samacharsecretary.com

ठंडा-गर्म खाते ही दांतों में क्यों होती है झनझनाहट? जानें सेंसिटिविटी के कारण और बचाव

कभी आइसक्रीम खाते समय, कभी गर्म चाय पीते हुए या फिर मीठा खाने के बाद दांतों में अचानक झनझनाहट होने लगती है। इस समस्या को टूथ सेंसिटिविटी कहा जाता है। कई लोग इसे मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और उम्मीद करते हैं कि कुछ समय बाद यह अपने आप ठीक हो जाएगी। कुछ मामलों में, खासकर दांतों की व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट के बाद होने वाली हल्की सेंसिटिविटी अस्थायी हो सकती है। लेकिन अगर इसकी वजह इनेमल का घिसना, मसूड़ों का पीछे हटना, दांत में सड़न या दरार है, तो केवल इंतजार करना पर्याप्त नहीं है। ठंडा-गर्म खाते ही दांतों में झनझनाहट क्यों होने लगती है? दांतों की बाहरी सतह पर इनेमल की मजबूत परत होती है, जो अंदर मौजूद डेंटिन और दांत के संवेदनशील हिस्सों की रक्षा करती है। जब इनेमल घिस जाता है या मसूड़े पीछे हटने से दांत की जड़ का हिस्सा खुल जाता है, तो बाहरी उत्तेजनाएं दांत के अंदर मौजूद सूक्ष्म नलिकाओं के जरिए नसों तक असर पहुंचा सकती हैं। इससे ठंडा, गर्म, मीठा या खट्टा खाने-पीने पर तेज, लेकिन अक्सर थोड़े समय के लिए रहने वाली झनझनाहट हो सकती है। इंडियन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार दांतों को बहुत जोर से ब्रश करना, एसिडिक पेय पदार्थों का बार-बार सेवन, मसूड़ों की बीमारी और दांत पीसने की आदत सेंसिटिविटी का जोखिम बढ़ा सकती हैं। हालांकि, हर तरह का दांत दर्द सेंसिटिविटी नहीं होता। कैविटी, दांत में दरार या अन्य समस्याएं भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। क्या टूथ सेंसिटिविटी अपने आप ठीक हो सकता है? अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के मुताबिक इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि सेंसिटिविटी क्यों हो रही है। अगर दांतों में झनझनाहट किसी अस्थायी वजह से हुई है, तो ट्रिगर कम होने पर परेशानी घट सकती है। उदाहरण के लिए, व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट के बाद होने वाली हल्की सेंसिटिविटी आमतौर पर कुछ समय में कम हो जाती है। लेकिन अगर दांतों का इनेमल काफी घिस चुका है या मसूड़े पीछे हटने के कारण जड़ का हिस्सा खुल गया है, तो यह समस्या केवल इंतजार करने से ठीक नहीं होती। ऐसी स्थिति में संवेदनशीलता कम करने वाले टूथपेस्ट, फ्लोराइड ट्रीटमेंट या डेंटिस्ट द्वारा सुझाए गए अन्य उपायों की जरूरत पड़ सकती है। इनमेल घिसने या मसूड़े पीछे हटने से दांत ज्यादा सेंसिटिव क्यों हो जाते हैं? दांतों का इनेमल शरीर के सबसे कठोर ऊतकों में से एक है, लेकिन समय के साथ एसिड के संपर्क, गलत तरीके से ब्रश करने या दांत पीसने की आदत से इसकी सतह घिस सकती है। इनेमल एक बार काफी मात्रा में नष्ट हो जाए, तो शरीर उसे पहले जैसी प्राकृतिक परत के रूप में दोबारा नहीं बना सकता। इसलिए इस तरह की सेंसिटिविटी को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी वजह को नियंत्रित करना जरूरी है। एनएचएस के अनुसार मसूड़ों का पीछे हटना (Gum Recession) भी सेंसिटिविटी की अहम वजह है। जब मसूड़े अपनी सामान्य स्थिति से पीछे हटते हैं, तो दांत की जड़ का हिस्सा खुल सकता है। जड़ पर इनेमल की जगह दूसरी सतह होती है, जो बाहरी उत्तेजनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती है। मसूड़ों की बीमारी, प्लाक का जमना और बहुत जोर से ब्रश करना इस समस्या से जुड़े कारण हैं। क्या टूथ सेंसिटिविटी अपने आप ठीक हो सकता है? अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार, व्हाइटनिंग के बाद होने वाली सेंसिटिविटी आमतौर पर हल्की और अस्थायी होती है। कुछ लोगों में यह उपचार के शुरुआती दिनों में दिखाई देती है और समय के साथ कम हो जाती है। अगर परेशानी ज्यादा हो या बनी रहे, तो व्हाइटनिंग रोककर डेंटिस्ट से सलाह लेना चाहिए। एनएचएस के अनुसार डेंटल क्लीनिंग या स्केलिंग के बाद भी कुछ लोगों को ठंडे-गर्म पदार्थों से संवेदनशीलता हो सकती है, खासकर जब पहले से मसूड़ों में सूजन, टार्टर जमा होने या मसूड़ों के पीछे हटने की समस्या हो। डीप स्केलिंग के बाद यह परेशानी अस्थायी हो सकती है, लेकिन इसकी अवधि व्यक्ति की दांतों और मसूड़ों की स्थिति पर निर्भर करती है। दांतों की सेंसिटिविटी कम करने के लिए क्या करें?     सेंसिटिविटी के लिए बनाए टूथपेस्ट का इस्तेमाल करें।     सॉफ्ट टूथब्रश इस्तेमाल करें।     एसिडिक चीजों का सेवन सीमित करें।     व्हाइटनिंग उत्पाद सावधानी से इस्तेमाल करें।     नियमित डेंटल चेकअप कराएं। दांतों की सेंसिटिविटी कुछ परिस्थितियों में अस्थायी हो सकती है, खासकर व्हाइटनिंग या डीप क्लीनिंग के बाद। लेकिन इनेमल घिसने, मसूड़ों के पीछे हटने, कैविटी या दांत में दरार के कारण होने वाली परेशानी अपने आप ठीक हो जाए, यह जरूरी नहीं है। इसलिए दर्द की अवधि, उसकी तीव्रता और उससे जुड़े दूसरे लक्षणों पर ध्यान दें। सही टूथपेस्ट, बेहतर ब्रशिंग तकनीक और डेंटिस्ट की सलाह से सेंसिटिविटी को नियंत्रित किया जा सकता है। बार-बार होने वाले दर्द को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच कराना बेहतर है। डॉक्टर कहती हैं कि संवेदनशील दांतों के लिए बने टूथपेस्ट के विज्ञापनों पर भरोसा न करें और इसके लिए डॉक्टर से सलाह लें।

