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सरिया में विकास कार्यों की प्रगति पर मंथन, ओपी चौधरी ने अधिकारियों को दिए दिशा-निर्देश

रायपुर : सरिया क्षेत्र में विकास परियोजनाओं की कार्य प्रगति की हुई समीक्षा वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ ऑनलाइन बैठक में दिए आवश्यक दिशा-निर्देश रायपुर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सरिया क्षेत्र में संचालित विभिन्न विकास परियोजनाओं की कार्य प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के साथ ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़कर क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की स्थिति की जानकारी ली। बैठक में विकास परियोजनाओं की प्रगति, कार्यों के क्रियान्वयन तथा निर्धारित समय-सीमा में उन्हें पूर्ण करने से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। वित्त मंत्री चौधरी ने विकास कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों की सतत निगरानी करने तथा कार्यों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी न होने देने के निर्देश दिए। साथ ही जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर विकास कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की बात कही। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि क्षेत्र के विकास से जुड़े प्रत्येक कार्य का लाभ आम नागरिकों तक समय पर पहुंचे, यह शासन की प्राथमिकता है। विकास परियोजनाओं की नियमित समीक्षा और प्रभावी मॉनिटरिंग से कार्यों में गति एवं गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने गौधन की सुरक्षा, देखभाल एवं संरक्षण के लिए ठोस व्यवस्था बनाने के निर्देश

रायपुर : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कबीरधाम के गौसेवकों एवं अधिकारियों की ली बैठक उप मुख्यमंत्री शर्मा ने गौधन की सुरक्षा, देखभाल एवं संरक्षण के लिए ठोस व्यवस्था बनाने के निर्देश उप मुख्यमंत्री शर्मा ने ग्राम सरेखा में गौशाला के लिए उपयुक्त स्थल चयन के निर्देश रायपुर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने  कबीरधाम जिला कार्यालय के सभाकक्ष में जिले में गौधन की सुरक्षा, समुचित देखभाल, संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों, गौसेवकों एवं पशुपालकों की बैठक ली। बैठक में जिले में गौधन के रखरखाव, उपचार, संरक्षण तथा दुर्घटना एवं आपात परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि गौधन की सुरक्षा और उनकी समुचित देखभाल के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जो प्रभावी होने के साथ-साथ स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप भी हो। उन्होंने अधिकारियों को जिले में गौधन के लिए पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पशुपालन विभाग के अधिकारियों को ग्राम सरेखा में गौशाला निर्माण के लिए उपयुक्त स्थल का चयन करने को कहा, ताकि गौधन के संरक्षण और देखभाल के लिए व्यवस्थित सुविधा विकसित की जा सके।          बैठक में प्रमुख मार्गों पर दुर्घटनाओं से संबंधित विषय पर भी चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग सहित जिले के अन्य प्रमुख मार्गों पर दुर्घटना अथवा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने क्रेन, जेसीबी मशीन सहित अन्य जरूरी संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता रखने को कहा, ताकि दुर्घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई कर स्थिति को सामान्य किया जा सके। गुजरात की व्यवस्थाओं का अध्ययन कर कबीरधाम में लागू करने पर जोर        उप मुख्यमंत्री शर्मा ने गुजरात राज्य में गौधन की देखभाल और पशुधन प्रबंधन के लिए अपनाई गई व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां की अच्छी व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कबीरधाम की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वहां की उपयोगी व्यवस्थाओं को अपनाने की संभावनाओं पर कार्य किया जाए। उन्होंने गौसेवकों एवं गौ रक्षकों को गुजरात में पशुधन की देखभाल और प्रबंधन की व्यवस्थाओं का प्रत्यक्ष अवलोकन कराने के लिए भ्रमण कराने की बात भी कही। इससे गौसेवकों को वहां की कार्यप्रणाली को समझने और जिले में बेहतर व्यवस्था विकसित करने में सहयोग मिलेगा। समय पर उपचार के लिए पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता          शर्मा ने पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक को निर्देश दिए कि जिले में गौधन के समुचित उपचार के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाइयां एवं अन्य आवश्यक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध रखी जाए। उन्होंने आवश्यकता के अनुसार पशु चिकित्सकों तथा अन्य अधिकारी-कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा, ताकि बीमार एवं घायल पशुओं को समय पर उपचार मिल सके। उन्होंने कहा कि गौधन की सुरक्षा एवं देखभाल के लिए प्रशासनिक व्यवस्था के साथ समाज की सहभागिता भी महत्वपूर्ण है। गौसेवकों, पशुपालकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को गौसेवकों एवं पशुपालकों के साथ बैठक कर स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ठोस रणनीति एवं कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।          बैठक में जिला पंचायत उपाध्यक्ष चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति, अपर कलेक्टर नरेंद्र पैकरा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमसागर सिदार, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गौसेवक एवं पशुपालक उपस्थित थे।

