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उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों को मिला केंद्र सरकार का सकारात्मक प्रतिसाद, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का जताया आभार

दीपावली से पहले बस्तर को सड़क विकास की बड़ी सौगात, 485 बसाहटों को मिलेगी बारहमासी सड़कें उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों को मिला केंद्र सरकार का सकारात्मक प्रतिसाद, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान का जताया आभार नक्सलवाद से मुक्त हुए दुर्गम गांवों को सड़क संपर्क से जोड़ने विशेष छूट के लिए उप मुख्यमंत्री ने किया अनुरोध      रायपुर,   दीपावली से पहले बस्तर संभाग के दूरस्थ, दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क के विस्तार की दिशा में केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। बस्तर की 485 बसाहटों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं 280 अन्य बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिए 804.06 करोड़ रुपए की लागत के 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान के साथ विकास की गति को तेज करने तथा दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने के राज्य सरकार के प्रयासों को केंद्र सरकार का सहयोग मिल रहा है।      उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा द्वारा बस्तर संभाग की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों, नक्सलवाद से मुक्त हुए गांवों की आवश्यकताओं तथा सड़क एवं पुल संपर्क के विस्तार को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र के माध्यम से इन क्षेत्रों के लिए विशेष पहल करने के लिए आग्रह किया था, जिसपर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्र द्वारा सकारात्मक रुख प्रदान किया है। केंद्रीय मंत्री चौहान ने अपने पत्र में बस्तर में सड़क संपर्क विस्तार की प्रगति, स्वीकृत कार्यों, प्रस्तावित सड़कों एवं पुलों तथा विशेष छूट के संबंध में की जा रही कार्यवाही की विस्तृत जानकारी दी है।     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर के विकास के प्रति केंद्र सरकार की संवेदनशीलता और सकारात्मक पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय ग्रामीण विकासमंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त किया है। बस्तर की 1,168 बसाहटों में सड़क संपर्क के लिए विभिन्न चरणों में कार्यवाही      केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया है कि वर्तमान में बस्तर संभाग की 1,168 बसाहटों से संबंधित सड़क कार्य विभिन्न चरणों में किया जा रहा है। इनमें से 485 बसाहटों के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के बैच-2 के अंतर्गत 280 बसाहटों को जोड़ने के लिए 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन सड़कों की कुल लंबाई 841.825 किलोमीटर तथा अनुमानित लागत 804.06 करोड़ रुपए है। वहीं लगभग 474 अन्य चिन्हांकित बसाहटों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए जा रहे हैं।      प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के प्रथम बैच में बस्तर संभाग की 234 बसाहटों के सड़क कार्यों को स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें बस्तर जिले की 87, बीजापुर की 44, दंतेवाड़ा की 12, कांकेर की 41, कोण्डागांव की 34 तथा सुकमा की 16 बसाहटें शामिल हैं। 754 और बसाहटों तक पहुंचेगी बारहमासी सड़क, सातों जिलों में प्रस्ताव तैयार      पीएमजीएसवाई-4 के दूसरे बैच में बस्तर जिले की 114, बीजापुर की 125, दंतेवाड़ा की 63, कांकेर की 140, कोण्डागांव की 31, नारायणपुर की 136 और सुकमा की 146 बसाहटों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के प्रस्ताव शामिल हैं। इसके लिए ग्रामीण सड़क सर्वे ऐप द्वारा सर्वे के साथ गति शक्ति योजना के साथ जोड़ने का काम भी किया जा रहा है। इन प्रस्तावित सड़कों के निर्माण से विशेष रूप से अंदरूनी वनांचल क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं का विस्तार होगा।  ग्रामीणों को स्वास्थ्य केंद्रों, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, बाजारों और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा होगी। साथ ही कृषि उपज के परिवहन, स्थानीय व्यापार और ग्रामीण आजीविका के नए अवसर विकसित होंगे। पुल निर्माण को भी मिलेगी गति, 373 पुलों के प्रस्तावों पर हुई चर्चा      केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने पत्र में बताया है कि पीएमजी एसवाई-4 के बैच-1 के अंतर्गत 206 पुलों तथा पीएम-जनमन योजना के अंतर्गत 167 पुलों के प्रस्तावों पर विचार करने के लिए अधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इन प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाएगी।        उल्लेखनीय है कि बस्तर संभाग के लिए 55 लंबे पुलों के प्रस्ताव किए गए हैं। इसके अतिरिक्त आगामी चरणों के लिए भी पुल निर्माण की कार्ययोजना तैयार की गई है। नारायणपुर जैसे दुर्गम जिले में पीएम-जनमन के अंतर्गत 22 लंबे पुलों के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 87.45 करोड़ रुपए है। इन पुलों के निर्माण से वर्षा ऋतु में नदी-नालों के कारण कट जाने वाले गांवों को बड़ी राहत मिलेगी तथा दूरस्थ बसाहटों के लिए आवागमन सुगम हो सकेगा। नक्सलमुक्त गांवों के लिए विशेष छूट के लिए पहल      उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर संभाग की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों की ओर पत्र द्वारा केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। बस्तर के घने जंगलों और दूर-दूर तक फैली छोटी बसाहटों में अनेक ऐसे गांव हैं, जिनकी जनसंख्या 100 से भी कम है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के प्रचलित जनसंख्या संबंधी मापदंडों के कारण ये गांव बारहमासी सड़क संपर्क की पात्रता से वंचित रह जाते हैं। उप मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद से मुक्त हुए गांवों में विकास कार्यों को तेज गति से पहुंचाने के लिए विशेष छूट प्रदान करने का अनुरोध किया था। इसमें निर्धारित क्लस्टर की जनसंख्या गणना में छूट तथा 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित छोटी-छोटी बसाहटों को एक क्लस्टर मानकर सड़क स्वीकृति देने की आवश्यकता को रेखांकित किया था।     केंद्रीय मंत्री चौहान ने बताया है कि बस्तर संभाग की शेष पात्र बसाहटों की पहचान और उनकी सड़क संपर्क आवश्यकताओं का आकलन करने के लिए ग्राम सड़क सर्वेक्षण (जीएसएस) ऐप के माध्यम से चार माह के लिए सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है। क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण और विशेष छूट संबंधी  अनुरोध पर परीक्षण कर प्राप्त तथ्यों एवं लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा सकेगा। नक्सलवाद से मुक्ति के साथ विकास की राह पर आगे बढ़ रहा बस्तर – उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा       उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के प्रभाव में कमी आने के साथ अब विकास की नई संभावनाएं … Read more

गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों को मिलेगी सामाजिक सुरक्षा, केंद्र ने गठित किए राष्ट्रीय बोर्ड

नई दिल्ली देश के विशाल असंगठित कार्यबल को औपचारिक कल्याणकारी दायरे में लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। श्रम व रोजगार मंत्रालय ने असंगठित श्रमिकों के साथ-साथ गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए 'राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड' (National Social Security Board) के गठन को अधिसूचित कर दिया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता के वैधानिक ढांचे के तहत स्थापित यह बोर्ड देश के डिजिटल गिग और प्लेटफॉर्म पेशेवरों को भारत के औपचारिक कल्याणकारी ढांचे में एकीकृत करने वाला एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य करोड़ों गिग, प्लेटफॉर्म और पारंपरिक असंगठित श्रमिकों के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाएं तैयार करना, उनकी निगरानी करना और सामाजिक सुरक्षा के अंतर को दूर करना है। ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष ने की तारीफ राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की अधिसूचना जारी करने पर ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल ने इसकी तारीफ की है। उन्होंने इसके लिए की तारीफ श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का हार्दिक आभार व्यक्त किया। डॉ. मंजीत पटेल ने एक्स पर लिखा- "भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी' के तहत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के साथ-साथ डिजिटल गिग (Gig) और प्लेटफॉर्म (Platform) वर्कर्स के लिए 'राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड' (National Social Security Board) की आधिकारिक अधिसूचना जारी करना एक बेहद ऐतिहासिक, दूरदर्शी और सराहनीय कदम है। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) इस क्रांतिकारी निर्णय का सहर्ष स्वागत करता है। देश के करोड़ों असंगठित एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मयोगियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना भारत के श्रम कल्याण और समावेशी विकास के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होगा। यह बोर्ड न केवल देश के विशाल अनौपचारिक श्रम बल के भविष्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि उनके लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाओं और सुरक्षा प्रणालियों को प्रभावी ढंग से लागू करने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस जन-हितैषी निर्णय के लिए हम केंद्र सरकार और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।" साल में कम से कम तीन बार होगी बैठक सरकार के अनुसार, बोर्ड विभिन्न श्रमिक वर्गों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश करेंगे और सामाजिक सुरक्षा संहिता के क्रियान्वयन से जुड़े मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देंगे। इसके अलावा, वे केंद्र द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी करेंगे, राज्यों में रिकॉर्ड प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा करेंगे और सामाजिक सुरक्षा कोष से होने वाले व्यय का भी परीक्षण करेंगे। इन बोर्डों की बैठक वर्ष में कम से कम तीन बार आयोजित की जाएगी। बैठकों की कार्यप्रणाली और नियम केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएंगे। श्रम मंत्रालय का मानना है कि ये बोर्ड देश में तेजी से बढ़ रहे गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा की कमी को दूर करने में अहम भूमिका निभाएंगे। वर्तमान समय में ऑनलाइन डिलीवरी, राइड-हेलिंग, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं से जुड़े लाखों श्रमिक कार्यरत हैं, जिनके लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मिलेगा लाभ सरकार ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों का वैधानिक ढांचा उपलब्ध कराती है। इसी दिशा में हाल के वर्षों में श्रम कानूनों में व्यापक सुधार भी किए गए हैं। सितंबर में आयोजित एक चर्चा के दौरान उद्योग जगत, श्रमिक संगठनों, विशेषज्ञों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने भी कहा था कि नए श्रम कोड नियंत्रण आधारित नियामक व्यवस्था से सहयोग आधारित श्रम व्यवस्था की ओर महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। श्रम मंत्रालय के सचिव चंद्र भूषण कुमार ने उस समय कहा था कि नए श्रम सुधारों के तहत विभिन्न कानूनों को एकीकृत किया गया है, अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, डिजिटल पोर्टल शुरू किए गए हैं, रिटर्न फाइलिंग को एकरूप बनाया गया है और वेतन की परिभाषा में भी अधिक समानता लाई गई है। इन कदमों का उद्देश्य श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ व्यवसायों के लिए अनुपालन बोझ कम करना है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों का गठन असंगठित क्षेत्र और गिग अर्थव्यवस्था से जुड़े श्रमिकों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा ढांचे से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।   गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक किन्हें माना जाता है? असंगठित क्षेत्र में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ श्रम पद्धतियों में बदलाव आया है। आधिकारिक परिभाषा के अनुसार: विज्ञापन     गिग श्रमिक: ऐसे व्यक्ति जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर स्वतंत्र रूप से काम करते हैं या कार्य व्यवस्था में भाग लेकर कमाई करते हैं, उन्हें गिग श्रमिक कहा जाता है।     प्लेटफॉर्म श्रमिक: जो श्रमिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से या उनके साथ जुड़कर कार्य में संलग्न होते हैं, उन्हें प्लेटफॉर्म श्रमिक के रूप में परिभाषित किया गया है। राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की अध्यक्षता कौन करेगा? इस नवगठित राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की संरचना को व्यापक और समावेशी बनाया गया है।      अध्यक्षता: बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे।     सदस्यता: इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा प्रमुख एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, नागरिक समाज संगठनों (Civil Society Organisations), श्रमिक संघों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर एसोसिएशनों के प्रतिनिधि भी इस बोर्ड में शामिल किए गए हैं।     बैठकें: केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की बैठक वर्ष में कम से कम तीन बार आयोजित की जाएगी और यह अपनी बैठकों में व्यापार के संचालन से संबंधित नियमों का पालन करेगा। बोर्ड की मुख्य जिम्मेदारियां और कार्य क्या होंगे? राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड को सामाजिक सुरक्षा अंतराल को समाप्त करने के लिए व्यापक शक्तियां और दायित्व सौंपे गए हैं। बोर्ड के प्रमुख कार्यों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं: योजनाओं की सिफारिश: बोर्ड असंगठित श्रमिकों, गिग श्रमिकों और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के विभिन्न वर्गों के लिए उपयुक्त कल्याणकारी योजनाएं तैयार करने हेतु केंद्र सरकार को सिफारिशें करेगा।     सलाह और निगरानी: यह सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रशासन से उत्पन्न होने वाले और संदर्भित किए गए मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देगा। साथ ही, यह केंद्र सरकार द्वारा संचालित सामाजिक … Read more

