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मध्यप्रदेश में मेडिकल एडमिशन की रेस तेज, 62 खाली सीटों के लिए आए 13,876 आवेदन; एक सीट पर 224 दावेदार

भोपाल   मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन का अंतिम दौर यानी कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) में खाली सीटों पर एडमिशन के लिए विद्यार्थियों में मारामारी है। राज्यभर के मेडिकल (एमबीबीएस) और डेंटल (बीडीएस) कॉलेजों की केवल 62 सीटें खाली हैं, जिसके लिए 13876 च्वाइस फिलिंग (आवेदन) हुए हैं। एक सीट के लिए औसतन 224 विद्यार्थियों ने आवेदन किए हैं। इंदौर में एमबीबीएस की खाली चार सीटों के लिए 2003 विद्यार्थी मैदान में हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा क्रेज जीएमसी भोपाल की एकमात्र खाली सीट पर है, जहां पर 944 विद्यार्थी एडमिशन की लाइन में हैं। जानकारी के अनुसार प्रदेश में एमबीबीएस की 38 सीटें खाली है, जिसके लिए 12069 आवेदन प्राप्त हुए है, यानी प्रत्येक सीट पर लगभग 317 विद्यार्थियों ने दावा किया है। बीडीएस की 24 सीटों के लिए 1807 च्वाइस फिलिंग दर्ज की गई है, जिसमें औसतन प्रति सीट करीब 75 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा कुछ आवेदनों में से 13345 आवेदन यानी 96.1 प्रतिशत मध्यप्रदेश के मूल निवासी, वहीं 531 आवेदन अन्य राज्यों के विद्यार्थियों के हैं। ये है प्रदेश की स्थिति 62-खाली सीटें 13876-च्वाइस फिलिंग 12069-एमबीबीएस आवेदन 317-प्रति सीट आवेदन 1807-बीडीएस आवेदन 75-प्रति सीट आवेदन 13345-राज्य के विद्याथियों के आवेदन 531-बाहरी राज्यों के विद्यार्थियों के आवेदन इंदौर के गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज का क्रेज शहर के एकमात्र गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज में बीडीएस की एक सीट के लिए 262 छात्रों ने दावेदारी की है। प्राइवेट डेंटल कॉलेजों (इंडेक्स डेंटल, मॉडर्न डेंटल, और श्री अरबिंदो डेंटिस्ट्री) में 9 सीटें खाली हैं, जिन पर 651 आवेदन प्राप्त हुए हैं। अरबिंदो डेंटल व माडर्न डेंटल की एक-एक सीट पर क्रमशः 213 व 211 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है। इंदौर में एडमिशन की होड़ सीएलसी काउंसलिंग में इंदौर के मेडिकल व डेंटल एजुकेशन कॉलेज में प्रवेश के लिए भारी होड़ है। यहां 14 सीटों के लिए 2900 से अधिक आवेदन आए हैं। यानी औसतन प्रति सीट 208 विद्यार्थी मैदान में हैं। इसमें एमबीबीएस की मात्र चार सीट है। यहां गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एकभी सीट खाली नहीं है। इंदौर के 3 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों (इंडेक्स, एलएनसीटी और श्री अरबिंदो) में एमबीबीएस की चार सीटें खाली हैं, जिन पर 2003 विद्यार्थियों ने च्वाइस फीलिंग की है। मतलब है कि इंदौर में एमबीबीएस की एक सीट पर 500 से अधिक छात्र कतार में हैं। गवर्नमेंट की 8 सीटों पर 5676 आवेदन गवर्नमेंट कॉलेजों में 8 सीटों के लिए 5676 आवेदन आए हैं। यहां 1 सीट के लिए औसतन 709 विद्यार्थियों में दौड़ में है। निजी मेडिकल कॉलेजों की खाली 54 सीटों के लिए 8200 च्वाइस फीलिंग की है।  भोपाल के गवर्नमेंट गांधी मेडिकल कॉलेज की एक खाली एमबीबीएस सीट पर 944, नंदकुमार सिंह चौहान गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज खंडवा में एमबीबीएस की 2 सीटों के लिए 913. गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना में एमबीबीएस की खाली एक सीट के लिए 896 और आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज उज्जैन में एमबीबीएस की 1 सीट पर 702 च्वाइस फिलिंग मिली।  

Namo Yamuna River Safari: ₹500 में यमुना की सैर का मौका, दिल्ली में क्रूज सेवा शुरू करने की तैयारी

