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विकास प्राधिकरण करेगा पंचायतों के मंजूर नक्शों का शमन, भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में बड़ी राहत

लखनऊ  विकास क्षेत्रों में जिला पंचायतों द्वारा एक अप्रैल तक स्वीकृत किए गए मानचित्रों को अगले वर्ष 31 मार्च तक वैध कराया जा सकेगा। संबंधित विकास प्राधिकरणों द्वारा पंचायतों के मंजूर नक्शों का शमन किया जाएगा। शमन के लिए तय अवधि तक भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी। कैबिनेट द्वारा पिछले दिनों किए गए निर्णय के संबंध में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने गुरुवार को शासनादेश जारी कर दिया। प्रमुख सचिव आवास पी गुरूप्रसाद की ओर से विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों, आवास आयुक्त व प्रमुख सचिव पंचायतीराज को भेजे गए शासनादेश के तहत विकास क्षेत्र में निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत करने के अधिकार को स्पष्ट करते हुए एक अप्रैल 2026 (कट आफ डेट) तक जिला पंचायतों से स्वीकृत मानचित्र को एक वर्ष यानी अगले वर्ष 31 मार्च विकास प्राधिकरण के माध्यम से वैध कराया जा सकेगा। आदेश में स्पष्ट की गई ये बात आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भवन निर्माण एवं विकास उपविधि, जिला पंचायत उपविधि के अनुसार स्वीकृत नक्शा शमनीय होगा बशर्ते महायोजना भू-उपयोग के अनुसार निर्माण हो। भू-उपयोग परिवर्तन के मामले में परिवर्तन शुल्क देना होगा लेकिन उसमें 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी। ग्रीन पार्क व खुले क्षेत्रों के लिए आरक्षित भूमि पर निजी उपयोग के लिए निर्मित आवासीय भवनों को छोड़कर अन्य प्रकरणों में भू-स्वामी द्वारा समतुल्य भूमि उस भू उपयोग के लिए आरक्षित करने पर विचार किया जाएगा। जलाशय महायोजना मार्ग तथा शासकीय भूमि पर विनियमितिकरण नहीं किया जाएगा। 200 वर्ग मीटर तक भूखंडों पर बने आवासीय भवनों को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। जिला पचायतों को एक अप्रैल तक स्वीकृत मानचित्रों की प्रमाणिक सूची 15 दिनों में संबंधित प्राधिकरण तथा शासन को उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि जिला पंचायतें ‘बैक डेटिंग’ न कर सकें। विकास प्राधिकरणों द्वारा भवन उपविधि के मानकों के तहत स्वीकृत मानचित्र परीक्षण में सही पाए जाने पर पंजीकृत किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि विकास क्षेत्र में पंचायतों द्वारा मंजूर किए गए मानचित्रों की वैध पर सवाल उठाते हुए प्राधिकरणों द्वारा भवन स्वामियों को नोटिस देने के साथ ही ध्वस्तीकरण के आदेश किए जा रहे हैं। महायोजना से बाहर के क्षेत्रों के नक्शों के लिए बनी मानक संचालन प्रक्रिया चूंकि प्रदेश के 17 नगर निगम सहित 762 नगरीय निकाय में से अभी लगभग 200 के ही मास्टर प्लान बने हैं इसलिए विकास /विस्तारित विकास या विनियमित ऐसे क्षेत्र जो महायोजना के दायरे से बाहर हैं उनमें सुनियोजित विकास के लिए सरकार ने किसी तरह के निर्माण के मानचित्र स्वीकृति के लिए मानक संचालन प्रक्रिया(एसओपी) भी तय की है। 29 विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित विकास क्षेत्र तथा 72 विनियमित क्षेत्र आदि में अगर कोई निर्माण जलाशय, राजस्व भूमि, बंजर भूमि, वन, श्मशान आदि की जमीन पर है तो उसका नक्शा पास होने पर भी उसे वैध नहीं माना जाएगा। जिन क्षेत्रों के मास्टर प्लान नहीं हैं उनके अनिवार्य रूप से छह माह में तैयार करने को कहा गया है। यथासंभव मानचित्रों को महायोजना में समायोजित किया जाएगा। उपविधि के तहत कृषि भूमि पर किए गए आवासीय निर्माण, लगाए गए उद्योग आदि की स्वीकृति नगर पंचायत व पालिका परिषद तभी दे सकेंगे जब उद्योग खतरनाक प्रकृति का न हो।

बोक चॉय की खेती ने बदली किसान की किस्मत, गोण्डा के प्रवीण बने किसानों के लिए मिसाल