राजस्थान के खारा गांव में प्रदूषण से 121 लोग बीमार, 694 घरों के सर्वे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

बीकानेर जिले के खारा गांव और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में बढ़ते वायु प्रदूषण और इससे लोगों की सेहत पर पड़ रहे असर को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने सख्ती दिखाई है। न्यायाधिकरण ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल को प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाकर तीन सप्ताह में अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से बताया गया कि 21 औद्योगिक इकाइयों को बंद करने के नोटिस जारी किए है। वहीं, चिकित्सा विभाग के सर्वेक्षण में 694 घरों के सर्वे के दौरान 121 लोगों में श्वसन संबंधी बीमारियों के लक्षण सामने आने की जानकारी दी गई। पौधरोपण और संरक्षण के निर्देश एनजीटी ने क्षेत्र में पर्यावरणीय मानकों की पालना सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। न्यायाधिकरण ने जरूरत के अनुसार पर्याप्त पौधरोपण कराने और लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखने के लिए उचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही, पौधों के जीवित रहने और उनके संरक्षण से जुड़े मानकों की पालना सुनिश्चित करने को कहा बच्चों को स्कूल नहीं भेजा, हुई शिकायत यह मामला राम सिंह खारा के पत्र के आधार पर एनजीटी की ओर से स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज किया गया था। पत्र में 12 दिसंबर 2025 को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित 'प्रदूषण को लेकर ग्रामीणों का बड़ा फैसला, कईयों ने बच्चों को नहीं भेजा स्कूल' शीर्षक की खबर का उल्लेख किया गया था। खबर में औद्योगिक प्रदूषण से परेशान ग्रामीणों की चिंताओं और कुछ परिवारों की ओर से बच्चों को स्कूल नहीं भेजने के फैसले को प्रमुखता से उठाया गया था। सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता के अधिवक्ता ने भी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण और इससे मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई। 18 दिसंबर को अगली सुनवाई एनजीटी की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल में 26 अक्टूबर को न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति श्योकुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई कर जवाब पेश नहीं करने वाले प्रतिवादियों को 3 सप्ताह का समय दिया है। वहीं, खारा औद्योगिक क्षेत्र (ग्रोथ सेंटर) की औद्योगिक इकाइयों की ओर से अधिवक्ता ने जवाब पेश करने के लिए समय मांगा। इस पर पीठ ने दो सप्ताह की मोहलत दी। मामले की अगली सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।