नई दिल्ली दिल्ली में यमुना नदी के किनारे पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 'नमो यमुना-रिवर सफारी' क्रूज सेवा शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है. इस सेवा का ट्रायल शुरू हो चुका है और छठ से पहले इसका उद्घाटन किए जाने की योजना है. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने इस पहल को राजधानी में पर्यटन की नई संभावनाओं से जोड़ते हुए क्रूज सेवा के ट्रायल की शुरुआत की. जानकारी के मुताबिक, 4 या 5 नवंबर को इसका उद्घाटन हो सकता है. इस सेवा के शुरू होने से दिल्लीवासियों और पर्यटकों को यमुना नदी में क्रूज की सवारी का नया अनुभव मिलने की उम्मीद है।  'नमो यमुना-रिवर सफारी' के तहत क्रूज सोनिया विहार से जगतपुर के बीच संचालित किया जाएगा. इसकी यात्रा करीब 30 से 40 मिनट की होगी. प्रति व्यक्ति किराया 500 रुपये तय किया गया है. क्रूज सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक चलाने की योजना है, एक बार में इसमें अधिकतम 30 से 40 यात्री सफर कर सकेंगे।  यात्रियों की सुविधा के लिए सोनिया विहार और जगतपुर, दोनों जगहों पर टिकट काउंटर बनाए गए हैं. इस सेवा के जरिए लोग यमुना नदी के प्राकृतिक वातावरण का आनंद ले सकेंगे. साथ ही, परिवार के साथ समय बिताने और राजधानी में घूमने के लिए एक नया विकल्प भी मिलेगा।  छठ से पहले उद्घाटन की तैयारी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार की योजना छठ पर्व से पहले यमुना सफारी का उद्घाटन करने की है. उन्होंने कहा कि दूसरे शहरों में नदियों पर नाव की सवारी करने से लोगों को सुकून मिलता है. इसी तरह दिल्ली में भी यमुना सफारी के जरिए लोग मां यमुना के दर्शन कर सकेंगे और नदी के आसपास के प्राकृतिक वातावरण का आनंद उठा सकेंगे।  मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस परियोजना को एक अच्छे पिकनिक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां परिवार आकर समय बिता सकेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल में प्रकृति और यमुना नदी की सफाई का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि पर्यटन गतिविधियों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा सके।  पर्यटन को मिलेगा नया विकल्प रेखा गुप्ता ने इस परियोजना को दिल्ली के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, पर्यटन विभाग और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के योगदान की सराहना की. उन्होंने कहा कि इन सभी के सहयोग से यह योजना संभव हो सकी है।   

दिन में 18 घंटे काम, फिर भी पति से कम कमाई! 29 साल की महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

नई दिल्ली 9 घंटे की नौकरी करने में इंसान की बॉडी थक जाती है लेकिन सोचो जो महिला 18 घंटे काम करती है, उसकी क्या हालात होती होगी. पर फिर भी उन्हें अच्छी सैलरी न मिले तो? दक्षिण कोरिया में रहने वाली 29 साल की कंटेंट क्रिएटर रेबेका की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना रोजाना का रूटीन शेयर करते हुए बताया कि वह दिन में करीब 18 घंटे काम करती हैं लेकिन फिर भी वह अपने पति की कमाई का आधा ही कमा पाती हैं. उनकी इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर वर्क कल्चर को लेकर बहस छिड़ गई है. भारत में ज्यादा देर तक काम करना एक अच्छे कर्मचारी की सबसे बड़ी क्वालिटी होती है. लेकिन दक्षिण कोरिया में इस तरह का कल्चर देखकर यूजर्स हैरान हो गए हैं।  सुबह 9 बजे शुरू होता है काम, रात 3 बजे तक रहती हैं व्यस्त कंटेंट क्रिएटर रेबेका ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर करते हुए बताया कि वह घर से काम करती हैं और सुबह 9 बजे उनका काम शुरू हो जाता है. वीडियो में उन्होंने यह भी बताया कि बिना कॉफी के उनकी नींद नहीं खुलती जिसके लिए वह बाहर कॉफी लेने के लिए जाती हैं. इसके बाद घर लौटते ही वह काम करने के लिए बैठ जाती हैं. रेबेका के मुताबिक, काम के दबाव के कारण उन्हें दिन में खाना बनाने का समय भी नहीं मिलता है. कई बार लंच में उन्हें इंस्टेंट नूडल्स से ही काम चलाना पड़ता है. उनका काम देर रात तक चलता रहता है।  रेबेका ने बताया कि उनके पति रात करीब 11 बजे घर आते हैं. उस समय भी वह काम कर रही होती हैं. उनके पति रात का खाना तैयार करते हैं, जबकि रेबेका अपना काम कर रही होती हैं. उनका कहना है कि वह रात करीब 3 बजे काम खत्म करके सोने जाती हैं।  पति से ज्यादा काम, फिर भी आधी सैलरी  लेकिन इस वीडियो को देखने के बाद लोगों के मन में एक ही सवाल उठ रहा होगा कि अगर वह दिनभर में इतनी मेहनत करती हैं, तो उनकी सैलरी भी अच्छी होगी. लेकिन ऐसा नहीं है… रेबेका ने अपने वीडियो में बताया कि वह अपने पति से ज्यादा घंटे काम करती हैं, लेकिन उनकी कमाई पति की सैलरी की आधी ही है।  उनकी इसी बात ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा. वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कुछ लोगों ने उनके काम के लंबे घंटों पर चिंता जताई और उन्हें आराम करने की सलाह दी. एक यूजर ने कहा कि इतनी मेहनत के बावजूद महिलाओं को पुरुषों से कम सैलरी मिलना चिंता की बात है. वहीं, दूसरे यूजर्स ने उनके रूटीन को बेहद थकाने वाला बताया।  काम के घंटों और सैलरी को लेकर उठे सवाल रेबेका की कहानी के बाद लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि आखिर इतनी देर तक काम करने के बावजूद उनकी सैलरी पति से कम क्यों है. हालांकि, रिपोर्ट में उनके काम की सटीक प्रकृति और दोनों की सैलरी के बीच अंतर की वजह साफ नहीं बताई गई है. यह मामला काम के बढ़ते दबाव और कामकाजी जीवन में संतुलन बनाए रखने की चुनौती को भी सामने लाता है. रेबेका का वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। 

