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हरियाणा में पुरानी गाड़ियों पर सख्ती, 1 अक्टूबर से पेट्रोल-डीजल पर रोक; पंपों पर CCTV से निगरानी

चंडीगढ़  हरियाणा में पुरानी गाड़ियों पर अब सख्ती होने जा रही है. 1 अक्टूबर 2026 से राज्य के NCR वाले इलाकों में ऐसी गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा, जो तय उम्र पूरी कर चुकी हैं. इन गाड़ियों की पहचान के लिए पेट्रोल पंपों पर खास कैमरे लगाए जाएंगे. यह व्यवस्था सबसे पहले गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में लागू होगी।  बताते चलें कि 1 अक्टूबर 2026 से 15 साल से पुरानी पेट्रोल और 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर तेल नहीं मिलेगा. यह नियम गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में लागू होगा. पुरानी गाड़ियों की पहचान के लिए पेट्रोल पंपों पर कैमरे लगाए जाएंगे।  हरियाणा सरकार पहले चरण में इन चार जिलों के पेट्रोल पंपों पर 775 ANPR कैमरे लगाएगी. इन कैमरों से गाड़ी की नंबर प्लेट अपने आप पढ़ी जाएगी. इसके बाद सिस्टम से पता चलेगा कि गाड़ी पुरानी गाड़ियों की तय श्रेणी में आती है या नहीं. इन कैमरों को लगाने पर करीब 41.74 करोड़ रुपये खर्च होंगे. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस योजना को मंजूरी दी है. हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि कैमरे लगाने का काम 30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  किस जिले में कितने कैमरे लगेंगे? पहले चरण में गुरुग्राम में सबसे ज्यादा 249 कैमरे लगाए जाएंगे. इसके बाद सोनीपत में 215, झज्जर में 195 और फरीदाबाद में 116 कैमरे लगाए जाएंगे. सरकार के मुताबिक पूरे हरियाणा में आगे चलकर करीब 2,780 ANPR कैमरों की जरूरत होगी।  पेट्रोल पंप पर ऐसे होगी गाड़ी की पहचान जब कोई गाड़ी पेट्रोल पंप पर पहुंचेगी तो कैमरा उसकी नंबर प्लेट पढ़ेगा. सिस्टम के जरिए गाड़ी की जानकारी चेक की जाएगी. अगर गाड़ी तय उम्र पूरी कर चुकी है और वह ‘End-of-Life Vehicle’ की श्रेणी में आती है, तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा. यह कदम NCR में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए उठाया गया है. हरियाणा सरकार यह काम वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के तहत कर रही है।  सरकार का कहना है कि कैमरों की मदद से पुरानी गाड़ियों की पहचान आसान होगी और प्रदूषण से जुड़े नियमों को लागू करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही हरियाणा में पेट्रोल पंपों पर नंबर प्लेट के जरिए गाड़ियों की जांच वाली व्यवस्था को और बढ़ाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक की मदद से प्रदूषण फैलाने वाली पुरानी गाड़ियों पर रोक लगाई जा सके। 

नंदीग्राम में ममता बनर्जी को घेरने की BJP की रणनीति, क्या बदलेगा चुनावी गणित?