 गोंडा  एक वक्त था जब खेती को केवल पेट भरने का जरिया समझा जाता था। लेकिन आज वही खेती लाखों रुपये की कमाई देने वाला व्यवसाय बन चुकी है। देश के किसान अब परंपरा की जंजीरें तोड़ रहे हैं। वे आधुनिक सोच के साथ खेतों में उतर रहे हैं। उन्नत बीज, नई तकनीक और बाजार की सटीक समझ ने खेती का पूरा नजरिया बदल दिया है। जो जमीन कभी बस गुजारे लायक फसल देती थी, आज वही जमीन समृद्धि की नई इबारत लिख रही है। सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में यह बदलाव और भी तेज है। यहाँ किसान कम समय में अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। वे न सिर्फ अपनी जिंदगी बदल रहे हैं, बल्कि अपने गाँव और समाज को भी नई दिशा दे रहे हैं। एक किसान, एक मिसाल उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले के मनकापुर ब्लॉक में बेनीपुर गाँव है। यहाँ के किसान प्रवीण कुमार सिंह इस बदलाव के जीते-जागते प्रमाण हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती की सीमाओं को पार किया। आधुनिक कृषि पद्धतियाँ अपनाईं। आज वे सालाना 25 से 30 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं है। उनके खेतों पर एक दर्जन से अधिक लोग नियमित रोजगार पा रहे हैं। इससे आसपास के ग्रामीण परिवारों की आजीविका भी सुदृढ़ हो रही है। देशी और विदेशी सब्जियों का संतुलित संगम प्रवीण पारंपरिक सब्जियों के साथ-साथ विदेशी किस्मों की भी खेती कर रहे हैं। इनमें बोक चॉय यानी चाइनीज पत्ता गोभी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह सब्जी तेजी से तैयार होती है। बाजार में इसके अच्छे दाम मिलते हैं। शहरी उपभोक्ताओं में इसकी माँग लगातार बढ़ रही है। सलाद, सूप और स्टर-फ्राई जैसे व्यंजनों में इसका खूब उपयोग होता है। इसी कारण यह एक नकदी फसल के रूप में स्थापित हो चुकी है। पोषण से भरपूर, स्वाद से भरपूर बोक चॉय स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। इसमें विटामिन ए, सी और के पाए जाते हैं। साथ ही कैल्शियम और फोलेट भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसमें कैलोरी कम होती है। पोषण मूल्य उच्च होता है। इसीलिए यह स्वास्थ्य के प्रति सजग उपभोक्ताओं की पसंदीदा सब्जी बनती जा रही है। प्रवीण कुमार की यह उपज लखनऊ और बाराबंकी पहुँच रही है। आसपास के प्रमुख बाजारों में भी इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। ज्ञान बाँटते किसान, जागती उम्मीदें प्रवीण सिंह की दृष्टि केवल अपने खेत तक सीमित नहीं है। उनके फार्म पर नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहाँ क्षेत्र के अन्य किसान आते हैं। वे आधुनिक खेती की तकनीकें सीखते हैं। अपनी आमदनी बढ़ाने की राह पकड़ते हैं। यह सामूहिक प्रयास ग्रामीण कृषि में सकारात्मक बदलाव की नींव रख रहा है। सरकारी सहयोग- नई फसलों को मिल रही नई उड़ान जिला उद्यान विभाग भी इस बदलाव में सक्रिय भागीदार है। ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी और चाइनीज सब्जियों के बीज व पौधे किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कम लागत में नर्सरी तैयार करने की सुविधा भी दी जा रही है। इससे छोटे और मझोले किसान भी नई फसलें आसानी से अपना सकते हैं। वे अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। प्रवीण कुमार सिंह की कहानी यह साबित करती है कि सही सोच,आधुनिक तकनीक और मेहनत के दम पर भारतीय किसान न सिर्फ अपनी किस्मत बदल सकता है, बल्कि अपने समाज के लिए भी बदलाव की मशाल थाम सकता है।

BCCI ने हर्षित राणा को दी टीम इंडिया में एंट्री, तीसरे वनडे की प्लेइंग XI में शामिल होने के आसार

नई दिल्ली  भारत और अफगिनस्तान के बीच 20 जून को वनडे सीरीज का तीसरा मुकाबले खेला जाने वाला है। इससे पहले बीसीसीआई ने हर्षित राणा को टीम इंडिया में एंट्री दे दी है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले अभ्यास मैच के दौरान चोटिल हो गए थे। बोर्ड ने जानकारी दी कि सेंटर ऑफ एक्सिलेंस हरी झंडी मिलने के बाद हर्षित को टीम में शामिल किया गया है। उनके आने से भारतीय तेज गेंदबाजी यूनिट को मजबूती मिलेगी। उनको सीधा प्लेइंग-XI में खेलने का मौका भी मिल सकता है। अफगानिस्तान के सामने भारतीय टीम लगातार बदलाव कर रही है। हर्षित राणा की हुई टीम इंडिया में एंट्री आज यानि 19 जून को भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने आधिकारिक रूप से जानकारी देते हुए बताया कि हर्षित राणा का अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे और आखिरी वनडे के लिए शामिल कर लिया गया है। बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सिलेंस में रिहैब करने के बाद तेज गेंदबाज ने फिटनेस हासिल कर ली है। भारत ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अभ्यास मैच खेला था। इस दौरान हर्षित के दाए घुटने में तकलीफ हुई थी। जिसके कारण वह चैंपियन टीम का हिस्सा नहीं बन पाए थे। साथ ही आईपीएल 2026 से भी बाहर हो गए थे। सीधे मिलेगी प्लेइंग-XI में जगह? हर्षित राणा को जिस तरह से अचानक तीसरे वनडे की टीम में शामिल किया गया है। उसको देखकर लगता है कि चेन्नई में प्लेइंग इलेवन का हिस्सा भी बन सकते हैं। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि टीम मैनेजमेंट किस खिलाड़ी को बाहर करता है। गुरनूर बराड़ ने 2 मैचों में 6 विकेट लिए हैं। प्रिंस यादव ने पहले ही मैच में 2 विकेट लिए वहीं अर्शदीप सिंह के खाते में भी 2 सफलताएं आई थी। टीम इंडिया ने सीरीज पर कब्जा कर लिया है, लेकिन वर्ल्ड कप 2027 के संयोजन को तलाशने और खिलाड़ियों को मौका देने के लिहाज से तीसरा वनडे खास होने वाला है। अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे वनडे के लिए अपडेटेड टीम: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), नितीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बराड़, हर्ष दुबे, यशस्वी जयसवाल, हर्षित राणा। मोहित कुमार