‘हैरी पॉटर’ के फैंस के लिए खुशखबरी, क्रिसमस पर रिलीज होगी HBO की नई सीरीज

फिल्म 'हैरी पॉटर' को लेकर दर्शकों में अलग ही दीवानगी है। दुनियाभर में जबरदस्त कामयाबी के बाद अब मेकर्स इस पर सीरीज ला रहे हैं। मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट का एलान किया है। यह सीरीज इस साल क्रिसमस के मौके पर रिलीज होगी।     कब रिलीज होगी 'हैरी पॉटर' सीरीज? मेकर्स ने सोशल मीडिया पर सीरीज का पोस्टर शेयर किया है। इसमें हॉगवर्ट्स का पहला लुक दिखाया गया है। पोस्टर के साथ मेकर्स ने फिल्म की रिलीज की तारीख का एलान किया है। इसके कैप्शन में लिखा है 'हमारी दुनिया में हर कोई उसका नाम जान जाएगा। HBO ओरिजिनल सीरीज 'हैरी पॉटर एंड द फिलॉसफर्स स्टोन' का प्रीमियर 25 दिसंबर को HBO मैक्स पर होगा।'  फैंस हुए उत्साहित इंस्टाग्राम पर इस पोस्ट के आने के बाद कई यूजर्स सीरीज की रिलीज डेट को लेकर उत्साहित हैं। कई यूजर्स ने कहा है कि वह क्रिसमस का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, ताकि सीरीज को देख सकें। वहीं कई यूजर्स सीरीज के पोस्टर को लेकर उत्साहित हैं। वह हॉगवर्ट्स के लुक को शानदार बता रहे हैं। मेकर्स ने दी सीरीज पर अपडेट इससे पहले मेकर्स ने सीरीज की रिलीज डेट का एलान करते हुए बताया था कि 'हैरी पॉटर' सीरीज के पहले सीजन का प्रीमियर होने में अभी वक्त है। एचबीओ के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर फ्रांसेस्का ने कहा था, 'हमने अपने ओवरलैपिंग प्रोडक्शन शेड्यूल के लिए प्लानिंग बनाई है, क्रिसमस तक हम पहले सीजन को पूरा कर लेंगे। जिसके बाद सर्दियों में दूसरे सीजन का प्रोडक्शन शुरू करेंगे।' सीरीज के बारे में जानकारी देते हुए एचबीओ की क्रिएटिव टीम ने जानकारी साझा करते हुए बताया था कि राइटर जे.के. रोलिंग की सात किताबों को 'हैरी पॉटर' के अलग-अलग सीजन के तौर पर बनाया जाएगा। कब रिलीज हुआ ट्रेलर?     बता दें कि जहां 'हैरी पॉटर' सीरीज का पहला सीजन इस साल क्रिसमस पर रिलीज होगा।     वहीं सीरीज के दूसरे सीजन के प्रोडक्शन का काम दिसंबर में ही शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।     दूसरे सीजन की रिलीज की तारीख अभी सामने नहीं आई है। सिर्फ शूटिंग से जुड़ी जानकारी ही बताई गई है।     'हैरी पॉटर' सीरीज के पहले सीजन का ट्रेलर बीते मार्च को रिलीज किया गया, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया।

ओवरलोड ऑटो बना हादसे की वजह, पीछे से टक्कर मारने पर दो लोगों की मौत

गोराया. गोराया में फिल्लौर से गोराया की ओर जाने वाले जीटी रोड पर प्राचीन शिव मंदिर के सामने वीरवार सुबह करीब नौ बजे एक भीषण सड़क हादसा हो गया। ओवरलोड ऑटो ने पीछे से वाहन को टक्कर मार दी। इसमें ऑटो में सवार 12 लोग गंभीर घायल हो गए। अस्पताल में उपचार के दौरान दो लोगों की मौत हो गई। एक मृतक की शिनाख्त पवित्र सिंह निवासी शिमलापुरी लुधियाना के रूप में हुई, जबकि दूसरे की शिनाख्त नहीं हो सकी है। एक अन्य घायल की हालत गंभीर बनी हुई है। लोगों के मुताबिक ऑटो ने अज्ञात वाहन को पीछे से टक्कर मार दी। हादसे के बाद वाहन लेकर चालक फरार हो गया। राहगीर की सूचना के बाद सड़क सुरक्षा फोर्स (एसएसएफ) की टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल पर क्षतिग्रस्त ऑटो मिला। टीम ने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया और दुर्घटनाग्रस्त ऑटो के आसपास सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सेफ्टी कोन लगाए। इसके बाद एंबुलेंसों की मदद से घायलों को सिविल अस्पताल फिल्लौर पहुंचाया गया। घायलों में 42 वर्षीय संतोष, 20 वर्षीय हिमांशु, 42 वर्षीय हरदीप सिंह, 40 वर्षीय सरबजीत सिंह, 76 वर्षीय शीशपाल, 26 वर्षीय राहुल, 24 वर्षीय रामवीर, 50 वर्षीय अंकित और 34 वर्षीय मनजीत सिंह शामिल हैं। ये सभी लुधियाना तथा आसपास के क्षेत्रों के निवासी बताए जा रहे हैं। मजदूरी के लिए लुधियाना से जालंधर जा रहे थे सभी जानकारी के अनुसार, ऑटो में सवार सभी लोग लुधियाना से जालंधर मजदूरी करने जा रहे थे। बताया गया है कि ये लोग आपस में एक-दूसरे को नहीं जानते थे और उनके पास पहचान संबंधी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं थे। हादसे की सूचना मिलने पर थाना गोराया के एसएचओ और ड्यूटी अधिकारी एएसआइ सुरिंदर पाल भी मौके पर पहुंचे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

श्रद्धा कपूर की फिल्म ‘ईठा’ का ट्रेलर रिलीज, लावणी कलाकार के दमदार अवतार में आईं नजर