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की हाई प्रोफाइल नंदीग्राम सीट पर होने वाले उपचुनाव ने सियासी पारा चढ़ा दिया है. बीजेपी ने पूर्व पीए स्वर्गीय चंद्रनाथ रथ की मां हासीरानी रथ को टिकट देकर बड़ा इमोशनल दांव चला है. टीएमसी में बगावत, कांग्रेस के अलग लड़ने और हुमायूं कबीर के तेवरों से ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं. वहीं शुभेंदु अधिकारी ने 2 करोड़ की सुपारी के आरोप लगाकर नया बवंडर खड़ा कर दिया है. पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव ने सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. इस पूरे सियासी घमासान में सबसे ज्यादा चर्चा हाई प्रोफाइल नंदीग्राम सीट की हो रही है. इस सीट को लेकर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की टेंशन अलग ही लेवल पर पहुंच चुकी है।  भवानीपुर सीट अपने पास रखने के बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई थी. अब इसी सीट पर बीजेपी ने एक ऐसा चौंकाने वाला नाम सामने रख दिया है, जिसने तृणमूल कांग्रेस के खेमे में खलबली मचा दी है. पार्टी के लिए अब इस सीट को बचाना एक बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती बन चुका है।  नंदीग्राम में बीजेपी ने किस इमोशनल कार्ड से बढ़ाई ममता की बेचैनी? बीजेपी ने नंदीग्राम उपचुनाव के लिए हासीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है. हासीरानी रथ खुद एक सक्रिय बीजेपी कार्यकर्ता हैं. वे शुभेंदु अधिकारी के पूर्व पीए रहे स्वर्गीय चंद्रनाथ रथ की मां हैं. 6 मई 2026 को विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद उत्तर 24 परगना में चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।  बीजेपी ने हासीरानी रथ को टिकट देकर साफ संदेश दिया है कि पार्टी अपने हर एक कार्यकर्ता के साथ मजबूती से खड़ी है. इससे पहले आरजी कर केस के दौरान भी बीजेपी ने पीड़ित महिला डॉक्टर की मां को चुनावी मैदान में उतारा था।  जनता ने उस भावुक अपील पर मुहर लगाई और उन्होंने जीत दर्ज की. अब पार्टी ने उसी रणनीति और इमोशन के साथ हासीरानी रथ को नंदीग्राम के रण में उतारा है. हासीरानी रथ के नामांकन के दौरान खुद शुभेंदु अधिकारी मौजूद रहे।  क्या टीएमसी की आपसी फूट ने नंदीग्राम में मुकाबला त्रिकोणीय बना दिया है?     नंदीग्राम में इस बार राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं. मुकाबला सिर्फ बीजेपी और टीएमसी के बीच सीमित नहीं रह गया है. इस बार जमीनी स्तर पर टीएमसी बनाम टीएमसी की जंग देखने को मिल रही है.     पार्टी दो गुटों में बंट चुकी है और दोनों ही खेमों ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं. टीएमसी ने संचिता प्रधान को अधिकृत उम्मीदवार बनाया है।  वहीं बागी धड़े ने मोहम्मद एतेशामुल हक के नाम का ऐलान कर दिया है.     वोटों के इसी संभावित बंटवारे को देखते हुए शायद ममता बनर्जी खुद इस बार नंदीग्राम से नहीं उतरीं. हालांकि बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने यह पेशकश की थी कि अगर ममता खुद चुनाव लड़ेंगी तो वे अपना उम्मीदवार वापस ले लेंगे. ममता के चुनाव न लड़ने से 15 साल में पहली बार ऐसा होगा जब वे विधानसभा में मौजूद नहीं रहेंगी।  शुभेंदु अधिकारी का कितना बड़ा फैक्टर रहेगा इस उपचुनाव में? नंदीग्राम सीट पर बीजेपी की स्थिति लगातार मजबूत मानी जा रही है. साल 2021 के मुकाबले 2026 के आम चुनाव में जीत का अंतर काफी बड़ा रहा था. उपचुनाव में सत्ता पक्ष का दबदबा रहने के बावजूद शुभेंदु अधिकारी की मजबूत पकड़ यहां गेमचेंजर साबित हो सकती है।  शुभेंदु अधिकारी का पूरा समर्थन और संगठन की ताकत हासीरानी रथ के पीछे खड़ी है. शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि इस बार बीजेपी यहां 50 हजार से ज्यादा के बड़े अंतर से जीत दर्ज करेगी. इसके साथ ही हासीरानी रथ को मिलने वाले सहानुभूति के वोट ममता बनर्जी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।  कांग्रेस ने कैसे फेरा ममता बनर्जी की चुनावी उम्मीदों पर पानी? नंदीग्राम की मुश्किलों के बीच ममता बनर्जी को कांग्रेस से भी कोई राहत नहीं मिली है. सूत्रों के मुताबिक उपचुनाव को लेकर टीएमसी ने कांग्रेस को एक खास फॉर्मूले की पेशकश की थी. प्रस्ताव यह था कि कांग्रेस नंदीग्राम से लड़े और रेजीनगर की सीट टीएमसी के लिए छोड़ दे।  कांग्रेस हाईकमान ने इस फॉर्मूले को सीधे तौर पर ठुकरा दिया. राहुल गांधी की पार्टी ने दोनों ही सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है. वामदलों की मौजूदगी के साथ कांग्रेस के अलग लड़ने से पूरा मुकाबला मल्टी-कॉर्नर हो चुका है. इसका सीधा नुकसान सत्ताधारी पार्टी को उठाना पड़ सकता है।  रेजीनगर में हुमायूं कबीर ने दीदी के लिए क्या नया चक्रव्यूह रचा है? उपचुनाव की दूसरी सीट रेजीनगर भी ममता बनर्जी के लिए आसान नहीं रहने वाली है. यह सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी. यहां भी टीएमसी के बागी गुट ने अपना अलग उम्मीदवार मैदान में उतार दिया है।  हुमायूं कबीर ने अपने बेटे को निर्दलीय मैदान में उतारकर मुकाबले को बेहद पेचीदा बना दिया है. रेजीनगर में हुमायूं कबीर का अपना मजबूत जनाधार है. ऐसे में टीएमसी के लिए अपने परंपरागत वोटों को एकजुट रखना बहुत मुश्किल नजर आ रहा है।  2 करोड़ की सुपारी वाले आरोप से बंगाल की सियासत में कैसे आया उबाल? चुनावी माहौल के बीच चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर शुभेंदु अधिकारी ने एक बहुत बड़ा और सनसनीखेज खुलासा किया है. शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि उनके पूर्व पीए की हत्या कोई सामान्य वारदात नहीं थी. इसके लिए बाकायदा 2 करोड़ रुपये की सुपारी दी गई थी।  शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर निशाना साधते हुए कहा कि यह रकम भाईपो गैंग की तरफ से दी गई थी. शुभेंदु ने कहा, ‘मैं जितना जानता हूं, ये पैसा विपुल को दो करोड़ रुपये देने के लिए दिया गया है, संद्रा को खत्म करने के लिए. इसमें आपके भतीजे का गैंग जुड़ा हुआ है. इसका CBI इन्वेस्टिगेशन करे, ये मेरा विश्वास है. लेकिन CBI अब तक बहुत दूर है। 

IPL 2027 ऑक्शन को लेकर BCCI का बड़ा फैसला, इस बार भारत में होगी खिलाड़ियों की नीलामी