राज्यसभा में भाजपा की नई स्थिति क्या है, दो-तिहाई बहुमत से NDA कितनी दूर?

नई दिल्ली राज्यसभा में NDA अब ताकतवर नजर आ रही है। हालांकि, अब भी सत्तारूढ़ गठबंधन दो तिहाई बहुमत से दूर है, लेकिन ताजा चुनाव नतीजों ने सीटों की संख्या में खासा इजाफा कर दिया है। 18 जून तक 10 राज्यों की 27 सीटों पर चुनाव हुए थे। वहीं, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस सांसदों के इस्तीफे के बाद कहा जा रहा है कि एनडीए का आंकड़ा और बढ़ सकता है। NDA किसकी ताकत कितनी उच्च सदन में एनडीए का सबसे बड़ा दल भाजपा है। वहीं, गठबंधन अब 152 सीटों पर पहुंच गया है। सबसे पहले 24 सीटों पर जब सांसद निर्विरोध चुने गए, तो उनमें 19 एनडीए के थे। वही, गुरुवार को झारखंड में परिमल नथवानी की जीत ने एनडीए सांसदों की संख्या 20 पर पहुंचा दी है। खास बात है कि अब गठबंधन दो तिहाई बहुमत से महज 11 सीटें दूर है। बहुमत मिलने के आसार, पर कैसे? दरअसल, हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के 4 राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया है। इनमें सुष्मिता देव, प्रकाश बरिक, सुखेंदु शेखर रे और कोयल मलिक का नाम शामिल है। हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद कहा जा रहा है कि इन सभी सीटों पर भाजपा आसानी से जीत दर्ज कर सकती है। अटकलें ये भी हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और सांसद भी इस्तीफा दे सकते हैं। वहीं, राज्यसभा में बीजू जनता दल के 5 और YSRCP के 7 सांसद हैं। खास बात है कि ये दोनों ही दल किसी गठबंधन में शामिल नहीं हैं और कई मौकों पर एनडीए का साथ देते रहे हैं। हालांकि, ओडिशा विधानसभा चुनाव के बाद बीजद और भाजपा के समीकरणों में कुछ बदलाव देखा जा रहा है। क्यों जरूरी है दो तिहाई बहुमत संसद में संविधान संशोधन संबंधी विधेयकों को पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। अब जब एनडीए यह आंकड़ा हासिल कर लेती है, तो परिसीमन से जुड़े बिल को लेकर राह आसान हो जाएगी। कहा जा रहा है कि सरकार आगामी मॉनसून सत्र के दौरान ही यह बिल दोबारा पेश कर सकती है। फिलहाल, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। विपक्ष के आंकड़े विपक्षी इंडिया गठबंधन के पास अभी 64 सांसद हैं। आठ सांसदों वाली डीएमके और तीन सांसदों वाली आप इस समूह से अलग हो गई हैं। लोकसभा में एनडीए की संख्या 300 पार जा सकती है, क्योंकि टीएमसी के लगभग 20 और सांसद एक अलग समूह बनाकर उसका समर्थन कर सकते हैं। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत पाने के लिए 363 सांसदों की जरूरत होती है। इधर, शिवसेना यूबीटी के बागी भी उनके साथ जा सकते हैं।

ट्रंप की भी नहीं चली? ईरान समझौते से पहले इजरायल के कदम ने बढ़ाया तनाव, लेबनान में 16 मारे गए

