्रशमन के रूप में प्राप्त राशि राज्य सरकार के संबंधित खाते में जमा की जाएगी। इस राशि का उपयोग पर्यावरण संरक्षण और पर्यावरण से जुड़ी विभिन्न कार्ययोजनाओं में किया जाएगा।

BRICS समिट के लिए भारत पहुंचेंगे शी जिनपिंग, 7 साल बाद होगा चीन के राष्ट्रपति का दौरा

 नई दिल्ली चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत आ सकते हैं. बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय यानी MFA की ओर से आज उनके भारत दौरे का आधिकारिक ऐलान किए जाने की उम्मीद है. राष्ट्रपति शी का शनिवार दोपहर दिल्ली पहुंच सकते हैं. शाम करीब छह बजे भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात हो सकती है।  BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है. यह बैठक भारत-चीन रिश्तों के लिहाज से अहम मानी जा रही है।  खास बात यह है कि मोदी और शी जिनपिंग की भारतीय जमीन पर करीब 7 साल बाद पहली द्विपक्षीय मुलाकात होगी. यह बैठक गलवान झड़पों के बाद भी दोनों नेताओं की भारत में पहली द्विपक्षीय बैठक होगी।  भारत में 12-13 सितंबर को होगा BRICS समिट भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और इसकी थीम "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" रखी गई है।  सम्मेलन में सदस्य और पार्टनर देशों के नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ BRICS के बीच राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय और लोगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे. 2026 में BRICS की स्थापना के 20 साल भी पूरे हो रहे हैं।  NSG कमांडो समेत 25000 जवान होंगे तैनात; जानें 11 बड़े सुरक्षा इंतजाम  18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए राजधानी दिल्ली को अभेद्य सुरक्षा घेरे में तब्दील किया जा रहा है। इस सम्मेलन में शिरकत करने 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि आ रहे हैं। इनमें दो नाम बेहद अहम माने जा रहे हैं- पहला, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और दूसरा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। इनके आने की भी संभावना है। तीन दिवसीय BRICS समिट 11 सितंबर से शुरू होगा। सुरक्षा व्यवस्था का स्तर 2023 में हुए G20 शिखर सम्मेलन के करीब रखा जा रहा है। दिल्ली पुलिस की सुरक्षा यूनिट ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर व्यापक सुरक्षा प्लान तैयार किया है। करीब 25000 जवानों को तैनात किया जाएगा। इसमें 100 से अधिक NSG कमांडो भी शामिल होंगे। एंटी-ड्रोन सिस्टम और लगातार मॉक ड्रिल के जरिए दिल्ली में जमीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है।आइए जानते हैं BRICS समिट के लिए दिल्ली में किए जा रहे 11 बड़े सुरक्षा इंतजाम…     25000 जवान संभालेंगे सुरक्षा की कमान BRICS समिट के दौरान दिल्ली में करीब 25000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जा रही है। दिल्ली पुलिस के अलावा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होंगे।     100 से ज्यादा NSG कमांडो तैनात VVIP सुरक्षा को देखते हुए 100 से अधिक NSG कमांडो भी तैनात किए जा रहे हैं। भारत मंडपम समेत संवेदनशील स्थानों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियां लगातार खतरे का आकलन करेंगी।     आसमान पर एंटी-ड्रोन सिस्टम से नजर समिट के दौरान ड्रोन और अन्य फ्लाइंग ऑब्जेक्ट्स से हर हवा में मौजूद खतरों पर निगरानी की जाएगी। संभावित खतरे को देखते हुए एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए जाएंगे।     भारत मंडपम से होटलों तक हाई-सिक्योरिटी कॉरिडोर समिट का मुख्य आयोजन स्थल भारत मंडपम होगा। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और मेहमानों के ठहरने वाले होटलों से भारत मंडपम तक के पूरे रूट को हाई-सिक्योरिटी कॉरिडोर के तौर पर तैयार किया जा रहा है। करीब 30 DCP रैंक के अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे।     