बैंकिंग सेक्टर में फिर नौकरी पर संकट, HSBC के बाद अब Barclays में 5,000 कर्मचारियों की छंटनी का प्लान

लंदन  ब्रिटिश बैंक बार्कलेज ने छंटनी का बड़ा प्लान बनाया है और रिपोर्ट्स के मुताबिक अपने ग्लोबल वर्कफोर्स का एक बड़ा हिस्सा साफ करने के लिए तैयार है. एआई, ऑटोमेशन और कॉस्ट कटिंग का हवाला देते हुए Barclays ने इस साल के अंत तक 5000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए लिस्ट बनाने पर काम शुरू कर दिया है।  छंटनी का कहां सबसे ज्यादा असर?  ब्रिटिश बैंक Barclays मल्टीनेशनल बैंक और फाइनेंशियल सर्विस कंपनी है, जो दुनिया के कई देशों में कारोबार करती है. अब इसने अपने ग्लोबल वर्कफोर्स के लगभग 5% को हटाने का प्लान बनाया है. इसमें लगभग 1,000 नौकरियों पर पहले ही तलवार लटकी है, जबकि इस साल 2026 के आखिर तक 4,000 कर्मचारियों की लिस्ट बनाई जा रही है. बैंक की ओर से प्लान की गई लगभग 60% कटौती से डेवलपर्स समेत सपोर्ट फंक्शन पर सबसे अधिक असर पड़ेगा।  क्या है इस बड़े Lay Off की वजह?  बार्कलेज ने साल के आखिर तक इस बड़ी छंटनी की तैयारी के पीछे की वजह बताते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोमेशन और कॉस्ट-कटिंग का हवाला दिया है, जो बैंकिंग वर्कफोर्स को बदलते हुए नजर आ रहे हैं. बैंक को इस कदम से बड़े पैमाने पर लागत बचाने और टेक्नोलॉजी को मॉडर्न बनाने और AI से प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।  छंटनी की दौड़ में अकेला नहीं बर्कलेज Barclays अकेला लेंडर नहीं है, जो बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा कर रहा है. इससे पहले मई में स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने कहा था कि उसने 2030 तक दुनिया भर में 7,000 से ज्यादा नौकरियां खत्म करने की योजना बनाई है. मार्च में खबर आई थी कि HSBC करीब 20,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने पर विचार कर रहा है. जुलाई में VISA ने लगभग 2,600 नौकरियों या अपनी ग्लोबल वर्कफोर्स का 7% हिस्सा कम करने का ऐलान किया था।   बैंकिंग जॉब्स बदल रही है ग्लोबल बैंकिंग सिस्टम में आया ये बदलाव बताता है कि फाइनेंशियल-सर्विस सेक्टर टेक्नोलॉजी में इन्वेस्ट करते हुए प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है. ऑटोमेशन की वजह से रूटीन प्रोसेसिंग और एडमिनिस्ट्रेटिव काम पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है, जबकि डिमांड टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, डेटा एनालिसिस और कस्टमर-फेसिंग रोल की तरफ शिफ्ट हो सकती है. हालांकि, अब तक का मौजूद डेटा यह कतई साबित नहीं करता है कि AI की वजह से हर नौकरी गई है।  भारतीय बैंकों में क्या चल रहा? भारतीय बैंकों में भी एक अलग तस्वीर नजर आई है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, HDFC Bank, ICICI Bank और Axis Bank ने FY2025-26 को मिलाकर 13,000 से ज्यादा कर्मचारियों की कमी की गई है. ICICI बैंक के कर्मचारियों की संख्या में 6,633, HDFC बैंक के कर्मचारियों में 3,343 और एक्सिस बैंक के कर्मचारियों में लगभग 3,400 की कमी आई है।  हालांकि, अधिकारियों ने इसके पीछे बड़े पैमाने पर छंटनी के बजाय कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने, चुनिंदा हायरिंग, रीडिप्लॉयमेंट और टेक प्रोडक्टिविटी जैसे कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। 

चंडीगढ़ को मिलेगी ट्रैफिक जाम से राहत, सुखना चो पर बनेगा फोरलेन एलिवेटेड पुल; दिसंबर से काम शुरू