वाशिंगटन  अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली समझौता समारोह ऐन मौके पर खटाई में पड़ गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस समझौते के औपचारिक साइनिंग समारोह के लिए स्विट्जरलैंड रवाना होने ही वाले थे, लेकिन इजरायल ने आखिरी वक्त टांग अड़ा दी. इजरायल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी अपील को भी नजरअंदाज कर दिया और लेबनान पर हमला कर दिया. इस हमले में 16 लोगों की मौत हुई है।  ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इजरायल, लेबनान और हिजबुल्लाह को आपस में न उलझने की हिदायत दी थी. लेकिन इजरायल ने इस चेतावनी को दरकिनार करते हुए गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात दक्षिणी लेबनान पर बड़ा हमला कर दिया. इस हमले के बाद ईरान ने स्विट्जरलैंड जाने से साफ इनकार कर दिया, जिसके चलते जेडी वेंस को भी अपना दौरा रद्द करना पड़ा।  ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने भी बताया है कि लेबनान में सीजफायर होने तक स्विट्जरलैंड में ईरान के प्रतिनिधिमंडल और अमेरिका के बीच होने वाली बैठक टाल दी गई है।  ट्रंप की अपील को इजरायल ने किया दरकिनार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बड़ी डील से ठीक पहले अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रूश सोशल' पर लिखा था, "अमेरिका शांति के लिए प्रतिबद्ध है और हम मिडिल ईस्ट रीजन में सभी को बढ़ावा देते हैं कि वे हमारी बातचीत को आगे बढ़ने देने के लिए अपना कमिटमेंट बनाए रखें. मार्केट को ये शांति रास आ रही है. तेल की कीमतें बहुत नीचे हैं और स्टॉक्स बहुत ऊपर हैं. हम लेबनान, हिजबुल्लाह और इजरायल सहित सभी मोर्चों पर पूरी तरह से सीजफायर की उम्मीद करते हैं।  इजरायल और हिजबुल्लाह में तनाव की लपटें फिर उठीं इजरायल के हमले के बाद हिजबुल्लाह ने भी मोर्चा खोल दिया. हिजबुल्लाह ने शुक्रवार सुबह एक बयान जारी कर दावा किया कि उसके लड़ाकों ने गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल करके इजरायल के तीन आधुनिक 'मर्कवा' टैंकों को तबाह कर दिया है और उनमें आग लगा दी है. हिजबुल्लाह के मुताबिक, यह भिड़ंत तब शुरू हुई जब इजरायली सेना के एक बख्तरबंद और एक इन्फैंट्री पलटन ने नबातीह शहर के पास रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण अली अल-ताहेर की पहाड़ियों की तरफ बढ़ने की कोशिश की।  इस हिंसक टकराव का सीधा असर स्विट्जरलैंड में होने वाली डील पर पड़ा. एक दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट वॉर को खत्म करने के लिए एक सहमति बनी थी, जिसे शुक्रवार को औपचारिक रूप देना था. लेकिन इस जमीनी सैन्य टकराव के बाद ईरान ने बातचीत की मेज से कदम पीछे खींच लिए और स्विट्जरलैंड जाने से मना कर दिया।  जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा ऐन वक्त पर रद्द इस अचानक बदले हालात के बाद सीएनएन की रिपोर्ट में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता के हवाले से बताया गया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अब स्विट्जरलैंड नहीं जा रहे हैं. उन्हें ईरान के साथ तय हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के सेरेमनी के तहत हस्ताक्षर करने के लिए वहां पहुंचना था. व्हाइट हाउस ने यह भी साफ किया है कि समझौते के अगले चरण और आने वाली तकनीकी वार्ताओं की योजनाएं अभी पूरी तरह अंतिम रूप में नहीं पहुंच सकी हैं।  अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल जब भी मौका बनेगा, रवाना होने के लिए तैयार है, लेकिन इस तरह की बातचीत की व्यवस्थाएं कभी भी आसान या पूरी तरह अनुमानित नहीं होती हैं. फिलहाल उपराष्ट्रपति रवाना नहीं हो रहे हैं और अगले कदम के बारे में जैसे ही कोई ठोस जानकारी मिलेगी, साझा की जाएगी।  ट्रंप के बाद जेडी वेंस ने भी इजरायल को सुनाया  इस पूरे घटनाक्रम और इजरायल के अड़ंगे से अमेरिकी प्रशासन बेहद नाराज नजर आ रहा है. बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बढ़ते तनाव के बीच, जेडी वेंस ने इजरायली कैबिनेट को बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए वेंस ने सीधे तौर पर नेतन्याहू की कैबिनेट के सदस्यों से कहा कि वे हकीकत को समझें और जागें।  जेडी वेंस ने इजरायल को याद दिलाया, "इस समय पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रंप ही ऐसे राष्ट्र प्रमुख हैं जो इजरायल को लेकर सहानुभूति रखते हैं. और संयोग से वही दुनिया की सबसे ताकतवर महाशक्ति के प्रमुख भी हैं. अगर मैं इजरायली सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं अपने उस इकलौते शक्तिशाली सहयोगी पर हमला नहीं करता जो पूरी दुनिया में मेरे साथ खड़ा है।  वेंस की नाराजगी सिर्फ यहीं नहीं रुकी, उन्होंने इजरायल को मिलने वाली अमेरिकी सैन्य मदद का हिसाब भी सरेआम रख दिया. उन्होंने इजरायल को दोटूक लहजे में कहा कि वे अमेरिकी करदाताओं के पैसे पर निर्भर हैं. वेंस ने कहा, "पिछले तीन महीनों में आपके देश की रक्षा करने वाले दो-तिहाई रक्षात्मक हथियार अमेरिकी लोगों ने बनाए हैं और उनका खर्च अमेरिकी करदाताओं ने उठाया है।   

RJD-माले के बाद हेमंत सोरेन का अलग रुख, परिमल नथवानी की जीत ने INDIA गठबंधन की केमिस्ट्री बिगाड़ी