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने 2 आतंकियों को मार गिराया

जम्मू  जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले के जंगली इलाके में गुरुवार को सुरक्षा बलों के साथ चल रहे एनकाउंटर में दो आतंकवादी मारे गए. सेना ने आज सुबह यह जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध आतंकवादियों की मूवमेंट की जानकारी मिलने के बाद बुधवार रात करीब 9 बजे मजालता के दूर-दराज के ब्रटेल सोन और खुब्बन इलाकों में सेना, पुलिस और सीआरपीएफ ने एक जॉइंट सर्च ऑपरेशन शुरू किया।  इंडियन आर्मी की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ऑपरेशन सोहन में अब तक दो आतंकवादी मारे जा चुके हैं. पोस्ट में लिखा,'16/17 सितंबर 2026 की दरमियानी रात को एक जॉइंट इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशन में कन्फर्म इनपुट्स से उधमपुर के ब्रटल इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी का इशारा मिला।  खराब मौसम, मुश्किल इलाके और खराब विजिबिलिटी के बावजूद व्हाइट नाइट कॉर्प्स जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने एक टारगेटेड काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन शुरू किया. इस दौरान दो आतंकवादी मारे गए.' सेना ने कहा कि ऑपरेशन अभी भी जारी है, और इलाके में सर्च और सर्विलांस ऑपरेशन जारी हैं. इसमें आगे कहा गया, 'किसी भी खतरे को ट्रैक करने और उसे बेअसर करने के लिए सिक्योरिटी फोर्स तैनात हैं।  इससे पहले अधिकारियों ने कहा कि बुधवार देर रात ऑपरेशन शुरू होने के तुरंत बाद जंगल में सिक्योरिटी फोर्स ने एक संदिग्ध ठिकाने को निशाना बनाते हुए कुछ राउंड फायरिंग की और धमाके सुने। 

ओवैसी को रामेश्वर शर्मा का दो टूक जवाब, बोले- ‘हैदराबाद तुम्हारे बाप का नहीं, भारत का है; मैं भी आऊंगा’

ओवैसी को रामेश्वर शर्मा का दो टूक जवाब: हैदराबाद तुम्हारे बाप का नहीं, भारत का है, मैं भी हैदराबाद आऊंगा भोपाल  काजी कैंप पर मिसाइल वाले बयान पर शुरू हुआ सियासी संग्राम अब भोपाल से हैदराबाद तक पहुंच गया है। AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के "माई के लाल हो तो मिसाइल चलाओ" वाले चैलेंज पर BJP विधायक रामेश्वर शर्मा ने करारा पलटवार किया है और कहा है – "मैं भी हैदराबाद जाऊंगा।" रामेश्वर शर्मा ने कहा, "हैदराबाद तुम्हारे बाप का नहीं है, हैदराबाद भारत का हिस्सा है। बैरिस्टर हो तो बदतमीजी की भाषा छोड़ दो।"  क्या बोले रामेश्वर शर्मा? ओवैसी की चुनौती के बाद शर्मा ने कहा: "मैं अपने बयान पर आज भी कायम हूं। मैंने काजी कैंप बोला था तो इस्लामाबाद वाले काजी कैंप की बात की थी, भोपाल वाले की नहीं। भारत की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल गिराई है, आतंकवाद पर कार्रवाई जारी रहेगी।"  उन्होंने आगे कहा, "अब तुम छाती पीटो या इस्लामाबाद से अपने तार जोड़ो, UCC लागू होकर रहेगा।"  शर्मा ने ओवैसी को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें आपत्ति है तो वो कोर्ट जा सकते हैं, लेकिन "पांच बीवी और 25 बच्चों की फैक्ट्री अब नहीं चलेगी"। कल भोपाल में क्या हुआ था? 15 सितंबर को सेंट्रल लाइब्रेरी ग्राउंड में ओवैसी ने कहा था – "रामेश्वर शर्मा, तुम माई के लाल हो तो बताओ कब लॉन्च करोगे मिसाइल? मैं अकेला काजी कैंप में खड़ा मिलूंगा, शहीद होने को तैयार हूं।"  अब इस बयान के बाद लड़ाई आर-पार की हो गई है। एक तरफ ओवैसी काजी कैंप में डटे हैं, दूसरी तरफ रामेश्वर शर्मा हैदराबाद जाने की बात कह रहे हैं।