चंडीगढ़  शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या दूर करने और मानसून के दौरान निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए बापूधाम-शास्त्री नगर के पास सुखना चो पर फोरलेन एलिवेटेड पुल का निर्माण दिसंबर में शुरू होने की संभावना है। चीफ इंजीनियर सीबी ओझा के अनुसार, टेंडरों का मूल्यांकन किया जा रहा है। 16.63 करोड़ से बनने वाले इस पुल का निर्माण कार्य दिसंबर में शुरू होने की उम्मीद है, जिसे 12 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बापूधाम-शास्त्री नगर के पास सुखना चो पर बना मौजूदा लो-लेवल पुल बरसात के दौरान परेशानी का कारण बनता है। सुखना झील से पानी छोड़े जाने पर जलस्तर बढ़ने के कारण इस रास्ते को बंद करना पड़ता है। जुलाई 2023 में पानी के तेज बहाव से पुल को काफी नुकसान पहुंचा था और इसे पांच दिन तक बंद रखना पड़ा था। यह मार्ग मनीमाजरा, पंचकूला और मनीमाजरा के आसपास के क्षेत्रों से चंडीगढ़ आने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। पुल बंद होने पर वाहनों का दबाव मध्यमार्ग पर बढ़ जाता है, जिससे सुबह और शाम के व्यस्त समय में लंबा जाम लग जाता है। सेक्टर-26 से मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी प्रस्तावित फोरलेन एलिवेटेड पुल को मौजूदा पुल से अधिक ऊंचाई पर बनाया जाएगा, ताकि मानसून के दौरान सुखना झील से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने पर भी आवाजाही प्रभावित न हो। इससे सेक्टर-26 को सेक्टर-13, चंडीगढ़ आईटी पार्क, किशनगढ़ और पंचकूला स्थित मनसा देवी काॅम्प्लेक्स से जोड़ने वाले मार्ग पर यातायात सुचारु रखने में मदद मिलेगी। इस रास्ते का इस्तेमाल हरियाणा सचिवालय, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, राॅक गार्डन और बर्ड पार्क जाने वाले लोग भी करते हैं। अधिकारियों के अनुसार, पुल बनने से मौजूदा यातायात अवरोध दूर होगा और लोगों को हर मौसम में निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी।मालूम हो कि पंजाब यूनिवर्सिटी और पीजीआई में बनने वाले अंडरपास के लिए प्रशासन ने टेंडर जारी कर दिया है।

Amazon Sale में 32 इंच के TV पर बड़ी बचत, कीमत में ₹12 हजार की कटौती का दावा

 नई दिल्ली दिवाली से पहले लोग अपने घर के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स की शॉपिंग करते हैं. अगर आप भी इस फेस्टिव सीजन अपने घर के लिए कम कीमत में TV (टेलीविजन) खरीदना चाहते हैं, तो ऐमेजॉन पर चल रही Great Indian Festival Sale में आपके लिए शानदार डील है. यहां Xiaomi का 32 इंच वाला स्मार्ट टीवी आधी कीमत के करीब मिल रहा है. इस टीवी में कई अच्छे फीचर्स भी मिलते हैं. आइए जानते हैं इस डील में कितनी बचत हो रही है और टीवी में क्या-क्या खास मिलता है।  कौन सा TV मिल रहा है सस्ते में? Xiaomi के 32 इंच F सीरीज स्मार्ट TV पर ऐमेजॉन ग्रेट इंडियन फेस्टिवल सेल में 50% की छूट मिल रही है. इस स्मार्ट टीवी की MRP ₹24,999 है, लेकिन सेल में इसे ₹12,499 में खरीदा जा सकता है. यानी इसकी कीमत में ₹12,500 की कटौती हो रही है. इसके अलावा, चुनिंदा कार्ड पर ₹1,000 तक का अतिरिक्त डिस्काउंट भी मिल सकता है. हालांकि, कार्ड ऑफर की शर्तें लागू होंगी।  कैसी है डिस्प्ले क्वालिटी? यह 32 इंच का स्मार्ट TV HD रेजोल्यूशन वाली डिस्प्ले के साथ आता है. इसमें 60Hz का रिफ्रेश रेट मिलता है, जिससे आप रोजाना टीवी देखने और सामान्य वीडियो कंटेंट का अच्छा अनुभव ले सकते हैं. इसका 32 इंच का साइज छोटे कमरे या बेडरूम के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है. इसे घर में आसानी से रखा जा सकता है।  कैसी है साउंड क्वालिटी? अच्छे डिस्प्ले के साथ टीवी में साउंड क्वालिटी भी मायने रखती है. Xiaomi के इस TV में 20W का साउंड आउटपुट मिलता है. इसके साथ Dolby Audio का सपोर्ट भी दिया गया है. इसकी मदद से मूवी और दूसरे वीडियो कंटेंट देखते समय बेहतर ऑडियो अनुभव मिल सकता है।  मिलते हैं ये स्मार्ट फीचर्स कम कीमत के बावजूद इस टीवी में कई स्मार्ट फीचर्स मिलते हैं. इसमें Fire टीवी बिल्ट-इन दिया गया है. यानी आप Prime Video, Netflix, Disney+ Hotstar और YouTube जैसे ऐप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं. कंपनी के मुताबिक, इसमें ऐप स्टोर से 12,000 से ज्यादा ऐप्स का सपोर्ट मिलता है।  इसके साथ Alexa सपोर्ट वाला वॉयस रिमोट भी दिया गया है. इसकी मदद से आप अपनी आवाज से कंटेंट खोज सकते हैं. टीवी में DTH सेट-टॉप बॉक्स इंटीग्रेशन भी मिलता है, जिससे होम स्क्रीन से DTH चैनल और OTT ऐप्स के बीच स्विच करना आसान हो सकता है।  कनेक्टिविटी के लिए मिलते हैं ये पोर्ट कनेक्टिविटी के लिए टीवी में 2 HDMI पोर्ट दिए गए हैं. इनकी मदद से आप सेट-टॉप बॉक्स और दूसरे HDMI डिवाइस कनेक्ट कर सकते हैं. इसके अलावा, इसमें 2 USB पोर्ट भी मिलते हैं, जिनकी मदद से सपोर्टेड USB डिवाइस कनेक्ट किए जा सकते हैं. अगर आपका बजट कम है और आप घर के लिए 32 इंच का स्मार्ट टीवी खरीदने की सोच रहे हैं, तो ऐमेजॉन की यह डील आपके काम आ सकती है। 

