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सऊदी के बाद पाकिस्तान को भी हूतियों की धमकी, मक्का पैक्ट के बीच बढ़ा तनाव

नई दिल्ली   मक्का समझौता करने के बाद पाकिस्तान की मुसीबतें और भी बढ़ गई हैं। पहली बात तो सऊदी अरब के खिलाफ हूतियों के अटैक पर निष्क्रियता की वजह से उसकी दुनियाभर में आलोचना हो रही है। दूसरी ओर हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तान को भी हमले की धमकी दे दी है।अमेरिका के पूर्व सुरक्षा सलाहकार लेफ्टिनेंट जनरल एचआर मैकमास्टर ने कहा कि मक्का पैक्ट के पीछे भी पाकिस्तान के इरादे साफ नहीं हैं। आपको बता दें कि 7 अगस्त को ही सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए ने एक सझौते पर साइन किए थे। इस समझौते के मुताबिक अगर इन तीनों में से किसी एक देश पर भी हमला होता है तो तीनों देशों पर हमला माना जाएगा और तीनों प्रतिक्रिया देंगे। तुर्किए ने तो यहां तक कहा था कि यह नाटो की तर्ज पर बनाया गया है. इसलिए इसे इस्लामिक नाटो कहा जा सकता है। हूतियों ने पाकिस्तान को दी धमकी सऊदी अरब में तुर्की और पाकिस्तान की सेना की तैनाती को लेकर हूती विद्रोहियों ने दोनों देशों को हमले की धमकी दी है। हूती नेता अल बुखैती ने कहा कि अगर इस्लामाबाद और अंकारा सामने आते हैं तो उनपर भी सीधा हमला होगा। हूती नेता ने कहा कि यमन अब भी रक्षात्मक रुख अपना रहा है। लेकिन अगर पाकिस्तान और तुर्की भी उतरते हैं तो उनके लिए ठक नहीं होगा। उन्होने कहा कि यमन किसी भी विदेशी ताकत का दखल स्वीकार नहीं करेगा। पाकिस्तान ने ईरान और अमरेका के बीच युद्धविराम पर समझौता करवाने और क्रेडिट लूटने की पूरी कोशिश की थी लेकिन उसका कोई भी प्रयास सफल नहीं हो पाया। इसके बाद पाकिस्तान की शांतिदूत की छवि बनाने वाली कोशिश फेल हो गई। मक्का समझौता करके उसने एक बार फिर अपनी विदेश नीति दिखाने की कोशिश की लेकिन यह भी फेल ही होता नजर आ रहा है। हूतियों ने खोल दिया नया मोर्चा सऊदी अरब ने शनिवार को पुष्टि की कि यमन के हूती विद्रोहियों ने बैलिस्टिक मिसाइल से उसकी राजधानी रियाद को निशाना बनाने की कोशिश की। ईरान समर्थित विद्रोहियों के साथ संघर्ष तेज होने के बाद रियाद को निशाना बनाने की यह पहली कोशिश है। हूती विद्रोहियों ने ईरान युद्ध में एक नया मोर्चा खोल दिया है। हूती विद्रोहियों से लड़ रहे सऊदी अरब नीत गठबंधन ने तड़के की गई इस कोशिश के काफी देर बाद बयान जारी कर कहा कि मिसाइल को बीच में ही रोक दिया गया। रियाद के कुछ निवासियों ने विस्फोट की आवाज सुनी। बाद में कुछ लोगों ने हवाई अड्डे के पास धुएं का गुबार देखा। किसी के हताहत होने या किसी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है। बयान में यह भी कहा गया कि हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के बंदरगाह शहर यनबू में असैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिश की। सऊदी अरब की एक प्रमुख पाइपलाइन यहीं समाप्त होती है। इसके अलावा ताइफ, बैश और फरसान में भी हमले के प्रयास किए गए लेकिन उन्हें नाकाम कर दिया गया। गठबंधन ने इस बारे में और जानकारी नहीं दी। हूती विद्रोहियों ने इससे पहले बिना कोई सबूत दिए दावा किया था कि उन्होंने रियाद में ''संवेदनशील ठिकानों'' और यनबू में सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जिससे ''भीषण आग'' लग गई।