वाराणसी-नई दिल्ली के बीच शुरू होगी स्लीपर वंदे भारत, जानें रूट और टाइमिंग

वाराणसी भारतीय रेलवे अब एक और नया स्‍लीपर वंदे भारत ट्रेन चलाने जा रहा है. कल यानी 31 अक्‍टूबर से इसकी शुरुआत हो रही है. यह ट्रेन वाराणसी से दिल्‍ली के बीच चलेगी, जो कई बड़े शहरों को एकसाथ जोड़ेगी. इसकी स्‍पीड भी 160 किलोमीटर प्रति घंटा है, जिसका मतलब है कि यह अन्‍य ट्रेनों की तुलना में जल्‍दी सफर पूरा कर लेगी।  भारतीय रेलवे के अनुसार, बाबा विश्वनाथ की नगरी से देश की राजधानी तक वंदे भारत स्लीपर का सफर आधुनिक रेल यात्रा के नए अनुभव की शुरुआत साबित होगी. वाराणसी से नई दिल्ली के बीच शुरू हो रही उत्तर प्रदेश की पहली वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन है।  किस रूट से जाएगी ये ट्रेन?  स्‍लीपर वंदे भारत के बारे में जानकारी देते हुए उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ डॉक्टर शिवम शर्मा ने बताया कि  इस ट्रेन का उद्घाटन शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को वाराणसी रेलवे स्टेशन से 'उद्घाटन स्पेशल ट्रेन सं. 02527 के रूप में किया जाएगा. इस विशेष रेल सेवा से काशी, संगम नगरी प्रयागराज, औद्योगिक नगरी कानपुर, ऐतिहासिक अलीगढ़ और गाजियाबाद के यात्रियों को राष्ट्रीय राजधानी तक रेल संपर्क का एक नया विकल्प मिलेगा।  स्‍लीपर वंदे भारत एक्‍सप्रेस की टाइमिंग  आधुनिक रेल सुविधाओं और स्लीपर यात्रा के नए अनुभव के साथ यह स्‍पेशल ट्रेन काशी और राष्ट्रीय राजधानी के बीच संपर्क को एक नई पहचान देगी. उन्होंने आगे बताया कि उद्घाटन स्पेशल गाड़ी संख्या 02527 बनारस–नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बनारस (BNRS) से दोपहर बाद 16:15 बजे खुलेगी. उद्घाटन स्पेशल यह ट्रेन प्रयागराज में 18:00 बजे, कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर 20:05 बजे, अलीगढ़ स्टेशन पर  23:20 बजे और प्रस्थान 23:22 बजे, गाजियाबाद में आधी रात 01:10 बजे और नई दिल्ली स्टेशन पर रात 2:00 बजे पहुंचेगी।  क्‍या होगी ट्रेन की खासियत?      यह ट्रेन वाराणसी से रात 8:50 बजे रवाना होगी और अगले दिन सुबह 5:55 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी. इस तरह लगभग 9 घंटे 5 मिनट में सफर पूरा होगा. वापसी में नई दिल्ली से रात 9:40 बजे रवाना होकर सुबह 6:45 बजे वाराणसी पहुंचेगी।      वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 वातानुकूलित कोच होंगे. इनमें यात्रियों के लिए तीन तरह की बर्थ उपलब्ध होंगी. इसमें AC फर्स्ट क्लास- 1, AC 2 टियर-4, AC 3 टियर-11 शामिल हैं. इन कोचों में कुल 823 यात्री सफर कर सकेंगे।      वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम डिजाइन स्पीड के हिसाब से तैयार किया गया है. इसकी परिचालन क्षमता 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक है. हालांकि, वास्तविक रफ्तार रेलवे ट्रैक और रूट की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।      लंबी दूरी की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए इसमें एर्गोनॉमिक डिजाइन वाली गद्देदार बर्थ दी गई हैं. इसके अलावा बेहतर सस्पेंशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे ट्रेन में झटके और शोर कम करने में मदद मिलेगी।      इस ट्रेन में रेलवे का स्वदेशी कवच (Kavach) सुरक्षा सिस्टम लगाया गया है. इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे, इमरजेंसी टॉक-बैक यूनिट और बेहतर फायर डिटेक्शन एवं सप्रेशन सिस्टम भी मौजूद हैं।      ऑटोमैटिक दरवाजे और सीलबंद गैंगवे भी होगा, आधुनिक टॉयलेट और सफाई व्यवस्था, यात्रियों के सामान रखने की बेहतर व्‍यवस्‍था और यह ट्रेन सप्‍ताह में 6 दिन चलेगी।   

