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गर्मी में ठंडक का शाही उपाय: घर पर बनाएं केसर-पिस्ता शरबत

गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप और उमस से राहत पाने के लिए लोग अक्सर मार्केट में मिलने वाले पैक्ड जूस या कोल्ड ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं जो सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे में अगर आप बिना चीनी के कुछ बेहद शाही, पौष्टिक और रिफ्रेशिंग ट्राई करना चाहते हैं तो घर पर बनाएं केसर-पिस्ता का यह खास शरबत. 2 हजार रुपये किलो मिलने वाले प्रीमियम केसर और पिस्ता से तैयार यह होममेड ड्रिंक आपके शरीर को अंदर से AC जैसी ठंडक देगी. यह न केवल स्वाद में लाजवाब है बल्कि डायबिटीज के मरीजों और वेट लॉस करने वालों के लिए भी एक बेहतरीन समर ड्रिंक है. आइए जानते हैं इसे बनाने की बेहद आसान और क्विक रेसिपी.केसर-पिस्ता शरबत रेसिपी केसर-पिस्ता शरबत बनाने की सामग्री पिस्ता: 1/2 कप (बिना नमक वाले) केसर के धागे: 15-20 (एक चम्मच गुनगुने पानी या दूध में भीगे हुए) दूध: 1 लीटर (लो-फैट या टोंड) हरी इलायची पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच भीगा हुआ बादाम गोंद (Almond Gum): 2 चम्मच (वैकल्पिक, एक्स्ट्रा ठंडक के लिए) मीठे के लिए नेचुरल विकल्प: 1/2 कप धागे वाली मिश्री का पाउडर या शहद/स्टीविया (स्वादानुसार) बर्फ के टुकड़े: आवश्यकतानुसार बनाने का तरीका सबसे पहले पिस्ता को 2 से 3 घंटे के लिए गुनगुने पानी में भिगोकर रख दें. इसके बाद उनका छिलका उतार लें. छिले हुए पिस्ता को मिक्सी के जार में डालें और थोड़े से ठंडे दूध के साथ पीसकर एकदम स्मूथ और बारीक पेस्ट बना लें. अब एक भारी तले वाले बर्तन में दूध को उबलने के लिए रखें. जब दूध में एक उबाल आ जाए, तो आंच धीमी कर दें और इसमें तैयार किया हुआ पिस्ता का पेस्ट मिला दें. दूध को लगातार चलाते हुए 5-7 मिनट तक पकाएं. अब इसमें भीगा हुआ केसर (रंग और खुशबू के लिए) और हरी इलायची पाउडर डालें. अगर आप धागे वाली मिश्री का इस्तेमाल कर रहे हैं (जो पेट के लिए ठंडी होती है) तो इस स्टेज पर मिला लें. अगर शहद या स्टीविया का उपयोग कर रहे हैं तो दूध के पूरी तरह ठंडा होने के बाद मिलाएं. जब दूध थोड़ा गाढ़ा हो जाए तो गैस बंद कर दें और इसे रूम टेम्परेचर पर आने दें. इसके बाद शरबत को 2 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें. सर्विंग ग्लास में बर्फ के टुकड़े और भीगा हुआ बादाम गोंद डालें. ऊपर से चिल्ड केसर-पिस्ता शरबत डालकर ठंडे-ठंडे स्वाद का आनंद लें.