योगी सरकार का बड़ा रोजगार प्लान, पुलिस-होमगार्ड समेत 1 लाख से अधिक भर्तियों की तैयारी

 लखनऊ आगामी छह माह में एक लाख से अधिक सरकारी नौकरियों के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए प्रदेश सरकार ने नियुक्तियों का सिलसिला शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न विभागों में चयनित 818 अभ्यर्थियों को शनिवार को नियुक्ति पत्र बांटते हुए सपा पर प्रहार किया। यह कहते हुए कि ‘वह गिनते जाएं, हम नियुक्ति पत्र बांटते जाएंगे। हम छह महीने में एक लाख से अधिक नौजवानों को नियुक्ति देंगे।’ बताया कि रविवार को भी करीब एक हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र मिलेंगे। अगले छह माह में पुलिस, होमगार्ड और विभिन्न भर्ती आयोगों की चयन प्रक्रियाएं पूरी होने के साथ नियुक्तियां जारी रहेंगी। लोकभवन में आयोजित समारोह में नियुक्ति पत्र पाने वालों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के 357 एक्सरे टेक्नीशियन, आयुष विभाग के 404, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के 48 अनुदेशक और उद्योग निदेशालय के नौ सहायक सांख्यिकीय अधिकारी शामिल थे। मिशन रोजगार के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस में 36 हजार से अधिक और होमगार्ड में 41-42 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। इन भर्तियों में मेडिकल और शारीरिक दक्षता परीक्षण की प्रक्रिया जारी है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से अगले छह माह में 25 से 30 हजार, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के माध्यम से 20 से 25 हजार और लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के बाद 15-16 हजार युवाओं को नियुक्ति मिलने की उम्मीद है। शिक्षा सेवा चयन आयोग के परिणाम तीन-चार माह में आने की संभावना है। इनमें से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अभी परीक्षा, परिणाम या चयन की प्रक्रिया में हैं। प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। प्रदेश में अब तक करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। विज्ञापन जारी होने से लेकर नियुक्ति पत्र वितरण तक पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने ग्रुप-3 और ग्रुप-4 की भर्तियों में साक्षात्कार समाप्त किए जाने का भी उल्लेख किया। 2017 से पहले की सरकारों पर भर्ती प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि कभी विज्ञापन जारी होते ही वसूली का तंत्र सक्रिय हो जाता था और ऐसे लोगों को भी नियुक्ति पत्र मिल जाते थे, जिन्होंने आवेदन तक नहीं किया था। आवेदन करने वाले अभ्यर्थी देखते रह जाते थे। आज वही लोग उपदेश दे रहे हैं, लेकिन 2027 के बाद वे उपदेश देने की स्थिति में भी नहीं रहेंगे। मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में एक अयोग्य व्यक्ति को अध्यक्ष बनाए जाने का भी आरोप लगाया। कहा कि भर्ती व्यवस्था के खिलाफ युवाओं को न्यायालय और सड़क तक संघर्ष करना पड़ा। 2017 से पहले प्रदेश में करीब 120 स्टार्टअप थे, जबकि अब इनकी संख्या 24 हजार से अधिक हो गई है। ये स्टार्टअप हजारों करोड़ रुपये का कारोबार कर रहे हैं। 25 से 29 सितंबर तक गौतमबुद्धनगर में होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे संस्करण का भी उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें 650 विदेशी खरीदार और 2500 से अधिक प्रदर्शक शामिल होंगे। कार्यक्रम में आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, एमएसएमई राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे। नियुक्ति पत्र पाने वाले कुछ अभ्यर्थियों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि निष्पक्ष व पारदर्शी भर्ती से सरकारी नौकरी का सपना पूरा हुआ। मिशन एक लाख का हिसाब घोषित लक्ष्य छह माह में एक लाख से अधिक नियुक्तियां शनिवार को नियुक्ति पत्र वितरण, 818 रविवार को मिलने वाले नियुक्ति पत्र, करीब 1,000 अलग से भर्ती प्रक्रिया में बताए गए पद, पुलिस 36 हजार, होमगार्ड 41-42 हजार यूपीएसएसएससी से संभावित अवसर, 25-30 हजार शिक्षा चयन आयोग के जरिये संभावित भर्तियां, 20-25 हजार यूपीपीएससी के माध्यम से संभावित नियुक्तियां, 15-16 हजार सरकार के अनुसार 2017 के बाद अब तक कुल सरकारी नियुक्तियां, 9.50 लाख