समान नागरिक संहिता से सामाजिक समरसता, महिला सशक्तिकरण और समान नागरिक अधिकारों को मिलेगी मजबूती

रायपुर  छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों की भागीदारी और जनसंवाद का क्रम जारी है। इसी कड़ी में स्वयंप्रभा फाउंडेशन एवं आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था मर्यादित, रायपुर के प्रतिनिधियों ने समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। समान नागरिक संहिता समिति के सदस्यों सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम.के. राऊत और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा प्रस्तुत सुझावों को गंभीरतापूर्वक सुना। समिति की ओर से सुझावों के समुचित परीक्षण एवं विचार-विमर्श के दौरान उन्हें संज्ञान में लेने की बात कही गई। प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि व्यापक जनभागीदारी और विभिन्न समुदायों के विचारों के आधार पर तैयार की जाने वाली समान नागरिक संहिता सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है।  प्रतिनिधियों ने सुझाव प्रस्तुत किया कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार, महिलाओं को न्यायपूर्ण संरक्षण और समाज में समानता एवं समरसता को बढ़ावा देना होना चाहिए। साथ ही छत्तीसगढ़ की विशिष्ट आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। स्वयंप्रभा फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री शिव नारायण मुंदड़ा,  डॉ. मुकेश शाह तथा आम्रपाली सहकारी गृह निर्माण संस्था मर्यादित के अध्यक्ष श्री इन्द्रनाथ सिंह ने समान नागरिक संहिता के संबंध में अपने सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति एवं पारिवारिक अधिकारों से जुड़े कानूनों में समानता स्थापित होने से नागरिकों को न्याय प्राप्त करने में सुविधा होगी, इससे कानूनी प्रक्रियाओं के सरलीकरण और सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था विकसित करने में सहायता मिलेगी। प्रतिनिधियों ने महिलाओं के अधिकारों को विशेष प्राथमिकता देते हुए कहा कि बहुविवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं, भरण-पोषण संबंधी असमानताओं और संपत्ति के अधिकारों में भेदभाव को दूर करने की दिशा में प्रभावी प्रावधान किए जाने चाहिए। विशेष रूप से बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार तथा महिलाओं को विवाह और तलाक के मामलों में न्यायपूर्ण संरक्षण उपलब्ध कराया जाना आवश्यक है।  प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ की जनजातीय आबादी का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश की लगभग 32 प्रतिशत आबादी आदिवासी समुदायों की है। इन समुदायों की अपनी विशिष्ट सामाजिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान और सदियों पुरानी परंपराएं हैं। इसलिए समान नागरिक संहिता लागू करने से पहले इनकी परंपराओं, सामाजिक हितों और संवैधानिक संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी समुदाय के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े सामाजिक एवं कानूनी पहलुओं पर भी सुझाव दिए गए। प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे संबंधों के पंजीयन की उपयुक्त कानूनी व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों के उत्तराधिकार, संपत्ति संबंधी अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट एवं न्यायसंगत प्रावधान आवश्यक हैं।