रांची  झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव में 'इंडिया ब्लॉक' की कलाई खुल गई. इंडिया ब्लॉक के पास पूरे वोट होने के बाद भी कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को करारी मात खानी पड़ी है. वहीं, नंबर गेम में कमजोर होने के बाद भी बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी राज्यसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहे।  राज्यसभा चुनाव के नतीजे सिर्फ दो सांसदों के चुनाव का परिणाम नहीं है. ये विधानसभा के भीतर राजनीतिक रिश्तों, गठबंधन प्रबंधन, भरोसे और रणनीतिक कौशल की भी परीक्षा थी. 56 विधायकों के साथ इंडिया ब्लॉक के पास राज्यसभा की दोनों सीटें जीतने के लिए जरूरी संख्या मौजूद थी, लेकिन उसके बाद भी एक ही सीट जीत सकी और एक पर हार का सामना करना पड़ा है।  झारखंड में इंडिया ब्लॉक का जेएमएम, कांग्रेस, आरजेडी, माले और लेफ्ट हिस्सा है और सत्ता में भी है. कांग्रेस ने अपने इन्हीं सहयोगियों के सहारे राज्यसभा चुनाव जीतने का तानाबाना बुना था, पर आरजेडी और माले ही नहीं बल्कि हेमंत सोरेन की पार्टी जेएमएम ने खेला कर दिया.  झारखंड में इंडिया गठबंधन कहीं अब टूट न जाए?  झारखंड में जेएमएम और नथवानी जीते झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में उतरे थे. जेएमएम से बैजनाथ राम और कांग्रेस से प्रणव झा तो निर्दलीय तौर पर परिमल नथवानी उम्मीदवार थे. नथवानी को बीजेपी सहित एनडीए का समर्थन था. 56 विधायकों के साथ इंडिया गठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या थी जबकि एनडीए के 24 विधायकों के साथ नथवानी को चार विधायकों के वोट की अतरिक्त जुगाड़ थी।  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर विधायकों की बैठकें हुईं, मॉक पोल कराया गया, विधायकों को मतदान की तकनीकी भी सिखाई गई और सार्वजनिक रूप से एकजुटता का दावा किया गया, लेकिन नतीजों ने इन सारे दावे को पोल खोल दी. इंडिया ब्लॉक के विधायकों की क्रॉस वोटिंग के चलते कांग्रेस के प्रणव झा को मात खाना पड़ा. राज्यसभा चुनाव में जेएमएम प्रत्याशी बैजनाथ राम और बीजेपी समर्थित परिमल नथवानी जीतने में कामयाब रहे।  मंत्री का ओवर कॉन्फिडेंस वोटिंग के बाद झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पूरी तरह कॉन्फिडेंट थे कि एक सीट तो कांग्रेस उम्मीदवार को ही मिलेगी. एनडीटीवी के रिपोर्टर ने जब इरफान अंसारी से कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की जीत वाले उनके दावे को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि वे कभी गलत नहीं बोलते. रिजल्ट आने में अब कितने ही घंटे ही बचे हैं. कांग्रेस जीत जाएगी उसके बाद आप खुद हमारे उम्मीदवार से मिल लेना।  60 वोट तक का आंकड़ा पार कर लिया मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि वोटिंग हो चुकी है. हम लोग 61 वोटों तक जा रहे थे, हमें लगता है कि हमने 60 वोट तक का आंकड़ा पार कर लिया है. बीजेपी के हताश और निराश लोग यहां से निकल गए, क्यों कि बीजेपी यहां कहीं भी नहीं है. लेकिन इसके बाद भी बीजेपी ने हमको बहुत तंग किया. वोटिंग का  परिणाम इरफान अंसारी की सोच के एकदम उलट आया. चुनाव के नतीजों ने पार्टी ही नहीं सभी को चौंका दिया।  कांग्रेस को आरजेडी और माले का धोखा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार ने इंडिया ब्लॉक की कलाई खोलकर रख दी है. क्या इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों ने वास्तव में कांग्रेस का साथ नहीं दिया? वहीं, अगर सहयोगियों ने साथ दिया तो फिर वोट कहां गए? झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के राजू कहते हैं कि आरजेडी और माले के व‍िधायकों ने हमारे साथ धोखा कर द‍िया. उन्‍होंने हमारे कैंड‍िडेट को वोट नहीं दिया।  के राजू कहते हैं कि कांग्रेस के सभी 16 विधायोंके वोट सुरक्षित रहे, जेएमएम ने 4 वोट दिए और कांग्रेस को कुल 20 वोट मिले. यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि निर्दलीय उम्मीदवार ने पैसे का इस्तेमाल किया. हमारे गठबंधन के साथियों ने साथ नहीं दिया. इंड‍िया अलायंस के सभी सहयोगी पूरी मजबूती के साथ साथ खड़े रहते, तो परिणाम अलग हो सकता था।    कांग्रेस के दावे को मानें तो उसके 16 विधायक एकजुट रहे और जेएमएम के अतिरिक्त वोट भी उसे मिले हैं. कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने भी प्रणव झा की हार के लिए आरजेडी और माले को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि महागठबंधन की मजबूती का दावा करने वाले सहयोगी दलों को अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए. ऐसे में सवाल राजद और माले पर जाता है।  क्या सोरेन ने भी कांग्रेस के साथ खेला किया  झारखंड विधानसभा का गण‍ित देखें तो 81 सीटों वाले सदन में  जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, आरजेडी के 4 और लेफ्ट के दो विधायक हैं. इस तरह कुल 56 वोट इंडिया ब्लॉक के बनते हैं, जिसमें जेएमएम की जीत के बाद भी कांग्रेस को 20 वोट ही मिले हैं. कांग्रेस और माले के विधायक को मिलाकर तो 6 वोट बनते हैं, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 8 वोट कम मिले है।  हेमंत सोरेन की पार्टी के उम्मीदवार 28 वोट से जीत सकते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें 30 वोट सिक्योर किया. इस तरह से दो वोट ज्यादा रखा, जिसका नतीजा रहा कि कांग्रेस के वोट कम हो गए. आरजेडी और माले का वोट कांग्रेस को मिल भी जाता तो हार तय थी।  इंडिया गठबंधन के पास 56 का आंकड़ा था, तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा के जीत का वोट का ख्याल क्यों नहीं रखा फैक्ट यह है कि जीत के लिए 28 वोट चाहिए थे, लेकिन सोरेन ने अपने उम्मीदवार बैजनाथ राम के लिए 30 वोट सुरक्षित कर लिए. झामुमो ने जरूरत से 4 वोट ज्‍यादा लिए, जबकि कांग्रेस सिर्फ 20 वोटों पर सिमट गई. ऐसे में साफ है कि कांग्रेस की हार में जेएमएम भी कहीं न कहीं गेम कर गई है।  क्या झारखंड में टूट जाएगा गठबंधन  कांग्रेस जहां हार के लिए आरजेडी और माले को जिम्मेदार ठहरा रही है तो दूसरी ओर आरजेडी-माले का कहना है कि उन्होंने गठबंधन धर्म निभाया और कांग्रेस को अपने भीतर झांकना चाहिए. ऐसे में सच्चाई जो भी हो, लेकिन एक तथ्य निर्विवाद है कि महागठबंधन में समन्वय नहीं था. यही कारण है कि परिणाम आने के बाद आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए।  राजनीति में हमेंशा परिणाम ही सबसे बड़ा प्रमाण माना … Read more

