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इंदौर मेट्रो के सुरंग निर्माण में तेजी, थाइलैंड से पहुंचेंगी 4 अत्याधुनिक TBM

इंदौर  इंदौर के बहुप्रतीक्षित मेट्रो अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट की तैयारियां तेज हो गई हैं। एयरपोर्ट से रेलवे स्टेशन और आगे खजराना तक बनने वाले भूमिगत कॉरिडोर के लिए टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) जल्द इंदौर पहुंचने वाली हैं। खास बात यह है कि, रेलवे स्टेशन से दो मशीनें और आएंगी। ये एक साथ सुरंग निर्माण शुरू करेंगी जो अलग-अलग ट्रैक तैयार करते हुए आगे बढ़ेंगी और बाद में एयरपोर्ट की ओर से आने वाले रूट से जुड़ जाएंगी। मेट्रो अधिकारियों के अनुसार, अंडरग्राउंड प्रोजेक्ट में कुल चार टीबीएम काम करेंगी। इनमें से पहली दो मशीनों के जून माह के अंत तक इंदौर पहुंचने की संभावना है। ये अत्याधुनिक मशीनें थाईलैंड से लाई जा रही हैं। इनके पहुंचते ही एयरपोर्ट क्षेत्र में सुरंग निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए आवश्यक तकनीकी तैयारी और सॉफ्टवेयर कॉन्फिग्रेशन का काम भी अंतिम चरण में है। काम की गति बढ़ाने की कवायद अधिकारियों के मुताबिक एयरपोर्ट क्षेत्र में विशेष शाफ्ट तैयार किए जा रहे हैं, जहां से मशीनों को जमीन के नीचे उतारा जाएगा। इसके बाद टीबीएम धीरे-धीरे सुरंग बनाते हुए रेलवे स्टेशन की दिशा में आगे बढ़ेंगी। इस दौरान दोनों ट्रैक समानांतर रूप से विकसित किए जाएंगे, जिससे निर्माण कार्य की गति बढ़ सके। दूसरे चरण में खजराना से रेलवे स्टेशन के बीच बनने वाले अंडरग्राउंड हिस्से के लिए भी दो अतिरिक्त टीबीएम लगाई जाएंगी। ये मशीनें रेलवे स्टेशन से अपना काम शुरू करेंगी और विभिन्न भूमिगत स्टेशनों से गुजरते हुए खजराना तक सुरंग तैयार करेंगी। आपस में जुड़ जाएंगे दोनों अंडरग्राउंड रूट पूरे प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग इस तरह की गई है कि, एयरपोर्ट और खजराना की दिशा से बनने वाले दोनों अंडरग्राउंड रूट बीच में आपस में जुड़ जाएंगे। इससे पूरा भूमिगत कॉरिडोर एक सतत नेटवर्क के रूप में तैयार होगा और संचालन में सुविधा मिलेगी। टेंडर जल्द ही हालांकि, मशीनों के संचालन से पहले तकनीकी परीक्षण और टेंडर जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं, लेकिन मेट्रो प्रबंधन ने निर्माण के अगले चरण की विस्तृत योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस रूट के लिए भी जल्दी टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी और कंपनी को कम अलर्ट कर दिया जाएगा इसके बाद में कंपनी अपने स्तर पर भी परीक्षण शुरू करेगी।

चयनित अभ्यर्थियों को कृषि मंत्री, कृषि राज्यमंत्री व अधिकारियों ने दीं शुभकामनाएं