नई दिल्ली IPL 2027 की नीलामी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने तय किया है कि इस बार IPL का ऑक्शन भारत में ही आयोजित किया जाएगा. यानी हाल के वर्षों की तरह मिनी ऑक्शन के लिए फ्रेंचाइजियों को विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।  IPL गवर्निंग काउंसिल की मंगलवार (15 सितंबर) को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया. इस बार ऑक्शन 'मिनी ऑक्शन' होगा. हालांकि, आयोजन के लिए भारत में किस शहर को चुना जाएगा, इसका फैसला अभी नहीं हुआ है. 'क्रिकबज' की र‍िपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है।  पिछले कुछ सालों में IPL ऑक्शन लगातार विदेश में आयोजित होता रहा है. 2023 में नीलामी कोच्चि में हुई थी, लेकिन इसके बाद ऑक्शन के लिए विदेश का रुख किया गया।  इसके बाद दुबई, जेद्दा और अबू धाबी जैसे शहर IPL ऑक्शन की मेजबानी कर चुके हैं. हालांकि, 2027 के मिनी ऑक्शन के लिए BCCI ने इस ट्रेंड को बदलने का फैसला किया है।  जानकारी के मुताबिक, अगले साल होने वाला मेगा ऑक्शन फिर विदेश में आयोजित किया जा सकता है. यानी फिलहाल भारत में ऑक्शन कराने का फैसला खास तौर पर इस साल के मिनी ऑक्शन के लिए है।  वहीं WPL 2027 का ऑक्शन 28 अक्टूबर को कोच्चि में होने की संभावना है, और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) आने वाले सीजन के लिए वेन्यू प्लान पर भी काम कर रहा है।  फ्रेंचाइजियों की परेशानी को देखते हुए बदला प्लान IPL फ्रेंचाइजियों ने विदेश में मिनी ऑक्शन कराने को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं. टीमों के लिए अपनी पूरी डेलिगेशन को विदेश ले जाना लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल स्तर पर चुनौतीपूर्ण होता है।  पिछले साल अबू धाबी में हुए ऑक्शन के दौरान भी फ्रेंचाइजियों की तरफ से इस तरह की दिक्कतों का मुद्दा सामने आया था. इसके बाद BCCI ने उनकी राय को ध्यान में रखते हुए इस बार भारत में ही ऑक्शन कराने का फैसला किया।  किस शहर में होगी नीलामी? ऑक्शन की तारीख और शहर का ऐलान अभी नहीं हुआ है. इसके लिए सबसे बड़ा फैक्टर फ्रेंचाइजियों और उनकी डेलिगेशन के लिए होटल की उपलब्धता होगी।  भारत में अक्टूबर से दिसंबर के बीच शादी का सीजन रहता है. ऐसे में इस अवधि में बड़े शहरों के फाइव स्टार होटलों में कमरों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती हो सकती है. BCCI को ऑक्शन के लिए कम से कम दो रातों के लिए 100 से ज्यादा कमरों की जरूरत होगी. इसी वजह से शहर का चुनाव होटल की उपलब्धता को ध्यान में रखकर किया जाएगा।  इम्पैक्ट प्लेयर रूल पर अभी फैसला नहीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इम्पैक्ट प्लेयर रूल को लेकर भी चर्चा हुई, लेकिन इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया. BCCI ने इस मुद्दे को फिलहाल खुला रखा है. अब करीब एक महीने बाद IPL गवर्निंग काउंसिल की एक और बैठक बुलाई जाएगी. इसी बैठक में इम्पैक्ट प्लेयर रूल के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।  इम्पैक्ट प्लेयर रूल का कौन कर रहा है व‍िरोध? इम्पैक्ट प्लेयर रूल को लेकर ज्यादातर फ्रेंचाइजियां इसके जारी रहने के पक्ष में नहीं हैं. हालांकि, कई टीमों का यह भी मानना है कि अगर नियम को खत्म करना ही है तो इसे अगले साल से हटाना बेहतर होगा।  कुछ फ्रेंचाइजियों ने यह तर्क भी दिया है कि उन्होंने रूल को ध्यान में रखकर अपनी टीमों का संतुलन तैयार किया है. इसलिए अचानक नियम हटाने के बजाय कम से कम एक और सीजन इसे जारी रखने का विकल्प देखा जा सकता है।  अब गवर्निंग काउंसिल की अगली बैठक में इस पर तस्वीर साफ होगी. फिलहाल इतना तय है कि IPL 2027 का मिनी ऑक्शन विदेश में नहीं, भारत में कराने का फैसला हो चुका है। 

नए यूपी का स्पोर्ट्स मॉडल होगा खास, ट्रेड शो में दिखेगी खेल प्रतिभा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की झलक