10 होटलों पर विशेष सुरक्षा विदेशी मेहमानों और प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े 10 होटल सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम होंगे। इन होटलों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई जा रही है।     VVIP काफिलों की बार-बार मॉक ड्रिल सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए दिल्ली पुलिस, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, विदेश मंत्रालय और अन्य एजेंसियां लगातार मॉक ड्रिल कर रही हैं। VVIP मोटरकेड की आवाजाही का 12 प्रमुख स्थानों पर अभ्यास किया जा रहा है, ताकि वास्तविक मूवमेंट के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।     22 डायवर्जन पॉइंट, 4800 ट्रैफिक पुलिसकर्मी विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के काफिलों की आवाजाही के दौरान ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं। करीब 4,800 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की तैयारी है। VVIP मूवमेंट के दौरान आम लोगों को ट्रैफिक संबंधी दिक्कतों से बचाने के लिए रूट डायवर्जन किए जाएंगे।     मोटरकेड की गाड़ियों में GPS VVIP काफिले में शामिल वाहनों को GPS से लैस किया जा रहा है। इससे सुरक्षा एजेंसियां मोटरकेड में शामिल वाहनों की स्थिति को रियल टाइम में मॉनिटर कर सकेंगी। एयरपोर्ट, होटल और भारत मंडपम के बीच होने वाली आवाजाही पर विशेष नजर रहेगी।     एंटी-सैबोटाज और बम निरोधक दस्ते सक्रिय भारत मंडपम, होटल और VVIP रूट पर एंटी-सैबोटाज टीम तथा बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वॉड सुरक्षा जांच कर रहे हैं। संवेदनशील स्थानों की जांच और संदिग्ध वस्तुओं या गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें तैनात रहेंगी।     दिल्ली ही नहीं, पड़ोसी राज्यों तक सुरक्षा ग्रिड BRICS की सुरक्षा व्यवस्था को दिल्ली की सीमाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। दिल्ली पुलिस हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और चंडीगढ़ की पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों के साथ काम कर रही है। संदिग्ध लोगों और वाहनों की जांच, सीमा पर निगरानी और खुफिया सूचनाओं को तेजी से साझा करने के लिए साझा सुरक्षा ग्रिड तैयार किया गया है।     खाकी वर्दी में दिखेंगे CAPF जवान BRICS ड्यूटी में लगाए गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। BSF, ITBP और CRPF समेत CAPF के जवानों को खाकी वर्दी पहनने की सलाह दी गई है। पुतिन और शी जिनपिंग जैसे हाई-प्रोफाइल नेताओं के संभावित दौरे को देखते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए जमीन, सड़क और आसमान- तीनों स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रही हैं। आखिरी बार अक्टूबर 2019 में शी जिनपिंग आए थे भारत चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पिछली भारत यात्रा 11-12 अक्टूबर 2019 को हुई … Read more

1993 मुंबई ब्लास्ट केस: अबू सलेम की जल्द रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, याचिका हुई खारिज

मुंबई  1993 के मुंबई धमाका मामले में दोषी करार कुख्‍यात गैंगस्‍टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई वाली याचिका को खारिज कर दिया है. इसका मतलब यह है कि अबू सलेम जेल से बाहर नहीं आ सकेगा. उसका कानूनी तिकड़म फेल हो गया है. इस मामले में अबू सलेम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. बता दें कि वॉन्‍टेड गैंगस्‍टर को पुर्तगाल से प्रत्‍यर्पित करा कर भारत लाया गया था। आपको बता दें कि इसी साल अप्रैल में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा रिहाई की याचिका खारिज किए जाने के बाद अबू सलेम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। उसे 1995 में बिजनेसमैन प्रदीप जैन की हत्या के मामले में 2015 में और 