     लखनऊ योगी सरकार में युवाओं को सरकारी सेवा के अपने सपने को पूरा करने का फिर अवसर मिला। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी पद पर 3446 अभ्यर्थियों को चयनित किया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 13 जुलाई 2025 को इसकी लिखित परीक्षा कराई थी। मंगलवार (23 जून) को परिणाम घोषित किया गया। कृषि निदेशक रिक्त पदों के अनुरूप जनपदों में इन अभ्यर्थियों को नियुक्त करेंगे।  चयनित अभ्यर्थियों को कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि सामान्य वर्ग के 1813, अनुसूचित जाति के 509, अनुसूचित जनजाति के 151, अन्य पिछड़ा वर्ग के 629, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर 344 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने भी सफल अभ्यर्थियों को बधाई दी। किसानों की आय बढ़ाने में मिलेगी मदद कृषि सचिव इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि यह भर्ती बहुत समय से प्रतीक्षित थी। अब कृषि विभाग का फील्ड स्तर पर काम और बेहतर हो पाएगा। इससे एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में विभाग प्रदेश सरकार को अहम सहयोग दे पाएगा। साथ ही किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। चयनित अभ्यर्थियों को प्रमुख सचिव (कृषि) रविंद्र, कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी आदि ने भी शुभकामनाएं दीं।

हाईकोर्ट की टिप्पणी- भरण-पोषण जरूरतमंद के लिए, 14 लाख कमाने वाली पत्नी को नहीं मिलेगा मेंटिनेंस

भोपाल  भोपाल की रहने वाली एक महिला की ओर से पति से अंतरिम भरण-पोषण (मेंटिनेंस) की मांग को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति को भरण-पोषण नहीं दिया जा सकता। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शेक्सपीयर के प्रसिद्ध नाटक ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ का जिक्र करते हुए टिप्पणी की कि यह मांग पति से “एक पाउंड मांस” वसूलने के प्रयास जैसी प्रतीत होती है, जिसकी अनुमति न्यायालय नहीं दे सकता। मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक जैन की एकल पीठ ने की। महिला ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें तलाक संबंधी लंबित प्रकरण के दौरान अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे के खर्च की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था। 2022 में हुई थी शादी, 2023 से अलग रह रहे दंपति का विवाह 4 नवंबर 2022 को हुआ था। 2023 से दोनों अलग रह रहे हैं। पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी, जबकि पत्नी ने अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी। फैमिली कोर्ट ने 18 फरवरी 2026 को आदेश दिया था कि तलाक प्रकरण लंबित रहने के दौरान महिला को कोई मेंटिनेंस नहीं दिया जाएगा। इसी आदेश को महिला ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। पहले 20 लाख, अब 14 लाख सालाना आय का दावा महिला ने अदालत में स्वीकार किया कि वह नौकरी करती हैं। पहले उनकी वार्षिक आय लगभग 20 लाख रुपए थी, जबकि पति की आय 30 लाख रुपए से ज्यादा बताई गई थी। बाद में महिला ने कहा कि उनकी आय घटकर करीब 14 लाख रुपए सालाना रह गई है, इसलिए उन्हें आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। हाईकोर्ट ने वेतन रिकॉर्ड देखे हाईकोर्ट ने महिला की आय से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। रिकॉर्ड के अनुसार महिला की मासिक आय लगभग 1.25 लाख रुपए है, जिससे उनकी वार्षिक आय करीब 14.81 लाख रुपए बनती है। अदालत ने कहा कि यह आय स्वयं का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में महिला को आर्थिक रूप से आश्रित नहीं माना जा सकता। कोई संतान नहीं, आय में भी बड़ा अंतर नहीं कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि दंपति की कोई संतान नहीं है। साथ ही पति और पत्नी की आय में इतना बड़ा अंतर भी नहीं है कि आर्थिक निर्भरता का आधार बनाया जा सके। अदालत ने कहा कि भरण-पोषण का उद्देश्य आर्थिक रूप से जरूरतमंद या आश्रित जीवनसाथी की सहायता करना है, न कि समान आर्थिक स्थिति वाले व्यक्ति को अतिरिक्त वित्तीय लाभ देना। फैमिली कोर्ट का आदेश बरकरार सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी और फैमिली कोर्ट के आदेश को यथावत रखा। अदालत ने अपने फैसले में दोहराया कि मेंटिनेंस का प्रावधान आर्थिक रूप से कमजोर जीवनसाथी की मदद के लिए है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं पर्याप्त आय अर्जित कर रहा है और अपना खर्च उठाने में सक्षम है, तो उसे भरण-पोषण का लाभ नहीं दिया जा सकता।  