खेल प्रतिभा से वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर तक, ट्रेड शो में दिखेगा नए यूपी का स्पोर्ट्स मॉडल इंटरनेशनल ट्रेड शो में पहली बार खेल विभाग का भव्य पवेलियन 200 वर्ग मीटर के पवेलियन में खेल निदेशालय, युवा कल्याण, स्पोर्ट्स कॉलेज और खेल यूनिवर्सिटी की होगी संयुक्त भागीदारी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां, वीडियो बाइट्स और तस्वीरों के जरिए दिखेगी यूपी की खेल प्रतिभा आधुनिक खेल परियोजनाओं के 3डी मॉडल होंगे आकर्षण का केंद्र जेन-जी को खेलों से जोड़ने के साथ एआई के इस्तेमाल और खेल प्रतिभाओं के डिजिटल डेटा प्रबंधन की भी दिखाई जाएगी झलक लखनऊ,  योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में खेलों और खेल सुविधाओं के तेजी से विस्तार को अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रदर्शित किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले पांच दिवसीय यूपी इंटरनेशन ट्रेड शो-4.0 में पहली बार प्रदेश का खेल विभाग अपनी व्यापक भागीदारी दर्ज कराने जा रहा है। खेल विभाग की ओर से करीब 200 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में विशेष पवेलियन तैयार किया जा रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश के खेल क्षेत्र की उपलब्धियों, खिलाड़ियों की सफलता, आधुनिक खेल सुविधाओं और भविष्य की योजनाओं को एक साथ प्रदर्शित किया जाएगा। इस पवेलियन में उत्तर प्रदेश सरकार के खेल विभाग के चार प्रमुख अंग संयुक्त रूप से प्रतिभाग करेंगे। इसमें खेल निदेशालय, प्रादेशिक विकास दल एवं युवा कल्याण विभाग, स्पोर्ट्स कॉलेज और मेरठ में विकसित हो रही खेल यूनिवर्सिटी शामिल हैं। शासन स्तर पर इस आयोजन के नोडल अधिकारी विशेष सचिव कुमार विनीत होंगे, जबकि खेल विभाग की ओर से भी इसकी तैयारियों के लिए नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है। उपलब्धियों से लेकर खिलाड़ियों तक की होगी झलक ट्रेड शो में खेल विभाग की उपलब्धियों को आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया जाएगा। पवेलियन में प्रदेश से निकले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की उपलब्धियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। खिलाड़ियों के वीडियो बाइट्स, उनकी तस्वीरों और उपलब्धियों से जुड़ी सामग्री के माध्यम से आगंतुकों को उत्तर प्रदेश की खेल प्रतिभाओं से परिचित कराया जाएगा। इसके लिए टीवी पैनल और डिजिटल डिस्प्ले का भी इस्तेमाल होगा। योगी सरकार के दौर में तैयार किए जा रहे वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा। अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर सहित प्रदेश में विकसित हो रही प्रमुख खेल सुविधाओं के साथ मेरठ में बन रही खेल यूनिवर्सिटी को भी पवेलियन में जगह मिलेगी। इन परियोजनाओं के 3डी मॉडल तैयार कर प्रदर्शित किए जाएंगे। साथ ही प्रदेश के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर तैयार की जा रही डॉक्यूमेंट्री भी ट्रेड शो के दौरान दिखाई जाएगी। युवा कल्याण विभाग की उपलब्धियां भी होंगी प्रदर्शित पवेलियन में युवा कल्याण विभाग की गतिविधियों और उपलब्धियों को भी प्रमुखता दी जाएगी। युवक मंगल दल और महिला मंगल दल से जुड़ी गतिविधियों और उपलब्धियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किए गए प्रमाणपत्रों, पुरस्कारों और मेडल्स को भी गैलरी के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा।  गेमिंग जोन बनेगा आकर्षण का केंद्र पवेलियन को केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे पूरी तरह इंटरएक्टिव बनाने की तैयारी है। इसके लिए एक विशेष गेमिंग जोन बनाया जा रहा है, जिसमें फुटबॉल, हॉकी और टेबल टेनिस समेत चार खेलों से जुड़े गेम शामिल किए जाएंगे। ट्रेड शो में आने वाले दर्शक इन खेलों का छोटा सा इंटरएक्टिव अनुभव ले सकेंगे। बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को छोटे उपहार और चॉकलेट आदि देकर प्रोत्साहित किया जाएगा। जेन-जी को खेलों से जोड़ने पर जोर आज की युवा पीढ़ी और खासकर जेन-जी को सकारात्मक ऊर्जा के साथ खेलों से जोड़ने पर भी पवेलियन में विशेष प्रस्तुति होगी। इसका उद्देश्य युवाओं को खेल, फिटनेस, अनुशासन और सकारात्मक सोच की दिशा में प्रेरित करना है। खेल विभाग की कोशिश होगी कि युवा पीढ़ी खेलों को केवल प्रतियोगिता के तौर पर नहीं, बल्कि बेहतर और स्वस्थ जीवनशैली के माध्यम के रूप में भी देखे। खेलों में एआई के इस्तेमाल की भी झलक पवेलियन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के खेल क्षेत्र में इस्तेमाल की संभावनाओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। खिलाड़ियों के लिए एआई का उपयोग, खेल प्रतिभाओं के डेटा बेस के बेहतर प्रबंधन और भविष्य में तकनीक के माध्यम से खेल गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की प्रस्तुति होगी। उच्च उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना से खिलाड़ियों को मिल रहा बेहतर प्रशिक्षण खेल विभाग के विशेष सचिव विनीत कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्पोर्ट्स कॉलेजों ने खेल नर्सरी के रूप में दशकों से देश और विश्व पटल पर प्रदेश की प्रतिभाओं को पहचान दिलाई है। इन संस्थानों से निकले खिलाड़ी विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर आसीन होने के साथ राष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अब खेल प्रतिभाओं को और बेहतर संबल देने के लिए प्रतियोगिताओं की तैयारी से लेकर शासकीय सेवा तक सहायता दी जा रही है। खेल विद्यालय, खेल विश्वविद्यालय, स्पोर्ट्स हॉस्टल और उच्च उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। साई के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को सुविधाएं, ग्रामीण प्रतिभाओं को प्रोत्साहन तथा स्टेडियमों में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के उपकरण व सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

भारत में बनेगा मेगा शिपबिल्डिंग क्लस्टर, ₹27,000 करोड़ से खुलेंगे 90,000 रोजगार के रास्ते