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में 2017 में TADA की स्पेशल कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा, "साधारण हिसाब से भी देखें तो 11 नवंबर, 2005 को जेल जाने की तारीख से आपके 25 साल पूरे नहीं हुए हैं।" अबू सलेम को मुंबई ब्लास्ट और प्रदीप जैन की हत्या के मामलों में मुकदमे का सामना करने के लिए भारत प्रत्यर्पित किया गया था, जब भारत सरकार ने यह पक्का भरोसा दिया था कि उसे 25 साल से ज्यादा जेल की सजा नहीं दी जाएगी। जब ट्रायल कोर्ट ने दोनों मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई तो सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई, 2022 को पुर्तगाल को दिए गए भारत के पक्के भरोसे के मुताबिक उसकी सजा को घटाकर 25 साल कर दिया। क्या थी अबु सलेम की दलील? अबू सलेम की तरफ से कहा गया था कि सजा में मिलने वाली छूट (remission) को जोड़ने पर उसने 25 साल की सजा पूरी कर ली है, इसलिए उसे रिहा किया जाए। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा था कि उसकी याचिका समय से पहले दायर की गई है। उसकी 25 साल की अवधि 2030 में पूरी होगी। अबू सलेम ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सही माना है। आपको बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल महीने में भी अबू सलेम की याचिका को खारिज कर दिया था। क्या है पूरा केस? आपको बता दें कि 12 मार्च 1993 को मुंबई में एक के बाद एक 12 बड़े बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और करीब 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इस मामले में अबू सलेम को साल 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था। अबु सलेम को कोर्ट ने मुंबई ब्लास्ट में शामिल होने के लिए आजीवन कारावास की सजा दी थी।  क्या था अबू सलेम का तर्क? सुप्रीम कोर्ट में पहले हुई कार्यवाही में केंद्र सरकार ने तर्क दिया था कि उसकी 25 साल की सजा 11 नवंबर, 2005 से शुरू हुई थी और यह नवंबर 2030 में खत्म होगी। वहीं, अबू सलेम ने तर्क दिया है कि सजा की अवधि की गिनती 18 सितंबर 2002 से की जानी चाहिए जब भारत के कहने पर इंटरपोल द्वारा जारी रेड कॉर्नर नोटिस के बाद उसे पुर्तगाल में हिरासत में लिया गया था। केंद्र सरकार का तर्क है कि अबू सलेम को पुर्तगाल में पासपोर्ट से जुड़े एक अपराध के सिलसिले में हिरासत में लिया गया था और उसकी हिरासत का उस अपराध से कोई लेना-देना नहीं था जिसके लिए उसे प्रत्यर्पित किया गया था। कौन है अबू सलेम? अबू सलेम अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के सिंडिकेट का हिस्सा था। जून 2017 में अबू सलेम को 1993 के मुंबई धमाकों के मामले में दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई। उसे सीरियल बम धमाकों में इस्तेमाल के लिए गुजरात से मुंबई हथियार ले जाने का दोषी पाया गया था। इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी और 700 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।  

पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, काकोरी के क्रांतिकारियों की मजबूती से की थी पैरवी: मुख्यमंत्री

पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर सीएम योगी ने दी श्रद्धाजंलि, उनके योगदान को किया नमन पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, काकोरी के क्रांतिकारियों की मजबूती से की थी पैरवी: मुख्यमंत्री 1937 में यूपी के प्रीमियर बने पंत जी, प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश में रखी सुशासन की नींव- सीएम योगी सीएम ने कहा- गृहमंत्री के रूप में पंत जी ने भाषाई संघर्ष का समाधान कर हिंदी को दिलाया सम्मान लखनऊ  महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, देश के पूर्व गृहमंत्री और उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत के स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्र निर्माण और उत्तर प्रदेश के