बिजली बिल से मिलेगी राहत! बांका के गांवों में पीएम सूर्य घर योजना का लाभ पहुंचाने की तैयारी

 बांका  पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं को महंगे बिजली बिलों से स्थायी राहत दिलाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ को धरातल पर उतारने के लिए बांका जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिले के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में अधिकाधिक परिवारों को इस योजना से जोड़ने के लिए विद्युत विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा सघन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को जिले के बाराहाट और कटोरिया प्रखंडों में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के विक्रेताओं और कर्मियों को रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशासन का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली के डीलरों को पहले स्वयं जागरूक कर उनकी छतों पर सोलर पैनल लगवाना है, ताकि वे अपने-अपने पोषक क्षेत्रों के आम उपभोक्ताओं के लिए रोल मॉडल और प्रेरक बन सकें। कटोरिया में डीएम के निर्देश पर हुई कार्यशाला, एमओ ने गिनाए लाभ कटोरिया में बांका जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल के निर्देश के आलोक में प्रखंड मुख्यालय सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) दिग्विजय की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में बड़ी संख्या में उचित मूल्य दुकानदार (राशन डीलर) उपस्थित रहे। बैठक में बिजली विभाग और आपूर्ति विभाग के पदाधिकारियों ने योजना के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर अपनी दैनिक बिजली की जरूरतों को पूरी तरह नि:शुल्क या बेहद कम खर्च में पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रूफटॉप सोलर पैनल लगाने पर केंद्र सरकार द्वारा बैंक खातों में सीधे भारी सब्सिडी दी जा रही है। अधिकारियों ने डीलरों से अपील की कि वे अपने वार्डों व गांवों में उपभोक्ताओं को जागरूक करें। डीलरों और कर्मियों ने मौके पर किया आवेदन जागरूकता सत्र के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस प्रणाली से जहां एक ओर ग्रिड पर बिजली का दबाव घटेगा, वहीं दूसरी ओर कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और घरों का मासिक बजट सुधरेगा। अभियान के सकारात्मक प्रभाव के रूप में दोनों प्रखंडों में कई जन वितरण प्रणाली विक्रेताओं तथा प्रखंड कार्यालय के कर्मचारियों ने योजना का लाभ उठाने के लिए तुरंत सहमति जताई और ऑनलाइन पोर्टल पर अपने आवेदन दर्ज कराए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में अन्य प्रखंडों में भी इसी तर्ज पर कैंप लगाकर आवेदनों की प्रक्रिया तेज की जाएगी। खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता और सही वजन के निर्देश कार्यशाला के दूसरे सत्र में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत खाद्यान्न आवंटन और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने सभी डीलरों को सख्त निर्देश दिए कि वे अपने-अपने केंद्रों पर पात्र कार्डधारियों को निर्धारित मात्रा और सटीक वजन के अनुसार ही राशन उपलब्ध कराएं। वितरण में किसी भी प्रकार की कोताही, कालाबाजारी या घटतौली की शिकायत मिलने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। विक्रेताओं ने भी अपनी स्थानीय समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिसके त्वरित निष्पादन का आश्वासन दिया गया। अधिकारियों ने दोहराया कि नियमित बैठकों के माध्यम से सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और पारदर्शी वितरण तंत्र को और मजबूत किया जाता रहेगा।

द्वारकाधीश मंदिर में दीपावली-अन्नकूट की तैयारियां पूरी, जानें पूजा और उत्सव की तारीखें