 मुंबई महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में जल्द ही एक बड़ा शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट आकार ले सकता है. दिघी में करीब ₹27,000 करोड़ के निवेश से ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर बनाने की तैयारी है. महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से करीब 90,000 रोजगार के मौके बन सकते हैं. प्रोजेक्ट को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड(MDL) आगे बढ़ाएगी और यहां बड़े कमर्शियल जहाजों के निर्माण के लिए आधुनिक सुविधाएं तैयार की जाएंगी।  महाराष्ट्र सरकार की ओर से मंगलवार को जारी रिलीज के मुताबिक, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने नेशनल शिपबिल्डिंग इंडस्ट्रियल पार्क एंड मरीन लॉजिस्टिक्स (NSHIPML) के साथ मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) साइन किया है. यह समझौता मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में हुआ. इस प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर डेवलपमेंट योजना के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है. इसका मकसद देश में बड़े स्तर पर जहाज बनाने की क्षमता बढ़ाना और शिपबिल्डिंग से जुड़ी पूरी इंडस्ट्री को मजबूत करना है।  ₹27,000 करोड़ का निवेश, बड़े जहाज बनेंगे प्रस्तावित प्रोजेक्ट में करीब ₹27,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा. सरकार के मुताबिक, दिघी में बनने वाले क्लस्टर में बड़े कमर्शियल वेसल्स यानी कारोबारी जहाज बनाए जा सकेंगे. इस प्रोजेक्ट से भारत की मैरीटाइम इंडस्ट्री से जुड़ी क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. साथ ही जहाज निर्माण से जुड़े दूसरे कारोबार, सप्लाई चेन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।  सालाना 2 मिलियन ग्रॉस टन क्षमता का लक्ष्य समझौते के तहत MDL ने दिघी में कम से कम 2 मिलियन ग्रॉस टन सालाना शिपबिल्डिंग क्षमता तैयार करने का लक्ष्य रखा है. इसका मतलब है कि क्लस्टर को काफी बड़े स्तर पर विकसित करने की योजना है. यहां सिर्फ जहाज बनाने की सुविधा ही नहीं होगी, बल्कि शिपबिल्डिंग से जुड़े दूसरे कामों के लिए भी जरूरी ढांचा तैयार किया जाएगा. दिघी का ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर महाराष्ट्र मेरिटाइम बोर्ड और मुंबई पोर्ट अथॉरिटी मिलकर विकसित कर रहे हैं. इसके लिए NSHIPML को स्पेशल पर्पज कंपनी (SPC) के तौर पर बनाया गया है. सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट 'मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047' के लक्ष्यों के साथ भी जुड़ा है।  शिपबिल्डिंग के साथ पूरा इकोसिस्टम बनेगा सरकारी रिलीज के मुताबिक, प्रोजेक्ट के तहत आधुनिक शिपबिल्डिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा. इसके साथ मैरीटाइम इंडस्ट्री को जरूरी सपोर्ट देने वाला इंडस्ट्रियल और सप्लाई चेन नेटवर्क भी विकसित होगा. इससे जहाज निर्माण के लिए जरूरी सामान, सेवाओं और दूसरी औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि इससे भारत में शिपबिल्डिंग की क्षमता बढ़ेगी और नई तकनीक व निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।  90 हजार रोजगार के मौके बनने की उम्मीद इस प्रोजेक्ट का एक बड़ा असर रोजगार के मोर्चे पर भी देखने को मिल सकता है. महाराष्ट्र सरकार ने करीब 90,000 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद जताई है. इनमें शिपबिल्डिंग के अलावा सप्लाई चेन और इससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी शामिल हो सकते हैं. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन जगमोहन ने कहा कि कंपनी सभी स्टेकहोल्डर्स के सहयोग से दिघी में आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिपबिल्डिंग सुविधा तैयार करने की दिशा में काम करेगी. MoU पर कैप्टन जगमोहन और NSHIPML के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रदीप पी ने हस्ताक्षर किए।  भारत के शिपबिल्डिंग सेक्टर के लिए अहम दिघी का यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक शिपयार्ड बनाने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए बड़े जहाजों के निर्माण की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ उससे जुड़े उद्योगों का नेटवर्क तैयार करने की योजना है. अगर प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है तो इससे महाराष्ट्र के साथ-साथ देश के शिपबिल्डिंग और समुद्री उद्योग को भी फायदा मिल सकता है। 