विकास में योगदान का उल्लेख करते हुए उनकी स्मृतियों को नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत जी की पावन जयंती है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश की जनता की ओर से वह पंत जी की स्मृतियों को नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। काकोरी के क्रांतिकारियों की मजबूती से की पैरवी मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत महान अधिवक्ता होने के साथ-साथ प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वर्ष 1925 में काकोरी ट्रेन एक्शन के बाद ब्रिटिश हुकूमत ने क्रांतिकारियों के खिलाफ जो अभियोग दर्ज किया था, उसके खिलाफ क्रांतिकारियों की पैरवी मजबूती के साथ करने वाले महान नेताओं में पंडित गोविंद बल्लभ पंत प्रमुख थे। उन्होंने देश की आजादी के आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1937 में पंत जी को यूपी के प्रीमियर के रूप में चुना गया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने पद से इस्तीफा देकर स्वाधीनता आंदोलन में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखी। भारत छोड़ो आंदोलन समेत समय-समय पर हुए स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न बड़े आंदोलनों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में सुशासन की नींव रखी मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में देश की आजादी के साथ पंडित गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने। उस समय उत्तराखंड भी उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। ऐसे में इतने बड़े राज्य की व्यवस्था को सुशासन के मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने के साथ ही आर्थिक उन्नयन और समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों के लिए उन्होंने काम किया। पंत जी ने अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए। उनके द्वारा प्रस्तुत लैंड रिफॉर्म मॉडल भी महत्वपूर्ण रहा।  गृहमंत्री के रूप में निभाई अहम भूमिका सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1954 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत देश के गृह मंत्री बने। गृह मंत्री के रूप में उन्होंने देश के भीतर चल रहे भाषाई संघर्ष और समाज में नए विभाजन की नींव डालने के प्रयासों का सूझ-बूझ के साथ समाधान निकाला। हिंदी को राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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पुराने जमाने की तस्वीरों में कुछ अलग ही बात होती है। उस समय के फैशन वाले कपड़े, पुराने कैमरे की तस्वीर और हल्के-फीके रंग देखकर आज भी कई लोगों को अपना बचपन या पुराना समय याद आ जाता है। अब अगर आप अपनी आज की फोटो को भी वैसा ही लुक देना चाहते हैं, तो एआई इसमें आपकी मदद कर सकता है। इसके लिए सिर्फ फोटो पर पुराना रंग चढ़ाने की जरूरत नहीं है। आप एआई को बता सकते हैं कि कपड़े कैसे हों, बाल कैसे दिखें, पीछे का माहौल कैसा हो और फोटो में किस तरह की रोशनी हो। सही प्रॉम्प्ट देने पर आपकी फोटो ऐसी लग सकती है, जैसे वह कई साल पहले ही खींची गई हो। यहां जानिए 1980 के दशक वाला लुक पाने के लिए 8 आसान प्रॉम्प्ट। 1. 1980 के दशक वाला स्टूडियो फोटो अगर आप चाहते हैं कि आपकी फोटो पुराने समय के स्टूडियो में खींची गई लगे, तो यह प्रॉम्प्ट डालें। प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक में स्टूडियो में खींची गई फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल ना बदलें। उस समय के कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। पीछे सादा स्टूडियो का बैकग्राउंड हो। हल्की पीली रोशनी और पुराने कैमरे से खींची गई फोटो जैसा लुक दें। तस्वीर असली और नैचुरल लगे। 2. 