जशपुर जिले में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त उपलब्धता, आपूर्ति व्यवस्था सुचारु

रायपुर राज्य सरकार प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता सुनिश्चत करने मॉनिटरिंग कर रही है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि जिले में पेट्रोल एवं डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है तथा किसी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। जशपुर जिले में भी पेट्रोल एवं डीजल की आपूर्ति सामान्य एवं सुचारु रूप से जारी है। जिले में कुल 61 पेट्रोल पंप संचालित हैं, जिनमें इंडियन ऑयल के 28, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के 24 तथा भारत पेट्रोलियम के 9 पेट्रोल पंप शामिल हैं। प्री-मानसून वर्षा के उपरांत खरीफ फसल की तैयारियों के कारण कृषि कार्यों में डीजल की मांग बढ़ी है। इसी क्रम में 23 जून 2026 को जशपुर जिले के कोतबा क्षेत्र स्थित दो पेट्रोल पंपों में डीजल स्टॉक समाप्त होने से अस्थायी स्थिति उत्पन्न हुई थी। किसानों एवं आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए निकटवर्ती पेट्रोल पंपों से वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की गई। वर्तमान में कोतबा क्षेत्र के सभी चार पेट्रोल पंपों में पेट्रोल एवं डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तथा ईंधन वितरण नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है। जिला एवं राज्य स्तर पर तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ सतत समन्वय स्थापित कर मांग के अनुरूप पेट्रोल एवं डीजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कृषि कार्यों के कारण बढ़ी मांग को देखते हुए जिन पेट्रोल पंपों में स्टॉक समाप्त होने की संभावना है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराने हेतु तेल कंपनियों को निर्देशित किया गया है।