Jhiram Ghati Case: 13 साल बाद आया बड़ा फैसला, 10 दोषियों को मृत्युदंड; हाईकोर्ट में अपील के लिए 30 दिन

रायपुर  2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं समेत 29 लोगों की हत्या के मामले में जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इनमें 2 महिला और 8 पुरुष शामिल हैं।25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सली हमला हुआ था। NIA के मुताबिक इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। करीब 13 साल चली सुनवाई में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज दर्ज किए गए। यह सजा हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही लागू होगी। तब तक सभी दोषी केंद्रीय जेल जगदलपुर में रहेंगे। 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। अभियोजन पक्ष ने फांसी की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने दलील में सजा कम करने की मांग की थी। न्यायालय के फैसले का सम्मान, लेकिन न्याय की लड़ाई जारी झीरम नक्सली हमले के मामले में न्यायालय के फैसले के बाद पीड़ितों की प्रतिक्रिया सामने आई है. हमले में घायल हुए शिवनारायण द्विवेदी ने न्यायालय के फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए इसका स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में इतनी बड़ी घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी. द्विवेदी के मुताबिक, झीरम हमले में बड़े नेताओं समेत कई निर्दोष लोगों की हत्या हुई थी. वे खुद भी इस हमले में घायल हुए थे और आज भी उस घटना के पीड़ित हैं. उन्होंने कहा कि न्यायालय के फैसले का सम्मान है, लेकिन न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।  क्या था झीरम घाटी हमला ? झीरम घाटी छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में दरभा इलाके के पास स्थित है। 25 मई 2013 को CPI (माओवादी) के सदस्यों ने कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ के काफिले पर हमला किया। NIA के रिकॉर्ड के मुताबिक हमला करीब शाम 4:15 बजे NH-221 के झीरम घाटी क्षेत्र में हुआ था। हमले में माओवादी दस्ते ने काफिले को निशाना बनाया। NIA के अनुसार 27 लोगों की मौके पर मौत हुई थी, जिनमें 10 पुलिसकर्मी शामिल थे और 38 लोग घायल हुए थे। सार्वजनिक रिपोर्टों में बाद में मृतकों की संख्या 29 बताई गई, जिसमें बाद में चोटों के कारण हुई मौतें भी शामिल हैं। हमला किसने किया था? जांच एजेंसी के अनुसार हमला CPI (Maoist) के सदस्यों ने किया था। NIA के मामले में इसी संगठन के सदस्यों पर काफिले पर हमले, हत्या और साजिश समेत विभिन्न अपराधों के आरोप लगाए गए। 2026 में हुई सुनवाई में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया और 16 सितंबर को इन्हीं 10 को मृत्युदंड सुनाया गया। हालांकि आरोपपत्र में इससे अधिक लोगों के नाम आरोपी के तौर पर दर्ज थे और कुछ आरोपी फरार/वांछित बताए गए हैं। आखिर हमला क्यों किया गया था? हमले के उद्देश्य को लेकर जांच और सार्वजनिक रिपोर्टों में कांग्रेस के राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाने की बात सामने आई है। खास तौर पर तत्कालीन कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा माओवादियों के निशाने पर बताए गए, क्योंकि वे माओवादी विरोधी सलवा जुडूम अभियान से जुड़े प्रमुख नेताओं में थे। हालांकि पूरे हमले के पीछे के उद्देश्य को एक ही कारण तक सीमित करना उचित नहीं होगा। उस