1980 के दशक का फैमिली फोटो पुराने पारिवारिक एलबम जैसी फोटो चाहिए तो यह प्रॉम्प्ट ट्राई करें। प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक के फैमिली एलबम की फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल वही रखें। उस समय के साधारण कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। पीछे घर का पुराना माहौल दिखे। फोटो में हल्की गर्म रोशनी और पुराने कैमरे वाली तस्वीर जैसा हल्का दानेदार असर रखें। तस्वीर बिल्कुल असली और नैचुरल लगे। 3. सड़क पर खींची गई पुरानी फोटो अगर आपको सड़क पर अचानक खींची गई पुराने जमाने की फोटो जैसा लुक चाहिए, तो यह प्रॉम्प्ट डालें। प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक की सड़क पर खींची गई फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल ना बदलें। उस समय के कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। पीछे पुरानी दुकानें, सड़क और उस दौर का माहौल दिखाएं। फोटो में प्राकृतिक रोशनी और पुराने कैमरे वाली तस्वीर जैसा लुक रखें। 4. 1980 के दशक का कॉलेज वाला लुक कॉलेज के दिनों वाली पुरानी फोटो जैसा अंदाज चाहिए तो यह प्रॉम्प्ट काम आएगा। प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक के कॉलेज स्टूडेंट की फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल वही रखें। उस समय के साधारण कपड़े और बालों की स्टाइल दें। पीछे पुराना कॉलेज का माहौल दिखाएं। फोटो ऐसी लगे जैसे उस समय के कैमरे से खींची गई हो। रंग हल्के पुराने और नैचुरल रखें। परिणीति चोपड़ा और राघव चड्ढा का 1980s AI Photo 5. पुराने समय की भारतीय फोटो इस प्रॉम्प्ट से फोटो में पूरा भारतीय रेट्रो लुक आ जाएगा। प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक की भारतीय फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल ना बदलें। उस समय के भारतीय कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। पीछे पुराने घर या सड़क का भारतीय माहौल दिखाएं। रोशनी गर्म और रंग थोड़े पुराने रखें। फोटो ऐसी लगे जैसे यह असली पुरानी तस्वीर हो। 6. 1980 के दशक की शादी वाली फोटो पुराने शादी के एलबम जैसा लुक चाहिए तो यह प्रॉम्प्ट डालें। प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक की शादी में खींची गई फोटो जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल वही रखें। उस समय के शादी वाले कपड़े, गहने और बालों की स्टाइल रखें। पीछे पुराने समय की शादी का माहौल और सजावट दिखे। फोटो में पुराने कैमरे वाली रोशनी और रंग रखें। तस्वीर असली और नैचुरल लगे। 7. पुराने सिनेमा जैसा लुक अगर आपको अपनी फोटो में 1980 के दशक की फिल्मों जैसा अंदाज चाहिए, तो यह प्रॉम्प्ट यूज कर सकते हैं। प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक की हिंदी फिल्म के दृश्य जैसा बनाएं। मेरा चेहरा और पहचान बिल्कुल ना बदलें। उस समय के फैशन वाले कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। पीछे पुराने सिनेमा जैसा माहौल हो। रोशनी थोड़ी खास लेकिन नैचुरल रखें और फोटो में पुराने फिल्म कैमरे जैसा रंग और लुक दें। 8. 1980 के दशक की पासपोर्ट जैसी स्टूडियो फोटो अगर आप अपनी फोटो को 1980 के दशक में खिंची पासपोर्ट या स्टूडियो फोटो जैसा लुक देना चाहते हैं, तो यह प्रॉम्प्ट इस्तेमाल करें। प्रॉम्प्ट: मेरी इस फोटो को 1980 के दशक में स्टूडियो में खींची गई पासपोर्ट जैसी फोटो बनाएं। मेरा चेहरा, चेहरे की बनावट और पहचान बिल्कुल वही रखें। फोटो सामने से हो, पीछे सादा हल्के रंग का बैकग्राउंड हो और चेहरे पर सीधी, साफ रोशनी हो। उस समय के कपड़े और बालों की स्टाइल रखें। फोटो में पुराने कैमरे की हल्की दानेदार रंगत और पुरानी तस्वीर जैसा नैचुरल लुक दें।

10 विधानसभा क्षेत्रों में सियासी परीक्षा, कहीं सीएम तो कहीं मंत्रियों की प्रतिष्ठा का सवाल