शमी का पौधा: घर में लगाने से दूर होते हैं वास्तु दोष और बढ़ती है समृद्धि

 हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में शमी का पौधा बहुत ही शुभ माना जाता है. कहते हैं कि इस पवित्र पौधे में कर्मफल दाता शनि का वास होता है, जो कि भगवान शिव का भी प्रिय है. मान्यता है कि यह पौधा घर में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है, जिसके रहते नकारात्मक ऊर्जा भी घर से कोसों दूर रहती है. इस पौधे की लकड़ियों का उपयोग अग्नि में किया जाता है ताकि घर का वातावरण शुद्ध रहे और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर घर की शमी के पौधे को सही दिशा लगाए जाए तो यह जातक मालामाल भी कर देता है. वास्तु के अनुसार शमी का सही स्थान 1. इसे घर के मुख्य द्वार के बाईं ओर लगाना शुभ माना जाता है. 2. अगर बाहर निकलते समय यह दाईं ओर पड़े, तो और भी अच्छा फल देता है. 3. उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखना भी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. 4. यह पौधा घर के आसपास एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. मान्यता है कि जहां शमी का पौधा हरा-भरा रहता है, वहां वास्तु दोष धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं और घर का माहौल शांत रहता है. धन और तरक्की से जुड़ा है शमी का पौधा वास्तु के अनुसार, शमी का पौधा घर में धन आकर्षित करने वाला माना जाता है. 1. घर में इसे लगाने से आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे कम हो सकती हैं. 2. यह नकारात्मक ऊर्जा को रोककर घर में मां लक्ष्मी जी के आगमन करवाता है. 3. जिन लोगों को कर्ज या पैसों की दिक्कत हो, उनके लिए यह खास लाभकारी माना जाता है. शनिवार के दिन शमी के पौधे के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से रुका हुआ धन मिलने और आय के नए रास्ते खुलने की मान्यता है. घर में कहां रखना चाहिए शमी का पौधा? वास्तु शास्त्र के अनुसार, शमी का पौधा घर के अंदर नहीं रखना चाहिए. इस पौधा को छत या बालकनी में रखना ज्यादा शुभ माना जाता है. इसकी सबसे अच्छी और लाभकारी दिशा दक्षिण मानी जाती है. इसके अलावा, इसको शनिवार के दिन ही लगाना चाहिए और सूरज के सामने इसे भूलकर भी ना रखें. शनि दोष और शमी का उपाय ज्योतिष में शमी का संबंध शनिदेव से बताया गया है. शमी की पूजा करने से शनि का प्रभाव शांत होता है. साढ़ेसाती या ढैय्या में राहत मिल सकती है. इसलिए, हर शनिवार की शाम को इसके पास दीपक जलाने से मानसिक शांति मिलती है.

पश्चिमी यूपी में लू का प्रकोप, नौतपा से पहले ही झुलसाने लगी गर्मी

मेरठ यूपी के मेरठ में तेज धूप और लू ने लोगों को झुलसा दिया है। सूरज निकलते ही सुबह से ही आसमान से आग बरसती महसूस हो रही है। बुधवार को दिन चढ़ने के साथ तापमान बढ़ता गया। दोपहर तक हालात इतने खराब हो गए कि सड़क और बाजारों में सन्नाटा रहा। तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक गर्म दिन रहा। 25 मई से गर्मी का प्रकोप नौतपा शुरू होने से पारा और बढ़ेगा। वहीं, जिलाधिकारी ने भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए स्कूलों की छुट्टी कर दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग इन दिनों भीषण गर्मी से झुलस रहे हैं। तापमान 44 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। सुबह से ही ऐसा महसूस होने लगता है जैसे आसमान से आग बरस रही हो। लू के थपेड़ शरीर को झुलसा रहे हैं।  नौतपा का भी 25 मई से आगाज हो जाएगा, ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आसमान से आग बरसेगी। 29 मई को एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से थोड़ी राहत मिलने के आसार हैं। बुधवार का दिन सीजन में सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही ने बताया कि वर्तमान में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कहा कि पश्चिमी हवाओं के प्रभाव और साफ आसमान के चलते गर्मी में और इजाफा हो रहा है।    दोपहर के समय लू चलने से स्थिति और अधिक गंभीर हो रही है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ गया है। बाजारों और मुख्य मार्गों पर दोपहर के समय लोगों की आवाजाही काफी कम देखने को मिल रही है। जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोग सिर और चेहरे को ढककर ही निकले। पिछले पांच दिन का तापमान 16 मई- 39.6 17 मई- 41.3 18 मई- 42.4 19 मई- 43.6 20 मई – 44.0 गर्मी और लू के कारण 23 मई तक स्कूलों में अवकाश मेरठ में बढ़ती गर्मी और लू के मद्देनजर जिलाधिकारी वीके सिंह ने 21 से 23 मई तक प्री-प्राइमरी से कक्षा दस तक के सभी बोर्डों के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया है। जिलाधिकारी ने कहा कि छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।   भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है। अत्यधिक गर्मी के दौरान बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने दें। पर्याप्त पानी और सावधानियों का ध्यान रखने को कहा गया है। सहारनपुर : 12 साल का टूटा रिकॉर्ड, 44 डिग्री पर पहुंचा पारा सहारनपुर जनपद में गर्मी का 12 साल का रिकॉर्ड टूट गया। बीते 12 वर्षों में 20 मई को अधिकतम तापमान 42 डिग्री से ऊपर नहीं गया था। बुधवार को अधिकतम तापमान 44 व न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मेरठ में भी अधिकतम तापमान 44 डिग्री पर पहुंच गया। बागपत में 43, मुजफ्फरनगर में 42, शामली में 42 और बिजनौर में 41 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।    