बिहार के बाद यूपी-पंजाब में ताकत दिखाएगी चिराग की पार्टी, NDA से सीटों की उम्मीद

पटना बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बना चुके केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी 'लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)' अब उत्तर प्रदेश और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में ताल ठोकने की तैयारी कर रही है। LJP(R) को उम्मीद है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के तहत उन्हें इन दोनों राज्यों में चुनाव लड़ने के लिए सम्मानजनक सीटें मिलेंगी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान बीते कुछ समय से लगातार यूपी और पंजाब के दौरों पर हैं। हाल ही में 17 सितंबर को चिराग पासवान ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के साथ वाराणसी में एक भव्य बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर गुजरात के वडनगर के लिए रवाना किया था। 'गैर-जाटव' और पंजाब के दलित वोट बैंक पर निशाना उत्तर प्रदेश और पंजाब, दोनों ही राज्यों में दलित आबादी चुनावी नतीजों को तय करने में अहम भूमिका निभाती है। उत्तर प्रदेश का गणित: LJP(R) की नजर यूपी के गैर-जाटव दलित मतदाताओं पर है, जो पारंपरिक रूप से बीएसपी (BSP) के खिसकते जनाधार के बाद नए विकल्प की तलाश में हैं। पंजाब का समीकरण: पंजाब में करीब 32 प्रतिशत दलित आबादी है। चिराग पासवान की युवा और दलित नेता के रूप में बनी छवि को एनडीए वहां भुनाना चाहता है। एलजेपी(आर) के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र कुमार मुन्ना ने कहा, "गठबंधन पर अंतिम फैसला हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ही लेंगे। लेकिन अगर एनडीए में सीटों का बंटवारा होता है, तो हम अपने उम्मीदवारों के साथ-साथ पूरे गठबंधन की जीत के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। यूपी और पंजाब के दलित समाज को चिराग पासवान के रूप में एक विश्वसनीय चेहरे से काफी उम्मीदें हैं।" 24 सितंबर से पटना से शुरू होगा 'युवा बोले तो' अभियान यूपी और पंजाब में जमीन मजबूत करने से पहले चिराग पासवान अपने गृह राज्य बिहार से युवाओं को जोड़ने के लिए एक नया जनसंपर्क अभियान- 'युवा बोले तो' शुरू करने जा रहे हैं। 24 सितंबर से पटना में इस विशेष युवा संवाद कार्यक्रम का आगाज होगा इसके जरिए चिराग पासवान सीधे युवाओं से संवाद करेंगे, उनकी समस्याओं को सुनेंगे और उनके रोजगार और करियर से जुड़े मुद्दों के हल तलाशने की कोशिश करेंगे। 28 साल बाद तृणमूल कांग्रेस का सिंबल फ्रीज होने और क्षेत्रीय राजनीति के बदलते दौर के बीच, चिराग पासवान का हिंदी भाषी राज्यों में अपनी पार्टी का विस्तार करने का यह दांव एनडीए के लिए कितना फायदेमंद साबित होता है, यह देखने वाली बात होगी।