राजसमंद पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ कांकरोली के द्वारकाधीश मंदिर में पीठाधीश्वर गोस्वामी वागीश कुमार महाराज के सानिध्य में 8 नवंबर 2026, रविवार को चतुर्दशी पर दीपावली महोत्सव तथा 9 नवंबर, सोमवार को अमावस्या पर गोवर्धन पूजा और सायंकाल अन्नकूट महोत्सव मनाया जाएगा। अन्नकूट की तैयारियों के लिए 26 अक्टूबर को महाराज की आज्ञा से भट्टी पूजन कर बालभोगियां, मुखिया, सहायक मुखिया और खासा भंडारी ने सेवा सामग्री तैयार करने का कार्य शुरू किया। मंदिर मंडल ने वैष्णवों के आवास, सुरक्षा और सुविधाजनक दर्शन की व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। आवास संबंधी पूछताछ के लिए व्रजप्रभा कॉटेज में कक्ष रहेगा। यात्री वाहनों की पार्किंग बांगड़ में होगी। आपात सेवा के लिए राजकीय एंबुलेंस और स्टाफ तैनात रहेगा। सुरक्षा कारणों से दीपावली पर मंदिर परिसर में मोबाइल फोन और कैमरा ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। जेबकतरी, छेड़खानी, जेवरात चोरी और भगदड़ जैसी घटनाएं रोकने के लिए पुलिस का सहयोग लिया गया है। अन्नकूट पर खेवा पद्धति से दर्शन होंगे। मनोरथी, वीआईपी और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अलग व्यवस्था रहेगी। मंदिर में सजावट और चित्रकारीदीपावली को लेकर मंदिर में सफाई, रंगाई-पुताई, पिछवाई और सामग्री सिद्ध करने का कार्य किया जा रहा है। मंदिर रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जा रहा है। अहमदाबाद के चित्रकार बाबूलाल शर्मा, लोकेन्द्र शर्मा, कुणाल शर्मा तथा कांकरोली-बिजोलिया के रामप्रसाद शर्मा ने जगमोहन के भीतर-बाहर हाथी, ब्रह्मा-विष्णु-महेश के विमानों में प्रभु दर्शन, सिंह पोल, बेलबूटे, शंख, नाचते मोर, ऐरावत हाथी, द्वारपाल सिपाही, आरती करती गोपियां, शेर, घोड़े और गायों की कलाकृतियां बनाई हैं। द्वारकेश गौशाला में भी सजावट की तैयारियां जारी हैं। पीठाधीश्वर गोस्वामी वागीश कुमार महाराज, युवराज वैदान्तकुमार और सिद्धान्तकुमार के आगमन से पहले तैयारियां पूरी की जाएंगी। कार्तिक कृष्ण पक्ष के प्रमुख उत्सव30 अक्टूबर को गिरिधर (भवाईवाले) उत्सव, 1 नवंबर को प्रथम नौमहल्ला और बालकृष्णलालजी का गादी उत्सव, 2 नवंबर को द्वितीय तथा 3 नवंबर को तृतीय नौमहल्ला दर्शन होंगे। 4 नवंबर को एकादशी का श्रृंगार, 5 नवंबर को रमा एकादशी, दीपावली की बधाई और गोवत्स द्वादशी, 6 नवंबर को त्रयोदशी श्रृंगार, 7 नवंबर को धनतेरस एवं चतुर्दशी श्रृंगार और 8 नवंबर को रूप चतुर्दशी, अभ्यंग स्नान, लक्ष्मी पूजन, कानजगाई तथा गोकर्ण जागरण होंगे। 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या पर गोवर्धन पूजा और अन्नकूटोत्सव मनाया जाएगा।

बिहार में सब्जी की खेती को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को बीज पर मिलेगी 75% तक छूट