Sahara Refund को लेकर बड़ा सवाल, क्या दोबारा करना पड़ेगा क्लेम? समझें पूरा नियम

नई दिल्ली चाय की दुकान चलाने वाले कुशीनगर जिले के दिनेश का सहारा में 4 लाख रुपये से अधिक फंसे हैं। नगर पंचायत मथौली बाजार के प्रमोद जायसवाल और उनके परिवार के कई सदस्यों के भी सहारा में फंसे लाखों रुपये अभी तक रिफंड नहीं हुए। जबकि, इन लोगों ने सहारा रिफंड पोर्टल पर अप्लाई कर चुके हैं। दिनेश और प्रमोद जैसे लाखों निवेशकों के मन अब भी एक ही सवाल गूंज रहा है कि आवेदन किए कई महीने गुजर गए तो क्या फिर से अप्लाई करना पड़ेगा? इसका सीधा जवाब है नहीं। अगर आपने साल 2023 या 2024 या फिर 2025 में क्लेम कर दिया था और अभी तक पैसा नहीं आया, तो सिर्फ पैसा नहीं आने के कारण नया क्लेम न करें। पहले पुराने क्लेम का Status देखें। जिन लोगों ने पहले CRCS-Sahara Refund Portal पर क्लेम कर दिया है, उन्हें सामान्य स्थिति में दोबारा नया क्लेम दाखिल करने की जरूरत नहीं है, लेकिन यहां एक जरूरी अंतर है। क्लेम पहले से जमा है और कोई कमी/Deficiency नहीं बताई गई है तो दोबारा आवेदन न करें। पुराने क्लेम की प्रोसेसिंग का इंतजार करें। अगर पोर्टल पर दिए गए स्टेटस या आपके रजिस्टर्ड नंबर पर मिले SMS में कोई कमी बताई गई है तो उसी पुराने क्लेम को Resubmission Portal पर सुधारकर दोबारा जमा करना करें। अगर Payment Failed दिख रहा है तो इसके लिए भी Resubmission Portal के जरिए निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी। अगर पहले कभी क्लेम नहीं किया तो क्या करें अगर अबतक आपने क्लेम नहीं किया है तो नया क्लेम CRCS-Sahara Refund Portal पर करना है। Resubmission में नया क्लेम जोड़ना संभव नहीं है। वह पुराने क्लेम की कमी दूर करने के लिए है। अभी सबसे जरूरी काम ये करना है अगर आपने पहले क्लेम किया था तो पहले अपना CRN डालकर Status/Remarks चेक करें। अगर वहां Deficiency या Resubmission Required जैसा मैसेज नहीं है, तो केवल नए सिरे से आवेदन करने की जरूरत नहीं है। बता दें सरकार ने 8 सितंबर 2026 को बताया कि अब तक ₹9,267 करोड़ 41.56 लाख जमाकर्ताओं को वापस किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 20 लाख आवेदन प्रोसेसिंग के लिए बाकी थे। सहारा रिफंड क्लेम स्टेटस को ऐसे जांचें     सबसे पहले पहले अपना पुराना क्लेम चेक करें। इसके लिए आधिकारिक पोर्टल CRCS-Sahara Refund पर जाएं।     यहां अपने रजिस्टर्ड मोबाइल/आधार से लॉगिन करके Claim/Refund Status देखें।  Status में क्या लिखा हो तो क्या करें?     अगर लिखा है Under Process / Processing तो नया आवेदन न करें, पुराने क्लेम की प्रक्रिया का इंतजार करें।     अगर लिखा है Verified / Eligible तो भुगतान की प्रक्रिया का इंतजार करें।     अगर लिखा है Payment Processed/Success तो अपने आधार से लिंक्ड बैंक खाते में पेमेंट को चेक करें।     अगर लिख है Deficiency Communicated तो कमी दूर करके Resubmission Portal पर दोबारा जमा करें।     अगर लिखा है Rejected/Deficiency तो पोर्टल पर बताई गई वजह देखें और यदि Resubmission उपलब्ध है तो सुधार करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ कमी पाए जाने वाले पुराने क्लेम को सुधारने के लिए Resubmission Portal का इस्तेमाल करना है। Deficiency आई है तो कहां जाएं यह नया क्लेम करने वाला पोर्टल नहीं है। यह पहले जमा किए गए क्लेम में बताई गई कमी को सुधारकर फिर जमा करने के लिए है। सितंबर 2026 की सरकार की सूचना भी यही कहती है।

2020 संपर्क कार्यालय विस्फोट मामले में नॉर्थ कोरिया पर भारी जुर्माना, कोर्ट ने सुनाया फैसला

सियोल नॉर्थ कोरिया ने 2020 में गुस्से में साउथ कोरिया का एक साझा संपर्क कार्यालय ही उड़ा दिया था. अब करीब 6 साल बाद इस मामले में साउथ कोरिया की कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने नॉर्थ कोरिया को 44.6 अरब वॉन (करीब 32. 5 करोड़ डॉलर) का भुगतान करने का आदेश दिया है. रकम कएसोंग में बनाए गए संयुक्त संपर्क कार्यालय को उड़ाने से हुए नुकसान के लिए है।  हालांकि इस फैसले का असर फिलहाल प्रतीकात्मक ही माना जा रहा है. इसकी वजह यह है कि साउथ कोरिया के पास नॉर्थ कोरिया से इस रकम की वसूली कराने का कोई साफ रास्ता नहीं है. दोनों देशों के बीच राजनयिक रिश्ते बेहद खराब हैं. ऐसे में कोर्ट का आदेश लागू कराना बड़ी चुनौती है।  यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार साउथ कोरिया की सरकार ने नॉर्थ कोरिया के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा किया था. इससे पहले कुछ लोग मानवाधिकार उल्लंघन और दूसरे मामलों को लेकर नॉर्थ कोरिया की सरकार पर मुकदमा कर चुके हैं।  साउथ कोरिया ने 2023 में यह केस दायर किया था. सरकार ने कहा था कि नॉर्थ कोरिया ने कएसोंग में संपर्क कार्यालय को उड़ाकर गैरकानूनी और हिंसक कार्रवाई की. इससे दोनों देशों के बीच हुए पुराने समझौतों का उल्लंघन हुआ. साथ ही आपसी सम्मान और भरोसे को भी बड़ा नुकसान पहुंचा।  दरअसल, यह संयुक्त संपर्क कार्यालय कएसोंग में बनाया गया था. इसका मकसद दोनों देशों के बीच बातचीत और संपर्क का रास्ता बनाए रखना था. लेकिन 2020 में दोनों देशों के रिश्ते तेजी से बिगड़ने लगे।  जून 2020 में नॉर्थ कोरिया ने विस्फोट करके इस इमारत को उड़ा दिया. उस समय इमारत खाली थी. कोरोना महामारी के कारण नॉर्थ कोरिया ने जनवरी में ही दफ्तर बंद कर दिया था।  नॉर्थ कोरिया साउथ कोरिया से इस बात पर नाराज था कि वह उत्तर कोरियाई लोगों को सीमा पार गुब्बारों के जरिए प्योंगयांग विरोधी पर्चे भेजने से नहीं रोक रहा था. इसी मुद्दे को लेकर उसने सियोल के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई थी।  न्यूक्लियर वार्ता टूटने के बाद बढ़ा तनाव दफ्तर को उड़ाने की घटना को सिर्फ सीमा विवाद के तौर पर नहीं देखा गया था. उस समय अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच परमाणु वार्ता भी ठप हो चुकी थी।  2018 में नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पहली शिखर वार्ता हुई थी. तत्कालीन साउथ कोरियाई राष्ट्रपति मून जे-इन ने दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने में अहम भूमिका निभाई थी।  लेकिन 2019 में किम और ट्रंप की दूसरी मुलाकात के बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी. नॉर्थ कोरिया प्रतिबंधों में बड़ी राहत चाहता था. बदले में वह अपने परमाणु कार्यक्रम के कुछ हिस्से को छोड़ने की बात कर रहा था. अमेरिका ने उसकी मांग स्वीकार नहीं की. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता गया. नॉर्थ कोरिया ने अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को और तेज कर दिया।  साउथ कोरिया में पिछले साल सत्ता बदलने के बाद नॉर्थ कोरिया को लेकर सरकार का रुख कुछ नरम हुआ. मौजूदा राष्ट्रपति ली जे म्यंग ने प्योंगयांग के साथ बातचीत फिर शुरू करने की अपील की. लेकिन नॉर्थ कोरिया ने अब तक इन अपीलों को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है. किम जोंग उन ने साउथ कोरिया को अपना सबसे शत्रुतापूर्ण देश तक बताया है।  नॉर्थ कोरिया ने इसी दौरान रूस और चीन के साथ अपने रिश्ते भी मजबूत किए हैं. रूस के साथ उसकी सैन्य साझेदारी बढ़ी है. अमेरिका की ओर से भी किम के साथ फिर बातचीत शुरू करने में रुचि दिखाई गई है. लेकिन प्योंगयांग ने अभी तक बातचीत के अमेरिकी प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया है।  साउथ कोरिया ने कहा- बातचीत से ही सुलझेगा मामला साउथ कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात कही है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत फिर शुरू होनी चाहिए।  मंत्रालय के मुताबिक, दक्षिण और उत्तर के बीच सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और सहयोग के जरिए किया जाना चाहिए. वहीं नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया ने अदालत के इस फैसले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।  इस तरह 2020 में उड़ाया गया एक दफ्तर अब दोनों देशों के बिगड़े रिश्तों और रुकी हुई बातचीत का प्रतीक बन गया है. अदालत का फैसला साउथ कोरिया के पक्ष में आया है, लेकिन नॉर्थ कोरिया से रकम की वसूली और दोनों देशों के बीच संवाद बहाल करना अभी भी बड़ी चुनौती है।   