'स्त्री 2' की जबर्दस्त सफलता के बाद अब बॉलीवुड एक्ट्रेस श्रद्धा कपूर एक बार फिर बड़े पर्दे पर एक बेहद अलग और पावरफुल अवतार में लौटने के लिए तैयार हैं. उनकी आने वाली मच-अवेटेड फिल्म 'ईठा' (Eetha) का ट्रेलर रिलीज हो चुका है, जिसने आते ही इंटरनेट पर सनसनी मचा दी है. मैडॉक फिल्म्स और कठपुतली क्रिएशंस के बैनर तले बनी इस फिल्म में श्रद्धा कपूर महाराष्ट्र की लोक कला 'लावणी' और 'तमाशा' की दुनिया में अपने हुनर का जलवा बिखेरती नजर आ रही हैं. ट्रेलर में मंच पर थिरकते कदम, चेहरे पर अटूट आत्मविश्वास और समाज की रूढ़ियों को तोड़कर अपनी अलग पहचान बनाने का जुनून साफ दिखाई दे रहा है. ट्रेलर को देखकर एक बात तो समझ आ गई है कि  यह महज एक एंटरटेनर फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐसी कलाकार की कहानी है, जिसके लिए उसकी कला सिर्फ एक जरिया नहीं बल्कि उसके अस्तित्व और स्वाभिमान की लड़ाई है. विथाबाई नारायणगांवकर से प्रेरित किरदार फिल्म में श्रद्धा कपूर का किरदार महाराष्ट्र की मशहूर लावणी सम्राज्ञी विथाबाई नारायणगांवकर के जीवन और संघर्षों से प्रेरित है. 'स्त्री 2' के बाद एक पीरियड ड्रामा पर आधारित फिल्म में श्रद्धा को देखना उनके फैंस के लिए किसी सरप्राइज से कम नहीं है. नौवारी साड़ी, हाथ में हरी चूड़ियां, गले में पारंपरिक गहने और लावणी का वो नटखट अंदाज श्रद्धा का यह लुक दर्शकों को खूब पसंद आ रहा है. 'ईथा' की सबसे खास बात यह है कि यह लावणी और तमाशा को सिर्फ नाच-गाने या मनोरंजन के तौर पर पेश नहीं करती. यह फिल्म लावणी कलाकारों के कड़े परिश्रम, उनके संघर्षों और समाज में मिलने वाले मान-सम्मान (या उसकी कमी) के कड़वे सच को उजागर करती है. ट्रेलर में उस दौर के बड़े-बड़े मंडपों, खचाखच भरी भीड़ और रंग-बिरंगे स्टेज शो को बहुत ही खूबसूरत ढंग से दिखाया गया है. लेकिन इस रंगीन दुनिया के पीछे जो चुनौतियां और सामाजिक दबाव छिपे होते हैं, वही इस कहानी की गहराई है. डायलॉग ने जीता दिल ट्रेलर का एक डायलॉग काफी दमदार है.जिसमें श्रद्धा कहती हैं,  'यह सिर्फ कपड़े का एक टुकड़ा नहीं है, यह हमारी अस्मिता और मान-सम्मान का प्रतीक है.' यह डायलॉग फिल्म की पूरी कहानी को बयां कर देता है. यहां 'नौवारी' साड़ी महज एक पारंपरिक पहनावा नहीं, बल्कि संस्कृति, आत्मसम्मान और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एक मजबूत जरिया बनकर उभरती है. अजय-अतुल का दमदार म्यूजिक फिल्म के संगीत की कमान इंडस्ट्री की मशहूर जोड़ी अजय-अतुल ने संभाली है, जबकि गानों की कोरियोग्राफी वैभवी मर्चेंट ने की है. ऐसे में दर्शकों को पारंपरिक लावणी संगीत और जबर्दस्त डांस परफॉर्मेंस का बेहतरीन मेल देखने को मिलने वाला है. ट्रेलर में रणदीप हुड्डा का भी एक अलग और धाकड़ अवतार देखने को मिलता है. उनके अलावा मोहम्मद जीशान अय्यूब, अनंत जोशी और सिद्धार्थ जाधव जैसे दमदार कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं. यह फिल्म 4 दिसंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है.