चार युगों की अवधारणा: कितनी लंबी है कलयुग की वास्तविक अवधि?

हिंदू धर्म में समय को चार युगों जैसे सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर और कलयुग, में बांटा गया है, जिन्हें मिलाकर एक महायुग बनता है. इनमें कलयुग को सबसे अंतिम और नैतिक रूप से सबसे कमजोर युग माना जाता है. धर्मग्रंथों में बताया गया है कि कलयुग की शुरुआत महाभारत युद्ध के बाद, लगभग 3102 ईसा पूर्व में हुई थी. इस हिसाब से देखा जाए तो अभी कलयुग का बहुत छोटा हिस्सा ही बीता है और इसका लंबा समय बाकी है. सबसे प्रचलित मान्यता मान्यता के अनुसार, चारों युगों की अवधि इस प्रकार है जैसे सतयुग 17,28,000 वर्ष, त्रेतायुग 12,96,000 वर्ष, द्वापर युग 8,64,000 वर्ष और कलयुग 4,32,000 वर्ष. इस गणना के अनुसार कलयुग की कुल आयु 4 लाख 32 हजार वर्ष मानी जाती है. यही कारण है कि इसे एक बहुत लंबा और धीरे-धीरे बदलने वाला युग माना गया है, जिसमें समय के साथ धर्म और नैतिकता का ह्रास होता जाता है. 1250 वर्ष वाली मान्यता कुछ पौराणिक मान्यताओं में युगों की अवधि को बहुत छोटे पैमाने पर भी समझाया गया है. इस मत के अनुसार हर युग की अवधि लगभग 1250 वर्ष होती है और इस तरह चारों युगों का पूरा चक्र केवल 5000 वर्षों में पूरा हो जाता है. इस दृष्टिकोण में युगों को प्रतीकात्मक रूप में देखा जाता है, जहां बदलाव अपेक्षाकृत तेजी से होते हैं. कुछ विद्वानों, जैसे परमहंस राजनारायण जी, ने युगों की अवधि को एक अलग तरीके से समझाया है. उनके अनुसार सतयुग 1200 वर्ष, त्रेता 2400 वर्ष, द्वापर 3600 वर्ष और कलयुग 4800 वर्ष का होता है. इस मत में युगों को मानव आधारित समय से जोड़ा गया है, न कि देवताओं के समय से. इससे यह समझने की कोशिश की गई है कि युगों की गणना को अधिक व्यावहारिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी देखा जा सकता है. वैदिक और ज्योतिष दृष्टिकोण वैदिक ग्रंथों में “युग” शब्द का अर्थ हमेशा लाखों वर्षों की अवधि नहीं रहा है. कई जगह इसे समय, काल या दिन-रात के रूप में भी प्रयोग किया गया है. वहीं ज्योतिष और खगोल विज्ञान के अनुसार पृथ्वी को राशि मंडल का एक पूरा चक्कर लगाने में लगभग 25,920 वर्ष लगते हैं, जिसे कुछ विद्वान एक युग चक्र के रूप में भी देखते हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि अलग-अलग काल और विद्वानों के अनुसार युग की परिभाषा बदलती रही है. कलयुग का अंत और भगवान कल्कि हिंदू धर्म के अनुसार जब कलयुग में पाप, अधर्म, झूठ और अन्याय अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएंगे, तब भगवान विष्णु का अंतिम अवतार, यानी कल्कि अवतार, प्रकट होगा. मान्यता है कि भगवान कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर हाथ में तलवार लिए अवतार लेंगे और पृथ्वी से अधर्म का नाश करेंगे. उनके आगमन के साथ ही कलयुग समाप्त हो जाएगा और एक बार फिर से सतयुग की शुरुआत होगी, जिसे सत्य और धर्म का युग माना जाता है.