कश्मीर में लोकल आतंकियों की संख्या घटी, आर्टिकल 370 के बाद बदले हालात

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की नापाक हरकतों पर काफी लगाम लगी है। आंकड़े भी इसके गवाही दे रहे हैं। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2021 से लेकर अब तक घाटी में आतंकवादी नेटवर्क में स्थानीय लोगों की भर्ती काफी कम हुई है। यह संख्या 2021 में जहां 146 थी, वही अब घटकर 2025 में सिर्फ एक रह गई। मंत्रालय ने यह भी बताया कि 2025 में घुसपैठ की सिर्फ छह कोशिशें हुईं, जो पिछले पांच सालों में सबसे कम हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में 146 स्थानीय युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए। इसके बाद 2022 में 121, 2023 में 19, 2024 में चार और 2025 में सिर्फ एक युवा शामिल हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थानीय युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है और वे सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों का लाभ उठा रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटने से पस्त हुआ पाकिस्तान आपको बता दें कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा हालात में काफी सुधार हुआ है। इस इलाके में आतंकवाद से जुड़ी हिंसा और आतंकवादियों की भर्ती में भारी कमी आई है। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर हालात काफी शांत हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में घुसपैठ की छह कोशिशों को नाकाम किया गया, जिनमें 12 आतंकवादी मारे गए। रिपोर्ट में कहा गया है, "2021 में घुसपैठ की 8 कोशिशें नाकाम की गईं और 12 आतंकवादी मारे गए। वहीं, 2022 में घुसपैठ की 12 कोशिशें नाकाम और 18 आतंकवादी मारे गए, 2023 में घुसपैठ की 18 कोशिशें नाकाम और 36 आतंकवादी मारे गए, 2024 में घुसपैठ की 10 कोशिशें नाकाम और 19 आतंकवादी मारे गए।" अब जम्मू से घुसपैठ की फिराक में आतंकी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भले ही नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशें कम हुई हैं, लेकिन आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिशें अब जम्मू इलाके में अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर ज्यादा हो रही हैं। नशीले पदार्थों की तस्करी की कोशिशें भी की जा रही हैं। मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि घुसपैठ की कोशिशों में कमी के बावजूद 2025 में सीजफायर उल्लंघन में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में LoC पर सीजफायर उल्लंघन की दो घटनाएं हुईं। वहीं, 2025 में कम से कम 163 बार सीजफायर का उल्लंघन हुआ। उनमें से 124 घटनाएं ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुईं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025 में केंद्र शासित प्रदेश में पत्थरबाजी की कोई घटना नहीं हुई।

Kalyan-Latur Expressway पर बनेगी 8 किमी की टनल, सफर का समय 6 घंटे तक घटेगा

लातूर  देश के बड़े शहरों को एक-दूसरे से जोड़ने के साथ ही सरकार अन्य छोटे शहरों तक कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रही है. इस कड़ी में अगला नाम है कल्याण से लातूर तक जाने वाले एक्सप्रेसवे (Kalyan-Latur Expressway)का. महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट ने इस ई-वे को मंजूरी दे दी है. यह ई-वे करीब 450 किलोमीटर लंबा होगा और इसके तैयार होने के बाद दोनों शहरों के बीच सफर में लगने वाला समय 11 घंटे से घटकर महज 5 घंटे का रह जाएगा।  यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बन रही बदलापुर टनल के उत्तर से ही शुरू होगा और महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा के पास लातूर में निकलेगा. इसकी कुल लंबाई 450 किलोमीटर के आसपास है, जिससे महज 4.5 से 5 घंटे के सफर में पूरा किया जा सकेगा. अभी इस दूरी को तय करने में करीब 11 घंटे का समय लग जाता है. आगे चलकर यह एक्सप्रेसवे मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से भी सीधे तौर पर जुड़ जाएगा, जो नागपुर-गोवा शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे के पास रहेगा।  8 किलोमीटर की टनल भी बनेगी इस एक्सप्रेसवे के रास्ते में 8 किलोमीटर लंबी एक टनल भी बनाई जाएगी, जो मलशेज घाट के पास होगी. यह टनल बिलकुल वैसी ही होगी जैसी इगतपुरी के पास बन रही ट्विन टनल है. यह ट्विन टनल समृद्धि एक्सप्रेसवे पर बनाई गई है. इस ई-वे पर कुल मिलाकर 17 इंटरचेंज बनाए जाएंगे. इस ई-वे को तैयार करने पर 22 से 25 हजार करोड़ का खर्चा आएगा. इस ई-वे की सबसे खास बात इसकी लंबाई नहीं, बल्कि इसका दुर्गम रास्ता है।  क्यों जरूरी है 8 किलोमीटर की सड़क मलशेज घाट पर बनने वाली 8 किलोमीटर लंबी टनल काफी मायने रखती है. इस टनल से गुजरने के लिए फ्लैट हाईवे जैसा रास्ता नहीं होगा, बल्कि इसमें तीखे मोड़ और स्लोप हैं जिस पर ट्रैफिक को काफी धीमे-धीमे गुजरना होगा. यही वजह है कि ई-वे पर सबसे जरूरी सेक्शन यह टनल ही है. यह ई-वे दो और एक्सप्रेसवे के साथ कनेक्टिविटी मजबूत करेगा, जिसकी वजह से इसकी अहमियत काफी बढ़ जाती है. इसके अलावा प्रोजेक्ट को विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर के साथ भी जोड़ा जाएगा. इससे बाद में नवी मुंबई एयरपोर्ट और अटल सेतु तक जाना भी आसान हो जाएगा. यह रास्ता मराठवाड़ा में बन रहे सूरत-चेन्नई इकनॉमिक कॉरिडोर को भी जोड़ेगा।   