भिलाई के गीतांश बामनिया की बड़ी कामयाबी, Rentomojo ला रही ₹1,266 करोड़ का IPO

भिलाई   शहर के कारोबारी गीतांश बामनिया ने अपनी कंपनी रेंटोमोजो का 1,266 करोड़ का आइपीओ बाजार में उतारकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रेंटोमोजो की इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) 9 सितंबर को खुली और 11 सितंबर को बंद हुई। कंपनी की शेयर बाजार में लिस्टिंग 17 सितंबर को प्रस्तावित है। बता दें कि रेंटोमोजो एक प्रमुख भारतीय आनलाइन रेंटल प्लेटफार्म है। यह कंपनी ग्राहकों को घर और आफिस के उपयोग के लिए फर्नीचर, घरेलू उपकरण (जैसे फ्रिज, वाशिंग मशीन) और इलेक्ट्रानिक्स सामान मासिक किराए या सब्सक्रिप्शन माडल पर उपलब्ध कराती है। भिलाई में पले-बढ़े, दो स्टार्टअप रहे असफल     गीतांश भिलाई में ही पले-बढ़े हैं। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के सेक्टर-10 इंग्लिश मीडियम हायर सेकंडरी स्कूल से पढ़ाई करने वाले गीतांश ने आइआइटी मद्रास से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है।  इसके बाद उन्होंने केपीएमजी और फ्लिपकार्ट जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में काम किया। फिर उन्होंने खुद उद्यमी बनने का निर्णय लिया, दो स्टार्टअप भी शुरू किए, जो असफल रहे।     असफलता से सीखते हुए उन्होंने वर्ष 2012 में ‘रेंटोमोजो’ की शुरुआत की। धीरे-धीरे कंपनी ने अपने कारोबार का विस्तार किया और ग्राहकों के बीच अपनी जगह बनाई। असफलताओं से मिली सीख बनी कारोबार की ताकत     रेंटोमोजो के सफर में गीतांश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने शुरुआती असफलताओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।  कारोबार में आने वाली चुनौतियों को समझते हुए उन्होंने माडल में बदलाव किए और बाजार की जरूरत के अनुरूप कंपनी को आगे बढ़ाया। अब 1,266 करोड़ रुपये के आइपीओ के जरिए कंपनी ने पहली बार अपने शेयर आम निवेशकों के लिए पेश किए हैं। शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री बाजार में की जा सकेगी। पिता से कारोबार की प्रेरणा, मां चिकित्सा क्षेत्र में रहीं अग्रणी गीतांश अपने कारोबारी दृष्टिकोण के लिए परिवार से मिली प्रेरणा को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके पिता जगदीश बामनिया भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत रहे और सेवानिवृत्ति के बाद करीब 10 वर्षों तक पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर के व्यवसाय से जुड़े रहे। उनकी मां डॉ. मीरा बामनिया बीएसपी के जेएलएन अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर सेक्टर-नौ में बाल एवं शिशु रोग विभाग की प्रमुख रहीं और वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त हुईं।

2017 कांस्टेबल भर्ती मामला: 400 से ज्यादा अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, SC ने SLP की खारिज