समस्तीपुर  जिले के सभी 18 प्रखंडों में सब्जियों की खेती होती है। मिट्टी और जलवायु अनुकूल होने के बावजूद सब्जी की खेती का दायरा अपेक्षित गति से नहीं बढ़ा है। पिछले छह वर्षों में रकबे में महज 172 हेक्टेयर की वृद्धि हुई। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिले में 24 हजार 103 हेक्टेयर में सब्जियों की खेती होती थी। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 24 हजार 275 हेक्टेयर हो गई। यानी छह वर्षों में क्षेत्रफल में एक प्रतिशत से भी कम बढ़ोतरी हुई। जिले में कुल 27 कोल्ड स्टोरेज इसके उलट, आलू की खेती का रकबा इस अवधि में 1,275 हेक्टेयर बढ़ा। वर्ष 2020-21 में 11 हजार 750 हेक्टेयर में आलू की खेती होती थी, जो 2025-26 में बढ़कर 13 हजार 25 हेक्टेयर हो गई। जिले में कुल 27 कोल्ड स्टोरेज संचालित हैं। उत्पादन बढ़ने के बावजूद उपज की बिक्री और उचित कीमत हासिल करना किसानों के लिए चुनौती बना हुआ है। गोभी, टमाटर और आलू की अच्छी पैदावार के बाद भी कीमत गिरने से लागत निकालना मुश्किल हो जाता है। पिछले साल कई किसानों को उचित भाव नहीं मिलने पर फसल खेतों में ही छोड़नी पड़ी थी। बीज पर 75 प्रतिशत तक अनुदान सब्जी उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार सरकार के कृषि विभाग के उद्यान निदेशालय की ओर से योजनाएं चलाई जा रही हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 की योजना में चयनित सब्जियों के बीज वितरण पर निर्धारित इकाई लागत या वास्तविक बीज मूल्य, जो कम हो, उस पर 75 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है। रबी मौसम में मटर, गाजर, चुकंदर और बैंगन तथा गरमा मौसम में कद्दू, नेनुआ, करेला, भिंडी, खीरा, खरबूजा और तरबूज इसके दायरे में हैं। लाभ के लिए किसानों को कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकरण कराना और उद्यान निदेशालय की वेबसाइट से आनलाइन आवेदन करना होता है।  चयन उपलब्ध लक्ष्य और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होता है। सूक्ष्म सिंचाई, संरक्षित खेती और बागवानी विकास योजनाओं में भी पात्र किसानों को सहायता दी जाती है। कीमत गिरने से खेतों में बर्बाद होती उपज एक साथ अधिक उपज बाजार पहुंचने पर कीमतें गिरती हैं और सीमित भंडारण सुविधा परेशानी बढ़ाती है। टमाटर और गोभी जल्दी खराब होने वाली फसलें हैं, जिन्हें सामान्य परिस्थितियों में लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव नहीं है। मांग कम होने पर किसानों को कम दाम पर उपज बेचनी पड़ती है। कई बार तोड़ाई और ढुलाई का खर्च निकालना भी मुश्किल होता है। भंडारण सुविधा के अभाव में आलू उत्पादकों को भी बाजार भाव के अनुसार बिक्री करने में दिक्कत आती है। शीतगृह और प्रसंस्करण इकाइयों की मांग आलू उत्पादक किसान बलराम मिश्र ने बताया कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च होता है। फसल तैयार होने पर कीमत गिरने से लागत निकालना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने प्रखंड स्तर पर सस्ते शीतगृह, भंडारण पर अनुदान और बाजार भाव की नियमित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की। टमाटर एवं गोभी उत्पादक किसान संजय कुमार ने कहा कि आवक बढ़ते ही कीमत गिर जाती है और कई बार तोड़ाई-ढुलाई का खर्च भी नहीं निकलता। उन्होंने गांवों में सब्जी संग्रह केंद्र, कोल्ड चेन और टमाटर से सास, प्यूरी सहित अन्य उत्पाद बनाने वाली प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने तथा किसानों की उपज खरीदने की व्यवस्था करने की मांग की।

प्रियंका चोपड़ा ने बढ़ाया भारतीय फिल्म का हौसला, ‘वी वर हीअर’ को ऑस्कर तक पहुंचाने में करेंगी मदद

फिल्ममेकर प्रणव भसीन की फिल्म 'वी वर हीअर' को अब ऑस्कर की दौड़ के लिए तैयार किया जा रहा है। उनकी मदद के लिए अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने हाथ आगे बढ़ाया है। जानिए क्या है पूरा मामला। प्रियंका चोपड़ा का फिल्म से क्या है कनेक्शन? प्रियंका चोपड़ा एक बार फिर भारतीय सिनेमा को इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाती नजर आ रही हैं। प्रणव भसीन के निर्देशन और लेखन में बनी शॉर्ट फिल्म 'वी वर हीअर' को अब तक 80 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में दिखाया जा चुका है। फिल्म से जुड़ने को लेकर प्रियंका चोपड़ा ने अपनी खुशी जाहिर की है। उन्होंने एक प्रेस नोट में कहा, 'यह फिल्म एक ऐसे विषय को नए और मजेदार अंदाज में पेश करती है, जो आज के समय में काफी प्रसांगिक है। एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर इससे जुड़ने का मौका मिलते ही मैंने हां कर दी। मैं इस क्रिएटिव टीम का साथ देना चाहती हूं, ताकि उनकी शानदार और अनोखी सोच को वह पहचान मिल सके जिसकी वह हकदार है।'  20 से ज्यादा अवॉर्ड जीत चुकी है फिल्म 'वी वर हीअर' ने अपने फेस्टिवल सफर में कई बड़े अवॉर्ड जीते हैं। क्या है फिल्म की कहानी? 'वी वर हीअर' की कहानी भारत के एक छोटे से शहर में रहने वाले तीन रिटायर्ड पुरुषों की है। उन्हें लगता है कि मशीनें धीरे-धीरे इंसानों की नौकरियां छीन रही हैं। इसके विरोध में वे तीनों एक अनोखा तरीका अपनाते हैं। वे घर में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का रूप धारण करके अपना विरोध जताने लगते हैं। हालांकि, उनकी इस कोशिश में तब नया मोड़ आता है, जब उनमें से एक के बच्चे की नौकरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी में लग जाती है। फिल्म में कॉमेडी के जरिए तकनीक, रोजगार और बदलती दुनिया में इंसानों की जगह जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया गया है।     फिल्म को साउथ बाय साउथवेस्ट (SXSW) फिल्म फेस्टिवल में ऑडियंस अवॉर्ड फॉर बेस्ट नैरेटिव शॉर्ट और रेडब्रेस्ट अनहिडन अवॉर्ड मिला।     इसके अलावा पाम स्प्रिंग्स इंटरनेशनल शॉर्टफेस्ट में फिल्म ने 15 मिनट से कम की बेस्ट लाइव-एक्शन शॉर्ट फिल्म और बेस्ट कॉमेडी शॉर्ट का अवॉर्ड जीता।     वहीं, क्लेरमॉन्ट-फेरांड इंटरनेशनल शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में इसे कैनाल प्लस प्राइज मिला था।     इसी फिल्म फेस्टिवल में इसका वर्ल्ड प्रीमियर भी हुआ था।     पाम स्प्रिंग्स में मिले अवॉर्ड की वजह से ही फिल्म ऑस्कर के लिए क्वालिफाई कर पाई।