H-1B Visa Fee को लेकर भारतीयों की बढ़ी चिंता, ट्रंप प्रशासन ने शुल्क व्यवस्था में किया बदलाव

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं जिससे पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। वहीं भारत पर भी उनके फैसलों का सीधा असर पड़ रहा है। 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने वाले कानून को मंजूरी देने के अलावा ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा पर लगने वाले शुल्क को एक साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा के लिए 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाया है। अमेरिका की कोर्ट में उनके इस फैसले के खिलाफ केस भी चल रहा है। ट्रंप प्रशासन का पहले का आदेश सितंबर 2026 तक ही लागू था। बता दें कि एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां दुनियाभर के कुशल लोगों को हायकर करती हैं। आईटी सेक्टर में भी बड़ी संख्या में लोगों को अमेरिका में नौकरियां मिलती हैं। इनमें भारतीयों की संख्या काफी ज्यादा है। वाइट हाउस का कहना है कि ये कंपनियां विदेश से लोगों को सस्ते में हायर करती हैं और अमेरिकियों के लिए रोजगार का संकट पैदा हो जाता है। ऐसे में दोनों तरफ से कंपनियां ही शोषण कर रही हैं। जानकारी के मुताबिक 21 सितंबर 2025 को यह फैसला लागू होने के बाद से 700 से ज्यादा लोगों ने फीस चुकाई है। वहीं अब डिपार्टमेंट ऑफ होम सिक्योरिटी ने एच-1बी के लिए चयन प्रक्रिया में भी परिवर्तन करने का ऐालान कर दिया है। बताया गया है कि अमेरिकी कंपनियों ने एच-1बी रजिस्ट्रेशन को 24946 से घटाकर 2055 कर दिया है। इसमें 92 फीसदी की कमी देखी गई है। भारतीयों के लिए क्यों टेंशन की बात भारत के बड़ी संख्या में प्रेफेशनल एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिका में काम करने जाते हैं। यूएससीआईएस के डेटा के मुताबिक 2024 ममें अमेरिका में 71 फीसदी एच-1बी वीजा वाले लोग भारतीय थे। वहीं चीन के 12 फीसदी लोग ही थे। भारतीय लोगों के लिए अमेरिका में काम करने का मौका एच-1बी वीजा के जरिए ही मिलता है। हालांकि अब 1 लाख डॉलर चुकाना आसान नहीं है। 2025 में एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है और यह मामला दो अलग-अलग संघीय अदालतों में विचाराधीन है। शुल्क बढ़ाने संबंधी 2025 के इस आदेश की अवधि इस महीने समाप्त होने वाली थी। यह आदेश उन विदेशी नागरिकों को दिए गए वीजा पर लागू नहीं है जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं और नए एच-1बी वीजा पाने वालों में जिनकी बड़ी हिस्सेदारी है। यह मौजूदा वीजा के नवीनीकरण पर भी लागू नहीं था। राष्ट्रपति ने एक अलग घोषणा भी जारी की है, जिसमें विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के जरिये एच-1बी वीजा आवेदनों की जांच और कड़ी करने का प्रावधान है। आदेश में विदेश मंत्री, श्रम मंत्री और गृह सुरक्षा मंत्री को निर्देश दिया गया है कि एच-1बी वीजा आवेदनों पर विचार करते समय वे यह भी देखें कि क्या आवेदनकर्ता नियोक्ता ने समान पदों पर कार्यरत अमेरिकी कर्मचारियों की हाल में छंटनी की है या वह ऐसा करने की योजना बना रहा है। ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में कहा कि एच-1बी गैर प्रवासी वीजा कार्यक्रम की शुरुआत अत्यधिक विशिष्ट कौशल वाले विदेशी अस्थायी कर्मचारियों की पहचान करने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को रणनीतिक रूप से पूरा करने के लिए की गई थी। ट्रंप ने कहा, ''इसके बजाय कुछ नियोक्ताओं, तीसरे पक्ष के जरिये कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाले समूहों और आउटसोर्सिंग कंपनियों ने अमेरिकी कुशल श्रमिकों को कम वेतन देने और उन्हें नौकरियों से निकालने के लिए इस कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया है।''