25 मई से गर्मी की छुट्टियां, उससे पहले हरियाणा स्कूलों में लागू होंगे नए नियम

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने राज्य में बढ़ती गर्मी को देखते हुए छह दिन पहले स्कूलों में 25 मई से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया है। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकारी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में श्रमदान को अनिवार्य घोषित कर दिया। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों में अनुशासन, सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके। चंडीगढ़ में शिक्षा विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा राज्य के विभिन्न स्कूलों के दौरे पर गए थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा की। महीपाल ढांडा के सुझाव पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने निर्देश दिए कि शिक्षक कक्षा में मोबाइल फोन लेकर नहीं जाएंगे। शिक्षकों के मोबाइल विद्यालय में प्रधानाचार्य कक्ष में जमा रहेंगे शिक्षकों के मोबाइल विद्यालय में प्रधानाचार्य कक्ष में जमा रहेंगे तथा शिक्षण कार्य के दौरान मोबाइल के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। विद्यालयों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने खेल अवधि को अनिवार्य रूप से प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा उसकी समुचित योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय ऐसा वातावरण विकसित करें, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्रत्येक कक्षा बेहतर सीखने का अनुभव प्रदान करती हुई महसूस हो। मुख्यमंत्री ने विद्यालय परिसरों में बागवानी और पौधारोपण कार्य का सर्वेक्षण करने तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण और रखरखाव को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और बेहतर शैक्षणिक परिणामों पर विशेष ध्यान देने को कहा है।

ईमेल से मिली धमकी, चंडीगढ़ के स्कूल और हरियाणा CMO निशाने पर, अंबाला-दिल्ली ट्रैक पर ब्लास्ट की बात

चंडीगढ़. चंडीगढ़ के कई स्कूलों को भेजे गए धमकी भरे ई-मेल में स्कूलों में बम धमाके की चेतावनी दी गई है। ई-मेल में चंडीगढ़ के स्कूलों के साथ-साथ हरियाणा मुख्यमंत्री कार्यालय का भी उल्लेख किया गया है। धमकी मिलने के बाद पुलिस, साइबर सेल और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। ई-मेल में कुछ आपत्तिजनक और भड़काऊ संदेश भी लिखे गए हैं। मेल में 6 जून 2026 तक अंबाला से दिल्ली रेल ट्रैक पर आईईडी धमाकों की धमकी का भी जिक्र किया गया है। धमकी मिलने के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह धमकी भरा ई-मेल कई स्कूलों को भेजा गया था। जिन स्कूलों को धमकी मिली उनमें सेक्रेड हार्ट स्कूल, संत कबीर स्कूल, भवन विद्यालय, सेंट स्टीफंस स्कूल सेक्टर-45, सेंट जॉन्स स्कूल सेक्टर-26, चितकारा इंटरनेशनल स्कूल सेक्टर-25 और बीपीएस स्कूल सेक्टर-40 शामिल हैं। धमकी मिलने के बाद संबंधित स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड की टीमों ने स्कूल परिसरों की गहन जांच की। फिलहाल किसी भी स्कूल से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है। चंडीगढ़ पुलिस की साइबर सेल ई-मेल की उत्पत्ति और भेजने वाले की पहचान करने में जुटी है। सुरक्षा एजेंसियां मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। वहीं, प्रशासन ने अभिभावकों और लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है।