पंजाब में किसानों के लिए बड़ी राहत, गेहूं के प्रमाणित बीज आधी कीमत पर मिलेंगे; 2.5 लाख किसानों को फायदा

चंडीगढ़  पंजाब में किसानों को प्रमाणित गेहूं के बीज की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने रविवार को 50 करोड़ रुपये की योजना की घोषणा की। इसके तहत किसानों को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) की सिफारिशों के अनुरूप प्रमाणित बीज रियायती दरों पर उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रति हेक्टेयर अधिकतम 2000 रुपये की सहायता मिलेगी। खुड्डियां ने बताया कि प्रमाणित गेहूं के बीज की कीमत 4250 रुपये प्रति क्विंटल है। सब्सिडी के बाद किसानों को यह बीज 2250 रुपये प्रति क्विंटल में मिलेगा। सब्सिडी की राशि खरीद के समय ही कीमत में समायोजित कर दी जाएगी। हालांकि, सहायता बीज की लागत के 50 प्रतिशत या प्रति हेक्टेयर 2000 रुपये, जो भी कम हो, तक सीमित रहेगी। 50 करोड़ का बजट प्रस्तावित कृषि विभाग ने योजना के तहत 2,42,218 किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कुल 50 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। योजना कृषि उन्नति योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (एनएफएसएनएम) के बीज घटक के अंतर्गत लागू होगी। 10 साल तक पुरानी किस्में पात्र योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपने जिला या ब्लाक कृषि कार्यालय में संपर्क कर निर्धारित पोर्टल http://www.agrimachinerypb.com के माध्यम से आवेदन करना होगा। इसके लिए आधार कार्ड जरूरी होगा और आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ओटीपी के जरिये पहचान सत्यापित की जाएगी। सब्सिडी केवल पीएयू की सिफारिश वाली और आइसीएआर या पंजाब सरकार से अधिसूचित प्रमाणित गेहूं की किस्मों पर मिलेगी। बीज की किस्म 10 साल से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए। बीज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित नोडल एजेंसियों की जवाबदेही तय की गई है। पारदर्शी प्रक्रिया से मिलेगा योजना का लाभ योजना में जिला और ब्लाक स्तर के निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर सहायता मिलेगी। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक लाभार्थियों के लिए दो साल की कूलिंग अवधि लागू होगी। मुख्यालय की ओर से लाभार्थियों, बीज की मात्रा और सब्सिडी राशि का रैंडम सत्यापन भी किया जाएगा। खुड्डियां ने कहा कि सरकार किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराने और उन पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।  

PCS अधिकारी राहुल मिश्रा और आकांक्षा बाजपेयी ने की सगाई, अब खजुराहो में होगी शादी