स्कूल मिड-डे मील में चिकन बिरयानी शामिल करने की तैयारी, बच्चों को मिलेगा नया मेन्यू

चेन्नई  तमिलनाडु सरकार ने सरकारी स्कूलों के बच्चों को हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी देने की योजना बनाई है। स्कूल शिक्षा मंत्री राज मोहन ने कहा कि यह मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की इच्छा है। हालांकि, इसे तुरंत लागू नहीं किया जाएगा। सरकार पहले इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट चलाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि बड़ी संख्या में बच्चों के लिए खाना साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा के तय मानकों के मुताबिक कैसे तैयार किया जाएगा। इसके बाद ही योजना को बड़े स्तर पर लागू करने पर फैसला होगा। मंत्री राज मोहन ने कहा कि सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूलों के सभी स्टूडेंट्स को चिकन बिरयानी का विकल्प मिले। उन्होंने साफ किया कि इसके लिए पहले जरूरी इंतजाम करने होंगे। उन्होंने कहा, 'पुझल जेल में कैदियों को भी चिकन बिरयानी मिलती है। क्या हमारे छात्रों को यह नहीं मिल सकती?' मंत्री ने कहा कि योजना को लागू करने से पहले पायलट प्रोजेक्ट के जरिए व्यवस्था की जांच की जाएगी। इसके बाद भोजन की तैयारी, साफ-सफाई और उसे स्कूलों तक पहुंचाने से जुड़ी व्यवस्थाओं को देखा जाएगा। भोजन में मांसाहारी विकल्प शामिल करने पर विचार यह प्रस्ताव पहली बार जुलाई में सामने आया था। उस समय तमिलनाडु सरकार सरकारी स्कूलों के बच्चों को लंच की योजना के तहत हफ्ते में एक बार चिकन बिरयानी देने पर विचार कर रही थी। राज मोहन ने तब बताया था कि उन्होंने खुद मुख्यमंत्री थलपति विजय के सामने यह सुझाव रखा था और अंतिम फैसला उन्हीं को करना है। यह प्रस्ताव स्कूलों में दिए जाने वाले भोजन में मांसाहारी विकल्प शामिल करने को लेकर चल रही चर्चा के बीच आया था। मंत्री ने कहा था कि बढ़ते बच्चों के लिए पर्याप्त प्रोटीन जरूरी है और चिकन बिरयानी देने के प्रस्ताव को राजनीतिक मुद्दे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर होगी शुरुआत राज मोहन ने कहा कि तमिलनाडु में शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव के साथ पोषण पर भी लगातार ध्यान दिया गया है। प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में शाकाहारी भोजन पसंद करने वाले बच्चों को पहले की तरह शाकाहारी खाना मिलता रहेगा, जबकि मांसाहारी भोजन खाने वाले छात्र चिकन बिरयानी का विकल्प चुन सकेंगे। फिलहाल सरकार का जोर योजना को सुरक्षित तरीके से लागू करने की तैयारी पर है। मालूम हो कि तमिलनाडु में लंच के साथ सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए नाश्ते की योजना भी चल रही है।

Central Employees: सरकार ने इस योजना में किए बदलाव, केंद्रीय कर्मचारियों पर होगा असर