यूपी रोडवेज बसों की लाइव ट्रैकिंग से यात्रियों का सफर हुआ ज्यादा सुरक्षित

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों की लाइव ट्रैकिंग से सुरक्षित बनाया जा रहा यात्रियों का सफर प्रतिदिन 16 लाख से ज्यादा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही योगी सरकार निगम की 13,500 से अधिक बसों को वीएलटीडी से जोड़ा गया बस के साथ ही ड्राइवरों की हर गतिविधि की हो रही कमांड सेंटर से निगरानी मार्गदर्शी पोर्टल पर यात्री भी बसों की देख पा रहे लाइव लोकेशन लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने और यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास करती आ रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) यात्रियों को सुरक्षित, सुगम यात्रा का अनुभव देने के लिए बड़े पैमाने पर नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। यूपीएसआरटीसी की लगभग सभी बसों की लाइव ट्रैकिंग हो रही है, ताकि प्रतिदिन इन बसों में सफर करने वाले 16 लाख से अधिक यात्रियों की सुरक्षा पुख्ता की जा सके। यूपीएसआरटीसी के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए 13,500 से अधिक बसों को व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) से जोड़ा जा चुका है। इसकी ट्रैकिंग लखनऊ स्थित मुख्यालय के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से हो रही है। बस ड्राइवरों की जवाबदेही भी तय की गई उन्होंने बताया कि इन बसों में प्रतिदिन 16 लाख से अधिक लोग यात्रा कर रहे हैं। बसों की ट्रैकिंग के लिए हर रोज 24 घंटे मुख्यालय का कमांड सेंटर और 20 रीजनल मॉनिटरिंग सेंटर एक्टिव रहते हैं। यहां से बस की ओवर स्पीड, तेज ब्रेक लगाने, तेज गति में बस मोड़ने, तय सीमा से अधिक रफ्तार पर बस चलाने, तय रूट समेत अन्य पर नजर रखी जा रही है। इसकी मुख्यालय से रोज रिपोर्ट तैयार होती है और गलती पाए जाने पर बस ड्राइवर को चेतावनी या कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। इससे प्रदेश में दुर्घटनाओं में काफी कमी लाई जा रही है। पैनिक बटन दबाते ही एक्शन शुरू लाइव ट्रैकिंग के साथ इन बसों में हादसे या आपात स्थिति के लिए पैनिक बटन भी लगाए गए हैं। इनका इस्तेमाल होते ही अलर्ट यूपीएसआरटीसी कमांड सेंटर के साथ यूपी पुलिस के कंट्रोल रूम को भी जाता है। इसके बाद फौरन कंडक्टर से संबंधित विभागों द्वारा बात कर उचित एक्शन लिया जाता है। यूपीएसआरटीसी के मुताबिक हर रोज 5 हजार से अधिक अलर्ट आते हैं। जरूरत के हिसाब से मदद उपलब्ध कराई जाती है। पोर्टल और वेबसाइपट के जरिए यात्रियों को सुविधा यूपीएसआरटीसी के मार्गदर्शी पोर्टल और निगम की वेबसाइपट पर ट्रैक माई बस के जरिए यात्रियों को काफी सुविधा मिल रही है। यात्री बस की लोकेशन कहीं से भी लाइव देख सकते हैं।