तीन दिन से पानी में डूबी धान की फसल, किसानों की बढ़ी चिंता

गरियाबंद. बंगाल की खाड़ी से उठे तूफान ने धान खरीदी से पहले किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. जिन खेतों में किसानों ने मेहनत कर फसल तैयार की थी, वे अब मौसम की मार झेल रहे हैं. साइक्लोन अर्नब के असर से देवभोग क्षेत्र में हजारों एकड़ फसल खराब होने के कगार पर पहुंच गई है. बताया जा रहा है कि सिनापाली, बाड़ीगांव, गिरशुल के अलावा झाखरपारा क्षेत्र के 20 से अधिक गांवों में पकी हुई धान की फसल पानी से भरे खेतों में बिछ गई है. फसल बचाने किसान कर रहे संघर्ष घुटने भर पानी में खड़े किसान की तस्वीर उनकी परेशानी बयां करने के लिए काफी है. पानी से भरे खेतों में किसान एक-एक पौधे को सहेजने में जुटे हैं. वे कई पौधों को एक साथ बांधकर फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं. यह तस्वीर देवभोग तहसील के सिनापाली गांव की है, जहां किसान कपड़े की रस्सी से धान के पौधों को खड़ा कर रहे हैं, ताकि खेतों में भरे पानी से बालियां सड़ने न पाएं. किसान दुर्बल राम, खिरसिंधु और हरिराम ने बताया कि दूध भरे धान की फसल को सबसे ज्यादा खतरा है. अगर फसल तीन दिन से ज्यादा पानी में डूबी रही तो धान खराब हो सकता है. वहीं, पकी हुई धान की फसल के पौधे भी सड़ने लगेंगे. नुकसान से बचाने के लिए बालियों को उठाकर खड़ा रखना किसानों के सामने बड़ी चुनौती है. इसके बावजूद वे अपनी फसल बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. सब्जी और दलहन को भी नुकसान हुआ साइक्लोन अर्नब ने केवल धान की फसल को ही नहीं, बल्कि मक्का, सब्जी और दलहन की फसलों को भी नुकसान पहुंचाया है. तूफान के चलते कच्चे मकानों को भी क्षति पहुंची है और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. बाजार बंद होने से सब्जी उत्पादकों के सामने भी असमंजस की स्थिति बन गई है. खेतों और बाड़ियों में पानी भरने से फसल को नुकसान का खतरा है, वहीं घर लाने के बाद भी सब्जियों की बिक्री नहीं हो पा रही है. पिछले दो दिनों में सब्जियों का रंग भी फीका पड़ने लगा है. ऐसे में मजबूरी में किसान अपने घरों के सामने ही दुकान लगाकर सब्जियां बेच रहे हैं, ताकि कम से कम उनकी लागत निकल सके. खाद और बीज पर लगाया पैसा डूबने की चिंता के बीच अब किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी बची हुई फसल को बचाने की है. नुकसान के आंकलन के लिए सर्वे देवभोग तहसीलदार के सुशील कुमार भोई ने कहा कि तूफान से काफी नुकसान हुआ है. किसानों के नुकसान का आंकलन के लिए सर्वे किया जाएगा. उन्होंने बताया कि 33 फीसदी तक नुकसान हुआ तो आरबीसी 6, 4 के तहत क्षतिपूर्ति का प्रावधान है. पीड़ित किसानों से विधिवत आवेदन लेकर प्रक्रिया के तहत यह दिया जाता है.

अब रात में भी खुले रहते हैं बाजार, व्यवसाय के विस्तार के मिल रहे नए अवसर: मुख्यमंत्री

अब व्यापारी के विश्वास का प्रकाश है रात में जगमगाते बाजारों की रोशनी: मुख्यमंत्री अब रात में भी खुले रहते हैं बाजार, व्यवसाय के विस्तार के मिल रहे नए अवसर: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पर किया पोस्ट- 2017 से पहले अपराध और असुरक्षा के कारण सूर्यास्त के साथ व्यापारिक गतिविधियां होने लगती थीं सीमित अब रात में भी खुले रहते हैं बाजार, व्यवसाय के विस्तार के मिल रहे नए अवसर: मुख्यमंत्री नाइट शिफ्ट में अपने कार्यस्थल पर निर्भय होकर दायित्व निभाती मातृशक्ति का आत्मविश्वास समाज की प्रगति का प्रतीक: मुख्यमंत्री लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2017 के पश्चात रात में जगमगाते बाजारों को व्यापारी के विश्वास का प्रकाश बताया है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर पोस्ट कर पूर्ववर्ती सरकार की कार्यपद्धति पर सवालिया निशान खड़ा किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले अपराध और असुरक्षा के कारण सूर्यास्त के साथ व्यापारिक गतिविधियां सीमित होने लगती थीं।  मातृशक्ति का आत्मविश्वास समाज की प्रगति का प्रतीक मुख्यमंत्री ने लिखा कि आज नए उत्तर प्रदेश में रात्रि के समय जगमगाते बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की रोशनी केवल व्यापार की नहीं, बल्कि व्यापारी के विश्वास का प्रकाश भी है। नाइट शिफ्ट में अपने कार्यस्थल पर निर्भय होकर दायित्व निभाती हमारी मातृशक्ति का आत्मविश्वास केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे समाज की प्रगति का प्रतीक है। 2017 से पहले महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहता था परिवार मुख्यमंत्री ने बताया कि सुरक्षा और विश्वास का यह वातावरण उत्तर प्रदेश में सदैव नहीं था। वर्ष 2017 से पहले अपराध और असुरक्षा के कारण सूर्यास्त के साथ व्यापारिक गतिविधियां सीमित होने लगती थीं। देर रात तक कार्य करने वाली महिलाओं की सुरक्षा को लेकर परिवारों में चिंता बनी रहती थी। डबल इंजन सरकार ने बदली परिस्थिति मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के यशस्वी मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार ने इस परिस्थिति को बदला। अपराध और अपराधियों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ किया एवं महिला सुरक्षा को प्राथमिकता दी। आज बाजार रात में भी खुले रहते हैं। व्यापारियों को व्यवसाय के विस्तार के नए अवसर मिल रहे हैं और हमारी बेटियां सुरक्षित वातावरण में अपनी प्रतिभा एवं परिश्रम से आगे बढ़ रही हैं। 'सुरक्षा से समृद्धि' की ओर अग्रसर 'नया उत्तर प्रदेश' मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश की महिला श्रम बल भागीदारी लगभग 13 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 36 प्रतिशत हो चुकी है। यह मातृशक्ति के बढ़ते आत्मविश्वास, आर्थिक सामर्थ्य और स्वावलंबन की सशक्त अभिव्यक्ति है। यह 'सुरक्षा से समृद्धि' की ओर अग्रसर 'नए उत्तर प्रदेश' की नई पहचान है।