टीही टनल परियोजना में अभी बाकी है काम, 60 मीटर हिस्से का निर्माण शेष

इंदौर  इंदौर-दाहोद नई रेल लाइन प्रोजेक्ट के तहत टीही के आगे टनल बन रही है। टनल के एक हिस्से (टीही एंड, पी-1) पर 60 मीटर का काम बचा है। सारी मशीनरी और लेबर यहीं लगी हुई है। इसे रेलवे 15 दिन में पूरा कर लेगा। इसके बाद तीन किमी लंबी टनल की लाइनिंग का काम पूरा हो जाएगा। इसी टनल के बीच के हिस्से में कट एंड कवर था, उसे रेलवे ने पूरा कर लिया है, अब यहां लिफ्ट और सीढ़ियों का काम चल रहा है। टनल के सबसे आखिरी हिस्से (पीथमपुर एंड, पी-2) में काम पूरा कर ट्रैक बिछाने के लिए यह हिस्सा दे दिया गया है। कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े लोगों ने कहा– टनल का कुल 261 मीटर का काम बचा था, इसमें से 201 मीटर काम कर लिया है। बचा काम 15 दिन में पूरा कर लिया जाएगा। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं टनल का लाइनिंग काम 8 जुलाई तक पूरा करने का लक्ष्य है। दो पारियों में 12-12 घंटे की शिफ्ट में 300 मजदूर काम कर रहे हैं। ऐसे तैयार हो रहा प्रोजेक्ट     शिलान्यास: 18 फरवरी 2008     लागत वर्तमान में: 1680 करोड़ से ज्यादा।     कुल 200.97 किमी लंबी लाइन।     वर्तमान स्थिति: टीही तक का काम पूरा हो गया है। दूसरी ओर दाहोद से कटवाड़ा और आगे कुछ हिस्से में काम चल रहा है।     देरी का खामियाजा: 678.56 करोड़ रुपए लागत थी। प्रोजेक्ट के हर साल देरी के साथ लागत भी बढ़ती जा रही है। टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे हर दिन की टाइमलाइन बनाकर काम कर रहे हैं। टीही एंड पर जिस हिस्से में टनल का काम चल रहा है, उससे 1208 मीटर आगे तक रेलवे ने ट्रैक बिछा लिया है। यहां बैलास्ट लेस ट्रैक बिछाया जा रहा है, जो आम ट्रैक से अलग और खास होता है। करीब 1800 मीटर से ज्यादा हिस्से में ट्रैक बिछाने का काम बचा है। रेलवे का कहना है कि हर दिन 50 से ज्यादा मीटर हिस्से में ट्रैक का फाउंडेशन तैयार किया जा रहा है। टनल के अंदर केबल-ट्रे, सीसीटीवी, ओएचई ब्रैकेट लगाने का काम भी तेजी से चल रहा है। फरवरी 2026 तक काम पूरा होना था रेलवे ने पहले टनल का काम पूरा करने का लक्ष्य फरवरी-2026 रखा था। अब संभावना है कि सितंबर-अक्टूबर तक धार तक ट्रेन चलाई जा सकती है। हालांकि रेलवे का कहना है कि टनल का काम काफी चुनौतीपूर्ण है, इसलिए समय लग रहा है। दो-तीन महीने का समय और लग सकता है। बारिश के कारण फिर काम की गति धीमी हो सकती है। टनल की वजह से ही अटका है काम रेलवे एक्सपर्ट नागेश नामजोशी ने कहा- 2017-18 से टनल का काम चल रहा है। कोरोना के बाद कॉन्ट्रैक्ट भी शॉर्ट टर्मिनेट हुए। फिर नए सिरे से कॉन्ट्रैक्ट होकर काम शुरू हुआ। टनल की वजह से काफी समय लग गया। रेलवे को चाहिए कि अब तेजी से काम कर जल्द से जल्द पूरा करें। उन्होंने यह भी कहा- 2007-08 में इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट तैयार हुआ और इसका शिलान्यास हुआ तब मूल प्रोजेक्ट में टीही के आगे टनल नहीं थी। यह प्रोजेक्ट हमारे लिए महत्वपूर्ण     इंदौर-दाहोद प्रोजेक्ट हमारे लिए सबसे अहम है। टीही टनल का काम जल्द पूरा हो और धार तक ट्रेन का संचालन शुरू हो, इसके लिए हम टाइम लाइन बनाकर काम काम कर रहे हैं। हर दिन की मॉनिटरिंग की जा रही है। टनल में हमने सारे संसाधन लगाए हैं, 300 से ज्यादा मजदूर 24 घंटे काम कर रहे हैं। – विनीत अभिषेक, सीपीआरओ, पश्चिम रेलवे

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के लिए 31 अगस्त तक करें ऑनलाइन आवेदन

मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना के ऑनलाइन आवेदन 31 अगस्त तक कर सकेंगे विद्यार्थी स्पर्श पोर्टल के माध्यम से होगा आवेदन और स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की मुख्यमंत्री दिव्यांगजन शिक्षा प्रोत्साहन योजना का वित्तीय वर्ष 2026-27 में ऑनलाइन आवेदन 31 अगस्त तक किये जा सकेंगे। योजना के प्रभावी संचालन के लिए एनआईसी मध्यप्रदेश के सहयोग से स्पर्श पोर्टल पर ऑनलाइन प्रणाली विकसित की गई है, जिसके माध्यम से पात्र दिव्यांग छात्र-छात्राएं आवेदन कर सकेंगे। योजना के अंतर्गत अध्ययनरत दिव्यांग विद्यार्थी पात्रतानुसार स्वयं स्पर्श पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके साथ ही जिला कार्यालयों में प्राप्त ऑफलाइन आवेदनों को भी संयुक्त अथवा उप संचालक, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण द्वारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों का परीक्षण जिला स्तर पर किया जाएगा। पात्रता एवं नियमानुसार आवेदनों को स्वीकृत किया जाएगा तथा अपात्र पाए जाने वाले आवेदनों को अस्वीकृत किया जाएगा। विद्यार्थियों से आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। प्राप्त आवेदनों के परीक्षण एवं स्वीकृति-अस्वीकृति की प्रक्रिया 15 सितम्बर 2026 तक पूर्ण की जाएगी। योजना के तहत स्वीकृत हितग्राहियों को उनकी पात्रतानुसार सामग्री का वितरण विश्व दिव्यांग दिवस 3 दिसम्बर 2026 के अवसर पर जिला स्तरीय कार्यक्रमों में किया जाएगा। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने सभी पात्र दिव्यांग छात्र-छात्राओं से निर्धारित समय-सीमा में आवेदन करने का आग्रह किया। जिला अधिकारियों से योजना के ऑनलाइन क्रियान्वयन की समस्त प्रक्रिया का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है।  

उज्जैन के कालभैरव मंदिर में नई व्यवस्था की तैयारी, श्रावण से अलग-अलग कतारों में होंगे दर्शन

 उज्जैन श्रावण महीने की शुरुआत से कालभैरव मंदिर में दर्शन व्यवस्था बदल सकती है। मंदिर प्रबंध समिति अभी से तैयारी कर रही है।कुछ दिनों पहले ही मंदिर में 500 रुपए सशुल्क वीआईपी दर्शन की व्यवस्था भी शुरू की गई है। ऐसे में अभी मंदिर में निःशुल्क सामान्य व सशुल्क दर्शनार्थियों के लिए अलग-अलग दो कतार लगाई जा रही है। इनमें से सशुल्क दर्शन वाली कतार में ही प्रोटोकॉल व वीआईपी वाले श्रद्धालुओं को भी दर्शन करवाए जा रहे हैं। इससे सुविधा बनाने में मुश्किलें हो रही हैं, क्योंकि इस कतार वाले सभी श्रद्धालुओं को गर्भगृह से दर्शन करवाने होते हैं। अगले महीने 30 जुलाई से सावन महीने की शुरुआत होने जा रही है। ऐसे में समिति यहां की दर्शन व्यवस्था को और भी सरल बनाने की तैयारी कर रही है। यह है समिति की प्लानिंग दर्शन की नई प्लानिंग यह की जा रही है कि दो की बजाय दर्शन के लिए तीन कतार का प्रबंध किया जाएगा। इनमें से पहली कतार निःशुल्क सामान्य दर्शनार्थियों के लिए रहेगी। दूसरी कतार 500 रुपए सशुल्क वाले दर्शनार्थियों के लिए और तीसरी कतार प्रोटोकॉल- वीआईपी वाले श्रद्धालुओं के लिए। मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एलएन गर्ग पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि व्यवस्थाओं में परिवर्तन करेंगे और ऑनलाइन पर भी जोर देंगे। श्रावण में बढ़ेगी भीड़ श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने के बाद अधिकांश श्रद्धालु कालभैरव मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसे में इस मंदिर में भी भीड़ का दबाव रहता है। महाकाल दर्शन रूट पर भी बदलाव की तैयारी श्रावण माह की शुरुआत और महाकाल लोक में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को ट्रैफिक डीएसपी दिलीपसिंह परिहार और थाना प्रभारी इंद्रपाल सिंह की उपस्थिति में ऑटो व ई-रिक्शा संघ के पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति बनी है कि बेगमबाग-हरिफाटक से नीलकंठ मार्ग पर लगने वाले जाम से मुक्ति के लिए अब इस रूट पर ऑटो और ई-रिक्शा का प्रवेश बंद करना जरूरी है। डीएसपी परिहार ने बताया कि इस प्रस्ताव को सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कलेक्टर के समक्ष अंतिम नोटिफिकेशन के लिए रखा जाएगा। मंदिर जाने के लिए दो वैकल्पिक मार्ग तय (साइड बॉक्स)     रूट नंबर 1: हरिफाटक- बेगमबाग के बजाय ऑटो व ई-रिक्शा गऊघाट और यंत्र महल के रास्ते होते हुए श्रद्धालुओं को नृसिंह घाट छोड़ेंगे।     रूट नंबर 2: हरिफाटक ब्रिज टी-पॉइंट से इंटरप्रिटेशन सेंटर होते हुए ई-रिक्शा सीधे चारधाम तक जा सकेंगे। (नोट- यदि किसी श्रद्धालु या स्थानीय नागरिक को ई-रिक्शा व ऑटो से गोपाल मंदिर की तरफ जाना है, तो ऑटो व ई-रिक्शा चालक दौलतगंज के रास्ते का उपयोग कर तोपखाना होते हुए जा सकेंगे।)