नई दिल्ली अगर केंद्रीय कर्मचारी हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। आइए डिटेल में जानतें है कि क्या कुछ बदल गया है। क्या बदला है नियम? सरकार ने उस भौगोलिक शर्त को हटाने का फैसला किया है जो पहले केंद्र सरकार के मौजूदा कर्मचारियों के लिए उनके रहने या पोस्टिंग की जगह के आधार पर CGHS की पात्रता को सीमित करती थी। जानकार बताते हैं कि पहले की भौगोलिक पाबंदियों ने CGHS कवरेज के दायरे से बाहर रहने या पोस्टेड कर्मचारियों के लिए मुश्किलें और परेशानियां पैदा कर दी थीं। बदले हुए नियम ऐसे हालात में योग्य कर्मचारियों को CGHS चुनने की इजाजत देते हैं, बशर्ते वे दूसरी शर्तों को पूरा करें और तय योगदान का भुगतान करें। एक बार यह विकल्प चुनने के बाद इसे बदला नहीं जा सकता। CGHS चुनने वाले योग्य कर्मचारियों को यह अंडरटेकिंग भी देनी होगी कि वे या उनके योग्य परिवार के सदस्य CGHS और सेंट्रल सर्विसेज (मेडिकल अटेंडेंस) रूल्स, 1944, दोनों के तहत मेडिकल फायदों का दावा नहीं करेंगे। जो कर्मचारी पहले से CGHS के कवरेज वाले इलाके में रह रहे हैं या वहां तैनात हैं, उनके लिए CGHS कवरेज अनिवार्य रहेगा। ऐसे कर्मचारी इसके बदले CS(MA) नियमों के तहत मिलने वाली सुविधाओं का विकल्प नहीं चुन सकेंगे। गलत जानकारी पर होगी कार्रवाई सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई कर्मचारी गलत या भ्रामक जानकारी देकर मेडिकल लाभ लेता है, तो उसके खिलाफ गंभीर कार्रवाई हो सकती है। ऐसी स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ गलत तरीके से लिए गए लाभ की वसूली भी की जा सकती है। CGHS क्या है? CGHS की बात करें तो केंद्र सरकार के मौजूदा और रिटायर्ड कर्मचारियों और उनके योग्य परिवार के सदस्यों के लिए एक सरकारी हेल्थकेयर प्रोग्राम है। इसे 1 जुलाई 1954 को दिल्ली में शुरू किया गया था, जिसका मुख्य मकसद मेडिकल देखभाल देना और आउटपेशेंट दवाओं के लिए रीइंबर्समेंट का दावा करने में कर्मचारियों को होने वाली दिक्कतों को दूर करना था। पिछले कुछ दशकों में, CGHS का विस्तार दिल्ली से आगे कई शहरों तक हुआ है और अब यह वेलनेस सेंटर, पॉलीक्लिनिक, लेबोरेटरी और एम्पैनल्ड अस्पतालों के जरिए सेवाएं देता है। इसके अलावा, इसके दायरे में योग्य पेंशनभोगी और लाभार्थियों की कुछ अन्य श्रेणियां भी शामिल हो गई हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की 2024-25 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, CGHS 81 शहरों तक फैल गया था और लगभग 46.87 लाख लाभार्थियों को सेवाएं दे रहा था।