किसानों के खाते में पहुंची PM किसान की 24वीं किस्त, दिवाली से पहले मिली खुशखबरी

बनासकांठा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी कर दी गई है। दिवाली से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनासकांठा में 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम-किसान योजना की 24वीं किस्त भी जारी की, जो लगभग 19,000 करोड़ रुपये की है। इसका लाभ 9 करोड़ 30 लाख से ज्यादा किसानों को मिलेगा। बता दें कि मोदी ने जून 2026 में पीएम किसान योजना की 23वीं किस्त जारी की थी। योजना के बारे में फरवरी 2019 में शुरू की गई पीएम-किसान योजना के तहत अब तक 23 किस्तों में पात्र किसानों को 4.47 लाख करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। इस योजना के तहत पात्र भूमिधारक किसान परिवारों को सालाना 6,000 रुपये तीन किस्तों में दिए जाते हैं। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी जाती है। योजना का लाभ किसे? पीएम किसान योजना का लाभ उन किसानों को मिलता है जिनकी जमीन का विवरण PM किसान पोर्टल पर दर्ज है, जिनके बैंक खाते उनके आधार कार्ड (UID कार्ड) से जुड़े हुए हैं और जिन्होंने अपनी e-KYC प्रक्रिया पूरी कर ली है। PM किसान की वेबसाइट पर आप यह देख सकते हैं कि आपका नाम योजना की आधिकारिक लाभार्थी सूची में शामिल है या नहीं। इसे चेक करने का तरीका स्टेप 1: PM किसान के आधिकारिक पोर्टल https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं। स्टेप 2: 'फार्मर्स कॉर्नर' पर विजिट करें। यह होमपेज पर मिल जाएगा। स्टेप 3: 'बेनिफिशियरी लिस्ट' चुनें। मेनू में 'बेनिफिशियरी लिस्ट' विकल्प पर क्लिक करना है। स्टेप 4: अपना राज्य, जिला, ब्लॉक और गांव चुनें। इसके बाद Get Report पर क्लिक करें। इससे PM किसान योजना के सभी लाभार्थियों के नाम दिखाई देंगे। e-KYC है जरूरी योजना के तहत रजिस्टर्ड किसानों के लिए e-KYC अनिवार्य है। अगर किसी किसान ने यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है, तो उसकी किस्त रुक सकती है। इसलिए लाभार्थियों को समय रहते अपना e-KYC पूरा कर लेना चाहिए। इसके लिए pmkisan.gov.in पर विजिट करना होगा। इसके बाद होमपेज पर e-KYC विकल्प चुनें। इसके अगले स्टेप में अपना आधार नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए OTP को दर्ज करके वेरिफिकेशन किया जा सकता है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद जानकारी सबमिट कर दें। अगर OTP के जरिए e-KYC नहीं हो पा रहा है, तो किसान नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या स्टेट सेवा केंद्र (SSK) पर जाकर बायोमेट्रिक तरीके से यह प्रक्रिया पूरी करा सकते हैं।