रोहित शर्मा की फिर होगी मुंबई इंडियंस में वापसी बतौर कप्तान, हार्दिक पंड्या के भविष्य पर सस्पेंस

मुंबई आईपीएल 2027 के आगामी सीजन के लिए पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस अपनी कप्तानी में बड़ा फेरबदल करने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई इंडियंस एक बार फिर रोहित शर्मा को टीम की कमान सौंपने की तैयारी में है। हाल ही में पूरी कोचिंग स्टाफ में बदलाव करने के बाद फ्रेंचाइजी का यह फैसला बिल्कुल हैरान करने वाला नहीं है। फ्रेंचाइजी ने कोचिंग डिपार्टमेंट में बड़ा बदलाव करते हुए कीरोन पोलार्ड को नया हेड कोच बनाया है। उनके साथ पूर्व खिलाड़ी रॉबिन उथप्पा को बैटिंग कोच, मिचेल मैक्लेनाघन को बॉलिंग कोच, टी दिलीप को फील्डिंग कोच और धवल कुलकर्णी को डेवलपमेंट बॉलिंग कोच के रूप में टीम से जोड़ा गया है। तिलक वर्मा का दिया था सुझाव, लेकिन फ्रेंचाइजी की गुजारिश पर माने रोहित पिछले सीजन में हार्दिक पंड्या की कप्तानी में 14 में से 10 मैच हारकर 9वें स्थान पर रहने के बाद फ्रेंचाइजी ने नेतृत्व बदलने का मन बना लिया था। न्यूजीलैंड दौरे पर जाने से पहले रोहित शर्मा से कप्तानी को लेकर कई दौर की बातचीत हुई। नए कोचों की नियुक्ति के दौरान भी रोहित से अहम सलाह ली गई थी। चर्चा के दौरान रोहित शर्मा ने शुरुआत में युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा को कप्तानी सौंपने का सुझाव दिया था, ताकि भविष्य के लिए टीम तैयार की जा सके। हालांकि, फ्रेंचाइजी के विशेष गुजारिश के बाद रोहित शर्मा एक बार फिर मुंबई इंडियंस की कप्तानी संभालने के लिए राजी हो गए हैं। हार्दिक पंड्या के ट्रेड या खेलने पर टिकीं निगाहें, फैंस के विरोध के बाद बदला फैसला गुजरात टाइटंस से ट्रेड होकर आए हार्दिक पंड्या की कप्तानी में मुंबई इंडियंस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था और वानखेड़े स्टेडियम में फैंस ने उनका काफी विरोध भी किया था। अब कप्तानी से हटने के बाद सभी की नजरें हार्दिक पंड्या के भविष्य पर टिकी हुई हैं। सीजन से पहले हार्दिक पंड्या को किसी दूसरी फ्रेंचाइजी के साथ ट्रेड करने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, अगर ट्रेड डील नहीं हो पाती है, तो हार्दिक पंड्या ने रोहित शर्मा की कप्तानी में बतौर खिलाड़ी खेलने पर सहमति जता दी है।  

2030 हॉकी विश्व कप की मेजबानी के लिए तीन राज्यों में मुकाबला, पंजाब-ओडिशा-तमिलनाडु दावेदार

जालंधर. भारत में साल 2030 में होने वाले पुरुष और महिला हॉकी विश्व कप की मेजबानी को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह ने शुक्रवार को एक साक्षात्कार में जानकारी दी। ओडिसा दो बार पुरुष विश्व कप की मेजबानी कर चुका है, जबकि तमिलनाडु ने पिछले साल चेन्नई और मदुरै में पुरुष जूनियर विश्व कप का आयोजन किया था। भारतीय हॉकी की नर्सरी कहे जाने वाले पंजाब ने कभी इस मेगा इवेंट की मेजबानी नहीं की है। यह राज्य वर्तमान में पुरुषों की एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी कर रहा है, जो 17 वर्षों में इसका पहला अंतरराष्ट्रीय हॉकी टूर्नामेंट है। पंजाब द्वारा आयोजित आखिरी अंतरराष्ट्रीय हॉकी इवेंट 2009 में गोल्ड कप था।