शेयर बाजार में मचा हड़कंप, IT स्टॉक्स की गिरावट से सेंसेक्स 800 अंक लुढ़का

मुंबई  शेयर मार्केट में सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली. ओपनिंग के साथ ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 800 अंक से ज्यादा का गोता लगा गया, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी करीब 200 अंक की बड़ी गिरावट लेकर ओपन हुआ. बाजार में इस गिरावट के बीच सबसे बुरा हाल आईटी और टेक कंपनियों के शेयरों का रहा. Infosys, Tech Mahindra, TCS से लेकर HCL Tech तक के शेयर खुलते ही धड़ाम हो गए।  खुलते ही धड़ाम हुए Sensex-Nifty शुक्रवार को शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही दोनों इंडेक्स बिखर गए. BSE Sensex अपने पिछले बंद 77,409 की तुलना में बड़ी गिरावट लेकर 76,852 पर खुला और फिर अचानक ये गिरावट तेज हो गई और 30 शेयरों वाला इंडेक्स गिरकर 76,605 के लेवल पर आ गया. इस हिसाब से सेंसेक्स में 804 अंक से ज्यादा की गिरावट आई।  सेंसेक्स के जैसा ही हाल NSE Nifty का रहा और ये 50 शेयरों वाला इंडेक्स अपने पिछले कारोबारी बंद 24,168 की तुलवा में गिरावट लेकर 23,991 पर खुला और फिर करीब 220 अंक की गिरावट लेकर 23,939 पर आ गया।  IT शेयरों में मचा कोहराम शेयर मार्केट में इस गिरावट को सपोर्ट करने में सबसे बड़ा रोल आईटी और टेक शेयरों का रहा, जो ओपनिंग के साथ ही धराशायी हो गए. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Infosys Share (8.50%), TCS Share (6.20%), Tech Mahindra Share (5.60%), HCL Tech Share (5.40%) की बड़ी गिरावट लेकर कारोबार कर रहे थे।  गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत करने वाले अन्य बड़े शेयरों की बात करें, तो HDFC Bank Share (2.30%), Mphasis Share (6.60%), Presistent Share (5%), Coforge Share (4.20%), Dixon Share (2.20%) फिसलकर ट्रेड करता नजर आया।  1324 शेयर बड़ी गिरावट लेकर खुले ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच शुक्रवार को खुलते ही निफ्टी 24,000 के नीचे आ गया. मार्केट की ओपनिंग के दौरान करीब 956 कंपनियों के शेयरों ने तेजी के साथ ट्रेड शुरू किया, तो वहीं 1324 कंपनियों के स्टॉक्स ऐसे थे, जो बड़ी गिरावट के साथ रेड जोन में ओपन हुए. इसके अलावा 178 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।  शेयर बाजार में यह गिरावट ग्लोबल आईटी सर्विस कंपनी एक्सेंचर की ओर से FY2026 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान में कटौती के बाद देखने को मिली है, जो वेस्ट एशिया से से राजस्व से जुड़ी चुनौतियों के चलते हैं. इसका शेयर रातोरात करीब 18 फीसदी टूट गया था, तो वहीं Infosys ADR में करीब 10 फीसदी, तो Wipro ADR में 3.6 फीसदी की गिरावट आई। 

रेलवे ट्रैक ब्लास्ट की साजिश रचने वाले KZF आतंकियों पर शिकंजा, मलेशिया से लौटते ही दबोचे गए