 महोबा उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में तैनात दो पीसीएस अधिकारी शादी करने जा रहे हैं. इनमें एक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा हैं, जबकि दूसरी जिला सेवायोजन अधिकारी आकांक्षा बाजपेयी हैं. दोनों 30 नवंबर को शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं।  हाल ही में दोनों अधिकारियों ने चित्रकूट के एक निजी होटल में आयोजित सादगीपूर्ण समारोह में एक-दूसरे को अंगूठी पहनाकर सगाई कर ली. दफ्तरों की महज 200 मीटर की दूरी से शुरू हुई यह नजदीकियां दोनों परिवारों की सहमति से अब विवाह के रिश्ते में बदलने जा रही हैं. शादी का यह भव्य समारोह खजुराहो में आयोजित किया जाएगा।  दफ्तरों के बीच 200 मीटर की दूरी से शुरू हुआ रिश्ता दोनों अधिकारियों के दफ्तर एक-दूसरे से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित हैं. काम के सिलसिले में अक्सर आमने-सामने आने के कारण दोनों अधिकारियों के बीच धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ीं. प्रशासनिक हलकों में इस रिश्ते की चर्चा पहले से ही थी, जिस पर अब सगाई के बाद आधिकारिक मुहर लग गई है. चित्रकूट के निजी होटल में हुए इस सगाई कार्यक्रम में केवल दोनों परिवारों के चुनिंदा सदस्य ही शामिल हुए थे।  जानिए दोनों पीसीएस अधिकारियों का परिचय वर्ष 2020 बैच के पीसीएस अधिकारी राहुल मिश्रा मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले हैं. उन्होंने जुलाई 2024 में महोबा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के रूप में कार्यभार संभाला था. वहीं, आकांक्षा बाजपेयी मूल रूप से बांदा जिले की निवासी हैं और वे पिछले तीन वर्षों से महोबा में जिला सेवायोजन अधिकारी के पद पर अपनी सेवाएं दे रही हैं।  खजुराहो में 30 नवंबर को होगा भव्य विवाह दोनों परिवारों की रजामंदी के बाद विवाह के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की गई है. शादी का यह भव्य समारोह खजुराहो में संपन्न होगा. सोशल मीडिया पर सगाई की तस्वीरें सामने आने के बाद से ही साथी अधिकारियों, शुभचिंतकों और स्थानीय लोगों द्वारा इस जोड़े को लगातार बधाइयां और शुभकामनाएं दी जा रही हैं। 

अरुणाचल में चीन से मुकाबले के लिए ITBP मजबूत करेगी ताकत, ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर खास जोर