जयपुर  जयपुर के 150 वार्डों में फिलहाल मुकाबला पार्षद बनने का है, लेकिन दांव इससे कहीं बड़ा है। दस विधानसभा क्षेत्रों में फैली इस सियासी बिसात पर कहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की साख का सवाल है, कहीं उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी की पकड़ की परीक्षा और कहीं कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की सियासी ताकत का इम्तिहान। हर वार्ड में समीकरण अलग हैं। कहीं 'कमल' और 'हाथ' आमने-सामने हैं तो कहीं अपनों की नाराजगी ने मुकाबले में नया कोण जोड़ दिया है। इसलिए नगर निगम का यह चुनाव सिर्फ पार्षदों की संख्या का हिसाब नहीं, राजधानी में सियासी असर की पैमाइश भी है। इस सबसे ऊपर बिना पार्षद बने किसी बाहरी को भी महापौर बनाने की 'रस्म-ए-रियायत' भी तमाम सियासी जोड़-बाकी के गणित को बिगाड़ने के लिए काफी है। भाजपा ने प्रचार के आखिरी दिन मुख्यमंत्री को जयपुर में उतारकर अपनी प्राथमिकता साफ कर दी। इससे पहले संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष की बैठक भी पार्टी की गंभीरता का संकेत दे चुकी है। अब अपनों को साधना और वोटों को एकजुट रखना बड़ी चुनौती है। मालवीय नगर और झोटवाड़ा में टिकट को लेकर उपजी नाराजगी ने कई वार्डों में मुकाबले के कोण बढ़ा दिए हैं। सांगानेर में सीएम की साख के साथ निर्दलीयों ने समीकरणों में तड़का लगाया है, जबकि विद्याधर नगर में कहीं दो, कहीं तीन तो कहीं चार कोण तक मुकाबले हैं। कांग्रेस भी पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी बुधवार को अलवर में मतदान कर राजधानी पहुंचे और उन्होंने यहां कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए जनसंपर्क किया। कांग्रेस के विधायक और विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी अपने-अपने इलाकों में सक्रिय हैं। उसके लिए यह चुनाव सत्ता की लड़ाई से ज्यादा राजधानी में अपनी राजनीतिक जमीन नापने का मौका है। आदर्श नगर में पार्टी के भीतर की खींचतान, सिविल लाइंस में नए चेहरों की आजमाइश और हवामहल में पुराने चेहरों व व्यक्तिगत पकड़ का असर दिख रहा है। यहां भी बागी और निर्दलीय अधिकृत प्रत्याशियों के सामने नई चुनौती बनकर खड़े हैं। इसी बीच, एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी की गुलाबीनगर परिक्रमा ने भी छोटे चुनाव पर बड़ा सियासी तड़का लगा दिया है। दस विधानसभा क्षेत्रों का अपना अलग मिजाज है। कहीं संगठन की पकड़ भारी है, कहीं व्यक्तिगत रिश्ते और राजनीतिक विरासत, तो कहीं बागी उम्मीदवार पूरे गणित को नए सिरे से लिखने की कोशिश में हैं। बगरू में व्यक्तिगत पकड़ और पार्टी की साख आमने-सामने है, किशनपोल में पुराने शहर के स्थानीय और सामाजिक समीकरण अपना रंग दिखा रहे हैं, जबकि आमेर में सीधे मुकाबलों के बीच निर्दलीय तीसरा कोण बना रहे हैं। लेकिन वार्ड की चौखट पर बड़े नेताओं के नाम से ज्यादा सड़क, सीवर, सफाई, जलभराव, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक और अतिक्रमण जैसे सवाल असर डालेंगे। पिछली बार 250 वार्डों वाला जयपुर ग्रेटर और हैरिटेज के दो निगमों में बंटा था। अब शहर फिर एक निगम और 150 वार्डों में लौट आया है। नक्शा बदला है, मगर सियासत की गलियां वही हैं।

जींद में नशे पर बड़ी पंचायत की तैयारी, 14 गांवों के सरपंचों की बैठक में होगा फैसला

 जींद नशा रोकने की मांग को लेकर दो सितंबर को नौगामा खाप ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात करने के बाद बुधवार को माजरा खाप ने भी एसपी कुलदीप सिंह से मुलाकात की। खाप पदाधिकारियों ने नशे पर रोक लगाने के लिए पुलिस से सहयोग मांगा। इस दौरान 15 सितंबर को गांव अशरफगढ़ में नशा मुक्ति को लेकर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रम के लिए एसपी को निमंत्रण दिया गया। एसपी कुलदीप सिंह ने कहा कि यदि खाप इस मामले में आगे आती हैं तो पुलिस के लिए नशा रोकना बड़ा काम नहीं है। नशा बिकता दिखे तो तुंरत करें शिकायत उन्होंने कहा कि यदि किसी के आसपास कोई नशा बेचता है तो उसकी तुरंत पुलिस को शिकायत दें। पुलिस अपने स्तर पर नशा रोकने का काम कर रही है। इसमें पंचायतों का भी सहयोग मिल जाए तो नशे पर जल्द काबू पाया जा