पटियाला  पंजाब पुलिस ने इंटेलिजेंस-लेड ऑपरेशन के तहत केंद्रीय एजेंसियों और रॉयल मलेशिया पुलिस (RMP) के सहयोग से प्रतिबंधित खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) से जुड़े दो आतंकियों को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है।  दोनों आरोपियों को पंजाब पुलिस ने मलेशिया से डिपोर्ट करवाया था। जैसे ही उन्हें भारत भेजा गया, उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट से पुलिस कस्टडी में लेकर आगे की जांच के लिए पंजाब लाया गया। गिरफ्तार किए गए दोनों आतंकियों की पहचान अंबाला निवासी गुरविंदर सिंह और पटियाला निवासी मनजीत सिंह के रूप में हुई है। ये दोनों मलेशिया में बैठकर केजेडएफ समर्थित आतंकी मॉड्यूल के मुख्य नेटवर्क के रूप में काम कर रहे थे। यह मॉड्यूल पंजाब में महत्वपूर्ण रेलवे बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (मालगाड़ी लाइनों) को निशाना बनाने में शामिल था। इससे पहले, पंजाब पुलिस ने 23 जनवरी 2026 को सरहिंद (फतेहगढ़ साहिब) के पास रेलवे फ्रेट कॉरिडोर लाइन पर हुए IED ब्लास्ट और 27 अप्रैल 2026 को जिला पटियाला के शंभू के पास इसी कॉरिडोर पर विस्फोट की कोशिश करने वाले आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। पहले ही पकड़े जा चुके हैं 4 आतंकी फतेहगढ़ साहिब व पटियाला के शंभू में हुए ब्लास्ट की जांच के दौरान चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से भारी मात्रा में सैन्य हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए थे। इसमें एक आरपीजी (RPG) लॉन्चर, एक आईईडी (IED), आरडीएक्स (RDX), हैंड ग्रेनेड और कारतूस के साथ हाई-एंड पिस्तौल शामिल थीं। विदेशी खातों से हो रही थी टेरर फंडिंग इस अंतरराष्ट्रीय साजिश की जांच के दौरान मलेशिया से काम कर रहे KZF के हैंडलर्स और फाइनेंशियल फेसिलिटेटर्स की संलिप्तता का खुलासा हुआ था। डिपोर्ट किए गए ये आरोपी विदेशी खातों के जरिए पंजाब में केजेडएफ गुर्गों को टेरर फंडिंग में मुख्य भूमिका निभा रहे थे, ताकि राज्य में आतंकी हमलों को अंजाम देकर कानून व्यवस्था को भंग किया जा सके। पुलिस रिमांड पर आरोपी दोनों आरोपियों को पटियाला की सक्षम अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें आगे की पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत (रिमांड) में भेज दिया गया है। इस पूरी साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने और इस व्यापक नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए जांच जारी है। पंजाब पुलिस आतंकी तंत्र को खत्म करने, टेरर फंडिंग नेटवर्क को तोड़ने और पंजाब की शांति, सुरक्षा व आपसी भाईचारे को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

ऊर्जा सुरक्षा को बड़ी मजबूती, गैस से लदा LNG टैंकर ‘दिशा’ सुरक्षित गुजरात तट पर पहुंचा

अहमदाबाद  अमेरिका-ईरान के बीच पीस डील होते ही भारत को पहली खुशखबरी मिल गई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर पहला एलएनजी जहाज भारत आ चुका है. जी हां, अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद पहला LNG कैरियर जहाज ‘दिशा’ आज यानी शुक्रवार को गुजरात में भरूच के दहेज पोर्ट पर पहुंचा. यह दहेज एलएनजी टर्मिनल पर आ गया है. इस तरह से तीन महीने का इंतजार खत्म हुआ. एनएनजी करियर दिशा ईरान युद्ध के चलते होर्मुज में फंसा हुआ था।  दरअसल, गुजरात के दहेज LNG टर्मिनल पर आज LNG कैरियर जहाज ‘दिशा’ सफलतापूर्वक पहुंच गया. इस जहाज ने 15 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार किया था. इस तरह से इस जहाज का तीन महीने से अधिक का इंतज़ार खत्म हुआ. इस जहाज ने 2 मार्च को कतर के रास लाफान टर्मिनल से 62,370 मीट्रिक टन LNG लोड किया था. मगर मध्य पूर्व में तनाव के कारण यह जहाज फारस की खाड़ी में फंस गया था।  दिशा जहाज पर कितना गैस इसक तरह से ‘दिशा’ जहाज में 62,370 मीट्रिक टन LNG है. ‘दिशा’ उन शुरुआती भारतीय LNG कैरियर जहाजों में से एक है, जिन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया है. इस कार्गो को भारत के सबसे बड़े LNG इंपोर्ट हब दहेज में स्टोर किया जाएगा और देश के अलग-अलग राज्यों में भेजा जाएगा।  दिशा दिखाएगा रास्ता दिशा का आना अपने आप में बड़ी खुशखबरी है. यह संकेत है कि अब भारत के जितने भी टैंकर और जहाज फंसे हैं, वो सब धीरे-धीरे भारत की ओर आ रहे हैं. इनमें कुछ एलपीजी टैंकर, कुछ ऑयल टैंकर और कुछ एलएनजी टैंकर हैं. ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से हॉर्मुज बंद हो गया था. इसके चलते ज्यादातर जहाज इस रास्ते में फंस गए थे. उन्हें गुजरने नहीं दिया जा रहा था. इसके चलते भारत के भी दर्जनों जहाज फंसे थे. ऐसे में भारत के लिए यह पहली बड़ी गैस खेप मानी जा रही है. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. दुनिया की करीब 20 प्रतिशत एलएनजी सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष और क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई थी।  भारत के लिए बड़ी खुशखबरी होर्मुज बंद होने से भारत के लिए यह स्थिति चिंता की वजह बन गई थी. कारण कि भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर और यूएई जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है. इसका रास्ता होर्मुज ही है. पिछले कुछ महीनों में सप्लाई कम होने के कारण भारत को महंगे स्पॉट मार्केट से गैस खरीदनी पड़ी और कुछ उद्योगों को गैस सप्लाई भी सीमित करनी पड़ी. हाालंकि, दिशा टैंकर का निकलना सामान्य स्थिति लौटने का संकेत जरूर है. दिशा टैंकर ने एक तरह से बाकी फंसे हुए जहाजों को एक नई दिशा दिखाई है. आने वाले समय में गैस और तेल की स्थित पहले की तरह नॉर्मल हो सकती है। 