 नई दिल्ली एक तरफ अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच कई स्थानों पर आमने-सामने की स्थिति की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) अपनी ऑपरेशनल क्षमता को नए सिरे से मजबूत करने में जुटी है. दुर्गम पहाड़ों में जवानों की तेज आवाजाही से लेकर ड्रोन वॉरफेयर, एंटी-ड्रोन सिस्टम, विशेष कमांडो ट्रेनिंग और भूमिगत बंकरों तक, सीमा सुरक्षा की रणनीति में व्यापक बदलाव की तैयारी है. इसी कड़ी में करीब दो दर्जन क्विक रिस्पांस फाइटिंग व्हीकल (QRFV) खरीदने की योजना अहम मानी जा रही है।  भारत-चीन सीमा पर चुनौती केवल दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने तक सीमित नहीं है. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के कई हिस्सों में ऊंचे पहाड़, बेहद कम तापमान, बर्फ से ढके रास्ते और सीमित सड़क संपर्क सुरक्षा बलों के सामने अलग तरह की चुनौतियां पैदा करते हैं।  ऐसे हालात में किसी संवेदनशील स्थान पर अचानक तनाव बढ़ने पर जवानों को कितनी तेजी से वहां पहुंचाया जा सकता है, यह सुरक्षा तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है.अरुणाचल प्रदेश में हाल के दिनों में सामने आई फेस-ऑफ की स्थितियों के बीच ITBP की वाहन क्षमता और आधुनिक तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसका उद्देश्य केवल जवानों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित, संगठित और प्रभावी तरीके से तैनात करने की क्षमता बढ़ाना।  1. करीब दो दर्जन QRFV से मजबूत होगी त्वरित कार्रवाई की क्षमता ITBP की योजना करीब दो दर्जन क्विक रिस्पांस फाइटिंग व्हीकल खरीदने की है. इन वाहनों का मकसद संवेदनशील परिस्थितियों में जवानों की आवाजाही और त्वरित तैनाती की क्षमता बढ़ाना है. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) पहले से ही सीमा के निकट सैनिकों की आवाजाही के लिए बेहतर सड़क नेटवर्क और आधुनिक वाहनों का इस्तेमाल करती है. ऐसे में भारतीय पक्ष के लिए भी मजबूत मोबिलिटी एक अहम जरूरत है।  QRFV यानी Quick Response Fighting Vehicle का मूल उद्देश्य है कि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा बल कम समय में निर्धारित स्थान तक पहुंच सकें. सामान्य परिवहन वाहन और इस तरह के विशेष सैन्य वाहन के बीच बड़ा अंतर उनकी सुरक्षा, कठिन भूभाग में संचालन और ऑपरेशनल परिस्थितियों के अनुरूप डिजाइन में होता है.यहां सबसे महत्वपूर्ण पहलू है रिएक्शन टाइम यानी प्रतिक्रिया देने में लगने वाला समय. सीमा पर तनाव की स्थिति में बेहतर सड़क संपर्क, उपलब्ध वाहन और प्रशिक्षित जवान मिलकर त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ाते हैं. अगर किसी स्थान पर आमने-सामने की स्थिति बनती है, तो वहां तक अतिरिक्त बल पहुंचाने की क्षमता हालात को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  2. चीन की चुनौती और भारत की बदलती रणनीति भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है.इसको लेकर कई बार दोनों देशों के बीच बैठकें  भी हो चुकीं है.जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प ने यह स्पष्ट कर दिया था कि सीमा पर किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए केवल पारंपरिक गश्त पर्याप्त नहीं है. बेहतर बुनियादी ढांचा, संचार, निगरानी और तेजी से बल तैनात करने की क्षमता भी जरूरी है।  अरुणाचल प्रदेश में हाल के दिनों में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच फेस-ऑफ की स्थिति सामने आने के बाद यह सवाल और महत्वपूर्ण हो गया है कि दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों को कितनी तेजी से सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है.ITBP भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करने वाला प्रमुख बल है।  इसका दायित्व ऐसे इलाकों में गश्त करना, सीमा पर निगरानी रखना और प्रतिकूल परिस्थितियों में चौकियों की सुरक्षा करना है, जहां ऊंचाई और मौसम दोनों बड़ी चुनौतियां हैं.QRFV जैसी गाड़ियों की खरीद इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है. इसका उद्देश्य केवल वाहनों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि जवानों की सुरक्षित आवाजाही और कठिन परिस्थितियों में कार्रवाई की क्षमता को बेहतर बनाना है।  3. पहाड़ों में गाड़ी चलाना ही सबसे बड़ी चुनौती मैदानी इलाकों में किसी स्थान तक पहुंचने और ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचने के बीच बहुत बड़ा अंतर होता है. पहाड़ों में संकरी सड़कें, तीखे मोड़, ढलान, भूस्खलन, बर्फबारी और कम तापमान वाहनों की परिचालन क्षमता को प्रभावित करते हैं.कई सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क सीमित है. कुछ जगहों पर अंतिम चौकी तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. मौसम खराब होने पर यात्रा का समय और बढ़ सकता है।  ऐसे में ITBP के लिए केवल अधिक वाहन खरीदना पर्याप्त नहीं होगा. वाहनों का पहाड़ी भूभाग के अनुकूल होना, नियमित रखरखाव, चालकों का विशेष प्रशिक्षण और ईंधन तथा स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता भी जरूरी होगी.QRFV जैसी गाड़ियों से मिलने वाला वास्तविक लाभ इसी बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें किन इलाकों में तैनात किया जाता है और वहां की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उनकी क्षमता कितनी प्रभावी रहती है।  4. बख्तरबंद वाहनों की खासियत क्या होती है? क्विक रिएक्शन फाइटिंग व्हीकल श्रेणी के कई आधुनिक सैन्य वाहनों में सुरक्षा और गतिशीलता को ध्यान में रखकर डिजाइन तैयार किया जाता है. वाहन के मॉडल के आधार पर इनमें बख्तरबंद बॉडी, चार पहियों से चलने वाली ड्राइव प्रणाली, विशेष टायर और कठिन परिस्थितियों में संचालन की सुविधाएं हो सकती हैं।  कुछ बख्तरबंद वाहनों में गोलीबारी और विस्फोट से सुरक्षा देने वाली संरचना भी होती है. कुछ में भीतर बैठे जवानों को सुरक्षा के साथ जवाबी कार्रवाई करने में मदद देने वाली सुविधाएं दी जाती हैं. लेकिन इन क्षमताओं का स्तर हर मॉडल में अलग होता है.यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि QRFV एक व्यापक श्रेणी का नाम भी है।  भारतीय सेना के लिए विकसित किसी खास वाहन की सीटिंग क्षमता, इंजन की शक्ति, ऊंचाई पर संचालन की सीमा या सुरक्षा स्तर को ITBP की प्रस्तावित खरीद पर स्वतः लागू नहीं किया जा सकता.ITBP के लिए सबसे महत्वपूर्ण जरूरत ऐसी गाड़ियों की होगी, जो उसके परिचालन क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुकूल हों और जरूरत पड़ने पर जवानों को तेजी से उनके निर्धारित स्थान तक पहुंचा सकें।    5. ड्रोन से लेकर एंटी-ड्रोन सिस्टम तक, ITBP का आधुनिकीकरण वाहनों की खरीद ITBP की व्यापक आधुनिकीकरण योजना का केवल एक हिस्सा है. बल की तैयारियों में ड्रोन, एंटी-ड्रोन तकनीक, विशेष प्रशिक्षण और सीमा पर बेहतर सुरक्षा ढांचे पर भी जोर दिया जा रहा … Read more

भोपाल मेट्रो को नहीं मिल रहे पर्याप्त यात्री, हर हफ्ते ₹50 लाख खर्च; कमाई बढ़ाने के दूसरे रास्ते भी नाकाम