अब सोते-सोते पहुंचेंगे दिल्ली, 2 दिन सागर से होकर चलेगी अंबिकापुर-निजामुद्दीन एक्सप्रेस

सागर  सागर में रेल सुविधाओं के विस्तार के प्रयासों के चलते एक और सौगात सागर शहर को मिली है. अब अंबिकापुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन सागर से होकर गुजरेगी. लोकसभा क्षेत्र की सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने बताया कि, ''रेल सुविधाओं के विस्तार के लिए किए जा रहे प्रयासों को एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है।  रेलवे बोर्ड द्वारा गाड़ी संख्या 22407/22408 अंबिकापुर–हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस की फ्रीक्वेंसी को साप्ताहिक से बढ़ाकर सप्ताह में दो दिन संचालित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है. डॉ. लता वानखेड़े ने बताया कि, ''उन्होंने सागर लोकसभा क्षेत्र की जनता, व्यापारियों, विद्यार्थियों एवं नौकरीपेशा यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस मांग को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के सामने प्रमुखता से रखा था. रेल मंत्रालय द्वारा इस जनहितकारी मांग को स्वीकार किया जाना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है।  व्यापारियों और स्टूडेंट्स के लिए दिल्ली का सफर हुआ आसान सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने बताया कि, ''ये ट्रेन सागर के यात्रियों के लिए काफी सुविधाजनक होगी. दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से रात लगभग 11 बजे चलकर ये ट्रेन अगले दिन सुबह 8:30 बजे सागर पहुंचती है, जिससे यात्रियों को रातभर में आरामदायक यात्रा कर सीधे अपने गंतव्य तक पहुंचने की सुविधा मिलती है।  उन्होंने बताया कि, ''अब तक दिल्ली जाने के लिए बड़ी संख्या में व्यापारी गोंडवाना एक्सप्रेस पर निर्भर थे, जिसके लिए उन्हें ट्रेन पकड़ने हेतु दोपहर लगभग 3 बजे ही स्टेशन के लिए निकलना पड़ता था. इससे उनके पूरे दिन का समय प्रभावित होता था. नई व्यवस्था से व्यापारियों का समय बचेगा, यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी तथा व्यवसायिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।  प्रधानमंत्री और रेलमंत्री का माना आभार डॉ. लता वानखेड़े ने कहा कि, ''इस निर्णय से सागर, दमोह, कटनी एवं आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों, व्यापारियों तथा नौकरीपेशा लोगों को दिल्ली आने-जाने में बड़ी राहत मिलेगी.'' इस सौगात के लिए सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, ''केंद्र सरकार निरंतर जनभावनाओं के अनुरूप रेल सुविधाओं का विस्तार कर रही है और सागर क्षेत्र के विकास के लिए वे आगे भी इसी प्रकार प्रयासरत रहेंगी। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुख्य सचिव को दिए निर्देश