समय बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा, सुरक्षा अभियानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर तनाव पहले से मौजूद था। कांग्रेस के कौन-कौन से बड़े नेता मारे गए? झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए। इस हमले में कांग्रेस नेताओं, आम नागरिकों और 10 सुरक्षाकर्मियों समेत 29 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। मारे गए लोगों में प्रमुख कांग्रेस नेताओं में… विद्या चरण शुक्ल – पूर्व केंद्रीय मंत्री, हमले में गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में उनकी मृत्यु हुई नंद कुमार पटेल – तत्कालीन छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश पटेल – नंद कुमार पटेल के बेटे महेंद्र कर्मा – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष उदय मुदलियार – कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक इनके अलावा पार्टी कार्यकर्ता, आम नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी हमले में मारे गए। उस दिन क्या हुआ था? कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाली थी। यात्रा के बाद नेताओं का काफिला बस्तर के रास्ते लौट रहा था। झीरम घाटी के पास माओवादियों ने काफिले को घेर लिया और हमला शुरू कर दिया। NIA के रिकॉर्ड के अनुसार हमले में हथियार और गोला-बारूद भी लूटा गया था। जांच में दो AK-47 राइफल, एक 9mm पिस्टल, हैंड ग्रेनेड और अन्य सामान के लूटे/गायब होने का उल्लेख है। जांच कैसे आगे बढ़ी? हमले के बाद मामला पहले छत्तीसगढ़ पुलिस ने दर्ज किया। केंद्र सरकार ने इसके बाद NIA को जांच सौंपी। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार ने घटना की न्यायिक जांच के लिए तत्कालीन हाईकोर्ट जज न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में आयोग बनाया था। NIA की जांच के बाद मामला अदालत में पहुंचा और लंबे समय तक सुनवाई चलती रही। 5 सितंबर 2026 को विशेष NIA अदालत ने ट्रायल का सामना कर रहे 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। 16 सितंबर 2026 को अदालत ने सभी 10 को मृत्युदंड सुनाया। झीरम घाटी हमला इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है? झीरम घाटी हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस के एक बड़े हिस्से का नेतृत्व एक ही हमले में मारा गया था। घटना ने राज्य की राजनीति और माओवादी हिंसा के बीच संबंधों पर देशभर में चर्चा छेड़ दी थी। 13 साल बाद आया अदालत का फैसला अब इस मामले की कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। मृत्युदंड के फैसले के बाद दोषियों के पास कानून के तहत उपलब्ध आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता रहेगा। वे माओवादी जिन्हें आरोपी बनाया गया था, अब मिली फांसी झीरम घाटी के हमले को नक्सली संगठन के टॉप लीडरों ने प्लान किया है। जानकारी के अनुसार, झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड हिडमा था। 25 मई 2013 को यह हमला हुआ था। माओवादियों ने बस्तर जिले के दरभा थाना क्षेत्र के झीरम घाटी इलाके में एक राष्ट्रीय राजमार्ग पर कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ पर घात लगाकर हमला किया था। हमला करने वाले सभी नक्सली संगठन के मेंबर थे। आरोपियों में जो शामिल थे, उनमें…     … Read more

मुख्यमंत्री ने कहा- पारंपरिक कारीगरों के हुनर को आधुनिक तकनीक और नए बाजार से जोड़ने का काम किया