गर्मी में पेट के लिए रामबाण: चुकंदर-राई कांजी बनाने की आसान रेसिपी

 उत्तर भारत में चिलचिलाती गर्मी दस्तक दे चुकी है और तेज धूप और लू कहर बनकर लोगों को सता रही है. इस मौसम में अक्सर हमारा पेट सुस्त पड़ जाता है, भूख कम लगती है और कुछ ठंडा-खट्टा पीने का मन करता है. आज के समय में लोग पेट को ठीक रखने के लिए बाजार के महंगे प्रोबायोटिक सप्लीमेंट्स या डिब्बाबंद जूस की तरफ भागते हैं, मगर हमारी रसोई में छुपा एक पुराना खजाना आपकी इस समस्या का रामबाण इलाज है. रसोई में मौजूद कुछ चीजें पेट से जुड़ी बीमारियोंं में बहुत असरदार साबित होती हैं, जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. गर्मी में शरबत, जूस के अलावा कांजी भी लोग खूब पीते हैं, लेकिन इस गर्मी आप चुकंदर-राई की कांजी ट्राई कीजिए. यह सिर्फ एक ड्रिंक नहीं है, बल्कि दादी-नानी के जमाने का एक ऐसा पारंपरिक अमृत है, जो टेस्ट में जितना चटपटा है, सेहत के लिए उतना ही वरदान. आइए जानते हैं चुकंदर और राई के पोषण से भरपूर इस देसी प्रोबायोटिक ड्रिंक को बनाने का आसान तरीका. चुकंदर-राई कांजी के लिए आपको यह सारी चीजें लेनी हैं.     काली राई : 2 बड़े चम्मच     पीली सरसों : 1 बड़ा चम्मच     गाजर (लंबे टुकड़ों में कटी हुई): 1 कप     चुकंदर (लंबे टुकड़ों में कटा हुआ): 1 कप     हरी मिर्च: 2 (स्वादानुसार)     हींग: एक चुटकी     काला नमक: 1 ½ छोटा चम्मच     सादा नमक: स्वादानुसार     पानी: 4 कप     सर्विंग के लिए: 2 बड़े चम्मच खारी बूंदी और कुछ ताजी पुदीने की पत्तियां कांजी बनाने का आसान तरीका कांजी बनाने की असली खूबसूरती इसके फर्मेंटेशन में है, अगर आप घर पर देसी स्टाइल में राई वाली कांजी बनाना चाहते हैं तो इन स्टेप्स को जरूर फॉलो करें. मसाला तैयार करें: सबसे पहले काली राई और पीली सरसों को मिक्सी में डालकर दरदरा पीस लें. इसका बारीक पाउडर नहीं बनाना है, क्योंकि दरदरा टेक्सचर ही इसे असली स्वाद देता है. पानी गुनगुना करें: पानी को अच्छी तरह उबाल लें और फिर उसे थोड़ा ठंडा होने दें. पानी गर्म होना चाहिए, लेकिन खौलता हुआ नहीं. जार में सामग्री मिलाएं: एक कांच के साफ और सूखे जार में कटी हुई गाजर, चुकंदर, हरी मिर्च, हींग, काला नमक, सादा नमक और पिसी हुई राई-सरसों का पाउडर डालें. फर्मेंटेशन की शुरुआत: अब इस जार में गुनगुना पानी डालें और चम्मच से अच्छी तरह मिला लें. जार के मुंह को एक साफ मलमल के कपड़े से बांध दें. धूप का जादू: इस जार को दो दिनों के लिए तेज धूप में रख दें. धूप की गर्मी से राई एक्टिव होगी और पानी में खट्टापन आना शुरू होगा. देखभाल: इन दो दिनों के दौरान रोजाना जार को एक बार हिलाएं और अगर ऊपर कोई सफेद झाग या परत दिखे, तो उसे साफ चम्मच से हटा दें. सर्विंग: 2 दिन बाद कांजी का कलर गहरा गुलाबी हो जाएगा और इसमें से एक तीखी-खट्टी खुशबू आने लगेगी. अब इसे फ्रिज में रखकर ठंडा करें, सर्व करते समय ऊपर से कुरकुरी खारी बूंदी और पुदीने की पत्तियां डालें.