सकता है माजरा खाप के प्रधान गुरविंदर सिंह सिंधु ने कहा कि खाप के कई गांवों में नशा काफी बिक रहा है। नशे के कारण कई परिवार बर्बाद हो चुके हैं और युवा पीढ़ी इसकी गिरफ्त में बुरी तरह फंस चुकी है। लड़कियां भी इससे अछूती नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि आज कोई गांव ऐसा नहीं है, जिसमें सूखा नशा न बिकता हो। समय रहते बच्चों को नहीं संभाला गया तो घर बर्बाद हो जाएंगे। प्रदेश में नशे के कारण काफी युवाओं की मौत हो चुकी है और नशे के कारण युवा वर्ग अपराध की तरफ बढ़ रहा है। पुलिस का हर तरह से खाप सहयोग करने को तैयार है। 15 सितंबर को होगा कार्यक्रम सिंधु ने बताया कि युवाओं को जागरूक करने और गांवों को नशे से दूर रखने के लिए 15 सितंबर को अशरफगढ़ में कार्यक्रम होगा। इसमें एसपी कुलदीप सिंह को मुख्यातिथि बनाया गया है। एसपी से मिलने वालों में महेंद्र सिंह सहारण, जयसिंह सैनी, रामफल गोयत, नवाब सिंह, रघुबीर नंबरदार, अमन पिलानियां, जगदीश और सरपंच फूल सिंह शामिल रहे। कल हैबतपुर सचिवालय में होगी बैठक माजरा खाप के प्रवक्ता समुंद्र सिंह फोर ने कहा कि युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में बुरी तरह फंस चुकी है और लड़कियां भी इससे अछूती नहीं हैं। उन्होंने कहा कि 15 सितंबर के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 11 सितंबर को हैबतपुर गांव के सचिवालय में माजरा खाप की पंचायत होगी। इसमें 14 गांवों के मुख्य लोगों के साथ सभी गांवों के सरपंचों को भी बुलाया गया है। पंचायत में नशे के खिलाफ बड़ा फैसला लिया जाएगा।  

जूते बचाने के लिए बुजुर्ग की पीठ पर चढ़ा पटवारी, वीडियो वायरल होते ही हुआ सस्पेंड

सीधी  जिले में एक पटवारी को जूतों की चिंता भारी पड़ गई और उन्हें निलंबित कर दिया गया है। पूरा मामला जिले के माटा गांव का है जहां से एक पटवारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में पटवारी एक बुजुर्ग की पीठ पर लदकर नाला पार करते दिख रहे थे। इस वीडियो के सामने आने के बाद बवाल मचा और अब जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पटवारी को निलंबित कर दिया है। जूते बच गए, पटवारी नहीं माटा गांव में बुजुर्ग व्यक्ति की पीठ पर सवार होकर पटवारी द्वारा पानी से भरे नाले को पार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। कलेक्टर विकास मिश्रा के निर्देश पर अपर कलेक्टर बीपी पाण्डेय ने माटा गांव पहुंचकर पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं। वहीं मामले में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गोपद बनास प्रिया पाठक द्वारा पटवारी हल्का माटा नीलेश नामदेव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। प्रथम दृष्टया असंवेदनशील एवं अपमानजनक व्यवहार पाए जाने पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 के तहत यह कार्रवाई की गई है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बुजुर्ग की पीठ पर लदकर किया था नाला पार पूरा मामला माटा गांव से जुड़ा है, यहां रहने वाले ललवा केवट के घर और जमीन तक एक छोटे से नाले को पार कर ही जाना पड़ता है। पूरे साल इस नाले में थोड़ा बहुत पानी रहता है। करीब एक साल पहले किसान ललवा केवट की फसल और घर को जंगली जानवरों ने नुकसान पहुंचाया था। जंगली जानवरों के कारण हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए माटा गांव के पटवारी नीलेश नामदेव पहुंचे थे। जूते गीले न हों इस कारण नाले को पार करने के लिए पटवारी बुजुर्ग ललवा केवट की पीठ पर लद गए थे और नाला पार किया था। इसका वीडियो सामने आया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।

एजबेस्टन टेस्ट में पाकिस्तान का शर्मनाक प्रदर्शन, टॉप-5 बल्लेबाज मिलकर भी नहीं बना सके 25 रन