यूपी में कारीगरी और हस्तशिल्प से तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री योगी ने भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर गोरखपुर के विश्वकर्मा पंचायत मंदिर में आयोजित विश्वकर्मा पूजनोत्सव कार्यक्रम को संबोधित किया   मुख्यमंत्री ने कहा- पारंपरिक कारीगरों के हुनर को आधुनिक तकनीक और नए बाजार से जोड़ने का काम किया   बोले मुख्यमंत्री- आजादी के बाद होती रही कारीगरों की उपेक्षा, पहली बार सरकार ने उनकी चिंता की   मुख्यमंत्री ने कहा- टूलकिट, प्रशिक्षण और सस्ते बैंक ऋण की सुविधा देकर कारीगरों को बनाया जा रहा स्वावलंबी   बोले मुख्यमंत्री- प्रधानमंत्री मोदी ने ‘पीएम विश्वकर्मा’ के जरिए कारीगरों और हस्तशिल्पियों को दिया मंच   विश्वकर्मा जयंती पर पंचायत मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी, प्रधानमंत्री मोदी के स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना की  गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अलग-अलग कारीगरी और हस्तशिल्प से तीन करोड़ से अधिक लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और स्वावलंबन का जीवन जी रहे हैं। वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद प्रदेश सरकार ने परंपरागत कारीगरों और हस्तशिल्पियों को आगे बढ़ाने के लिए काम शुरू किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक तकनीक और नए बाजार से जोड़ने के साथ उत्पादों की पैकेजिंग और डिजाइनिंग पर भी ध्यान दिया। इससे कारीगरों और हस्तशिल्पियों के लिए आगे बढ़ने का रास्ता खुला है।   मुख्यमंत्री योगी बुधवार को भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर गोरखपुर के विश्वकर्मा पंचायत मंदिर में आयोजित विश्वकर्मा पूजनोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज का दिन अत्यंत पवित्र है। एक ओर सृष्टि के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती है तो दूसरी ओर नए भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है।   मुख्यमंत्री योगी ने बाबा गोरखनाथ की धरती से प्रधानमंत्री मोदी को उत्तर प्रदेशवासियों की ओर से जन्मदिन की बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की नए भारत और विकसित भारत की संकल्पना को उनके नेतृत्व में 140 करोड़ भारतवासी साकार होते हुए देखेंगे। उन्होंने बाबा गोरखनाथ और भगवान विश्वकर्मा से प्रधानमंत्री मोदी के स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना की।   कारीगरों का सम्मान करने वाला देश आगे बढ़ता है मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत की परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के शिल्पी के देवता के रूप में पूजा जाता है। विशिष्ट कला, कारीगरी और हस्तशिल्प से जुड़े लोग विश्वकर्मा जयंती पर सृष्टि के शिल्पी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि जो देश अपने हस्तशिल्पियों और कारीगरों का सम्मान करता है, वह आगे बढ़ता है।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने नए भारत में कारीगरों और हस्तशिल्पियों को ‘पीएम विश्वकर्मा’ के रूप में एक मंच उपलब्ध कराया है। राजमिस्त्री, बढ़ई, हलवाई, सुनार सहित विभिन्न परंपरागत व्यवसायों से जुड़े कारीगर समाज के स्वावलंबन का आधार रहे हैं।   आजादी के बाद होती रही कारीगरों की उपेक्षा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आजादी के बाद परंपरागत कारीगरों और हस्तशिल्पियों की निरंतर उपेक्षा हुई। पहली बार सरकार ने उनकी बात सुनी, उनकी जरूरतों को समझा और उनकी चिंता की। उन्हें टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण और बैंक से सस्ता ऋण दिलाने की व्यवस्था की गई। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने कारीगरों को आगे बढ़ाने का काम किया।   उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 में सरकार बनने के बाद इस दिशा में काम शुरू किया गया। आज प्रदेश में तीन करोड़ से अधिक लोग अलग-अलग कारीगरी और हस्तशिल्प के माध्यम से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और स्वावलंबन का जीवन व्यतीत कर रहे हैं।   तकनीक और नए बाजार से जोड़ी पारंपरिक कारीगरी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि परंपरागत कारीगरी को समय के अनुरूप आगे बढ़ाने के लिए उसे आधुनिक तकनीक से जोड़ना जरूरी था। प्रधानमंत्री मोदी ने कारीगरों के हुनर को आधुनिक तकनीक और नए बाजार से जोड़ने के साथ उत्पादों की पैकेजिंग और डिजाइनिंग पर भी ध्यान दिया। इससे पारंपरिक कारीगरी को बदलते समय के अनुरूप आगे बढ़ाने का अवसर मिला।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत की परिकल्पना कारीगरों, हस्तशिल्पियों, युवा शक्ति और आधी आबादी नारी शक्ति के माध्यम से साकार होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के स्वस्थ और यशस्वी दीर्घ जीवन की कामना करते हुए कहा कि देश को लंबे समय तक उनका मार्गदर्शन प्राप्त हो।   हर वर्ष मंदिर आना मेरा सौभाग्य : मुख्यमंत्री योगी मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उन्हें प्रतिवर्ष विश्वकर्मा पंचायत मंदिर आने का अवसर मिलता है और यह उनका सौभाग्य है। उन्होंने मंदिर समिति के पदाधिकारियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि दशकों पहले जिस भावना के साथ मंदिर की व्यवस्था को आगे बढ़ाने का काम शुरू हुआ था, उसे आज भी लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। कारीगर और हस्तशिल्पी बिना किसी भेदभाव के इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।   कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी ने भगवान विश्वकर्मा से संबंधित पुस्तक का विमोचन किया। विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह समेत अन्य लोगों ने उनका स्वागत किया। पार्षद ने मुख्यमंत्री योगी को पुष्पगुच्छ भेंट किया। मंदिर समिति के मंत्री श्याम बाबू शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी को स्मृति चिह्न प्रदान किया, जबकि रवि पांचाल ने अंगवस्त्र देकर उनका स्वागत किया।   कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश महामंत्री साकेत मिश्रा, क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, विश्वकर्मा पंचायत मंदिर के अध्यक्ष विद्यानंद शर्मा, अनूप शर्मा, जयप्रकाश शर्मा, अजय कुमार विश्वकर्मा, गौरी शंकर शर्मा, रामविलास शर्मा और संजय शर्मा समेत विश्वकर्मा समाज से जुड़े लोग मौजूद रहे।