सोलर पैनल से घटा बिजली बिल, किसान नेतराम को हर माह ₹2,000 की बचत

सौर ऊर्जा से रोशन हुआ किसान नेतराम का घर, पीएम सूर्य घर योजना से हर माह 2000 रुपए की बचत  खेती-किसानी को मिला नया बल ​रायपुर        प्रदेश में 'सेवा संकल्प अभियान' के माध्यम से जन-कल्याणकारी योजनाओं का प्रभाव अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से न केवल आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार आया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है। ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम गोबरसिंहा निवासी किसान नेतराम पटेल का है, जिनके जीवन में 'प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' आर्थिक संबल बनकर उभरी है। ​बिजली के भारी-भरकम बिल से मुक्ति       ​योजना का लाभ लेने से पहले नेतराम पटेल के घर का मासिक बिजली बिल करीब 2,200 से 2,300 रुपए तक आता था, जो उनके बजट पर एक बड़ा वित्तीय बोझ था। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत छत पर सौर पैनल (रूफटॉप सोलर सिस्टम) स्थापित होने के बाद अब उनका मासिक बिजली बिल घटकर मात्र 250 से 300 रुपए रह गया है। ​बचत की राशि से कृषि कार्यों में मिला संबल        ​सोलर पैनल के माध्यम से बिजली की जरूरतें घर पर ही पूरी होने से नेतराम को हर महीने लगभग 2,000  रुपए की सीधी बचत हो रही है। इस बचत राशि का उपयोग वे अपनी खेती-किसानी से जुड़े दैनिक खर्चों को पूरा करने में कर रहे हैं। इससे उन्हें खाद, बीज व अन्य कृषि आवश्यकताओं के लिए अतिरिक्त वित्तीय संबल मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पहले हर महीने बिजली बिल के रूप में एक बड़ी राशि देनी पड़ती थी। अब वही पैसा बचकर खेती के काम आ रहा है। इस योजना ने मेरी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव लाया है। ​शासन के प्रति जताया आभार         ​योजना से जीवन में आए इस सकारात्मक परिवर्तन के लिए नेतराम पटेल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अन्य किसान भाइयों और ग्रामीणों से भी इस योजना से जुड़कर बिजली खर्च घटाने और अपनी बचत बढ़ाने की अपील की है। ​धरातल पर असर दिखा रहा 'सेवा संकल्प अभियान'       ​नेतराम पटेल की यह सफलता की कहानी यह साबित करती है कि जब शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं सीधे जरूरतमंदों तक पहुँचती हैं, तो उनका प्रभाव केवल मुफ्त या सस्ती बिजली तक सीमित नहीं रहता; बल्कि वह बचत, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण का स्थायी माध्यम बन जाता है।

देश सेवा से उद्यम तक का सफर, PMFME योजना ने बदली सफलता की कहानी

देश सेवा से उद्यम सेवा तक – प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना ने बनाया सफल उद्यमी भोपाल  भिण्ड शहर के चतुर्वेदी नगर निवासी संतोष सिंह प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना पीएमएफएमई अंतर्गत प्राप्त सहायता के माध्यम से सफल उद्यमी बने हैं। भारतीय सेना में हवलदार के पद पर 17 वर्षों तक सेवा देने वाले सिंह ने देश-सेवा के बाद जिले में उद्यम-सेवा के जज्बे के साथ खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कदम रखा। वैष्णवी ऑयल मिल के माध्यम से ओडीओपी उत्पाद – सरसो का प्रसंस्करण कर वे न केवल 10 लाख की वार्षिक आय प्राप्त कर रहे हैं बल्कि 5 अन्य स्थानीय व्यक्तियों को रोजगार भी दे रहे है। शुरुआती दिनों में वैष्णवी ऑयल मिल की सीमित संसाधनों के कारण उत्पादन क्षमता कम थी और उत्पाद को बड़ा बाजार नहीं मिल पा रहा था। पीएमएफएमई योजना अंतर्गत आवेदन करने पर योजना के तहत उन्हें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से 13.50 लाख रुपए का ऋण और 5.25 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। उन्होंने इस सहायता से मिल के उन्नयन हेतु आधुनिक एक्सपेलर, फिल्टर और मोटर मशीनें लगाई जिससे उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई। आज वे ग्रामीण क्षेत्रों से किसानों से सीधे सरसों खरीद कर शुद्ध सरसों का तेल निकालते हैं और उसे खुला एवं टीन के डिब्बों में पैक कर स्थानीय बाजार में बेचते हैं। सिंह का कहना है कि पीएमएफएमई योजना अत्यंत लाभकारी है जिसके अंतर्गत सहायता प्राप्त कर युवा अपना उद्यम स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। सिंह अपने खाद्य प्रसंस्करण उद्यम के सफल संचालन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देते हैं। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत संचालित इस योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण इकाई की स्थापना पर अधिकतम 10 लाख रुपए की सीमा तक 35 प्रतिशत अनुदान और 3 प्रतिशत ब्याज माफी का प्रावधान है। जिले के युवा, कृषक, और छोटे व्यवसायी व्यक्तिगत स्तर पर, तथा किसान उत्पाद संगठन, स्वसहायता समूह और उत्पादक सहकारी समिति उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से संपर्क कर नए औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अथवा मौजूदा इकाइयों के उन्नयन के लिए योजना अंतर्गत वित्तीय और तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।