बेटियों ने पैरा एशियन गेम्स में लहराया परचम, पदक जीतकर रचा नया इतिहास

 नई दिल्‍ली  हाल ही में जापान में संपन्न एशियन पैरा गेम्स में अपने अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करते हुए देश की बेटियों ने इतिहास रच दिया। इस बार खिलाड़ियों ने पदक जीतने के साथ ही दुनिया के सामने नए मानक भी स्थापित किए। इन खिलाड़ियों की क्षमता सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इनकी कहानियां भी लोगों को प्रेरित करने वाली हैं। पदक जीतने वाली कुछ बेटियों की जीवनयात्रा पर दिनेश दीक्षित की रिपोर्ट… 1.शीतल ने पैरों से लिखी सफलता की कहानी जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के पहाड़ों से निकली छोटी सी दिखने वाली शीतल देवी अपनी मेहनत और जज्बे से सफलता के उस आसमान पर पहुंच चुकी है, जहां पहाड़ों की ऊंचाइयां भी अब बौनी दिखने लगी हैं। वह कहती भी हैं कि कमजोरी हमारे मस्तिष्क में होती है, शरीर में नहीं, बस लक्ष्य संधान कर सही मेहनत करते चलो। पैरा एशियाई खेलों में तीरंदाजी में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर शीतल ने यह साबित भी कर दिया। यह पहला अवसर नहीं है, पिछले पैरा एशियाई खेलों में भी उन्होंने अपने लिए यही पैमाना तय किया था और अब फिर उसे दोहरा भी दिया। इतना ही नहीं उन्होंने विश्व रिकार्ड की बराबरी की और नया एशियाई रिकार्ड भी रच डाला। निरंतर प्रदर्शन दोहराने के दबाव पर शीतल ने कहा कि मैं पुरानी गलतियों के बारे में सोचकर दबाव में नहीं आती। आगे के निशाने पर लक्ष्य साधती हूं और यही सफलता का साधन भी है। शीतल का जीवन कभी भी आसान नहीं था। किश्तवाड़ के एक दूरदराज के गांव में जीवन हर दिन नई चुनौती पेश करता है। बचपन में दुर्लभ बीमारी के कारण उनके दोनों हाथ अविकसित रह गए, पर शीतल ने हार नहीं मानी और पैरों से लिखना, खाना और अन्य कार्य करने सीखे। बचपन से ही पैरों के सहारे वह पेड़ों पर चढ़ जाती थीं। यही उनकी मानसिक मजबूती का प्रमाण भी है और यही अंदाज आगे उनके जीवन के साथ खेल में भी काम आया। उनका बचपन आसान नहीं था। परिवार उन्हें संभालता था, पर समाज से ताने उनकी नियति बन चुके थे। हालांकि, इन सबका जवाब शीतल ने अपने खेल से दिया। सेना के अधिकारियों की उन पर नजर पड़ी और उनको कृत्रिम हाथ लगावाने का प्रयास किया पर वह सफल नहीं हो पाया। बाद में सेना के सहयोग से ही वह मां वैष्णोदेवी खेल केंद्र पहुंचीं। यहीं उन्होंने मुंह से पकड़कर और पैरों से धनुष थाम तीर चलाना सीखा। निरंतर मेहनत और एकाग्रता ने उन्हें वह मुकाम दिला दिया, जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता था। उनके पिता महेंद्र सिंह भी कहते हैं कि आज शीतल जिस मुकाम पर हैं, उन्हें देखकर आश्चर्य होता है। यह सब उसने अपनी मेहनत और सरकार की मदद से हासिल किया साथ ही प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन का असर है कि वह हर चुनौती को पार करने में सफल हो रही है। 2.अभावों से जूझकर चमकीं संजना सपने देखने से ज्यादा मुश्किल उन्हें हकीकत में बदलने का सफर होता है। खासकर तब, जब सुविधाओं का अभाव हो और हर कदम पर परिस्थितियों से लड़ना पड़े। झारखंड के लोहरदगा के शास्त्री नगर ढोढ़हा टोली की संजना कुमारी ने इन्हीं मुश्किलों के बीच अपने सपनों को जिंदा रखा। पैरा बैडमिंटन में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने अभाव ज्यादा दिनों तक रास्ता नहीं रोक सकते। उनकी यह उपलब्धि परिवार के त्याग, गुरु के मार्गदर्शन और एक बेटी के अदम्य साहस की कहानी है। अब संजना का सपना पैरालिंपिक में देश के लिए पदक जीतना है। संजना कहती हैं, दिव्यांगजनों के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी और खेल के क्षेत्र में सीमित अवसरों के बीच मैंने पैरा बैडमिंटन को अपना भविष्य बनाने का फैसला किया। खेल की दुनिया में आगे बढ़ने का निर्णय भी मेरा था। शुरुआत में स्वजन को आश्चर्य हुआ और उन्हें मेरी सुरक्षा व भविष्य को लेकर चिंता भी, लेकिन मेरा जुनून कम नहीं हुआ। आखिरकार मेरी मेहनत और दृढ़ निश्चय देखकर स्वजन ने भी साथ देने का फैसला किया। संजना कहती हैं, संघर्ष की शुरुआत रांची में प्रशिक्षण के दौरान काफी कठिन रही। मैं रोजाना प्रशिक्षण केंद्र के लिए अकेले निकलती थी और रात आठ बजे लौटती थी, लेकिन थकान और असुविधाओं के बीच भी लक्ष्य स्पष्ट रहा। प्रशिक्षण के बाद हमने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से लखनऊ में प्रशिक्षक गौरव खन्ना से संपर्क किया और स्वजन मुझे लखनऊ लेकर गए। वहां करीब दो लाख रुपये प्रतिमाह खर्च होने की जानकारी मिली। मजबूरी में मुझे वापस लौटना पड़ा। हालांकि, बाद में गौरव जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि परिवार रहने और खाने का खर्च उठाए, बाकी प्रशिक्षण और खेल से जुड़ी सुविधाओं के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस सहयोग ने मुझे आगे बढ़ने का अवसर दिया। पांच साल से अधिक समय से मेरी की जिंदगी का बड़ा हिस्सा प्रशिक्षण केंद्रों में बीत रहा है। मैं घर आती भी हूं तो मुश्किल से एक-दो सप्ताह ही परिवार के साथ रह पाती हूं। मैंने अब तक 11 देशों में विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए हैं। यदि सरकार और खेल संस्थाओं से और मदद मिले तो मैं और पदक जीतने का प्रयास करूंगी। बेटियों के लिए संजना का संदेश है कि आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरें। अनुशासन बनाए रखें, मेहनत करें और हार से डरकर पीछे न हटें। खेल केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सपनों को सच करने का माध्यम भी है। 3.बहन का सपना पूरा करने उतरीं कोकिला जूडो में रजत पदक जीतने वाली दृष्टिबाधित खिलाड़ी कोकिला कौशिक ने संघर्षों के बीच अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। उनकी जिंदगी और खेल यात्रा अब फिल्म के माध्यम से भी लोगों के सामने आएगी। हरियाणा के हिसार की कोकिला की सफलता के पीछे परिवार का लंबा संघर्ष है। उनकी बड़ी बहन सफलता जूडो खिलाड़ी थीं, लेकिन कंधे की चोट के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा। बहन के अधूरे सपने को आगे बढ़ाने के लिए कोकिला ने जूडो चुना। बेटी के करियर को आगे बढ़ाने के लिए पिता कृष्ण कुमार कौशिक ने करीब पचास लाख रुपये खर्च किए। कोकिला की मां सुमन शर्मा एथलीट रही हैं, जबकि भाई कुशल कौशिक कुश्ती खिलाड़ी हैं। खेल से … Read more