गऊ रक्षा के लिये जनप्रतिनिधि एवं आम जन आगे आये

गऊ रक्षा के लिये जनप्रतिनिधि एवं आम जन आगे आये ग्वालियर  शहर की यातायात व्यवस्था में बाधा बन रही एवं अचानक आमजनों को अपने सीगों से चोटिल कर रही भूखी,प्यासी, पॉलीथिन की पन्नीयों को खाकर जगह जगह से भगाये जाने से बदहवास सड़कों पर लड़ रहे बेजुवान जानवर ग्वालियर की जनता का ध्यान खींच रहे हैं कि नगर निगम का इतना बड़ा अमला होने के बावजूद भी शहर के मुख्य मार्गों पर घूम रहे आवारा पशु आखिर इतनी बड़ी संख्या में क्यों दिख जाते हैं कांग्रेस शासित नगर निगम प्रशासन इस और ध्यान क्यों नहीं दे रहा ? अपनी चरनोइ की जमीनों पर कब्जा हो जाने से बेचारे बेजुबान जानवर दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो रहे हैं और दूध देना बंद कर देने से किसान उनको छुट्टा छोड़ देता है यहाँ तक की रात के अँधेरे में ट्राली मे भरकर शहर किनारे छोड़ देता है और वही जानवर शहर में घुसकर फिर यातायात को प्रभावित करते हैं और राहगीरों को चोटिल भी कर देते हैं जिससे देखने में आया है कि कभी कभी  तो राहगीर परमात्मा को भी प्यारा हो जाता है l अपने जीवन के अंतिम समय में गऊ दान करने एवं गोमाता की पूँछ पकड़कर वैतरणी पार करने का ख्याल रखने वाले आमजनों एवं शहर के हिंदूवादी संगठनों को भी शायद अब आगे आना होगा और इस गहन समस्या का निराकरण करने की पहल करना होगी और सभी मिलजुल कर संकल्प लें कि प्रत्येक धर्मप्रेमी एवं पशु प्रेमी नागरिक सड़कों पर आवारा घूम रहे जानवरों को खाने के लिये अपने एवं अपने परिवार के सदस्यों के जन्म दिवसों एवं निर्वाण दिवसों पर पशुओं के खाने के लिये चारे की व्यवस्था गौशाला में जाकर दान करेंगे साथ ही शहर के सभी साधु,संतों एवं सभी राजनैतिक दलों के जनप्रतिनिधियों को भी दलगत भावना से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण कार्य को करने का संकल्प लेना होगा तभी भगवान श्रीकृष्ण एवं शनि क्षेत्र ग्वालियर में खुशहाली एवं बेजुवान जानवरों की लम्पी वायरस जैसी गंभीर बीमारियों से हो रही अकाल मोतों के लिये यह कार्य मील का पत्थर साबित हो जिससे गऊ माताओं के सहारे वैतरणी पार होने कि जगह गऊ माता के कोप का भाजन होने से भी बचा जा सकेगा l    