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ में कांस्टेबल भर्ती के सैकड़ों प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में 2259 कांस्टेबल पदों की भर्ती से जुड़े मामले में छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज कर दी है। इससे 400 से ज्यादा प्रतीक्षारत कांस्टेबल अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ होने की उम्मीद बढ़ गई है। मामला प्रतीक्षा सूची से रिक्त पदों को भरे जाने के अधिकार को लेकर लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में था। हाई कोर्ट ने सुनाया था अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला     मामला पारस राम ध्रुव एवं अन्य की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक फरवरी 2024 को अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि पुलिस कांस्टेबल सेवा नियम, 2007 के नियम 13(2) के तहत वैध प्रतीक्षा सूची से रिक्त पदों को भरा जा सकता है। हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार भर्ती प्रक्रिया के दौरान प्रोन्नति, सेवानिवृत्ति, कैडर परिवर्तन अथवा अन्य कारणों से रिक्त हुए पदों को केवल इस आधार पर प्रतीक्षा सूची से बाहर नहीं किया जा सकता कि वे प्रारंभिक रूप से चयनित अभ्यर्थियों के पद नहीं थे। सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की राज्य सरकार की एसएलपी     हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को 47 सफल अभ्यर्थियों के पद सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था। सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की एसएलपी खारिज कर दी। इसके साथ ही हाई कोर्ट के फैसले के आधार पर प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलने की संभावना मजबूत हो गई है। सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नौशीना अली उपस्थित रहीं। हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रुचि नागर और एओआर देवाशीष तिवारी ने पैरवी की। छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसिटर जनरल के. नटराज उपस्थित हुए। वर्षों से नियुक्ति का इंतजार     2017 की कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया में चयन और प्रतीक्षा सूची को लेकर विवाद के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी वर्षों से नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे। हाई कोर्ट के पक्ष में फैसले के बाद राज्य सरकार की एसएलपी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची।     अब एसएलपी खारिज होने से 400 से ज्यादा प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक नियुक्ति प्रक्रिया और रिक्त पदों की संख्या के संबंध में संबंधित विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।  

कला, विज्ञान और वाणिज्य के गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट अब ऑनलाइन, विद्यार्थियों को मिलेगा बड़ा फायदा

उच्च शिक्षा में डिजिटल नवाचार, विद्यार्थियों तक पहुंचेगा गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट अब डिजिटल माध्यम से घर बैठे पढ़ सकेंगे विद्यार्थी, ई-ज्ञानसेतु पर मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण ई-कंटेंट कला, विज्ञान और वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान होंगे उपलब्ध 10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से क्षेत्रीय भाषाओं में भी तैयार की जा रही डिजिटल अध्ययन सामग्री भोपाल  मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ई-कंटेंट वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। तैयार किए गए वीडियो विद्यार्थियों को विभाग के e-GyanSetu YouTube Channel पर मिलेंगे। विभाग की इस पहल से विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार डिजिटल माध्यम से विभिन्न विषयों की अध्ययन सामग्री का लाभ ले सकेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 की भावना के अनुरूप प्रदेश के संभागीय मुख्यालयों में स्थापित 10 डिजिटल स्टूडियो के माध्यम से स्नातक स्तर के विभिन्न विषयों एवं पाठ्यक्रमों के लिए ई-कंटेंट तैयार किया जा रहा है। कला, विज्ञान, वाणिज्य सहित विभिन्न विषयों के वीडियो व्याख्यान तैयार किए जा रहे हैं। ई-कंटेंट वीडियो को विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रभावी एवं रोचक बनाने के लिए ग्राफिक्स और डिजिटल विजुअल्स का उपयोग किया जा रहा है। वीडियो की विषयगत एवं शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह ई-कंटेंट प्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों एवं सहायक प्राध्यापकों द्वारा तैयार किया जा रहा है। Validation Board करेगा ई-कंटेंट का परीक्षण एवं सत्यापन ई-कंटेंट की प्रमाणिकता, विषयवस्तु और शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तैयार वीडियो का Validation Board द्वारा परीक्षण एवं सत्यापन किया जा रहा है। वीडियो की विषयवस्तु, पाठ्यक्रमानुरूपता एवं शैक्षणिक गुणवत्ता का परीक्षण करने के बाद ही सत्यापित ई-कंटेंट को विद्यार्थियों के लिए e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार किए जा रहा ई-कंटेंट ई-कंटेंट निर्माण में प्रदेश की भाषाई विविधता का भी विशेष ध्यान रखा गया है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बघेली, बुंदेली, मराठी एवं संस्कृत सहित विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में भी वीडियो तैयार किए जा रहे हैं। इससे अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों तक डिजिटल अध्ययन सामग्री पहुंचाने में सुविधा होगी। अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ सकेंगे विद्यार्थी e-GyanSetu YouTube Channel पर उपलब्ध वीडियो के माध्यम से विद्यार्थी मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से अपनी सुविधा के अनुसार अध्ययन कर सकेंगे। विद्यार्थी आवश्यकता के अनुसार विषयवस्तु को दोहरा सकेंगे, कठिन टॉपिक्स को पुनः समझ सकेंगे और अपनी सीखने की गति के अनुरूप अध्ययन कर सकेंगे। सत्यापन के बाद चरणबद्ध रूप से प्रकाशित होंगे वीडियो ई-कंटेंट निर्माण, एडिटिंग एवं सत्यापन की प्रक्रिया निरंतर जारी है। सत्यापन की प्रक्रिया पूर्ण होने वाले वीडियो को चरणबद्ध रूप से e-GyanSetu YouTube Channel पर प्रकाशित किया जाएगा। इस पहल से प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण डिजिटल अध्ययन सामग्री की उपलब्धता को और व्यापक बनाने में सहायता मिलेगी।