जून 2026 में बनेगा ग्रहों का महासंयोग, कई राशियों की बदलेगी किस्मत

 साल 2026 का छठा महीना यानी जून, ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद ऐतिहासिक और चमत्कारी रहने वाला है. इस महीने ब्रह्मांड में ग्रहों की एक ऐसी दुर्लभ जुगलबंदी होने जा रही है, जो कई राशियों की बंद किस्मत के ताले खोल सकती है. जून के महीने में देवगुरु बृहस्पति, धन के दाता शुक्र, ग्रहों के राजा सूर्य, ऊर्जा के कारक मंगल और बुद्धि के प्रदाता बुध का बड़ा गोचर होने जा रहा है. ग्रहों के इस महापरिवर्तन से इस महीने गजलक्ष्मी योग, हंस राजयोग और रूचक राजयोग जैसे 3 सबसे शक्तिशाली और शुभ योगों का निर्माण होगा. इन राजयोगों के प्रभाव से कुछ राशियों को करियर में छप्परफाड़ सफलता, नौकरी में प्रमोशन, व्यापार में तगड़ा मुनाफा और अचानक धन लाभ होने के प्रबल संकेत हैं. आइए जानते हैं ग्रहों के इस बड़े फेरबदल का मेष से लेकर कर्क राशि तक पर क्या असर पड़ने वाला है. 1. मेष राशि (Aries) – संभलकर चलने का समय मेष राशि वालों के लिए जून 2026 का महीना मिलाजुला रहने वाला है. राहु और केतु की स्थिति के कारण आपके स्वभाव में थोड़ा चिड़चिड़ापन या गुस्सा बढ़ सकता है, जिससे बचने की जरूरत है.  हालांकि, इस दौरान आपका रुझान आध्यात्मिकता और धार्मिक कार्यों की तरफ ज्यादा रहेगा. करियर और बिजनेस: कार्यक्षेत्र में काम का दबाव थोड़ा बढ़ सकता है. मेहनत का पूरा फल मिलने में कुछ देरी हो सकती है, इसलिए सीनियर्स और सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाकर रखें. आर्थिक स्थिति: धन के मामले में हाथ थोड़ा खींचकर चलना होगा. अचानक कुछ बड़े खर्च सामने आ सकते हैं, जिससे बजट बिगड़ सकता है. फिजूलखर्ची से बचें. लव और फैमिली: पार्टनर के साथ छोटी-छोटी बातों पर बहस हो सकती है.  रिश्तों में मधुरता बनाए रखने के लिए धैर्य रखें. परिवार में भी शांत रहकर बातचीत करें. सेहत: मानसिक तनाव, आंखों में जलन या कमजोरी की समस्या हो सकती है. फिट रहने के लिए योग और मेडिटेशन का सहारा लें. 2. वृषभ राशि (Taurus) – चमकेगी किस्मत, होगा बड़ा लाभ वृषभ राशि के जातकों के लिए जून का महीना बेहद सकारात्मक और तरक्की लेकर आने वाला साबित होगा. शनि और देवगुरु बृहस्पति की शुभ स्थिति आपके जीवन में कई बड़े और अच्छे बदलाव लेकर आएगी. करियर और बिजनेस: नौकरीपेशा लोगों को इस महीने करियर के नए और बेहतरीन अवसर मिल सकते हैं. वहीं, व्यापारियों के लिए कोई बड़ी और फायदेमंद डील फाइनल हो सकती है. काम के सिलसिले में की गई यात्राएं लाभ देंगी. आर्थिक स्थिति: आर्थिक रूप से यह समय शानदार है. अचानक धन लाभ होने और बचत बढ़ने के मजबूत योग हैं, हालांकि घरेलू सुख-सुविधाओं पर कुछ खर्च भी हो सकता है. लव और फैमिली: प्रेम और वैवाहिक जीवन में खुशियां ही खुशियां रहेंगी. पार्टनर के साथ आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होगा. पारिवारिक माहौल भी बेहद खुशनुमा और सपोर्टिव रहेगा. सेहत: इस महीने आपका आत्मविश्वास और ऊर्जा का स्तर बहुत ऊंचा रहेगा. सेहत अच्छी रहेगी, बस खानपान को संतुलित रखें. 3. मिथुन राशि (Gemini) – तरक्की के साथ बढ़ेगा मान-सम्मान मिथुन राशि वालों के लिए जून 2026 का महीना काफी हद तक अनुकूल रहेगा. हालांकि काम की व्यस्तता बढ़ेगी, लेकिन बुध देव की शुभ कृपा से आपकी निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास में गजब का सुधार देखने को मिलेगा. करियर और बिजनेस: कार्यक्षेत्र में आपकी धाक जमेगी. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है. बिजनेस में भी नए रास्ते खुलेंगे, लेकिन मानसिक तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दें. आर्थिक स्थिति: आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी. पुराने किए गए किसी निवेश या पैतृक संपत्ति से बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है. घर की जरूरतों पर खर्च बढ़ सकता है. लव और फैमिली: पार्टनर के साथ रिश्ते मजबूत होंगे, लेकिन अहंकार और गुस्से से दूरी बनाकर रखना बेहद जरूरी है, वरना हंसता-खेलता माहौल बिगड़ सकता है. परिवार में कुछ मतभेद हो सकते हैं, जिन्हें आप समझदारी से सुलझा लेंगे. सेहत: काम की अधिकता के कारण कंधे, गर्दन या पैरों में दर्द की शिकायत हो सकती है. योग और नियमित व्यायाम से शरीर को आराम दें.