भोपाल  मेट्रो की शुरुआत को अब करीब एक साल भोपाल में होने वाला है। लेकिन अभी भी भोपाल मेट्रो के पास यात्रियों का टोटा है। मेट्रो ट्रेन को चलाने में एक सप्ताह में करीब 50 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। इसे रिकवर करने में 100 दिन का समय लग सकता है। यात्री नहीं मिल रहे दरअसल, भोपाल में मेट्रो के पहले चरण की शुरुआत हुई है। सात किमी लंबे प्रॉयोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो यात्रियों को आकर्षित करने के लिए संघर्ष कर रही है, जबकि टिकट के अलावा अन्य तरीकों से कमाई करने की कोशिशें अभी भी जारी हैं। सलाना 20-25 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एस कृष्णा चैतन्य के अनुसार, सलाना परिचालन और रखरखाव का खर्च 20-25 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। इसका सीधा मतलब है कि हर दिन साढ़े पांच से लगभग लाख रुपए का खर्च आएगा। सप्ताह के हिसाब से देखें तो 38 से 48 लाख रुपए तक जाएगा। 150-500 तक पहुंचती है यात्रियों की संख्या वहीं, सामान्य दिनों में यात्रियों की अनुमानित संख्या 150 से 500 के बीच में होती है। वीकेंड पर यह संख्या 1500 तक जाती है। अगर औसत किराया 50 रुपए मान लिया जाए तो टिकट से होने वाली कमाई खर्च की तुलना में बहुत कम है। ये आंकड़े केवल एक अनुमान हैं, न कि ऑडिट किए राजस्व के आंकड़े हैं। यात्रियों की संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं भोपाल मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के जनसंपर्क अधिकारी ने यात्रियों की मौजूदा संख्या के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। जुलाई के बाद रोजाना होने वाली ट्रिप की संख्या 9 से बढ़कर लगभग 20 हो गई है। लेकिन यह डेटा उपलब्ध नहीं है कि यात्रियों की संख्या कितनी बढ़ी है। इन अतिरिक्त सेवाओं से यात्रियों की संख्या में कोई बढ़ोतरी हुई है। दिसंबर 2025 में हुई थी शुरुआत अभी भोपाल मेट्रो का परिचालन एम्स से सुभाष नगर के बीच में हो रहा है। आठ स्टेशनों वाला यह कॉरिडोर दिसंबर 2025 में खोला गया था। इसकी सीमित पहुंच के कारण, रोजाना सफर करने वालों की इसकी उपयोगिता कम है। मेट्रो रेल के एमडी ने कहा कि 2028 तक ही नेटवर्क का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। वीकेंड पर मिलता है अच्छा रिस्पांस शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि वीकेंड पर लोगों का रिस्पॉन्स अच्छा मिलता है। 15 जनवरी को यात्रियों की संख्या 275 थी लेकिन रविवार 18 जनवरी को यह आंकड़ा 1000 पहुंच गया था। 13-20 जनवरी के बीच ट्रेनों में कुल 3350 यात्रियों ने सफर किया था। ये आंकड़े शुरुआती परिचालन अवधि के हैं, न कि मौजूदा उपयोग के। कमाई के लिए अन्य तरीके अपनाए कॉर्पोरेशन टिकट से होने वाली कमाई को बढ़ाने के लिए विज्ञापन, सेमी-गेमिंग राइट्स, कमर्शियल लीग, कोचिंग स्पेस और निजी कार्यक्रमों जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। बीते दिनों मेट्रो में किटी और बर्थडे पार्टी की बुकिंग शुरू हुई थी लेकिन परवान नहीं चढ़ा। नवंबर 2025 में 700 से अधिक एलिवेटेड लाइन पिलरों पर विज्ञापन के लिए जगह किराए पर देने हेतु एक टेंडर जारी किया गया था। भोपाल में एक बुकिंग मिली सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स सुविधा के तहत, जन्मदिन, प्री वेडिंग शूट, फिल्म शूट और अन्य कार्यक्रमों के लिए कोच और कुछ चुनिंदा स्टेशनों के हिस्सों को किराए पर लिया जा सकता है। इससे बहुत कम प्रतिक्रिया मिली। चार हफ्तों में इंदौर में केवल दो बुकिंग हुई, जबकि भोपाल में एक बुकिंग जून की शुरुआत तक रद्द हो गई। कमाई का भरोसेमंद जरिया नहीं बना 7 जून को भोपाल में एक फिटनेस ग्रुप का कार्यक्रम आयोजित हुआ था लेकिन इस तरह की बुकिंग से अभी तक कमाई का कोई भरोसेमंद जरिया नहीं बन पाया है। जून में ही कमर्शियल लीजिंग के लिए बोर्ड ऑफिस चौराहे पर लगभग 620 वर्ग मीटर और सुभाष नगर में लगभग 2470 वर्ग मीट जगह उपलब्ध कराई गई थी। अक्टूर में भी कमाई बढ़ाने के प्रयास जारी रहे हैं। गौरतलब है कि मेट्रो को अपना नेटवर्क बड़ा होने, यात्रियों की संख्या बढ़ने और लगातार आमदनी शुरू होने का इंतजार करते हुए अपनी सेवाएं चालू रखनी होंगी।