पारिवारिक कलह में दी महोबा में किसान ने जान

पारिवारिक कलह में दी महोबा में किसान ने जान जांच में कर्जदार होने या फसल का नुकसान होने का कोई तथ्य नहीं मिला महोबा, अपर जिलाधिकारी (वि/रा) महोबा ने बताया कि तहसील चरखारी में खरेला कस्बा निवासी हरगोविंद पुत्र बिंदा उम्र लगभग 52 वर्ष द्वारा आत्महत्या किए जाने के संबंध में मीडिया में प्रसारित ख़बर के संबंध में उप ज़िलाधिकारी चरखारी से जांच करायी गई ।                  एसडीएम की रिपोर्ट के अनुसार, हरगोविंद द्वारा पूर्व में जमीन बेचने के कारण उसके घर में आए दिन पारिवारिक कलह एवं झगड़ा होता था। मृतक के पास मात्र 0.423 हेक्टेयर भूमि थी। मृतक की खतौनी में किसी तरह का कर्ज दर्ज नहीं है। ग्रामवासियों ने अपने बयान में कर्ज की बात कही, लेकिन कर्ज किससे लिया गया है, इस संबंध में गांव वालों व मृतक के परिजनों द्वारा कोई जानकारी नहीं दी गई। फसल क्षति के कारण आत्महत्या किए जाने का तथ्य भी प्रकाश में नहीं आया है। मृतक की पत्नी व तीन बालिग बच्चे हैं। प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।

EPFO Salary Limit बढ़ी, ₹25 हजार हुई वेतन सीमा; लाखों कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने EPFO में अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने को दी मंजूरी। वर्तमान व्यवस्था में ₹15,000 प्रति माह तक की वेतन सीमा EPF की अनिवार्य कवरेज के लिए अहम आधार रही है। यह सीमा सितंबर 2014 में बढ़ाकर ₹15,000 की गई थी और इसके बाद इसमें बदलाव नहीं हुआ। पिछले सालों में वेतन और आय के स्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए अब सरकार ने इस सीमा को ₹25,000 करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था से ₹15,000 से ₹25,000 के बीच कमाने वाले कई नए कर्मचारी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ सकेंगे। हालांकि, नई सीमा लागू होने की विस्तृत प्रक्रिया और जरूरी प्रशासनिक कदम EPFO तथा श्रम मंत्रालय की ओर से पूरे किए जाएंगे। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा रिटायरमेंट सेविंग से जुड़ा हो सकता है। EPFO के तहत कर्मचारी को EPF (Employees’ Provident Fund) के साथ EPS (Employees’ Pension Scheme) और EDLI (Employees’ Deposit Linked Insurance Scheme) से जुड़े लाभ मिलते हैं। ऐसे में नए कर्मचारियों के लिए लंबे समय में रिटायरमेंट फंड और सामाजिक सुरक्षा का आधार मजबूत हो सकता है। सरकार का कहना है कि वेतन बढ़ने और औपचारिक रोजगार के विस्तार के साथ सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को भी बदलती परिस्थितियों के अनुरूप बनाना जरूरी है। सरकार के अनुसार इस बदलाव से रोजगार के औपचारिकीकरण को भी बढ़ावा मिल सकता है। जब कर्मचारी EPFO जैसी व्यवस्था से जुड़ते हैं, तो उनकी बचत, पेंशन और बीमा सुरक्षा अधिक व्यवस्थित तरीके से होती है। कंपनियों के लिए भी सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ने से कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखने और स्थिर वर्कफोर्स तैयार करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कर्मचारियों की वास्तविक सैलरी और EPF में होने वाले योगदान पर असर उनकी वेतन संरचना और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। इस फैसले से सरकारी खजाने पर भी अतिरिक्त खर्च आएगा। सरकार ने अनुमान लगाया है कि इससे सालाना करीब ₹11,339 करोड़ का सरकारी खर्च होगा, जबकि मौजूदा बजटीय सहायता करीब ₹10,250 करोड़ है। पांच साल में अनुमानित खर्च लगभग ₹56,696 करोड़ बताया गया है। EPFO पहले से ही भारत की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में शामिल है और करोड़ों कर्मचारियों तथा पेंशनरों को कवर करता है। आपको बता दें कि ₹15,000 से ₹25,000 की वेतन सीमा बढ़ना लाखों कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण बदलाव है। हालांकि, कर्मचारियों के लिए इसका वास्तविक वित्तीय असर इस बात पर निर्भर करेगा कि नए नियमों के तहत योगदान की कैलकुलेशन कैसे होती है और वेतन संरचना पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है। सरकार और EPFO अब इस फैसले को लागू करने के लिए जरूरी प्रशासनिक और वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।