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य में जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बहुमंजिला आवासीय परिसरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, कोचिंग संस्थानों, होटलों तथा अन्य सार्वजनिक उपयोग के भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा और विशेष ऑडिट के निर्देश दिए हैं। हाल के दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई अग्नि दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करना आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नागरिकों, विद्यार्थियों और आमजन की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी विषय शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव विकास शील ने राज्य के सभी संभागीय आयुक्तों, जिला कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों, मुख्य नगरपालिका अधिकारियों, अग्निशमन विभाग तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को विशेष निरीक्षण अभियान संचालित करने के निर्देश जारी किए हैं। इस अभियान के अंतर्गत बहुमंजिला आवासीय भवनों, कोचिंग सेंटरों, ट्यूशन कक्षाओं, होटल, लॉज, मॉल, व्यावसायिक परिसरों एवं अन्य सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विद्यार्थियों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है। इसलिए सभी संबंधित संस्थानों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। निरीक्षण के दौरान अग्निशमन यंत्रों एवं फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता, वैध फायर एनओसी, आपातकालीन निकास मार्गों की व्यवस्था, भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, विद्युत वायरिंग एवं उपकरणों की स्थिति, सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था, प्राथमिक उपचार सुविधा, पेयजल एवं स्वच्छता व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक सुरक्षा मानकों की जांच की जाएगी। साथ ही भवनों की क्षमता के अनुरूप लोगों की संख्या, पार्किंग व्यवस्था तथा आपदा की स्थिति में निकासी एवं राहत प्रबंधन की तैयारियों का भी परीक्षण किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के संबंध में संबंधित संस्थानों को आवश्यक सुधार हेतु निर्देश दिए जाएं तथा गंभीर अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

उच्च शिक्षा विभाग की पहल, नए सत्र में कॉलेजों में होंगे मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम

भोपाल उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा नवप्रवेशित विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के सभी शासकीय एवं अशासकीय महाविद्यालयों में इंडक्शन (अभिमुखीकरण) कार्यक्रम के दौरान “मेंटल हेल्थ एंड वेलनेस प्रोग्राम” आयोजित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना तथा उन्हें तनाव, अवसाद एवं अन्य मनोवैज्ञानिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 1 जुलाई से प्रारंभ होने वाले नवप्रवेशित विद्यार्थियों के इंडक्शन कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में विद्यार्थियों को तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक सोच, ध्यान एवं जीवन कौशल जैसे विषयों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर काउंसलिंग एवं सहायता सेवाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को एंटी-रैगिंग नियमों, शिकायत निवारण तंत्र, मेंटर-मेंटी प्रणाली, साइबर बुलिंग से बचाव तथा जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार के संबंध में भी जागरूक किया जाएगा। महाविद्यालयों में उपलब्ध काउंसलर, मेंटर, एंटी-रैगिंग समिति, आंतरिक शिकायत समिति एवं अन्य सहायता तंत्रों की जानकारी भी विद्यार्थियों को प्रदान की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी महाविद्यालयों को निर्देशित किया है कि कार्यक्रम के लिए स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाए तथा नवप्रवेशित विद्यार्थियों की अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की जाए। कार्यक्रम के आयोजन से संबंधित प्रतिवेदन, फोटोग्राफ्स, वीडियो एवं समाचार प्रकाशन की प्रतियां विभाग को निर्धारित समय सीमा में भेजी जाएंगी। उल्लेखनीय है कि यह पहल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित नेशनल टास्‍क फोर्स की अनुशंसाओं के अनुरूप की जा रही है। विभाग का मानना है कि विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य उनके शैक्षणिक प्रदर्शन, व्यक्तित्व विकास और समग्र कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को संस्थागत रूप दिया जा रहा है, जिससे महाविद्यालयों में सुरक्षित, समावेशी और सहयोगात्मक शैक्षणिक वातावरण का निर्माण हो सके।