संजय निषाद बोले: तुष्टिकरण करते रहे तो जिस तरह बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरह सपा साफ हो जाएगी

मुगलों द्वारा लाए गए धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता, अखिलेश पर संजय निषाद का तीखा हमला संजय निषाद बोले: तुष्टिकरण करते रहे तो जिस तरह बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरह सपा साफ हो जाएगी फूलन देवी ने आरक्षण मांगा था तो पार्टी से बाहर कर दी गई थीं, वह मार भी दी गईं: संजय निषाद लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने आरक्षण के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। निषाद ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव पिछड़ों का हक मारकर मुगलों द्वारा लाए गए धर्म को आरक्षण देना चाहते हैं। निषाद ने जोर देते हुए कहा कि संविधान सभा ने भी ऐसा करने से मना कर दिया था। संजय निषाद ने कहा कि अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस ने पीडीए के एजेंडे की पोल खोल दी है। पिछड़ों के अधिकारों पर डांका डालने का काम किया गया है। उन्होंने कहा, 'जब संविधान सभा की बैठक हुई और जब संविधान सभा में आरक्षण की बात आई, उस समय धर्म के आधार पर इसको देना मना कर दिया था क्योंकि जो भारतीय धर्म हैं भारतीय सभ्यता है, उस पर मुगलों ने आक्रमण किया। भारत के ऊपर अंग्रेजों ने आक्रमण किया। तो मुगलों के द्वारा लाए गए धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। भीम राव अंबेडकर ने भी इसका विरोध किया था। ' सपा और इंडी गठबंधन पर साधा निशाना संजय निषाद ने सपा और इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा, ‘इन लोगों ने जस्टिस रंगनाथ मिश्र कमेटी बनाकर ओबीसी आरक्षण में से हिस्सा काटकर मुसलमानों को आरक्षण देने का प्रयास किया था। आंध्र प्रदेश में इनकी दोस्त कांग्रेस ने मुसलमानों को ओबीसी आरक्षण दिया। कर्नाटक में मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल कर पिछड़ों के अधिकारों को कमजोर किया।’ पश्चिम बंगाल का जिक्र पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए निषाद ने कहा,  ‘पश्चिम बंगाल में 118 मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल करके वर्षों तक पिछड़ों के हक पर डकैती डाली। कोलकाता हाई कोर्ट ने इस असंवैधानिक कदम को रद्द किया। जिस तरीके से वहां पिछड़ों के हक पर डकैती डाली गई। उनका आरक्षण मुसलमानों को दिया गया। वहां के लोग एक हुए और वहां की सरकार को हटा दिया।’ निषाद ने कहा ने आगे कहा, ‘यहां पर (यूपी में) भी इंडी गठबंधन मुसलमानों की आवाज तो उठाता है, लेकिन देश को आजाद कराने वाली पिछड़ी और उजड़ी जातियों की आवाज नहीं उठाता। समाजवादी पार्टी का अगर यही रवैया रहा तो जिस तरीके से बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरीके सपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा।’ निषाद ने किया फूलन देवी का जिक्र संजय निषाद ने यह भी कहा कि अन्य जातियों के नेता यह भी सोचें कि उन्हें सपा के समय में क्या मिला? फूलन देवी ने जैसे ही आरक्षण की बात की, किसानों के हक की बात की, उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था। बाद में वह मारी भी गईं। आप इस अन्याय को समझ सकते हैं। ओबीसी की किसी भी जाति के साथ अन्याय नहीं होगा, ये हमारे एनडीए का संकल्प है। ****