हरियाणा में पुरानी गाड़ियों पर सख्ती, 1 अक्टूबर से पेट्रोल-डीजल पर रोक; पंपों पर CCTV से निगरानी

चंडीगढ़  हरियाणा में पुरानी गाड़ियों पर अब सख्ती होने जा रही है. 1 अक्टूबर 2026 से राज्य के NCR वाले इलाकों में ऐसी गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा, जो तय उम्र पूरी कर चुकी हैं. इन गाड़ियों की पहचान के लिए पेट्रोल पंपों पर खास कैमरे लगाए जाएंगे. यह व्यवस्था सबसे पहले गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में लागू होगी।  बताते चलें कि 1 अक्टूबर 2026 से 15 साल से पुरानी पेट्रोल और 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों को पेट्रोल पंप पर तेल नहीं मिलेगा. यह नियम गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में लागू होगा. पुरानी गाड़ियों की पहचान के लिए पेट्रोल पंपों पर कैमरे लगाए जाएंगे।  हरियाणा सरकार पहले चरण में इन चार जिलों के पेट्रोल पंपों पर 775 ANPR कैमरे लगाएगी. इन कैमरों से गाड़ी की नंबर प्लेट अपने आप पढ़ी जाएगी. इसके बाद सिस्टम से पता चलेगा कि गाड़ी पुरानी गाड़ियों की तय श्रेणी में आती है या नहीं. इन कैमरों को लगाने पर करीब 41.74 करोड़ रुपये खर्च होंगे. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस योजना को मंजूरी दी है. हरियाणा के परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि कैमरे लगाने का काम 30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  किस जिले में कितने कैमरे लगेंगे? पहले चरण में गुरुग्राम में सबसे ज्यादा 249 कैमरे लगाए जाएंगे. इसके बाद सोनीपत में 215, झज्जर में 195 और फरीदाबाद में 116 कैमरे लगाए जाएंगे. सरकार के मुताबिक पूरे हरियाणा में आगे चलकर करीब 2,780 ANPR कैमरों की जरूरत होगी।  पेट्रोल पंप पर ऐसे होगी गाड़ी की पहचान जब कोई गाड़ी पेट्रोल पंप पर पहुंचेगी तो कैमरा उसकी नंबर प्लेट पढ़ेगा. सिस्टम के जरिए गाड़ी की जानकारी चेक की जाएगी. अगर गाड़ी तय उम्र पूरी कर चुकी है और वह ‘End-of-Life Vehicle’ की श्रेणी में आती है, तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा. यह कदम NCR में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए उठाया गया है. हरियाणा सरकार यह काम वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के तहत कर रही है।  सरकार का कहना है कि कैमरों की मदद से पुरानी गाड़ियों की पहचान आसान होगी और प्रदूषण से जुड़े नियमों को लागू करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही हरियाणा में पेट्रोल पंपों पर नंबर प्लेट के जरिए गाड़ियों की जांच वाली व्यवस्था को और बढ़ाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक की मदद से प्रदूषण फैलाने वाली पुरानी गाड़ियों पर रोक लगाई जा सके।