योगी सरकार ने जिस जमीन पर बसाए थे गरीब, अब उसी मकानों को तोड़ने की तैयारी; सिंचाई विभाग का नोटिस

लखनऊ  यूपी की राजधानी लखनऊ में डालीबाग स्थित एलडीए की सरदार पटेल आवास योजना में  हड़कंप मच गया। दरअसल,मुख्तार अंसारी की जमीन पर योगी सरकार ने गरीबों को जो घर बनवाकर दिए थे सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने उन्हीं फ्लैटों पर गिराने का नोटिस लगा दिया है। लाल क्रॉस का निशान लगाकर उन्हें खाली करने की चेतावनी दी गई है। यह वही 72 फ्लैट हैं जिनकी चाबी नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं गरीब परिवारों को सौंपी थी। उधर, नोटिस लगते ही कॉलोनी में रहने वाले परिवारों में दहशत फैल गई और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। छह महीने पहले मिला था आशियाना यह वही परियोजना है, जिसे लखनऊ विकास प्राधिकरण ने डालीबाग में माफिया मुख्तार अंसारी के ध्वस्त किए गए बंगले की जमीन पर विकसित किया था। यहां गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए 72 फ्लैट बनाए गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवंबर 2025 में आयोजित समारोह में लाभार्थियों को इन मकानों की आवंटन पत्र व चाबी सौंपी थी। कई परिवारों ने इसी वर्ष यहां आकर रहना शुरू किया था। अब सिंचाई विभाग ने सात दिन में खाली करने की नोटिस चस्पा की है। नोटिस सिंचाई विभाग के लखनऊ खण्ड दो शारदानहर के जिलेदार सर्वेक्षण की ओर से चस्पा की गयी है। नोटिस में यह भी लिखा है कि अगर इसे खाली कराने में कोई क्षति होती है तो कब्जेदार स्वयं जिम्मेदार होंगे। कब्जेदारों से शमन शुल्क और हर्जा खर्चा भी वसूला जाएगा। नोटिस देख भड़के आवंटी, जब मुख्तार का बंगला खड़ा था तब कहां था सिंचाई विभाग सिंचाई विभाग का दावा है कि यह भूमि हैदर कैनाल बंधे की सरकारी जमीन है। विभाग ने फ्लैटों पर नोटिस चस्पा करते हुए उन्हें अपनी भूमि बताया है। नोटिस लगते ही आवंटियों में नाराजगी फैल गई। लोगों का कहना है कि जब इसी जमीन पर वर्षों तक मुख्तार अंसारी का आलीशान बंगला खड़ा था, तब सिंचाई विभाग को अपनी जमीन दिखाई नहीं दी। अब जब गरीब परिवारों को सरकारी योजना के तहत घर मिल गए हैं, तब अचानक जमीन पर दावा किया जा रहा है। आवंटियों ने सवाल उठाया कि यदि भूमि को लेकर कोई विवाद था तो निर्माण शुरू होने से पहले ही इसे स्पष्ट क्यों नहीं किया गया। उनका कहना है कि अभी उन्हें मकानों में रहते हुए छह महीने भी पूरे नहीं हुए हैं और बेदखली की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एलडीए अधिकारियों के उड़े होश मामले की जानकारी मिलते ही एलडीए के अधिकारियों में भी हलचल मच गई। सूत्रों के अनुसार, सिंचाई विभाग की कार्रवाई और भूमि विवाद की सूचना तत्काल शासन के उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। एलडीए उच्च स्तर पर मामले में कड़ी नाराजगी जतायी है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि इस मामले की जानकारी होने के बाद सिंचाई विभाग के अफसरों से बात की गयी। उन्होंने अपनी गलती मानी है और कहा है कि शाम तक नोटिस हटवाएंगे। जो लाल क्रास के निशान लगाया है उसकी भी सिंचाई विभाग पुताई कराएगा।