बांसवाड़ा के गांव में अनोखी परंपरा, राजपूत-आदिवासी समाज मिलकर चुनते हैं वार्ड पंच

बांसवाड़ा पंचायती राज चुनाव में जहां वार्ड पंच बनने के लिए उम्मीदवारों के बीच मुकाबला देखने को मिलता है, वहीं गनोड़ा तहसील की भुवासा ग्राम पंचायत का सज्जन सिंह का गड़ा गांव आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। गांव में वर्ष 1952 से अब तक वार्ड पंच के चुनाव में मतदान की नौबत नहीं आई। ग्रामीण आपसी सहमति से ही अपना प्रतिनिधि चुनते हैं और निर्विरोध वार्ड पंच घोषित करते हैं। राजपूत और आदिवासी समाज के लोग एक जाजम पर बैठकर यह फैसला करते हैं, जिस पर गांव के सभी लोग सहमति जताते हैं। सामान्य और एसटी सीट पर भी कायम है सहमति गांव की परंपरा के अनुसार वार्ड पंच की सीट सामान्य हो या अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित, दोनों समाजों के लोग आपसी विचार-विमर्श के बाद उम्मीदवार का चयन करते हैं। इस प्रक्रिया में आपसी समझाइश को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे चुनाव में आमने-सामने की स्थिति नहीं बनती। आजादी के बाद से चली आ रही यह परंपरा आज भी कायम है। एक वार्ड से बढ़कर हुए दो, दोनों में निर्विरोध चयन पहले गांव में एक ही वार्ड था, लेकिन जनसंख्या के आधार पर अब दो वार्ड बनाए गए हैं। इस बार वार्ड संख्या एक, जो सामान्य वर्ग के लिए है, उसमें तारा कुंवर को वार्ड पंच चुना गया है। वहीं, वार्ड संख्या दो, जो एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है, उसमें लसी देवी को निर्विरोध वार्ड पंच चुना गया है। गांव के वार्ड संख्या एक में 192 और वार्ड संख्या दो में 204 मतदाता हैं। इस तरह दोनों वार्डों में कुल 396 मतदाता हैं, लेकिन आपसी सहमति के चलते मतदान की जरूरत नहीं पड़ी। दोनों वार्डों में निर्विरोध चयन के बाद ग्रामीणों ने गांव के चौराहे पर तारा कुंवर और लसी देवी का माला पहनाकर स्वागत किया। इस दौरान जयपाल सिंह, पर्वत सिंह, देवीलाल, गहू लाल, छत्र सिंह, संग्राम सिंह, जय सिंह, भीमजी भाई, नाथू भाई, शार्दुल सिंह, शंकर, कालू सिंह, मोती सिंह, सज्जन सिंह, लेखराज सिंह, रणवीर सिंह, धुला भाई, गहू भाई और मोहन सिंह सहित ग्रामीण मौजूद रहे। छोटे-बड़े विवाद भी गांव की चौपाल पर सुलझाते हैं ग्रामीण गांव में छोटे-बड़े विवाद होने पर भी लोग पहले आपस में बैठकर समाधान निकालने का प्रयास करते हैं। बातचीत और समझाइश के जरिए विवाद सुलझाने की परंपरा ने आपसी विश्वास और भाईचारे को मजबूत बनाए रखा है।