 नई दिल्ली इंग्लैंड दौरे पर पाकिस्तान की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. बर्मिंघम के एजबेस्टन में सीरीज के तीसरे टेस्ट में पाकिस्तान की बल्लेबाजी फिर ताश के पत्तों की तरह बिखर गई. मुकाबला बुधवार (9 सि‍तंबर) से शुरू हुआ. इंग्लैंड ने मेहमान टीम को सिर्फ 133 रन पर 33.5 ओवर में ऑलआउट कर दिया. पाकिस्तान की यह पारी इतनी जल्दी खत्म हुई कि एक 16 साल पुराना शर्मनाक रिकॉर्ड टूटते-टूटते रह गया. टॉस जीतकर इंग्लैंड ने पहले गेंदबाजी चुनी और उसके तेज गेंदबाजों ने कप्तान जो रूट के फैसले को सही साबित करने में ज्यादा वक्त नहीं लगाया. पाकिस्तान ने शुरुआती ओवरों से ही विकेट गंवाने शुरू कर दिए. सैम अयूब बिना खाता खोले, जबकि अजान अवैस 9 और अब्दुल्लाह शफीक सिर्फ 3 रन बनाकर लौट गए. शान मसूद भी 5 रन ही बना सके. नतीजा यह रहा कि पाकिस्तान ने शुरुआती 10 ओवर के भीतर ही अपने चार विकेट गंवा दिए और स्कोर 26 रन पर 4 विकेट हो गया. इसके बाद कप्तान बाबर आजम से पारी संभालने की उम्मीद थी, लेकिन वह भी 7 रन बनाकर जोश टंग का शिकार हो गए. बाबर का विकेट गिरते ही पाकिस्तान का स्कोर 48 रन पर 5 विकेट हो गया. सऊद शकील अकेले लड़ते रहे पाकिस्तान की ओर से सिर्फ सऊद शकील ने कुछ देर मोर्चा संभाला. उन्होंने 47 गेंदों पर 43 रन की पारी खेली, जिसमें 7 चौके शामिल थे. लेकिन दूसरे छोर से उन्हें कोई लंबा साथ नहीं मिला. गाजी घोरी 4, मोहम्मद इमरान 5 और राजाउल्लाह 11 रन बनाकर आउट हो गए. सऊद शकील भी 43 रन पर जोश टंग की गेंद पर बोल्ड हो गए. आखिर में मोहम्मद अब्बास ने 21 रन बनाकर टीम को 100 के पार पहुंचाया, लेकिन पाकिस्तान की पारी 133 रन पर ही सिमट गई. मोहम्मद अली 5 रन बनाकर नाबाद रहे. पाकिस्तान के खाते में 20 एक्स्ट्रा रन भी आए, जिसमें 6 बाई और 14 लेग बाई शामिल थे. टंग ने बरपाया कहर, रॉबिन्सन-आर्चर ने भी तोड़ी कमर इंग्लैंड की गेंदबाजी में जोश टंग सबसे घातक रहे. उन्होंने 10 ओवर में एक मेडन डालते हुए 42 रन देकर 4 विकेट झटके. ओली रॉबिन्सन ने 11 ओवर में 15 रन देकर 3 विकेट लिए. उनके लिए यह खास मौका भी रहा, क्योंकि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में अपने 100 विकेट पूरे किए. जोफ्रा आर्चर ने भी 7.5 ओवर में 25 रन देकर 3 विकेट अपने नाम किए. 16 साल पुराना रिकॉर्ड क्यों बच गया? पाकिस्तान की 33.5 ओवर की यह पारी इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में उसकी तीसरी सबसे छोटी पारी है. इससे छोटी दो पारियां साल 2010 में आई थीं. नॉटिंघम में पाकिस्तान 29 ओवर में 80 रन पर ऑलआउट हुआ था, जबकि उसी साल लॉर्ड्स में टीम 33 ओवर में 74 रन पर ढेर हो गई थी. बर्मिंघम में पाकिस्तान 33.5 ओवर तक टिक गया और इस तरह 16 साल पुराना वह रिकॉर्ड टूटने से बच गया. यानी पाकिस्तान ने इस मैच में 133 रन तो बनाए, लेकिन उसके बल्लेबाजों ने एक और शर्मनाक आंकड़ा अपने नाम कर लिया. यह इस सीरीज में पाकिस्तान की सबसे छोटी पारी भी रही है. टॉप-5 का हाल सबसे खराब पाकिस्तान की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसके शुरुआती पांच बल्लेबाजों में कोई भी दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर सका. सैम अयूब 0, अजान अवैस 9, अब्दुल्लाह शफीक 3, शान मसूद 5 और बाबर आजम 7 रन बनाकर आउट हुए. यानी टॉप-5 के खाते में कुल 24 रन आए. यह टेस्ट की पहली पारी में इंग्लैंड में पाकिस्तान के लिए बेहद खराब बल्लेबाजी प्रदर्शन रहा. इंग्लैंड को मिला 23 रन का फायदा पाकिस्तान को 133 रन पर समेटने के बाद इंग्लैंड की शुरुआत भी बहुत शानदार नहीं रही. उसने 39 रन तक अपने तीन विकेट गंवा दिए थे. लेकिन एमिलियो गे ने 60 और हैरी ब्रूक ने नाबाद 52 रन बनाकर पारी को संभाल लिया. दिन का खेल खत्म होने तक इंग्लैंड ने 39 ओवर में 156/4 रन बना लिए थे. इस तरह उसे पाकिस्तान के खिलाफ पहली पारी में 23 रन की बढ़त हासिल हो गई. पाकिस्तान पहले ही सीरीज के शुरुआती दोनों टेस्ट गंवा चुका है. ऐसे में एजबेस्टन में भी उसकी बल्लेबाजी का यही हाल रहा तो इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में क्लीन स्वीप से बचना उसके लिए बड़ी चुनौती होगी.